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जब राजीव गाँधी ने INS विराट की स्टोरी दबाने के लिए मीडिया का गला घोंटने की ठानी थी

बीते दिनों चुनाव प्रचार के दौरान नरेंद्र मोदी ने पूर्व प्रधानमंत्री राजीव गाँधी की लक्षद्वीप यात्रा का जिक्र करके मामले को दोबारा से जीवित कर दिया। आइएनएस विराट पर पूरे परिवार सहित छुट्टी मनाने पहुँचे राजीव गाँधी की यात्रा ‘वृत्तांत’ पर उस समय इंडियन एक्सप्रेस और इंडियन टुडे ने स्टोरी कवर की थी। अब चूँकि इन दिनों इस मामले ने तूल पकड़ा हुआ है तो इंडियन एक्सप्रेस ने उस पूरे समय को दोबारा से याद किया और बताया कि कैसे उस समय स्टोरी छपने के बाद राजीव गाँधी ने इंडियन एक्सप्रेस से बदला लेने की ठान ली थी।

निरूपमा सुब्रह्मण्यन द्वारा इंडियन एक्सप्रेस में लिखे गए लेख में राजीव गाँधी की उन छुट्टियों पर कवर हुई स्टोरी पर प्रकाश डाला गया। इस लेख की हेडलाइन ही स्पष्ट करती है कि प्रधानमंत्री मोदी ने इस किस्से पर बात करके हमारे समक्ष सवाल छोड़े हैं ताकि हम पूछें कि वास्तव में अपने पद की शक्तियों का दुरुपयोग किसने किया है?

लेख में सुब्रह्मण्यन ने न केवल राजीव गाँधी की उन छुट्टियों को याद किया, बल्कि राजीव गाँधी की उन जरूरतों पर सवाल भी दागे जिनके कारण उन्होंने (राजीव) देश को जरूरी न समझकर, साल भर के लिए छुट्टी पर जाना आवश्यक समझा था। खास बात ये है कि इस रिपोर्ट में निरूपमा ने यह भी बताया कि किस तरह INS विराट पर छुट्टियाँ बिताने के बाद राजीव गाँधी और उनकी सरकार ने इंडियन एक्सप्रेस को सबक सिखाने की सोची थी।

इसका कारण उन दिनों इंडियन एक्सप्रेस में छपा एक कार्टून था। इस कार्टून में राजीव गाँधी नारियल के पेड़ के नीचे बैठकर नारियल पी रहे थे और कह रहे थे,“Ah! To get away from it all!” और देश उनसे पूछ रहा था “कब?”

इस कार्टून के प्रकाशित होने के बाद राजीव गाँधी और उनकी सरकार ने कई महीनों बाद इंडियन एक्सप्रेस पर निशाना साधते हुए एंटी डिफेमेशन बिल 1988 पेश करने की कोशिश की थी जिसका मीडिया समूहों ने जमकर
विरोध किया था। लेकिन, जुलाई 1988 में राजीव गाँधी ने अपमानजनक लेखन पर अंकुश लगाने के लिए एक कड़ा बिल पास कर ही दिया। हालाँकि बाद में मीडिया की प्रतिक्रिया ने उन्हें बिल को रद्द करने के लिए मजबूर कर दिया था।

इंडियन एक्सप्रेस की रिपोर्ट के मुताबिक कार्टून के छपने के बाद दफ्तर के परिसर में कई बार रेड पड़ी। इसकी फर्जी जाँच करने के लिए कि संस्थान ने कस्टम ड्यूटी से बचने की कोशिश की है। गौरतलब है कि इस लेख में
सुब्रह्मण्यन ने अपने अनुभव साझा करते हुए यह भी बताया है कि उस दौरान इंडियन एक्सप्रेस के दिल्ली कार्यालय में रेड मारने के लिए दिल्ली पुलिस और सीआरपीएफ के इतने सिपाही तैनात किए गए थे जितने टैक्स रेड में कहीं भी नहीं भेजे जाते होंगे।

कर्नाटक में गठबंधन में दरार, JDS अध्यक्ष और विधायक ने कॉन्ग्रेस पर लगाए आरोप

कर्नाटक के पूर्व मुख्यमंत्री और भाजपा नेता बीएस येदियुरप्पा ने शुक्रवार (मई 10, 2019) को यह कहते हुए सियासे गलियारे में हलचल मचा दी कि राज्य की वर्तमान कॉन्ग्रेस-जेडीएस गठबंधन की सरकार से कॉन्ग्रेसी खेमा खुश नहीं है और कॉन्ग्रेस के लगभग 20 विधायक उनके संपर्क में हैं, जो कभी भी कोई फैसला ले सकते हैं। और अब कॉन्ग्रेस और जेडीएस के बीच लगातार अनबन की खबरें आ रही हैं। दोनों के बीच की दरार बढ़ती हुई नज़र आ रही  है। गठबंधन के नेता एक दूसरे पर ही आरोप मढ़ रहे हैं।

जानकारी के मुताबिक, जेडीएस विधायक सुरेश गौड़ा ने कॉन्ग्रेस पर आरोप लगाते हुए कहा है कि कॉन्ग्रेस कार्यकर्ताओं ने मांड्या में भाजपा को वोट दिया है। सुरेश गौड़ा पूछते हैं कि आखिरकार कॉन्ग्रेस कार्यकर्ता किसे प्रधानमंत्री बनाना चाहते हैं, राहुल गाँधी को या फिर नरेंद्र मोदी को?

वहीं, अब जेडीएस के प्रदेश अध्यक्ष एच विश्वनाथ ने कॉन्ग्रेस को नसीहत देते हुए कहा कि कॉन्ग्रेस नेताओं को गठबंधन सरकार में बिखराव लाने की कोशिश नहीं करनी चाहिए। उन्होंने कहा कि वे (कॉन्ग्रेस नेता) 2022 में राजनीति कर सकते हैं, लेकिन अभी सही वक्त नहीं है। विश्वनाथ ने कहा, “हम सिद्धारमैया को कॉन्ग्रेस में लाए थे और हमने ऐसी स्थिति पैदा की, जिसने उन्हें सीएम बना दिया।”

विश्वनाथ की इन बातों पर कॉन्ग्रेस नेता और पूर्व मुख्यमंत्री सिद्धारमैया ने जवाब देते हुए कहा कि विश्वनाथ के बयान जलन से भरे हैं, जिसके बारे में वो कोऑर्डिनेशन कमेटी में बात करेंगे। उन्होंने कहा कि इससे पहले सीएम जीटी देवगौड़ा ने उनके बारे में बोला और अब एच विश्वनाथ की बातें सामने आई हैं। वो कहते हैं कि उन्हें नहीं पता आगे कौन क्या बोलेगा, इसलिए अच्छा रहेगा कि जेडीएस के सीनियर नेता अपने नेताओं के गैर-जिम्मेदाराना बयानों का संज्ञान लें। सिद्धारमैया ने कहा, “हमारी जुबान बंद है, क्योंकि हम गठबंधन धर्म से बँधे हैं, इसलिए विश्वनाथ की बातों पर प्रतिक्रिया नहीं दूंगा। वे ऐसे बयान देने के लिए जाने जाते हैं। ईश्वर से प्रार्थना है कि उन्हें सद्बुद्धि मिले।”

गौरतलब है कि, जनवरी में खुद मुख्यमंत्री कुमारस्वामी ने भी कहा था कि अगर कॉन्ग्रेस अपने विधायकों को उनके काम करने के तरीके की आलोचना करने से नहीं रोक सकती तो वे अपना इस्तीफा देने के लिए तैयार हैं। उन्होंने कहा था कि कॉन्ग्रेस को निश्चित ही अपने विधायकों को नियंत्रित करना चाहिए और मामले को सुलझाना चाहिए। अगर वो खुली बैठकों में उनके खिलाफ टिप्पणी करते रहेंगे तो वो इस्तीफा देना चाहेंगे।

16 साल की सेलेब्रिटी ने भेजा PM मोदी के नाम पर्यावरण बचाने का संदेश

स्वीडन की 16 वर्षीय ग्रेटा थनबर्ग पूरी दुनिया में एक जाना-माना चेहरा बन चुकी है। पर्यावरण संरक्षण को लेकर उनकी चिंता ने उन्हें पूरे विश्व में पहचान दिलाई है। बीते दिनों 105 देशों के स्कूली छात्रों ने पर्यावरण संरक्षण के लिए हड़ताल की थी, इसके पीछे का कारण भी ग्रेटा थनबर्ग ही थीं। उनके द्वारा इस नेक मुहिम में आज कई देश और संगठन जुड़ चुके हैं। ऐसे में टाइम्स ऑफ इंडिया की रिपोर्ट के मुताबिक उन्होंने भारतीय अखबार को दिए अपने पहले साक्षात्कार में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के लिए और देश के बच्चों के लिए संदेश भेजा है।

15 मार्च 2019 को ऐसा पहली बार हुआ कि पर्यावरण को बचाने के लिए 105 देशों के स्कूली छात्र हड़ताल पर गए। विश्व भर के क़रीब 1,500 से अधिक शहरों के स्कूली छात्रों ने इस हड़ताल में भाग लिया था। आप सोच रहे होंगे कि एकदम से स्कूली छात्रों में पर्यावरण को लेकर इतनी जागरूकता कैसे जाग उठी कि एक साथ इतने बच्चों ने हड़ताल करने का फैसला कर लिया। तो आपको बता दें कि इस हड़ताल की वजह के पीछे एक 16 वर्षीय छात्रा है जिसका नाम ग्रेटा थनबर्ग है।

ग्रेटा कहती हैं कि प्रधानमंत्री मोदी को पर्यावरण संरक्षण को बेहद गंभीरता से लेना चाहिए और साथ ही उन्हें इस पर ठोस कदम उठाने चाहिए। उनके ऊपर बहुत बड़ी जिम्मेदारी है और अगर वह इस समस्या के लिए कुछ नहीं करेंगे तो भविष्य में लोग इसके (पर्यावरण समस्या) लिए उन्हें (मोदी) ही दोषी ठहराएँगे।

ग्रेटा ने भारतीय स्कूल के बच्चों की तारीफ़ करते हुए इस साक्षात्कार में कहा कि उन्हें लगता है कि पर्यावरण के लिए भारत के कई स्कूली बच्चे हड़ताल करते हैं जो कि बहुत अच्छी बात है, वो बच्चे बेहद बहादुर है। उन्होंने कहा कि और जो बच्चे हड़ताल नहीं करते हैं उन्हें पर्यावरण की समस्या के बारे में पढ़ना चाहिए और पता करना चाहिए कि आखिर क्या चल रहा है।

लंदन और स्वीडन में उनके लगातार प्रदर्शनों को केंद्र में रखकर जब उनसे सवाल किया गया कि चीन में ऐसी कोई मुहिम क्यों नहीं चलाई जा रही है जबकि वहाँ सबसे अधिक उत्सर्जन हो रहा है तो ग्रेटा ने बताया कि अगर उन्हें इस मामले के मद्देनजर चीन जाने का निमंत्रण मिलता है तो उन्हें बहुत खुशी होगी। वो कहती हैं कि वह हवाई यात्रा नहीं करती हैं, इसलिए उन्हें चीन ट्रेन से जाना होगा, जिसके लिए काफ़ी समय लगेगा और उन्हें काफ़ी तैयारी भी करनी होगी।

इस साक्षात्कार में ग्रेटा ने भारत के बारे में कहा कि भारत ग्रीनहाउस का उत्सर्जन करने वाले देशों में काफ़ी आगे हैं। भारत की जनसंख्या बहुत अधिक है और इस कारण भी यहाँ प्रदूषण का स्तर बहुत अधिक रहता है। साक्षात्कार में जब उनसे पूछा गया कि क्या इस समस्या से जूझने के लिए भारत के पास कोई रणनीति है, तो उन्होंने एक टूक जवाब देते हुए कहा कि उन्हें नहीं लगता इस समस्या को दूर करने के लिए किसी भी देश के पास कोई उपाय है।

ग्रेटा कहती हैं कि इन समस्याओं से जूझने के लिए सबसे बड़ा उपाय है कि हर व्यक्ति को पढ़ना चाहिए और खुद को शिक्षित बनाना चाहिए। तभी लोग समझ पाएँगे कि उन्हें क्या करना है। वो कहती हैं कि वो सिर्फ़ एक बच्ची हैं और संदेशवाहक की भूमिका में है।

‘स्वतंत्र भारत का पहला आतंकवादी एक हिन्दू था’: कमल हासन का वाहियात बयान

कॉन्ग्रेस शासनकाल में उछाला गया शब्द ‘हिंदू आतंकवाद’ इस लोकसभा चुनाव में अहम मुद्दा बन गया है। इसको लेकर सियासत काफी गर्म रही है। जब से भाजपा ने मध्य प्रदेश की भोपाल लोकसभा सीट से मालेगाँव ब्लास्ट की आरोपित साध्वी प्रज्ञा सिंह ठाकुर को उतारा है, तब से इस मुद्दे ने और भी ज्यादा तूल पकड़ लिया। विपक्षी पार्टियाँ लगातार इसका इस्तेमाल वोट बटोरने के लिए कर रही हैं। इसी बीच नेता से अभिनेता बने कमल हासन ने हिंदू आतंकवाद को लेकर एक विवादित बयान दिया है। दरअसल, कमल हासन ने तमिलनाडु में अपनी पार्टी मक्कल निधि मय्यम के उम्मीदवार के लिए चुनाव प्रचार के दौरान कहा कि स्वतंत्र भारत का पहला आतंकवादी एक हिंदू था और उसका नाम नाथूराम गोडसे था। उन्होंने कहा कि वो इसलिए ये नहीं कह रहे हैं, क्योंकि ये मुस्लिम बहुल इलाका है, बल्कि वो ऐसा इसलिए कह रहे हैं, क्योंकि महात्मा गाँधी की प्रतिमा सामने है।

हिंदू आतंकवाद के नाम पर वोटबैंक की राजनीति करने को लेकर पीएम मोदी, भाजपा अध्यक्ष अमित शाह, वित्त मंत्री अरुण जेटली समेत पूरी भाजपा कॉन्ग्रेस को जमकर घेरती रही है। पीएम मोदी ने रविवार (मई 12, 2019) को भी मध्य प्रदेश के खंडवा में कॉन्ग्रेस पर जमकर निशाना साधते हुए कहा कि कॉन्ग्रेस ने हमारी धार्मिक विरासत को बदनाम करने के लिए ‘हिंदू आतंकवाद’ की साजिश रची। इससे पहले भी उन्होंने एक रैली में कहा था कि वोट-बैंक की राजनीति के लिए एनसीपी और कॉन्ग्रेस किसी भी हद तक जा सकती हैं। इस देश के करोड़ों लोगों पर हिंदू आंतकवाद का दाग लगाने का प्रयास कॉन्ग्रेस ने ही किया है।

अमित शाह ने भी कॉन्ग्रेस को इसी मुद्दे पर घेरा था। यूपी के नगीना में एक जनसभा को सम्बोधित करते हुए शाह ने कहा था, “समझौता ब्लास्ट को हिन्दू आतंकवाद बोलकर कॉन्ग्रेस ने अपने वोट बैंक के लिए पूरी दुनिया में शांति और सौहार्द के प्रतीक हिन्दू धर्म को बदनाम किया। आतंकवाद को हिंदू धर्म के साथ जोड़ने का पाप कॉन्ग्रेस ने किया। राहुल बाबा, आपको पता नहीं है हम तो चींटियों को भी आटा खिलाने वाले लोग हैं। कॉन्ग्रेस ने इसके साथ ही पाक प्रेरित लश्कर-ए-तैयबा के ब्लास्ट करने वाले असली गुनहगारों को छोड़कर देश की सुरक्षा के साथ भी खिलवाड़ किया।” अरुण जेटली ने भी कहा था कि कॉन्ग्रेस द्वारा इस शब्द का प्रयोग केवल वोटों के लिए किया गया था। उन्होंने कहा कि केवल राजनीतिक लाभ के लिए हिंदू समाज को कलंकित किया गया। इसके साथ ही उन्होंने इसके लिए पूरे हिन्दू समाज से कॉन्ग्रेस को माफी माँगने की भी बात कही थी।

कालाहांडी में 24 घंटों में नक्सलियों ने किए 2 धमाके, 2 जवान घायल

उड़ीसा के कालाहांडी जिले में पिछले 24 घंटों में नक्सलियों ने 2 ब्लास्ट किए है। ये धमाके लांजीगढ़ पुलिस थाने की सीमा के तहत त्रिलोचनपुर और बीजापुर में सीआरपीएफ शिविरों के पास हुए। इन विस्फोटों में 2 जवानों के घायल होने की ख़बर है।

गौरतलब है कि कल (मई 12, 2019) नक्सलियों ने सीआरपीएफ के निर्माणाधीन भवन को विस्फोट से उड़ा दिया था। हालाँकि इस घटना में किसी के हताहत होने की सूचना नहीं मिली थी। विस्फोट के बाद पुलिस के शीर्ष अधिकारी दल-बल सहित मौके पर पहुँचे थे और सर्च अभियान शुरू हुआ। इस घटना के एक दिन पूर्व मलकानगिरी जिले के मैथिली थाना अंतर्गत बोगापदर पहाड़ में भी नक्सलियों ने विस्फोट किया था जिसमें स्पेशल ऑपरेशन ग्रुप के 2 जवान घायल हुए थे।

इसके अलावा अभी हाल ही में 1 मई को महाराष्ट्र के गढ़चिरौली जिले में नक्सलियों द्वारा किए गए धमाके में 15 सुरक्षाकर्मियों वीरगति को प्राप्त हो गए थे। यह घटना तब हुई थी जब गढ़चिरौली के घने जंगलों के बीच से सी 60 कमांडो यूनिट का दस्ता गुजर रहा था।

नक्सलियों ने जिस तरह से इस हमले को अंजाम दिया था, उससे स्पष्ट था कि इस हमले के लिए लंबी प्लानिंग की गई होगी। पहले सुबह महाराष्ट्र दिवस पर 36 गाड़ियों को जलाकर नक्सलियों ने सुरक्षा बलों को अपनी ओर आने का एक तरह से लालच दिया। घटना की सूचना मिलते ही क्विक एक्शन फोर्स घटनास्थल की ओर रवाना हुई। इसी रूट पर नक्सली घात लगा कर बैठे थे। जैसे ही जंबुलखेड़ा गांव से सी 60 कमांडो की टीम गुजर रही थी, नक्सलियों ने IED ब्लास्ट कर उनकी गाड़ी को निशाना बनाया।

मोदी के खिलाफ चुनाव में उतरने वाले अतीक अहमद ने छोड़ा मैदान

वाराणसी की संसदीय सीट पर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के ख़िलाफ़ बतौर निर्दलीय प्रत्याशी नामांकन भरने वाले अतीक अहमद ने आखिरी समय में मैदान से हटने का फैसला किया है। मीडिया खबरों के मुताबिक अतीक ने इसका कारण ‘पैरोल’ न मिलने को बताया है। साथ ही इस चुनाव में उन्होंने किसी उम्मीदवार को समर्थन न देने की भी घोषणा की है।

गौरतलब है कि पूर्व सांसद अतीक अहमद ने निर्दलीय उम्मीदवार के तौर पर नामांकन भरने के उपरांत पैरोल की अर्जी दी थी, लेकिन कुछ दिनों पहले एमपी-एमएलए विशेष कोर्ट और उच्च न्यायालय ने उनकी अपील खारिज़ कर दी थी। इसके बाद अतीक के चुनाव एजेंट वकील शहनवाज आलम ने रविवार (मई 12,2019) को अतीक की ओर से पत्र लिखा। इस पत्र में उनके चुनावी मैदान से हटने की बात थी।

इस पत्र में अतीक की ओर से लिखा गया कि उन्होंने सांप्रदायिक ताकतों को हराने के लिए सभी दलों से समर्थन माँगा था लेकिन उन्हें न किसी ने समर्थन दिया और न ही अदालत ने पैरोल की अर्जी को मंजूर किया। अब ऐसे में उनका चुनाव लड़ना और लड़कर मतों को विभाजित करना उचित नहीं है।

इस पत्र में अप्रत्यक्ष रूप से भाजपा पर निशाना साधते हुए अहमद ने कहा कि भारत में लोकतंत्र की जड़ें बहुत मजबूत हैं लेकिन यहाँ ऐसी विचारधारा के लोग भी मौजूद हैं, जो लोकतंत्र को समाप्‍त कर हिटलरशाही लाना चाहते हैं। उन्होंने मतदाताओं से सांप्रदायिक ताकतों को परास्‍त करने की अपील की। इसके अलावा इस पत्र के जरिए उन्होंने बताया कि चुनाव में किसी दल ने उनसे समर्थन नहीं माँगा है इसलिए वह भी किसी को समर्थन नहीं देंगे।

बता दें नामांकन प्रक्रिया पूरी होने के कारण बैलेट यूनिट में अतीक अहमद का चुनाव चिह्न अंकित रहेगा लेकिन शाहनवाज़ (अतीक के चुनाव एजेंट) ने स्पष्ट किया है कि उनकी ओर से किसी तरह का पास और अनुमति नहीं ली जाएगी।

केंद्रीय बलों की वर्दी में भेजे जा रहे BJP-RSS के कार्यकर्ता, पैसे बाँटने बंगाल आते हैं PM मोदी: ममता

पश्चिम बंगाल की मुख्यमंत्री ममता बनर्जी ने भारतीय जनता पार्टी और राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ पर सनसनीखेज आरोप लगाए हैं। ममता ने कहा कि सीआरपीएफ व अन्य केंद्रीय बलों की वर्दी में भाजपा व संघ के कार्यकर्ता पश्चिम बंगाल में चुनाव को प्रभावित कर रहे हैं। इतना ही नहीं, उन्होंने चुनाव आयोग से प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के चॉपर्स और गाड़ियों की जाँच करने की माँग करते हुए कहा कि भाजपा वोट ख़रीद रही है। उन्होंने कहा कि कई जेड सुरक्षा प्राप्त मंत्री अपनी गाड़ियों में पैसा लेकर चलते हैं। भाजपा नेताओं को बाहरी बताते हुए मतदाताओं को उनसे सचेत रहने को कहा।

भाजपा उम्मीदवार भारती घोष के साथ हुई बदतमीजी के बाद ममता बनर्जी ने कहा कि उनके साथ उनके सुरक्षा में तैनात इंचार्ज की फायरिंग से एक टीएमसी कार्यकर्ता की मौत हुई है। बता दें कि भाजपा की प्रत्याशी भारती घोष के साथ मतदान केंद्र पर तृणमूल के गुंडों ने बदसलूकी की थी। भाजपा प्रदेश अध्यक्ष के भी काफ़िले पर तृणमूल के गुंडों ने हमला किया। इसके बाद प्रदेश अध्यक्ष दिलीप घोष ने कहा कि राज्य में तृणमूल कार्यकर्ता और पुलिस साथ मिल कर काम कर रही है। उन्होंने ममता सरकार पर सरकारी मशीनरी के दुरूपयोग का आरोप लगाया।

ममता बनर्जी ने फिर से केंद्रीय बलों पर आरोप लगाते हुए कहा कि वे मतदाताओं को भाजपा के पक्ष में वोट डालने को कह रहे हैं। ममता ने पूछा कि केंद्रीय बलों के जवान ऐसा कैसे कर सकते हैं? उन्होंने कहा कि मोदी सरकार मतदान संपन्न कराने के लिए कुछ रिटायर्ड जवानों की मदद ले रही है, जो भाजपा के लिए कार्य कर रहे हैं। बता दें कि अभी कुछ दिनों पहले ही ममता ने केंद्रीय बलों को धमकाते हुए कहा था कि आज भले ही वो मोदी के अंतर्गत कार्य कर रहे हैं लेकिन बाद में वो भी सत्ता में आएँगी और जवानों को याद रखना चाहिए कि उन्हें विपक्षी पार्टियों के सत्ता में आने के बाद उनके अंतर्गत भी कार्य करना पड़ेगा।

भाजपा नेता मुख्तार अब्बास नकवी ने कहा कि ममता बनर्जी राज्य में लोकतंत्र की हत्या कर राजतंत्र को गुंडातंत्र में तब्दील कर दिया है। 23 मई के बाद जनता ममता बनर्जी को अच्छे से जवाब देगी। ममता बनर्जी ने केंद्रीय बलों के जवानों का अपमान करते हुए आगे कहा:

राज्य में मतदाताओं को प्रभावित करने के लिए संघ और भाजपा के लोग केंद्रीय बलों की वर्दी पहनकर आ रहे हैं। मैं केंद्रीय बलों का निरादर नहीं करती हूँ। लेकिन, उन्हें निर्देश दिए जा रहे हैं। मुझे शक है कि भाजपा-संघ के कुछ कार्यकर्ताओं को केंद्रीय बलों की वर्दी पहनाकर बंगाल भेजा जा रहा है। नरेंद्र मोदी बार-बार राज्य में क्यों आ रहे हैं? दरअसल वे लोगों को बाँटना चाहते हैं। वे यहाँ पैसे लेकर आते हैं ताकि लोगों को बाँटकर वोट हासिल किए जा सकें। पीएम मोदी और भाजपा अध्यक्ष अमित शाह को चुनाव हारने का डर है। मैंने कभी ऐसा प्रधानमंत्री नहीं देखा जो इतने निम्न स्तर पर आकर बयानबाजी करता हो।

पश्चिम बंगाल में लगातार भाजपा नेताओं व कार्यकर्ताओं पर हमले हो रहे हैं। राज्य में क़ानून व्यवस्था की कलई खुल गई है और पत्रकारों तक को भी नहीं बख्शा जा रहा है। बंगाल में सुरक्षा की दृष्टि से चुनाव आयोग ने सभी सात चरणों में चुनाव संपन्न कराने का लक्ष्य रखा, लेकिन फिर भी हिंसक वारदातें थमने का नाम नहीं ले रही हैं।

मीडिया को हेडलाइन मैटीरियल न मिले तो लोकतंत्र रुक नहीं जाता: नरेंद्र मोदी की ‘खरी-खरी’ मन की बात

यह ‘प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी’ का इंटरव्यू नहीं था, नरेंद्र दामोदरदास मोदी का था- साफ़, स्पष्ट, कड़वी लेकिन खरी बातों से भरा हुआ, 5 साल तक मीडिया रिपोर्टिंग में अपने साथ हुए अन्याय को लेकर शिकायती लहजे से सराबोर। नरेंद्र मोदी इसमें कोई स्टेट्समैन नहीं, खाँटी नेता थे जो जनता तक अपनी बात पहुँचाने और वोट माँगने निकले थे। इसमें प्रधानमंत्री की धीर-गंभीरता कम, और खुद को गलत तरीके से घिरा पा रहे एक व्यक्ति का क्षोभ अधिक था। आज शायद ठंडा दिमाग नहीं, उबल रहा दिल बोल रहा था।

लिहाजा इंडियन एक्सप्रेस को दिए इस साक्षात्कार में पत्रकारों की गलतियाँ भी गिनाईं, उन्हें यह याद भी दिलाया कि (सोशल मीडिया के दौर में) आज मुख्यधारा का पत्रकार खुद विश्वसनीयता साबित करने के लिए जूझ रहा है। उन्होंने अपने ऊपर लगने वाले हर आरोप- ‘रेवड़ी’-नॉमिक्स से लेकर नोटबंदी के लक्ष्य बदलते रहने और राजीव गाँधी को अपशब्द कहने के बारे में आक्रामक खंडन करते हुए अपना पक्ष सामने रखा। पेश हैं प्रमुख मुद्दों पर प्रधानमंत्री भाजपा नेता नरेंद्र मोदी के विचार:

रिकॉर्ड उठा कर देख लो, मैं निर्वाचन के समय के अलावा राजनीति नहीं करता

सवाल था कि इस आगामी लोकसभा की निर्वाचन प्रक्रिया में इतनी तल्खी हो गई है कि सवाल उठ रहा है क्या सत्ता पक्ष और विपक्ष इसके बाद तालमेल बिठा कर संघीय तंत्र को चला पाएँगे। जवाब में नरेंद्र मोदी ने अपने पाँच साल के प्रधानमंत्रित्व और 13 साल के गुजरात के कार्यकाल का हवाला देकर दावा किया कि निर्वाचन प्रक्रिया के समय प्रचार के दौरान और समसामयिक राजनीतिक मुद्दों पर टिप्पणियों का जवाब देने तक ही उनकी विशुद्ध राजनीतिक गतिविधियाँ सीमित रहीं हैं। “मैं अगर पानी से जुड़े कार्यक्रम में गया तो पानी पर ही बोला। अगर बिजली से जुड़े कार्यक्रम में गया तो बिजली पर ही बोला।”

उन्होंने यह भी दावा किया कि विपक्षी दलों के कई सांसद निजी तौर पर यह मान चुके हैं कि मोदी ने जितना समय उन्हें दिया, किसी और प्रधानमंत्री ने नहीं। उन्होंने उड़ीसा और बंगाल में हालिया चक्रवात का उदाहरण दिया कि कैसे वह अपने राजनीतिक कार्यक्रम रोक कर इसकी समीक्षा बैठकें कर रहे थे। 2016 का भी उदाहरण दिया जब केरल में 18 लोगों की मृत्यु पटाखों के धमाके में हो जाने के बाद वह चोटी के डॉक्टरों की टीम लेकर वहाँ पहुँचे थे जबकि उस समय वहाँ कॉन्ग्रेस की सरकार थी।

यूँ उठी थी राजीव गाँधी वाली बात

मोदी हाल-फ़िलहाल राजीव गाँधी की मृत्यु के समय ‘भ्रष्टाचारी नं. 1’ की छवि होने की बात कहने को लेकर वाम-(छद्म) उदारवादी मीडिया के निशाने पर हैं। उन पर आईएनएस विराट भी ‘गड़े मुर्दे उखाड़ने’ का आरोप है। इन दोनों का भी उन्होंने जवाब दिया और मीडिया के दोहरे मापदण्डों को भी आड़े हाथों लिया। उन्होंने सवाल पूछा कि अगर राहुल गाँधी का एक साल से उन्हें ‘चोर’ कहना लोकतंत्र में अशिष्टता नहीं था तो उनका राजीव गाँधी को ‘भ्रष्टाचारी’ कहना क्यों अपमानजनक हो गया।

“एक आदमी की छवि पर चोर-चोर-चोर-चोर-चोर के सहारे चोट किया जा रहा है, आपको उस पर कोई आपत्ति नहीं है!”

राजीव गाँधी के आईएनएस विराट विवाद का भी परिप्रेक्ष्य उन्होंने दिया कि पहले राहुल गाँधी ने उन्हें ताना मारा था कि सेना उनकी (मोदी की) जागीर नहीं है। तब उन्होंने यह याद दिलाना जरूरी समझा कि सरकारी और सार्वजानिक सम्पत्ति को निजी जागीर बना लिए जाने की असली तस्वीर कैसी होती है, और विराट के दुरुपयोग का मामला उठाया।

मेरी छवि 45 साल के संघर्ष से बनी है, खान मार्केट गैंग से नहीं; यूँ ही नहीं तोड़ लोगे

मोदी ने राहुल गाँधी के हालिया इंटरव्यू का भी जिक्र किया जिसमें राहुल गाँधी ने उनकी साफ़ छवि को छिन्न-भिन्न कर देने को अपनी सबसे बड़ी रणनीति बताया था। मोदी ने तंज कसते हुए कहा,

“मोदी की छवि दिल्ली के खान मार्केट गैंग ने नहीं बनाई है, लुटियंस दिल्ली ने नहीं बनाई है। 45 साल की मोदी की तपस्या ने बनाई है। अच्छी है या बुरी, इसे आप नष्ट नहीं कर सकते।”

नरेंद्र मोदी यहीं नहीं रुके। दिल्ली के सबसे महँगे रियल एस्टेट खान मार्केट में रहने और लुटियंस से सत्ता की दलाली करने वालों पर कटाक्ष करते हुए उन्होंने यह भी पूछा कि जिस भूतपूर्व प्रधानमंत्री (राजीव गाँधी) की ‘मिस्टर क्लीन, मिस्टर क्लीन’ करके इन्होंने छवि बनाई थी, उनका अंत कैसे (किस छवि के साथ) हुआ?

हम हार कर भी उत्साह से ओत-प्रोत हैं

सवाल था कि लोकसभा निर्वाचन से ठीक पहले तीन राज्यों की सत्ता गँवाकर भाजपा ने क्या सीखा? मोदी ने पलट कर भाजपा को तीन राज्यों में कुल 40 सीटों पर समेटने वाले राजनीतिक गणितज्ञों पर कटाक्ष किया। यह भी याद दिलाया कि छत्तीसगढ़ के अलावा भाजपा को सत्ता-विरोधी लहर के बावजूद भारी जनसमर्थन मिला और मध्य प्रदेश में तो कुल मत प्रतिशत कॉन्ग्रेस से ज्यादा ही रहा।

मोदी ने यह भी याद दिलाया कि कॉन्ग्रेस अपने ‘असली रंग’ में आ गई है, और नोटों के बंडलों की ख़बरें देश भर में फिर से सुनाई पड़ रहीं हैं। उन्होंने इंडियन एक्सप्रेस की खोजी पत्रकारिता की छवि पर भी तंज कसते हुए पूछा कि कैसे इंडियन एक्सप्रेस को भोपाल में गरीब बच्चों के खाने के कोष में घोटाला नहीं दिखा।

मेरी सरकार को केवल एक-दो चीज़ों से जोड़कर न देखें

जब नरेंद्र मोदी से पूछा गया कि जैसे अटल सरकार को पोखरण, विनिवेश, बिजली सुधार आदि के लिए याद किया जाता है, वैसे उनकी सरकार 20 साल बाद किस चीज़ के लिए याद की जाएगी, तो उन्होंने कहा कि किसी एक-दो चीजों से वह अपनी और अपनी सरकार की छवि नहीं जोड़ना चाहते। उन्होंने आधारभूत ढाँचे से लेकर स्वच्छ भारत और आयुष्मान भारत गिनाते हुए कहा कि उनकी सरकार की (और अटल सरकार की भी) परिकल्पना में हर क्षेत्र में स्तम्भ खड़े करते हुए समग्र विकास के लिए काम करने की रही है।

प्रोत्साहन और आधारभूत सहायता को रेवड़ी मत कहिए, विनिवेश की प्रतिबद्धता दोहराई

मोदी से सवाल किया गया कि पीएम-किसान जैसी जनकल्याणकारी योजनाएँ क्या एक तरह से कॉन्ग्रेस की ही तरह ‘रेवड़ियाँ’ बाँटकर सत्ता पाने का प्रयास नहीं है। जवाब में उन्होंने प्रतिप्रश्न किया कि अगर उनकी सरकार इंडियन एक्सप्रेस में विज्ञापन देती है तो क्या इसे ‘रेवड़ी’ माना जाए। उन्होंने गरीबों के लिए सस्ते मकान बनाने की परियोजना, हेल्थकेयर में आधारभूत चेन बनाने आदि को ‘रेवड़ी’ बताने पर भी आपत्ति जताई। यह समझाया कि उनके दृष्टिकोण से यह सब मूलभूत ढाँचे हैं, जिनके ऊपर निजी भागीदार इस क्षेत्र में अपनी उपस्थिति का निर्माण करेंगे।

विनिवेश के सवाल पर उन्होंने अपना मशहूर नारा “government has no business to be in business” दोहराया और विनिवेश के प्रति प्रतिबद्धता भी जताई। पर यह मजबूरी भी गिनाई कि किसी भी इकाई को बेचने के लिए उसे खरीददारों में उत्सुकता पैदा करने वाला बनाना तो जरूरी है। साथ ही यह भी याद दिलाया कि उनकी सरकार ने ही सबसे ज्यादा विनिवेश किया है। एक PSU द्वारा दूसरे को खरीदने के सवाल पर उन्होंने कहा कि यह विनिवेश प्रक्रिया का ही हिस्सा है जिसमें छोटी-छोटी इकाइयों को मिलाकर एक बड़ी इकाई बनाई जा रही है। उदाहरण उन्होंने एसबीआई का दिया जिसमें कुछ समय पहले त्रावणकोर स्टेट बैंक समेत 5 छोटे बैंकों का विलय हुआ है।

अधिनायकवाद का खण्डन

नरेंद्र मोदी ने साफ़ कर दिया कि यह अधिनायकवाद की छवि पूरी तरह झूठी है। उन्होंने यूपीए काल की कैबिनेट मीटिंगों से एनडीए-2 की तुलना करते हुए कहा कि (जब ‘रिमोट कंट्रोल’ से सरकार चलती थी तो) यूपीए में 20 मिनट औसतन कैबिनेट मीटिंग होती थी। उनके (मोदी के) समय में यह बढ़कर तीन घंटे के आसपास हो गया है। उन्होंने बताया कि कैबिनेट में कई पूरी तरह तैयार प्रस्ताव ख़ारिज हुए हैं और कई अन्य अस्थाई मंत्री-समूहों के हवाले किए गए हैं।

मीडिया को आईना भी, लताड़ भी

इस समय नरेंद्र मोदी पूरी तरह चुनावी मोड में चल रहे हैं। 5 साल तक मीडिया द्वारा प्रॉक्सी-विपक्ष का रोल अदा करने के बाद भी उन्होंने शायद ही कभी मीडिया पर सीधा निशाना साधा हो। पर आज उन्होंने मीडिया को नहीं बख्शा। हर मुद्दे पर मोदी के लिए अलग मापदंड तय होने की भी जमकर बखिया उधेड़ी।

इंडियन एक्सप्रेस के पत्रकारों के सामने ही उनके पूर्व सम्पादक द्वारा एक समय दो बैंकों के विलय को ‘बड़ा कदम’ करार दिए जाने और मोदी के 5 और 3 बैंकों के विलय पर सन्नाटा मार लेने पर भी सवाल उठाया। जब उन पर ‘लोकतंत्र के अनिर्वाचित स्तम्भों’ (मीडिया और न्यायपालिका) से असहज होने का आरोप लगा तो उन्होंने बिना लागलपेट साफ़ कर दिया कि हालाँकि वह मीडिया के सवालों से नहीं डरते पर यह उम्मीद जरूर करते हैं कि मीडिया उतने ही सवाल और वैसे ही सवाल दस साल तक रिमोट कंट्रोल से सरकार चलाने वालों से भी पूछने की हिम्मत दिखाए।

उन्होंने मीडिया की तथाकथित ‘निष्पक्षता’ को भी कठघरे में खड़ा किया। उन्हें याद दिलाया कि आज सोशल मीडिया मुख्यधारा के पत्रकारों के पूर्वग्रहों को बेनकाब कर रहा है। उन्होंने सवाल उठाया कि क्यों मीडिया ने कॉन्ग्रेस-शासित राजस्थान में दलित के बलात्कार की खबर को तभी उठाया जब वहाँ निर्वाचन सम्पन्न हो गए (यानी खबर उछलने से कॉन्ग्रेस को वोटों के नुकसान का खतरा नहीं रहा)। उन्होंने पलट कर मीडिया से सवाल किए जाने को ‘अपमान’ करार देने पर भी सवाल खड़े किए।

‘हेट स्पीच’ के मामले में भी उन्होंने मीडिया द्वारा ‘अप्रूव’ की गई परिभाषा को मानने से इंकार कर दिया। उल्टा मीडिया को कटघरे में खड़ा किया। मोदी ने पूछा कि ‘हेट स्पीच’ की यह कैसी परिभाषा है कि यदि एक व्यक्ति (साध्वी प्रज्ञा सिंह ठाकुर) खुद को हिरासत में प्रताड़ित किए जाने की बात करे तो वह ‘हेट स्पीच’ है लेकिन सभी हिन्दुओं को ‘भगवा आतंकवाद’ के झूठे नाम पर अपमानित करना हेट स्पीच नहीं है। यहाँ तक कि समुदाय विशेष को अलग-थलग करने का खुद पर आरोप लगाने पर पलट कर उन्होंने पूछा कि कितने (मीडिया हाउस में) आज समुदाय विशेष वालों को मुख्य पत्रकार (सम्पादक) बनाया गया है।

लोकतंत्र पर पत्रकारों की ‘चिंता’ पर भी उन्होंने सीधे-सीधे कहा कि मीडिया की यह चिंता अपारदर्शिता और लोकतंत्र की नहीं, हेडलाइन बनने के लिए खबरें लीक न होने को लेकर है। और इसके लिए कोई ‘आश्वासन देने के बजाय उन्होंने साफ़ कह दिया कि पत्रकारों को खबरें न मिल पाना उनकी (मोदी की) समस्या नहीं है।

देश का नुकसान मतलब देशद्रोह

राष्ट्रवाद और देशद्रोह के मुद्दे पर नरेंद्र मोदी ने बहुत तफ़सील से अपनी परिभाषा बताई भी, और समझाई भी। उन्होंने साफ़ कर दिया कि कोई भी इंसान जो देश का नुकसान करता है उसे वह देशभक्त नहीं मानते। उन्होंने उदाहरण दिया कि पंडित नेहरू द्वारा शुरू किया गया सरदार सरोवर बाँध इतना खिंचा (भ्रष्टाचार के चलते) कि उसका उद्घाटन उन्होंने (मोदी ने) हाल ही में किया। ₹6,000 करोड़ की अनुमानित कीमत से शुरू हुई परियोजना की आखिरी कीमत ₹1 लाख करोड़ बैठी। यह देशद्रोह ही था (मोदी की नजरों में)।

कश्मीर के विकास लिए मुफ़्ती-अब्दुल्ला से मुक्ति जरूरी, नक्सलियों के नेता कार और PhD वाले

नरेंद्र मोदी ने जहाँ एक ओर कश्मीर के विकास के लिए मुफ़्ती और अब्दुल्ला खानदानों के चंगुल से मुक्ति को जरूरी बताया, दूसरी ओर यह साफ़ किया कि नक्सली-माओवादी न गरीब हैं न ही गरीबों के हिमायती। उन्होंने ‘अर्बन नक्सलियों’ की ओर इशारा करते हुए साफ़ किया कि नक्सलियों के छोटे नेता गाड़ियों में घूमते और PhD कर विश्वविद्यालयों में पढ़ाते हैं। वह विकास को भी रोकते हैं क्योंकि अगर विकास होगा तो उनकी विचारधारा का फैलाव नहीं होगा। उन्होंने यह भी बताया कि हिंसा को लेकर उनकी सरकार की ‘जीरो-टॉलरेंस ‘नीति के बावजूद रिकॉर्ड स्तर पर माओवादियों ने हथियार डाले हैं और एक-तिहाई जिले अब वामपंथी चरमपंथ से मुक्त हैं।

पाकिस्तान की गेंद पाकिस्तान के पाले में, चीन समझता है हमारी चिंताएँ

पाकिस्तान के मुद्दे पर मोदी ने केवल इतना ही कहा कि पाकिस्तान का अगला कदम ही भारत के अगले कदम को तय करेगा। चीन के मुद्दे पर हालाँकि उन्होंने देश को आश्वस्त किया कि चीन भारत की आतंक-संबंधी चिंताओं से अनभिज्ञ नहीं है। उन्होंने यह भी जोड़ा कि चीन और भारत के बीच कुछ असहमतियाँ होते हुए भी बहुत (से महत्वपूर्ण मुद्दों पर) सहमति है।

विदेश नीति में सौभाग्यशाली रहा कि जमीन से जुड़ा रहा, किताबी ज्ञान से नहीं

अपनी अनूठी विदेश नीति के मुद्दे पर भी नरेंद्र मोदी अपने आलोचकों के प्रति ही आलोचनात्मक नजर आए। उन्होंने कहा कि अधिकाँश विदेश नीति ‘विशेषज्ञ’, और यहाँ तक कि विदेश मंत्री, इस विषय को अत्यधिक ‘अकादमिक’ तरीके से देखते हैं। जबकि उनका (मोदी का) दृष्टिकोण यहाँ भी जमीन से जुड़ा हुआ रहा। उन्होंने बताया कि कैसे अपने वर्षों पहले के अमेरिका प्रवास में उन्होंने सस्ते और रियायती टिकट का लाभ उठाते हुए अमेरिका के 23 राज्यों का भ्रमण किया था।

अपनी विदेश नीति के फायदे गिनाते हुए उन्होंने G-20 के इतर हुई भारत की रूस-चीन और जापान-अमेरिका से वार्ताओं को मिल रहे महत्व का उदाहरण दिया। साथ में यह भी जोड़ा कि व्यक्तिगत मित्रताएँ स्थापित करने से पारस्परिक समझ स्थापित होने में सहूलियत होती है

मतदान न कर पाने वाले दिग्विजय सिंह को BJP ने बताया Nervous, साध्वी ने कहा ‘धर्मयुद्ध है यह’

चुनाव प्रचार के लिए कई दिनों से भोपाल में डेरा जमाए दिग्विजय सिंह छठे चरण के दौरान मतदान करने में असफल रहे। मध्य प्रदेश के पूर्व मुख्यमंत्री भोपाल में ख़ुद को इसीलिए वोट नहीं दे सके, क्योंकि वह भोपाल लोकसभा क्षेत्र के मतदाता नहीं हैं। मतदाता सूची में दिग्विजय सिंह का नाम मध्य प्रदेश के राजगढ़ लोकसभा क्षेत्र के अंतर्गत आने वाले उनके पैतृक कस्बे राघौगढ़ में पंजीकृत है। इसकी वजह से वो भोपाल में स्वयं को वोट नहीं दे पाए। दिग्विजय के पैतृक क्षेत्र में भी आज छठे चरण के तहत मतदान हुआ, लेकिन भोपाल से लगभग 150 किलोमीटर दूर अपने गाँव में दिग्विजय वोट डालने के लिए नहीं गए। सोशल मीडिया पर लोगों ने इस पर गुस्सा ज़ाहिर करते हुए पूछा कि सबको वोट देने की अपील करने वाले कुछ नेता ख़ुद मतदान क्यों नहीं करते?

वहीं दूसरी तरफ़ भोपाल लोकसभा क्षेत्र से भाजपा की उम्मीदवार साध्वी प्रज्ञा सिंह ठाकुर ने मतदान में हिस्सा लिया। साध्वी प्रज्ञा ने आज रविवार (मई 12, 2019) को सुबह भोपाल के रेवेरा टाउन मतदान केन्द्र पर अपना वोट डाला। मतदान करने के बाद साध्वी प्रज्ञा ने मीडिया से बातचीत करते हुए कहा कि यह धर्म युद्ध है। उन्होंने कहा कि पूरे देश में भाजपा को पहले से भी ज्यादा सीटें मिलेंगी और नरेन्द्र मोदी फिर से प्रधानमंत्री बनेंगे। साध्वी प्रज्ञा वर्ष 2008 में हुए मालेगांव विस्फोट मामले में आरोपित हैं और फिलहाल जमानत पर हैं। साध्वी प्रज्ञा ने कॉन्ग्रेस सरकार द्वारा ख़ुद को फँसाने और गिरफ़्तारी के बाद उनका टॉर्चर किए जाने को चुनाव में मुद्दा बनाया था।

साध्वी प्रज्ञा ने इस चुनाव को धर्मयुद्ध इसीलिए बताया क्योंकि उन्होंने जनता के बीच जाकर लगातार यह बताया कि दिग्विजय सिंह ‘हिन्दू आतंकवाद’ वाली थ्योरी गढ़ने वालों में प्रमुख नेता थे और साध्वी प्रज्ञा इस नैरेटिव की शिकार बनीं। साध्वी प्रज्ञा द्वारा इन बातों को छेड़ने के बाद भोपाल सहित पूरे देश में उन्हें जनता की सहानुभूति मिली। 1993 से 2003 तक राज्य के मुख्यमंत्री रहे कॉन्ग्रेस के दिग्गज नेता दिग्विजय सिंह के ख़िलाफ़ उन्हें उतारना भाजपा की हिंदुत्ववादी नीतियों को आगे बढ़ाने में भी सहायक सिद्ध होगा। दिग्विजय सिंह ने वोट न डालने वाले सवाल पर कहा कि उन्हें इसका अफ़सोस है।

वहीं भाजपा खेमे का कहना है कि दिग्विजय बेचैनी और अधीरता के कारण वोट डालने नहीं जा सके। दिग्विजय लगातार भोपाल में कैम्प करते रहे क्योंकि मुख्यमंत्री कमल नाथ ने उन्हें राज्य के सबसे कठिन सीट से लड़ कर जीतने की चुनौती दी थी, ऐसा भाजपा का मानना है। दिग्विजय ने भाजपा के हिंदुत्व की काट के लिए कम्प्यूटर बाबा को प्रचार के लिए बुलाया था और कई साधु-संतों के साथ भगवा कपड़ों में रोड शो भी किया था। दिग्विजय के लिए साधु-संतों ने भोपाल कॉन्ग्रेस के दफ़्तर में हवन किया।

मध्य प्रदेश की आठ लोकसभा सीटों के लिए आज मतदान संपन्न हुआ। शाम 4 बजे तक मध्य प्रदेश में लगभग 53% मतदान हुआ था। पिछली बार भाजपा ने यहाँ अच्छा प्रदर्शन किया था लेकिन विधानसभा चुनाव हारने के बाद पार्टी ने अपनी तैयारियों को एक नया स्वरूप दिया। इसी क्रम में साध्वी प्रज्ञा को पार्टी की सदस्यता दिलाकर भोपाल से उतारा गया।

अयोध्या में भगवान श्रीराम की सबसे ऊँची 221 मीटर की प्रतिमा, अधिकृत होगी 28 हेक्टेयर भूमि

अयोध्या में भगवान श्रीराम की सबसे ऊँची प्रतिमा के लिए 28.284 हेक्टेयर भूमि अधिग्रहीत की जाएगी। अयोध्या के डीएम अनुझ झा ने इसके लिए ज़मीन चिन्हित करके इसका प्रस्ताव पर्यटन विभाग को भेज दिया है।

ख़बर के अनुसार, सरयू नदी के पास भगवान राम की क़रीब 221 मीटर ऊँची प्रतिमा बनाई जाएगी। इसके अलावा प्रतिमा के आसपास प्रदर्शनी दीर्घा के साथ-साथ वहाँ आने वाले भक्तों के लिए सुविधाएँ भी मुहैया कराई जाएँगी।

सर्किल रेट के तहत ज़मीन की क़ीमत लगभग 38 करोड़ रुपए आँकी गई है। लेकिन यह नियम है कि ग्रामीण क्षेत्र की भूमि का मुआवज़ा सर्किल रेट से चार गुना और शहरी क्षेत्र का मुआवज़ा सर्किल रेट से दोगुना दिया जाना है।

इस प्रतिमा के लिए ज़मीन अधिग्रहण में क़रीब 80 करोड़ से अधिक ख़र्च हो सकता है। फ़िलहाल, देश में लोकसभा चुनाव की प्रक्रिया जारी है इसलिए ज़मीन अधिग्रहण की प्रक्रिया चुनाव के बाद आगे बढ़ाई जाएगी। वहीं सरकार ने पहले ही यह साफ़ कर दिया है कि खातेदार की सहमति से ही उसकी भूमि का अधिग्रहण होगा।

भगवान श्रीराम की प्रतिमा 151 मीटर ऊँची होगी, 50 मीटर ऊँचे पैडस्टल और 20 मीटर ऊँचे छत्र के बाद प्रतिमा की कुल ऊँचाई 221 मीटर हो जाएगी। 50 मीटर ऊँचे पैडस्टल के अंदर ही अत्याधुनिक म्यूज़ियम भी बनाना तय हुआ है। इस म्यूज़ियम में अयोध्या का इतिहास, इक्ष्वाकु वंश का इतिहास दिखाया जाएगा। इसके अलावा यहाँ आने वाले भक्त राजा मनु से लेकर श्रीराम तक के बारे पूरी जानकारी से अवगत हो सकेंगे।