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‘ज़्यादा हँसो मत, एक दिन रोओगे’- अब्दुल हमीद के कॉमेंट के कारण श्री लंका की मस्जिदों पर अटैक

श्री लंका में स्थिति अभी भी तनावपूर्ण बनी हुई है। स्थानीय आबादी और समुदाय विशेष के बीच ताजा तनातनी एक फेसबुक पोस्ट को लेकर हुई और देखते ही देखते कर्फ्यू लगाने की स्थिति आ गई। यह घटना चिलॉव नाम के शहर में हुई है। स्थानीय पुलिस ने मामले की गंभीरता को देखते हुए सोमवार की सुबह 6 बजे तक कर्फ्यू लगा दिया है।

रॉयटर्स के अनुसार, फेसबुक पर एक पोस्ट को लेकर यह मामला इतना बढ़ गया कि चिलॉव स्थित तीन मस्जिदों और सम्प्रदाय विशेष की कुछ दुकानों पर स्थानीय ईसाई समुदाय के लोगों ने पथराव किया।

फेसबुक पर किसी यूजर ने सिंहलीज़ में लिखा – “हमें रुलाना इतना आसान नहीं।” इसके साथ ही उसने समुदाय विशेष के लिए एक स्थानीय गाली का भी प्रयोग किया। इसी पोस्ट पर अब्दुल हमीद मोहम्मद हसमार ने अंग्रेजी में कॉमेंट किया – “Dont laugh more 1 day u will cry.” मतलब ज्यादा हँसो मत, एक दिन तुम रोओगे।

आपको बता दें कि श्री लंका में ईस्टर संडे के मौके पर 21 अप्रैल को हुए सिलसिलेवार बम धमाकों के बाद सरकार ने बुर्के पर बैन लगाने के बाद अब एक और बड़ा कदम उठाया था। श्री लंका सरकार ने कुल 600 विदेशी नागरिकों को देश से निष्कासित कर दिया था। बता दें कि, देश से बाहर निकाले गए इन लोगों में 200 मौलवी भी शामिल थे।

इस साल ईस्टर संडे की सुबह ने श्रीलंका को हिला कर रख दिया था। 21 अप्रैल 2019 को श्रीलंका में इस्लामी आतंक का कहर बरपा था। लगातार आठ बम धमाकों से 200+ मौतें और करीब 500 से ज्यादा लोग बुरी तरह जख्मी हुए थे।

‘पिंक बूथ’ मतदान केंद्रों पर ‘नारी शक्ति’: बड़ी संख्या में मुस्लिम महिला वोटरों को जोड़ने की पहल

राजधानी दिल्ली में आज (मई 12, 2019) मतदान के दौरान 17 मतदान केंद्रों पर ‘नारी शक्ति’ साफ तौर पर देखने को मिला। इन 17 मतदान केंद्रों को ऐसे बनाया गया था, जिसमें सिर्फ महिला स्टाफ ही थीं। ये महिला मतदान केंद्र दिल्ली की सभी सातों लोकसभा सीटों पर बनाए गए, जिनमें पीठासीन अधिकारी से लेकर अन्य स्टाफ तक सिर्फ महिलाएँ ही थीं। इन मतदान केंद्रों पर महिला वोटर खासकर, मुस्लिम महिला वोटरों की संख्या काफी रही।

दिलचस्प बात ये है कि दिल्ली की सात में से चार जिला निर्वाचन एवं रिटर्निंग ऑफिसर भी महिलाएँ ही हैं। वो इस तरह के सकारात्मक पहल के प्रभाव को देखकर खासी उत्साहित हैं। चांँदनी चौक लोकसभा सीट की रिटर्निंग ऑफिसर तन्वी गर्ग ने कहा कि दिल्ली के मुख्य निर्वाचन अधिकारी कार्यालय ने महिला मतदान केंद्र की कल्पना की थी और इसका मकसद महिला सशक्तिकरण को बढ़ावा देना था, जो कि कारगर साबित हुआ।

तन्वी गर्ग ने बताया कि उन्होंने ऐसे दो मतदान केंद्र बनवाए। एक मटिया महल विधानसभा में और दूसरा मॉडल टाउन विधानसभा में। सभी मतदान कर्मियों ने काफी मेहनत की और सभी महिलाएँ एक अखिल महिला टीम का हिस्सा बनकर काफी खुश हैं। महिला मतदाता भी इससे काफी खुश थीं। बता दें कि 17 मतदान केंद्रों में से 10 पूर्वी दिल्ली निर्वाचन क्षेत्र में, दो चाँदनी चौक और उत्तर पूर्वी दिल्ली में बनाए गए तो वहीं पश्चिम दिल्ली, दक्षिणी दिल्ली, नई दिल्ली और उत्तर पश्चिम दिल्ली निर्वाचन क्षेत्रों में एक-एक महिला मतदान केंद्र बनाया गया।

उत्तर-पूर्वी दिल्ली की रिटर्निंग अधिकारी शशि कौशल ने कहा कि यह पहल बहुत कामयाब रही। कौशल ने बताया कि उन्होंने मुस्लिम आबादी वाले इलाके के जीनत महल स्कूल में गुलाबी मतदान केंद्र बनाया। सुबह बड़ी संख्या में बुर्के में महिलाएँ वोट डालने के लिए आईं, जहाँ फूल देकर उनका स्वागत किया गया। मगर, व्यक्तिगत सशक्तिकरण से ज्यादा ये “नारी शक्ति” का बड़ा सामाजिक संदेश है, जो समाज को दिया गया है।

इसके साथ ही कौशल ने बताया कि उत्तर पूर्वी जिले में एक मतदान केंद्र में सभी स्टाफ दिव्यांग हैं, जबकि इसी जिले के ताहिरपुर के लेप्रॉसी होम कॉम्प्लेक्स में एक मतदान केंद्र सिर्फ दिव्यांगों के लिए है। तन्वी गर्ग और शिव कौशल के अलावा नई दिल्ली की रिटर्निंग ऑफिसर पूजा जोशी और दक्षिणी दिल्ली की रिटर्निंग ऑफिसर निधि श्रीवास्तव भी महिला ही हैं। राजधानी में 1.43 करोड़ मतदाता हैं, जिनमें से 78,73,022 पुरुष और 64,43,431 महिलाएँ एवं 669 थर्ड जेंडर हैं। ये मतदाता 164 प्रत्याशियों के भाग्य का फैसला करेंगे, जिनमें 18 महिला प्रत्याशी शामिल हैं।

रॉबर्ट वाड्रा ने तिरंगे की जगह ‘लहरा’ दिया पराग्वे का झंडा, Twitter पर लोगों ने जम कर किया ट्रोल

सोनिया गाँधी के दामाद रॉबर्ट वाड्रा को ट्विटर पर लोगों के गुस्से का शिकार होना पड़ा। दरअसल, उन्होंने ग़लती ही ऐसी की थी, जिससे वो ख़ुद को ट्विटर पर ट्रोल होने से बचा नहीं सके। आज रविवार (मई 12, 2019) को छठे चरण का मतदान संपन्न हुआ। इस दौरान दिल्ली की सभी सात सीटों पर भी मतदान हुआ। इस दौरान रॉबर्ट वाड्रा और उनकी पत्नी एवं कॉन्ग्रेस महासचिव प्रियंका गाँधी ने भी लोधी एस्टेट स्थित मतदान केंद्र पर अपने मताधिकार का प्रयोग किया। अन्य कई लोगों व सेलेब्स की तरह रॉबर्ट वाड्रा ने भी मतदान करने के बाद सेल्फी पोस्ट की, लेकिन इसमें उन्होंने भारत के झंडे की जगह पराग्वे का झंडा प्रयोग कर दिया। सोशल मीडिया पर लोगों ने इसे नोटिस किया और अंततः वह जमकर ट्रोल हुए।

दरअसल, रॉबर्ट वाड्रा ने जो झंडा पोस्ट किया, उसमें भी भारतीय झंडे की तरह तीन रंग हैं। दक्षिण अमेरिकी देश पराग्वे के इस झंडे में भारत के झंडे की तरह ही ऊपर केसरिया और बीच में सफ़ेद रंग है। इतना ही नहीं, भारत के झंडे की तरह इसके बीचोंबीच भी एक चक्र स्थित है। लेकिन, इस झंडे में नीचे का रंग नीला है, जो भारतीय झंडे से बिलकुल अलग है। भारत के राष्ट्रीय ध्वज में सबसे नीचे हरा रंग होता है। वाड्रा ने अपनी सेल्फी में पराग्वे का झंडा ट्वीट करते हुए लिखा, “हमारा अधिकार, हमारी ताकत! आप सबको बाहर आना चाहिए और वोट डालना चाहिए। अपने प्रिय लोगों के सम्मिलित भविष्य, सेक्युलर, प्रोडक्टिव और देश के सुरक्षित भविष्य के लिए हमें आपके सहयोग की जरूरत है।” ट्रोल होने के बाद वाड्रा ने अपना ट्वीट डिलीट कर दिया। लेकिन तकनीक के समय में स्क्रीनशॉट लेने की सुविधा के कारण बेचारे वाड्रा बच नहीं पाए।

वाड्रा को उंगली दिखाना पड़ा महंगा

ट्विटर पर लोगों ने वाड्रा को ट्रोल करते हुए लिखा कि वह ऐसे व्यक्ति हैं जो भारत और किसी अन्य देश के झंडे में फ़र्क़ नहीं कर सकते हैं। कई लोगों ने वाड्रा की समझ पर भी सवाल खड़े किए। वाड्रा द्वारा इस बारे में कोई स्पष्टीकरण नहीं दिया गया। इसके बाद उन्होने एक दूसरा ट्वीट करते हुए उसमें भारतीय ध्वज का प्रयोग किया।

प्रियंका गाँधी के बेटे रेहान भी इस बार अपने मताधिकार का प्रयोग नहीं कर सके। पहली बार वोट देने के योग्य हुए 19 वर्षीय रेहान द्वारा अपने मताधिकार का प्रयोग न कर पाने के बारे में बोलते हुए प्रियंका गाँधी ने कहा कि चूँकि वह अपनी परीक्षा के लिए लंदन गया हुआ है, इसीलिए उसने मतदान प्रक्रिया में हिस्सा नहीं लिया। अभी हाल ही में कुछ दिनों पहले हुई एक कॉन्ग्रेस की रैली में प्रियंका गाँधी और रॉबर्ट वाड्रा के बेटे-बेटी को मंच से हाथ हिलाते देखा गया था। इसके बाद ट्विटर पर यह चर्चा छिड़ गई थी कि क्या कॉन्ग्रेस नेतृत्व के भविष्य का चयन किया जा चुका है? अमेठी में कॉन्ग्रेस अध्यक्ष राहुल गाँधी के नामांकन के दौरान भी रेहान को देखा गया था।

मतदान से पहले कॉन्ग्रेस महासचिव प्रियंका गाँधी ने पत्रकारों से बात करते हुए कहा कि यह पूरी तरह स्पष्ट है कि भाजपा हार रही है क्योंकि लोग पूरी तरह दुःखी एवं निराश हैं। प्रियंका ने कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी विकास के मुद्दे पर चर्चा करने की बजाए इधर-उधर की बातें कर रहे हैं। ख़ुद को कॉन्ग्रेस की जीत के प्रति आश्वस्त बताते हुए प्रियंका ने कहा कि पीएम मोदी को राहुल गाँधी की चुनौती स्वीकार करनी चाहिए और रोज़गार पर जवाब देना चाहिए।

लुंगी पहने बुर्जुग, साइकिल में दूध का लटका डब्बा और पैरों में चप्पल: BJP विधायक के पिताजी ने जीता दिल

कर्नाटक में सोशल मीडिया पर एक तस्वीर काफ़ी वायरल हो रही है। आज के दौर में जब विधायक या सांसद का चुनाव जीतना गंगा नहाने के समान होता जा रहा है, इस तस्वीर से हमें काफ़ी कुछ सीखने को मिल सकता है। कर्नाटक में सोशल मीडिया के विभिन्न प्लैटफॉर्म्स पर धूम मचा रही ये तस्वीर एक बुज़ुर्ग की है। तस्वीर में साइकल पर जा रहे यह बुर्जुग लुंगी पहने हुए हैं और इनकी साइकिल में दूध का एक डब्बा लटका हुआ है। टाइम्स नेटवर्क की ख़बर के अनुसार, ये बुज़ुर्ग भाजपा विधायक के पिता हैं। इनका नाम मुथन्ना पूंजा है और इनके बेटे हरीश पूंजा दक्षिण कन्नड़ जिले की बेलथान्गडी सीट से भाजपा विधायक हैं। सोशल मीडिया पर लोग इसे प्रेरणादायी तस्वीर बताते हुए कह रहे हैं कि कैसे बेटे के विधायक होते हुए भी यह बुज़ुर्ग इतना सिंपल जीवन जी रहा है।

पूंजा ने 2018 विधानसभा चुनाव में वसंत बंगेरा को 23,000 के क़रीब मतों से मात दी थी। बेलथान्गडी से 9 बार चुनाव लड़ चुके व पाँच बार विधायक रह चुके वसंत बंगेरा को हराकर चर्चा में आए हरीश पहले भाजपा के सक्रिय कार्यकर्ता हुआ करते थे। वसंत भाजपा से जदएस और फिर कॉन्ग्रेस में आए थे। पूंजा से पहले इस सीट पर ख़ास परिवारों के लोग ही जीतते आए थी, जिस क्रम को पूंजा ने तोड़ दिया। नवभारत टाइम्स के अनुसार, वायरल तस्वीर हरीश पूंजा के पिता मुथन्ना पूंजा की ही है। सफ़ेद शर्ट और घुटने तक मुड़ी धोती पहनकर घूमने वाले मुथन्ना पूंजा सच में काफ़ी सिंपल जीवन जीते हैं।

साभार: टाइम्स ऑफ इंडिया

टाइम्स ऑफ इंडिया में प्रकाशित ख़बर के अनुसार, मुथन्ना ने इस फोटो के बारे में बात करते हुए कहा, “मैंने अभी तक तस्वीर नहीं देखी है। हम अपनी जीविका के लिए कृषि पर निर्भर हैं। मैं हर रोज अपने खेतों में जाता हूं। 30 साल पहले हमारी बीड़ी की एक इकाई थी और मैं साइकल से ही वहाँ जाता था। मैं पास में ही एक डेयरी में दूध के लिए जाता हूँ। यह सब मेरी दिनचर्या में शामिल है।” मुथन्ना के इस बयान से पता चलता है कि बेटे के विधायक बनने के बाद भी उनकी लाइफस्टाइल में कोई बदलाव नहीं आया है और वे अभी भी पहले की तरह ही जीवन जी रहे हैं।

टाइम्स नेटवर्क की रिपोर्ट के अनुसार, विधायक हरीश पूंजा ने भी अपने पिता के इस लाइफस्टाइल को स्वीकारते हुए कहा कि ये ख़बर सच है। विधायक पूंजा ने अपने पिता की वायरल तस्वीर पर बात करते हुए कहा, “हम एक ग़रीब परिवार से ताल्लुक रखते हैं और मेरे पिता किसान हैं। मेरे विधायक बन जाने के बाद भी उनकी जिंदगी में कोई बदलाव नहीं आया है। उनकी जिंदगी कृषि और डेयरी फार्मिंग के चारों तरफ ही घूमती है। वह आम किसानों की तरह ही वह उठकर डेयरी में दूध का काम करते हैं और फिर खेत में जाकर काम भी करते हैं।

आज के दौर में जब विधायक, सांसद और मंत्री बन जाने के बाद नेतागण महँगी गाड़ियों में घूमने लगते हैं और महँगे बंगलों में रहने लगते हैं, हरीश पूंजा का परिवार एक आदर्श प्रस्तुत करता है। करोड़पति नेताओं के इस दौर में विधायक बनने के बाद भी अगर उनके परिवार ने कृषि व दूध का काम नहीं छोड़ा है, यह सराहनीय बात है।

जब तक दीदी जिंदा है, हम तुम्हें यहाँ घुसने नहीं देंगे: बंगाल BJP अध्यक्ष पर तृणमूल गुंडों का हमला

पश्चिम बंगाल में चुनावी हिंसा की वारदातें थमती नज़र नहीं आ रही हैं। तृणमूल के गुंडों द्वारा लगातार विपक्षी पार्टियों, ख़ासकर भाजपा नेताओं को निशाना बनाया जा रहा है। कभी पोलिंग बूथ पर ग्रेनेड फेंकना तो कभी भाजपा कार्यकर्ता को जान से मार देना, लगातार कई हिंसक वारदातों में तृणमूल के गुंडों के नाम आते रहे हैं। अब पश्चिम बंगाल के मिदनापुर संसदीय क्षेत्र के गोपालपुर से हिंसा की ख़बरें आई हैं। यहाँ भाजपा प्रदेश अध्यक्ष दिलीप घोष के काफ़िले पर ही हमला कर दिया गया। वहाँ दिलीप घोष के ख़िलाफ़ विरोध प्रदर्शन चल रहा था। तभी अचानक से उनके काफ़िले पर हमला कर दिया गया और उन्हें खदेड़ा जाने लगा। सूचना मिलने पर पुलिस को बुलाया गया, जिसे भीड़ को काबू करने के लिए काफ़ी मशक्कत करनी पड़ी।

तृणमूल कॉन्ग्रेस कार्यकर्ताओं ने भाजपा के प्रदेश अध्यक्ष दिलीप घोष पर गाली देने का आरोप लगाया। तृणमूल कार्यकर्ताओं ने कहा कि घोष ने उनके तेल निकालने की बात कही है। आक्रोशित तृणमूल कार्यकर्ताओं ने दिलीप घोष के प्रति नाराज़गी जताते हुए कहा, “जब तक ममता बनर्जी जिंदा है हम दिलीप घोष को यहाँ नहीं घुसने देंगे।” बेलगाम तृणमूल कॉन्ग्रेस कार्यकर्ताओं ने घोष के काफ़िले पर पत्थरबाज़ी भी की और गाड़ियों को नुकसान पहुँचाया। इससे आम राहगीरों को भी अच्छी-ख़ासी परेशानी हुई और कई किलोमीटर लम्बा जाम लग गया। बाद में पुलिस व अन्य लोगों के प्रयासों के बाद घोष के काफ़िले को किसी तरह वहाँ से निकाला जा सका।

बता दें कि मिदनापुर संसदीय सीट पश्चिम बंगाल की 42 लोकसभा सीटों में से एक महत्वपूर्ण संसदीय सीट है। यह संसदीय क्षेत्र 1951 में ही अस्तित्व में आया था। मिदनापुर शहर मेदिनीपुर पश्चिम का मुख्यालय भी है। यह कांग्सताबती नदी के किनारे है। यह संसदीय क्षेत्र सीपीएम के कद्दावार नेता इंद्रजीत गुप्ता की कर्मस्थली रहा है। चुनाव प्रचार अभियान के शुरुआती दौर में ही पीएम मोदी ने रैली कर यहाँ का चुनावी माहौल गर्मा दिया था। मिदनापुर से दिलीप घोष की प्रतिष्ठा दाँव पर है। भाजपा के बढ़ते प्रभाव के कारण तृणमूल खेमा बौखलाया हुआ है और इसीलिए भाजपा नेताओं को लगातार निशाना बनाया जा रहा है।

आज छठे चरण के चुनाव के तहत 3 बजे तक मिदनापुर में 69% वोटिंग की ख़बर आई है। दिलीप घोष ने कहा कि अभी चुनाव शुरू भी नहीं हुए थे, तभी से तृणमूल के गुंडों ने भाजपा कार्यकर्ताओं को डराना-धमकाना शुरू कर दिया था। घोष ने ममता सरकार समर्थित गुंडों के बारे में बात करते हुए आगे कहा, “हमारे लोगों को डराया जा रहा है। राज्य पुलिस ने हमारे कुछ लोगों को गिरफ़्तार किया है। हमारे कार्यकर्ताओं को हर तरह से प्रताड़ित किया जा रहा है। मतदान के दिन हमारे कार्यकर्ताओं को गोली लगने की खबर है। सुबह से ही डर का वातावरण बनाया जा रहा है।” दिलीप घोष ने कहा कि तृणमूल कॉन्ग्रेस हार के डर से हिंसक वारदातों में बढ़ोतरी करते जा रही है।

राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ में लम्बे समय तक सक्रिय रहे दिलीप घोष ने कहा कि बंगाल में सत्ताधारी दल और पुलिस साथ मिलकार काम कर रही है। उन्होंने कहा कि हमारे कार्यकर्ता तनाव से निपटने के लिए पूरी तरह तैयार हैं। घोष ने 2016 में खड़गपुर सदर विधानसभा क्षेत्र से जीत दर्ज की थी।

यूपी और महाराष्ट्र में घटेगी NDA की सीटें: PM मोदी के मंत्री की भविष्यवाणी

23 मई को चुनाव के परिणामों की घोषणा होगी, मगर उससे पहले ही सभी पार्टियाँ अपनी-अपनी जीत को लेकर दावा कर रही हैं। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और बीजेपी के राष्ट्रीय अध्यक्ष अमित शाह भी लगातार दावा कर रहे हैं कि एनडीए 2014 के चुनाव की अपेक्षा 2019 में ज्यादा सीटों के साथ सत्ता में आएगी। मगर इसी बीच केन्द्रीय मंत्री रामदास अठावले ने यूपी और महाराष्ट्र में एनडीए के सीट की संख्या कम होने की बात कह दी, लेकिन साथ ही उन्होंने केंद्र में एनडीए की सरकार बनने का भी दावा किया।

बता दें कि, रामदास अठावले एनडीए के सहयोगी पार्टी रिपब्लिकन पार्टी ऑफ इंडिया के अध्यक्ष और मोदी कैबिनेट में केंद्रीय सामाजिक न्याय मंत्री हैं। अठावले एनडीए में बड़ा दलित चेहरा माने जाते हैं। उनका कहना है कि भाजपा इस बार कम से कम से कम 260 लोकसभा सीटें जीतेगी। महाराष्ट्र में भाजपा और शिवसेना के गठबंधन को 37 से 38 सीटें मिलेंगी, जबकि 2014 में उन्हें 42 सीटें मिली थीं। अठावले ने ओडिशा, पश्चिम बंगाल और दक्षिण भारत में भाजपा को अच्छी सीटें मिलने की संभावना जताई है और साथ ही कहा कि इस बार राजग को 330 से 325 सीटें मिलेंगी। हालाँकि रामदास ने एनडीए को पिछले साल की तुलना में कम सीटें मिलने की बात जरूर कही है, लेकिन उन्होंने नरेंद्र मोदी के फिर से प्रधानमंत्री पर भी विश्वास जताया है। इतना ही नहीं, उन्होंने तो एक बार फिर से खुद के मंत्री बनने की भविष्यवाणी भी कर दी।

गौरतलब है कि, पिछले महीने 14 अप्रैल को भी अठावले कुछ इसी तरह की भविष्यवाणी करते हुए कहा था कि लोकसभा चुनाव में एनडीए 350 से ज्यादा सीटें जीतेगा। उन्होंने कहा था कि उत्तर प्रदेश में बीजेपी 65 से ज्यादा सीटें जीतेंगी क्योंकि यूपी के महागठबंधन में समाजवादी पार्टी (एसपी) और बहुजन समाज पार्टी (बीएसपी) के साथ कॉन्ग्रेस पार्टी नहीं है। इससे वोट बँट जाएँगे और इसका फायदा भाजपा को होगा। इसके साथ ही उन्होंने एनडीए के केंद्र में दोबारा वापस आने पर नागरिकता विधेयक में बदलाव करने के बारे में पीएम मोदी से बात करने की भी बात कही थी।

गौ तस्करी में आरिफ़, क़ासिम और यासीन गिरफ़्तार, लंबे समय से थे फ़रार

नोएडा पुलिस ने तीन गौ तस्करों को गिरफ़्तार किया है। इन तीनों पर 25-25 हज़ार की इनामी राशि घोषित की गई थी। गौ तस्करों की गिरफ़्तारी को नोएडा पुलिस की एक बड़ी कामयाबी के तौर पर देखा जा रहा है। ख़बर के अनुसार, ये तीनों गौ तस्कर लंबे समय से फ़रार थे। इनकी पहचान आरिफ़, क़ासिम और यासीन के रूप में हुई है।

पुलिस अधिकारी के अनुसार, नोएडा थाना सेक्टर-20 की पुलिस और स्वाट-1 व स्वाट-2 की संयुक्त टीमों ने नोएडा सेक्टर-8 की रेड लाइट से इन तीनों की गिरफ़्तारी की। इनके पास से 10 ज़िंदा कारतूस समेत तीन तमंचे भी बरामद किए। बता दें कि गिरफ़्तार किए गए इन तीनों तस्करों पर खुर्जा, बुलंदशहर और अलीगढ़ में 50 से अधिक मुकदमें दर्ज हैं। इसी वजह से इन तीनों पर 25-25 हज़ार की इनामी राशि घोषित की गई थी। इन तीनों का काम गौ वंश की तस्करी करना था।

इन तीनों तस्करों के बारे में कहा जाता है कि ये बहुत शातिर हैं, ये लोग कई वर्षों से गौ तस्करी से जुड़े हुए थे। इनके ऊपर गौ हत्या के भी मामले दर्ज हैं। अक्सर ये तीनों पुलिस की आँखों में धूल झोंक कर भाग जाते थे। ये तीनों कुख़्यात तस्कर खुर्जा, बुलंदशहर और अलीगढ़ में गौ तस्करी का काम काफ़ी लंबे समय से करते आ रहे थे।

इससे पहले भी गौ तस्करी के कई मामले सामने आ चुके हैं। कई जगहों पर ये गौ तस्कर इतने हिंसक हो जाते हैं कि पुलिस पर वार करने तक से नहीं चूकते, उन पर गोलीबारी की भी घटनाएँ सामने आ चुकी हैं।

ऑस्ट्रेलिया में नहीं है EVM जैसी अच्छी प्रणाली: ऑस्ट्रेलियाई राजनयिक ने माना EC का लोहा

विपक्षी दलों द्वारा लगातार ईवीएम को लेकर ग़लतफ़हमियां फैलाई गई हैं, जिसे चुनाव आयोग भी कई बार नकार चुका है। अब ऑस्ट्रेलिया के राजनयिक ने भी ईवीएम को लेकर बयान दिया है और बैलेट पेपर से इसकी तुलना करते हुए इसे बेहतर बताया है। ऑस्ट्रेलियाई राजनयिक ने भारत में ईवीएम से चुनाव मतदान कराने की प्रक्रिया को जानने और परखने के अनुभव को प्रेरणादायी बताया। राजनयिक हरिंदर सिद्धू ने कहा कि भारत की विशाल जनसँख्या को देखते हुए यहाँ बैलेट पेपर से मतदान कराना एक दुष्कर कार्य हो सकता है। इससे विपक्षी दलों के उन नेताओं को झटका लगना तय है, जो लगातार यह कहते हैं कि विदेशी राष्ट्र ईवीएम की व्यवस्था पर यकीं नहीं करते और बैलेट पेपर से मतदान को बेहतर मानते हैं। ऑस्ट्रेलियाई राजनयिक ने खुल कर ईवीएम का समर्थन किया।

हरिंदर सिद्धू ने ईवीएम से मतदान की व्यवस्था की प्रशंसा करते हुए कहा, “भारत में ईवीएम आधारित मतदान की अच्‍छी प्रणाली है। यह पूरी तरह से व्‍यवस्थित है। चुनाव आयोग और उनके कर्मचारियों ने लोकसभा चुनाव 2019 को कुशलतापूर्वक संपन्‍न कराकर सराहनीय काम किया है। ऑस्‍ट्रेलिया में ये सुविधा उपलब्‍ध नहीं है।” सिद्धू ने ईवीएम की तारीफ़ करते हुए इससे वीवीपैट प्रणाली को जोड़े जाने को एक अच्छी पहल बताया। वहीं बैलेट पेपर की बात करते हुए उन्होंने कहा कि कोई भी चुनाव प्रणाली पूरी तरह से दोषमुक्त नहीं है, सबमें कुछ न कुछ त्रुटियाँ हैं। सिद्धू ने कहा कि भारत ने वीवीपैट के विकास का कार्य कर सराहनीय कार्य किया है, जिससे गड़बड़ियों से बचा जा सकेगा।

बता दें कि भारत में विपक्षी दलों के नेताओं ने ईवीएम की व्यवस्था हटाने को लेकर चुनाव आयोग से लेकर अदालत तक के दरवाज़े खटखटाए थे। हाल ही में उन्होंने ईवीएम व वीवीपैट की 50% पर्चियों का मिलान करने की माँग की थी, जिसे सुप्रीम कोर्ट ने खारिज कर दिया था। चुनाव आयोग लगातार कहता आ रहा है कि ईवीएम को हैक नहीं किया जा सकता और मामूली गड़बड़ियों को हैकिंग कहना सही नहीं है। विपक्षी नेताओं का आरोप है कि भाजपा ईवीएम में गड़बड़ियाँ कर चुनाव जीतती है। कभी-कभार ब्लूटूथ और वाई-फाई से भी ईवीएम को हैक करने की ख़बरें फैलाई जाती रही हैं।

नेशनल कॉन्फ्रेंस के नेता और जम्मू कश्मीर के पूर्व मुख्यमंत्री उमर अब्दुल्ला ने तो यहाँ तक कहा था कि पूँछ इलाके में ईवीएम में कॉन्ग्रेस का बटन ही नहीं कार्य कर रहा है। ऑस्ट्रेलियाई राजनयिक ने न सिर्फ़ ईवीएम की तारीफ़ की बल्कि इतने बृहद स्तर पर इतने संगठित व अच्छे तरीके से चुनाव आयोजित कराने के लिए भारतीय चुनाव आयोग की भी प्रशंसा की। एक अनुभवी विदेशी राजनयिक द्वारा इस तरह से भारतीय मतदान प्रणाली की प्रशंसा करना बताता है कि चुनाव आयोग सही तरीके से कार्य कर रहा है।

सिंगापुर में जन्मीं हरिंदर सिद्धू पिछले 3 वर्षों से भारत में ऑस्ट्रेलिया की राजदूत के रूप में कार्य कर रही हैं। वह बॉलीवुड फिल्मों की फैन हैं और उन्हें भारत के इतिहास व संस्कृति में अच्छी रूचि है। हिंदी और पंजाबी भाषा बोलने में सक्षम सिद्धू के माता-पिता बचपन में ही ऑस्ट्रेलिया चले गए थे। उन्होंने यूनिवर्सिटी ऑफ सिडनी से लॉ एवं इकोनॉमिक्स की डिग्री हासिल की है।

कॉन्ग्रेस कार्यकर्ताओं और मंत्री के बीच झड़प, मारपीट के बाद BJP नेता अस्पताल में भर्ती

हरियाणा में छठे चरण के मतदान के दौरान कॉन्ग्रेस कार्यकर्ताओं ने हंगामा खड़ा किया। राज्य के सहकारिता मंत्री और भाजपा नेता मनीष ग्रोवर ने बताया कि वो अपने कार्यालय में बैठे हुए थे, तभी उन्हें सूचना मिली कि विश्वकर्मा स्कूल के सामने बूथ संख्या 143-144 पर कॉन्ग्रेस नेता भारत भूषण बतरा, जोजो व अन्य 20 लोग घुसे हुए थे। ग्रोवर के अनुसार, जब उन्होंने वहाँ जाकर उनको रोका तो झड़प हो गई। ग्रोवर ने कहा कि उनके प्रयासों के बाद कॉन्ग्रेस नेताओं को बाहर निकाला जा सका। वहीं दूसरी तरफ़ मतदान केंद्र पर मंत्री ग्रोवर के पहुँचते ही पूर्व विधायक बतरा ने उन्हें वहाँ से जाने को कहा और पूछा कि आप यहाँ क्या कर रहे हैं? ग्रोवर द्वारा कड़ाई से जवाब देने के बाद दोनों में झड़प हो गई और माहौल तनावपूर्ण बन गया।

कॉन्ग्रेस नेता दीपेंद्र हुड्डा ने रोहतक में मनीष ग्रोवर पर बूथ कैंचरिंग के आरोप लगाए हैं। मंत्री ने इसे हताशा में लगाया गया आरोप करार दिया। अधिकारी यश गर्ग को एक ज्ञापन देकर हुड्डा ने ग्रोवर पर बूथों पर जाकर गड़बड़ियाँ करने का आरोप मढ़ा। दीपेंद्र हुड्डा ने कहा, “मंत्री मनीष ग्रोवर एक बाहुबली के साथ बिनी किसी अनुमति के बूथ पर जा रहे हैं और वहाँ मतदाताओं को धमका रहे हैं। रोहतक में सरासर लोकतंत्र की हत्या हो रही है।” हुड्डा ने उक्त बाहुबली पर अपने समर्थकों को जान से मारने की धमकी देने का भी आरोप लगाया। हुड्डा ने अदालत जाने की भी धमकी दी है।

दीपेंद्र हुड्डा रोहतक से चौथी बार लोकसभा चुनाव लड़ रहे हैं। इससे पहले उन्होंने 2005, 09 और 14 में यहाँ से जीत दर्ज की थी। हुड्डा परिवार का पारम्परिक गढ़ माने जाने वाले रोहतक से उनके पिता भूपेंद्र सिंह हुड्डा 4 बार सांसद रह चुके हैं। इस सीट से प्रथम लोकसभा चुनाव जीतने वाले रणबीर सिंह हुड्डा दीपेंद्र के दादा थे। गढ़ बचाने की चुनौती का सामना कर रहे हुड्डा परिवार के लिए कॉन्ग्रेस महासचिव प्रियंका गाँधी वाड्रा ने भी रोड शो किया।यहाँ उनकी टक्कर भाजपा के अरविन्द शर्मा से है, जो चुनाव से पहले कॉन्ग्रेस छोड़ भाजपा में शामिल हुए हैं।

हुड्डा के इन आरोपों के बाद भारी संख्या में पुलिस बन तैनात किए गए और डीसी ऑफिस को भी छावनी में तब्दील कर दिया गया। वहीं फतेहाबाद में बूथ नंबर 79 पर भाजपा और कॉन्ग्रेस कार्यकर्ताओं में लड़ाई हुई। भाजपा के जिला उपाध्यक्ष हरमेश शर्मा और वार्ड नंबर 2 के कांग्रेसी पार्षद नरेश शर्मा बूथ के अंदर आपस में भिड़ गए। दोनों को ही इस झड़प के बाद चोटें आईं। भाजपा जिला उपाध्यक्ष को सरकारी अस्पताल में भर्ती कराया गया है। उनका आरोप है कि कॉन्ग्रेस नेता वोटरों को मतदान केंद्र पर बरगला कर वोट डलवा रहे थे, जब उन्होंने रोका तो उनके साथ मारपीट की गई। उन्होंने कॉन्ग्रेस पार्षद नरेश शर्मा पर हमला करने का आरोप लगाया।

हरियाणा में दोपहर एक बजे तक 37 प्रतिशत के आसपास वोटिंग हुई है। भले ही यह लोकसभा चुनाव हो लेकिन इसे मुख्यमंत्री मनोहर लाल खट्टर के पिछले साढ़े चार सालों के परफॉरमेंस की परीक्षा माना जा रहा है। जहाँ कॉन्ग्रेस पूर्व मुख्यमंत्री हुड्डा के बल पर चुनाव में उत्तरी है, भाजपा ने मोदी-खट्टर सरकारों के अच्छे परफॉरमेंस को मुद्दा बनाया है।

जब नर्स ही बन जाए हत्यारा: 300 मरीज़ों को मौत के घाट उतारने वाला शख़्स

जर्मनी में डेलमेनहॉर्स्ट अस्पताल के आईसीयू में नील्स होगेल नामक एक नर्स रेफरेंस लेटर के साथ पहुँचा। इस पत्र में उसकी ‘कर्तव्यनिष्ठा’ से संबंधित ब्यौरा दर्ज था। वह पहले ओल्डेनबर्ग के अस्पताल में काम करता था। ओल्डेनबर्ग के अधिकारियों द्वारा पत्र में ऐसा कोई संकेत नहीं दिया गया था कि नर्स, नील्स होगेल की ड्यूटी के दौरान अस्पताल में कितने मरीज़ों की मौत हुई थी।

इसके अलावा इस बात का भी उल्लेख नहीं था कि जब वो वहाँ कार्यरत था, तो अधिकारियों ने उसे रोगियों से सम्पर्क करने तक से रोक दिया था। काफ़ी समय बाद इस बात पर ग़ौर किया गया कि होगेल की देखरेख में चार महीनों के भीतर, एक मरीज़, ब्रिजिट ए की मृत्यु हो गई। इसके बाद हान्स एस, क्रिस्टोफ के और जोसेफ जेड की भी मृत्यु हो गई। जर्मनी के इतिहास में 42 साल के होगेल की पहचान आज सीरियल किलर के रूप में दर्ज़ हो गई है। अधिकारियों को संदेह है कि 2000 के बाद के वर्षों में क़रीब 300 मरीज़ उसके हाथों मौत के घाट उतारे जा चुके हैं।

बहरहाल, अधिकारियों को इस बात की पुष्टि करने के लिए लगभग एक दशक से अधिक समय लगा। होगेल ने 43 लोगों की हत्या करने की बात तो स्वीकार कर ली है, साथ ही अन्य 52 लोगों को मारने से भी इनकार नहीं किया। लेकिन, अन्य पाँच लोगों को मारने से इनकार किया है।

क्रिश्चियन मारबैक (जिनके दादा होगेल के शिकार थे) ने कहा, “अगर यह संभव है कि जर्मनी में 15 वर्षों में 300 से अधिक मौतों का राज़ कालीन के नीचे दफ़्न है, तो और क्या संभव होना बाक़ी है?”

फ्रैंक लाक्सटरमैन, जिन्होंने होगेल के साथ काम किया है उनका कहा कि होगेल ने दो रोगियों की हत्या करने के अलावा और चार अन्य की भी हत्याएँ की थी। 2006 के बाद से उनका यह तीसरा परीक्षण था। इस बार, उनके ऊपर 100 अन्य मरीज़ों की हत्या का आरोप है।

न्यायाधीश ने होगेल के पूर्व सहयोगियों में से आठ की भी जाँच करने का आदेश दिया है क्योंकि इसका संदेह है कि उन्होंने अदालत में झूठ बोला था। अस्पताल के अधिकारियों द्वारा स्पष्ट लापरवाही के ख़ुलासे से पहले ही अन्य आपराधिक जाँच शुरू हो चुकी है। डेलमेनहॉर्स्ट अस्पताल के दो डॉक्टरों और दो हेड नर्सों पर हत्या का आरोप लगाया गया था। जून में उनके मामले में फैसला आने के बाद वो शायद होगेल के मुकदमे में अपनी गवाही दे सकते हैं।