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केजरीवाल के दावे के 7 घंटे के भीतर AAP विधायक BJP में शामिल

आम आदमी पार्टी जो आए दिन विवादों में घिरी रहती है। अभी हाल ही में यह ख़बर  सामने आई थी कि आप पार्टी अध्यक्ष अरविंद केजरीवाल की पिटाई हुई थी, जिसके बाद वो अब तक शांत थे। लेकिन उन्होंने अपनी चुप्पी तोड़ते हुए ट्विटर पर अपनी उपस्थिति दर्ज कराई। उन्होंने ट्वीट किया कि हंस राज हंस आरक्षित सीट से चुनाव लड़ने के लिए अयोग्य हैं। उन्हें अंत में अयोग्य घोषित किया जाएगा। उन्होंने उत्तर-पश्चिम दिल्ली के मतदाताओं उन्हें वोट ना देने की अपील भी की।

आज सुबह, केंद्रीय मंत्री और भाजपा नेता विजय गोयल ने केजरीवाल पर कटाक्ष करने का फैसला किया और उन्होंने यह दावा किया कि AAP के 14 विधायक भाजपा के संपर्क में हैं जो भाजपा में शामिल होने के इच्छुक हैं।

दरअसल, विजय गोयल दिल्ली के उपमुख्यमंत्री मनीष सिसोदिया के उन आरोपों का जवाब दे रहे थे जिसमें यह कहा गया कि बीजेपी AAP के सात विधायकों को 10 करोड़ रुपए का भुगतान करके उन्हें रिश्वत देने की कोशिश में है। गोयल ने जवाब दिया था कि यह संख्या सात नहीं बल्कि 14 है, जो भाजपा के साथ सम्पर्क बनाए हुए हैं। भाजपा में सामिल होने के इच्छुक ये सभी विधायक केजरीवाल की तानाशाही कार्यशैली से पूरी तरह से ‘नाख़ुश’ थे।

इसके बाद केजरीवाल ने ट्वीट किया कि बीजेपी ने AAP विधायकों को पहले भी रिश्वत देने की कोशिश की है, लेकिन उनमें से किसी ने भी इसे हाथ नहीं लगाया। AAP वालों को ख़रीदना आसान नहीं।

केजरीवाल के इस ट्वीट से अंदाज़ा लगाया जा सकता है कि उन्हें अपने विधायकों पर बेशुमार गर्व था, जिसे लगभग सात घंटे बाद ही उनके विधायक अनिल वाजपेयी ने तोड़ दिया।

इस मुद्दे पर सोशल मीडिया पर केजरीवाल की काफ़ी फ़ज़ीहत हो गई, जिसमें लोगों ने अपने ट्वीट के ज़रिए AAP पार्टी अध्यक्ष अरविंद केजरीवाल की जमकर खिंचाई की।

यूज़र्स ने तो यह तक अनुमान लगाया कि कहीं ये 10 विधायक वे तो नहीं, जिन्होंने केजरीवाल के साथ कथित तौर पर मारपीट की थी।

एक अन्य ट्विटर यूज़र ने लिखा कि केजरीवाल जी भाजपा के गूगन सिंह को उत्तर पश्चिम से उम्मीदवार बनाने के लिए आपने खरीदा था क्या। विधान सभा में स्पीकर रामनिवास गोयल, फतेह सिंह, भावना गौड़, नरेश बाल्यान को क्या खरीद कर आपने अपनी पार्टी से लड़वाया था? राजनीति का स्तर मत गिराओ।

इसके अलावा, विजय गोयल ने केजरीवाल पर निशाना साधा और उनसे कहा कि ‘विधायकों’ को ख़रीदने का आरोप लगाकर राजनीतिक प्रवचन देना बंद करें।

राजस्थान के बाद अब मध्यप्रदेश में ‘NYAY’ योजना के फ़र्ज़ी फॉर्म बँटवा रही कॉन्ग्रेस

कुछ दिनों पहले ही राजस्थान में कॉन्ग्रेस के द्वारा नकली न्याय फॉर्म बाँटने के बाद अब मध्यप्रदेश के बुरहानपुर में एक कॉन्ग्रेसी नेता के द्वारा गरीबी रेखा से नीचे के मतदाताओं की महत्त्वपूर्ण जानकारी एकत्रित करते हुए पाया गया है। बता दें कि ये मामला खंडवा संसदीय क्षेत्र का है। कॉन्ग्रेस कार्यकर्ता लोकसभा चुनाव के कार्यक्रमों में न्याय योजना का फर्जी फॉर्म बाँट रहे हैं, जिसमें गरीबों को ₹72,000 प्रति वर्ष उनके खाते में दिए जाने का आश्वासन दिया गया है। इस फॉर्म के बाएँ कोने पर कॉन्ग्रेस अध्यक्ष राहुल गाँधी की तस्वीर है तो दाईं तरफ मध्य प्रदेश के खंडवा निर्वाचन क्षेत्र के लिए कॉन्ग्रेस के लोकसभा उम्मीदवार अरुण यादव की फोटो है।

बता दें कि, कॉन्ग्रेस कार्यकर्ता इस फॉर्म को बाँटते वक्त लोगों को बकायदा ये भी बता रहे हैं कि किस सूची में कौन सी जानकारी भरनी है। इस फॉर्म में गरीबी रेखा से नीचे रहने वाले लोगों से महत्त्वपूर्ण जानकारियाँ जैसे नाम, पिता का नाम, बैंक का नाम, बैंक खाता और आधार नंबर आदि भरवाया जा रहा है और इसके महत्त्व को बढ़ाने के लिए इस पर अँगूठे का निशान भी लिया जा रहा है। फॉर्म भरवाने के बाद फॉर्म का एक हिस्सा कॉन्ग्रेस कार्यकर्ता अपने पास रखते हैं और दूसरा हिस्सा फॉर्म भरने वाले व्यक्ति को दे रहे हैं। कॉन्ग्रेस नकली फॉर्म का वितरण करके न केवल निर्दोष लोगों को गुमराह कर रही है, बल्कि इससे लोगों की महत्त्वपूर्ण जानकारी की सुरक्षा को भी खतरा है।

कॉन्ग्रेस अध्यक्ष राहुल गाँधी ने अपने चुनावी वादे के रुप में घोषणा की थी कि अगर कॉन्ग्रेस केंद्र में सरकार बनाती है, तो वे गरीबी दूर करने के लिए न्याय योजना को लागू करेंगे। उन्होंने कहा था कि इसके तहत 5 करोड़ परिवार या 25 करोड़ लोगों को इस योजना से फायदा मिलेगा। हालाँकि, यह योजना अभी तक स्पष्ट नहीं हैं कि आखिर राहुल गाँधी इस योजना की धनराशि कहाँ से लाएँगे। कई वरिष्ठ अर्थशास्त्रियों ने इस योजना के व्यवहारिक रूप पर भी सवाल उठाए थे।

गौरतलब है कि पिछले सप्ताह यानी चुनाव के चौथे चरण के ठीक दो दिन पहले कॉन्ग्रेसी नेता राखी गौतम के  द्वारा राजस्थान के कोटा में न्याय योजना के नकली फॉर्मों को बाँटा गया था और बाद में मिली जानकारी में पता चला कि कॉन्ग्रेस अध्यक्ष राहुल गाँधी भी इन फर्जी फॉर्मों के वितरण की खबर से भलीभाँति परिचित थे।

पिछले साल दक्षिण कोटा से 2018 का विधानसभा का चुनाव लड़ने वाली कॉन्ग्रेसी नेता राखी गौतम ने रैली की कुछ तस्वीरें पोस्ट की थीं, जिसमें साफ तौर पर मंच पर मौजूद राहुल गाँधी और सचिन पायलट को न्याय की फर्जी फॉर्म दिखाते हुए देखा गया। राजस्थान और मध्यप्रदेश, जहाँ पर नकली न्याय के फॉर्म का वितरण किया गया, दोनों ही कॉन्ग्रेस शासित राज्य हैं।

UN ने पुलवामा हमले के बाद ही शुरू की मसूद अजहर को ग्लोबल आतंकवादी घोषित करने की पहल: MediaReports

मसूद अजहर को वैश्विक स्तर पर आतंकवादी घोषित किए जाने के बाद देशभर में विपक्ष ने तमाम दलीलें देने की कोशिश की हैं। कॉन्ग्रेस ने तो इस घटना के समय पर भी आपत्ति जता दी है। इसी बीच कॉन्ग्रेस के सोशल मीडिया अधिकारियों द्वारा यह भी दावा किया जा रहा था कि मसूद अजहर को वैश्विक आतंकवादी घोषित करने में मोदी सरकार का कोई योगदान नहीं था बल्कि यह प्रक्रिया UPA के दौरान ही शुरू की गई थी।

वहीं सूत्रों के अनुसार खुलासे में बताया जा रहा है कि मसूद अजहर को वैश्विक आतंकवादी घोषित किए जाने की प्रक्रिया पुलवामा आतंकी हमले के बाद ही शुरू की गईं थीं। मीडिया रिपोर्ट्स का कहना है कि संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद् द्वारा पुलवामा आतंकी हमले के बाद सख्त रवैया अपनाया गया और तमाम साक्ष्य और सुबूतों के आधार पर ही उन्होंने यह फैसला लिया है।

संयुक्त राष्ट्र द्वारा मसूद अजहर को वैश्विक आतंकवादियों की सूची में डालने के तुरंत बाद प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने कॉन्ग्रेस की अगुआई वाली पूर्ववर्ती UPA सरकार के ढुलमुल रवैये पर कई बार कटाक्ष भी किए हैं।

बताया जा रहा है कि अमेरिका मसूद अजहर को आतंकवादी घोषित करने के मुद्दे के तत्काल समाधान पर जोर दे रहा था, इस कारण चीन की अमेरिका से सीधे टकराव की स्थिति बन गई थी। चीन का समर्थन न मिलने की वजह से कई बार संयुक्त राष्ट्र में यह प्रस्ताव ख़ारिज़ हो चुका था। जबकि, फ़्रांस, अमरीका और ब्रिटेन जैसे देश इस प्रस्ताव के पक्ष में थे। सदस्य देशों के आपत्ति दर्ज कराने के लिए तय प्रक्रियागत ‘यथास्थिति की अवधि’ पहली मई को समाप्त हो गई और निर्धारित अवधि में कोई आपत्ति दर्ज नहीं कराए जाने के कारण सुरक्षा परिषद (UNSC) की प्रतिबंध समिति ने मसूद अजहर को अंतरराष्ट्रीय आतंकवादियों की सूची में डाल दिया।

यह दुनिया और भारत के लिए एक अच्छी खबर है: फ्रांसीसी राजदूत जिगलर

मसूद अजहर को ग्लोबल टेररिस्ट घोषित करने पर फ्रांसीसी राजदूत अलेक्जेंडर जिगलर का कहना है, “यह दुनिया और भारत के लिए एक अच्छी खबर है। पहली बार दुनिया और संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद के सदस्य एक आम सहमति पर पहुँचे हैं। हमने यूरोपियन यूनियन कमिशन में भी मसूद अजहर की लिस्टिंग का प्रयास शुरू किया है, यह सफल होने को है।”

अलेक्जेंडर जिलगर ने आगे कहा, “मसूद अजहर पर प्रतिबंध का हमने 2001 और 2016 में समर्थन किया था। 2017 में इस प्रक्रिया को दोबारा शुरू किया। पुलवामा के बाद भी हमने कदम उठाए। संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद के अध्यक्ष ने बयान जारी किया कि इस हमले के साजिशकर्ता पर बैन लगना चाहिए।”

रवीश कुमार इतना ज्ञान क्यों बाँच रहे हैं? एंकर तो आप भी बना दिए गए हैं, मैनेज तो आप भी हो रहे हैं

जैसे-जैसे चुनावों के फ़ेज़ निकलते जा रहे हैं, रवीश कुमार जी के ‘मैं ही इकलौता सही पत्रकार हूँ’ होने का घमंड चरम की ओर पहुँचता जा रहा है। आज उन्होंने आज तक के एक एंकर निशान्त चतुर्वेदी को अपनी टाइपिंग स्पीड का शिकार बनाया है। उन्होंने आदतानुसार जो है नहीं, वो भी उसमें घसीट लाए क्योंकि वो रवीश कुमार हैं, और उनके भक्तों की संख्या आज भी लाखों में तो है ही।

हुआ यूँ कि राबड़ी देवी ने कुछ ट्वीट किया तो निशान्त चतुर्वेदी ने लिखा कि राबड़ी देवी तीन बार ट्विटर बोल कर दिखा दें। इस पर राबड़ी देवी ने ट्वीट कर बताया कि उन्होंने उनके जैसे पत्तलकारों से पसीना पोंछवाया है, और वो बिहार की मुख्यमंत्री रह चुकी हैं, वो भी लोकतांत्रिक तरीके से, कुल आठ साल।

ये मामला चतुर्वेदी और राबड़ी देवी के बीच का था। फिर रवीश कुमार आए और बताने लगे कि इस तरह की प्रतिक्रिया चतुर्वेदी जी को जाति के सामाजिक अहंकार और गोदी मीडिया के चापलूस होने से आता है। उसके बाद उन्होंने जो ज्ञानधारा बहाई है उससे बस यही लगता है कि रवीश जी को हर उस व्यक्ति का विरोध करना है, शब्दों की मदद से, जो उनके हिसाब की पत्रकारिता नहीं करता, उनके हिसाब की बातें सोशल मीडिया पर नहीं लिखता, उनके बताए आचरण नहीं करता।

आगे रवीश कुमार ने वही किया जिसमें उनको महारत हासिल है: जिसके परिवार के ऊपर, राबड़ी सहित, बिहार को सुव्यवस्थित तरीके से बर्बाद करने तक का अपराध चिपका हुआ है, उसे जाति, महिला और निचले तबके से होने को लेकर डिफ़ेंड करना जैसे कि विक्टिम पूरा बिहार नहीं, राबड़ी देवी हैं।

पहली बात जो रवीश कुमार को क्लियर कर लेना चाहिए वो यह है कि राबड़ी देवी कोई महिला नेता नहीं हैं। अगर लोकतांत्रिक तरीक़ों की बात हो रही है तो रवीश कुमार मोदी को सुप्रीम लीडर किस हिसाब से कह रहे थे, मुझे यह बता दें। मोदी भी निचली जाति से ऊपर आए, मेहनत की, दर-दर भटके और सत्ता की सीढ़ियाँ चढ़ें। लेकिन पानी पीकर मोदी को गरियाते हुए उन्हें ज्ञान नहीं हुआ।

खैर, राबड़ी देवी वंचित और पिछड़ी नहीं, बल्कि एक मुख्यमंत्री की पत्नी भी हैं, स्वयं मुख्यमंत्री भी रही हैं, तो उनके दबे-कुचले होने का तर्क तो वाहियात ही है। दूसरी बात, उस दौर के बिहार को याद करता हूँ तो लोकतंत्र की तस्वीरों में मतपेटियों को लेकर भागते गुंडे और विरोधियों के इलाके के मतपेटियों में इंक डालने से लेकर उन्हें आग के हवाले करने की तस्वीर याद आती है।

या तो रवीश जी की पैदाइश 2005 के बाद की है, या फिर वो कम से कम बीस साल कोमा में रहे होंगे और 2005 में ही जगे तो उन्हें वो दौर याद नहीं। जो नेता पूरा चुनाव मैनेज कर लेता था, लोगों तक विकास पहुँचने ही नहीं देता था, शिक्षा व्यवस्था को बर्बाद किया कि लोग सोच ही न सकें, उसे मैं दबा-कुचला मान कर चरण पूजूँ?

फिर रवीश मायावती, ममता को भी खींच लाए कि लोगों ने उनके रंग-रूप का भी मजाक उड़ाया है, उन्हे टार्गेट किया है। रंग-रूप का मजाक उड़ाने वाले विक्षिप्त लोग होते हैं। लेकिन मायावती और ममता के सत्ता में होकर कानून और भ्रष्टाचार में लिप्त होने के कारण उन्हें टार्गेट किया गया। वही तो काम है न आपका रवीश जी, सत्ता के खिलाफ खड़े रहना। या फिर सत्ता का मतलब बस मोदी है?

आप राबड़ी देवी को डिफ़ेंड कर रहे हैं? जिसमें इतनी हिम्मत है कि वो लिखती है कि उसने पत्रकारों से पसीने पोंछवाए हैं? कोई पूर्व मुख्यमंत्री जब पत्रकारों से पसीना पोंछवाने की बात करती है तो उसके पीछे किस तरह की सोच रही होगी? क्या यह सत्ता का नशा नहीं है? या फिर इसे आप इग्नोर कर देंगे क्योंकि वो उसके नाम से पता चलता है कि इतिहास के किसी मोड़ पर ऐसे नाम वाले लोग वंचित, पिछड़े और सताए हुए लोग थे।

इससे यह साबित नहीं होता कि राबड़ी देवी भी वहीं से थी। सत्ता का यही नशा, इसी तरह के सिस्टम में पत्रकार राजदेव रंजन की हत्या हो जाती है, ऐसी ही दंभ भरती महिला नेत्री के राज्य में एसिड से नहलाकर लोगों को मार दिया जाता है। और आप उसे महिला और निचली जाति का होने का बता कर डिफ़ेंड कर रहे हैं? दो पैसे का शर्म कर लीजिए महाराज!

निशान्त चतुर्वेदी ने न लिखा होता, तो मैं लिखता। मैंने तो विडियो भी बनाया था, जिसमें तेजस्वी अपराधी लालू का पुत्र होने के बावजूद खुद को शेर का बेटा बता कर दंभ भरा था। तो क्या यह मेरी किसी खास जाति से होने का अहंकार है या फिर मुझे अपनी परिस्थितियों को समझ कर बोलना ही नहीं चाहिए? किसी के पूरे परिवार ने अरबों के घोटाले किए, और पूरी स्कूली व्यवस्था बर्बाद कर दी, और कोई उसका उपहास करता है तो ये उसकी जाति से आप जोड़ देते हैं?

फिर से सुनिए, और गौर से सुनिए। राबड़ी देवी उच्च वर्ग से ताल्लुक़ रखती है। वो वंचित नहीं है। अगर वो वंचित है, तो मुझे भी वैसा ही वंचित होना है। राबड़ी देवी को घेरने का हक़, उसका मजाक उड़ाने का हक़ हर उस व्यक्ति का है जिसकी पूरी जिंदगी लालू और उसके परिवार के कारण मजाक बन गई है। बिहारी को गाली किसने बनाया? इसकी ज़िम्मेदारी भी क्या हम ही उठाते चलें?

ये एक बेहयाई है कि राबड़ी देवी को कोई किसी भी बात पर डिफ़ेंड करने के लिए उसे पीड़िता की तरह बता रहा है। राबड़ी देवी ने शोषण किया है, लालू यादव ने शोषण किया है, इन दो मुख्यमंत्रियों ने बिहार को तबाह किया है इसलिए इनको पड़ने वाली गालियाँ और उपहास के शब्द इनके निकम्मेपन और भ्रष्टाचार पर हैं, न कि ये कैसी दिखती हैं, किस जाति से हैं।

इतने अरबों का घोटाला करने के बाद, पूरे पटना और बाहर में संपत्ति बनाने के बाद लालू या राबड़ी का अपनी जाति या उस जाति की वर्तमान स्थिति से कोई ताल्लुक़ नहीं रह जाता। ये लोग भारत के एक प्रतिशत वैसे लोगों में आते हैं जिनके पास भारत की आधी जनसंख्या के बराबर की संपत्ति होगी। इसलिए, राबड़ी देवी चाहे महिला हों, यादव जाति से हों, पिछड़े राज्य से हों, ये सारी बातें एक्सीडेंटल हैं, अब इन बातों का राबड़ी देवी से कोई वास्ता नहीं।

रवीश कुमार का दूसरे पत्रकारों को ज्ञान देना

रवीश जी ने निशान्त चतुर्वेदी के बारे में अपने लेख के अंतिम हिस्से में जो लिखा है उससे ज़्यादा बेकार बातें कोई कर भी नहीं सकता। रवीश जी लिखते हैं कि निशान्त चतुर्वेदी जैसे लोग एंकर बना दिए गए हैं। कमाल की बात यह है रवीश जी कि आपके हाथ में पूरी दुनिया के हर टीवी शो के एंकर बनाने की शक्ति नहीं है। आप ये तय नहीं करेंगे कि कौन क्या बना दिया गया है।

एंकर तो आप भी हैं जो हर रात चालीस मिनट अपने दर्शकों का समय बर्बाद करते हैं। आप को भी तो किसी ने एंकर बना ही दिया है, वरना आपको रिपोर्टिंग करनी थी तो करते रहते। आपके पास तो यह चुनाव करने का विकल्प रहा ही होगा, लेकिन आपने एंकर बनना चुना और विडंबना यह है कि आप रिपोर्टरों की होती कमी पर रोना रोते हैं और लोगों को कहते फिरते हैं टीवी मत देखिए।

आपने जो निशान्त चतुर्वेदी को सिर्फ टायटल में चतुर्वेदी होने से जज किया है, और उनकी परवरिश तक पहुँच गए, तो फिर उसी तरीके से कोई आपकी परवरिश तक भी पहुँच सकता है। ब्रजेश पांडे वाली बात किस परवरिश से आती है? आप तो संदेह छोड़िए, आशंका पर भी प्राइम टाइम कर के लोगों से इस्तीफा माँगते फिरते हैं, फिर नैतिकता का इतना बड़ा टोकरा लेकर घूमने वाले रवीश ने बिहार के सेक्स रैकेट कांड पर कितने मिनट बोला या लिखा?

आप कहते हैं कि एंकर मैनेज किए जा रहे हैं? ये कितनी अजीब बात है कि आपको यह कहना पड़ रहा है। ये बात तो हर व्यक्ति किसी भी संस्था को ज्वाइन करने से पहले जानता है कि उसे संस्था के मुताबिक़ चलना होगा। मैनेज तो आप भी हो रहे हैं वरना प्रणय रॉय की जगह सुभाष चंद्रा पर मनी लॉन्ड्रिंग के आरोप होते तो आपके गले की नस फट चुकी होती।

इसलिए, शब्दों का इस्तेमाल गलत कार्य के लिए मत कीजिए। किसी दिन उँगली जवाब दे देगी और गला सूख जाएगा। कई बार ऐसा होता है कि ज्ञान का इस्तेमाल गलत कार्य के लिए हो तो वह ज्ञान गायब हो जाता है। आपको कुंगफू आती है तो उसको सेल्फ़ डिफ़ेंस के लिए रखिए, राह चलते किसी को नानचाकू से मत पीटिए।

ज्ञानी व्यक्ति के शब्द दोधारी तलवार की तरह होते हैं। वो शब्दों के खेल से दोनों तरह की बातें, समय देख कर लिख सकता है। इसी ममता और मायावती को भ्रष्ट साबित करने के लिए आपके मैनेजमेंट से अगर फ़रमान आएगा, तो आपको तुरंत मायावती के पुतले, पार्क, घोटाले याद आने लगेंगे। तब आप तुरंत बताएँगे कि बंगाल के हर जिले में दंगे हो रहे हैं, चिट फ़ंड स्कैम के तार सीधे मुख्यमंत्री तक से जुड़े हुए हैं।

लेकिन, अभी वो समय नहीं है इसलिए आज आपको ये सारे पावरफुल लोग अचानक से सताए हुए, वंचित लोग नजर आने लगे हैं। इनको सब ने स्वीकारा है रवीश जी। इनको अगर कोई नकारात्मक तरीके से देखता है, उपहास करता है तो वो इन लोगों का विक्टिम हैं। पूरा राज्य ऐसे भ्रष्ट नेताओं का विक्टिम है, और अगर वंचित तबके, पिछड़ी जाति और भेदभाव के शिकार लिंग के लोग जनप्रतिनिधि बन कर पूरे राज्य को लूटते हैं, हत्याएँ करवाते हैं, तो फिर उन्हें इन विशेषणों के पीछे छुपने का कोई हक़ नहीं।

माओनंदन येचुरी जी, रामायण, महाभारत और जिहाद में अंतर है, सन्दर्भ समझिए

बीते कुछ सालों में हिंदू धर्म को ‘हिंसात्मक धर्म’ बताने की पुरजोर कोशिशें हुई हैं। एक निश्चित विचारधारा द्वारा इस समाज मे हिंदू धर्म के खिलाफ माहौल बनाने का भरसक प्रयास किया गया। उदाहरण के लिए आप साध्वी प्रज्ञा के पूरे मामले को तह तक पढ़ सकते है, जहाँ बिना आरोपों के सिद्ध हुए, सिर्फ़ भगवा धारण करने के कारण उन्हें ‘हिन्दू आतंकवाद’ का चेहरा करार दे दिया गया। सोशल मीडिया पर तो ये माहौल है कि जो कोई भी सामान्य रहते हुए हिंदू धर्म पर लिखने का प्रयास करता है उसे कट्टरता का चेहरा करार दे दिया जाता है। इसके अनेकों उदाहरण आपको आए दिन देखने को मिल जाएँगे।

खतरनाक बात तो ये हैं कि ऐसे माहौल को बनाने वालों में कोई ‘अनपढ़’ या ‘भटका’ गली का नौजवान ही नहीं बल्कि शिक्षित और राजनैतिक पार्टियों के दिग्गज नेता भी शामिल हैं। जिन्होंने अपनी विचारधारा को परोसने के लिए हिंदुओं को सिर्फ़ इसलिए निशाना बनाया है कि कहीं एक धर्म उनकी विचारधारा या मजहब पर हावी न हो जाए। सीपीआई के नेता सीताराम येचुरी ने सार्वजनिक तौर पर हिंदुओं को हिंसक साबित करने के लिए धर्म ग्रंथों का जिक्र किया। उन्होंने रामायण और महाभारत में हुए युद्धों का वर्णन करते हुए यह बताने का प्रयास किया कि हिंदु धर्म के प्रचारक इन दोनों महाकाव्यों का वर्णन करते हैं और फिर भी दावा करते हैं कि वो हिंसक नहीं हो सकते? ये कैसा तर्क है कि जब हिंदुओं का धर्म हिंसा से घिरा हुआ है तो हिंदू हिंसक कैसे नहीं हो सकते?

सीताराम येचुरी के इस बयान में केवल एक बात की संतुष्टि है कि कल तक इन महाकाव्यों के औचित्य पर सवाल उठाने वाले लोग अब ये मानते हैं कि वो हिंदुओं का धर्म ग्रंथ है। वरना सीताराम येचुरी के सवाल किसी भटके नौजवान के प्रश्नों से अधिक कुछ भी नहीं हैं। सोचिए रामायण और महाभारत में हुए युद्धों को आज के समय के साथ प्रासंगिक बनाकर पेश करना किस प्रकार से उचित हो सकता है। वो युद्ध थे, जिनमें भगवान ने असुरों का संहार करने के लिए धरती पर रूप लिया था। वो युद्ध थे जब स्वाभिमान की परिभाषाएँ तय हुई। समाज को बचाने के लिए धर्म की नीतियाँ निर्धारित हुई, उनका संदर्भ कलयुग में इस्तेमाल करना मानसिक रूप से बीमार होने से ज्यादा कुछ भी नहीं हैं।

धर्मनिरपेक्षता की आड़ में देश के बहुसंख्यकों पर हमला करना कौन से मानवाधिकारों के तहत आता है, ये बात मेरी समझ से बाहर हैं। मुझे हैरानी है कि एक ओर आप उस धर्म की आलोचना करते नहीं थक रहे हैं जिसने आपके नाम (सीताराम) तक को सांस्कृतिक रूप से परिभाषित किया है और दूसरी ओर उन मजहबों का कोई जिक्र भी नहीं है कि जिनके अस्तित्व की धरातल ही ‘व्यवहारिक’ हिंसा से पनपी। येचुरी जी, बतौर देश का नागरिक मुझे कोई आपत्ति नहीं हैं कि आप कौन-सी विचारधारा को प्रमोट करते हैं, लेकिन मुझे इस बात से दिक्कत है कि आप अपनी राजनीति खेलने के लिए, अपने वोटर्स बनाने के लिए हिंदू धर्म और हिंदू ग्रंथों का गलत प्रतिबिंब तैयार करें।

कम्युनिस्टों के नाम पर चीनी विचारधारा को संजोने वाले जब धर्म और ग्रंथों पर बात करते हैं तो जाहिर हैं उससे ज्यादा हास्यास्पद कुछ नहीं होता। चूँकि देश में विभिन्नताएँ धर्म के आधार पर भी देखने को मिलती हैं, ऐसे में सीताराम येचुरी इतना तो कर ही सकते हैं कि यदि वे किसी भी ग्रंथ के किसी हिस्से का संदर्भ दे रहें हैं तो वह पहले उसकी पृष्ठभूमि पर बात करें और उसका दूसरे मजहबों के साथ तुलनात्मक अध्य्यन करें।

याद करिए हिंदुओं में राजवंशी परंपरा के कारण कितनी लड़ाइयाँ आम मानस ने लड़ी है? आपने कभी सुना है क्या किसी हिंदू ने धर्म प्रचार-प्रसार के लिए किसी पर आक्रमण किया हो, हमने कभी अगर किसी पर आक्रमण भी किया है तो सिर्फ़ खुद को और अपने धर्म को सुरक्षित रखने के लिए किया है। हमारा इतिहास भले ही राजाओं की परंपरा के अधीन हो, लेकिन बेवजह आक्रमक होना हमारी पहचान नहीं हैं। आज जब अनेकों अपराधों को आए दिन हिंदुओं के चेहरे के साथ बाँधने का प्रयास किया जाता है तब मालूम चलता है कि देश में तथाकथित सेक्युलरों का गिनती कितनी अधिक बढ़ गई हैं।

मुझे लगता है येचुरी अपनी विचारधारा से प्रताड़ित हो चुके इंसान हैं, जो हिंदुओं को हिंसा का प्रतीक बना रहे हैं और अल्पसंख्कों के तमगा देकर उस मजहब को प्रोटेक्ट कर रहे हैं जिसके चलते आए दिन हिंदू और अन्य किसी भी धर्म के लोग काफ़िर करार दिए जाते हैं। जिसका इतिहास ही मजहब को पूरी दुनिया में फैलाने की धरातल पर है, उस पर येचुरी चाह कर भी कोई बात नहीं कर सकते हैं क्योंकि यहीं से तो उनकी पार्टी को गिनी चुनी साँसे मिल रहीं हैं। सोचिए यदि कम्युनिस्ट पार्टी की विचारधारा समाज के लिए इतनी ही लाभप्रद होती तो क्या 1960 में समाज पर पकड़ बनाने वाली वामपंथी आज आईसीयू में वेंटीलेटर पर होती?

रामायण में राम के चरित्र का वर्णन हर जगह मर्यादापुरुषोत्तम के रूप में हुआ है। तब भी जब उन्होंने रावण के ख़िलाफ़ युद्ध छेड़ा। इसी तरह पांडवों का जिक्र भी महाभारत में अधिकार के लिए युद्ध लड़ने वालों में आता है। जिन्होंने न्याय के नाम पर केवल 5 ग्राम की माँग की थी, लेकिन फिर भी उन्हें उनके अधिकार से वंचित किया गया, जिसके कारण खुद कृष्ण भगवान ने धर्म की लड़ाई में पांडवों का साथ दिया क्योंकि धर्म अपने अधिकारों के लिए लड़ने की सीख देता है, न कि किसी के अधिकारों को छीनने की। जहाँ येचुरी को जिहाद के बारे में बात करनी चाहिए थी वे वहाँ हिंदुओं को ले आए। उनके बयान को देखकर-पढ़कर लगता है कि यदि वे वाकई हिंदू विरोधी है और इसे साबित करने के लिए उन्हें ग्रंथों का उदाहरण देना है तो कम से कम पहले उन्हें उसके बारे में अच्छे से पढ़ लेना चाहिए ताकि वे अर्थों का अनर्थ न करें और समाज में घृणा नफरत का प्रचार प्रसार न करें। जिसका दोष मजबूरन हमें उनकी विचारधारा को ही देना पड़ता है।

मस्जिद संचालक से ED ने जब्त की ₹73 लाख की संपत्ति, हाफिज सईद से तार जुड़े होने का शक

गुरुवार (2 मई) को प्रवर्तन निदेशालय (ED) ने आतंकी  फंडिंग के केस में हाफिज सईद से तार होने के शक में मोहम्मद सलमान और उसके परिवार से ₹73 लाख की सम्पत्ति जब्त की है। मामला 26 /11 के मुंबई हमले में लश्कर, जमात-उद-दावा, और फ़लाह-ए-इंसानियत फाउंडेशन (FIF) की आर्थिक भूमिका की जाँच का है।

FIF जमात और लश्कर का मुखौटा संगठन है, और जमात व लश्कर पर आतंकी वारदातों को अंजाम देने के चलते लगे प्रतिबंधों को धता बताने के लिए बनाया गया था। 2016 में हिंदुस्तान ने इस संगठन को आतंकी घोषित कर प्रतिबंधित कर दिया था।

मनी लॉन्ड्रिंग रोधी कानून के तहत कार्रवाई

मोहम्मद सलमान और परिवार के खिलाफ कार्रवाई मनी लॉन्ड्रिंग रोधी कानून के तहत तहत की गई है। जब्त सम्पत्ति में दिल्ली में रिहाइशी फ्लैट, नकदी, और बैंक में जमा पैसे हैं. इन सबकी कुल कीमत ₹73.12 लाख बताई गई है। ED के अनुसार असल में जिहादी गतिविधियों के लिए बनी FIF ‘मानवीय’ समाज सेवा के काम कर के लोगों की आँखों में धूल झोंकती थी। वह जिहाद के लिए पैसे का इंतजाम करती थी, स्लीपर सेल बनाती थी, और नौजवानों को दशहतगर्दी के लिए उकसाती थी।

ED ने यह दावा भी किया कि FIF को हवाला के जरिए भारी मात्रा में पैसा मिलता था, जो कि दुबई के मोहम्मद कामरान द्वारा भेजा जाता था। सलमान को जब NIA ने पिछले साल गिरफ्तार किया, तो पता चला कि इसी पैसे का इस्तेमाल एक मस्जिद बनाने के लिए भी हुआ था। रिपोर्टों के अनुसार पलवल, हरियाणा के उत्तवार गाँव स्थित खुलफ़ा-ए-रशीदीन मस्जिद FIF ने इसी जिहादी पैसे से बनाई गई थी, जिसके लिए सलमान को ₹70 लाख हवाला से मिले थे।

पिछले साल भी थे ₹1.53 करोड़

मोहम्मद सलमान से पिछले साल भी ₹1.53 करोड़ की सम्पत्ति बरामद हुई थी, और वह फ़िलहाल तिहाड़ जेल में है। जाँच के दौरान पता चला था कि सलमान पैसे मिल जाने की सूचना और काम कितना हुआ, इसके फ़ोटो ईमेल से भेजता था। ₹4.70 करोड़ की सम्पत्ति अलग-अलग हवाला कारोबारियों के जरिए लिए-दिए जाने की जानकारी अब तक जाँच एजेंसियों को मिली है।

बिप्लब देब के खिलाफ अफवाह फैलाने के आरोप में कॉन्ग्रेस उपाध्यक्ष तापस डे पर मामला दर्ज

त्रिपुरा के मुख्यमंत्री बिप्लब देब और उनकी पत्नी नीति देब की निजी जिंदगी के बारे में सोशल साइट्स पर झूठी अफवाहें फैलाने के आरोप में राज्य के कॉन्ग्रेस उपाध्यक्ष तापस डे के खिलाफ त्रिपुरा पुलिस ने मामला दर्ज किया है। बता दें कि, तापस डे इस मामले में आरोपित होने वाले तीसरे शख्स हैं। इससे पहले सोमवार (अप्रैल 29, 2019) को इसी आरोप में फ्रीलांस पत्रकार सैकत तलपात्रा को पश्चिम अगरतला से गिरफ्तार किया गया था और उसी दिन हवलदार जमाल हुसैन को भी गिरफ्तार किया गया था, जिसे बाद में सस्पेंड कर दिया गया।

बता दें कि, जिस फर्जी पोस्ट को सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म और व्हाट्सएप पर एक अटैचमेंट के साथ शेयर किया गया था, वो वास्तव में नई दिल्ली की एक अदालत में किसी अन्य व्यक्ति द्वारा दायर किया गया तलाक था और उसका सीएम या उसकी पत्नी से कोई संबंध नहीं था।

हालाँकि, डे ने इस बात को स्वीकार किया कि उन्होंने व्हाट्सएप ग्रुपों पर इसे शेयर किया था, मगर उनका कहना है कि उन्होंने ये सिर्फ अपने दोस्तों के साथ शेयर किया था, ताकि इस खबर की पुष्टि की जा सके। तापस डे ने कहा कि उन्होंने इसके खिलाफ कोई टीका-टिप्पणी नहीं की थी, और जो भी कानूनी कार्रवाई होगी, उसके लिए वो तैयार हैं। वहीं भाजपा के प्रवक्ता डॉ. अशोक सिन्हा ने कहा कि तापस डे एक वरिष्ठ नेता हैं और कानून के अच्छे जानकार भी हैं, और अगर वो दावा कर रहे हैं कि वो निर्दोष हैं, तो कानूनी रास्ता अपनाते हुए उन्हें इस मामले से बरी कर देना चाहिए।

गौरतलब है कि, बीते दिनों बिप्लव कुमार देब के बारे में खबर आई थी कि उनकी पत्नी नीति देब ने उन पर घरेलू हिंसा का आरोप लगाया है और साथ ही उन्होंने तलाक की अर्जी भी दी है। हालाँकि, सीएम की पत्नी नीति देब ने एक फेसबुक पोस्ट करते हुए इन तमाम दावों को झूठा बताते हुए नकार दिया था। उन्होंने कहा था कि सिर्फ गंदे, भद्दे और बीमार किस्म की मानसिकता वाले लोग ही घटिया प्रचार के लिए इस तरह की अफवाहें फैलाते हैं। इसके साथ ही उन्होंने आरोप लगाया कि प्रभावशाली लोगों के खिलाफ राजनीतिक लाभ हासिल करने के लिए इस तरह की गंदी अफवाहों को फैलाने के लिए उन्हें मोटी रकम दी जाती है। नीति देब ने कहा था कि ये सब कुछ सिर्फ और सिर्फ उनकी छवि को धूमिल करने की कोशिश है।

हमारा दिमाग ही सभी फैसले करता है, मुझे गाजर खाना पसंद नहीं था, लेकिन अब मैं खाता हूँ: राहुल गाँधी

एक इंटरव्यू में कॉन्ग्रेस पार्टी अध्यक्ष और रॉबर्ट वाड्रा के साले राहुल गाँधी ने पीएम नरेंद्र मोदी से लेकर अपने बारे में बड़े खुलासे किए। इस इंटरव्यू में ही राहुल गाँधी ने स्वीकार किया कि मोदी की ताकत उनकी छवि है और दावा किया कि वो इसे इसे खराब कर के रहेंगे। इस इंटरव्यू में राहुल गाँधी ने  कहा कि नरेंद्र मोदी की छवि खराब करने का काम उन्होंने शुरू भी कर दिया है।

‘मुझे आम पसंद हैं, केले भी पसंद हैं और अब मैं गाजर भी खाता हूँ’

कॉन्ग्रेस पार्टी अध्यक्ष और प्रियंका गाँधी के भाई राहुल गाँधी ने आगे कहा, “आप गरीब लोगों को पसंद कर सकते हैं या फिर आप उनसे नफरत कर सकते हैं। यह सब आप अपने मन से निर्धारित करते हैं। हमारा दिमाग ही है जो सभी फैसले करता है। हो सकता है कि मैं किसी से नफरत करता हूँ, लेकिन जब उनसे थोड़ी बातचीत कर लूँ, तो मैं फिर चीजों को उनके नजरिए से देखने लगता हूँ। वास्तव में मैं उन्हें (नरेंद्र मोदी) पसंद करता हूँ। वह शानदार हैं। मोदी को आम पसंद है, लेकिन मुझे विपश्यना पसंद है। और जहाँ तक बात रही आम की; तो हाँ, मुझे भी आम पसंद हैं, केले भी पसंद हैं। मुझे गाजर खाना पसंद नहीं था, लेकिन अब मैं गाजर भी खाता हूँ।”

‘राफेल डील में पीएम मोदी ने अनिल अंबानी को फायदा पहुँचाया’

वहीं, राफेल डील के सवाल पर राहुल गाँधी ने कहा कि पीएम मोदी ने सभी नियमों को अनदेखा कर अनिल अंबानी को फायदा पहुँचाया है, जिसकी जाँच होनी चाहिए। कॉन्ग्रेस पार्टी शुरू से ही इसकी जाँच की माँग कर रही है। इसके साथ ही राहुल गाँधी ने सर्जिकल स्ट्राइक को लेकर भी पीएम पर निशाना साधा। उन्होंने कहा कि मनमोहन सरकार में तीन बार सर्जिकल स्ट्राइक हुए थे, लेकिन कॉन्ग्रेस ने इसका कभी ढिढोरा नहीं पीटा। इसके आगे राहुल ने कहा कि मिस्टर मोदी और बीजेपी चुनाव नहीं जीत रहे हैं। कॉन्ग्रेस की अगुवाई में यूपीए सरकार बनाने वाली है।

बुरहान वानी गैंग का आखिरी आतंकी लतीफ़ टाइगर भी कुत्ते की मौत मारा गया

आतंकी संगठन हिजबुल-मुजाहिदीन से संबंधित समूह के आतंकी बुरहान वानी गैंग का अंतिम जीवित सदस्य, लतीफ अहमद डार उर्फ लतीफ टाइगर को शुक्रवार को कश्मीर के शोपियाँ में सुरक्षा बलों द्वारा मुठभेड़ में मार गिराया गया। इसके साथ ही, आतंकी बुरहान वानी का 11 आतंकियों का समूह पूरी तरह से समाप्त हो गया।

मीडिया रिपोर्ट में कहा गया है कि शोपियाँ में हुई मुठभेड़ में लतीफ और तारिक मौलवी नामक एक अन्य आतंकवादी को भी मार गिराया गया है।

मारे गए हिजबुल मुजाहिदीन के कमांडर बुरहान वानी की वायरल ग्रुप फोटो, जो 2015 में सोशल मीडिया पर वायरल हो गई थी, उसके पास कश्मीर में ‘नए जमाने के आतंकवाद’ के जन्म की घोषणा करने के लिए केंद्र में बुरहान के साथ हथियार और गोला-बारूद से लैस 11 आतंकवादी थे।

इस आतंकी टीम के 9 सदस्यों को पहले ही मार गिराया गया था और इस आतंकी समूह के एक आतंकी ने आत्मसमर्पण कर दिया था। अब अंतिम सदस्य के साथ, लतीफ़ टाइगर को भी मार दिया गया, इस तरह बुरहान वानी का पूरा समूह समाप्त हो चुका है।

इस क्षेत्र में आतंकवादियों की मौजूदगी के बाद जो ऑपरेशन चल रहा है, वह 34 आरआर और स्पेशल ऑपरेशन ग्रुप (एसओजी) की संयुक्त टीम द्वारा शोपियाँ जिले के इमाम साहिब के अडखरा इलाके में शुक्रवार सुबह शुरू किया गया था।

मुठभेड़ में एक अन्य आतंकवादी तारिक मौलवी उर्फ ​​मुफ्ती वकास भी मारा गया है। हालाँकि, अधिकारियों ने अभी तक इस खबर की आधिकारिक पुष्टि नहीं की है।

सुरक्षाबलों और आतंकवादियों के बीच हुई गोलीबारी में सेना का एक जवान घायल हो गया है, जबकि दो और आतंकवादी अभी भी क्षेत्र में फँसे हुए हैं। इस क्षेत्र की घेरेबंदी कर दिया गया है। और उन आतंकियों की तलाश जारी है।

नागरिकता पर राहुल ने नहीं दिया जवाब: EC में उम्मीदवारी निरस्त करने को याचिका

राहुल गाँधी की नागरिकता का प्रश्न अब सुप्रीम कोर्ट की दहलीज़ तक जा पहुँचा है। रिपोर्ट के अनुसार, हिन्दू महासभा ने सुप्रीम कोर्ट में याचिका दाख़िल कर उनकी ब्रिटिश नागरिकता पर आपत्ति जताई थी और उनका नामांकन रद करने की माँग की थी।

हिन्दू महासभा की तरफ से जय भगवान गोयल ने यह याचिका दाखिल की थी, जिस पर जल्द सुनवाई करने की माँग पर ज़ोर दिया गया था। याचिका में यह सवाल भी उठाया गया था कि यह जानते हुए कि राहुल गाँधी की नागरिकता ब्रिटिश है, निर्वाचन आयोग द्वारा उनका नामांकन क्यों स्वीकार किया गया?

बता दें कि राहुल गाँधी की ब्रिटिश नागरिकता और उनके कथित नाम (राउल विंची) को लेकर पहले भी विवाद उठ चुके हैं। भारतीय गृह मंत्रालय ने बड़ा क़दम उठाते हुए राहुल गाँधी को नोटिस थमाकर उनकी विदेशी नागरिकता पर 15 दिनों के भीतर स्पष्टीकरण देने को कहा है।

इन सबके बीच राहुल गांधी की विवादित नागरिकता पर न्यायालय के आदेश व गृह मंत्रालय द्वारा नोटिस जारी किए जाने के 4 दिन बाद भी कोई जवाब न दिए जाने के कारण राहुल गांधी का नामांकन रद करने के लिए चुनाव आयोग को एक व्यक्ति ने पत्र लिखा है। अयोध्या के रहने वाले याचिकाकर्ता डॉ रजनीश सिंह ने यह पत्र लिखा है जिसमें कहा गया है कि राहुल गाँधी  की नागरिकता 2015 से सवालों के घेरे में है और भारत सरकार के पास उनकी नागरिकता को लेकर अर्ज़ी लंबित है। ऐसे में अमेठी से उनकी उम्मीदवारी निरस्त होनी चाहिए।