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दूरदर्शी युगपुरुष, ‘चाराकंठ’ समाजवादी नेता लालू यादव – गोदी मीडिया छिपाता है, अमेरिका ने माना लोहा

साथियो! आजादी के कई सालों बाद भी ये देखने को मिलता था कि केवल जो अमीर और पूँजीपति किस्म के व्यक्ति थे, उनका ही अपहरण किया जाता था या बस उन्हें ही लूटा जाता था। देश की बहुजन आबादी इस चीज के एहसास से सदियों से वंचित थी। खास तौर पे बिहार में तो हालात और विकट थे। ऐसे अन्याय भरे माहौल मे फिर उदय होता है गरीबों के नायक श्री लालू प्रसाद यादव का।

जनसुलभ अपहरण

आज जो बिहार के जातिवादी, सवर्णवादी और मनुवादी लालू जी से इतनी नफरत करते हैं, तो उसका कारण यही है कि पहले जो अपहरण और लूट केवल अमीरों और सामंतों तक सीमित थी, उसे लालू जी ने अपने कुशल नेतृत्व में गरीबों तक पहुँचा दिया। बिहार में सामाजिक न्याय की ऐसी क्रांति आई कि मात्र ₹2000 कमाने वाले टीचर्स का भी अपहरण होने लगा।

समाजवादी लालू ने ही तोड़ी थी अपहरण और लूट की अभिजात्यता

ये सामंतवाद की प्रताड़ना झेल रहे गरीब-गुरबा लोगों के लिए एक सुकून देने वाली क्रांति थी। लूट का ऐसा सामाजवादी विकेंद्रीकरण किया गया कि लोग ₹5000 जैसी छोटी रकम भी लेकर चलना मुनासिब नहीं समझते थे और इतने की भी DD बनवा कर चलते थे। राह चलते लुट जाने का भय जो पहले केवल अमीर और अभिजात्यों तक सीमित था, उसे गरीबों के मसीहा श्री लालू प्रसाद यादव ने एक-एक गरीब तक पहुँचाने का काम किया। हालाँकि, गोदी मीडिया और सवर्णवादी समाज ने यह तथ्य कभी नहीं बताया लेकिन, जानकार तो यह भी बताते हैं कि जिस ‘कैशलेस इकोनॉमी’ का नारा बुलंद कर के वर्तमान प्रधानमन्त्री नरेंद्र मोदी हर जगह खुद की वाह-वाही करवा रहे हैं, उसका मॉडल भी लालू की ही उपरोक्त वर्णित नीतियों का हिस्सा है।

असल में, ये लालू यादव के समाजिक न्याय का ही कमाल था कि अब हर गरीब और शोषित भी अपहरण कर लिए जाने के उसी डर के साथ बेचैनी से जी सकता था, जो पहले केवल समाज के ऊँचे तबके तक सीमित हुआ करती थी। अपहरण के लालूकरण नामक इस क्रांति के बारे में एक मशहूर शायर ने भी लिखा था, “जब 85% गरीब ने भी महसूस किया अपहरणकर्ता का राज, उसे जलन से सामंतवादी कहते हैं जंगल राज।”

GST से पहले लालू लेकर आए थे SRT यानी, ‘सरल रंगदारी टैक्स’

लालू जी इतने बड़े दूरदर्शी थे कि उनके सरकार द्वारा किए गए कई कामों को ही मोदी सरकार ने नाम बदलकर लागू कर दिया है। उदाहरण के तौर पर GST ही ले लीजिए, जिसके तहत ‘एक देश, एक टैक्स’ की व्यवस्था करके मोदी जी अपनी पीठ थपथपा रहे हैं, उसे लालू जी ने कई साल पहले ही लागू कर दिया था। 90 के दशक में बिहार में किसी भी कार्य को करने के लिए, चाहे वो भवन निर्माण हो या दुकानदारी, सब के लिए एक अत्यंत ही ‘सरल रंगदारी टैक्स’ चुकाना पड़ता था। यह एक ‘सिंगल विंडो क्लीयरेंस’ जैसी व्यवस्था हुआ करती थी। जहाँ रंगदारी के एकमुश्त भुगतान के तुरंत बाद ही आप अपना काम करने के लिए स्वतंत्र हो जाते थे।

आज नरेंद्र मोदी, टैक्स चोरी और काला धन को देश की बहुत बड़ी समस्या बताते हैं, लेकिन लालू जी के राज में रंगदारी वसूली की इतनी चाक-चौबंद व्यवस्था थी कि अगर किसी भी व्यक्ति ने रंगदारी ना देने या कम देने जैसा अनैतिक कार्य किया, उसे तत्काल प्रभाव से क्षेत्रीय रंगदारी वसूली अधिकारी द्वारा दंडित किया जाता था। दंड विधान में इस अपराध के लिए दोषी व्यक्ति की हत्या से लेकर, उसकी दुकान, मकान को बम से उड़ा देने जैसी, कठोर सजाओं का प्रावधान था। इससे यह भी साबित होता है कि लालू राज में बिहार में न्याय व्यवस्था कितनी प्रभावी थी।

आज कई अर्थशास्त्री बताते हैं कि देश GST के बदलाव को झेलने के लिए तैयार नहीं था, जिस कारण देश का काफी आर्थिक नुकसान हुआ। लेकिन, गोदी मीडिया ये कभी नहीं बताता है कि रंगदारी टैक्स के रूप में लालू जी ने इस सरल टैक्स प्रणाली की शुरुआत 20 साल पहले ही कर दी थी, ताकि आज के समय में GST को अपनाते हुए व्यापारी किसी उलझन में ना फँसें।

परमादरणीय लालू जी ऐसे करिश्माई मुख्यमंत्री थे, जिन्होंने अपने कालजयी मुख्यमंत्रीत्व काल में पर्यावरण, पर्यटन से लेकर नारीवाद तक जैसे आज के गंभीर सामाजिक मुद्दों पे आज से 20 वर्ष पूर्व ही कई क्रांतिकारी कदम ऊठा लिए थे। तब इन विषयों पर पूरे विश्व मे कोई सोचता भी नहीं था। किंतु हमारा गैर राजनीतिक गोदी मीडिया हमेशा गरीबों के नायक की इन उपलब्धियों को अपनी ‘एक कठिन सवाल पूछने’ की कुंठा के कारण नजरअंदाज कर देता है या दबाने की कोशिश करता है।

पर्यावरणविद ‘चाराहारी’ लालू ने रोका था ग्रीन हाउस उत्सर्जन, गोदी मीडिया ने छुपाया

विश्व ने 1992 में ग्रीन हाऊस गैसों के उत्सर्जन को कम करने के लिए क्योटो प्रोटोकाॅल पास किया और आप जानते होंगे कि ग्रीन हाऊस गैसों के उत्सर्जन का एक बड़ा कारण मवेशी हैं। ऐसे में श्री लालू जी ने समाज कल्याण के लिए यह बीड़ा उठाया और जिस जेनेटिकली मोडीफाईड चारे को खाकर मवेशी ग्रीन हाऊस गैसों का उत्सर्जन कर ग्लोबल वॉर्मिंग करते थे, उसे लालू स्वयं डकार गए। इस प्रकार आप देखेंगे कि भगवान शिव ने जिस प्रकार मानव कल्याण के लिए हलाहल निगल लिया था, लालू ने भी उसी प्रकार समाज के लिए सारा चारा तक खा लिया था।

यह जानकार आपको आश्चर्य होगा कि जिस ‘बड़े कदम’ को विश्व ने 1992 में क्योटो प्राॅटोकाॅल के रूप में अपनाया, वो काम दूरदर्शी लालू जी ने 1980 में ही चाईबासा के कोषागार से शुरू कर दिया था। शिव जी की तरह लालू जी ने इस संसार की भलाई के लिए ₹900 करोड़ के चारे को डकारा और उस दिन से ‘चाराकंठ’ रूप में जाने गए।

लालू राज में ‘शेल्टर हाउस’ सुविधा से लेस थे बिहार के दियारा-देहात

आजकल ईको पर्यटन और रूरल पर्यटन का बड़ा क्रेज है। कहने की जरूरत नहीं है कि ये भी लालू जी की नीतियों में ही शामिल था। 90 के दशक में कई अपराधी पड़ोस के राज्यों से बिहार के देहात में छुपने के लिए आते थे। उदाहरण के लिए, उत्तर प्रदेश के नामी बदमाश श्रीप्रकाश शुक्ला ने UP पुलिस के STF से बचते हुए कई महीने मोकामा के दियारा में बिताया था। जहाँ नरेंद्र मोदी की पर्यटन नीतियाँ केवल पाँच सितारा होटल के मालिकों और पूँजीपतियों को फायदा पहुँचाने वाली हैं, वहीं लालू जी की पर्यटन नीति गरीब, किसानों और ग्रामीण अर्थव्यवस्था को फायदा पहुँचाने वाली थी।

‘वीमेन एम्पावरमेंट’

वर्तमान का एक और ज्वलंत समाजिक मुद्दा जिस पर लालू जी ने वर्षों पहले राह दिखाई थी, वो है नारीवाद। आज जहाँ अमेरिका अभी अपनी पहली महिला राष्ट्रपति का इंतजार कर रहा है, लालू जी ने अपनी सत्ता का त्याग कर राजनीति में महिलाओं की भागीदारी सुनिश्चित की। मशहुर अमेरिकी टीवी सीरीज ‘हाऊस ऑफ कार्ड्स’ भी लालू जी के जीवन से ही प्रेरणा लेता है। केविन स्पेसी ने लालू जी द्वारा राबड़ी जी को मुख्यमंत्री बनाने के कदम से ही सीख ली है। तभी तो कहते हैं, “लालू जो आज सोचता है, अमेरिका वो बीस साल बाद सोचता है।”

(यह व्यंग्य राघवेंद्र प्रताप सिंह द्वारा लिखा गया है)

गाज़ीपुर में माया-अखिलेश की रैली में भिड़े SP-BSP कार्यकर्ता, अफ़ज़ल अंसारी है उम्मीदवार

सपा-बसपा ने चुनाव से पहले गठबंधन किया और उत्तर प्रदेश में 6 चरणों का चुनाव संपन्न भी हो गया लेकिन रुझानों को देख कर ऐसा लगता नहीं कि दोनों पार्टियों के कार्यकर्ताओं के दिल मिले हैं। ताज़ा मामला कुछ यूँ है कि दोनों दलों के राष्ट्रीय अध्यक्षों की रैली में ही कार्यकर्ता आपस में भिड़ गए और अखिलेश-माया के गठबंधन को ज़मीनी स्तर पर धता बताया। दरअसल, गाज़ीपुर में गठबंधन की रैली थी। इसमें सपा अध्यक्ष अखिलेश यादव, बसपा की मुखिया मायावती और रालोद सुप्रीमो चौधरी अजीत सिंह ने भाग लिया। यूपी महागठबंधन की इस संयुक्त शक्ति प्रदर्शन जनसभा के दौरान सपा और बसपा कार्यकर्ताओं ने मारपीट की। नीचे संलग्न किए गए वीडियो में आप पूरे वाकये को देख सकते हैं, जो सोशल मीडिया पर भी वायरल हो रहा है।

जब कार्यकर्ताओं में मारपीट हुई, तब दोनों पूर्व मुख्यमंत्री मंच पर नहीं पहुँचे थे। भाषण से पहले हुई इस हाथापाई की शुरुआत किसी बात को लेकर झड़प से हुई। दोनों दलों के कार्यकर्ता अपनी-अपनी पार्टियों का झंडा लिए नारे लगा रहे थे। तभी अचानक से कहासुनी हुई और फिर मारपीट हो गई। वहाँ मौजूद लोगों ने मोबाइल से वीडियो बना कर सोशल मीडिया पर डाल दिया। महागठबंधन की यह संयुक्त रैली बसपा प्रत्याशी अफ़ज़ल अंसारी के पक्ष में माहौल बनाने के लिए हुई। अफ़ज़ल अंसारी अपराधी से राजनेता बने मुख़्तार अंसारी का भाई है। मुख़्तार अभी जेल में बंद है।

गाज़ीपुर सीट की बात करें तो वर्तमान में केंद्रीय रेल राज्यमंत्री मनोज सिन्हा यहाँ से सांसद हैं। पिछले चुनाव में उन्होंने सपा प्रत्याशी को 32,000 मतों के अंतर से मात दी थी जो कि बहुत कम है। सपा और बसपा प्रत्याशियों के बीच मतों का अंतर भी लगभग इतना ही था। ऐसे में, इस सीट को लेकर अभी तक संशय बना हुआ है। वाराणसी से ख़ुद पीएम मोदी मैदान में हैं और काशी से सटी गाज़ीपुर सीट भाजपा के लिए प्रतिष्ठा का विषय है। राजनीतिक विशेषज्ञों का मानना है कि मनोज सिन्हा की लोकप्रियता में बढ़ोतरी हुई है और वो अपने द्वारा कराए गए विकास कार्यों के साथ-साथ नरेंद्र मोदी के चेहरे और राष्ट्रवाद के मुद्दे के साथ मैदान में हैं।

जबकि, महागठबंधन प्रत्याशी 2014 के समीकरणों के आधार पर जातिगत गणित के कारण अपनी जीत के प्रति आश्वस्त हैं। भाजपा इस सीट के लिए पूरा ज़ोर लगा रही है। इसका अंदाजा इसी बात से लगाया जा सकता है कि यहाँ प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी, भाजपा अध्यक्ष अमित शाह और उप-मुख्यमंत्री केशव प्रसाद मौर्य की रैलियाँ हो चुकी हैं। वहीं महागठबंधन की तरफ से अखिलेश यादव, मायावती और अजीत सिंह की संयुक्त रैली हुई। हाँ, कार्यकर्ताओं की झड़प से महागठबंधन की फ़ज़ीहत तो हुई है और ज़मीन पर उनकी पोल खुल गई है। साथ ही, विधायक हत्याकांड में ज़मानत पर बाहर अफ़ज़ल अंसारी का आपराधिक बैकग्राउंड भी किसी से छिपा नहीं है।

इससे पहले पूर्व मुख्यमंत्री मायावती ने भी सपा-बसपा गठबंधन का कार्यकर्ताओं को इतिहास के सारे गिले-शिकवे भूल कर साथ काम करने की सलाह दी थी। गठबंधन के नेता वैसे तो आश्वस्त नज़र आते हैं लेकिन कहीं न कहीं उनकी चिंता है कि दोनों दलों के कार्यकर्ता एक-दूसरे का वोट बैंक ट्रांसफर कर पाएँगे या नहीं।

विपक्षी एकता ने नए सूत्रधार बन कर उभरना चाहते हैं KCR, खिचड़ी सरकार के लिए प्रयास तेज़

देश में राजनीतिक समीकरण तेज़ी से बदल रहे हैं। विपक्ष के एक धड़े ने अपनी रणनीति इस आधार पर बनानी शुरू कर दी है कि वर्तमान प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की भाजपा गठबंधन को बहुमत न मिले और जोड़-तोड़ से नई सरकार बनाई जाए। खिचड़ी सरकार को दोहराने के लिए कुछ दल पूरी तरह से तैयार बैठे हैं, भले ही जनता का निर्णय ईवीएम में क़ैद हो चुका हो (आख़िरी चरण का चुनाव 19 मई को होना है)।

आइए इस खेल के प्रमुख खिलाडियों के बारे में जानते हैं और चुनावी राजनीति के बीच जनता के बीच जो कुछ भी चल रहा है और जिसकी लगातार मीडिया रिपोर्टिंग हो रही है, उसके अलावा क्या सब चल रहा है, इस पर चर्चा करते हैं। अभी इस खेल के सबसे बड़े खिलाड़ी बने हुए हैं तेलंगाना के मुख्यमंत्री के चंद्रशेखर राव। राव राज्य में एकतरफ़ा जीत दर्ज कर चुके हैं और असदुद्दीन ओवैसी द्वारा उन्हें प्रधानमंत्री मैटेरियल बताया जा चुका है।

के चंद्रशेखर राव (केसीआर) ने चुनाव से पहले भी देश के कई प्रमुख नेताओं से मुलाक़ात कर तीसरे मोर्चे के लिए प्रयास किया था लेकिन सभी दलों के अपने-अपने स्थानीय हितों के कारण उन्हें कुछ अच्छा रेस्पॉन्स नहीं मिला। केसीआर के लिए तेलंगाना में सब कुछ सेट है और उन्हें अपने राज्य में ज्यादा प्रतिस्पर्धा नहीं मिल रही है क्योंकि तेलंगाना में कॉन्ग्रेस और टीडीपी, दोनों का ही पत्ता गोल है। भाजपा तो अभी वहाँ पाँव जमाने में ही लगी हुई है। ऐसे में, केसीआर के पास दुनियाभर का समय है कि वह तीसरे मोर्चे के लिए समर्थन जुटाएँ और ख़ुद को विपक्ष के एक प्रमुख सूत्रधार के रूप में प्रस्तुत करें। अभी आंध्र के सीएम चंद्रबाबू नायडू इस भूमिका में हो सकते थे लेकिन चूँकि उन्हें ख़ुद का गढ़ बचाने में ही कड़ी चुनौती का सामना करना पड़ रहा है और जगन रेड्डी से उन्हें कड़ी चुनौती मिल रही है, वह आंध्र और ईवीएम पर ही लटके पड़े हैं।

बिहार में लालू प्रसाद यादव के जेल में होने से विपक्ष को एक ऐसे सूत्रधार की लम्बे समय से ज़रूरत थी, जो भारत भर के बड़े विपक्षी नेताओं से अच्छे सम्बन्ध स्थापित कर जोड़-तोड़ का प्रधानमंत्री बनाने में अहम किरदार अदा करे। नब्बे के दशक में लालू ने देवे गौड़ा और फिर गुजराल को प्रधानमंत्री बनाने में अहम भूमिका निभाई थी। लालू विपक्ष गठबंधन के सूत्रधार हुआ करते थे और जनता दल के सबसे बड़े नेता होने के नाते इन समीकरणों में उनकी ख़ूब चलती थी। दक्षिण से आने वाले केसीआर को ख़ूब पता था कि लालू जेल में हैं और नायडू अपने ही राज्य के कठिन समीकरणों में फँस कर रह गए हैं, ऐसे में सही समय पर उन्होनें अपना भारत भ्रमण शुरू कर दिया। उनका अखिलेश यादव से भी मिलने का कार्यक्रम तय था और वे मिले भी लेकिन सपा ने कॉन्ग्रेस और केसीआर को धता बताते हुए बसपा से गठबंधन कर लिया।

सपा-बसपा अन्य राज्यों में कॉन्ग्रेस सरकार को समर्थन दे रहे हैं, ऐसे में ये दोनों ही दल किस पाले में जाएँगे, कहना मुश्किल है। हाल ही में केसीआर ने द्रमुक के मुखिया स्टालिन से मुलाक़ात की है। प्रधानमंत्री पद के लिए राहुल गाँधी के सबसे मुखर समर्थक बनें स्टालिन से तीसरे मोर्चे की वकालत करने वाले केसीआर की मुलाक़ात अहम है क्योंकि किसी अन्य बड़े विपक्षी नेता ने अभी तक राहुल का नाम पीएम पद के लिए नहीं सुझाया है। केसीआर ने स्टालिन से मुलाक़ात कर तीसरे मोर्चे की बात की और भाजपा गठबंधन को बहुमत न मिलने की स्थिति से कैसे निपटा जाएगा, पहले से ही इसकी तैयारी पर चर्चा की। स्टालिन ने केसीआर से बैठक में उन्हें भी कॉन्ग्रेस का समर्थन करने को कहा।

लेकिन, केसीआर कुछ और इरादे लेकर चेन्नई गए थे। उन्होंने स्टालिन का कॉन्ग्रेस प्रेम देख कर एक ऐसी सरकार के बारे में भी चर्चा की, जिसे कॉन्ग्रेस का समर्थन प्राप्त हो। इस सरकार में क्षेत्रीय विपक्षी पार्टियाँ शामिल होंगी। चंद्रशेखर सहित ऐसे कई प्रधानमंत्री रहे हैं, जिन्हें कॉन्ग्रेस का बाहर से समर्थन प्राप्त था लेकिन ऐसी कोई भी सरकार अपना पाँच वर्षों का कार्यकाल पूरा नहीं कर सकी। हाँ, इन सबके बीच क्षेत्रीय दलों को अपना हित साधने का अच्छा मौक़ा मिल जाता है। शुरू में ऐसी ख़बरें आईं थी कि केसीआर चुनाव बाद राजग में भी शामिल हो सकते हैं क्योंकि तेलंगाना में चुनाव प्रचार के दौरान उन्होंने कॉन्ग्रेस और भाजपा, दोनों से ही बराबर दूरी रखने की बात कही थी। लेकिन, केसीआर ने तीसरे मोर्चे के लिए अपने प्रयासों में तेज़ी लाकर भाजपा को यह सन्देश देने की कोशिश की है कि वह उन्हें ग्रांटेड न लें।

केसीआर की यह भी समस्या है कि उनके भाजपा के साथ जाने के बाद राज्य में मुस्लिम आबादी का झुकाव कॉन्ग्रेस की तरफ बढ़ सकता है और वो ऐसा कभी नहीं चाहेंगे कि कॉन्ग्रेस तेलंगाना में फिर से उभरे। केसीआर लालू यादव की जगह फिलहाल इसीलिए भी नहीं ले सकते क्योंकि तेलंगाना में बिहार की आधी से भी कम लोकसभा सीटें हैं और लालू की राष्ट्रीय राजनीति (यूपीए सरकार से पहले) के दौर में बिहार-झारखण्ड मिलाकर उनके प्रभाव में बहुत सारी लोकसभा सीटें आ जाती थीं। और, लालू कई बड़े राष्ट्रीय नेताओं के ख़ास क़रीबी भी थे। केसीआर के ताज़ा दौरों को उनके द्वारा राष्ट्रीय फलक पर ख़ुद को एक सूत्रधार के रूप में स्थापित करने और मीडिया में बने रहने के हथकंडे के तौर पर भी देखा जा सकता है।

कुछ पार्टियों ने अपने पत्ते अभी भी नहीं खोले हैं। ओडिशा में प्रधानमंत्री मोदी और भाजपा ने चुनाव प्रचार के दौरान वहाँ की सत्ताधारी पार्टी बीजद और मुख्यमंत्री पटनायक पर ख़ूब ज़ुबानी हमले किए लेकिन फोनी तूफ़ान के आने के बाद मोदी-पटनायक में जैसी केमिस्ट्री दिखी है, उससे पता चलता है कि राजग गठबंधन को अगर कुछ सीटें कम पड़ जाती हैं तो पटनायक अपना समर्थन दे सकते हैं। बीजद के अभी भी 19 सांसद हैं और पटनायक को यक़ीन है कि इन आँकड़े में ज्यादा कमी नहीं आएगी। केसीआर ने उनसे भी मुलाक़ात की थी और पश्चिम बंगाल की मुख्यमंत्री ममता बनर्जी से भी उनकी बात हुई थी लेकिन ओडिशा में भाजपा के कर्ता-धर्ता केंद्रीय मंत्री धर्मेंद्र प्रधान बीजद को राजग में लाने में एक अहम किरदार निभा सकते हैं।

तमिलनाडु का गणित ख़ासा टेढ़ा है क्योंकि दोनों ही बड़े दलों के मुखिया दिवंगत हो चुके हैं। कई दशकों से वहाँ की राजनीति में छाए करुणानिधि और जयललिता की मृत्यु के बाद किसी को भी नहीं पता कि ऊँट किस करवट बैठेगा। लोकसभा में देश की तीसरी सबसे बड़ी पार्टी अन्नाद्रमुक नेतृत्व संकट से जूझ रही है और मौक़ा देख कर भाजपा ने उसे राजग में शामिल कर लिया। द्रमुक के पास स्टालिन के रूप में एक नेतृत्व है लेकिन पिछले चुनाव में पार्टी के भयावह प्रदर्शन को लेकर नेता अभी भी आशंकित हैं। लेकिन, अन्नाद्रमुक की सीटों की संख्या घटनी तय है, ऐसा सभी राजनीतिक विश्लेषक मान रहे हैं। तभी पार्टी के लाख मना करने के बावजूद भाजपा ने राज्य के पूर्व नेता प्रतिपक्ष विजयकांत की पार्टी को गठबंधन में शामिल किया। अन्नाद्रमुक की सीटें घटेंगी तो इसका सीधा फ़ायदा द्रमुक को मिलेगा।

राहुल गाँधी के समर्थन में मुखर स्टालिन कॉन्ग्रेस के पाले में जाकर खेल रहे हैं क्योंकि उन्हें पता है कि उनकी पार्टी को अच्छी संख्या में सीटें मिलती हैं तो यूपीए गठबंधन में उनकी पूछ इसीलिए भी बढ़ेगी, क्योंकि वो चुनाव से पहले से ही राहुल की पीएम उम्मीदवारी का समर्थन करते रहे हैं। संख्याबल के मामले में स्टालिन केसीआर से ज्यादा मज़बूत बन कर उभर सकते हैं, लेकिन केसीआर की व्यक्तिगत महत्वाकांक्षा अभी उन पर हावी दिख रही है। उत्तर में लालू-मुलायम के अप्रासंगिक होने, दक्षिण के दोनों बड़े नेताओं की मृत्यु, विधानसभा चुनाव होने के कारण नायडू-पटनायक के अपने गढ़ में व्यस्त रहने (आंध्र और ओडिशा में विधानसभा चुनाव भी साथ में ही हुए हैं) और शरद पवार की सक्रियता कम होने (वो स्वयं चुनाव भी नहीं लड़ रहे) के कारण केसीआर जैसे छोटे पक्षी भी बड़ा पंख फैला रहे हैं।

कॉन्ग्रेस महिला विधायक ने मीटिंग के दौरान सरकारी अफसरों को दी गाली, वीडियो वायरल

पिछले कुछ दिनों से नेताओं द्वारा अभद्र भाषा के इस्‍तेमाल के मामले लगातार सामने आ रहे हैं। इन्‍हीं अभद्र बयानबाजियों के बीच महाराष्‍ट्र के तिवसा की कॉन्ग्रेस विधायक यशोमति ठाकुर द्वारा एक सरकारी अधिकारी को गाली देने का वीडियो वायरल हो रहा है। ये मामला महाराष्ट्र के अमरावती का है। यहाँ पर सोमवार (मई 13, 2019) को जल संसाधनों को लेकर अधिकारियों की मीटिंग चल रही थी। मीटिंग के दौरान अचानक किसी अधिकारी की बात पर कॉन्ग्रेस विधायक यशोमति ठाकुर भड़क गईं और उन्‍होंने अपना आपा खोते हुए अधिकारी को खूब खरी-खोटी सुनाई और गालियाँ भी दी। मीटिंग में कॉन्ग्रेस के काफी समर्थक मौजूद थे।

इसका एक वीडियो सामने आया है, जिसमें विधायक साहिबा को एक सरकारी अधिकारी के ऊपर चीखते-चिल्लाते हुए और गालियाँ देते हुए देखा जा सकता है। वीडियो में देखा जा सकता है कि वे सभा में मौजूद सरकारी अधिकारी से बेहद अभद्र तरीके से बात कर रही हैं। वहाँ पर मौजूद दूसरे अधिकारी महिला विधायक को रोकने की कोशिश करते रहे, लेकिन यशोमति ने किसी की एक ना सुनीं। वो लगातार अधिकारियों पर चीखती-चिल्लाती रहीं।

वीडियो के वायरल होने के बाद कॉन्ग्रेस की महिला विधायक के इस रवैये पर पार्टी की फजीहत होने लगी तो उन्होंने सफाई देते हुए कहा कि अधिकारी पानी की समस्या पर ध्यान नहीं दे रहे थे, जिसकी वजह से उन्हें गुस्सा आ गया। उन्होंने भाजपा पर आरोप लगाते हुए कहा कि वो पिछले दो सप्ताह से पानी रिलीज करने की माँग कर रहे हैं, और कलेक्टर ने भी पानी रिलीज करने का आदेश दे दिया है, लेकिन भाजपा विधायक इसमें बाधा डाल रहे हैं, हस्तक्षेप कर रहे हैं। हालाँकि इस मामले पर अभी तक कोई शिकायत दर्ज नहीं कराई गई है, लेकिन महिला विधायक की इस हरकत से अफसरों में काफी रोष है। उनका कहना है कि अगर जन प्रतिनिधि इस तरह का बर्ताव करेंगे तो अफसर कैसे अपनी ड्यूटी कर पाएँगे।

श्रीनगर से जैश आतंकी अब्दुल माजिद गिरफ्तार: 2007 से था फरार, रिमांड पर लाया गया दिल्ली

दिल्ली पुलिस की स्पेशल सेल ने जैश आंतकी अब्दुल माजिद बाबा को गिरफ्तार करके बड़ी कामयाबी हासिल की है। खूफिया सूचना के आधार पर माजिद को शनिवार (मई 11, 2019) की शाम गिरफ्तार किया गया था। लंबे समय से फरार चल रहे इस आतंकी पर 2 लाख का इनाम घोषित था। एएनआई द्वारा किए हालिया ट्वीट के मुताबिक अब इस आतंकी को रिमांड पर दिल्ली लाया गया है।

गौरतलब है, साल 2007 में दिल्ली के दीन दयान मार्ग पर हुए शूट आउट में 3 कश्मीरी और एक पाकिस्तानी आतंकी पकड़े गए थे। उस समय (साल 2007) निचली अदालत ने इन्हें बरी कर दिया था, बाद में 2015 में दिल्ली हाइकोर्ट ने इन आतंकियों को उम्रकैद की सज़ा सुनाई थी। खबरों के मुताबिक माजिद और उसका एक साथी तबसे ही फरार चल रहे थे। माजिद के साथ फरार अन्य आतंकी को अभी स्पेशल सेल ने पिछले महीने कश्मीर से ही पकड़ा है।

आजतक में प्रकाशित खबर के मुताबिक दिल्ली पुलिस के विशेष प्रकोष्ठ पुलिस उपायुक्त संजीव कुमार यादव ने जानकारी दी है कि अब्दुल को श्रीनगर के निकट सौरा से शनिवार की शाम को गिरफ्तार किया गया था। पुलिस के अनुसार माज़िद को श्रीनगर के मुख्य न्यायिक दंडाधिकारी के समक्ष पेश किया जाएगा और ट्रांजिट रिमांड पर उसे दिल्ली लाया जाएगा।

इसके अलावा बता दें कि जम्मू-कश्मीर के अनंतनाग जिले में सोमवार (अप्रैल 13, 2019) को सुरक्षाबलों ने जैश के आतंकवादी हिलाल अहमद नाइकू को गिरफ्तार किया है, बीते दिनों ये आतंकी दक्षिण कश्मीर में सक्रिय था। गिरफ्तारी के बाद नाइकू से कड़ी पूछताछ की जा रही है।

Exit Poll का प्रकाशन कर IANS ने किया अचार संहिता का उल्लंघन, EC की कार्रवाई का इंतज़ार

इंडो-एशियन न्यूज सर्विस (आईएएनएस) ने आचार संहिता का उल्लंघन करते हुए रविवार (मई 12, 2019) को एक एग्जिट पोल प्रकाशित किया। आईएएनएस का कहना है कि ये सर्वेक्षण विभिन्न संस्थानों और निष्पक्ष चुनाव विश्लेषकों द्वारा किया गया है। न्यूज सर्विस ने ये सर्वेक्षण ट्विटर पर शेयर किया है। दरअसल, चुनाव आयोग द्वारा 1998 से रिप्रजेंटेशन ऑफ पीपुल्स एक्ट 1951 के तहत मतदान शुरू होने के समय से लेकर मतदान के सभी चरणों के समाप्त होने के आधे घंटे बाद तक एक्जिट पोल प्रकाशित करने पर प्रतिबंध है।

लोकसभा चुनाव का परिणाम 23 मई को आने वाला है और आईएएनएस के मुताबिक, इस एग्जिट पोल में लोकसभा चुनाव के संभावित परिणामों पर चुनाव विश्लेषक एकमत दिखाई दे रहे हैं। इस बार के लोकसभा चुनाव में 7 चरणों में चुनाव होना है, जिसमें से 6 चरण संपन्न हो चुके हैं और अंतिम यानी सातवां चरण रविवार (मई 19, 2019) को होने वाला है।

आईएएनएस ने खुद ही ट्वीट करते हुए ये बताया कि जारी किए गए एग्जिट पोल में सीटों की संख्या “मतदाताओं के एक सर्वेक्षण” पर आधारित है, जो कि साफ तौर पर आचार संहिता का उल्लंघन है, क्योंकि किसी को भी मतदान के सभी चरणों के समाप्त  होने के 30 मिनट बाद तक एग्जिट पोल प्रकाशित करने की अनुमति नहीं है।

अब ये देखना बाकी है कि चुनाव आयोग आईएएनएस के खिलाफ कोई कार्रवाई करता है या नहीं। बता दें कि, इससे पहले भी, जब स्वराज एक्सप्रेस ने एग्जिट पोल प्रसारित किया था, तो कई चुनाव विश्लेषकों ने कहा था कि इंटरनेट के इस युग में चुनाव आयोग का ये नियम निरर्थक साबित हो सकता है, क्योंकि आज के युग में इंटरनेट पर क्या प्रकाशित किया जा रहा है, इस पर निगरानी रखना बेहद मुश्किल है।

गौरतलब है कि, इससे पहले एक ऑनलाइन मीडिया पोर्टल, स्वराज एक्सप्रेस ने चुनाव आचार संहिता का उल्लंघन करते हुए एग्जिट पोल का प्रसारण किया था। फिलहाल वीडियो को यू ट्यूब से हटा दिया गया है। इस शो की ऐंकरिंग वायर के जर्नलिस्ट विनोद दुआ कर रहे थे, जिनके ऊपर यौन शोषण का आरोप लगा था।

सैलरी माँगने पर अनाथ युवती को वसीम ने 40 तमाशबीनों के सामने डंडे से पीटा, Rape का प्रयास

उत्तर प्रदेश के ग्रेटर नोएडा में कुछ युवकों द्वारा एक अनाथ युवती के साथ दरिंदगी करने की घटना सामने आई है। युवकों ने युवती से काम करा कर उसे वेतन भी नहीं दिया और वेतन माँगने पर जम कर पिटाई की। इतना ही नहीं, पीड़िता के साथ दुष्कर्म के प्रयास भी किए गए और उसके कपड़े उतारने की कोशिश की। मुख्य आरोपित सैलून का मालिक है और उसका नाम वसीम है। इस पूरे वारदात में वसीम का साला भी शामिल था। देश की राजधानी दिल्ली से 50 किलोमीटर के दायरे में घटी इस घटना का वीडियो सोशल मीडिया पर भी तेज़ी से वायरल हो रहा है। वीडियो में बदमाश युवक पीड़िता की पिटाई करते देखे जा सकते हैं। ये सब सिर्फ़ इसीलिए किया गया क्योंकि पीड़िता ने काम के बदले अपने हक़ की सैलरी की माँग की थी। ग्रेटर नोएडा के नॉलेज पार्क कोतवाली क्षेत्र स्थित पटेल लोक सांस्कृतिक संस्थान परिसर की यह घटना है।

आरोपित वसीम इसी परिसर में अपना सैलून चलाता है। युवती से दुष्कर्म का प्रयास करने में सैलून मालिक वसीम के अल्वा उसके दो अन्य गुर्गे भी शामिल थे। पीड़िता की पिटाई का डेढ़ मिनट का वीडियो सोशल मीडिया पर वायरल हो गया। पीड़िता द्वारा शिकायत दर्ज कराने के बाद पुलिस ने तीन आरोपितों के ख़िलाफ़ मारपीट और छेड़छाड़ का मामला दर्ज किया है। ताज़ा सूचना के अनुसार, नोएडा सेक्टर-12 निवासी मुख्य आरोपित सैलून संचालक वसीम को पुलिस ने गिरफ़्तार कर लिया है। पीड़िता ने उक्त सैलून में 2 महीने तक मेक-आप आर्टिस्ट की नौकरी की थी। उसका आरोप है कि इस दौरान उसका शोषण किया गया। परेशान होकर उसने नौकरी ही छोड़ दी।

दैनिक जागरण के स्थानीय संस्करण में छपी ख़बर

सैलून मालिक वसीम उसे पिछले 10 दिनों से वेतन के लिए चक्कर कटवा रहा था। 17 हज़ार रुपए प्रति महीने के हिसाब से उसे 34000 रुपए वेतन दिए जाने थे। जैसे ही युवती ने अपनी सैलरी की माँग की, वसीम ने अपने साले व एक साथी के साथ मिलकर उसे जबरन एक कमरे में बंद कर दिया। इसके बाद उसके साथ दुष्कर्म का प्रयास किया गया। जब आरोपित पीड़िता के कपडे उतारने लगे, तब उसने ज़ोर-ज़ोर से शोर मचाया। गुस्से में बौखलाए आरोपितों ने बेसबॉल बैट और लाठी-डंडों से उसे पीटना शुरू कर दिया। पीटते-पीटते निरंकुश आरोपित उसे सड़क पर ले आए और तमाशा बना दिया। पीड़िता को ज़मीन पर गिरा कर कई डंडे मारे गए।

वहाँ उपस्थित लोगों में से किसी ने भी बीच-बचाव की कोशिश नहीं की और सभी वीडियो बनाते रहे। अंत में जब आरोपितों का पीटने से जी भर गया तो पीड़िता ख़ुद उठ कर चली गई। आरोपितों ने युवती के साथ गाली-गलौज भी की। युवती ने ईंट उठा कर अपनी रक्षा करने का प्रयास किया। वहाँ मौजूद 30-40 लोग यूँ ही तमाशबीन बने रहे। पीड़िता ने कहा कि जब वह मामला दर्ज कराने कोतवाली गई तो वहाँ उसकी एक न सुनी गई। बाद में वीडियो वायरल होने पर पुलिस ने मामला दर्ज किया और युवती को बुलाया।

पीड़िता अनाथ है, उसके माता-पिता नहीं हैं। वह नोएडा में एक किराए के कमरे में रहती है और नौकरी कर अपना जीवन-यापन करती है। सबसे अजीब बात यह है कि लड़की लगातार चिल्लाती रही लेकिन 40 तमाशबीनों में से एक ने भी उसे बचाने की ज़हमत नहीं उठाई। कौशल्या रेसीडेंसी की छात्राओं ने वीडियो बना कर पुलिस के सामने साक्ष्य के रूप में पेश किया, जिसके बाद गिरफ़्तारी की कार्रवाई की गई। युवती को पैर से मारा गया, उसके बाल पकड़ कर भी घसीटे गए।

‘याद है 2017 में मैंने मोदी को क्या कहा था’ – ‘नीच’ से नीचता पर उतरे मणिशंकर अय्यर

साल 2017 में कॉन्ग्रेस नेता मणिशंकर अय्यर ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को ‘नीच किस्म का आदमी’ बोला था, विवादों का हिस्सा बने थे। इस दौरान उन्हें अपने इस बयान के कारण काफ़ी आलोचनाओं का सामना भी करना पड़ा था। नतीजतन कॉन्ग्रेस नेता को अपने इन बिगड़े बोलों के लिए माफ़ी तक माँगनी पड़ी थी। लेकिन हाल ही में मणिशंकर अय्यर ने एक लेख में मोदी की रैलियों और उनके बयानों का हवाला देते हुए कहा, “याद है 2017 में मैंने मोदी को क्या कहा था?” अपने लेख में अय्यर ने पूछा कि क्या उनकी भविष्यवाणी सही नहीं थी?

इस लेख में उन्होंने मोदी के रैलियों और साक्षात्कार में दिए बयानों का जिक्र किया है। प्रधानमंत्री की शैक्षिक पृष्ठभूमि पर बात करते हुए कॉन्ग्रेस नेता ने गणेश जी की ‘प्लास्टिक सर्जरी’ और उड़नखटोलों को प्राचीन विमान बताने वाले बयानों को ‘अज्ञानता भरे दावे’ बताया है। साथ ही इस लेख में अय्यर ने बालाकोट हमले के समय बादलों की आड़ का फायदा लेने वाले बयान की भी बात की है।

मणिशंकर अय्यर ने On Cloud Nine of Nationalism के नाम से अपना यह लेख पहले ‘राइज़िंग कश्मीर’ वेबसाइट के लिए लिखा। फिर इसे ‘द प्रिंट’ वालों ने ‘Modi’s ouster on 23 May will be India’s fitting reply to the most foul-mouthed PM’ के शीर्षक से पब्लिश किया। कॉन्ग्रेस नेता के लेख में नरेंद्र मोदी के उस बयान पर भी सवाल उठाए गए हैं, जिसमें उन्होंने कहा था कि राजीव गाँधी आईएनएस विराट को पर्सनल टैक्सी की तरह लक्षद्वीप ले गए थे। इन्हीं बयानों को याद दिलाते हुए अय्यर ने अपनी बात दोहराई – ‘याद है 2017 में मैंने मोदी के बारे में क्‍या कहा था? क्‍या मैंने सही भविष्‍यवाणी नहीं की थी?’

‘राइज़िंग कश्मीर’ में मणिशंकर अय्यर का लेख और लाल घेरे में विवादित हिस्सा

इस लेख के सुर्खियों में आने के बाद एक ओर जहाँ कुछ सोशल मीडिया यूजर्स अय्यर पर अपना गुस्सा जमकर उतार रहे हैं तो वहीं कुछ यूजर्स उनके बयानों को भाजपा के लिए ‘लकी चार्म’ भी बोल रहे हैं और कुछ उनके इस बयान को उनकी ‘ग्रैंड एंट्री’ बता रहे हैं। बता दें कि 2014 में मणिशंकर अय्यर के ‘चायवाला’ बयान ने नरेंद्र मोदी को चुनावों में काफ़ी फायदा पहुँचाया था, इसलिए लोग उनके इस बयान को भी सीरियस न लेकर ‘वेलकम’ कर रहे हैं।

गौरतलब है कि 2017 में नरेंद्र मोदी के लिए ‘नीच’ शब्द का प्रयोग करने पर अय्यर को पार्टी से सस्पेंड कर दिया गया था लेकिन 2018 की अगस्त में वह दोबारा पार्टी से जुड़ गए थे।

श्री लंका में भड़का मुस्लिम-विरोधी दंगा: पूरे देश में लगाना पड़ा कर्फ्यू, अब तक एक व्यक्ति की हत्या

श्री लंका में दो समुदायों के बीच भड़के दंगों में एक मुस्लिम व्यक्ति की सोमवार (मई 13, 2019) को मौत हो गई। खबरों के मुताबिक दंगाई पहले व्यक्ति की लकड़ी की दुकान में घुसे फिर वहाँ उस पर किसी तेज धार हथियार से वार किया। घायल व्यक्ति को पुतल्लम (Puttalam) जिले के अस्पताल में भर्ती कराया गया लेकिन कुछ देर बाद ही उसने दम तोड़ दिया। मृत व्यक्ति की उम्र 45 वर्ष थी।

रविवार (अप्रैल 12, 2019) को फेसबुक पोस्ट के बाद भड़के इन दंगों में ये मौत की पहली खबर है। इस घटना के बाद पूरे देश में रात के समय कर्फ्यू लगाने के आदेश दे दिए गए हैं। साथ ही पुलिस को निर्देश है कि दंगा करने वालों से निबटने के लिए अधिक से अधिक सुरक्षाबल का इस्तेमाल हो।

स्थानीय पुलिस ने दंगाइयों के खिलाफ कड़ी कार्रवाई की है। साथ ही पुलिस प्रमुख चंदना विक्रमरत्ने ने मुस्लिमों की दुकानों और वाहनों में आग लगाने वाले लोगों को टेलीविजन पर संदेश के जरिए चेतावनी दी है।

बता दें कि इन दंगों में अब तक कई घरों और मस्जिदों पर हमला किया जा चुका है। दंगाई हाथ में लाठी और हथियार लिए आते हैं और सीधा हमला कर देते हैं। इस समय श्री लंका में अल्पसंख्यक मुस्लिमों में और सिंहलियों में काफ़ी तनातनी का माहौल है। हालाँकि देश की राजधानी के तीन जिलों में सुरक्षा के कड़े प्रबंध हैं लेकिन हिंसा को रोकने के लिए पूरे देश में रात के समय कर्फ्यू लगाए जाने के निर्देश हैं।

इससे पहले रविवार (मई 12, 2019) को देश के पश्चिमी तटीय शहर चिलॉव में मुस्लिमों और ईसाइयों के बीच हुई झड़प के कारण वहाँ मध्य रात्रि से फेसबुक और व्हाट्सअप पर अस्थाई रूप से प्रतिबंध लगा दिया गया था।

झारखंड के पूर्व CM हेमंत सोरेन और उनकी पत्‍नी पर FIR दर्ज, भाजपा ने की थी शिकायत

आचार संहिता के उल्लंघन के मामले में झारखंड के पूर्व मुख्यमंत्री और झारखंड मुक्ति मोर्चा (झामुमो) के कार्यकारी अध्यक्ष हेमंत सोरेन और उनकी पत्नी पर एफआईआर दर्ज की गई है। दरअसल, राँची संसदीय सीट के लिए 6 मई को हटिया विधानसभा क्षेत्र के मतदान केंद्र संख्या-288 (सेंट फ्रांसिस स्कूल) में हेमंत सोरेन और उनकी पत्नी मतदान करने गए थे। इस दौरान वे झामुमो का पट्टा अपने गले में डालकर कतार में खड़े थे और दोनों ने पट्टा पहनकर ही वोट डाला था।

भारतीय जनता पार्टी ने इस मामले में चुनाव आयोग से शिकायत की थी। आयोग को दर्ज शिकायत में भाजपा ने कहा था कि हेमंत ने मतदाताओं को अपने पक्ष में मतदान करने के लिए प्रत्यक्ष ढंग से प्रभावित किया। शिकायत मिलने पर चुनाव आयोग ने जाँच के आदेश दिए। जिसके बाद राँची के कार्यपालक दंडाधिकारी राकेश रंजन उरांव ने मामले की जाँच की और आरोप को सही पाया। जाँच में आरोप के सही पाए जाने के बाद हेमंत सोरेन और उनकी पत्नी के खिलाफ सोमवार (मई 13, 2019) को रिप्रेजेंटेशन ऑफ पीपुल्स एक्ट 1951 एवं 188 आईपीसी के तहत प्राथमिकी दर्ज की गई और इसकी जानकारी और जाँच रिपोर्ट जिला प्रशासन द्वारा निर्वाचन आयोग को भेज दी गई है।

गौरतलब है कि, जब भाजपा ने हेमंत सोरेन और उनकी पत्नी के खिलाफ मतदान केंद्र पर पार्टी के सिंबल वाला पट्टा गले में डालकर जाने को आचार संहिता का उल्लंघन बताकर चुनाव आयोग से इसकी शिकायत की थी, तब हेमंत सोरेन ने कहा था कि यदि ऐसा करना चुनाव आचार संहिता का उल्लंघन होता तो कोई उनको रोकता। उनको किसी ने बताया भी नहीं कि इस प्रकार मतदान केंद्र में मतदान के लिए नहीं जा सकते।

हेमंत सोरेन के इस बयान को भाजपा प्रदेश प्रवक्ता प्रतुल शाहदेव ने हास्यास्पद बताया था और कहा था कि हेमंत सोरेन मुख्यमंत्री रह चुके हैं और वो ये कह कर नहीं बच सकते हैं। उन्होंने चुनाव के दिन बूथ के भीतर और बाहर पार्टी का सिंबल वाला पट्टा लगाकर अपनी पार्टी का प्रचार करने का प्रयास किया है। प्रतुल ने चुनाव आयोग से इस पर संज्ञान लेकर कार्रवाई करने का अनुरोध किया था।