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पाकिस्तानी जेल में बंद है नोएडा से लापता हुआ कश्मीरी छात्र, पिता को आया कॉल

उत्तर प्रदेश के नोएडा से कुछ समय पहले गायब हुए एक कश्मीरी छात्र के पाकिस्तान में बंद होने की ख़बर आई है। छात्र के परिवार ने बताया कि उन्हें पाकिस्तान से कॉल आई थी। कॉल करने वाले ने जानकारी दी कि उनका बेटा पाकिस्तान की जेल में बंद है।

गौरतलब है नोएडा के सेक्टर 125 स्थित एशियन बिजनेस स्कूल में पढ़ने वाला सैयद वाहिद नाम का छात्र 12 दिसंबर को गायब हो गया था।

पुलिस से बातचीच में सैयद के पिता ने बताया कि उन्हें पाकिस्तान से फोन आया था। ये कॉल उन्हें वहाँ की जेल से हाल ही में रिहा हुए एक कैदी ने किया था। उसने ही सैयद के वहाँ जेल में बंद होने की जानकारी दी। खबरों के मुताबिक रिहा हुए कैदी को सैयद ने अपने परिवार के नाम एक पत्र लिखकर दिया है। इसपर सैयद ने परिजनों का नाम और परिवार का पता भी लिखा है। फिलहाल, पुलिस मामले की सत्यता की जाँच कर रही है। उसके बाद ही विधिवत तरीके से आगे एक्शन लिया जाएगा।

सैयद का परिवार कश्मीर के बांदीपोरा इलाके में रहता है। उसकी गुमशुदगी एक्सप्रेसवे पुलिस और बांदीपोरा थाने में दर्ज है। इसलिए छात्र के पिता ने कॉल की जानकारी एक्सप्रेसवे पुलिस को दी है। सैयद के पिता नसीरुल हसन खुद भी कश्मीर पुलिस में दरोगा है। खबरों के मुताबिक सैयद को पाकिस्तान से वापस लाने के लिए परिजनों ने वहाँ जाने के लिए कागज़ी कार्रवाई शुरू कर दी है।

कॉन्ग्रेस सहित 21 विपक्षी दलों को लताड़: EVM-VVPAT मामले पर सुप्रीम कोर्ट ने कहा – ‘बार-बार क्यों सुनें हम?’

ईवीएम-वीवीपैट को लेकर 21 विपक्षी दलों की याचिका सुप्रीम कोर्ट ने ख़ारिज कर दी है। इससे बीच लोकसभा चुनाव में विपक्षी पार्टियों को तगड़ा झटका लगा है। इन दलों ने सुप्रीम कोर्ट में पुनर्विचार याचिका दाखिल की थी। इसमें टीडीपी, कॉन्ग्रेस और नेशनल कॉन्फ्रेंस सहित कई अहम दल शामिल थे। इन सभी दलों ने अदालत से चुनाव आयोग को 50% वीवीपैट पर्चियों की ईवीएम से मिलान करने का आदेश देने की माँग की थी, जिसे नकार दिया गया। सुनवाई के दौरान आंध्र प्रदेश के मुख्यमंत्री चंद्रबाबू नायडू और जम्मू कश्मीर के पूर्व मुख्यमंत्री फ़ारूक़ अब्दुल्ला मौजूद रहे। याचिका को ख़ारिज करते हुए सुप्रीम कोर्ट के मुख्य न्यायाधीश रंजन गोगोई ने पूछा कि अदालत इस मामले को बार-बार क्यों सुने?

सीजेआई गोगोई ने कहा कि वो इस मामले में दखलअंदाज़ी नहीं करना चाहते हैं। विपक्षी दलों की तरफ से कॉन्ग्रेस नेता और राज्यसभा सांसद अभिषेक मनु सिंघवी ने ज़िरह की। जस्टिस रंजन गोगोई, जस्टिस संजीव खन्ना और जस्टिस दीपक गुप्ता की पीठ ने विपक्षी दलों द्वारा दायर की गई समीक्षा याचिका को ख़ारिज कर दिया। 8 अप्रैल को सुप्रीम कोर्ट ने आदेश दिया था कि हर विधानसभा क्षेत्र (असेंबली सेगमेंट) में 1 के बदले 5 ईवीएम-वीवीपैट पर्चियों का मिलान किया जाएगा। विपक्षी दलों द्वारा 50% ईवीएम और वीवीपैट पर्चियों के मिलान की माँग पर अदालत ने यह निर्णय लिया था।

वहीं अभिषेक मनु सिंघवी ने बाद में कहा कि मुख्य याचिका में 50% ईवीएम और वीवीपैट पर्चियों के मिलान की बात कही गई है, लेकिन अदालत इसे 33% भी कर दे तो उन्हें कोई आपत्ति नहीं है। जब अदालत ने उनकी बात मानने से इनकार कर दिया तो सिंघवी ने 25% ईवीएम व वीवीपैट पर्चियों के मिलान की माँग रखी, जिसे नकार दिया गया। विपक्षी दलों का कहना था कि इस प्रक्रिया को वास्तविक, असरदार और अर्थपूर्ण बनाने के लिए ज़रूरी है कि आधे ईवीएम व वीवीपैट पर्चियों का मिलान किया जाए। अदालत ने समीक्षा याचिका में दिए गए तर्कों को योग्य नहीं समझा।

अदालत के फ़ैसले के बाद नाराज़ टीडीपी सुप्रीमो चंद्रबाबू नायडू ने कहा कि वह फिर से चुनाव आयोग जाएँगे। उन्होंने कहा कि तीसरा व चौथा फ्रंट, सब विपक्ष का ही हिस्सा है और वे सभी मिलकर चुनाव बाद प्रधानमंत्री का नाम तय करेंगे। बता दें कि 8 अप्रैल को सुप्रीम कोर्ट के आदेश के बाद चुनाव आयोग को 20625 ईवीएम की वीवीपैट पर्चियाँ गिननी हैं, अर्थात प्रति विधानसभा क्षेत्र में पाँच ईवीएम की जाँच होगी। लेकिन, 21 राजनीतिक दलों के नेताओं ने लगभग 6.75 लाख ईवीएम की वीवीपीएटी पेपर स्लिप के मिलान की माँग की थी, जो कि एक कठिन, उबाऊ और विवाद पैदा करने वाली प्रक्रिया हो सकती थी।

चंद्रबाबू नायडू का सवाल है कि ईवीएम को 190 से भी अधिक देशों में से मात्र 18 देशों ने ही क्यों अपनाया है? इनमें से शीर्ष के 3 देश 10 सबसे ज्यादा जनसंख्या वाले देश हैं। आंध्र के मुख्यमंत्री ने भाजपा पर ईवीएम को प्रोग्राम करने का आरोप मढ़ते हुए पूछा कि नए वीवीपैट में वोट स्लिप सिर्फ़ 3 सेकंड ही क्यों दिखाई देता है, जबकि इसे 7 सेकंड दिखाई देना चाहिए था? उन्होंने ईवीएम में छेड़छाड़ व गड़बड़ी किए जाने की बात कही। सुनवाई के समय वामपंथी नेता डी राजा भी अदालत में मौजूद थे।

एक नंबर की बकलोल हैं स्वरा भास्कर, बिना पढ़े-लिखे मोदी को किसानों का हत्यारा बता दिया

देश में चुनावी माहौल छाया हुआ है। इसमें आम जनता के साथ-साथ बॉलीवुड सेलेब्स की भी काफी सक्रियता देखने को मिल रही है। इन्हीं सेलेब्स में से एक हैं स्वरा भास्कर। ये आए दिन कोई न कोई उटपटांग बयान देती रहती हैं, जिसका कोई मतलब ही नहीं होता है। अभी स्वरा ने शुक्रवार (मई 3, 2019) को राजस्थान के सीकर शहर में एक रैली के दौरान केंद्र सरकार पर आरोप लगाते हुए कहा कि उन्होंने मध्य प्रदेश के मंदसौर में किसानों पर गोलियाँ चलवा दीं।

स्वरा का ये बयान बे सिर-पैर का लग रहा है। क्यों? क्योंकि राज्य में हुई घटना के लिए केंद्र सरकार को जिम्मेदार नहीं ठहराया जा सकता – खासकर तब जब मसला कानून-व्यवस्था से जुड़ा हो। देश की सरकारी कार्यप्रणाली में सभी का कार्य क्षेत्र बँटा हुआ है और अगर किसी राज्य के अंदर किसी तरह की कोई घटना होती है, तो उसके लिए राज्य सरकार वहाँ का प्रशासन जिम्मेदार होता है, ना कि केंद्र सरकार। खैर, इतना भारी-भरकम शायद ही समझ में आए स्वरा भास्कर को! क्योंकि समझने के लिए पढ़ना पड़ता है पर अफसोस ‘लाल-सलाम’ वालों ने किताब से दोस्ती कभी की नहीं। गाहे-बगाहे कभी की भी तो मार्क्स, लेनिन के सपनों की सैर करते रह गए और चे-गुआरा की टी-शर्ट से आगे निकल नहीं पाए!

और वैसे भी स्वरा भास्कर मध्य प्रदेश के मंदसौर जिले की जिस घटना के बारे में बात करते हुए उसे किसानों की हत्या ठहरा रही हैं, वो असल में हत्या नहीं, अपितु आत्मरक्षा थी, जो कि न्यायसंगत था। न्यायसंगत पर अटक मत जाइए, क्योंकि मंदसौर में हुए गोली काँड की जाँच के लिए गठित की गई न्यायिक जाँच आयोग ने अपनी रिपोर्ट में पुलिस और सीआरपीएफ को क्लीन चिट दे दी है। इस रिपोर्ट में कहा गया है कि भीड़ को तितर-बितर करने और आत्मरक्षा के लिए गोली चलाना आवश्यक और न्यायसंगत था। तब कई रिपोर्ट ऐसी भी आई थीं, जिसमें स्थानीय कॉन्ग्रेस नेताओं द्वारा किसानों को बरगलाने और तत्कालीन शिवराज सरकार के खिलाफ भड़काने वाली बातें कही गई थीं।

न्यायिक रिपोर्ट में इस बात का भी उल्लेख किया गया है कि उस दौरान सीआरपीएफ और राज्य पुलिस का गोली चलाना न तो अन्यायपूर्ण था और न ही बदले की भावना से उठाया गया कदम। इसके साथ ही, जाँच आयोग ने निलंबन पर चल रहे तत्कालीन कलेक्टर स्वतंत्र कुमार और एसपी ओपी त्रिपाठी को भी सीधा दोषी नहीं ठहराया था। इस जाँच रिपोर्ट के सामने आने के बाद तो राज्य सरकार पर भी ऊँगली नहीं उठाया जा सकता। ये रिपोर्ट तो पिछले साल ही आ गई थी। अगर स्वरा ने ये रिपोर्ट देखी होती तो शायद इस तरह की अनर्गल बयानबाजी नहीं करतीं।

चुनाव जीता तो सीलिंग रुकवा दूँगा: सुप्रीम कोर्ट के आदेश को केजरीवाल ने दिखाया ठेंगा

हाल ही में दिल्ली के मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल ने चुनाव प्रचार के दौरान किसी भी राजनैतिक दल का नाम लिए बिना जनता से कहा कि पार्टियाँ पैसे दें तो मना मत करना, लेकिन वोट आम आदमी पार्टी को ही देना। अरविंद केजरीवाल ने दक्षिण दिल्ली के उम्मीदवार राघव चड्ढा के समर्थन में आयोजित रोड शो में इस बात को कहा है। गौरतलब है कि इससे पहले भी चाँदनी चौक में वो इसी तरह की टिप्पणी कर चुके हैं, जिसके कारण निर्वाचन आयोग ने उन्हें कारण बताओ नोटिस भी भेजा था।

इतना ही नहीं ‘पैसे ले लेना, लेकिन वोट AAP को देना’ के अलावा, चुनाव जीतने के लिए अरविंद केजरीवाल ने दिल्ली के व्यापारियों की नब्ज को भी पकड़ा। अरविन्द केजरीवाल ने कहा, “प्रधानमंत्री मोदी द्वारा नोटबंदी करने के बाद देश के व्यापारियों में अफरा-तफरी मच गई थी। जब नोटबंदी का प्रभाव कम हुआ तो बिना तैयारी के जीएसटी लागू कर दिया गया। दिल्ली के व्यापारियों पर सीलिंग की भी मार पड़ी, जिसके कारण बड़ी संख्या में रोजगार खत्म हुए।

अमर उजाला में प्रकाशित खबर के मुताबिक, पार्टी कार्यालय से हुई मीडिया में बातचीत में उन्होंने आरोप लगाया कि बीते पाँच सालों में केंद्र सरकार की आर्थिक नीतियों ने अर्थव्यवस्था को बर्बाद किया है। इसके कारण व्यापारियों में खासी नाराज़गी है। केजरीवाल ने व्यापारियों से अपील की है कि इस बार अगर वह सातों सीट पर आम आदमी पार्टी को जितवा देंगे, तो केजरीवाल दिल्ली में सीलिंग नहीं होने देंगे। हालाँकि, केजरीवाल के इस दावे पर दिल्ली के कारोबारियों का कहना है कि अरविंद केजरीवाल का यह दावा गलत है क्योंकि यह मामला केंद्र सरकार का है और यह पूरा मामला सुप्रीम कोर्ट में है। ऐसे में जो मुद्दा सुप्रीम कोर्ट में है, उस पर दिल्ली की सातों सीट जीतकर क्या किया जाएगा इसका पता नहीं है।

वैसे तो चुनाव प्रचार के लिए हर पार्टी और राजनेता अपने-अपने ढंग से मतदाताओं को रिझाने में जुटे हुए हैं। इसी दिशा में अरविंद केजरीवाल भी रैलियाँ करके दिल्ली की जनता से आप को वोट देने की गुहार लगा रहे हैं, लेकिन उनकी इन अपीलों को सुनकर लगता है कि शायद वो अपने पद की गरिमा और माननीय सर्वोच्च न्यायालय की ताकत को भूल रहे हैं। या फिर यह भी हो सकता है कि उन्हें चुनाव जीतने के लिए कोई और मुद्दा न दिख रहा हो।

सुप्रीम कोर्ट ने दिया है दिल्ली में सीलिंग का आदेश

अरविन्द केजरीवाल दिल्ली की जनता को पहले ही पूर्ण राज्य का सपना दिखाकर पार्टी के लिए वोटों की माँग कर रहे हैं, और अब सीलिंग रुकवाने का झूठ बोलने लगे हैं। केजरीवाल को जानने-समझने की जरूरत है कि जिस प्रकार दिल्ली को पूर्ण राज्य बनाने का कार्य अकेले केजरीवाल और दिल्ली के 7 लोकसभा सीटों के विधायक नहीं कर सकते हैं, उसी प्रकार दिल्ली में सीलिंग रोकने काम भी वो, और उनके 7 विधायक नहीं कर सकते हैं क्योंकि दिल्ली में हो रही सीलिंग का आदेश  सुप्रीम कोर्ट द्वारा दिया गया है। केजरीवाल के इस बयान के बाद उन्हें सोशल मीडिया पर जमकर घेरा जा रहा है। लोग उनसे सवाल कर रहे हैं कि अगर ऐसा हो सकता था, तो उन्होंने अब तक सीलिंग क्यों नहीं रुकवाई? इसके अलावा कुछ लोग केजरीवाल को उनके अधूरे वादों की याद दिला कर भी उनसे जवाब माँग रहे हैं।

जावेद ‘ट्रोल’ अख़्तर ने रावण से कर दी साध्वी प्रज्ञा की तुलना, अब झेलेंगे मानहानि का मुक़दमा

स्क्रिप्ट लेखक से गीतकार और फिर ट्विटर ट्रोल बने जावेद अख़्तर के ख़िलाफ़ आपराधिक मानहानि का मुक़दमा दर्ज कर उन पर कड़ी से कड़ी कार्रवाई करने की माँग की गई है। भोपाल की एक अदालत में इससे जुड़ी याचिका दाखिल की गई। न्यायिक मजिस्ट्रेट विजय सूर्यवंशी की अदालत में अशोका गार्डन निवासी राजेश कुंसारिया ने परिवाद पेश करते हुए निवेदन किया कि जावेद अख़्तर को कठोर सजा दी जाए। अदालत 24 जून को शिकायतकर्ता के बयान दर्ज करेगी। शिकायत में कहा गया है कि जावेद अख्तर ने गुरुवार (मई 2, 2019) को भोपाल लोकसभा सीट से भाजपा प्रत्याशी साध्वी प्रज्ञा सिंह ठाकुर को मानहानिकारक शब्द कहे थे।

जावेद अख्तर ने साध्वी प्रज्ञा को रावण बताते हुए कहा था, “उसकी वेशभूषा पर मत जाओ। सिर्फ़ इसलिए कि एक व्यक्ति संत की तरह दिखता है, इसका मतलब यह नहीं है कि वह व्यक्ति संत ही है। यह मत भूलिए कि जब रावण सीता का अपहरण करने के लिए आया था, तो उसने भी एक संत की तरह कपड़े पहने हुए थे।” शिकायतकर्ता ने कहा कि चूँकि जावेद अख्तर के ये बयान सार्वजनिक मंच पर दिए गए और इसे टीवी न्यूज़ से लेकर अख़बारों तक में भी दिखाया गया, इससे उन्हें आघात पहुँचा है। जावेद अख़्तर ने भाजपा को सलाह दी थी कि साध्वी प्रज्ञा को उस क्षेत्र से लड़ाया जाए, जहाँ सबसे ज्यादा अशिक्षित और सांप्रदायिक लोग रहते हों।

जावेद अख्तर ने साध्वी प्रज्ञा और भारतीय जनता पार्टी पर हमला बोलते हुए आगे कहा,

मुझे लगता है कि भाजपा ने प्रज्ञा ठाकुर को भोपाल से उम्मीदवार बनाकर पहले ही अपनी हार मान ली है। भाजपा ने यह मान लिया है कि अब अपने को अच्छा दिखाने का ड्रामा नहीं करना चाहिए और असली मुद्दे पर आ जाना चाहिए क्योंकि चुनाव में वही काम आने वाला है। अभी तक जो पर्दा ओढ़ा गया था, उसे हटा दिया गया है। भाजपा को अगर जीत का थोड़ा सा भी विश्वास होता तो वह प्रज्ञा ठाकुर को टिकट नहीं देती। उन्हें भी प्रज्ञा को उम्मीदवार बनाने में तकलीफ हुई होगी, मगर मजबूरी के कारण उन्हें ऐसा करना पड़ा होगा।

जावेद अख़्तर इधर कई दिनों से अलूल-जलूल बयान दे रहे हैं। कुछ दिनों पहले ही उन्होंने कहा था कि अगर बुर्क़ा पर प्रतिबन्ध लगता है तो घूँघट पर भी लगना चाहिए। उनके इस बयान के बाद बवाल मचा और करणी सेना ने उन्हें परिणाम भुगतने की चेतावनी भी दी है। जावेद अख्तर ने कहा था कि लोकतंत्र तभी आगे बढ़ता है और फलता-फूलता है जब राजनीति और धर्म को अलग-अलग रखा जाए।

‘मोदी खो चुके हैं मानसिक संतुलन, चाकूबाज साध्वी प्रज्ञा पहनती थीं जींस-टीशर्ट’

कॉन्ग्रेस पार्टी के राज्य मुख्यालय ‘राजीव भवन’ में सोमवार (मई 07, 2019) को एक संवाददाता सम्मेलन में छत्तीसगढ़ के मुख्यमंत्री भूपेश बघेल ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी पर विवादित टिप्पणी करते हुए कहा कि वह अपना मानसिक संतुलन खो चुके हैं और उन्हें इलाज की ज़रूरत है। बता दें कि प्रधानमंत्री मोदी ने पूर्व प्रधानमंत्री राजीव गाँधी को भ्रष्टाचारी नंबर एक बताया था, जिसके बाद बौखलाए कॉन्ग्रेस नेता लगातार उन पर हमले कर रहे हैं।

पत्रकारों को सम्बोधित करते हुए CM बघेल ने कहा कि राजीव गाँधी के प्रति PM मोदी की टिप्पणी निंदनीय है और उन्हें देश से माफ़ी माँगनी चाहिए। राजीव गाँधी के योगदान को मील का पत्थर बताते हुए बघेल ने कहा कि सूचना एवं प्रौद्योगिकी के क्षेत्र में उन्होंने एक से एक काम किए थे। इसके साथ ही, बघेल ने कहा कि राजीव जी ने देश की एकता एवं अखंडता के लिए अपना बलिदान दे दिया।

भूपेश बघेल ने राजीव गाँधी को मरणोपरांत भारत रत्न दिए जाने की चर्चा भी की। राजीव गाँधी को 1991 में मरणोपरांत भारत रत्न से सम्मानित किया गया था। बघेल ने पंचायती राज के क्षेत्र में राजीव गाँधी के किरदार को अहम बताया। बघेल ने कहा कि कोई सोच भी नहीं सकता है कि प्रधानमंत्री के पद पर बैठे व्यक्ति एक ऐसे आदमी के बारे में टिप्पणी करेगा, जो जीवित ही नहीं है। इसके आगे CM बघेल ने कहा, क्योंकि वो 3-4 घंटे ही सोने का दावा करते हैं, इस कारण नींद की कमी की वजह से प्रधानमंत्री का मानसिक संतुलन ख़राब हो गया है। उन्होंने मोदी के प्रधानमंत्री बनने को देश के लिए खतरनाक बताया। उन्होंने कहा कि कुर्सी और सत्ता के भूखे मोदी देशभक्ति का झूठा दावा करते हैं।

प्रधानमंत्री मोदी पर टिप्पणी करते हुए छत्तीसगढ़ प्रदेश कॉन्ग्रेस कमेटी के अध्यक्ष भूपेश बघेल ने कहा: “नरेंद्र मोदी सत्ता हथियाने के लिए किसी भी स्तर तक नीचे गिर सकते हैं। उनके इस तरह के बयान से यह साबित होता है कि उन्होंने इस आम चुनावों में अपनी हार स्वीकार कर ली है। भाजपा लोकसभा चुनाव में 150 से अधिक सीटें नहीं जीतने वाली है और यूपीए 300से अधिक सीटों पर जीत दर्ज करेगी।

उधर रविवार (मई 5, 2019) को मुख्यमंत्री भूपेश बघेल ने साध्वी प्रज्ञा पर भी विवादित टिप्पणी करते हुए कहा कि उन्होंने जींस-टीशर्ट पहनने के बाद भगवा चोला ओढ़ा है। भोपाल से भाजपा की लोकसभा प्रत्याशी साध्वी प्रज्ञा सिंह ठाकुर को बघेल ने आदतन अपराधी बताते हुए कहा कि उन्होंने कई लोगों के साथ बदतमीजी की है। उन्होंने कहा, “प्रज्ञा ने न जाने कितने लोगों से चप्पल की भाषा में बात की है और एक शख़्स को उन्होंने चाकू भी मार दिया था। बिलाईगढ़ का हर शख्स जानता है कि वह शुरुआत से आदतन अपराधी रही हैं। बाद में उन्होंने भगवा पहनना शुरू किया, लेकिन उसे पहनने से कोई साध्वी नहीं बन जाता। उनका व्यवहार साध्वी की तरह नहीं लगता। साध्वी प्रज्ञा झगड़ालू प्रवृत्ति की रही हैं और छोटी-छोटी बात पर झगड़ा करती थीं।”

भूपेश बघेल द्वारा पीएम मोदी और साध्वी प्रज्ञा पर टिप्पणी किए जाने को लेकर भाजपा ने कड़ा विरोध दर्ज कराया। राज्य में भाजपा के प्रवक्ता सच्चिदानंद उपासने ने कहा कि मोदी जब से प्रधानमंत्री बनें हैं, कॉन्ग्रेस नेता उन पर आपत्तिजनक टिप्पणियाँ कर रहे हैं। उन्होंने कहा कि छत्तीसगढ़ के मुख्यमंत्री को अपने संवैधानिक पद का ख्याल रखते हुए इस अशोभनीय टिप्पणी के लिए माफ़ी माँगनी चाहिए। मध्य प्रदेश भाजपा प्रवक्ता हितेश वाजपेयी ने कहा कि साध्वी प्रज्ञा पर CM बघेल का बयान शर्मनाक और झूठा है।

‘फिक्सर और बिचौलिए’ सुप्रीम कोर्ट में भी? राहुल और राफेल की अलग-अलग तारीखों पर बौखलाए CJI

राफेल मामले की सुनवाई के दौरान प्रधान न्यायाधीश रंजन गोगोई की अध्यक्षता वाली पीठ दो मामलों की तारीखें एक साथ न देखकर हैरान रह गई। यह हुआ सोमवार को यानी मई 6, 2019 को। सुप्रीम कोर्ट की पीठ के मुताबिक उन्होंने राहुल गाँधी अवमानना मामले और राफेल पर एक ही तारीख को सुनवाई करने का फैसला किया था। लेकिन सुनवाई के दौरान जब पीठ को पता चला कि दोनों मामलों से जुड़ी तिथियाँ अलग-अलग हैं तो उन्हें बहुत आश्चर्य हुआ। उन्हें यह कहने पर मजबूर होना पड़ा कि आखिर यह हुआ कैसे!

पीठ ने कहा कि यह हैरानी वाली बात है कि उनके आदेश के बाद भी राहुल गाँधी के ख़िलाफ़ दायर अवमानना याचिका को राफेल की सुनवाई के साथ सूचीबद्ध नहीं किया गया। अपनी इस बात के साथ ही कोर्ट ने मामले की सुनवाई को 10 मई तक के लिए टाल दिया। अब 10 मई को अवमानना मामले की सुनवाई और राफेल को लेकर दायर पुनर्विचार याचिका पर एक साथ सुनवाई होगी।

गौरतलब है कि प्रशांत भूषण की ओर से राफेल मामले में दायर की गई याचिका उस मामले से जुड़ी हुई है, जिसमें फ्रेंच एविएशन फर्म दसॉ के साथ 36 राफेल विमान सौदे की मंजूरी से जुड़े फैसले पर फिर से विचार करने की माँग की गई है। वहीं दूसरी ओर कॉन्ग्रेस अध्यक्ष राहुल गाँधी के ख़िलाफ़ मीनाक्षी लेखी ने अवमानना याचिका दर्ज की है।

दरअसल, राहुल ने एक चुनावी रैली में सुप्रीम कोर्ट का हवाला देकर गलत दावा किया था। उन्होंने कहा था कि शीर्ष अदालत भी इस बात को कह चुका है कि चौकीदार चोर है, जबकि हकीक़त में कोर्ट ने ऐसा कुछ नहीं कहा था। मीनाक्षी लेखी द्वारा याचिका दर्ज कराने के बाद राहुल गाँधी ने इस पर हलफनामा दर्ज कर अपनी गलती को माना है और अपने इस बयान पर खेद जताया है। लेकिन उनके इस हलफनामे पर सर्वोच्च न्यायालय संतुष्ट नहीं है।

न्यायाधीश केएम जोसेफ और जस्टिस एसके कौल की पीठ ने 10 मई को दोपहर 2 बजे सुनवाई के लिए दोनों मामलों को सूचीबद्ध किया है। लेकिन इन दोनों मामलों पर सुनवाई से ज्यादा अब इस बात पर सवाल उठ रहे हैं कि आखिर पीठ द्वारा तय तारीखें बदलीं कैसे? तारीखों में हेरफेर और कोर्ट के आदेश का पालन न होने पर संदेह प्रत्यक्ष रूप से ‘फिक्सर और बिचौलियों‘ पर जा रहा है। आपको बता दें कि तारीखों के हेर-फेर में सुप्रीम कोर्ट पहले से ही फिक्सर और बिचौलियों को लेकर जाँच का आदेश दे चुकी है। ऐसे में दो और हाई-प्रोफाइल मामलों से संबंधित तारीखों की हेराफेरी किसी बड़े गैंग या मोडस ऑपरेंडी की ओर इशारा करती है।

सुप्रीम कोर्ट के गलियारे में चल रही तारीखों वाली यह खबर न सिर्फ मीडिया बल्कि सोशल मीडिया पर भी चर्चा का विषय बन चुकी है। लोग तरह-तरह के सवाल कर रहे हैं। कुछ इसे राहुल गाँधी और कॉन्ग्रेस की साजिश बता रहे हैं तो कोई राफेल डील को पटरी से उतारने और सेना के मनोबल को तोड़ने वाला देशद्रोही गैंग की करतूत। नेताओं से परे कुछ लोग इसमें बड़े बिजनेसमैन का हाथ बता रहे हैं। कुछ सवाल को अगले स्तर तक ले जाते हुए यह तक पूछ रहे हैं कि आखिर कितनी बड़ी साजिश है कि खुद चीफ जस्टिस को किसी केस की सुनवाई के दौरान इसके ऊपर बोलना पड़ गया। वो भी तब जब ऐसे फिक्सर और बिचौलियों की जाँच को लेकर आदेश दिया जा चुका है।

मेरे परिवार से लिया जा सकता है प्रतिशोध: CJI को क्लीन चिट के बाद ‘डरी हुई’ पीड़िता का बयान

सोमवार को सुप्रीम कोर्ट के मुख्य न्यायाधीश रंजन गोगोई द्वारा गठित आतंरिक कमिटी ने उन पर लगे यौन शोषण के आरोपों से उन्हें मुक्त कर दिया। कमिटी ने गोगोई के ख़िलाफ़ सुप्रीम कोर्ट की एक पूर्व कर्मचारी द्वारा लगाए गए आरोपों का कोई ठोस सबूत नहीं पाया। उन्होंने जो रिपोर्ट दी, उसे सार्वजनकि भी नहीं किया जाएगा क्योंकि कहा गया कि यह एक आंतरिक जाँच प्रक्रिया थी। इन पैनल में 2 महिला जज भी शामिल थीं। पीड़िता सीजेआई गोगोई के आवास स्थित कार्यालय में काम करती थीं। उसने जस्टिस गोगोई पर यौन शोषण के आरोप लगाए थे और कहा था कि जब उसने उनके कहे अनुसार यह सब करना बंद कर दिया, तो उसे नौकरी से ही निकाल दिया गया। अब इन-हाउस कमिटी द्वारा जस्टिस गोगोई को क्लीन चिट दिए जाने के बाद उक्त महिला ने ख़ुद को काफ़ी ‘डरी हुई और भयाक्रांत’ बताया है। उसने कहा कि वह बहुत ही भयातुर हैं और कुछ भी हो सकता है।

महिला ने कहा कि कमिटी के इस निर्णय से वह हतोत्साहित और उदास हैं। महिला ने कहा कि कमज़ोर एवं शक्तिहीन लोगों को न्याय देने की सिस्टम की क्षमता पर से उनका विश्वास उठने लगा है। एक बयान में उन्होंने कहा कि सिस्टम के अंदर ही शक्तिहीनों को शक्तिशाली लोगों के आगे खड़ा कर दिया जाता है। बता दें कि उक्त महिला ने आंतरिक कमिटी के समक्ष शामिल होने से इनकार कर दिया था और कहा था कि उन्हें कमिटी से न्याय की कोई उम्मीद नहीं है। महिला द्वारा पेश होने से इनकार करने के बावजूद कमिटी की सुनवाई चालू रही और मुख्य न्यायाधीश रंजन गोगोई कमिटी के समक्ष पेश हुए।

पीड़िता ने पूछा कि उसने अपनी शिकायत में जिन लोगों के नाम लिए थे, क्या उनमें से किसी को भी जानकारी इकट्ठा करने के लिए बुलाया गया? उसने कहा कि उसकी अनुपस्थिति में उसके चरित्र पर सवाल खड़े किए गए और ग़लत तरीके से उसकी निंदा की गई। वहीं जस्टिस गोगोई ने कहा कि उन्हें जानबूझ कर निशाना बनाया जा रहा है क्योंकि उन्हें कई अहम मुद्दों पर सुनवाई करनी है। जस्टिस गोगोई ने कहा कि इसके पीछे बहुत बड़ी ताक़तें हैं जो सीजेआई के पद को निष्क्रिय करना चाहते हैं। साथ ही उन्होंने कहा कि न्यायिक व्यवस्था की स्वतन्त्रता पर भी ख़तरे हैं।

पिछले सप्ताह कमिटी से न्याय की उम्मीद को बेमानी बताते हुए महिला ने इस मामले से अपना नाम वापस ले लिया था और कहा था कि कमिटी का वातावरण काफ़ी डरावना है। महिला ने कहा था कि वह काफ़ी नर्वस महसूस कर रही थीं क्योंकि साथ में उसे काउंसल ले जाने की इज़ाज़त नहीं दी गई थी ताकि वह मामले व सुनवाई से जुड़ी चीजों पर चर्चा न कर सकें। महिला ने कहा कि उसके परिवार वालों से प्रतिशोध लिया जा सकता है और किसी भी प्रकार के हमले किए जा सकते हैं। महिला के अनुसार, कमिटी ने पीड़िता को जाँच रिपोर्ट की कॉपी देने से भी इनकार कर दिया है।

सेना को सलाम: पत्थर खाकर भी चलाते हैं गुडविल स्कूल, 100% बच्चे 10वीं में पास, हिज़्बुल नाराज़

जम्मू कश्मीर में भारतीय सेना द्वारा चलाए जा रहे आर्मी गुडविल स्कूलों का पासिंग पर्सेंटेज 100% रहा है। सोमवार (मई 6, 2019) को सीबीएसई ने दसवीं के परीक्षा परिणाम जारी किए। बता दें कि राज्य में कुल ऐसे 43 गुडविल स्कूल संचालित किए जाते हैं, जिनमें से 3 सीबीएसई से सम्बद्ध हैं। राजौरी स्थिति गुडविल स्‍कूल के छात्र हित्‍ताम अयूब ने 94.2% अंक पाकर टॉप किया है। जम्मू कश्मीर में संचालित किए जा रहे इन गुडविल स्कूलों में 15,000 से भी अधिक छात्रों की शिक्षा-दीक्षा हो रही है। इनमें से अधिकतर जम्मू कश्मीर एजुकेशन बोर्ड स जुड़े हुए हैं। भारतीय सेना के अथक प्रयासों के कारण ये स्कूल अशांति के दौर में भी खुले रहते हैं व यहाँ पढ़ाई-लिखाई पर कोई असर नहीं पड़ता।

इन गुडविल स्कूलों से काफ़ी प्रतिभावान छात्र भी निकल कर सामने आए हैं। इनमें से एक छात्र ताजमुल इस्लाम ने किक-बॉक्सिंग चैंपियनशिप जीत कर राज्य और स्कूल का नाम रोशन किया था। 2017 में कश्मीरी अलगाववादियों ने इन स्कूलों में दी जा रही शिक्षा को आड़े हाथों लिया था। अलगाववादी सैयद अली शाह गिलानी ने कहा था कि ये संस्थान कश्मीरी छात्रों को अपने धर्म एवं संस्कृति से विमुख कर रहे हैं। उन्होंने अभिभावकों को गुडविल स्कूलों को नज़रअंदाज़ करने की सलाह दी थी। गिलानी ने कहा था कि थोड़े फायदों के लिए हम अपनी अगली पीढ़ी को गँवा रहे हैं। गिलानी ने कहा था, “एक देश जो आज़ादी के लिए लड़ रहा है, वो कब्जेदारों को अपने बच्चों की देखरेख करने की इज़ाज़त नहीं दे सकता।” यह अलग बात है कि खुद गिलानी के सभी बच्चे शानदार शिक्षा पाकर जीवन के हर सुख-सुविधा का आनंद उठा रहे हैं।

बता दें कि कश्मीरी स्कूल और शिक्षा हमेशा से अलगाववादियों व आतंकियों के निशाने पर रहे हैं। 2016 में इनके द्वारा फैलाई गई अशांति के कारण कई सरकारी व प्राइवेट स्कूल 6 महीने तक बंद रहे थे लेकिन फिर भी गुडविल स्कूल चलते रहे थे। 2013 में भी गिलानी ने गुडविल स्कूलों के विरुद्ध ज़हर उगला था। गिलानी ने 2013 में कहा था कि सेना द्वारा चले जा रहे सद्भावना स्कूलों में सनक और बेहूदगी फैलाई जा रही है, जिसे बंद किया जाना चाहिए। इधर गुडविल स्कूलों के अच्छे परफॉरमेंस से ख़फ़ा हिज़्बुल मुजाहिदीन ने छात्रों के विरोध में पोस्टर्स चिपकाएँ हैं और कहा है कि ऐसा नहीं चलेगा।

2016 में भारतीय सेना ने घाटी में स्कूल चलो अभियान चलाया था, जिसमें छात्रों को स्कूलों में दाखिला लेने के लिए कहा जाता था और उन्हें मुफ़्त में कोचिंग की सुविधा भी दी जाती थी। इतना ही नहीं, इन छात्रों को पढ़ाई के अलावा खेल-कूद सहित अन्य क्रियाकलापों में भी बढ़-चढ़ कर भाग लेना सिखाया जाता है। इन स्कूलों में प्रशिक्षित एवं योग्य शिक्षक होते हैं। 1998 में 4 गुडविल स्कूलों के साथ शुरू हुए शिक्षा के इस पवित्र सफ़र को सेना नित नए आयाम दे रही है। इससे न सिर्फ़ 15,000 बच्चों को शिक्षा मिल रही है बल्कि 1000 शिक्षक एवं अन्य कर्मचारियों को भी रोज़गार मिला है। डिजिटल क्लासरूम, आधुनिक लाइब्रेरी और ढाँचागत सुविधाएँ इन स्कूलों की ख़ासियत है।

Pak लड़कियों का चीन में देह व्यापार: मसूद अज़हर मामले के बाद 8 चाइनीज नागरिक गिरफ़्तार

पाकिस्तानी आतंकी मसूद अज़हर को संयुक्त राष्ट्र द्वारा ग्लोबल आतंकी घोषित किए जाने पर इस बार चीन ने अड़ंगा नहीं लगाया। कहा जा रहा है कि इसके बाद पाकिस्तान और चीन के रिश्ते पहले जैसे नहीं रहे। पाकिस्तान की फेडरल इन्वेस्टिगेशन एजेंसी (FIA) ने सोमवार (मई 6, 2019) को चीन के 8 नागरिकों को गिरफ़्तार किया, जिनमें एक महिला भी शामिल है। इन सब पर मानव तस्करी का आरोप है। ये लोग पाकिस्तान से लड़कियों की तस्करी कर उन्हें चीन ले जाते थे। इन लड़कियों से पहले तो फ़र्ज़ी शादी का कॉन्ट्रैक्ट किया जाता है, फिर इन्हें चीन ले जाकर देह व्यापार की काली इंडस्ट्री में धकेल दिया जाता है। पाकिस्तान की इस कार्रवाई को चीन द्वारा मसूद अज़हर मामले में भारत के सामने झुकने से जोड़ कर देखा जा रहा है।

पिछले सप्ताह भी एफआईए ने 2 चीनी नागरिकों को गिरफ़्तार किया था। इन्हें फैसलाबाद में एक शादी समारोह से उठाया गया था। फैसलाबाद पाकिस्तान के प्रसिद्ध शहर लाहौर से 150 किलोमीटर की दूरी पर स्थित है।पाकिस्तानी एजेंसी एफआईए के पंजाब निदेशक तारिक रुस्तम ने एजेंसी की इस कार्रवाई के बारे में न्यूज एजेंसी पीटीआई को बताया:

“गिरफ़्तार किए गए ये लोग मानव तस्करी में शामिल हैं और पाकिस्तानी लड़कियों को चीन ले जाकर उनसे देह व्यापार कराते हैं। हमें सूचना मिली थी कि चाइनीज नागरिक पाकिस्तान से अंग तस्करी और मानव तस्करी कर रहे हैं। ये लोग ज्यादातर पाकिस्तान में रह रही अल्पसंख्यक ईसाई समुदाय की लड़कियों से शादी करते हैं। इसके बाद उन्हें चीन ले जाकर उनसे जबरन देह व्यापार कराते हैं।”

गिरफ़्तार आरोपितों में इस गिरोह का कैनेडिश सरगना भी शामिल है। पिछले एक साल से लाहौर एयरपोर्ट के पास रह रहा कैनेडिश सरगना पाकिस्तानी लड़कियों को पहले लाहौर के किसी किराए के घर में रखता था। वहाँ उन्हें चाइनीज भाषा सिखाई जाती थी। फिर उन लड़कियों के शादी सम्बन्धी फ़र्ज़ी दस्तावेज तैयार किए जाते थे। इसके बाद उन्हें चीन ले जाया जाता था और फिर देह व्यापार में ढकेल दिया जाता था। बता दें कि चीन और पाकिस्तान की सीमावर्ती इलाकों में लम्बे अरसे से आपस में शादियाँ होती आई हैं। पाकिस्तान में अल्पसंख्यक लड़कियों के प्रति दुराचार, अत्याचार और दुष्कर्म की घटनाएँ आम हैं। कहा जा रहा है कि ये चाइनीज गिरोह काफ़ी दिनों से पाक में सक्रिय है लेकिन चीन को नाराज़ न करने के लिए इन पर कार्रवाई नहीं की जा रही थी।

पाकिस्तानी अधिकारी पिछले कुछ वर्षों में अवैध तरीके से चीन भेजी गई लड़कियों की सूची तैयार कर रहे हैं और आँकड़ें का पता लगा रहे हैं। शक है कि इनकी संख्या सैंकड़ों में हो सकती है। पाकिस्तानी सरकार ने एजेंसियों को ऐसे चाइनीज गिरोहों के ख़िलाफ़ सख्ती से काम लेने को कहा है। ग़रीब ईसाई लड़कियाँ पैसे और बेहतर जीवन की लालसा में इनके बहकावे में आ जाती हैं। फ़र्ज़ी मैच मेकिंग सेंटर के जरिए इन्हें झाँसे में लाया जाता है। फ़र्ज़ी दस्तावेजों में चाइनीज लड़कियों को ईसाई या मुस्लिम धर्म का दिखाया जाता है। अंतरराष्ट्रीय स्तर पर भी चीन में अल्पसंख्यकों के साथ हो रहे दुर्व्यवहार का मुद्दा कई बार उठ चुका है।