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CJI गोगोई के ख़िलाफ़ यौन उत्पीड़न की ख़बरों पर प्रतिबंध के लिए HC में याचिका दायर

दिल्ली उच्च न्यायालय में एक याचिका दायर की गई है, जिसमें भारत के मुख्य न्यायाधीश रंजन गोगोई के ख़िलाफ़ उत्पीड़न के आरोपों की रिपोर्ट करने के लिए मीडिया पर प्रतिबंध लगाने की माँग की गई है। याचिका में टीवी, अख़बारों और सोशल मीडिया प्लेटफार्मों पर CJI गोगोई के ख़िलाफ़ यौन उत्पीड़न के आरोपों से संबंधित ख़बरों के प्रकाशित करने पर रोक लगाने के लिए सरकार और भारतीय प्रेस परिषद से निर्देश माँगे गए।

मुख्य न्यायाधीश राजेंद्र मेनन की अध्यक्षता वाली पीठ ने याचिका पर सुनवाई की, जिसमें CJI के ख़िलाफ़ यौन उत्पीड़न के आरोपों को प्रसारित करने से “समाचार मीडिया चैनलों और अन्य प्लेटफार्मों पर तत्काल प्रतिबंध” की माँग की और इसे सोमवार (29 अप्रैल) को सुनवाई के लिए सूचीबद्ध किया।

एंटी करप्शन काउंसिल ऑफ़ इंडिया ने अपने वकीलों के माध्यम से, इस आधार पर मामले की तत्काल सूची के लिए उच्च न्यायालय का दरवाजा खटखटाया कि CJI के ख़िलाफ़ आरोपों का प्रसारण और प्रकाशन “भारतीय न्यायिक प्रणाली पर सीधा हमला है।”

इस याचिका में क़ानून मंत्रालय, सूचना और प्रसारण मंत्रालय, दिल्ली सरकार, प्रेस काउंसिल ऑफ़ इंडिया, दिल्ली पुलिस कमिश्नर, ऑपरेशनल हेड वाट्सएप, गूगल, यूट्यूब, लिंक्डइन और वेबसाइट Scroll.in को पक्षकार बनाया गया है।

सुप्रीम कोर्ट की एक पूर्व महिला कर्मचारी द्वारा भारत के मुख्य न्यायाधीश रंजन गोगोई के ख़िलाफ़ यौन उत्पीड़न के गंभीर आरोप लगाए गए थे। अदालत ने CJI पर लगाए गए आरोपों की आंतरिक जाँच के आदेश दिए थे और साथ ही मुख्य न्यायाधीश के ख़िलाफ़ साज़िश के आरोपों की जाँच के निर्देश दिए थे। CJI ने कहा था कि यह आरोप उन्हें अगले सप्ताह महत्वपूर्ण मामलों की सुनवाई से रोकने की बड़ी साज़िश है। इन मामलों में राहुल गाँधी की अवमानना का मामला भी शामिल था।


भीम आर्मी चीफ अशोक कांबले ने साध्वी प्रज्ञा के मुँह पर कालिख पोतने के लिए रखा ₹5 लाख का ईनाम, गिरफ्तार

भोपाल से भाजपा उम्मीदवार साध्वी प्रज्ञा सिंह ठाकुर के मुँह पर कालिख पोतने वाले को ₹5 लाख का ईनाम देने का ऐलान करने वाले महाराष्ट्र भीम आर्मी के चीफ अशोक कांबले को गिरफ्तार कर लिया गया है। इस मामले में पुलिस ने कांबले के अलावा सात अन्य पार्टी कार्यकर्ताओं को भी गिरफ्तार किया है। पिछले दिनों साध्वी प्रज्ञा ठाकुर ने शहीद हेमंत करकरे को लेकर एक विवादास्पद बयान देते हुए कहा था कि उन्हें मेरा श्राप लगा था, जिसके सवा महीने बाद आतंकी हमले में करकरे की मौत हो गई थी। हालाँकि, इसके बाद प्रज्ञा ने अपना बयान वापस लेते हुए उस पर खेद भी जताया था।

प्रज्ञा के इस बयान के बाद भीम आर्मी के महाराष्ट्र प्रमुख अशोक कांबले ने बुधवार (अप्रैल 24, 2019) को मुंबई में मीडिया से बातचीत के दौरान प्रज्ञा सिंह के चेहरे पर कालिख पोतने वाले को ₹5 लाख का इनाम दिए जाने की घोषणा की थी। इसके साथ ही उन्होंने ये भी कहा था कि जो प्रज्ञा ठाकुर को महाराष्ट्र के किसी गाँव में नहीं घुसने देगा, उसे भी सम्मानित किया जाएगा। अशोक कांबले के द्वारा किए गए इस ऐलान करने के बारे में पुलिस को कुछ ही देर बाद पता चल गई थी और अब पुलिस ने कार्रवाई करते हुए उन्हें हिरासत में ले लिया है।

गौरतलब है कि प्रज्ञा के चुनाव लड़ने के ऐलान के बाद से ही साध्वी प्रज्ञा को चुनाव लड़ने से रोकने की कवायद शुरू हो गई। साध्वी प्रज्ञा के खिलाफ तहसीन पूनावाला ने चुनाव आयोग से शिकायत करते हुए साध्वी प्रज्ञा की उम्मीदवारी पर रोक लगाने की सिफारिश की थी। मगर चुनाव आयोग ने साध्वी प्रज्ञा की उम्मीदवारी पर रोक लगाने से साफ तौर पर इनकार कर दिया। चुनाव आयोग ने कहा कि अभी तक साध्वी प्रज्ञा ठाकुर के खिलाफ कोई भी दोष साबित नहीं हुआ है और जब तक आरोप साबित नहीं हो जाता, चुनाव लड़ने पर रोक नहीं लगाई जा सकती। चुनाव आयोग ने कहा कि दोष साबित हो जाने पर चुनाव न लड़ने का प्रवाधान है। आरोपित होने पर चुनाव लड़ने से किसी की उम्मीदवारी पर रोक नहीं लगाई जा सकती।

राहुल गाँधी ने अमित शाह को ‘हत्या का आरोपित’ कहा, कोर्ट ने दिए जाँच के आदेश

राहुल गाँधी ने हाल ही में मध्य प्रदेश के जबलपुर में एक चुनावी रैली के दौरान भाजपा अध्यक्ष अमित शाह को ‘हत्या का आरोपित’ कहा था। इसके बाद कॉन्ग्रेस अध्यक्ष के खिलाफ बुधवार को उनकी अपमानजनक और झूठी टिप्पणी के लिए मानहानि की शिकायत दर्ज की गई थी।

अब, गुजरात की एक महानगरीय अदालत ने शुक्रवार को बीजेपी के खड़िया पार्षद कृष्णवदन ब्रह्मभट्ट द्वारा दर्ज की गई शिकायत के आधार पर इस मामले की जाँच का आदेश दिया है। कोर्ट 30 अप्रैल 2019 को इस बात पर फैसला करेगा कि इस शिकायत का संज्ञान लिया जाए या नहीं।

अदालत ने इस मामले में ब्रह्मभट्ट और उनके दो गवाहों- जिगेश दानी और उमंग नाइक के बयान को दर्ज किया और सुनवाई 30 अप्रैल तक के लिए स्थगित कर दी। 30 अप्रैल को ही यह फैसला होगा कि मामले में संज्ञान लिया जाए और गाँधी को समन जारी किया जाए? या नहीं। उपरोक्त बातें ब्रह्मभट्ट के वकील प्रकाश पटेल ने डीएनए को बताया।

बता दें कि राहुल गाँधी के खिलाफ हाल के दिनों में सार्वजनिक रूप से की गई कई झूठी टिप्पणियों, बयानों के लिए मुकदमा दायर किया गया है। कुछ दिन पहले ही, उन्होंने दावा किया था कि देश की सर्वोच्च अदालत ने कहा था कि “चौकीदार चोर है।” उन्हें अपनी इसी विवादास्पद टिप्पणी के लिए सर्वोच्च न्यायालय के समक्ष माफी माँगने को विवश होना पड़ा था।

एक और मानहानि की शिकायत में, जो आरएसएस अध्यक्ष द्वारा राहुल की उस टिप्पणी के लिए दायर की गई थी कि जिसमें राहुल ने दावा किया था, “भगवा संगठन महात्मा गाँधी की हत्या के लिए जिम्मेदार था।’ इस मामले में भी राहुल गाँधी ने कोर्ट में यू-टर्न ले लिया था और दावा किया कि उन्होंने ऐसा कभी नहीं कहा था बल्कि उनकी टिप्पणियों की गलत व्याख्या की गई थी।”

बुधवार को राहुल गाँधी के खिलाफ एक और शिकायत, उनके चुनावी हलफनामों में यह बात छिपाने के लिए दायर की गई थी कि उनको मानहानि मामले में समन मिला था।

‘NYAY’ योजना का फ़र्ज़ी फॉर्म बँटवा रही कॉन्ग्रेस, लोगों ने किया बेनक़ाब: रिपोर्ट

राजस्थान के कोटा में, इस क्षेत्र के मतदान से 48 घंटे पहले, शहर के कुठा बस्ती क्षेत्र में कुछ राजनीतिक कार्यकर्ता कॉन्ग्रेस के ‘NYAY’ योजना के फ़र्ज़ी फॉर्म बाँटते देखे गए, जिससे शहर में हलचल मच गई। फॉर्म में निजी जानकारी माँगी गई थी और लोगों से 72,000 रुपए प्राप्त करने के लिए ख़ुद को पंजीकृत करने के लिए ई-मित्र पर फॉर्म जमा करने के लिए कहा गया था। भाजपा ने आधिकारिक तौर पर चुनाव आयोग को इस बारे में शिकायत दर्ज कराई है।

जैसे-जैसे लोकसभा चुनाव का चौथा चरण पास आ रहा है वैसे-वैसे कॉन्ग्रेसी खेमें में नए-नए प्रयोग करना लगातार जारी है। कॉन्ग्रेस, NYAY योजना के फ़र्ज़ी फॉर्म ग्रामीणों के बीच बाँट कर रही है जिसका एकमात्र उद्देश्य अपने पक्ष में वोट देने के लिए वोटरों को लुभाना है। इस फॉर्म में 72,000 रुपये वार्षिक प्राप्त करने के लिए मतदाताओं की व्यक्तिगत जानकारी माँगी गई है।

ट्विटर यूज़र @yash1m, जो अपने ट्विटर प्रोफाइल के अनुसार भाजपा के आईटी सेल का एक हिस्सा हैं, ने भी इस घटना का एक वीडियो शेयर किया।

इस वीडियो में देखा जा सकता है, कई ग्रामीणों, जिनमें विशेषतौर पर ग्रामीण क्षेत्रों की भोली-भाली महिलाएँ शामिल थे उन्हें NYAY योजना के फॉर्म दिए गए थे, इस पर कॉन्ग्रेस के चुनाव चिन्ह के साथ-साथ कॉन्ग्रेस अध्यक्ष राहुल गाँधी की भी फोटो छपी थी। जब ग्रामीण-जन स्थानीय सरकारी कार्यालय में अपने फॉर्म जमा करने के लिए पहुँचे, तो उन्हें पता चला कि उन्हें जो फॉर्म वितरित किए गए वो नकली थे और इनका वितरण केवल उन्हें धोखा देने के लिए किया गया था।

अपनी चुनावी नौटंकी के रूप में, राहुल गाँधी ने घोषणा की थी कि अगर कॉन्ग्रेस केंद्र में सरकार बनाती है, तो वे गरीबी दूर करने के लिए NYAY योजना को लागू करेंगे। उन्होंने कहा कि इसके तहत 5 करोड़ परिवार या 25 करोड़ लोगों को इस योजना से फ़ायदा मिलेगा। हालाँकि, यह योजना अभी तक स्पष्ट नहीं हैं कि आख़िर राहुल गाँधी इस योजना की धनराशि कहाँ से लाएँगे। कई वरिष्ठ अर्थशास्त्रियों ने इस योजना के व्यवहारिक रूप पर भी सवाल उठाए थे।

जबकि कॉन्ग्रेस के गुरू सैम पित्रोदा ने इस योजना के लिए मध्यम वर्ग को अतिरिक्त बोझ यानी अधिक टैक्स देने के लिए तैयार रहने की बात तक कह डाली थी। इसके अलावा इलाहाबाद उच्च न्यायालय ने तो चुनाव आयोग को नोटिस भेजकर पूछा था कि क्या इस योजना को मतदाताओं के लिए चुनावी रिश्वत कहा जा सकता है।

‘जिसको आलू से सोना बनाना है वो उनके पास जाएँ, हम ऐसा नहीं कर सकते’ : PM मोदी

प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने उत्तर प्रदेश के कन्नौज में जनसभा को संबोधित करते हुए सपा-बसपा और कॉन्ग्रेस पर जमकर निशाना साधा। उन्हें ‘महामिलावटी’ करार दिया और शनिवार (अप्रैल 27, 2019) को आरोप लगाया कि इन पार्टियों का हाल ‘जात-पात जपना, जनता का माल अपना’ जैसा है।

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने कॉन्ग्रेस अध्यक्ष राहुल गाँधी के उस कथित बयान पर तंज किया, जिसमें दावा किया गया कि वह किसी मशीन से आलू से सोना बनाने की बात कर रहे थे। PM मोदी ने उसी एक बयान को राहुल गाँधी के खिलाफ इस्तेमाल करते हुए कहा कि आलू से सोना निकालने का काम भाजपा के बस की बात नहीं है।

नरेंद्र मोदी ने अपने भाषण में कहा, “हमारे देश में ऐसे बुद्धिमान और तेजस्वी लोग हैं, जो आलू से सोना बनाते हैं। वो काम हम नहीं कर सकते, न मेरी पार्टी कर सकती। जिसको आलू से सोना बनाना है, वो उनके पास जाये, हम ऐसा नहीं कर सकते।”

आज की जनसभा में किसानों को विश्वास दिलाते हुए नरेंद्र मोदी ने कहा, “हम कोल्ड स्टोरेज बनाएँगे, आलू का वैल्यू एडिशन बढ़ाएँगे और आलू से चिप्स बनवा सकते हैं और किसानों की आय दोगुना करने के प्रयास कर रहे हैं।”

आएगा तो मोदी ही’

भाषण के बीच नरेंद्र मोदी ने अपनी परिचित शैली में कहा, “सभी एकमत होकर कह रहे हैं, महामिलावटी लोग सारी कोशिश कर लो, लेकिन… आएगा तो मोदी ही!”

‘महामिलावटी लोगों ने चौकीदार को गाली दी, राम भक्तों को गाली दी’

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने सपा-बसपा और कॉन्ग्रेस पर हमला करते हुए कहा, “इन महामिलावटी लोगों ने चौकीदार को गाली दी, राम भक्तों को गाली दी, लेकिन परिणाम ये हुआ है कि ये सभी लोग खत्म हो गए।”

इसके साथ ही, मोदी ने कहा कि ये चुनाव ना तो भाजपा लड़ रही है और ना ही भाजपा के कार्यकर्ता लड़ रहे हैं, इस बार का चुनाव उत्तर प्रदेश की जनता लड़ रही है। उन्होंने कहा, “आज मोदी का प्रचार वो बहन कर रही है, जिसने पूरी जिंदगी चूल्हे के धुएँ में निकाल दी थी और उसे उज्ज्वला योजना से गैस कनेक्शन मिला।

‘1 Rupee clinic’ की मदद से युवती ने स्टेशन पर बच्चे को जन्म दिया, पीयूष गोयल ने किया रीट्वीट

कल (अप्रैल 26, 2019) 20 साल की एक लड़की ने कोंकण कन्या एक्सप्रेस में सफर करते हुए ठाणे स्टेशन पर नवजात को जन्म दिया। ट्रेन में सफर के दौरान युवती को प्रसव पीड़ा शुरु हुई तो “1 रुपए क्लिनिक” की स्टाफ ने उस लड़की की मदद की और विषम परिस्थितियों में भी एक माँ का प्रसव सही सलामत कराया।

“1 रुपए क्लिनिक” की इस उपलब्धि को रेल मंत्री ने अपने ट्विटर अकॉउंट पर शेयर किया और साथ ही लिखा कि ठाणे के चौकीदार राष्ट्र की सेवा करने के लिए हमेशा तैयार रहते हैं। जाहिर है इस घटना के बाद “1 रुपए क्लिनिक” की निष्ठा और लगन की जितनी तारीफ की जाए उतनी कम है। किसी भी महिला के जीवन में प्रसव एक ऐसा अनुभव होता है जिसमें भले ही स्त्री को असीम पीड़ा से गुजरना पड़े लेकिन वो उसका मलाल कभी नहीं करती। लेकिन सच यह भी है कि कई बार उचित स्वास्थ्य सुविधा न मिलने के कारण इस वेदना को झेलते हुए स्त्रियाँ अपनी जान तक गवाँ बैठती हैं।

भारतीय रजिस्ट्रार जनरल कार्यालय के अनुसार साल 2011-13 में एक लाख जीवित शिशुओं के जन्म पर 167 महिलाओं की जान प्रसव के दौरान गई थी। हालाँकि 2014-16 में 22 प्रतिशत की कमी के साथ ये सूची 167 से घटकर 130 हो गई। स्पष्ट है कि यदि उचित स्वास्थ्य सुविधाएँ उपलब्ध हो तो प्रसव पीड़ा के कारण होती मौतों को भी रोका जा सकता है। लेकिन सवाल ये है कि क्या बेहतर स्वास्थ्य सुविधाएँ सबके लिए उपलब्ध हैं कि समाज का हर तबका उनका लाभ उठा सके?

एक ओर जहाँ झोलाछाप डॉक्टरों ने भी आज अपना शुल्क निम्न वर्ग के व्यक्ति की एक दिन की आय जितना कर दिया है वहीं भारतीय रेलवे के सहयोग से संचालित होने वाली “1 रुपए क्लिनिक” मात्र ₹1 में स्वास्थ्य संबंधी परामर्श देता है। इनकी वेबसाइट के होमपेज पर ही इसका जिक्र है। इतना ही नहीं यहाँ मात्र ₹5 में ब्लड प्रेशर की जाँच होती है और ECG का शुल्क केवल ₹50 है। मैजिकदिल द्वारा शुरू हुए “1 रुपए क्लिनिक” की परिकल्पना हर आम व्यक्ति के स्वास्थ्य लाभ के लिए है। जहाँ भागती दौड़ती जिंदगी में लोग स्वास्थ्य से दूर होते जा रहे हैं वहीं भारतीय रेलवे के साथ मिलकर मैजिकदिल ने मुम्बई के हर लोकल स्टेशन पर यह सुविधा उपलब्ध कराई है। यहाँ चौबीस घंटे न केवल प्रशिक्षित MBBS डॉक्टरों से परामर्श केवल ₹1 में मिलता है बल्कि फार्मेसी और डायग्नोस्टिक सेन्टर जैसी सुविधाएँ भी डिस्काउंट पर उपलब्ध हैं।

आर्थिक स्थिति ठीक न रहने के कारण जो लोग अपनी स्वास्थ संबंधी दिक्कतों को नजरअंदाज करने की अनचाही कोशिश करते थे, उनके पास अब खुद का इलाज कराने के लिए एक बेहतर विकल्प मौजूद है। मैजिकदिल का मकसद किसी क्षेत्र तक सीमित न रहकर बड़े पैमाने पर विस्तार करना है ताकि कोई भी अक्षम व्यक्ति स्वास्थ्य के सवाल से समझौता न करे और पैसों की कमी के चलते हार न माने और सुविधा का लाभ उठाए। “1 रुपए क्लिनिक” मुंबई के लगभग हर लोकल स्टेशन पर मौजूद है।

मुम्बई जाती ट्रेन में लड़की के प्रसव के दौरान “1 रुपए क्लिनिक” की सक्रियता बेहद सराहनीय है। क्योंकि सही समय पर मदद न पहुँचने पर कुछ भी अनहोनी हो सकती थी। प्रसव भले ही एक प्राकृतिक प्रक्रिया है, लेकिन आज के समय में उचित स्वास्थ्य सुविधा मिलना सबसे बड़ी जरूरत है क्योंकि बीमारी कोई भी हो लेकिन इलाज सबका होना जरूरी है।

“1 Rupee” clinic वेबसाइट का लिंक- https://www.1rupeeclinic.com/about_us

मद्रास क्रिश्चियन कॉलेज के प्रोफेसर रवीन और टेनिसन यौन शोषण के दोषी करार

मद्रास क्रिश्चियन कॉलेज में जूलॉजी के प्रोफेसर के खिलाफ यौन शोषण के आरोप सही पाए गए हैं। आरोपों की जाँच के लिए मद्रास क्रिश्चियन कॉलेज (एमसीसी) द्वारा गठित आंतरिक शिकायत समिति (आईसीसी) एक महत्वपूर्ण नतीजे पर पहुँची है। ICC ने अपनी रिपोर्ट में छात्राओं के यौन उत्पीड़न के आरोप में प्रोफेसर आर रवीन को दोषी पाया है और उनके सहयोगी सैमुअल टेनिसन को रवीन को प्रोत्साहित करने का दोषी माना गया है।

यह मामला पिछले महीने सामने आया जब एमसीसी में जूलॉजी विभाग के छात्रों ने प्रोफेसर रवीन पर अपनी डिपार्टमेंट ट्रिप के दौरान छात्राओं के साथ कर्नाटक में दुर्व्यवहार करने का आरोप लगाया। छात्रों ने रवीन पर अनुचित तरीके से छूने, उनकी ड्रेसिंग के बारे में भद्दे कमेंट पास करने और उनकी निजता भंग करने का आरोप लगाया। यात्रा इस साल जनवरी में आयोजित की गई थी।

यात्रा के बाद, छात्रों ने सामूहिक और गोपनीय रूप से प्रोफेसर के खिलाफ उत्पीड़न की शिकायत उनके विभागाध्यक्ष (HoD) को सौंपी। हालाँकि, एचओडी की निष्क्रियता से पीड़ित, 50 छात्रों में से 36, जो कर्नाटक भ्रमण का हिस्सा थे, ने एक औपचारिक हस्ताक्षर के साथ अपनी शिकायत दर्ज कराई।

एचओडी ने छात्रों को घटना इस बारे में अनौपचारिक जाँच के लिए आमंत्रित किया था। हालाँकि, इस मीटिंग का कोई परिणाम नहीं निकला और हेड ने प्रोफेसर रवीन के खिलाफ कड़ी कार्रवाई करने की बजाय केवल चेतावनी के साथ दोनों ‘दोषी’ प्रोफेसरों को छोड़ दिया। उनके अनुसार उन्होंने अपनी कार्रवाई को सही ठहराया क्योंकि दोनों के खिलाफ कोई पिछली शिकायत नहीं मिली थी।

प्रोफेसर रवीन द्वारा यौन उत्पीड़न का अन्य मामला तब सामने आया जब 1997-2000 के जूलॉजी विभाग के बैच के छात्र भी सामने आए और उन्होंने अपने समय में कॉलेज के भ्रमण के दौरान उत्पीड़न की घटनाओं को साझा करने की हिम्मत दिखाई। पुराने छात्रों के समय HoD ने आरोपित को 15 दिनों के लिए निलंबित कर दिया था। हालाँकि, निलंबन का कोई रिकॉर्ड नहीं रखा गया क्योंकि यह निलंबन उनकी गर्मियों की छुट्टियों के दौरान हुआ था।

छात्रों के अनुसार जब उन्हें एहसास हुआ कि कॉलेज विभाग ने उनसे झूठ बोला था, तो वो विरोध करने लगे। यह तब की बात है जब ICC की स्थापना की गई थी और एक औपचारिक जाँच शुरू हुई। बाहरी सदस्य और वकील शीला जयप्रकाश की समिति ने कई दौर की जाँच की। इसके बाद, समिति ने 24 अप्रैल को रिपोर्ट जारी करने से पहले इस मुद्दे पर अपने निष्कर्षों को सुरक्षित रखा। उसी दिन इस रिपोर्ट की एक प्रति छात्रों और निदेशक मंडल को सौंप दी गई।

आईसीसी ने माना कि रवीन और टेनीसन यौन उत्पीड़न में शामिल हैं। “यह समिति की सर्वसम्मत निष्कर्ष है कि डॉ. रवीन और डॉ. टेनीसन ने अनफ्रेंडली कार्य/अध्ययन का माहौल बनाकर यौन उत्पीड़न किया, जिसके परिणामस्वरूप शिकायतकर्ताओं के खिलाफ लैंगिक भेदभाव हुआ।” रिपोर्ट में कहा गया है कि समिति दोनों प्रोफेसरों के खिलाफ उचित कार्रवाई के लिए इसे प्राचार्य को भेज रही है।

छात्रों ने समिति की रिपोर्ट, दृष्टिकोण और टिप्पणियों पर प्रसन्नता व्यक्त की। उन्होंने कहा कि वे अब इस रिपोर्ट के निष्कर्षों के अनुसार दोषी प्राध्यापकों के खिलाफ कार्रवाई करने के लिए कॉलेज के प्राचार्य का इंतजार कर रहे हैं।

जीसस एजुकेशन हॉस्टल में नाबालिग आदिवासी छात्राओं से दुष्‍कर्म की जाँच के लिए केंद्र ने CM फडणवीस को लिखा पत्र

केंद्रीय गृह राज्‍य मंत्री हंसराज अहीर ने महाराष्‍ट्र के मुख्‍यमंत्री देवेंद्र फडणवीस को पत्र लिखकर चंद्रपुर में ‘इनफैंट जीसस एजुकेशन सोसायटी’ द्वारा संचालित छात्रावास में रहने वाली नाबालिग आदिवासी छात्राओं के साथ दुष्‍कर्म के मामलों में FIR दर्ज करने में हुई देरी के सिलसिले में जाँच कराने को कहा है। इस घटना से स्‍थानीय लोगों में काफी गुस्‍सा है और वे सीबीआई से जाँच कराने की माँग कर रहे हैं। 

बीते दिनों चंद्रपुर के राजुरा तहसील में ‘इनफैंट जीसस एजुकेशन सोसाइटी‘ द्वारा संचालित छात्रावास में रहने वाली नाबालिग आदिवासी छात्राओं के साथ दुष्‍कर्म के मामले सामने आए थे। इन मामलों में FIR दर्ज करने में देरी हुई थी। राज्य के वित्तमंत्री और चंद्रपुर के संरक्षक मंत्री सुधीर मुंगंटीवार के मामले की जाँच के आदेश के बाद पुलिस और आदिवासी विभाग हरकत में आया था और कार्रवाई शुरू हो पाई थी। 

मेडिकल परीक्षण में भी छात्राओं से दुष्‍कर्म की पुष्टि हुई है। मामले में हॉस्टल के सुपरिटेंडेंट और डिप्टी सुपरिटेंडेंट को गिरफ्तार किया जा चुका है। आरोपितों के खिलाफ IPC और पॉक्सो (POCSO) एक्ट की अलग-अलग धाराओं के तहत केस दर्ज किया गया। आरोपितों पर SC/ ST एक्ट की धाराओं के तहत भी केस दर्ज हुआ। 

कॉन्ग्रेस को ‘जिन्नाह’ की पार्टी बताने वाले शत्रुघ्न सिन्हा की सफाई, चिदंबरम ने कहा ‘ख़ामोश’

बड़बोले शत्रुघ्न सिन्हा के लिए मुसीबतें कम नहीं हो रही हैं बल्कि अब पहले से ही कई अन्य मुश्किलों का सामना कर रही कॉन्ग्रेस के लिए उन्होंने नई मुसीबत खड़ी कर दी। कॉन्ग्रेस को मो. अली जिन्नाह की पार्टी बता और देश के विकास में उनके महान योगदान की गाथा सुनाने के बाद अब शत्रुघ्न सिन्हा ने इसे लेकर आज सफाई दी। बयान पर मचे सियासी घमासान के बाद सिन्हा को अपनी गलती का एहसास हुआ और कहा कि उन्होंने कल जो भी कहा था वो स्लिप ऑफ टंग था, उनकी जुबान फिसल गई थी। वो कहना चाहते थे मौलाना आजाद, लेकिन उनके मुँह से मो. अली जिन्नाह निकल गया।

बता दें कि कॉन्ग्रेस के टिकट पर बिहार के पटना साहिब से चुनाव लड़ रहे शत्रुघ्न सिन्हा ने मध्य प्रदेश के छिंदवाड़ा के सौसर में एक चुनावी सभा को संबोधित करते हुए कह दिया था कि भारत की आजादी और विकास में जिन्नाह का भी महत्वपूर्ण योगदान है।

सिन्हा के कॉन्ग्रेस में शामिल होने के बाद से ही गाँधी परिवार और उसके महान योगदान का गुणगान करने के क्रम में उन्होंने कुछ ऐसा कर दिया जो कॉन्ग्रेस के लिए फिर से एक सेल्फ गोल हो गया। सिन्हा ने यादगार भाषण में कहा, “कॉन्ग्रेस परिवार महात्मा गाँधी से लेकर सरदार वल्लभ भाई पटेल तक, मो अली जिन्नाह से लेकर जवाहर लाल नेहरू तक, इंदिरा गाँधी से लेकर राजीव गाँधी और राहुल गाँधी तक की पार्टी है। भारत की आजादी और विकास में इन सभी का योगदान है। इसलिए मैं कॉन्ग्रेस पार्टी में आया हूँ। और एक बार आ गया हूँ, पहली और शायद आखिरी बार, अब जाने का सवाल नहीं है।”

उनके इसी बयान पर सियासी घमासान छिड़ा हुआ है और एक बार फिर भाजपा को कॉन्ग्रेस पर हमले का मौका मिल गया। इसे लेकर कॉन्ग्रेस बैकफुट पर है और उसे अपनी तरफ से सफाई भी देनी पड़ रही है। हालाँकि, कॉन्ग्रेस ने इस बयान से पूरी तरह पल्ला झाड़ने की कोशिश करते हुए उल्टा भाजपा को ही सफाई देने को कहा।

गौरतलब है कि आज पी चिदंबरम ने भी एक तरह से सिन्हा से किनारा करते हुए कहा, “उनके (सिन्हा) जो भी विचार हैं, उसका स्पष्टीकरण दिया जाना चाहिए। कुछ दिन पहले वह भाजपा का हिस्सा थे। भाजपा को बताना चाहिए कि वह इतने साल तक पार्टी का हिस्सा क्यों थे। मैं पार्टी के हर सदस्य के बयान पर स्पष्टीकरण नहीं दे सकता। सिर्फ पार्टी के आधिकारिक स्टैंड पर ही कुछ बोल सकता हूँ।”

बेचारे सिन्हा को शायद अब समझ नहीं आ रहा होगा कि क्या करें, जाएँ तो जाएँ कहाँ? बोले तो बोले क्या? आज शायद उन्हें धोबी के गधे वाली बात ज़रूर याद आई होगी जो न घर का होता है न घाट का। खैर जो भी हो बड़बोले सिन्हा को अब खुद को ही कहने का समय आ गया है ‘ख़ामोश।’

फ़र्ज़ी डिफेंस पत्रकार अजय शुक्ला के झूठ का पर्दाफ़ाश, भारतीय वायुसेना ने दिया जवाब

27 फरवरी को श्रीनगर में हेलीकॉप्टर दुर्घटना की जाँच के लिए IAF कोर्ट ऑफ एन्क्वायरी के गठन के संदर्भ में झूठी ख़बर फैलाने के लिए NDTV के पूर्व पत्रकार और वर्तमान बिजनेस स्टैंडर्ड के स्तंभकार, अजय शुक्ला को भारतीय वायु सेना ने आड़े हाथों लेते हुए ट्विटर पर उनके ब्लॉग का जवाब दिया।

भारतीय वायु सेना के आधिकारिक ट्विटर हैंडल से कहा गया कि अजय शुक्ला ने अपने ब्लॉग में ग़लत अनुमान लगाया था कि 27 फरवरी को श्रीनगर में हुई Mi-17 V5 हेलीकॉप्टर दुर्घटना की जाँच के लिए गठित IAF कोर्ट ऑफ एन्क्वायरी को कुछ समय के लिए रोका गया गया है। भारतीय वायु सेना ने कहा, “यह उनकी कल्पना है और भारतीय वायु सेना इसे स्पष्ट रूप से नकारती है।”

IAF ने यह भी कहा कि विमान दुर्घटनाओं की कोर्ट ऑफ़ एन्क्वॉयरी पूरी होने में कुछ समय लगेगा। सभी मामलों में जाँच पूरी होने तक IAF द्वारा एक कोर्ट ऑफ़ एन्क्वायरी की कार्यवाही पर टिप्पणी नहीं की जा सकती। वायुसेना ने यह भी कहा कि लोकसभा चुनाव और कोर्ट ऑफ़ एन्क्वॉयरी पूरा होने के बीच कोई संबंध नहीं है।

अजय शुक्ला ने लिखा था कि भारतीय वायु सेना को आदेश दिया गया है कि वह चुनाव तक अपनी कोर्ट ऑफ़ एन्क्वायरी की कार्यवाही रोककर रखे जिसमें यह सामने आने वाला था कि एयरफोर्स का हेलीकॉप्टर बालाकोट हमले के एक दिन बाद “Friendly Fire” में वायुसेना की ही मिसाइल द्वारा मार गिराया गया था। शुक्ला के अनुसार यह बात सामने आ जाती तो सरकार पर और चुनावों पर इसका बुरा असर पड़ता इसीलिए सरकार ने कोर्ट ऑफ़ इन्क्वायरी रोक रखी थी। भारतीय वायुसेना ने शुक्ला के इन दावों का खंडन किया है।

इसके अलावा, अजय शुक्ला ने अपने ब्लॉग में यह भी लिखा था कि भारतीय वायु सेना ने इन वाहियात अटकलों पर प्रतिक्रिया देने से इनकार कर दिया था, यह कहते हुए कि पूछताछ अभी भी जारी है और किसी निष्कर्ष पर पहुँचने के लिए कोर्ट ऑफ़ एन्क्वायरी को समय लगता है और इस पर कोई भविष्यवाणी नहीं की जा सकती।

यह स्पष्ट है कि अजय शुक्ला ने अपने बेतुके सिद्धांतों के साथ IAF कोर्ट ऑफ़ एन्क्वायरी के नाम पर 2019 के चुनावों में भ्रामकता फैलाने का प्रयास किया। उनकी मंशा रहती है कि वो पुलवामा आतंकी हमले के बाद भारत सरकार की ओर से किए गए अभियानों से यह सिद्ध कर सकें कि सरकार इससे कुछ छिपाने का काम कर रही है। पुलवामा आतंकी हमले के बाद अजय शुक्ला, भारत पर पाकिस्तान द्वारा किए जा रहे आतंक और बलिदानियों के परिवारों के बारे में बात करने की बजाय आतंकवादी हमले से प्रधानमंत्री मोदी को मिलने वाले ‘लाभ’ पर अधिक चिंतित रहते हैं। वास्तव में यह स्पष्ट झूठ अन्य तथाकथित पत्रकारों द्वारा भी आगे बढ़ाया गया था।

बालाकोट हवाई हमले पर जिन पत्रकारों को भारत सरकार पर संदेह था, अजय शुक्ला ने उन्हीं के झूठ को और आगे बढ़ाने का काम किया। इस झूठ को आगे बढ़ाने वालों में कृष्ण प्रताप सिंह और अभिसार शर्मा भी शामिल थे जिन्होंने शुक्ला के ब्लॉग को खूब रीट्वीट किया था।