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‘सेक्स स्लेव’ बना किसी से 1 साल तक रेप करता रहा फिल्म डायरेक्टर, किसी ने भागकर खुद को बचाया: मॉलीवुड हो या बॉलीवुड, हिरोइनों का एक जैसा शोषण

हेमा कमेटी की रिपोर्ट आने के बाद टीवी इंडस्ट्री में हलचल मच गई है। इंडस्ट्री से जुड़ी पुरानी और नई अभिनेत्रियाँ खुलकर अपने साथ हुए यौन शोषण पर शिकायतें कर रहीं। लोग आरोपितों के नाम पढ़-सुनकर हैरान हुए जा रहे हैं। किसी को यकीन नहीं हो पा रहा कि इतनी ऊँचाई पर पहुँचे लोगों का सच कितना काला है। हाल में मलयालम की एक और अभिनेत्री ने तमिल डायरेक्टर के खिलाफ मानसिक रूप से प्रताड़ित करने के आरोप लगाए हैं। वहीं हिंदी टीवी इंडस्ट्री का जाना-माना नाम शिल्पा शिंदे ने भी खुलासा किया है कि करियर के शुरुआती दिनों में उनका यौन शोषण हुआ था।

पहले बात करते हैं मलयालम एक्ट्रेस सौम्या के आरोपों की। सौम्या ने NDTV को दिए इंटरव्यू में बताया कि एक तमिल डायरेक्टर जो दुनिया के आगे उन्हें बेटी बेटी कहता था उसी ने उसका मानसिक, शारीरिक और यौन शोषण किया। सौम्या ने एनडीटीवी को दिए अपने इंटरव्यू में बताया कि वो जब 18 साल की थीं तब पहली बार उस डायरेक्टर से मिली थीं। वो दुनिया के सामने उन्हें बेटी कहता था और दूसरी तरफ उनका रेप करता था।

बेटी बोलकर प्राइवेट पार्ट में डालता था रॉड

सौम्या के मुताबिक, उस डायरेक्टर ने उन्हें बिलकुल सेक्स स्लेव बनाकर रखा था जिसके साथ वो जो चाहे वो कर कर रहा था। वह अपने आनंद के लिए उनके प्राइवेट पार्ट में रॉड तक डालता था। उन्होंने बताया, “मैं 18 साल की थी। कॉलेज के प्रथम वर्ष में। मेरे घरवालों को फिल्मों के बारे में कुछ भी ज्यादा नहीं पता था। मुझे मेरे कॉलेज थिएटर वाले कॉन्टैक्ट से फिल्म करने का अवसर मिला।” उन्होंने बताया कि घर में विद्रोही स्वभाव का होने की वजह से उन्हें डायरेक्टर के परिवार में अच्छा लगने लगा था क्योंकि वो उन्हें खाना-पीना आदि देते थे। लेकिन एक दिन जब डायरेक्टर की पत्नी घर पर नहीं थी, तब डायरेक्टर ने उन्हें अपने पास बुलाया और बेटी बोलकर किस किया।

एक्ट्रेस के मुताबिक वो इस घटना से सदमे में आ गई थीं। उन्हें इस बारे में अपने दोस्तों को बताना था लेकिन वो शर्मा से किसी को कुछ नहीं बता पाईं। उन्हें लगा शायद उन्हें ही कुछ कुछ गलत लगा है वो लगातार उस व्यक्ति से अच्छा बर्ताव करती रहीं और प्रैक्टिस पर जाना भी बंद नहीं दिया। धीरे-धीरे उस व्यक्ति ने मेरे शरीर का फायदा उठाना शुरू कर दिया। एक समय आया उसने मेरे साथ जबरदस्ती की और मेरा रेप किया। बाद में ये सब एक साल तक चलता रहा।

सौम्या के अनुसार, वो दुनिया के आगे तो उन्हें बेटी कहता था लेकिन अकेले में उनका रेप करता था। उनका दिमाग इसी सोच में रहता था कि आखिर ये सब चल क्या रहा है। उनके साथ हो क्या रहा है। इस इंटरव्यू में उन्होंने ये भी बताया वो डायरेक्टर इनके प्राइवेट पार्ट में रॉड तक डाल देता था। सौम्या ने बोला कि उनके साथ ये सब होता था और इसमें उस डायरेक्टर को मजा आता था। उन्होंने बताया कि जिस डायरेक्टर ने उनके साथ ये सब किया वो उस समय 40 साल का था और वो 18 की थीं। उन्हें इस घटना से उभरने में 30 साल लग गए।

एनडीटीवी को दिए इंटरव्यू में कहीं भी सौम्या ने उस डायरेक्टर के नाम का खुलासा नहीं किया जिसने उनके साथ ऐसी घिनौनी हरकत की थीं। उन्होंने कहा है कि वे डायरेक्टर के नाम का खुलासा स्पेशल पुलिस फोर्स के सामने करेंगी। इसका गठन केरल सरकार ने हेमा कमेटी की रिपोर्ट आने के बाद किया है।

शिल्पा शिंदे हुईं यौन शोषण की शिकार

इसी तरह शिल्पा शिंदे ने 26 साल पहले हुई घटना के बारे में बताया। उन्होंने न्यूज18 शोशा से एक्सक्लूसिव बातचीत में बताया कि एक बार उन्हें ऑडिशन की आड़ में एक फिल्ममेकर को रिझाने के लिए कहा गया था। उस समय उनके मुताबिक वह बहुत मासूम थीं और सीन के लिए तैयार हो गई थीं। हालाँकि, मामला जब आगे बढ़ने लगा, तो एहसास हुआ कि प्रोड्यूसर ने लिमिट क्रास कर दी है। इसके बाद उन्होंने तुरंत उस डायरेक्टर को धक्का दिया और वो बाहर आ गईं।

बातचीत में 46 साल की एक्ट्रेस ने कहा, “यह मेरे संघर्ष के दिनों के दौरान घटना है। 1998-99 के आसपास की बात है। मैं नाम नहीं ले सकती, लेकिन उन्होंने मुझसे कहा, ‘आप ये कपड़े पहनो और ये सीन करो।’ सीन में मैंने वो कपड़े नहीं पहने। उसने मुझसे कहा कि वह मेरा बॉस है और मुझे उसे आकर्षित करना है। मैं तब बहुत मासूम थी, इसलिए मैंने यह सीन किया।’ उस शख्स ने मेरे साथ जबरदस्ती करने की कोशिश की और मैं बहुत डर गई। मैंने उसे धक्का दिया और बाहर भाग गई। सुरक्षा कर्मचारियों को एहसास हुआ कि क्या हुआ था और उन्होंने मुझे तुरंत जाने के लिए कहा। उन्होंने सोचा कि मैं बखेड़ा बनाऊँगी।” शिल्पा कहती हैं, “मैं झूठ नहीं बोल रही हूँ, लेकिन मैं उनका नाम नहीं ले सकती। उनके बच्चे शायद मुझसे थोड़े छोटे हैं और अगर मैं उनका नाम रखूँगी तो उन्हें भी तकलीफ होगी।”

गौरतलब है कि फिल्मी दुनिया में महिला कलाकारों के साथ होने वाले यौन शोषण की कई घटनाएँ मीडिया में सामने आ चुकी हैं, लेकिन हेमा कमेटी रिपोर्ट के आने के बाद लगातार खुलासे हो रहे हैं जो हैरान करने वाले हैं। इससे पहले जब सोशल मीडिया पर meetoo अभियान चला था उस समय ऐसे खुलासे हुए थे।

CBI के बाद ED ने भी संदीप घोष पर कसा शिकंजा, मनी लॉन्ड्रिंग में घर पर मारा छापा: इनके ही प्रिंसिपल रहते RG कर मेडिकल कॉलेज में महिला डॉक्टर की रेप के बाद हुई थी हत्या

कोलकाता में RG कर मेडिकल कॉलेज के पूर्व प्राचार्य संदीप घोष के ठिकानों पर प्रवर्तन निदेशालय (ED) ने छापेमारी की है। यह छापेमारी उनके वित्तीय लेनदेन में गड़बड़ी करने के आरोपों के बाद की गई है। संदीप घोष के ठिकानों पर लगभग 100 मेम्बरों की एक टीम छापेमारी कर रही है।

मीडिया रिपोर्ट्स के अनुसार, शुक्रवार (6 सितम्बर, 2024) को यह छापेमारी सुबह से ही चालू हो गई थी। ED ने संदीप घोष के तीन ठिकानों की तलाश चालू की है। बताया गया है कि इनमें से एक संदीप घोष के रिश्तेदार का घर भी शामिल है। संदीप घोष के खिलाफ ED ने मनी लॉन्ड्रिंग का मामला दर्ज किया है। यह छापेमारी इसी कड़ी में हुई है।

ED ने उनके खिलाफ यह मामला अस्पताल में वित्तीय गड़बड़ी करने के आरोपों के बाद दर्ज किया था। उनके ऊपर आरोप है कि उन्होंने अस्पताल की मेडिकल सप्लाई और बायोमेडिकल वेस्ट तस्करी करके बांगलादेश भेजा। उनके संदीप घोष के ऊपर यहाँ तक आरोप है कि वह लाशों की तस्करी करते हैं।

संदीप घोष के खिलाफ RG मेडिकल कॉलेज के ही पूर्व उपाधीक्षक अख्तर अली ने शिकायत दर्ज करवाई थी। अख्तर अली ने उनके वित्तीय अनिमितताओं के अलावा यह भी आरोप लगाया था कि वह यहाँ ठेके देने में पक्षपात करते हैं। संदीप घोष के ऊपर भाई-भतीजावाद का भी आरोप लगा था।

अख्तर अली की शिकायत के बाद इस मामले की जाँच कोलकाता पुलिस कर रही थी। बाद में इस मामले में कलकत्ता हाई कोर्ट ने आदेश दिया था कि इसकी जाँच भी CBI करे। इस मामले में मनी लॉन्ड्रिंग की बात होने के कारण ED भी जुड़ गई थी। अब ED की जाँच आगे बढ़ गई है।

इस मामले के केंद्र रहने वाले संदीप घोष 1994 डॉक्टरी की पढ़ाई पूरी करके सर्जन बने थे। उन्होंने इसी RG मेडिकल कॉलेज में डॉक्टरी की पढ़ाई की है।  साल 2021 में वो आरजी कर मेडिकल कॉलेज के प्रिसिंपल बने। इससे पहले, उन्होंने कलकत्ता नेशनल मेडिकल कॉलेज में उप-प्रिंसिपल के रूप में कार्य किया था।

हालाँकि संदीप घोष के आरजी कर मेडिकल कॉलेज और अस्पताल का प्रिसिंपल बनने के पीछे अलग कहानी थोड़ी आसामान्य है। आजतक के मुताबिक, जब प्रिसिंपल के पद को लेकर इंटरव्यू चल रहे थे, तो संदीप घोष का नाम 16वें स्थान पर था। लेकिन रातोंरात वो सभी कैंडिडेट्स को पीछे छोड़कर लिस्ट में टॉप पर पहुँच गए और प्रिंसिपल के पद पर नियुक्त हो गए।

गौरतलब है कि 9 अगस्त, 2024 को RG कर मेडिकल कॉलेज में एक महिला डॉक्टर की रेप के बाद हत्या कर दी गई थी। उसका शव कॉलेज में ही पड़ा हुआ मिला था। इस मामले में कॉलेज और पुलिस पर पहले परिजनों को गुमराह करने का आरोप लगा था। मामले के तूल पकड़ने के बाद पुलिस ने एक आरोपित को गिरफ्तार किया था। इस मामले में संदीप घोष भी हिरासत में हैं।

संजौली से कसुम्पटी तक सड़क पर हिंदू, क्या शिमला में मस्जिदों पर चलेगा बुलडोजर? जानिए अपने ही मंत्री का कॉन्ग्रेसी क्यों कर रहे विरोध, रोहिंग्या मुस्लिमों-लव जिहाद से क्या है कनेक्शन

हिमाचल प्रदेश की राजधानी शिमला में बनी एक अवैध मस्जिद को लेकर हिन्दू सड़कों पर हैं। बड़ी संख्या में स्थानीय लोग इस अवैध निर्माण को तोड़ने की माँग कर रहे हैं। राज्य की कॉन्ग्रेस सरकार ने भी माना है कि यह मस्जिद अवैध रूप से बनाई गई है। राज्य सरकार मंत्री अनिरुद्ध सिंह ने हिमाचल प्रदेश में रोहिंग्या और बांग्लादेशी आ गए हैं। उन्होंने इसको लेकर कार्रवाई की बात की है। वहीं कॉन्ग्रेस के ही एक विधायक इस मस्जिद के बचाव में उतरे हैं।

संजौली मस्जिद को लेकर क्या है विवाद?

राजधानी शिमला में बनी संजौली की मस्जिद में अवैध निर्माण को हटाने की लम्बे समय से माँग चल रही है। यह मामला हाल ही में मारपीट की एक घटना के बाद और गरमा गया। दरअसल, 31 अगस्त, 2024 को एक स्थानीय युवक यशपाल की मल्याना में मुस्लिम लड़कों से कहासुनी हुई। इसके बाद मुस्लिम हिंसक हो गए, उन्होंने यशपाल पर हमला कर दिया और उसे गंभीर रूप से घायल कर दिया। बताया गया कि हमला करने वाले यह युवक कुछ देर बाद संजौली की मस्जिद में छुप गए।

इसके बाद आसपास के लोगों का गुस्सा भड़क गया। स्थानीय लोग यहाँ इकट्ठा होकर इन युवकों पर कार्रवाई करने की माँग करने लगे। इसको लेकर पुलिस में भी मामला दर्ज करवाया गया। पुलिस ने इस मामले में 6 लोगों को पकड़ा, जिसमें 2 नाबालिग हैं। जिन लोगों को गिरफ्तार किया गया है, उनके नाम गुलनवाज, सारिक, सैफ अली और रोहित हैं। इनके साथ दो नाबालिग भी पकड़े गए, जिन्हें बाद में छोड़ दिया गया। गिरफ्तार आरोपितों के विरुद्ध मामला दर्ज किया गया है।

अवैध निर्माण को लेकर उठी आवाज

इस पूरे विवाद के केंद्र में शिमला के संजौली में बनी अवैध मस्जिद आई। इसको लेकर हिन्दू संगठन और स्थानीय संगठन सड़कों पर उतरे और इसे तोड़ने की माँग की। उन्होंने कहा कि इसका निर्माण पूरी तरीके से अवैध है और इसकी अनुमति प्रशासन से नहीं ली गई है। स्थानीय लोगों ने आरोप लगाया कि संजौली की यह मस्जिद पहले कच्ची थी और मात्र दो मंजिल की थी। लेकिन 2010 के बाद इसमें तेजी से पक्का निर्माण किया जाने लगा। देखते देखते यह मस्जिद पाँच मंजिल तक पहुँच गई।

इस मामले में राज्य सरकार ने बताया कि 2010 में जब इस मस्जिद में अवैध निर्माण चालू हुआ तो शिमला नगर निगम ने नोटिस भी भेजे लेकिन निर्माण नहीं रुका। मस्जिद के निर्माण रोकने को लेकर 30-35 नोटिस भेजे जा चुके हैं। इसके आसपास एक अवैध निर्माण को शिमला नगर निगम ने तोड़ा भी था। फिर भी यह पाँच मंजिल मस्जिद शहर के बीचों-बीच खड़ी कर दी गई।

स्थानीय लोग इस निर्माण से गुस्सा हैं। उनका कहना है कि यहाँ नमाज पढ़ने के लिए आने वालों की सँख्या लगातार बढ़ रही है। यहाँ आने वाले कुछ लोगों पर आसपास के घरों में ताकाझाकी के आरोप लगाए गए हैं। स्थानीय लोगों ने आरोप लगाया है कि यहाँ बाहरी लोग आकर माहौल बिगाड़ना चाहते हैं। संजौली की इस मस्जिद को लेकर कोर्ट में भी मामला चल रहा है। बताया गया है कि इस मस्जिद के निर्माण में सलीम खान नाम के व्यक्ति का सबसे बड़ा रोल है। वह सहारनपुर का बताया जा रहा है।

कॉन्ग्रेस के मंत्री-विधायक आपस में भिड़े

अवैध मस्जिद और राज्य में अवैध लोगों की घुसपैठ को लेकर हिमाचल प्रदेश की कॉन्ग्रेस सरकार के विधायक और मंत्री ही आपस में टकरा गए हैं। कॉन्ग्रेस सरकार में मंत्री अनिरुद्ध सिंह ने इसको लेकर विधानसभा में स्थिति साफ़ की है। अनिरुद्ध सिंह ने इसको लेकर कहा, “ये कैसी स्थिति उत्पन्न हो रही प्रदेश में, लगातार बाहरी लोग आ रहे हैं, जमात के लोग आ रहे हैं। क्या यह रोहिंग्या मुस्लिम हैं। मैं खुद ऐसे लोगों को जानता हूँ जो बांग्लादेशी हैं। इन सबका सत्यापन होना चाहिए।”

अनिरुद्ध सिंह ने बताया, “2010 में इस मस्जिद को लेकर काम चालू हुआ, मेरे पास रिकॉर्ड है। इसमें अवैध निर्माण किया गया। 2500 स्क्वेयर फीट का निर्माण किया गया। इसके बाद 2012 में भी यही बात आई। 2010 में मामला चल रहा था लेकिन 2019 तक चार और मंजिल चल गई…संजौली बाजार में महिलाओं का चलना मुश्किल हो गया है। चोरियाँ हो रही हैं। लव जिहाद जैसी घटनाएँ हो रही हैं, जो प्रदेश और देश के लिए खतरनाक हैं। इस मस्जिद का अवैध निर्माण हुआ है।”

अनिरुद्ध सिंह ने खुले तौर पर मस्जिद को अवैध बताया है और इस पर कार्रवाई की बात कही है। उनके अलावा कॉन्ग्रेस सरकार में मंत्री विक्रमादित्य सिंह ने भी इसे अवैध बताया है। जहाँ कॉन्ग्रेस सरकार के मंत्री इस मामले में स्थाने लोगों की बातों का समर्थन कर रहे हैं वहीं कॉन्ग्रेस के ही एक विधायक इसे बचाने की कोशिश में लगे हुए हैं। कॉन्ग्रेस विधायक हरीश जनारथा ने कहा है कि तनाव मस्जिद की वजह से नहीं हुआ है और यह मस्जिद काफी पुरानी है। उन्होंने कहा मस्जिद वक्फ बोर्ड की जमीन पर है।

भाजपा ने कहा- कार्रवाई एक दिन का काम

अवैध मस्जिद के मुद्दे पर भाजपा भी अब हमलावर हो गई है। हिमाचल प्रदेश के पूर्व मुख्यमंत्री जयराम ठाकुर ने कहा, “बाहर से लोग आए हैं, उनका सत्यापन बहुत जरूरी है। जहाँ तक मस्जिद की बात है, इसके बारे में स्पष्ट है कि 2010 में नगर निगम में शिकायत हुई है, इन्हें नोटिस भेजे गए हैं। इसके बावजूद निर्माण कार्य 4 मंजिल तक पहुँच गया। एक दरजी आया था, उसने यह इमारत खड़ी कर दी। धीरे धीरे उसने अपने लोगों को बुलाया और अब वहाँ बड़ी संख्या में इकट्ठा हुए हैं।

जयराम ठाकुर ने कहा, “जो लोग बाहर से आते हैं, उनकी कोई पहचान नहीं है। निर्माण सरकारी जमीन पर है, निर्माण अवैध है और उनके पास कोई मंजूरी नहीं है। उनके खिलाफ कार्रवाई होनी चाहिए। सरकार इस मामले को रफा दफा करना चाहती है। कॉन्ग्रेस संविधान की बात करती है, उस दिन संविधान बचेगा ही नहीं जब हिन्दू कम हो जाएँगे।”

शिमला की इस मस्जिद का यह मामला अब गरमाया हुआ है और हिन्दू संगठन अवैध निर्माण को हटाने के लिए प्रतिबद्ध हो गए हैं। वहीं कॉन्ग्रेस सरकार के मंत्री अनिरुद्ध सिंह भी इस पर मुखर हैं। हालाँकि, अभी तक मस्जिद पर कार्रवाई की कोई बात सामने नहीं आई है। इस बीच शिमला के कसुम्पटी में भी एक मस्जिद के अवैध निर्माण को लेकर विवाद चालू हो गया है।

सुनवाई के दौरान वकील ने उतार लिए कपड़े, गंदे-गंदे इशारे भी किए: एडवोकेट टीके अजान की ‘नग्नता’ से शर्मसार हुआ केरल का कोर्ट, FIR दर्ज

केरल में कोर्ट की सुनवाई के दौरान गंदी हरकत करने पर एक वकील के खिलाफ एफआईआर दर्ज की गई है। आरोप है कि उस वकील ने एक मामले की सुनवाई के दौरान अपनी नग्न होकर फोटो खींचीं और साथ ही साथ यौन इशारे भी किए।

रिपोर्ट्स के मुताबिक, ये घटना 2 सितंबर 2024 की है। बताया जा रहा है कि वकील टीके अजान इडुक्की के थोडुपुझा के अतिरिक्त जिला न्यायाधीश के समक्ष वीडियो कॉन्फ्रेंस करने के जरिए उपस्थित हुए थे। उस समय उन्होंने खुद को बेहद अश्लील ढंग से प्रस्तुत किया।

घटना के बाद न्यायालय ने तुरंत वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग सुनवाई को बंद कर दिया। साथ ही अदालत ने अपने आदेश में कहा, मामले की सुनवाई के दौरान अपीलकर्ता के वकील ने कुछ हाव-भाव के साथ नग्नता दिखाई, इसलिए मामले को निर्देश के साथ स्थगित कर दिया गया।

कोर्ट ने कि अपीलकर्ता के वकील को अदालत के समक्ष व्यक्तिगत रूप से उपस्थित होने के निर्देश दिए और उनके हाव भाव देख गूगल मीट को बंद कर दिया गया। साथ ही मामले की सुनवाई की अगली तारीख 3 अक्टूबर चुनी गई।

बाद में बेंच क्लर्क द्वारा न्यायालय में आरोपित वकील के खिलाफ वकील के खिलाफ भारतीय न्याय संहिता (बीएनएस) की धारा 79 (किसी महिला की शील को अपमानित करने के इरादे से शब्द, इशारा या कार्य) और सार्वजनिक स्थान पर महिलाओं की गरिमा को ठेस पहुंचाने वाले यौन इशारों या कृत्यों पर केरल पुलिस अधिनियम की धारा 119 (1) (ए) के तहत अपराध के लिए प्राथमिकी दर्ज की गई।

अल्ताफ ने आकाश बनकर दोस्ती की, अकेला देख किया रेप: इस्लाम कबूलने और बुर्का-नमाज से इनकार पर करता था मरापीट, 4 साल की बेटी से दुष्कर्म की धमकी

उत्तर प्रदेश के मुरादाबाद में एक महिला ने अल्ताफ नाम के मुस्लिम पर आकाश बनकर उससे दोस्ती करने और फिर शादी का झाँसा देकर रेप करने का आरोप लगाते हुए मुकदमा दर्ज कराया है। अल्ताफ ने बाद में महिला पर इस्लाम अपनाकर मुस्लिम बनने का दबाव बनाया। महिला ने इनकार किया तो उसकी 4 साल की बेटी से रेप करने की धमकी दी। पुलिस ने आरोपित को गिरफ्तार कर लिया है।

घटना मुदाराबाद जिले के मझोला थाना क्षेत्र की है। पीड़ित महिला ने अपनी शिकायत में बताया कि वह मुरादाबाद के लाइनपार इलाके की रहने वाली है। वह विवाहित और 4 साल की बच्ची की माँ है। नौकरी करने वह अमरोहा जाती है। वहाँ पर उसकी मुलाकात अल्ताफ से हुई। अल्ताफ ने उसे अपना नाम आकाश बताया और उससे दोस्ती कर ली। धीरे-धीरे अल्ताफ उसे अपने झाँसे में ले लिया।

महिला बताया कि एक दिन वह अपने घर में अकेली थी। इसी दौरान अल्ताफ उससे मिलने मुरादाबाद आया। उसे अकेला पाकर उसने महिला के साथ रेप किया। जब महिला ने इसकी शिकायत करने की बात कही तो वह शादी का झाँसा दिया। महिला का आरोप है कि अल्ताफ ने उसका अश्लील वीडियो भी बना लिया। जब उसे पता चल गया कि आकाश हिंदू नहीं मुस्लिम नहीं तो वह उसे परेशान लगा।

महिला का कहना है कि इस वीडियो के नाम पर उसे ब्लैकमेल करके उसे अपने पति से भी अलग करा दिया। वह वीडियो को वायरल करने की धमकी देकर साथ रहने के लिए मजबूर करने लगा। अल्ताफ ने उस पर माँस खाने और बुर्का पहनने का दबाव डालने लगा। उसे पाँचों वक्त नमाज पढ़ने के लिए कहने लगा। जब वह इनकार करती तो अल्ताफ ने उसके साथ मारपीट करने लगा।

महिला ने कहा, “2 सितंबर 2024 को अल्ताफ मेरे घर आया और धमकी दी कि तुझे इस्लाम कबूल करना होगा। जब मैंने ऐसा करने से इनकार कर दिया तो उसने मेरी 4 साल की बेटी के कपड़े उतार दिए। उसने धमकाया कि अगर मैं इस्लाम कबूल नहीं करूँगी तो वह मेरी बेटी के साथ रेप करेगा। मैं किसी तरह बचकर भागी और थाने पहुँचकर पुलिस को इसकी सूचना दी।”

शिकायत मिलने के बाद पुलिस ने आरोपित अल्ताफ के खिलाफ विभिन्न धाराओं में मुकदमा दर्ज करके उसे गिरफ्तार कर लिया। SP सिटी कुमार रणविजय सिंह ने बताया कि आरोपित अल्ताफ के खिलाफ पॉक्सो एक्ट समेत विभिन्न धाराओं में केस दर्ज किया है। आरोपित को गिरफ्तार करके उससे पूछताछ की जा रही है।

पंजाब में ₹100 करोड़ का साइबर घोटाला: शिक्षा मंत्री हरजोत बैंस और SP पत्नी ज्योति यादव पर आरोप: AAP नेता बोले- हम बेदाग, मानहानि का मुकदमा करेंगे

पंजाब में एक बड़ा साइबर घोटाला सामने आया है, जिसमें आम आदमी पार्टी (आप) के मंत्री हरजोत बैंस और उनकी पत्नी पुलिस अधीक्षक (एसपी) ज्योति यादव के नाम कथित रूप से जुड़े हैं। मामले में मोहाली की इंस्पेक्टर अमनजोत कौर ने पंजाब पुलिस के महानिदेशक को शिकायत दर्ज कराई है, जिसमें साइबर फ्रॉड और उच्च स्तर की मिलीभगत के गंभीर आरोप हैं। इस बीच, पंजाब के मंत्री हरजोत सिंह बैंस ने एक्स पर आरोपों को खारिज किया है और कहा कि वो और उनकी पत्नी बेदाग हैं। वो इस मामले में मानहानि का केस करेंगे।

पीटीसी न्यूज के मुताबिक, यह जानकारी आरटीआई कार्यकर्ता माणिक गोयल ने अपने एक्स हैंडल पर शेयर की है। पोस्ट के मुताबिक, साइबर क्राइम यूनिट में पहले काम कर चुकी इंस्पेक्टर अमनजोत कौर ने इस संबंध में पंजाब पुलिस के महानिदेशक के पास शिकायत दर्ज कराई है।

इंस्पेक्टर अमनजोत कौर ने अपनी शिकायत में कहा कि मोहाली के एक बेसमेंट से संचालित एक फर्जी कॉल सेंटर ने विदेशियों से 100 करोड़ रुपये से अधिक की रकम ठगी है। इस घोटाले की प्रारंभिक जाँच अमनजोत ने शुरू की थी, जिसमें विजय राय कपूरिया को गिरफ्तार किया गया था। शिकायत में कहा गया है कि विजय राय कपूरिया का आम आदमी पार्टी के नेता और पंजाब सरकार के शिक्षा मंत्री हरजोत सिंह बैंस से गहरा संबंध है। बैंस और कपूरिया दोनों ही नांगल के रहने वाले हैं। अमनजोत ने आरोप लगाया कि बैंस को इस घोटाले से पार्टी के लिए फंड भी प्राप्त हुआ होगा।

अमनजोत ने आरोप लगाया कि मंत्री हरजोत सिंह बैंस की पत्नी एसपी ज्योति यादव जाँच में बाधा डाल रही हैं और मामले को रोकने के लिए दबाव डाल रही हैं। हालाँकि, जाँच के दौरान उन्हें रोकने की काफी कोशिश की गई। इसी क्रम में उनके खिलाफ फर्जी मुकदमा भी दर्ज कराया गया। इंडियन एक्सप्रेस ने भी इस शिकायत के बारे में खबर छापी है, हालाँकि उसमें मंत्री और उनकी एसपी पत्नी के नाम नहीं दिए गए हैं, लेकिन कॉल सेंटर घोटाले के आरोपितों के बारे में जानकारी दी गई है।

मंत्री की एसपी पत्नी पर भी गंभीर आरोप

इंस्पेक्टर अमनजोत कौर ने अपनी शिकायत में मंत्री हरजोत बैंस की पुलिस अधीक्षक (एसपी) पत्नी ज्योति यादव पर आरोप लगाया कि उन्होंने जाँच में रुकावट डालने की कोशिश की और मामले को कमजोर करने के लिए दबाव बनाया। एसपी ज्योति यादव पर यह आरोप लगाया गया है कि उन्होंने प्रोफेसर बलविंदर कौर की मौत के मामले में भी हस्तक्षेप किया था, जिसमें एसपी ज्योति यादव और डीएसपी गुरशेर ने प्रोफेसर बलविंदर कौर से संबंधित कॉल रिकॉर्ड अवैध रूप से माँगे, जिन्होंने 1,158 सहायक प्रोफेसरों से जुड़े विवाद के बीच आत्महत्या कर ली थी।

बलविंदर कौर ने आत्महत्या से पहले एक सुसाइड नोट छोड़ा था। उन्होंने अपने सुसाइड नोट में हरजोत सिंह बैंस का नाम लिखा था। अमनजोत ने कहा कि एसपी ज्योति यादव इस मामले को अपने पति को बचाने के लिए दबा रही थीं। बता दें कि एसपी ज्योति यादव और मंत्री हरजोत बैंस ने बीते साल मार्च महीने में शादी की थी।

अमनजोत कौर ने एक जज पर भी आरोप लगाए हैं कि उन्होंने घोटालेबाजों से संपत्ति स्वीकार की और उनके खिलाफ एक फर्जी एफआईआर दर्ज की। शिकायत में जज का नाम और संपत्ति का विवरण भी दिया गया है। अमनजोत ने इस मामले की निष्पक्ष जाँच की माँग की है और मोहाली पुलिस से केस हटाकर किसी अन्य एजेंसी से जाँच कराने की अपील की है।

यह घोटाला पंजाब के साइबर क्राइम यूनिट से जुड़ा है, जहाँ फर्जी कॉल सेंटर चलाए जा रहे थे। इन कॉल सेंटरों से विदेशियों को निशाना बनाकर ठगी की जा रही थी, और यह राशि धीरे-धीरे करोड़ों में पहुँच गई। कॉल सेंटर के मालिक विजय राय कपूरिया को गिरफ्तार कर लिया गया था, लेकिन जाँच के दौरान कई बड़े नाम सामने आए हैं, जिसमें हरजोत बैंस का नाम भी प्रमुख रूप से उभर कर आया है। अगर इन आरोपों की पुष्टि होती है, तो यह आम आदमी पार्टी के लिए बड़ा झटका साबित हो सकता है, जो भ्रष्टाचार और घोटाले के खिलाफ कड़ा रुख अपनाने का दावा करती है।

हालाँकि हरजोत सिंह बैंस ने सोशल मीडिया पर सफाई दी है कि उनका नाम गलत तरीके से लिया जा रहा है। उन्होंने एक्स पर लिखा, “अभी-अभी मुझे एक दागी अधिकारी द्वारा मेरे और मेरी पत्नी के खिलाफ लगाए गए निराधार आरोपों के बारे में पता चला, जो एक बेदाग रिकॉर्ड वाली एक शानदार आईपीएस अधिकारी हैं। हम मानहानि का मुकदमा दायर करेंगे। अरविंद केजरीवाल के एक सिपाही के रूप में ईमानदारी मेरा धर्म है। मुझे अपनी पत्नी पर गर्व है, जो पेशेवर और ईमानदारी की मिशाल है। हम सच्चाई सामने लाने के लिए किसी भी जाँच का स्वागत करते हैं।”

इंस्पेक्टर ने की न्याय की माँग

अमनजोत कौर ने इस मामले की निष्पक्ष और स्वतंत्र जाँच की माँग की है। उनका कहना है कि यह घोटाला न केवल साइबर क्राइम का मामला है, बल्कि इसमें राजनीतिक हस्तक्षेप और मिलीभगत का भी संदेह है। अब देखना यह है कि पंजाब पुलिस और राज्य सरकार इस मामले में क्या कदम उठाती है। वैसे, यह मामला न केवल राष्ट्रीय बल्कि अंतर्राष्ट्रीय स्तर पर भी अहम है, क्योंकि इसमें विदेशियों को निशाना बनाया गया है। साइबर घोटाले की इस घटना ने एक बार फिर साइबर सुरक्षा और अपराध के खिलाफ कठोर कदम उठाने की आवश्यकता को रेखांकित किया है।

सनातन में महिलाओं का सम्मान देख मुस्लिम महिला ने बेटों संग की घर वापसी, शौहर इरफान खान से थीं दुखी: मेहनाज बनी मीनाक्षी, बच्चे ‘लव-कुश’

मध्य प्रदेश के मंदसौर जिले में एक मुस्लिम महिला ने अपने पूर्व शौहर की प्रताड़ना से तंग आकर अपने दो बच्चों के साथ हिंदू धर्म अपनाने का निर्णय लिया। इस बदलाव के साथ ही महिला का नाम मेहनाज बी से मीनाक्षी रखा गया है और उनके दोनों बेटों के नाम लव और कुश रखे गए हैं। उन्होंने यह कदम सनातन परंपरा में महिलाओं के प्रति सम्मान और आदर देखकर उठाया।

मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक, मंदसौर जिले के धमानर गाँव की रहने वाली 30 वर्षीय मेहनाज बी ने बुधवार (4 सितंबर 2024) को अपने दो बेटों के साथ गायत्री मंदिर में शुद्धिकरण प्रक्रिया के तहत हिंदू धर्म अपनाया। शुद्धिकरण के बाद उनका नाम मीनाक्षी और बच्चों के नाम लव और कुश रखे गए।

मीनाक्षी ने बताया कि उसने अपने शौहर इरफान खान के साथ 15 साल पहले निकाह किया था। शुरूआत में सब कुछ ठीक था, लेकिन धीरे-धीरे शौहर और सास-ससुर का व्यवहार बदल गया। वे छोटी-छोटी बातों पर मारपीट करने लगे और उसके साथ अपशब्द कहने लगे। परिवार की स्थिति इतनी दयनीय हो गई कि उसके अब्बू अब्दुल रशीद ने इसे पारिवारिक मामला बताते हुए हस्तक्षेप नहीं किया।

सनातन में महिलाओं का सम्मान

मीनाक्षी ने बताया कि उसने यूट्यूब और अन्य माध्यमों से देखा कि हिंदू धर्म में महिलाओं को सम्मान और इज्जत दी जाती है। यह बात उसे बहुत प्रभावित कर गई। हिंदू धर्म में महिलाओं के प्रति सम्मान और उनकी भूमिका को देखकर उसने हिंदू संगठन के लोगों से संपर्क किया और धर्म परिवर्तन की प्रक्रिया शुरू की।

गायत्री मंदिर में हुए विधिपूर्वक घर वापसी समारोह में करीब डेढ़ घंटे तक मंत्रोचार किया गया। इस दौरान मीनाक्षी और उनके दोनों बेटों को दूध, दही, शहद, गंगाजल, गौमूत्र और गोबर से स्नान करवाया गया। पूजा और आरती के बाद मीनाक्षी और उनके दोनों बेटे लव और कुश ने सनातन धर्म अपनाया।

मीनाक्षी ने बताया कि निकाह के बाद उसके जीवन में जो कठिनाइयाँ आईं, वे अब समाप्त हो गई हैं। अब वह अपने नए जीवन में संतुष्ट और खुशहाल महसूस कर रही हैं। उन्होंने आशा जताई है कि उनके धर्म परिवर्तन की कहानी दूसरों के लिए प्रेरणा का स्रोत बनेगी और वे भी अपने जीवन में सकारात्मक बदलाव ला सकेंगे। मीनाक्षी ने बताया, “उसका खुद के घर में बहुत अपमान होता था, उन्हें और उनके बच्चों को इज्जत नहीं मिलती थी। उन्हें हर तरह से प्रताड़ित किया जाता था। इस मामले में उसके मायके पक्ष के लोग भी खुलकर साथ नहीं दे पाए, लिहाजा उसने नई दुनिया बसाने के सोची और हिंदू धर्म स्वीकार कर लिया।”

हिंदू युवा वाहिनी के प्रदेश प्रभारी चैतन्य सिंह राजपूत ने बताया कि मेहनाज ने करीब दो से तीन माह पहले घर वापसी के लिए संपर्क किया था। सभी कानूनी प्रक्रियाओं को पूरा कर गायत्री परिवार मंदिर में घर वापसी का आयोजन किया गया। अब मीनाक्षी और उनके दोनों बेटे लव और कुश बहुत खुश हैं। राजपूत ने बताया कि वे अब तक 40 महिलाओं, 5 पुरुष और 2 बच्चों की पूरी कानूनी प्रक्रियाओं का पालन करते हुए घर वापसी करवा चुके हैं, और सभी खुशहाल जीवन जी रहे हैं।

हिंदू युवा वाहिनी के प्रतिनिधियों का कहना है कि धर्म परिवर्तन की इस प्रक्रिया ने उन लोगों को नया जीवन देने में मदद की है जो अपने पूर्व जीवन से दुखी थे। अब वे एक नई शुरुआत के साथ एक बेहतर जीवन जी रहे हैं।

शिमला में अवैध बनी 5 मंजिला मस्जिद के खिलाफ हिंदुओं का प्रदर्शन: कॉन्ग्रेस सरकार में मंत्री बोले- यहाँ महिलाओं का चलना मुश्किल, हो रहा लव जिहाद

हिमाचल प्रदेश की राजधानी शिमला में एक मस्जिद के अवैध निर्माण को लेकर लोगों में आक्रोश फैल गया है। संजौली उपनगर में सैकड़ों लोग इस अवैध निर्माण के खिलाफ एकजुट होकर संजौली बाजार में विरोध मार्च निकाला और फिर मस्जिद का घेराव किया। वहीं, कॉन्ग्रेस सरकार में मंत्री अनिरुद्ध सिंह ने कहा कि संजौली बाज़ार में महिलाओं का चलना मुश्किल हो गया है और लव जिहाद की घटनाएँ हो रही हैं।

प्रदेश सरकार में मंत्री अनिरुद्ध सिंह के बयान के बाद AIMIM प्रमुख असदुद्दीन ओवैसी ने भी अपनी प्रतिक्रिया दी है। वहीं, पूर्व मुख्यमंत्री एवं भाजपा नेता जयराम ठाकुर ने भी इसका विरोध किया है।इतना ही नहीं, राज्य सरकार में मंत्री अनिरुद्ध सिंह धरने में भी पहुँचे और सभा को संबोधित भी किया। हिंदू संगठनों ने इस गिराने के लिए राज्य सरकार को दो दिन का अल्टीमेटम दिया है। 

अपनी सरकार पर निशाना साधते हुए अनिरुद्ध सिंह ने कहा, “संजौली बाजार में महिलाओं का चलना मुश्किल हो गया है। चोरियाँ हो रही हैं। लव जिहाद जैसी घटनाएँ हो रही हैं, जो प्रदेश और देश के लिए खतरनाक हैं। इस मस्जिद का अवैध निर्माण हुआ है। पहले एक मंजिल बनाई गई, फिर बिना अनुमति लिए इसे 5 मंजिल की मस्जिद बना दी गई है। प्रशासन ने इसका बिजली-पानी क्यों नहीं काटा?”

उन्होंने कहा कि बाजार में होने वाली अभद्र टिप्पणियों का वे स्वयं गवाह हैं। राज्य की सुखविंदर सिंह सुक्खू सरकार में ग्रामीण विकास एवं पंचायती राज मंत्री अनिरुद्ध सिंह ने आगे कहा कि क्षेत्र में हो रहे झगड़ों और हिंसा के पीछे स्थानीय लोगों का हाथ नहीं है, बल्कि यह बाहरी तत्वों द्वारा शुरू किया गया है। इसके बाद ही स्थानीय लोगों ने प्रतिक्रिया दी है।

उन्होंने मुख्यमंत्री से माँग की है कि काम करने के लिए राज्य में आने वाले व्यक्तियों का सही तरीके से सत्यापन किया जाना चाहिए। मंत्री ने कहा कि केवल हिमाचली बोनाफाइड नागरिकों को ही तहबाज़ारी का लाइसेंस दिया जाना चाहिए। विपक्षी दल भाजपा ने भी इस मामले में अनिरुद्ध सिंह का समर्थन किया। अब कॉन्ग्रेस सरकार पर इस मामले में कार्रवाई को लेकर दबाव बढ़ गया है।

दरअसल, देवभूमि क्षेत्रीय संगठन के अध्यक्ष रुमित सिंह ठाकुर के नेतृत्व में स्थानीय लोगों ने शिमला में गुरुवार (5 सितंबर) को यह मार्च निकाला। मलाणा क्षेत्र में 1 सितंबर को व्यवसायी यशपाल सिंह पर कुछ मुस्लिमों ने हमला कर दिया था। इस हमले में उनके सिर पर 14 टाँके लगे हैं। इसके बाद गुस्साए लोगों ने वहाँ भी एक मस्जिद के सामने प्रदर्शन करके उसे गिराने की माँग की।

ओवैसी की प्रतिक्रिया और अनिरुद्ध सिंह का पलटवार

AIMIM प्रमुख असदुद्दीन ओवैसी ने हिमाचल प्रदेश के मंत्री अनिरुद्ध सिंह के बयान पर कड़ी प्रतिक्रिया दी है। उन्होंने कहा कि कॉन्ग्रेस भी अब भाजपा की भाषा बोलने लगी है। ओवैसी ने सोशल मीडिया साइट एक्स (पूर्व में ट्विटर) एक वीडियो पोस्ट किया और कहा, “क्या हिमाचल की सरकार भाजपा की है या कांग्रेस की? हिमाचल की ‘मोहब्बत की दुकान’ में नफ़रत ही नफ़रत है।”

ओवैसी के बयान पर प्रतिक्रिया देते हुए अनिरुद्ध सिंह ने कहा, “मन्दिर-मस्जिद निजी संपत्ति नहीं हैं। यहाँ वैध और अवैध का मामला है। अवैध तो अवैध है।” उन्होंने कहा कि ओवैसी की राजनीति केवल एक समुदाय के दम पर चलती है। वह अपना राज्य सँभालें। बाहर से आने वाले लोगों का मुद्दा गंभीर है और उनकी पहचान करना जरूरी है। उन्होंने कहा कि आपराधिक पृष्ठभूमि के लोग हिमाचल आ रहे हैं।

वहीं, शिमला नगर निगम के आयुक्त भूपेंद्र अत्री ने बताया कि मस्जिद के लिए केवल एक मंजिल के निर्माण की अनुमति दी गई थी, लेकिन अवैध रूप से तीन और मंजिलें बनाई गई हैं। उन्होंने कहा कि यह मामला कोर्ट में विचाराधीन है और वक्फ बोर्ड को भी इसमें पार्टी बनाया गया है। उन्होंने कहा कि मामला कोर्ट में जाने के बाद कोई निर्माण नहीं हुआ है।

हिंदू जागरण मंच के पूर्व प्रांत अध्यक्ष कमल गौतम ने कहा कि जिस जगह पर मस्जिद बनी है, वह हिमाचल प्रदेश सरकार की भूमि है। ऐसा खुद सरकार भी मान रही है। उन्होंने कहा कि वक्फ बोर्ड कोई बोर्ड नहीं है, बल्कि भू माफिया है। कमल गौतम ने कहा कि हिमाचल प्रदेश में अपराधियों शरण स्थली बन गई है और यह पवित्र भूमि खतरे में आ गई है।

बता दें कि सुखविंदर सिंह सुक्खू के नेतृत्व वाली कॉन्ग्रेस सरकार में कैबिनेट मंत्री अनिरुद्ध सिंह ने बुधवार (4 सितंबर 2024) को विधानसभा में इस मामले को उठाया। उन्होंने कहा कि हिमाचल में अब रोज नए लोग आ रहे हैं। कहीं से जमात वाले आ रहे हैं, जिनका कोई अता-पता नहीं है। क्या ये रोहिंग्या मुसलमान हैं? उन्होंने कहा कि वे खुद एक-दो लोगों को जानते हैं, जो बांग्लादेश से आए हैं।

ग्रामीण विकास मंत्री अनिरुद्ध सिंह ने खुलासा किया कि इस मस्जिद का अवैध तौर पर अब तक 6,357 वर्ग फुट में अवैध निर्माण हो गया है। इससे भी बढ़कर चिंता की बात है कि जो व्यक्ति केस की सुनवाई में आ रहा था, उसके बारे में साल 2023 में निगम को पता चलता है कि उसका केस से लेना-देना ही नहीं है। उन्होंने पूछा कि क्या निगम के अफसरों ने उसके कागज चेक नहीं किए?

PM मोदी की ‘स्वच्छ भारत मिशन’ के सामने आने लगे अच्छे परिणाम, शोध में खुलासा: भारत में शिशु मृत्यु दर में आई भारी कमी, सालाना 70000 शिशुओं की बच रही जान

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में शुरू किया गया स्वच्छ भारत मिशन (SBM) अब एक महत्वपूर्ण सफलता की कहानी बनकर उभरा है। एक नई रिसर्च रिपोर्ट के अनुसार, स्वच्छ भारत मिशन ने भारत में हर साल 60,000 से 70,000 शिशुओं की जान बचाने में महत्वपूर्ण योगदान दिया है।

सुमन चक्रवर्ती, सोयरा गुने, टिम ए. ब्रुकनर, जूली स्ट्रोमिंगर और पार्वती सिंह द्वारा किए गए अध्ययन “स्वच्छ भारत मिशन के तहत शौचालय निर्माण और भारत में शिशु मृत्यु दर” को नेचर पत्रिका में प्रकाशित किया गया है। इसमें इस बात पर जोर दिया गया है कि स्वच्छ भारत कार्यक्रम के तहत शौचालय निर्माण से देश में शिशु और पाँच साल से कम उम्र के बच्चों की मृत्यु दर में कमी आई है। यही नहीं, देश में स्वच्छता को लेकर जागरुकता भी आई है, जिसके दूरगामी परिणाम अब आने शुरू हो गए हैं। स्वच्छ भारत अभियान की वजह से सालाना 60-70 हजार शिशुओं की जान भी बच रही है।

स्वच्छ भारत मिशन की शुरुआत 2 अक्टूबर 2014 को महात्मा गाँधी की जयंती के दिन हुई थी। इसका मुख्य उद्देश्य भारत में खुले में शौच की आदतों को समाप्त करना और स्वच्छता को बढ़ावा देना है। इस मिशन के अंतर्गत, ग्रामीण और शहरी दोनों क्षेत्रों में शौचालयों का निर्माण, स्वच्छता शिक्षा, और स्वच्छता प्रबंधन के लिए कई पहल किए गए हैं।

स्वच्छ भारत मिशन ने भारत के विभिन्न हिस्सों में स्वच्छता की स्थिति में सुधार लाने के लिए कई महत्वपूर्ण कदम उठाए हैं। इसके तहत स्वच्छ शौचालयों का निर्माण, स्वच्छता पर जागरूकता अभियान, और स्वच्छता प्रबंधन के लिए विभिन्न योजनाएँ लागू की गई हैं। इस लेख में, हम स्वच्छ भारत मिशन के प्रभाव और शिशु मृत्यु दर में कमी के प्रमुख आँकड़े और विश्लेषण प्रस्तुत करेंगे।

शिशु मृत्यु दर में कमी के आँकड़े

स्वच्छता में सुधार के परिणामस्वरूप, भारत में शिशु मृत्यु दर (IMR) में महत्वपूर्ण कमी देखी गई है। नई रिपोर्ट के अनुसार, स्वच्छ भारत मिशन ने हर साल 60,000 से 70,000 शिशुओं की जान बचाई है।

शिशु मृत्यु दर में कमी: यह शोधपत्र शिशु मृत्यु दर (आईएमआर) और 5 वर्ष से कम आयु के बच्चों की मृत्यु दर (यू5एमआर) पर शौचालय निर्माण के प्रभाव का अनुमान दो-तरफ़ा निश्चित-प्रभाव प्रतिगमन मॉडल का उपयोग करके लगाता है। इसमें पाया गया कि जिन जिलों में स्वच्छ भारत मिशन के तहत 30% घरों में शौचालय बने थे, उनमें प्रति 1,000 जीवित जन्मों पर 5.3 शिशु मृत्यु दर और 5 वर्ष से कम आयु के बच्चों की मृत्यु दर में 6.8 की कमी आई, जो बाल जीवित रहने की दरों पर बेहतर स्वच्छता के परिणाम को दर्शाता है।

वार्षिक जीवन बचत: एक नई अध्ययन रिपोर्ट के अनुसार, स्वच्छ भारत मिशन हर साल 60,000 से 70,000 शिशुओं की जान बचाने में सफल रहा है। इस आँकड़े से यह स्पष्ट होता है कि स्वच्छता में सुधार का प्रत्यक्ष प्रभाव शिशु मृत्यु दर पर पड़ा है।

स्वच्छता का प्रभाव: स्वच्छता की स्थिति में सुधार और स्वच्छ शौचालयों की उपलब्धता के कारण, खासकर ग्रामीण क्षेत्रों में, शिशु मृत्यु दर में कमी आई है। 2014 में 38 मिलियन स्वच्छ शौचालयों की संख्या अब 2023 तक 100 मिलियन से अधिक हो गई है।

डायरिया और संक्रामक बीमारियों में कमी: स्वच्छता में सुधार के कारण, डायरिया जैसी संक्रामक बीमारियों में भी कमी आई है। डायरिया के मामलों में 2014 से 2023 तक 20% की कमी देखी गई है। इसके साथ ही, अन्य संक्रामक बीमारियों जैसे कि हैज़ा और कॉलरा के मामलों में भी कमी आई है।

स्वच्छ भारत मिशन की सफलताएँ

इस शोध पत्र के मुताबिक, साल 2011 से 2020 तक 640 जिलों को कवर करने वाले सभी भारतीय राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों के डेटा का उपयोग किया गया है। इस अध्ययन का उद्देश्य बच्चों के स्वास्थ्य पर इस विशाल स्वच्छता कार्यक्रम के प्रभाव का आकलन करना है। लेखकों ने कार्यक्रम के तहत शौचालय प्राप्त करने वाले घरों के जिला प्रतिशत हिस्से पर ध्यान केंद्रित किया है, जो स्वच्छता तक बेहतर पहुँच और शिशु मृत्यु दर में कमी के बीच स्पष्ट संबंध दर्शाता है।

स्वच्छ शौचालयों का निर्माण: मिशन के तहत, 2014 से 2024 तक भारत में 100 मिलियन से अधिक शौचालयों का निर्माण किया गया है। इसके परिणामस्वरूप पहले के 30% के मुकाबले अब अधिकतम ग्रामीण घरों में अब स्वच्छ शौचालय की सुविधा उपलब्ध है।

स्वच्छता शिक्षा और जागरूकता: स्वच्छ भारत मिशन ने स्वच्छता शिक्षा के लिए कई अभियान चलाए हैं। स्कूलों और समुदायों में स्वच्छता के महत्व के बारे में जागरूकता फैलाने के लिए कार्यक्रम चलाए गए हैं, जिनसे लोगों को स्वच्छता की आदतें अपनाने में मदद मिली है।

स्वास्थ्य सेवाओं में सुधार: स्वच्छता की दिशा में उठाए गए कदमों के साथ, भारतीय सरकार ने स्वास्थ्य सेवाओं में भी सुधार किया है। स्वास्थ्य केंद्रों में स्वच्छता और सुविधाओं की स्थिति में सुधार हुआ है, जिससे लोगों को बेहतर स्वास्थ्य सेवाएं उपलब्ध हो रही हैं।

भविष्य की योजनाएँ और चुनौतियाँ

स्वच्छ भारत मिशन की सफलता के बावजूद, कुछ चुनौतियाँ अभी भी मौजूद हैं। शहरी और ग्रामीण क्षेत्रों में स्वच्छता की स्थिति को बनाए रखना और सुधारना एक सतत प्रक्रिया है। सरकार ने आगामी वर्षों में निम्नलिखित योजनाएँ बनाईं हैं:

  • स्वच्छता का स्थायित्व: स्वच्छता को स्थायी रूप से बनाए रखने के लिए, नियमित निगरानी और रखरखाव के लिए योजनाएं बनाई जा रही हैं। स्वच्छता की आदतों को जन-आंदोलन के रूप में बनाए रखने के लिए शिक्षा और जागरूकता अभियानों को जारी रखा जाएगा।
  • नए शौचालयों का निर्माण: शहरी और ग्रामीण क्षेत्रों में और अधिक स्वच्छ शौचालयों का निर्माण जारी रहेगा। विशेष रूप से उन क्षेत्रों में ध्यान केंद्रित किया जाएगा जहां स्वच्छता की सुविधाएँ अभी भी अपर्याप्त हैं।
  • स्वास्थ्य सेवाओं में सुधार: स्वास्थ्य सेवाओं में सुधार के लिए सरकार ने कई नई योजनाएं बनाई हैं। प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्रों और अस्पतालों में स्वच्छता और सेवाओं को बेहतर बनाने के लिए निवेश किए जाएंगे।

स्वच्छ भारत मिशन ने भारत में स्वच्छता और स्वास्थ्य के क्षेत्र में महत्वपूर्ण सुधार किए हैं, विशेष रूप से शिशु मृत्यु दर में कमी लाने में। इस मिशन के तहत उठाए गए कदमों के परिणामस्वरूप, स्वच्छता की स्थिति में सुधार हुआ है और हर साल 60,000 से 70,000 शिशुओं की जान बचाई गई है। स्वच्छता में सुधार और बेहतर स्वास्थ्य सुविधाओं के माध्यम से, भारत एक स्वस्थ और स्वच्छ भविष्य की ओर बढ़ रहा है। हालाँकि, चुनौतियाँ अभी भी हैं, लेकिन सरकार की योजनाओं और मिशन की सफलता से यह स्पष्ट है कि भारत स्वच्छता और स्वास्थ्य के क्षेत्र में एक नई दिशा में अग्रसर है।

RG कर मेडिकल कॉलेज रेपकांड में संदीप घोष ने की थी सबूतों को नष्ट करने की कोशिश? BJP का आरोप- घटना के अगले दिन पूर्व प्रिंसिपल ने जारी किया था रेनोवेशन ऑर्डर

कोलकाता के आरजी कर मेडिकल कॉलेज और अस्पताल में डॉक्टर के रेप-मर्डर केस केस में पूर्व प्रिंसिपल संदीप घोष पर सबूत मिटाने के आरोप लगते रहे हैं। मृतका के माता-पिता और जूनियर्स डॉक्टर्स ने सबूत मिटाने के आरोप लगाए थे। इस बीच, एक पत्र वायरल हो रहा है, जिसमें दावा किया गया है कि ये पत्र संदीप घोष ने जारी किया था और रेप-मर्डर के दूसरे ही दिन अस्पताल के सेमीनार हॉल में तोड़फोड़ और सबूत मिटाने की कोशिश की थी।

आरजी कर मेडिकल कॉलेज और अस्पताल में डॉक्टर के रेप-मर्डर केस में गुरुवार (5 सितंबर 2024) को पश्चिम बंगाल बीजेपी प्रमुख सुकांत मजूमदार ने गंभीर आरोप लगाते हुए कहा है कि रेप की घटना के अगले दिन ही मेडिकल कॉलेज के पूर्व प्रिंसिपल संदीप घोष ने लेटर लिखकर सेमिनार हॉल के पास रेनोवेशन करवाने का ऑर्डर दिया था। बता दें कि सेमिनार हॉल वही जगह है, जहाँ डॉक्टर की रेप के बाद हत्या कर दी गई।

केंद्रीय मंत्री और बीजेपी के प्रदेश अध्यक्ष सुकांत मजूमदार ने कथित तौर पर संदीप घोष द्वारा जारी पत्र भी शेयर किया है, जिसमें संदीप घोष के हस्ताक्षर भी हैं। बीजेपी नेता सुकांत मजूमदार ने एक्स पर लिखा, ”आरजी कर मेडिकल कॉलेज के पूर्व डायरेक्टर संदीप घोष द्वारा साइन किया गया यह आदेश 10 अगस्त का है, जो पीड़िता की मौत के ठीक एक दिन बाद का है। सहकर्मियों और प्रदर्शनकारियों द्वारा घटनास्थल के साथ छेड़छाड़ के आरोपों के बावजूद, पुलिस आयुक्त ने इससे इनकार किया है।”

पत्र के मुताबिक संदीप घोष ने लोक निर्माण विभाग को पत्र लिखा था और टॉयलेट रेनोवेशन की अनुमति माँगी थी। संदीप घोष ने ऑन ड्यूटी डॉक्टरों के लिए टॉयलेट रूम बनाने हेतु निर्माण का आदेश दिया था। निर्देश में साफ दिख रहा है कि संदीप घोष ने लोकनिर्माण विभाग के सिविल और इलेक्ट्रिकल इंजीनियर को यह निर्देश दिया था।

सीबीआई पहले ही सुप्रीम कोर्ट में कह चुकी है कि घटनास्थल से सबूत गायब हो गए हैं। ऐसे में घटनास्थल तोड़ने का निर्देश भी प्रासंगिक है। सीबीआई पहले ही इस मामले का जिक्र कोर्ट में कर चुकी है।

इस मामले में कई मीडिया रिपोर्ट्स पहले ही दावा कर रही थीं कि संदीप घोष ने घटना स्थल के पास मरम्मत कार्य का आदेश दिया था, जिससे साक्ष्यों से छेड़छाड़ की संभावना पर सवाल उठाए जा रहे हैं। इस पत्र के वायरल होने के बाद सत्तारूढ़ पार्टी और पुलिस पर सवाल उठने लगे हैं। बीजेपी का आरोप है कि कॉलेज प्रशासन और राज्य सरकार ने इस घटना को छुपाने की कोशिश की है।

गौरतलब है कि 9 अगस्त 2024 के तड़के कोलकाता के आरजी कर अस्पताल में नाइट ड्यूटी के दौरान महिला डॉक्टर से रेप के बाद हत्या की गई थी। इस मामले में जब अन्य डॉक्टर इंसाफ माँगने प्रदर्शन पर उतरे तो उन्हें उपद्रवियों द्वारा डराया-धमकाया गया था। साथ ही अस्पताल में भी तोड़फोड़ हुई थी।