नेटफ्लिक्स पर हाल ही में रिलीज की गई IC814: द कंधार हाइजैक वेब सीरिज पर प्रतिबंध लगाने के लिए जनहित याचिका (PIL) लगाई गई है। याचिका में कहा गया है कि इस वेब सीरिज में तथ्यों के साथ छेड़छाड़ की गई है और विमान अपहरण करने वाले इस्लामी आतंकियों के नाम बदले गए हैं। याचिका में यह भी कहा गया है कि इस वेब सीरिज ने हिन्दुओं की भावनाओं को आहत किया है।
दिल्ली हाई कोर्ट में यह PIL हिन्दू सेना नाम के एक संगठन ने लगाई है। याचिका में माँग की गई है कि सेंसर बोर्ड इस वेबसीरिज का प्रमाण पत्र रद्द कर दे और इसके प्रसारण पर रोक लगा दी जाए। याचिका को हिन्दू सेना के सुरजीत सिंह यादव ने दायर किया है।
दिल्ली हाई कोर्ट में दायर की गई इस याचिका में कहा गया, “यह सीरिज अपहरण के दौरान आतंकवादियों के छोड़ने जाने के लम्बे समय पर पड़ने वाले प्रभावों को नजरअंदाज करती है, इससे असली में हुई घटना की गंभीरता पर फर्क पड़ता है। आतंकवादियों की असली पहचान छिपाना और उनके लिए भोला और शंकर जैसे नामों का उपयोग करना असली तथ्यों और घटनाओं को पूरी तरह से विकृत करता है और इससे हिंदू समुदाय का अपमान होता है क्योंकि भोला और शंकर भगवान शिव के दूसरे नाम हैं।”
याचिका में कहा गया कि जिन आतंकियों के नाम जहूर मिस्त्री, शाकिर, शाहिद और इब्राहिम अख्तर आदि थे उनके नाम भोला-शंकर या फिर बदल कर दिखाए गए, इससे हिन्दुओं की भावनाएँ आहत होती हैं। इस वेबर सीरिज को लेकर पहले से विवाद चला आ रहा है। सीरिज में पहचान बदले जाने को लेकर हाल ही में केन्द्रीय सूचना और प्रसारण मंत्रालय ने भी नेटफ्लिक्स के कंटेंट हेड को तलब किया था। इस मामले में वह मंगलवार (3 सितम्बर, 2024) को मंत्रालय के सामने अपना पक्ष रखेंगे।
1999 में काठमांडू से दिल्ली आ रहे इस विमान अपहरण की घटना पर वेब सीरिज डायरेक्टर अनुभव सिन्हा ने बनाई है। इस वेब सीरिज को 29 अगस्त, 2024 को नेटफ्लिक्स पर रिलीज किया गया था। तब से यह विवादों में घिर गई है। इसके बचाव में भी लिबरल गैंग उतर आया है। इससे पहले भी कई बार वेबसीरिज में हिन्दू भावनाओं को आहत करने की बात होती आई है।
राज्यसभा सांसद स्वाति मालीवाल के साथ मारपीट करने के आरोप में जेल में 100 दिन से बंद बिभव कुमार को बेल मिल गई है। उनके अलावा सोमवार (2 सितंबर 2024) को AAP के पूर्व संचार प्रभारी विजय नायर को भी जमानत मिली है। उनकी गिरफ्तारी आबकारी नीति घोटाले से जुड़े मनी लॉन्ड्रिंग मामले में हुई थी।
बिभव कुमार केस में असिस्टेंट सॉलिस्टर जनरल एसवी राजू ने जमानत का विरोध किया। उन्होंने आशंका जताई कि बिभव सबूतों से छेड़छाड़ कर सकते हैं। हालाँकि सुप्रीम कोर्ट में जस्टिस सूर्यकांत और जस्टिस उज्जवल भुइयां की पीठ ने उन्हें बेल देते हुए कहा कि केस में चार्जशीट दाखिल हो चुकी है। मालीवाल को आई चोटें सामान्य हैं। केस में जमानत मिलनी चाहिए। ऐसे किसी को जेल में नहीं रखा जा सकता।
इसके बाद कोर्ट ने बिभव को चार शर्तों पर जमानत दी। कोर्ट ने निर्देश दिए कि बिभव को मुख्यमंत्री के निजी सचिव या किसी आधिकारिक पद पर बहाल नहीं किया जाएगा, बिभव तब तक मुख्यमंत्री आवास नहीं जाएँगे जब तक गवाहों की जाँच पूरी नहीं हो जाती, वो इस मामले को लेकर कोई सार्वजनिक टिप्पणी नहीं करेंगे, इस मामले में सबसे पहले उन गवाहों के बयान दर्ज होंगे जो डरे हुए है।
इसी प्रकार 23 महीने से जेल में बंद विजय नायर के मामले की सुनवाई सुप्रीम कोर्ट में जस्टिस ऋषिकेष राय की पीठ ने की। उन्होंने कहा कि अनुच्छेद-21 के तहत जीवन और लिबर्टी का अधिकार मिला हुआ है और यह अधिकार बेहद पवित्र अधिकार है। सख्त और कड़े प्रावधान वाले मामले में भी इसका आदर होना चाहिए।
कोर्ट ने कहा, इस केस में आरोपित जेल में 13 नवंबर 2022 से (23 महीने) से बंद है। ट्रायल शुरू नहीं हुआ है। ऐसे में सजा के तौर पर जेल में उन्हें नहीं रखा जा सकता है। मनी लॉन्ड्रिंग केस में विजय नायर पिछले 23 महीने से जेल में बंद हैं और मामले में अधिकतम सजा जहाँ 7 साल है। बेल नियम और जेल अपवाद का सिद्धांत है। यह सिद्धांत पराजित हो जाएगा, अगर आरोपित को इस तरह से जेल में रखा जाए।
बता दें कि बिभव कुमार से जुड़ा मामला जहाँ राज्यसभा सांसद से मारपीट से जुड़ा है। उनके विरुद्ध आईपीसी की धारा 354 बी, 308, 323, 504 और 509 के तहत केस दर्ज हुआ था और 500 पन्नों की इस चार्जशीट में करीब 50 गवाहों के बयान जोड़े गए थे। इस केस में वो खुद मुख्य आरोपित है जबकि विजय नायर से जुड़े आबकारी नीति मामले में कई अन्य लोगों के नाम शामिल है। इस केस में पिछले दिनों के कविता और मनीष सिसोदिया को जमानत मिल गई है। वहीं मनी लॉन्ड्रिंग केस में केजरीवाल को भी राहत मिल चुकी है। हालाँकि सीबीआई की ओर से दर्ज भ्रष्टाचार केस में केजरीवाल अभी जेल में ही हैं।
कर्नाटक राज्यपाल थावरचंद गहलोत ने कॉन्ग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खरगे के बेटे प्रियंक खरगे के ट्रस्ट को कॉन्ग्रेस सरकार द्वारा जमीन दिए जाने के मामले में जानकारी माँगी है। वहीं कर्नाटक हाई कोर्ट को बताया गया है कि CM सिद्दारमैया की पत्नी को मैसुरु विकास प्राधिकरण (MUDA) ने जमीन देने का फैसला तब किया जब वह CM थे। कॉन्ग्रेस जमीन घोटाले के इन आरोपों से अब चौतरफा घिर गई है और उससे जवाब देते नहीं बन रहा है।
कर्नाटक हाई कोर्ट ने सोमवार (2 सितम्बर, 2024) को CM सिद्दारमैया कि पत्नी को जमीन दिए जाने के मामले में सुनवाई की। इस मामले में एक्टिविस्ट ने CM सिद्दारमैया पर गंभीर आरोप लगाए हैं। एक्टिविस्ट के वकील ने कोर्ट को बताया, “नवंबर 2017 में निर्णय लिया गया था। यह मानते करते हुए कि विकास लेआउट बनाने के लिए डी नोटिफाइड जमीन का उपयोग करने में उसने गलती की थी, MUDA ने याचिकाकर्ता (CM सिद्दारमैया) की पत्नी पार्वती को वैकल्पिक जमीन देने का फैसला किया। यही पूरी बात का निष्कर्ष है।”
आगे एक्टिविस्ट ने बताया,”यह भूमि याचिकाकर्ता के बहनोई द्वारा खरीदी गई थी, बाद में इसे डी-नोटिफाई किया गया। इसके बाद इसे गिफ्ट के तौर पर बहन को दिया गया। फिर यह MUDA ने ले ली और इसे विकसित किया और इसके बदले में नियम संशोधित करके मुआवजा भी दे दिया गया। यह सब तब हुआ जब CM सिद्दारमैया राज्य के मौजूदा मुख्यमंत्री थे। उनका पहला कार्यकाल 2013 से 2018 तक था। इस तरह से उनका इस मामले से संबंध है।”
इस मामले में एक्टिविस्ट ने कहा कि CM सिद्दारमैया के रोल की जाँच होनी चाहिए। एक्टिविस्ट ने कहा कि हो सकता है कि भले ही आखिर में सबको चिट मिल जाए, लेकिन अगर थोड़ा सा भी रोल CM सिद्दारमैया का निकला तो ये पद पर रहते हुए भ्रष्टाचार का मामला होगा। इस मामले में बीते माह राज्यपाल थावरचंद गहलोत ने CM सिद्दारमैया के विरुद्ध मामला चलाने की अनुमति दी थी। इसके खिलाफ CM सिद्दारमैया ने कर्नाटक हाई कोर्ट में याचिका डाली है। इसी पर सुनवाई में यह आरोप लगाए गए। अब इस मामले में सुनवाई 9 सितम्बर, 2024 को होगी।
खरगे परिवार के ट्रस्ट को जमीन पर राज्यपाल ने माँगी जानकारी
कर्नाटक के राज्यपाल थावरचंद गहलोत ने कॉन्ग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खरगे परिवार के ट्रस्ट को जमीन को दिए जाने पर सरकार से जानकारी माँगी है। कर्नाटक के राज्यपाल थावरचंद गहलोत ने कॉन्ग्रेस सरकार को पत्र लिख कर इस मामले में जानकारी माँगी है। राज्यपाल ने खरगे परिवार के ट्रस्ट को बेंगलुरु के औद्योगिक इलाके में सरकार द्वारा जमीन दिए जाने पर जवाब की माँग की है। यह जमीन सिद्धार्थ विहार ट्रस्ट को दी गई थी, इसके मुखिया राहुल खरगे हैं, जो कॉन्ग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खरगे के बेटे हैं।
इस मामले में कॉन्ग्रेस सरकार पर आरोप लगाया गया है कि खरगे परिवार के ट्रस्ट को यह जमीन ऐसे इलाके में दी गई, जो एयरोस्पेस कम्पनियों के लिए थी। भाजपा नेता लहर सिंह सिरोया ने पूछा है कि आखिर खरगे परिवार कबसे एयरोस्पेस कम्पनी चलाने लगा। खरगे परिवार के ट्रस्ट को जमीन दिए जाने के मामले में कर्नाटक सरकार के मंत्री एमबी पाटिल की भूमिका की भी जाँच किए जाने की माँग की गई है। यह जमीन खरगे परिवार के ट्रस्ट को मार्च, 2024 में दी गई थी।
बेंगलुरु में जमीन दिए जाने के अलावा कलबुर्गी में भी एक जमीन के आवंटन का मामला भी सामने आया है। भाजपा सांसद लहर सिंह सिरोया ने एक ट्वीट करके इस मामले में सवाल पूछे हैं। लहर सिंह सिरोया ने एक्स (पहले ट्विटर) पर पूछा है, “कागजो से पता चला है कि गुलबर्गा में अंतर्राष्ट्रीय पाली, संस्कृत और तुलनात्मक दर्शन संस्थान को 19 एकड़ सरकारी जमीन मुफ्त में दी गई थी, जिसका संचालन श्री मल्लिकार्जुन खरगे परिवार से सिद्धार्थ विहार ट्रस्ट द्वारा किया जाता है।”
New documents reveal that 19 acres of government land was given FREE to the International Institute of Pali, Sanskrit and Comparative Philosophy in Gulbarga, run by the Siddhartha Vihara Trust managed by the Shri Mallikarjuna Kharge family. Trustees of the Siddhartha trust.. 1/7 pic.twitter.com/l5bMkCvBXC
सांसद सिरोया ने बताया, “मार्च 2014 में सिद्धारमैया की कॉन्ग्रेस सरकार ने पाली इंस्टीट्यूट को 30 साल के लिए 16 एकड़ सरकारी जमीन लीज पर दी थी। कुछ सालों में 16 एकड़ की लीज में 03 एकड़ की जमीन और जोड़ दी गई। आखिरकार, मार्च 2017 में, कॉन्ग्रेस सरकार ने खरगे परिवार द्वारा संचालित संस्थान को सभी 19 एकड़ जमीन मुफ्त में ट्रांसफर कर दी। एक महत्वपूर्ण बात यह है कि खरगे के बेटे, प्रियांक खरगे, तत्कालीन कर्नाटक सरकार में कैबिनेट मंत्री थे, जैसे कि वे वर्तमान में हैं।”
कर्नाटक की कॉन्ग्रेस सरकार इन सभी मामलों में नियमों के पालन की बात कह रही है। जहाँ सिद्दारमैया मामले में वह कोर्ट में गई है, खरगे परिवार मामले में अभी जुबानी जंग ही चल रही है। आगे यह मामला यदि जाँच के लिए जाता है तो राज्य राजनीतिक उथलपुथल और बढ़ने के संकेत हैं।
उत्तर प्रदेश के बागपत जिले में कई हिन्दू महिलाओं ने मुस्लिम समुदाय के कुछ युवकों पर अश्लीलता करने और जान से मार डालने की धमकी देने का आरोप लगाया है। पीड़िताओं का आरोप है कि उनके घरों के आगे पेशाब की जाती है और विरोध करने पर इलाके से भगा देने की धमकियाँ मिलती हैं। इसी के साथ महिलाओं को इलाके अपनी अपनी तादाद ज्यादा होने की धौंस भी दी जाती है। रविवार (1 सितंबर 2024) को दी गई इस शिकायत पर पुलिस ने जाँच शुरू कर दी है।
यह मामला बागपत जिले के थानाक्षेत्र खेकड़ा का है। यहाँ रविवार को लक्ष्मीनगर मोहल्ले के वार्ड 4 में रहने वाली 3 हिन्दू महिलाओं ने सामूहिक तौर पर खेकड़ा थाने में तहरीर दी है। तहरीर में उन्होंने बताया उनके मोहल्ले के चाँद, अनीस, सोहैल, साहिल, जावेद और साद उनके घरों के आगे बैठ कर आए दिन सट्टा, जुआ और नशा करते हैं। इन आरोपितों के साथ 10-15 अन्य अज्ञात असामाजिक तत्व भी होते हैं। ये लोग अश्लील गाने गाते हैं और आपस में जोर-जोर से गाली-गलौज किया करते हैं।
पीड़िताओं ने आगे बताया कि आपस में गालियाँ देने के साथ ये सभी मोहल्ले की महिलाओं पर अभद्र टिप्पणी भी करते हैं। 31 अगस्त (शनिवार) को हर दिन की तरह उपद्रव कर रहे आरोपितों को पीड़िताओं ने टोक दिया। इस से नाराज हो कर रात में लगभग 9 बजे सभी आरोपित पीड़िता के घर तक चढ़ गए। यहाँ वो महिलाओं को गंदी-गंदी गालियाँ देने लगे। विरोध करने पर इन आरोपितों के परिवार की औरतें भी जमा हो गईं। इन्होने कहा, “तुम हिन्दुओं, बहुत चढ़ रही है। आज इन्हे देख लेंगे।”
आरोप है कि इसके बाद पीड़ित परिवारों से अश्लील बातें करते हुए मारपीट करने की कोशिश की गई। इसी विवाद के बीच आरोपितों ने आगे कहा, “यहाँ से भाग जाओ। यहाँ पर तुम्हारा रहना दूभर कर देंगे। यहाँ हमारी तादात ज्यादा है, तुम लोग क्या कर सकते हो ?” चारों तरफ से घिरता देख कर पीड़िता हिन्दू महिलाओं ने रात 9:45 के आसपास पुलिस बुला ली। पुलिस ने सुबह सबको थाने आ कर लिखित तहरीर देने के लिए कहा। इसके बाद अगले दिन पीड़ित हिन्दुओं ने थाने में तहरीर दी।
तहरीर में पीड़िताओं ने लिखा, “विपक्षियों ने हमारा जीना हराम कर रखा है। आए दिन हमें मानसिक रूप से परेशान किया जाता है और जान से मारने की धमकी भी दी जाती है।” कई बार पीड़िताओं ने आरोपितों की करतूतों को मोबाइल में रिकॉर्ड करने का प्रयास किया। इसे देख कर उन्होंने धमकाते हुए कहा, “हाँ कर लो रिकॉर्ड। हम किसी से नहीं डरते और ज्यादा कानूनी कार्रवाई की तो तुम्हें तुम्हारे जवान बच्चों सहित को घर से ही उठा लिया जाएगा।”
आरोपितों की तरफ से पीड़ित हिन्दू परिवारों को हथियार होने की भी धमकी दी जाती है। शिकायत में पीड़िताओं ने लिखा कि आरोपितों ने उनसे कहा, “हमारे पास हथियार और तंमचे भी हैं। उनको चलाना भी हमें आता है। या तो तुम यहाँ चुपचाप रहो और जो हम कर रहे उसे सहते रहो, तुम सब लोग यहाँ से अपने-अपने घर छोड कर चले जाओ वर्ना तुम सबको जान से मार दिया जाएगा।” बकौल पीड़िता सुबह से लेकर रात 11 बजे तक उनके घरों के आगे जुआ, नशा और सट्टा आदि होता रहता है।
इस सम्बन्ध में थाना खेकड़ा पुलिस द्वारा जांच कर आवश्यक वैधानिक कार्यवाही की जा रही है।
शिकायतकर्ता हिन्दू महिलाओं ने आरोपितों से अपने जान-माल का खतरा जताया है और कड़ी कानूनी कार्रवाई की माँग की है। ऑपइंडिया के पास शिकायत कॉपी मौजूद है। एक वीडियो बयान में पीड़िताओं ने बताया कि आरोपित उनके घरों के आगे अक्सर पेशाब करते हैं। उन्होंने उम्मीद जताई है कि प्रशासन जल्द ही उन सभी को अत्याचार से मुक्ति दिलाएगा। बागपत पुलिस ने इस शिकायत का संज्ञान लिया है। सोमवार (2 सितंबर) को पुलिस ने बताया कि मामले में जाँच व अन्य जरूरी कार्रवाई के लिए थाना प्रभारी खेकड़ा को निर्देशित कर दिया गया है।
उत्तर प्रदेश के मेरठ जिले में नाबालिग दलित लड़की से गैंगरेप का मामला सामने आया है। गैंगरेप का आरोप सलीम के बेटे समीर और राजा पर लगा है। केस में कुछ अन्य अज्ञात आरोपित भी शामिल बताए जा रहे हैं जिनकी तलाश में दबिश दी जा रही है। घटना गुरुवार (29 अगस्त, 2024) की है। घटना की जानकारी मिलने के बाद हिन्दू संगठनों ने आरोपितों पर कड़ी कार्रवाई के लिए थाने पर प्रदर्शन किया है। पुलिस ने 2 आरोपितों को गिरफ्तार कर लिया है जिसमें समीर भी शामिल है।
यह घटना मेरठ के थानाक्षेत्र फलावदा की है। यहाँ शनिवार (31 अगस्त) को अनुसूचित जाति (SC वर्ग) के एक व्यक्ति ने थाने में तहरीर दी है। तहरीर में उन्होंने बताया कि गुरुवार (29 अगस्त) की दुपहरी में लगभग 1:30 पर उनकी 15 वर्षीया बेटी गाँव के पास बगीचे में शौच के लिए गई थी। तभी पीड़िता के ही गाँव का रहने वाले सलीम के बेटे राजा और समीर वहाँ पहुँच गए। इनके साथ कुछ अन्य अज्ञात लोग भी थे जिनके नाम शिकायतकर्ता नहीं जानता।
आरोप है कि समीर और राजा के साथ उसके अन्य साथियों ने पीड़िता को अकेला पा कर दबोच लिया। ये सभी पीड़िता को ले कर जंगल में अंदर तक घसीट ले गए। यहाँ बारी-बारी सभी ने नाबालिग से रेप किया। जब पीड़िता ने इन हरकतों का विरोध किया तो उसे च$री सहित अन्य जातिसूचक शब्द बोले गए और गंदी-गंदी गालियाँ दी गईं। आरोप है कि इसके बाद सभी ने पीड़िता का अपहरण कर लिया और कहीं बंधक बना कर रखा। इधर अपनी बेटी को लापता देख कर पीड़ित पिता ने खोजबीन शुरू कर दी।
घटना के अगले दिन शुक्रवार (30 अगस्त) को पीड़िता के पिता को कहीं से अपनी बेटी के आरोपितों के पास होने की भनक लगी। पीड़िता की सुरक्षा की फ़िक्र में उनके पिता ने समीर के परिजनों से अपनी बेटी को वापस लौटाने की गुहार लगाई। जब सामने से कोई जवाब नहीं मिला तो पीड़ित पिता ने खुद ही अपने समाज के लोगों के साथ मिल कर अपनी बेटी को खोजना शुरू कर दिया। आखिरकार पीड़िता जंगल के एक हिस्से में बदहवास हालत में पड़ी मिली। यहाँ पीड़िता ने अपने साथ हुआ पूरा घटनाक्रम परिजनों को बताया।
मेरठ फलावदा थाना क्षेत्र की नाबालिक लड़की से दौराला थाना क्षेत्र के गांव लोहिया के जंगल में गैंगरेप का आरोप आरोपियों पर कार्यवाही को लेकर थाने पहुंचे स्थानीय लोग की कार्रवाई की मांग पुलिस ने तहरीर लेकर किया मुकदमा दर्ज आरोपियों की तलाश जारी pic.twitter.com/MtCQFWQE5L
शिकायतकर्ता के मुताबिक जंगल के जिस हिस्से में उनकी बेटी बदहवास मिली वहीं कुछ ही दूरी पर अपहरणकर्ता भी एक साथ बैठे थे। पीड़िता के परिजनों की आने की भनक लगते ही उसमें से समीर ने गोली चला दी। पीड़िता के परिजन इस गोली से बाल-बाल बचे। इसी दौरान समीर और उसके साथियों ने कहीं भी शिकायत करने पर पीड़िता के पूरे परिवार के नरसंहार की धमकी दी। जैसे-तैसे पीड़िता को ले कर उसके परिजन घर पहुँचे। अगले दिन शनिवार को इसकी शिकायत पुलिस में दर्ज करवाई गई।
थाना फलावदा पर अभियोग पंजीकृत है। 02 अभियुक्तों को गिरफ्तार कर जेल भेजा गया है।
शिकायत में पीड़िता के पिता ने आरोपितों पर कड़ी कार्रवाई की माँग की है। पुलिस ने समीर और राजा को नामज़द व उसके साथियों को अज्ञात में बताते हुए FIR दर्ज कर ली है। इन सभी पर भारतीय न्याय संहिता (BNS) की धारा 140 (1), 70 (2), 351 (2), 351 (3), 115 (2), 352 और 109 के साथ SC/ST व पॉक्सो एक्ट के तहत कार्रवाई की गई है। ऑपइंडिया के पास शिकायत कॉपी मौजूद है। हिन्दू संगठनों ने आरोपितों पर कार्रवाई की माँग के साथ थाने का घेराव किया है। पुलिस ने समीर सहित एक अन्य आरोपित को गिरफ्तार कर लिया है। मामले में जाँच व अन्य जरूरी कानूनी कार्रवाई की जा रही है।
जातीय जनगणना देश में बड़ी बहस का मुद्दा बना हुआ है, राहुल गाँधी लगातार संसद से लेकर अपनी सभाओं तक में कह चुके हैं कि जातीय जनगणना होनी चाहिए। ये अलग बात है कि जब संसद में राहुल गाँधी की जाति पूछ दी गई थी तो सपा सुप्रीमो अखिलेश यादव भड़क गए थे। अब कॉन्ग्रेस पार्टी ने एक वीडियो शेयर कर के ‘राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ’ (RSS) को जातीय जनगणना के खिलाफ बताया है। बता दें कि केरल के पलक्कड़ में संघ की समन्वय बैठक भी चल रही है।
कॉन्ग्रेस पार्टी ने सोशल मीडिया पर पोस्ट किए गए वीडियो में दावा किया कि RSS ने जातिगत जनगणना का खुल कर विरोध करते हुए कहा है कि इससे समाज की एकता और अखंडता को ख़तरा हो सकता है। साथ ही पार्टी ने ‘आजतक’ की खबर का एक स्क्रीनशॉट भी शेयर किया। कॉन्ग्रेस ने कहा कि इस बयान से साफ़ है कि RSS और भाजपा जातिगत जनगणना नहीं कराना चाहते, वो दलितों, पिछड़ों और जनजातीय समाज को उनका अधिकार नहीं देना चाहते हैं।
कॉन्ग्रेस पार्टी ने इस वीडियो में राहुल गाँधी का एक बयान भी शेयर किया, जिसमें उन्होंने कहा था, “अब लिखो लो। अगर कोई सोचे कि जाति जनगणना को रोका जा सकता है तो वो सुन ले, इसको रोका नहीं जा सकता है। ये होगा ही होगा।” इस वीडियो में कॉन्ग्रेस ने आरएसएस के सरसंघचालक मोहन भागवत और प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की तस्वीर भी शेयर की। साथ ही RSS को गलत तरीके से चित्रित करते हुए कार्टून दिखाया। हालाँकि, सच्चाई कॉन्ग्रेस के इस दावे के उलट है।
'जातिगत जनगणना से समाज की एकता और अखंडता को खतरा हो सकता है।'
‘राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ’ के ‘अखिल भारतीय प्रचार प्रमुख’ सुनील आम्बेकर ने कहा था कि RSS ने पहले भी जातीय जनगणना पर टिप्पणी की है, हिन्दू समाज में जाति और जातियों के बीच संबंध एक संवेदनशील मुद्दा है। उन्होंने कहा था कि ये बहुत ही संवेदनशील मुद्दा है, लेकिन ये हमारी राष्ट्रीय एकता और अखंडता के लिए महत्वपूर्ण मुद्दा भी है। उन्होंने ये भी कहा था कि इस मुद्दे के साथ बेहद गंभीरता से निपटा जाना चाहिए। इसके बाद उन्होंने जो कहा वो महत्वपूर्ण है।
RSS की तरफ से विचार रखते हुए सुनील आम्बेकर ने स्पष्ट कहा कि जातीय जनगणना का इस्तेमाल सिर्फ चुनाव और चुनावी राजनीति के लिए नहीं होना चाहिए। यानी, राजनीतिक आरोप-प्रत्यारोप के लिए इसका इस्तेमाल नहीं किया जाना चाहिए। उन्होंने ये भी कहा कि RSS मानता है कि जन-कल्याणकारी योजनाओं के लिए, खासकर उन जातियों/समूहों के लिए जो पीछे छूट गए हैं, अगर कुछ वर्गों पर विशेष ध्यान देने की ज़रूरत है तो इसके लिए सरकार को आँकड़ों की ज़रूरत होती है।
RSS का मानना है कि पीछे छूटे समूहों को जन-कल्याणकारी योजनाओं का लाभ दिलाने के लिए अगर सरकार को आँकड़ों की ज़रूरत है तो वो ये आँकड़े इकट्ठा कर सकती है। संगठन ने याद दिलाया कि पहले भी ऐसा हो चुका है। सुनील आम्बेकर ने कहा कि जातीय जनगणना का एक चुनावी या राजनीतिक हथियार की तरह इस्तेमाल नहीं किया जाना चाहिए। उन्होंने सिर्फ लोगों को आगाह किया था। यानी, RSS गरीबों को लाभ के लिए जातिगत जनगणना के पक्ष में है, विरोध में होने वाली बात झूठ है।
उत्तर प्रदेश के बागपत जिले में एक नाबालिग हिन्दू लड़की से रेप का मामला सामने आया है। रेप का आरोप रिज़वान, वसीम और उसके भाई रोशू पर लगा है। इन तीनों ने मिल कर पीड़िता का उसके घर से अपहरण का भी प्रयास किया। नाबालिग को इस्लाम कबूल करवाने की भी कोशिश की गई। पुलिस ने शनिवार (31 अगस्त, 2024) को मामले में FIR दर्ज कर ली है। रविवार (1 सितंबर) को मुख्य आरोपित रिज़वान को गिरफ्तार कर लिया गया है। फरार चल रहे वसीम और उसके भाई रोशू की तलाश में दबिश दी जा रही है।
यह घटना बागपत के शहर कोतवाली क्षेत्र की है। यहाँ शनिवार (31 अगस्त) को यहाँ पीड़िता के पिता ने शिकायत दर्ज करवाई है। उन्होंने बताया कि शनिवार की शाम लगभग 7 बजे उनकी नाबालिग बेटी अचानक कहीं लापता हो गई। परिजनों ने खोजबीन शुरू की तो पीड़िता पास के ही वसीम नाम के व्यक्ति के घर में मिली। इस घर के एक कमरे में पीड़िता के साथ रिज़वान आपत्तिजनक हालत में पकड़ा गया। पीड़िता का पिता डाँट-फटकार कर अपनी बेटी को वापस घर ले आया।
आरोप है कि कुछ ही देर बाद रिज़वान, वसीम और उसका भाई रोशू लाठी-डंडे ले कर पीड़िता के घर तक पहुँच गए। इन सभी ने घर में घुस कर पीड़ित परिवार को गालियाँ देनी शुरू कर दीं और लड़की को दोबारा उठा का ले जाने की धमकियाँ दीं। जब पीड़ित परिवार ने इसका विरोध किया तो उनके साथ गाली-गलौज व हाथापाई भी की गई। पीड़िता के पिता का दावा है कि उनकी पत्नी ने घर में अपनी बेटी को कई बार नमाज़ पढ़ते भी देखा है। इस वजह से उन्होंने अपनी बेटी को कई बार डाँटा भी, पर इसका कोई फर्क नहीं पड़ा।
शिकायत में पीड़िता के पिता का दावा है कि उनकी बेटी घर में अक्सर धर्म-परिवर्तन की बातें किया करती थी। आरोप है कि नाबालिग को धर्म परिवर्तन के लिए रिज़वान लम्बे समय से उकसा रहा था। रिज़वान को ‘लव जिहाद’ का साजिशकर्ता बताते हुए पीड़िता के पिता ने उस पर कई बार अपनी बेटी से रेप करने का आरोप भी लगाया है। बकौल शिकायतकर्ता पीड़िता के जरिए रिज़वान ने घर में रखे 48 हजार रुपए और सोने की एक अंगूठी भी हड़प ली है। साथ ही रिज़वान पीड़िता को अपने साथ कही भगा कर भी ले जाना चाहता था।
#baghpatpolice थाना बागपत पुलिस ने मु0अ0सं0 739/24धारा 137(2)/333/352/115(2)/65(1)बीएनएस व 9L/10 पोक्सो एक्ट व 3/5(1) उ0प्र0 विधि विरुद्ध धर्म सपरिवर्तन प्रतिषेध अधि0 से सम्बन्धित 01अभियुक्त को गिरफ्तार कर मा0 न्यायालय के समक्ष पेश किया जा चुका है। CO नगर बागपत की बाइट-@Uppolicehttps://t.co/k0wRW1iYVcpic.twitter.com/cv8aIZLeLr
पीड़ित परिवार ने इस शिकायत के साथ आरोपितों पर कड़ी कार्रवाई की माँग की है। पुलिस ने FIR में रिज़वान, रोशू और उसके भाई वसीम को नामजद किया है। इन सभी पर भारतीय न्याय संहिता (BNS) की धारा 137 (2), 333, 352, 115 (2), 64 (2) के साथ उत्तर प्रदेश विधि विरुद्ध धर्म संपरिवर्तन प्रतिषेध अधिनियम व पॉक्सो एक्ट के तहत करवाई की गई है। ऑपइंडिया के पास शिकायत कॉपी मौजूद है। रविवार (1 सितंबर) को पुलिस ने रिज़वान को गिरफ्तार कर लिया है। DSP बागपत के मुताबिक फरार आरोपितों की तलाश में दबिश दी जा रही है।
उत्तर प्रदेश के जौनपुर जिले में पुलिस ने अपनी नौकरानी से रेप के आरोप में कॉन्ग्रेस पार्टी के एक नेता को गिरफ्तार किया है। आरोपित का नाम मुफ़्ती मेहँदी है जो कॉन्ग्रेस के शहर उपाध्यक्ष भी रह चुका है। पीड़िता पिछले 10 वर्षों से मुफ़्ती मेहँदी के घर झाड़ू-पोंछा कर रही थी। जब पीड़िता महज 15 साल की थी तब मुफ़्ती मेहँदी ने उनके साथ रेप किया था। शुक्रवार (31 अगस्त, 2024) को मामले की शिकायत पुलिस में दर्ज करवाई गई थी। पुलिस ने सोमवार (2 सितंबर) को आरोपित को गिरफ्तार कर के जेल भेज दिया है।
यह मामला जौनपुर जिले के थानाक्षेत्र कोतवाली का है। शुक्रवार को यहाँ पीड़िता ने पुलिस में तहरीर दी है। तहरीर में पीड़िता ने बताया कि वो पिछले 10 वर्षों से मुफ़्ती मेहँदी के घर पर झाड़ू-पोंछे का काम कर रही है। कुछ समय बाद मुफ़्ती मेहँदी ने पीड़िता को मीठी-मीठी बातें कर के प्यार के जाल में फँसा लिया। उसने पीड़िता को चप्पल और कपड़े आदि दिला कर अपने विश्वास में लिया। इसी दौरान मेहँदी ने 15 साल की नाबालिग पीड़िता से रेप किया। जब पीड़िता ने विरोध किया तो कॉन्ग्रेस नेता ने निकाह का वादा कर के उसे चुप करवा दिया।
कई वर्षों तक यौन शोषण का शिकार होती रही पीडिता ने आखिरकार मुफ़्ती मेहँदी पर शादी का दबाव बनाना शुरू किया। शुरू में तो आरोपित ने टाल-मटोल किया लेकिन बाद वो पीड़िता को खुलेआम धमकियाँ देने लगा। आरोप है कि मेहँदी ने पीड़िता की तमाम आपत्तिजनक तस्वीरें खींच रखी थीं। इसी को दिखा कर वह पीड़िता को मुँह बंद रखने की धमकियाँ दिया करता था। एक दिन मेहँदी ने ने पीड़िता से कहा, “तेरा जीना हराम कर देंगे।” धमकियाँ दे कर मेहँदी पीड़िता से रेप करता रहा।
शिकायत में आगे बताया गया है कि मुफ़्ती मेहँदी पीड़िता पर अन्य लोगों के साथ भी शारीरिक संबंध बनाने का दबाव दिया करता था। जब लड़की इस से मना करती थी तो उसकी पिटाई होती थी। 27 अगस्त (मंगलवार) को मेहँदी ने एक बार फिर से पीड़िता से रेप किया। विरोध करने पर उसे बेरहमी से पीटा। जाते-जाते मेहँदी ने पीड़िता से कहा, “पुलिस से बताओगी तो तुम्हें और तुम्हारे पूरे परिवार को जान से खत्म कर दूँगा।” डरी सहमी पीड़िता ने आखिरकार सारी बात अपनी माँ को बता दी।
मामले की जानकारी मिलते ही पीड़िता की माँ अपनी बेटी को ले कर पुलिस स्टेशन पहुँची। यहाँ पीड़िता ने तहरीर दे कर मेहँदी पर कड़ी कार्रवाई की माँग की। इस तहरीर पर पुलिस ने भारतीय न्याय संहिता (BNS) की धारा 64, 115 (2) और 351 (3) के साथ पॉक्सो एक्ट के तहत केस दर्ज किया है। ऑपइंडिया के पास शिकायत कॉपी मौजूद है। सोमवार (2 सितंबर) को दबिश दे कर मुफ़्ती मेहँदी को गिरफ्तार कर लिया गया। आरोपित मुफ़्ती मार्च 2022 तक कॉन्ग्रेस पार्टी में जौनपुर शहर का उपाध्यक्ष था। मामले में जाँच व अन्य जरूरी कानूनी कार्रवाई की जा रही है।
मलयालम फिल्म इंडस्ट्री एक कठिन दौर से गुजर रही है। पिछले कई दशकों से मोहनलाल, ममूटी, जयराम और सुरेश गोपी जैसे अभिनेता केरल सिनेमा की रीढ़ हैं। पृथ्वीराज सुकुमारन, फहाद फासिल और दिलकीर सलमान के रूप में युवा अभिनेताओं की एक खेप आई है जो खासी प्रतिभावान है। इन सबके बीच अचानक से इंडस्ट्री में यौन शोषण के मामले खुलने लगे। ये सब जस्टिस हेमा कमिटी की रिपोर्ट को सार्वजनिक किए जाने के बाद शुरू हुआ। पिछले 5 वर्षों से ये रिपोर्ट ठण्डे बस्ते में धूल फाँक रही थी।
WCC और हेमा कमिटी रिपोर्ट
मलयालम फिल्मों में महिलाओं के अधिकार के लिए आवाज़ उठाने का दावा करने वाला एक संगठन है – ‘Women in Cinema Collective’ (WCC) नाम की, जिसे नवंबर 2017 में एक सोसाइटी के रूप में पंजीकृत किया गया था। इसका गठन उसी साल मई में हुआ था, जिसमें मलयालम फिल्म इंडस्ट्री की कई अभिनेत्रियाँ, महिला निर्देशक और टेक्नीशियन शामिल थीं। मनु वॉरियर, पार्वती, भावना, अंजलि मेनन, गीतू मोहनदास, विधु विन्सेंट, रीमा कल्लिंगल रेम्या नम्बीशन, दीदी दामोदरन और सुरभि लक्ष्मी जैसी महिलाएँ इसमें शामिल थीं।
इन महिलाओं ने केरल के मुख्यमंत्री पिनराई विजयन से मुलाकात कर अपनी माँगें सौंपी थीं। इनका कहना था ये ये संस्था मलयालम फिल्म इंडस्ट्री में महिलाओं के साथ लिंग के आधार पर हो रहे भेदभाव के खिलाफ आवाज़ उठाने के लिए बनाई गई है। 2017 में केरल में एक मामला सामने आया। कार्तिका मेनन उर्फ़ भावना नामक अभिनेत्री का कुछ लोगों ने अपहरण कर लिया और चलती कार में उनका यौन शोषण हुआ। इसमें अभिनेता दिलीप का नाम आया। भावना को फिल्म इंडस्ट्री छोड़नी पड़ी थी।
इसके बाद WCC की पहल पर केरल उच्च न्यायालय की रिटायर्ड जज की अध्यक्षता में जस्टिस हेमा कमिटी बनी, जिसने दिसंबर 2019 में अपनी रिपोर्ट राज्य सरकार को सौंप दी। अब तक इस पर कुछ नहीं हुआ था, अब इसे सार्वजनिक किया गया है। इसके बाद एक-एक कर के ऐसी कई घटनाओं की तह खुली और पीड़िताओं ने भी सार्वजनिक रूप से आवाज़ उठाई। एक तरह से मलयालम फिल्म इंडस्ट्री ठहर सी गई। अभी भी रोज कुछ न कुछ आरोप सामने आते ही जा रहे हैं।
एक के बाद एक आरोप, AMMA अध्यक्ष मोहनलाल का इस्तीफा
अभिनेत्री मीनू मुनीर ने अभिनेता जयसूर्या, मुकेश और एडवेला बाबू पर आरोप लगाए। अभिनेत्री शर्मिला ने फिल्म निर्देशक हरिहरन पर आरोप लगाया। एक युवा अभिनेता ने निर्देशक रंजीत पर आरोप लगाया। एक अभिनेत्री ने अभिनेता सिद्दीकी पर आरोप लगाया। CPI(M) विधायक M मुकेश का भी FIR में नाम है। मणियनपिल्लई राजू, निर्देशक VK प्रकाश और प्रोडक्शन एग्जीक्यूटिव विचू व नोबेल अन्य लोग हैं जिनके खिलाफ केस दर्ज कराया गया है। इन सबके बीच एक और खबर आई।
वरिष्ठ अभिनेता मोहनलाल ने ‘एसोसिएशन ऑफ मलयालम फिल्म आर्टिस्ट्स’ के अध्यक्ष पद से इस्तीफा दे दिया। मोहनलाल ने सोशल मीडिया में चल रही बातों का जवाब देते हुए कहा कि वो नहीं भागे नहीं थे बल्कि काफी दिनों से केरल से बाहर से और अपनी आने वाली फिल्म Barroz 3D में व्यस्त थे। उन्होंने हेमा कमिटी रिपोर्ट का स्वागत करते हुए कहा कि AMMA कोई ट्रेड यूनियन नहीं है बल्कि 500 लोगों का एक परिवार है। मोहनलाल ने कहा कि इंडस्ट्री में जो हो रहा है उसके लिए सभी लोग जवाबदेह हैं।
मोहनलाल ने मलयालम फिल्म इंडस्ट्री को यहाँ तक पहुँचाया है, ऐसे में उन्होंने कहा कि इस एक मुद्दे को विषय बना कर फिल्म इंडस्ट्री को तबाह नहीं किया जाना चाहिए। उन्होंने कहा, “पुलिस और अदालत आरोपितों की धर-पकड़ के लिए हैं। इसे केरल से एक बड़े अभियान की शुरुआत के रूप में देखा जाना चाहिए, अन्य भाषाओं के फ़िल्मी लोग मुझे फोन करते हैं तो मैं कहता हूँ कि वो भी ऐसी कमिटी बनाएँ। ये मलयालम फिल्म के लिए सर्वश्रेष्ठ समय है, दक्षिण भारतीय फ़िल्में दुनिया भर में अच्छा कर रही हैं। कानून अपना काम करे, इंडस्ट्री को बर्बाद नहीं किया जाना चाहिए।”
मोहनलाल को बदनाम करने के लिए पीछे पड़ा ‘The News Minute’?
मोहनलाल कोई साधारण अभिनेता नहीं हैं। पिछले 44 वर्षों से वो फिल्म इंडस्ट्री में सक्रिय हैं। 1986 आते-आते उन्होंने मलयालम फिल्म इंडस्ट्री में स्टार का तमगा हासिल कर लिया था। 90 के दशक में उन्होंने ममूटी के साथ खुद को मलयालम सिनेमा के सबसे बड़े सुपरस्टार के रूप में स्थापित किया। उनके फैंस उन्हें प्यार से ‘Lalettan’ कहते हैं। 2016 में एक ऐसा समय आया जब उनकी फिल्मों ने मिल कर 378 करोड़ रुपए का कारोबार किया, उनसे आगे सिर्फ बॉलीवुड के आमिर खान, सलमान खान और अक्षय कुमार ही थे।
अब आते हैं दक्षिण भारत के एक मीडिया पोर्टल ‘The News Minute’ पर। ‘द न्यूज मिनट’ को धन्या राजेंद्रन नामक पत्रकार चलाती हैं। ये वही धन्या राजेंद्रन हैं जिन्होंने भाजपा को इलेक्टोरल बॉन्ड्स में मिले पैसे को लेकर निशाना साधा था, वहीं DMK को मिले पैसों का बचाव किया था। जब मुस्लिम महिलाएँ वॉशरूम में हिन्दू महिलाओं के वीडियो शूट कर रही थीं तो इसे उन्होंने प्रैंक बताया था। उनका मीडिया संस्थान अक्सर भाजपा के खिलाफ लिखने के लिए जाना जाता रहा है।
आपने मोहनलाल के बारे में जाना, धन्या राजेंद्रन के बारे में जाना। अब असली बात पर आते हैं। असल में केरल की फिल्म इंडस्ट्री में यौन शोषण की घटनाओं पर ‘The News Minute’ ने खबर छापी। इस खबर में मोहनलाल की तस्वीर लगा दी गई। न तो मोहनलाल पर यौन शोषण का कोई आरोप लगा है, किसी महिला अभिनेत्री ने उन्हें लेकर अपना खराब अनुभव साझा किया है और न ही उन्होंने किसी आरोपित का बचाव किया है – फिर भी उनकी तस्वीर के साथ यौन शोषण से जुड़ी खबर को प्रकाशित करने का तुक लोगों को समझ नहीं आया।
धन्या राजेंद्रन ने अपने मीडिया संस्थान का एक लिंक शेयर किया। इसमें फीचर इमेज मोहनलाल की लगी थी। शेयरिंग टेक्स्ट में उन्होंने लिखा कि अभिनेत्री राधिका शरतकुमार ने मलयालम फिल्म इंडस्ट्री में पुरुषों को लेकर बड़ा खुलासा किया है। खबर में तस्वीर मोहनलाल की लगी है लेकिन जब आप लिंक खोल कर देखेंगे तो पूरे पेज पर एक बार भी Mohanlal शब्द का इस्तेमाल नहीं किया गया है। इसे Character Assassination बताया जा रहा है, जो सही भी लग रहा है।
Selective character assassination !!
So called "free media" stooping to a different level for TRP / clicks.
जिसे मान रहे भाजपा-RSS का करीबी उन सभी को बनाया जा रहा निशाना?
मोहनलाल के फैंस को ये बुरा लगा। उन्होंने कहा कि वरिष्ठ अभिनेता को बदनाम करने के लिए ऐसा किया गया। वैसे समय-समय पर मोहनलाल भाजपा के साथ नजदीकियों के कारण भी चर्चा में रहे हैं, शायद इसीलिए भी उन्हें निशाना बनाया जा रहा हो। सितंबर 2018 में मोहनलाल ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी से मिल कर अपने ‘विश्वशांति फाउंडेशन’ द्वारा किए जा रहे सामाजिक कार्यों की जानकारी दी थी। जन्माष्टमी के दिन ये मुलाकात हुई थी। कई बार चर्चा चलती है कि RSS मोहनलाल को भाजपा के चेहरे के रूप में प्रोजेक्ट करने का इच्छुक है।
मलयालम सिनेमा के एक अन्य दिग्गज अभिनेता सुरेश गोपी ने केरल के त्रिशूर से जीत दर्ज की है। ये पहली बार हुआ है जब भाजपा ने केरल में खाता खोला हो। केरल वामपंथ का गढ़ है जहाँ कई RSS-BJP कार्यकर्ताओं की हत्या हो चुकी है। सबरीमाला मंदिर की परंपराओं को बचाने के लिए हुए आंदोलन में शामिल लोगों पर थोक में केस दर्ज हुए। वहाँ मुस्लिमों और ईसाइयों का प्रभाव बढ़ता ही चला जा रहा है। इन सबके बीच मलयालम फिल्म के एक बड़े स्टार्ट का भाजपा से जीत का अर्थ है कि और भी फ़िल्मी हस्तियाँ पार्टी के साथ आ सकती हैं।
दक्षिण भारत में फिल्मों का क्रेज है। तमिलनाडु में मुख्यमंत्री रहे MGR अभिनेता थे, करूणानिधि कहानी लेखक थे और जयललिता अभिनेत्री थीं। आंध्र प्रदेश में अभिनेता NTR मुख्यमंत्री बने, अभी पवन कल्याण डिप्टी CM हैं। केरल में पिछले कई दशकों से कॉन्ग्रेस और CPM गठबंधन की ही जीत होती रही है। ऐसे में अंदेशा जताया जा रहा है कि मोहनलाल को बदनाम करने के पीछे ये मंशा भी हो सकती है कि उन्हें भाजपा का करीबी बताए जाने की चर्चाएँ बंद हों, बाकी अभिनेता भी डरें।
कुछ फैंस का कहना है कि सिनेमा के कोच्चि और तिरुवनंतपुरम समूह के बीच टकराव चल रहा है, इसीलिए इस मुद्दे से कोई वास्ता न होने के बावजूद मोहनलाल और सुरेश गोपी निशाना बनाए जा रहे हैं। कहा जा रहा है कि मलयालम सिनेमा में जितना तिरुवनंतपुरम समूह का दबदबा कम होगा और कोच्चि समूह का बढ़ेगा, फिल्म इंडस्ट्री और भी Woke हो जाएगी। बड़ी बात ये है कि हेमा कमिटी रिपोर्ट में ड्रग्स और पार्टियों के जरिए फिल्म इंडस्ट्री में एक समानांतर अर्थव्यवस्था चलाने की बातें हैं, उस पर कई मीडिया संस्थान चुप्पी साधे हुए हैं।
ड्रग्स माफिया पर चुप क्यों हैं धन्या राजेंद्रन और उनका ‘The News Minute’
आपको ‘The News Minute’ पर ऐसी खबरें नहीं मिलेंगी। क्या जानबूझकर मोहनलाल को इस पूरे मामले में उनका नाम न आने के बावजूद फँसाया जा रहा है और ड्रग्स कार्टेल वाले बड़े लोगों को बचाया जा रहा है? हेमा कमिटी की रिपोर्ट में इंडस्ट्री में अंदर तक जम चुके ड्रग्स माफिया की भी बातें हैं, कहा गया है कि महिलाओं के खिलाफ अधिकतर अपराध नशे में किए गए हैं। कई युवा अभिनेता ड्रग्स के आदी हैं। यौन शोषण के मामलों की जाँच तो हो रही है, ड्रग्स वाली बात पर अब तक सरकार भी चुप है।
ख़ुफ़िया विभाग ने भी बताया है कि कई हालिया मलयालम फिल्मों की शूटिंग के दौरान सेट पर ही ड्रग्स चलते हैं और शूटिंग खत्म होने के बाद होने वाली पार्टियों में खुलेआम ड्रग्स का इस्तेमाल होता है। स्थानीय मीडिया की खबरों की मानें तो पुलिस और एक्साइज विभाग के पास इसकी सूचनाएँ हैं फिर भी कार्रवाई नहीं होती। ड्रग्स का इस्तेमाल पिछले एक दशक से इस तरह से हो रहा है। मिमिक्री आर्टिस्ट व अभिनेता tini टॉम ने कहा था कि उन्होंने एक फिल्म में एक अभिनेता के बेटे के रोल के लिए अपने बेटे के पास आए ऑफर को ठुकरा दिया, क्योंकि सेट पर ड्रग्स का इस्तेमाल किया जाता है।
अब देखिए, गायिका सुचित्रा ने मलयालम अभिनेत्री रीमा कल्लिंगल पर ड्रग्स पार्टियाँ आयोजित करने का आरोप लगाया। उन्होंने कहा कि इन पार्टियों में ऐसी चीजें इस्तेमाल की गईं, जो एडल्ट पार्टियों में भी इस्तेमाल नहीं की जानी चाहिए। उन्होंने बताया कि इन पार्टियों में मादक पदार्थों के इस्तेमाल में पुरुष और महिलाएँ दोनों शामिल थे। निर्माता-निर्देशक आशिक बाबू पर भी ऐसे ही आरोप लगे। और जानने वाली बात ये भी है कि रीमा WCC की भी सदस्य हैं, जो संगठन यौन शोषण के खिलाफ आवाज़ उठाने का दावा कर रहा है।
‘The News Minute’ में इससे जुड़ी खबर आपको नहीं मिलेगी। कारण – धन्या और रीमा मित्र हैं। एक वैश्विक टूर के दौरान इन दोनों की एक तस्वीर भी आप नीचे देख सकते हैं। यानी, केरल फिल्म इंडस्ट्री से जुड़ा ये मुदा उनके लिए व्यक्तिगत है, व्यक्तिगत हित से जुड़ा प्रतीत होता है। मित्र-मंडली के खिलाफ लगे आरोपों को छिपाया जा रहा है और जिसका इन सब में कोई किरदार नहीं उसकी तस्वीर लगा कर कहबर बेचीं जा रही है ताकि इनका सब्सक्रिप्शन मॉडल सफल हो।
विदेश में साथ में हैंगआउट करती हुईं धन्या, रीमा और पार्वती
उन्होंने हेमा कमिटी रिपोर्ट मुद्दे पर अपने एक शो में रीमा से बातचीत भी की। धन्या राजेंद्रन और उनका मीडिया संस्थान ‘The News Minute’ इस पर चुप क्यों हैं? क्या मलयालम फिल्म इंडस्ट्री पर हिन्दू विरोधी समूह के आधिपत्य के लिए ऐसा खेल किया जा रहा है? धन्या राजेंद्रन और जैसे धूर्त जब मोहनलाल की तस्वीर का बिना अर्थ इस्तेमाल करें, तो इसका अर्थ सिर्फ क्लिकबेट नहीं हो सकता। इसके पीछे कुछ न कुछ बड़ी मंशा है। ड्रग कार्टेल के खिलाफ चुप्पी, भाजपा के करीबियों को धमकी – यही है उद्देश्य।
उत्तर प्रदेश के कन्नौज जिले में नाबालिग पीड़िता से रेप केस के आरोपित समाजवादी पार्टी के पूर्व नेता नवाब सिंह यादव की मुश्किलें बढ़ती नजर आ रहीं हैं। फॉरेंसिक जाँच और FSL रिपोर्ट में पीड़िता के साथ बलात्कार किए जाने की पुष्टि हो गई है। नवाब सिंह के DNA सैम्पल का मिलान भी पीड़िता से हो गया है। सोमवार (2 सितंबर 2024) को कन्नौज के पुलिस अधीक्षक IPS अमित कुमार आनंद ने इसकी पुष्टि की है। उन्होंने बताया कि मामले में आगे की जाँच व अन्य कानूनी कार्रवाई जारी है।
नवाब सिंह के केस में सोमवार (2 सितंबर 2024) को कन्नौज के पुलिस अधीक्षक अमित कुमार आनंद ने ANI से बात की। उन्होंने बताया, “घटनास्थल से फॉरेंसिक सबूत जुटाए गए थे। इन्हें FSL भेजा गया था। FSL से रिपोर्ट प्राप्त हो गई है जिसमें दुष्कर्म किए जाने की पुष्टि हुई है। इसमें कन्नौज पुलिस द्वारा अग्रिम विधिक कार्रवाई की जा रही है।” बताया जा रहा है कि अब पुलिस सपा के पूर्व नेता पर रेप के साथ पॉक्सो एक्ट के तहत भी चार्जशीट दाखिल करेगी।
#WATCH | Uttar Pradesh | Kannauj rape case: Amit Kumar Anand, Kannauj SP says "In connection with this case, forensic evidence was collected from the spot, which was sent to FSL. The FSL report has been released in which the incident of rape has been confirmed. Further… pic.twitter.com/QFDuYN9uN1
मीडिया रिपोर्ट्स में यह भी दावा किया गया है कि FSL की इसी रिपोर्ट में नवाब सिंह यादव और पीड़िता के DNA का मिलान हो गया है। बताते चलें कि यह मामला 11 अगस्त 2024 का है। तब अपनी बुआ के साथ लखनऊ से कन्नौज लौट रही पीड़िता को कथित तौर पर सपा के पूर्व नेता नवाब सिंह यादव ने अपने कॉलेज बुलाया था। यहाँ पीड़िता को रात में रुकने की बात कहते हुए नवाब सिंह यादव ने बलात्कार किया। रेप के बाद पीड़िता ने पुलिस बुला ली थी। पुलिस ने नवाब सिंह यादव को गिरफ्तार कर लिया।
बाद में पीड़िता की बुआ की भी इस केस में संलिप्तता निकली थी। पुलिस ने पीड़िता की बुआ को भी जेल भेज दिया था। नवाब सिंह यादव पर रेप का आरोप लगते ही समाजवादी पार्टी ने फ़ौरन ही उनसे अपना पल्ला झाड़ लिया था। कन्नौज सपा ने एक आधिकारिक पत्र जारी करते हुए नवाब सिंह यादव को पार्टी विरोधी हरकतें करने वाला बता दिया था। हालाँकि स्थानीय लोगों सहित नवाब सिंह ने भी अपने सोशल मीडिया हैंडल से खुद को डिम्पल यादव का प्रतिनिधि बताया था।