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अवैध निर्माणों की ढाल नहीं बनेगा सुप्रीम कोर्ट, UP सरकार की तारीफ कर कहा- बुलडोजर एक्शन पर बनेगी देशव्यापी गाइडलाइन

सुप्रीम कोर्ट ने देश भर में बुलडोजर एक्शन को लेकर गाइडलाइन बनाने की बात कही है। सुप्रीम कोर्ट ने कहा है कि यदि कोई व्यक्ति केवल आरोपित है तो उसका घर कैसे गिराया जा सकता है। कोर्ट ने यह भी कहा कि वह अवैध इमारतों को किसी भी तरीके से नहीं बचाएँगे।

सुप्रीम कोर्ट की जस्टिस केवी विश्वनाथन और जस्टिस बीआर गवई की बेंच ने सोमवार (2 सितम्बर, 2024) को देश भर में पुलिस-प्रशासन के बुलडोजर एक्शन लेने पर सुनवाई की। सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि इस मुद्दे को देशव्यापी स्तर पर सुलझाए जाने की जरूरत है। कोर्ट ने कहा इस मामले में गाइडलाइन बनाया जाना जरूरी है।

मामले की सुनवाई के दौरान कोर्ट ने सभी राज्यों से सुझाव माँगे हैं जिन्हें इमारतें तोड़ने सम्बन्धित नई गाइडलाइन में सम्मिलित किया जा सकता है। हालाँकि, सुनवाई के दौरान सुप्रीम कोर्ट ने नाराजगी भी जताई। कोर्ट ने कहा, “किसी का घर सिर्फ इसी आधार पर कैसे गिराया जा सकता है कि वह किसी अपराध का आरोपित है? उसका घर तो तब भी नहीं तोड़ा जा सकता जब अपराध सिद्ध हो जाए।” कोर्ट ने यह भी कहा कि हम अवैध इमारतों को किसी भी तरह नहीं बचाएँगे।

सुप्रीम कोर्ट में सुनवाई के दौरान उत्तर प्रदेश ने भी अपना पक्ष रखा। उत्तर प्रदेश की तरफ से पेश सोलिसीटर जनरल तुषार मेहता ने कहा, “किसी अचल संपत्ति को सिर्फ इसलिए ध्वस्त नहीं किया जा सकता क्योंकि आरोपित किसी अपराध में शामिल है और वह इसलिए तोड़ा जा सकता है जब इमारत अवैध हो।”

उत्तर प्रदेश ने यह भी कहा कि वही इमारतें गिराई गई हैं, जो अवैध हैं और उन्हें तब ही गिराया गया जब इनके मालिकों ने नोटिस का जवाब नहीं दिया। सुप्रीम कोर्ट ने इस मामले में उत्तर प्रदेश सरकार के स्टैंड की तारीफ भी की है। कोर्ट ने यह भी कहा कि गाइडलाइन बनने तक बुलडोजर एक्शन पर नियंत्रण रखा जाए।

सुप्रीम कोर्ट यह सुनवाई उन याचिकाओं के संबंध में सुन रहा है, जिनमें कहा गया है कि उनका घर सिर्फ इसलिए गिराया गया क्योंकि उसमें आरोपित रहता था। सुप्रीम कोर्ट में 2 याचिकाएँ मध्य प्रदेश और राजस्थान से दायर की गई हैं। राजस्थान की याचिका में कहा गया है कि उनका घर सिर्फ इसलिए गिराया गया क्योंकि उसमे रहने वाले किराएदाएर ने अपराध किया था।

इसके अलावा दिल्ली में भी घर गिराने को लेकर एक याचिका सुप्रीम कोर्ट के सामने पहुँची। हरियाणा के नूंह में भी घर गिराए जाने को लेकर सुप्रीम कोर्ट के समक्ष याचिकाएँ पहुँची थी। अब सुप्रीम कोर्ट इस मामले में आगे सुनवाई करके गाइडलाइन जारी करेगा।

31 साल की महिला डॉक्टर के ‘उपचार’ से डरी पाकिस्तान सरकार, मार्च करने निकली तो 2 लाख लोग साथ हो लिए: बलूचिस्तान की आवाज महरंग बलोच को जानिए

पाकिस्तान के अत्याचारों के खिलाफ बलूचिस्तानियों के संघर्ष का इतिहास पुराना रहा है। आज भी बलोच के लोग अपने अधिकारों के लिए पाकिस्तान सरकार से लड़ाई लड़ रहे हैं। कुछ ने इस क्रम में हिंसा का रास्ता अपना लिया है तो कुछ ऐसे भी हैं जो अहिंसा के मार्ग पर चलते हुए भी पाकिस्तान सरकार के नाक में दम किए हुए। 31 साल की महरंग बलोच इनमें सबसे ज्यादा जाना-माना नाम है।

कौन हैं महरंग बलोच

1993 में जन्मीं महरंग पेशे से डॉक्टर हैं लेकिन वैश्विक स्तर पर उनकी पहचान मानवाधिकार कार्यकर्ता के तौर पर होती है। उन्हें बलूचिस्तान के लोगों के हकों के लिए लड़ते-लड़ते एक दशक से ज्यादा का समय बीत गया है।

इस लड़ाई में वो अपने अब्बा को खो चुकी हैं और भाई के अचानक गायब होने के दर्द को जानती हैं। उन्होंने वैसे तो बलोच लोगों के लिए 2006 से ही आवाज उठाना शुरू कर दिया था लेकिन कुछ समय बाद उनके अब्बा का अपहरण कर लिया गया और फिर 2011 में उनका शव क्षत-विक्षत हालत में मिला।

महरंग उस समय तक इतना सक्रियता से प्रदर्शनों में नहीं जुड़ीं थीं, लेकिन 2017 में जब भाई भी अचानक किडनैप कर लिया गया, तब उन्होंने मैदान में आने की ठानी। महरंग ने अपने भाई के लिए प्रदर्शन किए, मार्च में शामिल हुई, बैठकों में गईं। उनके आवाज उठाने का ये लाभ हुआ कि अपहरणकर्ताओं को 2018 में उनके भाई को लौटाना पड़ा।

राजनीति में कैसे हुई एंट्री

महरंग इस बीच ये समझ चुकी थीं कि ये दर्द जो उन्होंने सहा वो उनके अकेले के साथ हुई घटना नहीं है बल्कि बलूचिस्तान में कई परिवार इस दर्द को झेल रहे हैं। नतीजतन भाई के आने के बाद भी महरंग ने अपना काम नहीं छोड़ा। वह अपहरण होने वाले लोगों के लिए इंसाफ को माँगती रहीं। बाद में 2019 में उन्होंने अपनी एक पार्टी बनाई- बलूच यकजहती समिति (बीवाईसी)।

पार्टी बनाने के बाद उन्होंने छोटी-छोटी बैठकें शुरू कीं। दरवाजे पर जा जाकर ऐसे लोगों को जोड़ा। धीरे-धीरे उनके साथ घर की बुजुर्ग औरतों से लेकर घर की बेटियाँ तक जुड़ने लगीं। उनके साथ चलने वाला काफिला बड़ा होने लगा।

महरंग का बलूचिस्तानियों पर असर

महरंग का असर आज बलूचिस्तान पर ऐसा है कि हाल में उनके नेतृत्व में एक मार्च हुआ था जिसमें अनुमान था कि करीबन 2 लाख लोग आए होंगे। इन लोगों को रोकने के लिए पुलिस ने लाठीचार्च किया, आंसू गैस छोड़े, तमाम प्रयत्न किए, लेकिन लोगों ने हार नहीं मानी।

महरंग को सुनने जटी भीड़

उलटा लोग महरंग की हिम्मत देख उनके कायल हो गए। युवा लड़कियों ने बताया कि वो मार्च में महरंग को देखकर आई हैं। उन्होंने कहा कि मार्च में उन्हें पहली बार पता चला कि बलूचिस्तानी लोग अपने परिजनों को खोने से दर्द में हैं। लड़की ने कहा कि महरंग सच में लोगों के दिल और दिमाग जीत रही हैं। उन्हीं के कारण सबको पता चला कि आखिर बलूचिस्तानियों के साथ उनके अपने देश में क्या हो रहा है।

वहीं महरंग है जिन्हें आए दिन अपने लोगों की आवाज उठाने के लिए मारने की धमकियाँ मिलती हैं, लेकिन महरंग कहती हैं, “पहले मुझे मृत्यु से डर लगता था। यहाँ तक मैं अंतिम संस्कार में भी नहीं जाती थी। मगर 2011 में पहली बार मुझे अपने पिता के क्षत-विक्षत शव की पहचान करनी पड़ी। पिछले 15 वर्षों में अपने लोगों के दर्जनों शवों को देखा है। अब मुझे मौत से भी डर नहीं लगता है।”

डरती है पाकिस्तान सरकार

बता दें कि महरंग के पिता मजदूर थे, लेकिन उन्होंने एमबीबीएस हासिल करके डॉक्टरी की पढ़ाई पूरी की और आज वो जिन बलोच लोगों के लिए संघर्ष कर रही हैं वो उन तमाम लोगों के दर्द को बयान करता है जिन्होंने पाकिस्तानी फौज के कारण अपने अपनों को खोया और जिन्हें पता भी नहीं कि उनके अपने जीवित हैं भी या नहीं। आज उनके नाम और काम के बारे में सिर्फ बलूचिस्तानी ही नहीं जानते बल्कि अलग-अलग जगह के लोग, जो इंसानियत की पैरवी करते हैं वो उनके मुरीद हैं। उनकी लोकप्रियता तेजी से मुल्क में बढ़ रही है। वहीं सरकार कोशिश कर रही है कि महरंग का असर देश के अन्य जगहों पर न पड़े। इसी कारण से मुल्क की सरकार लोगों को महरंग के साथ जुड़ने से रोक रही है। इंटरनेट बंद कराया जा रहा है और जवान तैनात किए जा रहे हैं ताकि प्रदर्शन पर काबू पाया जा सके।

इमरान ने कुरान जला कर पी सिगरेट, कहा – इसमें काफिरों का क़त्ल का फरमान: जिन संत के खिलाफ ‘सर तन से जुदा’ के नारे, उनका किया समर्थन – हुआ गिरफ्तार

उत्तर प्रदेश के बुलंदशहर जिले में कुरान जलाने का मामला सामने आया है। यह आरोप इमरान नाम के एक युवक पर लगा है जो पेशे से वकील है। आरोपित ने एक वीडियो जारी कर के इस्लाम मज़हब पर कई आपत्तिजनक टिप्पणियाँ भी की हैं। घटना का वीडियो भी सोशल मीडिया पर वायरल हो रहा है जिसमें इमरान बता रहा है कि कुरान की 26 आयतों में काफिरों के कत्ल का फरमान है। इमरान ने इस्लाम त्याग कर सनातन धर्म में घर वापसी का भी एलान किया है। रविवार (1 सितंबर, 2024) को पुलिस ने केस दर्ज कर के इमरान को गिरफ्तार कर लिया है।

मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक, यह घटना बुलंदशहर के थाना क्षेत्र शिकारपुर की है। यहाँ रविवार को कस्बे के ही रहने वाले शाहिद ने पुलिस में शिकायत दर्ज करवाई है। शाहिद ने बताया कि शनिवार को ही शिकारपुर के रहने वाले इमरान के यूट्यूब पर एक आपत्तिजनक वीडियो शेयर की है। इस वीडियो में इमरान न सिर्फ कुरान को जला रहा है बल्कि इस्लाम पर भी आपत्तिजनक टिप्पणियाँ कर रहा है। शाहिद ने इमरान पर नबी की शान में गुस्ताखी का भी आरोप लगाया है। अपनी भावनाएँ आहत होने और लोगों में रोष फैलने की दलील देते हुए शाहिद ने इमरान के खिलाफ कड़ी कार्रवाई की माँग की है।

शिकायतकर्ता का यह भी दावा है कि आरोपित इमरान वकील है। पुलिस ने इस शिकायत पर अधिवक्ता इमरान के खिलाफ नामजद FIR दर्ज कर ली है। यह FIR भारतीय न्याय संहिता (BNS) की धारा 192, 299, 302 और 353 के तहत तहत दर्ज हुई है। ऑपइंडिया के पास FIR कॉपी मौजूद है। सोमवार (2 सितंबर) को पुलिस ने बताया कि आरोपित इमरान को गिरफ्तार कर लिया गया है। मामले में जाँच व अन्य जरूरी कानूनी कार्रवाई अमल में लाई जा रही है।

इस घटना का वीडियो भी सोशल मीडिया पर वायरल हो रहा है। वायरल वीडियो में इमरान क़ुरान को जलाते हुए बोला, “जबान के जायके के लिए अल्लाह का नाम लेकर। कुरान की 26 शैतानी आयतें जो काफिरों के नाम पर इंसानों का कत्ल करने का खुल्लम-खुल्ला आदेश देती हैं। इमरान ने आगे तीन तलाक, हलाला और ईरान में 9 साल की बच्ची से निकाह को भी शरिया बना देने जैसी बातें भी कहीं हैं। वीडियो में उसे पैगंबर मुहम्मद का भी नाम लिया है।

वीडियो में आगे एडवोकेट इमरान ने दावा किया कि शरिया के नाम पर हो रहे ऐसे कामों की निंदा पूरी दुनिया कर रही है। इमरान आगे बोला, “स्वामी रामगिरि महाराज ने कुछ भी गलत नहीं किया। मैं सही को सही और गलत को गलत समझने के इल्म से बख़ूबी वाकिफ हूँ।” अपनी हरकत को इमरान ने ‘अपने अक़ीदे को जला कर खत्म करने’ की संज्ञा दी है। बांग्लादेश का भी जिक्र करते हुए इमरान आगे बोला, “अभी आपने देखा होगा कि बांग्लादेशी हिन्दुओं का क्या अंजाम किया। यह है शांतिप्रिय मज़हब। और फिर उल्टा चोर कोतवाल को डाँटे।”

इसी के जलते पन्नों से इमरान ने सिगरेट बना कर भी पी। इस पर चप्पल भी रखी। एडवोकेट इमरान ने अपने वीडियो में क़ुरान पर बैन लाने की वकालत की है। उन्होंने दावा किया कि आज वो घर वापसी कर रहे हैं। पूरे वीडियो के दौरान इमरान ने सिर पर खास टोपी लगा रखी है। वह लगातार मुस्करा रहा था।

शंभू बॉर्डर खुलवाने के लिए सुप्रीम कोर्ट ने बनाई कमिटी, कहा- बात कर किसानों-ट्रैक्टर को हटवाइए, हाइवे खोलिए: राजनीति नहीं करने की दी हिदायत

शंभू बॉर्डर पर महीनों से जमे किसान प्रदर्शनकारियों से बातचीत करने के लिए सुप्रीम कोर्ट ने एक कमिटी का गठन कर दिया है। सुप्रीम कोर्ट ने इस पाँच सदस्यीय कमिटी को किसानों और सरकार का पक्ष सुन कर किसी नतीजे पर पहुँचने को कहा है। कोर्ट ने कमिटी से कहा है कि वह सबसे पहले किसानों से बात करके हाइवे खुलवाए।

सुप्रीम कोर्ट ने सोमवार (2 सितम्बर, 2024) को इस मामले में सुनवाई करते हुए इस कमिटी का गठन किया। सुप्रीम कोर्ट ने पंजाब और हरियाणा हाई कोर्ट के सेवानिवृत्त जस्टिस नवाब सिंह को इसका चेयरमैन नियुक्त किया है। इसके अलावा इसमें हरियाणा के पूर्व DGP पीएस संधू, कृषि प्रोफ़ेसर देविंदर शर्मा और कृषि अर्थशास्त्री सुखपाल सिंह को इसका सदस्य नियुक्त किया है।

इनके अलावा इस कमिटी में प्रोफ़ेसर बीआर कम्बोज को विशेष आमंत्रित सदस्य बनाया गया है। कमिटी से सुप्रीम कोर्ट ने कहा है कि वह पहले पंजाब और हरियाणा की सरकार से बातचीत करे तय करे कि मुद्दे क्या हैं। सुप्रीम कोर्ट ने यह भी हिदायत दी कि किसी भी मुद्दे का राजनीतिकरण नहीं होना चाहिए।

सुप्रीम कोर्ट ने कमिटी से यह भी कहा है कि वह शंभू बॉर्डर पर बैठे किसानों से भी बातचीत करे। कोर्ट ने कह़ा, “शंभू बॉर्डर पर आंदोलनकारी किसानों से बातचीत कर उन्हें राष्ट्रीय राजमार्ग से अपने ट्रैक्टर और अन्य सामान तुरंत हटाने के लिए मनाएँ ताकि ताकि दोनों राज्य हाइवे खोलने में सक्षम हो सकें।”

सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि अब कमिटी इस मामले को देखेगी और बाकी लोग इन मुद्दों को खाली में ना उठाएँ। सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि हरियाणा और पंजाब में बड़ी आबादी ऐसी है जो खेती पर आश्रित है और काफी गरीब तबके से है, ऐसे में इनके मुद्दे इस कमिटी को देखने होंगे।

कोर्ट का यह फैसला हरियाणा की एक याचिका पर दिया गया है। इससे पहले जुलाई में पंजाब और हरियाणा हाई कोर्ट ने हरियाणा को आदेश दिया था कि वह शंभू बॉर्डर खोल दे। हालाँकि, हरियाणा ने इस फैसले को सुप्रीम कोर्ट में चुनौती दी थी। सुप्रीम कोर्ट ने तबसे ही इस मामले की सुनवाई कर रहा है।

इससे पहले की सुनवाइयों में सुप्रीम कोर्ट ने हरियाणा और पंजाब से कमिटी के लिए नाम देने को कहा था। इसके बाद सुप्रीम कोर्ट ने कमिटी का गठन कर दिया। अब कमिटी सभी पक्ष से बातचीत करके किसान आंदोलन के लिए समाधान बताएगी।

‘Emergency की Uncut वर्जन ही रिलीज करूँगी’: सेंसर ने रोकी फिल्म तो बोलीं कंगना रनौत – ‘खालिस्तानी’ शब्द का इस्तेमाल करने पर भी है मनाही

अभिनेत्री कंगना रनौत की फिल्म ‘Emergency’ की रिलीज डेट टल गई है। फिल्म को अभी तक सेंसर बोर्ड ने भी पास नहीं किया है। फिल्म आपातकाल और इंदिरा गाँधी पर आधारित है। बता दें कि कंगना रनौत हिमाचल प्रदेश के मंडी से भाजपा की सांसद भी हैं। अब अभिनेत्री ने शुभंकर मिश्रा के YouTube चैनल पर उनसे बात करते हुए अपनी बात रखी है। उन्होंने कहा कि समस्या ये है कि फिल्म में ‘खालिस्तानी’ शब्द का इस्तेमाल नहीं किया जा सकता, सिखों को इंदिरा गाँधी को मारते हुए नहीं दिखाया जा सकता।

उन्होंने कहा कि ये ऐसे मुद्दे हैं जिनसे अराजक तत्वों को समस्या है और वो याचिका डाल कर फिल्म को रुकवाने की कोशिश कर रहे हैं। कंगना रनौत ने कहा कि ऐसे लोगों को उनके अस्तित्व से भी समस्या हो सकती है, कि वो जीवित ही क्यों हैं। बकौल कंगना रनौत, वो हमेशा से अकेली हैं। अभिनेत्री ने कहा कि उन्होंने किसी पार्टी के लिए, किसी को नीचा दिखाने के लिए या फिर किसी समुदाय को ठेस पहुँचाने के लिए नहीं बल्कि बेहद ही ईमानदार तरीके से ये फिल्म बनाई है।

कंगना रनौत ने कहा कि जिन चीजों को लेकर आपत्ति है वो फिल्म का छोटा सा हिस्सा है, उसे पकड़ कर हंगामा खड़ा किया जा रहा है। कंगना रनौत ने कहा कि लोग हर चीज पर डराते रहते हैं, फिर हम झाड़ियों के पीछे रोमांस वाली फ़िल्में ही बनाते रह जाएँगे। कंगना रनौत ने कहा, “सेंसर बोर्ड ने हमारा सर्टिफिकेट रोका हुआ है लेकिन मैं प्रतिबद्ध हूँ कि फिल्म का Uncut वर्जन ही रिलीज करूँगी। मैं कोर्ट में लड़ कर Uncut रिलीज करूँगी। मैं अचानक से ये नहीं दिखा सकती कि इंदिरा गाँधी अचानक ही मर गईं।” वीडियो में 12:45 के बाद ये सुना जा सकता है।

धमकियों को लेकर ‘तनु वेड्स मनु’ सीरीज और ‘क्वीन’ की अभिनेत्री कंगना रनौत ने कहा कि उन्होंने कभी सोचा नहीं था कि उन्हें इतनी हद तक निशाना बनाया जाएगा। उन्होंने बताया कि 4 इतिहासकारों की मदद से ये फिल्म बनाई गई है, जिनमें उस ज़माने के दिग्गज पत्रकार भी शामिल हैं जो जेल भी गए थे। बकौल कंगना रनौत, Gun Point पर रख कर सिस्टम को चलाने वाली धारणा चल रही है। कंगना रनौत ने कहा कि ये महाराष्ट्र से शुरू हुआ, जब उनके लिए गाली का इस्तेमाल किया गया और फिर सबको आदत पड़ जाती है, पंजाब से भी उन्हें गाली पड़ती है, ‘X’ व अन्य सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म्स पर भी गाली पड़ती है।

जो 147 साल में नहीं हुआ, वह एक कृष्ण भक्त क्रिकेटर ने बांग्लादेश के लिए कर दिखाया: हिंदू होने पर ताने देते रहे हैं इस्लामी कट्टरपंथी , कहते रहे हैं- मुस्लिम बनो

पाकिस्तान और बांग्लादेश के बीच रावलपिंडी में चल रहे 2 टेस्ट मैचों की सीरिज के बीच एक कृष्ण भक्त के चर्चे हर ओर रह रहे हैं। कृष्ण भक्त का नाम लिटन दास है। लिटन बांग्लादेश के खिलाड़ी हैं। रावलपिंडी में उन्होंने पाकिस्तानी गेंदबाजों को अपनी बल्लेबाजी से ऐसा धोया कि नया रिकॉर्ड बन गया।

सीरिज के दूसरे मैच में पहले बल्लेबाजी करते हुए पाकिस्तान ने 274 रन बनाए थे इसके बाद बांग्लादेश टीम आई और एक के बाद एक ओपनिंग बैट्समैन फेल होते रहे। मात्र 26 रनों पर पाकिस्तान ने बांग्लादेश की 6 विकेट ले ली थी।

मुश्फिकुर रहीम(3), शाकिब अल हसन (2), जाकिर हसन (1), कप्तान नजमुल हुसैन शांतो (4), मोमिनुल हक (1) और शादमान इस्लाम (10)… 7वें नंबर पर हिंदू क्रिकेटर लिटन दास आए।

उन्होंने मेहदी हसन मिराज के साथ मिलाकर 165 रनों की पार्टनरशिप की और टीम को संभाला। इसके बाद उन्होंने 228 गंदों पर 138 रनों की पारी खेली। इस दौरान उन्होंने 13 चौके और 4 छक्के लगाए। वहीं मेहरी हसन ने भी 78 गेंदों पर 124 रन बनाए। दोनों खिलाड़ियों की जोड़ी टीम को पाकिस्तान के दिए लक्ष्य के करीब पहुँचा दिया।

इस पारी के बाद वो पहले बल्लेबाज बन गए हैं जिन्होंने टीम के 50 से कम रन होने की स्थिति के बाद टॉप ऑर्डर में न रहते हुए 3 बार शतक लगाए। बीते 147 साल में कहा जा रहा है ये रिकॉर्ड किसी खिलाड़ी के नाम नहीं रहा है।

इस टेस्ट मैच से पहले लिटन ने 2021 के चटगाँव टेस्ट में पाकिस्तान और 2022 में मीरपुर टेस्ट में श्रीलंका के खिलाफ यह कमाल किया था। चटगाँव वाले मैच में बांग्लादेश ने 49 पर 4 विकेट गवा दिए थे वहीं मीरपुर में सिर्फ 24 रन पर। ऐसे मुश्किल के समय में लिटन दास ने आकर टीम को उभारा था।

लिटन दास के नाम ये रिकॉर्ड बनने के बाद अब उनकी चर्चा हर जगह है। उनके सोशल मीडिया पर लोग उन्हें बधाइयाँ दे रहे हैं। हिंदू उन्हें असली कृष्ण भक्त रहे हैं, लेकिन बता दें कि कुछ समय पहले इन्हीं लिटन दास को बांग्लादेश के कट्टरपंथियों ने धर्मांतरण के लिए खुलेआम कहा था। ये हरकत कट्टरपंथियों ने साल 2022 में महालया पर लिटन द्वारा किए गए एक पोस्ट के बाद की थी। तभी इस्लामी कट्टरपंथियों ने कहा था कि उन्हें अल्लाह की शरण में आना चाहिए।

कोलकाता रेप-मर्डर के खिलाफ प्रदर्शन कर रही महिला को दिखाया लिंग, बंगाल पुलिस ने मानसिक रोगी बता छोड़ा: अब CCTV से ढूँढ रही

पश्चिम बंगाल की राजधानी कोलकाता में एक व्यक्ति ने महिला के सामने लिंग लहराया। महिला RG कर मेडिकल कॉलेज में डॉक्टर की रेप-हत्या के विरोध में हो रहे प्रदर्शन में शामिल थी। यह अश्लीलता करने वाले व्यक्ति को लोगों ने पकड़ लिया और पुलिस को सौंप दिया। बताया गया है कि कोलकाता पुलिस ने उसे मानसिक विक्षिप्त बता कर छोड़ दिया।

मीडिया रिपोर्ट्स के अनुसार, रविवार (1 सितम्बर, 2024) को कोलकाता में अमरा तिलोत्तमा नाम का एक संगठन प्रदर्शन कर रहा था। इस प्रदर्शन में बड़ी संख्या में लोग शामिल थे। यह प्रदर्शन RG कर मेडिकल कॉलेज में डॉक्टर की रेप और हत्या के विरोध में किया जा रहा था।

इसी प्रदर्शन में पीड़िता महिला शामिल थी। यह महिला जब एस्पलेनैड सर्कल के पास पहुँची तो यहाँ मौजूद एक आदमी ने उससे अश्लीलता चालू कर दी और उसे अपना लिंग दिखाया। इस व्यक्ति के अश्लीलता करने पर महिला ने आसपास अपने साथियों को बताया।

महिला के साथियों ने उस व्यक्ति को तुरंत पकड़ लिया। उन्होंने इस आदमी को पकड़ने के बाद पुलिस को इस संबंध में जानकारी दी। कोलकाता पुलिस आकर इसे साथ ले गई। रिपोर्ट्स में बताया गया कि कोलकाता पुलिस ने व्यक्ति की पहचान स्थानीय व्यक्ति के रूप में की।

यह भी बताया गया कि पुलिस ने इसे मानसिक विक्षिप्त बता कर उसे छोड़ दिया। हालाँकि, इससे प्रदर्शनकारी गुस्से में आ गए और पुलिस के खिलाफ प्रदर्शन करने लगे। उन्होंने अश्लीलता फ़ैलाने वाले व्यक्ति को गिरफ्तार कर उसके खिलाफ मामला दर्ज किए जाने की माँग की।

पीड़िता ने भी इस सबंध में पुलिस से शिकायत दर्ज करवाई है। पीड़िता की शिकायत के बाद अब पुलिस लिंग दिखाने वाले आदमी को फिर से ढूंढ रही है। पुलिस ने इसके लिए आसपास के CCTV कैमरे देखने चालू किए हैं। इस मामले में उसको छोड़ने वाले पुलिसकर्मियों पर भी कार्रवाई की माँग की गई है।

गौरतलब है कि 9 अगस्त, 2024 को RG कर मेडिकल कॉलेज में एक महिला डॉक्टर की रेप के बाद हत्या कर दी गई थी। उसका शव कॉलेज में ही पड़ा हुआ मिला था। इस मामले में कॉलेज और पुलिस पर पहले परिजनों को गुमराह करने का आरोप लगा था। मामले के तूल पकड़ने के बाद पुलिस ने एक आरोपित को गिरफ्तार किया था।

इस्लामी नाम वाले आतंकियों ने विमान अगवा किया, फिर वेब सीरिज में क्यों दिखाया शंकर-भोला? ‘आईसी 814: द कंधार हाईजैक’ के आतंकियों के हिंदू नाम पर विवाद

नेटफ्लिक्स पर हाल में अनुभव सिन्हा के निर्देशन में बनी IC 814 नाम से एक सीरिज आई है। ये सीरिज 1999 में हुए कंधार हाईजैक घटना पर आधारित है। सीरिज में दिखाया गया कि कैसे भारत में बंद आतंकियों को छुड़ाने के लिए अन्य पाकिस्तानी आतंकियों ने एक प्लेन हाईजैक किया और यात्रियों को 7 दिन (24 दिसंबर 1999-31 दिसंबर 1999) तक बंधक बनाए रखा।

IC-814 को लेकर सोशल मीडिया पर उठ रहे सवाल

इस सीरिज को लेकर कुछ आपत्तियाँ सोशल मीडिया पर देखने को मिल रही हैं। लोगों का कहना है कि बॉलीवुड एक बार फिर से इतिहास को सही से दिखाने में विफल हुआ है।

लोगों की शिकायत है कि सिर्फ और सिर्फ सीरिज में संवाद के माध्यम से आतंकियों की छवि को सुधारने का काम हुआ है। लोग इस सीरिज के डायरेक्टर अनुभव सिन्हा को इस्लामी जिहादी, हिंदूफोबिक आदि कह रहे हैं।

बताया जा रहा है कि सीरिज में हाईजैकर्स का नाम भोला और शंकर इस्तेमाल करते हुए सिर्फ हिंदुओं को बदनाम करने का प्रयास किया गया इसलिए ऐसी फिल्में गटर में डाल देनी चाहिए।

अब सवाल है कि अगर एक इतिहास की घटना पर आधारित कोई सीरिज बनी है तो क्या वाकई उसमें इतनी बड़ी छेड़छाड़ हुई है कि हिंदुओं को बदनाम करने के लिए आतंकियों के हिंदू नाम रख दिए गए। तो पहले जानते हैं कि उन आतंकियों के असली नाम क्या थे जिन्होंने आईसी-814 को हाईजैक किया था।

किसने किया था IC-814 हाईजैक

केंद्रीय गृह मंत्रालय द्वारा जारी एक बयान के अनुसार साल 2000 में उन्होंने मुंबई से 4 आईएसआई ऑपरेटिव्स को गिरफ्तार किया था। इनके नाम मोहम्मद रेहान, मोहम्मद इकबाल, यासूफ नेपाली और और अब्दुल लतीफ थे। ये रावलपिंडी के आतंकी संगठन हरकत उल अंसार के आतंकी थे। इन्हें हिरासत में लेने के बाद खुलासा हुआ था कि कंधार हाईजैक ISI का ऑपरेशन था जोकि आतंकियों को छुड़ाने के लिए करवाया गया था। गृह मंत्रालय के डॉक्यूमेंट में साफ लिखा है कि प्लेन हाईजैक करने वालों के असली नाम इब्राहिम अतहर, शाहिद अख्तर सईद, गुलशन इकबाल, सनी अहमद काजी, मिस्त्री जहूर इब्राहिम और शाकिर थे।

क्या थे IC-814 को हाईजैक करने वालों के कोड नाम

हाँ, ये बात भी सही कि इन आतंकियों ने हाईजैक के दौरान अपने असली नामों की जगह कोड वर्ड्स का इस्तेमाल किया था और जो कोड वर्ड सीरिज में बताए गए हैं वो सही हैं। जैसे इब्राहिम अतहर के लिए ‘चीफ’, शाहिद अख्तर सईद के लिए ‘डॉक्टर’, सनी अहमद के लिए ‘बर्गर’, मिस्त्री जहूर इब्राहिम के लिए ‘भोला’ और शकीर के लिए ‘शंकर’ नाम का कोड वर्ड रखा हुआ था।

अब ये तो साफ है कि सीरिज में आतंकियों के असली कोडवर्ड नाम के साथ छेड़छाड़ नहीं की गई बल्कि जगह-जगह उनका प्रयोग हुआ है। आतंकी को कहते दिखाया जाता है कि हमारे साथी भोला और शंकर हैं। इसके अलावा बाकी कोडवर्ड भी बार बार लिए जाते हैं।

आपत्ति किस बात से?

अब लोगों को आपत्ति इस बात से नहीं है कि आतंकियों ने जो कोडवर्ड अपने लिए बोले उसे सीरिज में क्यों दिखाया बल्कि आपत्ति इस बात से हैं कि आतंकियों के कोडवर्ड वाले नाम के अलावा उनके असली नाम क्यों नहीं बताए गए। अगर कोई व्यक्ति जिसे कंधार हाईजैक से जुड़े कोई तथ्य मालूम ही नहीं है और वो सिर्फ सीरिज को अपनी सूचना का स्रोत मानें तो सोचकर देखिए कि उसके दिमाग में जो आतंकी ‘हिंदू’ ही होंगे जिनका नाम भोला और शंकर है।

इसके अलावा सीरिज में आतंकियों को दयावान तक दिखाया गया है। सीरिज में ऐसे दृश्य भी है जहाँ दिखाया जा रहा था कि यात्रियों के खाने-पीने का ऐसे इंतजाम कर रहे थे जैसे उन्होंने कोई इवेंट करवाया हो। सीरिज में ‘बर्गर’ का चरित्र इतना अच्छा दिखाया गया है जैसे लगे कि उसे यात्रियों के दर्द से कितना ज्यादा फर्क पड़ रहा था, वो उनकी चोटें देखता, उनके साथ हँसता-खेलता सीरिज में दिखाया गया है। पूरी सीरिज को दिखाने का ढंग इतना सपाट कर दिया गया है कि लोग उस भयावहता को महसूस ही न कर पाएँ जो उन यात्रियों ने 7 दिन झेली होगी।

भाजपा नेता ने समझाया कैसे दशकों बाद पड़ेगा फर्क

इस मामले पर भाजपा नेता अमित मालवीय ने भी ट्वीट किया। उन्होंने कहा कि IC-814 के हाईजैकर्स दुर्दांत आतंकी थे जिन्होंने अपनी मुस्लिम पहचान छिपाने के लिए हिंदू नाम का इस्तेमाल किया, लेकिन फिल्म निर्माता अनुभव सिन्हा ने अपनी आपराधिक मंशा छिपाते हुए उनके नाम को सही दिखाया। नतीजा क्या होगा? दशकों बाद जब लोग इसे देखेंगे तो उन्हें लगेगा कि प्लेन हिंदुओं ने हाईजैक किया था।

उन्होंने कहा कि ये केवल वामपंथी एजेंडा है ताकि पाकिस्तानी आतंकियों के कुकर्म को धोया-पोंछा जा सके। ये होती है सिनेमा की शक्ति जोकि वामपंथी 70 के दशक या उससे पहले सेे इस्तेमाल करह रहे हैं। ये कवल भारत की सुरक्षा को कमजोर या उस पर सवाल नहीं खड़े करते बल्कि सारे दोष को उस मजहब से भी दूर कर देगा जो पूरे रक्तपात के लिए जिम्मेदार है।

इस सीरिज को लेकर उठा विवाद इतना बढ़ गया है कि सूत्रों से खबर ये भी आ रही है कि सूचना एवं प्रसारण मंत्रालय द्वारा नेटफ्लिक्स कंटेंट हेड को समन भेजा गया है।

जिस मुफ़्ती सलमान अजहरी ने हिन्दुओं को कहा ‘कुत्ता-काफिर’, CM योगी का किया अपमान, उसकी रिहाई के लिए बरेली में जुटी मुस्लिम भीड़: मौलाना बोले- हम उसके साथ, दुआ भी पढ़ी

हिन्दुओं की तुलना कुत्ता और काफिर से करने वाले मुफ़्ती सलमान अजहरी की रिहाई के लिए बरेली में मुस्लिम की भीड़ ने बैनर-पोस्टर लहराए हैं। भड़काऊ भाषण देने वाले मुफ़्ती की रिहाई के लिए मुस्लिम भीड़ ने दुआ भी पढ़ी। बड़े मौलानाओं ने भी सलमान अजहरी का समर्थन किया है और उसके साथ होने की बात कही है।

मीडिया रिपोर्ट्स के अनुसार, बरेली में आला हजरत दरगाह पर उर्स-ए-रजवी में यह घटना हुई है। बरेली में अगस्त के अंत में आला हजरत दरगाह पर उर्स-ए-रजवी का आयोजन किया गया था। यहाँ बड़ी संख्या में देश बहर से मुस्लिम इकट्ठा हुए हैं। इस कार्यक्रम में 30 अगस्त, 2024 को कार्यक्रम के समापन के मौके पर बड़ी मुस्लिम भीड़ बैनर-पोस्टर लेकर पहुँची। इस भीड़ ने मुफ़्ती सलमान अजहरी की रिहाई की माँग को लेकर नारे लगाए। उन्होंने चलते कायर्क्रम के बीच शोर मचाना चालू कर दिया।

इसके बाद मंच मौजूद मौलानाओं ने नारे लगाने वालों को शांत किया। मौलानाओं ने उनकी रिहाई वाली माँग का समर्थन किया। मंच पर मौजूद एक मौलाना आकिल रजवी ने कहा कि वह मुफ़्ती के साथ हैं। मौलाना आकिल ने यह भी कहा कि अगर कोई किसी सहाबी के खिलाफ बोलेगा तो उसकी जबान बंद कर दी जाएगी।

मंच पर से ही मुफ़्ती सलमान अजहरी की रिहाई के लिए दुआ भी पढ़ी गई। मौलाना ने अपील की जब भी नारे लगाने वालों से कहा जाए वह बस बाहर निकल आएँ। मौलाना सलमान अजहरी की रिहाई की माँग करने वालों ने इसके बाद फिलिस्तीन के लिए दुआ पढ़ी।

गौरतलब है कि मुफ़्ती सलमान अजहरी फरवरी, 2024 से गुजरात की एक जेल में बंद है। मुफ़्ती सलमान अजहरी 31 जनवरी, 2024 को गुजरात के जूनागढ़ के एक कार्यक्रम में हिन्दुओं की तुलना कुत्ते से की थी। सलमान अजहरी ने कहा था, ” ”मुसलमानों घबराओ मत, अभी खुदा की शान बाकी है। अभी इस्लाम जिंदा है, अभी कुरान बाकी है, ऐ जालिम काफिर क्या समझता है जो रोज हमसे उलझता है, अभी तो कर्बला का आखिरी मैदान बाकी है। कुछ देर की खामोशी है, किनारा आएगा… आज कुत्तों का वक्त है, कल हमारा दौर आएगा।”

मुफ़्ती सलमान अजहरी का यह वीडियो सोशल मीडिया पर वायरल हो गया था। इसके बाद उसे मुंबई से गुजरात की ATS पकड़ ले गई थी। उसका एक और वीडियो सामने आया था जहाँ वह उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के लिए अपमानजनक भाषा बोल रहा था। मुफ़्ती सलमान अजहरी पर गुजरात ही नहीं बल्कि महाराष्ट्र और कर्नाटक में भी कई FIR दर्ज की जा चुकी हैं। उसके खिलाफ दंगा भड़काने से लेकर सम्पत्ति नष्ट करने तक के मामले दर्ज हैं।

‘फिल्म इंडस्ट्री की तरह कॉन्ग्रेस में भी होता है कास्टिंग काउच’: केरल की नेता को मुँह खोलते ही पार्टी ने निकाला, कहा था- बड़े नेताओं की करीबी महिलाएँ पाती हैं पद

कॉन्ग्रेस की एक बड़ी नेता सिमी रोजबेल जॉन ने आरोप लगाया है कि पार्टी में उन्हीं महिलाओं को आगे बढ़ाया जाता है जो बड़े नेताओं की करीबी हैं। सिमी रोजबेल ने आरोप लगाया है कि कॉन्ग्रेस में भी कास्टिंग काउच जैसी स्थिति है। सिमी रोजबेल के इन गंभीर आरोपों के बाद उन्हें पार्टी से निकाल दिया गया है।

कॉन्ग्रेस नेता सिमी रोजबेल ने मीडिया से बात करते हुए कहा, “महिलाओं का शोषण हर क्षेत्र में हो रहा है, यहाँ तक कि दफ्तरों पर पर और राजनीति में भी। कई महिला साथियों ने मुझे अपने बुरे अनुभव बताए हैं। मैं हमेशा उन्हें सलाह देती हूँ कि वे नेताओं से मिलने अकेले न जाएँ। वे हमेशा अपने परिवार के सदस्यों या दोस्तों को भी अपने साथ बुला सकती हैं।”

सिमी रोजबेल ने आरोप लगाया था कि फिल्म उद्योग की तरह ही कास्टिंग की काउच की स्थिति कॉन्ग्रेस में भी है। उन्होंने आरोप लगाया कि उन्हीं महिलाओं को आगे बढ़ाया जाता है जो शीर्ष नेतृत्व की करीबी हैं। उन्होंने कई महिला नेताओं की राजनीतिक क्षमता पर प्रश्न उठाए थे।

सिमी रोजबेल ने यह भी बताया था कि उनके पास कई महिलाओं के अनुभव आए हैं और उनके पास सबूत भी मौजूद हैं। उन्होंने कहा था कि समय आने पर वह इस संबंध में खुलासे करेंगी। हालाँकि, उन्होंने अपने साथ किसी ऐसे अनुभव होने से इनकार कर दिया था।

सिमी रोजबेल के इस बयान के बाद कॉन्ग्रेस नेतृत्व पर गंभीर प्रश्न उठे हैं। कॉन्ग्रेस ने सिमी रोजबेल के आरोपों का जवाब उन्हें पार्टी से निष्कासित करके दिया है। केरल कॉन्ग्रेस प्रदेश कमिटी ने उनकी प्राथमिक सदस्यता रद्द करने की घोषणा की है। पार्टी ने आरोप लगाया है कि सिमी रोजबेल ने कॉन्ग्रेस की लाखों महिला कार्यकर्ताओं को अपमानित किया है।

सिमी रोजबेल ने पार्टी से निष्कासन का जवाब दिया है। उन्होंने कहा कि कॉन्ग्रेस में वह महिलाएँ काम नहीं कर सकती जिनमें गरिमा बची हुई है। उन्होंने इस दौरान केरल में कॉन्ग्रेस के बड़े नेता वीडी सतीशन पर भी आरोप जड़े। रोजबेल ने कहा कि कॉन्ग्रेस के पास अगर कोई सबूत है तो उन्हें आगे रखना चाहिए।

सिमी रोजबेल केरल कॉन्ग्रेस की बड़ी नेता रही हैं। वह राज्य के लोक सेवा आयोग की समिति की सदस्य भी रही हैं। उनके आरोपों के बाद कॉन्ग्रेस निशाने पर है। राज्य की सत्तारूढ़ पार्टी सीपीएम ने कॉन्ग्रेस पर निशाना साधते हुए प्रश्न उठाए हैं।

कॉन्ग्रेस ने महिला नेताओं का ऐसे आरोप लगाने का यह कोई पहला मामला नहीं है। इससे पहले भी कॉन्ग्रेस उन नेताओं को पार्टी से बाहर करती रही है जिन्होंने बड़े नेताओं के खिलाफ बोलने का प्रयास किया। इससे पहले यूथ कॉन्ग्रेस के मुखिया बीवी श्रीनिवास पर आरोप लगाने वाली अंगकिता दत्ता को भी कॉन्ग्रेस ने निकाल दिया था।

असम युवा काॅन्ग्रेस की अध्यक्ष रहीं अंगकिता ने यूथ काॅन्ग्रेस के राष्ट्रीय अध्यक्ष बीवी श्रीनिवास (Srinivas BV) और यूथ कॉन्ग्रेस के सेक्रेटरी इंचार्ज वर्धन यादव पर लैंगिक भेदभाव तथा बदजुबानी का आरोप लगाया था। कहा था कि राहुल गाँधी ने भी उनकी शिकायतों पर गौर नहीं किया और प्रताड़ना का सिलसिला चलता रहा।