Home Blog Page 703

बांग्लादेश में झील में तैरती मिली महिला पत्रकार की लाश, जिस चैनल में काम करती थी उसके मालिक को भी जेल: अराजकता थामने में विफल अंतरिम सरकार

बांग्लादेश में लगातार विरोध प्रदर्शन और उपद्रव के बाद सत्ता-परिवर्तन हो गया, इसके बावजूद वहाँ हिंसा थमने का नाम नहीं ले रही है। हिन्दुओं और शेख हसीन की पार्टी ‘आवामी लीग’ के नेताओं को खासकर के निशाना बनाया जा रहा है। अब बांग्लादेश की राजधानी ढाका स्थित हातिर झील से एक महिला पत्रकार की लाश मिली है। सारा रहनुमा नामक उक्त महिला पत्रकार ‘गाजी टीवी’ नामक न्यूज़ चैनल में कार्यरत थीं। इससे पता चलता है कि बांग्लादेश में महिलाएँ अराजक तत्वों से सुरक्षित नहीं हैं।

सारा रहनुमा ‘गाजी टीवी’ में बतौर न्यूज़रूम एडिटर कार्यरत थीं। उनकी हत्या को अभिव्यक्ति की आज़ादी पर हमले के रूप में देखा जा रहा है क्योंकि पत्रकार भी बांग्लादेश में डरे हुए महसूस कर रहे हैं। इस चैनल को गोलम दस्तगीर गाजी द्वारा चलाया जाता है, जो उद्योगपति होने के साथ-साथ बांग्लादेश के टेक्सटाइल एन्ड जूट मंत्री भी रहे हैं। वो ‘आवामी लीग’ से जुड़े हुए थे। 2024 में वो नारायणगंज क्षेत्र से लगातार चौथी बार सांसद बने थे। अब उन्हें भी सत्ता-परिवर्तन के बाद गिरफ्तार कर लिया गया है।

मृतका सारा रहमुमा की उम्र 32 वर्ष थी।ढाका मेडिकल कॉलेज हॉस्पिटल (DMCH) आउटपोस्ट के इंस्पेक्टर बच्चू मियाँ ने भी सारा रहनुमा की मौत की पुष्टि की है। सागर नामक शख्स उन्हें अस्पताल लेकर आया था। उसने पानी के ऊपर झील में उन्हें देखा, जिसके बाद उन्हें अस्पताल लेकर आया। यहाँ डॉक्टरों ने उन्हें मृत घोषित कर दिया। सारा ने मौत से पहले फहीम फैसल को टैग करते हुए फेसबुक पर उनकी दोस्ती के लिए धन्यवाद दिया था और लिखा था कि आपके सारे सपने पूरे हों।

सारा रहनुमा ने इस फेसबुक पोस्ट में ये भी लिखा था कि साथ में हमारी बहुत सारी योजनाएँ थीं, लेकिन मैं माफ़ी चाहती हूँ कि हम उन योजनाओं को पूरा नहीं कर पाए। एक अन्य फेसबुक पोस्ट में उन्होंने लिखा था कि मौत की तरह जीवन जीने से बेहतर है कि व्यक्ति मर ही जाए। पुलिस मौत के कारण की जाँच करेगी। बांग्लादेश में मोहम्मद यूनुस को मुख्य सलाहकार नियुक्त कर उनके नेतृत्व में अंतरिम सरकार चलाई जा रही है। यही सरकार चुनाव भी कराएगी, जिसके बाद पूर्ण सरकार का गठन होगा।

बांग्लादेश के पत्रकार ने अब ‘सुकन्या देवी रेप’ केस पर राहुल गाँधी को घेरा: जानिए क्या है वह मामला जिसमें कॉन्ग्रेस नेता थे आरोपित, सुप्रीम कोर्ट ने कर दिया था खारिज

बांग्लादेश के वरिष्ठ पत्रकार और बांग्लादेशी अखबार Blitz के संपादक सलाउद्दीन शोएब चौधरी ने अपने एक्स अकॉउंट से ‘सुकन्या देवी’ मामले में ट्वीट करके एक बार फिर राहुल गाँधी को सवालों में घेरा है। अपने ट्वीट में उन्होंने कहा है कि वो इस केस में जाँच शुरू कर चुके हैं और उन्हें इस क्रम में कई सौ सोशल मीडिया पोस्ट मिले हैं जो बताते हैं कि सुकन्या देवी के साथ जो रेप हुआ था उस मामले में कैसे राहुल गाँधी की संलिप्ता थी।

उन्होंने अपने लंबे पोस्ट में उन्होंने सुकन्या देवी से जुड़े कई बातों का जिक्र किया है। इससे पहले वो राहुल गाँधी से जुड़े कई दावों को अपने एक्स पर साझा कर चुके हैं। फिर चाहे वो राहुल गाँधी की किसी कैरिबियन महिला से हुई शादी पर किया गया किसी यूट्यूबर का दावा हो, या उनके दो बच्चे होने की बात।

उन्होंने कुछ तस्वीरें भी अपने अकॉउंट पर लगातार साझा की हुईं हैं और उनका कहना है कि वो राहुल विंसी उर्फ राहुल गाँधी के बारे में बहुत सी चौंकाने वाली सच्चाई खोजने का प्रयास कर रहे हैं। उन्होंने बीते दिनों राहुल गाँधी पर एक रिपोर्ट भी पेश की थी जिसका शीर्षक उन्होंने- “राहुल विंसी एक्सपोज्ड -द अटोल्ड स्टोरी ऑफ पॉवर, सीक्रेट्स एंड कॉन्ट्रोवर्सी था।” इसके बाद उनका दावा है कि उन्हें मारने की धमकियाँ दी गईं। उन्होंने पोस्ट में राहुल गाँधी की कैंब्रिज की डिग्री पर भी प्रश्न खड़े किए और सबसे ताजा ट्वीट में उन्होंने सुकन्या देवी केस उठाया।

ये सुकन्या देवी केस क्या है और कैसे इसके तार राहुल गाँधी से जुड़े हैं आइए बताएँ…

सुकन्या देवी मामला उस आरोप से संबंधित है, जिसमें राहुल गाँधी और उनके दोस्तों पर यूपी के एक स्थानीय कॉन्ग्रेस नेता की बेटी सुकन्या देवी के साथ 2006 में अमेठी में बलात्कार करने का आरोप लगाया लगाया गया था। शुरू में इस आरोप को कई ब्लॉगर्स द्वारा उठाया गया था। उसमें कहा गया था कि कथित घटना को लेकर शिकायत करने के लिए सोनिया गाँधी से मिलने के बाद लड़की और उसके माता-पिता गायब हो गए थे।

आरोपों में कहा गया कि सुकन्या, बलराम सिंह नामक कॉन्ग्रेस कार्यकर्ता की बेटी थी, और वह आरोपित राहुल गाँधी की बहुत बड़ी प्रशंसक थी। आरोप लगाया गया कि जब राहुल गाँधी अमेठी गेस्ट हाउस में अपने दोस्तों के साथ पार्टी कर रहे थे, तो वह उनसे मिलने के लिए वहाँ गई थीं, जहाँ आरोपित राहुल गाँधी और उनके 7 दोस्तों ने उनका कथित तौर पर बलात्कार किया था, जिनमें से 2 ब्रिटेन के थे और 2 अन्य इटली के थे।

जाहिर है कि वह किसी तरह इस घटना के बाद भाग निकली और कई लोगों से संपर्क किया लेकिन कोई भी मदद के लिए आगे नहीं आया। आरोपों में यह भी कहा गया कि सुकन्या देवी अपने पिता बलराम सिंह और माँ सुमित्रा देवी के साथ सोनिया गाँधी और मानवाधिकार आयोग से मिलीं, मगर उसके बाद उसका पूरा परिवार लापता हो गया। आरोप यह भी था कि ध्रुपद नाम का वीडियोग्राफर और एक न्यूज चैनल का एक कैमरामैन, जिन्होंने सुकन्या का बयान रिकॉर्ड किया था, उसके बाद वो भी लापता हो गए।

हालाँकि, उस समय इन आरोपों को मेन स्ट्रीम मीडिया ने पूरी तरह से नजरअंदाज किया और केवल कुछ सोशल मीडिया यूजर्स द्वारा इसे उठाया गया, लेकिन जब 2011 में सपा विधायक किशोर समरते ने इसे उठाया तो मीडिया को इसकी रिपोर्ट करने के लिए मजबूर होना पड़ा। समरीते ने इलाहाबाद उच्च न्यायालय में एक मामला भी दायर किया था, जिसमें कथित बलात्कार और सुकन्या के माता-पिता के गायब होने को लेकर जाँच की माँग की गई थी।

विधायक ने कहा था कि जब वह गाँव गए थे, तो उन्होंने पाया था कि उसके परिवार ने घर को छोड़ दिया था और पड़ोसी उस परिवार के दिल्ली जाने के बाद रहस्यमय तरीके से गायब होने की बात से अनजान थे।

लेकिन अदालत के आदेश पर पुलिस द्वारा की गई जाँच में आरोपों में कोई सच्चाई नहीं पाई गई। जाँच में पाया गया कि किशोर समरिते द्वारा बताया गया परिवार का पता मौजूद नहीं है। इसके अलावा, गजेंद्र पाल नाम के एक अन्य व्यक्ति ने बलराम और सुकन्या के दोस्त के रूप में अदालत में एक और याचिका दायर की थी, जिसमें कहा गया था कि समरिते ने एक झूठी याचिका दायर की थी जो राजनीति से प्रेरित थी।

जाँच में यह भी पाया गया कि बलराम सिंह ने अपना घर बेच दिया था और दूसरी जगह चले गए थे, और उनकी पत्नी और बेटी के नामों का ब्लॉगों में गलत उल्लेख किया गया था। उनकी पत्नी सुशीला देवी थीं और उनकी सबसे बड़ी बेटी कीर्ति सिंह थीं। उन्होंने जानकारी दी थी कि मीडिया में दावा करने वाले कुछ लोग उनके घर आए थे और उन्हें सुकन्या देवी की तस्वीर दिखाते हुए पूछा कि क्या वह उनकी बेटी है। उन्होंने उन्हें बताया था कि यह एक अलग महिला थी न कि उनकी बेटी।

इसके बाद याचिकाकर्ता ने आरोप लगाया था कि कीर्ति देवी एक अलग महिला थी, और उसे इस केस को कमजोर करने के लिए इसमें शामिल किया गया था। मगर हाईकोर्ट ने दोनों याचिकाकर्ताओं, किशोर सम्राट और गजेंद्र पाल को जुर्माना भरने के लिए कहा था। किशोर पर ‘झूठ’के आधार पर एक याचिका दायर करने के लिए 50 लाख रुपए का जुर्माना लगाया गया था, जिसमें से 25 लाख कीर्ति सिंह को, 20 लाख राहुल गाँधी को और 5 लाख यूपी के डीजीपी को इनाम के रूप में दिए जाने थे।

दूसरी ओर, गजेंद्र पर 5 लाख का जुर्माना लगाया गया था, क्योंकि उनके पास मामले में उनका उस परिवार से कोई संबंध नहीं था। इस तथ्य के बावजूद कि परिवार ने कोई शिकायत दर्ज नहीं की थी, अदालत ने गजेन्द्र पाल को उस परिवार को अदालत में घसीटने के लिए भी फटकारा।

इसके बाद किशोर समरीते ने सुप्रीम कोर्ट का दरवाजा खटखटाया था, लेकिन शीर्ष अदालत ने भी 2012 में आरोपों को खारिज कर दिया था, और समरिते पर 5 लाख रुपए का जुर्माना लगाया था, जबकि उच्च न्यायालय के जुर्माने को 50 लाख रुपए से घटाकर 10 लाख रुपए कर दिया था।

अदालत ने उल्लेख किया था कि “कोई भी साक्ष्य नहीं है” यह दिखाने के लिए कि कथित घटना 2006 में हुई थी। इसके अलावा, समरिते ने सुनवाई के दौरान यू-टर्न लेते हुए कहा था कि उन्हें इस मामले की कोई व्यक्तिगत जानकारी नहीं है और उन्होंने सपा नेतृत्व के निर्देश पर यह याचिका दायर की थी।

लक्षद्वीप में PM मोदी के पड़े चरण, मालदीव में हाफ हो गए भारतीय पर्यटक: देसी द्वीप जाने वाले टूरिस्ट हुए डबल, फ्लाइट 88% बढ़े

मालदीव के भारत विरोधी रवैये का नुकसान उसकी टूरिज्म इंडस्ट्री को उठाना पड़ा है। भारत विरोधी स्टैंड लेने के कारण मालदीव जाने वाले भारतीय टूरिस्टों की संख्या में 41% तक की कमी दर्ज की गई है। वहीं लक्षद्वीप में जाने वाले भारतीयों की संख्या इस बीच दोगुनी हो गई है। पीएम मोदी का लक्षद्वीप के प्रचार करने का असर भी पड़ा है।

मालदीव के पर्यटन मंत्रालय की रिपोर्ट के अनुसार, वर्ष 2024 में अप्रैल से जुलाई के बीच मालदीव जाने वाले भारतीयों की संख्या बीते वर्ष के इसी समय के मुकाबले लगभग आधी हो गई है। मालदीव के पर्यटन मंत्रालय के आँकड़ों के अनुसार, 2023 में जनवरी से जुलाई के बीच में भारत से 1.22 लाख पर्यटक मालदीव पहुँचे थे।

वर्ष 2024 के जनवरी से जुलाई के बीच यह संख्या घट कर 71,600 पर आ गई है। पर्यटकों की संख्या में यह 41.6% की कमी है। भारत 2023 में जनवरी-जुलाई के बीच मालदीव में पर्यटकों का दूसरा सबसे बड़ा स्रोत था। वर्तमान में भारत इसमें छठे स्थान पर पहुँच गया है।

मालदीव भारत

मालदीव भारतीय पर्यटकों की घटती संख्या से होने वाले नुकसान को चीन के जरिए पूरा करने की कोशिश कर रहा है। चीन से मालदीव पहुँचने वाले पर्यटकों की संख्या में 2024 में 59% की बढ़ोतरी हुई है। चीन से 2023 (जनवरी-जुलाई) में लगभग 92,391 पर्यटक पहुँचे थे। यह संख्या 2024 (जनवरी-जुलाई) के बीच बढ़ कर 1.59 लाख हो चुकी है।

रूस को पछाड़ कर मालदीव में पर्यटकों का सबसे बड़ा स्रोत अब चीन बन गया है। चीन के बाद अब रूस इस मामले में दूसरे स्थान पर पहुँच गया है। भारत अब शीर्ष 5 में भी नहीं है। यह भारतीयों के मालदीव के बहिष्कार करने का असर है। इस कारण मालदीव की टूरिज्म इंडस्ट्री को बड़ा नुकसान होने की संभावना है।

जहाँ मालदीव को भारतीय पर्यटक अब त्याग रहे हैं वहीं भारत के अपने नैसर्गिक स्थान लक्षद्वीप में पर्यटकों की आमद में बढ़ोतरी हो रही है। आँकड़ों के अनुसार, लक्षद्वीप के अगात्ती एयरपोर्ट पर जाने वाली फ्लाइट्स की संख्या बीते वर्ष के मुकाबले लगभग दोगुनी हो गई है।

अगात्ती एयरपोर्ट पर बीते वर्ष अप्रैल से जून के बीच 418 फ्लाइट्स पहुँची थी। यह संख्या 2024 के अप्रैल से जून के बीच बढ़ कर 786 हो गई। अप्रैल और जून के बीच लक्षद्वीप पहुँचने वाले पर्यटकों की संख्या 22,890 रही है। यह संख्या बीते वर्ष की इसी अवधि के दौरान 11,074 थी। यानी इसमें दोगुना उछाल देखा गया है।

मालदीव से भारतीय पर्यटकों के मोहभंग के पीछे सबसे बड़ा कारण वहाँ के राष्ट्रपति मोहम्मद मुइज्जू का भारत विरोधी रवैया है। मोहम्मद मुइज्जू 2023 में देश के राष्ट्रपति चुने गए थे। उन्होंने लगातार भारत विरोधी अभियान चुनाव में चलाए थे। जीतने के बाद भी उन्होंने राहत बचाव में लगे भारतीय सैनिकों को मालदीव से बाहर जाने को कहा था।

इसके अलावा प्रधानमंत्री मोदी के लक्षद्वीप का प्रचार करने के बाद मालदीव के मंत्रियों द्वारा की गई गाली गलौच का भी नकारात्मक प्रभाव पड़ा है। मालदीव के मंत्रियों के अभद्र बयानों के कारण भारत में बायकाट अभियान चलाया गया था। इसका सीधा असर अब दिख रहा है।

यूट्यूबर्स को ₹5-8 लाख, X यूजर्स को ₹2-4 लाख हर महीने: सोशल मीडिया इंफ्लुएंसर्स को ‘रोजगार’ देगी UP सरकार, जान लीजिए शर्तें

उत्तर प्रदेश की योगी आदित्यनाथ सरकार ने ऐलान किया है कि वो सोशल मीडिया इन्फ्लूएंसरों को माला-माल कर देगी। 8 लाख रुपए महीने तक सोशल मीडिया इन्फ्लूएंसर्स कमा सकेंगे। कमाई की मिनिमम लिमिट भी 2 लाख रुपए रखी गई है। खास बात ये है कि इस सोशल मीडिया इन्फ्लूएंसरों को सरकार का गुणगान करना होगा। सरकारी योजनाओं की जानकारी देनी होगी। वैसे, योगी सरकार ने प्रस्ताव में ये बात भी रखी है कि अगर किसी ने राष्ट्र विरोधी बातों का प्रसार किया, तो पैसे छोड़िए, जेल भी जाना पड़ सकता है।

मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक, यूपी कैबिनेट ने सोशल मीडिया पॉलिसी पास कर दी है। अब एक्स, यूट्यूब, फेसबुक और इंस्टाग्राम के इंफ्लूएंसर को फॉलोअर्स की संख्या के हिसाब से हर महीने पैसे मिला करेंगे। इसके बदले में उन्हें यूपी सरकार का प्रचार प्रसार करना पड़ेगा। इसके लिए बाकायदा रजिस्ट्रेशन भी किया जाएगा। हालाँकि यूपी सरकार को अगर कंटेंट गलत लगा, अभद्र लगा, राष्ट्रविरोधी लगा, तो फिर कानूनी कार्रवाई भी हो सकती है। यूपी से पहले राजस्थान में भी इस तरह की पॉलिसी आई थी। तब अशोक गहलोत वहाँ के मुख्यमंत्री थे।

इस पॉलिसी के तहत विज्ञापन का लाभ लेने के लिए कॉन्टेंट प्रोवाइडर को चार श्रेणियों बाँटा गया है। इसमें एजेंसी या फर्म को अलग-अलग प्लेटफॉर्म पर सब्सक्राइबर और फॉलोअर्स के आधार पर बाँटा गया है- 5 लाख, 4 लाख, 3 लाख और 30 हजार रुपए प्रति माह, जबकि यूट्यूब वीडियो शॉट और पॉडकास्ट भुगतान के लिए 8 लाख रुपए, 7 लाख रुपए, 6 लाख रुपए और 4 लाख रुपए रखा गया है।

यूपी सरकार द्वारा जारी प्रेस नोट

यूपी सरकार नई सोशल मीडिया पॉलिसी में राष्ट्र विरोधी कॉन्टेंट डालने पर तीन साल से लेकर उम्रकैद तक की सजा का प्रावधान है। हालाँकि यूपी सरकार का प्रस्ताव कैबिनेट में पास जरूर हुआ है, लेकिन विस्तार से इसकी पूरी जानकारी सामने नहीं आ पाई है। वैसे, अभी तक आईटी एक्ट की धारा 66E, और 66F के तहत कार्रवाई की जाती थी। इसके अलावा अभद्र एवं अश्लील सामग्री पोस्ट करने पर आपराधिक मानहानि के मुकदमे का भी सामना करना पड़ सकता है।

एक्सपोज होंगे दोहरे कैरेक्टर वाले सोशल मीडिया इन्फ्लूएंसर?

अगर आप सोशल मीडिया इस्तेमाल करते हैं, तो ये बात आपको भली भाँति पता होगी कि सोशल मीडिया इन्फ्लूएंसर्स की कोई राजनीतिक लाइन नहीं होती। जो लोग एंटरटेनमेंट के लिए कंटेंट बनाते हैं, उन्हें तो इस योजना का जमकर फायदा मिलेगा, लेकिन जो लोग राजनीतिक, सामाजिक कंटेंट के नाम पर पार्टी विशेष, व्यक्ति विशेष के लिए काम करते हैं, और मौका पाते ही दूसरी तरफ पलट जाते हैं, वो इस योजना से जरूर एक्सपोज हो जाएँगे।

यही नहीं, अब वो बैलेंस के नाम पर दोनों तरफ बैटिंग भी नहीं कर पाएँगे, क्योंकि इस गाइडलाइन का सीधा सा मतलब है कि आप इस तरफ हैं या उस तरफ। उस तरफ में समाज को तोड़ने वाली बातें, राजनीतिक दुराग्रह और कदाचार हमेशा दिखता रहा है। ऐसे लोग आम तौर पर ‘वरिष्ठ’ पत्रकार के तौर पर खुद की पहचान रखते हैं, लेकिन खुलेतौर पर वो समाज को तोड़ने वाली बातें फैलाते हैं। इस मामले में इन लोगों को ज्यादा सावधान रहने की जरूरत है। वैसे, हम इस कदम को इस नजरिए भी देख सकते हैं कि सोशल मीडिया पर यूपी को लेकर क्या कुछ कहा जा रहा है, उन सब पर तो नजर रहेगी ही, साथ ही राष्ट्र विरोधी तत्वों की पहचान में भी इस कदम से मदद मिल सकती है।

ममता बनर्जी के राज में ‘अभया’ के लिए न्याय माँगना भी गुनाह, BJP नेता के कार को घेर कर गोलीबारी; घटनास्थल से बम भी मिला: डरा रहे हैं बंगाल बंद के वीडियोज

पश्चिम बंगाल में भाजपा नेता प्रियांगु पांडेय पर हमला किया गया है। आरोप है कि उन पर 6-7 गोलियाँ चलाई गईं। पुलिस ने घटनास्थल पर बम के गोले भी बरामद किए हैं। बम से भी हमला किया गया था। उनकी कार का शीशा क्षतिग्रस्त हो गया है। साथ ही ड्राइवर को गोली लगी है। घटना नॉर्थ 24 परगना जिले की है। भाजपा ने राज्य में बंद का आह्वान किया है। 1 दिन पहले छात्रों ने ‘नबन्ना अभियान’ चलाया, जिसके तहत राज्य भर में विरोध प्रदर्शन हुए। RG Kar मेडिकल कॉलेज एवं अस्पताल में महिला डॉक्टर के बलात्कार एवं हत्या के खिलाफ ये विरोध प्रदर्शन हो रहा है।

नॉर्थ 24 परगना के भाटपारा में 2 भाजपा कार्यकर्ताओं को गोली मारे जाने की भी खबर है। हालाँकि, पुलिस का कहना है कि ‘एंग्लो-इंडिया जूट मिल’ के बाहर कुछ लोगों ने 2 व्यक्तियों की पिटाई की है और घायलों को अस्पताल में भर्ती कराया गया है। विधानसभा में नेता प्रतिपक्ष शुभेंदु अधिकारी ने फायरिंग का वीडियो डाला है। पूर्व सांसद अर्जुन सिंह ने भी कहा कि गोलीबारी की घटना हुई है। वीडियो में देखा जा सकता है कि एक व्यक्ति कार पर फायरिंग कर रहा है, अंदर से चीख की आवाजें आती हैं और लोग झुक जाते हैं

सौमिक भट्टाचार्य, राहुल सिन्हा और लॉकेट चटर्जी – इन 3 प्रमुख भाजपा नेताओं को पुलिस ने हिरासत में ले लिया है। 12 घंटे का ये बंद बुलाया गया है। वहीं प्रियांगु पांडेय ने बताया कि वो अर्जुन सिंह के आवास पर जा रहे थे, जेटिंग मशीन का इस्तेमाल कर रास्ता ब्लॉक कर दिया गया था। उन्होंने बताया कि लगभग 50 लोगों ने उनकी गाड़ी को घेरा, 7-8 बम फेंके गए और 6-7 राउंड गोलीबारी हुई। उन्होंने बताया कि TMC और पश्चिम बंगाल पुलिस ने मिल कर उनकी हत्या की साजिश रची थी, उनकी सुरक्षा हटा लिए जाने के बाद ये घटना हुई है।

अर्जुन सिंह ने कहा कि ACP की मौजूदगी में ये घटना हुई है। कोलकाता में भी बंद के कारण सड़कों पर कम गाड़ियाँ दिखीं। नदिया और मुंशीबाजार में टीएमसी कार्यकर्ताओं द्वारा भाजपा कार्यकर्ताओं पर हमले की खबर है। सियालदह रेलवे स्टेशन से ट्रेनों का परिचालन ठप्प रहा, ईस्टर्न रेलवे में 49 जगह प्रदर्शनकारी डटे रहे। नबन्ना अभियान में शामिल प्रदर्शनकारियों पर कार्रवाई के कारण भाजपा ने ये बंद बुलाया है। कई छात्रों और युवाओं को पुलिस ने गिरफ्तार कर लिया था।

53 करोड़ बैंक अकाउंट, ₹2 लाख करोड़ डिपॉजिट… 10 साल की हुई PMJDY, नरेंद्र मोदी ने PM बनते ही डाली वित्तीय क्रांति की नींव: जनधन के बारे में जानिए सब कुछ

प्रधानमंत्री जनधन योजना (PMJDY) के 10 साल बुधवार (28 अगस्त, 2024) पूरे हो गए हैं। देश के हर परिवार में एक बैंक खाता खोलने के उद्देश्य से चालू की गई यह योजना अपने लक्ष्य से भी आगे निकल चुकी है। आम नागरिकों तक वित्तीय सेवाएँ पहुँचाने के साथ ही बैंकों की सेहत सुधारने में भी इस योजना का बड़ा फायदा हुआ है। इस योजना के कारण कई स्तर पर होने वाला भ्रष्टाचार भी कम करने में मदद मिली है और सरकार सीधे जनता तक पहुँची है। पीएम मोदी ने इस योजना के 10 वर्ष पूरे होने पर इसके लाभार्थियों को बधाई दी है।

पीएम मोदी ने एक्स (पहले ट्विटर) पर लिखा, “आज देश के लिए एक ऐतिहासिक दिन है। इस अवसर पर मैं सभी लाभार्थियों को शुभकामनाएँ देता हूँ। इस योजना को सफल बनाने के लिए दिन-रात एक करने वाले सभी लोगों को भी बहुत-बहुत बधाई। जन धन योजना करोड़ों देशवासियों, विशेषकर हमारे गरीब भाई-बहनों को आर्थिक रूप से सशक्त बनाने और उन्हें सम्मान के साथ जीवन जीने का अवसर देने में सफल रही है।”

PMJDY ने 10 वर्ष में कई उपलब्धियाँ हासिल की हैं। चाहे देश की लगभग 50 करोड़ आबादी को बैंक खाते उपलब्ध करवाना हो या फिर लगभग 36 करोड़ लोगों को ATM कार्ड उपलब्ध करवाना हो, इस योजना के कारण देश में वित्तीय क्रान्ति आई है। PMJDY के शुरू होने से पहले देश की लगभग 60%-70% आबादी के पास बैंकिंग सुविधा नहीं थी। इस योजना के कारण उस तक आर्थिक आजादी पहुँच पाई है।

क्यों लाई गई PMJDY?

दरअसल, पीएम मोदी को पता था कि जब तक सरकारी सहायता लोगों तक सीधे नहीं पहुँचेगी तब तक भ्रष्टाचार कम नहीं होगा और मदद सीधे पहुँचे, इसके लिए लोगों के पास बैंक खाते होने जरूरी थे। देश की आजादी के लगभग 7 दशक पूरे होने और बैंकों के राष्ट्रीयकरण के बाद भी एक बड़ी आबादी के पास बैंक सुविधाओं का एक्सेस नहीं था। वर्ल्ड बैंक की एक रिपोर्ट बताती है कि वर्ष 2011 तक भारत की लगभग 70% आबादी बैंक खाते की सुविधा से महरूम थी।

देश की आबादी का बड़ा हिस्सा सिर्फ इसलिए खाता नहीं खुलवा सकता था, क्योंकि उसके पास उसमें जमा करने के लिए न्यूनतम राशि भी नहीं थी। यह इस राह में सबसे बड़ा रोड़ा था। जब देश में लोगों के पास खाते नहीं थे तो ATM जैसी सुविधाओं की बात ही छोड़ दी जाए। इसमें भी हमारा देश दुनिया के बाक़ी विकासशील देशों से कहीं पीछे थे।

साल दर साल बदली तस्वीर

पीएम मोदी की सरकार ने यह सभी समस्याएँ इसी एक योजना के जरिए सुलझाने की सोची और 28 अगस्त, 2014 को PMJDY शुरू हो गई। यह भी अनोखी बात थी कि कोई योजना ऐलान के मात्र दो सप्ताह के भीतर जमीन पर उतर आई हो। इसके लिए सरकारी बैंकों ने गाँवों में अपने कैम्प लगाए। बैंक मित्र नियुक्त किए गए, जो कि गरीब एवं वंचित तबके के लोगों को इसके बारे में जागरूक कर उनके खाते खुलवाते।

योजना के अंतर्गत सरकार ने खाता खोलने के लिए कोई न्यूनतम राशि रखने की शर्त हटा दी। सिर्फ आधार एवं अन्य पहचान पत्र पर बैंकों ने खाते खोले। PMJDY के शुरू ही हिट हो गई। गाँव-गाँव में लगे कैम्प असर दिखाने लगे। PMJDY की रिपोर्ट बताती है कि योजना चालू होने के एक महीने के भीतर ही 3.3 करोड़ से अधिक खाते खुले। इनमें से 1.8 करोड़ से अधिक खाते ग्रामीण इलाकों में खोले गए थे।

मात्र एक वर्ष में PMJDY के अंतर्गत 17.9 करोड़ खाते खोले गए। उससे भी बड़ी सफलता यह रही कि इनमें से 60% खाते ग्रामीण इलाकों में खोले गए थे। एक माह के भीतर ही देश के 1 करोड़ लोगों को रुपे ATM कार्ड भी दे दिए गए। एक साला पूरा होते-होते देश में इस योजना के अंतर्गत खोले जाने वाले खातों की संख्या लगभग 18 करोड़ पहुँच गई। इसमें से लगभग 11 करोड़ खाते ग्रामीण क्षेत्रों में खोले गए थे।

PMJDY की उपलब्धियाँ

वर्तमान स्थिति के अनुसार, PMJDY के अंतर्गत 53.13 करोड़ से अधिक खाते देश भर में खोले जा चुके हैं। इस योजना के तहत देश में 36 करोड़ से अधिक रुपे एटीएम जारी किए जा चुके हैं। इन कार्ड की खासियत यह है कि इन पर आमजनों को कोई चार्ज नहीं देना पड़ता, जबकि पहले विदेशी कम्पनियों के कार्ड पर सालाना फीस देनी पड़ती थी।

PMJDY पीएम मोदी

PMJDY खातों में औसतन ₹4000 से अधिक खाताधारक रख रहे हैं। यह दिखाता है कि देश में छोटी बचतें भी बढ़ रही हैं। अगस्त 2015 में इन खातों में औसतन ₹1015 ही जमा थे। इस हिसाब देखा जाए तो पिछले लगभग 10 वर्षों में छोटे बचतें 4 गुनी हो चुकी हैं। PMJDY का सीधा संबंध देश की डिजिटल भुगतान क्रान्ति UPI से भी है। PMJDY के तहत खोले गए खातों के कारण UPI लेनदेन में भी तेजी से बढ़ोतरी हुई है और यह गाँवों तक पहुँच सका है।

खाते खुले तो पहुँची सीधी मदद

PMJDY खातों का सबसे बड़ा लाभ देश की आम जनता को सरकारी लाभ लेने में रहा है। सरकार द्वारा लोगों के खाते में सीधे लाभ भेजने में बीते 10 वर्षों में खासी तेजी आई है। रिपोर्ट बताती है कि डायरेक्ट बेनिफिट ट्रांसफर (DBT) के तहत जहाँ 2013-14 में मात्र 10.8 करोड़ लोगों को सीधे सहायता राशि भेजी जा रही थी। वहीं, कोरोनाकाल के दौरान यह संख्या 98 करोड़ पहुँच गई। 98 करोड़ लाभार्थियों को अलग-अलग योजनाओं के तहत सहायता राशि उपलब्ध करवाई गई। यह इसीलिए संभव हो पाया, क्योंकि अब इन सबके पास बैंक खाता है।

PMJDY से बैंकों की भी सुधरी हालत

PMJDY से सिर्फ लोगों को ही नहीं, बल्कि बैंकों को भी फायदा हुआ है। लोगों द्वारा छोटी-छोटी बचत को बैंक में जमा करने के कारण अब बैंकों के पास अधिक पूँजी आ रही है। रिपोर्ट बताती है कि PMJDY के अंतर्गत खोले गए खातों में देश के लोगों ने ₹2 लाख करोड़ से अधिक की धनराशि जमा कर रखी है। इस धनराशि के आने से बैंकों को अपना संचालन करने में आसानी हुई है। 2014 से पहले बैकों की सेहत ख़ास अच्छी नहीं थी। खाताधारकों की संख्या बढ़ने और उनके लेनदेन के कारण इन बैंकों का लेनदेन भी बढ़ा है।

हर गिरफ्तारी के बाद रोकी ट्रायल, नई चार्जशीट के बाद नए सिरे से सुनवाई-गवाही: राजस्थान पुलिस की एक ‘भूल’, अजमेर सेक्स स्कैंडल में सजा सुनाने में लगे 32 साल

32 साल पहले हुए ‘अजमेर सेक्स कांड’ (Ajmer sex scandal) मामले में अभी कुछ दिन पहले फैसला आया तो इस केस की भयावहता पर दोबारा चर्चा होने लगी। लोग हैरान थे ये जानकर कि आखिर इतने बड़े मामले मे अब तक कार्रवाई क्यों नहीं हो पाई थी? और क्यों 100 से ज्यादा लड़कियों को इंसाफ मिलने में इतना समय लगा? गड़बड़ी कहाँ हुई, ढिलाई कहाँ बरती गई? चलिए आज पूरे केस में क्या-क्या कार्रवाई कब-कब हुई इसे समझते हैं, लेकिन पहले जान लेते हैं कि आखिर इस पूरे कांड की शुरुआत हुई कैसे।

अजमेर सेक्स कांड कैसे खुला

साल 1992 में अजमेर का यह मामला सुर्खियों में आया था जब शहर में अचानक लड़कियों की न्यूड तस्वीरें वायरल होना शुरू हुई थी। लड़कियाँ सुसाइड करने लगी थीं और पूरा शहर इन तस्वीरों को देख शर्मसार हो रहा था। केस में रसूखदारों के नाम आने लगे थे। पुलिस केस दबाने में जुटी थी। मगर, तब एक न्यूजपेपर में इस घटना को लेकर एक खबर छपी और हड़कंप मच गया। बात बिगड़ती देख राजस्थान की तत्कालीन सरकार भैरोसिंह शेखावत ने जाँच को सीआईडी-सीबी को सौंपा।

कैसे हुई थी अजमेर सेक्स कांड की शुरुआत

पड़ताल हुई तो हर पहलु चौंकाने वाला था। सेक्स कांड के आरोपितों के तार दरगाह के खादिमों से जुड़ते मिले। पूरी साजिश रचने वालों ने सबसे पहले एक बिजनेसमैन के बेटे को निशाना बनाया था। उन्होंने उस लड़के से दोस्ती करके उसकी तस्वीरें उतारी थी और बाद में अपनी गर्लफ्रेंड को पोल्ट्री फार्म पर लाने को कहा था। लड़का जब पोल्ट्री फार्म पर गर्लफ्रेंड लाया तो वहाँ उसका भी रेप हुआ और न्यूड तस्वीरें निकाली गईं। इसके बाद लड़की से कहा गया कि वो अपनी सहेलियों को वहाँ लाए वरना उसकी फोटो हर जगह होगी।

लड़की भी डरकर उनकी बात मान बैठी। इसके बाद फार्म पर आने वाली हर लड़की के साथ रेप हुआ, दूसरों से रेप करवाया गया, उनके न्यूड फोटोशूट हुए और फिर उन्हें उसी के सआधार पर ब्लैकमेल करके अलग-अलग जगह बुलाया जाने लगा। मामले में बड़ा मोड़ तब आया जब आरोपितों ने फोटो को डेवलप कराने के लिए उन्हें लैब भेजा और लैब कर्मचारियों ने उन्हें बेचना शुरू कर दिया। लड़कियों को ब्लैकमेल करना शुरू कर दिया। हर जगह सर्कुलेट करना शुरू कर दिया।

कौन-कौन था शामिल?

मामले में 18 आरोपितों का नाम उजागर हुआ जिसमें तत्कालीन यूथ कॉन्ग्रेस के अध्यक्ष फारूख चिश्ती, उपाध्यक्ष नफीस चिश्ती, ज्वाइंट सेक्रेट्री अनवर चिश्ती का नाम शामिल था। इनके नाम इस प्रकार हैं- हरीश तोलानी (कलर लैब मैनेजर), फारुख चिश्ती, नफीस चिश्ती (उपाध्यक्ष), अनवर चिश्ती (ज्वाइंट सेक्रेट्री), पुरुषोत्तम, इकबाल भाटी, कैलाश सोनी, सलीम चिश्ती, सोहैल गनी, जमीन हुसैन, अल्मास महाराज, इशरत अली, मोइजुल्लाह उर्फ पूतन इलाहाबादी, परवेज अंसारी, नसीम उर्फ टारजन, महेश लुधानी, शम्सू उर्फ माराडोना, जहूर चिश्ती, का नाम सामने आया।

चार्जशीट दायर करते समय हुई गलती

अखबार में खबर छपने के बाद जब जाँच एजेंसियों ने इसमें पड़ताल शुरू की तो 12 नाम मुख्य रूप से सामने आए। उसके बाद 30 नवंबर 1992 में इस मामले में जाकर पहली 8 लोगों के खिलाफ चार्जशीट 173 सीआरपीसी के तहत दायर हुई। हीं बाकी चार आरोपितों के खिलाफ मामले में चार अलग-अलग चार्जशीट दायर हुए।

केस में देरी का कारण

दैनिक भास्कर की रिपोर्ट में विशेषज्ञों से की गई बात से पता चलता है कि ये मामला 32 साल तक इसलिए खिंचा क्योंकि जब नई चार्जशीट दायर होती थी तो पहले से चले ट्रायल को रोककर फिर से ट्रायल शुरू करना पड़ता था। अगर 173 सीआरपीसी की जगह 299 सीआरपीसी में चार्जशीट दायर होती तो ऐसा नहीं होता।

इस केस में जितनी देरी हो रही थी आरोपित उतने बेखौफ थे। उन्हें पता था कि हर बार नई चार्जशीट दायर होनी है और हर बार केस नए सिरे से देखा जाएगा। पुलिस की भूल थी या कुछ और लेकिन साल 2003 तक इस केस के 7 आरोपित नफीस चिश्ती , इकबाल भाटी, सलीम चिश्ती, सोहैल गनी, जमीर हुसैन, अल्मास महाराज और नसीम उर्फ टारजन फरार रहे। बाद में जाकर ये पुलिस के हत्थे चढ़े।

साल 2003 में नफीस चिश्ती और नसीम टार्जन के पकड़े जाने के बाद इनके खिलाफ 2004 में चार्जशीट दाखिल हुई। 2005 तक 52 गवाहों के बयान दर्ज कराए गए, लेकिन उसके बाद केस के एक और आरोपित इकबाल भाटी मुबंई से गिरफ्तार हो गया। अब जिस समय 52 गवाह के बयान दर्ज हो चुके थे उसके बाद भी पुलिस को नई चार्जशीट दाखिल करनी पड़ी। दोबारा से गवाहों को कोर्ट में बुलाया गया और बयान दर्ज हुए।

20 गवाहों के बयान दर्ज होने के बाद साल 2012 में सलीम चिश्ती को पुलिस ने पकड़ा और जाकर गिरफ्तारी हुई। वहीं जमीन हुसैन भी अग्रिम जमानत लेकर अमेरिका से भारत लौटा। इस तरह एक बार फिर ट्रायल रुका और नफीस चिश्ती, नसीम, इकबाल भाटी, सलीम चिश्ती और जमीर हुसैन के खिलाफ पुलिस ने फिर बयान दर्ज करने शुरू किए। 69 गवाहों की बयान दर्ज होने के बाद 2018 में फिर सोहैल गनी को पुलिस ने इस मामले में गिरफ्तार किया और इस तरह एक और बार पीछे की गई सारी मेहनत पर पानी फिर गया।

नई चार्जशीट दायर हुई नया ट्रायल हुआ। फिर 104 गवाहों ने कोर्ट में अपना बयान दर्ज कराया और इस तरह पूरा मामला 2024 तक खिंचता ही गया। दैनिक भास्कर की रिपोर्ट के मुताबिक, विशेषज्ञों ने जो इस केस के लंबे खिंचने के बारे में बताया वो यही था कि आरोपितों को भगौड़ा मानते हुए 173 सीआरपीसी की बजाय 299 के तहत पेश करती तो शायद केस इतना लंबा न खिंचता। 173 सीआरपीसी में केस दर्ज होने के कारण बार-बार गवाही लेनी पड़ी। अगर केस 299 के तहत दर्ज होता तो ट्रायल भी जल्दी पूरा होता और फैसला भी आ जाता। 299 crpc का अर्थ यही होता है कि मामले में साफ किया जाए कि आरोपित फरार हैं और उन्हें तत्काल गिरफ्तार करने की संभावना नहीं है। ऐसे में उनकी अनुपस्थिति में गवाहों के बयान दर्ज हों।

32 साल में आए उतार-चढ़ाव

बता दें कि इस केस में इन 32 सालों में कई उतार-चढ़ाव देखने को मिले। कहने को पहली बार सजा 8 आरोपितों को 1998 में मिल गई थी। 18 मई 1998 को जिला जज ने कैलाश सोनी, हरीश तोलानी, इशरत अली, मोइजुल्लाह उर्फ पूतन इलाहाबादी, परवेज अंसारी, महेश लुधानी, अनवर चिश्ती और शम्सू उर्फ माराडोना को उम्रकैद की सजा दी थी लेकिन इन आरोपितों ने हाईकोर्ट में अपील की और 2001 में 4 आरोपितों महेश लुधानी, कैलाश सोनी, हरीश तोलानी और परवेज अंसारी को बरी कर दिया गया और इशरत अली, मोइजुल्लाह उर्फ पूतन इलाहाबादी, अनवर चिश्ती और शम्सू उर्फ माराडोना की सजा बरकरार रखी।

जिनकी सजा बरकरार रही उन्होंने 2003 में सुप्रीम कोर्ट में अपील की जहाँ उनकी सजा 10 साल कम कर दी गई और इस तरह 10 साल की सजा काटने के बाद वो सब रिहा हो गए। केस का मुख्य आरोपित फारूख चिश्ती पहले ही मानसिक बीमारी का हवाला देकर बचा हुआ था, लेकिन 2007 में उसे उम्रकैद की सजा हो गई। फिर फारूख चिश्ती भी हाईकोर्ट गया और कोर्ट ने इस बात पर गौर करते हुए कि उसे उसे सजा काटते हुए 11 साल हो गए थे इसलिए उसे भी छोड़ दिया गया। अब 20 अगस्त को इस मामले में नफीस चिश्ती, नसीम उर्फ़ टार्जन, सलीम चिश्ती, इकबाल भाटी, सोहेल गनी और सैयद जमीर हुसैन को दोषी ठहराया गया है और इन्हें सजा हुई।

ऐसा नहीं है कि अब इस मामले में हर आरोपित को सजा मिल गई हो। केस का एक आरोपित अल्मास महाराज आज भी फरार है। कहा जाता है कि वो अमेरिका में रहता है। उसके खिलाफ इंटरपोल ने रेड कॉर्नर नोटिस इश्यू कर रखा है। भविष्य जब कभी वो गिरफ्तार होगा तो फिर से वही समस्या देखने को मिलेगी जो इतने समय तक थी। यानी दोबारा नई चार्जशीट और नया ट्रायल। इस केस को इतना समय बीत गया है कि पीड़िताएँ थक चुकी हैं।

रेलवे ट्रैक पर कहीं पत्थर, कहीं सरिया… संयोग नहीं है ये: पाकिस्तान में बैठे आतंकी का वीडियो- छेड़ो ‘फिदायीन जंग’, ट्रेन-पुलिस-हिंदू नेताओं को करो टारगेट

हाल में कई ऐसी घटनाएँ सामने आई है जिसके बाद ट्रेनों को बेपटरी करने की साजिश रचे जाने का अंदेशा जताया जा रहा है। पाकिस्तान में बैठे आतंकी फरहतुल्लाह गोरी के एक वीडियो से यह अंदेशा और गहरा गया है। इसमें उसने भारतीय रेल, पाइपलाइन, पुलिस और हिंदू नेताओं को निशाना बनाते हुए ‘फिदायीन जंग’ छेड़ने के लिए उकसाया है।

मीडिया रिपोर्ट्स के अनुसार, पाकिस्तान में रहने वाले आतंकी फरहतुल्लाह गोरी ने यह काम स्लीपर सेल से करने को कहा है। आतंकी गोरी ने कहा है कि प्रवर्तन निदेशालय (ED) आतंक की कमर तोड़ रहा है। इसका जवाब देने के लिए उसने देश भर में इन्फ्रा पर हमला करने को कहा है। इस संबंध में एक वीडियो सुरक्षा एजेंसियों को मिला है।

सुरक्षा एजेंसियों को मिले वीडियो में गोरी बता रहा है कि कैसे ट्रेनों में अलग-अलग तरीके से धमाके किए जा सकते हैं। वह इसके लिए प्रेशर कुकर जैसी चीजों से बम बनाने का भी आईडिया दे रहा है। गोरी अभी पाकिस्तान की खुफिया एजेंसी ISI की शह पर वहीं रह रहा है और भारत के खिलाफ साजिश रच रहा है।

गोरी का कहना है कि भारत में NIA और ED लगातार उनकी कमर आर्थिक रूप से तोड़ रही है। NIA और ED आतंकियों और उनके मददगारों की सम्पत्ति जब्त कर रही है, इस कारण गोरी काफी बौखलाया हुआ है। उसने कहा है कि इसका जवाब भारत में दिया जाएगा। उसने इसे फिदायीन जंग का नाम दिया है।

ट्रेनों को निशाने पर लेने की बात के बाद भारतीय एजेंसियाँ हरकत में आ गई हैं और सतर्क हो चुकी हैं। बीते कुछ समय में रेल दुर्घटनाओं में बढ़ोतरी भी देखी गई है, कई जगह रेल पटरियों पर अवरोध रख कर रेल दुर्घटना करवाने का प्रयास किया गया है। राजस्थान से बीते सप्ताह एक ऐसी ही घटना सामने आई थी।

राजस्थान के पाली में जोधपुर से अहमदाबाद जाने वाली वन्दे भारत ट्रेन के आने से पहले 22 अगस्त को सीमेंट का बड़ा ब्लॉक रखा गया था वन्दे भारत ट्रेन इस ब्लॉक से टकरा भी गई। इसके बाद लोको पायलट ने इमरजेंसी ब्रेक लगा दिए और दुर्घटना नहीं हुई। इसके अगले दिन इससे बड़े 2 ब्लॉक रख दिए गए ताकि ट्रेन पलट जाए।

हालाँकि, इस दिन रेल कर्मचारियों ने इसे पहले देख लिया और पटरी पर से हटा दिया। इसी दौरान उत्तर प्रदेश के अलीगढ़ में अहसान नाम के एक युवक पटरी पर एक मोटरसाइकिल का एक एलाय रिम रख कर उसे पलटने की साजिश रची। अहसान के रखे पहिए से एक मालगाड़ी टकरा भी गई थी। हालाँकि, इमरजेंसी ब्रेक लगने से हादसा टल गया।

फरहतुल्लाह गोरी ने ट्रेन और लॉजिस्टिक चेन को निशाना बनाने के अलावा आतंकियों से कहा है कि वह हिन्दू नेताओं और पुलिस वालों की भी हत्या करें। उसने कहा है कि इन नेताओं और पुलिस वहाँ निशाना बनाए जहाँ वह कमजोर हैं। इसके लिए उसने नई तरकीब अपनाने की बात की है।

भारत में ट्रेन हादसों करने के लिए ऐलान करने वाला फरहतुल्लाह गोरी हाल ही में हुए बेंगलुरु रामेश्वरम कैफे ब्लास्ट का मास्टरमाइंड है। इसके अलावा वह गुजरात के अक्षरधाम मंदिर हमले में भी जुड़ा हुआ था। उसका मुख्य काम भारत से मुस्लिम युवाओं को भर्ती करके उन्हें आतंकी बनाना था। वह कई आतंकी मॉड्यूल का हैंडलर है।

राह चलती महिलाओं से छेड़खानी करता था छोटी मस्जिद का आरिफ लंगड़ा, हिंदू युवती के साथ अभद्रता के बाद घर पर पथराव: रायपुर के कोटा में बवाल

छत्तीसगढ़ के रायपुर में एक मुस्लिम युवक ने एक हिन्दू युवती के साथ छेड़छाड़ की। युवती ने छेड़छाड़ के बाद जब विरोध किया तो युवक ने उसके साथ अभद्रता भी की। इसके बाद आसपास के लोग आक्रोशित हो गए और उन्होंने मुस्लिम युवक के विरोध में हंगामा किया। उन्होंने उसकी गिरफ्तारी की माँग की।

मीडिया रिपोर्ट्स के अनुसार, रायपुर के सरस्वती नगर थाना क्षेत्र में कोटा इलाके में यह घटना हुई। यहाँ छोटी मस्जिद के पास रहने वाले एक युवक आरिफ लंगडा ने रविवार (25 अगस्त, 2024) को एक युवती के साथ छेड़छाड़ की। युवती ने इसका प्रतिरोध किया तो आरिफ अभद्रता पर उतर आया।

युवती ने इसके बाद शोर मचाया तो आसपास के लोग इकट्ठा हो गए। आरिफ पहले भी महिलाओं के साथ लगातार छेड़छाड़ करता रहा है। पीड़ित युवती के परिजनों ने आरिफ के घर में इस बात की शिकायत की तो उनकी सुनने के बजाय उन्होंने हमला कर दिया।

आरिफ के परिजनों ने छेड़छाड़ का विरोध करने वालों पर लाठी डंडों से हमला किया। वह शिकायत करने वाले लोगों के विरुद्ध हिंसक हो गए। इसके बाद दूसरा पक्ष भी सामने आ गया। आरिफ के विरुद्ध प्रदर्शन इसके बाद लोगों ने उसके घर का घेराव कर प्रदर्शन किया। आक्रोशित लोगों ने आरिफ के परिजनों की हिंसा का जवाब भी दिया।

आरिफ का विरोध करने वाले इस मामले में तुरंत पुलिस एक्शन की माँग कर रहे थे। उन्होंने सरस्वती नगर पुलिस थाने पर जाकर भी प्रदर्शन किया। लोगों का कहना था कि आरिफ को तुरंत गिरफ्तार किया जाए। इसके बाद पुलिस ने यहाँ मौके पर पहुँच कर मोर्चा संभाला और लोगों को शांत किया।

पुलिस ने आरोपित आरिफ को गिरफ्तार कर लिया है। पुलिस ने बताया कि पहले मामला शांत हो गया था लेकिन बाद में बवाल चालू हो गया। सरस्वती नगर पुलिस थाने के प्रभारी ने बताया है कि अब कोटा इलाके में शान्ति है और लोगों को समझा बुझा दिया गया है। आरोपित पर FIR दर्ज करके उसे जेल भेज दिया गया है।

‘न भिंडरावाले और न किसी सिख ने कभी माँगा खालिस्तान’: कंगना रनौत को SGPC का नोटिस- सीन हटाओ, माफी माँगो; ‘इमरजेंसी’ के खिलाफ हाई कोर्ट में याचिका

बॉलीवुड अभिनेत्री कंगना रनौत की ‘इमरजेंसी’ फिल्म रिलीज होने से पहले बवाल मचा हुआ है। शिरोमणि गुरुद्वारा प्रबंधक कमेटी ने फिल्म में सिखों के चरित्र और इतिहास को गलत तरह पेश करने का आरोप लगाते हुए मेकर्स को कानूनी नोटिस भेजा है। इसमें कहा गया है कि कभी किसी सिख ने खालिस्तान नहीं माँगा चाहे वो भिंडरावाले ही क्यों न हो।

जानकारी के मुताबिक शिरोमणि गुरुद्वारा प्रबंधक कमेटी द्वारा भेजे गए नोटिस में गए कहा गया कि जरनैल सिंह भिंडरावाला और सिख समुदाय के किसी अन्य व्यक्ति ने कभी भी खालिस्तान की माँग नहीं की। फिल्म में ऐसे सीन दिखाए गए हैं जिनमें सिख पोशाक में कुछ किरदारों को असॉल्ट राइफल में से लोगों पर गोली चलाते दिखाया गया है।

एसजीपीसी के कानूनी सलाहकार एडवोकेट अमबीर सिंह सियाली द्वारा भेजे गए नोटिस में कहा गया कि कहीं कोई ऐसा सबूत या रिकॉर्ड नहीं है जो साबित करे कि भिंडरावाले ने ऐसे शब्द कहे। नोटिस में फिल्म निर्माताओं से ये भी कहा गया है कि वो सिख विरोधी भावना वाले दृश्यों को फिल्म से हटाएँ और सिख समुदाय से माफी माँगें।

इमरजेंसी फिल्म के रिलीज से पहले एसजीपीसी के नोटिस के अलावा कोर्ट में एक जनहित याचिका भी दायर की गई है। ये याटिका पंजाब और हरियाणा हाईकोर्ट में दायर हुई है वो भी इस माँग के साथ कि इमरजेंसी फिल्म को बैन किया जाना चाहिए।

लाइव लॉ की रिपोर्ट के मुताबिक, इस याचिका को दो अमृतधारी सिखों ने दायर किया है। याचिका में कहा गया है कि इस फिल्म में ऐतिहासिक पहलुओं से छेड़छाड़ हुई है। ये सिख समुदाय और हिंदू समुदाय के लोगों के बीच घृणा फैलाएगी। इसके अलावा इस याचिका में कहा गया कि फिल्म में सिख समुदाय को गलत तरीके से दिखाया गया है, इसलिए न सिर्फ इस फिल्म के रिलीज पर रोक लगाई जाए बल्कि सेंसर बोर्ड ने इस फिल्म को पास कर जो सर्टिफिकेट जारी किया है उसे भी रद्द किया जाए।

याचिका में उसी सीन पर आपत्ति जताई गई है जिसमें कुछ लोग सिख पोशाक में फायरिंग करते दिख रहे हैं। कोर्ट में इस याचिका की पैरवी अमृतधारी सिखों की ओर से ईमान सिंह खारा और दीपेंद्र सिंह वर्क करेंगे।

बता दें कि इमरजेंसी फिल्म की फिलहाल रिलीज डेट 6 सितंबर 2024 निर्धारित हुई है। लेकिन, इसका ट्रेलर आने के बाद से ही इस फिल्म को लेकर बवाल मचा हुआ है। इस बीच कंगना रनौत को जान से मारने की धमकियाँ भी मिल रही हैं। दो दिन रहले विक्की थॉमस सिंह (एक ईसाई से निहंग) बने व्यक्ति ने वीडियो जारी कर कहा था कि अगर खालिस्तानी नायक जरनैल सिंह भिंडरावाले को आतंकवादी के रूप में दर्शाया गया तो याद रखें कि इंदिरा गाँधी के साथ क्या हुआ था? सतवंत सिंह और बेअंत सिंह कौन थे?