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‘चिकन नेक बंद कर पूर्वोत्तर का रास्ता काटेंगी, आतंकियों को बसाएँगी’: BJP नेता ने कहा- सत्ता के लिए कुछ भी कर सकती हैं ममता बनर्जी, राज्यपाल को लिखी चिट्ठी

केंद्रीय मंत्री और पश्चिम बंगाल भाजपा अध्यक्ष सुकांत मजूमदार ने मुख्यमंत्री ममता बनर्जी पर कोलकाता में हिंसा भड़काने का आरोप लगाया है। उन्होंने राज्यपाल सीवी आनंद बोस को पत्र लिखकर शिकायत की है। वहीं, बंगाल भाजपा के प्रदेश उपाध्यक्ष सौमित्र खान ने कहा कि सीएम ममता बनर्जी 2026 तक सिलीगुड़ी में भारत के ‘चिकन नेक’ को बंद करके पूर्वोत्तर भारत के रास्ते को बंद कर देंगी।

अपने पत्र में मजूमदार ने लिखा है, “हाल ही में कोलकाता में टीएमसी की छात्र शाखा को संबोधित करते हुए मुख्यमंत्री ममता बनर्जी द्वारा दिए गए बयानों को आपके ध्यान में लाने के लिए यह पत्र लिख रहा हूँ। उन्होंने यह कहते हुए सभा में शामिल लोगों को उकसाया कि ‘मैंने कभी बदला नहीं लिया, लेकिन अब जो करना है, करो’।”

मजूमदार ने अपने पत्र में आगे लिखा है, “राज्य के सर्वोच्च पद से बदला लेने की राजनीति का यह खुला समर्थन चिंताजनक है। इसके अलावा, उन्होंने भड़काऊ टिप्पणी भी की, जिसमें कहा गया कि ‘याद रखें, अगर बंगाल जलता है तो असम, बिहार, झारखंड, ओडिशा और दिल्ली भी जलेंगे’। यह संवैधानिक पद पर बैठे व्यक्ति की आवाज नहीं है, यह एक राष्ट्र विरोधी का बयान है।”

सुकांत मजूमदार ने आगे कहा कि मुख्यमंत्री ममता बनर्जी के ये बयान धमकी देने, लोगों को उकसाने, हिंसा भड़काने और लोगों के बीच घृणा का प्रदर्शन है। उन्होंने कहा कि ममता बनर्जी इस पद पर बने रहने के योग्य नहीं हैं। उन्हें तुरंत अपने पद से इस्तीफा दे देना चाहिए। पत्र में उन्होंने राज्यपाल से उचित कदम उठाने का आग्रह किया है।

पश्चिम बंगाल की सीएम ममता बनर्जी के बयान पर बीजेपी सांसद और पश्चिम बंगाल बीजेपी के उपाध्यक्ष सौमित्र खान ने भी चिंता जाहिर की है। उन्होंने कहा, “मैं पश्चिम बंगाल में रहता हूँ और मुझे डर है कि अगर भारत सरकार इस पर ध्यान नहीं देती है तो ममता बनर्जी साल 2026 तक सिलीगुड़ी में भारत का चिकन नेक कहलाने वाले हिस्से को बंद कर देंगी।”

सौमित्र खान ने आगे कहा, “ममता बनर्जी ऐसा करके पूर्वोत्तर भारत का रास्ता बंद कर देंगी… वह राजनीति के लिए कुछ भी कर सकती हैं… वह अपनी राजनीति के लिए वहाँ आतंकवादियों और अपराधियों को भी जगह दे सकती हैं। न्यायालय और भारत सरकार को इस पर ध्यान देना चाहिए, अन्यथा भारत खतरे में पड़ जाएगा।”

पत्रकार का सवाल- आपकी रिहाई पर तेजस्वी यादव ने कहा है… अनंत सिंह का जवाब- खस्सी-पठरू दिन भर बकर-बकर करता रहता है

बिहार के बाहुबली अनंत सिंह ने राजद नेता और पूर्व उपमुख्यमंत्री तेजस्वी यादव पर हमला बोला है। अनंत सिंह ने कहा है कि तेजस्वी यादव और उनके पिता लालू यादव ने घोटाले किए हैं। उन्होंने कहा है कि जनता जानती है किसका बाप कितने दिन जेल में रह कर आया है। अनंत सिंह ने तेजस्वी यादव के हमलों को ‘खस्सी-पठरू की बकर-बकर’ बताया है।

तेजस्वी के मुख्यमंत्री नीतीश कुमार की सरकार में पैसे लेकर ट्रांसफर पोस्टिंग होने के आरोपों के बाद यह हमला अनंत सिंह ने बोला। अनंत सिंह ने पत्रकारों के सवालों का जवाब देते हुए कहा, “तेजस्वी के बाप ने घोटाला किया है, तेजस्वी ने घोटाला किया है। जनता जानती है कि किसका बाप कितने दिन जेल में रह कर आया है। मात्र कहने से नहीं होगा, जनता जानती है।”

आगे उन्होंने कहा, “आगे हम चुनाव लड़ने वाले हैं। नीतीश कुमार के साथ मजबूती के साथ राजनीति होगी। नीतीश कुमार जी जब तक जीवित रहेंगे मुख्यमंत्री रहेंगे।” अनत सिंह ने कहा कि वह अब तेजस्वी का नाम सुनने को भी तैयार नहीं है और वह खस्सी-पठरु की तरह बक-बक करते हैं।

उन्होंने कहा कि तेजस्वी यादव किसी लायक नहीं है जो उन पर हमला बोलें। अनत सिंह ने यह बयान हत्या के एक मामले में कोर्ट से बरी होने के बाद दिया। उन्होंने बताया कि उनका न्याय व्यवस्था में पूरा विश्वास है और उनको न्याय मिला है। उन्हें कोर्ट ने रामजन्म यादव हत्याकांड मामले में राहत दी है।

अनंत सिंह यह बयान तेजस्वी यादव के बीते दिनों में नीतीश सरकार पर किए गर तीखे हमलों के बाद दिया है। हाल ही में तेजस्वी यादव ने आरोप लगाया था कि बिहार के भीतर IAS-IPS अफसरों की पोस्टिंग में भ्रष्टाचार होता है और इसीलिए अच्छे अफसर बिहार में नहीं रुकते। उन्होंने मुख्यमंत्री नीतीश कुमार पर भी आरोप लगाए थे। अगले चुनावों में अनंत सिंह अपनी दावेदारी पेश कर रहे हैं। वर्तमान में उनकी पत्नी मोकामा से विधायक हैं। इससे पहले 4 बार विधायक रहे हैं।

बनभूलपुरा हिंसा मामले में HC ने 50 को दी जमानत: नैनीताल पुलिस ने चार्जशीट नहीं फाइल करने के दावों को नकारा

हल्द्वानी के बनभूलपुरा क्षेत्र में 8 फरवरी को हुई हिंसा और आगजनी के मामले में हाई कोर्ट ने 29 अगस्त को 6 आरोपित महिलाओं समेत 50 लोगों की जमानत मंजूर कर ली है। इस मामले में पहले कहा गया था कि ये जमानत पुलिस द्वारा समय से चार्जशीट जमा न करने के कारण हुई है। हालाँकि बाद में नैनीताल पुलिस ने इस बाबत स्पष्टीकरण दिया और इन खबरों को फेक न्यूज बताया।

नैनीताल पुलिस ने बताया, बनभूलपुरा हिंसा से संबंधित कुछ आरोपितों की जमानत होने पर कुछ सोशल मीडिया एवं समाचार पत्रों में तथ्यहीन और भ्रामक खबरें फैलाई गई कि पुलिस ने समय से चार्जशीट नहीं फाइल की इसी वजह से आरोपितों की जमानत हुई। हालाँकि सच ये है कि यूएपीए के सेक्शन 43डी के अंतर्गत विवेचक को आवश्यकता अनुसार 90 दिन के पश्चात रिमांड अवधि बढ़ाने हेतु आवेदन करने का अधिकार है, उसी को मानते हुए अधीनस्थ न्यायालय द्वारा रिमांड की अवधि 90 दिन से 180 दिन की गई थीं। पुलिस ने 180 दिन से पूर्व चार्जशीट फाइल भी कर दी थी। अत: पुलिस द्वारा समय से चार्जशीट फाइल न करने की खबरें असत्य और भ्रामक हैं।

बता दें कि पहले रिपोर्ट्स में कहा गया था कि हिंसा केस के एक आरोपित बनभूलपुरा निवासी गुलजार सहित 50 अन्य ने जमानत की याचिका लगाते हुए कोर्ट में कहा कि पुलिस की ओर से उनके विरुद्ध 90 दिन के भीतर न तो चार्जशीट दाखिल की गई है और न ही रिमांड बढ़ाने का कारण बताया गया और जमानत भी खारिज कर दी गई।

इसी के बाद मीडिया में ये चला कि पुलिस ने चार्जशीट फाइल नहीं की है। हालाँकि पुलिस की सफाई आने के बाद रिपोर्टें अब अपडेट कर दी गई हैं। रिपोर्ट्स में बताया गया कि सरकारी पक्ष ने कोर्ट को बता दिया था कि पुलिस के पास पर्याप्त आधार और कारण हैं कि रिमांड क्यों बढ़ाई गई।

उल्लेखनीय है कि इस वर्ष फरवरी माह में बनभूलपुरा में अवैध मदरसे और नमाज स्थल को तोड़ने को लेकर 8 फरवरी को काफी बवाल हुआ था। उपद्रवियों ने पुलिस , प्रशासन व नगर निगम की टीम पर पथराव कर दिया था और थाने को भी आग के हवाले कर दिया था। घटना में पाँच लोगों की मौत हो गई थी।

पुलिस ने जाँच के बाद मामले में 107 लोगों को गिरफ्तार किया था। इसमें गुलजार, फुरकीन, मोहम्मद वसीम, शहराज हुसैन, सरीम मिकरानी, मो फैजान, नबी हसन, जीशान, मो फिरोज, मो उजैर, हाजरा बेगम, शहनाज, सोनी, शमशीर, अजीम, शाहबुद्दीन, मो आसिफ, आदिल खान, हुकुम रजा, शाहिल अंसारी, अरबाज, अहमद हसन, माजिद, जीशान, मुजम्मिल, रईस अहमद, गुलजार, मो शाद, मो फरीद, जावेद, शरीफ व मो ईश्तकार आदि का नाम शामिल था। वहीं केस को आईपीसी की धारा 147, 148, 149, 120 बी, 307, 332, 353, 427, 435, उत्तराखंड प्रिवेंशन आफ डैमेज पब्लिक प्रापर्टी, आर्म्स एक्ट आदि के तहत प्राथमिकी दर्ज की थी।

हर मंदिर को ₹10 लाख, पुजारियों को हर महीने ₹15 हजार: आंध्र प्रदेश में सत्ता बदलते ही ‘तुष्टिकरण’ बंद, बोले CM चंद्रबाबू नायडू- मंदिरों में गैर हिंदुओं को नहीं मिले नौकरी

आंध्र प्रदेश के मुख्यमंत्री चंद्रबाबू नायडू ने कहा है कि राज्य के मंदिरों में केवल हिंदुओं को ही काम पर रखा जाएगा। उन्होंने मंदिरों के पुजारियों के वेतन में 50 प्रतिशत की वृद्धि की घोषणा की है। इसके साथ ही ‘नाई ब्राह्मणों’ (मंदिरों में काम करने वाले नाई) के लिए न्यूनतम मासिक वेतन 25,000 रुपए दिया जाएगा। वेद विद्या प्राप्त करने वाले बेरोजगार युवाओं को भी 3,000 रुपए मासिक भत्ता दिया जाएगा।

मुख्यमंत्री चंद्रबाबू नायडू ने राज्य भर के विभिन्न मंदिरों में काम कर रहे 1683 अर्चकों (पुजारियों) का वेतन 10,000 रुपए से बढ़ाकर 15,000 रुपए महीना करने की घोषणा की है। इसके अलावा, राज्य सरकार ने ‘धूप दीप नैवेद्यम योजना’ के तहत छोटे मंदिरों को दी जाने वाली वित्तीय सहायता को 5,000 रुपए से बढ़ाकर 10,000 रुपए प्रति माह करने का निर्णय लिया है।

बैठक के दौरान यह निर्णय लिया गया कि मंदिर ट्रस्ट में दो और बोर्ड सदस्य जोड़े जाएँगे। बता दें कि 20 करोड़ रुपए या उससे अधिक राजस्व वाले मंदिरों के ट्रस्ट बोर्ड में 15 सदस्य होते हैं। अब यह संख्या बढ़ाकर 17 की जाएगी। इसके अलावा, यह भी स्पष्ट किया गया कि ट्रस्ट बोर्ड में एक ब्राह्मण और एक नाई ब्राह्मण सदस्य होंगे। एनडीए ने चुनाव से ये पहले वादा किया था।

बैठक के दौरान सीएम नायडू ने कहा, “हिंदू मंदिरों में गैर-हिंदुओं को कोई नौकरी नहीं दी जानी चाहिए। आंध्र प्रदेश में 1,110 मंदिरों के लिए ट्रस्टी नियुक्त किए जा रहे हैं।” नायडू ने यह भी घोषणा की कि वर्तमान में अवैध रूप से कब्जा की गई 87,000 एकड़ मंदिर भूमि को कानूनी माध्यम से फिर से प्राप्त किया जाएगा। उन्होंने यह भी कहा कि राज्य में जबरन धर्मांतरण नहीं होना चाहिए।

सीएम नायडू ने घोषणा की कि श्रीवाणी ट्रस्ट के तहत प्रत्येक मंदिर को 10 लाख रुपए दिए जाएँगे। यदि आवश्यक हुआ तो उन कार्यों की समीक्षा पूरी होने के बाद और अधिक धनराशि प्रदान की जाएगी। अधिकारियों से कहा गया कि वे उन मंदिरों के लिए प्रस्ताव भेजें, जहाँ 10 लाख रुपए से अधिक की आवश्यकता है।

मुख्यमंत्री ने श्रीवाणी ट्रस्ट फंड के लिए जवाबदेही की आवश्यकता पर बल दिया और अधिकारियों को मंदिरों और उनकी संपत्तियों की सुरक्षा के लिए एक समिति गठित करने का निर्देश दिया। उन्होंने सभी मंदिरों के लिए एक ऑनलाइन प्रणाली लागू करने को कहा। धर्मस्व विभाग के अधिकारियों को कृष्णा और गोदावरी नदी को पुनर्जीवित करने का भी निर्देश दिया।

हिंदू धार्मिक बंदोबस्ती विभाग के अधिकारियों के साथ मंगलवार (27 अगस्त 2024) को बैठक के दौरान सीएम नायडू ने राज्य के हर मंदिर में आध्यात्मिकता को बढ़ावा देने पर जोर दिया। उन्होंने निर्देश दिया कि मंदिरों और उनके आसपास के इलाकों को पूरी तरह से साफ-सुथरा रखा जाना चाहिए, ताकि वहाँ आध्यात्मिक माहौल बना रहे।

मुख्यमंत्री ने पर्यटन विभाग, हिंदू धर्मार्थ विभाग और वन विभाग के अधिकारियों की एक समिति के गठन की भी घोषणा की। यह समिति मंदिरों, विशेष रूप से वन क्षेत्रों में स्थित मंदिरों के विकास की देखरेख करेगी। समिति इन स्थलों की प्राकृतिक सुंदरता और आध्यात्मिक महत्व को संरक्षित रखते हुए इसे अधिक से अधिक पर्यटकों के लिए सुलभ बनाएगी।

आंध्र प्रदेश के मुख्यमंत्री ने कहा, “आंध्र प्रदेश के हर मंदिर में आध्यात्मिकता प्रस्फुटित होनी चाहिए। आध्यात्मिक कार्यक्रम इस तरह से आयोजित किए जाने चाहिए कि श्रद्धालु मंदिर में वापस आएँ और उन्हें ये ना लगे कि उनसे पैसे ऐंठे जा रहे हैं। यह भी जरूरी है कि मंदिर और उनके आसपास के इलाकों को बेहद साफ-सुथरा रखा जाए।”

बैठक के दौरान नायडू ने पिछले वाई एस जगन मोहन रेड्डी प्रशासन के दौरान हिंदू मंदिरों पर हमलों की घटनाओं की कड़ी निंदा की, जिसमें मंदिर के रथ को जलाना भी शामिल है। उन्होंने ऐसे अपराधों के लिए जिम्मेदार लोगों के खिलाफ सख्त कार्रवाई करने का आह्वान किया और इस बात पर जोर दिया कि आंध्र प्रदेश में जबरन धर्म परिवर्तन बर्दाश्त नहीं किया जाएगा।

अयोध्या की जिस 4 साल की दलित बच्ची को सलमान ने नोंचा, उसे अब अपनी माँ से भी लगता है डर: रेप के बाद लहूलुहान हालत में मिली थी

अयोध्या में जन्माष्टमी के दिन 26 अगस्त 2024 को सलमान नाम का दरिंदा 4 साल की बच्ची को उठा कर अपने घर में ले गया। बच्ची से रेप किया। उसके गले और गाल को काट डाला। कई घंटों तक बच्ची के गायब होने के बाद जब उसकी खोज की गई, तो सलमान के घर के अंदर से उसके रोने की आवाज आ रही थी। उस समय बच्ची लहूलुहान हालत में पड़ी थी और सलमान लोगों को देखकर भाग गया। बाद में पुलिस ने उसे मुठभेड़ के बाद गिरफ्तार कर लिया। फिलहाल बच्ची की हालत नाजुक है और वो अस्पताल में भर्ती है।

ये वारदात अयोध्या जिला मुख्यालय से करीब 35 किमी दूर महाराजगंज थाना इलाके की है। इस गाँव में करीब 450 घर हैं, जिसमें 30 घर मुस्लिमों के हैं। गाँव में करीब 150 घर दलितों के हैं। भास्कर ने गाँव में जाकर पड़ताल की है और बच्ची के परिजनों से भी बात की है।

बच्ची की माँ ने बताया, “मेरी बच्ची अभी ठीक से बोल भी नहीं पाती। जो भी प्यार से आवाज लगा देता, उसके पास चली जाती थी। सलमान ने मेरी बच्ची की मुस्कराहट को ही छीन लिया। उसने प्यार से बुलाया, तो वो उसके साथ चली गई थी। लेकिन सलमान ने उसके गालों को काट लिया, उसके साथ दरिंदगी की। हमें समझ नहीं आ रहा है कि जो खुद एक बच्ची का बाप हो, वो कैसे ऐसी दरिंदगी कर सकता है। वो हमारे घर भी आता था। उसकी छोटी सी बच्ची मेरी बच्ची के साथ खेलती थी। अब वो हर किसी से डर जाती है, यहाँ तक कि मेरी गोद में भी नहीं आ रही।”

गाँव में सलमान का नाम सुनते ही एक व्यक्ति भड़क गया। उन्होंने कहा, “सलमान को सीधे फाँसी पर लटका देना चाहिए। हम लोगों ने ही गाँव में उसे आसरा दिया और उसने हमारी ही बच्ची के साथ ऐसी घिनौनी हरकत कर दी।” उस व्यक्ति ने बताया कि बच्ची अपनी माँ के साथ ननिहाल आई थी। रक्षाबंधन के बाद घर में जन्माष्टमी का त्योहार मनाने की तैयारी हो रही थी, तभी दोपहर करीब 2 बजे सलमान बच्ची को उठाकर ले गया और इस घिनौनी वारदात को अंजाम दिया।

बच्ची की नानी ने कहा, “जन्माष्टमी के दिन बच्ची घर के बाहर खेल रही थी। करीब 2 बजे के आसपास वो गायब हो गई। हमें लगा कि आसपास ही खेल रही होगी। 2-3 घंटे जब बच्ची नहीं मिली, तो लोगों ने ढूँढना शुरू किया। थोड़ी देर बाद सलमान के घर से बच्ची के चीखने की आवाज सुनाई दी, तो हम सब भागकर वहाँ पहुँचे। सलमान तुरंत भाग गया। उसके चेहरे और गले पर दाँत के निशान थे। उसकी खुद की 4 साल की बेटी है। मेरी नातिन भी उसकी बेटी के साथ खेलती थी। सलमान भी उसे अक्सर गोद में उठाकर खिलाया करता था। हमें समझ नहीं आ रहा है कि हम क्या करें।”

उन्होंने कहा, “हमारी बेटी यानी बच्ची की माँ रक्षाबंधन का त्योहार मनाने आई थी। उसे क्या पता था कि उसकी मासूम बच्ची के साथ ऐसी हरकत हो जाएगी।” बच्ची की मौसी ने बीच में कहा कि हम जब जन्माष्टमी की तैयारी में लगे थे, रात में पूजा होने वाली थी, लेकिन उस दरिंदे को हमारी बच्ची पर तरस नहीं आया। ऐसे आदमी को फाँसी दे देनी चाहिए।

ससुराल में रहता था सलमान

मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक, सलमान बीकापुर क्षेत्र का रहने वाला है। 4 साल पहले उसका निकाह महाराजगंज की रुबीना से हुआ था। सलमान का आचरण उसके घर में ठीक नहीं है। उसके चार भाई और हैं। सलमान के गलत व्यवहार के कारण उसके और उसके भाइयों के बीच में अक्सर तकरार और मारपीट जैसी नौबत आ जाती थी। निकाह के 6 महीने बाद से ही सलमान रुबीना के साथ अपने ससुराल महाराजगंज थाना क्षेत्र उसी गाँव में रहने लगा। दोनों की एक 2 साल की बेटी भी है। पीड़िता उसी बच्ची को खिलाने सलमान के घर जाती थी। हालाँकि घटना वाले दिन जब रुबीना अपने एक रिश्तेदार को देखने अस्पताल गई हुई थी और उस समय पीड़िता उनके घर के बाहर खेल रही थी।

जान-पहचान का फायदा उठाकर सलमान ने पहले बच्ची को घर बुलाया, फिर उसे कमरे में ले गया और फिर उसके साथ दुष्कर्म किया। बच्ची जब 4-5 घंटे घर नहीं लौटी तो परिवार ने खोजबीन की। ढूँढते-ढूँढते जब घरवाले सलमान के दरवाजे पहुँचे तो वहाँ बच्ची आपत्तिजनक स्थिति में मिली। बच्ची को देखने के बाद घटना की सूचना तुरंत पुलिस को दी गई। पुलिस ने मौके पर पहुँचकर बच्ची को अस्पताल में एडमिट कराया और गाँव में भारी संख्या में पुलिस बल तैनात कर दिया। अब प्रशासन सलमान के घर पर बुलडोजर चलाने की भी तैयारी कर रहा है। राजस्व टीम जाँच में जुट गई है।

सीओ सदर संदीप सिंह ने जानकारी दी कि सूचना मिलने के बाद उन्होंने सलमान को ढूँढने के लिए कई टीमों को लगाया। पड़ताल के दौरान पता चला सलमान तारापुर गाँव में छिपा है। पुलिस जब उसे पकड़ने गई तो सलमान ने भागते हुए पुलिस पर फायरिंग शुरू कर दी। जवाब में तारापुर गाँव के पुलिस ने भी गोली चलाई जो सलमान के पाँव में लगी। इसके बाद आरोपित को गिरफ्तार करके अस्पताल ले जाया गया।

शेख हसीना के जाते ही बांग्लादेश में पाक-साफ़ हो गया जमात-ए-इस्लामी, 28 दिन में ही खत्म हो गया प्रतिबंध: भारत विरोधी एजेंडे और हिंसा के लिए कुख्यात है इस्लामी संगठन

बांग्लादेश की मोहम्मद युनुस की अगुवाई वाली अंतरिम सरकार ने इस्लामी कट्टरपंथी जमात-ए-इस्लामी पर लगाया गया प्रतिबंध हटा लिया है। जमात के छात्र संगठन से भी प्रतिबंध हटा लिया गया है। युनुस सरकार ने कहा है कि इन दोनों संगठनों के विरुद्ध आतंक का कोई भी सबूत नहीं है। जमात का बांग्लादेश के हालिया तख्तापलट में बड़ा हाथ है। इस पर बांग्लादेश की प्रधानमंत्री शेख हसीना ने अगस्त, 2024 में ही पूर्णतया प्रतिबंध लगा दिया था।

क्या है युनुस सरकार का फैसला?

बांग्लादेश की मोहम्मद युनुस की अगुवाई वाली अंतरिम सरकार ने बुधवार (28 अगस्त, 2024) को जमात-ए-इस्लामी बांग्लादेश और इसके छात्र संगठन, छात्र शिबिर पर से प्रतिबंध हटाने का निर्णय लिया। इस संबंध में एक आदेश भी निकाला गया। इस आदेश में कहा गया है कि बांग्लादेश जमात-ए-इस्लामी और उसके छात्र संगठन इस्लामी छात्र शिबिर की आतंकवाद और हिंसा में संलिप्तता का कोई ठोस सबूत नहीं है और सरकार का मानना ​​है कि यह संगठन आतंकवादी गतिविधियों में शामिल नहीं हैं इसलिए इस पर प्रतिबंध हटाया जाता है।

युनुस सरकार ने 1 अगस्त, 2024 को हसीना सरकार द्वारा जारी किए गए प्रतिबंध के आदेश को निरस्त कर दिया है। यह प्रतिबंध तत्काल प्रभाव से हटाया गया है। अब जमात-ए-इस्लामी बांग्लादेश में खुले तौर पर सभाएँ कर पाएगी। इसके अलावा छात्र शिबिर भी खुले तौर पर चल सकेगी। बांग्लादेश में प्रधानमंत्री शेख हसीना के इस्तीफे के बाद यह साफ़ हो गया था कि अब जमात के समर्थन वाले लोग सत्ता में काबिज होंगे, ऐसे में इस पर से प्रतिबंध हटना तय माना जा रहा था।

क्यों लगा था प्रतिबंध?

बांग्लादेश की पूर्व प्रधानमंत्री शेख हसीना ने 1 अगस्त, 2024 को जमात-ए-इस्लामी और इसके छात्र संगठन को आतंकी गतिविधियाँ करने के कारण प्रतिबंधित कर दिया था। हसीना सरकार का कहना था कि जुलाई में शुरू हुए छात्रों के आरक्षण विरोधी आंदोलन की आड़ में जमात ने अपना एजेंडा चलाया है। जमात पर आरोप है कि इसने इस प्रदर्शन के दौर में लगातार हिंसा की और कई जगह पुलिसकर्मियों तक पर हमले किए।

शेख हसीना सरकार ने जमात पर सरकार अस्थिर करने का आरोप लगाया था। इसके कुछ दिनों बाद ही शेख हसीना को इस्तीफ़ा भी देना पड़ा। जमात-ए-इस्लामी ने इसके बाद खुले तौर प्रेस कॉन्फ्रेंस भी की। वर्तमान में जमात के बड़े नेता बांग्लादेश में अहम फैसलों में भी दखल दे रहे हैं। युनुस सरकार में भी जमात की विचारधारा वाले लोगों को लिया गया है।

जमात-ए-इस्लामी है क्या, क्या करता है?

जमात-ए-इस्लामी बांग्लादेश का एक इस्लामी कट्टरपंथी संगठन है। इसकी जड़ें अविभाजित भारत में थीं। इसकी स्थापना 1941 में भारत में मौलाना मौदूदी ने की थी। भारत के विभाजन के बाद यह पाकिस्तान का जमात-ए -इस्लामी हो गया। यह संगठन बांग्लादेश मुक्ति संग्राम में पाकिस्तान के साथ था और इसने पाकिस्तानी सेना के साथ मिलकर बंगालियों पर काफी अत्याचार किया था।

जमात के अधिकांश नेताओं ने इसके बाद बांग्लादेश छोड़ दिया था और सऊदी अरब या पाकिस्तान भाग गए थे। हालाँकि, जब 1975 में बांग्लादेश में मुजीबुर रहमान की हत्या कर सैन्य शासन लगा दिया गया तो जमात यहाँ फिर से ज़िंदा हो गई और इस बार बांग्लादेश में एक राजनीतिक शक्ति के रूप में लौटी।

जमात का लक्ष्य मुस्लिमों को कट्टरपंथी इस्लाम की तरफ लाना है। यह सूफीवाद के विरोध में खड़ा हुआ संगठन है। बांग्लादेश, भारत और पाकिस्तान सभी जगह यह संगठन इस्लामी कट्टरपंथ का समर्थक है। यह बांग्लादेश को भी कट्टर इस्लाम की तरफ ले जाना चाहता है।

शेख हसीना इसकी राह में एक बाधा थीं क्योंकि वह लगातार कट्टरपंथ को कुचलने में आगे थी। हसीना सरकार में अल्पसंख्यकों के अधिकारों को लेकर भी कदम बढ़ाए गए थे जमात बांग्लादेश की विपक्षी पार्टी BNP के साथ मिलकर शेख हसीना के खिलाफ चुनाव भी लड़ती रही है।

जमात का राजनीतिक पार्टी के तौर पर रजिस्ट्रेशन बांग्लादेश के हाई कोर्ट ने 2013 में रद्द कर दिया था। हाई कोर्ट ने कहा था कि जमात राजनीतिक पार्टी के तौर पर नहीं मानी जा सकती, क्योंकि इसका विश्वास लोकतांत्रिक प्रक्रिया से अधिक अल्लाह में है। अब जमात पर से प्रतिबंध हट गया है। अंदाजा लगाया जा रहा है कि यह अगले चुनाव में BNP के साथ गठबंधन करके सत्ता में भी आ सकती है। हालाँकि, इसके लिए न्यायिक चुनौती से गुजरना होगा।

‘कंगना से पूछिए रेप कैसे होता है, उन्हें रेप का बड़ा तजुर्बा है’: खालिस्तान समर्थक पूर्व सांसद ने की विवादित टिप्पणी, भगत सिंह को ‘आतंकी’ भी बता चुके हैं सिमरनजीत सिंह मान

बॉलीवुड अभिनेत्री से भारतीय जनता पार्टी की सांसद बनीं कंगना रनौत पर पंजाब के पूर्व सांसद सिमरनजीत सिंह मान ने विवादित बयान दिया है। उन्होंने कंगना के पूर्व बयान पर प्रतिक्रिया देते हुए कहा कि कंगना से पूछा जाना चाहिए कि रेप होता कैसे उन्हें रेप का बड़ा अनुभव है।

मीडिया रिपोर्ट के अनुसार, पूर्व सांसद सिमरनजीत सिंह मान ने कहा, “आप कंगना से पूछ सकते हैं कि रेप कैसे होता है ताकि लोगों को उसके बारे में बताया जा सके। उन्हें बड़ा अनुभव है।”

जब मान से पूछा गया कि कंगना रनौत को रेप का तजुर्बा कैसे है? सके जवाब में मान ने कहा- “जैसे आप साइकिल चलाते हैं तो आपको साइकिल चलाने का तजुर्बा हो जाता है। उनको रेप का तजुर्बा है।”

मान से फिर पूछा गया कि क्या वे कंगना रनौत की बात कर रहे हैं। इस पर मान ने कहा कि बिल्कुल, वह कंगना रनौत की बात कर रहे हैं।

उल्लेखनीय है कि सिमरनजीत सिंह मान खालिस्तान के भी समर्थक होने के नाते जाने जाते हैं। ऑपरेशन ब्लू स्टार-सिख विरोधी दंगों के विरोध में उन्होंने सरकारी नौकरी छोड़ी थी। बाद में उनपर हत्या की साजिश से लेकर देशद्रोह तक के केस दर्ज हुए थे। 5 साल भागलपुर जेल में बंद रहने के बाद में उन्होंने 1989 में चुनाव लड़ा और 93.92 फीसद वोट पाकर सांसद बने। फिर 1999 में भी तरनतारन सीट को जीता।

इसके बाद वो अपने विवादित बयान के कारण 2 साल पहले चर्चा में आए थे उन्होंने सरदार भगत सिंह को आतंकवादी कहा था। इस बार उन्होंने ये प्रतिक्रिया उस समय दी है जब किसान प्रदर्शन को लेकर कंगना का दिया बयान काफी सुर्खियों में रहा। अभिनेत्री ने अपने बयान में कहा था कि अगर भारतीय नेतृत्व मजबूत नहीं होता तो प्रदर्शन से बांग्लादेश जैसे हालात हो सकते थे।

उन्होंने कहा था कि किसान आंदोलन में शवों को लटका पाया गया था, उस दौरान रेप हुआ था। उन्होंने इन सबके पीछे चीन और यूएस तक कहा हाथ कहा था। हालाँकि बाद में पार्टी नेतृत्व ने जब उन्हें इस बयान के लिए फटकार लगाई उसके बाद उन्होंने कहा था कि वो आगे से शब्दों का चयन करते समय सवाधानी बरतेंगी।

हिंदू देवी-देवताओं का उदाहरण देकर रेप के बारे में पढ़ाता था अलीगढ़ मुस्लिम यूनिवर्सिटी का प्रोफेसर, इलाहाबाद हाई कोर्ट ने दे दी अग्रिम जमानत: जानिए क्या है मामला

इलाहाबाद हाई कोर्ट ने रेप के लिए हिंदू देवी-देवताओं का संदर्भ देने वाले अलीगढ़ मुस्लिम विश्वविद्यालय (Aligarh Muslim University- AMU) के निलंबित प्रोफेसर को अंतरिम अग्रिम जमानत दे दी है। साल 2022 में फोरेंसिक मेडिसन की क्लास में रेप पर लेक्चर देते हुए डॉक्टर जितेंद्र कुमार ने देवी-देवताओं का संदर्भ दिया तो माहौल गरमा गया था। इसके बाद AMU ने प्रोफेसर को निलंबित कर दिया था।

इलाहाबाद हाई कोर्ट के न्यायाधीश विक्रम डी. चौहान की एकल पीठ ने प्रोफेसर जितेंद्र कुमार द्वारा दायर आपराधिक विविध अग्रिम जमानत याचिका पर सुनवाई करते हुए यह आदेश पारित किया है। याचिका में जितेंद्र कुमार ने अलीगढ़ के सिविल लाइन्स थाने में IPC की धारा 153A, 295A, 298, 505(2) के तहत दर्ज FIR में अग्रिम जमानत देने की प्रार्थना की गई थी।

जितेंद्र कुमार के वकील ने कोर्ट में दलील दी कि आवेदक के खिलाफ़ कक्षा में विद्यार्थियों को ऐतिहासिक परिप्रेक्ष्य में बलात्कार के विषय पर पढ़ाने के लिए प्राथमिकी दर्ज की गई है। आवेदक द्वारा कक्षा में व्याख्यान में धार्मिक अर्थ वाले कुछ उदाहरण भी दिए गए हैं। आवेदक विश्वविद्यालय में सहायक प्रोफेसर हैं। उनका किसी व्यक्ति की धार्मिक भावनाओं को ठेस पहुँचाने का इरादा नहीं था।

दरअसल, बलात्कार विश्वविद्यालय के पाठ्यक्रम में शामिल विषयों में से एक है। बाबा साहब डॉ. अंबेडकर सम्पूर्ण वाङ्मय भाग-8 नामक पुस्तक के पृष्ठ 176 और 302 पर इसका संदर्भ दिया गया है। जितेंद्र कुमार ने कक्षा में पढ़ाई जा रही सामग्री के ऐतिहासिक परिप्रेक्ष्य को प्रस्तुत करने के लिए गीता प्रेस, गोरखपुर द्वारा प्रकाशित ‘ब्रह्मवैवर्त पुराण’ के पृष्ठ 183 का भी हवाला दिया है।

आरोपित के वकील ने अदालत में यह भी तर्क दिया गया कि विश्वविद्यालय की फैक्ट फाइंडिंग में यह नहीं पाया गया कि उन्होंने हिंदू पौराणिक कथाओं का कोई जानबूझकर संदर्भ दिया है। वहीं, सरकारी वकील ने इसका विरोध किया और प्रस्तुत किया कि यद्यपि बलात्कार का विषय पाठ्यक्रम में था, लेकिन पाठ्यक्रम में किसी भी ऐतिहासिक परिप्रेक्ष्य का कोई संदर्भ नहीं था।

तमाम तर्कों को सुनने के बाद हाई कोर्ट ने अगली सुनवाई तक प्रोफेसर को अंतरिम अग्रिम जमानत दे दी। कोर्ट ने कहा कि आवेदक की गिरफ्तारी की स्थिति में उसे निम्नलिखित शर्तों के साथ संबंधित न्यायालय की संतुष्टि के लिए 25,000 रुपए के व्यक्तिगत बांड और समान राशि के दो जमानतदार प्रस्तुत करने पर अंतरिम अग्रिम जमानत पर रिहा किया जाएगा। इसके साथ ये शर्तें भी लागू होंगी-

(i) आवेदक को आवश्यकतानुसार पुलिस थाने द्वारा पूछताछ के लिए बुलाए जाने पर स्वयं को उपलब्ध कराना होगा।

(ii) आवेदक मामले के तथ्यों से परिचित किसी भी व्यक्ति को प्रत्यक्ष या अप्रत्यक्ष रूप से कोई प्रलोभन, धमकी या वादा नहीं करेगा, जिससे वह ऐसे तथ्यों को न्यायालय या किसी पुलिस कार्यालय को बताने से विमुख हो जाए।

(iii) आवेदक संबंधित न्यायालय की पूर्व अनुमति के बिना भारत नहीं छोड़ेगा।

(iv) आवेदक वर्तमान मामले के लंबित रहने के दौरान विश्वविद्यालय की शैक्षणिक परिषद द्वारा अनुमोदित किए जाने तक धार्मिक अर्थ वाले कोई ऐतिहासिक संदर्भ नहीं देगा।

(v) यदि आवेदक अपना आवासीय पता बदलता है, तो आवेदक को संबंधित न्यायालय/जांच अधिकारी को लिखित रूप में नए आवासीय पते के बारे में सूचित करना होगा।

बता दें कि डॉक्टर जितेंद्र कुमार AMU से संबद्ध जवाहरलाल नेहरू मेडिकल कॉलेज में असिस्टेंट प्रोफेसर के पद पर कार्यरत हैं। वह 5 अप्रैल 2022 को सेक्सुअल ऑफेंस पर लेक्चर दे रहे थे। इसी दौरान हिंदू पौराणिक घटनाओं का संदर्भ लेते हुए एक स्लाइड शो शेयर किया। इसमें उन्होंने ब्रह्मा, इंद्र और भगवान विष्णु के चरित्र पर सवाल उठाए थे।

लेक्चर के दौरान प्रोफेसर जितेंद्र ने कहा कि ब्रह्मा ने अपनी पुत्री के साथ रेप किया। इंद्र ने गौतम ऋषि को धोखा देते हुए उनकी पत्नी के साथ संबंध बनाए। दैत्यराज जलंधर की पत्नी के साथ विष्णु ने संबंध जोड़ा। लेक्चर के दौरान इन संदर्भों को देखकर विद्यार्थियों ने हंगामा शुरू कर दिया। टिप्पणी के बाद माहौल गरमाया तो जिंतेंद्र कुमार ने माफी माँग ली।

विश्वविद्यालय और मेडिकल कॉलेज ने भी डॉक्टर जितेंद्र कुमार के इस कारनामे की निंदा की थी। हालाँकि, हंगामे को देखते हुए उत्तर प्रदेश पुलिस ने डॉक्टर जितेंद्र कुमार के खिलाफ मामला दर्ज कर उन्हें गिरफ्तार कर लिया गया था। विश्व हिंदू परिषद ने डॉक्टर जितेंद्र कुमार के खिलाफ राष्ट्रीय सुरक्षा कानून (रासुका) लगाने की माँग की थी।

हे कॉन्ग्रेस के लेमनचूसों! स्मृति ईरानी ने जो कहा उसे ‘राहुल गाँधी का फैन’ होना नहीं कहते, इसे हिंदुओं को बाँटने की राजनीति करने वालों को ‘भिगो भिगो कर मारना’ कहते हैं

पूर्व केन्द्रीय मंत्री और अमेठी की पूर्व सांसद स्मृति ईरानी ने पत्रकार सुशांत सिन्हा के साथ एक बातचीत में राहुल गाँधी के जाति पर शोर मचाने के कारण का खुलासा किया है। उन्होंने राहुल गाँधी की राजनीति में बदलाव के मायने भी बताए हैं। इस बातचीत में ईरानी ने 2024 में उनको अमेठी में मिली हार, मोदी सरकार 3.0 और राजनीति के बाक़ी पहलुओं को लेकर भी अपनी राय रखी है। इस बातचीत की एक क्लिप के सहारे राहुल गाँधी और कॉन्ग्रेस के दरबारी माहौल बनाने में जुट गए हैं।

स्मृति ईरानी की एक क्लिप के सहारे दरबारी यह बताने में जुटे हैं कि वह राहुल गाँधी की फैन हो गई हैं। हालाँकि, दृष्टिदोष रखने वाले दरबारी यह नहीं समझ पा रहे कि जिसे वह राहुल गाँधी की उपलब्धि मान रहे हैं, असल में वह उनकी विभाजनकारी राजनीति को नंगा करने जैसा है। स्मृति ईरानी ने स्पष्ट तरीके से बताया है कि बीते कुछ सालों में राहुल गाँधी की राजनीति में मंदिरों में मत्था टेकने की जगह जातिगत आरक्षण की बात ने क्यों ले ली है।

स्मृति ईरानी ने बताई जाति की राजनीति की असलियत

स्मृति ईरानी ने कहा कि राहुल गाँधी की राजनीति कुछ साल पहले तक मंदिरों में जाने की थी। हालाँकि, इससे उन्हें कोई फायदा नहीं हो रहा था, उलटे उनका मजाक उड़ रहा था। ईरानी ने कहा कि उनके मंदिर जाने से ना ही राहुल गाँधी की लोकप्रियता बढ़ रही थी और ना ही उन्हें उतनी कवरेज मिल रही थी। ईरानी ने बताया कि उनकी मंदिरों की राजनीति फेल होने के बाद ही पूरी रणनीति जाति पर आकर रुक गई है। राहुल गाँधी जाति को इसलिए बार बार अपनी बातचीत में ला रहे हैं क्योंकि यही उनके लिए कवरेज पाने का एक तरीका है।

स्मृति ईरानी ने यह भी कहा कि राहुल गाँधी के लिए जाति कोई पुराना मुद्दा नहीं बल्कि रणनीतिक मुद्दा है। उन्होंने इसका इस्तेमाल सिर्फ राजनीतिक बढ़त लेने के लिए किया है। स्मृति ईरानी ने यह भी बताया कि राहुल गाँधी की राजनीति में पहले जाति का नाम नहीं था और अब यह आ गया है। ईरानी ने उनके मिस इंडिया वाले बयान का भी उदाहरण दिया। उन्होंने कहा कि राहुल गाँधी मिस इंडिया में दलित या ओबीसी की बात इसलिए कर रहे हैं क्योकि उससे हेडलाइन बनती है। स्मृति ईरानी की यह बातें आप नीचे लगे लिंक पर 55 मिनट से 60 मिनट के बीच सुन सकते हैं।

अकारण नहीं है राहुल का ‘जाति राग’

राहुल गाँधी का लगातार जाति-जाति करना और वित्त मंत्रालय की हलवा सेरेमनी में दलित ओबीसी ढूँढना कोई अकारण नहीं है, ना ही वह जातिगत जनगणना की बात अकारण कर रहे हैं। दरअसल, इसके पीछे उनको अपनी उस रणनीति में मिली शिकस्त का नतीजा है, जिसे मीडिया ने ‘सॉफ्ट हिंदुत्व’ का नाम दिया है। दरअसल, कुछ साल पहले तक राहुल गाँधी की सोमनाथ जैसे मंदिरों से तस्वीरें आती थीं। उन्हें कॉन्ग्रेस के प्रवक्ता ‘दत्तात्रेय ब्राम्हण’ बताते थे। उनकी जनेव वाली फोटो लहराई जाती थीं।

यह सब करने का कोई फायदा जब कॉन्ग्रेस को नहीं मिला और लोगों ने इस कथित हिंदुत्व को सिरे से नकार दिया तो हिन्दू समाज को बाँटने वाली राजनीति सहारा लिया। हालाँकि, यह उनका ओरिजिनल आईडिया नहीं है। इसे सबसे पहले समाजवादी पार्टी ने उत्तर प्रदेश विधानसभा चुनाव में उठाया था लेकिन उसे शिकस्त मिली थी। राहुल गाँधी को इस मुद्दे को उठा कर लगता है कि वह अधिक वोट हासिल करने में सफल होंगे। उनका यह सोचना भी ऐसे ही नहीं है।

दरअसल, कॉन्ग्रेस मानती है कि देश की दूसरी सबसे बड़ी आबादी यानी मुस्लिम उनकी राजनीतिक जागीर हैं। यह सोच लगातार चलती आई है कि कॉन्ग्रेस और भाजपा के सीधे मुकाबले में मुस्लिम वोटर कॉन्ग्रेस को ही चुनेगा। हालाँकि, 100% मुस्लिम वोट पाकर भी देश में बहुमत पाना संभव नहीं है। ऐसे में राहुल गाँधी की नई रणनीति जातिगत जनगणना का शोर मचा कर हिन्दू समाज को अलग अलग करना है। वह उस समाज को तोड़ कर दलित, OBC और अन्य वर्गों में बाँटना चाहते हैं जिसे हिंदुत्व एक साथ रखने की कोशिश करता है।

कॉन्ग्रेस सिद्ध होती रही है पिछड़ा विरोधी

राहुल गाँधी का जतिजत जनगणना की बात करना और पिछड़ों के अधिकार के लिए शोर मचाना इसलिए भी हास्यासपद है क्योंकि उन्हीं की पार्टी के माथे पर इस समाज को पीछे रखने का कलंक है। पिछले 1-2 वर्षों से जातिगत जनगणना का मुद्दा उठाने वाले राहुल गाँधी के पिता राजीव गाँधी ने 1990 के दशक में पिछड़ों को आरक्षण देने के मुद्दे इसे बुद्धुओं से जोड़ दिया था। इसी कॉन्ग्रेस ने एक दशक से अधिक समय तक मंडल आयोग की रिपोर्ट को भी नहीं छुआ।

हाथ में संविधान की एक कॉपी पकड़ कर मिस इंडिया में OBC और दलित ढूँढने वाले राहुल गाँधी की पार्टी पर किया गया एक शोध बात है कि उनकी सरकारों में OBC समुदाय से मंत्रियों की संख्या हमेशा भाजपा की तुलना में कम रही। कॉन्ग्रेस ने जहाँ 1952-2024 के बीच अपनी सरकारों में 14% मंत्रिपद OBC को दिए तो वहीं भाजपा ने यह आँकड़ा 25% तक पहुँचाया। एक और बात यह है कि राहुल गाँधी यदि जाति को लेकर चिंतित हैं तो कर्नाटक में वह जातिगत जनगणना के आँकड़े क्यों नहीं सार्वजनिक करवाते।

दलित-OBC पर दिलफेंक टाइप राजनीति का असल सच यह है कि कर्नाटक की कॉन्ग्रेस सरकार ने दलितों के फंड में से पैसा अपनी गारंटी योजनाओं के लिए निकाल लिया है। इसी कर्नाटक में जनजातियों के विकास के लिए चलाई गई एक योजना में करोड़ों का घोटाला हुआ। यहाँ तक कि एक मंत्री को इस्तीफ़ा देना पड़ गया।

ऐसे में भले अब आरक्षण सीमा तोड़ने, आबादी का हक़ दिलाने और हर चीज में जाति ढूँढने की बाते राहुल गाँधी करें, यह उनकी पार्टी के चरित्र को नहीं बदलेगा। ना ही इससे यह बात बदल पाएगी कि उनकी सरकारें ही दलितों का फंड कम कर रही हैं। लोकसभा चुनाव 2024 में कॉन्ग्रेस की सीटों में कुछ बढ़ोतरी जरूर हुई है। राहुल गाँधी को लगता है इसमें और बढ़ोतरी जाति के नैरेटिव को धार देने से होगी। हालाँकि, वह यह नहीं समझ पा रहे कि यदि जनता में इस बात की इतनी ही स्वीकार्यता होती तो NDA को स्पष्ट बहुमत कैसे मिलता।

कर्नाटक में बिजली पोल से ‘मजहब’ आहत: बजरंगबली के जन्मस्थान से गदा-धनुष की आकृति वाले खंबे हटाने का आदेश, हिंदुओं के विरोध के बाद पीछे हटा प्रशासन

कर्नाटक के कोप्पल में गदा और धनुष वाले बिजले के खंबों को हटाने का आदेश देने वाले फैसले को पलट दिया गया है। हिंदुओं की एकजुटता को देखते हुए कलेक्टर ने खंबों को हटाने का आदेश रद्द कर दिया। कलेक्टर के आदेश की कॉपी भी सामने आ गई है।

बता दें कि कोप्पल के तहसीलदार ने बुधवार (28 अगस्त 2024) को गंगावती तालुका की सड़कों पर सजावट के लिए लगाए गए बिजली के खंबों को हटाने का आदेश दिया था। गंगावती तालुका बगरंग बली का जन्मस्थान माना जाता है। यहाँ मंदिर की तरफ जाने वाली सड़कों पर बिजली के खंबे लगाए गए थे, जिनपर बजरंग बली के ‘गदा’ और भगवान राम के ‘धनुष’ जैसी आकृतियाँ थी। तहसीलदार ने ये आदेश प्रतिबंधित आतंकी संगठन पीएफआई के मुखौटा राजनीतिक संगठन SDPI की शिकायत के बाद दिया है।

मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक, सार्वजनिक जगहों पर “हिंदू धार्मिक प्रतीकों” को लगाने के लिए कर्नाटक ग्रामीण अवसंरचना विकास निगम (केआरआईडीएल) के इंजीनियर के खिलाफ भी एफआईआर दर्ज करने के निर्देश दिए गए थे। ये कार्रवाई सोशल डेमोक्रेटिक पार्टी ऑफ इंडिया (SDPI) की आपत्ति के बाद की गई थी। SDPI बैन आतंकी संगठन पॉपुलर फ्रंट ऑफ इंडिया (पीएफआई) की राजनीतिक शाखा है। SDPI ने कहा था कि इन धार्मिक प्रतीकों की वजह से उसकी धार्मिक भावनाएँ आहत हो रही हैं।

तहसीलदार नागराज द्वारा जारी आदेश में कहा गया है, “केआईआरडीएल द्वारा लगाए गए बिजली के खंभे इस तरह से बनाए गए हैं कि वे धार्मिक सद्भाव और भावनाओं को नुकसान पहुंचाते हैं। इनसे शहर में सार्वजनिक शांति भंग होने की संभावना है और इन्हें तुरंत हटा दिया जाना चाहिए। तहसीलदार नागराज ने केआरआईडीएल इंजीनियर के खिलाफ मामला दर्ज कर उचित कार्रवाई करने और रिपोर्ट सौंपने का सुझाव दिया है।” जानकारी के मुताबिक, ये विशेष खंबे गंगावती इलाके के राणा प्रताप सक्रिल और जूलिया नगर में लगाए गए हैं।

बता दें कि गंगावती (कोप्पल जिला) में अंजनाद्री पहाड़ियों को भगवान हनुमान के जन्मस्थान माना जाता है। ये प्रतीक (धनुष और गदा) सिर्फ़ इसलिए लगाए गए था कि अंजनाद्री पहाड़ियों की ओर जाने वाले भक्तों को भगवान हनुमान की पूजा करने के लिए प्रोत्साहित किया जा सके।

पब्लिक टीवी की स्थानीय रिपोर्ट बताती है कि धनुष और गदा के प्रतीक वाले बिजली के खंभे अंजनाद्री पहाड़ियों की ओर जाने वाले श्रद्धालुओं के मन में धार्मिक प्रेरणा पैदा करने के लिए लगाए गए हैं। स्थापना के दौरान, यह भी स्पष्ट किया गया था कि यह कार्य किसी अन्य सांप्रदायिक इरादे से नहीं किया जा रहा था।

लेकिन, एसडीपीआई ने 21 अगस्त को कहा था कि “बिजली के खंभों में धार्मिक प्रतीक हैं जो गंगावती में सांप्रदायिक सद्भाव को बिगाड़ सकते हैं।” एसडीपीआई ने यह भी दावा किया कि बिजली के खंभों पर लगे ये हिंदू धार्मिक प्रतीक समाज की शांति के लिए खतरा हैं। जिसके बाद तहसीलदार ने सांप्रदायिक वैमनस्य का हवाला देते हुए लैंप हटाने को कहा था।

इससे पहले, भाजपा के जनार्दन रेड्डी ने उत्तर प्रदेश में भगवान राम के जन्मस्थान अयोध्या की तर्ज पर अंजनाद्री पहाड़ियों के विकास की माँग की थी। उन्होंने इस क्षेत्र के विकास के लिए राज्य कोष से 120 करोड़ रुपये जारी करने की भी माँग की थी।

मूल रूप से ये रिपोर्ट अंग्रेजी भाषा में प्रकाशित की गई है। मूल रिपोर्ट पढ़ने के लिए यहाँ क्लिक करें।