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हर साल राष्ट्रीय ध्वज फहराने के लिए आदेश क्यों लेना पड़ता है: तमिलनाडु की स्टालिन सरकार से हाई कोर्ट का सवाल, BJP को तिरंगा यात्रा निकालने की दी अनुमति

मद्रास हाई कोर्ट ने बुधवार (14 अगस्त 2024) को अपने फैसले में भारतीय जनता पार्टी (BJP) के कार्यकर्ताओं को स्वतंत्रता दिवस पर पूरे तमिलनाडु में राष्ट्रीय ध्वज के साथ बाइक रैली निकालने की अनुमति दे दी। कोर्ट ने कहा कि इसकी अनुमति नहीं देना मौलिक अधिकारों का उल्लंघन है। तमिलनाडु के मुख्यमंत्री एमके स्टालिन के नेतृत्व वाली डीएमके सरकार ने इसकी अनुमति देने से मना कर दिया था।

न्यायाधीश जी जयचंद्रन ने पूछा, “नागरिकों को राष्ट्रीय ध्वज फहराने के लिए हर साल अदालत की अनुमति क्यों लेनी पड़ती है?” कोर्ट ने डीजीपी को निर्देश दिया कि ऐसी रैली के लिए अनुमति देने से इनकार न करें। हालाँकि, कोर्ट ने यह भी जोड़ा कि प्रतिभागी को यह गारंटी देनी होगी कि ध्वज को नुकसान नहीं पहुँचाया जाएगा और यातायात एवं कानून-व्यवस्था के नियमों का उल्लंघन नहीं किया जाएगा।

इस पर राज्य ने यह तर्क दिया कि यह मुद्दा राजनीतिक नहीं है। अतिरिक्त महाधिवक्ता जे रवींद्रन ने पिछली रैलियों की तस्वीरों का हवाला देते हुए तर्क दिया कि कुछ प्रतिभागी हेलमेट नहीं पहनते हैं। राज्य की ओर से पेश वकील ने कहा, “यह खुशी का अवसर है। हम किसी को भी जश्न मनाने से नहीं रोकना चाहते। वास्तव में हम चाहते हैं कि हर कोई जश्न मनाए, लेकिन इसके और भी तरीके हैं।”

रवींद्रन ने कहा, “ये संवेदनशील तिथियाँ हैं। राज्य अपने नागरिकों की सुरक्षा के लिए कदम उठाने के लिए बाध्य है। स्वतंत्रता दिवस के लिए 1,700 पुलिसकर्मियों को तैनात किया गया, जबकि 60 या 90 कर्मियों को अन्य कामों के लिए छोड़ दिया गया था।” इस पर अदालत ने कहा कि वह इनका संज्ञान लेगा, लेकिन इस तरह की रैलियों के लिए अनुमति न देने के निर्णय के पीछे यह तर्क सही नहीं है।

बार एंड बेंच की रिपोर्ट के मुताबिक, न्यायाधीश ने राज्य सरकार से पूछा, “यदि राज्य इसमें किंतु-परंतु जोड़ना चाहता है तो राज्य के नागरिकों को क्या संदेश जाएगा? क्या राज्य उन्हें राष्ट्रीय ध्वज फहराने या ले जाने की अनुमति नहीं देना चाहता, जबकि उन्हें ऐसा करने का अधिकार है?” न्यायालय ने यह भी कहा कि वह अपना आदेश केवल इस मौजूदा याचिका तक ही सीमित रखेगा।

दरअसल, कोयंबटूर का भाजपा युवा मोर्चा स्वतंत्रता दिवस पर राष्ट्रीय ध्वज के साथ बाइक रैली निकालने की योजना बनाई थी। इसके लिए उन्होंने पुलिस के पास आवेदन भेजा, लेकिन पुलिस ने अनुमति देने से इनकार कर दिया। इसके बाद कोयंबटूर जिला सचिव ए कृष्ण प्रसाद ने अदालत में इस आदेश के खिलाफ एक याचिका दाखिल की। इसके बाद कोर्ट ने यह अनुमति दे दी।

जिस कमरे में डॉक्टर की रेप के बाद हत्या, उसकी दीवारें टूटी मिलीं: BJP नेता ने शेयर किया वीडियो, रिनोवेशन के नाम पर सबूतों से छेड़छाड़ का आरोप

पश्चिम बंगाल में डॉक्टर के गैंगरेप और हत्या मामले में भारतीय जनता पार्टी ने तृणमूल कॉन्ग्रेस पर गंभीर आरोप लगाए हैं। भाजपा नेता अमित मालवीय ने एक वीडियो साझा करते हुए दावा किया है कि आर.जी. कर मेडिकल कॉलेज और अस्पताल में महिला जूनियर डॉक्टर के साथ हुए दुष्कर्म और हत्या के मामले में सबूतों से छेड़छाड़ की जा रही है।

अपने ट्वीट में उन्होंने दावा किया कि एक तरफ इस मामले में दिखाई जा रही ममता बनर्जी की उदासीनता और कोलकाता पुलिस के मामले को दबाने के असफल प्रयास के कारण गुस्से से उबल रहा है और दूसरी तरफ आर.जी. कर मेडिकल कॉलेज के अधिकारियों ने उस कमरे की दीवारों को तोड़ दिया जहाँ ड्यूटी पर तैनात जूनियर डॉक्टर के साथ यह क्रूरता हुई थी।

अमित मालवीय का कहना है कि इस हरकत से कई महत्वपूर्ण सबूत नष्ट हो गए जो सीबीआई जाँच में मददगार हो सकते थे । उन्होंने बताया कि ये तोड़फोड़ चेस्ट मेडिसीन डिपार्टमेंट के भीतर बने महिला टॉयलेट और डॉक्टर रेजिडेंट एरिया में की गई है ।

वह कहते हैं कि इस बात में अब कोई संदेह नहीं रह जाता कि ममता बनर्जी अपराध के सबूत छिपाने और अपराधियी को बचाने की कोशिश में हैं जिसे लेकर माना जा रहा है कि वो टीएमसी नेता के परिवार का हो सकता है। अंत में वह जोर देते हुए कहते हैं, “बंगाल में कोई महिला सुरक्षित नहीं है।” मालूम हो कि इस मामले में सबूतों से छेड़छाड़ की बात भारतीय कम्युनिस्ट पार्टी (मार्क्सवादी) के छात्र औरयुवा संगठनों के सदस्यों ने की थी।

बता दें कि बंगाल के आर.जी कर अस्पताल में हुई इस घटना मामले की जाँच सीबीआई के हाथ चली गई है। कलकत्ता हाई कोर्ट के चीफ जस्टिस की बेंच ने मामले की जाँच सीबीआई को सौंपने का आदेश दिया। इस बीच, पीड़ित डॉक्टर की पोस्टमार्टम रिपोर्ट सामने आई, जिससे पता चलता है कि कैसे महिला डॉक्टर के साथ हैवानियत की हदें पार की गईं। उनके चेहरे से लेकर प्राइवेट पार्ट तक में चोट आई।

अयोध्या के भक्ति पथ-राम पथ से ₹50 लाख की लाइटें चोरी: मीडिया रिपोर्टों में दावा, डिविजनल कमिश्नर बोले- जाँच जारी, मामले को बढ़ा-चढ़ाकर पेश किया जा रहा

अयोध्या में भक्ति पथ और राम पथ पर 50 लाख रुपये से अधिक कीमत की 3800 बैम्बू और 36 गोबो प्रोजेक्टर लाइटों के चोरी होने का मामला सामने आया है। ये लाइटें राम मंदिर में प्राण प्रतिष्ठा के दौरान अयोध्या की साज-सज्जा के लिए लगाई गई थी। कॉन्ट्रैक्टर ने थाने में तहरीर दी है कि आधी से ज्यादा लाइटें चोरी हो गई हैं। वहीं, इस मामले में प्रशासन की प्रतिक्रिया भी सामने आई है, जिसमें कहा जा रहा है कि संभवत: ये लाइटें लगाई ही नहीं गई। कॉन्टैक्टर का अभी पेमेंट नहीं हुआ है। हालाँकि प्रशासन ने एफआईआर दर्ज कर जाँच शुरू कर दी है।

मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक, योगी सरकार की ओर से अयोध्या को स्मार्ट सिटी के रूप में विकसित करने की योजना के तहत मठ-मंदिर और प्रमुख सड़कों के किनारे आकर्षक लाइटें लगाई गई थीं। पर्यटक स्थलों की इस खूबसूरती पर चोरों ने हाथ साफ कर दिया। बताया जा रहा है कि अयोध्या विकास प्राधिकरण ने यश इंटरप्राइजेज और कृष्णा ऑटोमोबाइल को रामपथ व भक्ति पथ पर लाइटें लगाए जाने का ठेका दिया था। जिसके तहत नया घाट, हनुमान गढ़ी और टेढ़ी बाजार पर लगभग 6400 बैम्बू और 96 गोबो प्रोजेक्टर लाइट लगाई गई थी।

यश इंटरप्राइजेज प्रतिनिधि शेखर शर्मा के अनुसार, रामपथ और भक्ति पर लगाई गईं 3800 बैम्बू और 36 गोबो लाइट चोरी हो गई हैं, जिसको लेकर राम जन्मभूमि थाने में मुकदमा दर्ज कराया गया है। शिकायत में कहा गया है कि 19 मार्च तक सभी लाइटें लगा दी गई थीं। बाद में मालूम चला कि काफी लाइटें गायब हैं, इसकी जब जाँच पड़ताल की गई तो 3800 बैम्बू और 36 गोबो लाइटें गायब मिलीं। इस मामले में पुलिस ने मामला दर्ज कर जाँच शुरू कर दी है।

शायद ये लाइटें कभी लगी ही नहीं: प्रशासन

राम पथ पर लगी फैंसी लाइटों की चोरी की रिपोर्ट पर जिला प्रशासन ने स्पष्टीकरण देते हुए कहा कि कड़ी सुरक्षा के कारण बड़े पैमाने पर चोरी की संभावना नहीं है। विकास प्राधिकरण ने स्थापित लाइटों की संख्या और चोरी की रिपोर्ट की गई लाइटों की संख्या में अंतर पाया। जाँच जारी है और अगर चोरी की झूठी रिपोर्ट पाई जाती है तो कार्रवाई की जाएगी।

डिविजनल कमिश्नर गौरव दयाल ने कहा, “संभावना यह है कि लाइटें कभी लगाई ही नहीं गईं।” उन्होंने कहा, “ये संभव ही नहीं है कि पेड़ों पर इतनी लाइटे लगाई गई हों। पेड़ों से लाइट चोरी होना असंभव बात है। वैसे, ये कॉन्ट्रैक्टर की जिम्मेदारी है कि वो साल भर इन लाइटों की देख-रेख करे। कॉन्ट्रैक्टर जो आरोप लगा रहा है, उसकी जाँच की जाएगी और अगर गलत शिकायत की गई है, तो उसके खिलाफ भी कार्रवाई करेंगे।”

गैंगस्टर अतीक अहमद के बेटे असद का एनकाउंटर करने वाले STF जवानों को वीरता पुरस्कार: स्वतंत्रता दिवस पर यूपी पुलिस के 17 जवानों को राष्ट्रपति करेंगी सम्मानित

उत्तर प्रदेश के कुख्यात माफिया अतीक अहमद के बेटे का एनकाउंटर करने वाले पुलिस की STF टीम को राष्ट्रपति द्वारा दिया जाने वाला वीरता पुरस्कार से सम्मानित किया जाएगा। अतीक अहमद का बेटा असद और उसका साथी शूटर मोहम्मद गुलाम उमेश पाल एवं उनके सुरक्षाकर्मियों की हत्या में शामिल थे। उमेश पाल की हत्या करके फरार होने के बाद उन पर 5 लाख रुपए का इनाम रखा गया था।

बता दें कि उत्तर प्रदेश पुलिस की स्पेशल टास्क फोर्स (STF) ने 13 अप्रैल 2023 को झाँसी में असद और शूटर मोहम्मद गुलाम को मुठभेड़ में मार गिराया था। उमेश पाल की हत्या का एक वीडियो सामने आया था, जिसमें ये दोनों घटनास्थल पर देखे गए थे। ये दोनों घटना के बाद फरार हो गए थे। उसके बाद पुलिस इन्हें पकड़ने के लिए लगातार दबिश दे रही थी, लेकिन हाथ में नहीं आ रहे थे।

इस टीम की कमान विमल कुमार सिंह और फील्ड में नवेंदु कुमार ने संभाली थी। एसटीएफ में शामिल पुलिसकर्मियों के नाम हैं- एसटीएफ पुलिस उपाधीक्षक विमल कुमार सिंह, पुलिस उपाधीक्षक फील्ड इकाई नवेंदु कुमार, निरीक्षक ज्ञानेंद्र कुमार राय, निरीक्षक अनिल कुमार सिंह, मुख्य आरक्षी सुनील कुमार, राकेश कुमार सिंह चौहान, मुख्य आरक्षी अनिल कुमार, मुख्य आरक्षी हरिओम।

केंद्रीय गृह मंत्रालय ने बुधवार (14 अगस्त 2024) को इस साल वीरता पुरस्कार और विशिष्ट सेवा पुरस्कार पाने वाले 1037 जवानों के नामों की घोषणा कर दी है। इनमें पुलिस के अलावा फायर सर्विस, होमगार्ड और सिविल डिफेंस कर्मियों के नाम भी शामिल हैं। इनमें यूपी पुलिस के 17 जवान शामिल हैं, जिनमें एसटीएफ जवान भी शामिल हैं। इन सभी को स्वतंत्रता दिवस पर सम्मानित किया जाएगा।

गृह मंत्रालय की तरफ से घोषित 1037 जवानों के नामों की सूची में 1 व्यक्ति को वीरता के लिए राष्ट्रपति पदक देने के अलावा 213 लोगों को वीरता पदक को दिया जाएगा। इनमें पुलिस सेवाओं के 208 जवान शामिल हैं। इनमें 31 जम्मू-कश्मीर पुलिस, 17-17 जवान उत्तर प्रदेश पुलिस और महाराष्ट्र पुलिस के, 15 जवान छत्तीसगढ़ पुलिस के, 12 मध्य प्रदेश पुलिस के हैं।

इसके अलावा, 7-7 जवान झारखंड, पंजाब और तेलंगाना पुलिस के शामिल हैं। अगर केंद्रीय पुलिस बल की बात की जाए तो 52 जवान केंद्रीय रिजर्व पुलिस बल (CRPF) के, 14 जवान SSB (सशस्त्र सीमा बल) के, 10 जवान CISF (केंद्रीय औद्योगिक सुरक्षा बल) के और 6 जवान BSF (सीमा सुरक्षा बल) के शामिल हैं।

क्राउडफंडिंग से जमा पैसे को शेयर बाजार में लगाया, क्रेडिट कार्ड का बिल भरा, शराब-खाने पर किया खर्च… TMC सांसद साकेत गोखले के खिलाफ मनी लॉन्ड्रिंग केस में आरोप तय

अहमदाबाद की स्पेशल कोर्ट ने मनी लॉन्ड्रिंग मामले में तृणमूल कॉन्ग्रेस के राज्यसभा सांसद साकेत गोखले के खिलाफ धन शोधन विरोधी कानून के तहत आपराधिक आरोप तय कर दिए है। प्रवर्तन निदेशालय (ईडी) ने बताया कि गोखले के खिलाफ क्राउड फंडिंग के जरिए जुटाए गए धन के दुरुपयोग को लेकर गुजरात पुलिस की एफआईआर के आधार पर यह कार्रवाई की गई है।

मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक, ईडी ने कहा कि अहमदाबाद (ग्रामीण) विशेष अदालत ने टीएमसी सांसद और राष्ट्रीय प्रवक्ता गोखले के खिलाफ मंगलवार (13 अगस्त 2024) को मनी लॉन्ड्रिंग रोकथाम कानून 2002 के तहत आपराधिक आरोप तय किए। मामले में 31 वर्षीय सांसद के खिलाफ पिछले साल चार्जशीट दायर की गई थी। आरोप है कि क्राउड फंडिंग से जुटाए गए धन को गोखले ने अपने ऊपर खर्च किया, जिनमें शेयर बाजार में इंट्रा डे ट्रेडिंग, क्रेडिट कार्ड बिल आदि के भुगतान शामिल हैं। वहीं, गोखले का कहना है कि उन्होंने इस धन का कोई दुरुपयोग नहीं किया।

ईडी ने कहा कि विशेष अदालत ने सीआरपीसी की धारा 309 के तहत गोखले की ओर से दायर उस आवेदन को खारिज कर दिया था, जिसमें उनके खिलाफ दर्ज अनुसूचित अपराध के मामले का फैसला होने तक पीएमएलए के तहत कार्यवाही को स्थगित रखने की माँग की गई थी।

गुजरात पुलिस की अहमदाबाद साइबर क्राइम ब्रांच ने टीएमसी नेता 30 दिसंबर, 2022 को चंदा के माध्यम से एकत्र किए गए धन के कथित दुरुपयोग के मामले में दिल्ली से गिरफ्तार किया था। उन पर आईपीसी की धारा 420 (धोखाधड़ी), 406 (आपराधिक विश्वासघात) और 467 (जालसाजी) के तहत आरोप लगाए गए हैं। स्पेशल कोर्ट ने कथित अनियमितताओं से जुड़े धन शोधन मामले में पिछले साल मई में गोखले को नियमित जमानत दे दी थी।

कट्टरपंथी हिंसा से बांग्लादेश का बैंड बजा, खाना महँगा-बैंकों से लिमिट में ही निकलेगा पैसा: जिन्होंने पाकिस्तान से दिलाई आजादी उनकी ‘शहीदी दिवस’ की छुट्टी भी खत्म

बांग्लादेश में शेख हसीना सरकार के गिरने के बाद वहाँ अब 15 अगस्त की राष्ट्रीय छुट्टी को निरस्त कर दिया गया है। ये छुट्टी इसलिए दी जाती थी क्योंकि इस दिन बांग्लादेश के संस्थापक शेख मुजीबुर रहमान की हत्या की गई थी। खबर है कि अंतरिम सरकार बनने के बाद मुख्य सलाहकार कार्यालय से ये आदेश पारित हुआ। इससे पहले बांग्लादेश में जगह-जगह शेख मुजीबुर रहमान की मूर्तियाँ तोड़ने का काम भी हुआ था।

बता दें कि बांग्लादेश की अंतरिम सरकार बनने के बाद भी मुल्क की स्थिति में सुधार नहीं है। इस्लामी कट्टरपंथियों की लगाई आग का असर बाजार पर भी नजर आ रहा है। वहाँ लोग महंगाई से तंग आ रहे हैं। बांग्लादेश ब्यूरो ऑफ स्टैटिक्स के आँकड़े बताते हैं उपभोक्ता मूल्य सूचांक पिछले 12 साल में सबसे ज्यादा रहा है जो कि11.66 फीसद है। इसी तरह खाद्य मुद्रास्फीति की बात करें तो ये भी 13 वर्षों में पहली बार 14 प्रतिशत के सबसे अधिक रही।

इन्हीं हालातों के बीच इंडिया टुडे ने ढाका के सबसे बड़े थोक बाजार कावरान में जाकर स्थिति का जायजा लिया और कुछ स्थानीय खुदरा व्यापारियों से बात की। इस दौरान इंडिया टुडे को पता चला कि कैसे बांग्लादेशी टका का मूल्य लगातार गिर रहा है। व्यापारियों पर सामान बेचने का दबाव है लेकिन मुनाफा उन्हें कोई नहीं मिल रहा। उन्हें बस उम्मीद है कि जल्द ही हालात सुधरेंगे और उनकी जिंदगी में बदलाव आए।

व्यापारियों ने बताया कि देश में अस्थिरता के कारण कावरान बाजार में लोगों ने आनाजाना कम कर दिया है। दाल-चावल की कीमत पहले के मुकाबले बढ़ गई है क्योंकि ये चीजें आयात के जरिए आती हैं। अब चूँकि आयात होने में व्यवधान है इसलिए दाल चावल के साथ अन्य वस्तुओं की कीमतें भी बढ़ सकती हैं।एक व्यापारी ने बताया कि वो लोग फिलहाल कीमतों को स्थिर रख रहे हैं लेकिन सरकार ने उन्हें आश्वासन दिया है कि वे अगले महीने तक कीमतें बढ़ा सकेंगे कयोंकि जरूरत की चीजें वाकई महंगी हो गई हैं।

वहीं ये भी बताया जा रहा है कि तख्तापलट की स्थिति में बांग्लादेश की विदेशी मुद्रा भंडार भी प्रभावित हुआ है। पिछले महीने जो भंडार 21.78 बिलियन था वो अब 20.48 बिलियन डॉलर पहुँच गया है। इस स्थिति से निपटने के लिए मुहम्मद यूनुस के नेतृत्व वाली अंतरिम सरकार को एक दिन में अधिकतम नकद निकासी की सीमा तक तय करनी पड़ी जो कि मात्र एक लाख है। व्यापारियों का कहना है कि ये सीमा तय होने से उन्हें विदेशी मुद्रा खरीदने में समस्या आ रही है और बाजार भी धीरे हो रहा है। ये स्थिति बांग्लादेश में आयात और ईंधन मुद्रास्फीति को प्रभावित करेगी।

मालूम हो कि साल 2009 में हसीना सरकार के आने के बाद बांग्लादेश के विकास को एक नया रूप मिला था। उन्होंने 2009 में सत्ता में आने के बाद से इस कदर उद्योग पर ध्यान केंद्रित किया और नए वैश्विक बाजारों में विस्तार किया कि आँकड़ों में बांग्लादेश ऊपर जाने लगा। इस दौरान बांग्लादेशी परिधानों की किफ़ायती कीमतों ने अंतरराष्ट्रीय खुदरा विक्रेताओं, विशेष रूप से ज़ारा और एचएंडएम जैसे फास्ट-फ़ैशन ब्रांडों को आकर्षित किया। जिससे न केवल लाखों नौकरियाँ पैदा हुईं बल्कि जीवन स्तर में भी सुधार हुआ। हसीना ने अपने कार्यकाल में बुनियादी ढाँचे में भारी निवेश किया, जिससे अंतरराष्ट्रीय कंपनियों को देश की ज़रूरतों को पूरा करने की क्षमता पर भरोसा मिला।

अभी जेल में ही रहेंगे दिल्ली के CM, शराब घोटाले में राहत देने से सुप्रीम कोर्ट का इनकार: मनीष सिसोदिया और स्वास्थ्य की दुहाई देकर अंतरिम जमानत माँग रहे थे अरविंद केजरीवाल

दिल्ली के मुख्यमंत्री और आम आदमी पार्टी के संयोजक अरविंद केजरीवाल को फिलहाल जेल में ही रहना होगा। शराब नीति घोटाले से जुड़े सीबीआई के केस में केजरीवाल की जमानत याचिका पर आज (14 अगस्त 2024) सुप्रीम कोर्ट में सुनवाई हुई। इस दौरान कोर्ट ने सीबीआई को नोटिस जारी कर जवाब तलब किया है। अब इस मामले में मामले की अगली सुनवाई 23 अगस्त को होगी। यानी तब तक के लिए केजरीवाल को जेल में ही रहना होगा।

लाइव लॉ की रिपोर्ट के मुताबिक, अरविंद केजरीवाल के मामले की सुनवाई सुप्रीम कोर्ट में जस्टिस सूर्यकांत और जस्टिस उज्जल भुयांन की बेंच कर रही है, जहाँ अरविंद केजरीवाल की तरफ से अभिषेक मनु सिंघवी पेश हुए। उन्होंने अरविंद केजरीवाल को जमानत न मिलता देख अंतरिम जमानत की माँग कर डाली, लेकिन तुरंत ही सुप्रीम कोर्ट ने इसे खारिज कर दिया। अभिषेक मनु सिंघवी ने स्वास्थ्य कारणों का हवाला देते हुए अंतरिम जमानत का अनुरोध किया था, लेकिन सुप्रीम कोर्ट ने साफ शब्दों में कह दिया, “हम कोई अंतरिम जमानत नहीं देने जा रहे।”

जानकारी के मुताबिक, सुप्रीम कोर्ट के सामने अरविंद केजरीवाल के पक्ष में सिसोदिया वाली दलील भी दी गई थी, जो नहीं चल पाई। दरअसल, सिसोदिया अपनी याचिका में कहा था कि 2023 अक्टूबर से उनके खिलाफ मुकदमे में कोई प्रोग्रेस नहीं हुई है। ऐसे में उन्हें जमानत मिल गई थी। सिंघवी ने वही पैंतरा अरविंद केजरीवाल के मामले में चलने की कोशिश की और फिर स्वास्थ्य का भी हवाला दिया, लेकिन सुप्रीम कोर्ट ने कोई भी राहत देने से इनकार कर दिया।

केजरीवाल के वकील अभिषेक मनु सिंघवी ने कोर्ट से कहा कि उनके पक्ष में 3 बार जमानत के आदेश दिए जा चुके हैं। इसमें सेक्शन 45 का मामला भी शामिल है। पीएमएलए कोर्ट ने मई में अंतरिम आदेश जारी कर दिया था। इसके बाद पीएमएलए में जून में नियमित जमानत दी गई थी, लेकिन हाई कोर्ट ने उस पर रोक लगा दी। ऐसे में उन्हें अब जमानत दी जा सकती है। जब PMLA जैसे आत्यधिक कठोर मामले में जमानत मिल चुकी है, तो सीबीआई केस भी जमानत मिलनी चाहिए। इस पर सुप्रीम कोर्ट ने सीबीआई से जवाब तलब करते हुए 23 अगस्त को अगली सुनवाई की तारीख तय कर दी है।

गौरतलब है कि दिल्ली शराब घोटाला मामले में मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल को ईडी ने 21 मार्च, 2024 को गिरफ्तार किया था। एजेंसी ने आरोप लगाया था कि केजरीवाल ही इस पूरे मामले के सरगना हैं। एजेंसी का आरोप है कि दिल्ली में शराब नीति बदल कर निजी विक्रेताओं को फायदा पहुँचाया और उनसे बदले में लाभ प्राप्त किए। इस मामले में ईडी की जमानत मिलने से पहले ही उन्हें सीबीआई ने गिरफ्तार कर लिया था। बीच में उन्हें लोकसभा चुनाव के लिए प्रचार का समय मिला था और कुछ दिनों के लिए चुनाव प्रचार करने वो जेल से भी बाहर आए थे।

क्या रेप-मर्डर के बाद कोलकाता की डॉक्टर को चीर दिया गया था? परिजनों ने खड़े किए सवाल, कहा- 3 घंटे इंतजार कराया, शव पर कपड़े तक नहीं थे

कोलकाता के आरजी कर मेडिकल कॉलेज और अस्पताल में रेप-मर्डर की शिकार हुई डॉक्टरों के परिजनों ने बताया है कि उनकी बेटी को उन्हें तीन घंटे तक देखने भी नहीं दिया गया, जबकि उन्हें शुरुआत में ये सूचना दी गई थी कि उनकी बेटी ने आत्महत्या कर ली है। उन्हें अस्पताल के बाहर ही रोके रखा गया और सिर्फ पिता को ही तीन घंटे बाद अंदर ले जाया गया, जहाँ उन्हें एक सिर्फ तस्वीर ही खींचने दी गई। बेटी का पैर 90 डिग्री मुड़ा हुआ था, ऐसा सिर्फ तब होता है, जब पेल्विक गर्डल टूटा हो। इस बीच, कलकत्ता हाई कोर्ट ने मामले की जाँच सीबीआई को सौंप दी है, साथ ही निर्देश भी दिए हैं कि एक भी सबूत बर्बाद न होने पाए।

पीड़ित परिवार ने अस्पताल प्रशासन पर खड़े किए सवाल

लल्लनटॉप की रिपोर्ट के मुताबिक, पीड़ित परिवार का कहना है कि हॉस्पिटल अथॉरिटी ने उन्हें फोन करके कहा कि उनकी बेटी ने आत्महत्या कर ली है। फिर जब वे हॉस्पिटल में शव देखने पहुँचे…उन्हें अस्पताल के बाहर तीन घंटे तक इंतजार करना पड़ा।

एक रिश्तेदार ने बताया, “तीन घंटे तक माँ-बाप रोते रहे, लेकिन उन्हें बच्ची को देखने अंदर नहीं जाने दिया। तीन घंटे बाद… पिता को अंदर जाने, बेटी का शव देखने की अनुमति दी। बेटी की केवल एक तस्वीर क्लिक करने की अनुमति दी गई जिसे उन्होंने बाहर आने पर हमें दिखाया। उसके शरीर पर कोई कपड़ा नहीं था। उसके पैर 90 डिग्री अलग-अलग थे। ऐसा तब तक नहीं हो सकता जब तक कि पेल्विक गर्डल टूट न जाए। इसका साफ मतलब है कि वह दो भागों में एकदम चीर दी गई थी।”

पीड़ित परिवार ने बताया कि बेटी का चश्मा टूटा हुआ था। ये ही शीशे उसकी आंखों में घुस गए थे। उसे गला घोंटकर मारा गया। पोस्टमार्टम रिपोर्ट में भी आँखों में चोट की वजह सीसे का घुसना बताया गया है, जो चश्मे का हिस्सा था। उन्होंने बताया, “चश्मे को कूटा गया, जिसकी वजह से आँखों से खून निकल गया।”

हॉस्पिटल में मौजूद एक रिश्तेदार ने बताया, “माँ जोर-जोर से रो रही थी। जब मैं वहाँ गया तो उन्होंने मुझे गले लगाया और रोते हुए कहा कि सब कुछ खत्म हो गया है। उन्होंने मुझे बताया कि अस्पताल ने उनसे कहा है कि बेटी ने आत्महत्या कर ली है।” सूत्रों के हवाले से रिपोर्ट कहती है कि आरजी कर अस्पताल के चेस्ट मेडिसिन विंग के सहायक अधीक्षक ने सबसे पहले पीड़िता के परिवार को घटना के बारे में सूचित किया।

बता दें कि पोस्टमार्टम रिपोर्ट में ये बात सामने आई है कि गला घोंटने के कारण उसकी थायरॉयड कार्टिलेज टूट गई थी और उसके निजी अंगों में गहरा घाव पाया गया था। उसके पेट, होठों, उंगलियों और बाएँ पैर पर चोट के निशान पाए गए। आँख में चश्मे का सीसा घुस गया था, क्योंकि रेप के समय उसके चेहरे पर चोट पहुँची थी। पीड़िता की नाक और मुँह को दबाया गया था और उसे चीखने से रोकने के लिए उसके सिर को दीवार से टक्कर मारी गई थी। रिपोर्ट में यह भी बताया गया है कि महिला की दोनों आँखों, मुँह और गुप्तांगों से खून बह रहा था।

गौरतलब है कि गुरुवार-शुक्रवार (8-9 अगस्त 2024) की रात 3-5 बजे के बीच डॉक्टर की रेप के बाद हत्या कर दी गई थी। इस मामले को दबाने का आरोप लगाया गया। शुरुआत में मृतक डॉक्टर के माता-पिता को आत्महत्या की सूचना दी गई थी, लेकिन विरोध-प्रदर्शन के बाद इस मामले ने बड़ा तूल ले लिया। इस मामले की जाँच सीबीआई को सौंप दी है, जिसने अपनी जाँच शुरू कर दी है।

सीबीआई ने इस मामले में एक बार फिर से एफआईआर दर्ज की है। सीबीआई कोई मामला हाथ में लेती है, तो अपनी तरफ से एफआईआर दर्ज करती है। इस बीच, फॉरेंसिक एक्सपर्ट और डॉक्टरों की टीम कोलकाता पहुँची है और जाँच शुरू कर चुकी है। सीबीआई की टीम पोस्टमार्टम रिपोर्ट देखने से लेकर घटनास्थल तक का मुआयना करेगी। इस मामले की सुनवाई करते हुए हाई कोर्ट ने कहा कि अस्पताल प्रशासन पीड़ित या उसके परिवार के साथ नहीं था। अदालत ने कहा, “यह मामला एक अनोखा मामला है। इसमें और समय बर्बाद नहीं किया जाना चाहिए। साक्ष्यों के साथ छेड़छाड़ की संभावना हो सकती है।”

अजीत अंजुम ने ‘कोलकाता हॉरर’ पर किया सवाल, महुआ मोइत्रा ने ब्लॉक कर दिया: कभी TMC सांसद के फैन थे ‘दिहाड़ी पत्रकार’, अब बता रहे हिप्पोक्रेट

बंगाल में महिला डॉक्टर के साथ हुई दरिंदगी मामले में पत्रकार अजीत अंजुम ने तृणमूल कॉन्ग्रेस से कुछ सवाल किए तो इस पर टीएमसी सांसद महुआ मोइत्रा भड़क गईं और उन्होंने उन्हें ट्विटर पर ब्लॉक कर दिया। हमेशा महुआ मोइत्रा के प्रशंसक रहे अजीत अंजुम से इस तरह ब्लॉक होना बर्दाश्त नहीं हुआ और उन्होंने महुआ की इस हरकत को सार्वजनिक कर दिया।

अंजीत अंजुम ने अपने एक ट्वीट में लिखा, “बंगाल की डॉक्टर बिटिया के साथ हुई दरिंदगी पर एक सवाल के साथ टैग क्या किया, महुआ मोइत्रा ने मुझे ब्लॉक कर दिया। वाह मैडम वाह। आप हर रोज मोदी की सत्ता से तीखे तेवर के साथ सवाल पूछती हैं और हमने आपकी सत्ता से एक सवाल पूछ दिया तो आपने तुरंत ब्लॉक कर दिया।”

उन्होंने आगे कहा,”आप एक सवाल नहीं सुन सकतीं? आपको सिर्फ पूछना आता है? अभिव्यक्ति की आज़ादी पर सिर्फ प्रवचन देना आता है? आपके राज में एक बेटी के साथ दरिंदगी हुई है और आपसे कोई सवाल भी नहीं पूछे? चलिए कोई बात नहीं, तभी लोग कहते हैं -हिप्पोक्रेसी की भी सीमा होती है।”

अजीत अंजुम की पीड़ा यही शांत नहीं हुई। उन्होंने इस मसले पर और ट्वीट किए। अगले ट्वीट में लिखा गया, हिप्पोक्रेसी की भी सीमा होती है मैडम महुआ मोइत्रा। आपके सूबे में एक बेटी के साथ ऐसी दरिंदगी पर जवाब माँगने का मतलब है ब्लॉक हो जाना। अभिव्यक्ति की आज़ादी की दुहाई मत अब दीजिएगा मैडम। बंगाल में सत्ताधारी दल की सांसद होकर अगर आप एक सवाल नहीं सुन सकतीं तो आपको यूपी -बिहार या किसी दूसरे सूबे में रेप की घटना पर बयान देने का हक़ नहीं है। दूसरे राज्यों में बलात्कार और हत्या की घटनाओं पर संसद या सड़क पर गला फाड़कर मत चिल्लाइगा मैडम।

बता दें कि बंगाल में महिला डॉक्टर के साथ घटी घटना पर अजीत अंजुम ने परिजनों के बयान की एक वीडियो साझा की थी। इस वीडियो में परिजनों के साथ खड़ी महिला बता रही थी कि पीड़ित परिवार पर क्या गुजर रही है। उन्हें अपनी 31 साल की बच्ची किस हाल में अस्पताल में देखनी पड़ी। उनके मुताबिक मृतिका के शव का पोस्टमार्टम हुआ तो पता चला कि उसकी हड्डी तोड़ दी गई थी, आँख से खून बह रहा था।

इसी वीडियो को साझ करते हुए अजीत अंजुम ने ममता बनर्जी, महुआ मोइत्रा, सागरिका घोष समेत अन्य टीएमसी महिला सांसदों से सवाल किया था- “क्या इस परिवार की तकलीफ को महसूस कर रहे हैं आपलोग? क्या आप लोगों के इस परिवार के पास अब तक जाना नहीं चाहिए था ? क्या आपके राज में एक बेटी के साथ बर्बरता, रेप और हत्या के बाद इसके परिवार को यूं बिलखना पड़ेगा? लानत है आप सभी पर। कोई हक नहीं है आप लोगों को किसी दूसरे राज्य में हुई रेप की घटना पर बोलने का। इस वीडियो को गौर से देखिए, सुनिए , इस दर्द को महसूस कीजिए और तय कीजिए कि आप लोगों को अब क्या करना चाहिए?”

गौरतलब है कि अजीत अंजुम हमेशा से महुआ मोइत्रा समेत तमाम नारीवादी पत्रकारों की समर्थक रहे हैं। वो अक्सर अपने निजी सोशल मीडिया अकॉउंट से भी महुआ मोइत्रा की तारीफ कर चुके हैं। उन्होंने उस समय भी महुआ का शुक्रिया किया था जब उन्होंने इंडियन एक्सप्रेस में बिलकिस बानो मामले पर लिखा था। उस समय अंजुम ने महुआ को सराहा था और आज वही महुआ अपने राज्य की बात आने पर आवाज उठाना तो दूर, सवाल करने पर भी ब्लॉक कर रही हैं। ऐसे में अजीम अंजुम की ये तिलमिलाहट और ट्वीट सही भी हैं।

महिला डॉक्टर का गैंगरेप

बता दें कि कोलकाता के आरजी कर हॉस्पिटल एंड मेडिकल कॉलेज में बीते शुक्रवार को महिला डॉक्टर के साथ हुई घटना सामने आई थी। परिवार को पहले बताया गया कि उसने सुसाइड किया है। हालाँकि पोस्टमार्टम रिपोर्ट के बाद पता चला कि पीड़िता के शरीर जिस प्रकार की चोटें पाई गई हैं। इसके अलावा मृतक लेडी डॉक्टर के प्राइवेट पार्ट काफी मात्रा में सीमेन मिला है जिसकी मात्रा करीब 151 ग्राम के करीब है। गोस्वामी ने कहा कि इतना सीमेन सिर्फ एक से अधिक व्यक्तियों के शामिल होने पर ही संभव है। कलकत्ता हाईकोर्ट ने इस मामले की जांच सीबीआई को सौंपी है।

कौन है आसिफ मर्चेंट, डोनाल्ड ट्रंप पर हमले की साजिश रचने में हुआ है गिरफ्तार: क्या डोनाल्ड ट्रंप पर चली गोली में बारूद ईरान-पाकिस्तान का?

अमेरिका के पूर्व राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप इस्लामिक कट्टरपंथियों की नजर में उनके सबसे बड़े दुश्मन हैं। 13 जुलाई 2024 को उनकी हत्या की कोशिश की गई थी, जिसमें उनके कान में गोली लगी। इस मामले में हमलावर को सीक्रेट सर्विस के एजेंट्स ने तुरंत ढेर कर दिया था। जाँच शुरू हुई तो पाकिस्तानी नागरिक आसिफ मर्चेंट को गिरफ्तार किया गया। आसिफ अमेरिका से भागने की कोशिश कर रहा था। अब पता चला है कि वो अमेरिका स्थित पाकिस्तानी दूतावास में तैनात आईएसआई एजेंट्स के संपर्क में था। इन कड़ियों को अमेरिकी एजेंसियाँ जोड़ रही हैं।

इस मामले में सीएनएन-न्यूज18 ने सूत्रों के हवाले से दावा किया है कि आसिफ मर्चेंट के आईएसआई लिंक की जाँच एफबीआई कर रही है। ये सूत्र पाकिस्तान से ही जुड़े हैं, जिन्होंने बताया है कि अमेरिकी एजेंसियों ने आसिफ मर्चेंट की जाँच में पाया है कि वो वाशिंगटन डीसी स्थित पाकिस्तानी दूतावास में तैनात आईएसआई एजेंट्स के साथ संपर्क में था और ‘मिलकर’ काम कर रहा था। आसिफ मर्चेंट को जुलाई में ही डोनाल्ड ट्रंप की हत्या की साजिश रचने के आरोप में गिरफ्तार किया गया था।

जानकारी के मुताबिक, आसिफ मर्चेंट पाकिस्तान और ईरान की सरकारों के साथ भी काम कर चुका है और इन देशों के दुश्मनों का ‘मुँह बंद’ करने वाले ठेकेदार के तौर पर काम कर रहा था। साफ शब्दों में कहें तो वो ईरान और पाकिस्तान के लिए ‘हिट जॉब’ कर रहा था, जो सुपारी किलिंग की तर्ज पर अपने कारनामों को अंजाम देते हैं। बताया जा रहा है कि आईएसआई अमेरिका में रह रहे उन पाकिस्तानियों को निशाना बना रही है, जो पाकिस्तान सरकार का विरोध करते हैं।

आसिफ मर्चेंट का कराची-तेहरान कनेक्शन

आसिफ मर्चेंट एक बैंकर था। मर्चेंट ने 2010 में कराची बैंक में ब्रांच मैनेजर के रूप में काम किया था। यहाँ उसकी जिम्मेदारी 1,850 मिलियन रुपये से अधिक की संपत्ति और देनदारी पोर्टफोलियो का मैनेजमेंट करना था, लेकिन कुछ समय पहले उसे बैंक ने गड़बड़झाले में पकड़ा और बैंक से बाहर निकाल दिया। उसकी एक बीवी कराची में रहती है। कराची में आलीशान घर में रहता है, यहाँ लक्जरी कारों से लेकर हर सुख-सुविधाएँ मौजूद हैं। उसका एक घर ईरान में भी है, जहाँ उसकी दूसरी बीवी और बच्चे रहते हैं। वो पाकिस्तान-ईरान, सीरिया-इराक और अन्य देशों की यात्रा करता रहता है, जिसमें अमेरिका भी है।

न्याय विभाग ने खुलासा किया कि वह एक बड़े ऑपरेशन की योजना बना रहा था और साजिश को आगे बढ़ाने से पहले पाकिस्तान की यात्रा करने की योजना बना रहा था। उसे 12 जुलाई को गिरफ्तार किया गया, उसी दिन उसने अमेरिका छोड़ने की योजना बनाई थी। उसने कासिम सुलेमानी की हत्या के बाद भी अमेरिका में एक हमले की योजना बनाई थी।

मर्चेंट के बारे में दावा किया गया है कि वो अमेरिका जाने से पहले वह कई दिनों तक ईरान में रहा। वह इसी साल अप्रैल में अपने प्लान को अंजाम देने के लिए पाकिस्तान से अमेरिका पहुँचा। अमेरिका में डोनाल्ड ट्रंप को निशाना बनाने, विरोध प्रदर्शन करने एवं ‘हितों’ को पूरा करने के लिए उसने 5 हजार डॉलर की रकम भी दी थी, लेकिन कथित तौर पर उसने जिस हत्यारे को ‘हायर’ किया था, वो एफबीआई का ही आदमी निकला। अमेरिका की फेडरल कोर्ट ने 16 जुलाई को उसे गिरफ्तार करने का आदेश दिया, जिसके बाद उसे गिरफ्तार कर लिया गया।