Thursday, July 18, 2024
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केरल की सत्ताधारी CPM फिर शुरू करेगी देश का सबसे बड़ा बूचड़खाना: ‘मालाबार मीट’ के लिए मँगाए निवेश, कटेगा भैंसा-बकरा

BDS में 500 से ज़्यादा शुरुआती निवेशकों हैं, जिनमें से अधिकांश पार्टी के कार्यकर्ता और समर्थक हैं। इन्होंने केरल चिकन और वायनाड कॉफ़ी सहित विभिन्न BDS उपक्रमों में पैसा लगाया है। उन्होंने कृषि क्षेत्र सहित विभिन्न परियोजनाओं में 70 करोड़ रुपए से ज़्यादा का निवेश किया था। हालाँकि, कोविड के कारण BDS का कर्ज़ बढ़कर 100 करोड़ रुपए से ज़्यादा हो गया।

केरल की सत्ताधारी कम्युनिस्ट पार्टी ऑफ इंडिया (मार्क्सवादी) यानी CPM द्वारा नियंत्रित ब्रह्मगिरी डेवलपमेंट सोसाइटी (BDS) द्वारा संचालित देश से सबसे बड़े बूचड़खाने को पुनर्जीवित की प्रक्रिया तेज हो गई है। BDS ने अपने प्रमुख उद्यम ‘मालाबार मीट’ ब्रांड निजी पूंजी स्वीकार की है। कर्ज तथा निवेशकों एवं कर्मचारियों के विरोध के कारण बीडीएस ने लगभग एक साल पहले मीट संयंत्र बंद कर दिया था।

दरअसल, पशु बाजारों से वध के लिए मवेशियों की खरीद-बिक्री पर राष्ट्रव्यापी प्रतिबंध के बाद BDS ने केरल में बीफ का सबसे बड़ा आपूर्तिकर्ता बनने की कोशिश की थी। इसके लिए CPM ने भरपूर मदद भी की थी। हालाँकि, कोरोना और राजनीतिक खींचतान के बाद यह कर्ज में डूब गई और आखिरकार मीट प्लांट बंद करना पड़ा था। अब मालाबीर मीट ब्रांड को बचाने की कोशिश की जा रही है।

ऑनमनोरमा ने सूत्रों के हवाले से कहा कि कोट्टयम स्थित फर्म बफेट ब्लूवे प्राइवेट लिमिटेड (BBL) ने BDS में हिस्सेदारी ली है। BBL इस प्लांट के रखरखाव में BDS की मदद करेगी। इसके लिए वह कार्यशील पूँजी जुटाएगी और आवश्यक लाइसेंस प्राप्त करेगी। सूत्रों ने बताया कि मध्य केरल की यह फर्म विदेशी बाजारों में भैंस के मांस के निर्यात में शामिल है।

BDS के COO डॉक्टर बी. सुनील कुमार ने बताया कि इससे केरल में ‘पिंक क्रांति’ होगी। उन्होंने कहा, “निजी भागीदारी के साथ मालाबार मीट ब्रांड को फिर से लॉन्च करने के लिए विस्तृत व्यवस्था की जा रही है। हमने कोट्टयम स्थित कंपनी के साथ समान लाभ-साझाकरण के आधार पर एक समझौता किया है। हम प्लांट की क्षमता के 100% तक उत्पादन बढ़ाने की भी सोच रहे हैं।”

मालाबार मीट अपने मौजूदा फ्रोजन बीफ, मटन और चिकन आइटम में और उत्पाद जोड़ेगा। उन्होंने कहा कि मौजूदा आउटलेट्स को गुणवत्तापूर्ण एवं प्रमाणित ताजा मांस उपलब्ध कराने के लिए सुल्तान बाथरी और कलपेट्टा नगरपालिकाओं सहित स्थानीय प्रशासनिक निकायों द्वारा बातचीत शुरू की गई है। सुनील कुमार ने कहा, “अछूते बाजार स्थान का दोहन करने के लिए ‘ताजा मांस’ और ‘ठंडा मांस’ आपूर्ति श्रृंखला भी बनाई जाएगी।”

BDS में 500 से ज़्यादा शुरुआती निवेशकों हैं, जिनमें से अधिकांश पार्टी के कार्यकर्ता और समर्थक हैं। इन्होंने केरल चिकन और वायनाड कॉफ़ी सहित विभिन्न BDS उपक्रमों में पैसा लगाया है। उन्होंने कृषि क्षेत्र सहित विभिन्न परियोजनाओं में 70 करोड़ रुपए से ज़्यादा का निवेश किया था। हालाँकि, कोविड के कारण BDS का कर्ज़ बढ़कर 100 करोड़ रुपए से ज़्यादा हो गया।

इस दौरान मालाबार मीट को 46 करोड़ रुपए और केरल चिकन प्रोजेक्ट को 26 करोड़ रुपए का घाटा हुआ। दावा यह भी किया जाता है कि CPM के नेताओं के आपसी मतभेद के कारण इस ड्रीम प्रोजेक्ट को बंद करना पड़ा। पूर्व चेयरमैन पी. कृष्ण प्रसाद, जिन्हें पिनाराई विजयन के विरोधी गुट का माना जाता है, को कर्ज बढ़ने के कारण चेयरमैन पद से हटना पड़ा था।

निवेश के साथ ही इस संयंत्र के पूर्व कर्मचारियों को बहाली की प्रक्रिया शुरू की जाएगी। मीट प्रोसेसिंग यूनिट के 70 से ज़्यादा कर्मचारियों में से 26 को बहाल किया जाएगा। बाकी कर्मचारियों को चरणबद्ध तरीके से भर्ती किया जाएगा। पिछले महीने बंद हुई वायनाड कॉफ़ी प्रोजेक्ट भी कनियम्पट्टा स्थित एक सहकारी संस्था से निवेश के बाद सुधार के दौर में है।

बता दें कि वायनाड स्थित ब्रह्मगिरी डेवलपमेंट सोसाइटी (बीडीएस) देश में सबसे बड़े बहु-प्रजाति बूचड़खाने का मालिक है। कोरोना से पहले इस संयंत्र की प्रतिदिन की क्षमता 45 टन थी। जबकि सालना टर्नओवर 7.5 करोड़ रुपए थी। मालाबार मीट ब्रांड के कई फ्रेंचाइजी भी बाँटे गए थे। इसके साथ ही राज्य सरकार की ओर से किसानों को भैंस के बछड़े दिए गए थे पालने के लिए, ताकि भैंसों की कमी ना हो।

हालाँकि, केंद्र सरकार द्वारा पशुओं के वध से संबंधित नियम बना दिए गए। इसके बाद BDS ने इसमें अवसर खोजा और साल 2017 में BDS ने अगले पाँच साल के भीतर यानी साल 2022 तक राज्य के 6,500 करोड़ रुपए के बीफ बाजार में कम से कम 10% हिस्सेदारी हासिल करने का लक्ष्य रखा था। हालाँकि, कोरोना के कारण यह फेल हो गया।

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ऑपइंडिया स्टाफ़
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कार्यालय संवाददाता, ऑपइंडिया

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