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मुस्लिमों का बदला, जय फिलिस्तीन, कश्मीर में 90 वाला नरसंहार की धमकी… मुस्लिम विल बी मुस्लिम, जिस ‘मजहबी वफादारी’ से आगाह कर गए थे अंबेडकर वह खतरा टला नहीं

हाल के समय में कई चीजें ऐसी सामने आई हैं जो कि हिंदुओं के लिए काफी डराने वाली है। ये डर लगातार गहरा होता जा रहा है। ऐसा इसलिए क्योंकि एक तरफ एक मुस्लिम सांसद कश्मीर में हुए हिंदुओं के नरसंहार को खुलेआम खारिज करते हैं और धमकी देते हैं कि 370 हटा रहा तो वापस से पुराने हाल होंगे। दूसरे मुस्लिम नेता कहते हैं भाजपा को हराकर मुस्लिमों ने बीजेपी से बदला लिया है और तीसरे नेता संसद में खुलेआम जाकर ‘जय फिलीस्तीन’ के नारे बुलंद करता दिखते हैं। ऐसे लोगों के बीच देश के प्रधानमंत्री ‘सबका साथ सबका विकास’ के नारे के साथ देश को विकसित करने की सोच रहे हैं। सवाल है कि क्या सिर्फ प्रधानमंत्री के सोचने से ऐसा संभव हो पाएगा वो भी तब जब मुस्लिम सांसद और नेता इस प्रकार से खुलकर हिंदूविरोधी बयानबाजी करते हैं और बात सिर्फ मजहब की और मजहब के लोगों की करते हैं।

‘370 हटने से कश्मीरियों में गुस्सा, कभी भी भड़क सकते हैं’ : JKNC नेता रुहुल्लाह मेहदी

श्रीनगर से नवनिर्वाचित सांसद व जम्मू-कश्मीर नेशनल कॉन्फ्रेंस पार्टी के नेता रुहुल्लाह मेहदी ने खुलेआम भारत की सरकार के खिलाफ प्रोपगेंडा साइट द वायर पर बयान दिया। रुहुल्लाह मेहदी ने इस इंटरव्यू में कहा कि कश्मीरियों में आर्टिकल 370 हटाए जाने का गुस्सा है जो कि कभी फूट सकता है जैसा कि स्वतंत्रता के 40 साल बाद देखने को मिला था। आरफा खानुम शेरवानी को दिए इटरव्यू में रुहुल्ला मेहदी ने इस्लामी आतंक को धो पोंछने के लिए साथ इस मुद्दे पर बात की। साथ ही कहा कि मुस्लिमों को टारगेट करके मॉब लिंचिंग हो रही है, सिखों को खालिस्तानी कहा जा रहा है, ईसाइयों को धर्मांतरण का आरोप लगाकर सामाजिक कार्य करने से रोक रहे हैं।

दिलचस्प बात ये है कि अपने इंटरव्यू में मेहदी को हिंदुओ की आवाज उठानी जरूरी नहीं लगी। इसके अलावा रुहुल्लाह ने साफ-साफ कश्मीरी पंडितों के उस दर्द से खारिज कर दिया जिसे वो लोग पिछले 34 साल से सीने में दबाए हुए थे और कश्मीर फाइल्स में दिखाई गई हकीकत को देख रो पड़े। जेकेएनसी नेता ने तो कहा कि द कश्मीर फाइल्स में दिखाई गई चीजें सच नहीं हैं। मेहदी एक तरफ इस्लामी कट्टरपंथ को मानने से इनकार करते दिखे है तो दूसरी तरफ विपक्षी पार्टियों को हिंदुत्व से लड़ने के लिए मुस्लिमों के साथ खड़े होने को कहते दिखे।

मुस्लिमों ने वोट देकर भाजपा को दिया जवाब: मौलाना मदनी

इसी तरह जमीयत उलेमा ए हिंद के प्रमुख मौलाना अरशद मदनी ने भी लोकसभा चुनावों के बाद ताजा बयान दिया है। चुनावों के नतीजों पर मौलाना मदनी ने कहा कि लोगों ने नफरत और सांप्रदायिकता की राजनीति को खारिज कर दिया और इसका सारा श्रेय मुस्लिमों द्वारा बुद्धिमानी से किए गए मतदान को जाता है। अगर मतदाताओं ने समझदारी से वोट नहीं डाले होते तो नतीजे अलग हो सकते थे। ये मौलाना मदनी वहीं है जिन्हें तालिबान एक आतंकी संगठन नहीं लगता बल्कि उन्हें वो स्वतंत्रता सेनानी जैसा मानते हैं। मदनी ने एक बार इंटरव्यू में तालिबान का पक्ष लेते हुए कहा था कि अगर सिर्फ गुलामी के खिलाफ लड़ना आतंकवाद है तो इस हिसाब से तो महात्मा गाँधी, जवाहर लाल नेहरू और मौलाना हजरत शेखुद्दीन भी आतंकवादी थे।

‘जय फिलीस्तीन’ के नारे

इनके अलावा हैदराबाद के सांसद असदुद्दीन ओवैसी को पिछले दिनों खुलेआम जय फिलिस्तीन के नारे लगाते सुना ही गया था। उन्होंने लोकसभा सदन में सांसद पद की शपथ उर्दू भाषा में ली थी। शपथ के बाद ओवैसी को “जय भीम-जय मीम” और “अल्लाहू अकबर” के नारों के साथ “जय फिलिस्तीन” कहते सुना गया था। जबकि देश का जो संविधान ओवैसी को सांसद बनने के लिए योग्य बनाता है उसी संविधान के अनुच्छेद 102, 103 में वह स्थितियाँ बताई गई हैं, जिनके अंतर्गत किसी संसद सदस्य को अयोग्य घोषित किया जा सकता है। अनुच्छेद 102 के भाग ‘घ’ में लिखा है कि ऐसे संसद सदस्य को अयोग्य घोषित किया जा सकता है जो भारत का नागरिक नहीं है या उसने किसी दूसरे राष्ट्र की नागरिकता ले ली है।

कैसे होगा सबका-साथ सबका विकास?

ऊपर जिक्र किए गए तीनों नेताओं के ऐसे बयानों से स्पष्ट है कि ऐसे मुस्लिम नेता समाज में लोकतंत्र और संविधान की दुहाई देते हुए खुलेआम मजहब की राजनीति करते हैं और उनके समर्थक इसी आधार पर इन्हें अपना मसीहा मानते हैं जबकि दूसरी ओर प्रधानमत्री नरेंद्र मोदी सरकार में आने के बाद से लगातार जो देश के हर वर्ग के लिए काम करने में लगे हैं मगर उससे इनके समर्थकों का कोई सरोकार नहीं। वो भूल बैठे है कि पीएम मोदी ने ही सरकार बनने के बाद तीन तलाक से मुस्लिम महिलाओं को राहत दिलवाई और इसके खिलाफ कानून बनाया। इसके अलावा घर-घर राशन बिजली-पानी बिन किसी भेदभाव के पहुँचाया… पीएम मोदी ने मुस्लिम समुदाय के जीवन स्तर को सुधारने के लिए जो प्रयास किए उसके कारण कई बार उनके धुर समर्थक तक उनके ऊपर ‘तृप्तिकरण’ का आरोप लगाते दिखे। बावजूद इसके उन्होंने जैसे देश के बाकी समुदायों के लिए काम किया, वैसा मुस्लिमों के हित में करते दिखे ताकि उन्हें अच्छी शिक्षा, स्कॉलरशिप और अन्य हर वो सुविधा मिले जो बाकी नागरिकों को मिलती है… लेकिन जब बात आई उन्हें समर्थन करने की तो मजहब परस्त लोगों को उनसे ज्यादा वो लोग विश्वसनीय लगे जो बातें ही सिर्फ अराजकता और हिजाब-बुर्का की करते हैं।

बाबासाहब अंबेडकर के क्या थे विचार

मालूम हो कि भले ही आज पीएम मोदी सरकार में इन नेताओं का और इनके समर्थकों का ऐसा चेहरा उभर कर सामने आ रहा है, लेकिन हकीकत तो यह है कि दशकों पहले डॉक्टर भीम राव अंबेडकर खुद भी इनकी ऐसी प्रवृति के बारे में सबको बता चुके हैं। अंबेडकर के विचारों का एक संग्रह में पढ़ने को मिलता है-

“इस्लाम में जिस भाईचारे की बात की गई है, वो केवल मुस्लिमों का मुस्लिमों के साथ भाईचारा है। इस्लामिक बिरादरी जिस भाईचारे की बात करता है, वो उसके भीतर तक ही सीमित है। जो भी इस बिरादरी से बाहर का है, उसके लिए इस्लाम में कुछ नहीं है- सिवाय अपमान और दुश्मनी के। इस्लाम के अंदर एक अन्य खामी ये है कि ये सामाजिक स्वशासन की ऐसी प्रणाली है, जो स्थानीय स्वशासन को छाँट कर चलता है। एक मुस्लिम कभी भी अपने उस वतन के प्रति वफादार नहीं रहता, जहाँ उसका निवास-स्थान है, बल्कि उसकी आस्था उसके मज़हब से रहती है। मुस्लिम ‘जहाँ मेरे साथ सबकुछ अच्छा है, वो मेरा देश है’ वाली अवधारणा पर विश्वास करें, ऐसा सोचा भी नहीं जा सकता।”

इसके अलावा बाबासाहब डॉक्टर भीमराव आंबेडकर ने कहा था कि इस्लाम कभी भी किसी भी अपने नुमाइंदे को यह स्वीकार नहीं करने देगा कि भारत उसकी मातृभमि है। बाबासाहब के अनुसार, इस्लाम कभी भी अपने नुमाइंदो को यह स्वीकार नहीं करने देगा कि हिन्दू उनके स्वजन हैं, उनके साथी हैं। बाबा साहब ने इस मामले पर विचार प्रकट करते हुए ये भी कहा था कि मुस्लिम उसी क्षेत्र को अपना देश मानेगा, जहाँ इस्लाम का राज चलता हो…आज के समय में बाबा साहब की मुस्लिमों को लेकर कही गई ये सारी बात सत्य साबित होती दिखती हैं। बाबा साहब ने जैसा कहा था कि मुस्लिम उसी क्षेत्र को अपना मानेंगे जहाँ इस्लाम का राज चले, ठीक वैसे ही मुस्लिम आज के समय में उसी नेता पर विश्वास जताते हैं जो सिर्फ इस्लाम की बात करे। उनके लिए विकास का अर्थ देश का विकास नहीं बल्कि मजहबी विकास है। वहीं शिक्षा का अर्थ दीनी तालीम का प्रसार है।

अखिलेश यादव जिसके ‘भक्त’ वह भगदड़ के बाद भागा, CCTV फुटेज से मीडिया रिपोर्टों में दावा: कैंसर से जो मरी उसको जिंदा करने के दावे में 24 साल पहले हुई थी गिरफ्तारी

उत्तर प्रदेश के हाथरस में कथावाचक नारायण साकार विश्व हरि उर्फ ‘भोले बाबा’ के सत्संग में हुई भगदड़ में मृतकों की संख्या 121 हो गई है। भोले बाबा के अनुयायी मानते हैं कि उनमें चमत्कारी शक्ति है। इसलिए घटना के दिन उनके चरणों की धूल लेने के लिए भगदड़ मची और इतने लोग मारे गए। इतना ही नहीं, भोले बाबा ने 23 साल पहले एक मृत लड़की को जिंदा करने का दावा भी किया था।

बात साल 2000 की है। उसने 16 साल की एक मृत लड़की के शव को उसके परिजनों से जबरन छीन लिया था और दावा किया था कि वह उसे जिंदा कर देगा। खुद के जादुई शक्तियों के कथित दावे के कारण भोले बाबा के खिलाफ साल 2000 में आगरा के शाहगंज थाने में मुकदमा दर्ज कर गिरफ़्तार कर लिया गया था। हालाँकि, बाद में यह मामला बंद कर दिया गया था।

लड़की को जिंदा करने का दावा, पुलिस ने किया था गिरफ्तार

आगरा के शाहगंज के तत्कालीन SHO तेजवीर सिंह ने बताया, “18 मार्च 2000 को सूरज पाल 200-250 लोगों के साथ श्मशान घाट पर पहुँचे। वहाँ स्थानीय व्यक्ति की 16 वर्षीय बेटी स्नेहलता का शव उसके परिवार द्वारा लाया गया था। सूरज पाल और अन्य लोगों ने परिवार को अंतिम संस्कार करने से रोक दिया और उन्हें समझाने की कोशिश की कि वह उसे फिर से जीवित कर सकता है।”

तेजवीर सिंह ने बताया कि भोले बाबा और उसके लोगों ने शव को परिवार से जबरन छीन लिया था। इस बीच पुलिस को सूचना दी गई। उन्होंने आगे बताया, “जब हम मौके पर पहुँचे तो सूरज पाल और उसके समर्थकों ने हमसे बहस की। उन्होंने दावा किया कि वह लड़की को फिर से जीवित कर सकता है। इसके बाद उसके समर्थकों ने पुलिस टीम पर पथराव शुरू कर दिया।”

इसके बाद अतिरिक्त पुलिसकर्मियों को बुला स्थिति को नियंत्रित किया गया और सूरज पाल एवं उसके साथियों को गिरफ्तार कर लिया गया। शाहगंज थाने में सूरज पाल, उसकी पत्नी और चार अन्य (जिनमें से दो महिलाएं थीं) समेत छह लोगों के खिलाफ आईपीसी की धारा 109 और ड्रग्स एवं मैजिक रेमेडीज (आपत्तिजनक विज्ञापन) के तहत मामला दर्ज किया गया।

इस मामले में सूरज पाल और उनकी पत्नी सहित सभी 6 लोगों के खिलाफ जाँच करके आरोप पत्र भी दाखिल किया गया। बाद में नए सबूत सामने आने के बाद आगे की जाँच की गई। आगरा के पुलिस उपायुक्त सूरज कुमार राय ने बताया, “आगे की जाँच के दौरान एकत्र किए गए सबूतों के आधार पर मामले में क्लोजर रिपोर्ट दाखिल की गई।”

भूत-प्रेत भगाने का होता था काम

उत्तर प्रदेश के पुलिस अधिकारियों का कहना है कि कॉन्स्टेबल रह चुका सूरजपाल जाटव अपनी पत्नी प्रेमावती के साथ आगरा के केदारनगर इलाके में रहते थे। उनके साथ दो महिलाओं सहित चार अन्य लोग भी रहा करते थे। ये खुद को बाबा में प्रचारित करता था। इसकी सभा में विशेष रूप से दलित और रिक्शा चालक, मजदूर आदि कम आय वर्ग के लोग आते थे।

कई लोगों के हवाले से लिखा है कि भोले बाबा किसी तरह का चढ़ावा नहीं माँगते थे और वे दलित परिवार से थे। इसलिए वे उनकी तरफ ज्यादा आकर्षित हुए। हादसे में घायल एक महिला की बहन उर्मिला देवी ने कहा, “बाबा न तो कुछ लेते हैं और न ही कुछ माँगते हैं। अपने सत्संग में वे हमें झूठ न बोलने और मांस, मछली, अंडा और शराब नहीं खाने-पीने की सलाह देते थे।”

अस्पताल के बिस्तर पर घायल पड़ी हुई उर्मिला देवी की बहन तारामती ने इंडियन एक्सप्रेस से कहा, “जब सत्संग समाप्त हो रहा था तो भोले बाबा ने कहा, ‘आज प्रलय आएगी और फिर प्रलय आ गई।” हाथरस जिले के डोनकेली गाँव के निवासियों का कहना है कि हर गाँव में भोले बाबा के 10 से 12 सेवादार (मुख्य अनुयायी) हैं। वे लोगों को बसों आदि से कार्यक्रम स्थल तक ले जाते हैं।

भोले बाबा के कई अनुयायी अपने गले में उनकी तस्वीर वाला पीला लॉकेट पहनते हैं। उनका गुलाबी रंग का विशेष ड्रेस होता है। एक अन्य अनुयायी ने बताया कि ये हादसा बाबा सत्संग के बाद बाबा के चरण की धूल लेने के लिए हुई भगदड़ के कारण हुई। उसका कहना है, “यदि आप उनके पैरों की धूल अपने शरीर या सिर पर लगाते हैं, तो यह सभी बीमारियों को ठीक कर देती है”।

वहीं, सोखना गाँव के लोगों का कहना है कि ‘भोले बाबा’ भूत-प्रेत भगाने का काम करते थे। खासकर छोटी लड़कियों पर से। एक ग्रामीण ने दावा किया, “सत्संग में 100 से अधिक लोग भूत-प्रेत से पीड़ित थे और उन्होंने सभी को ठीक कर दिया।” सिकंदराराऊ के दामादपुरा में कुछ महिलाओं ने बताया, “उन्होंने हमसे कहा कि अगर हम अच्छे मार्ग पर चलेंगे तो अगले जन्म में बेहतर होगा।”

हादसे के बाद भागते भोले बाबा की फुटेज आई सामने

हादसे के बाद भोले बाबा ने कहा था कि भगदड़ से पहले ही वह अपने सत्संग स्थल से चले गए थे। हालाँकि, सामने आए सीसीटीवी फुटेज में दिख रहा है कि वह कड़ी सुरक्षा के बीच वहाँ से निकल रहे हैं। 47 सेकंड की क्लिप में भोले बाबा के सुरक्षाकर्मी काफिले के आने की सूचना मिलने पर सड़क के डिवाइडर और सड़क के दोनों तरफ हरकत में आ जाते हैं। इसके बाद बाबा वहाँ से निकल जाते हैं।

काफिले के रवाना होने का समय प्रत्यक्षदर्शियों के बयानों से मेल खाता है। इसमें बताया गया है कि भगदड़ तब शुरू हुई, जब श्रद्धालु भोले बाबा की कार के पीछे भागते समय फिसलकर कीचड़ में गिर गए। इंडिया टीवी ने यह सीसीटीवी फुटेज हासिल की है। इसमें काले कपड़े पहने सुरक्षाकर्मियों के बीच दर्जनों मोटरसाइकल वाले काफिले के साथ बाबा वहाँ से निकलते हैं।

बता दें कि उत्तर प्रदेश पुलिस ने सत्संग के आयोजकों के खिलाफ एफआईआर दर्ज की है। FIR में उन पर सबूत छिपाने, स्वीकृत क्षमता से अधिक लोगों को लाने और अधिकारियों के साथ सहयोग नहीं करने का आरोप लगाया गया है। FIR में कहा गया है कि आयोजकों ने 80,000 लोगों के लिए अनुमति माँगी थी, लेकिन 2.5 लाख से अधिक लोगों को कार्यक्रम स्थल में आने दिया। इससे समस्या उत्पन्न हुई।

केरल का हर तीसरा सरकारी कर्मचारी मुस्लिम/ईसाई, यादव 26 तो क्षत्रिय केवल 28: कॉन्ग्रेस-लेफ्ट के इकोसिस्टम में तुष्टिकरण से ‘सोशल जस्टिस

मीडिया रिपोर्ट्स के अनुसार, केरल की विधानसभा (नियामसभा) में रखा गया आँकड़ा बताया है कि राज्य के पास वर्तमान में 5,45,423 कर्मचारी हैं। यह अलग-अलग विभागों में कार्यरत हैं। इन कर्मचारियों में से इस आँकड़े के मुताबिक राज्य सरकार के लिए 73,774 मुस्लिम काम करते हैं। यह राज्य सरकार के पूरे कर्मचारियों का 13.5% है।

वहीं ईसाइयों की संख्या राज्य सरकार के लिए काम करने वाले मुस्लिमों से अधिक है। राज्य सरकार के 73,714 कर्मचारी अगड़े ईसाई हैं। इसके अलावा लैटिन चर्च को मानने वाले 22,452 कर्मचारी केरल सरकार में कार्यरत हैं। इसके अलावा 2399 कर्मचारी ऐसे हैं जो कि धर्मान्तरित हो कर ईसाई बने हैं। इसी के साथ 929 कर्मचारी ऐसे हैं जो नादर ईसाई हैं।

इस प्रकार सभी ईसाई समुदाय की संख्या केरल की सरकारी नौकरियों में 99,494 है। इनका प्रतिशत केरल की सरकारी नौकरियों में 18.25% है। इसके अलावा जैन समुदाय के 27 कर्मचारी भी केरल सरकार के लिए काम करते हैं। राज्य की सरकारी नौकरियों में 1,73,268 ईसाई और मुस्लिम हैं।

इस प्रकार केरल सरकार के कर्मचारियों में 31.5% ईसाई और मुस्लिम हैं। यानी राज्य के लगभग एक तिहाई कर्मचारी मुस्लिम और ईसाई हैं। इसके अलावा केरल की सरकारी नौकरियों में अनुसूचित जातियों से 51,783 जबकि अनुसूचित जनजातियों से 10,513 कर्मचारी हैं। 7113 ब्राह्मण भी राज्य के सरकारी कर्मचारी हैं, यह कुल सरकारी कर्मचारियों का 1.5% भी नहीं है।

केरल सरकार में केवल 26 यादव जबकि 28 क्षत्रिय ही सरकारी नौकरी में हैं। सबसे बड़ी संख्या इझावा समुदाय की है जो पिछड़ी जाति माने जाते हैं। इस समुदाय से 1.15 लाख कर्मचारी केरल सरकार में हैं। नायर समुदाय के भी 1.08 लाख कर्मचारी केरल सरकार में हैं।

955 कर्मचारी ऐसे भी हैं जो अपने आप को किसी भी वर्ग में वर्गीकृत नहीं करते। केरल में मुस्लिम और ईसाई कुल जनसांख्यिकी का लगभग 50% हैं। इसमें 27% इस्लाम धर्म को मानने वाले और 22% ईसाइयत को मानते हैं। दोनों धर्मों में अलग-अलग तरह के पंथों को मानने वाले लोग हैं।

केरल सरकार को राज्य में नौकरियों में विविधता ना होने के लिए विपक्ष लगातार घेर रहा है। इसके अलावा विपक्ष ने केरल की वामपंथी सरकार को आर्थिक हालत और केरल पर चढ़े कर्जे के लिए भी घेरा है। केरल की विधानसभा में लगातार विपक्ष सरकार पर हमलावर है।

चाचा ने दी थी मोदी की बोटी-बोटी करने की धमकी, भतीजा संविधान का उड़ा रहा मजाक: इमरान मसूद के सांसद बनते ही परिजन दिखाने लगे रंग, Video वायरल

सहारनपुर से कॉन्ग्रेस के सांसद इमरान मसूद के भतीजे हमजा मसूद द्वारा संविधान का मजाक उड़ाने का मामला सामने आया है। इसका वीडियो सोशल मीडिया पर वायरल हो रहा है। वीडियो में हमजा के साथ एक युवती भी नजर आ रही है। हालाँकि, जब बवाल बढ़ा तो हमजा ने यह कहा कि यह एक फन वीडियो था। हालाँकि, सोशल मीडिया पर इसके खिलाफ कार्रवाई की माँग उठ रही है।

दरअसल, यह वीडियो बुधवार (3 जुलाई 2024) को सोशल मीडिया पर वायरल हुआ। इस वीडियो में दिख रहा है कि हमजा मसूद हाथ में संविधान की पुस्तक लेते हुए है। इसके साथ में वो कह रहा है, मैं ह हमजा मसूद, ईश्वर की/अल्लाह की शपथ लेता हूँ कि मैं विधि द्वारा स्थापित भारत के संविधान के प्रति सच्ची श्रद्धा और निष्ठा रखूँगा।”

यहाँ तक तो ठीक है, लेकिन इसके बाद हमजा मसूद जो कुछ कहता है कि वह संविधान का मजाक उड़ाने वाला है। वीडियो में यह भी दिख रहा है कि जब हमजा मसूद संविधान का मजाक उड़ा रहा होता है, उस समय उसके साथ खड़ी युवती खिलखिलाती रहती है। हमजा कहता है, “मैं ‘कुछ-कुछ करके’ अक्षुण्ण रखूँगा। ये मेरा वचन है। मेरा वचन ही है शासन।”

इस वायरल वीडियो को शेयर करते हुए भाजपा नेता अजय आलोक ने लिखा, “ये ‘शहज़ादे’ की फ़ौज के फ़िदायीन गुरिल्ले हैं, इनके चचा जो सांसद बने हैं। उन्होंने मोदी जी की बोटिया काटने की बात कही थी, ये संविधान को काट रहे हैं। इनका वचन इनका शासन। अच्छे जा रहे हो। राहुल गाँधी फ़ौज तैयार करो।”

इस वीडियो के वायरल होने के बाद हमजा मसूद ने व्‍हॉट्सऐप ग्रुप पर कहा कि वह यूँ ही फन वीडियो बना रहा था। उसका उद्देश्य किसी की भावनाओं को आहत करना नहीं था। बता दें कि हमजा के अब्बू नौमान मसूद और सांसद इमरान जुड़वाँ भाई हैं। नौमान गंगोह नगरपालिका के पूर्व चेयरमैन हैं और गंगोह की राजनीति में सक्रिय रहते हैं। हमजा भी नगरपालिका के मौजूदा बोर्ड में सभासद है।

ये वही इमरान मसूद हैं, जिन्होंने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की बोटी-बोटी करने की धमकी दी थी। यह धमकी उन्होंने एक सभा में दी थी। साल 2014 के चुनाव प्रचार के दौरान उन्होंने कहा था, “गुजरात में चार परसेंट मुसलमान हैं। यहाँ 40 परसेंट हैं। नरेंद्र मोदी यहाँ आ जाएँ तो उनकी बोटी-बोटी कर डालेंगे।” इस बयान के बयान उनके खिलाफ FIR करके उन्हें गिरफ्तार कर लिया गया था।

भाई के साथ NEET काउंसलिंग के लिए जा रही थी लड़की, शोहदे ने कर दिया एसिड अटैक: पीड़िता पर मिलने का डालता था दबाव, पैर में गोली मार UP पुलिस ने पकड़ा

उत्तर प्रदेश की राजधानी लखनऊ में लोहिया पार्क के पास भाई-बहन पर अभिषेक वर्मा नाम के शोहदे ने एसिड फेंक दिया। जिसमें भाई-बहन दोनों झुलस गए। एसिड से छात्रा का चेहरा झुलस गया, तो उसके भाई की पीठ और अन्य अंग प्रभावित हुए। इस घटना के बाद अभिषेक वर्मा फरार हो गया, जिसे पुलिस ने शाम को एनकाउंटर के बाद गिरफ्तार किया। एनकाउंटर के दौरान उसने पुलिस पर गोली चलाई, तो पुलिस की गोली उसकी टाँग में लगी।

मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक, लोहिया पार्क के पास बुधवार (3 जुलाई 2024) को अभिषेक वर्मा नाम के शोहदे ने नीट काउंसिलिंग के लिए अपने भाई के साथ जा रही छात्रा पर एसिड फेंक दिया। दोनों इस हमले में गंभीर रूप से झुलस गए। दोनों को केजीएमयू में भर्ती कराया गया है, जहाँ उन्हें प्लास्टिक सर्जरी डिपार्टमेंट में रखा गया है। इस हमले में घायल छात्रा का मौसेरा भाई नीट क्वालिफाई करने के बाद एमबीबीएस की पढ़ाई कर रहा है।

पीड़ित के चाचा ने मीडिया से कहा कि छात्रा और उसका भाई टैक्सी से उतरे थे, तभी आरोपित वहाँ आ गया और छात्रा से बात करने की कोशिश करने लगा। छात्रा ने जब उसे डपट दिया, तो उसने एसिड की बोतल निकाली और उनके ऊपर भेज दिया। एसिड हमले में लड़के की पीठ और लड़की का चेहरा झुलस गया है। पीड़िता के चाचा ने बताया कि एसिड से हमला करने वाले युवक का नाम अभिषेक वर्मा है।

वारदात के बाद छात्रा ने परिजनों को बताया कि अनजान नंबरों से कॉल करने वाला एक शख्स उसको चार-पाँच दिन से परेशान कर रहा था। मैसेज भी भेजता था, लेकिन छात्रा ने परिजनों को नहीं बताया और न ही पुलिस से शिकायत की। वो छात्रा पर लगातार मिलने के लिए भी दबाव डाल रहा था, लेकिन जब उसने एसिड अटैक कर दिया, जब जाकर ये बात सामने आ पाई। हालाँकि पुलिस ने बुधवार रात ही आरोपित अभिषेक वर्मा को मुठभेड़ के बाद गिरफ्तार कर लिया है। वो लखीमपुर खीरी जिले का रहने वाला है। मुठभेड़ के दौरान उसके दाहिने पैर में पुलिस की गोली लगी है।

कोविड जैसा संकट आया, फिर भी गरीबी को सिंगल डिजिट में खींच लाई मोदी सरकार: NCAER ने रिसर्च में बताया- 12 साल में 12.7% घटी गरीबी की दर

भारत में गरीबी पर आपको कई प्रोपगेंडाबाज प्रोपगेंडा फैलाते दिखेंगे लेकिन अगर अर्थशास्त्रियों की रिपोर्ट देखेंगे तो पता चलेगा कि भारत में गरीबी बढ़ी नहीं बल्कि घटी है। हाल में नेशनल काउंसिल ऑफ एप्लाइड इकोनॉमिक रिसर्च (NCAER) द्वारा जारी किए गए रिसर्च पेपर से ये जानकारी सामने आई है कि कोरोना महामारी जैसी चुनौती के बावजूद भारत में 12 साल में गरीबी 12.7 फीसद तक गिरी है।

थिंक टैंक NCAER के सोनाल्डे देसाई के नेतृत्व में अर्थशास्त्रियों के एक पेपर (जिसका शीर्षक ‘बदलते समाज में सामाजिक सुरक्षा दायरा पर पुनर्विचार’ है) में गरीबी के आँकड़ों को लेकर यह अनुमान लगाया गया है। इस सर्वे में कहा गया है कि भारत में गरीबी अनुपात में तेजी से गिरावट आई है। 2011-12 में ये 21.2% थी और अब घटकर 8.5% हो गई है। ग्रामीण क्षेत्रों में ये आँकड़ा 24.8 से 8.6 फीसद तक आया है। वहीं, शहरी क्षेत्रों में गरीबी 13.4 फीसदी से घटकर 8.4 फीसदी तक।

इस रिसर्च के लिए शोधकर्ताओं ने इंडियन ह्यूमन डेवलपमेंट सर्वे की वेव 3, वेव 2 और वेव 1 के डेटा को आधार बनाया। साथ ही बताया कि देश में भले ही सरकार से मिलने वाले लाभों के कारण ये बदलाव आया हो लेकिन ये बात भी ध्यान देने वाली है कि लोगों के जीवन में होने वाली घटनाएँ उन्हें फिर से गरीबी में ढकेल सकती है। सोनल डे देसाई अपनी रिपोर्ट में इस बात को बताती है कि इन 8.5 फीसद गरीबों में 3.2 फीसद जन्म से गरीब थे जबकि 5.3 फीसद जीवन में हुई किसी दुर्घटना के बाद गरीब बने।

रिसर्च में देश में हो रहे आर्थिक विकास और गरीबी में आई कमी जैसे मुद्दों पर बात की गई। दस्तावेज में कहा गया है कि इकनॉमिक ग्रोथ और गरीबी की स्थिति में कमी से एक गतिशील परिवेश पैदा होता है। इसके लिए कारगर सामाजिक सुरक्षा कार्यक्रमों की जरूरत होती है। सामाजिक बदलाव की रफ्तार के साथ सामाजिक सुरक्षा प्रणालियों को बनाए रखना भारत के लिए एक प्रमुख चुनौती होगी।

रिसर्च में इस्तेमाल किया गया पेपर

बता दें कि इससे पहले नीति आयोग के सीईओ बी वी आर सुब्रह्मण्यम ने कुछ महीने पहले भारत में गरीबी को लेकर अनुमान लगाते हुए कहा था कि नवीनतम उपभोक्ता व्यय सर्वेक्षण से संकेत मिलता है कि देश में गरीबी घटकर 5 फीसदी रह गई है। ग्रामीण और शहरी दोनों क्षेत्रों में लोगों के पास पैसे आ रहे हैं।

NCAER क्या है?

मौजूदा जानकारी के अनुसार, नेशनल काउंसिल ऑफ एप्लाइड इकोनॉमिक रिसर्च भारत का सबसे पुराना और सबसे बड़ा स्वतंत्र, गैर-लाभकारी, आर्थिक नीति अनुसंधान थिंक टैंक है। 1956 में नई दिल्ली में स्थापित, इसने अपनी स्थापना के कुछ दशकों के भीतर ही काफी राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय स्तर पर पहचान हासिल कर ली। यह सरकारों और उद्योग के लिए अनुदान-वित्तपोषित अनुसंधान और कमीशन अध्ययन का कार्य करता है, और यह वैश्विक स्तर पर उन कुछ थिंक टैंकों में से एक है जो प्राथमिक डेटा भी एकत्र करते हैं।

तूफान से निकलकर आई टीम इंडिया तो स्वागत में बरसा आसमान, एयरपोर्ट से लेकर होटल तक फैन का जमावड़ा: PM से मिले T20 के वर्ल्ड चैंपियन, मुंबई में ‘विक्ट्री परेड’

भारतीय क्रिकेट टीम टी-20 विश्वकप जीत के बाद भारत लौट आई है। भारतीय खिलाड़ियों का दिल्ली के एयरपोर्ट पर प्रशंसकों ने जोरदार तरीके से स्वागत किया। इसके बाद खिलाड़ी होटल पहुँचे और फिर प्रधानमंत्री मोदी से मिलने लोक कल्याण मार्ग पहुँचे हैं। बता दें कि पीएम मोदी ने पिछले साल 50 ओवरों के विश्व कप फाइनल में मिली हार के बाद खिलाड़ियों से मिलकर उनका हौसला बढ़ाया था और अब विश्व विजेता बनने के बाद सभी खिलाड़ी लोक कल्याण मार्ग स्थित प्रधानमंत्री आवास पर पहुँचे और उनसे मुलाकात की।

विश्व विजेता बनने के बाद सभी खिलाड़ी पीएम मोदी से मुलाकात की। सभी खिलाड़ी लोक कल्याण मार्ग स्थित प्रधानमंत्री आवास पर पहुँचे। टीम इंडिया के साथ ही बीसीसीआई के अध्यक्ष रोजर बिन्नी, बीसीसीआई के उपाध्यक्ष जय शाह, मुख्य कोच राहुल द्रविड़, कप्तान रोहित शर्मा, विराट कोहली, रविंद्र जडेजा, जसप्रीत बुमराह समेत सभी खिलाड़ी मौजूद रहे।

इससे पहले टीम के खिलाफ सुबह साढ़े दस बजे के आसपास पीएम मोदी के आवास पर पहुँचे थे। खिलाड़ी करीब 3 घंटे तक पीएम आवास में रहे।

केंद्रीय मंत्री ने किया स्वागत

टीम इंडिया की बारबाडोस से वतन वापसी पर केंद्रीय मंत्री मनसुख मंडाविया ने वीडियो पोस्ट किया और एक्स पर लिखा, “बारबाडोस की धरती पर तिरंगा लहराने वाली T20 विश्वकप विजेता हमारी भारतीय टीम का स्वेदश लौटने पर हार्दिक स्वागत। पूरा देश आपके सत्कार के लिए उत्सुक है।”

मुंबई में विक्ट्री परेड

पीएम मोदी से मिलने के बाद खिलाड़ी चार्टर्ड फ्लाइट पकड़ कर मुंबई पहुँचेंगे, जहाँ टीम की विक्ट्री परेड होगी। मुंबई में लैंड करने के बाद सभी खिलाड़ी खुली बस में वानखेड़े स्टेडियम तक पहुँचेंगे। उसके बाद शाम शाम 5:00 बजे से मरीन ड्राइव और वानखेड़े स्टेडियम के बीच विक्ट्री परेड होगी।

बता दें कि 29 जून 2024 को भारत ने साउथ अफ्रीका को टी20 वर्ल्ड कप फाइनल में 7 रनों से हराया और 17 साल बाद इस फॉर्मेंट में विश्व चैंपियन बनी। ये फाइनल मुकाबला ब्रिजटाउन (बारबाडोस) के केंसिंग्टन ओवल स्टेडियम में खेला गया था। लेकिन इस मुकाबले के बाद भारतीय टीम मौसम खराब होने की वजह से वहीं फँस गई थी और आज (गुरुवार-4 जुलाई 2024) की सुबह ही पूरी टीम भारत पहुँची है।

‘कियारा आडवाणी ने करवा रखा है सिद्धार्थ मल्होत्रा पर काला जादू, तुम बचा लो’: अलीजा और हुस्ना ने इनसाइड स्टोरी के नाम पर एक्टर की फैन से ठगे ₹50 लाख

बॉलीवुड अभिनेता सिद्धार्थ मल्होत्रा ​​के एक फैन पेज पर 50 लाख रुपए की ठगी का आरोप लगा है। अमेरिका में रहने वाली मीनू वासुदेवा नाम की यूजर ने @desi_girl334 हैंडल से सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर बताया कि मल्होत्रा के फैन पेज की मैनेजर अलीजा और हुस्ना परवीन ने उन्हें कियारा और सिद्धार्थ की इनसाइड स्टोरी देने के नाम पर लाखों का चूना लगाया।

माीनू का इस पूरे मामले पर पोस्ट वायरल होने के बाद अब अभिनेता ने खुद इस पर प्रतिक्रिया दी है। सिद्धार्थ मल्होत्रा ​​ने कहा,

“मेरी जानकारी में आया है कि कुछ फ्रॉड एक्टिविटी और स्कैम सोशल मीडिया पर मेरे नाम से चल रहे हैं जिसमें यह दावा किया जा रहा है कि ये लोग मेरी फैमिली से नाता रखते हैं या फिर मेरे समर्थक हैं। इस नाम पर वो लोगों से पैसा भी माँग रहे हैं। मैं आपको बताना चाहता हूँ कि ना तो मैं, ना ही मेरे परिवार का कोई सदस्य और ना ही मेरा कोई समर्थक सोशल मीडिया पर इस तरह की गतिविधि में लिप्त है। अगर आपके संपर्क में कोई भी ऐसा फर्जीवाड़ा आता है तो उसके लिए शिकायत करें और किसी भी तरह की झूठी जानकारी को फैलने ना दें। मेरे प्रशंसक ही मेरी सबसे बड़ी ताकत हैं। आपका भरोसा और आपकी सुरक्षा मेरे लिए सर्वोपरि है। बिग लव एंड हग।”

बता दें कि मीनू वासुदेवा ने बताया कि इन दोनों लोगों ने उन्हें बताया था कि एक्टर सिद्धार्थ मल्होत्रा की जान को खतरा है। इन्होंने यह तक कहा था कि सिद्धार्थ, कियारा आडवाणी से शादी नहीं करना चाहते थे मगर कियारा ने काला जादू करके एक्टर से शादी की है। इसके अलावा मीनू को यह विश्वास भी दिलाया गया कि कियारा के साथ करण जौहर, मनीष मल्होत्रा और शशांक खेतान मिले हुए हैं और कियारा ने सिद्धार्थ का बैंक अकाउंट अपने कंट्रोल में ले लिया है और सिद्धार्थ के साथ चीटिंग भी की है।

मीनू बताती हैं कि वह अमेरिका की रहने वाली हैं और उनके साथ ये धोखाधड़ी साल 2023 में हुई थी। आरोपित कियारा और सिद्धार्थ की इनसाइड स्टोरी के नाम पर ये सारी ठगी करते थे और मीनू से सिद्धार्थ को बचाने को कहा जाता था। इसके अलावा सिद्धार्थ को गिफ्ट हैंपर देने के लिए भी मीनू से पैसे लिए और बाद में मीनू को जानकारी हुई कि वो फोटो एडिटेड है। धीरे-धीरे मीनू को समझ आया कि उन्हें सिर्फ इनसाइड स्टोरी के नाम पर ठगा जा रहा है। इसके बाद उन्होंने इस संबंध में पोस्ट लिखा और लोगों को अपने साथ हुई धोखाधड़ी से अवगत कराया।

पुलों का कब्रिस्तान बना बिहार: 24 घंटे में 5 तो 15 दिन में 11 गिरे, अंग्रेजों के जमाने से लेकर नए नवेले तक हुए धराशायी

बिहार में पुलों के ढहने का मानो सिलसिला चल पड़ा हो। बिहार के अलग-्अलग जिलों में पिछले 15 दिनों के दौरान 11 पुल ढह चुके हैं। कहीं अंग्रेजों के जमाने का पुल बहा है, तो कहीं 5 साल पुराना पुल पानी के दबाव को नहीं सह सका। अकेले बुधवार-गुरुवार (3-4 जुलाई 2024) को सीवान और सारण जिले में 5 पुल ढह गए हैं। पुलों के ढहने की घटनाओं पर विपक्ष ने सरकार पर जोरदार हमला बोला है।

सीवान में ढहे तीन पुल

बुधवार को सीवान जिले में पुलों के ढहने की तीन घटनाएँ सामने आई। पहली घटना महाराजगंज अनुमंडल के देवरिया गाँव में घटी, जहाँ गंडक नदी पर बना पुल का एक पिलर धँस गया और पुल टूट गया। बताया जा रहा है कि यह पुल तकरीबन 40 साल पुराना था। पुल टूटने की दूसरी घटना महाराजगंज प्रखंड के तेवता पंचायत में घटी, स्थानीय लोगों ने बताया कि यह पुल 5 साल पहले ही बनाया गया था। वहीं, पुल टूटने की तीसरी घटना महाराजगंज के धम्ही गाँव में घटी। लोगों का कहना है कि नदी के जल बहाव में काफी तेजी आने और जलस्तर बढ़ने से पुल दबाव नहीं झेल पा रहे हैं।

सारण में ढहे 2 पुल, 1 तो अंग्रेजों के जमाने से खड़ा था

बिहार के सारण जिले में भी 2 पुलों के ढहने की जानकारी मिल रही है। सारण जिले का मुख्यालय छपरा है। छपरा में गंडक नदी पर स्थित जनता बाजार इलाके में पहला पुल टूटा। वहीं दूसरा पुल भी इसी इलाके में टूटा, जो वहाँ से करीब एक किलोमीटर की दूरी पर है। ये पुलिस करीब 100 साल पुराना था और अंग्रेजों के जमाने से खड़ा था। सीवान और छपरा में पाँच पुल पुलिया टूटने से पहले पिछले दो सप्ताह में अररिया, सीवान, मोतिहारी, किशनगंज और मधुबनी में कुल 6 पुल और पुलिया पहले ही ध्वस्त हो चुके हैं।

पुल के टूटने की घटनाओं को लेकर विपक्ष अब राज्य सरकार पर हमलावर है। तेजस्वी यादव ने राज्य सरकार को निशाने पर लिया है। उन्होंने बुधवार को एक्स पर लिखा, “आज बिहार में एक ही दिन में ? पुल और गिरे। सुशासनी नेकचलनी के सौजन्य से विगत ?? दिन में बिहार में कुल ? पुल जल समाधि ले चुके है। डबल इंजन सरकार अब इसका दोष भी विपक्ष को देकर अपने कर्तव्यों, सुशीलता से परिपूर्ण वसूली तंत्र एवं डबल इंजन पॉवर्ड भ्रष्टाचार का इतिश्री कर सकती है।”

बता दें कि 18 जून से बिहार में लगातार पुलों के टूटने की खबरें आ रही हैं। 18 जून को अररिया में बकरा नदी पर निर्माणाधीन पुल ढह गया था, तो 22 जून को सीवान में गंडक नदी पर बना पुल गिर गया। 23 जून को पूर्वी चंपारण में निर्माणाधीन पुल गिया, तो 27 जून को बिहार के किशनगंज में कंकाई और महानंदा नदी को जोड़ने वाली एक छोटी सहायक नदी पर बन रहा पुल ध्वस्त हो गया। इसी दिन मधुबनी जिले में भी एक पुल टूटा तो 30 जून को भी किशनगंज में एक पुल ढह गया था।

भारतीय सेना ने भी बता दिया राहुल गाँधी कितने बड़े झूठे, कहा- बलिदानी ‘अग्निवीर’ अजय कुमार के परिवार को दिए ₹98.39 लाख, ₹67 लाख और मिलेंगे

भारतीय सेना ने राहुल गाँधी और उन मीडिया रिपोर्ट्स को खारिज किया है, जिसमें कहा जा रहा था कि वीरगति को प्राप्त होने वाले अग्निवीरों के परिवारों को किसी तरह की आर्थिक सहायता नहीं दी गई। सेना ने बताया है कि पंजाब के बलिदानी अग्निवीर अजय कुमार के परिवार को 98 लाख रुपए दिए जा चुके हैं, तो 67 लाख रुपए की धनराशि उनके परिवार को देने की प्रक्रिया अभी जारी है। बता दें कि राहुल गाँधी ने आरोप लगाया था कि अग्निवीरों के परिजनों को कोई आर्थिक सहायता नहीं दी गई है। उन्होंने रक्षामंत्री राजनाथ सिंह पर देश को गुमराह करने के भी आरोप लगाए थे। हालाँकि भारतीय सेना ने राहुल गाँधी के आरोपों की पोल खोल दी है।

रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह ने भी सेना की ओर से जारी बयान को री-ट्वीट किया है और कहा, “भारतीय सेना अग्विनीरों के कल्याण के लिए प्रतिबद्ध है।” रक्षा मंत्री ने राहुल गाँधी को सदन में भी फटकारा था। उन्होंने कहा था कि राहुल गाँधी को ऐसी बयानबाजी नहीं करनी चाहिए। वहीं, अब सेना की ओर से जारी आधिकारिक बयान में बताया गया है कि अग्निवीर के परिजनों को मुआवजे के तौर पर अब तक 98 लाख रुपए दिए जा चुके हैं।

सेना ने एक्स पर पोस्ट किया, “कुछ सोशल मीडिया पोस्ट में दावा किया गया है कि ड्यूटी के दौरान वीरगति प्राप्त करने वाले अग्निवीर अजय कुमार के परिजनों को मुआवजा नहीं दिया गया है। ऐसे दावे बिल्कुल निराधार हैं। भारतीय सेना अग्निवीर अजय कुमार के सर्वोच्च बलिदान को सलाम करती है। उनका पूरे सैन्य सम्मान के साथ अंतिम संस्कार किया गया। अग्निवीर अजय के परिवार को कुल देय राशि में से 98.39 लाख रुपये का भुगतान पहले ही किया जा चुका है।” सेना की ओर से कहा गया है कि इसके अलावा उनके परिवार को 67 लाख रुपये की राशि और दी जाएगी, इसके बाद कुल राशि करीब 1.65 करोड़ रुपए हो जाएगी।

नौशेरा में वीरगति को प्राप्त हुए थे अग्निवीर अजय सिंह

पंजाब के लुधियाना जिले के खन्ना के रहने वाले अग्निवीर अजय सिंह 23 जनवरी, 2024 को जम्मू-कश्मीर में बलिदान हो गए थे, उनकी उम्र महज 23 साल थी। केंद्रशासित प्रदेश के राजौरी जिले के नौशेरा सेक्टर में एक बारूदी सुरंग में हुए विस्फोट की चपेट में आने से वो वीरगति को प्राप्त हुए थे। उनके परिवार में माता-पिता और 4 बहनें हैं। लोकसभा चुनाव से पहले दाखा की दाना मंडी में रैली को संबोधित करने के बाद राहुल गाँधी खन्ना आए और फिर अचानक गाँव रामगढ़ सरदारा में अग्निवीर बलिदानी अजय कुमार के घर पहुँचे थे।

राहुल गाँधी ने भी किया झूठा दावा

कुछ मीडिया रिपोर्ट्स में दावा किया गया कि अग्निवीर अजय सिंह के परिवार को कोई मुआवजा या राहत राशि नहीं मिली है। वहीं, राहुल गाँधी ने एक्स पर दावा करते हुए कहा कि संसद में रक्षामंत्री राजनाथ सिंह ने झूठ बोला है। उन्होंने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म ‘एक्स’ पर वीडियो शेयर करते हुए राजनाथ सिंह से माफी माँगने को भी कहा था। राहुल गाँधी ने कहा, “संसद में मैंने कहा कि सत्य की रक्षा हर धर्म का आधार है। जवाब में राजनाथ सिंह ने शिव जी के फोटो के सामने पूरे हिंदुस्तान को, देश की सेना को और अग्निवीरों को कंपेनसेशन के बारे में झूठ बोला।”

राहुल ने कहा कि अजय सिंह के पिता ने मेरे और रक्षा मंत्री के भाषण सुनने के बाद कहा कि राजनाथ सिंह ने सदन में जो कहा, उसके अनुसार हमें न कोई पैसा नहीं मिला और न ही कोई मैसेज आया। राहुल गाँधी ने आगे कहा कि रक्षा मंत्री ने संसद में शहीद अजय सिंह के परिवार से, सेना से और देश के युवाओं से झूठ बोला है। रक्षा मंत्री को इन सबसे माफी माँगनी चाहिए।

राहुल गाँधी के बयान का रक्षा मंत्री ने ही नहीं, बल्कि महाराष्ट्र के अग्रिवीर के परिवार ने भी उनके दावे का खंडन किया है। महाराष्ट्र के बलिदानी अग्निवीर अक्षय गवटे के परिवार ने कहा है कि उन्हें सरकार से 1.08 करोड़ रुपये की सहायता मिली है। महाराष्ट्र के बुलढाणा जिले में पिंपलगांव सराय के मूल निवासी अग्निवीर अक्षय गवटे 21 अक्टूबर 2023 को सियाचिन में अपने कर्तव्य का निर्वहन करते हुए वीरगति को प्राप्त हुए थे। अक्षय के पिता लक्ष्मण गवटे ने सोमवार (2 जुलाई 2024) को पत्रकारों से कहा कि अक्षय की मौत के बाद परिवार को ‘‘बीमा कवर के रूप में 48 लाख रुपए, केंद्र सरकार से 50 लाख रुपए और राज्य सरकार से 10 लाख रुपए मिले।’’

साल 2022 से लागू है अग्निपथ योजना

गौरतलब है कि अग्निपथ योजना की घोषणा 14 जून, 2022 को की गई थी। इसमें 17 से 21 वर्ष की आयु वर्ग के युवाओं को केवल चार साल के लिए सेना में भर्ती करने का प्रावधान किया गया था, जिनमें से 25 प्रतिशत को आगे 15 और वर्षों के लिए बनाए रखने का प्रावधान है। सरकार ने बाद में ऊपरी आयु सीमा को बढ़ाकर 23 वर्ष कर दिया। इस योजना का राजनीतिक विरोध काफी किया गया। अब भी इंडी गठबंधन कहता है कि वो सत्ता में आएगी तो अग्निपथ योजना को बंद कर देगी।