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बांग्लादेशी घुसपैठियों को बाहर करो: झारखंड हाई कोर्ट का आदेश, याचिकाकर्ता ने बताया- ST लड़कियों को फँसाकर बना रहे मुस्लिम, खुल रहे मदरसे

अवैध रूप से भारत में घुसने वाले बांग्लादेशियों के खिलाफ झारखंड कोर्ट ने सख्ती दिखाई है। अदालत ने राज्य सरकार को आदेश दिए हैं कि वो गैर कानूनी रूप से भारत में घुसे हुए बांग्लादेशियों को चिह्नित करें और उनपर कार्रवाई करके उन्हें वापस भेजने के लिए कार्ययोजना तैयार करें।

जस्टिस सुजीत नारायण प्रसाद और जस्टिस एके राय की पीठ ने बुधवार (3 जुलाई 2024) को डानियल दानिश की याचिका पर सुनवाई के बाद ये निर्देश दिए। याचिका में अदालत को बताया गया था कि संताल परगना जैसे जिले जो बांग्लादेश से सटे हुए हैं, उनमें बांग्लादेश के प्रतिबंधित संगठन सुनियोजित तरीके से झारखंड की जनजातीय लड़कियों से शादी करके उनका धर्मांतऱण करवा रहे हैं। इसे रोका जाना अनिवार्य है।

इसमें ये भी कहा गया था कि संताल परगना के बांग्लादेश की सीमा से सटे हुए जिलों में अचानक मदरसों में भी बढोतरी हुई । नए 46 मदरसे हैं। याचिका में कहा गया कि इन मदरसों के जरिए देश विरोधी कार्य हो रहे हैं। न केवल जनजातीय महिलाओं का शोषण हो रहा है बल्कि घुसपैठिए जमीन पर कब्जा भी कर रहे हैं।

अदालत ने इस मामले में सरकार को दो सप्ताह के भीतर प्रगति रिपोर्ट पेश करने को कहा है जिसमें उन्हें बताना है कि उन्होंने कितने बांग्लादेशी घुसपैठियों को चिह्नित किया, उनमें से कितनों को रोका और कितनों को वापस भेजने का प्रयास हो रहा है।

इसके अलावा कोर्ट ने इस मामले में केंद्र सरकार से भी जवाब दाखिल करने को कहा है। कोर्ट ने कहा कि ये बहुत गंभीर मसला है। इसको सिर्फ राज्य की सरकारें नहीं हैंडल कर सकतीं। केंद्र को भी इसमें राज्य के साथ काम करना चाहिए। इसलिए वो भी उन्हें रिपोर्ट दें कि केंद्र इस मामले में क्या-क्या कदम उठा सकता है।

बता दें कि इस सुनवाई के दौरान केंद्र की ओर से भी अदालत में बात रखी गई। केंद्र ने कोर्ट को बताया कि घुसपैठ के मामले में केंद्र सरकार ने राज्य सरकारों को अधिकार दिए हैं वो ऐसे लोगों को खुद चिह्नित करके कार्रवाई कर सकते हैं। हालाँकि याचिका डालने वाले व्यक्ति ने बताया कि राज्य सरकार तो राज्य में घुसपैठ से ही इनकार कर रही है। वो संताल इलाके में किसी धर्मांतरण की बात भी नहीं स्वीकार कर रही। ऐसे में केंद्र को ही घुसपैठियों के खिलाफ कार्रवाई के निर्देश दिए जाने चाहिए। अब मामले में अगली सुनवाई 18 जुलाई को होनी है।

गौरतलब है कि धर्मांतरण के मसले पर इससे पहले इलाहाबाद हाई कोर्ट ने भी सख्त टिप्पणी की थी। उन्होंने ईसाई धर्मांतरण के खतरे को देख कहा था कि अगर अगर इसी तरह से धर्मांतरण का खेल जारी रहा तो आने वाले समय में देश में बहुसंख्यक जनसंख्या अल्पसंख्यक हो जाएगी। कोर्ट में ये महत्वपूर्ण टिप्पणी जस्टिस रोहित रंजन अग्रवाल की पीठ ने की थी। उन्होंने कहा था कि जहाँ भी और जैसे भी भारतीय लोगों का धर्मांतरण करवाया जाता है उसे फौरन रोका जाना चाहिए।

कूड़ा बीनने वाला मोहम्मद जकी घर में 8 साल के बच्चे को अकेला देख बना शैतान, समोसा खिलाने का लालच देकर किया कुकर्म: हल्द्वानी की बनभूलपुरा पुलिस ने दबोचा

उत्तराखंड के हल्द्वानी में एक नाबालिग बच्चे से कुकर्म का मामला सामने आया है। यहाँ कूड़ा बीनने वाला मोहम्मद जकी ने 8 साल के नाबालिग बच्चे के साथ अप्राकृतिक दुष्कर्म किया है।आरोपित ज़की पीड़ित को समोसे का लालच देकर अपने साथ ले गया था। पुलिस ने FIR दर्ज करके आरोपित को गिरफ्तार कर लिया है।

मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक, घटना हल्द्वानी के थाना क्षेत्र बनभूलपुरा की है। यहाँ एक महिला ने पुलिस में तहरीर देकर बताया कि वह 5 बच्चों की माँ है। लोगों के घरों में काम करके वह अपने परिवार का भरण-पोषण करती है। उसने बताया कि वह घटना के दिन काम पर गई थी। घर में उसका 8 साल का बेटा मौजूद था।

इसी दौरान इलाके में कूड़ा बीनने वाला मोहम्मद ज़की महिला के घर आया। थोड़ी देर की बातचीत के बाद उसने महिला के बच्चे को समोसा खिलाने का लालच दिया और अपने साथ ले गया। महिला ने आरोप लगाया कि बाहर कहीं सुनसान जगह पर ले जाकर ज़की ने बच्चे के साथ कुकर्म किया। इसके बाद इस घटना के बारे में बताने पर जान से मारने की धमकी दी।

महिला जब घर आई तो उसने अपने बच्चे को परेशान देखा। कई बार पूछने के बाद पीड़ित ने अपनी माँ को सारी बात बता दी। सच्चाई जानकर पीड़ित की माँ ने पुलिस में शिकायत दर्ज करवाई। थाना प्रभारी वनभूलपुरा नीरज भाकुनी का कहना है कि आरोपित के खिलाफ पॉक्सो एक्ट सहित अन्य सुसंगत धाराओं में केस दर्ज कर लिया गया है।

पीड़ित बच्चे की माँ ने अपनी शिकायत में आरोपित मोहम्मद ज़की पर कड़ी कार्रवाई की माँग की है। मोहम्मद ज़की को जेल भेज दिया गया है। आरोपित हल्द्वानी के इंदिरानगर इलाके का रहने वाला है। इस मामले में जाँच और अन्य जरूरी कार्रवाई की जा रही है। पीड़ित बच्चे की काउंसिलिंग करवाई गई है।

पोर्न देखने का आदी हाफिज दिलनवाज ने मदरसे के 9 साल के बच्चे से किया कुकर्म, विरोध पर मारकर कुएँ में फेंका: हाथ-पैर बाँधकर मुँह में चिपका दिया था टेप

उत्तर प्रदेश की फतेहपुर पुलिस ने मदरसे के अंदर हुई 9 साल के नाबालिग छात्र की हत्या की गुत्थी सुलझा ली है। हत्या के आरोप में बुधवार (3 जुलाई) को मदरसे के ही एक हाफिज और एक मौलवी को गिरफ्तार किया गया है। हाफिज का नाम दिलनवाज है, जबकि मौलवी का नाम रकीमुद्दीन है। दोनों रिश्ते में जीजा-साले लगते हैं।

मदरसे के अंदर शनिवार (29 जून 2024) को बच्चे के साथ अप्राकृतिक दुष्कर्म किया गया था। राज खुलने के डर से दोनों आरोपितों ने मिलकर नाबालिग की हत्या कर दी थी। आरोपित दिलनवाज को पोर्न देखने की लत है। फतेहपुर के पुलिस अधीक्षक IPS उदय शंकर सिंह ने एक प्रेस कॉन्फ्रेंस में बताया कि मदरसे में लगभग 20 बच्चे पढ़ते हैं।

उन्होंने कहा कि इस मदरसे में पढ़ाने वाले हाफिज दिलनवाज ने 9 वर्षीय बच्चे के साथ कुकर्म किया था। जब बच्चे ने विरोध किया तो उसकी निर्ममता से हत्या कर दी गई। हत्या के बाद दिलनवाज ने मदरसे के मौलवी रकीमुद्दीन के साथ मिलकर बच्चे की लाश को ठिकाने लगा दिया। दोनों ने शव को एक बोरी में भरकर मदरसे से लगभग 400 मीटर दूर एक कब्रिस्तान के पास बने कुएँ में फेंक दिया था।

पुलिस अधीक्षक ने आगे बताया कि चाइल्ड वेलफेयर कमेटी के साथ जिला अल्पंसख्यक कल्याण विभग इस मामले की अलग-अलग जाँच करवा रहा है। मदरसे की वैधता की भी जाँच चल रही है। मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक, आरोपित हाफिज दिलनवाज पोर्न देखने का आदी है। मृतक मदरसे में उम्र में सबसे छोटा था। घटना के दिन भी दिलनवाज ने मोबाइल पर पोर्न देखी।

उन्होंने आगे बताया कि दिलनवाज ने मदरसे में पीड़ित छात्र को अकेला पाकर उससे कुकर्म किया था। कुकर्म के बाद पोल खुलने के डर से उसने रस्सी से गला घोंट कर छात्र को मार डाला था। दिलनवाज का जीजा रकीमुद्दीन इसी मदरसे में मौलवी था। उसने अपने साले को बचाने के लिए बच्चे की लाश को ठिकाने लगाने का प्लान बनाया।

रकीमुद्दीन ने रातों-रात बोरी में बच्चे का शव भर करके उसे पास के कब्रिस्तान से सटे हुए कुएँ में फेंक दिया था। शव को मदरसे से कुएँ तक बाइक से ले जाया गया था। ख़ास बात ये है कि मौलवी रकीमुद्दीन ने ही छात्र के परिजनों को बच्चे के गायब होने की सूचना फोन पर दी थी। पुलिस ने दोनों आरोपितों की गिरफ्तारी के साथ हत्या में प्रयोग हुई रस्सी को भी बरामद कर लिया है।

पुलिस ने शव को ले जाने के लिए इस्तेमाल की गई बाइक को भी सीज कर लिया है। बता दें कि 30 जून को मालवां थाने के एक गाँव के कुछ चरवाहों ने कुएँ में एक शव को तैरता हुए देखा था। इसके बाद इसकी जानकारी पुलिस को दी गई। पुलिस की मौजूदगी में शव को कुएँ से निकला गया। लाश के हाथ और पैरों को बाँध दिया गया था। मुँह पर भी टेप चिपका दिया गया था।

पुलिस ने मृतक छात्र के परिजनों को बुलाया और उसकी शिनाख्त करवाई। इसके बाद परिजनों से तहरीर ले कर मुकदमा दर्ज कर लिया। पुलिस ने आरोपितों के खिलाफ हत्या, पॉक्सो और IPC की धारा 377 सहित कई धाराओं में मुकदमा दर्ज की है। मृत छात्र का शव अंतिम संस्कार के लिए उनके परिजनों को सौंप दिया गया है।

‘पाप में जन्मा’ पंचशील समझौता… जिसे नेहरू ने चीन से डील करने भेजा, वो चायनीज महिला के प्यार में फँस गया: तिब्बत पर चीन के कब्जे को मान्यता, सीमा विवाद ज्यों का त्यों रहा

चीन के राष्ट्रपति शी जिनपिंग ने ‘पंचशील समझौते’ की तारीफ़ की है। उन्होंने कहा कि दुनिया में बढ़ रहे संघर्षों पर लगाम लगाने के लिए इस तरह का समझौता एक उदाहरण है। इसकी 70वीं वर्षगाँठ पर चीन के राष्ट्रपति ने कहा कि शांतिपूर्ण व्यवहार, सभी देशों के साथ दोस्ती और साझा विकास की भावना पर चीन काम करता रहेगा। चीन के राष्ट्रपति शी जिनपिंग ने कहा कि ‘पंचशील सिद्धांत’ आज अंतरराष्ट्रीय संपत्ति हैं, बेहतर भविष्य का तरीका एकता, सहयोग, कम्युनिकेशन और आपसी समझ को बढ़ावा देना है।

बता दें कि 29 अप्रैल, 1954 को भारत-चीन और चीन-म्यांमार सीमा विवाद सुलझाने के लिए हुए पंचशील के सिद्धांतों में ‘एक-दूसरे की संप्रभुता व क्षेत्रीय अखंडता का सम्मान’, ‘गैर-आक्रामकता’, ‘एक दूसरे के आंतरिक मामलों में हस्तक्षेप न करना’, ‘समानता और पारस्परिक लाभ’, तथा ‘शांतिपूर्ण सह-अस्तित्व’ हैं। चीन में इसे ‘शांतिपूर्ण सह-अस्तित्व के 5 सिद्धांत’ कहा गया। झ़ोउ एनलाई तब चीन के प्रधानमंत्री थे। इसके बाद ‘हिंदी-चीनी भाई-भाई’ के नारे लगे और चीन ने पीठ में छुरा घोंपते हुए 1962 में भारत पर हमला बोल दिया।

इसे जवाहरलाल नेहरू की दूरदर्शिता-हीन सोच का परिणाम कहा जा सकता है, क्योंकि वो चीन के फेंके पास के मुग़ालते में आ गए थे और देश की सुरक्षा व्यवस्था में निवेश से लेकर रणनीति बनाने तक के लिए उन्होंने कोई प्रयास नहीं किया। वर्षों तक ये प्रचारित किया गया कि भारत के तत्कालीन प्रधानमंत्री द्वारा किया गया ये समझौता ऐतिहासिक था, लेकिन ये एक बड़ी भूल थी। कारोबार और सह-अस्तित्व के नाम पर चीन ने अपने अवैध कब्जे वाले तिब्बत और भारत के बीच समझौते की चाल चली।

चीन की राजधानी बीजिंग में भारत के राजदूत N राघवन और चीन के उप विदेश मंत्री झांग हांफू के बीच इस समझौते पर हस्ताक्षर हुए थे। इसके तहत भारतीयों को चीन नियंत्रित जमीन में स्थित कैलाश मानसरोवर जैसे पवित्र हिन्दू स्थलों में दर्शन के लिए भी अनुमति मिली। 15 मई को संसद में जवाहरलाल नेहरू ने तिब्बत में यथास्थिति को मान्यता देने की बात कही। यानी, एक स्वतंत्र राष्ट्र जिस पर चीन ने कब्ज़ा किया था, उसे उसके अधिकारों से वंचित कर नेहरू ने चीन के साम्राज्यवादी कृत्य को मान्यता दे दी।

जवाहरलाल नेहरू ने इसे वैश्विक शांति के लिए उठाया गया कदम बता दिया, भले अपने देश की सुरक्षा व्यवस्था की उन्हें कोई फ़िक्र नहीं थी। कॉन्ग्रेस और कम्युनिस्ट पार्टी ने संसद में खुल कर इस समझौते का समर्थन किया। हालाँकि, आज़ादी के समय कॉन्ग्रेस अध्यक्ष रहे आचार्य JB कृपलानी ने इस समझौते पर कड़ी आपत्ति जताते हुए कहा कि चीन ने तिब्बत पर अत्याचार किया है। कुछ वर्षों बाद उन्होंने इसे पाप में जन्मा समझौता बताया था।

बीजिंग में 4 महीनों तक इस समझौते के लिए मोलभाव चला, इसके साथ ही भारत तिब्बत को लेकर अपना प्रभाव खोता चला गया। रही बात सीमा विवाद की तो ये तो आज भी वैसे का वैसा ही है। गलवान में जून 2020 में भारत के 20 सैनिक युद्ध में वीरगति को प्राप्त हुए। 13 मार्च, 1954 को विदेश मंत्रालय के सेक्रेटरी जनरल NT पिल्लई ने जवाहरलाल नेहरू को पत्र लिख कर बताया कि कैसे भारत ने जिन अधिकारियों को चीन में तैनात कर रखा गया वो वहाँ ऐशोआराम की ज़िंदगी जी रहे हैं।

बीजिंग में पदस्थापित भारत के राजनयिक TN कौल चीन की एक महिला से प्यार में थे और उससे शादी करना चाहते थे। यानी, चीन ने हनीट्रैप के खेल का बखूबी इस्तेमाल किया। NT पिल्लई ने तत्कालीन पीएम को याद दिलाया कि विदेश मंत्रालय के अधिकारियों को विदेशी महिला से शादी से पहले केंद्र सरकार की अनुमति लेनी ज़रूरी है। एक तो लड़की के बारे में कुछ पता नहीं था, ऊपर से कौल पहले से ही शादीशुदा थे। उनके 2 बच्चे भी थे। सबसे बड़ी बात, वो भारत की तरफ से मोलभाव की जिम्मेदारी सँभाल रहे थे।

तिब्बत के साथ भारत के रिश्ते और चीन के साथ सीमा विवाद, सबका भाग्य इस समझौते पर निर्भर था और इसके लिए जिम्मेदार व्यक्ति हनीट्रैप में फँस चुका था। पिल्लई ने कौल द्वारा 2 महीने की छुट्टी माँगे जाने के बाद कहा कि वो भारत आकर वार्ता के संबंध में जानकारी दें। शायद ही ऐसा कहीं देखा गया हो जहाँ कोई राजनयिक एक संवेदनशील वार्ता में अपने देश का प्रतिनिधित्व कर रहा हो और विरोधी देश की लड़की के साथ रोमांटिक रिश्ता बना रहा हो।

तब प्रधानमंत्री रहे जवाहरलाल नेहरू ने ये सब जानने के बाद TN कौल को तुरंत भारत तलब किया और N राघवन को आगे की वार्ता के लिए अधिकृत किया। इसके बावजूद कौल ने भारत लौटने के लिए 4 सप्ताह का समय लिया। उन्हें फिर चीन मामले का ज्वाइन सेक्रेटरी इंचार्ज बना दिया गया। फिर वो सोवियत यूनियन और अमेरिका में राजदूत रहे, विदेश सचिव भी बने’। ‘पंचशील समझौते’ के तहत जो भारत पहले तिब्बत के साथ सीमा साझा करता था, वो अब चीन के साथ करने लगा।

यही कारण है कि अब जब ‘पंचशील समझौते’ की चीन ने 70वीं वर्षगाँठ मनाई है तो भारत ने इस आयोजन से दूरी बनाए रखी। असल में TN कौल ने जो 2 महीने की छुट्टी माँगी थी, वो इसीलिए थी कि वार्ता खत्म होने के बाद वो चीन की उक्त प्रेमिका के साथ शादी कर हनीमून पर जाना चाहते थे। सोचिए, त्रिलोकी नाथ कौल ने इसके बाद कई पदों पर रहते हुए देश का कितना भला किया होगा? खैर, जब दिक्कत प्रधानमंत्री की नीति से ही थी तो अधिकारी भला क्या करते।

इंस्टाग्राम पर स्कूली लड़कियों को फँसाता था मुहम्मद अमजद, मिलने के बहाने बुला हड़प लेता था गहने: फिर दोस्ती खत्म कर हो जाता था गायब, केरल पुलिस ने दबोचा

केरल पुलिस ने थम्पिल मोहम्मद अजमल नाम के एक जालसाज को गिरफ्तार किया है। 20 साल का मोहम्मद अजमल इंस्टाग्राम पर लड़कियों को अपने जाल में फँसाता था और उनके सोने के आभूषण ठग लेता था। आरोपित अजमल चमरावट्टम का निवासी है। उसे वलनचेरी से गिरफ्तार किया गया है। पुलिस ने बताया कि आरोपित की गिरफ्तारी एक पीड़िता के रिश्तेदार की शिकायत पर हुई है।

मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक, अजमल अपना टारगेट इंस्टाग्राम पर सेट करता था। यहाँ वो बातचीत करके लड़कियों से दोस्ती करता और उनका विश्वास जीतने की कोशिश करता था। अजमल के निशाने पर अधिकतर कक्षा 10 में पढ़ने वाली लड़कियाँ होती थीं। कुछ दिनों की दोस्ती के बाद अजमल लड़कियों को मिलने के लिए बुलाता था।

आरोपित मोहम्मद अजमल मिलने आई लड़कियों के गहने ये कहकर ले लिया करता था कि वो उनके लिए नए गहने बनवा देगा। गहने हड़पने के बाद अजमल लड़कियों से दोस्ती खत्म कर लेता था और गायब हो जाता था। माना जा रहा है कि अजमल कई लड़कियों के साथ ऐसी हरकतें कर चुका था। उन्हीं में से एक पीड़िता ने ठगे जाने के बाद अपने माता-पिता को सारी बात बता दी।

आखिरकार मामले की शिकायत कल्पाकंचेरी पुलिस में दर्ज करवाई गई। पुलिस की जाँच में यह बात सामने आई कि मोहम्मद अजमल ने कभी भी ठगी की शिकार लड़कियों को अपना मोबाइल नंबर नहीं दिया। इस वजह से पुलिस को अजमल की खोजबीन में शुरुआत में काफी दिक्कतों का सामना करना पड़ा। ठगी के बाद अजमल सोशल मीडिया का भी प्रयोग सँभल के करता था।

अजमल की चालाकी को देखते हुए पुलिस ने उसे फँसाने के लिए जाल बिछाया। पुलिस ने एक लड़की के नाम से फर्जी इंस्टाग्राम प्रोफ़ाइल बनाया। इस प्रोफ़ाइल से अजमल को सम्पर्क किया। कुछ दिनों के बाद अजमल उस ID से लड़की बनी पुलिस के साथ बातचीत करने लगा। बात मिलने-मिलाने तक पहुँच गई। हर बार की तरह इस बार भी अजमल सोने की चाहत में लड़की से मिलने पहुँचा।

यहाँ पुलिस ने उसे गिरफ्तार कर लिया। अजमल ने बताया कि ठगी का सोना वह अपने दोस्त निफिक को दे देता था। निफिक और अजमल की भी दोस्ती भी सोशल मीडिया साइट इंस्टाग्राम के जरिए ही हुई थी। निफिक चमरावट्टम के नरिप्पारम्बिल का रहने वाला है। अजमल की गिरफ्तारी के बाद वह फरार हो गया है। पुलिस ने निफिक की तलाश शुरू कर दी है।

वृद्धा ने TMC नेता को गधा कहा तो जूतों से की पिटाई, अस्पताल में मौत: जो महिला की नातिन को लेकर भाग गया, उसका समर्थन कर रहा था तृणमूल नेता

पश्चिम बंगाल में रविवार (30 जून 2024) को गधा कहने पर तृणमूल कॉन्ग्रेस (TMC) नेता ने एक वृद्ध महिला की जूतों से इतना मारा कि उसकी मौत हो गई। बंगाल के पूर्व वर्धमान जिले के केतुग्राम के सीताहाटी पंचायत इलाके की यह घटना है। TMC की मुखिया ममता बनर्जी द्वारा शासित पश्चिम बंगाल में पिछले 11 दिनों में पिटाई से यह छठी मौत है।

मृत वृद्धा के परिजनों ने इसको लेकर TMC के नेता विश्वजीत आचार्य के खिलाफ मामला दर्ज कराया है। इसके बाद आचार्य को गिरफ्तार कर उसे 14 दिन की न्यायिक हिरासत में भेज दिया गया है। विश्वजीत आचार्य सीताहाटी पंचायत का सदस्य है। एफआईआर में अर्जुन देबनाथ और अभि देबनाथ के भी नाम हैं। हालाँकि, ये दोनों अभी फरार हैं।

मीडिया रिपोर्ट के मुताबिक, इनायतपुर की रहने वाली मृत वृद्धा बिंदुबाला मजूमदार की उम्र लगभग 62 साल थी। महिला की नतिनी प्रेम प्रसंग में पड़ोसी गाँव नैहाटी के एक युवक के साथ फरार हो गई है। इसके बाद लड़की के परिजन अपनी लड़की को लाने के लिए युवक के घर गए। इस दौरान ग्राम पंचायत सदस्य और नैहाटी के रहने वाले टीएमसी नेता विश्वजीत आचार्य ने लड़के का पक्ष लिया।

इतना ही नहीं, टीएमसी नेता विश्वजीत आचार्य ने कहा कि उसे लड़की के परिजनों से उन्हें नहीं मिलने दिया जाएगा। वृद्ध महिला और उसके परिजनों को धमकाया भी। इस पर लड़की की नानी बिंदुबाला गुस्सा गईं। उन्होंने कह दिया कि तृणमूल के नेता गधे होते हैं। उन्होंने आचार्य से पूछा, ‘अगर लड़की तुम्हारे घर की होती तो तुम क्या करते?”

इस पर टीएमसी नेता आचार्य ने बिंदुबाला की जूतों की पिटाई शुरू कर दी। वह लड़की की नानी बिंदुबाला को तब तक मारते रहा, जब तक कि वह बेहोश नहीं हो गई। इसके बाद बेहोश वृद्धा को अस्पताल ले जाया गया, जहाँ कुछ ही देर में उसकी मौत हो गई। इसके बाद वृद्धा की बेटी इति दास ने विश्वजीत आचार्य, अर्जुन देबनाथ और अभि देबनाथ के खिलाफ FIR दर्ज करा दी।

इति दास ने जिस लड़के देबनाथ के साथ उसकी लड़की भागी है, उसके पिता अर्जुन देबनाथ को भी आरोपित बनाया है। वहीं, उसी के परिवार का अभि देबनाथ भी है। उधर, केतुग्राम 2 पंचायत समिति के अध्यक्ष विकास विश्वास ने कहा कि बुजुर्ग महिला दिल की मरीज थी। उन्होंने कहा कि महिला की मौत दिल का दौरा पड़ने से मौत हुई है और टीएमसी नेता को नाहक फँसाया जा रहा है।

 

एक मर्द ने 200 महिलाओं को किया गर्भवती, रिकॉर्ड्स में गड़बड़ी से बच्चों की हो गई अदला-बदली: ऑस्ट्रेलिया की IVF इंडस्ट्री के लिए नई समस्या

ऑस्ट्रेलिया के क्वींसलैंड में एक अजीबोगरीब मामला सामने आया है। यहाँ एक ही शख्स के स्पर्म से 200 महिलाओं के गर्भवती होने की बात सामने आई है, जिसके अगम्यगमन या कौटुम्बिक व्यभिचार का खतरा बढ़ गया है। अर्थात, ये 200 बच्चे बड़े होंगे तो आपस में इनके शादी-विवाह का डर है, ये फिर इनके बच्चे आपस में शादी कर सकते हैं। मेडिकल विज्ञान मानता है कि खून के रिश्ते में शादी होने के बाद जो बच्चे पैदा होते हैं वो अनुवांशिक रोग से ग्रस्त हो सकते हैं।

वहाँ पर इन सबके लिए जिम्मेदार प्रशासन ने स्पर्म डोनर्स और इससे गर्भवती हुई महिलाओं के जो रिकॉर्ड्स रखे हैं, उनमें गड़बड़ी सामने आई है। जेनेटिक सूचनाओं में गड़बड़ी से बड़ी समस्या सामने आई है। क्वींसलैंड दुनिया की सबसे बड़ी IVF इंडस्ट्री में से है। कोरोना संबंधित दिशानिर्देशों और बढ़ती माँग के बीच अब वहाँ स्पर्म डोनेशन की कमी हो गई है। प्रत्येक 6 में से 1 परिवार ऑस्ट्रेलिया में परिवार शुरू करने में दिक्कतों का सामना करता है।

क्वींसलैंड की ये इंडस्ट्री कई मिलियन डॉलर की है। अब इनमें से 42% स्पर्म डोनेशन के रिकॉर्ड्स में गड़बड़ी सामने आई है। लोगों ने आरोप लगाया है कि उन्हें डोनर की मेडिकल स्थिति के बारे में कुछ नहीं बताया गया। इससे भ्रूण की पहचान में भी गड़बड़ी सामने आई है। कइयों का आरोप है कि वो जिस बच्चे का पालन-पोषण कर रहे हैं उनके बायोलॉजिकल अभिभावक कोई और हैं। बड़ी संख्या में स्पर्म डोनेशन को नष्ट भी किया गया है। ये तय मानक पर खड़े नहीं उतरे।

बड़ी मात्रा में संगहित डोनटेड स्पर्म को नष्ट करने का आदेश जारी किया गया है। ऑडिट में ये भी पता चला है कि निम्न गुणवत्ता वाले स्पर्म का भी बच्चा पैदा करने के लिए इस्तेमाल किया गया। एक ही डोनर कई क्लीनिकों में जाकर स्पर्म डोनेट करता है, ऐसे में उसके कितने परिवार होंगे इसके कोई रिकॉड्स गड़बड़ी की वजह से सामने नहीं आए हैं। सरकार के पास 200 से अधिक शिकायतें पहुँची हैं। सरकार अब इन परिवारों से बात कर के आगे का कदम उठाएगी।

कहाँ है वो परशुराम कुंड, जिसे अयोध्या की तरह सँवारेगी मोदी सरकार, जानिए क्या है इसका महत्व: पूर्वोत्तर भारत के धार्मिक स्थल के लिए ₹37.87 करोड़ आवंटित

केंद्रीय संस्कृति एवं पर्यटन मंत्री गजेंद्र सिंह शेखावत ने मंगलवार (2 जुलाई 2024) ने कहा कि अरुणाचल प्रदेश स्थित परशुराम कुंड को देश के प्रमुख दर्शनीय तीर्थ स्थल के रूप में विकसित किया जाएगा। उन्होंने कहा कि इस विकास केंद्र सरकार और अरुणाचल सरकार मिलकर करेगी। उन्होंने कहा कि इस कार्य की पूर्ति के लिए भगवान ने उन्हें संस्कृति एवं पर्यटन मंत्रालय दिया है।

गजेंद्र सिंह शेखावत ने कहा कि परशुराम कुंड को अयोध्या तथा अन्य देव स्थलों की तर्ज पर विकसित करने का सपना है। केंद्रीय मंत्री ने कहा, “मुझे लगता है कि भगवान ने इसी मनोकामना की पूर्ति के लिए उन्हें संस्कृति एवं पर्यटन मंत्रालय का दायित्व दिलवाया हैं। मेरी कोशिश रहेगी कि इस क्षेत्र का हर संभव विकास हो, ताकि धार्मिक पर्यटन के रूप में परशुराम कुंड भी देश में एक प्रमुख स्थल बनकर उभरे।”

परशुराम कुंड अरुणाचल प्रदेश के लोहित जिले में स्थित है। इसके विकास के बाद यह स्थान देश के प्रमुख धार्मिक केंद्र के रूप में स्थापित हो जाएगा। परशुराम कुंड को क्षेत्र के सबसे बड़े तीर्थस्थलों में से एक बनाने के लिए 37.87 करोड़ रुपये का पर्याप्त अनुदान आवंटित किया गया है। यह आवंटन तीर्थयात्रा कायाकल्प और आध्यात्मिक विरासत संवर्धन अभियान (प्रशाद) योजना के तहत किया गया है।

यहाँ हर साल परशुराम कुंड महोत्सव आयोजित किया जाता है। यहाँ हर बीतते साल के साथ तीर्थयात्रियों की संख्या में वृद्धि देखी जा रही है। आधिकारिक सूत्रों ने बताया कि जिस जगह पर ऋषि परशुराम की प्रतिमा स्थापित किया जाना है, वहाँ पर नींव का काम पूरा हो चुका है। प्रतिमा की स्थापना का काम जल्द शुरू होने की संभावना है।

इस परियोजना में परशुराम की 51 फीट ऊँची प्रतिमा की स्थापना शामिल है। इसे साल 2021 में एक संस्था द्वारा दान किया गया था। अरुणाचल प्रदेश के उपमुख्यमंत्री चौना मीन ने परशुराम कुंड को एक प्रमुख तीर्थस्थल के रूप में विकसित करने की देखरेख में सक्रिय भूमिका निभाई है। चौना मीन चोंगखाम-वाकरो निर्वाचन क्षेत्र के स्थानीय प्रतिनिधि हैं।

एक अधिकारी ने बताया कि इस स्थान पर लोहित नदी के तट पर मकर संक्रांति पर्व के दौरान लाखों श्रद्धालु पवित्र स्नान करते हैं। माना जाता है कि परशुराम कुंड का हिंदू पौराणिक कथाओं में बहुत महत्व है। राज्य के उपमुख्यमंत्री चाउना मीन खुद परशुराम कुंड में परियोजना की देखरेख कर रहे हैं।

बता दें कि परशुराम ने अपने पिता जमदग्नि के कहने पर अपनी माँ रेणुका की हत्या कर दी थी। उन्होंने जो कुल्हाड़ी चलाई थी, वह पाप के कारण उनके हाथ में फँस गई थी। कुछ ऋषियों की सलाह पर परशुराम प्रायश्चित करने के लिए पूरे हिमालय में भटकते रहे। इस दौरान लोहित नदी के पानी में हाथ धोते कुल्हाड़ी उनके हाथ से गिर गई थी।

पुराणों में कहा गया है कि लोहित नदी के किनारे जिस जगह पर ऋषि परशुराम ने अपना हाथ धोया था, उस जगह को परशुराम कुंड कहा जाने लगा। कालांतर में यहाँ हर साल मकर संक्रांति के मौके पर लगने लगा। इस मेले को परशुराम कुंड मेला कहा जाता है। अब इसे पूर्वोत्तर भारत के एक प्रमुख धार्मिक केंद्र के रूप में विकसित किया जा रहा है।

CM सिद्दारमैया की पत्नी को मैसूर के पॉश इलाके में मिली सरकारी जमीन, इधर DK शिवकुमार को प्रदेश अध्यक्ष से हटाने के लिए गुटबाजी शुरू

कर्नाटक की सत्ताधारी पार्टी में कलह के कारण सब कुछ ठीक नहीं है, ऐसी अटकलें लगाई जा रही हैं। उधर भाजपा ने आरोप लगाया है कि ‘मैसूर अर्बन डेवलपमेंट अथॉरिटी (MUDA)’ ने मुख्यमंत्री सिद्दावामैया की पत्नी पार्वती को एक पॉश इलाके में अवैध रूप से जमीन उपलब्ध कराई है। बता दें कि पार्वती के नाम पर स्थित 4 एकड़ जमीन का अधिग्रहण किया गया था, जिसके एवज में उन्हें वैकल्पिक जमीन उपलब्ध कराई गई है। भाजपा का कहना है कि उन्हें दी गई जमीन की कीमत अधिग्रहित जमीन से कई गुना अधिक है।

वहीं CM सिद्दारमैया का कहना है कि ’50:50 अनुपात’ वाले नियम के तहत उनकी पत्नी को वैकल्पिक जमीन मिलनी चाहिए थी। उन्होंने कहा कि ये नियम पूर्ववर्ती भाजपा सरकार ने ही बनाया था। इस योजना के तहत अगर किसी व्यक्ति की 1 एकड़ अविकसित इलाके में स्थित जमीन का अधिग्रहण किया जाता है तो उसे आधा एकड़ जमीन विकसित इलाके में दी जाती है। वहीं नेता प्रतिपक्ष R अशोक ने सिद्दारमैया की पत्नी को जमीन दिए जाने को अवैध बताया है।

उन्होंने आरोप लगाया कि जब ये मामला प्रकाश में आया तो अधिकारियों को निलंबित किए जाने की बजाए उन्हें स्थानांतरित कर दिया गया। उन्होंने कहा कि CBI या रिटायर्ड जज की जगह 2 IAS अधिकारियों को जाँच सौंपी गई है। सिद्दारमैया ने बताया कि उनके साले मल्लिकार्जुन ने 3 एकड़ 36 गुंटा जमीन 1996 में खरीदी थी और अपनी बहन, यानी सीएम की पत्नी को गिफ्ट की थी। एक एकड़ में 40 गुंटा होते हैं। MUDA ने प्लॉट बना-बना कर इस जमीन को बेचा।

मुख्यमंत्री का कहना है कि उनकी पत्नी की जमीन ले ली गई। उन्होंने पूछा कि क्या हमें अपनी जमीन के बदले जमीन नहीं मिलनी चाहिए? उनका कहना है कि इसके बदले अलग-अलग इलाकों में इसके आधी माप की जमीन MUDA ने उनकी पत्नी के नाम की है। एक पैनल बना कर 15 दिन में जाँच रिपोर्ट सौंपने को कहा गया है। उधर डिप्टी सीएम DK शिवकुमार ने कर्नाटक में बतौर कॉन्ग्रेस प्रदेश अध्यक्ष 4 साल पूरे कर लिए हैं। कोरोना महामारी के दौरान उन्हें KPPC की कमान सौंपी गई थी।

अब मुख्यमंत्री सिद्दारमैया के खेमे के नेताओं का कहना है कि अब प्रदेश अध्यक्ष बदला जाना चाहिए। गृह मंत्री G परमेश्वर का कहना है कि इस माँग में कुछ भी गलत नहीं है। उन्होंने कहा कि डीके शिवकुमार कई पदों पर हैं। उनकी शक्तियाँ कम करने के लिए एक से अधिक उप-मुख्यमंत्री नियुक्त करने की माँग भी की जा रही है। वहीं DK शिवकुमार के गुट के नेता कह रहे हैं कि मुख्यमंत्री को बदला जाना चाहिए। शिवकुमार ने पार्टी नेताओं की एक बैठक में कहा कि वो झुकने वाले नहीं हैं।

वोक्कालिंगा समाज के इलाकों में लोकसभा चुनाव 2024 में कॉन्ग्रेस की फजीहत के बाद DK शिवकुमार को बदले जाने की मॉंग हो रही है क्योंकि वो इसी समाज से आते हैं। उनके विरोधियों का कहना है कि अब SC-ST वर्ग से आने वाले नेताओं को मौका मिलना चाहिए। KN राजन्ना, सतीश जर्कीहोली और MB पाटिल जैसे मंत्रियों के अलावा विधायक विनय कुलकर्णी भी इस पद के दावेदार हैं। वहीं DK शिवकुमार ने कहा कि वो नकारात्मक आलोचनाओं की जगह लोगों की सेवा को तरजीह देते हैं। उन्होंने लोकसभा चुनाव में अपेक्षित परिणाम न मिलने की जाँच के लिए एक फैक्ट-फाइंडिंग कमिटी बनाने का ऐलान किया है।

इजरायल के शॉपिंग मॉल में संदिग्ध आतंकी ने 2 को चाकू मारा, सुरक्षा बलों ने किया ढेर: अभी तक किसी आतंकी संगठन ने हमले की नहीं ली जिम्मेदारी

इजरायल के एक शॉपिंग मॉल में बुधवार (3 जुलाई 2024) को आतंकी हमले की खबर आई। यहाँ एक चाकूबाज ने अचानक हमला कर के 2 लोगों को घायल कर दिया है। गंभीर हालात में घायल दोनों युवकों का इलाज अस्पताल में चल रहा है। वहीं, पुलिस ने हमलावर को मार गिराया है। इस घटना का वीडियो भी सोशल मीडिया पर वायरल हो रहा है।

मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक, घटना उत्तरी इजरायल के कार्मेल शहर की है। बुधवार को यहाँ के एक शॉपिंग मॉल में काफी भीड़ थी। इसी दौरान एक हमलावर मॉल में 2 युवकों पर चाकू से हमला कर दिया। दोनों युवक इस हमले से बचने का काफी प्रयास करते दिखे। हालाँकि, कुछ देर में दोनों युवक घायल होकर जमीन पर गिर गए।

घटना के वक्त आसपास के लोग वहाँ पहुँचे और घायलों का अपने स्तर पर इलाज शुरू कर दिया। कुछ ही देर में वहाँ एम्बुलेंस आई और दोनों घायलों को तुरंत अस्पताल पहुँचा दिया गया। इनमें से एक हालत गंभीर है। दोनों घायलों की उम्र 20 वर्ष के आसपास बताई जा रही है।

इस घटना का वीडियो सोशल मीडिया पर वायरल हो रहा है। इजरायली अधिकारियों ने इसे एक आतंकी हमला माना है। मौके पर पुलिस पहुँची और हमलावर को मार गिराया गया। इस हमले की जिम्मेदारी अभी तक किसी आतंकी संगठन ने नहीं ली है। हमलावर की पहचान अभी तक उजागर नहीं की गई है।

बता दें कि पिछले साल 7 अक्टूबर को दक्षिणी इज़रायल पर हमास के आतंकी हमले के बाद इजरायल गाजा में सैन्य कार्रवाई कर रहा है। गाजा में युद्ध से पहले ही इज़रायली कब्जे वाले पश्चिमी तट पर हिंसा बढ़ गई थी। इज़रायली सैन्य कार्रवाई के बाद हिंसा की घटनाएँ बढ़ गई हैं।