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विश्व चैम्पियन का निकला विजय रथ: मरीन ड्राइव से लेकर वानखेड़े स्टेडियम तक लाखों की भीड़, एक झलक पाने को बेताब दिखे प्रशंसक

बारबाडोस में T-20 वर्ल्ड कप फाइनल में भारत विश्व चैंपियन बना है। इसको लेकर पूरे देश में उमंग है। विजेता भारतीय टीम को स्वदेश लाने के लिए चार्टर्ड प्लेन भेजा गया था। टीम की वापसी के बाद क्रिकेटरों ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी से मुलाकात की। इसके बाद गुरुवार (3 जुलाई 2024) की शाम को मुंबई में विक्ट्री परेड निकाली गई। इस दौरान लाखों लोगों ने टीम इंडिया का आभार व्यक्त किया।

मुंबई की सड़कों पर लाखों क्रिकेट फैंस जुटे। हर किसी को चैंपियंस का इंतजार रहा। मुंबई का मरीन ड्राइव पूरी तरह से खचाखच भरा हुआ है। वानखेड़े स्टेडियम में भी हजारों फैंस जुटे हुए हैं। यह परेड मरीन ड्राइव से शुरू होकर वानखेड़े स्टेडियम तक खत्म होगी। भारतीय टीम जब मुंबई एयरपोर्ट पर पहुँची तो क्रिकेट टीम को वाटर सैल्यूट दिया गया।

एयरपोर्ट से निकलते ही सेल्फी लेने के लिए फैंस की भीड़ उमड़ पड़ी। इस दौरान टी20 वर्ल्ड कप की ट्रॉफी हार्द‍िक पंड्या अपने हाथ में लिए हुए थे। टीम इंडिया के खिलाड़ी एयरपोर्ट से विक्ट्री परेड के लिए मरीन ड्राइव निकल गए। इस सुरक्षा के भी कड़े इंतजाम किए गए थे। साथ में एंबुलेंस की भी व्यवस्था की गई थी।

जब खिलाड़ियों को एयरपोर्ट से मरीन ड्राइव ले जाया जा रहा था, तब हजारों की तदाद में खड़े प्रशंसक उनकी एक झलक पाने को बेताब दिखे। खिलाड़ियों को ले जाने वाली बस के आसपास भारी भीड़ जमा हो गई। इस दौरान पुलिसकर्मियों ने भीड़ को तितर-बितर किया और बस को मरीन ड्राइव तक सुरक्षित पहुँचने के लिए रास्ता बनाया।

मरीन ड्राइव पहुँचने से पहले हार्दिक पांड्या ने ट्रॉफी के साथ एक सेल्फी शेयर की है, जिसमें वह मुस्कुराते हुए नजर आ रहे हैं। हार्दिक ने ट्वीट करके लिखा, “वानखेड़े कुछ देर में मिलते हैं।” वहाँ पहुँचते ही खिलाड़ियों के सम्मान में नारे लगने लगे। मरीन ड्राइव पर फैंस की भीड़ के बीच विराट कोहली और कप्तान रोहित शर्मा के बड़े-बड़े कट आउट लगाए गए।

इसके बाद वहाँ से खिलाड़ियों की विक्ट्री परेड निकाली गई। वानखेड़े स्टेडियम के सभी स्टैंड भरे हुए नजर आए। स्टेडियम हाउसफुल था। एमसीए ने फैंस को स्टेडियम में फ्री एंट्री दी, जिसके कारण उम्मीद से ज्यादा लोग वहाँ पहुँचे।

बता दें कि 29 जून को हुए फाइनल मुकाबले में भारत ने दक्षिण अफ्रीका को 7 रनों से हराकर इस फॉर्मेट में दूसरी बार चैम्प‍ियन बना है। फाइनल मुकाबले में भारत ने रोमांचक अंदाज में अपने प्रतिद्वंद्वी को मात दी। यह मुकाबला बारबाडोस के केंसिंग्टन ओवल स्टेडियम में हुआ था। इस जीत के साथ ही भारत ने 17 साल बाद टी20 वर्ल्ड कप अपने नाम किया है।

‘मेक इन इंडिया’ की रफ्तार नहीं पचा पा रही विदेशी मीडिया एजेंसी ‘रॉयटर्स’, भारत में iPhone बनाने वाली Foxconn को महिलाओं के बहाने निशाने पर लिया: सरकार ने दावे नकारे

भारत में बीते कुछ वर्षों में मेक इन इंडिया योजना ने अच्छी रफ़्तार पकड़ी है। इसके अंतर्गत अब भारत विश्व का दूसरा सबसे बड़ा फोन निर्माता देश बन गया है। भारत में विश्व की सबसे बड़ी फोन कम्पनी एप्पल के भी फोन बन रहे हैं और लाखों करोड़ का इनका निर्यात भी हो रहा है। यह बात विदेशी मीडिया को पसंद नहीं आई है, उसने अब भारत में आईफोन का निर्माण करने वाली कंपनी Foxconn को निशाना बनाया है। ऐसी ही एक रिपोर्ट विदेशी मीडिया समूह रायटर्स ने छापी है।

क्या कहती है रायटर्स की रिपोर्ट?

विश्व के बड़े मीडिया समूह रायटर्स ने 25 जून, 2024 को प्रकाशित एक रिपोर्ट में दावा किया कि Foxconn तमिलनाडु के श्रीपेरम्बदूर में स्थित आईफोन प्लांट में विवाहित महिलाओं की भर्ती को लेकर अनियमितताएँ कर रही है। रायटर्स ने आरोप लगाया है कि इस प्लांट में विवाहित महिलाओं को नौकरी नहीं दी जाती। इसको लेकर रायटर्स ने कुछ महिलाओं के इंटरव्यू और भर्ती के पैम्फलेट भी इकट्ठा किए हैं। रायटर्स का आरोप है कि विवाहित महिलाओं को सुनियोजित तरीके से भर्ती प्रक्रिया से बाहर किया जाता है।

रायटर्स का दावा है कि महिलाओं को इस फैक्ट्री में इसलिए नहीं लिया जाता क्योंकि वह सोने-चाँदी के आभूषण पहनती हैं। इसके अलावा उनके पारिवारिक कारणों से छुट्टी लेने की समस्याएँ आती हैं, इसलिए भी उनको फैक्ट्री से दूर रखा जाता है। रायटर्स की रिपोर्ट में दावा है कि Foxconn यहाँ स्वयं ऐसा नहीं करती बल्कि वह जिन एजेंसियों के जरिए कम करने वालों की भर्ती करवाती है, उनके जरिए यह बात मौखिक रूप से स्पष्ट करवा देती है। रायटर्स ने इसे भेदभाव का नाम दिया है।

रायटर्स की रिपोर्ट को सरकार ने नकारा, नहीं मिली गड़बड़ी

रायटर्स के इन दावों को Foxconn ने पहले ही नकार दिया था। Foxconn ने अपने एक बयान में बताया था कि वह ऐसा कोई भेदभाव नहीं करती और इन आरोपों को सिरे से नकारती है। Foxconn ने यह भी बताया था कि उसके यहाँ सभी महिलाओं का काम करने के लिए स्वागत है। उसने यह भी साफ़ किया था कि Foxconn ने हाल ही में जिन महिलाओं की भर्ती की थी, उनमें से 25% विवाहित थीं। Foxconn ने यह भी बताया कि इससे पहले जब ऐसी बात सामने आई थी तो उसने कुछ भर्ती एजेंसियों के साथ काम करना बंद कर दिया था।

रायटर्स की इस रिपोर्ट पर Foxconn के बाद भारत सरकार और तमिलनाडु सरकार ने भी एक्शन लिया है। श्रीपेरम्बदूर में स्थित इस प्लांट में तमिलनाडु के श्रम विभाग के बड़े अधिकारियों ने जाँच की है। इस क्षेत्र के जोनल चीफ लेबर कमिश्नर ने एक पाँच सदस्यीय टीम के साथ प्लांट का जायजा लिया है और महिलाओं के साथ भी की है।

लेबर कमिश्नर ने यह जानकारी रायटर्स को दी है कि इस प्लांट में 41,281 लोग काम कर रहे हैं। इनमें से 33360 महिलाएँ हैं। इन महिलाओं में से 2750 विवाहित हैं। यह कुल महिलाओं का 8% है। प्रथम दृष्टया श्रम विभाग के अधिकारियों को इस प्लांट में कोई भी गड़बड़ी नहीं मिली है। उन्होंने इसे दोषमुक्त करार दिया है। ऐसे में Foxconn को क्लीनचिट मिली है।

जहाँ Foxconn विवाहित महिलाओं को काम देती है और उनके साथ भेदभाव नहीं करती तो वहीं भारतीय कानून उसे ऐसा करने से रोकता भी नहीं। भारत में निजी फर्म अपने काम की जरूरतों के अनुसार, विवाहित महिलाओं को भर्ती में शामिल होने से मना कर सकती हैं। हालाँकि, Foxconn ऐसा नहीं कर रही।

इस मामले में SPJ एडवोकेट्स में श्रम कानूनों की वकील सुनीता शर्मा ने ऑपइंडिया को बताया कि भारतीय श्रम कानून विवाह के आधार पर भर्ती करने को लेकर विशेष नियम नहीं बताता। ऐसे में कोई कम्पनी यदि चाहे तो विवाहित महिलाओं को अपनीं भर्ती प्रक्रिया से बाहर कर सकती है। हालाँकि, अधिकांश कम्पनियाँ ऐसा नहीं करती।

भारत में बढ़ती मैन्युफैक्चरिंग, चीन की चिंता का सबब

भारत में मोबाइल निर्माण के क्षेत्र में बीते कुछ वर्षों में हुई बढ़ोतरी चीन के लिए चिंता का सबब बन रही है। Foxconn का भारत में बढ़ता निवेश चीन को खटक रहा है। भारत ने 2023-24 में 12.1 बिलियन डॉलर (लगबग ₹1 लाख करोड़) के एप्पल के फोन निर्यात किए हैं, यह 2022-23 के मुकाबले दोगुने थे। इनमें से अधिकांश इसी श्रीपेरम्बदूर के प्लांट में बने हुए हैं। Foxconn यहाँ 2019 से ही iPHONE बना रही है। वर्तमान में दुनिया भर उपयोग होने वाले 14% iPHONE भारत में बन रहे हैं और हर साल में इसमें बढ़ोतरी हो रही है।

वर्तमान में चीन iPHONE समेत एप्पल के सभी उत्पादों का सबसे बड़ा उत्पादक है। चीन में अब तक 90% से अधिक iPHONE बनते थे। लेकिन भारत में निर्माण चालू होने के बाद धीमे धीमे चीन का हिस्सा घटने लगा है। एप्पल चाहता है कि उसके कुल iPHONE का 25% उत्पादन 2027 तक भारत में हो। ऐसे में इससे चीन को बड़ा झटका लगेगा। चीन को इससे निर्यात और रोजगार, दोनों का नुकसान होगा। वहीं भारत को अपना निर्यात बढ़ाने में मदद मिलेगी।

चीन के सोशल मीडिया में भी अब भारत के आगे बढ़ने को लेकर चिंताएँ जताई जा रही हैं। Foxconn भारत में लगभग ₹60,000 करोड़ अगले कुछ वर्षों में निवेश करने वाली है। यह ताईवान की कम्पनी है और बीते दिनों में भारत और ताइवान के संबंध भी सुदृढ़ हुए हैं। ताइवान भारत को अन्य कई तकनीकों में भी मदद कर रहा है। ताइवान को चीन अपना हिस्सा करार देता है , ऐसे में उसके लिए भारत और ताइवान के संबंध सुदृढ़ होना चिंता की बात है।

रायटर्स की रिपोर्ट का चीनी कर रहे प्रसार

Foxconn को निशाने पर लेकर की गई रायटर्स की रिपोर्ट को चीन के सरकारी समाचार वेबसाइट और चीन समर्थक बढ़ा चढ़ा कर भी दिखा रहे हैं। चीन का सरकार नियंत्रित SCMP अखबार भी इस रिपोर्ट को आगे बढ़ा रहा है। रायटर्स की रिपोर्ट को सोशल मीडिया पर भी जगह मिल रही है। इस रिपोर्ट का उद्देश्य महिला अधिकारों को उठाना कम और भारत की छवि को धूमिल करना अधिक लगता है। ऐसे में आगे यह मामला और उठता दिख सकता है। रायटर्स इससे पहले चीन के ऊपर ऐसी रिपोर्ट भी नहीं करता देखा गया है।

जिधर मुस्लिम आबादी उस बूथ पर 5 साल में ही 117% बढ़ गए वोटर… हाई कोर्ट को भी कहना पड़ा- झारखंड की जमीन पर बस कर सुविधा भोग रहे बांग्लादेशी घुसपैठिए

झारखंड हाई कोर्ट राज्य में बढ़ रही घुसपैठ को लेकर सख्त हो गया है। उसने बांग्लादेशी घुसपैठियों से को राज्य से बेदखल करने को लेकर एक्शन का आदेश दिया है। हाई कोर्ट ने एक याचिका की सुनवाई के दौरान घुसपैठियों की राज्य में उपस्थिति के ऊपर भी रिपोर्ट माँगी है।

जस्टिस सुजीत नारायण प्रसाद और जस्टिस एके राय की पीठ ने बुधवार (3 जुलाई 2024) को ये निर्देश दिए हैं। हाई कोर्ट ने राज्य सरकार को आदेश दिया है कि वह दो सप्ताह के भीतर राज्य में मौजूद घुसपैठियों का पता लगाए, उनको चिन्हित करे और उन पर क्या कार्रवाई की गई, इसको लेकर रिपोर्ट दाखिल करे। हाई कोर्ट ने केंद्र सरकार से भी रिपोर्ट माँगी है।

हाई कोर्ट की यह सख्ती डानियल दानिश की याचिका पर सुनवाई के दौरान दिखी है। याचिका में अदालत को बताया गया था कि राज्य के संताल परगना के जो भी जिले बांग्लादेश से सटे हुए हैं, उनमें बांग्लादेश के प्रतिबंधित संगठन सुनियोजित तरीके से झारखंड की जनजातीय लड़कियों से शादी करके उनका धर्मांतऱण करवा रहे हैं। नए मदरसे भी खुल रहे हैं। यहाँ 46 नए मदरसे खुले हैं। संताल परगना में गोड्डा, देवघर, दुमका, जामताड़ा, साहिबगंज और पाकुड़ जिले शामिल हैं।

हाई कोर्ट की यह टिप्पणी झारखंड की उस समस्या को दर्शाती है जो धीरे-धीरे नासूर बन चुकी है। संताल परगना के जिले पश्चिम बंगाल से सीमाएँ साझा करते हैं। पहले घुसपैठिए बांग्लादेश से पश्चिम बंगाल में आते हैं और यहाँ से फैलते हुए वह झारखंड में आ जाते हैं।

नई नहीं है डेमोग्राफी बदलने की बात

झारखंड हाई कोर्ट की टिप्पणी को रेखांकित करने वाली काफी सारी घटनाएँ पहले भी सामने आ चुकी हैं। इससे पहले मार्च, 2024 में आजतक की एक रिपोर्ट में याचिका में बताई गई समस्या को लेकर ही बात की गई थी। आजतक की रिपोर्ट में बताया गया था कि यहाँ बांग्लादेशी मुस्लिम घुसपैठिए, पश्चिम बंगाल के रास्ते आते हैं। इसके बाद वह बस जाते हैं। इनमें से कुछ आदिवासियों की लड़कियों को निशाना बनाते हैं। जब लडकियाँ उनके दिखावे में फंस जाती हैं तो उनसे शादी कर ली जाती है।

शादी के बाद लड़की की कागजों में पहचान आदिवासी के तौर पर ही रहने दी जाती है। इसके बाद उस लड़की के नाम पर जमीन ली जाती है या फिर उसकी ही जमीन कब्जा ली जाती है। रिपोर्ट में बताया गया था कि यह सब करने के लिए बांग्लादेश से आने वाले घुसपैठियों को फंडिंग मिलती है। लड़की की पहचान आदिवासी रखने के पीछे सरकारी फायदे लेने के मकसद रहता है। इसके अलावा कई जगह उन लड़कियों को चुनाव भी लड़वाया गया, जिन्होंने मुस्लिमों से शादी की।

आजतक की रिपोर्ट में यह तक बताया गया था कि यहाँ घुसपैठ करने वाले बांग्लादेशी इस जमीन में खनन के लिए भी ऐसा कर रहे हैं। कुल मिलाकर धीमे-धीमे इस इलाके की पहचान बदली जा रही है। बांग्लादेशी घुसपैठिए झारखंड में घुसते ही फर्जी पहचान पत्र भी बनवा लेते हैं। इसमें इनकी मदद पहले से आकर बस चुके लोग भी करते हैं।

सिर्फ जमीन ही नहीं चुनाव में भी घुसपैठ

बांग्लादेशी घुसपैठियों की यह समस्या शादी करने और जमीन हथियाने तक सीमित नहीं रही है। इसका कनेक्शन लोकसभा चुनाव तक से जुड़ा है। इसके लिए आपको संताल के बड़े जिले साहिबगंज की राजमहल विधानसभा का रुख करना होगा। कुछ दिन पहले राजमहल के विधायक अनंत ओझा ने ऑपइंडिया को बताया था कि उनके इलाके में कुछ गाँवों में बेतहाशा मुस्लिम वोट बढ़े हैं। उन्होंने बताया था कि यह काम पश्चिम बंगाल की सीमा से सटे गाँवों में हुआ है।

अनंत ओझा के अनुसार, उनकी विधानसभा के 187 नंबर बूथ पर 2019 में 672 वोट थे। 2024 में यह बढ़ कर 1461 हो गए। यानी इसमें लगभग 117% की वृद्धि हुई। इसी के साथ सरकारी मदरसा बूथ पर 754 वोट बढ़ कर 1189 हो गए। ऐसे कम से कम 73 बूथ इस विधानसभा के भीतर हैं जहाँ की वोटर वृद्धि असामान्य है।

विधायक अनंत ओझा ने ऑपइंडिया को बताया था कि यह सभी बूथ मुस्लिम आबादी के बीच स्थित हैं। इसी इलाके में हिन्दू आबादी वाले 17 बूथ पर इसी दौरान आबादी कम हो गई है। उन्होंने इस संबंध में राज्य चुनाव आयोग से भी शिकायत की थी। राज्य चुनाव आयोग ने इस मामले में एक टीम बनाकर एक्शन लेने को कहा है।

बताया जा रहा है इस इलाके में मतदाताओं के भौतिक सत्यापन पर भी विचार हो रहा है। हालाँकि, इस बीच समस्या का दायरा बढ़ रहा है। ऐसे में अब कोर्ट को भी इस मामले में उतरना पड़ा है। कोर्ट के आदेश के बाद राज्य की सरकार इन बांग्लादेशी घुसपैठियों पर क्या कार्रवाई करती है, यह देखने वाला होगा।

फिर से झारखंड के मुख्यमंत्री बने हेमंत सोरेन, मंत्रियों के नाम अभी फाइनल नहीं: घोटाले में गिरफ्तारी के बाद चंपई सोरेन को सौंपी थी कुर्सी

झारखंड में हेमंत सोरेन ने फिर से मुख्यमंत्री पद की शपथ ली है। राजभवन में राज्यपाल ने हेमंत सोरेन को पद और गोपनीयता की शपथ दिलाई है। राजभवन में आयोजित शपथग्रहण समारोह में हेमंत सोरेन के पिता शिबू सोरेन भी नजर आए। हेमंत सोरेन अपने पिता का हाथ थामकर उन्हें सहारा देते और राजभवन में ले जाते नजर आए। हेमंत सोरेन तीसरी बार राज्य के सीएम बने हैं। उनसे पहले शिबू सोरेन और अर्जुन मुंडा तीन बार सीएम रह चुके हैं।

पिता शिबू सोरेन और अर्जुन मुंडा की बराबरी

राज्यपाल सीपी राधाकृष्णन ने राज भवन में हेमंत सोरेन को मुख्यमंत्री के पद एवं गोपनीयता की शपथ दिलाई। वो तीसरी बार मुख्यमंत्री बने हैं। हेमंत सोरेन से पहले शिबू सोरेन और अर्जुन मुंडा झारखंड के तीन-तीन बार मुख्यमंत्री रह चुके हैं। बता दें कि झारखंड हाई कोर्ट द्वारा 28 जून को जमानत दिए जाने के बाद हेमंत को जेल से रिहा कर दिया गया था, पाँच महीने पहले उन्हें गिरफ़्तार किया गया था। बीच के समय में चंपई सोरेन बतौर मुख्यमंत्री काम कर रहे थे। उन्होंने हेमंत के जेल से बाहर आने के बाद इस्तीफा दे दिया और हेमंत के लिए रास्ता साफ कर दिया।

शपथ ग्रहण समारोह से पहले हेमंत सोरेन ने एक वीडियो संदेश जारी किया। उन्होंने कहा कहा, “5 महीने पहले सत्ता के मद में चूर अहंकारियों ने मुझे चुप कराने की कोशिश की थी। आज झारखंडियों की जनमत वापस बुलंद होगी। हेमंत सोरेन ने कहा कि इसी जगह से मैंने आपको संदेश दिया था कि किस तरह हमारे खिलाफ विरोधियों ने साजिश रची और वो उसमें कामयाब हुआ। मुझे 5 महीने तक जेल में रखने का प्रयास किया गया। हमने भी कानूनी लड़ाई का रास्ता अपनाया। न्याय ने मुझे पाक करार दिया। मैं आज फिर से आपके सामने हूँ।” हेमंत सोरेन ने कहा कि भगवान के घर अंधेर नहीं रहता है।

बता दें कि झारखंड में इस साल नवंबर-दिसंबर में विधानसभा चुनाव भी प्रस्तावित है। झारखंड में झामुमो की अगुवाई में इंडी गठबंधन के विधायकों की संख्या 45 है। इसमें कॉन्ग्रेस के 17 विधायक, राजद के एक और झामुमो के 27 विधायक शामिल हैं। झामुमो के दो विधायक नलिन सोरेन और जोबा माझी अब सांसद बन चुके हैं। सीता सोरेन ने भाजपा की टिकट पर चुनाव लड़ा था और विधायकी पद से इस्तीफा दे दिया था।

हाथरस भगदड़ मामले में 2 महिलाओं समेत 6 लोग गिरफ्तार: मुख्य आरोपित की तलाश जारी, पता बताने वाले के लिए पुलिस ने रखा ₹1 लाख का इनाम

उत्तर प्रदेश के हाथरस में हुए भगदड़ हादसे की जाँच के बाद यूपी पुलिस ने 6 आरोपितों को गिरफ्तार किया है। वहीं मामले में मुख्य आरोपित की तलाश जारी है। मुख्य आरोपित सेवादार देव प्रकाश मधुकर है जिसे खोजने के लिए पुलिस ने 1 लाख रुपए का इनाम रखा है। कहा जा रहा है कि पुलिस जल्द ही उसके विरुद्ध गैर जमानती वारंट जारी करवा सकती है।

आईजी शलभ माथुर ने प्रेस कॉन्फ्रेंस करके इस मामले में मीडिया को हालिया कार्रवाई से अवगत कराया है। उन्होंने कहा कि आरोपितों को पूछताछ के बाद अरेस्ट किया गया है। यह लोग आयोजन समिति के सदस्य थे लेकिन घटना के बाद मौके से फरार हो गए थे। गिरफ्तार आरोपितों में 2 महिलाएँ भी शामिल हैं।

पुलिस को जाँच में पता चला है कि ये लोग खुद ही भीड़ को नियंत्रित करने का काम करते थे। प्रशासन से मदद नहीं लते थे। घटना वाले दिन भी यही हुआ। मगर भगदड़ में जब हालात अनियंत्रित हुए तो ये मौके से भाग गए और लोगों को वीडियो बनाने से रोकने लगे।

इस मामले में पुलिस ने यह भी बताया कि फिलहाल भगदड़ में मरे 121 लोगों की पहचान हो गई है। वहीं जिला मजिस्ट्रेट आशीष कुमार ने बताया कि इन 121 शवों में 21 शवों को आगरा, 28 को एटा, 34 को हाथरस और 38 को अलीगढ़ लेकर जाया जाएगा।

बता दें कि 2 जुलाई को हुई इस घटना की बाबत यूपी सरकार ने जाँच हाईकोर्ट के रिटायर्ड जज की अध्यक्षता में तीन सदस्यीय टीम को दी है। पैनल को दो महीने में अपनी रिपोर्ट सौंपनी है। वहीं योगी आदित्यनाथ खुद भी हाथरस का दौरा किए और घायलों से मुलाकात थी।

इस दौरान उन्होंने सवाल किया था कि जिनकी वजह से भीड़ इकट्ठा हुई उनका नाम एफआईआर में क्यों नहीं है। इस पर उन्हें कहा गया ता कि प्रथम दृष्टया में आयोजकों पर केस हुआ है। आगे जो जो इस केस में जिम्मेदार पाया जाएगा सब पर कार्रवाई होगी।

श्रमिकों के बच्चे भी अब बन सकेंगे अधिकारी, छत्तीसगढ़ की BJP सरकार ने शुरू की मुफ्त कोचिंग योजना: 10 जिलों में पंजीकरण का काम शुरू

छत्तीसगढ़ की भाजपा सरकार ने श्रमिकों के बच्चों को सरकारी नौकरियों की तैयारी कराने के लिए मुफ्त कोचिंग देने का निर्णय लिया है। इस योजना के तहत राज्य लोकसेवा आयोग, बैंकिंग, व्यापम आदि प्रतियोगी प्रतियोगी परीक्षाओं की तैयारी के लिए मुफ्त कोचिंग की सुविधा दी जाएगी। शुरू में यह योजना कोरबा सहित राज्य के 10 जिलों में शुरू होगी।

प्रदेश के 10 जिलों में मुफ्त कोचिंग क्लासेस जुलाई में ही शुरू हो जाएगी। इसके लिए आवेदन प्रक्रिया भी विभाग ने बता दी है। यह योजना कोरबा विधायक और श्रम मंत्री लखन लाल देवांगन के पहल से शुरू की जा रही है। योजना का लाभ लेने के लिए इच्छुक और पात्र हितग्राही सेन्टर या श्रम कार्यालय के माध्यम से ऑनलाइन आवेदन प्रस्तुत कर सकते हैं।

नियमों के अनुसार, पंजीकृत श्रमिक की अगर मौत हो चुकी है, तब भी उसके बच्चों को मुफ्त कोचिंग की सुविधा मिलेगी। अगर पंजीकृत श्रमिक की मौत 9 जून 2020 से पहले हुई है तो पुरानी अधिसूचना के अनुसार योजना के लिए उनके बच्चे पात्र हैं। मुख्यमंत्री निर्माण श्रमिक और दिव्यांग सहायता योजना से जुड़े हुए श्रमिक की मौत पर भी उनके बच्चे भी यह सुविधा मिलेगी।

छत्तीसगढ़ के श्रम मंत्री लखन लाल देवांगन ने बताया कि छत्तीसगढ़ में भवन और अन्य निर्माण कर्मकार कल्याण मंडल के पंजीकृत श्रमिकों एवं मुख्यमंत्री निर्माण श्रमिकों के बच्चों के लिए यह योजना लाई गई है। उन्होंने कहा कि पंजीकृत श्रमिक एवं उनकी संतानों को शैक्षणिक योग्यता के अनुसार 4 से 10 महीने तक मुफ्त कोचिंग दी जाएगी।

इस मुफ्त कोचिंग में संघ लोक सेवा आयोग, राज्य लोकसेवा आयोग, छत्तीसगढ़ व्यवसायिक परीक्षा मण्डल, कर्मचारी चयन आयोग, बैंकिंग, रेलवे, पुलिस भर्ती जैसी परीक्षाओं की व्यापक तौर पर तैयारी कराई जाएगी। यह कोचिंग ऑनलाइन के साथ-साथ ऑफलाइन भी मिलेगी, ताकि विभिन्न परीक्षा की तैयारी कर रहे छात्र-छात्राओं को ये दोनों को विकल्प मिल सके।

यह योजना राज्य के रायपुर, बिलासपुर, दुर्ग, धमतरी, राजनांदगाँव, कोरबा, रायगढ़, जांजगीर, चांपा, महासमुंद जिले में इस योजना की शुरुआत की जा रही है। प्रदेश के तीन जिले रायपुर, दुर्ग और बिलासपुर में 50-50 की संख्या वाले चार बैच भरे जा चुके हैं। अन्य जिलों में भी काम जारी है। मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय ने विभागीय अधिकारियों को इस संबंध में निर्देश कर दिए हैं।

मौलाना ने कहा- ईद पर गाय की कुर्बानी न दें, भड़का मुफ्ती रहमान अजहरी: हिंसक प्रदर्शन की धमकी, असम पुलिस ने किया गिरफ्तार

असम पुलिस ने कट्टरपंथी इस्लामिक धर्मगुरु मुफ्ती मुकिबुर रहमान अजहरी को गिरफ्तार किया है। प्रशासन के खिलाफ भड़काऊँ भाषण देने के आरोपों में मंगलवार (2 जुलाई 2024) उसे गिरफ्तार किया गया। असम के डीजीपी जीपी सिंह के निर्देशों पर दराँग जिले की पुलिस ने उसे पकड़ा। मुकिबुर रहमान अजहरी ने सोशल मीडिया पर लखमीपुर पुलिस स्टेशन और एसपी को धमकाते हुए हिंसक विरोध प्रदर्शनों की धमकी दी थी।

मुफ्ती मुकिबुर रहमान अजहरी ने 6 जुलाई को लखीमपुर पुलिस स्टेशन के घेराव की धमकी दी थी और उसकी तैयारियों में जुटा था। यही नहीं, उसने असम में 6 से 10 जुलाई के बीच राज्यव्यापी चक्काजाम और प्रदर्शन की भी धमकी दी थी।

अजहरी ने ये बयान और धमकी मौलाना मुस्तफा कमाल द्वारा ईद के मौके पर उस अपील के बाद दी थी, जिसमें मौलाना कमाल ने मुस्लिमों से ईद के मौके पर गाय की कुर्बानी न देने की अपील की थी। मौलाना मुस्तफा कमाल ने कहा था कि इस्लाम में कुर्बानी तो अहम है, लेकिन गाय की ही कुर्बानी देनी है, ये जरूरी बिल्कुल भी नहीं है। उनके इस बयान पर असम के कट्टरपंथियों ने उसका विरोध किया था और मौलाना मुस्तफा कमाल की गिरफ्तारी की माँग की थी। इसी क्रम में मुफ्ती मुकिबुर रहमान अजहरी ने सोशल मीडिया पर बाकायदा लाइव आकर कहा था कि वो मौलाना मुस्तफा कमाल के घर के साथ ही पुलिस स्टेशन और एसपी ऑफिस का भी घेराव करेगा, जिसमें दम है वो रोक कर दिखाए। ये वीडियो सोशल मीडिया पर वायरल भी हो गया है।

असम के मंत्री पीयूज हजारिका ने मुफ्ति मुकिबुर रहमान के बयान के आलोचना की है। उन्होंने कहा, “ये व्यक्ति खास समुदाय से संबंध रहता है, जो अल्पसंख्यक है। चूँकि ईद पर गाय की कुर्बानी न देने की अपील की गई थी, लेकिन इसकी आड़ में ये व्यक्ति नफरत बढ़ा रहा है और लाइव वीडियो में असम पुलिस को चैलेंज कर रहा है। ये व्यक्ति हिंसा की भी धमकी दे रहा है। असम किधर जा रहा है?”

फेसबुक लाइव सेशन के दौरान मुफ़्ती ने कहा कि वो 6 से 10 जुलाई के बीच लखीमपुर पुलिस स्टेशन और उस “शैतान” (मुस्तफा कमाल) के घर का घेराव करेगा। इस दौरान काफी लोग मेरे साथ रहेंगे। मुकिबुर रहमान अज़हरी ने घोषणा की, “मैं यह जानना चाहता हूँ कि वो आदमी कितना बहादुर है। मुझे आज उत्तर लखीमपुर पुलिस स्टेशन से फोन भी आया था और ये कहा गया कि 6 जुलाई को घेराव जैसा कोई काम न किया जाए, लेकिन मैं उस दिन जरूर आऊँघा.. इंशाअल्लाह।” यही नहीं, उसने कहा कि एसपी और डीसीपी भी उसे फोन करें, तब भी वो घेराव करेगा, मानेगा नहीं।

मुस्तफा कमाल को गाली देते हुए उसने कहा, “मैं फिर भी जाऊँगा इंशाअल्लाह। उस आदमी ने यह खेल शुरू किया है और यह उसका आखिरी खेल है। मैं इस खेल को खत्म कर दूँगा। मैं इस्लाम का प्रचार करने के लिए बहुत मेहनत करता हूँ। अब, आप इस्लाम का अपमान करते हैं? आप रसूल (पैगंबर मुहम्मद) को गाली देते हैं। उन्होंने रसूल को शैतान कहा था। चाहे वे मेरे पैर काट दें या मेरे हाथ तोड़ दें, मैं जाऊँगा। मैं जाऊँगा, चाहे वह कितनी भी पुलिस को बुलाए। मैं 3 से 4 लाख रुपए महीना कमाता हूँ। यह आदमी केवल आरएसएस (राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ) के जरिए कमाता है। वह मानहानि का मामला दर्ज कर सकता है, लेकिन यह सच है। वह एक बाँग्लादेशी नास्तिक से भी मिला था। वह 100% आरएसएस है।”

अजहरी ने एक बार फिर दोहराया कि उसे थाने में जिहादी आंदोलन करने से कोई नहीं रोक सकता और आरोप लगाया, “इस्लाम और हमारे रसूल का अपमान मेरे लिए असहनीय है। मैं लड़ाई लड़ूँगा और विरोध करूँगा। आप मेरा वीडियो एसपी को दिखा सकते हैं। लेकिन मैं संविधान के अनुसार विरोध करूँगा। मैं बवाल करूँगा बाबा साहब अंबेडकर के संविधान ने हमें हदीस, कुरान, अल्लाह और रसूल पर विश्वास करने की आजादी दी है।”

अजहरी ने मुस्तफा कमाल को धमकी देते हुए कहा कि असम किसी के बाप की जागीर नहीं है। उसने कहा, “अगर आप इस्लाम, कुरान, रसूल या नबी का अपमान करते हैं, तो हम चुप नहीं बैठेंगे। हम चुप नहीं बैठेंगे। असम आपके पिता की जागीर नहीं है। मैं तुम्हारी दिलेरी देखने तुम्हारे शहर आऊँगा और थाने को भी घेर कर रखूँगा।”

सोशल मीडिया पर भड़काऊ वीडियो के लोकप्रिय होने के बाद कानून अधिकारियों ने तुरंत कार्रवाई की और 2 जुलाई को मुफ्ती मुकीबुर रहमान अजहरी को गिरफ्तार कर लिया। धुला पुलिस स्टेशन ने उनके खिलाफ मामला 97/24 दर्ज किया है, जिसे मंगलदोई कोर्ट में पेश किया गया है। किसी भी तरह की और गड़बड़ी को रोकने के प्रयास में अधिकारी भी स्थिति पर कड़ी नजर रख रहे हैं।

मुस्लिमों का बदला, जय फिलिस्तीन, कश्मीर में 90 वाला नरसंहार की धमकी… मुस्लिम विल बी मुस्लिम, जिस ‘मजहबी वफादारी’ से आगाह कर गए थे अंबेडकर वह खतरा टला नहीं

हाल के समय में कई चीजें ऐसी सामने आई हैं जो कि हिंदुओं के लिए काफी डराने वाली है। ये डर लगातार गहरा होता जा रहा है। ऐसा इसलिए क्योंकि एक तरफ एक मुस्लिम सांसद कश्मीर में हुए हिंदुओं के नरसंहार को खुलेआम खारिज करते हैं और धमकी देते हैं कि 370 हटा रहा तो वापस से पुराने हाल होंगे। दूसरे मुस्लिम नेता कहते हैं भाजपा को हराकर मुस्लिमों ने बीजेपी से बदला लिया है और तीसरे नेता संसद में खुलेआम जाकर ‘जय फिलीस्तीन’ के नारे बुलंद करता दिखते हैं। ऐसे लोगों के बीच देश के प्रधानमंत्री ‘सबका साथ सबका विकास’ के नारे के साथ देश को विकसित करने की सोच रहे हैं। सवाल है कि क्या सिर्फ प्रधानमंत्री के सोचने से ऐसा संभव हो पाएगा वो भी तब जब मुस्लिम सांसद और नेता इस प्रकार से खुलकर हिंदूविरोधी बयानबाजी करते हैं और बात सिर्फ मजहब की और मजहब के लोगों की करते हैं।

‘370 हटने से कश्मीरियों में गुस्सा, कभी भी भड़क सकते हैं’ : JKNC नेता रुहुल्लाह मेहदी

श्रीनगर से नवनिर्वाचित सांसद व जम्मू-कश्मीर नेशनल कॉन्फ्रेंस पार्टी के नेता रुहुल्लाह मेहदी ने खुलेआम भारत की सरकार के खिलाफ प्रोपगेंडा साइट द वायर पर बयान दिया। रुहुल्लाह मेहदी ने इस इंटरव्यू में कहा कि कश्मीरियों में आर्टिकल 370 हटाए जाने का गुस्सा है जो कि कभी फूट सकता है जैसा कि स्वतंत्रता के 40 साल बाद देखने को मिला था। आरफा खानुम शेरवानी को दिए इटरव्यू में रुहुल्ला मेहदी ने इस्लामी आतंक को धो पोंछने के लिए साथ इस मुद्दे पर बात की। साथ ही कहा कि मुस्लिमों को टारगेट करके मॉब लिंचिंग हो रही है, सिखों को खालिस्तानी कहा जा रहा है, ईसाइयों को धर्मांतरण का आरोप लगाकर सामाजिक कार्य करने से रोक रहे हैं।

दिलचस्प बात ये है कि अपने इंटरव्यू में मेहदी को हिंदुओ की आवाज उठानी जरूरी नहीं लगी। इसके अलावा रुहुल्लाह ने साफ-साफ कश्मीरी पंडितों के उस दर्द से खारिज कर दिया जिसे वो लोग पिछले 34 साल से सीने में दबाए हुए थे और कश्मीर फाइल्स में दिखाई गई हकीकत को देख रो पड़े। जेकेएनसी नेता ने तो कहा कि द कश्मीर फाइल्स में दिखाई गई चीजें सच नहीं हैं। मेहदी एक तरफ इस्लामी कट्टरपंथ को मानने से इनकार करते दिखे है तो दूसरी तरफ विपक्षी पार्टियों को हिंदुत्व से लड़ने के लिए मुस्लिमों के साथ खड़े होने को कहते दिखे।

मुस्लिमों ने वोट देकर भाजपा को दिया जवाब: मौलाना मदनी

इसी तरह जमीयत उलेमा ए हिंद के प्रमुख मौलाना अरशद मदनी ने भी लोकसभा चुनावों के बाद ताजा बयान दिया है। चुनावों के नतीजों पर मौलाना मदनी ने कहा कि लोगों ने नफरत और सांप्रदायिकता की राजनीति को खारिज कर दिया और इसका सारा श्रेय मुस्लिमों द्वारा बुद्धिमानी से किए गए मतदान को जाता है। अगर मतदाताओं ने समझदारी से वोट नहीं डाले होते तो नतीजे अलग हो सकते थे। ये मौलाना मदनी वहीं है जिन्हें तालिबान एक आतंकी संगठन नहीं लगता बल्कि उन्हें वो स्वतंत्रता सेनानी जैसा मानते हैं। मदनी ने एक बार इंटरव्यू में तालिबान का पक्ष लेते हुए कहा था कि अगर सिर्फ गुलामी के खिलाफ लड़ना आतंकवाद है तो इस हिसाब से तो महात्मा गाँधी, जवाहर लाल नेहरू और मौलाना हजरत शेखुद्दीन भी आतंकवादी थे।

‘जय फिलीस्तीन’ के नारे

इनके अलावा हैदराबाद के सांसद असदुद्दीन ओवैसी को पिछले दिनों खुलेआम जय फिलिस्तीन के नारे लगाते सुना ही गया था। उन्होंने लोकसभा सदन में सांसद पद की शपथ उर्दू भाषा में ली थी। शपथ के बाद ओवैसी को “जय भीम-जय मीम” और “अल्लाहू अकबर” के नारों के साथ “जय फिलिस्तीन” कहते सुना गया था। जबकि देश का जो संविधान ओवैसी को सांसद बनने के लिए योग्य बनाता है उसी संविधान के अनुच्छेद 102, 103 में वह स्थितियाँ बताई गई हैं, जिनके अंतर्गत किसी संसद सदस्य को अयोग्य घोषित किया जा सकता है। अनुच्छेद 102 के भाग ‘घ’ में लिखा है कि ऐसे संसद सदस्य को अयोग्य घोषित किया जा सकता है जो भारत का नागरिक नहीं है या उसने किसी दूसरे राष्ट्र की नागरिकता ले ली है।

कैसे होगा सबका-साथ सबका विकास?

ऊपर जिक्र किए गए तीनों नेताओं के ऐसे बयानों से स्पष्ट है कि ऐसे मुस्लिम नेता समाज में लोकतंत्र और संविधान की दुहाई देते हुए खुलेआम मजहब की राजनीति करते हैं और उनके समर्थक इसी आधार पर इन्हें अपना मसीहा मानते हैं जबकि दूसरी ओर प्रधानमत्री नरेंद्र मोदी सरकार में आने के बाद से लगातार जो देश के हर वर्ग के लिए काम करने में लगे हैं मगर उससे इनके समर्थकों का कोई सरोकार नहीं। वो भूल बैठे है कि पीएम मोदी ने ही सरकार बनने के बाद तीन तलाक से मुस्लिम महिलाओं को राहत दिलवाई और इसके खिलाफ कानून बनाया। इसके अलावा घर-घर राशन बिजली-पानी बिन किसी भेदभाव के पहुँचाया… पीएम मोदी ने मुस्लिम समुदाय के जीवन स्तर को सुधारने के लिए जो प्रयास किए उसके कारण कई बार उनके धुर समर्थक तक उनके ऊपर ‘तृप्तिकरण’ का आरोप लगाते दिखे। बावजूद इसके उन्होंने जैसे देश के बाकी समुदायों के लिए काम किया, वैसा मुस्लिमों के हित में करते दिखे ताकि उन्हें अच्छी शिक्षा, स्कॉलरशिप और अन्य हर वो सुविधा मिले जो बाकी नागरिकों को मिलती है… लेकिन जब बात आई उन्हें समर्थन करने की तो मजहब परस्त लोगों को उनसे ज्यादा वो लोग विश्वसनीय लगे जो बातें ही सिर्फ अराजकता और हिजाब-बुर्का की करते हैं।

बाबासाहब अंबेडकर के क्या थे विचार

मालूम हो कि भले ही आज पीएम मोदी सरकार में इन नेताओं का और इनके समर्थकों का ऐसा चेहरा उभर कर सामने आ रहा है, लेकिन हकीकत तो यह है कि दशकों पहले डॉक्टर भीम राव अंबेडकर खुद भी इनकी ऐसी प्रवृति के बारे में सबको बता चुके हैं। अंबेडकर के विचारों का एक संग्रह में पढ़ने को मिलता है-

“इस्लाम में जिस भाईचारे की बात की गई है, वो केवल मुस्लिमों का मुस्लिमों के साथ भाईचारा है। इस्लामिक बिरादरी जिस भाईचारे की बात करता है, वो उसके भीतर तक ही सीमित है। जो भी इस बिरादरी से बाहर का है, उसके लिए इस्लाम में कुछ नहीं है- सिवाय अपमान और दुश्मनी के। इस्लाम के अंदर एक अन्य खामी ये है कि ये सामाजिक स्वशासन की ऐसी प्रणाली है, जो स्थानीय स्वशासन को छाँट कर चलता है। एक मुस्लिम कभी भी अपने उस वतन के प्रति वफादार नहीं रहता, जहाँ उसका निवास-स्थान है, बल्कि उसकी आस्था उसके मज़हब से रहती है। मुस्लिम ‘जहाँ मेरे साथ सबकुछ अच्छा है, वो मेरा देश है’ वाली अवधारणा पर विश्वास करें, ऐसा सोचा भी नहीं जा सकता।”

इसके अलावा बाबासाहब डॉक्टर भीमराव आंबेडकर ने कहा था कि इस्लाम कभी भी किसी भी अपने नुमाइंदे को यह स्वीकार नहीं करने देगा कि भारत उसकी मातृभमि है। बाबासाहब के अनुसार, इस्लाम कभी भी अपने नुमाइंदो को यह स्वीकार नहीं करने देगा कि हिन्दू उनके स्वजन हैं, उनके साथी हैं। बाबा साहब ने इस मामले पर विचार प्रकट करते हुए ये भी कहा था कि मुस्लिम उसी क्षेत्र को अपना देश मानेगा, जहाँ इस्लाम का राज चलता हो…आज के समय में बाबा साहब की मुस्लिमों को लेकर कही गई ये सारी बात सत्य साबित होती दिखती हैं। बाबा साहब ने जैसा कहा था कि मुस्लिम उसी क्षेत्र को अपना मानेंगे जहाँ इस्लाम का राज चले, ठीक वैसे ही मुस्लिम आज के समय में उसी नेता पर विश्वास जताते हैं जो सिर्फ इस्लाम की बात करे। उनके लिए विकास का अर्थ देश का विकास नहीं बल्कि मजहबी विकास है। वहीं शिक्षा का अर्थ दीनी तालीम का प्रसार है।

अखिलेश यादव जिसके ‘भक्त’ वह भगदड़ के बाद भागा, CCTV फुटेज से मीडिया रिपोर्टों में दावा: कैंसर से जो मरी उसको जिंदा करने के दावे में 24 साल पहले हुई थी गिरफ्तारी

उत्तर प्रदेश के हाथरस में कथावाचक नारायण साकार विश्व हरि उर्फ ‘भोले बाबा’ के सत्संग में हुई भगदड़ में मृतकों की संख्या 121 हो गई है। भोले बाबा के अनुयायी मानते हैं कि उनमें चमत्कारी शक्ति है। इसलिए घटना के दिन उनके चरणों की धूल लेने के लिए भगदड़ मची और इतने लोग मारे गए। इतना ही नहीं, भोले बाबा ने 23 साल पहले एक मृत लड़की को जिंदा करने का दावा भी किया था।

बात साल 2000 की है। उसने 16 साल की एक मृत लड़की के शव को उसके परिजनों से जबरन छीन लिया था और दावा किया था कि वह उसे जिंदा कर देगा। खुद के जादुई शक्तियों के कथित दावे के कारण भोले बाबा के खिलाफ साल 2000 में आगरा के शाहगंज थाने में मुकदमा दर्ज कर गिरफ़्तार कर लिया गया था। हालाँकि, बाद में यह मामला बंद कर दिया गया था।

लड़की को जिंदा करने का दावा, पुलिस ने किया था गिरफ्तार

आगरा के शाहगंज के तत्कालीन SHO तेजवीर सिंह ने बताया, “18 मार्च 2000 को सूरज पाल 200-250 लोगों के साथ श्मशान घाट पर पहुँचे। वहाँ स्थानीय व्यक्ति की 16 वर्षीय बेटी स्नेहलता का शव उसके परिवार द्वारा लाया गया था। सूरज पाल और अन्य लोगों ने परिवार को अंतिम संस्कार करने से रोक दिया और उन्हें समझाने की कोशिश की कि वह उसे फिर से जीवित कर सकता है।”

तेजवीर सिंह ने बताया कि भोले बाबा और उसके लोगों ने शव को परिवार से जबरन छीन लिया था। इस बीच पुलिस को सूचना दी गई। उन्होंने आगे बताया, “जब हम मौके पर पहुँचे तो सूरज पाल और उसके समर्थकों ने हमसे बहस की। उन्होंने दावा किया कि वह लड़की को फिर से जीवित कर सकता है। इसके बाद उसके समर्थकों ने पुलिस टीम पर पथराव शुरू कर दिया।”

इसके बाद अतिरिक्त पुलिसकर्मियों को बुला स्थिति को नियंत्रित किया गया और सूरज पाल एवं उसके साथियों को गिरफ्तार कर लिया गया। शाहगंज थाने में सूरज पाल, उसकी पत्नी और चार अन्य (जिनमें से दो महिलाएं थीं) समेत छह लोगों के खिलाफ आईपीसी की धारा 109 और ड्रग्स एवं मैजिक रेमेडीज (आपत्तिजनक विज्ञापन) के तहत मामला दर्ज किया गया।

इस मामले में सूरज पाल और उनकी पत्नी सहित सभी 6 लोगों के खिलाफ जाँच करके आरोप पत्र भी दाखिल किया गया। बाद में नए सबूत सामने आने के बाद आगे की जाँच की गई। आगरा के पुलिस उपायुक्त सूरज कुमार राय ने बताया, “आगे की जाँच के दौरान एकत्र किए गए सबूतों के आधार पर मामले में क्लोजर रिपोर्ट दाखिल की गई।”

भूत-प्रेत भगाने का होता था काम

उत्तर प्रदेश के पुलिस अधिकारियों का कहना है कि कॉन्स्टेबल रह चुका सूरजपाल जाटव अपनी पत्नी प्रेमावती के साथ आगरा के केदारनगर इलाके में रहते थे। उनके साथ दो महिलाओं सहित चार अन्य लोग भी रहा करते थे। ये खुद को बाबा में प्रचारित करता था। इसकी सभा में विशेष रूप से दलित और रिक्शा चालक, मजदूर आदि कम आय वर्ग के लोग आते थे।

कई लोगों के हवाले से लिखा है कि भोले बाबा किसी तरह का चढ़ावा नहीं माँगते थे और वे दलित परिवार से थे। इसलिए वे उनकी तरफ ज्यादा आकर्षित हुए। हादसे में घायल एक महिला की बहन उर्मिला देवी ने कहा, “बाबा न तो कुछ लेते हैं और न ही कुछ माँगते हैं। अपने सत्संग में वे हमें झूठ न बोलने और मांस, मछली, अंडा और शराब नहीं खाने-पीने की सलाह देते थे।”

अस्पताल के बिस्तर पर घायल पड़ी हुई उर्मिला देवी की बहन तारामती ने इंडियन एक्सप्रेस से कहा, “जब सत्संग समाप्त हो रहा था तो भोले बाबा ने कहा, ‘आज प्रलय आएगी और फिर प्रलय आ गई।” हाथरस जिले के डोनकेली गाँव के निवासियों का कहना है कि हर गाँव में भोले बाबा के 10 से 12 सेवादार (मुख्य अनुयायी) हैं। वे लोगों को बसों आदि से कार्यक्रम स्थल तक ले जाते हैं।

भोले बाबा के कई अनुयायी अपने गले में उनकी तस्वीर वाला पीला लॉकेट पहनते हैं। उनका गुलाबी रंग का विशेष ड्रेस होता है। एक अन्य अनुयायी ने बताया कि ये हादसा बाबा सत्संग के बाद बाबा के चरण की धूल लेने के लिए हुई भगदड़ के कारण हुई। उसका कहना है, “यदि आप उनके पैरों की धूल अपने शरीर या सिर पर लगाते हैं, तो यह सभी बीमारियों को ठीक कर देती है”।

वहीं, सोखना गाँव के लोगों का कहना है कि ‘भोले बाबा’ भूत-प्रेत भगाने का काम करते थे। खासकर छोटी लड़कियों पर से। एक ग्रामीण ने दावा किया, “सत्संग में 100 से अधिक लोग भूत-प्रेत से पीड़ित थे और उन्होंने सभी को ठीक कर दिया।” सिकंदराराऊ के दामादपुरा में कुछ महिलाओं ने बताया, “उन्होंने हमसे कहा कि अगर हम अच्छे मार्ग पर चलेंगे तो अगले जन्म में बेहतर होगा।”

हादसे के बाद भागते भोले बाबा की फुटेज आई सामने

हादसे के बाद भोले बाबा ने कहा था कि भगदड़ से पहले ही वह अपने सत्संग स्थल से चले गए थे। हालाँकि, सामने आए सीसीटीवी फुटेज में दिख रहा है कि वह कड़ी सुरक्षा के बीच वहाँ से निकल रहे हैं। 47 सेकंड की क्लिप में भोले बाबा के सुरक्षाकर्मी काफिले के आने की सूचना मिलने पर सड़क के डिवाइडर और सड़क के दोनों तरफ हरकत में आ जाते हैं। इसके बाद बाबा वहाँ से निकल जाते हैं।

काफिले के रवाना होने का समय प्रत्यक्षदर्शियों के बयानों से मेल खाता है। इसमें बताया गया है कि भगदड़ तब शुरू हुई, जब श्रद्धालु भोले बाबा की कार के पीछे भागते समय फिसलकर कीचड़ में गिर गए। इंडिया टीवी ने यह सीसीटीवी फुटेज हासिल की है। इसमें काले कपड़े पहने सुरक्षाकर्मियों के बीच दर्जनों मोटरसाइकल वाले काफिले के साथ बाबा वहाँ से निकलते हैं।

बता दें कि उत्तर प्रदेश पुलिस ने सत्संग के आयोजकों के खिलाफ एफआईआर दर्ज की है। FIR में उन पर सबूत छिपाने, स्वीकृत क्षमता से अधिक लोगों को लाने और अधिकारियों के साथ सहयोग नहीं करने का आरोप लगाया गया है। FIR में कहा गया है कि आयोजकों ने 80,000 लोगों के लिए अनुमति माँगी थी, लेकिन 2.5 लाख से अधिक लोगों को कार्यक्रम स्थल में आने दिया। इससे समस्या उत्पन्न हुई।

केरल का हर तीसरा सरकारी कर्मचारी मुस्लिम/ईसाई, यादव 26 तो क्षत्रिय केवल 28: कॉन्ग्रेस-लेफ्ट के इकोसिस्टम में तुष्टिकरण से ‘सोशल जस्टिस

मीडिया रिपोर्ट्स के अनुसार, केरल की विधानसभा (नियामसभा) में रखा गया आँकड़ा बताया है कि राज्य के पास वर्तमान में 5,45,423 कर्मचारी हैं। यह अलग-अलग विभागों में कार्यरत हैं। इन कर्मचारियों में से इस आँकड़े के मुताबिक राज्य सरकार के लिए 73,774 मुस्लिम काम करते हैं। यह राज्य सरकार के पूरे कर्मचारियों का 13.5% है।

वहीं ईसाइयों की संख्या राज्य सरकार के लिए काम करने वाले मुस्लिमों से अधिक है। राज्य सरकार के 73,714 कर्मचारी अगड़े ईसाई हैं। इसके अलावा लैटिन चर्च को मानने वाले 22,452 कर्मचारी केरल सरकार में कार्यरत हैं। इसके अलावा 2399 कर्मचारी ऐसे हैं जो कि धर्मान्तरित हो कर ईसाई बने हैं। इसी के साथ 929 कर्मचारी ऐसे हैं जो नादर ईसाई हैं।

इस प्रकार सभी ईसाई समुदाय की संख्या केरल की सरकारी नौकरियों में 99,494 है। इनका प्रतिशत केरल की सरकारी नौकरियों में 18.25% है। इसके अलावा जैन समुदाय के 27 कर्मचारी भी केरल सरकार के लिए काम करते हैं। राज्य की सरकारी नौकरियों में 1,73,268 ईसाई और मुस्लिम हैं।

इस प्रकार केरल सरकार के कर्मचारियों में 31.5% ईसाई और मुस्लिम हैं। यानी राज्य के लगभग एक तिहाई कर्मचारी मुस्लिम और ईसाई हैं। इसके अलावा केरल की सरकारी नौकरियों में अनुसूचित जातियों से 51,783 जबकि अनुसूचित जनजातियों से 10,513 कर्मचारी हैं। 7113 ब्राह्मण भी राज्य के सरकारी कर्मचारी हैं, यह कुल सरकारी कर्मचारियों का 1.5% भी नहीं है।

केरल सरकार में केवल 26 यादव जबकि 28 क्षत्रिय ही सरकारी नौकरी में हैं। सबसे बड़ी संख्या इझावा समुदाय की है जो पिछड़ी जाति माने जाते हैं। इस समुदाय से 1.15 लाख कर्मचारी केरल सरकार में हैं। नायर समुदाय के भी 1.08 लाख कर्मचारी केरल सरकार में हैं।

955 कर्मचारी ऐसे भी हैं जो अपने आप को किसी भी वर्ग में वर्गीकृत नहीं करते। केरल में मुस्लिम और ईसाई कुल जनसांख्यिकी का लगभग 50% हैं। इसमें 27% इस्लाम धर्म को मानने वाले और 22% ईसाइयत को मानते हैं। दोनों धर्मों में अलग-अलग तरह के पंथों को मानने वाले लोग हैं।

केरल सरकार को राज्य में नौकरियों में विविधता ना होने के लिए विपक्ष लगातार घेर रहा है। इसके अलावा विपक्ष ने केरल की वामपंथी सरकार को आर्थिक हालत और केरल पर चढ़े कर्जे के लिए भी घेरा है। केरल की विधानसभा में लगातार विपक्ष सरकार पर हमलावर है।