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मुरैना में 2 गोहत्यारों के घरों को बुलडोजर ने किया ध्वस्त: अब तक 6 गिरफ्तार, 3 फरार… बोरी में मिला था मांस, बजरंग दल कार्यकर्ता पर किया था हमला

मध्य प्रदेश के मुरैना जिले में प्रशासन ने बुधवार (26 जून 2024) को गो-हत्या के आरोपित जफ्फार खान और असगर खान के घरों पर बुलडोजर चला दिया है। इस मामले में कुल 9 आरोपित नामजद किए गए हैं, जिनमें से 6 को गिरफ्तार कर लिया गया है। फरार 3 गो-हत्यारों की तलाश जारी है। बजरंग दल ने कठोर कार्रवाई की माँग लेकर प्रदर्शन किया है।

मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक, यह मामला मुरैना के थाना क्षेत्र नूराबाद का है। यहाँ 21 जून (शुक्रवार) को बजरंग दल ने बंगाली कॉलोनी स्थित एक घर में गोमांस होने की शिकायत की थी। तब गोकशी रोकने के प्रयास में दिलीप गुर्जर नाम के एक व्यक्ति पर आरोपितों ने हमला कर दिया था। इस घटना के विरोध में हिन्दू संगठनों ने पुलिस स्टेशन का घेराव करके नारेबाजी की थी।

सूचना मिलने पर पुलिस घटनास्थल पर पहुँची तो उसे एक बोरे में मांस भरा मिला। जाँच में यह मांस गाय का निकला। फ़ौरन ही शिकायत दर्ज करके कार्रवाई शुरू कर दी गई। इस घटना में पुलिस ने कुल 9 आरोपितों के खिलाफ नामजद FIR दर्ज की हैं। आरोपितों में जफ्फार खान, असगर खान, शम्मी, अफसर, रेतुआ, बिश्नोई, मौसम, इकरार और साहू शामिल हैं।

आरोपितों के खिलाफ IPC की विभिन्न धाराओं के साथ-साथ गोहत्या अधिनियम के तहत भी कार्रवाई की गई है। इनमें असगर और उसके ससुर रेतुआ पर राष्ट्रीय सुरक्षा कानून (NSA) की भी धाराएँ लगाई गई हैं। प्रशासन की जाँच में असगर और जफ्फार के घर अवैध तौर पर बने पाए गए। गोकशी की इस घटना में फरार चल रहे 3 आरोपितों की तलाश जारी है।

जालंधर में ओडिशा की छात्रा से गैंगरेप, निहंगों के वेष में थे दुष्कर्मी: लवली प्रोफेशनल यूनिवर्सिटी में पढ़ती है पीड़िता, अमन, रनवीर सिंह और मंजीत सिंह गिरफ्तार

पंजाब में AAP के राज में कानून व्यवस्था चरमरा गई है। पंजाब के बड़े शहर जालंधर में ओडिशा से पढ़ने आई एक छात्रा से तीन युवकों ने रेप किया। यह लोग निहंग बन कर आए थे और छात्रा को रात में अपने साथ उठा ले गए। छात्रा से रेप करने के बाद छात्रा को वह सूनसान इलाके में छोड़ गए। पुलिस ने तीनों आरोपितों को गिरफ्तार कर लिया है।

मीडिया रिपोर्ट्स के अनुसार, पीड़ित 21 वर्षीय छात्रा जालंधर की लवली प्रोफेशनल यूनिवर्सिटी में केमिस्ट्री और बायोलॉजी पढ़ रही है। वह 24 जून, 2024 की रात को अपने कुछ दोस्तों के साथ ढिलवाँ चौक के पास खाने पीने गई हुई थी। छात्रा के साथ तीन युवक भी थे।

यहीं पर कुछ समय बाद तीन युवक आ गए। इनमें से दो ने निहंग का वेश धारण किया हुआ था। यह युवक बाइक पर सवार थे। इन्होने लड़की को डराना धमकाना और उसके दोस्तों से पूछताछ करना चालू कर दिया। निहंग बन कर आए युवकों ने लड़की के साथ के लड़कों को यहाँ से भगा दिया और कहा कि वह लड़की को उसके हॉस्टल छोड़ देंगे।

इसके बाद निहंगों के वेश में आए युवकों ने युवती को अपने साथ बैठा लिया और उसे लेकर चल दिए। यह तीनों उसे वापस हॉस्टल ना ले जाकर सूनसान जगह ले गए। यहाँ उन्होंने लड़की के साथ रेप किया। लड़की का वीडियो भी बनाने का आरोप इन तीनों युवकों पर लगा है।

रेप करने के बाद उसे घायल अवस्था में यह तीनों वहीं छोड़ गए। लड़की ने इसके बाद अपने दोस्तों को फ़ोन किया और पूरी घटना बताई। लड़की के दोस्त उसे लेने आए और फिर अस्पताल में भर्ती करवाया। मामले में इसके बाद पुलिस को सूचना दी गई है।

पुलिस ने शिकायत दर्ज होने के बाद आरोपितों की तलाश चालू कर दी और उन्हें मंगलवार (25 जून, 2024) को गिरफ्तार कर लिया है। बताया गया है कि इन तीनों में से निहंग कोई नहीं और यह खाली उनका वेश बनाए हुए थे। तीनों में से दो आरोपित काम करते हैं जाकी तीसरा बेरोजगार है। इन तीनों के नाम अमन, रणवीर सिंह और मंजीत सिंह हैं।

‘हमें कॉलेज में बुर्का-हिजाब पहनने दो, कुरान में लिखा है’: बॉम्बे हाईकोर्ट ने ठुकराई मुस्लिम छात्राओं की याचिका, कहा – शैक्षिक संस्थान के फैसले में नहीं देंगे दखल

मुंबई के चेंबूर ट्रॉम्बे एजुकेशन सोसाइटी के एनजी आचार्य और डीके मराठे कॉलेज में ड्रेस कोड तय करते हुए हिजाब, बुर्का बैन किया गया तो नौ छात्राएँ हाई कोर्ट पहुँच गईं। छात्राओं ने माँग की कि कॉलेज परिसर में जो चीज बैन हैं, उन्हें वो (जैसे हिजाब, नकाब) पहनने की अनुमति मिले। उन्होंने तर्क दिया कि हिजाब उनके मजहब में पहनना अनिवार्य है। अब इसी मामले पर सुनवाई करते हुए बॉम्बे हाई कोर्ट ने परिसर में हिजाब, बुर्का और नकाब पर प्रतिबंध लगाने के फैसले में हस्तक्षेप करने से इनकार कर दिया।

न्यायमूर्ति ए एस चंदुरकर और न्यायमूर्ति राजेश पाटिल की खंडपीठ ने ये कहकर नौ छात्राओं की याचिका को खारिज कर दिया कि वह कॉलेज द्वारा लिए गए फैसले में हस्तक्षेप करने के इच्छुक नहीं है। जानकारी के मुताबिक अदालत जाने वाली छात्राएँ विज्ञान डिग्री पाठ्यक्रम के दूसरे और तीसरे वर्ष में हैं। इन्होंने कॉलेज द्वारा एक ड्रेस कोड लागू करने के निर्देश को हाई कोर्ट में चुनौती दी थी।

निर्देश में छात्र-छात्राओं को परिसर के भीतर हिजाब, नकाब, बुर्का, स्टोल, टोपी और बैज पहनने से मना किया गया था। इसी निर्देश को मानने की बजाय छात्राएँ कोर्ट गईं। अपनी याचिका में इन्होंने कहा कि ऐसे निर्देश उनके मजहब का पालन करने के मौलिक अधिकारों, निजता के अधिकारों के खिलाफ है।

छात्राओं ने इस कार्रवाई को अपनी याचिका में मनमाना, अनुचित, गलत और विकृत बताया था। साथ ही कुरान की आयतों का हवाला देकर कहा कि इस्लाम में हिजाब पहनना अनिवार्य है। वहीं कॉलेज की ओर से पेश वकील अनिल अंतुरकर ने बताया कि कॉलेज परिसर में हिजाब, नकाब और बुर्का पर प्रतिबंध लगाने का निर्णय सिर्फ इसलिए है ताकि समान ड्रेस कोड लागू हो सके। ये सिर्फ अनुशासनात्मक कार्रवाई है और ये किसी भी तरह से मुस्लिम समुदाय के खिलाफ नहीं है। जो ड्रेस कोड लागू किया गया है वो हर धर्म और जाति के सभी छात्रों के लिए है।

राहुल गाँधी के लिए हिंदू ‘चरमपंथी’, नरेंद्र मोदी की ईमानदारी के विरोधी भी कायल, जेट विमान से आता था मायावती का सैंडल: जूलियन असांजे की विकिलीक्स ने भारतीय नेताओं पर भी किए थे खुलासे

पूरी दुनिया में खुफिया कागजों का खुलासा कर हंगामा मचा देने वाले विकिलीक्स के फाउंडर जूलियन असांजे लंदन की जेल छूटकर अपने देश ऑस्ट्रेलिया पहुँच गए हैं। उनकी अमेरिका के साथ डील हो गई है। उन्हें अमेरिका के न्याय विभाग के सामने अपने आप को एक मामले में दोषी मान लिया है, जिसकी पाँच वर्ष की सजा वह पहले ही लंदन में काट चुके हैं।

विकिलीक्स के खुलासों से भारत में भी काफी हंगामा मचा था। विकिलीक्स के खुलासों में दावा किया गया था कि राहुल गाँधी हिन्दुओं में धार्मिकता को इस्लामी जिहाद से बड़ा खतरा मानते थे। राहुल गाँधी के अलावा विकिलीक्स में तब गुजरात के मुख्यमंत्री नरेन्द्र मोदी और उत्तर प्रदेश की मुख्यमंत्री मायावती को लेकर भी कई खुलासे हुए थे।

राहुल गाँधी ने हिन्दुओं को बताया था खतरा

विकिलीक्स ने राहुल गाँधी और तत्कालीन अमेरिकी राजदूत टिमोथी रोमर के बीच हुई बातचीत का खुलासा किया था। इस विकिलीक्स में दावा था कि राहुल गाँधी ने टिमोथी रोमर से एक बातचीत में हिन्दू चरमपंथियों को इस्लामी आतंक से बड़ा खतरा बताया था। अमेरिकी राजदूत के भारत में इस्लामी आतंक को लेकर बात करने पर उन्होंने उनका पूरा ध्यान हिन्दू आतंकवाद की थ्योरी पर मोड़ने का प्रयास किया था। उन्होंने अमेरिका को हिन्दुओं को लेकर चेताया भी था।

राहुल गाँधी का कहना था कि ऐसे समूह जो भारत में ही पनपे हैं और पाकिस्तान और इस्लामी समूहों की तरफ से आने वाले आतंकी हमलों का जवाब देने की सोचते हैं, उन पर अधिक ध्यान दिए जाने की आवश्यकता है। संभवतः उनका इशारा मालेगाँव बम धमाकों की तरफ रहा होगा, इस मामले में कई निर्दोष हिन्दू कार्यकर्ताओं को तब फंसाया गया था।

राहुल गाँधी ने टिमोथी रोमर से बातचीत में यह भी माना था कि भारत में लश्कर-ए-तैयबा को लेकर स्थानीय मुस्लिमों में समर्थन बढ़ रहा था और इसके सबूत भी थे। टिमोथी रोमर ने अपने देश अमेरिका को बताया था कि वह अमेरिकी हित साधने के लिए एक अच्छा साधन हो सकते हैं।

अमेरिकी विदेश विभाग द्वारा दक्षिणी एशिया में तैनात किए गए रोबर्ट ओ ब्लेक ने अमेरिका को भेजे गए नोट का खुलासा भी विकीलीक्स ने किया था। विकिलीक्स के इस खुलासे में राहुल गाँधी के बारे में अमेरिका के विचारों को लिखा गया था। यह नोट पत्रकार सईद नकवी से बातचीत पर आधारित था।

ब्लेक ने कहा था कि राहुल गाँधी की कॉन्ग्रेस पार्टी में काफी कम लोग तारीफ़ करते हैं। यह भी कहा गया था कि राहुल गाँधी लगातार दिल्ली की राजनीति से बाहर रहते हैं। ब्लेक से बातचीत में नकवी ने कहा था कि राहुल गाँधी कॉन्ग्रेस के लिए फायदे से ज्यादा नुकसान करते हैं।

मायावती रखती थीं 9 खाना बनाने वाले, सैंडल लेने भेजा था जेट

विकिलीक्स के एक खुलासे में उत्तर प्रदेश की तत्कालीन मुख्यमंत्री मायावती पर भी बात की गई थी। अमेरिकी दूतावास में तैनात पोलोफ़ ने अपनी उत्तर प्रदेश यात्रा के बाद सारा ब्यौरा अमेरिका भेजा था। इसमें कहा गया था कि मायावती ने उत्तर प्रदेश में भ्रष्टाचार को केंद्रीकृत कर दिया था। इसमें दावा किया गया था कि मुख्यमंत्री रहते हुए मायावती काफी शानदार जीवन जीती थीं। उन्होंने अपना खाना बनाने के लिए 9 शेफ रखे हुए थे।

मायावती की विलासिता के विषय में यह भी बताया गया था कि उन्होंने एक बार अपनीं पसंदीदा सैंडल मँगाने के लिए मुंबई को एक खाली विमान भेजा था। इसी खुलासे में दावा था कि मायावती ने अपने एक मंत्री को उठक बैठक भी लगवाई थी क्योंकि वह बिना उनकी इजाजत के उत्तर प्रदेश के राज्यपाल के पास चला गया था।

अमेरिका को भेजे गए ब्यौरे में दावा था कि बसपा का टिकट लेने के लिए लगभग ₹1 करोड़ की धनराशि देनी पड़ती थी। इसमें यह भी कहा गया था कि इस दौरान अधिकांश पत्रकारों और नौकरशाहों के फोन तक टैप किए जाते थे। इसीलिए यह लोग मायावती के खिलाफ लिखने से बचते थे।

नरेन्द्र मोदी के विकास के बारे में की थी बात

विकिलीक्स में अमेरिका के मुंबई में काउंसल जनरल माइकल ओवेन और मुख्यमंत्री नरेन्द्र मोदी की एक मुलाकात का भी जिक्र था। इस मुलाक़ात में नरेन्द्र मोदी ने गुजरात के विकास के विषय में ओवेन को बताया था। ओवेन ने भी गुजरात में हो रहे विकास की बात मानी थी। ओवेन ने अन्य नेताओं से भी बात की थी। इन नेताओं ने ओवेन को बताया था कि मोदी को रिश्वत नहीं दी जा सकती। इनमें कॉन्ग्रेस के नेता भी शामिल थे, इन्होने भी माना था कि गुजरात में विकास हो रहा है।

CBI ने अरविंद केजरीवाल को कोर्ट से किया गिरफ्तार, दिल्ली शराब घोटाले में CM पर कसा डबल फंदा: क्या सुप्रीम कोर्ट से मिलेगी राहत?

केंद्रीय जाँच ब्यूरो (सीबीआई) ने दिल्ली शराब नीति घोटाला मामले में मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल को गिरफ्तार कर लिया है। उन्हें तिहाड़ जेल से सीबीआई की टीम कोर्ट लेकर पहुँची थी, जहाँ कोर्ट की इजाजत के बाद अरविंद केजरीवाल को गिरफ्तार कर लिया गया।

मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक, सीबीआई ने कोर्ट को बताया कि उन्होंने दिल्ली के मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल को औपचारिक रूप से गिरफ्तार कर लिया है और सभी आवश्यक दस्तावेज मुहैया करा दिए हैं। बता दें कि मंगलवार, 25 जून को, दिल्ली हाई कोर्ट ने अरविंद केजरीवाल को जमानत देने के ट्रायल कोर्ट के आदेश पर रोक लगा दी थी, जबकि ईडी की याचिका को स्वीकार करते हुए उत्पाद शुल्क नीति मनी लॉन्ड्रिंग मामले में ट्रायल कोर्ट के आदेश पर रोक लगाने की माँग की थी। अब अरविंद केजरीवाल ने सुप्रीम कोर्ट में याचिका दायर कर दिल्ली हाई कोर्ट के आदेश को चुनौती दी है, जिस पर आज (26 जून 2024) को सुप्रीम कोर्ट में सुनवाई हो रही है।

सुप्रीम कोर्ट में सुनवाई से पहले ही सीबीआई ने अरविंद केजरीवाल को गिरफ्तार किया है। सीबीआई ने पूछताछ के लिए अदालत से अरविंद केजरीवाल की हिरासत माँगी, इस पर अदालत ने मंजूरी दे दी। फिलहाल, दिल्ली की राऊज एवेन्यू कोर्ट और आम आदमी पार्टी दफ्तर के बाहर भारी पुलिस बल तैनात किया गया है, किसी भी तरह के विरोध प्रदर्शन की आशंका को देखते हुए ये तैनाती की गई है।

बता दें कि दिल्ली के मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल की मुश्किलें कम होने का नाम नहीं ले रही हैं। सीबीआई ने सोमवार को तिहाड़ जेल के अंदर अरविंद केजरीवाल से पूछताछ की थी और फिर अब बुधवार (26 जून 2024) को सीबीआई ने अरविंद केजरीवाल को कोर्ट में पेश करने के बाद औपचारिक तौर पर गिरफ्तार कर लिया।

लोकसभा की पहली बाजी PM मोदी ने जीती, ध्वनिमत से अध्यक्ष चुने गए BJP सांसद ओम बिरला: उम्मीदवार उतारकर भी वोटिंग की हिम्मत नहीं जुटा पाया INDI गठबंधन

भारतीय जनता पार्टी के सांसद ओम बिरला एक बार फिर लोकसभा स्पीकर बन गए है। वोटिंग प्रक्रिया में ओम बिरला को ध्वनि मत से लोकसभा स्पीकर के तौर पर चुना गया। चुनाव के बाद प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और कॉन्ग्रेस नेता राहुल गाँधी उन्हें स्पीकर के आसन तक ले गए।

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने एक बार फिर सदन का स्पीकर बनने पर ओम बिरला को बधाई दी। उन्होंने कहा, “सौभाग्य है कि आप दूसरी बार स्पीकर चुने गए। आप नए प्रतिमान, नए कीर्तिमान गढ़ते आए हैं। आपकी कार्यशैली से युवा सांसदों को प्रेरणा मिलेगी। बतौर सांसद ओम बिरला का कार्य सराहनीय रहा है। आपने दूसरी बार स्पीकर बनकर नया रिकॉर्ड बनाया है।”

पीएम मोदी ने कहा कि ओम बिरला की मुस्कान सदन को भी खुश रखेगी। उन्होंने ने कहा कि सरकार ने लगातार तीसरी बार कार्यकाल शुरू किया है और ओम बिरला को लगातार दूसरी बार सदन के नेतृत्व करने का मौका मिल रहा है। पिछले 20 सालों का इतिहास ऐसा रहा है कि ज्यादातर स्पीकर ज्यादा समय तक स्पीकर नहीं रह पाते। या तो वो चुनाव नहीं जीत पाते या स्पीकर नहीं रह पाते। लेकिन, आपने न सिर्फ चुनाव जीता है बल्कि एक बार फिर स्पीकरपद पर आसीन हुए हैं।

बता दें कि इससे पहले लोकसभा स्पीकर पद को लेकर सत्ता पक्ष और विपक्ष के बीच सहमति नहीं बन पाई थी। ऐसे में लोकसभा स्पीकर के चुनाव की बात सामने आई। पीएम मोदी के नेतृत्व में एनडीए ने अपनी ओर से उम्मीदार के तौर पर ओम बिरला का नाम दिया। वहीं विपक्ष ने अपनी ओर से कॉन्ग्रेस नेता के सुरेश को उतारा था।

एनडीए प्रत्याशी के नाम पर उनके दल में एक तरफ जहाँ सब राजी थे तो वहीं इंडी गठबंधन के प्रत्याशी पर तृणमूल कॉन्ग्रेस की ममता बनर्जी कल से ही नाराज चल रही थीं। ममता बनर्जी का कहना था कि स्पीकर का उम्मीदवार उतारने से पहले उनसे कोई सलाह नहीं ली गई। हालाँकि बाद में खबरें आई कि राहुल गाँधी ने बातचीत करके सब सुलझा लिया है टीएमसी विपक्ष को ही समर्थन देंगी… मगर आज जब वोटिंग की बारी आई तो विपक्ष इतने मतभेदों के बीच मतदान के बिन मान गया और ध्वनिमत से ओम बिरला एक बार फिर लोकसभा स्पीकर चुने गए।

ध्वनि-मत क्या होता है?

संसद में ध्वनि मत का अर्थ होता है किसी मुद्दे पर ध्वनि के आधार पर निर्णय होना। सामान्यत: ऐसे मामले में सदन के सारे सदस्यों से समर्थन माँगा जाता है। फिर हाँ या नहीं के रूप में अपनी आवाज सदस्य देते हैं। जिस पक्ष की ओर से ज्यादा तेज आवाज उठाई जाती है, उसी के आधार पर निर्णय ले लिया जाता है। ये प्रक्रिया प्रस्ताव पारित करने के दौरान भी अपनाई जाती है।

जम्मू-कश्मीर बार एसोसिएशन का 20 साल अध्यक्ष रहा मियाँ अब्दुल कयूम गिरफ्तार, लश्कर आतंकियों से करवाई थी विरोधी वकील की हत्या: अलगाववादियों का भी रहा है करीबी

जम्मू-कश्मीर हाई कोर्ट बार एसोसिएशन के पूर्व अध्यक्ष मियाँ अब्दुल कयूम भट्ट को मंगलवार (25 जून 2024) को गिरफ्तार कर लिया गया। मियाँ अब्दुल कयूम भट्ट 2 दशकों से भी ज्यादा समय तक बार एसोसिएशन का अध्यक्ष रहा है। उसका दामाद जावेद इकबाल वानी अभी श्रीनगर हाई कोर्ट का जज है। मियाँ अब्दुल कयूम भट्ट पर आरोप है कि उसने अपने प्रतिद्वंदी वकील बाबर कादरी की लश्कर के आतंकवादियों से हत्या कराई थी।

कादरी की हत्या करने वाला लश्कर का कमांडर साकिब मंजूर अगस्त 2021 में मुठभेड़ में मारा जा चुका है। वो घाटी में ‘द रेजिस्टेंट फोर्स’ का भी चेहरा था। द रेजिस्टेंट फोर्स लश्कर का मुखौटा संगठन है, जिसने बीते कुछ सालों में घाटी में हुए आतंकवादी हमलों की जिम्मेदारी ली है।

मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक, मियाँ अब्दुल कयूम भट्ट अलगाववादी कामों के चलते काफी समय जेल में भी बिता चुका है। वो हुर्रियत कॉन्फ्रेंस के मुखिया सैयद अली शाह गिलानी के गुट में रहा है, जो कश्मीर को पाकिस्तान में मिलाने की वकालत करता था। मियाँ अब्दुल कयूम भट्ट कई बार जेल जा चुका है। उसे 1990 में लोक सुरक्षा अधिनियम के तहत गिरफ्तार किया गया था और 1992 तक जेल में रखा गया था। यही नहीं, घाटी में विरोध प्रदर्शन आयोजित करने के आरोप में उन्हें 2008 और 2010 में दो बार फिर से गिरफ्तार किया गया था। 5 अगस्त, 2019 को जिस दिन अनुच्छेद 370 को हटाया गया था, उस समय उसे पीएसए के तहत गिरफ्तार कर लिया गया था, हालाँकि साल 2021 में उसे रिहा कर दिया गया, जब उसने अलगाववादी गतिविधियों में शामिल नहीं होने का वचन दिया था।

कादरी की घर में गोली मार कर हत्या

बाबर कादरी श्रीनगर में वकील थे। वो मियाँ अब्दुल कयूम भट्ट के विरोधी थे और बार एसोसिएशन पर मियाँ अब्दुल कयूम भट्ट के लंबे समय से कब्जे का विरोध कर रहे थे। बाबर कादरी ने आरोप लगाया था कि भट्ट ने चुनावों में हेरफेर करके वर्षों तक अपने पद पर कब्जा जमाए रखा। सितंबर 2020 में कादरी की उनके श्रीनगर स्थित घर पर दो आतंकवादियों ने गोली मारकर हत्या कर दी थी, जो मुवक्किल बनकर आए थे। उन्होंने अपनी हत्या के कुछ दिन पहले एक वीडियो पोस्ट किया था जिसमें आरोप लगाया गया था कि कैसे भट्ट ने बार चुनावों में धांधली की थी। कादरी पर साल 2018 में भी हमला हुआ था।

अगस्त 2022 में पुलिस ने श्रीनगर में भट और दो अन्य वकीलों के घरों की तलाशी ली थी और डिजिटल उपकरण, बैंक स्टेटमेंट और दस्तावेज जब्त किए थे। इस साल की शुरुआत में हाई कोर्ट ने कादरी हत्याकांड को निर्भीक और निष्पक्ष सुनवाई के लिए श्रीनगर से जम्मू की एक अदालत में स्थानांतरित कर दिया था। जहाँ गवाह ऐसे माहौल में गवाही देने की स्थिति में हों जो स्वतंत्र और प्रतिकूल न हो। हाई कोर्ट का आदेश SIA की एक याचिका पर आया था। जिसमें दावा किया गया था कि श्रीनगर का कोई भी वकील कुछ प्रभावशाली अधिवक्ताओं की संलिप्तता के कारण कानूनी सहायता देने को तैयार नहीं था। कादरी की हत्या की प्रारंभिक जाँच के बाद मामला एसआईए को स्थानांतरित कर दिया गया था।

बार एसोसिएशन के चुनाव पर लगी रोक

भट्ट की गिरफ्तारी के कुछ घंटों बाद श्रीनगर के जिला मजिस्ट्रेट ने एक आदेश जारी किया जिसमें जम्मू-कश्मीर हाई कोर्ट बार एसोसिएशन के चुनावों को रोक दिया गया। ये चुनाव 27 जून को होने वाले थे। प्रशासन ने श्रीनगर में निचली अदालत परिसर में धारा 144 भी लागू कर दी है, जहाँ चुनाव होने वाले थे। भट्ट पाकिस्तान समर्थक अलगाववादी नेता गिलानी के साथ संबंधों के लिए चर्चित था और एसोसिएशन समेत 23 संगठनों को हुर्रियत से जोड़ने में कामयाब रहा था। वो अलगाववादी नेताओं, आतंकियों के मामलों को फ्री में अदालत में चुनौती देता था और उनका केस लड़ता था।

बस्ते में कपड़ों के बीच ड्रग्स भरकर ला रही थी राबिया, सूरत पुलिस ने दबोचा: पूछताछ के बाद 5 जगह मारी रेड; शफीक, फैजल समेत 9 गिरफ्तार

गुजरात में कई ड्रग तस्करों की गिरफ्तारी हुई है। इनमें एक महिला तस्कर भी शामिल है। उसका नाम राबिया शेख है। पता चला है कि राबिया अपने बस्ते में कपड़ों के भीतर ड्रग छिपाकर उन्हें सूरत में तस्करी के लिए ला रही थी। हालाँकि सूरत क्राइम ब्रांच ने उसे स्टेशन से अरेस्ट कर लिया। उसके साथ उसका साथी शफीक खान भी दबोचा गया है। इसके अलावा इस कार्रवाई के बाद हुई पूछताछ से कई तस्करों को हिरासत में लिया गया है। अब तक कुल 9-10 गिरफ्तारियों की बात सामने आ रही है।

उल्लेखनीय है कि राबिया की गिरफ्तारी उस समय सामने आई है जब सूरत में पुलिस लंबे समय से ड्रग के विरुद्ध एक्शन में है। इसी क्रम में सूरत क्राइम ब्रांच को राबिया के आने की सूचना मिली थी। उन्हें पता चला था कि मुंबई के गोवंडी में रहने वाली एक महिला राबिया शेख एम.डी.ड्रग्स की बड़ी खेप लेकर सूरत आ रही है। इसी टिप पर सूरत रेलवे स्टेशन पर पुलिस ने निगरानी रखी और मुंबई से जैसे ही ट्रेन सूरत आई राबिया और शफीक को पुलिस ने दबोच लिया।

इंडिया टीवी खबर में बताया गया है कि सूरत पुलिस इस केस पर पिछले 1 महीने से भी ज्यादा समय से काम कर रही थी। उन्होंने सारे अपराधियों की डिटेल्स इकट्ठे कर लिए थे। राबिया को लेकर उनके पास जानकारी आई थी कि वो ट्रेन, सूरत आने के लिए ट्रेन, बस और रिक्शे चेंज करती रहती थी। इस बार पुलिस ने शुरू से ही राबिया के पीछे 2 कॉन्स्टेबल लगा दिए थे ताकि उसके हर मूवमेंट पर नजर रखी जा सके। साथ ही उसके डिलीवरी एजेंट्स को भनक तक नहीं लगने दी कि वे क्राइम ब्रांच के रडार पर हैं।

राबिया के मुंबई से सूरत पहुँचने के बाद उसपर कार्रवाई की गई। छानबीन में राबिया के पास एक स्कूल बैग मिला। उसकी जाँच हुई तो उसमें उसने कपड़ों के बीच में ढाई सौ ग्राम एमडी ड्रग मिला। पुलिस ने सख्ती से पूछताछ की तो इन लोगों ने कुछ अन्य ड्रग पेडलर्स के नाम और पते भी बताए। इसके बाद सूरत क्राइम ब्रांच ने 5 जगहों पर रेड मारी। इन जगहों मे होटल से लेकर आरोपितों के घर शामिल हैं।

पहले पता चला कि राबिया और शफीक द्वारा बताए गए मोहसिन शेख, सरफराज उर्फ सलमान और फैजल पाल इलाके के काचा मरीना होटल में हैं। हालाँकि जब पुलिस गई तो वहाँ पर सिर्फ सरफराज ही था। चेकिंग के दौरान होटल के कमरे से 28 ग्राम एमडी ड्रग बरामद हुआ, फिर रान्देर इलाके में स्थित रमा रेजिडेंसी के पास रोड से फैसल अल्लारखा कचरा और यासीन बाबुल मुल्ला को 31 ग्राम ड्रग्स के साथ गिरफ्तार किया। इसके बाद मोहसिन शेख और अशफाक शेख की तलाशी में उनके घरों में भी रेड मारी गई।

छापे के वक्त अशफाक ने दूसरे की छत पर कूदकर भागने की कोशिश की, हालाँकि वो नाकाम हो गया। चोट आने पर तुरंत अस्पताल ले जाया गया। पड़ताल के दौरान 14 ग्राम ड्रग मिला। इसी तरह नानपुरा श्रुति हॉस्पिटल के सामने से आसिफ सैयद उर्फ़ बाबू को भी पुलिस ने पकड़कर उसके पास से भी 27 ग्राम एम.डी. ड्रग बरामद किया।

कुल मिलाकर सूरत क्राइम ब्रांच ने 5 जगह रेड डालकर 354.650 ग्राम ड्रग्स और 1.930 ग्राम गांजा भी बरामद किया। इस कार्रवाई में गोवंडी की राबिया के अलावा यूपी के जौनपुर का शफीक खान पठान, भरूच के सरफराज और सलमान, सूरत के फैसल अल्लारखा कचरा, यासीन बाबुल मुल्ला, अशफाक मोहम्मद, युनिस शेख और आसिफ सैयद को गिरफ्तार किया गया।

तमिलनाडु के मंत्री उदयनिधि स्टालिन को जमानत, कहा था- AIDS-डेंगू जैसा है सनातन, इसे खत्म करना होग: देश भर में दर्ज हैं FIR

तमिलनाडु के मुख्यमंत्री एमके स्टालिन के बेटे और राज्य सरकार में मंत्री उदयनिधि स्टालिन को सनातन धर्म पर अपमानजनक बयान देने के मामले में जमानत मिल गई है। उन्हें बेंगलुरु के एक कोर्ट ने जमानत दे दी है। उदयनिधि ने एक सभा के दौरान सनातन धर्म की तुलना डेंगू-मलेरिया और HIV-AIDS से की थी और इसे खत्म करने की बात कही थी।

मंगलवार (25 जून, 2024) को बेंगलुरु के एक विशेष कोर्ट में हुई सुनवाई के दौरान उन्हें यह जमानत दी गई है। कोर्ट में इस मामले में सुनवाई के दौरान उदयनिधि निजी रूप से मौजूद थे। इस मामले की सुनवाई विशेष मामलों के जज केएन शिवकुमार ने की। उन्हें ₹50,000 के निजी मुचलके पर जमानत दी गई है।

उन्हें सुनवाई के बाद तुरंत ₹5000 नकद जमा कराने का आदेश भी न्यायालय ने दिया। इसके बाद उन्हें जमानत दे दी गई। इस मामले में फरवरी, 2024 में एक शिकायत के आधार पर उनके खिलाफ बेंगलुरु के ही एक कोर्ट ने आपराधिक मामला दर्ज करने का आदेश दिया था। उनके अलावा और भी कई लोगों को इस मामले में आरोपित बनाया गया था।

गौरतलब है कि सितम्बर, 2023 में न्नई में तमिलनाडु प्रोग्रेसिव राइटर्स आर्टिस्ट एसोसिएशन द्वारा आयोजित एक सम्मेलन में सनातन की तुलना डेंगू, मलेरिया और कोरोनावायरस से की थी और इसे खत्म करने की अपील की थी। उनके इस बयान का देश भर में विरोध हुआ था और कई जगह उनके खिलाफ शिकायतें भी दर्ज करवाई गईं थी।

उदयनिधि के विरुद्ध उत्तर प्रदेश, कर्नाटक, बिहार, जम्मू-कश्मीर और महाराष्ट्र में FIR दर्ज हैं। वह इन पर कार्रवाई से बचने के लिए सुप्रीम कोर्ट भी गए थे और सभी FIR को एक साथ जोड़ कर मामले की सुनवाई की माँग की थी। हालाँकि, सुप्रीम कोर्ट ने उनकी इस माँग को मानने से इनकार कर दिया था।

उदयनिधि के मामले में मद्रास हाई कोर्ट ने कहा था कि उनकी टिप्पणियाँ समाज को बाँटने वाली थी। उदयनिधि के मामले में कर्नाटक हाई कोर्ट ने इससे पहले कार्रवाई पर रोक लगा दी थी।

6 साल की बच्ची से रेप में शेख आसिफ अली को हुई थी फाँसी, लेकिन हाई कोर्ट ने कम कर दी सजा क्योंकि वह ‘पाँच वक्त का नमाजी’ है

ओडिशा हाई कोर्ट ने 6 साल की बच्ची की रेप के बाद मौत के मामले में अकील अली को दोषमुक्त कर दिया और आसिफ अली की सजा को बदल दिया। दोनों को ट्रायल कोर्ट ने फाँसी की सजा सुनाई थी, लेकिन ओडिशा हाई कोर्ट ने अकील अली को दोषमुक्त कर दिया और आसिफ अली की फाँसी की सजा को बदलकर उम्रकैद कर दिया। कटक स्थित ओडिशा हाई कोर्ट ने कहा कि ‘आरोपित दिन में कई बार नमाज अदा करता है, चूँकि उसने खुद को अल्लाह को समर्पित कर दिया है, ऐसे में वो कोई भी सजा भुगतने को तैयार है।’

वर्डिक्टम की रिपोर्ट के मुताबिक, ओडिशा हाई कोर्ट के जस्टिस एस.के. साहू और जस्टिस आर.के. पटनायक की खंडपीठ ने कहा, “सजा अनुपातहीन रूप से बड़ी नहीं होना चाहिए, यह न्यायोचित सजा का एक परिणाम है और यह उसी सिद्धांत द्वारा निर्धारित होता है जो निर्दोष को सजा की अनुमति नहीं देता है। अपराध करने पर निर्धारित सजा से अधिक कोई भी सजा, निर्दोष को सजा देने जैसा है।”

ऑपइंडिया के पास मौजूद कोर्ट के आदेश के मुताबिक, अकील और आसिफ ने 21 अगस्त 2014 को चॉकलेट खरीदने गई 6 साल की बच्ची का अपहरण कर लिया, जिसे बाद में नग्न और बेहोशी की हालत में पाया गया। अस्पताल ले जाने पर डॉक्टरों ने संदेह जताया कि उसके साथ रेप हुआ है। जहाँ से उसे कटक के एससीबी मेडिकल कॉलेज और अस्पताल में रेफर कर दिया गया। अस्पताल ले जाते समय उसकी मौत हो गई। उसके चचेरे भाई ने बाद में खुलासा किया कि अपीलकर्ता आसिफ अली और अकील अली उसे जबरदस्ती ले गए थे।

इस मामले में पीड़ित की चाची ने आसिफ और अकील के साथ 2 अन्य के खिलाफ FIR दर्ज कराई थी, जिसमें पुलिस ने चार्जशीट दाखिल किया था। ट्रायल कोर्ट ने आईपीसी की धारा 302, 376-डी, 376-ए और पोक्सो अधिनियम की धारा 6 के तहत दोषी पाया और उन्हें फाँसी की सजा सुनाई। इस सजा के खिलाफ अकील और आसिफ ने हाई कोर्ट में अपील की थी।

हाई कोर्ट ने अकील अली को आईपीसी की धारा 302/376-ए/376-डी और पोक्सो अधिनियम की धारा 6 के तहत सभी आरोपों से बरी कर दिया, साथ ही आसिफ अली को भी आईपीसी की धारा 376-डी के तहत बरी कर दिया। हालाँकि कोर्ट ने आसिफ को आईपीसी की धारा 302/376-ए और पोक्सो अधिनियम की धारा 6 के तहत दोषी पाया और उम्रकैद की सजा दी।

हाई कोर्ट ने अपने फैसले में कहा, “यह रिकॉर्ड से प्रमाणित है कि अपराध लगभग छह वर्ष की आयु की एक बालिका के साथ सबसे वीभत्स, शैतानी और बर्बर तरीके से किया गया था, लेकिन मामला परिस्थितिजन्य साक्ष्य पर आधारित है और रिकॉर्ड पर ऐसा कोई भी साक्ष्य नहीं है कि अपराध पूर्व-नियोजित तरीके से किया गया था। ऐसा लगता है कि दोनों अपीलकर्ताओं ने मृतक को उसके चचेरे भाई (पीडब्लू 17) के साथ देखा था, जब वे चॉकलेट खरीद कर लौट रहे थे और फिर मृतक को उठा लिया गया और उसके साथ बलात्कार किया गया, जिसके दौरान उसके शरीर के विभिन्न हिस्सों पर चोटें आईं और उसकी मृत्यु जननांग पथ पर लगी चोटों के परिणामस्वरूप सदमे और रक्तस्राव के कारण हुई, जो सामान्य प्रकृति में घातक थी।” हाई कोर्ट ने आगे कहा कि नाबालिग चचेरे भाई को कोई नुकसान नहीं पहुँचाया गया, जबकि अभियुक्तों को पता था कि वो लोगों को उनके अपराध के बारे में बता देंगे।