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जिस हल्द्वानी में इस्लामी कट्टरपंथियों ने किया था दंगा-आगजनी, वहाँ से गायब 2 हिन्दू लड़कियाँ यूपी से बरामद: निशा हुसैन और जीजा उजैर समेत 5 गिरफ्तार

हल्द्वानी के बनभूलपुरा से लापता हुई दोनों हिंदू लड़कियों को मुजफ्फरनगर से बरामद कर लिया है। उनके साथ उन्हें भगाने वाले मुस्लिम किशोर को भी गिरफ्तार कर लिया गया है। इस मामले में आरोपित किशोर की बहन नुरीन उर्फ निशा, बहनोई उजैर उर्फ आसिफ, मामा अब्दुल शमी समेत कुल 5 लोगों को गिरफ्तार कर लिया गया, जिसमें आमिल हसन भी शामिल है। उसी ने दो दिन तक किशोर और दोनों लड़कियों को अपने घर मुजफ्फरनगर में छिपाकर रखा।

बता दें कि दोनों किशोरियाँ 20 मई को हल्द्वानी के बनभूलपुरा से गायब हो गईं थी। आरोप पड़ोस में रही रहने वाले नाबालिग मुस्लिम युवक पर था। सीसीटीवी फुटेज में सभी लोग बदायूँ की ओर जाते दिखे थे। इस मामले में पुलिस ने किशोर की बहन

स्थानीय मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक, पुलिस ने निशा उर्फ नूरीन, उसके शौहर उजैर उर्फ आसिफ को गिरफ्तार किया। आरोपित किशोर पहले दोनों लड़कियों को लेकर उन्हीं के बदायूँ के सहसवान में मृदाटोला लेकर पहुँचा था। दोनों ने पुलिस की तलाश को देखते हुए उन्हें पैसे देकर मुजफ्फरनगर की ओर रवाना कर दिया, जहाँ आमिल ने उसे अपने घर में शरण दी थी। आमिल बनभूलपुरा के ही रहने वाले अब्दुल समी उर्फ भोला के लगातार संपर्क में था और उसे मालूम था कि तीनों मुजफ्फरनगर में हैं।

पुलिस ने इस मामले में अब आरोपित किशोर, निशा, उजैर, अब्दुल समी उर्फ भोला और मुजफ्फरनगर निवासी आमिल को गिरफ्तार किया है। इस मामले में रविवार को हिंदू संगठनों ने पुलिस को चेतावनी भी दी थी, तो सोमवार को सामाजिक संगठनों ने प्रदर्शन करते हुए एसएसपी पीएन मीणा से मुलाकात की थी, जिसके बाद एसएसपी ने 24 घंटे के अंदर लड़कियों की बरामदगी का आश्वासन दिया था।

एसएसपी पीएन मीणा ने दोनों किशोरियों की बरामदगी के लिए पुलिस की 4 टीमें लगाई थी, साथ ही साइबर ट्रेसिंग भी लगातार कर रही थी। इसके साथ ही पुलिस लगातार किशोर के संपर्क में रहने वालों से भी पूछताछ कर रही थी। पुलिस को सूचना मिली थी कि आरोपित किशोर दोनों लड़कियों को लेकर बरेली होकर दिल्ली के लिए निकला था, लेकिन पहुँचा नहीं। इसके बाद से सभी मुजफ्फरनगर में थे और अब पुलिस ने दोनों किशोरियों को बरामद करते हुए 5 लोगों को गिरफ्तार कर लिया है। किशोरियों की बरामदगी से पुलिस ने भी राहत की साँस ही है।

बता दें कि फरवरी 2024 में नगर निगम द्वारा सरकारी जमीन से कब्जा हटाए जाने के दौरान इस्लामिक कट्टरपंथियों ने जमकर हिंसा की थी। हिंसा की इन वारदातों में 6 लोगों की मौत हो गई थी। इस दौरान कट्टरपंथी इस्लामिक भीड़ ने पत्थरबाजी-आगजनी जैसी घटनाओं को अंजाम दिया था और दर्जनों गाड़ियों को आग के हवाले कर दिया था।

‘हलाला से डर लगता था’: सनातन में घर-वापसी कर समरीन बनीं ‘सुमन यादव’, मित्रपाल को चुना जीवनसाथी: गायत्री मंत्र के जाप और हवन से हुआ शुद्धिकरण

उत्तर प्रदेश के बरेली जिले में एक मुस्लिम लड़की ने सनातन धर्म में घर वापसी की है। लड़की का नाम समरीन है जो अब सुमन यादव नाम से जानी जाएँगी। सुमन ने मित्रपाल नाम के हिन्दू युवक को अपना जीवन साथी चुना है। दोनों ने बरेली के ही अगत्स्य मुनि आश्रम में अग्नि को साक्षी मान कर 7 फेरे लिए और सदा एक दूसरे का साथ निभाने की कसम खाई। समरीन ने गायत्री मंत्र के जाप के साथ वैदिक विधि-विधान से हवन किया। मंगलवार (25 जून, 2024) को अपनी घर वापसी के बाद समरीन ने बुर्का नापसंद बताते हुए कहा कि उनको तीन तलाक और हलाला से डर लगता था।

कपड़ों का काम करने वाले जमील अहमद की 22 वर्षीया बेटी समरीन मूलतः बरेली के सेंथल इलाके की रहने वाली हैं। समरीन के अब्बा ने उन्हें महज कक्षा 5 तक पढ़ाया था। लगभग 2 साल पहले वह इज्जतनगर इलाके में अपने एक रिश्तेदार के घर किसी फंक्शन में गईं थीं। यहाँ रिश्तेदारी के पड़ोस में मित्रपाल का घर था। दोनों की यहीं पहली बार मुलाकात हुई थी। मित्रपाल इंटर पास हैं और 12 हजार रुपए प्रतिमाह वेतन पर एक प्राइवेट नौकरी करते हैं।

थोड़े दिनों की बातचीत के बाद समरीन और मित्रपाल दोस्ती हो गई जो अंत में प्यार में बदल गई। दोनों ने शादी करने का भी निर्णय ले लिया। इस रिश्ते की भनक जब समरीन के परिजनों को लगी तो उन्होंने तमाम पाबंदियाँ कायम कर दीं। समरीन का घर से निकलना भी पहरे में होने लगा। उससे फोन भी छीन लिया गया। समरीन के निकाह के लिए भी कोई मुस्लिम लड़का खोजा जाने लगा। इधर समरीन के साथ उनके प्रेमी मित्रपाल भी जल्द से जल्द वैवाहिक बंधन में बंधने की कोशिश में जुटे थे।

मित्रपाल ने अपने दोस्तों के जरिए अगत्स्य मुनि आश्रम और कई घर वापसी करवा चुके पंडित के के शंखधर के बारे में पता लगाया। 25 मई (मंगलवार) को समरीन जैसे-तैसे अपने घर से निकल कर मित्रपाल के पास पहुँची। यहाँ से दोनों अगत्स्य मुनि आश्रम गए। पंडित के के शंखधर ने दोनों के कागजात चेक किए। समरीन ने अपनी घर वापसी व मित्रपाल से विवाह की इच्छा बिना किसी जोर-जबरदस्ती के अपनी मर्जी से करना बताया। इसका उन्होंने बाकायदा लिखित सबूत भी जमा किया।

आखिरकार दोनों का विवाह अग्नि को साक्षी मान कर हो गया। समरीन ने अपनी घर वापसी के बाद गायत्री मंत्र का जाप किया और विधि-विधान से हवन किया। पंडित के के शंखधर के अलावा मंदिर में मौजूद हिन्दू संगठन के सदस्यों ने समरीन को आशीर्वाद दिया। मित्रपाल के परिजनों ने समरीन से सुमन यादव बनी अपनी बहू का ख़ुशी से स्वागत किया। समरीन ने बताया कि उनको इस्लमी तौर-तरीकों के साथ मज़हबी किताबों में लिखी गई बातों की ज्यादा जानकारी नहीं है।

मीडिया से बात करते हुए समरीन ने यह भी बताया कि अपने प्रेमी के घर वालों के तौर तरीके देख कर उन्हें हिन्दू धर्म पसंद आने लगा था। बकौल समरीन उन्हें बुर्का पसंद नहीं है। साथ ही वो तीन तलाक और हलाला से भी डरती हैं। शादी बाद समरीन पति के साथ अपने ससुराल चली गईं।

‘बड़ी संख्या में OBC ने दलितों से किया भेदभाव’: जिस वकील के दिमाग की उपज है राहुल गाँधी वाला ‘छोटा संविधान’, वो SC-ST आरक्षण से समृद्ध लोगों को करना चाहते हैं बाहर

आजकल राहुल गाँधी को आपने हाथ में भारत का संविधान लिए हुए देखा होगा। लाल रंग की डायरी की तरह दिखने वाला ये भारत के संविधान का पॉकेट वर्जन है, जो 20 सेंटीमीटर लंबा और 9 सेंटीमीटर चौड़ा है। इस पर चमड़े का जिल्द चढ़ा हुआ है। राहुल गाँधी ने लोकसभा चुनाव 2024 के चुनाव प्रचार के दौरान अपनी रैलियों में भी मंच से संविधान की इस पुस्तक को दिखाया और लोगों को डराया कि भाजपा संविधान बदल देना चाहती है।

संविधान का कोट पॉकेट वर्जन, जिसे रखते हैं राहुल गाँधी

इसी तरह जब लोकसभा में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी शपथ ले रहे थे तब भी राहुल गाँधी ने उनकी तरफ संविधान की ये प्रति दिखाई। असल में ‘ईस्टर्न बुक कंपनी’ ने इस संविधान को 2009 में पहली बार प्रिंट किया था। ये संविधान का कोट पॉकेट संस्करण है। कंपनी के निदेशकों में से एक सुमित मलिक ने जानकारी दी कि सुप्रीम कोर्ट के अधिवक्ता गोपाल शंकरनारायणन ने की तरफ से इसका आईडिया आया था। उन्होंने कंपनी से कहा था कि वो संविधान की ऐसी पुस्तक प्रिंट करे, जो वकीलों के पॉकेट में आराम से समा जाए।

अब तक इसके 16 संस्करण छापे जा चुके हैं। राष्ट्रपति रहते रामनाथ कोविंद और प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को भी ये गिफ्ट में दिया जा चुका है। वकील और जज इसे खरीदते हैं। इसके लिए बाइबिल पेपर का इस्तेमाल किया गया जो काफी पतला होता है, सभी अनुच्छेदों को लाल रंग में रखा गया और टेक्स्ट को काले रंग में। पहले संस्करण में इसकी 500-600 प्रतियाँ बिकी थीं, 16वाँ संस्करण आते-आते इसकी 5000-6000 प्रतियाँ बिक रही हैं।

2022 में इसका 14वाँ संस्करण जारी किया गया था, जिसका मूल्य 745 रुपए था। भारत के अटॉर्नी जनरल रहे KK वेणुगोपाल ने इसकी प्रस्तावना लिखी थी। उन्होंने इसमें संविधान को भारत का भाग्य बताया है। दो भाइयों CL मलिक और PL मिल्क ने 1940 के दशक में उत्तर प्रदेश की राजधानी लखनऊ में बस कर बुक पब्लिशिंग का फैसला लिया था। कॉन्ग्रेस के कई नेता-कार्यकर्ता अब इसे खरीद रहे हैं। कॉन्ग्रेस की ताज़ा रणनीति को देखें तो वो ‘संविधान संरक्षक’ के रूप में खुद को दिखाना चाहती है, ऐसे में इसकी बिक्री और बढ़नी तय है।

आइए, अब बात करते हैं सुप्रीम कोर्ट के अधिवक्ता गोपाल शंकरनारायणन की। वही, जिनके आईडिया पर ये छपा था और आज राहुल गाँधी का फेवरिट बना हुआ है। 2 दशक से भी अधिक समय से वो कानून की प्रैक्टिस कर रहे हैं और पिछले 25 वर्षों में मान्यता प्राप्त करने वाले सबसे युवा वरिष्ठ अधिवक्ता है। प्रदूषण के खिलाफ भी वो सक्रिय रहे हैं, EWS को लेकर भी न्यायपालिका में साक़िया रहे हैं। 2015 में भारत में क्रिकेट प्रशासन और BCCI में बदलाव लाने के लिए सुप्रीम कोर्ट ने जिस लोढ़ा समिति का गठन किया था, उसके सचिव के रूप में उन्होंने काम किया था।

OBC आरक्षण के लाफ हैं वकील गोपाल शंकरनारायणन

आरक्षण को लेकर गोपाल शंकरनारायणन की क्या सोच है, ये जानना ज़रूरी है। साथ ही ये सवाल भी, कि क्या राहुल गाँधी इससे इत्तिफ़ाक़ रखते हैं? उन्होंने EWS आरक्षण को चुनौती दी थी। इस पर उनके विचार हैं कि किसी भी चीज का सिर्फ समर्थन या विरोध नहीं होता, बीच में भी कुछ होता है। उनका मानना है कि SC-ST के अलावा जाति आधारित आरक्षण का प्रावधान संविधान में कहीं नहीं है। वो कहते हैं कि संविधान के पहले संशोधन के बाद OBC आरक्षण जैसी चीजें आईं।

बकौल गोपाल शंकरनारायणन, ST और OBC समाज में भी एक छोटा सा अभिजात्य वर्ग है जो उन्हें मिले 98-99% आरक्षण का लाभ उठा रहा है। उनका कहना है कि राष्ट्रपति द्वारा मान्यता प्राप्त SC जातियों में 1200 ऐसी हैं जिन्हें कभी आरक्षण का लाभ मिला ही नहीं। असं में उन्हें दिक्कत इस बात से है कि EWS के कारण आरक्षण की सीमा 50% के पार चली जाती है। उन्होंने बताया कि EWS पर फैसला सुनाने वाले 5 जजों में सबकी अलग-अलग राय थी।

‘Law School Policy Review’ नामक वेबसाइट को दिए गए इंटरव्यू में उन्होंने बताया था कि संविधान की बहस से पहले भी महात्मा गाँधी और भीमराव आंबेडकर जैसे नेता दलितों के खिलाफ वर्षों से हो रहे भेदभाव की बात करते थे और सुझाया गया कि जिन्हें ‘अछूत’ कहा जाता था उनके लिए संविधान में विशेष उपाय करने की ज़रूरत है। उनका मानना है कि जैसे ही आरक्षण SC-ST के अलावा अन्य समुदायों के लिए आगे बढ़ाया गया, वैसे ही इसका उद्देश्य खत्म होने लगा।

अधिवक्ता गोपाल शंकरनारायणन ने कहा था, “सामाजिक रूप से मजबूत कई समुदायों को आरक्षण का लाभ मिलने लगा, जो उन्हें मिलना चाहिए था जिनके साथ इतिहास में भेदभाव हुआ। OBC समुदाय में बड़ी संख्या में ऐसे हैं, जिन्होंने दलितों के साथ भेदभाव किया। अब आप दोनों को लाभार्थियों की समान श्रेणी में डाल रहे हैं। उत्तर प्रदेश, तमिलनाडु, बिहार, मध्य प्रदेश और राजस्थान में सत्ता में यही समुदाय हैं और सरकार में उनकी बड़ी भूमिका है। कई ऐसे समुदाय हैं जो OBC बनना चाहते हैं, जैसे कई OBC सब SC का दर्जा चाहते हैं।”

गोपाल शंकरनारायणन समझाते हैं कि प्रावधान होने के बावजूद राष्ट्रपति द्वारा मान्यता प्राप्त पिछड़ों की सूची में से अब तक एक भी जाति को हटाया नहीं गया है, जो बताता है कि आरक्षण के लाभार्थियों की संख्या बढ़ती ही गई है अब तक। उनका पूछना है कि आरक्षण का क्या यही उद्देश्य था कि अधिक से अधिक लोग पिछड़े हो जाएँ? वो जाती जनगणना या सरकारी दस्तावेजों में जाति के जिक्र के भी विरोधी हैं और कहते हैं कि लोगों से ये पूछा जाना चाहिए कि उनके पास घर है या नहीं, उसकी आर्थिक स्थिति क्या है।

सुप्रीम कोर्ट में भी आरक्षण में बदलाव पर लड़ाई

गोपाल शंकरनारायणन द्वारा दायर की गई याचिका के आधार पर ही सुप्रीम कोर्ट ने केंद्र सरकार से पूछा था कि क्या शिक्षा और नौकरी के क्षेत्र में SC-ST में जो क्रीमीलेयर हैं, अर्थात जो संपन्न और शिक्षित हैं, उन्हें आरक्षण का लाभ न दिया जाए? मार्च 2028 में ‘समता आंदोलन समिति’ व अन्य की याचिका पर ये सवाल किया गया था, याचिकाकर्ताओं के वकील गोपाल शंकरनारायणन ही थे। उनका मानना है कि आरक्षण में क्रीमीलेयर को हटा दिए जाने से गरीबों और पिछड़ों को इसका वास्तविक लाभ मिलेगा।

उन्होंने उस दौरान दलील दी थी कि अनुसूचित जाति एवं जनजाति में जो सचमुच में पिछड़े एवं वंचित हैं, उन्हें ये पीड़ा हो रही है कि उनके ही समुदाय के उन्नत व समृद्ध वर्ग उन लाभों को उनसे छीन रहा है, जो वास्तव में उन तक पहुँचने चाहिए थे। गोपाल शंकरनारायणन मराठा आरक्षण के भी खिलाफ हैं। महाराष्ट्र में विधानसभा चुनाव से पहले एक्टिविस्ट जारांगे पाटिल मराठों और मुस्लिमों के लिए आरक्षण की माँग कर रहे हैं, इसके लिए धरना-प्रदर्शन और अनशन किए जा रहे हैं।

इसी साल अप्रैल में मराठा आरक्षण के खिलाफ सुप्रीम कोर्ट में पेश होकर गोपाल शंकरनारायणन ने कहा था कि सर्वोच्च न्यायालय पहले ही निर्णय दे चुका है कि आरक्षण की सीमा 50% से अधिक नहीं जा सकती। गोपाल शंकरनारायणन के बारे में एक और बात बता दें कि राजीव गाँधी के हत्यारे AG पेरारिवलन की रिहाई सुनिश्चित करवाने के लिए भी उन्होंने सुप्रीम कोर्ट का रुख किया था। सुप्रीम कोर्ट में जस्टिस अरुण कुमार मिश्रा के साथ उनकी झड़प भी हो चुकी है, जज ने उन पर अवमानना का मामला चलाने की चेतावनी दी थी, जिसका वकीलों के संघ ने विरोध किया था।

OBC-OBC का रट्टा मारते रहते हैं राहुल गाँधी

ये आश्चर्य की बात है कि OBC-OBC का रट्टा लगाने वाले राहुल गाँधी संविधान की वही पुस्तक लेकर घूम रहे हैं, जो एक ऐसे अधिवक्ता की संकल्पना है जो OBC आरक्षण के विरोधी हैं। राहुल गाँधी कभी प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की सरकार से पूछते हैं कि उनके प्रशासन में कितने OBC सचिव हैं। जबकि वो भूल जाते हैं कि पीएम मोदी खुद OBC समुदाय से आते हैं। मोदी मंत्रिमंडल में सबसे अधिक ओबीसी मंत्रियों की संख्या है। ओबीसी समाज के लिए कई योजनाएँ चल रही हैं।

राहुल गाँधी ये तक कह चुके हैं कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी OBC नहीं हैं, उन्होंने खुद गुजरात का CM बनने के बाद अपनी जाति को ओबीसी में शामिल किया। हालाँकि, सच ये है कि 1994 में ही इस संबंध में अधिसूचना जारी हुई थी जब कॉन्ग्रेस की ही सरकार थी। वहीं अप्रैल 2000 में भारत सरकार ने मोढ़ घांची समुदाय को OBC का दर्जा दिया। उस समय भी मोदी सीएम तक नहीं बने थे। इसके बावजूद कॉन्ग्रेस लगातार झूठ फैलाती रहती है।

मुस्लिम महिला ने BJP को दिया वोट तो शौहर अब्दुल आशिफ मंसूरी ने बताया हराम, तीन-तलाक देकर घर से निकाला: MP के छिंदवाड़ा का मामला

मध्य प्रदेश के छिंदवाड़ा में एक मुस्लिम महिला ने बीजेपी की सदस्यता की और बीजेपी के लिए प्रचार किया, तो उसके शौहर ने बीजेपी को वोट देने को हराम बताते हुए उसे तीन-तलाक दे दिया। यही नहीं, शौहर की माँ और बहन से भी उसकी जमकर पिटाई की। उन लोगों ने महिला को घर से निकाल दिया है और महिला किराए के घर में रहने को विवश है। महिला का निकाह 8 साल पहले हुआ था, लेकिन अब तीन तलाक दिए जाने के बाद वो बेघर हो चुकी है। महिला ने शौहर और ससुराल के पक्ष के सदस्यों पर 5 लाख के दहेज के लिए प्रताड़ित करने के भी आरोप लगाए हैं।

मीडिया रिपोर्टस के मुताबिक, पीड़ित मुस्लिम महिला ने कहा, “8 साल पहले उसका निकाह अब्दुल आशिफ मंसूरी से हुआ। निकाह के बाद से पति, सास व चार ननद मायके से दहेज में 5 लाख रुपए लाने का दबाव बनाकर शारीरिक और मानसिक प्रताड़ना देने लगे। उसे घर से निकाल दिया गया। वह बेटे के साथ किराए के मकान में रह रही है। इस दौरान शौहर अब्दुल आशिफ मंसूरी ने उसके साथ मारपीट कर तीन तलाक बोलकर रिश्ता तोड़ लिया।” महिला ने कहा कि शौहर और परिजनों ने बीजेपी को वोट देने को हराम कहते हुए तीन तलाक दिया है।

महिला ने छिंदवाड़ा कोतवाली में दी शिकायत में कहा है कि उसके शौहर ने उसे पहले 30 मार्च, 2022 को तलाक दिया और बाद में अक्टूबर और नवंबर 2023 में दो बार तलाक दिया। वहीं, महिला के शौहर ने कहा कि उसके परिवार में किसी ने भी उसे परेशान नहीं किया क्योंकि वह पिछले तीन साल से अलग रह रही थी। तलाक का मुद्दा पहले ही अदालत में दायर किया जा चुका था।

इस मामले में कोतवाली के टीआई उमेश गोल्हानी ने बताया, “पीड़िता ने अपनी शिकायत में बताया कि प्रधानमंत्री व मुख्यमंत्री से प्रभावित होकर उसने भारतीय जनता पार्टी की सदस्यता ग्रहण की थी। लोकसभा चुनाव में भारतीय जनता पार्टी के उम्मीदवार को अपना वोट दिया। उसने बीजेपी के लिए प्रचार भी किया था। इससे महिला का पति, सास व ननद नाराज हो गए। इसके बाद पति ने मारपीट करने के साथ तीन तलाक कहकर उससे रिश्ता तोड़ लिया।”

दिहाड़ी मजदूर इस्माइल शेख ने बहन के बॉयफ्रेंड के पिता को चाकुओं से गोद कर मार डाला, अफेयर से था नाराज़

महाराष्ट्र के पुणे में कटारु काचरू लहाड़े नाम के 60 वर्षीय बुजुर्ग की चाकुओं से गोद कर हत्या कर दी गई है। हत्या की वजह मृतक के बेटे का मुस्लिम लड़की से अफेयर होना बताया जा रहा है। कातिलों के तौर पर अब तक इस्माइल रियाज़ शेख और उसके दोस्त उमेश गुप्ता की पहचान हुई है। इस्माइल शेख को गिरफ्तार कर लिया गया है जबकि फरार उमेश की तलाश की जा रही है। घटना सोमवार (24 जून, 2024) की है। पुलिस मामले की जाँच कर रही है।

मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक, यह घटना पुणे के राजीव गाँधी नगर इलाके की है। यहाँ सोमवार को कटारु काचरू लहाड़े नाम के व्यक्ति को दोपहर में 2 लोगों ने चाकुओं से गोद डाला। सूचना मिलने पर पुलिस ने घटनास्थल पर पहुँच कर घायल को अस्पताल पहुँचाया जहाँ उसने दम तोड़ दिया। मामले की जाँच शुरू की गई तो सामने आया कि कटारू की हत्या येरवडा के रहने वाले दिहाड़ी के मजदूर इस्माइल रियाज शेख ने की। धारदार हथियार से हुई इस हत्या में शेख का साथ उसके दोस्त उमेश गुप्ता ने भी दिया। घटना के बाद दोनों हत्यारोपित फरार हो गए।

पुलिस की जाँच में यह भी निकल कर सामने आया कि मृतक कटारू के बेटे का इस्माइल रियाज़ शेख की बहन से अफेयर था। इस्माइल इस रिश्ते से काफी नाराज रहता था। सोमवार को इस्माइल की बहन बिना बताए अपने घर से निकल गई। वह कटारू के बेटे के साथ कहीं चली गई। इस बात की जानकारी जब इस्माइल को हुई तो वह भड़क गया। उसने अपने साथ ही मजदूरी करने वाले उमेश गुप्ता को सारी बात बताई। दोनों ने कटारू के बेटे का गुस्सा उसके पिता पर उतार दिया। घटना के बाद दोनों फरार हो गए थे।

फिलहाल इस्माइल को हिरासत में ले कर पूछताछ की जा रही है। फरार उमेश गुप्ता की तलाश में पुलिस टीमें दबिश दे रही हैं। मामले की जाँच व अन्य जरूरी कानूनी कार्रवाई की जा रही है।

उम्रकैद, संपत्ति कुर्की, ₹1 करोड़ जुर्माना… पेपर लीक के खिलाफ अध्यादेश लेकर आई योगी सरकार, गड़बड़ी करने वाली संस्थाएँ होंगी ब्लैकलिस्ट

नीट-यूजी और यूजीसी-नेट के पेपर लीक को लेकर पूरे देश में बवाल मचा हुआ है, तो कुछ समय पहले उत्तर प्रदेश में भी सिपाही भर्ती परीक्षा और आरओ-एआरओ परीक्षा में गड़बड़ी के बाद परीक्षाएँ रद्द हुई थी। अब उत्तर प्रदेश सरकार ने परीक्षाओं में धाँधली को रोकने के लिए बड़ा कदम उठाया है और पेपर लीक के खिलाफ अध्यादेश का प्रस्ताव लेकर आई है। कैबिनेट बैठक में इस अध्यादेश के प्रस्ताव को मंजूरी भी मिल गई है। अब उत्तर प्रदेश में परीक्षाओं में गड़बड़ी करने वालों को 2 साल से लेकर उम्रकैद तक की सजा मिलेगी और 1 करोड़ रुपए तक का जुर्माना भी लगाया जाएगा। यूपी सरकार के इस कदम की तारीफ हो रही है।

मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक, उत्तर प्रदेश सरकार ने कहा कि फर्जी प्रश्नपत्र बांटना, फर्जी सेवायोजन वेबसाइट बनाना इत्यादि भी दंडनीय अपराध बनाए गए हैं। अधिनियम के प्रावधानों के उल्लंघन के लिये न्यूनतम दो वर्ष से लेकर आजीवन कारावास की सजा तथा एक करोड़ रुपए तक के दंड का भी प्रावधान किया गया है। बता दें कि सीएम योगी आदित्यनाथ ने लोकसभा चुनावों के दौरान ही नकल माफियाओं पर नकेल कसने के लिए सख्त कानून लाने की बात कही थी। इस कड़ी में अब सरकार ने बड़ा कदम उठाया है।

जानकारी के मुताबिक, पेपर लीक या अन्य कारणों से परीक्षा प्रभावित होती है तो उस पर आने वाले खर्च की भरपाई सॉल्वर गैंग से वसूली कर की जाएगी। साथ ही परीक्षा में गड़बड़ी करने वाली कंपनियों और सेवा प्रदाताओं को हमेशा के लिए ब्लैक लिस्ट किया जाएगा। फरवरी में यूपी पुलिस की सिपाही भर्ती परीक्षा और उससे पहले आरओ और एआरओ का पेपर लीक हुआ था। तभी से यह संकेत मिलने लगे थे कि सरकार जल्द ही पेपर लीक के खिलाफ सख्त कानून लेकर आ सकती है। अब अध्यादेश के जरिए सरकार पेपर लीक के खिलाफ नया कानून लेकर आ रही है।

परीक्षाओं को लेकर सरकार ने बनाई नई नीति

इसके साथ ही योगी सरकार ने पेपर लीक रोकने के लिए नई नीति का भी ऐलान कर दिया है। जिसके तहत हर पाली में 2 या अधिक पेपर सेट जरूर होने चाहिए। प्रत्येक सेट के प्रश्नपत्र की छपाई अलग-अलग एजेंसी के माध्यम से होगी। पेपर कोडिंग को भी और व्यवस्थित किया जाएगा। चयन परीक्षाओं के सेंटर के लिए राजकीय माध्यमिक, डिग्री कॉलेज, विश्वविद्यालय, पॉलिटेक्निक, इंजीनियरिंग कॉलेज, मेडिकल कॉलेज अथवा साफ-सुथरे ट्रैक रिकॉर्ड वाले ख्याति प्राप्त सुविधा संपन्न वित्त पोषित शैक्षिक संस्थान ही सेंटर बनाए जाएँगे। सेंटर वहीं होंगे, जहाँ सीसीटीवी की व्यवस्था होगी।

पहले बकरीद पर पर्दे में होती थी कुर्बानी, इस बार मंदिर के आगे काटा भैंस: बरेली के एक हिन्दू बहुल गाँव में इसरार एंड फैमिली ने नया ‘रिवाज’ शुरू कर बढ़ाया तनाव

उत्तर प्रदेश के बरेली जिले में बकरीद (17 जून) के मौके पर 2 पक्षों के बीच तनाव फ़ैल गया। तनाव की वजह सीबीगंज थानाक्षेत्र के एक गाँव में मुस्लिम पक्ष द्वारा नया रिवाज कायम करते हुए बकरे के बजाय भैंस की कुर्बानी करना था। हिन्दू पक्ष का यह भी आरोप है कि कुर्बानी एक प्राचीन मंदिर के आगे दी गई थी। पुलिस इस घटना पर FIR दर्ज करके जाँच कर रही है। मामले में इस्लाम, इस्लाम, शफी और अखलाक सहित कुछ अन्य लोगों को आरोपित किया गया है। FIR में इसरार के चारों बेटों का भी नाम है। ऑपइंडिया ने इस मामले में ताजा हालातों की जानकारी ली।

यह घटना बरेली के गाँव जोगीठेर की है। इस संबंध में 17 जून को थाना सीबीगंज में गाँव के संग्राम सिंह, अनुज, अनिल और गंगाधर सहित लगभग ढाई दर्जन ग्रामीणों ने शिकायत दर्ज करवाई। शिकायत में उन्होंने बताया कि गाँव के ही इसरार, उसके चारों बेटों, इस्लाम, शफी और अखलाख ने नया रिवाज शुरू करते हुए भैंसे की कुर्बानी दी। यह कुर्बानी 17 जून को दोपहर लगभग 11:30 पर गाँव में बने शिव मंदिर के सामने देने का आरोप लगाया गया। शिकायतकर्ता के मुताबिक आरोपितों की इस हरकत से गाँव में असंतोष फ़ैल गया था।

पुलिस ने इसरार, उसके चारों बेटों, इस्लाम, शफी और अखलाख के खिलाफ केस दर्ज कर लिया। इन सभी पर भारतीय दंड संहिता (IPC) की धारा 429 के साथ पशु क्रूरता अधिनियम के तहत कार्रवाई की गई है। ऑपइंडिया के पास FIR कॉपी मौजूद है। घटना से नाराज हिन्दू संगठन के सदस्यों ने ग्रामीणों के साथ थाने के बाहर प्रदर्शन किया। इस दौरान दूसरे पक्ष के लोग भी जमा होने लगे थे। पुलिस ने लोगों को समझा-बुझाकर शांत करवाया, तब बरेली के एडिशनल एसपी ने भी आरोपितों द्वारा नया रिवाज शुरू करने पर केस दर्ज करके कार्रवाई किए जाने की बात स्वीकारी थी।

स्वराज्य के मुताबिक 2 आरोपितों को गिरफ्तार किया गया था जिन्हें अगले ही दिन जमानत मिल गई थी। इसी रिपोर्ट में कुछ ग्रामीणों के हवाले से बताया गया है कि पूर्व में तो पर्दे में कुर्बानी होती थी लेकिन इस बार खुलेआम किए जाने का सीधा अर्थ हिन्दू समाज की भावनाओं को आहत करना है। इस हरकत को देखते हुए ग्रामीणों ने कहा कि वो आने वाले बकरीद पर गाँव में पहरा देंगे जिससे कोई उकसाने वाली हरकत न कर पाए।

गाँव हिन्दू बहुल फिर भी दबदबा मुस्लिमों का

ऑपइंडिया ने शिकायतकर्ता संग्राम सिंह से बात की। उन्होंने बताया कि गाँव जोगीठेर हिन्दू बाहुल्य है। आरोप है कि महज 20% की तादाद होने के बावजूद मुस्लिम समुदाय के लोग हमेशा ताव में रहते हैं। जिस मंदिर के आगे भैंस काटी गई वहाँ अक्सर हिन्दू समाज के लोग पूठा-पाठ करने जाते है। शिकायतकर्ता का यह भी दावा है कि पहले मुस्लिम समुदाय के लोग बकरीद पर कुर्बानी कहाँ देते थे ये पता ही नहीं चलता था लेकिन इस बार उन्होंने खुलेआम सबको दिखा कर भैंस काटी है।

न तो माँगी माफी, न की बातचीत की पेशकश

गाँव में एहतियातन पुलिस तैनात कर दी गई है। शिकायतकर्ता का दावा है कि गाँव में हिन्दू समाज के राजपूतों और कश्यप समुदाय के लोगों की संख्या अधिक है। उन्होंने बताया कि इस बीच मुस्लिम पक्ष से आए दिन कोई न कोई उकसावे वाली हरकतें की जा रही हैं। संग्राम सिंह के अनुसार घटना के बाद से अब तक मुस्लिम पक्ष के किसी भी सदस्य ने अपनी हरकत कर न तो दुःख जताया और न ही हिन्दुओं से किसी बातचीत आदि की पहल की। संग्राम ने पुलिस पर भी आरोपितों के खिलाफ लचर कार्रवाई का आरोप लगाया है। उन्होंने कहा कि अभी तक किसी भी आरोपित को जेल नहीं भेजा गया जिसकी वजह से उनके हौसले बुलंद हैं।

घटना के वीडियो भी वायरल

केस में आरोपित मोहम्मद इरशाद एक क्लिनिक में काम करता है। उसका अब्बा इसरार गाँव में परचून की दुकान चलाता है। संग्राम सिंह ने ऑपइंडिया को इस घटना के वीडियो भी भेजे हैं। घर के अंदर चुपके से बनाए गए 2 वीडियो में इसरार के परिजन काटे गए भैंसे का मांस लिए दिखाई दे रहे हैं। एक और वीडियो में पुलिस की जीप एक मंदिर के आगे खड़ी हुई है। जीप के आसपास लोग जमा हैं। फिलहाल गाँव में शांति है।

इसरार की बाइक का बीमा एक्सपायर, 6 चालान पेंडिंग

जिस इसरार पर गाँव में कुर्बानी का नया रिवाज चालू करने की साजिश का आरोप लगा है उसके बेटे मोहम्मद इरशाद ने अपनी बाइक के बहाने भी कई नियम तोड़ रखे हैं। मोहम्मद इरशाद के हीरो हौंडा पैशन प्रो बाइक पर कुल 7 चालान हुए हैं। इसमें से हजारों रुपयों के 6 चालान पिछले लम्बे समय से नहीं भरे गए हैं। इसी के साथ इरशाद की बाइक का बीमा भी साल 2023 में ऑनलाइन तौर पर एक्सपायर दिख रहा है।

ऑपइंडिया ने अब तक हुई कानूनी कार्रवाई की जानकारी के लिए SHO सीबीगंज को कॉल किया। उन्होंने बताया कि उनकी अभी हाल ही में तैनाती हुई है जिसकी वजह से उनको अपडेट बताने के लिए थोड़ा समय चाहिए। इंस्पेक्टर सीबीगंज ने ताजा जानकारी के लिए 26 जून को बात करने के लिए कहा। वहीं इसरार के बेटे इरशाद को भी हमने कॉल किया। इरशाद का भी मोबाइल नंबर बंद (स्विच ऑफ़) आया। पुलिस और इरशाद का वर्जन मिलने के बाद उसे खबर में अपडेट किया जाएगा।

क्या है भारत और बांग्लादेश के बीच का तीस्ता समझौता, क्यों अनदेखी का आरोप लगा रहीं ममता बनर्जी: जानिए केंद्र ने पश्चिम बंगाल की CM के दावों को क्यों नकारा

पश्चिम बंगाल की मुख्यमंत्री ममता बनर्जी ने हाल ही में भारत और बांग्लादेश के बीच तीस्ता जल समझौते की बातचीत पर प्रश्न उठाए थे। ममता बनर्जी ने कह़ा था कि इस नदी समझौता पर हो रही बातचीत में उनके राज्य पश्चिम बंगाल का पक्ष नहीं लिया गया। उनके दावों को केंद्र सरकार ने नकार दिया है। केंद्र सरकार के सूत्रों ने स्पष्ट किया है कि तीस्ता के संबंध में हुई बातचीत में पश्चिम बंगाल को शामिल किया गया था और उसने इसके लिए जरूरी डाटा भी उपलब्ध करवाया था।

CM ममता का पत्र और केंद्र का जवाब

CM ममता बनर्जी ने सोमवार (24 जून, 2024) को प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी को एक पत्र लिखा था। इस पत्र में उन्होंने दावा किया था कि भारत और बांग्लादेश के बीच 1996 के गंगा जल समझौते के दोबारा किए जाने और तीस्ता पर नए समझौते पर बांग्लादेश के साथ बातचीत में उनके प्रदेश का पक्ष नहीं लिया गया। उन्होंने कहा था कि तीस्ता नदी में पहले ही कुछ सालों से पानी कम हो रहा है और अगर पानी को बांग्लादेश के साथ साझा किया जाएगा तो इससे बंगाल के लाखों लोग प्रभावित होंगे।

उन्होंने लिखा था, “पिछले कुछ सालों में तीस्ता में पानी का बहाव कम होता गया है और अनुमान है कि अगर बांग्लादेश के साथ पानी साझा किया जाता है तो उत्तर बंगाल के लाखों लोग सिंचाई का पानी ना उपलब्ध होने के कारण गंभीर रूप से प्रभावित होंगे। इसके अलावा, उत्तर बंगाल में पीने के पानी की ज़रूरत को पूरा करने के लिए तीस्ता का पानी जरूरी है। इसलिए बांग्लादेश के साथ तीस्ता के पानी को साझा करना संभव नहीं है।”

उनके इन दावों पर केंद्र सरकार के सूत्रों ने मीडिया को बताया है कि पश्चिम बंगाल के चीफ इंजीनियर स्तर के अधिकारी को इस मामले में बंगाल की तरफ से इसके लिए लगाया गया था। वह 1996 वाले समझौते के रिव्यू करने वाली समिति के सदस्य थे। केंद्र सरकार ने बताया है कि पश्चिम बंगाल के अधिकारियों ने अगले 25-30 वर्षों के लिए राज्य की पानी की जरूरतों संबंधी आँकड़े भी केंद्र सरकार को उपलब्ध करवाए थे। यह आँकड़े अप्रैल में उपलब्ध करवाए थे।

ममता बनर्जी का यह पत्र बांग्लादेश की प्रधानमंत्री शेख हसीना के भारत दौरे के बाद सामने आया था। शेख हसीना के भारत के दौरे में दोनों देशों के बीच तीस्ता को लेकर सहमति बनी है। केंद्र सरकार ने कहा है कि उसकी एक टीम बांग्लादेश में तीस्ता की स्थिति सुधारने और उसके प्रबन्धन के लिए जाएगी। इसका अर्थ यह लगाया गया था कि दोनों देशों के बीच तीस्ता के जल समझौते को लेकर बातचीत आगे बढ़ रही है।

क्या है तीस्ता जल समझौता?

तीस्ता नदी भारत और बांग्लादेश के बीच बहने वाली 50 से अधिक छोटी-बड़ी नदियों में से एक है। भारत और बांग्लादेश के बीच गंगा और ब्रह्मपुत्र, दो बड़ी नदियाँ बहती हैं। तीस्ता, ब्रह्मपुत्र की सहायक नहीं है। 400 किलोमीटर लम्बी यह नदी हिमालय के तीस्ता खंगत्से ग्लेशियर से निकलती है और सिक्किम के रास्ते होते हुए पश्चिम बंगाल में आती है। इसके बाद बांग्लादेश को जाती है और वहाँ यह ब्रह्मपुत्र से मिल जाती है। यह उत्तरी बंगाल की बड़ी नदियों में से एक है और इस पर लाखों लोगों की जीविका आश्रित है।

तीस्ता के पानी पर समझौते को लेकर बातचीत कोई नई नहीं है। इसको लेकर लगातार कई दशकों से बातचीत दोंनो देशों के बीच होती आई है लेकिन कोई ठोस समझौता नहीं हो सका है। इसको लेकर 1983 में एक अस्थायी समझौता भी दोनों देशों के बीच हुआ था। इसके तहत बांग्लादेश इस नदी से 36% जबकि भारत 39% पानी ले सकता था। बाकी का 25% पानी बिना बँटवारे के छोड़ दिया गया गया था। यह समझौता 1985 तक ही मान्य था।

बांग्लादेश इसके बाद स्थायी समझौते को लेकर भारत से माँग करता आया है। बांग्लादेश ने 1996 में भारत के साथ गंगा जल समझौता किया था, इसके बाद इस समझौते के लिए और भी कोशिशें होने लगीं। इससे पहले यूपीए सरकार के दौरान भारत और बांग्लादेश के बीच तीस्ता के पानी को लेकर लगभग सहमति बन गई थी। इसके अंतर्गत बांग्लादेश को तीस्ता का 37.5% पानी और भारत को 42.5% पानी दिसम्बर से मार्च के बीच मिलना था।

दोनों देश इस समझौते पर राजी हो गए थे लेकिन तब भी बंगाल की मुख्यमंत्री ममता बनर्जी ने इस समझौते पर हस्ताक्षर करने से मना कर दिया था और यह जहाँ का तहाँ लटक गया था। अब मोदी सरकार इस समझौते को फिर से आगे बढ़ाने की कोशिश में जुटी हुई है, जिससे दोनों देशों का फायदा हो। 2011 के बाद से भारत ने मुद्दे पर इसलिए भी जोर देना चालू किया है क्योंकि चीन भी इस मुद्दे पर अपनी रूचि दिखा चुका है।

चीन, बांग्लादेश को यह ऑफर दे चुका है कि वह तीस्ता की तलहटी गहरी कर सकता है। भारत, चीन के इस कदम को सुरक्षा खतरे के तौर पर देखता है, ऐसे में वह भी समझौता आगे बढ़ा कर बांग्लादेश में तीस्ता के संरक्षण और प्रबन्धन को लेकर कदम उठा रहा है। हालाँकि, ममता बनर्जी के पत्र लिखने से इस मामले में कुछ रुकावटें आ सकती हैं।

ओवैसी ने लोकसभा में लगाए ‘जय फिलिस्तीन’ के नारे, पूछा – संविधान में कहाँ लिखा है ये गलत? उधर महाराष्ट्र के सांसद को बाल ठाकरे का नाम लेने पर दोबारा लेनी पड़ी शपथ

AIMIM के सांसद असदुद्दीन ओवैसी ने लोकसभा में शपथ लेने के दौरान ‘जय फिलिस्तीन’ का नारा लगाया। उर्दू में शपथ लेने वाले असदुद्दीन ओवैसी ने अंत में ‘जय भीम, जय मीम’ कहा और ‘अल्लाह-हू-अकबर’ का नारा भी लगाया, लेकिन अंत में उन्होंने ‘जय फिलिस्तीन’ भी कहा। इस दौरान पूर्वी चम्पारण से भाजपा के सांसद राधामोहन सिंह पीठासीन थे और नव-निर्वाचित सांसदों को शपथ दिला रहे थे। असदुद्दीन ओवैसी का ये वीडियो सोशल मीडिया पर वायरल हो रहा है।

बता दें कि ओडिशा के कटक से सांसद और प्रोटेकम स्पीकर भर्तृहरि महताब लोकसभा चुनाव 2024 के नव-निर्वाचित सांसदों को शपथ दिला रहे हैं, उनकी अनुपस्थिति में राधामोहन सिंह पीठासीन होते हैं। असदुद्दीन ओवैसी शपथ लेने के बाद चेयर तक गए और उनसे मिले भी। अब सोशल मीडिया में लोग पूछ रहे हैं कि आखिर कोई व्यक्ति भारत के लोकतंत्र के सबसे बड़े स्थल पर जाकर शपथग्रहण के मौके का इस्तेमाल इस्लामी प्रोपेगंडा के लिए कैसे कर सकता है?

असदुद्दीन ओवैसी तेलंगाना की राजधानी हैदराबाद से लगातार 5वीं बार सांसद बने हैं, इस बार उन्होंने भाजपा की माधवी लता को हराया है। हैदराबाद मुस्लिम बहुल है, ऐसे में वहाँ की 7 विधानसभा सीटों पर भी AIMIM ही जीत दर्ज करती है। बताते चलें कि इजरायल और फिलिस्तीन के बीच तनाव बढ़ा हुआ है। अक्टूबर 2023 में फिलिस्तीन स्थित हमास के आतंकियों ने इजरायल में घुस कर 1100 लोगों का नरसंहार किया, निरीह पशुओं तक को नहीं छोड़ा।

इस दौरान महिलाओं को बंदी बना कर उनके साथ बलात्कार किया गया, फिर उनकी हत्या कर के उनके नग्न शव का परेड निकाला गया। भारत में कई मुस्लिम समाज के लोग फिलिस्तीन के नाम पर चन्दा भी जुटाते रहे हैं। वहीं इस्लामी कट्टरपंथी इजरायली उत्पादों के बहिष्कार का भी ऐलान करते हैं। इजरायल एक छोटा सा यहूदी मुल्क है, जिसे फिलिस्तीन और लेबनान मिटा देना चाहता है। हालाँकि, अपनी अत्याधुनिक सुरक्षा व्यवस्था की वजह से इजरायल बचता रहा है।

सवाल इसीलिए भी उठ रहे हैं, क्योंकि इसी 18वीं लोकसभा के शपथग्रहण के दौरान जब महाराष्ट्र के हिंगोली लोकसभा क्षेत्र से शिवसेना (उद्धव बालासाहेब ठाकरे) के नव-निर्वाचित सांसद नागेश बापूराव पाटिल अष्टीकर ने पार्टी के संस्थापक बाल ठाकरे को हिन्दू हृदय सम्राट बताते हुए उनके नाम पर शपथ लेनी चाही, लेकिन प्रोटेम स्पीकर भर्तृहरि महताब ने उन्हें मना किया और फिर से शपथ लेने को कहा। प्रोटेम स्पीकर ने उनसे कहा कि वो वहीं पढ़ें, जो लिखा हुआ है।

जब असदुद्दीन ओवैसी से जब इस संबंध में पूछा गया तो उन्होंने कहा कि ये संविधान के खिलाफ कैसे हुआ, ये संविधान के कौन से प्रावधान के हिसाब से गलत है? G किशन रेड्डी के विरोध पर उन्होंने कहा कि उनका काम है विरोध करना, हम उन्हें खुश करने के लिए क्यों बोलेंगे। उन्होंने इस दौरान फिलिस्तीन को लेकर महात्मा गाँधी के विचार पढ़ने की सलाह भी दी। वहीं गाजियाबाद से सांसद चुने गए अतुल गर्ग ने तो दीन दयाल उपाध्याय, श्यामा प्रसाद मुखर्जी, अटल बिहारी वाजपेयी और नरेंद्र मोदी के नाम से भी ज़िंदाबाद का नारा लगाया।

पुणे के रईसजादे को बॉम्बे हाई कोर्ट ने दी बेल, जुवेनाइल बोर्ड के फैसले को बताया अवैध: पोर्श से इंजीनियरों को कुचल दिया था

पुणे पोर्श एक्सीडेंट केस के आरोपित नाबालिग बॉम्बे हाई कोर्ट से बड़ी राहत मिली है। बॉम्बे हाई कोर्ट ने उसकी हिरासत को अवैध ठहराते हुए उसे तुरंत रिहा करने का आदेश दिया। बॉम्बे हाई कोर्ट ने कहा कि ये जुवैनाइल जस्टिस बोर्ड के अधिकार क्षेत्र के बाहर का मामला था, जिसमें उसे दोबारा हिरासत में लिया गया था। नाबालिग 37 दिन जुवैनाइल होम में था और अब बॉम्बे हाई कोर्ट के आदेश के बाद उसे रिहाई मिल गई। अब वो अपनी बुआ के घर रहेगा।

मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक, बॉम्बे हाई कोर्ट ने जुवैनाइल बोर्ड द्वारा दोबारा उसे हिरासत में लेने के आदेश को अवैध करार दिया है। बॉम्बे हाई कोर्ट ने कहा कि एक बार किशोर को रिहा करने के बाद दोबारा उसे हिरासत में लेने का आदेश देना जुवैनाइल जस्टिस बोर्ड के अधिकार क्षेत्र में था ही नहीं, बोर्ड ने ऐसा करके अपने अधिकार क्षेत्र का उल्लंघन किया और उसे दोबारा हिरासत में भेज दिया था, जिसके बाद से वो जुवैनाइल होम में ही था। हाई कोर्ट ने साफ कहा है कि ये आदेश ऊपर से लाना था, लेकिन हादसे के बाद उसे रिहा करने के आदेश को लेकर लोगों में जो गुस्सा था, उसे देखते हुए ऐसा फैसला किया गया, जो कि गलत था।

बता दें कि 18 और 19 मई की रात पुणे के कल्याणी नगर में पोर्शे कार से टक्कर में दो लोगों की मौत हुई था। ये कार 17 साल का नाबालिग चला रहा था। नाबालिग पर आरोप लगा था कि उसने एक्सीडेंट से पहले शराब पी थी, इसके बाद उसे गिरफ्तार कर लिया गया था। लेकिन गिरफ्तारी के कुछ ही घंटों बाद उसे ‘निबंध’ लिखने की शर्त पर जमानत मिल गई थी। इसके बाद जब बवाल हुआ, तो 22 मई को इसे दोबारा हिरासत में ले लिया गया, क्योंकि जुवैनाइल जस्टिस बोर्ड ने उसकी जमानत रद्द कर दी थी। उसके बाद से किशोर की हिरासत बढ़ाई जा रही थी। निचली कोर्ट से उसे राहत न मिलने बाद परिवार ने हाई कोर्ट में याचिका दाखिल की थी, जिसके बाद अब बॉम्बे हाई कोर्ट ने उसकी हिरासत को अवैध बताते हुए उसे तुरंत जमानत पर रिहा करने का फैसला सुनाया है।

काफी विवादित रहा था मामला, माता-पिता-दादा हो चुके हैं गिरफ्तार

गौरतलब है कि ये मामला काफी विवादित रहा था। इस मामले में बच्चे के माता-पिता पर भी गंभीर आरोप लगे थे। किशोर के ब्लड सैंपल को बदला गया था और पैसों का भी लेन-देन हुआ था। इस मामले में किशोर की माँ फरार हो गई थी, लेकिन उसे भी बाद में गिरफ्तार कर लिया गया था। इस मामले में डॉक्टर, लैब असिस्टेंट से लेकर कई लोग गिरफ्तार हो चुके हैं। वहीं, किशोर के पिता ने परिवार के ड्राइवर पर हादसे की जिम्मेदारी अपने सिर पर लेने का दबाव डाला था, जिसके बाद उसे (बच्चे के पिता को) भी गिरफ्तार किया गया, हालाँकि कुछ दिन पहले उसे जमानत मिल गई।