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दिहाड़ी मजदूर इस्माइल शेख ने बहन के बॉयफ्रेंड के पिता को चाकुओं से गोद कर मार डाला, अफेयर से था नाराज़

महाराष्ट्र के पुणे में कटारु काचरू लहाड़े नाम के 60 वर्षीय बुजुर्ग की चाकुओं से गोद कर हत्या कर दी गई है। हत्या की वजह मृतक के बेटे का मुस्लिम लड़की से अफेयर होना बताया जा रहा है। कातिलों के तौर पर अब तक इस्माइल रियाज़ शेख और उसके दोस्त उमेश गुप्ता की पहचान हुई है। इस्माइल शेख को गिरफ्तार कर लिया गया है जबकि फरार उमेश की तलाश की जा रही है। घटना सोमवार (24 जून, 2024) की है। पुलिस मामले की जाँच कर रही है।

मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक, यह घटना पुणे के राजीव गाँधी नगर इलाके की है। यहाँ सोमवार को कटारु काचरू लहाड़े नाम के व्यक्ति को दोपहर में 2 लोगों ने चाकुओं से गोद डाला। सूचना मिलने पर पुलिस ने घटनास्थल पर पहुँच कर घायल को अस्पताल पहुँचाया जहाँ उसने दम तोड़ दिया। मामले की जाँच शुरू की गई तो सामने आया कि कटारू की हत्या येरवडा के रहने वाले दिहाड़ी के मजदूर इस्माइल रियाज शेख ने की। धारदार हथियार से हुई इस हत्या में शेख का साथ उसके दोस्त उमेश गुप्ता ने भी दिया। घटना के बाद दोनों हत्यारोपित फरार हो गए।

पुलिस की जाँच में यह भी निकल कर सामने आया कि मृतक कटारू के बेटे का इस्माइल रियाज़ शेख की बहन से अफेयर था। इस्माइल इस रिश्ते से काफी नाराज रहता था। सोमवार को इस्माइल की बहन बिना बताए अपने घर से निकल गई। वह कटारू के बेटे के साथ कहीं चली गई। इस बात की जानकारी जब इस्माइल को हुई तो वह भड़क गया। उसने अपने साथ ही मजदूरी करने वाले उमेश गुप्ता को सारी बात बताई। दोनों ने कटारू के बेटे का गुस्सा उसके पिता पर उतार दिया। घटना के बाद दोनों फरार हो गए थे।

फिलहाल इस्माइल को हिरासत में ले कर पूछताछ की जा रही है। फरार उमेश गुप्ता की तलाश में पुलिस टीमें दबिश दे रही हैं। मामले की जाँच व अन्य जरूरी कानूनी कार्रवाई की जा रही है।

उम्रकैद, संपत्ति कुर्की, ₹1 करोड़ जुर्माना… पेपर लीक के खिलाफ अध्यादेश लेकर आई योगी सरकार, गड़बड़ी करने वाली संस्थाएँ होंगी ब्लैकलिस्ट

नीट-यूजी और यूजीसी-नेट के पेपर लीक को लेकर पूरे देश में बवाल मचा हुआ है, तो कुछ समय पहले उत्तर प्रदेश में भी सिपाही भर्ती परीक्षा और आरओ-एआरओ परीक्षा में गड़बड़ी के बाद परीक्षाएँ रद्द हुई थी। अब उत्तर प्रदेश सरकार ने परीक्षाओं में धाँधली को रोकने के लिए बड़ा कदम उठाया है और पेपर लीक के खिलाफ अध्यादेश का प्रस्ताव लेकर आई है। कैबिनेट बैठक में इस अध्यादेश के प्रस्ताव को मंजूरी भी मिल गई है। अब उत्तर प्रदेश में परीक्षाओं में गड़बड़ी करने वालों को 2 साल से लेकर उम्रकैद तक की सजा मिलेगी और 1 करोड़ रुपए तक का जुर्माना भी लगाया जाएगा। यूपी सरकार के इस कदम की तारीफ हो रही है।

मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक, उत्तर प्रदेश सरकार ने कहा कि फर्जी प्रश्नपत्र बांटना, फर्जी सेवायोजन वेबसाइट बनाना इत्यादि भी दंडनीय अपराध बनाए गए हैं। अधिनियम के प्रावधानों के उल्लंघन के लिये न्यूनतम दो वर्ष से लेकर आजीवन कारावास की सजा तथा एक करोड़ रुपए तक के दंड का भी प्रावधान किया गया है। बता दें कि सीएम योगी आदित्यनाथ ने लोकसभा चुनावों के दौरान ही नकल माफियाओं पर नकेल कसने के लिए सख्त कानून लाने की बात कही थी। इस कड़ी में अब सरकार ने बड़ा कदम उठाया है।

जानकारी के मुताबिक, पेपर लीक या अन्य कारणों से परीक्षा प्रभावित होती है तो उस पर आने वाले खर्च की भरपाई सॉल्वर गैंग से वसूली कर की जाएगी। साथ ही परीक्षा में गड़बड़ी करने वाली कंपनियों और सेवा प्रदाताओं को हमेशा के लिए ब्लैक लिस्ट किया जाएगा। फरवरी में यूपी पुलिस की सिपाही भर्ती परीक्षा और उससे पहले आरओ और एआरओ का पेपर लीक हुआ था। तभी से यह संकेत मिलने लगे थे कि सरकार जल्द ही पेपर लीक के खिलाफ सख्त कानून लेकर आ सकती है। अब अध्यादेश के जरिए सरकार पेपर लीक के खिलाफ नया कानून लेकर आ रही है।

परीक्षाओं को लेकर सरकार ने बनाई नई नीति

इसके साथ ही योगी सरकार ने पेपर लीक रोकने के लिए नई नीति का भी ऐलान कर दिया है। जिसके तहत हर पाली में 2 या अधिक पेपर सेट जरूर होने चाहिए। प्रत्येक सेट के प्रश्नपत्र की छपाई अलग-अलग एजेंसी के माध्यम से होगी। पेपर कोडिंग को भी और व्यवस्थित किया जाएगा। चयन परीक्षाओं के सेंटर के लिए राजकीय माध्यमिक, डिग्री कॉलेज, विश्वविद्यालय, पॉलिटेक्निक, इंजीनियरिंग कॉलेज, मेडिकल कॉलेज अथवा साफ-सुथरे ट्रैक रिकॉर्ड वाले ख्याति प्राप्त सुविधा संपन्न वित्त पोषित शैक्षिक संस्थान ही सेंटर बनाए जाएँगे। सेंटर वहीं होंगे, जहाँ सीसीटीवी की व्यवस्था होगी।

पहले बकरीद पर पर्दे में होती थी कुर्बानी, इस बार मंदिर के आगे काटा भैंस: बरेली के एक हिन्दू बहुल गाँव में इसरार एंड फैमिली ने नया ‘रिवाज’ शुरू कर बढ़ाया तनाव

उत्तर प्रदेश के बरेली जिले में बकरीद (17 जून) के मौके पर 2 पक्षों के बीच तनाव फ़ैल गया। तनाव की वजह सीबीगंज थानाक्षेत्र के एक गाँव में मुस्लिम पक्ष द्वारा नया रिवाज कायम करते हुए बकरे के बजाय भैंस की कुर्बानी करना था। हिन्दू पक्ष का यह भी आरोप है कि कुर्बानी एक प्राचीन मंदिर के आगे दी गई थी। पुलिस इस घटना पर FIR दर्ज करके जाँच कर रही है। मामले में इस्लाम, इस्लाम, शफी और अखलाक सहित कुछ अन्य लोगों को आरोपित किया गया है। FIR में इसरार के चारों बेटों का भी नाम है। ऑपइंडिया ने इस मामले में ताजा हालातों की जानकारी ली।

यह घटना बरेली के गाँव जोगीठेर की है। इस संबंध में 17 जून को थाना सीबीगंज में गाँव के संग्राम सिंह, अनुज, अनिल और गंगाधर सहित लगभग ढाई दर्जन ग्रामीणों ने शिकायत दर्ज करवाई। शिकायत में उन्होंने बताया कि गाँव के ही इसरार, उसके चारों बेटों, इस्लाम, शफी और अखलाख ने नया रिवाज शुरू करते हुए भैंसे की कुर्बानी दी। यह कुर्बानी 17 जून को दोपहर लगभग 11:30 पर गाँव में बने शिव मंदिर के सामने देने का आरोप लगाया गया। शिकायतकर्ता के मुताबिक आरोपितों की इस हरकत से गाँव में असंतोष फ़ैल गया था।

पुलिस ने इसरार, उसके चारों बेटों, इस्लाम, शफी और अखलाख के खिलाफ केस दर्ज कर लिया। इन सभी पर भारतीय दंड संहिता (IPC) की धारा 429 के साथ पशु क्रूरता अधिनियम के तहत कार्रवाई की गई है। ऑपइंडिया के पास FIR कॉपी मौजूद है। घटना से नाराज हिन्दू संगठन के सदस्यों ने ग्रामीणों के साथ थाने के बाहर प्रदर्शन किया। इस दौरान दूसरे पक्ष के लोग भी जमा होने लगे थे। पुलिस ने लोगों को समझा-बुझाकर शांत करवाया, तब बरेली के एडिशनल एसपी ने भी आरोपितों द्वारा नया रिवाज शुरू करने पर केस दर्ज करके कार्रवाई किए जाने की बात स्वीकारी थी।

स्वराज्य के मुताबिक 2 आरोपितों को गिरफ्तार किया गया था जिन्हें अगले ही दिन जमानत मिल गई थी। इसी रिपोर्ट में कुछ ग्रामीणों के हवाले से बताया गया है कि पूर्व में तो पर्दे में कुर्बानी होती थी लेकिन इस बार खुलेआम किए जाने का सीधा अर्थ हिन्दू समाज की भावनाओं को आहत करना है। इस हरकत को देखते हुए ग्रामीणों ने कहा कि वो आने वाले बकरीद पर गाँव में पहरा देंगे जिससे कोई उकसाने वाली हरकत न कर पाए।

गाँव हिन्दू बहुल फिर भी दबदबा मुस्लिमों का

ऑपइंडिया ने शिकायतकर्ता संग्राम सिंह से बात की। उन्होंने बताया कि गाँव जोगीठेर हिन्दू बाहुल्य है। आरोप है कि महज 20% की तादाद होने के बावजूद मुस्लिम समुदाय के लोग हमेशा ताव में रहते हैं। जिस मंदिर के आगे भैंस काटी गई वहाँ अक्सर हिन्दू समाज के लोग पूठा-पाठ करने जाते है। शिकायतकर्ता का यह भी दावा है कि पहले मुस्लिम समुदाय के लोग बकरीद पर कुर्बानी कहाँ देते थे ये पता ही नहीं चलता था लेकिन इस बार उन्होंने खुलेआम सबको दिखा कर भैंस काटी है।

न तो माँगी माफी, न की बातचीत की पेशकश

गाँव में एहतियातन पुलिस तैनात कर दी गई है। शिकायतकर्ता का दावा है कि गाँव में हिन्दू समाज के राजपूतों और कश्यप समुदाय के लोगों की संख्या अधिक है। उन्होंने बताया कि इस बीच मुस्लिम पक्ष से आए दिन कोई न कोई उकसावे वाली हरकतें की जा रही हैं। संग्राम सिंह के अनुसार घटना के बाद से अब तक मुस्लिम पक्ष के किसी भी सदस्य ने अपनी हरकत कर न तो दुःख जताया और न ही हिन्दुओं से किसी बातचीत आदि की पहल की। संग्राम ने पुलिस पर भी आरोपितों के खिलाफ लचर कार्रवाई का आरोप लगाया है। उन्होंने कहा कि अभी तक किसी भी आरोपित को जेल नहीं भेजा गया जिसकी वजह से उनके हौसले बुलंद हैं।

घटना के वीडियो भी वायरल

केस में आरोपित मोहम्मद इरशाद एक क्लिनिक में काम करता है। उसका अब्बा इसरार गाँव में परचून की दुकान चलाता है। संग्राम सिंह ने ऑपइंडिया को इस घटना के वीडियो भी भेजे हैं। घर के अंदर चुपके से बनाए गए 2 वीडियो में इसरार के परिजन काटे गए भैंसे का मांस लिए दिखाई दे रहे हैं। एक और वीडियो में पुलिस की जीप एक मंदिर के आगे खड़ी हुई है। जीप के आसपास लोग जमा हैं। फिलहाल गाँव में शांति है।

इसरार की बाइक का बीमा एक्सपायर, 6 चालान पेंडिंग

जिस इसरार पर गाँव में कुर्बानी का नया रिवाज चालू करने की साजिश का आरोप लगा है उसके बेटे मोहम्मद इरशाद ने अपनी बाइक के बहाने भी कई नियम तोड़ रखे हैं। मोहम्मद इरशाद के हीरो हौंडा पैशन प्रो बाइक पर कुल 7 चालान हुए हैं। इसमें से हजारों रुपयों के 6 चालान पिछले लम्बे समय से नहीं भरे गए हैं। इसी के साथ इरशाद की बाइक का बीमा भी साल 2023 में ऑनलाइन तौर पर एक्सपायर दिख रहा है।

ऑपइंडिया ने अब तक हुई कानूनी कार्रवाई की जानकारी के लिए SHO सीबीगंज को कॉल किया। उन्होंने बताया कि उनकी अभी हाल ही में तैनाती हुई है जिसकी वजह से उनको अपडेट बताने के लिए थोड़ा समय चाहिए। इंस्पेक्टर सीबीगंज ने ताजा जानकारी के लिए 26 जून को बात करने के लिए कहा। वहीं इसरार के बेटे इरशाद को भी हमने कॉल किया। इरशाद का भी मोबाइल नंबर बंद (स्विच ऑफ़) आया। पुलिस और इरशाद का वर्जन मिलने के बाद उसे खबर में अपडेट किया जाएगा।

क्या है भारत और बांग्लादेश के बीच का तीस्ता समझौता, क्यों अनदेखी का आरोप लगा रहीं ममता बनर्जी: जानिए केंद्र ने पश्चिम बंगाल की CM के दावों को क्यों नकारा

पश्चिम बंगाल की मुख्यमंत्री ममता बनर्जी ने हाल ही में भारत और बांग्लादेश के बीच तीस्ता जल समझौते की बातचीत पर प्रश्न उठाए थे। ममता बनर्जी ने कह़ा था कि इस नदी समझौता पर हो रही बातचीत में उनके राज्य पश्चिम बंगाल का पक्ष नहीं लिया गया। उनके दावों को केंद्र सरकार ने नकार दिया है। केंद्र सरकार के सूत्रों ने स्पष्ट किया है कि तीस्ता के संबंध में हुई बातचीत में पश्चिम बंगाल को शामिल किया गया था और उसने इसके लिए जरूरी डाटा भी उपलब्ध करवाया था।

CM ममता का पत्र और केंद्र का जवाब

CM ममता बनर्जी ने सोमवार (24 जून, 2024) को प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी को एक पत्र लिखा था। इस पत्र में उन्होंने दावा किया था कि भारत और बांग्लादेश के बीच 1996 के गंगा जल समझौते के दोबारा किए जाने और तीस्ता पर नए समझौते पर बांग्लादेश के साथ बातचीत में उनके प्रदेश का पक्ष नहीं लिया गया। उन्होंने कहा था कि तीस्ता नदी में पहले ही कुछ सालों से पानी कम हो रहा है और अगर पानी को बांग्लादेश के साथ साझा किया जाएगा तो इससे बंगाल के लाखों लोग प्रभावित होंगे।

उन्होंने लिखा था, “पिछले कुछ सालों में तीस्ता में पानी का बहाव कम होता गया है और अनुमान है कि अगर बांग्लादेश के साथ पानी साझा किया जाता है तो उत्तर बंगाल के लाखों लोग सिंचाई का पानी ना उपलब्ध होने के कारण गंभीर रूप से प्रभावित होंगे। इसके अलावा, उत्तर बंगाल में पीने के पानी की ज़रूरत को पूरा करने के लिए तीस्ता का पानी जरूरी है। इसलिए बांग्लादेश के साथ तीस्ता के पानी को साझा करना संभव नहीं है।”

उनके इन दावों पर केंद्र सरकार के सूत्रों ने मीडिया को बताया है कि पश्चिम बंगाल के चीफ इंजीनियर स्तर के अधिकारी को इस मामले में बंगाल की तरफ से इसके लिए लगाया गया था। वह 1996 वाले समझौते के रिव्यू करने वाली समिति के सदस्य थे। केंद्र सरकार ने बताया है कि पश्चिम बंगाल के अधिकारियों ने अगले 25-30 वर्षों के लिए राज्य की पानी की जरूरतों संबंधी आँकड़े भी केंद्र सरकार को उपलब्ध करवाए थे। यह आँकड़े अप्रैल में उपलब्ध करवाए थे।

ममता बनर्जी का यह पत्र बांग्लादेश की प्रधानमंत्री शेख हसीना के भारत दौरे के बाद सामने आया था। शेख हसीना के भारत के दौरे में दोनों देशों के बीच तीस्ता को लेकर सहमति बनी है। केंद्र सरकार ने कहा है कि उसकी एक टीम बांग्लादेश में तीस्ता की स्थिति सुधारने और उसके प्रबन्धन के लिए जाएगी। इसका अर्थ यह लगाया गया था कि दोनों देशों के बीच तीस्ता के जल समझौते को लेकर बातचीत आगे बढ़ रही है।

क्या है तीस्ता जल समझौता?

तीस्ता नदी भारत और बांग्लादेश के बीच बहने वाली 50 से अधिक छोटी-बड़ी नदियों में से एक है। भारत और बांग्लादेश के बीच गंगा और ब्रह्मपुत्र, दो बड़ी नदियाँ बहती हैं। तीस्ता, ब्रह्मपुत्र की सहायक नहीं है। 400 किलोमीटर लम्बी यह नदी हिमालय के तीस्ता खंगत्से ग्लेशियर से निकलती है और सिक्किम के रास्ते होते हुए पश्चिम बंगाल में आती है। इसके बाद बांग्लादेश को जाती है और वहाँ यह ब्रह्मपुत्र से मिल जाती है। यह उत्तरी बंगाल की बड़ी नदियों में से एक है और इस पर लाखों लोगों की जीविका आश्रित है।

तीस्ता के पानी पर समझौते को लेकर बातचीत कोई नई नहीं है। इसको लेकर लगातार कई दशकों से बातचीत दोंनो देशों के बीच होती आई है लेकिन कोई ठोस समझौता नहीं हो सका है। इसको लेकर 1983 में एक अस्थायी समझौता भी दोनों देशों के बीच हुआ था। इसके तहत बांग्लादेश इस नदी से 36% जबकि भारत 39% पानी ले सकता था। बाकी का 25% पानी बिना बँटवारे के छोड़ दिया गया गया था। यह समझौता 1985 तक ही मान्य था।

बांग्लादेश इसके बाद स्थायी समझौते को लेकर भारत से माँग करता आया है। बांग्लादेश ने 1996 में भारत के साथ गंगा जल समझौता किया था, इसके बाद इस समझौते के लिए और भी कोशिशें होने लगीं। इससे पहले यूपीए सरकार के दौरान भारत और बांग्लादेश के बीच तीस्ता के पानी को लेकर लगभग सहमति बन गई थी। इसके अंतर्गत बांग्लादेश को तीस्ता का 37.5% पानी और भारत को 42.5% पानी दिसम्बर से मार्च के बीच मिलना था।

दोनों देश इस समझौते पर राजी हो गए थे लेकिन तब भी बंगाल की मुख्यमंत्री ममता बनर्जी ने इस समझौते पर हस्ताक्षर करने से मना कर दिया था और यह जहाँ का तहाँ लटक गया था। अब मोदी सरकार इस समझौते को फिर से आगे बढ़ाने की कोशिश में जुटी हुई है, जिससे दोनों देशों का फायदा हो। 2011 के बाद से भारत ने मुद्दे पर इसलिए भी जोर देना चालू किया है क्योंकि चीन भी इस मुद्दे पर अपनी रूचि दिखा चुका है।

चीन, बांग्लादेश को यह ऑफर दे चुका है कि वह तीस्ता की तलहटी गहरी कर सकता है। भारत, चीन के इस कदम को सुरक्षा खतरे के तौर पर देखता है, ऐसे में वह भी समझौता आगे बढ़ा कर बांग्लादेश में तीस्ता के संरक्षण और प्रबन्धन को लेकर कदम उठा रहा है। हालाँकि, ममता बनर्जी के पत्र लिखने से इस मामले में कुछ रुकावटें आ सकती हैं।

ओवैसी ने लोकसभा में लगाए ‘जय फिलिस्तीन’ के नारे, पूछा – संविधान में कहाँ लिखा है ये गलत? उधर महाराष्ट्र के सांसद को बाल ठाकरे का नाम लेने पर दोबारा लेनी पड़ी शपथ

AIMIM के सांसद असदुद्दीन ओवैसी ने लोकसभा में शपथ लेने के दौरान ‘जय फिलिस्तीन’ का नारा लगाया। उर्दू में शपथ लेने वाले असदुद्दीन ओवैसी ने अंत में ‘जय भीम, जय मीम’ कहा और ‘अल्लाह-हू-अकबर’ का नारा भी लगाया, लेकिन अंत में उन्होंने ‘जय फिलिस्तीन’ भी कहा। इस दौरान पूर्वी चम्पारण से भाजपा के सांसद राधामोहन सिंह पीठासीन थे और नव-निर्वाचित सांसदों को शपथ दिला रहे थे। असदुद्दीन ओवैसी का ये वीडियो सोशल मीडिया पर वायरल हो रहा है।

बता दें कि ओडिशा के कटक से सांसद और प्रोटेकम स्पीकर भर्तृहरि महताब लोकसभा चुनाव 2024 के नव-निर्वाचित सांसदों को शपथ दिला रहे हैं, उनकी अनुपस्थिति में राधामोहन सिंह पीठासीन होते हैं। असदुद्दीन ओवैसी शपथ लेने के बाद चेयर तक गए और उनसे मिले भी। अब सोशल मीडिया में लोग पूछ रहे हैं कि आखिर कोई व्यक्ति भारत के लोकतंत्र के सबसे बड़े स्थल पर जाकर शपथग्रहण के मौके का इस्तेमाल इस्लामी प्रोपेगंडा के लिए कैसे कर सकता है?

असदुद्दीन ओवैसी तेलंगाना की राजधानी हैदराबाद से लगातार 5वीं बार सांसद बने हैं, इस बार उन्होंने भाजपा की माधवी लता को हराया है। हैदराबाद मुस्लिम बहुल है, ऐसे में वहाँ की 7 विधानसभा सीटों पर भी AIMIM ही जीत दर्ज करती है। बताते चलें कि इजरायल और फिलिस्तीन के बीच तनाव बढ़ा हुआ है। अक्टूबर 2023 में फिलिस्तीन स्थित हमास के आतंकियों ने इजरायल में घुस कर 1100 लोगों का नरसंहार किया, निरीह पशुओं तक को नहीं छोड़ा।

इस दौरान महिलाओं को बंदी बना कर उनके साथ बलात्कार किया गया, फिर उनकी हत्या कर के उनके नग्न शव का परेड निकाला गया। भारत में कई मुस्लिम समाज के लोग फिलिस्तीन के नाम पर चन्दा भी जुटाते रहे हैं। वहीं इस्लामी कट्टरपंथी इजरायली उत्पादों के बहिष्कार का भी ऐलान करते हैं। इजरायल एक छोटा सा यहूदी मुल्क है, जिसे फिलिस्तीन और लेबनान मिटा देना चाहता है। हालाँकि, अपनी अत्याधुनिक सुरक्षा व्यवस्था की वजह से इजरायल बचता रहा है।

सवाल इसीलिए भी उठ रहे हैं, क्योंकि इसी 18वीं लोकसभा के शपथग्रहण के दौरान जब महाराष्ट्र के हिंगोली लोकसभा क्षेत्र से शिवसेना (उद्धव बालासाहेब ठाकरे) के नव-निर्वाचित सांसद नागेश बापूराव पाटिल अष्टीकर ने पार्टी के संस्थापक बाल ठाकरे को हिन्दू हृदय सम्राट बताते हुए उनके नाम पर शपथ लेनी चाही, लेकिन प्रोटेम स्पीकर भर्तृहरि महताब ने उन्हें मना किया और फिर से शपथ लेने को कहा। प्रोटेम स्पीकर ने उनसे कहा कि वो वहीं पढ़ें, जो लिखा हुआ है।

जब असदुद्दीन ओवैसी से जब इस संबंध में पूछा गया तो उन्होंने कहा कि ये संविधान के खिलाफ कैसे हुआ, ये संविधान के कौन से प्रावधान के हिसाब से गलत है? G किशन रेड्डी के विरोध पर उन्होंने कहा कि उनका काम है विरोध करना, हम उन्हें खुश करने के लिए क्यों बोलेंगे। उन्होंने इस दौरान फिलिस्तीन को लेकर महात्मा गाँधी के विचार पढ़ने की सलाह भी दी। वहीं गाजियाबाद से सांसद चुने गए अतुल गर्ग ने तो दीन दयाल उपाध्याय, श्यामा प्रसाद मुखर्जी, अटल बिहारी वाजपेयी और नरेंद्र मोदी के नाम से भी ज़िंदाबाद का नारा लगाया।

पुणे के रईसजादे को बॉम्बे हाई कोर्ट ने दी बेल, जुवेनाइल बोर्ड के फैसले को बताया अवैध: पोर्श से इंजीनियरों को कुचल दिया था

पुणे पोर्श एक्सीडेंट केस के आरोपित नाबालिग बॉम्बे हाई कोर्ट से बड़ी राहत मिली है। बॉम्बे हाई कोर्ट ने उसकी हिरासत को अवैध ठहराते हुए उसे तुरंत रिहा करने का आदेश दिया। बॉम्बे हाई कोर्ट ने कहा कि ये जुवैनाइल जस्टिस बोर्ड के अधिकार क्षेत्र के बाहर का मामला था, जिसमें उसे दोबारा हिरासत में लिया गया था। नाबालिग 37 दिन जुवैनाइल होम में था और अब बॉम्बे हाई कोर्ट के आदेश के बाद उसे रिहाई मिल गई। अब वो अपनी बुआ के घर रहेगा।

मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक, बॉम्बे हाई कोर्ट ने जुवैनाइल बोर्ड द्वारा दोबारा उसे हिरासत में लेने के आदेश को अवैध करार दिया है। बॉम्बे हाई कोर्ट ने कहा कि एक बार किशोर को रिहा करने के बाद दोबारा उसे हिरासत में लेने का आदेश देना जुवैनाइल जस्टिस बोर्ड के अधिकार क्षेत्र में था ही नहीं, बोर्ड ने ऐसा करके अपने अधिकार क्षेत्र का उल्लंघन किया और उसे दोबारा हिरासत में भेज दिया था, जिसके बाद से वो जुवैनाइल होम में ही था। हाई कोर्ट ने साफ कहा है कि ये आदेश ऊपर से लाना था, लेकिन हादसे के बाद उसे रिहा करने के आदेश को लेकर लोगों में जो गुस्सा था, उसे देखते हुए ऐसा फैसला किया गया, जो कि गलत था।

बता दें कि 18 और 19 मई की रात पुणे के कल्याणी नगर में पोर्शे कार से टक्कर में दो लोगों की मौत हुई था। ये कार 17 साल का नाबालिग चला रहा था। नाबालिग पर आरोप लगा था कि उसने एक्सीडेंट से पहले शराब पी थी, इसके बाद उसे गिरफ्तार कर लिया गया था। लेकिन गिरफ्तारी के कुछ ही घंटों बाद उसे ‘निबंध’ लिखने की शर्त पर जमानत मिल गई थी। इसके बाद जब बवाल हुआ, तो 22 मई को इसे दोबारा हिरासत में ले लिया गया, क्योंकि जुवैनाइल जस्टिस बोर्ड ने उसकी जमानत रद्द कर दी थी। उसके बाद से किशोर की हिरासत बढ़ाई जा रही थी। निचली कोर्ट से उसे राहत न मिलने बाद परिवार ने हाई कोर्ट में याचिका दाखिल की थी, जिसके बाद अब बॉम्बे हाई कोर्ट ने उसकी हिरासत को अवैध बताते हुए उसे तुरंत जमानत पर रिहा करने का फैसला सुनाया है।

काफी विवादित रहा था मामला, माता-पिता-दादा हो चुके हैं गिरफ्तार

गौरतलब है कि ये मामला काफी विवादित रहा था। इस मामले में बच्चे के माता-पिता पर भी गंभीर आरोप लगे थे। किशोर के ब्लड सैंपल को बदला गया था और पैसों का भी लेन-देन हुआ था। इस मामले में किशोर की माँ फरार हो गई थी, लेकिन उसे भी बाद में गिरफ्तार कर लिया गया था। इस मामले में डॉक्टर, लैब असिस्टेंट से लेकर कई लोग गिरफ्तार हो चुके हैं। वहीं, किशोर के पिता ने परिवार के ड्राइवर पर हादसे की जिम्मेदारी अपने सिर पर लेने का दबाव डाला था, जिसके बाद उसे (बच्चे के पिता को) भी गिरफ्तार किया गया, हालाँकि कुछ दिन पहले उसे जमानत मिल गई।

21 जून को इस्लामी आतंकियों ने अगवा कर कई दिनों तक किया रेप, फिर 25 जून को आरी से चीर कश्मीर की सड़कों पर फेंक दिया: याद हैं गिरिजा टिक्कू?

कश्मीरी हिंदुओं के नरसंहार को तीन दशक बीत गए हैं लेकिन जिन लोगों ने उस समय अपने परिवार वालों को खोया उनके लिए वो जख्म कभी नहीं भर सकते। आज 25 जून 2024 है। आज से ठीक 34 साल पहले कश्मीर में एक सरकारी स्कूल की लैब सहायिका का काम करने वाली गिरिजा टिक्कू की निर्ममता से हत्या की गई थी।

गिरिजा के साथ जो वीभत्सता हुई थी उस घटना को 2022 में रिलीज कश्मीर फाइल्स फिल्म में भी दिखाया गया था। फिल्म देखने के बाद उनके भाई-बहन बोले थे कि इतने सालों में परिवार में किसी सदस्य ने कभी गिरिजा दीदी का नाम नहीं लिया और इस विषय पर कभी कोई बात नहीं हुई। फिल्म देखने के बाद पहली बार घर में उनकी बात हुई और सब लोग रोए।

21 जून को अपहरण के बाद जब इस्लामी कट्टरपंथियों का मन भर गया तो उन दरिंदों नें जिंदा गिरिजा को बिजली से चलने वाली मशीन के बीच डालकर दो हिस्सों में चीरा दिया था और फिर उनका शव 2 टुकड़ों में काटकर फेंक दिया था।

गौरतलब है कि गिरिजा बारामूला जिले के अरिगाम गाँव में रहती थीं। उनकी एक स्कूल में बतौर लैब असिस्टेंट की नौकरी थी। 11 जून 1990 को गिरिजा अपने पैसे लेने के लिए स्कूल गयी। उसी दिन वह अपने स्कूल के दोस्तों से मिलने उनके घर भी गई थीं। इसके बाद जब वो बस से लौट रही थीं तभी कट्टरपंथियों की नजर उनके ऊपर पड़ी। उसके बाद जो हुआ उस पर बोलते हुए गिरिजा टिक्कू की भतीजी सिद्धि रैना ने एक इंस्टा पोस्ट भी किया था।

गिरिजा टिक्कू की भतीजी ने फिल्म को लेकर इंस्टाग्राम पर एक पोस्ट शेयर किया था। इस पोस्ट में उन्होंने कश्मीरी फाइल्स में दिखाई गई हकीकत पर कहा था- यह फिल्म उन भयानक रातों को दिखाती है जिनसे न केवल उनका परिवार गुजरा बल्कि हर कश्मीरी पंडित परिवार गुजरा। उनके पिता की बहन गिरिजा टिक्कू, एक यूनिवर्सिटी में लाइब्रेरियन थीं। वह अपनी सैलरी लेने के लिए गई थीं। वापस आते वक्त वह जिस बस में सवार थी, उसे रोक दिया गया और इसके बाद जो हुआ, उसे सोचकर अभी भी उनकी रुह काँप जाती है, आँख आँसुओं से और मन घृणा से भर उठता है।

सिद्धि रैना ने बताया कि उनकी बुआ को एक टैक्सी में फेंक दिया गया था, जिसमें 5 आदमी थे (उनमें से एक उसका सहयोगी था)। उन लोगों ने उन्हें प्रताड़ित किया, उनके साथ बलात्कार किया और फिर बढ़ई की आरी से उन्हें जिंदा काटकर बेरहमी से उनकी हत्या कर दी। वह कहती हैं, “आज तक मैंने अपने परिवार के किसी व्यक्ति को इस घटना के बारे में बोलते नहीं सुना। मेरे पिता मुझसे कहते हैं कि हर भाई इतनी शर्म और गुस्से में जी रहा था कि मेरी बुआ को न्याय दिलाने के लिए कुछ नहीं किया गया।”

एयर इंडिया की जिस विमान से सुहैब को जाना था लंदन, उसमें ही बम होने की धमकी दी: कोचीन एयरपोर्ट पर चेक-इन करते हुए बीवी-बच्चे के साथ पकड़ाया

कोचीन से लंदन जाने वाली एयर इंडिया की इंटरनेशनल फ्लाइट में बम रखे होने की सूचना मिलने के बाद हड़कंप मच गया। कोचीन इंटरनेशनल एयरपोर्ट पर मंगलवार (25 जून 2024) को प्लेन में सभी लोग सवार हो चुके थे और वो उड़ान भरने ही वाली थी, कि तभी फ्लाइट में बम रखे होने की सूचना मिली। इसके तुरंत बाद प्लेन को अलग-अलग कर दिया गया और प्रोटोकॉल के मुताबिक जाँच की गई। जाँच में प्लेन में कुछ भी नहीं मिला, जिसके बाद प्लेन को दोबारा उड़ान भरने की अनुमति दे दी गई।

इस बीच, प्लेन में बम होने की सूचना देने वाले व्यक्ति को गिरफ्तार कर लिया गया है। आरोपित का नाम सुहैल है, वो खुद उसी फ्लाइट से लंदन जाने वाला था। उसे कोचीन इंटरनेशनल एयरपोर्ट पर चेक-इन करने के दौरान पकड़ा गया। जानकारी के मुताबिक, चेक-इन प्रक्रिया सुबह के 10:30 बजे समाप्त हो गई थी और फ्लाइट अपने निर्धारित समय 11:50 बजे उड़ान भरने वाली थी।

लेट होने की वजह से सुहैब ने दी थी सूचना?

फ्लाइट में बम रखे होने की सूचना देने वाले की पहचान सुहैब के रूप में हुई। उसने मुंबई स्थित एयर इंडिया के कॉल सेंटर में फोन करके फ्लाइट में बम रखे होने की सूचना दी थी। वो अपनी बीवी और बच्ची के साथ प्लाइट में चढ़ने वाला था, लेकिन लेट हो गया था। इस बीच, एक तरफ फ्लाइट में बम की जाँच प्रोटोकॉल के मुताबिक की जा रही थी, तो दूसरी तरफ बम की सूचना देने वालो को खोजा जा रहा था। प्लेन जब सुरक्षित घोषित कर दिया गया, तभी एयरपोर्ट में चेक-इन कर रहे सुहैब को गिरफ्तार कर लिया गया। वो काफी देरी से एयरपोर्ट पहुँचा था और उसे उसी फ्लाइट से लंदन जाना था।

मलप्पुरम का रहने वाला सुहैब गिरफ्तार

रिपोर्ट्स के मुताबिक, बम की सूचना वाली कॉल केरल के मलप्पुरम जिले के निवासी सुहैब (29) ने की थी, जो AI 149 फ्लाइट से लंदन जाने वाला था। सुहैब को उसकी पत्नी और बेटी के साथ चेक-इन के दौरान कोचीन एयरपोर्ट के अंतरराष्ट्रीय प्रस्थान टर्मिनल पर रोका गया। प्रवक्ता ने कहा, “उसे आगे की पूछताछ और कानूनी कार्रवाई के लिए पुलिस को सौंप दिया गया है।”

लोकसभा में ‘परंपरा’ की बातें, खुद की सत्ता वाले राज्यों में दोनों हाथों में लड्डू: डिप्टी स्पीकर पद पर हल्ला कर रहा I.N.D.I. गठबंधन, जानिए तमिलनाडु-बंगाल सहित 9 प्रदेशों का हाल

लगातार तीसरी बार प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में केंद्र में सरकार बनने के बाद लोकसभा का नया सत्र शुरू हो चुका है। ओडिशा के कटक से सांसद भर्तृहरि महताब ने बतौर प्रोटेम स्पीकर लोकसभा सदस्यों को शपथ दिलाई, उनकी अनुपस्थिति में बिहार के पूर्वी चम्पारण से सांसद राधामोहन सिंह ने पीठासीन होकर ये प्रक्रिया पूरी कराई। अब लोकसभा अध्यक्ष पद के लिए चुनाव हो रहा है। भाजपा ने एक बार फिर से ओम बिड़ला को आगे किया है, जिनकी जीत लगभग तय है।

वहीं कॉन्ग्रेस पार्टी की तरफ से केरल के मावेलिक्करा से सांसद K सुरेश नामांकन भरेंगे। उन्हें प्रोटेम स्पीकर बनाए जाने की माँग भी कॉन्ग्रेस ने की थी। पार्टी का कहना था कि वो 8 बार के सांसद हैं, जबकि भर्तृहरि महताब 7वीं बार सांसद बने हैं। हालाँकि, कोडीकुन्नील सुरेश 2 बार चुनाव हार चुके हैं, जबकि भर्तृहरि महताब लगातार जीतते रहे हैं। अब विपक्ष की माँग है कि स्पीकर का पद अगर भाजपा के पास जाता है तो डिप्टी स्पीकर का पद उसे दिया जाए।

लोकसभा के डिप्टी स्पीकर का पद बना विवाद का केंद्र

हालाँकि, भाजपा I.N.D.I. गठबंधन की इस माँग के आगे झुकती हुई नहीं दिख रही है। कॉन्ग्रेस वाले इसके लिए ‘परंपरा’ का हवाला दे रहे हैं। हाँ, ये सत्य है कि 1991 में जब कॉन्ग्रेस की सरकार बनी थी और नरसिम्हा राव प्रधानमंत्री थे तब कर्नाटक के तुमकुर से भाजपा सांसद S मल्लिकार्जुनैया को लोकसभा का उपाध्यक्ष बनाया गया था। इसी तरह 1998 में अटल बिहारी वाजपेयी के नेतृत्व में भाजपा की सरकार बनी तो लक्षद्वीप के कॉन्ग्रेस सांसद P मोहम्मद सईद ये पद ले गए।

2004 में कॉन्ग्रेस नेता मनमोहन सिंह के नेतृत्व में UPA की सरकार बनी तब विपक्षी पार्टी ‘अकाली’ दल के चरणजीत सिंह अटवाल को ये पद मिला, जो पंजाब के फिल्लौर से सांसद थे। UPA के दूसरे कार्यकाल में झारखण्ड के खूँटी से सांसद करिया मुंडा को ये पद मिला। हालाँकि, 2014 में जब नरेंद्र मोदी PM बने तब तमिलनाडु के करूर से AIADMK सांसद M थंबीदुरई ने ये पद सँभाला। ध्यान दीजिए, उस समय AIADMK भाजपा गठबंधन का हिस्सा नहीं थी, फिर भी उसे ये पद दिया गया।

2019 में जब दोबारा मोदी सरकार बनी तब ये पद अगले 5 वर्षों के लिए खाली रहा। अब एक बार फिर से गहमागहमी इसके लिए शुरू हो चुकी है। राहुल गाँधी का कहना है कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी परस्पर सहयोग की बातें करते हैं संसद के अंदर, लेकिन बाहर कुछ और बोलते हैं। बता दें कि कॉन्ग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खड़गे को केंद्रीय रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह ने स्पीकर पद पर आम सहमति बनाने के लिए फोन किया था, डिप्टी स्पीकर की माँग पर उन्होंने फिर फोन करने की माँग की लेकिन राहुल गाँधी का कहना है कि फोन आया नहीं।

राहुल गाँधी का कहना है कि विपक्ष की शर्त ये है कि वो स्पीकर का समर्थन तभी करेगी, तब डिप्टी स्पीकर का पद उसे मिले। अब जब विपक्ष ने स्पीकर पद के लिए नामांकन भर दिया है, जिससे साफ़ है कि डिप्टी स्पीकर का पद देने के लिए भाजपा तैयार नहीं है। K सुरेश की हार तय लग रही है क्योंकि विपक्ष के पास संख्या बल नहीं है। K सुरेश की सदस्यता 2009 में केरल हाईकोर्ट द्वारा रद्द कर दी गई थी, क्योंकि उन पर ईसाई होकर दलितों के लिए आरक्षित सीट से लड़ने के आरोप लगे थे। बचपन में ही उनका Baptisma हो चुका है।

खैर, अब फिर से बात करते हैं ताज़ा हालात की। सपा अध्यक्ष अखिलेश यादव का कहना है कि डिप्टी स्पीकर विपक्ष का होना चाहिए। उन्होंने इसके लिए उत्तर प्रदेश का उदाहरण दिया जहाँ उनके हिसाब से आश्वासन के बावजूद उन्हें उपाध्यक्ष का पद नहीं मिला विधानसभा में। बता दें कि उत्तर प्रदेश में भी विधानसभा अध्यक्ष का पद रिक्त है, अक्टूबर 2021 में सपा के बाग़ी नितिन अग्रवाल का समर्थन कर के भाजपा ने उन्हें जिता दिया था, उससे पहले भी 5 वर्षों से ये पद रिक्त था।

विपक्ष शासित राज्यों में I.N.D.I. गठबंधन वाले भूले ‘परंपरा’

खैर, अब बात करते हैं विपक्ष शासित राज्यों की। पीछे न जाते हुए मौजूदा स्थिति को ही देखते हैं। दक्षिण भारत से शुरू करते हैं। तमिलनाडु में विपक्ष सबसे अधिक मजबूत है, क्या वहाँ उसने विधानसभा उपाध्यक्ष का पद विपक्ष को दिया है? तमिलनाडु विधानसभा में तिरुनेलवेली के राधापुरम से सत्ताधारी दल DMK के विधायक M अप्पवु स्पीकर हैं, वहीं इसी पार्टी के K पिचांदी डिप्टी स्पीकर हैं। वो तिरुवन्नामलाई के किलपेन्नाथुर से MLA हैं। इस तरह तमिलनाडु में विपक्ष ‘परंपरा’ की बातें नहीं करेगा।

अब आते हैं जरा पश्चिम बंगाल पर। वहाँ 2012 से ही TMC का शासन है। देखते हैं, वहाँ परंपरा कैसे निभाई जा रही है। वहाँ सत्ताधारी दल के बिमान बनर्जी स्पीकर हैं, जो साउथ 24 परगना के बरुईपुर से विधायक हैं। डिप्टी स्पीकर, विपक्ष का है? एकदम नहीं। विधानसभा का उपाध्यक्ष भी मुख्यमंत्री ममता बनर्जी ने अपनी ही पार्टी के आशीष बनर्जी को बना रखा है, जो बीरभूम के रामपुरहाट का प्रतिनिधित्व करते हैं। वहाँ भाजपा को ये पद क्यों नहीं दे रही TMC?

अब तीसरे राज्य पर आते हैं। कर्नाटक को देखते हैं, जहाँ कॉन्ग्रेस सत्ता में है। वही कॉन्ग्रेस, जिसे लोकसभा में उपाध्यक्ष का पद चाहिए। कर्नाटक विधानसभा में मुख्यमंत्री सिद्दारमैया की सरकार ने अपनी ही पार्टी के UT खादेर फरीद को स्पीकर बना रखा है, जो दक्षिण कन्नड़ लोकसभा क्षेत्र में स्थित मंगलौर से विधायक हैं। डिप्टी स्पीकर? नहीं, उपाध्यक्ष का पद विपक्ष को नहीं दिया गया है, बल्कि हावेरी से कॉन्ग्रेस के ही विधायक रुद्रप्पा लामानी को ये पद दिया गया है।

विपक्ष ‘परंपरा’ का कितना पालन कर रहा है, हुए भी उदाहरण देखते हैं। वामपंथियों की बात कर लेते हैं। केरल में सत्ताधारी CPI(M) के AN शमशीर स्पीकर हैं जो वाटकरा लोकसभा क्षेत्र के थालास्सेरी से MLA हैं, वहीं पतनमतिट्टा लोकसभा क्षेत्र के अडूर से CPI के विधायक चित्तायाम गोपकुमार को मुख्यमंत्री पिनाराई विजयन ने डिप्टी स्पीकर बना रखा है। CPI(M) और CPI सिर्फ पार्टी अलग है, दोनों ही साथी हैं और हमेशा से साथ लड़ते रहे हैं। साथ ही दोनों घोर वामपंथी विचारधारा से भी ताल्लुक रखती हैं।

अब तेलंगाना की बात कर लेते हैं। वहाँ भी कॉन्ग्रेस की सरकार है। वहाँ सत्ताधारी कॉन्ग्रेस के गड्डम प्रसाद कुमार विधानसभा अध्यक्ष हैं। वो वो चेवेल्ला लोकसभा क्षेत्र स्थित विकाराबाद से कॉन्ग्रेस विधायक हैं। वहीं रेवंत रेड्डी की सरकार ने विधानसभा उपाध्यक्ष का पद रिक्त रखा है। झारखंड में भी ये पद रिक्त है, जबकि सत्ताधारी JMM के रवींद्रनाथ महतो स्पीकर हैं, जो दुमका जिले और जामताड़ा लोकसभा क्षेत्र में स्थित नाला से MLA हैं। वहाँ हेमंत सोरेन के जेल जाने के बाद चंपई सोरेन सीएम हैं।

थोड़ा पंजाब की भी बात कर लेते हैं। ‘ड्रामा कंपनी’ AAP की सरकार है वहाँ। मुख्यमंत्री भगवंत मान ने अपने ही नेता कुलतार सिंह संधवाँ को विधानसभा का स्पीकर बना रखा है, जो फरीदकोट में स्थित कोटकपुरा का प्रतिनिधित्व करते हैं। वहीं डिप्टी स्पीकर का पद किसी विपक्षी नेता को नहीं, बल्कि होशियारपुर के गढ़शंकर से अपने ही MLA जयकृष्ण सिंह रौरी को बना रखा है। AAP की दिल्ली में भी यही परिपाटी रही है। शाहदरा के MLA रामनिवास गोयल स्पीकर हैं जबकि मंगोलपुरी की MLA राखी गोयल उनकी डिप्टी हैं। दोनों मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल की पार्टी AAP से ही हैं।

अंत में थोड़ा पहाड़ी राज्य हिमाचल प्रदेश की भी बात कर लें, जहाँ कॉन्ग्रेस सत्ता में है और सुखविंदर सिंह सुक्खू CM हैं। वहाँ पार्टी ने कांगड़ा के भटियात से अपने विधायक कुलदीप सिंह पठानिया को स्पीकर बना रखा है, जबकि शिमला के श्री रेणुकाजी से अपनी ही पार्टी के विनय कुमार को विधानसभा उपाध्यक्ष बना रखा है। आज यही पार्टी ‘परंपरा’ और ‘परिपाटी’ की बातें कर रही है। लोकसभा उपाध्यक्ष का पद माँग रही है। जबकि ये न संसद चलने देना चाहते हैं, न सरकार को ठीक से काम करने देते हैं।

शराब घोटाले में जेल में ही बंद रहेंगे दिल्ली के CM केजरीवाल, हाई कोर्ट ने जमानत पर लगाई रोक: निचली अदालत के फैसले पर उठाए सवाल, कहा- ED के सबूतों पर गौर नहीं किया

दिल्ली हाई कोर्ट ने CM अरविन्द केजरीवाल को निचली अदालत से दी गई जमानत पर स्थायी तौर पर रोक लगा दी है। हाई कोर्ट ने शुक्रवार (21 जून, 2024) को सुरक्षित रखा गया निर्णय सुनाते हुए कहा कि जमानत देते समय निचली अदालत ने इस मामले पर दिमाग नहीं लगाया और यह एकदम पूरी तरह अनुचित है।

मंगलवार (25 जून, 2024) को दिल्ली हाई कोर्ट में जस्टिस सुधीर कुमार जैन ने इस मामले को सुना। कोर्ट ने इस मामले में प्रवर्तन निदेशालय (ED) की दलीलों को मान लिया। हाई कोर्ट ने कहा, “इस अदालत ने फैसला किया है कि निचली अदालत की अवकाश बेंच की जज ने रिकॉर्ड पर मौजूद सबूत और ईडी की दलीलों का सही मूल्यांकन नहीं किया।”

हाई कोर्ट ने कहा कि निचली अदालत ने मामले के पूरे कागजों पर जोर नहीं दिया जो कि पूरी तरह से अनुचित है और दिखाता है कि अदालत ने मामले के सबूतों पर पूरा दिमाग नहीं लगाया है। कोर्ट ने ED की यह दलील भी मानी कि निचली अदालत में सुनवाई के दौरान उसे बात रखने का पूरा मौका नहीं दिया गया था।

कोर्ट अब इस मामले में जुलाई में अगली सुनवाई करेगा। इस सुनवाई में ED की उस याचिका पर बहस होगी जिसमें उसने निचली अदालत के CM केजरीवाल को नियमित जमानत देने के फैसले को चुनौती दी है।

गौरतलब है कि दिल्ली मुख्यमंत्री अरविन्द केजरीवाल को गुरुवार (20 जून, 2024) को दिल्ली शराब घोटाला मामले में राउज अवेन्यु कोर्ट की एक विशेष अदालत ने जमानत दे दी थी। उन्हें यह जमानत नियमित दी गई थी। इस दौरान ED ने माँग की थी इस फैसले पर 48 घंटे तक रोक लगाई जाए। हालाँकि, उसकी यह माँग नहीं मानी गई थी।

ED ने इस निर्णय के खिलाफ दिल्ली हाई कोर्ट में याचिका दी थी। ED ने केजरीवाल को जमानत देने का विरोध किया था। इसी याचिका के आधार पर दिल्ली हाई कोर्ट ने जमानत पर रोक लगाई। CM केजरीवाल हाई कोर्ट की इस रोक विरुद्ध सुप्रीम कोर्ट चले गए थे और यह रोक हटाने की माँग की थी। सुप्रीम कोर्ट ने भी सोमवार (24 जून, 2024) को इस मामले की सुनवाई करते हुए हाई कोर्ट के निर्णय पर रोक लगाने से मना कर दिया था।

इससे पहले निचली अदालत में ED ने साफ़ किया था कि उसके पास अरविन्द केजरीवाल के खिलाफ पक्के सबूत हैं। एजेंसी ने कहा था कि उसके पास इस मामले में पैसे के लेनदेन तक की फोटो हैं। एजेंसी ने यह भी कहा कि CM केजरीवाल ने अपने फ़ोन का पिन बताने से भी मना किया, जो इस मामले में शंका पैदा करता है।

गौरतलब है कि दिल्ली शराब घोटाला मामले में CM केजरीवाल को ED ने 21 मार्च, 2024 को गिरफ्तार कर लिया था। एजेंसी ने आरोप लगाया था कि केजरीवाल ही इस पूरे मामले के सरगना हैं। एजेंसी का आरोप है कि दिल्ली में शराब नीति बदल कर निजी विक्रेताओं को फायदा पहुँचाया और उनसे बदले में लाभ प्राप्त किए।