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चीन की ‘कठपुतली’ बना पाकिस्तान, चलाएगा ‘अज्म-ए-इस्तेकाम’ सैन्य ऑपरेशन: ड्रैगन ने डाला था दबाव, इसी के बाद आया फैसला

पड़ोसी मुल्क पाकिस्तान ने अपनी संप्रुभता चीन के हवाले कर दी है। उसके एक हालिया फैसले से यह बात साफ़ हो गई है। पाकिस्तान ने अब देश भर में आतंकवाद के कथित तौर पर खात्मे के लिए नया आतंक-विरोधी ऑपरेशन लॉन्च किया है। इसे ‘अज्म-ए-इस्तेकाम’ का नाम दिया गया है।

पाकिस्तान में रविवार (22 जून, 2024) को प्रधानमंत्री शाहबाज शरीफ के साथ फ़ौज के उच्चाधिकारियों की बैठक में इस ऑपरेशन को लॉन्च करने का निर्णय लिया गया है। पाकिस्तानी मीडिया ने बताया है कि इस ऑपरेशन के जरिए सुरक्षाबल इस्लामी मुल्क से कट्टरता और आतंक को उखाड़ने का प्रयास करेंगे।

इस ऑपरेशन को देश भर में लॉन्च किया जाएगा। इसका फोकस विशेष रूप से बलोचिस्तान और खैबर पख्तुन्ख्वा पर होने के कयास हैं। पाकिस्तान में होने वाले अधिकांश हमले यहीं होते हैं। इससे पहले पाकिस्तान ने वर्ष 2014 में आतंकियों के सफाए के लिए ज़र्ब ए अज्ब नाम का एक ऑपरेशन चालू किया था। यह नया ऑपरेशन इसी की तर्ज पर चालू किया मालूम होता है।

पाकिस्तान के इस फैसले के बाद उसकी नीयत पर प्रश्न उठ रहे हैं। दरअसल, इस नए ऑपरेशन के फैसले से कुछ ही दिन पहले चीन ने पाकिस्तान पर दबाव बनाया था कि वह इन्हें चालू करे। पाकिस्तान के भीतर चीन द्वारा बनाए जाने वाले कई प्रोजेक्ट पर बलोच विद्रोही हमला कर चुके हैं। चीन को इसके कारण जानमाल का नुकसान झेलना पड़ा है।

उसके पाकिस्तान के भीतर कई प्रोजेक्ट इस कारण से बंद हो गए हैं। बलोच विद्रोही इन चीनी प्रोजेक्ट को अपनी जमीन पर कब्जे की तरह देखते हैं। मार्च महीने में एक हमले में पाँच चीनी इंजीनियर मारे गए थे। इसके बाद चीन लगातार पाकिस्तान पर दबाव बना रहा था कि वह एक आतंक विरोधी अभियान चालू करे।

पाकिस्तान के प्रधानमंत्री शाहबाज शरीफ के हालिया चीन दौरे से पहले चीन ने यह माँग की थी। चीन के उप विदेश मंत्री सुन वेइडोंग ने पाकिस्तान के वरिष्ठ सैन्य अधिकारियों के साथ बैठक में माँग की थी कि पाकिस्तान जर्ब ए अज्ब जैसा ऑपरेशन चलाए। हालाँकि, तब यह कहा गया था कि पाकिस्तान ने इस माँग को ठुकरा दिया है।

अब पाकिस्तान के इस फैसले से प्रश्न उठे हैं कि क्या पाकिस्तान, चीन के दबाव में आकर यह काम कर रहा है। चीन ने हाल ही में पाकिस्तान के साथ रिश्तों को सबसे अधिक प्राथमिकता वाले दर्जे से हटाकर अधिक प्राथमिकता के दजे में डाल दिया गया था। दोनों देशों के बीच रिश्तों में खटास की खबरें भी आई थीं। इसके बाद पाकिस्तान ने यह कदम उठाया है। इस ऑपरेशन की घोषणा के बाद यह आशंका भी है कि इससे बलोच जनता पर अत्याचार किया जाएगा। इसे पूर्व के जर्ब ए अज्ब ऑपरेशन से भी ऐसी खबरें आई थीं।

स्थानीय जनसंख्या के नरसंहार की योजना थी ज़र्ब ए अज्ब

ऑपरेशन ज़र्ब-ए-अज्ब 15 जून 2014 को पाकिस्तान-अफ़गानिस्तान सीमा पर उत्तरी वज़ीरिस्तान प्रान्त में शुरू किया गया था। पाकिस्तान ने दावा किया था कि यह एक आतंकवाद विरोधी अभियान था। जबकि इस ऑपरेशन पर आरोप थे कि इससे पाकिस्तान समर्थक जिहादी समूह पनपे, स्थानीय लोगों को हत्याएँ हुई और पूरे इलाके में खून खराबा हुआ।

जर्मन मीडिया DW के अनुसार, पाकिस्तानी विशेषज्ञ और ओकलाहोमा विश्वविद्यालय में अंतरराष्ट्रीय मामलों के असिस्टेंट प्रोफेसर अकील शाह ने बताया था कि पाकिस्तानी फ़ौज के आतंकवाद विरोधी अभियान में अंतर्विरोधी बातें हैं। शाह ने बताया कि फ़ौज पाकिस्तान में हमले करने वाले आतंकवादियों पर कार्रवाई करती है, लेकिन वह अपने दुश्मनों पर हमला करने वालों को संरक्षण देती है।

DW से बात करते हुए शाह ने बताया था, “फ़ौज ने टीटीपी के दुश्मन गुटों से लड़ाई लड़ी है, लेकिन वह भारत के खिलाफ आतंकवादी समूहों का इस्तेमाल करना जारी रखती है।” उन्होंने हक्कानी नेटवर्क और अफगान तालिबान का उदाहरण दिया, जिसने पाकिस्तान को अफगानिस्तान पर अपना प्रभाव बनाए रखने में मदद की, साथ ही लश्कर-ए-तैयबा, जो भारत के खिलाफ आतंकवादी हमलों की योजना बनाना और उन्हें अंजाम देना जारी रखता है।

अमेरिकी विदेश मंत्री जॉन केरी ने भी अपनी भारत यात्रा के दौरान यही बात कही थी। नई दिल्ली में केरी ने कहा था, “यह साफ़ है कि पाकिस्तान को अपने आतंकी समूहों के खिलाफ़ और अधिक कठोर कार्रवाई करने की आवश्यकता है जो आतंकवादी गतिविधियों से जुड़े हैं।” उन्होंने पाकिस्तान से माँग की थी वह भारत में हमला करने वाले आतंकी को खत्म करने में सहायता करे ताकि दोंनो देशों के बीच शान्ति का वातावरण बन सके।

इस ऑपरेशन को लेकर कई विशेषज्ञों ने कहा था कि यह कभी आतंकियों को खत्म करने को लेकर चालू ही नहीं किया गया था। इस ऑपरेशन के दौरान पश्तूनों और बलोचों पर भी काफी अत्याचार हुए थे। बड़ी संख्या में लोगों को मारा गया था और काफी लोग गायब हो गए थे।

मणिपुर में 55 संवेदनशील क्षेत्रों की पहचान, सुरक्षा बलों की तैनाती शुरू: हिंसा पर लगाम, विस्थापितों की वापसी है प्राथमिकता

मणिपुर में जारी जातीय हिंसा को लेकर मुख्यमंत्री एन. बीरेन सिंह ने कहा है कि इसका समाधान 2-3 महीनों में निकाल लिया जाएगा। उन्होंने कहा कि इस बार पीएम मोदी की प्राथमिकता मणिपुर है। सीएम ने यह भी कहा कि लोकसभा चुनाव ड्यूटी के लिए विभिन्न राज्यों में गए सुरक्षा बल मणिपुर लौट आए हैं और उन्हें संवेदनशील क्षेत्रों में तैनात किया जा रहा है।

मुख्यमंत्री सिंह ने मीडिया से बातचीत में कहा, “पिछले कई महीनों में राज्य के अधिकांश हिस्सों में हिंसा की घटनाओं में काफी कमी आई है। कुछ जगहों से हिंसा की छिटपुट घटनाएँ सामने आई हैं। मणिपुर के अधिकांश हिस्सों में आम दिनों की तरह स्कूल, कॉलेज, कार्यालय और व्यावसायिक प्रतिष्ठान खुले हुए हैं।” इस दौरान पर लगाम और विस्थापितों की वापसी प्राथमिकता में शामिल है।

मुख्यमंत्री ने कहा कि तीसरी बार प्रधानमंत्री बनने के बाद पीएम नरेंद्र मोदी ने मणिपुर को सर्वोच्च प्राथमिकता दी है। वे राज्य में शांति स्थापित करने के लिए हरसंभव प्रयास कर रहे हैं। उन्होंने कहा, “प्रधानमंत्री और गृह मंत्री, दोनों मणिपुर में हो रहे घटनाक्रम पर लगातार नजर रख रहे हैं। वे राज्य में जातीय मुद्दों को सुलझाने के लिए ईमानदारी से प्रयास कर रहे हैं।”

मणिपुर की राज्यपाल अनुसुइया उइके ने भी राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू से मुलाकात की है। उन्होंने इस सप्ताह की शुरुआत में गृह मंत्री अमित शाह और वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण से भी मुलाकात की। राज्यपाल ने इन नेताओं को मणिपुर के विभिन्न राहत शिविरों में शरण लिए हुए विस्थापित लोगों की कठिनाइयों से अवगत कराया।

चुनाव ड्यूटी से वापस लौटने के बाद सुरक्षा बलों की विभिन्न इलाकों में तैनाती शुरू कर दी गई है। सुरक्षा बलों ने मणिपुर में लगभग 55 संवेदनशील क्षेत्रों की पहचान की है। राज्य में एक साल से अधिक समय से जारी जातीय हिंसा से निपटने के प्रयासों के तहत इन जगहों पर पर्याप्त सुरक्षा बल तैनात किए जाएँगे।

बता दें कि लोकसभा चुनावों के दौरान हिंसा प्रभावित पूर्वोत्तर राज्य के कुछ इलाकों से केंद्रीय बलों को अस्थायी रूप से हटा लिया गया था और उन्हें चुनावी ड्यूटी पर लगा दिया गया था। केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह ने मणिपुर में सुरक्षा स्थिति की समीक्षा के लिए एक उच्चस्तरीय बैठक की थी। इस दौरान उन्होंने केंद्रीय बलों की रणनीतिक तैनाती का निर्देश दिया था।

हालाँकि, कुछ इलाकों में सुरक्षा बलों की फिर से तैनाती का विरोध हो रहा है। हिल ट्राइबल काउंसिल ने एक बयान जारी कर तेंगनौपाल जिले में सीमा सुरक्षा बल (बीएसएफ) की तैनाती के प्रस्ताव की निंदा की है और इस तैनाती को वापस लेने की माँग की है। काउंसिल का कहना है कि सुरक्षा बलों की तैनाती से इलाके में शांति और सद्भाव को नुकसान पहुँचेगा।

ISRO की नई उपलब्धि, अब एक ही रॉकेट बार-बार उपयोग होगा, प्रयोग में पाई सफलता: फाइटर जेट की तरह उतरा RLV-LEX3

भारतीय अंतरिक्ष अनुसंधान संस्थान (ISRO) ने एक और उपलब्धि हासिल की है। ISRO का रीयूजेबल रॉकेट (RLV) बनाने के लिए किया गया प्रयोग सफल हुआ है। इसके लिए बनाए गए रॉकेट लॉन्च व्हीकल ने लैंडिंग करने में सफलता पाई है। इसके जरिए अब एक रॉकेट से ही कई बार सैटेलाईट लॉन्च किए जा सकेंगे।

ISRO ने यह जानकारी रविवार (23 जून, 2024) को दी है। उसने बताया है, “ISRO ने 23 जून, 2024 को रीयूजेबल लैंडिंग व्हीकल(RLV) ने लैंडिंग एक्सपेरिमेंट
(Lex) की अपनी तीसरी और अंतिम उड़ान में सफलता हासिल की है। ‘पुष्पक’ ने सटीक तरीके से जमीन पर सीधी लैंडिंग की है। RLV Lex के लक्ष्य को पूरा करने के साथ अब ISRO RLV -ORV की तरफ बढ़ेगा।” ISRO ने इस सफल लैंडिंग की कुछ फोटो और वीडियो भी जारी की हैं।

ISRO ने यह टेस्ट कर्नाटक के चित्रदुर्गा में किया है। ISRO के इस प्रयोगात्मक RLV ने तीसरे टेस्ट में 500 मीटर की क्रॉस रेंज पर लैंड होने में सफलता पाई, दूसरे टेस्ट में यह रेंज मात्र 150 मीटर थी। RLV को टेस्ट करने के लिए उसे भारतीय वायु सेना के एक चिनूक हेलिकॉप्टर से 4.5 किलोमीटर की ऊँचाई से छोड़ा गया था।

इसे रनवे से 4.5 किलोमीटर दूर हवा में छोड़ दिया गया था। इसके बाद यह स्वयं अपने सिस्टम चालू करके आटोमेटिक तरीके से रनवे पर लैंड कर गया। इस RLV की उतरते समय स्पीड किसी यात्री हवाई जहाज की 260 किलोमीटर/घंटा और फाइटर जेट की 280 किलोमीटर/घंटा से अधिक थी। इसकी उतरते समय स्पीड 320 किलोमीटर/घंटा थी। यह लैंडिंग किसी फाइटर जेट की तरह से हुई।

इसकी स्पीड घटाने के लिए पहले विमान के पिछले हिस्से में लगा पैराशूट खोला गया और जब उसने इसकी स्पीड घटाकर 100 किलोमीटर/घंटा कर दी तब इसके ब्रेक लगाए गए। इस लैंडिंग के बाद अब ISRO ऐसे ही रॉकेट लॉन्च करने वाले व्हीकल को धरती से ऊपर भेजेगा और प्रयोग करेगा।

दरअसल, ISRO का यह प्रयोग भविष्य में सैटेलाईट लॉन्च पर होने वाला खर्चा कम करेगा। पूरी दुनिया में अभी इस तकनीक पर काम चल रहा है। अमेरिका की कम्पनी स्पेसएक्स इस मामले में काफी आगे बढ़ चुकी है। सामान्यतः जब कोई सैटेलाईट लॉन्च करने के लिए किसी रॉकेट को एक ही बार उपयोग किया जा सकता है।

यह रॉकेट भेजना काफी महँगा होता है। ऐसे में यदि कोई रॉकेट सैटेलाईट को अन्तरिक्ष में पहुँचाने के बाद वापस धरती पर लैंड कर जाता है तो इसे अगली बार फिर इसी काम के लिए उपयोग किया जा सकता है। इसीलिए ISRO भी इस तकनीक पर काम कर रहा है। ISRO के मुखिया एस सोमनाथ ने इस सफलता पर बधाई दी है। इस पूरे मिशन के डायरेक्टर जे मुथुपांडियन हैं जबकि इस पुष्पक के डायरेक्टर बी कार्तिक हैं।

दूध के डब्बों पर से GST घटाकर हुआ 12%, मोदी विरोधी सोशल मीडिया पर करने लगे दुष्प्रचार: बोले- अब दूध पर 12% का नया टैक्स

वस्तु एवं सेवा कर (GST) परिषद की शनिवार (22 जून) को हुई बैठक में कई महत्वपूर्ण निर्णय लिए गए। इसमें करदाताओं को राहत देने और कारोबारियों पर कंप्लाएंस बोझ को कम करने के लिए निर्णय लिए गए। इसके अलावा, इसमें दूध के डिब्बों पर से जीएसटी को 18% से घटाकर 12% करने और इसे एक समान बनाने का निर्णय भी शामिल था।

दूध का डिब्बा स्टील, लोहे या एल्युमीनियम चाहे जिससे भी बना हो, उस पर अब 18% के स्थान पर 12% की एक समान जीएसटी दर लागू होगी। परिषद के इस निर्णय की घोषणा के तुरंत बाद सोशल मीडिया पर यह बात फैलाई जाने लगी कि मोदी सरकार ने दूध के डिब्बों पर 12% का नया कर लगा दिया है।

दूध के डिब्बों पर जीएसटी में की गई इस कटौती को इस तरह पेश किया जा रहा है, जैसे कि यह मोदी 3.0 द्वारा शुरू किया गया कोई नया कर हो। इस तथ्य को छिपाया जा रहा है कि यह जीएसटी में कटौती के बाद की दर है। मोदी सरकार के कई आलोचकों ने इस खबर को कुछ ऐसे ही एंगल के साथ साझा किया है।

कुछ सतर्क एक्स (पूर्व में ट्विटर) यूजर्स ने बताया कि वास्तव में दूध के डिब्बों पर जीएसटी दरों में कमी की गई है। गौर करने वाली बात यह है कि 12% का यह जीएसटी सिर्फ़ दूध के डिब्बों पर है, उस दूध पर नहीं जिसे हम सब खरीदते हैं।

हालाँकि, जिस तरह से फर्जी खबरें का प्रचार-प्रसार होता है, उसमें हैरान मत होइए अगर आप यूट्यूबर्स अपने चैनलों पर वीडियो बनाएँ कि मोदी सरकार अब दूध पर 12% टैक्स लगा रही है और बाद में राहुल गाँधी भी प्रेस कॉन्फ्रेंस करने बाहर आ जाएँ।

दिलचस्प बात यह है कि जीएसटी दरें जीएसटी परिषद द्वारा तय की जाती हैं, जिसमें विपक्ष द्वारा शासित राज्यों सहित सभी राज्यों के वित्त मंत्री शामिल होते हैं। इसलिए कर दरों के लिए अकेले मोदी सरकार को दोष देना बिल्कुल समझ से परे है।

योगी सरकार ने DSP को बनाया दिया सिपाही, महिला कॉन्स्टेबल संग होटल में पकड़ा गया था कृपा शंकर कनौजिया

उत्तर प्रदेश की योगी सरकार ने एक पुलिस अफसर को अनुशासनहीनता की कठोर सजा दी है। वर्ष 2021 में कानपुर के एक होटल में एक महिला सिपाही के साथ पकड़े जाने वाले एक पुलिस उपाधीक्षक (DSP) रैंक के अधिकारी को अब कॉन्स्टेबल बना दिया गया है। उसे कॉन्स्टेबल बनाकर नई पोस्टिंग भी दे दी गई है।

अपने पुलिस करियर में डिमोशन का का यह तमगा पाने वाले अधिकारी का नाम कृपा शंकर कनौजिया है। पुलिस महकमे ने कृपा शंकर कनौजिया के विरुद्ध कार्रवाई करते हुए उन्हें उनके भर्ती वाले पद पर वापस भेजा है। कनौजिया उत्तर प्रदेश पुलिस में कॉन्स्टेबल के रूप में भर्ती हुए थे और उन्हें दोबारा वही तैनाती दे दी गई है।

उनके खिलाफ यह कार्रवाई 18 जून, 2024 को की गई है। उन्हें गोरखपुर में पीएसी में तैनात किया गया है। उन्हें उन्हें गोरखपुर में 26वीं बटालियन पीएसी में ‘एफ’ दल में तैनात किया गया है। अब DSP होने के कोई अधिकार उनके पास नहीं रह जाएँगे और उनका वेतन समेत सुविधाएँ सिपाहियों वाली मिलेंगी।

कृपा शंकर कनौजिया के विरुद्ध यह कार्रवाई शनिवार (22 जून, 2024) को की गई है। उनके खिलाफ 2021 से ही विभागीय जाँच प्रचलित थी। जिसके पूरे होने के बाद यह एक्शन लिया गया है। उनके खिलाफ की गई कार्रवाई के पीछे उनका 2021 का एक कारनामा है।

दरअसल, वर्ष 2021 में कनौजिया उन्नाव जिले के बीघापुर थाने में तैनात थे। यहाँ वह DSP रैंक पर थे। वह इस थाने से पारिवारिक काम का कारण बता कर छुट्टी लेकर निकले थे। इसके बाद उनका फोन बंद आने लगा था। उनकी पत्नी ने उनके थाने में फोन करके जानकारी दी थी कि वह घर पर नहीं पहुँचे।

कनौजिया की पत्नी ने इसके बाद उन्नाव के एसपी से इस मामले की शिकायत की थी। कनौजिया की तलाश के लिए उनके नम्बर को सर्विलांस पर लगाया गया था। इससे मिले जानकारी के अनुसार पुलिस ने कार्रवाई करते हुए उन्हें कानपुर में एक होटल में पाया था। यहाँ वह एक महिला कॉन्स्टेबल के साथ मौजूद थे।

इसके बाद उनकी पत्नी ने काफी हंगामा काटा था। महिला कॉन्स्टेबल के साथ पाए जाने के बाद कनौजिया के विरुद्ध विभागीय कार्रवाई चालू कर दी गई थी। उनके खिलाफ हुई जाँच के बाद उनके खिलाफ प्रतिकूल कार्रवाई की गई और उन्हें उनके कॉन्स्टेबल पर भेज दिया गया।

हनुमान मंदिर के सामने ईदगाह का दूसरा गेट खोलने पर अड़े थे कट्टरपंथी: विरोध के बाद शुरू कर दी हिंसा, हिंदू महिला ने आँख की रोशनी गंवाई, पुलिसकर्मी की सर्जरी

राजस्थान के जोधपुर स्थित सूरसागर थाना क्षेत्र में 21 जून 2024 की रात को हिंसा भड़क गई। इसके बाद से इलाके में धारा-144 लागू है। हिंसा रूकी है, लेकिन इलाके में शांतिपूर्ण तनाव है। यह पूरा विवाद ईदगाह के गेट को शुरू हुआ था। इसके बाद आगजनी और पत्थरबाजी शुरू हो गई। मामला हिंसक होते ही दोनों पक्षों ने एक-दूसरे पर हमला बोल दिया।

इस हिंसा में दुकान और ट्रैक्टर को फूँक दिया गया है। बीच-बचाव करने आए पुलिसकर्मियों को भी चोटें आई हैं। आखिरकार पुलिस को लाठीचार्ज कर के स्थिति को सँभालना पड़ा। इस झगड़े में लाजवंती गहलोत ने अपनी एक आँख की रोशनी चली गई है। घटना के दिन उनका पोता बाहर खेल रहा था। उसे लेने बाहर आईं तो एक पत्थर आकर उनकी आँख में लग गई।

इसके बाद घर वाले उन्हें अस्पताल लेकर पहुँचे, जहां डॉक्टरों ने बताया कि उनकी आँख की रोशनी चली गई है। इस घटना के बाद लाजवंती ने शनिवार (22 जून 2024) को सूरसागर थाने में पहुँचकर अपने बयान दर्ज करवाए। इसके बाद पुलिस उन्हें एमएलसी करवाने के लिए अस्पताल लेकर गई। वहीं, घायल एक पुलिसकर्मी की सर्जरी कराई गई है। वह खतरे से बाहर है।

इस घटना को लेकर एक पक्ष शनिवार (22 जून 2024) को कलेक्ट्रेट पहुँचा। आरोप है कि कुछ लोगों द्वारा उनके घर में घुसकर परिवार के लोगों को पीटा गया है। इसके साथ ही महिलाओं से बदसलूकी भी की गई है। कई परिवार का यह भी आरोप है कि इस विवाद से उनका कोई लेना-देना नहीं है, फिर भी उनसे मारपीट की गई। कई लोगों को जबरदस्ती उठाकर ले जाया गया।

इलाके में भारी पुलिस बल तैनात है। ड्रोन से छतों पर रखे पत्थर और उसे फेंकने वाले आरोपितों की पहचान की जा रही है। सबूतों के आधार पर पुलिस लोगों के घरों में दबिश देकर पकड़ रही है। जाँच के दौरान इलाके के कुछ सीसीटीवी ऐसे भी मिले हैं, जिनके तार काट दिए गए थे। स्थिति नियंत्रण में है, लेकिन तनाव बना हुआ है।

जोधपुर पश्चिम के पुलिस उपायुक्त राजेश कुमार यादव ने बताया कि बीते रात हुए इस तनाव में दो पुलिसकर्मी घायल हुए हैं। दोनों पक्षों की शिकायतों के आधार पर दो एफआईआर दर्ज की गई हैं। इनमें कुल 200 लोगों के नाम हैं, जिनमें से अब तक 45 लोगों को गिरफ्तार किया गया है। गिरफ्तार लोगों में 7 हिंदू हैं। बाकी संदिग्धों को पकड़ने के लिए छापेमारी जारी है।

पुलिस उपायुक्त (पश्चिम) आलोक श्रीवास्तव ने प्रतापनगर वृत्त के पुलिस स्टेशन सूरसागर, प्रतापनगर, प्रतापनगर सदर, देवनगर व राजीव गांधी नगर थाना क्षेत्रों में शनिवार सुबह छह बजे से धारा 144 लगा दी। कोई भी व्यक्ति किसी भी तरह का हथियार लेकर इन क्षेत्रों में आ-जा नहीं सकेगा। धार्मिक उन्माद फैलाने वालों पर सख्त कार्रवाई की जाएगी।

क्या है मामला?

दरअसल, सूरसागर इलाके के राजाराम सर्किल के पास ईदगाह है। हिंसा की वजह यही ईदगाह है। इसके पीछे की तरफ एक गेट बनवाया जा रहा था। जहाँ गेट बनाया जा रहा था, उसके ठीक सामने हनुमान मंदिर है। हिंदू समुदाय इस नए दरवाजे का लगातार विरोध करता रहा है। इस गेट के निर्माण को लेकर करीब 15 साल पहले भी विवाद हुआ था। विवाद के बाद निर्माण कार्य पर रोक लगा दी गई थी।

हालाँकि, शुक्रवार (21 जून 2024) की शाम को एक पक्ष ने उस समझौते को तोड़ दिया और ईदगाह का दरवाजा फिर बनवाने लगे। इसकी जानकारी मिलते ही हिंदू समाज के लोग वहाँ पहुँच गए और उसका विरोध करने गए। विरोध को देखते हुए और बहसा-बहसी के बाद इस गेट को हटाने पर सहमति बन गई।

हालाँकि समुदाय के कट्टरपंथियों को यह फैसला पसंद नहीं आया। वे हर कीमत पर हनुमान मंदिर के सामने दूसरा गेट खोलना चाहते थे। इसके बाद वे घटना के दिन देर रात सड़कों पर उतर आए। इसका परिणाम हुआ कि लगभग दो घंटे तक दोनों तरफ से पत्थरबाजी हुई। इस दौरान एक दुकान और एक ट्रैक्टर को आग लगा दी गई, जबकि एक जीप में तोड़फोड़ की गई।

T20 वर्ल्ड कप में अफगानिस्तान ने ऑस्ट्रेलिया को हराया: कंगारू कप्तान ने बनाया पहली बार ऐतिहासिक वर्ल्ड रिकॉर्ड, अफगानों को भी पहली बार मिली यह उपलब्धि

T20 वर्ल्ड कप 2024 में बड़ा उलटफेर हो गया है। कैरिबियन शहर किंग्सटाउन में आयोजित सुपर 8 मुकाबले में अफगानिस्तान ने ऑस्ट्रेलिया को पटखनी दे दी है। अफगानिस्तान क्रिकेट टीम ने पहली बार यह उपलब्धि हासिल की है।

रविवार (23 जून, 2024) को आयोजित इस मुकाबले में अफगानिस्तान ने पहले खेलते हुए 20 ओवर में 6 विकेट के नुकसान पर 148 रन बनाए। ऑस्ट्रेलिया इस का पीछा करते हुए 127 रन पर ही पूरी धराशायी हो गई। ऑस्ट्रेलिया पूरे 20 ओवर भी इस मुकाबले में नहीं खेल सकी और उसके खिलाड़ी एक के बाद एक पवेलियन का रास्ता नापते रहे।

अफगानिस्तान की तरफ से ओपनिंग करने उतरे रहमतुल्लाह गुरबाज और इब्राहिम जादरान ने महत्वपूर्ण पारियाँ इस मैच में खेली। गुरबाज ने जहाँ 49 गेंदों में 60 रन बनाए तो वहीं जादरान ने 48 गेंदों में 51 रन बनाकर टीम को सम्मानजनक स्कोर तक पहुँचाया। अन्य कोई भी अफगानी खिलाड़ी बल्ले से कमाल नहीं दिखा सका।

दूसरी तरफ 148 रनों का पीछा करने उतरी मजबूत मानी जाने वाली टीम ऑस्ट्रेलिया के विकेट लगातार गिरते रहे। ऑस्ट्रेलिया की तरफ से केवल ग्लेन मैक्सवेल ही 41 गेंदों में 59 रन बनाकर ऑस्ट्रेलिया को थोड़ी देर लड़ाई में रख सके। ऑस्ट्रेलिया के 7 बल्लेबाज तो दहाई का आँकड़ा भी पार नहीं कर सके।

ग्लेन मैक्सवेल के अलावा मिचेल मार्श और मार्कस स्तोइनिस ने क्रमशः 12 और 11 रनों की पारियाँ खेलीं। ऑस्ट्रेलिया के सामने अफगानिस्तान ने काफी कसी हुई गेंदबाजी की, जिसकी बदौलत उसे जीत हासिल हुई। अफगानिस्तान के गुल्बदीन नायब ने इस मुकाबले में 4 विकेट झटके। उन्होंने ओवर में मात्र 20 रन ही दिए।

इसके अलावा नवीन उल हक़ ने भी 4 ओवर में मात्र 20 रन देकर 3 विकेट लिए। इन दोनों गेंदबाजों के अलावा राशिद खान, अजम्तुल्लाह ओमरजई और मोहम्मद नबी को भी 1-1 विकेट हासिल हुआ। कुल मिलाकर गेंदबाजों ने ऑस्ट्रेलिया को कहीं भी आगे बढ़ने का मौका नहीं दिया।

ऑस्ट्रेलिया की इस हार के बाद उस पर से T20 वर्ल्ड कप से बाहर होने का खतरा मंडरा रहा है। उसका अगला मैच भारत से है। यदि वह यह मैच हार जाती है और साथ अफगानिस्तान अगले मैच में बांग्लादेश को हरा देता है, तो उसे बाहर का रास्ता देखना पड़ेगा।

इस मैच में एक और रिकॉर्ड बना। ऑस्ट्रेलिया के कप्तान पैट कमिंस ने यह रिकॉर्ड अपने नाम किया। उन्होंने अफगानिस्तान के खिलाफ इस मुकाबले में तीन विकेट चटका कर हैट ट्रिक लगाई। उन्होंने इससे पहले गुरुवार को बांग्लादेश से हुए मुकाबले में भी हैट ट्रिक लगाई थी। T20 विश्व कप में दो लगातार मैचों में हैट ट्रिक लगाने वाले पहले खिलाड़ी बन गए हैं।

केरल-कर्नाटक को केंद्र से चाहिए विशेष पैकेज: वामपंथी सरकार को पहले से ₹21000 करोड़ का कर्ज, कॉन्ग्रेसी सरकार को चुनावी गारंटियों के लिए चाहिए ₹11495 करोड़

केरल की वामपंथी सरकार ने केंद्र सरकार से एक बार फिर आर्थिक सहायता की गुहार लगाई है। कॉन्ग्रेस और वामपंथी सरकारों के आर्थिक कुप्रबन्धन का दंश झेल रहे राज्य ने केंद्र से ₹24,000 करोड़ करोड़ का विशेष पैकेज माँगा है। केरल का कहना है कि इस पैकेज का उपयोग वह अपनी आर्थिक संकट से लड़ने में करेगा।

मीडिया रिपोर्ट्स के अनुसार, शनिवार (22 जून, 2024) को नई दिल्ली में हुई एक प्री बजट बैठक में केरल के वित्त मंत्री के एन बालगोपाल ने यह माँग रखी। यह बैठक नई सरकार के पूर्ण बजट पेश करने से पहले राज्यों के साथ आयोजित की गई थी, इस बैठक में केरल समेत अन्य राज्य भी शामिल हुए।

केरल के वित्त मंत्री के एन बालगोपाल ने कहा है कि उनके राज्य को दो वर्षों के लिए मदद दी जाए ताकि वह आर्थिक संकट से लड़ सकें। केरल ने ₹24,000 करोड़ के अलावा ₹5000 करोड़ की माँग विजिंझम पोर्ट के विकास के लिए भी की है।

केरल ने यह भी माँग की है कि उसे बाजार से और अधिक उधार लेने की अनुमति दी जाए ताकि राज्य की वामपंथी सरकार खर्च चला सके। उन्होंने उधार ना ले पाने को राज्य में आर्थिक संकट का कारण भी बताया है। इसके अलावा भी केरल ने केंद्र से कई माँग की हैं।

केरल की ₹24,000 के आर्थिक पैकेज की माँग तब सामने आई है जब एक माह पहले ही केंद्र उसे ₹21,253 करोड़ की राहत दे चुका है। केरल को मई में ही मोदी सरकार ने ₹21,253 करोड़ की अधिक उधारी की अनुमति दी थी। यह राहत उसे दिसम्बर, 2024 तक जारी रहेगी।

कर्नाटक ने भी माँगा ₹11,000 करोड़ का पैकेज

वित्त वर्ष 2024-25 में ₹52,000 करोड़ चुनावी गारंटियों पर खर्च करने वाले कॉन्ग्रेस शासित राज्य कर्नाटक ने भी केंद्र सरकार से ₹11,000 करोड़ के विशेष पैकेज की माँग की है। कर्नाटक की कॉन्ग्रेस सरकार ने केंद्र सरकार से कहा है कि वह राज्य के लिए ₹11,495 करोड़ जारी करे। कर्नाटक ने हाल ही में राज्य की आय बढ़ाने को एक अमेरिकी एजेंसी को काम पर लगाया था। एजेंसी को 6 महीने के काम के लिए ₹9.5 करोड़ दिए जाएँगे।

कर्नाटक की कॉन्ग्रेस सरकार राज्य में मुफ्त योजनाओं के कारण आए आर्थिक दबाव को कम करने के लिए इससे पहले SC/ST के लिए जारी किया गया ₹11,000 करोड़ फंड उपयोग में ला चुकी है। उसने हाल ही में पानी के दाम और बसों के किराए बढ़ाने पर भी विचार चालू कर दिया है। कर्नाटक की कॉन्ग्रेस सरकार ने हाल ही में पेट्रोल और डीजल के दाम भी बढ़ाए थे।

NTA अब उसके जिम्मे, प्रशासनिक सुधार के लिए जिसके चर्चे देश-विदेश तक: कौन हैं प्रदीप सिंह खरोला, जो 24 साल पहले भी कर चुके हैं असंभव को संभव

केंद्र सरकार ने NEET और UGC-NET परीक्षा में धांधली के बाद इन्हें आयोजित करने वाली नेशनल टेस्टिंग एजेंसी (NTA) के डायरेक्टर जेनरल सुबोध कुमार को हटा दिया है। उनकी जगह सेवानिवृत IAS अधिकारी प्रदीप सिंह खरोला को NTA का नया महानिदेशक बनाया गया है। इस बीच शिक्षा मंत्रालय ने NEET-UG परीक्षा में अनियमितताओं की जाँच CBI को सौंप दी है।

प्रदीप सिंह खरोला उत्तराखंड के रहने वाले हैं। 1985 बैच के कर्नाटक कैडर के भारतीय प्रशासनिक सेवा (IAS) अधिकारी खरोला साल 2021 में नागरिक उड्डयन सचिव के पद से सेवानिवृत हुए थे। इसके बाद मार्च 2022 में उन्हें राष्ट्रीय भर्ती एजेंसी (NRA) का अध्यक्ष नियुक्त किया गया। वर्तमान में वह आईटीपीओ के अध्यक्ष एवं प्रबंध निदेशक के रूप में काम करे हैं।

इससे पहले वह एयर इंडिया के चेयरमैन एवं प्रबंध निदेशक थे। IAS खरोला बेंगलुरु मेट्रो रेल निगम के प्रबंध निदेशक भी रहे हैं। वे 2012-13 में कर्नाटक के मुख्यमंत्री के प्रमुख सचिव भी रहे हैं। उन्होंने कर्नाटक में शहरों के आधारभूत ढाँचे निर्माण के लिए अंतरराष्ट्रीय संस्थानों से धन जुटाने वाली संस्था अर्बन इंफ्रास्ट्रक्चर डेवलपमेंट एंड फाइनेंस कॉपोर्रेशन (केयूआईडीएफसी) का नेतृत्व भी किया है।

प्रदीप सिंह खरोला नेशनल एडमिनिस्ट्रेटिव रिफॉर्म कमीशन के संयुक्त सचिव भी रहे हैं। साल 2012 में उन्हें ई-गवर्नेस के लिए राष्ट्रीय पुरस्कार और साल 2013 में प्रधानमंत्री उत्कृष्ट लोक प्रशासन पुरस्कार मिल चुका है। उन्होंने कई क्षेत्रों में काम किया है और प्रशासन में सुधार लाने के लिए जाने जाते हैं। इस संबंध में कई अंतरराष्ट्रीय और राष्ट्रीय पत्रिकाओं में उनके शोध पत्र प्रकाशित हुए हैं।

प्रदीप सिंह खरोला सार्वजनिक परिवहन कंपनियों को घाटे से निकाल कर लाभ देने वाली कंपनी बनाने के विशेषज्ञ माने जाते हैं। उन्होंने बेंगलुरू की सिटी बस सेवा बेंगलुरू मेट्रोपॉलिटन ट्रांसपोर्ट कॉपोर्रेशन को घाटे से उबारा था और साल 2000 में उसे फायदे में लाए दिए थे। यह देश के राज्य परिवहन का इकलौता सफल मॉडल है। बेंगलुरू में मेट्रो सेवा की शुरुआत में भी उनका अहम योगदान है।

प्रदीप सिंह खरोला ने 1982 में इंदौर विश्वविद्यालय से मैकेनिकल इंजीनियरिंग की डिग्री ली। इसके बाद उन्होंने 1984 में आईआईटी दिल्ली से इंडस्ट्रियल इंजीनियरिंग में पोस्ट ग्रेजुएशन किया। यहाँ वे टॉपर रहे। इसके बाद उन्होंने फिलीपींस के मनीला स्थित एशियन इंस्टीट्यूट ऑफ मैनेजमेंट से डेवलपमेंट मैनेजमेंट में मास्टर्स किया है।

NTA के लिए समिति का गठन

NTA द्वारा कराई जाने वाली परीक्षाओं में लगातार होने वाली गड़बड़ी और विद्यार्थियों के विरोध के बाद शिक्षा मंत्रालय ने इसकी जाँच केंद्रीय जाँच एजेंसी (CBI) को दे दी है। वहीं, NTA में किस तरह का परिवर्तन किया जाए, इसको लेकर मंत्रालय ने एक हाई लेवल कमिटी बनाई है। इस कमिटी की अध्यक्षता इसरो को पूर्व प्रमुख को दी गई है।

इसरो के पूर्व अध्यक्ष और आईआईटी कानपुर के बोर्ड ऑफ गवर्नर्स के अध्यक्ष डॉ. के. राधाकृष्णन इस समिति के अध्यक्ष होंगे। पाँच अन्य विशेषज्ञ समिति के सदस्य होंगे, जबकि मंत्रालय के एक संयुक्त सचिव इसके सदस्य सचिव होंगे। अध्यक्ष के अलावा समिति में 6 अन्य सदस्य भी होंगे।

विशेषज्ञ समिति के सदस्यों की सूची इस प्रकार है:

1-डॉ. के. राधाकृष्णन , पूर्व अध्यक्ष, इसरो और अध्यक्ष BoG, आईआईटी कानपुर – अध्यक्ष

2-डॉ. रणदीप गुलेरिया , पूर्व निदेशक, एम्स दिल्ली – सदस्य

3-प्रो. बी.जे. राव, कुलपति, हैदराबाद केंद्रीय विश्वविद्यालय – सदस्य

4-प्रो. राममूर्ति के, प्रोफेसर एमेरिटस, सिविल इंजीनियरिंग विभाग, आईआईटी मद्रास – सदस्य

5-पंकज बंसल, सह-संस्थापक, पीपल स्ट्रॉन्ग और बोर्ड सदस्य, कर्मयोगी भारत – सदस्य

6-प्रो. आदित्य मित्तल, डीन छात्र मामले, आईआईटी दिल्ली – सदस्य

7-गोविंद जायसवाल, संयुक्त सचिव, शिक्षा मंत्रालय, भारत सरकार – सदस्य सचिव

क्या है NTA

मानव संसाधन विकास मंत्रालय (अब शिक्षा मंत्रालय) ने साल 2017 में उच्च शिक्षा से संबंधित भर्ती की प्रवेश परीक्षा के लिए सिंगल, स्वतंत्र, स्वायत्त निकाय स्थापित करने की घोषणा की थी। इसके बाद 1 मार्च 2018 को राष्ट्रीय परीक्षण एजेंसी (NTA) को औपचारिक रूप से स्थापित किया गया।

इस एजेंसी को विभिन्न विश्वविद्यालयों और संस्थानों में स्नातक और स्नातकोत्तर कार्यक्रमों में प्रवेश के लिए राष्ट्रीय स्तर की पात्रता परीक्षाएँ (NEET, JEE Main, UGC NET आदि) आयोजित कराने का जिम्मा सौंपा गया, ताकि परीक्षा प्रक्रिया को पारदर्शी, कुशल और निष्पक्ष रहे।

हालाँकि, NTA अपने उद्देश्यों को पूरा करने में अब तक नाकाम रहा है। स्थापना के बाद ही एजेंसी द्वारा ली जाने वाली परीक्षा में 2018 और 2023 को छोड़कर हर साल गड़बड़ियाँ मिली हैं। इसके कारण एजेंसी पर सवाल उठते हैं। इस बार यह मुद्दा अधिक विकराल हो गया है। अब NTA के नए महानिदेशक के रूप में प्रदीप सिंह खरोला के पास इसकी विश्वसनीयता को बहाल करना प्रमुख चुनौती है।

घर के बाहर खेल रही नाबालिग लड़की को देखकर अफजल शाह की नीयत डोली, निकाह के लिए कर लिया अपहरण: अजमेर रेलवे स्टेशन से गिरफ्तार

अजमेर में घर के बाहर खेल रही एक नाबालिग लड़की का अफजल शाह ने घर से बाहर से ही अपहरण कर लिया। वो उसे लेकर रात भर फरार रहा, लेकिन दूसरे दिन शुक्रवार (21 जून 2024) की सुबह उसे अजमेर के रेलवे स्टेशन से गिरफ्तार कर लिया गया। अफजल शाह 7-8 दिन पहले ही मध्य प्रदेश से अजमेर आया था और वो नाबालिग लड़की को लेकर एमपी ही जा रहा था। अफजल शाह ने पूछताछ में बताया कि वो बच्ची से निकाह करना चाहता था, इसलिए उसने उसका अपहरण किया।

मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक, ये मामला अजमेर के क्रिश्चियन गंज थाना क्षेत्र का है, जहाँ बच्ची घर के बाहर खेल रही थी तभी अफजल शाह (34) उसे डरा धमकाकर अपने साथ ले गया। बच्ची के घर वापस नहीं आने पर परिवार तलाश करने लगा। बच्ची के रेलवे स्टेशन पर सूचना मिलने पर परिवार वहाँ पहुँचा और आरोपित को पकड़ लिया। बाद में पुलिस को सूचना देकर आरोपी को पुलिस के हवाले कर दिया। पीड़ित पिता की शिकायत पर क्रिश्चियन गंज थाना पुलिस ने मुकदमा दर्ज कर जाँच शुरू कर दी है।

क्रिश्चियन गंज थाना पुलिस के अनुसार, माकड़वाली रोड निवासी पीड़ित पिता की ओर से थाने पर मुकदमा दर्ज करवाया गया है। पिता ने शिकायत देकर बताया कि उसकी तीसरे नंबर की बेटी घर के बाहर खेल रही थी। लेकिन वापस घर नहीं आई। तभी परिवार के द्वारा पड़ोस में उसकी तलाश की गई। रिश्तेदारों को फोन कर पूछताछ की गई लेकिन बच्ची का कुछ पता नहीं चला।

पीड़ित पिता ने बताया कि वह सुबह बस स्टैंड पर गए और उसके बच्चे रेलवे स्टेशन पर ढूँढने के लिए गए थे। इसी बीच उसके बड़े बेटे को बेटी के रेलवे स्टेशन पर बैठे होने की सूचना मिली। वह तुरंत रेलवे स्टेशन गए और पुलिस को इसकी सूचना दी और वहाँ पर आरोपित अफजल शाह को बच्ची के साथ ही पकड़ लिया।

पीड़ित बच्ची के पिता ने बताया कि अफजल शाह बच्ची को डरा-धमकाकर अपहरण कर अपने साथ ले गया और चिल्लाने पर मरने की धमकी दी थी। पिता की शिकायत पर क्रिश्चियन गंज थाना पुलिस ने आरोपी के खिलाफ अपहरण की धाराओं में मुकदमा दर्ज कर जाँच शुरू कर दी है। बताया जा रहा है कि अफजल शाह के खिलाफ एमपी में भी मामले दर्ज हैं।