राजस्थान के जोधपुर में शुक्रवार (21 जून 2024) को बवाल हो गया। तनाव को देखते हुए रविवार (23 जून 2024) को प्रशासन ने हिंसा के आरोपितों के खिलाफ तलाशी अभियान चलाया और ड्रोन से इलाके की छानबीन की, जिसके बाद प्रशासनिक अधिकारियों की आँखें खुली की खुली रह गई, क्योंकि कई छतों पर भारी मात्रा में पत्थर मिले हैं, जिनका इस्तेमाल हिंसा के दौरान पत्थरबाजी में हुआ था।
मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक, बीते शुक्रवार को जोधपुर के सूरसागर थाना इलाके में स्थित एक ईदगाह का गेट हिंदू मोहल्ले की तरफ खोले जाने का विरोध हुआ, तो मुस्लिमों ने जमकर पथराव किए। इस पथराव में कई गाड़ियाँ टूट गई, तो एक दुकान को भी आग के हवाले कर दिया गया। हिंसा की इन घटनाओं में एक महिला की आँख की रोशनी चली गई। इस मामले में अब तक 65 लोगों के खिलाफ एफआईआर दर्ज की जा चुकी है, जिसमें से 51 लोग गिरफ्तार हो चुके हैं। इस बीच, पूरे इलाके में तनाव बरकरार है।
इस तनाव के बीच, पुलिस प्रशासन ड्रोन के जरिए पूरे क्षेत्र में स्थिति पर नियंत्रण बनाए हुए हैं। इस बीच सामने आया कि लोगों ने घरों पर पथराव करने के लिए पत्थर जमा कर रखे थे। पुलिस के अनुसार यह पत्थर करीब दो ट्रॉली थे। इस खुलासे के बाद चर्चा शुरू हो गई है कि विवाद को लेकर लोगों ने पहले ही पथराव करने की प्लानिंग कर रखी थी। इस दौरान जोधपुर के 5 थाना क्षेत्रों में धारा 144 लागू होने के कारण क्षेत्र रविवार को सन्नाटा छाया रहा। वहीं पुलिस बलों ने पूरी स्थिति पर नियंत्रण रखा।
पुलिस के अनुसार चिन्हित मकान पर करीब दो ट्रॉली पत्थर बरामद हुआ है। इस मामले में पुलिस ने घरों के लोगों को नामजद किया है और उनके खिलाफ कार्रवाई शुरू कर दी हैं। घरों के ऊपर पत्थर मिलने की घटना से चर्चा तेज हो गई है कि लोगों ने इस विवाद को देखते हुए पहले से ही पथराव करने की प्लानिंग बना ली थी।
सूरसागर क्षेत्र में पथराव, आगजनी और तोड़फोड़ की घटना को देखते हुए पुलिस आयुक्त ने पूरे इलाके में पुलिस तैनात कर धारा 144 लागू कर दी। इसको लेकर अब तक पुलिस 51 लोगों को गिरफ्तार कर चुकी हैं। मामले की गंभीरता को देखते हुए पुलिस प्रशासन के अधिकारी पूरी स्थिति पर नजर बनाए हुए हैं। इसके अलावा ड्रोन के जरिए पूरे इलाके की छानबीन की जा रही हैं। हिंसा के इस मामले में अब तक 51 लोग गिरफ्तार हो चुके हैं, तो 65 लोगों के खिलाफ एफआईआर दर्ज की जा चुकी है।
फिलीपींस और चीन के बीच तनाव एक बार फिर से बढ़ गया है। फिलीपींस के राष्ट्रपति फ़ेरदिनानद मारकोस जूनियर ने चीन को खरी-खरी सुनाई है। उन्होंने कहा कि वो युद्ध नहीं चाहते, लेकिन किसी भी अत्याचारी के सामने झुकेंगे भी नहीं। बता दें कि ये लड़ाई साउथ चाइना सी को लेकर है, जहाँ हाल ही में फिलीपींस की नौसेना और चीन कोस्ट गार्ड के बीच हिंसक झड़प हुई है। उन्होंने कहा कि राष्ट्र की रक्षा के रूप में हम फिलीपींस के सिद्धांतों का पालन करते हैं और शांति से मसला हल करने में विश्वास रखते हैं।
उन्होंने रविवार को फिलीपींस साउथ चाइना सी फोर्सेज के पलवान द्वीप स्थित मुख्यालय का दौरा भी किया। इस दौरान उन्होंने 80 सेलर्स को सम्मानित भी किया। उन्होंने कहा कि हम किसी के भी दबाव में नहीं आएँगे, न झुकेंगे। राष्ट्रपति फ़ेरदिनानद मारकोस जूनियर ने अंतर्राष्ट्रीय कानून के अनुसार, फिलीपींस अपने राष्ट्रीय हितों के समर्थन में अपनी स्वतंत्रता और अधिकारों का प्रयोग जारी रखने की प्रतिज्ञा लेते हुए कहा कि हम युद्ध शुरू नहीं करेंगे, लेकिन दबेंगे भी नहीं। चीन ने अपने कोस्ट गार्ड्स को 2021 के कानून के तहत विदेशी जहाजों पर खतरनाक हमलों की अनुमति दे दी है, जिसके बाद तनाव बढ़ गया है।
बता दें कि दोनों देशों की सेनाओं के बीच सेकंड थॉमस शॉल (एक जलमग्न चट्टान) के पास हिंसा भड़क गई थी। ये पलवान से करीब 200 किलोमीटर की दूरी पर स्थित है, वहीं चीन के नज़दीकी जमीन से 1000 किलोमीटर की दूरी पर है। चीनी नौसेना ने इस दौरान फिलीपींस के कई सैनिकों को घायल कर दिया और उनके 2 नावों को भी क्षति पहुँचाई। इस दौरान उन्होंने कुल्हाड़ी, छुरा और हथौड़ा ले रखा था। फिलीपींस के एक सेलर को इस हिंसा में अपना अंगूठा गँवाना पड़ा।
The level of hostility by China against the Philippines is unbelievable. Two Chinese naval vessels have jammed a Phillipines boat in between. China is the neighborhood bully that needs to be taught a serious lesson. When will the world unite to respond to this menace called… pic.twitter.com/Wzqe1Yyx5W
साथ ही चीन के कोस्ट गार्ड्स ने न सिर्फ फिलीपींस की नावों और हथियारों को क्षतिग्रस्त किया, बल्कि उनके कई उपकरण चुरा कर भी ले गए। चीन ने इस झड़प के लिए फिलीपींस को जिम्मेदार ठहराते हुए कहा कि उसके कोस्ट गार्ड्स ने तो पेशेवर और नियंत्रित तरीके से व्यवहार किया। चीन अपनी जमीन से हजारों किलोमीटर दूर स्थित समुद्री स्थलों पर भी दावा ठोकता रहा है। अमेरिका-EU समेत कई देशों ने चीन की निंदा की है। फिलीपींस ने इसे ‘हथियारबंद हमले’ की श्रेणी में नहीं डाला है, वरना करार के तहत अमेरिका को फिर मदद के लिए आना होगा।
अयोध्या धाम रेलवे स्टेशन का उद्घाटन प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी 30 दिसंबर 2023 को किया, जिसकी दीवार 6 माह के अंदर गिर गई। इस दावे के साथ एक वीडियो सोशल मीडिया पर तेजी से वायरल किया जा रहा है। कॉन्ग्रेसी इकोसिस्टम इसे मोदी सरकारी की नाकामी बता रहा है, तो कुछ लोग सिर्फ राजनीतिक वैमनस्यता के नाम पर इसे फैला रहे हैं। चूँकि मामला अयोध्या जैसी धार्मिक नगरी से जुड़ा है, ऐसे में अयोध्या के विकास को लेकर तंज कस कर ये लोग लोगों में गुस्सा भी भर रहे हैं। हालाँकि अब साफ हो गया है कि ये दावा न सिर्फ भ्रामक है, बल्कि तथ्यात्मक रूप से गलत भी है।
सचिन गुप्ता नाम के एक्स यूजर ने एक्स पर दावा किया कि अयोध्या धाम रेलवे स्टेशन की 20 मीटर की बाउंड्रीवॉल एक ही बारिश में ढह घई। 30 दिसंबर 2023 को पीएम नरेंद्र मोदी ने इस रेलवे स्टेशन का उद्घाटन किया था। अपना पसंदीदा विषय पाते ही मोदी विरोध में कुँठित कथित पूर्व पत्रकार और अब यूट्यूबर अजित अंजुम ने तुरंत इसे मोदी सरकार की विफलता से जोड़ दिया और लिखा, “मोदी राज में ढहता विकास।”
वैसे, ये पोस्ट सचिन गुप्ता ने 12.40 बजे एक्स पर पोस्ट की थी और ठीक उसी समय अजित अंजुम ने भी इसे पोस्ट किया। ऐसे में ये सिर्फ इत्तेफाक ही है, इस बात पर संशय हो सकता है। हालाँकि इस पोस्ट को लेकर उत्तर रेलवे द्वारा जवाब भी आया है, जिसे न तो अजित अंजुम ने आगे बढ़ाना चाहा और न ही अपने द्वारा किया गया पोस्ट ही डिलीट किया।
उत्तरी रेलवे ने इस दीवार के गिरने की पूरी जानकारी देते हुए लिखा, “1-सूचित किया जाता है कि वीडियो में दिखाई गई दीवार मुख्य स्टेशन भवन का हिस्सा नहीं बल्कि रेलवे और निजी भूमि के बीच है। 2. दूसरे छोर से निजी लोगों द्वारा खुदाई कार्य करने और निजी क्षेत्र में जलभराव के कारण यह ढह गई। 3. रेलवे तुरंत कार्रवाई करेगी।”
1. सूचित किया जाता है कि वीडियो में दिखाई गई दीवार मुख्य स्टेशन भवन का हिस्सा नहीं बल्कि रेलवे और निजी भूमि के बीच है। 2. दूसरे छोर से निजी लोगों द्वारा खुदाई कार्य करने और निजी क्षेत्र में जलभराव के कारण यह ढह गई। 3. रेलवे तुरंत कार्रवाई करेगी । pic.twitter.com/Ff52ZkJULz
खास बात ये है कि न्यूज24 जैसा चैनल भी इस झूठ को आगे बढ़ाने में लगा रहा, जबकि पीआईबी तक ने ये बात साफ कर दी है कि ये दावा बिल्कुल गलत है। हालाँकि बाद में न्यूज24 ने अपना पोस्ट डिलीट कर दिया।
— Shehzad Jai Hind (Modi Ka Parivar) (@Shehzad_Ind) June 23, 2024
क्या है सच्चाई?
अयोध्या धाम रेलवे स्टेशन से जुड़े जिस दीवार के दिसंबर 2023 में बने होने का दावा किया जा रहा है, वो दावा पूरी तरह से गलत है। दीवार पुरानी है और मुख्य रेलवे स्टेशन की संचरना से अलग है। ये दीवार आम रिहाइशी इलाके और रेलवे की भूमि को अलग करने के लिए बहुत पहले से बनी थी। दीवार की दूसरी तरफ की निजी भूमि पर खनन के चलते वहाँ गड्ढा हो गया था और पानी भरने की वजह से पुरानी दीवार गिर गई। इसका अयोध्या धाम रेलवे स्टेशन से कोई लेना देना नहीं है और न ही दीवार दिसंबर 2023 में बनी।
ऐसे में इस वीडियो को गलत तथ्यों के साथ शेयर किया गया है, जिसके पीछे एक खास गैंग, एक खास इकोसिस्टम दिखाई पड़ता है। इस पोस्ट के माध्यम से लोगों में सरकार के प्रति गुस्सा भरने की कोशिश की जा रही है। गलत सूचना के साथ ऐसा करना कानूनन अपराध भी है।
पूर्व प्रधानमंत्री HD देवगौड़ा का परिवार लगातार आ रहे दुष्कर्म के मामलों के कारण विवादों में है। उनके बेटे रेवन्ना पर बलात्कार का आरोप लगा, इसके बाद पोते प्रज्वल पर भी यही आरोप लगा, अब एक अन्य पोते सूरज पर तो पार्टी के पुरुष कार्यकर्ता के साथ ही कुकर्म करने का आरोप लगा है। सूरज और प्रज्वल, दोनों ही रेवन्ना के बेटे हैं। तीनों पिता-पुत्र फ़िलहाल जेल में बंद हैं। इनकी पार्टी JDS कर्नाटक में कई बार सत्ता में रह चुकी है। देवगौड़ा के एक अन्य बेटे HD कुमारस्वामी मुख्यमंत्री रहे हैं।
सूरज रेवन्ना ने अपनी पार्टी के कार्यकर्ता के साथ उसकी आपत्तियों के बावजूद सेक्स किया और साथ ही कहा कि अगली बार सब कुछ और अच्छे से होगा। कर्नाटक के हासन जिले के गन्नीकडा स्थित अपने फार्महाउस में सूरज रेवन्ना ने पार्टी कार्यकर्ता के साथ कुकर्म किया। ये घटना 16 जून, 2024 की है। इस दौरान सूरज रेवन्ना ने पीड़ित से कहा कि ये उनके लिए उसके साथ पहली बार सेक्स का अनुभव है, अगली बार वो और अच्छे से करेंगे।
साथ ही पीड़ित को नौकरी का भी झाँसा दिया गया। 16 जून को सूरज ने पीड़ित को दोपहर के 2 बजे कहा कि वो शाम के 6-6:30 के बीच उनके फार्महाउस पर आ जाए। जैसे ही वो पहुँचा, दर्ज ने उससे दरवाजा बंद करने को कहा और उसके कंधे पर अपना हाथ रख दिया। इसके बाद वो उसके कानों को सहलाने लगे और उसके गाल पर किस कर लिया। उन्होंने पार्टी के कार्यकर्ता के होंठों को काटना शुरू कर दिया। FIR के अनुसार, पीड़ित ने विरोध किया तो सूरज रेवन्ना ने उसकी हत्या तक की धमकी दे डाली।
#WATCH | Hassan, Karnataka: JD(S) MLC and son of HD Revanna, Suraj Revanna being taken to the CID office in Bengaluru from Hassan Police Station
FIR was filed against Suraj Revanna u/s 377, 342, 506 of IPC at Holenarasipura Rural PS yesterday. Complainant Chethan has alleged… pic.twitter.com/KngDUAYBH4
इसके बाद उसके मुँह और गुदाद्वार का इस्तेमाल करते हुए सूरज रेवन्ना ने सेक्स किया। पीड़ित इस दौरान उनके पाँव पड़ कर माफ़ी माँगता रहा, लेकिन सूरज रेवन्ना का दिल नहीं पसीजा। उन्होंने कहा कि अगर पीड़ित जब वो बुलाते हैं तब आ जाता है और मैसेजों का सही से जवाब देता है तो उसे नौकरी दी जाएगी। पीड़ित इसके बाद अवसाद में चला गया और उसने हनुमनहल्ली के रहने वाले सूरज रेवन्ना के सहायक शिवकुमार को इसके बारे में बताया। शिवकुमार ने उलटे उस पर ही पैसे लेकर मामला शांत करने का दबाव बनाया और उसे ब्लैकमेल किया।
फिल्म अभिनेता अनुपम खेर के ऑफिस का ताला तोड़कर चोरी करने के आरोप में पुलिस ने दो सीरियल चोरों को गिरफ्तार किया है। आरोपितों की पहचान माजिद शेख और दलेर बहरीम खान के रूप में हुई है। दोनों ने बुधवार (19 जून 2024) की रात जोगेश्वरी इलाके में स्थित एक्टर के ऑफिस में चोरी की थी। इतनी जल्दी कार्रवाई होने पर अनुपम खेर ने मुंबई पुलिस को धन्यवाद दिया है और उनके लिए एक पोस्ट भी लिखा है। अनुपम खेर ने अपने इंस्टा अकाउंट पर चोरों की एक फोटो पोस्ट की है। इस फोटो में पुलिस ने चोरों को पकड़ रखा है और वे पुलिस थाने के सामने खड़े हैं।
अनुपम खेर ने अपने नोट में लिखा, “मुंबई पुलिस के प्रति मेरा हार्दिक आभार और प्रशंसा। मेरे दफ्तर में तोड़फोड़ करने वाले, मेरी तिजोरी और ‘मैंने गांधी को नहीं मारा’ के नेगेटिव को चुराने वाले दोनों चोरों को पकड़ लिया गया है। यह सब 48 घंटों के भीतर किया जाना पुलिस की अद्भुत दक्षता को दर्शाता है!! जय हो!”
बता दें कि अनुपम खेर के मुंबई के वीरा देसाई रोड स्थित ऑफिस से बुधवार की रात चोरी हुई थी। चोर उनके ऑफिस से कैश से भरी तिजोरी और फिल्म के नेगेटिव चुरा ले गए। जिसके बाद एक एफआईआर दर्ज कराई गई थी, जिस पर पुलिस ने आश्वासन दिया था कि वे आरोपियों को जल्द से जल्द पकड़ लेंगे। इसक बाद 22 जून को पुलिस ने माजिद शेख और मोहम्मद दलेर बहरीम खान को अरेस्ट किया।
मुंबई पुलिस ने बताया कि दोनों सीरियल चोर हैं। चोरी करने के लिए ऑटोरिक्शा का इस्तेमाल करते हैं। दोनों ने अंबोली इलाके में वीरा देसाई रोड पर अनुपम खेर के ऑफिस का ताला तोड़ा था। वहाँ से एक्टर की कंपनी द्वारा निर्मित एक फिल्म के निगेटिव और 4.15 लाख रुपए चुरा लिए। इन चोरों उसी रात विले पार्ले में भी चोरी की थी। अगले दिन सुबह अनुपम खेर के ऑफिस के एक शख्स ने शिकायत दर्ज कराई थी। इसके बाद कार्रवाई करते हुए अंबोली पुलिस स्टेशन की एक टीम ने दोनों चोरों को गिरफ्तार कर लिया। उनके पास चोरी किए गए पैसों का एक हिस्सा बरामद कर लिया गया है।
तमिलनाडु में ज़हरीले शराब हुई 56 मौतों के बाद राजनीति भी गर्मा गई है। भाजपा ने I.N.D.I. गठबंधन की चुप्पी पर सवाल उठाए हैं। कल्लाकुरिची में हुई इस घटना को भाजपा के राष्ट्रीय प्रवक्ता व जगन्नाथपुरी से सांसद संबित पात्रा ने कहा कि ‘राज्य द्वारा की गई हत्या’ करार देते हुए पूछा है कि आखिर कॉन्ग्रेस इस पर चुप क्यों है? उन्होंने मुख्यमंत्री MK स्टालिन से सफाई देने की माँग की। उन्होंने आरोप लगाया कि स्थानीय कलक्टर के मौतों को नकारते हुए मामला रफा-दफा करने की कोशिश की।
उन्होंने पूछा कि क्या राज्य के शीर्ष नेतृत्व ने प्रशासन को ऐसा करने का आदेश दिया था? उन्होंने ध्यान दिलाया कि कॉन्ग्रेस के किसी भी बड़े नेता ने इस घटना पर बयान नहीं दिया है। उन्होंने पूछा कि जो लोग दलितों के अधिकार के लिए लड़ने का दावा करते हैं और कैंडल मार्च निकालते हैं, वो आज इतने दलितों की मौत पर चुप क्यों हैं? बता दें कि दलित बहुल करुणापुरम की इस घटना में 200 से अधिक लोग अब भी अस्पताल में हैं जिनका इलाज चल रहा है।
DMK सरकार ने मृतकों के परिजनों के लिए 10-10 लाख रुपए के मुआवजे और घायलों के लिए 50-50 हजार रुपए की सहायता का ऐलान किया है। साथ ही रिटायर्ड न्यायाधीश B गोकुलदास के नेतृत्व में एक न्यायिक समिति बना कर 3 महीने में जाँच रिपोर्ट तैयार करने को कहा गया है। वहीं अभिनेता कमल हासन ने अस्पताल पहुँच कर पीड़ितों से मुलाकात की। उन्होंने इनके मनोवैज्ञानिक इलाज के लिए केंद्र बनाने की माँग की। उन्होंने कहा कि पीड़ित लापरवाह रहे, उन्हें शराब पीने के दौरान अपनी क्षमता का अंदाज़ा नहीं रहा।
The Hooch tragedy that has taken place in Karunapuram, a village mostly inhabited by SC people, of Tamil Nadu is extremely upsetting.
Over 56 people have died and several are in critical condition… Why are the leaders of the Congress party and their INDI Alliance silent on this… pic.twitter.com/jf52ClB7c0
उधर DMK ने दावा किया है कि जिस शराब को पीकर मौतें हुई हैं उन्हें बनाने के लिए भाजपा शासित पुडुचेरी से मेथनॉल आया था। DMK के संगठन सेक्रेटरी RS भारती ने इसे भाजपा के प्रदेश अध्यक्ष अन्नामलाई की साजिश करार दिया। उन्होंने इसे विकरावंडी उपचुनाव के लिए भाजपा की सोची-समझी साजिश करार देते हुए कहा कि पुडुचेरी के CM को इस्तीफा देना चाहिए। अन्नामलाई ने सीएम स्टालिन से इस्तीफा माँगा था, जिस पर डीएमके ने पूछा है कि क्या कंचनजंगा रेल हादसे के बाद मंत्री अश्विनी वैष्णव ने इस्तीफा दिया?
असम के मुख्यमंत्री हिमंता बिस्वा सरमा ने कहा है कि बांग्लादेशी मूल के अल्पसंख्यक समुदाय के लोगों ने कॉन्ग्रेस को बढ़-चढ़कर वोट दिया। उन्होंने कहा कि इससे जाहिर होता है कि सांप्रदायिकता में हिंदू नहीं, बल्कि सिर्फ एक समुदाय…. एक मजहब शामिल है। उन्होंने कहा कि बांग्लादेशी मूल के अल्पसंख्यकों ने कॉन्ग्रेस को इसलिए वोट दिया, क्योंकि अगले 10 सालों में वे राज्य को कब्जा करना चाहते हैं।
शनिवार (22 जून 2024) असम के पार्टी मुख्यालय में भाजपा और सहयोगी दलों के विजयी उम्मीदवारों के अभिनंदन समारोह में सीएम सरमा ने कहा कि सत्तारूढ़ गठबंधन को लगभग 47% वोट मिले, जबकि कॉन्ग्रेस और उसके सहयोगी दलों को 39% वोट मिले। दरअसल, भाजपा-एजीपी-यूपीपीएल गठबंधन ने राज्य की 14 लोकसभा सीटों में से 11 सीटें जीतीं, जबकि कॉन्ग्रेस ने 3 सीटें जीतीं।
उन्होंने कहा, “मैं गर्व से कहता हूँ कि असम में हिन्दू समुदाय ने तुष्टिकरण की राजनीति नहीं की। हिंदुओं ने मेरिट पर वोट किया है, लेकिन एक विशेष समुदाय ने इस प्रकार की Tactical Voting की है कि उनके क्षेत्र में चाहे जितनी भी विकास हो, पूरी समुदाय ने अपना 100% वोट कॉन्ग्रेस को दिया है।”
मैं गर्व से कहता हूँ कि असम में हिन्दू समुदाय ने तुष्टिकरण की राजनीति नहीं की। हिंदुओं ने मेरिट पर वोट किया है। लेकिन एक विशेष समुदाय ने इस प्रकार की Tactical Voting की है कि उनके क्षेत्र में चाहे जितनी भी विकास हो, पूरी समुदाय ने अपना 100% वोट कांग्रेस को दिया है। pic.twitter.com/7c2oqONFu7
उन्होंने कहा कि अगर कॉन्ग्रेस को मिले 39 प्रतिशत वोटों का विश्लेषण किया जाए तो यह पूरे राज्य से नहीं मिला है। इस वोट का 50 प्रतिशत हिस्सा 21 विधानसभा क्षेत्रों में केंद्रित है। ये विधानसभा क्षेत्र अल्पसंख्यक बहुल हैं। इन अल्पसंख्यक बहुल क्षेत्रों में भाजपा को सिर्फ 3 प्रतिशत ही वोट मिले हैं। उन्होंने कहा कि इससे जाहिर होता है कि सांप्रदायिकता हिंदू नहीं, बल्कि सिर्फ एक समुदाय है।
मुख्यमंत्री सरमा ने कहा कि अल्पसंख्यक बहुल इलाकों में भले ही सड़कें न हों… बिजली न हों, लेकिन वे कॉन्ग्रेस को भारी मत देते रहे हैं और ऐसा इस बार भी हुआ। उन्होंने कहा कि हालाँकि भाजपा असमिया लोगों और आदिवासियों के लिए काम करती रही है, लेकिन इन समुदायों ने भगवा पार्टी को 100 प्रतिशत वोट नहीं दिया है, उन्होंने कहा।
हिमंता ने आगे कहा, “अगर हम बांग्लादेशी मूल के लोगों की बहुलता वाले केंद्रों पर विचार करें तो करीमगंज को छोड़कर 99 प्रतिशत वोट कॉन्ग्रेस को गए हैं। वे (अल्पसंख्यक लोग) भले ही प्रधानमंत्री मोदी द्वारा दिए गए घरों में रह रहे हों, मोदी द्वारा दी गई बिजली और अन्य सुविधाओं का लाभ उठा रहे हों, लेकिन जब वे वोट देने जाते हैं तो वे कॉन्ग्रेस को वोट देते हैं।”
उन्होंने कहा कि बांग्लादेशी मूल के अल्पसंख्यक कॉन्ग्रेस को वोट देगा, क्योंकि वे अगले 10 वर्षों में राज्य पर नियंत्रण करना चाहते हैं। सीएम सरमा ने आरोप लगाया कि जब आचार संहिता लागू होने के कारण भाजपा सरकार सक्रिय नहीं थी तो इस समुदाय के सदस्यों ने बारपेटा के लखीमपुर गाँव में एक पुलिस स्टेशन पर हमला किया और कोकराझार में भूमि पर अतिक्रमण करने की कोशिश की।
असम के मुख्यमंत्री ने कहा, “जब राज्य में भाजपा की सरकार नहीं होगी तो इस तरह के कितने हमले होंगे, इसकी कल्पना की जा सकती है।” भाजपा नेता ने कहा, “इस बार हमें 47 प्रतिशत वोट मिले हैं। हमारा लक्ष्य 2026 के राज्य चुनावों में 50 प्रतिशत वोट हासिल करना है।”
मुख्यमंत्री ने कहा कि भाजपा और उसके सहयोगियों ने इस लोकसभा चुनाव में 126 विधानसभा क्षेत्रों में से 92 पर जीत हासिल की है, जो राज्य में किसी भी सत्तारूढ़ गठबंधन के लिए अब तक की सबसे बड़ी जीत है। उन्होंने यह भी कहा। कि भाजपा राष्ट्र निर्माण की राजनीति करती है और सभी भागों के विकास के लिए काम करती रहेगी, भले ही उसके उम्मीदवार उन क्षेत्रों से जीते हों या नहीं।
पश्चिम बंगाल पुलिस ने मोहम्मद हबीबुल्लाह नामक आतंकवादी को गिरफ्तार किया है। बर्धमान जिला स्थित मीरपारा से ये गिरफ़्तारी की गई है। शनिवार (22 जून, 2024) की शाम को अंजाम दी गई छापेमारी में STF को ये सफलता मिली। एक प्रतिबंधित बांग्लादेशी आतंकी संगठन के संबंध में मिली गुप्त सूचना के आधार पर ये कार्रवाई की गई। मोहम्मद हबीबुल्लाह बर्धमान के ही एक कॉलेज में कम्प्यूटर साइंस एन्ड इंजीनियरिंग की पढ़ाई करता है।
साथ ही अंसार-अल-इस्लाम (बांग्लादेश) नामक संगठन के साथ उसके संबंध सामने आए हैं। इसे अंसारुल्लाह बांग्ला टीम के रूप में भी जाना जाता है। स्पशेल टास्क फोर्स इस मामले में UAPA (गैर-कानूनी गतिविधि रोकथाम अधिनियम) के तहत काम कर रही है। उसके लैपटॉप, मोबाइल फोन व अन्य उपकरणों को जब्त कर लिया गया है। वो पश्चिम बंगाल में बांग्लादेशी आतंकी संगठन के मॉड्यूल के लिए काम कर रहा था। उसे काँकसा पुलिस थाने में लाया गया।
वहीं पर उससे पूछताछ की गई। आसनसोल-दुर्गापुर पुलिस कमिश्नरेट और STF के अधिकारियों ने उससे पूछताछ की। आगे की जाँच के लिए उसे कोलकाता भेजा जाएगा। पानागढ़ क्षेत्र से पश्चिम बंगाल पुलिस ने 5 अन्य लोगों को भी हिरासत में लिया है। उक्त छात्र से पूछताछ के दौरान मिली जानकारी पर काम करते हुए पुलिस ने नाभाघाट क्षेत्र से 5 अन्य संदिग्धों को हिरासत में लिया। शहादत-ए-अल हिकमा के साथ भी इनके संबंध सामने आ रहे हैं। ये सब संगठन अलकायदा के संबद्ध हैं।
Watch: The West Bengal Special Task Force arrested Mohammad Habibullah in West Burdwan's Kanksa area, suspecting his affiliation with the militant group Shahadat, which is linked to Ansar-al-Islam and potentially Al-Qaeda. Shahadat reportedly uses a secret messaging platform… pic.twitter.com/9SgGWTpboy
ये सब मिल कर पश्चिम और पूर्वी बर्धमान जिलों के युवाओं को आतंकी संगठनों में भर्ती कर रहे थे। इनके साथ और कौन-कौन संपर्क में था, इसका पता लगाया जा रहा है। मोहम्मद हबीबुल्लाह के पास से एक डायरी और कुछ दस्तावेज भी मिले हैं। इसी तरह 2016 में भी काँकसा में ISI से जुड़े एक छात्र को गिरफ्तार किया गया था। बता दें कि अलकायदा कश्मीर से लेकर अन्य इलाकों में भी भारत में अपने पाँव फैलाना चाहता है और कई साल से इस कोशिश में लगा है।
केंद्र सरकार ने नीट-यूजी परीक्षा विवाद को देकते हुए मामले की जाँच सीबीआई को सौंप दी। शनिवार (22 जून 2024) को इस बारे में फैसला लिया गया। केंद्रीय शिक्षा मंत्रालय की ओर से बताया गया कि विवाद की समीक्षा के बाद मंत्रालय ने मामले की व्यापक जाँच के लिए इसे सीबीआई को सौंपने का फैसला किया है।
प्रेस विज्ञप्ति में कहा गया है कि NEET-UG के संबंध में कथित अनियमितताओं/धोखाधड़ी/नकल के कुछ मामले सामने आए हैं। इसलिए परीक्षा प्रक्रिया के संचालन में पारदर्शिता के लिए सीबीआई जाँच का आदेश दिया गया है।
Ministry of Education entrusts the matter of alleged irregularities in NEET (UG) Examination 2024 to CBI for the comprehensive investigation. pic.twitter.com/KO95a5a8nD
— Ministry of Education (@EduMinOfIndia) June 22, 2024
बता दें कि केंद्र सरकार ने सार्वजनिक परीक्षाओं में अनुचित साधनों के इस्तेमाल को रोकने और उससे जुड़े या उससे संबंधित मामलों के लिए प्रावधान करने के लिए सार्वजनिक परीक्षा (अनुचित साधनों की रोकथाम) अधिनियम, 2024 भी लागू किया है। सरकार ने अपने बयान में कहा, “सरकार परीक्षाओं की पवित्रता सुनिश्चित करने और छात्रों के हितों की रक्षा करने के लिए प्रतिबद्ध है। यह दोहराया जाता है कि इसमें शामिल पाए जाने वाले किसी भी व्यक्ति/संगठन के खिलाफ सख्त कार्रवाई की जाएगी।”
इससे पहले, दिन में मंत्रालय ने नीट-यूजी परीक्षा में अनियमितताओं के आरोपों के बीच राष्ट्रीय परीक्षण एजेंसी (एनटीए) के कामकाज से संबंधित मुद्दों की जाँच के लिए एक उच्च स्तरीय विशेषज्ञ समिति का भी गठन किया। मंत्रालय ने कहा कि राष्ट्रीय परीक्षण एजेंसी (एनटीए) के माध्यम से परीक्षाओं का पारदर्शी, सुचारू और निष्पक्ष संचालन सुनिश्चित करने के लिए शिक्षा मंत्रालय के तहत उच्च शिक्षा विभाग ने विशेषज्ञों की एक उच्च स्तरीय समिति का गठन किया है।
समिति परीक्षा प्रक्रिया के तंत्र में सुधार, डेटा सुरक्षा प्रोटोकॉल में सुधार और राष्ट्रीय परीक्षण एजेंसी की संरचना और कार्यप्रणाली पर सिफारिशें करेगी। इसरो के पूर्व अध्यक्ष और आईआईटी कानपुर के बोर्ड ऑफ गवर्नर्स के अध्यक्ष डॉ. के. राधाकृष्णन समिति के अध्यक्ष होंगे। पाँच अन्य विशेषज्ञ समिति के सदस्य होंगे, जबकि मंत्रालय के एक संयुक्त सचिव सदस्य सचिव होंगे।
एक अन्य महत्वपूर्ण निर्णय में सरकार ने पूर्व केंद्रीय सचिव प्रदीप सिंह खरोला को एनटीए का नया महानिदेशक नियुक्त किया है। निवर्तमान महानिदेशक सुबोध कुमार को कार्मिक एवं प्रशिक्षण विभाग में अनिवार्य प्रतीक्षा पर रखा गया है, जो स्पष्ट रूप से दंडात्मक कदम है।
एक अन्य संबंधित घटनाक्रम में, केंद्रीय स्वास्थ्य मंत्रालय ने रविवार, 23 जून को होने वाली NEET-PG परीक्षा को स्थगित कर दिया। उल्लेखनीय है कि NEET-PG, एमबीबीएस ग्रेजुएट द्वारा मास्टर डिग्री में प्रवेश के लिए ली जाने वाली प्रवेश परीक्षा है। नीट-पीजी की परीक्षा नेट नहीं बल्कि नेशनल बोर्ड ऑफ एग्जामिनेशन इन मेडिकल साइंसेज (NBEMS) कराती है। यह एक कंप्यूटर आधारित परीक्षा (CBT) है, जबकि NEET-UG पेन और पेपर OMR आधारित है।
केंद्रीय स्वास्थ्य मंत्रालय ने कहा कि वह NEET-PG के लिए परीक्षा प्रक्रियाओं का व्यापक मूल्यांकन करेगा और नई तिथि की घोषणा की जाएगी। इससे पहले दिन में NBEMS ने आश्वासन दिया था कि परीक्षा सुचारू रूप से आयोजित की जाएगी।
भीषण गर्मी के बीच देश की राजधानी दिल्ली जल संकट से जूझ रही है। देश की राजधानी में रहने वाली जनसंख्या का एक बड़ा हिस्सा चिलचिलाती धूप के बीच पानी के लिए तरस रहा है। दिल्ली के VIP इलाकों में भी पानी के टैंकरों के पीछे-पीछे बच्चे और बूढ़े तक भाग रहे हैं। दिल्ली जल बोर्ड की तरफ से आने वाला पानी गंदा है। दरअसल, यह पूरी अव्यवस्था की स्थिति क्यों है, इसकी पोल अरविन्द केजरीवाल की आम आदमी पार्टी (AAP) सरकार के खुद के दस्तावेज खोलते हैं।
केजरीवाल सरकार द्वारा जनता में रखे गए कागज ही बताते हैं कि बीते 9-10 वर्षों में दिल्ली में पानी की आपूर्ति बढ़ाने पर कोई काम नहीं हुआ है। दिल्ली पानी आपूर्ति पर किए जाने वाले खर्चे भी कमी कर दी गई है। उस पर जितने खर्चे की योजना बन रही है, उसका आधा ही पैसा उसे दिया जा रहा है। इस बीच दिल्ली की जनसंख्या बढ़ती जा रही है।
राजधानी में पानी की माँग भी इन वर्षों में लगभग 30% तक बढ़ गई है, लेकिन धरना-प्रदर्शन वाली सरकार जमीन पर कुछ भी नहीं कर पाई है। अरविन्द केजरीवाल की सरकार के दावों की पोल उन्होंने खुद दिल्ली के आर्थिक सर्वे में खोली है। इस आर्थिक सर्वे में कई चौंकाने वाले खुलासे हैं।
पानी आपूर्ति बढ़ाने पर कोई काम नहीं
दूसरे राज्यों पर अपनी नाकामी का ठीकरा फोड़ने वाले केजरीवाल ने 2015 में स्थायी रूप से सत्ता में आने के बाद से दिल्ली में जल आपूर्ति क्षमता में कोई वृद्धि नहीं की है। इस क्षेत्र में उनका काम एकदम नगण्य है। उनसे पहले सत्ता में रहने वाली शीला दीक्षित के मुकाबले वह कहीं नहीं ठहरते।
दिल्ली को अलग-अलग स्रोतों पानी से मिलता है और इसे ट्रीटमेंट प्लांट में साफ करके भेजा जाता है। दिल्ली सरकार का 2023-24 का आर्थिक सर्वे बताता है कि वर्ष 2006 में दिल्ली में इस पानी साफ करने की क्षमता कुल 650 मिलियन गैलन/दिन थी। यह शीला दीक्षित सरकार के दौरान यह प्रति वर्ष बढ़ रही थी।
वर्ष 2015 तक आते आते यह क्षमता 906 मिलियन गैलन/दिन हो चुकी थी। यानी 2006 से 2013 के बीच दिल्ली में पानी साफ करने की क्षमता में 39% बढ़ोतरी हुई थी। इसके बाद केजरीवाल सत्ता में आ गए और मुफ्त पानी का वादा भी किया। 2015 के बाद से 2024 तक लगातार केजरीवाल लगातार सत्ता में हैं।
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उनके शासनकाल के दौरान दिल्ली की पानी साफ करने की क्षमता में मात्र 40 मिलियन गैलन/दिन की वृद्धि हुई और यह क्षमता 946 मिलियन गैलन/दिन पहुँच पाई। यानी जहाँ 2006-15 के बीच वृद्धि 39% हुई थी तो वहीं 2015-2024 में यह मात्र 4% रह गई। ऊपर दिए गए ग्राफ से यह तुलना आसानी से समझी जा सकती है।
पानी की माँग 9 सालों में 26% बढ़ी
केजरीवाल सरकार की इस शिथिलता का खामियाजा दिल्लीवासियों को भुगतना पड़ रहा है। केजरीवाल सरकार की इस नाकामी के बीच दिल्ली में पानी की माँग प्रति वर्ष बढ़ती जा रही है। दिल्ली में वर्ष 2006 में पानी की माँग 963 मिलियन गैलन/दिन थी, यह 2015 तक बढ़ कर 1020 मिलियन गैलन/दिन हो गई। 2023-24 के लिए दिल्ली की पानी माँग और बढ़ कर 1290 मिलियन गैलन/दिन हो चुकी है।
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ऐसे में साफ़ होता है कि जहाँ 2015 में दिल्ली पानी की रोजाना माँग का 94% पानी साफ करने की क्षमता उसके पास थी तो वहीं 2024 तक आते-आते यह 73% हो चुकी है। यानी दिल्ली वर्तमान में जितना पानी चाहती है, उतना पानी साफ करने की उसके पास क्षमता नहीं है। वर्तमान में दिल्ली की एक चौथाई पानी की माँग पूरे करने के साधन उसके पास नहीं हैं। दिल्ली की केजरीवाल सरकार इसका इलाज करने के बजाय अपने मंत्रियों को धरने पर बिठाने और दूसरे राज्यों पर दोष डालने में लगी हुई है।
सीवर ट्रीटमेंट क्षमता पर भी काम नहीं
केजरीवाल सरकार ने पानी साफ करने की क्षमता बढ़ाने पर तो नहीं ही काम किया, उन्होंने दिल्ली से निकलने वाले सीवरेज को साफ करने पर भी कोई ध्यान नहीं दिया। दिल्ली के सभी सीवर ट्रीटमेंट प्लांट की कुल क्षमता कमोबेश उतनी ही है, जितनी वह 2015 में हुआ करती थी। 2006 में दिल्ली के सभी सीवर ट्रीटमेंट प्लांट की कुल क्षमता 512 मिलियन गैलन/दिन हुआ करती थी। यह 2015 आते-आते 613 मिलियन गैलन/दिन हो चुकी थी। यानी इसमें 6 वर्ष के भीतर लगभग 100 मिलियन गैलन/ दिन की वृद्धि हुई थी।
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दिल्ली सरकार का 2023-24 का आर्थिक सर्वे बताता है कि मार्च 2023 में 632 मिलियन गैलन/दिन की क्षमता के सीवर ट्रीटमेंट प्लांट हैं। यानी 2015 से 2023 के बीच केजरीवाल सरकार ने मात्र 19 मिलियन गैलन/दिन सीवर ट्रीटमेंट क्षमता बढ़ाने का काम किया है जबकि उनकी पूर्ववर्ती सरकार ने 100 मिलियन गैलन/दिन क्षमता बढ़ाई थी।
दिल्ली सीवर से आने वाले पानी की सफाई को लेकर निवेश ना करना दिल्ली को दो तरह से नुकसान पहुँचा रहा है। पहला तो यह है कि गंदा पानी साफ होकर वापस दिल्ली वासियों को नहीं मिल पा रहा, जिससे पानी की कमी में और बढ़त हो रही है। वहीं इस गंदे पानी के साफ पानी के स्रोत में मिलने से और भी समस्या हो रही है। विशेषज्ञ बताते हैं कि यदि लम्बे समय ऐसा नहीं किया जाता तो साफ़ साफ पानी के स्रोतों की क्षमता भी कम हो जाती है।
दिल्ली में पानी के लिए खर्चे में भी कमी कर रही सरकार
दिल्ली की केजरीवाल सरकार जहाँ एक ओर लम्बे चौड़े वादे करती हैं तो वहीं जमीन पर काम करने के दौरान उसके सारे वादे हिरन हो जाते हैं। दिल्ली सरकार के आर्थिक सर्वे ने ही बताया है कि जितना पैसे की योजनाएँ दिल्ली में प्रति वर्ष बनाई जा रही हैं, उतना खर्च नहीं हो रहा। पिछले तीन वर्षों में इसमें भारी गिरावट आई है। आर्थिक सर्वे के अनुसार, 2020-21 के दौरान दिल्ली पानी की कमी को पूरा करने के लिए ₹4004 करोड़ खर्च करने की योजना बनाई गई थी। इसके मुकाबले ₹3584 करोड़ की ही धनराशि जारी की गई।
वर्ष 2021-22 के दौरान ₹2951 करोड़ खर्च की मंजूरी दी गई थी लेकिन इस वर्ष मात्र ₹1892 करोड़ ही जारी किए गए। 2022-23 में तो जितना बजट मंजूर हुआ उसकी आधी धनराशि ही जारी की गई। 2022-23 में दिल्ली में पानी से सम्बन्धित सुविधाओं पर ₹6344 करोड़ के खर्चे की मंजूरी दी गई थी। इसकी तुलना में मात्र ₹3171 करोड़ ही जारी किए गए।
पानी साफ करने की नई क्षमताओं का विकास ना करना, सीवर व्यवस्था को ना बढ़ाना और पानी की आपूर्ति पर खर्च ना करना दिल्ली में वर्तमान जल संकट का बड़ा कारण है। दिल्ली की AAP सरकार इस नाकामी का ठीकरा हरियाणा और हिमाचल प्रदेश पर फोड़ कर बचना चाह रही है। उसके मंत्री केंद्र सरकार को पत्र लिख रहे हैं, आरोप-प्रत्यारोप कर रहे हैं लेकिन जमीन पर काम नहीं कर रहे। मात्र जुबानी जमा खर्च करके ही काम चलाया जा रहा है।