अमृतसर से चौंकाने वाले घटनाक्रम की जानकारी मिल रही है। स्वर्ण मंदिर के नाम से मशहूर श्री दरबार साहिब के परिसर में योग करने वाली एक महिला के खिलाफ शिरोमणि गुरुद्वारा प्रबंधक कमेटी ने शिकायत दर्ज कराई है। अर्चना मकवाना नाम की ये महिला सोशल मीडिया इन्फ्लूएंशर हैं और योग की तस्वीरें उन्होंने सोशल मीडिया पर पोस्ट की थी। उन्होंने 21 जून को अंतर्राष्ट्रीय योग दिवस के मौके पर योग किया था और तस्वीरें सोशल मीडिया पर साझा की थी, जिसके बाद SGPC ने ये कदम उठाया। यही नहीं, योग करने की अनुमति देने वाले तीन सेवादारों के खिलाफ भी शिरोमणि गुरुद्वारा प्रबंधक कमेटी ने एक्शन लिया है।
शिरोमणि गुरुद्वारा प्रबंधक कमेटी ने तीन सेवादारों के खिलाफ कार्रवाई का निर्देश दिया है। इस मामले में शिरोमणि गुरुद्वारा प्रबंधक कमेटी के अध्यक्ष हरजिंदर सिंह धामी ने कहा, “सचखंड श्री हरमंदिर साहिब में गुरुमाटी के खिलाफ काम करने की इजाजत किसी को नहीं दी जा सकती, लेकिन कुछ लोग जान बूझकर घृणित कामों द्वारा इस पवित्र स्थान की पवित्रता और ऐतिहासिक महत्ता को चोट पहुँचा रहे हैं।”
धामी ने कहा कि अर्चना मकवाना नामक महिला के कृत्य से सिखों की भावनाएँ आहत हुई हैं, इसलिए उसके खिलाफ शिकायत दर्ज कराई गई है। उन्होंने कहा कि महिला ने पहले ही अपने कृत्य के लिए माफी माँग ली है, और लोगों को ऐसा काम नहीं करना चाहिए जिसके लिए बाद में माफी माँगनी पड़े।
— Shiromani Gurdwara Parbandhak Committee (@SGPCAmritsar) June 22, 2024
इस मामले पर श्री दरबार साहिब के जनरल मैनेजर भगवंत सिंह धंगेरा ने बताया कि मकवाना की योग करते हुए तस्वीरें सोशल मीडिया पर आई थीं, जिसकी पुष्टि के लिए सीसीटीवी कैमरों की जाँच की गई। फुटेज का विश्लेषण करने पर पता चला कि महिला ने योग की मुद्रा में केवल 5 सेकंड के लिए ही पोज दिया था। इस मामले में तीन सेवादारों – गगनपाल सिंह, हरजिंदर सिंह और पलविंदर सिंह – के खिलाफ कर्तव्य में लापरवाही के आरोप में कार्रवाई शुरू की गई है।
न्यूज़ 18 की रिपोर्ट के अनुसार, इनमें से दो सेवादारों को पहले ही निलंबित कर दिया गया है, और एक को अस्थायी रूप से निलंबित कर दिया गया है और उसे गुरुद्वारा गढ़ी साहिब गुरदास नंगल में ट्रांसफर कर दिया गया है। भगवंत सिंह धंगेरा ने कहा कि महिला के व्यवहार से सिखों की भावनाओं को ठेस पहुँची है, जिसके चलते लड़की के खिलाफ पुलिस में शिकायत दर्ज कराई गई है। वहीं, अर्चना मकवाना ने अपने इंस्टाग्राम अकाउंट से ये तस्वीरें और वीडियो पहले ही हटा दिए हैं।
उत्तर प्रदेश के अलीगढ़ स्थित गाँधी पार्क इलाके में मंगलवार (18 जून) को मोहम्मद फरीद उर्फ़ औरंगज़ेब की मौत के बाद 10 नामजद लोगों के खिलाफ FIR दर्ज की गई थी। इसमें से 6 आरोपित गिरफ्तार कर लिए गए हैं। अधिकतर आरोपित मामू-भांजा मार्किट के कारोबारी हैं।
मृतक को चोर और अपने परिजनों को बेकसूर बताते हुए आरोपितों के परिजनों ने अपना कारोबार समेटने और इलाके से पलायन करने के एलान दिए हैं। ऑपइंडिया से बात करते हुए उन्होंने खुद को पुलिस और चोर-डकैतों की तरफ से पड़ रही दोहरी मार का शिकार बताया है।
यहीं लिया जन्म, लेकिन अब बुढ़ापे में चला जाऊँगा कहीं और
औरंगज़ेब मौत मामले में जेल भेजे गए मोहित मित्तल के 76 वर्षीय पिता ने ऑपइंडिया से बात की। उन्होंने कहा कि औरंगजेब चोर था। इस बात को सुनने को कोई तैयार नहीं है। कहा जा रहा है कि घटना के दिन औरंगजेब ने मोहित के ही घर में चोरी की थी। मोहित के पिता का कहना है कि पिछले कुछ वर्षों में इलाके में मुस्लिमों की तादाद में भारी इजाफा हुआ है।
उनका यह भी आरोप है कि पुलिस ने उसके पक्ष की नहीं सुनी। मोहित के पिता अपने बेटे से जेल में मिलकर आए थे। वो काफी भावुक थे और हमसे बात करते हुए रो पड़े। उन्होंने कहा कि भले ही 76 साल पहले उनका जन्म मामू-भांजा इलाके में हुआ, लेकिन अब वो कहीं और बसने का प्लान बना रहे हैं। इसकी वजह उन्होंने अगली पीढ़ी को होने वाली परेशानी बताई।
लेने वाली थी दुकान, पर अब समेट लेंगे कारोबार
इस मामले में अंकित वार्ष्णेय को भी पुलिस ने गिरफ्तार किया है। अंकित पर भी औरंगज़ेब की पिटाई और हत्या का आरोप लगाया गया है। अंकित की 65 वर्षीया दादी प्रेमा देवी ने ऑपइंडिया से बात की। प्रेमा देवी का दावा है कि लोगों ने औरंगजेब को जीवित हालत में पुलिस सौंपा था, लेकिन बाद में उसे कैसे और क्या हो गया ये संदिग्ध है।
प्रेमा देवी मृतक को चोर नहीं, बल्कि डकैत बता रही थीं। उनका यह भी दावा है कि 4-5 लोग मिलकर मित्तल परिवार के घर में घुस गए थे। उन्होंने लोगों से सवाल किया कि अगर कोई घर में घुसकर लूटपाट कर रहा हो और बहन-बेटियों को छेड़ रहा हो तो क्या उसे माला पहनाई जाए? उन्होंने कहा कि इलाके में चोरी की घटनाओं से कारोबार बहुत प्रभावित हुआ है।
खुद प्रेमा देवी का दावा है कि वह मामू-भांजे इलाके में 2 दुकान खरीद कर कारोबार बढ़ाने की तैयारी कर रही थीं, लेकिन अब वो ऐसा नहीं करेंगी। प्रेमा देवी अपने परिवार को लेकर मामू-भांजा इलाके से कहीं दूर बसने की तैयारी कर रही हैं। उन्होंने कहा कि न्याय के हिसाब से यह हत्या नहीं, बल्कि गैर-इरादतन हत्या की घटना है। कार्रवाई भी इन्हीं धाराओं में चाहिए।
हम पर रहम करे सरकार
औरंगजेब मामले में राहुल मित्तल भी नामजद हैं। राहुल मित्तल स्टाम्प पेपर आदि बेचकर अपने परिवार का गुजारा चलाते हैं। घर में उनकी पत्नी और वयोवृद्ध पिता हैं। राहुल मित्तल के पिता की दोनों आँखें खराब हैं। उनका कहना है कि उनका बेटा बेगुनाह है। उन्होंने दावा किया कि घटना के दिन शोर-शराबा सुनकर उन्हें महसूस हुआ था कि उनके घर में कुछ लोग जबरन घुसने की कोशिश कर रहे थे।
अब कोई पड़ोसी मार भी डाला जाए तो मदद करने में लगेगा डर
औरंगज़ेब की हत्या में नामजद आरोपितों में 60 वर्षीय कमल बंसल भी शामिल हैं। कमल को पुलिस ने गिरफ्तार कर लिया है। कमल की पत्नी और बड़े बेटे पुश्किन बंसल ने ऑपइंडिया से बात की। पुश्किन बंसल का दावा है कि उनके पिता ने पूरे जीवन भर बिना जाति-धर्म देखे सामाजिक कार्यकर्ता के तौर पर लोगों की मदद की।
उनका दावा है कि जेल भेजे गए 60 वर्षीय पिता पथरी के अलावा ब्लड प्रेशर व कई अन्य बीमारियों से पीड़ित हैं। इनका परिवार किराने की एक छोटी-सी दुकान से पल रहा था, जो कमल की गिरफ्तारी के बाद से बंद है। कमल के बेटे ने कहा कि चोर-चोर की आवाज सुनकर उनके पिता ही नहीं, बल्कि मोहल्ले के तमाम लोग घटनास्थल पर गए थे।
पुश्किन बंसल का कहना है कि वे मुसीबत में फँसे किसी व्यक्ति की मदद करने की सोच लेकर वे बाहर गए थे। उन्होंने कहा कि औरंगजेब की घटना से अब उनके मन-मस्तिष्क में इतना डर बैठ गया है कि अगर पड़ोस में किसी व्यक्ति को कोई मार भी डाले तो शायद ही वो मदद के लिए बाहर निकल पाएँ। कमल बंसल का छोटा बेटा जन्मजात दिव्यांग है। वह चलने-फिरने में असमर्थ है।
फ़िलहाल कमल के जेल जाने के बाद परिजनों ने दवाओं तो दूर जमानत आदि के लिए भी पैसे जुटाने में खुद को असमर्थ बताया है। जब हमने पूछा कि कमल बंसल के जेल में रहते हुए घर कैसे चलेगा तो उनकी पत्नी और बेटे ने घर में रखी भगवान कृष्ण की मूर्ति की तरफ इशारा किया और कहा, “तब तक घर यही चलाएँगे।”
नीट-यूजी और यूजीसी-नेट की परीक्षाओं में पेपर लीक से जुड़े मामले में लगातार गिरफ्तारियाँ हो रही हैं। बिहार पुलिस ने बिहार और झारखंड से कुल 6 लोगों को गिरफ्तार किया है। इस तरह से अकेले बिहार और झारखंड से गिरफ्तारियों की संख्या 19 पहुँच गई है। वहीं, गुजरात के गोधरा में 30 छात्रों के परिजनों को नोटिस भेजा जा चुका है और उनमें से कुछ से पूछताछ हो रही है। इसी मामले में ग्रेटर नोएडा नीमका गाँव का रहने वाला रवि अत्रि भी पकड़ा गया है, तो उत्तर प्रदेश के कुशीनगर जिले से भी सीबीआई ने एक गिरफ्तारी की है। पडरौना से पकड़े गए युवक का नाम निखिल है। बताया जा रहा है कि उसने ही यूजीपी-नेट के पेपर को टेलीग्राम पर डाला था।
एक्शन में बिहार की आर्थिक अपराध ईकाई, 6 नई गिरफ्तारियाँ
मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक, नीट-यूजी पेपर लीक मामले में बिहार पुलिस की आर्थिक अपराध ईकाई ने पेपर लीक करने के बाद उसका प्रिंट निकलवाकर अभ्यर्थियों तक पहुंचने वाले आरोपी पिंटू को झारखंड के देवघर से गिरफ्तार कर लिया है। पिंटू बिहार के नालंदा का रहने वाला है। उसने चिंटू के कहने पर प्रिंट आउट निकाला था। पेपर लीक सरगना संजीव मुखिया के नेटवर्क में पिंटू और चिंटू शामिल हैं। चिंटू को भी देवघर से गिरफ्तार किया गया है।
पुलिस के मुताबिक दोनों को खेमनीचक वाले सेफ हाउस के बारे में जानकारी थी। बताया जा रहा है कि संजीव मुखिया को किसी प्रोफेसर ने सबसे पहले प्रश्न पत्र भेजा, जिसे चिंटू और पिंटू ने मिलकर अभ्यर्थियों तक पहुँचाया। ये पेपर सॉल्वर के जरिए सवालों के जवाब हल कर 5 मई की सुबह अभ्यर्थियों को दिया गया। इसके अलावा काजू, अजीत और राजीव की भी गिरफ्तारी देवघर से की गई है। पुलिस इस मामले में अब तक कुल 19 लोगों को गिरफ्तार कर चुकी है।
इस मामले में बिहार पुलिस पहले से 13 आरोपितों को गिरफ्तार कर चुकी है, जिसमें सिकंदर यादवेंदु (सेटर), बिट्टू कुमार (ड्राइवर), आयुष कुमार (कैंडिडेट), अखिलेश कुमार (आयुष के पिता), नीतीश कुमार (सेटर), अमित आनंद (सेटर), रोशन कुमार (सेटर अमित का सहयोगी), अभिषेक कुमार (कैंडिडेट), अनुराग यादव (कैंडिडेट), अवधेश कुमार (अभिषेक के पिता), रीना कुमारी (अनुराग यादव की माँ), आशुतोष कुमार (सेटर अमित का सहयोगी), शिवनंदन कुमार (कैंडिडेट) के नाम शामिल हैं।
नीट-यूजी लीक केस में सॉल्वर रवि अत्रि गिरफ्तार
एनडीटीवी की रिपोर्ट के मुताबिक, नीट पेपर लीक मामले के कथित मास्टरमाइंड रवि अत्रि को उत्तर प्रदेश स्पेशल टास्क फोर्स (Uttar Pradesh Special Task Force) ने गिरफ्तार किया है। ग्रेटर नोएडा के नीमका गाँव का रहने वाला अत्रि पहले भी पकड़ा जा चुका है। 2007 में अत्रि के परिवार ने उसे मेडिकल प्रवेश परीक्षा की तैयारी के लिए कोटा भेजा था। अत्रि ने 2012 में परीक्षा पास कर ली और पीजीआई रोहतक में दाखिला ले लिया। हालाँकि चौथे साल में अत्रि परीक्षा में शामिल नहीं हुआ और तब से वो पेपर सॉल्वर गैंग से जुड़ गया था।
यूजीसी-नेट मामले में सीबीआई ने युवक को पकड़ा
इस बीच, UGC NET 2024 परीक्षा गडबड़ी मामले में दिल्ली की सीबीआई टीम ने उत्तर प्रदेश के कुशीनगर से एक युवक को पकड़ा गया है। पकड़े गए युवक का नाम निखिल बताया जा रहा है, जिससे सीबीआई टीम पूछताछ कर रही है। जानकारी के अनुसार, निखिल ने भी यूजीसी नेट की परीक्षा दी थी। वह कोटा में रहकर तैयारी कर रहा था और करीब एक महीना पहले निखिल कुशीनगर सिधुआ में आकर रह रहा था। निखिल ने यूजीसी नेट पेपर के कुछ अंश टेलीग्राम पर पोस्ट किए थे।
गोधरा में 30 छात्रों के परिजनों को नोटिस, 5 पहले ही गिरफ्तार
इस बीच, गुजरात के गोधरा में एक परीक्षा केंद्र पर शिक्षकों द्वारा राष्ट्रीय पात्रता प्रवेश परीक्षा-स्नातक (नीट-यूजी) की उत्तर पुस्तिकाएँ भरने वाले लगभग 30 छात्रों के माता-पिता उन्हें जारी किए गए प्रारंभिक सम्मन में शामिल नहीं हुए हैं, उन्हें फिर से समन जारी किया गया है। एक अधिकारी ने कहा कि जाँच के सिलसिले में उन्हें नए समन जारी किए जाएँगे। इस मामले में पाँच लोगों को पहले ही गिरफ्तार किया जा चुका है। पंचमहल जिले के गोधरा में जय जलाराम स्कूल के शिक्षकों द्वारा भरी जाने वाली उत्तर पुस्तिकाओं की सूची में छात्रों के नाम थे।
बता दें कि नीट-यूजी की परीक्षा को लेकर विवाद उस वक्त शुरू हुआ, जब 67 छात्रों ने 720 में से 720 अंक हासिल किए। नेशनल टेस्टिंग एजेंसी (National Testing Agency) ने इसके लिए दोषपूर्ण प्रश्नों और कुछ केंद्रों पर पेपर वितरण में देरी के चलते ग्रेस अंक दिए जाने को जिम्मेदार ठहराया। हालाँकि बिहार पुलिस की जाँच में पता चला कि परीक्षा के पेपर को कुछ चुनिंदा परीक्षार्थियों को लीक कर दिया गया था। ये मामला अभी सुप्रीम कोर्ट में है।
मध्य प्रदेश के सिवनी में 19 जून 2024 को गोवंश के दर्जनों कटे शव मिले थे। प्रशासन ने मवेशी डॉक्टर को बुलाकर शवों का परीक्षण करवाने के बाद शवों कों दफना दिया था। इनकी पोस्टमॉर्टम से पता चला कि इनका गला 17 और 18 जून के बीच रेता गया। पुलिस ने इस मामले में 7 लोगों को हिरासत में लिया है। वहीं, नागपुर के तीन आरोपितों को चिह्नित किया है।
जाँच में पता चला है कि मध्य प्रदेश में ऑपरेट करने वाले गोवंश तस्करों को हैदराबाद और नागपुर से फंडिंग हो रही है। सिवनी में पकड़े गए गो तस्करों ने पुलिस पूछताछ में यही खुलासा किया है। नागपुर के तीन तस्करों के संपर्क में थे। इन्होंने गोवंश को पशु बाजार से खरीदा था और इन पशुओं को नागपुर से होते हुए हैदराबाद ले जाना था।
दैनिक भास्कर की रिपोर्ट के मुताबिक, हिरासत में लिए गए लोगों में शादाब, वाहिद, इरफान, रामदास उइके, संतोष शामिल हैं। रामदास व संतोष पहले भी पशु तस्करी में जेल जा चुके हैं। वाहिद धनौरा थाना क्षेत्र के ग्वारी गाँव का रहने वाला है। शादाब उसका रिश्तेदार है। दोनों पर पशु क्रूरता अधिनियम का एक-एक मामला पहले से ही दर्ज है।
सिवनी के एसपी राकेश सिंह ने बताया कि मृत मिले गोवंश में से दो के कान में टैग लगे थे। अधिकांश पशुओं के कान काटकर टैग गायब कर दिए गए थे। ये टैग पशु बाजार में मवेशियों की खरीदी-बिक्री के दौरान लगाए जाते हैं। इसी टैग के सहारे पुलिस आरोपितों तक पहुँची है। एसपी राकेश सिंह के मुताबिक, हिरासत में लिए गए तस्करों को नागपुर व हैदराबाद के तस्करों से फंडिंग की गई थी।
दरअसल, पुलिस की सख्ती के कारण ये गो तस्करों ने इनके गले काटकर शवों को फेंक दिए। पुलिस और ग्रामीणों को ऐसे 54 गोवंश मिले थे। एसपी राकेश सिंह का कहना है कि गोवंश का गला काटकर तस्कर सांप्रदायिक सौहार्द्र बिगाड़ना चाहते थे, ताकि पुलिस की सख्ती ढीली पड़ जाए और दूसरे रास्ते से अन्य गोवंशों को ले जाने का मौका मिल जाए।
पुलिस अधीक्षक का कहना है कि गोवंश का गला काटने में 12 से 15 लोग शामिल हैं। अभी सात लोगों को हिरासत में लिया गया है। वहीं, तीन आरोपित नागपुर के रहने वाले हैं। उनकी पहचान कर ली गई है। एसपी राकेश सिंह का कहना है कि इन तीनों आरोपितों की गिरफ्तारी के बाद उनके नामों का खुलासा किया जाएगा।
पुलिस की पूछताछ में आरोपितों ने बताया कि कि मवेशियों को आगे खरीदने वालों ने ही उन्हें गला काटकर फेंकने का निर्देश दिया था। दरअसल, पुलिस ने पिछले 10 सालों में पशु तस्करी रूट को ट्रैक कर संवेदनशील जिलों को चिह्नित किया है। इनमें सिवनी, बालाघाट व बैतूल सहित बड़वानी, खरगोन, बुरहानपुर, उज्जैन, रतलाम, नीमच जिले शामिल हैं।
दरअसल, 19 जून को सिवनी जिले के पिंडरई के पास वैनगंगा नदी में 19 गोवंश के शव मिले। वहीं, धूमा क्षेत्र में ऐसे 32 शव मिले। इन शवों के गर्दन कटे हुए थे। शवों का कुछ हिस्सा नजदीकी जंगलों में भी फेंका गया है। पुलिस ने गाँव के लोगों की मदद से गोवंश के शवों को वैनगंगा नदी से बाहर निकाला और उन्हें दफनाया।
जुलाई 2023 में भी सिवनी जिले में 10 गायों का सिर मिला था। उन गायों के सिर को काटकर उनके सिर को सड़क के किनारे और खेतों में फेंक दिए गए थे। वहीं, एक सिर गाँव के कुएँ में भी मिला था। हिंदू संगठनों का कहना था कि दंगे कराने की साजिश के तहत यह सब किया गया है। वहीं, इस घटना का संबंध बकरीद से होने की बात भी कही जा रही थी।
NEET-UG और UGC-NET जैसी कई प्रतियोगी परीक्षाओं को लेकर विवादों के बीच, केंद्रीय शिक्षा मंत्रालय ने 22 जून को परीक्षाओं के पारदर्शी, सुचारू और निष्पक्ष संचालन को सुनिश्चित करने के लिए विशेषज्ञों की एक उच्च स्तरीय समिति का गठन किया। यह केंद्रीय शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान द्वारा NEET-UG परीक्षा में अनियमितताओं के आरोपों के बीच राष्ट्रीय परीक्षण एजेंसी (NTA) के कामकाज से संबंधित मुद्दों की जाँच के लिए एक उच्च स्तरीय समिति के गठन की घोषणा के दो दिन बाद आया है।
मंत्रालय की ओर से जारी एक प्रेस विज्ञप्ति में कहा गया है कि राष्ट्रीय परीक्षण एजेंसी (एनटीए) के माध्यम से परीक्षाओं का पारदर्शी, सुचारू और निष्पक्ष संचालन सुनिश्चित करने के लिए शिक्षा मंत्रालय के तहत उच्च शिक्षा विभाग ने विशेषज्ञों की एक उच्च स्तरीय समिति का गठन किया है। समिति परीक्षा प्रक्रिया के तंत्र में सुधार, डेटा सुरक्षा प्रोटोकॉल में सुधार और राष्ट्रीय परीक्षण एजेंसी की संरचना और कार्यप्रणाली पर सिफारिशें करेगी।
इसरो के पूर्व अध्यक्ष और आईआईटी कानपुर के बोर्ड ऑफ गवर्नर्स के अध्यक्ष डॉ. के. राधाकृष्णन इस समिति के अध्यक्ष होंगे। पाँच अन्य विशेषज्ञ समिति के सदस्य होंगे, जबकि मंत्रालय के एक संयुक्त सचिव इसके सदस्य सचिव होंगे।
5-पंकज बंसल, सह-संस्थापक, पीपल स्ट्रॉन्ग और बोर्ड सदस्य, कर्मयोगी भारत – सदस्य
6-प्रो. आदित्य मित्तल, डीन छात्र मामले, आईआईटी दिल्ली – सदस्य
7-गोविंद जायसवाल, संयुक्त सचिव, शिक्षा मंत्रालय, भारत सरकार – सदस्य सचिव
ये समिति इन विषयों पर काम करेगी-
(i) परीक्षा प्रक्रिया के तंत्र में सुधार
(क) संपूर्ण परीक्षा प्रक्रिया का विश्लेषण करना तथा प्रणाली की दक्षता में सुधार लाने और किसी भी संभावित उल्लंघन को रोकने के लिए उपाय सुझाना।
(ख) एनटीए की मानक संचालन प्रक्रियाओं (एसओपी)/प्रोटोकॉल की गहन समीक्षा करना तथा हर स्तर पर अनुपालन सुनिश्चित करने के लिए निगरानी तंत्र के साथ-साथ इन प्रक्रियाओं/प्रोटोकॉल को मजबूत बनाने के उपाय सुझाना।
(ii) डेटा सुरक्षा प्रोटोकॉल में सुधार
(क) एनटीए की मौजूदा डेटा सुरक्षा प्रक्रियाओं और प्रोटोकॉल का मूल्यांकन करना और इसके सुधार के उपायों की सिफारिश करना।
(ख) विभिन्न परीक्षाओं के लिए पेपर-सेटिंग और अन्य प्रक्रियाओं से संबंधित मौजूदा सुरक्षा प्रोटोकॉल की जांच करना और सिस्टम की मजबूती बढ़ाने के लिए सिफारिशें करना।
(iii) राष्ट्रीय परीक्षण एजेंसी की संरचना और कार्यप्रणाली
(क) बिंदु (i) और (ii) के तहत दी गई सिफारिशों के कार्यान्वयन के लिए राष्ट्रीय परीक्षण एजेंसी (एनटीए) की संगठनात्मक संरचना और कार्यप्रणाली पर सिफारिशें करना और हर स्तर पर पदाधिकारियों की भूमिकाओं और जिम्मेदारियों को स्पष्ट रूप से परिभाषित करना।
(ख) एनटीए के वर्तमान शिकायत निवारण तंत्र का आकलन करना, सुधार के क्षेत्रों की पहचान करना और इसकी दक्षता बढ़ाने के लिए सिफारिशें करना।
समिति को इस आदेश के जारी होने की तिथि से दो महीने के भीतर मंत्रालय को अपनी रिपोर्ट सौंपने को कहा गया है। प्रेस विज्ञप्ति में कहा गया है कि समिति अपनी सहायता के लिए किसी भी विषय विशेषज्ञ को शामिल कर सकती है।
राष्ट्रीय जाँच एजेंसी (NIA) कोर्ट ने इलाहाबाद हाई कोर्ट से जज रवि कुमार दिवाकर की सुरक्षा बढ़ाने का अनुरोध किया है। दिवाकर ने साल 2022 में विवादित ज्ञानवापी ढाँचे का वीडियोग्राफी सर्वेक्षण करने की अनुमति दी थी। उसके बाद से उन्हें और उनके परिवार के सदस्यों को जान से मारने की धमकियाँ मिल रही हैं।
एनआईए कोर्ट के विशेष जज विवेकानंद शरण त्रिपाठी ने इलाहाबाद हाईकोर्ट के रजिस्ट्रार जनरल को पत्र लिखकर जज दिवाकर के लिए और सुरक्षा की माँग की है। यह घटनाक्रम अतिरिक्त सत्र न्यायाधीश दिवाकर को धमकाने के आरोप में अदनान खान नामक आरोपित के खिलाफ प्राथमिकी दर्ज होने के तीन सप्ताह बाद हुआ है।
अपने पत्र में विशेष न्यायाधीश त्रिपाठी ने कहा, “जाँच से पता चला है कि इस्लामी कट्टरपंथी न्यायाधीश दिवाकर की हत्या की साजिश रच रहे हैं… यह एक संवेदनशील मुद्दा है। अगर अदनान खान की गतिविधियों पर लगाम नहीं लगाई गई तो इससे कोई अप्रिय घटना हो सकती है।”
गौरतलब है कि जज दिवाकर अब बरेली में एडिशनल सेशन जज हैं। इससे पहले उन्होंने यूपी के मुख्य सचिव को एक पत्र लिखकर अपनी मौजूदा सुरक्षा को लेकर चिंता जताई थी। पत्र में उन्होंने कहा था कि इस्लामिक कट्टरपंथी अल्पसंख्यक समुदाय का ब्रेनवॉश कर रहे हैं और उन्हें काफिर बताकर उनकी जान को खतरा पैदा कर रहे हैं।
पत्र में कहा गया है, “13 मई 2022 को इलाहाबाद हाईकोर्ट के आदेश के बाद मुझे और मेरे परिवार को सुरक्षा मुहैया कराई गई थी, लेकिन मौजूदा स्तर अपर्याप्त है। इस्लामी कट्टरपंथी अल्पसंख्यक समुदाय के सदस्यों का ब्रेनवॉश कर रहे हैं और मुझे काफिर बताकर भड़का रहे हैं ताकि मुझे मरवा सकें। इसलिए मुझे और मेरे परिवार को पर्याप्त सुरक्षा मुहैया कराने के लिए यह पत्र भेजा जा रहा है।”
इसके अलावा, 25 अप्रैल 2024 को जज दिवाकर ने बरेली पुलिस को बताया कि उन्हें अंतरराष्ट्रीय नंबरों से दुर्भावनापूर्ण कॉल और जान से मारने की धमकियाँ मिल रही हैं। उन्होंने अपने खिलाफ़ मिल रही धमकियों की जाँच की भी माँग की थी। इससे पहले 2022 में इलाहाबाद हाई कोर्ट ने उनके और उनके परिवार के लिए वाई-श्रेणी की सुरक्षा का आदेश दिया था, जो अंततः एक्स-श्रेणी में बदल गया।
टाइम्स ऑफ इंडिया से बात करते हुए उनके सहयोगी ने बताया कि उनके मौजूदा सुरक्षा दल में दो ऐसे कर्मी शामिल हैं, जो संभावित आतंकवादी हमले के लिए पर्याप्त रूप से सुसज्जित नहीं हैं। सहयोगी ने कहा, “आतंकवादी हमले की स्थिति में उनके पास पर्याप्त आधुनिक हथियार भी नहीं हैं।”
जून 2022 से जज दिवाकर के खिलाफ धमकियाँ जारी हैं। वाराणसी पुलिस ने इस्लामिक आगाज़ मूवमेंट के अध्यक्ष के एक धमकी भरे पत्र की जाँच की थी। धमकी भरे पत्र में उनके परिवार और प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के बारे में आपत्तिजनक टिप्पणियाँ थीं, जिसके कारण उनकी सुरक्षा बढ़ा दी गई थी।
साल 2022 में जज दिवाकर ने विवादित ज्ञानवापी ढाँचे का वीडियोग्राफिक सर्वेक्षण करने की अनुमति दी थी, ताकि यह पता लगाया जा सके कि इसके नीचे कोई मंदिर है या नहीं। इसके बाद उन्होंने अपनी सुरक्षा के बारे में चिंता व्यक्त की थी। उन्होंने कहा, “डर इतना है कि मेरा परिवार हमेशा मेरी सुरक्षा को लेकर चिंतित रहता है और मैं उनकी सुरक्षा को लेकर चिंतित रहता हूँ।”
इस बीच, पिछले साल लखनऊ में जज के आवास के बाहर प्रतिबंधित पॉपुलर फ्रंट ऑफ इंडिया (पीएफआई) के एक सदस्य को पकड़ा गया था। इसके बाद शाहजहाँपुर के एसएसपी अशोक कुमार मीणा ने जस्टिस दिवाकर के भाई के आवास पर एक गनर तैनात कर दिया, जो अतिरिक्त जिला जज के पद पर कार्यरत हैं। हालाँकि, लोकसभा चुनाव के कारण सुरक्षा कवर हटा लिया गया था।
इस महीने की शुरुआत में 3 जून को यूपी एटीएस के जाँच अधिकारी ने अदनान खान नामक एक आरोपित के खिलाफ आईपीसी की कई धाराओं और गैरकानूनी गतिविधि रोकथाम अधिनियम (UAPA) के तहत एफआईआर दर्ज की। अदनान ने कथित तौर पर अपने इंस्टाग्राम अकाउंट का इस्तेमाल जज दिवाकर के खिलाफ धमकियाँ देने और उनके खिलाफ हिंसा को बढ़ावा देने के लिए किया।
एटीएस अधिकारी प्रभाकर ओझा की ओर से दर्ज कराई गई एफआईआर में कहा गया है, “अदनान खान एक इंस्टाग्राम अकाउंट चलाता है, जिसके जरिए वाराणसी में ज्ञानवापी मस्जिद मामले की सुनवाई कर रहे जज रवि कुमार दिवाकर को धमकी दी गई है।”
आईसीसी टी-20 क्रिकेट विश्वकप का खुमार पूरी दुनिया पर छाया हुआ है। भारतीय क्रिकेट टीम भी पहला पड़ाव पार कर सुपर 8 में पहुँच गई है। सुपर 8 का पहला मैच भारतीय टीम ने अफगानिस्तान से जीता और आज (22 जून 2024) भारत का मुकाबला बाँग्लादेश की टीम से है। सेमीफाइनल में जाने के लिए ये मैच काफी अहम है, क्योंकि अभी भारतीय टीम को ऑस्ट्रेलिया जैसी टीम से खेलना है। ऐसे में भारतीय टीम बाँग्लादेश के खिलाफ मुकाबले को जीतने के लिए पूरी ताकत लगाना चाहेगी। लेकिन क्या वो सही कॉम्बिनेशन के साथ मैदान पर उतर रही है? ये एक बड़ा सवाल है। देखा जाए तो अभी तक भारतीय टीम को गेंदबाजों ने जिताया है। यही नहीं, जिन्हें इन बार विश्वकप में जीत का सबसे बड़ा फैक्टर माना जा रहा था, वही खिलाड़ी अब तक एकदम फ्लॉप साबित हुए हैं। ये वो खिलाड़ी हैं, जो विश्वकप में टीम के लिए बैटिंग की शुरुआत करते हैं और इंटरनेशनल टी-20 क्रिकेट में सबसे ज्यादा रन बनाने वाले बल्लेबाजों में टॉप 3 में शामिल हैं।
बात हो रही है रोहित शर्मा और विराट कोहली की। आईसीसी टी-20 विश्वकप में भारतीय टीम की सबसे बड़ी कमजोरी उसकी ओपनिंग बल्लेबाजी का फ्लॉप होना है। दोनों ने अब तक 4 मैचों में बल्लेबाजी की है और महज 22, 12, 1 और 11 रनों की पार्टनरशिप ही की है। न तो विराट कोहली ही लय में दिख रहे हैं और न ही रोहित शर्मा। दोनों एक ही तरह की गलतियाँ कर रहे हैं और एक ही तरह के गेंदबाजों के सामने अपना विकेट गवाँ रहे हैं।
ऐसे में सवाल ये खड़ा होता है कि आखिर विराट कोहली और रोहित शर्मा की ओपनिंग जोड़ी को क्यों न बदल दिया जाए, क्योंकि विराट कोहली इंटरनेशनल क्रिकेट में ओपनिंग की जगह तीसरे और चौथे नंबर पर अधिक सफल रहे हैं। आँकड़े भी तो यही कहते हैं और आपके पास यशस्वी जायसवाल जैसा ओपनर अपनी बारी का इंतजार कर रहा है।
विराट कोहली कब चलेंगे?
विराट कोहली ने इस वर्ल्डकप में अब तक 4 मुकाबले खेले हैं। इसमें से वो एक पारी में गोल्डन डक पर आउट हुए हैं, यानी खाता भी नहीं खोल पाए हैं, जबकि चारों पारियों को मिलाकर भी वो 30 रनों का आँकड़ा नहीं छू पाए। विराट कोहली इस टी-20 विश्वकप में सिर्फ 29 रन ही बना पाए हैं और उनका स्कोरकार्ड रहा है- आयरलैंड के खिलाफ 1 रन, पाकिस्तान के खिलाफ 4 रन, अमेरिका के खिलाफ 0 रन और अफगानिस्तान के खिलाफ महज 24 रन।
अफगानिस्तान के खिलाफ भी वो जूझते नजर आए। टी-20 विश्वकप में ओपनर के तौर पर 24 गेंदों पर सिर्फ 24 रन बनाना कैसा फॉर्म है? इसे कैसे जस्टिफाई कर सकते हैं? खास बात ये है कि इसी टी-20 विश्वकप से ठीक पहले आईपीएल में उनका बल्ला खूब चला था और उन्होंने 15 पारियों में 741 रन ठोक दिए थे।
रोहित शर्मा की परेशानी क्या है?
भारतीय टीम के कप्तान रोहित शर्मा आयरलैंड के खिलाफ पहले मैच में जरूर लय में दिखे थे। उन्होंने 37 गेंदों पर 52 रन बनाए थे, लेकिन उसके बाद से उनका बल्ला भी खामोश है। रोहित शर्मा ने अगली तीन पारियों में 13, 3 और 8 रनों की पारियाँ खेली हैं। ऐसे में रोहित शर्मा को गियर बदलना पड़ेगा। लेकिन यहाँ पर उनके सामने पुरानी समस्याएँ फिर से हैं। बांग्लादेश के पास मुस्तफिजुर रहमान जैसे बाएँ हाथ का तेज गेदबाज है, जो रोहित शर्मा और विराट कोहली जैसे बल्लेबाजों के लिए काल है। वहीं, साकिब अल हसन जैसे लेफ्ट आर्म स्पिनर से भी बचकर रहना भी जरूरी है।
बांग्लादेश के किन गेंदबाजों से सावधान रहने की जरूरत?
टीम इंडिया के टॉप ऑर्डर के पास जो ताकत विराट कोहली, रोहित शर्मा, सूर्या जैसे बल्लेबाजों की वजह से है, उनकी एक कॉमन कमजोरी है। वो कमजोरी है, बाएँ हाथ के गेंदबाजों के खिलाफ। इसमें मुस्तफिजुर रहमान भारतीय बल्लेबाजों से काफी परिचित हैं और वो काफी सफल भी रहे हैं। वहीं, इस बार बांग्लादेशी टीम के पास रिशद हुसैन जैसा शानदार लेग स्पिनर भी है, जो दाएँ हाथ के बल्लेबाजों पर भारी पड़ सकता है। निचले क्रम में भारतीय टीम के पास हार्दिक पांड्या जैसा विस्फोटक बल्लेबाज भी हैं, लेकिन बाएँ हाथ के गेंदबाजों के सामने उनकी भी कमजोरी झलकती है। फिर साकिब अल हसन जैसे सदाबहार आल-राउंडर से निपटना भी भारतीय टीम के लिए बड़ी चुनौती होगी।
क्या प्लेइंग 11 में बदलाव करना जरूरी?
भारत-बाँग्लादेश के बीच मैच को देखें, तो इस मैच में भारतीय टीम को कुछ बदलाव की जरूरत है, जोकि ऑस्ट्रेलिया के खिलाफ अगले सबसे बड़े मैच को देखते हुए सही भी है। चूँकि ऑस्ट्रेलिया के पास मिचेल स्टार्क जैसा बॉलर है, जो रोहित शर्मा-विराट-सूर्या जैसे बल्लेबाजों के साथ ही बाएँ हाथ के बल्लेबाजों के भी काल की तरह है, तो हैजलवुड-जैंपा और कमिंग के साथ ही मैक्सवेल भी भारतीय टीम के लिए बड़ी चुनौती होंगे। वेस्टइंडीज की धीमी पिचों पर मार्कस स्टोइनिश की कटर गेंदों का भी कोई जवाब बल्लेबाज नहीं पा रहे।
ऐसे में बदलाव के तौर पर बाँग्लादेश के खिलाफ टॉप ऑर्डर में यशस्वी को खिलाकर विराट कोहली की पोजिशन एक नंबर नीचे कर सकते हैं। हालाँकि ऐसा करने से भारतीय टीम को शिवम दुबे जैसे बिग हिटर से समझौता करना पड़ सकता है, या फिर रविंद्र जड़ेजा/अक्षर पटेल से। अगर टॉप ऑर्डर में यशस्वी ने अच्छे रन बनाए, तो निचले क्रम में इन आल राउंडर्स के लिए ज्यादा मौके भी नहीं रहेंगे। वहीं, बॉलिंग में कुलदीप यादव और अक्षर/जड़ेजा की स्पिन के साथ ही बुमराह-सिराज-अक्षदीप की तेज गेंदबाजी कमाल का काम कर सकती है।
बिहार पुलिस की आर्थिक अपराध इकाई (EOU) इस साल 5 मई को हुई NEET-UG पेपर लीक मामले की जाँच कर रही है। इस मामले में पुलिस को सूचना मिली थी कि कुछ विद्यार्थियों को पहले ही प्रश्नपत्र मिल चुका है और वे उत्तर याद कर लिए हैं। जब पुलिस उस स्थान पर पहुँची, जहाँ परीक्षार्थी उत्तर याद कर रहे थे। वहाँ पुलिस को जला हुआ प्रश्नपत्र और बुकलेट नंबर 636488 बरामद हुई।
सूत्रों के अनुसार, यह बुकलेट हजारीबाग के एक परीक्षा केंद्र की थी। इस आधार पर माना जा रहा है कि पेपर झारखंड से लीक हुआ है। इस मामले में नालंदा के एक सरकारी संस्थान में तकनीकी सहायक 53 वर्षीय संजीव मुखिया EOU की जाँच का केंद्र बिंदु है। अधिकारियों का मानना है कि वह पेपर लीक के मास्टरमाइंड में से एक है। वह BPSC शिक्षक बहाली पेपर लीक कांड में भी जेल जा चुका है।
जाँचकर्ताओं के अनुसार, मुखिया एक गिरोह का सरगना है, जो प्रतियोगी परीक्षाओं में धांधली करके लाभ कमाने के लिए कई राज्यों में काम करता है। उत्तराखंड पुलिस ने पहले उसे 2016 में पकड़ा था। उसके बेटे शिव कुमार को भी ऐसे ही एक मामले में गिरफ्तार किया गया था और वर्तमान में उसे अप्रैल 2024 में BPSC शिक्षक भर्ती परीक्षा लीक करने के संदेह में उज्जैन की जेल में रखा गया है।
इस गिरोह ने कई महीनों तक इस पेपर लीक की योजना बनाई और संजीव मुखिया उर्फ ‘लूटन मुखिया’ ने एक प्रोफेसर से व्हाट्सएप के जरिए प्रश्नपत्र हासिल किया। इसके बाद पटना और राँची के मेडिकल छात्रों की मदद से पेपर हल करवाया गया। 5 मई की सुबह चिंटू उर्फ बलदेव के मोबाइल पर हल के साथ पेपर भेजा गया। जाँच एजेंसी को मैसेज भेजने वाले प्रोफेसर के बारे में भी जानकारी मिल गई है।
इस प्रश्न पत्र के लिए हर एक छात्र से सौदा 40 लाख रुपए में की गई थी। इसमें 30 से 32 लाख ऊपर भेजने थे और बाकी रकम यानी 8 से 10 लाख रुपए सिकंदर, नीतीश और अमित जैसे बिचौलिए के बीच बँटने थे। इन सबकी प्लानिंग संजीव मुखिया ने की थी। चिंटू उर्फ बलदेव के अनुरोध पर हिलसा के पिंटू ने पेपर का प्रिंटआउट लिया और सुबह 9 बजे 20-25 परीक्षार्थियों में बाँट दिया।
उत्तर को याद करने के लिए परीक्षार्थी खेमनीचक में अब बंद हो चुके लर्न एंड प्ले स्कूल और ब्वॉयज हॉस्टल में रह रहे थे। यह मकान मुखिया के करीबी प्रभात रंजन का है, जिसे किराए पर लिया गया था। प्रभात दनियावाँ प्रखंड का प्रमुख और उसकी पत्नी मुखिया रह चुकी है। पुलिस ने उससे भी पूछताछ की है। EOU ने नालंदा पुलिस को नोटिस भेजकर संजीव मुखिया को गिरफ्तार करने को कहा है।
नालंदा पुलिस ने 21 जून 2024 को जिले के नगरनौसां गाँव स्थित उसके घर पर छापा मारा था, लेकिन पुलिस के पहुँचने से पहले ही वह फरार हो गया था। हालाँकि, एजेंसी ने उसके परिवार के सदस्यों से भी पूछताछ की है। एफआईआर में नामजद एकमात्र आरोपित संजीव मुखिया ही है। पुलिस को रॉकी उर्फ राकेश रंजन, चिंटू, पिंटू, आशुतोष समेत अन्य आरोपियों की भी तलाश है।
इस मामले में 4 जून को उसने पटना जिला एवं सत्र न्यायालय में अग्रिम जमानत के लिए आवेदन किया। उस पर 4 जुलाई को सुनवाई होगी। एक पुलिस अधिकारी के अनुसार, वे गुप्त सूचना के आधार पर अलग-अलग जगहों पर संजीव मुखिया को तलाश रहे हैं। अधिकारी ने कहा, “हमें उम्मीद है कि अगले कुछ दिनों में उसे पकड़ लिया जाएगा। हम उस पर नजर रख रहे हैं।”
संजीव मुखिया नालंदा के नूरसराय हॉर्टिकल्चर में तकनीकी सहायक के रूप में काम करता था। बाद में उसने नौकरी दी और अपनी पहुँच के बल पर राजनीति में कदम रखा। वह अपने पंचायत का मुखिया भी बना। स्थानीय लोगों का कहना है कि संजीव मुखिया की पत्नी ममता कुमारी हरनौत विधानसभा क्षेत्र से लोजपा की टिकट पर चुनाव भी लड़ चुकी है। हालाँकि, उसे हार का सामना करना पड़ा।
कौन है सिकंदर यादवेंदु और अवधेश?
5 मई को पुलिस ने परीक्षा केंद्र से अभिषेक नाम के एक छात्र को हिरासत में लिया था। साथ ही राँची में रहने वाले उसके पिता अवधेश को भी गिरफ्तार किया गया। दानापुर नगरपालिका में जूनियर इंजीनियर 56 वर्षीय सिकंदर प्रसाद यादवेंदु को भी पेपर लीक मामले में गिरफ्तार किया गया है। जाँच में उसे नीट प्रश्नपत्रों के प्रसार में मुख्य संदिग्ध के रूप में चिन्हित किया गया है।
सिकंदर साल 2012 से पहले राँची में 15 साल से छोटी-मोटी ठेकेदारी करता था। इसके बाद उसने राँची में जमीन का कारोबार किया और महज 12 साल में ही करोड़ों की संपत्ति अर्जित कर ली। सिकंदर मूलत: बिहार के समस्तीपुर के एक किसान परिवार से ताल्लुक रखता है। उसके पास इंजीनियरिंग में डिप्लोमा है। साल 2012 में उसे जल संसाधन विभाग में जूनियर इंजीनियर का पद मिला।
इस दौरान उसने राँची में भी करोड़ों की संपत्ति अर्जित की है। राँची के जगतपुरम में उसका एक घर और एक अपार्टमेंट है। उसने करीब तीन महीने पहले राँची के बाईपास रोड पर अपने बेटे के लिए एक स्पोर्ट्स शोरूम खोला है। वहीं, उसकी बेटी एमबीबीएस की पढ़ाई पूरी कर चुकी है। जाँच एजेंसी सिकंदर के खिलाफ आय से अधिक संपत्ति का मामला भी दर्ज करेगी।
पुलिस को यह भी पता चला है कि जब सिकंदर राँची में छोटी-मोटी ठेकेदारी करता था, उस वक्त अवधेश उसका क्लर्क था। बाद में जब सिकंदर की अवैध कमाई बढ़ी तो अवधेश उसे राँची में ही जमीन के कारोबार में लगाने लगा था। जमीन के कारोबार को लेकर हुए विवाद साल 2023 में अवधेश को राँची में गोली भी मारी गई थी, जिसमें वह घायल हो गया था।
भाजपा का तेजस्वी यादव के निजी सचिव पर आरोप
बिहार के उपमुख्यमंत्री विजय सिन्हा ने तेजस्वी यादव के निजी सचिव और बिहार प्रशासनिक सेवा के अधिकारी प्रीतम कुमार पर लीक का आरोप लगाया है। सिन्हा ने कहा, “1 मई को तेजस्वी यादव के निजी सचिव प्रीतम कुमार ने गेस्टहाउस के कर्मचारी प्रदीप कुमार को सिकंदर यादवेंदु के लिए कमरा बुक करने के लिए बुलाया था। 4 मई को प्रीतम ने प्रदीप को कमरा बुक करने के लिए फिर से बुलाया।”
सिन्हा ने कहा, “तेजस्वी यादव के लिए ‘मंत्री’ शब्द का इस्तेमाल किया गया था। सिकंदर यादवेंदु तेजस्वी यादव के पीएस प्रीतम कुमार के करीबी रिश्तेदार हैं। सिकंदर की बहन रीना यादव और बेटे अनुराग यादव के लिए 4 मई को NHAI गेस्ट हाउस बुक किया गया था। गेस्ट हाउस की डायरी में एक फोन नंबर और ‘मंत्री जी’ का उल्लेख है। जाँच एजेंसी इस मंत्री जी की पहचान करने की कोशिश कर रही है।”
आमिर खान के बेटे जुनैद की एक फिल्म आई है ‘महाराज’, जिसमें उन्होंने एक पत्रकार का किरदार निभाया है वहीं जयदीप अहलावत एक वैष्णव संत की भूमिका में हैं जिस पर कई गंभीर आरोप लगे थे। फिल्म वास्तविक घटनाओं से प्रेरित है और जुनैद खान ने करसनदास मुळजी का किरदार निभाया है, वहीं जयदीप अहलावत ने जदुनाथजी बृजरतनजी का। असल में कहानी 19वीं सदी के मध्य में घूमती है, जब समाज सुधर के लिए बने ‘बुद्धिवर्धक सभा’ का प्रभाव बढ़ रहा था।
इस सभा में शामिल थे – नर्मदाशंकर लालशंकर, महिपतराम रूपराम और करसनदास मुळजी। इन्होंने उस दौर में यूरोपियन शिक्षा प्राप्त की थी, साथ ही अंग्रेज शिक्षकों से भी पढ़े थे। इन्होंने भारत में सामाजिक-धार्मिक सुधार का जिम्मा उठाया। इस दौरान वो स्वदेशाभिमान का लक्ष्य लेकर भी चले, जिसमें गुजराती भाषा का विकास शामिल था। साथ ही इन सबने बदलते समाज और परिदृश्य में भारत में सुधार का बिगुल फूँका। जहाँ नर्मद और महिपत नागर ब्राह्मण थे, वहीं करसन कपोल बनिया।
‘सत्यप्रकाश’, करसनदास मुळजी और ‘महाराज’
इन तीनों ने विधवा विवाह के लिए अभियान चलाया। मात्र 21 वर्ष की उम्र में करसनदास मुळजी को उनकी चाची ने पत्नी समेत घर से निकाल दिया था, वहीं नर्मदाशंकर लालशंकर को एक विधवा से शादी करने के कारण समाज से बहिष्कृत कर दिया गया था। सन् 1860 में महिपतराम पढ़ाई के लिए लंदन गए, जिसका उनके समुदाय में खूब विरोध हुआ क्योंकि तब समुद्र पार करना पाप माना जाता था। वहीं नर्मद का वैष्णव संत जदुनाथजी के साथ वाद-विवाद चालू हुआ।
इसी दौरान करसनदासजी मुळजी ने ‘सत्यप्रकाश’ नामक अख़बार में अक्टूबर 1860 में एक लेख लिखा, जिसमें उन्होंने वैष्णव आचार्यों के मनमाने और अनैतिक करतूतों को लेकर खुलासे किए। उस दौरान जदुनाथजी बॉम्बे में थे। इस लेख के प्रकाशित होने के बाद उन्होंने करसनदास मुळजी और ‘सत्यप्रकाश’ के संपादक रुस्तमजी राणिना के खिलाफ मानहानि का मामला दायर किया, जिसे ‘महाराज लिबेल केस’ कहा गया। इसमें जदुनाथजी की हार हुई और पत्रकार की जीत।
पूरे देश में इस मामले की खूब रिपोर्टिंग हुई। जाति और कारोबार से जुड़ी संस्थाओं को वैष्णव आचार्य ने अपने हाथ में कर रखा था, ऐसे में उनके अनुयायी भी बड़ी संख्या में उनके समर्थन के लिए उतर गए थे। तब बॉम्बे में ही सुप्रीम कोर्ट चला करता था, जिसमें इसकी सुनवाई हुई। वल्लभ संप्रदाय के जदुनाथजी की लाइफस्टाइल को लेकर देश भर में चर्चा छिड़ गई थी और भारत-इंग्लैंड में करसनदास मुळजी नायक बन गए थे। इसके कुछ महीनों बाद उन्होंने इंग्लैंड की यात्रा भी की और वापस लौट कर वृत्तांत लिखा।
दक्षिणपंथी लेखक व पत्रकार हैं सौरभ शाह, हिन्दू हित पर मुखर
फिल्म ‘महाराज’ गुजरात के वरिष्ठ पत्रकार सौरभ शाह के उपन्यास पर आधारित है। सौरभ शाह दक्षिणपंथी हैं और अक्सर हिन्दू हित के मुद्दों पे बोलते रहते हैं। फिल्म की रिलीज से पहले उनका कहना था कि YRF-Netflix अगर फिल्म में हिन्दू धर्म को गलत तरीके से दिखाता है और या फिर क्रिएटिव लिबर्टी के नाम पर धर्म को बदनाम करता है तो सबसे पहले वही विरोध करेंगे। हालाँकि, फिल्म के अंत में डिस्क्लेमर डाल कर धर्म के प्रति सम्मान प्रकट किया गया है।
इसी डिस्क्लेमर के जरिए YRF-Netflix ने बताया कि उसके ‘इरादे गलत नहीं’
फिल्म के अंत में लिखा गया है, “संप्रदाय किसी व्यक्ति या घटना से बड़ा होता है। इस एक अपवाद को पीछे छोड़, वैष्णव संप्रदाय धर्म के मार्ग पर आगे बढ़ता रहा। भारत के सामाजिक, सांस्कृतिक और धार्मिक गौरव का वैष्णव संप्रदाय और उसके लाखों भक्त एक अभिन्न अंग हैं और हमेशा रहेंगे।” एक तरह से फिल्म निर्माताओं ने ये दिखाया है कि वो ये फिल्म बना रहे हैं, जिसमें विलेन एक हिन्दू संत है, लेकिन वो वास्तविक घटना को दिखा रहे हैं और उनका इरादा धर्म को बदनाम करने का नहीं है।
बॉलीवुड पर शक क्यों न हो?
अब चूँकि फिल्म में आमिर खान के बेटे जुनैद हैं, निर्माता यशराज फिल्म्स है और रिलीज नेटफ्लिक्स ने किया है – इसीलिए, विवाद तो स्वाभाविक है। आमिर खान ने ‘PK’ (2014) में किस तरह से भगवान शिव की वेशभूषा वाले व्यक्ति को बाथरूम में छिपते दिखा कर मजाक बनाया है, ये सर्वविदित है। नेटफ्लिक्स ने कैसे ‘लीला’ (2019) वेब सीरीज के जरिए हिन्दुओं को आतंकवादी दिखाया, ये भी हमें पता होना चाहिए। YRF ने ‘शमशेरा’ (2022) में कैसे एक त्रिपुण्ड तिलकधारी ब्राह्मण को जनजातीय समाज के खिलाफ और गुंडे के रूप में दिखाया, ये भी हमने देखा।
ऐसे में शक किसे न हो? और हाँ, आज के दौर में जब मदरसों से यौन शोषण की खबरें आ रही हैं और मौलवियों द्वारा कुकर्म की घटनाएँ सामने आ रही हैं – एक 164 साल पुराने मामले को अचानक से उखाड़ने के पीछे क्या मकसद हो सकता है? सौरभ शाह ने तो 2014 के उपन्यास पर आधारित है, उन्हें पैसे मिले और उन्होंने अपनी कहानी बेची जैसा कि प्रक्रिया है। लेकिन, उसके बाद सब कुछ निर्माता-निर्देशक के हाथ में होता है। अब ये तो दर्शक तय करेंगे कि फिल्म इस घटना के साथ न्याय करती है या नहीं।
सौरभ शाह ने ऑपइंडिया से बात करते हुए बताया कि वो खुद भी वैष्णव संप्रदाय के वल्लभ पंथ के अनुयायी हैं और करसनदास मुळजी भी एक कट्टर वैष्णव थे। बतौर पत्रकार वो चाहते थे कि महाराज अपने अनुयायियों का सही तरीके से मार्गदर्शन करें और अपनी जीवनचर्या को सुधारें। घूस और धमकी के जरिए उन्हें अपने पाले में करने की कोशिश की गई। वैष्णव महाराजों ने कोर्ट में पेशी से छूट हासिल की, दस्तावेज पर प्रभावशाली लोगों से हस्ताक्षर कराया और महिलाओं को विश्वास में लेकर पुरुषों पर दबाव बनाया कि वो उनका समर्थन करें।
करसनदास मुळजी ने नए संप्रदायों में चल रहे ठगी को उजागर करते हुए अपने लेख में बताया कि असली हिन्दू धर्म क्या है, शास्त्र क्या कहते हैं। बॉम्बे में जब मामला चला तो कई प्रभावशाली लोग उनकी तरफ से ही कोर्ट में गवाही देने के लिए पेश हुए। इनमें से अधिकतर कट्टर वैष्णव थे। 21 अख़बारों ने करसनदास मुळजी की जीत पर खबर प्रकाशित की थी। जज जोसेफ अर्नोल्ड ने भी उनकी प्रशंसा करते हुए कहा कि उन्होंने एक बड़ी लड़ाई लड़ी है, साथ ही उन्होंने कहा कि जो अनैतिक है उसे धर्म के आधार पर सही नहीं ठहराया जा सकता।
खैर, इस बहस में हम कोई निर्णय नहीं देना चाहेंगे क्योंकि एक तरफ बॉलीवुड और इस फिल्म से जुड़ी संस्थाओं और लोगों का इतिहास ख़राब है तो दूसरी तरफ एक दक्षिणपंथी लेखक ने इसकी कहानी लिखी है और ये वास्तविक घटनाओं पर आधारित है। क्या बॉलीवुड सुधर गया है? – इस प्रश्न का उत्तर एक फिल्म के आधार पर नहीं दिया जा सकता। जब माँ भवानी का अपमान करने वाले को जवाब देने कारण हकीकत राय नामक बच्चे का खुलेआम सिर कलम कर दिया गया था। इस पर फिल्म बनाएगा बॉलीवुड?
वैष्णव आचार्यों को ‘गुंडा’ दिखाना अगर ठीक है तो फिर औरंगजेब ने काशी विश्वनाथ व श्रीकृष्ण मंदिर मंदिर ध्वस्त किया, मीर बाक़ी ने राम मंदिर ध्वस्त किया और सिकंदर बुतशिकन ने मार्तण्ड मंदिर को ध्वस्त किया – इन सब कहानियों पर फिल्म कब बनेगी? इन सब कहानियों पर फिल्म इंडस्ट्री का एक छोटा सा समूह फिल्म बना तो रहा है, लेकिन उसके पास न संसाधन है और न समर्थन। खैर, ‘सनातन के सम्मान’ के साथ ‘व्यभिचारी वैष्णव आचार्य’ की कहानी को पर्दे पर दिखाना हिन्दू विरोधी है या हिन्दू हित में – आप तय कीजिए।
मध्य प्रदेश के राजगढ़ स्थित जालपा माता मंदिर में चोरों ने माफ़ी माँगी है। दरअसल, ये एक पूरा का पूरा गिरोह था जो मध्य प्रदेश में लगातार हिन्दू मंदिरों को निशाना बना रहा था। SP आदित्य मिश्रा ने बताया कि इनके पास से चोरी की वारदात में इस्तेमाल की गई 7 बाइक भी जब्त की गई है। ये हिन्दू मंदिरों को निशाना बनाते थे, क्योंकि इन्हें लगता था कि वहाँ इन्हें कोई खतरा नहीं है। जालपा माता मंदिर में इन्होंने अब माफ़ी माँगी है, जिसका वीडियो सोशल मीडिया पर वायरल हो रहा है।
यहीं पर राजगढ़ के SP आदित्य मिश्रा ने इस गिरोह के पकड़े जाने का खुलासा भी किया। कुछ दिनों पहले गिरोह ने यहाँ भी चोरी की थी। इसके बाद पुलिस ने उसकी तलाश शुरू की और 5 आरोपितों को गिरफ्तार किया। अन्य फरार आरोपितों की तलाश अभी जारी है। इनके पास से 5 लाख रुपए का चुराया हुआ माल जब्त किया गया है। यहाँ तक कि 2 साल पहले शहर के ही एक मंदिर से चोरी हुए पंखे भी इनके पास से मिले हैं। ये सब राजस्थान के रहने वाले हैं।
गिरफ्तार चोरों में बनवारी पिता अमर सिंह तंवर, पहलवान पिता गुलाब सिंह तंवर, मुकेश पिता जगन्नाथ तंवर, दिनेश पिता रंगलाल और राधेश्याम पिता रंगलाल तंवर शामिल हैं। ये सब झालावाड़ जिला के रहने वाले हैं। चोरों ने मंदिर में माता की प्रतिमा के सामने हाथ जोड़ कर कहा, “हे माँ, हमें माफ़ कर दो। हमसे गलती हो गई कि हमने यहाँ चोरी की।” गिरफ़्तारी के बाद ही चोरों ने कहा कि उनका हृदय परिवर्तन हो गया है और वो माता से माफ़ी माँगना चाहते हैं।
चोरों ने इच्छा व्यक्त की कि उन्हें माता के सामने चोरी न करने का संकल्प दिलाया जाए। इसके बाद मंदिर के पुजारी ने उन्हें संकल्प दिलाया कि वो कभी चोरी नहीं करेंगे। इन्होंने जालपा माता मंदिर और हनुमान मंदिर की दानपेटी तोड़ लाखों रुपए चुराए थे। बालाजी धाम के कैमरे का DVR और LCD चुराया था। बाबा रामदेव मंदिर से विद्युत मोटर, संकट मोचन मंदिर से साउंड मशीन, खेड़ापति सरकार मंदिर से DVR मशीन और स्पीकर-माइक, शिवजी खोयरी मंदिर से 1 क्विंटल सरिया चोरी की थी।