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अब बिहार के पूर्वी चम्पारण में भरभरा कर गिर गया पुल, ₹2 करोड़ की लागत से हो रहा था निर्माण: 1 हफ्ते में अररिया और सीवान के बाद तीसरी ऐसी घटना

बिहार के पूर्वी चम्पारण स्थित घोड़ासहन में एक निर्माणाधीन पुल ध्वस्त हो गया है। एक सप्ताह के भीतर बिहार में तीसरी ऐसी घटना सामने आई है, जो राज्य में सार्वजनिक इंफ्रास्ट्रक्चर के निर्माण कार्य में बड़े पैमाने पर हो रहे भ्रष्टाचार पर सवाल खड़े करते हैं। इससे पहले अररिया और सीवान में इसी तरह की घटना हुई थी। मोतिहारी में जो पुल ध्वस्त हुआ है उसे 2 करोड़ रुपए की लागत से बनाया जा रहा था। ये घटना घोड़ासहन प्रखंड के चैनपुर स्टेशन के लिए पहुँच मार्ग पर ये घटना हुई है।

इस पुल की लंबाई लगभग 50 फ़ीट थी। 16 मीटर के इस पुल को बिहार के रूरल वर्क्स डिपार्टमेंट (RWD) द्वारा बनवाया जा रहा था। ये घटना रविवार (23 जून, 2024) को हुई है। अमवा गाँव को अन्य इलाकों से जोड़ने के लिए एक लहर के ऊपर इस पुल का निर्माण किया जा रहा था। RWD के एडिशनल चीफ सेक्रेटरी दीपक कुमार सिंह ने कहा कि पुल के ध्वस्त होने का कारण अब तक नहीं पता चल सका है। उन्होंने इसे गंभीर मसला बताते हुए कहा कि इसकी जाँच के आदेश दे दिए गए हैं।

जिले के वरिष्ठ अधिकारी इस घटना के बाद मौके पर पहुँचे। विभाग को विस्तृत रिपोर्ट का इंतजार है। DM सौरभ जोरवाल ने कहा कि कुछ स्थानीय लोगों ने इस पुल के कुछ पिलरों के निर्माण का विरोध किया था। पुलिस इस कोण से भी जाँच कर रही है। इस पुल के बन जाने के बाद दरौंदा और मगराजगंज प्रखंडों के गाँवों के बीच आवागमन की सुविधा विकसित हो जाती। बिहार में पुलों के ध्वस्त होने के कारण जान की क्षति भले ही नहीं हो रही हो, लेकिन इससे भ्रष्टाचार उजागर हो रहा है।

इससे पहले सीवान में पटेढी-गरौली गाँवों के बीच बन रहा पुल ध्वस्त हो गया था। बिना आँधी-तूफान के ही ये पुल धड़ाम हो गया था। तब DM मुकुल गुप्ता ने कहा था कि नहर में पानी छोड़े जाने के कारण इसके खम्बे ढह गए थे। 20 फीट लंबा ये पुल 1991 में महराजगंज के तत्कालीन विधायक उमाशंकर सिंह की निधि से बना था। इसी तरह अररिया में 12 करोड़ रुपए की लागत से बन रहा पुल ढह गया था। सिकटी प्रखंड में बकरा नदी पर इसे बनाया जा रहा था।

अरशद ने पहचान छिपाकर हिंदू लड़की फँसाया, ब्लैकमेल कर 1.5 साल तक किया रेप: भेद खुला तो धर्मांतरण का बनाने लगा दबाव, बुर्का नहीं पहनने पर करता था मारपीट

मध्य प्रदेश के गुना में नाम बदलकर 20 साल की एक हिंदू युवती से दोस्ती करने और लगभग डेढ़ साल तक रेप का मामला सामने आया है। इस दौरान आरोपित अरशद ने युवती की अश्लील वीडियो भी बना ली और इस वीडियो के सहारे कई बार दुष्कर्म किया। इतना ही नहीं उसने युवती के साथ मारपीट की और धर्म बदलकर मुस्लिम बनने का भी दबाव बनाया। तंग आकर युवती ने थाने में शिकायत दर्ज कराई है।

कोतवाली थाना में दर्ज कराई अपनी शिकायत में युवती ने बताया कि वह गुना में रहकर प्राइवेट नौकरी है और उस पैसे को घर भेजती है। करीब दो साल पहले इंस्टाग्राम पर उसकी भय्यू नाम के युवक ने मैसेज किया। युवती ने पूछा कि वह कौन है और उसे कैसे जानता है तो आरोपित अरशद ने गोल-मोल जवाब दिए। धीरे-धीरे उसने युवती को अपनी जाल में फँसा लिया और उससे बात करने लगा।

युवती का कहना है कि एक दिन वह अस्पताल गई थी। वहाँ आरोपित भी पहुँच गया। वहाँ उसने युवती के साथ एक सेल्फी खींच ली। युवती ने बताया कि वह गुना में किराए का कमरा लेकर रहती है और वहाँ निजी संस्थान में नौकरी करती है। आरोपित ने उसके घर पता लगा लिया और वहाँ पहुँच गया। वहाँ पर उसने जान से मारने की धमकी देकर उसके साथ रेप किया और अश्लील तस्वीरें खींच लीं।

युवती का कहना है कि मूल रूप से वह एक बमोरी की रहने वाली है। उसके पिता मानसिक रूप से बीमार हैं। छोटा भाई पढ़ाई करता है और माँ गृहणी है। वह परिवार का खर्चा चलाने के लिए गुना शहर में किराए से मकान रहती है। रेप करने के बाद अश्लील तस्वीरों से आरोपित उसे ब्लैकमेल करने लगा। वह गुना में जीनघर का रहने वाला है। उसकी बातों से वह इनकार करती तो वह मारपीट करता था।

युवती का कहना है कि करीब तीन महीने पहले उसके मोबाइल में कई मुस्लिम युवकों के कॉन्टैक्ट्स मिले। उसने भैय्यू से इस बारे में पूछा तो उसने अपना नाम अरशद बताया। युवती ने बताया कि सच्चाई साने आने के बाद वह उससे दूर होने की कोशिश की, लेकिन अरशद उसे ब्लैकमेल करता रहा। वह धर्म परिवर्तन का दबाव भी बनाने लगा।

युवती का कहना है कि अरशद उसे जींस पहनने की मना करने लगा। सूट और बुर्का पहनने के लिए बोलता था। इतना ही नहीं, जब मन करता था उसे वह बुला लेता था। युवती का कहना है, “अगर मैं ऑफिस में काम भी कर रही हूँ तो काम छोड़कर जाना पड़ता था। किराए के कमरे पर कभी भी आ जाता था।

युवती ने बताया, “पिछले डेढ़ वर्ष से अरशद ने बहुत टॉर्चर किया। वह मारपीट करता था। बीच बाजार में पिटाई करता था। यह देख एक दुकानदार ने कहा कि क्यों सहन कर रही हो? फिर भी घर और लोक लाज के डर से सहन करती रही। चेहरे और शरीर पर मारपीट के निशान हैं।”

बाद में अपने सहयोगियों की सलाह पर उन्हें हिंदू संगठनों संपर्क किया। उनके सहयोग से उसने कोतवाली थाने में शिकायत दर्ज कराई। कोतवाली पुलिस ने दुष्कर्म, मारपीट समेत कुछ अन्य धाराओं में मामला दर्ज कर छानबीन शुरू कर दी है।

‘सुनील दास’ बन गुजरात में रह रहा था बांग्लादेशी घुसपैठिया मीनार हेमायत, हिन्दू पहचान वाले फर्जी कागजात बना कर क़तर में की नौकरी

गुजरात के सूरत में एक ऐसा बांग्लादेशी घुसपैठिया पकड़ा गया है, जो भारत में फर्जी भारतीय आईडेंटिटी लेकर आराम से जिंदगी काट रहा था। आरोपित का नाम मीनार हेमायत है। मीनार हेमायत को सूरत एसओजी ने गिरफ्तार किया है। वो शुवो सुनील दास नाम के फर्जी हिंदू पहचान के साथ रह रहा था और उसी नाम से उसके पास सारे फर्जी कागजात भी मिले हैं। इन कागजातों के दम पर वो 2 साल कतर की राजधानी दोहा में नौकरी कर चुका है।

मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक, मीनार हेमायत बांग्लादेशी मुस्लिम है। उसे सूरत के ऊना इलाके से गिरफ्तार किया गया। पुलिस ने शुवो सुनील दास के नाम से हिंदू पहचान के कई जाली दस्तावेज बरामद किए। आरोपी के पास से जन्म प्रमाण पत्र, स्कूल प्रवेश और छोड़ने के प्रमाण पत्र, बांग्लादेशी राष्ट्रीय पहचान पत्र और अन्य दस्तावेज सहित कई बांग्लादेशी दस्तावेज भी बरामद किए गए। भारतीय दस्तावेजों में पश्चिम बंगाल से स्कूल लीविंग सर्टिफिकेट, आधार कार्ड, कतर के लिए रेजिडेंट परमिट कार्ड, भारतीय पासपोर्ट और घर का रेंट एग्रीमेंट भी शामिल है।

रिपोर्ट्स के मुताबिक, हेमायत 2020 में पश्चिम बंगाल में सतखीरा सीमा के रास्ते बांग्लादेश से भारत आया था। उसे ममता बनर्जी की टीएमसी शासित पश्चिम बंगाल के नादिया जिले में हिंदू पहचान के तहत जाली दस्तावेज़ मिले। जाली दस्तावेज़ों का इस्तेमाल करके उसने भारतीय पासपोर्ट हासिल किया और 2021 से 2023 तक कतर के दोहा में काम किया। इसके बाद वह कंस्ट्रक्शन कंपनी में काम करने के लिए सूरत चला गया।

बता दें कि हाल ही में महाराष्ट्र एटीएस ने भारत में कई बांग्लादेशियों को पकड़ा है, जिसमें खुलासा हुआ है कि उनमें से कुछ ने हाल ही में हुए लोकसभा चुनावों में फर्जी दस्तावेजों के आधार पर मतदान भी किया था। जाँच में पता चला कि इन बांग्लादेशी घुसपैठियों ने गुजरात से अपने फर्जी पासपोर्ट बनवाए और उनका इस्तेमाल विदेश में नौकरी पाने के लिए किया। कुछ लोग जाली भारतीय दस्तावेजों का इस्तेमाल करके सऊदी अरब गए थे।

इन गिरफ्तारियों ने भारत के अलग-अलग हिस्सों में फर्जी पहचान के साथ रह रहे बांग्लादेशी घुसपैठियों की गंभीर चिंता को उजागर किया है। इस मामले में सरकार को और भी कड़े कदम उठाने की जरूरत है, क्योंकि ये राष्ट्रीय सुरक्षा के लिए बड़ा खतरा साबित हो सकता है।

गलत साइड में फॉर्च्यूनर चला रहा था विधायक का भतीजा, टक्कर के बाद 19 साल के बाइक सवार की मौत: पुणे में पोर्शे कांड के बाद रोड रेज की एक और घटना

पुणे में एक नामी बिल्डर के नाबालिग बेटे द्वारा शराब पीकर पोर्शे कार से कुचल कर इंजीनियर युवक और युवती को मार डालने का मामला ठंडा भी नहीं हुआ था कि शहर में इस तरह की एक और घटना हो गई है। इस बार विधायक के भतीजे की कार से कुचल कर एक शख्स की मौत हो गई। शनिवार (22 जून, 2024) की रात महाराष्ट्र के पुणे में 19 साल के लड़के की मौत हो गई। वो मोटरबाइक से था, वहीं कार गलत दिशा में सामने से आ रही थी।

पुलिस ने FIR दर्ज करते हुए कार चला रहे मयूर मोहिते को हिरासत में ले लिया। वो विधायक दिलीप मोहिते पाटिल का भतीजा है। दिलीप मोहिते NCP (अजीत पवार गुट) के विधायक हैं। उन्होंने शिरूर लोकसभा क्षेत्र स्थित खेड़ विधानसभा क्षेत्र से 2004 और 2009 में जीत दर्ज की थी। 2019 में एक बार फिर जीत दर्ज कर वो तीसरी बार MLA हैं। उनके भतीजे की संलिप्तता वाली दुर्घटना की बात करें तो ये रात के साढ़े 9 बजे मौजे एक्लाहारे गाँव में हुई है।

अम्बेगाँव तालुका अंतर्गत पुणे-नासिक रोड पर हुई इस घटना के संबंध में पुलिस ने बताया है कि मृतक की पहचान ओम भालेराव के रूप में हुई है। इस घटना के बाद विधायक पाटिल ने कहा है कि उनके भतीजे ने भागने का प्रयास नहीं किया। साथ ही उन्होंने अपने भतीजे के शराब के नशे में होने की बात से भी इनकार किया। मंचर पुलिस थाने में मामला दर्ज किया गया है। आरोपित फॉर्च्यूनर कार चला रहा था और रॉन्ग साइड पर था।

इसी दौरान मोटरबाइक से इसकी आमने-सामने की टक्कर हुई। दोनों गाड़ियाँ इस घटना में क्षतिग्रस्त हुई हैं। इस मामले में अभी जाँच चल रही है। बता दें कि पुणे में इससे पहले जो ऐसी घटना हुई थी, उसमें नाबालिगों वाली अदालत के जज ने आरोपित को ट्रैफिक नियमों के संबंध में 200 शब्दों का लेख लिखने की शर्त पर जमानत दे दी थी। उस दौरान भी NCP के विधायक सुनील विजय तिंगरे पर आरोपित की पैरवी करने का आरोप लगा था।

बजरंग पूनिया फिर से सस्पेंड: डोप टेस्ट के लिए अपना पेशाब सैम्पल क्यों नहीं दिया? क्या छिपा रहे कि नाडा को दोबारा लेना पड़ा एक्शन

भारत के ओलंपिक मेडलिस्ट बजरंग पूनिया को राष्ट्रीय डोपिंग एजेंसी ( नाडा) ने फिर से सस्पेंड कर दिया है। उन्हें नियमों के उल्लंघन और जवाब न देने की वजह से अस्थायी तौर पर सस्पेंड किया गया है। नोटिस जारी करते हुए उन्हें 11 जुलाई तक का समय दिया गया है, तब तक सस्पेंशन जारी रहेगा।

रिपोर्ट्स के मुताबिक, नाडा ने उन्हें दूसरी बार सस्पेंड किया है। पिछली बार के सस्पेंशन के समय उन्हें नोटिस नहीं जारी किया गया था, जिसकी वजह से अनुशासनात्मक पैनल ने सस्पेंशन को रद्द कर दिया था, लेकिन इस बार उन्हें सस्पेंड करने के साथ ही नोटिस भी जारी किया गया है, जिसका जवाब देने केे लिए 11 जुलाई का समय दिया गया है। बता दें कि 10 जुलाई 2024 को सोनीपत में ट्रायल्स के दौरान बजरंग पूनिया हार गए थे और उनके पेरिस ओलम्पिक में भाग लेने की संभावनाएं खत्म हो गई थी। उन्होंने ट्रायल्स के बाद जरूरी यूरीन सैंपल देने से मना कर दिया था और ट्रायल्स के बीच ही कैंप छोड़कर चले गए थे।

नाडा ने बजरंग पूनिया को जो नोटिस भेजा है, उसमें लिखा है कि ‘डीसीओ ने आपको डोप टेस्ट के लिए यूरीन सैम्पल देने को कहा था। डीसीओ द्वारा किए गए कई अनुरोधों के बाद भी आपने इस आधार पर अपने यूरीन सैम्पल देने से इनकार कर दिया था। सैम्पल देने से इनकार के बाद नाडा के डीसीओ ने आपको इसके परिणामों के बारे में विस्तार से बताया था। आप पर राष्ट्रीय डोपिंग रोधी नियम, 2021 के अनुच्छेद 2.3 के उल्लंघन का आरोप लगा है। अब आपको अस्थाई रूप से निलंबित कर दिया गया है।’

बता दें कि बजरंग पूनिया को पेरिस ओलंपिक क्वॉलिफायर्स के लिए आयोजित नेशनल सेलेक्शन ट्रायल्स में हार झेलनी पड़ी थी। टोक्यो ओलंपिक के कांस्य पदक विजेता पूनिया को रोहित कुमार ने ट्रायल्स के दौरान सेमीफाइनल में हरा दिया था। जिसके बाद पेरिस ओलंपिक 2024 में भाग लेने का भी उनका सपना टूट गया।

गौतरलब है कि किसी भी खिलाड़ी के प्रतियोगिताओं में हिस्सा लेने के दौरान एक सप्ताह पहले और एक सप्ताह बाद के बीच के समय में अपना यूरीन सैंपल डोपिंग की जाँच के लिए देना होता है। ये अनिवार्य है। ऐसा न करने पर खिलाड़ियों के खिलाफ अनुशासनात्मक कार्रवाई की जाती है। ऐसा इसलिए किया जाता है, ताकि खिलाड़ी किसी तरह की डोपिंग न कर सकें। डोपिंग का मतलब किसी ऐसे पदार्थ या दवा के सेवन से है, जो खेल के दौरान खिलाड़ियों के प्रदर्शन को बेहतर करता है। ऐसा करना प्रतिबंधित है।

हिमाचल में दुकान गई, यूपी में गिरफ्तार हुआ… जावेद को भारी पड़ा पशु हत्या की वीभत्स तस्वीर WhatsApp पर पोस्ट करना, बकरीद पर हिन्दुओं को धमका रहा था

उत्तर प्रदेश की शामली जिले की पुलिस ने पशु हत्या की तस्वीर सोशल मीडिया पर पोस्ट करने वाले जावेद को गिरफ्तार कर लिया है। इस्लामी कट्टरपंथी जावेद ने बकरीद के दौरान हिन्दुओं की भावनाओं को ठेस पहुँचाने वाली फोटो डाली थी, जिसके बाद हिमाचल प्रदेश स्थित उसके दुकान में घुस कर आक्रोशित लोगों ने विरोध किया था। DSP श्रेष्ठा ठाकुर ने बताया कि कुर्बानी की तस्वीर को जावेद ने व्हाट्सएप्प पर स्टेटस लगा कर सांप्रदायिक सौहार्द बिगाड़ने की कोशिश की है।

उन्होंने बताया कि मामला संज्ञान में आने के साथ ही यूपी पुलिस ने इसकी तलाश शुरू कर दी थी और अंततः इसे गिरफ्तार कर लिया गया है। उसके खिलाफ उचित धाराओं में मुकदमा दर्ज कर के कार्रवाई की जानकारी दी गई है। जावेद का वीडियो भी सामने आया है, जिसमें वो थाने के पुरुष बंदी गृह में दिख रहा है। हिमाचल प्रदेश के सिरमौर जिले के नाहन में पहले से ही जावेद के खिलाफ FIR दर्ज है। वो शामली का रहने वाला है लेकिन वहाँ कारोबार करता था।

जलालाबाद के कोटला मोहल्ले के निवासी जावेद के अब्बा का नाम कल्लू कुरैशी है। वो पिछले 12-13 साल से नाहन में कपड़े और कॉस्मेटिक्स की दुकान चलाता है। ईद-उल-अजहा के मौके पर वो जलालाबाद आया था और इस दौरान पशु की कुर्बानी के बाद उसकी रील बना कर उसने Whatsapp पर स्टेटस लगा दिया। इसके बाद वहाँ आक्रोशित भीड़ ने उसकी दुकान में घुस कर सामान फेंक दिया था। शनिवार (22 जून, 2024) की देर रात उसे यूपी में गिरफ्तार किया गया।

शामली के पुलिस अधीक्षक अभिषेक ने बताया कि उक्त तस्वीर गाय की नहीं है, लेकिन ये काफी वीभत्स है। बघरा स्थित योग साधना आश्रम के महंत यशवीर महाराज ने चेताया था कि 24 जून तक जावेद को गिरफ्तार नहीं किया गया तो 25 जून को उसके घर के बाहर हिन्दू महापंचायत होगी और उसकी गिरफ़्तारी तक धरना प्रदर्शन चलेगा। मोहम्मद ज़ुबैर ने जावेद की करतूत को सही ठहराने के साथ-साथ उलटे आक्रोशित हिन्दुओं को ही नीचा दिखाया था।

इंदौर में भाजपा नेता की गोली मारकर हत्या, निकालने वाले थे भगवा यात्रा: मध्य प्रदेश के मंत्री कैलाश विजयवर्गीय के थे करीबी

मध्य प्रदेश के इंदौर में एक भाजपा नेता की गोली मारकर हत्या कर दी गई है। मृतक का नाम मोनू कल्याणे है। कल्याणे कैबिनेट मंत्री कैलाश विजयवर्गीय का करीबी बताए जा रहे हैं। बीती रात (22 जून 2024) कुछ बदमाशों ने उन्हें गोली मार दी। इस घटना की जानकारी लोगों को जब सुबह लगी तो उनमें गुस्सा फैल गया। भीड़ ने आरोप‍ितों के घरों में तोड़फोड़ और आगजनी की।

कहा जा रहा है कि भाजपा नेता मोनू कल्याणे रविवार (23 जून 2024) को भगवा यात्रा निकालने वाले थे। यह यात्रा चिमनबाग से राजवाड़ा तक निकलने वाली थी। इसके लिए वह देर रात तक अपने साथियों के साथ इसकी तैयारियों में जुटे हुए थे। घटना की रात करीब 2 बजे चिमनबाग के समीप गणेश मंडल के सामने झंडे-बैनर लगवाने का काम चल रह था।

इसी दौरान दो बदमाश बाइक से आए उन पर अंधाधुन फायरिंग कर भाग गए। गोली मोनू के सीने में लगी और एक गोली दाएँ हाथ को छूते हुए निकल गई। मोनू के साथी गंभीर हालत में उन्हें एमवाय अस्पताल लेकर गए, जहाँ डॉक्टरों ने उन्हें मृत घोषित कर दिया। पुलिस ने इस घटना के आरोपितों की पहचान कर ली है। इस मामले में दो लोगों को नामजद आरोपित बनाया गया है।

पुलिस का कहना है कि यह घटना पुरानी रंजिश में अंजाम दी गई है। कल्याणे को पीयूष और अर्जुन ने गोली मारी है। दोनों आरोपित फिलहाल फरार हैं और उनकी तलाश की जा रही है। यह भी कहा जा रहा है गोली मारने से पहले दोनों ने कल्याण से कुछ बातचीत भी की थी। इसके साथ ही दोनों ने मोनू कल्याणे के साथियों पर भी फायरिंग की थी, लेकिन वे बच गए।

मोनू कल्याणे विधानसभा क्रमांक-3 में काफी सक्रिय थे। वह मध्य प्रदेश सरकार में कैबिनेट मंत्री कैलाश विजयवर्गीय और पूर्व विधायक आकाश विजयवर्गीय के विशेष समर्थकों में से एक थे। वे इन दोनों के बेहद करीबी बताए जाते हैं। इतना ही नहीं, मोनू कल्याणे भाजपा की युवा ईकाई भारतीय जनता युवा मोर्चा (BJYM) के पदाधिकारी भी थे।

चीन की ‘कठपुतली’ बना पाकिस्तान, चलाएगा ‘अज्म-ए-इस्तेकाम’ सैन्य ऑपरेशन: ड्रैगन ने डाला था दबाव, इसी के बाद आया फैसला

पड़ोसी मुल्क पाकिस्तान ने अपनी संप्रुभता चीन के हवाले कर दी है। उसके एक हालिया फैसले से यह बात साफ़ हो गई है। पाकिस्तान ने अब देश भर में आतंकवाद के कथित तौर पर खात्मे के लिए नया आतंक-विरोधी ऑपरेशन लॉन्च किया है। इसे ‘अज्म-ए-इस्तेकाम’ का नाम दिया गया है।

पाकिस्तान में रविवार (22 जून, 2024) को प्रधानमंत्री शाहबाज शरीफ के साथ फ़ौज के उच्चाधिकारियों की बैठक में इस ऑपरेशन को लॉन्च करने का निर्णय लिया गया है। पाकिस्तानी मीडिया ने बताया है कि इस ऑपरेशन के जरिए सुरक्षाबल इस्लामी मुल्क से कट्टरता और आतंक को उखाड़ने का प्रयास करेंगे।

इस ऑपरेशन को देश भर में लॉन्च किया जाएगा। इसका फोकस विशेष रूप से बलोचिस्तान और खैबर पख्तुन्ख्वा पर होने के कयास हैं। पाकिस्तान में होने वाले अधिकांश हमले यहीं होते हैं। इससे पहले पाकिस्तान ने वर्ष 2014 में आतंकियों के सफाए के लिए ज़र्ब ए अज्ब नाम का एक ऑपरेशन चालू किया था। यह नया ऑपरेशन इसी की तर्ज पर चालू किया मालूम होता है।

पाकिस्तान के इस फैसले के बाद उसकी नीयत पर प्रश्न उठ रहे हैं। दरअसल, इस नए ऑपरेशन के फैसले से कुछ ही दिन पहले चीन ने पाकिस्तान पर दबाव बनाया था कि वह इन्हें चालू करे। पाकिस्तान के भीतर चीन द्वारा बनाए जाने वाले कई प्रोजेक्ट पर बलोच विद्रोही हमला कर चुके हैं। चीन को इसके कारण जानमाल का नुकसान झेलना पड़ा है।

उसके पाकिस्तान के भीतर कई प्रोजेक्ट इस कारण से बंद हो गए हैं। बलोच विद्रोही इन चीनी प्रोजेक्ट को अपनी जमीन पर कब्जे की तरह देखते हैं। मार्च महीने में एक हमले में पाँच चीनी इंजीनियर मारे गए थे। इसके बाद चीन लगातार पाकिस्तान पर दबाव बना रहा था कि वह एक आतंक विरोधी अभियान चालू करे।

पाकिस्तान के प्रधानमंत्री शाहबाज शरीफ के हालिया चीन दौरे से पहले चीन ने यह माँग की थी। चीन के उप विदेश मंत्री सुन वेइडोंग ने पाकिस्तान के वरिष्ठ सैन्य अधिकारियों के साथ बैठक में माँग की थी कि पाकिस्तान जर्ब ए अज्ब जैसा ऑपरेशन चलाए। हालाँकि, तब यह कहा गया था कि पाकिस्तान ने इस माँग को ठुकरा दिया है।

अब पाकिस्तान के इस फैसले से प्रश्न उठे हैं कि क्या पाकिस्तान, चीन के दबाव में आकर यह काम कर रहा है। चीन ने हाल ही में पाकिस्तान के साथ रिश्तों को सबसे अधिक प्राथमिकता वाले दर्जे से हटाकर अधिक प्राथमिकता के दजे में डाल दिया गया था। दोनों देशों के बीच रिश्तों में खटास की खबरें भी आई थीं। इसके बाद पाकिस्तान ने यह कदम उठाया है। इस ऑपरेशन की घोषणा के बाद यह आशंका भी है कि इससे बलोच जनता पर अत्याचार किया जाएगा। इसे पूर्व के जर्ब ए अज्ब ऑपरेशन से भी ऐसी खबरें आई थीं।

स्थानीय जनसंख्या के नरसंहार की योजना थी ज़र्ब ए अज्ब

ऑपरेशन ज़र्ब-ए-अज्ब 15 जून 2014 को पाकिस्तान-अफ़गानिस्तान सीमा पर उत्तरी वज़ीरिस्तान प्रान्त में शुरू किया गया था। पाकिस्तान ने दावा किया था कि यह एक आतंकवाद विरोधी अभियान था। जबकि इस ऑपरेशन पर आरोप थे कि इससे पाकिस्तान समर्थक जिहादी समूह पनपे, स्थानीय लोगों को हत्याएँ हुई और पूरे इलाके में खून खराबा हुआ।

जर्मन मीडिया DW के अनुसार, पाकिस्तानी विशेषज्ञ और ओकलाहोमा विश्वविद्यालय में अंतरराष्ट्रीय मामलों के असिस्टेंट प्रोफेसर अकील शाह ने बताया था कि पाकिस्तानी फ़ौज के आतंकवाद विरोधी अभियान में अंतर्विरोधी बातें हैं। शाह ने बताया कि फ़ौज पाकिस्तान में हमले करने वाले आतंकवादियों पर कार्रवाई करती है, लेकिन वह अपने दुश्मनों पर हमला करने वालों को संरक्षण देती है।

DW से बात करते हुए शाह ने बताया था, “फ़ौज ने टीटीपी के दुश्मन गुटों से लड़ाई लड़ी है, लेकिन वह भारत के खिलाफ आतंकवादी समूहों का इस्तेमाल करना जारी रखती है।” उन्होंने हक्कानी नेटवर्क और अफगान तालिबान का उदाहरण दिया, जिसने पाकिस्तान को अफगानिस्तान पर अपना प्रभाव बनाए रखने में मदद की, साथ ही लश्कर-ए-तैयबा, जो भारत के खिलाफ आतंकवादी हमलों की योजना बनाना और उन्हें अंजाम देना जारी रखता है।

अमेरिकी विदेश मंत्री जॉन केरी ने भी अपनी भारत यात्रा के दौरान यही बात कही थी। नई दिल्ली में केरी ने कहा था, “यह साफ़ है कि पाकिस्तान को अपने आतंकी समूहों के खिलाफ़ और अधिक कठोर कार्रवाई करने की आवश्यकता है जो आतंकवादी गतिविधियों से जुड़े हैं।” उन्होंने पाकिस्तान से माँग की थी वह भारत में हमला करने वाले आतंकी को खत्म करने में सहायता करे ताकि दोंनो देशों के बीच शान्ति का वातावरण बन सके।

इस ऑपरेशन को लेकर कई विशेषज्ञों ने कहा था कि यह कभी आतंकियों को खत्म करने को लेकर चालू ही नहीं किया गया था। इस ऑपरेशन के दौरान पश्तूनों और बलोचों पर भी काफी अत्याचार हुए थे। बड़ी संख्या में लोगों को मारा गया था और काफी लोग गायब हो गए थे।

मणिपुर में 55 संवेदनशील क्षेत्रों की पहचान, सुरक्षा बलों की तैनाती शुरू: हिंसा पर लगाम, विस्थापितों की वापसी है प्राथमिकता

मणिपुर में जारी जातीय हिंसा को लेकर मुख्यमंत्री एन. बीरेन सिंह ने कहा है कि इसका समाधान 2-3 महीनों में निकाल लिया जाएगा। उन्होंने कहा कि इस बार पीएम मोदी की प्राथमिकता मणिपुर है। सीएम ने यह भी कहा कि लोकसभा चुनाव ड्यूटी के लिए विभिन्न राज्यों में गए सुरक्षा बल मणिपुर लौट आए हैं और उन्हें संवेदनशील क्षेत्रों में तैनात किया जा रहा है।

मुख्यमंत्री सिंह ने मीडिया से बातचीत में कहा, “पिछले कई महीनों में राज्य के अधिकांश हिस्सों में हिंसा की घटनाओं में काफी कमी आई है। कुछ जगहों से हिंसा की छिटपुट घटनाएँ सामने आई हैं। मणिपुर के अधिकांश हिस्सों में आम दिनों की तरह स्कूल, कॉलेज, कार्यालय और व्यावसायिक प्रतिष्ठान खुले हुए हैं।” इस दौरान पर लगाम और विस्थापितों की वापसी प्राथमिकता में शामिल है।

मुख्यमंत्री ने कहा कि तीसरी बार प्रधानमंत्री बनने के बाद पीएम नरेंद्र मोदी ने मणिपुर को सर्वोच्च प्राथमिकता दी है। वे राज्य में शांति स्थापित करने के लिए हरसंभव प्रयास कर रहे हैं। उन्होंने कहा, “प्रधानमंत्री और गृह मंत्री, दोनों मणिपुर में हो रहे घटनाक्रम पर लगातार नजर रख रहे हैं। वे राज्य में जातीय मुद्दों को सुलझाने के लिए ईमानदारी से प्रयास कर रहे हैं।”

मणिपुर की राज्यपाल अनुसुइया उइके ने भी राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू से मुलाकात की है। उन्होंने इस सप्ताह की शुरुआत में गृह मंत्री अमित शाह और वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण से भी मुलाकात की। राज्यपाल ने इन नेताओं को मणिपुर के विभिन्न राहत शिविरों में शरण लिए हुए विस्थापित लोगों की कठिनाइयों से अवगत कराया।

चुनाव ड्यूटी से वापस लौटने के बाद सुरक्षा बलों की विभिन्न इलाकों में तैनाती शुरू कर दी गई है। सुरक्षा बलों ने मणिपुर में लगभग 55 संवेदनशील क्षेत्रों की पहचान की है। राज्य में एक साल से अधिक समय से जारी जातीय हिंसा से निपटने के प्रयासों के तहत इन जगहों पर पर्याप्त सुरक्षा बल तैनात किए जाएँगे।

बता दें कि लोकसभा चुनावों के दौरान हिंसा प्रभावित पूर्वोत्तर राज्य के कुछ इलाकों से केंद्रीय बलों को अस्थायी रूप से हटा लिया गया था और उन्हें चुनावी ड्यूटी पर लगा दिया गया था। केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह ने मणिपुर में सुरक्षा स्थिति की समीक्षा के लिए एक उच्चस्तरीय बैठक की थी। इस दौरान उन्होंने केंद्रीय बलों की रणनीतिक तैनाती का निर्देश दिया था।

हालाँकि, कुछ इलाकों में सुरक्षा बलों की फिर से तैनाती का विरोध हो रहा है। हिल ट्राइबल काउंसिल ने एक बयान जारी कर तेंगनौपाल जिले में सीमा सुरक्षा बल (बीएसएफ) की तैनाती के प्रस्ताव की निंदा की है और इस तैनाती को वापस लेने की माँग की है। काउंसिल का कहना है कि सुरक्षा बलों की तैनाती से इलाके में शांति और सद्भाव को नुकसान पहुँचेगा।

ISRO की नई उपलब्धि, अब एक ही रॉकेट बार-बार उपयोग होगा, प्रयोग में पाई सफलता: फाइटर जेट की तरह उतरा RLV-LEX3

भारतीय अंतरिक्ष अनुसंधान संस्थान (ISRO) ने एक और उपलब्धि हासिल की है। ISRO का रीयूजेबल रॉकेट (RLV) बनाने के लिए किया गया प्रयोग सफल हुआ है। इसके लिए बनाए गए रॉकेट लॉन्च व्हीकल ने लैंडिंग करने में सफलता पाई है। इसके जरिए अब एक रॉकेट से ही कई बार सैटेलाईट लॉन्च किए जा सकेंगे।

ISRO ने यह जानकारी रविवार (23 जून, 2024) को दी है। उसने बताया है, “ISRO ने 23 जून, 2024 को रीयूजेबल लैंडिंग व्हीकल(RLV) ने लैंडिंग एक्सपेरिमेंट
(Lex) की अपनी तीसरी और अंतिम उड़ान में सफलता हासिल की है। ‘पुष्पक’ ने सटीक तरीके से जमीन पर सीधी लैंडिंग की है। RLV Lex के लक्ष्य को पूरा करने के साथ अब ISRO RLV -ORV की तरफ बढ़ेगा।” ISRO ने इस सफल लैंडिंग की कुछ फोटो और वीडियो भी जारी की हैं।

ISRO ने यह टेस्ट कर्नाटक के चित्रदुर्गा में किया है। ISRO के इस प्रयोगात्मक RLV ने तीसरे टेस्ट में 500 मीटर की क्रॉस रेंज पर लैंड होने में सफलता पाई, दूसरे टेस्ट में यह रेंज मात्र 150 मीटर थी। RLV को टेस्ट करने के लिए उसे भारतीय वायु सेना के एक चिनूक हेलिकॉप्टर से 4.5 किलोमीटर की ऊँचाई से छोड़ा गया था।

इसे रनवे से 4.5 किलोमीटर दूर हवा में छोड़ दिया गया था। इसके बाद यह स्वयं अपने सिस्टम चालू करके आटोमेटिक तरीके से रनवे पर लैंड कर गया। इस RLV की उतरते समय स्पीड किसी यात्री हवाई जहाज की 260 किलोमीटर/घंटा और फाइटर जेट की 280 किलोमीटर/घंटा से अधिक थी। इसकी उतरते समय स्पीड 320 किलोमीटर/घंटा थी। यह लैंडिंग किसी फाइटर जेट की तरह से हुई।

इसकी स्पीड घटाने के लिए पहले विमान के पिछले हिस्से में लगा पैराशूट खोला गया और जब उसने इसकी स्पीड घटाकर 100 किलोमीटर/घंटा कर दी तब इसके ब्रेक लगाए गए। इस लैंडिंग के बाद अब ISRO ऐसे ही रॉकेट लॉन्च करने वाले व्हीकल को धरती से ऊपर भेजेगा और प्रयोग करेगा।

दरअसल, ISRO का यह प्रयोग भविष्य में सैटेलाईट लॉन्च पर होने वाला खर्चा कम करेगा। पूरी दुनिया में अभी इस तकनीक पर काम चल रहा है। अमेरिका की कम्पनी स्पेसएक्स इस मामले में काफी आगे बढ़ चुकी है। सामान्यतः जब कोई सैटेलाईट लॉन्च करने के लिए किसी रॉकेट को एक ही बार उपयोग किया जा सकता है।

यह रॉकेट भेजना काफी महँगा होता है। ऐसे में यदि कोई रॉकेट सैटेलाईट को अन्तरिक्ष में पहुँचाने के बाद वापस धरती पर लैंड कर जाता है तो इसे अगली बार फिर इसी काम के लिए उपयोग किया जा सकता है। इसीलिए ISRO भी इस तकनीक पर काम कर रहा है। ISRO के मुखिया एस सोमनाथ ने इस सफलता पर बधाई दी है। इस पूरे मिशन के डायरेक्टर जे मुथुपांडियन हैं जबकि इस पुष्पक के डायरेक्टर बी कार्तिक हैं।