पश्चिम बंगाल पुलिस ने मोहम्मद हबीबुल्लाह नामक आतंकवादी को गिरफ्तार किया है। बर्धमान जिला स्थित मीरपारा से ये गिरफ़्तारी की गई है। शनिवार (22 जून, 2024) की शाम को अंजाम दी गई छापेमारी में STF को ये सफलता मिली। एक प्रतिबंधित बांग्लादेशी आतंकी संगठन के संबंध में मिली गुप्त सूचना के आधार पर ये कार्रवाई की गई। मोहम्मद हबीबुल्लाह बर्धमान के ही एक कॉलेज में कम्प्यूटर साइंस एन्ड इंजीनियरिंग की पढ़ाई करता है।
साथ ही अंसार-अल-इस्लाम (बांग्लादेश) नामक संगठन के साथ उसके संबंध सामने आए हैं। इसे अंसारुल्लाह बांग्ला टीम के रूप में भी जाना जाता है। स्पशेल टास्क फोर्स इस मामले में UAPA (गैर-कानूनी गतिविधि रोकथाम अधिनियम) के तहत काम कर रही है। उसके लैपटॉप, मोबाइल फोन व अन्य उपकरणों को जब्त कर लिया गया है। वो पश्चिम बंगाल में बांग्लादेशी आतंकी संगठन के मॉड्यूल के लिए काम कर रहा था। उसे काँकसा पुलिस थाने में लाया गया।
वहीं पर उससे पूछताछ की गई। आसनसोल-दुर्गापुर पुलिस कमिश्नरेट और STF के अधिकारियों ने उससे पूछताछ की। आगे की जाँच के लिए उसे कोलकाता भेजा जाएगा। पानागढ़ क्षेत्र से पश्चिम बंगाल पुलिस ने 5 अन्य लोगों को भी हिरासत में लिया है। उक्त छात्र से पूछताछ के दौरान मिली जानकारी पर काम करते हुए पुलिस ने नाभाघाट क्षेत्र से 5 अन्य संदिग्धों को हिरासत में लिया। शहादत-ए-अल हिकमा के साथ भी इनके संबंध सामने आ रहे हैं। ये सब संगठन अलकायदा के संबद्ध हैं।
Watch: The West Bengal Special Task Force arrested Mohammad Habibullah in West Burdwan's Kanksa area, suspecting his affiliation with the militant group Shahadat, which is linked to Ansar-al-Islam and potentially Al-Qaeda. Shahadat reportedly uses a secret messaging platform… pic.twitter.com/9SgGWTpboy
ये सब मिल कर पश्चिम और पूर्वी बर्धमान जिलों के युवाओं को आतंकी संगठनों में भर्ती कर रहे थे। इनके साथ और कौन-कौन संपर्क में था, इसका पता लगाया जा रहा है। मोहम्मद हबीबुल्लाह के पास से एक डायरी और कुछ दस्तावेज भी मिले हैं। इसी तरह 2016 में भी काँकसा में ISI से जुड़े एक छात्र को गिरफ्तार किया गया था। बता दें कि अलकायदा कश्मीर से लेकर अन्य इलाकों में भी भारत में अपने पाँव फैलाना चाहता है और कई साल से इस कोशिश में लगा है।
केंद्र सरकार ने नीट-यूजी परीक्षा विवाद को देकते हुए मामले की जाँच सीबीआई को सौंप दी। शनिवार (22 जून 2024) को इस बारे में फैसला लिया गया। केंद्रीय शिक्षा मंत्रालय की ओर से बताया गया कि विवाद की समीक्षा के बाद मंत्रालय ने मामले की व्यापक जाँच के लिए इसे सीबीआई को सौंपने का फैसला किया है।
प्रेस विज्ञप्ति में कहा गया है कि NEET-UG के संबंध में कथित अनियमितताओं/धोखाधड़ी/नकल के कुछ मामले सामने आए हैं। इसलिए परीक्षा प्रक्रिया के संचालन में पारदर्शिता के लिए सीबीआई जाँच का आदेश दिया गया है।
Ministry of Education entrusts the matter of alleged irregularities in NEET (UG) Examination 2024 to CBI for the comprehensive investigation. pic.twitter.com/KO95a5a8nD
— Ministry of Education (@EduMinOfIndia) June 22, 2024
बता दें कि केंद्र सरकार ने सार्वजनिक परीक्षाओं में अनुचित साधनों के इस्तेमाल को रोकने और उससे जुड़े या उससे संबंधित मामलों के लिए प्रावधान करने के लिए सार्वजनिक परीक्षा (अनुचित साधनों की रोकथाम) अधिनियम, 2024 भी लागू किया है। सरकार ने अपने बयान में कहा, “सरकार परीक्षाओं की पवित्रता सुनिश्चित करने और छात्रों के हितों की रक्षा करने के लिए प्रतिबद्ध है। यह दोहराया जाता है कि इसमें शामिल पाए जाने वाले किसी भी व्यक्ति/संगठन के खिलाफ सख्त कार्रवाई की जाएगी।”
इससे पहले, दिन में मंत्रालय ने नीट-यूजी परीक्षा में अनियमितताओं के आरोपों के बीच राष्ट्रीय परीक्षण एजेंसी (एनटीए) के कामकाज से संबंधित मुद्दों की जाँच के लिए एक उच्च स्तरीय विशेषज्ञ समिति का भी गठन किया। मंत्रालय ने कहा कि राष्ट्रीय परीक्षण एजेंसी (एनटीए) के माध्यम से परीक्षाओं का पारदर्शी, सुचारू और निष्पक्ष संचालन सुनिश्चित करने के लिए शिक्षा मंत्रालय के तहत उच्च शिक्षा विभाग ने विशेषज्ञों की एक उच्च स्तरीय समिति का गठन किया है।
समिति परीक्षा प्रक्रिया के तंत्र में सुधार, डेटा सुरक्षा प्रोटोकॉल में सुधार और राष्ट्रीय परीक्षण एजेंसी की संरचना और कार्यप्रणाली पर सिफारिशें करेगी। इसरो के पूर्व अध्यक्ष और आईआईटी कानपुर के बोर्ड ऑफ गवर्नर्स के अध्यक्ष डॉ. के. राधाकृष्णन समिति के अध्यक्ष होंगे। पाँच अन्य विशेषज्ञ समिति के सदस्य होंगे, जबकि मंत्रालय के एक संयुक्त सचिव सदस्य सचिव होंगे।
एक अन्य महत्वपूर्ण निर्णय में सरकार ने पूर्व केंद्रीय सचिव प्रदीप सिंह खरोला को एनटीए का नया महानिदेशक नियुक्त किया है। निवर्तमान महानिदेशक सुबोध कुमार को कार्मिक एवं प्रशिक्षण विभाग में अनिवार्य प्रतीक्षा पर रखा गया है, जो स्पष्ट रूप से दंडात्मक कदम है।
एक अन्य संबंधित घटनाक्रम में, केंद्रीय स्वास्थ्य मंत्रालय ने रविवार, 23 जून को होने वाली NEET-PG परीक्षा को स्थगित कर दिया। उल्लेखनीय है कि NEET-PG, एमबीबीएस ग्रेजुएट द्वारा मास्टर डिग्री में प्रवेश के लिए ली जाने वाली प्रवेश परीक्षा है। नीट-पीजी की परीक्षा नेट नहीं बल्कि नेशनल बोर्ड ऑफ एग्जामिनेशन इन मेडिकल साइंसेज (NBEMS) कराती है। यह एक कंप्यूटर आधारित परीक्षा (CBT) है, जबकि NEET-UG पेन और पेपर OMR आधारित है।
केंद्रीय स्वास्थ्य मंत्रालय ने कहा कि वह NEET-PG के लिए परीक्षा प्रक्रियाओं का व्यापक मूल्यांकन करेगा और नई तिथि की घोषणा की जाएगी। इससे पहले दिन में NBEMS ने आश्वासन दिया था कि परीक्षा सुचारू रूप से आयोजित की जाएगी।
भीषण गर्मी के बीच देश की राजधानी दिल्ली जल संकट से जूझ रही है। देश की राजधानी में रहने वाली जनसंख्या का एक बड़ा हिस्सा चिलचिलाती धूप के बीच पानी के लिए तरस रहा है। दिल्ली के VIP इलाकों में भी पानी के टैंकरों के पीछे-पीछे बच्चे और बूढ़े तक भाग रहे हैं। दिल्ली जल बोर्ड की तरफ से आने वाला पानी गंदा है। दरअसल, यह पूरी अव्यवस्था की स्थिति क्यों है, इसकी पोल अरविन्द केजरीवाल की आम आदमी पार्टी (AAP) सरकार के खुद के दस्तावेज खोलते हैं।
केजरीवाल सरकार द्वारा जनता में रखे गए कागज ही बताते हैं कि बीते 9-10 वर्षों में दिल्ली में पानी की आपूर्ति बढ़ाने पर कोई काम नहीं हुआ है। दिल्ली पानी आपूर्ति पर किए जाने वाले खर्चे भी कमी कर दी गई है। उस पर जितने खर्चे की योजना बन रही है, उसका आधा ही पैसा उसे दिया जा रहा है। इस बीच दिल्ली की जनसंख्या बढ़ती जा रही है।
राजधानी में पानी की माँग भी इन वर्षों में लगभग 30% तक बढ़ गई है, लेकिन धरना-प्रदर्शन वाली सरकार जमीन पर कुछ भी नहीं कर पाई है। अरविन्द केजरीवाल की सरकार के दावों की पोल उन्होंने खुद दिल्ली के आर्थिक सर्वे में खोली है। इस आर्थिक सर्वे में कई चौंकाने वाले खुलासे हैं।
पानी आपूर्ति बढ़ाने पर कोई काम नहीं
दूसरे राज्यों पर अपनी नाकामी का ठीकरा फोड़ने वाले केजरीवाल ने 2015 में स्थायी रूप से सत्ता में आने के बाद से दिल्ली में जल आपूर्ति क्षमता में कोई वृद्धि नहीं की है। इस क्षेत्र में उनका काम एकदम नगण्य है। उनसे पहले सत्ता में रहने वाली शीला दीक्षित के मुकाबले वह कहीं नहीं ठहरते।
दिल्ली को अलग-अलग स्रोतों पानी से मिलता है और इसे ट्रीटमेंट प्लांट में साफ करके भेजा जाता है। दिल्ली सरकार का 2023-24 का आर्थिक सर्वे बताता है कि वर्ष 2006 में दिल्ली में इस पानी साफ करने की क्षमता कुल 650 मिलियन गैलन/दिन थी। यह शीला दीक्षित सरकार के दौरान यह प्रति वर्ष बढ़ रही थी।
वर्ष 2015 तक आते आते यह क्षमता 906 मिलियन गैलन/दिन हो चुकी थी। यानी 2006 से 2013 के बीच दिल्ली में पानी साफ करने की क्षमता में 39% बढ़ोतरी हुई थी। इसके बाद केजरीवाल सत्ता में आ गए और मुफ्त पानी का वादा भी किया। 2015 के बाद से 2024 तक लगातार केजरीवाल लगातार सत्ता में हैं।
BG साभार: oneindia
उनके शासनकाल के दौरान दिल्ली की पानी साफ करने की क्षमता में मात्र 40 मिलियन गैलन/दिन की वृद्धि हुई और यह क्षमता 946 मिलियन गैलन/दिन पहुँच पाई। यानी जहाँ 2006-15 के बीच वृद्धि 39% हुई थी तो वहीं 2015-2024 में यह मात्र 4% रह गई। ऊपर दिए गए ग्राफ से यह तुलना आसानी से समझी जा सकती है।
पानी की माँग 9 सालों में 26% बढ़ी
केजरीवाल सरकार की इस शिथिलता का खामियाजा दिल्लीवासियों को भुगतना पड़ रहा है। केजरीवाल सरकार की इस नाकामी के बीच दिल्ली में पानी की माँग प्रति वर्ष बढ़ती जा रही है। दिल्ली में वर्ष 2006 में पानी की माँग 963 मिलियन गैलन/दिन थी, यह 2015 तक बढ़ कर 1020 मिलियन गैलन/दिन हो गई। 2023-24 के लिए दिल्ली की पानी माँग और बढ़ कर 1290 मिलियन गैलन/दिन हो चुकी है।
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ऐसे में साफ़ होता है कि जहाँ 2015 में दिल्ली पानी की रोजाना माँग का 94% पानी साफ करने की क्षमता उसके पास थी तो वहीं 2024 तक आते-आते यह 73% हो चुकी है। यानी दिल्ली वर्तमान में जितना पानी चाहती है, उतना पानी साफ करने की उसके पास क्षमता नहीं है। वर्तमान में दिल्ली की एक चौथाई पानी की माँग पूरे करने के साधन उसके पास नहीं हैं। दिल्ली की केजरीवाल सरकार इसका इलाज करने के बजाय अपने मंत्रियों को धरने पर बिठाने और दूसरे राज्यों पर दोष डालने में लगी हुई है।
सीवर ट्रीटमेंट क्षमता पर भी काम नहीं
केजरीवाल सरकार ने पानी साफ करने की क्षमता बढ़ाने पर तो नहीं ही काम किया, उन्होंने दिल्ली से निकलने वाले सीवरेज को साफ करने पर भी कोई ध्यान नहीं दिया। दिल्ली के सभी सीवर ट्रीटमेंट प्लांट की कुल क्षमता कमोबेश उतनी ही है, जितनी वह 2015 में हुआ करती थी। 2006 में दिल्ली के सभी सीवर ट्रीटमेंट प्लांट की कुल क्षमता 512 मिलियन गैलन/दिन हुआ करती थी। यह 2015 आते-आते 613 मिलियन गैलन/दिन हो चुकी थी। यानी इसमें 6 वर्ष के भीतर लगभग 100 मिलियन गैलन/ दिन की वृद्धि हुई थी।
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दिल्ली सरकार का 2023-24 का आर्थिक सर्वे बताता है कि मार्च 2023 में 632 मिलियन गैलन/दिन की क्षमता के सीवर ट्रीटमेंट प्लांट हैं। यानी 2015 से 2023 के बीच केजरीवाल सरकार ने मात्र 19 मिलियन गैलन/दिन सीवर ट्रीटमेंट क्षमता बढ़ाने का काम किया है जबकि उनकी पूर्ववर्ती सरकार ने 100 मिलियन गैलन/दिन क्षमता बढ़ाई थी।
दिल्ली सीवर से आने वाले पानी की सफाई को लेकर निवेश ना करना दिल्ली को दो तरह से नुकसान पहुँचा रहा है। पहला तो यह है कि गंदा पानी साफ होकर वापस दिल्ली वासियों को नहीं मिल पा रहा, जिससे पानी की कमी में और बढ़त हो रही है। वहीं इस गंदे पानी के साफ पानी के स्रोत में मिलने से और भी समस्या हो रही है। विशेषज्ञ बताते हैं कि यदि लम्बे समय ऐसा नहीं किया जाता तो साफ़ साफ पानी के स्रोतों की क्षमता भी कम हो जाती है।
दिल्ली में पानी के लिए खर्चे में भी कमी कर रही सरकार
दिल्ली की केजरीवाल सरकार जहाँ एक ओर लम्बे चौड़े वादे करती हैं तो वहीं जमीन पर काम करने के दौरान उसके सारे वादे हिरन हो जाते हैं। दिल्ली सरकार के आर्थिक सर्वे ने ही बताया है कि जितना पैसे की योजनाएँ दिल्ली में प्रति वर्ष बनाई जा रही हैं, उतना खर्च नहीं हो रहा। पिछले तीन वर्षों में इसमें भारी गिरावट आई है। आर्थिक सर्वे के अनुसार, 2020-21 के दौरान दिल्ली पानी की कमी को पूरा करने के लिए ₹4004 करोड़ खर्च करने की योजना बनाई गई थी। इसके मुकाबले ₹3584 करोड़ की ही धनराशि जारी की गई।
वर्ष 2021-22 के दौरान ₹2951 करोड़ खर्च की मंजूरी दी गई थी लेकिन इस वर्ष मात्र ₹1892 करोड़ ही जारी किए गए। 2022-23 में तो जितना बजट मंजूर हुआ उसकी आधी धनराशि ही जारी की गई। 2022-23 में दिल्ली में पानी से सम्बन्धित सुविधाओं पर ₹6344 करोड़ के खर्चे की मंजूरी दी गई थी। इसकी तुलना में मात्र ₹3171 करोड़ ही जारी किए गए।
पानी साफ करने की नई क्षमताओं का विकास ना करना, सीवर व्यवस्था को ना बढ़ाना और पानी की आपूर्ति पर खर्च ना करना दिल्ली में वर्तमान जल संकट का बड़ा कारण है। दिल्ली की AAP सरकार इस नाकामी का ठीकरा हरियाणा और हिमाचल प्रदेश पर फोड़ कर बचना चाह रही है। उसके मंत्री केंद्र सरकार को पत्र लिख रहे हैं, आरोप-प्रत्यारोप कर रहे हैं लेकिन जमीन पर काम नहीं कर रहे। मात्र जुबानी जमा खर्च करके ही काम चलाया जा रहा है।
बिहार के पूर्वी चम्पारण स्थित घोड़ासहन में एक निर्माणाधीन पुल ध्वस्त हो गया है। एक सप्ताह के भीतर बिहार में तीसरी ऐसी घटना सामने आई है, जो राज्य में सार्वजनिक इंफ्रास्ट्रक्चर के निर्माण कार्य में बड़े पैमाने पर हो रहे भ्रष्टाचार पर सवाल खड़े करते हैं। इससे पहले अररिया और सीवान में इसी तरह की घटना हुई थी। मोतिहारी में जो पुल ध्वस्त हुआ है उसे 2 करोड़ रुपए की लागत से बनाया जा रहा था। ये घटना घोड़ासहन प्रखंड के चैनपुर स्टेशन के लिए पहुँच मार्ग पर ये घटना हुई है।
इस पुल की लंबाई लगभग 50 फ़ीट थी। 16 मीटर के इस पुल को बिहार के रूरल वर्क्स डिपार्टमेंट (RWD) द्वारा बनवाया जा रहा था। ये घटना रविवार (23 जून, 2024) को हुई है। अमवा गाँव को अन्य इलाकों से जोड़ने के लिए एक लहर के ऊपर इस पुल का निर्माण किया जा रहा था। RWD के एडिशनल चीफ सेक्रेटरी दीपक कुमार सिंह ने कहा कि पुल के ध्वस्त होने का कारण अब तक नहीं पता चल सका है। उन्होंने इसे गंभीर मसला बताते हुए कहा कि इसकी जाँच के आदेश दे दिए गए हैं।
जिले के वरिष्ठ अधिकारी इस घटना के बाद मौके पर पहुँचे। विभाग को विस्तृत रिपोर्ट का इंतजार है। DM सौरभ जोरवाल ने कहा कि कुछ स्थानीय लोगों ने इस पुल के कुछ पिलरों के निर्माण का विरोध किया था। पुलिस इस कोण से भी जाँच कर रही है। इस पुल के बन जाने के बाद दरौंदा और मगराजगंज प्रखंडों के गाँवों के बीच आवागमन की सुविधा विकसित हो जाती। बिहार में पुलों के ध्वस्त होने के कारण जान की क्षति भले ही नहीं हो रही हो, लेकिन इससे भ्रष्टाचार उजागर हो रहा है।
इससे पहले सीवान में पटेढी-गरौली गाँवों के बीच बन रहा पुल ध्वस्त हो गया था। बिना आँधी-तूफान के ही ये पुल धड़ाम हो गया था। तब DM मुकुल गुप्ता ने कहा था कि नहर में पानी छोड़े जाने के कारण इसके खम्बे ढह गए थे। 20 फीट लंबा ये पुल 1991 में महराजगंज के तत्कालीन विधायक उमाशंकर सिंह की निधि से बना था। इसी तरह अररिया में 12 करोड़ रुपए की लागत से बन रहा पुल ढह गया था। सिकटी प्रखंड में बकरा नदी पर इसे बनाया जा रहा था।
मध्य प्रदेश के गुना में नाम बदलकर 20 साल की एक हिंदू युवती से दोस्ती करने और लगभग डेढ़ साल तक रेप का मामला सामने आया है। इस दौरान आरोपित अरशद ने युवती की अश्लील वीडियो भी बना ली और इस वीडियो के सहारे कई बार दुष्कर्म किया। इतना ही नहीं उसने युवती के साथ मारपीट की और धर्म बदलकर मुस्लिम बनने का भी दबाव बनाया। तंग आकर युवती ने थाने में शिकायत दर्ज कराई है।
कोतवाली थाना में दर्ज कराई अपनी शिकायत में युवती ने बताया कि वह गुना में रहकर प्राइवेट नौकरी है और उस पैसे को घर भेजती है। करीब दो साल पहले इंस्टाग्राम पर उसकी भय्यू नाम के युवक ने मैसेज किया। युवती ने पूछा कि वह कौन है और उसे कैसे जानता है तो आरोपित अरशद ने गोल-मोल जवाब दिए। धीरे-धीरे उसने युवती को अपनी जाल में फँसा लिया और उससे बात करने लगा।
युवती का कहना है कि एक दिन वह अस्पताल गई थी। वहाँ आरोपित भी पहुँच गया। वहाँ उसने युवती के साथ एक सेल्फी खींच ली। युवती ने बताया कि वह गुना में किराए का कमरा लेकर रहती है और वहाँ निजी संस्थान में नौकरी करती है। आरोपित ने उसके घर पता लगा लिया और वहाँ पहुँच गया। वहाँ पर उसने जान से मारने की धमकी देकर उसके साथ रेप किया और अश्लील तस्वीरें खींच लीं।
युवती का कहना है कि मूल रूप से वह एक बमोरी की रहने वाली है। उसके पिता मानसिक रूप से बीमार हैं। छोटा भाई पढ़ाई करता है और माँ गृहणी है। वह परिवार का खर्चा चलाने के लिए गुना शहर में किराए से मकान रहती है। रेप करने के बाद अश्लील तस्वीरों से आरोपित उसे ब्लैकमेल करने लगा। वह गुना में जीनघर का रहने वाला है। उसकी बातों से वह इनकार करती तो वह मारपीट करता था।
गुना
लव जिहाद
नाम बदल कर युवती से दोस्ती फिर डेढ़ साल तक रेप और मारपीट ।
आरोपी ने युवती का अश्लील वीडियो भी बनाया।
आरोपी ने सोशल मीडिया पर भय्यू नाम बताकर दोस्ती की थी।
युवती का कहना है कि करीब तीन महीने पहले उसके मोबाइल में कई मुस्लिम युवकों के कॉन्टैक्ट्स मिले। उसने भैय्यू से इस बारे में पूछा तो उसने अपना नाम अरशद बताया। युवती ने बताया कि सच्चाई साने आने के बाद वह उससे दूर होने की कोशिश की, लेकिन अरशद उसे ब्लैकमेल करता रहा। वह धर्म परिवर्तन का दबाव भी बनाने लगा।
युवती का कहना है कि अरशद उसे जींस पहनने की मना करने लगा। सूट और बुर्का पहनने के लिए बोलता था। इतना ही नहीं, जब मन करता था उसे वह बुला लेता था। युवती का कहना है, “अगर मैं ऑफिस में काम भी कर रही हूँ तो काम छोड़कर जाना पड़ता था। किराए के कमरे पर कभी भी आ जाता था।
युवती ने बताया, “पिछले डेढ़ वर्ष से अरशद ने बहुत टॉर्चर किया। वह मारपीट करता था। बीच बाजार में पिटाई करता था। यह देख एक दुकानदार ने कहा कि क्यों सहन कर रही हो? फिर भी घर और लोक लाज के डर से सहन करती रही। चेहरे और शरीर पर मारपीट के निशान हैं।”
बाद में अपने सहयोगियों की सलाह पर उन्हें हिंदू संगठनों संपर्क किया। उनके सहयोग से उसने कोतवाली थाने में शिकायत दर्ज कराई। कोतवाली पुलिस ने दुष्कर्म, मारपीट समेत कुछ अन्य धाराओं में मामला दर्ज कर छानबीन शुरू कर दी है।
गुजरात के सूरत में एक ऐसा बांग्लादेशी घुसपैठिया पकड़ा गया है, जो भारत में फर्जी भारतीय आईडेंटिटी लेकर आराम से जिंदगी काट रहा था। आरोपित का नाम मीनार हेमायत है। मीनार हेमायत को सूरत एसओजी ने गिरफ्तार किया है। वो शुवो सुनील दास नाम के फर्जी हिंदू पहचान के साथ रह रहा था और उसी नाम से उसके पास सारे फर्जी कागजात भी मिले हैं। इन कागजातों के दम पर वो 2 साल कतर की राजधानी दोहा में नौकरी कर चुका है।
मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक, मीनार हेमायत बांग्लादेशी मुस्लिम है। उसे सूरत के ऊना इलाके से गिरफ्तार किया गया। पुलिस ने शुवो सुनील दास के नाम से हिंदू पहचान के कई जाली दस्तावेज बरामद किए। आरोपी के पास से जन्म प्रमाण पत्र, स्कूल प्रवेश और छोड़ने के प्रमाण पत्र, बांग्लादेशी राष्ट्रीय पहचान पत्र और अन्य दस्तावेज सहित कई बांग्लादेशी दस्तावेज भी बरामद किए गए। भारतीय दस्तावेजों में पश्चिम बंगाल से स्कूल लीविंग सर्टिफिकेट, आधार कार्ड, कतर के लिए रेजिडेंट परमिट कार्ड, भारतीय पासपोर्ट और घर का रेंट एग्रीमेंट भी शामिल है।
रिपोर्ट्स के मुताबिक, हेमायत 2020 में पश्चिम बंगाल में सतखीरा सीमा के रास्ते बांग्लादेश से भारत आया था। उसे ममता बनर्जी की टीएमसी शासित पश्चिम बंगाल के नादिया जिले में हिंदू पहचान के तहत जाली दस्तावेज़ मिले। जाली दस्तावेज़ों का इस्तेमाल करके उसने भारतीय पासपोर्ट हासिल किया और 2021 से 2023 तक कतर के दोहा में काम किया। इसके बाद वह कंस्ट्रक्शन कंपनी में काम करने के लिए सूरत चला गया।
बता दें कि हाल ही में महाराष्ट्र एटीएस ने भारत में कई बांग्लादेशियों को पकड़ा है, जिसमें खुलासा हुआ है कि उनमें से कुछ ने हाल ही में हुए लोकसभा चुनावों में फर्जी दस्तावेजों के आधार पर मतदान भी किया था। जाँच में पता चला कि इन बांग्लादेशी घुसपैठियों ने गुजरात से अपने फर्जी पासपोर्ट बनवाए और उनका इस्तेमाल विदेश में नौकरी पाने के लिए किया। कुछ लोग जाली भारतीय दस्तावेजों का इस्तेमाल करके सऊदी अरब गए थे।
इन गिरफ्तारियों ने भारत के अलग-अलग हिस्सों में फर्जी पहचान के साथ रह रहे बांग्लादेशी घुसपैठियों की गंभीर चिंता को उजागर किया है। इस मामले में सरकार को और भी कड़े कदम उठाने की जरूरत है, क्योंकि ये राष्ट्रीय सुरक्षा के लिए बड़ा खतरा साबित हो सकता है।
पुणे में एक नामी बिल्डर के नाबालिग बेटे द्वारा शराब पीकर पोर्शे कार से कुचल कर इंजीनियर युवक और युवती को मार डालने का मामला ठंडा भी नहीं हुआ था कि शहर में इस तरह की एक और घटना हो गई है। इस बार विधायक के भतीजे की कार से कुचल कर एक शख्स की मौत हो गई। शनिवार (22 जून, 2024) की रात महाराष्ट्र के पुणे में 19 साल के लड़के की मौत हो गई। वो मोटरबाइक से था, वहीं कार गलत दिशा में सामने से आ रही थी।
पुलिस ने FIR दर्ज करते हुए कार चला रहे मयूर मोहिते को हिरासत में ले लिया। वो विधायक दिलीप मोहिते पाटिल का भतीजा है। दिलीप मोहिते NCP (अजीत पवार गुट) के विधायक हैं। उन्होंने शिरूर लोकसभा क्षेत्र स्थित खेड़ विधानसभा क्षेत्र से 2004 और 2009 में जीत दर्ज की थी। 2019 में एक बार फिर जीत दर्ज कर वो तीसरी बार MLA हैं। उनके भतीजे की संलिप्तता वाली दुर्घटना की बात करें तो ये रात के साढ़े 9 बजे मौजे एक्लाहारे गाँव में हुई है।
अम्बेगाँव तालुका अंतर्गत पुणे-नासिक रोड पर हुई इस घटना के संबंध में पुलिस ने बताया है कि मृतक की पहचान ओम भालेराव के रूप में हुई है। इस घटना के बाद विधायक पाटिल ने कहा है कि उनके भतीजे ने भागने का प्रयास नहीं किया। साथ ही उन्होंने अपने भतीजे के शराब के नशे में होने की बात से भी इनकार किया। मंचर पुलिस थाने में मामला दर्ज किया गया है। आरोपित फॉर्च्यूनर कार चला रहा था और रॉन्ग साइड पर था।
MLA दिलीप मोहिते पाटिल के भतीजे ने एक बाइक को मारी टक्कर
◆ घटना में बाइक सवार युवक की मौत, मृतक युवक की उम्र 19 साल थी
◆ पुलिस ने आरोपी मयूर मोहिते को गिरफ्तार किया
◆ बता दें कि दिलीप मोहिते पाटिल NCP अजित गुट के विधायक हैं
इसी दौरान मोटरबाइक से इसकी आमने-सामने की टक्कर हुई। दोनों गाड़ियाँ इस घटना में क्षतिग्रस्त हुई हैं। इस मामले में अभी जाँच चल रही है। बता दें कि पुणे में इससे पहले जो ऐसी घटना हुई थी, उसमें नाबालिगों वाली अदालत के जज ने आरोपित को ट्रैफिक नियमों के संबंध में 200 शब्दों का लेख लिखने की शर्त पर जमानत दे दी थी। उस दौरान भी NCP के विधायक सुनील विजय तिंगरे पर आरोपित की पैरवी करने का आरोप लगा था।
भारत के ओलंपिक मेडलिस्ट बजरंग पूनिया को राष्ट्रीय डोपिंग एजेंसी ( नाडा) ने फिर से सस्पेंड कर दिया है। उन्हें नियमों के उल्लंघन और जवाब न देने की वजह से अस्थायी तौर पर सस्पेंड किया गया है। नोटिस जारी करते हुए उन्हें 11 जुलाई तक का समय दिया गया है, तब तक सस्पेंशन जारी रहेगा।
रिपोर्ट्स के मुताबिक, नाडा ने उन्हें दूसरी बार सस्पेंड किया है। पिछली बार के सस्पेंशन के समय उन्हें नोटिस नहीं जारी किया गया था, जिसकी वजह से अनुशासनात्मक पैनल ने सस्पेंशन को रद्द कर दिया था, लेकिन इस बार उन्हें सस्पेंड करने के साथ ही नोटिस भी जारी किया गया है, जिसका जवाब देने केे लिए 11 जुलाई का समय दिया गया है। बता दें कि 10 जुलाई 2024 को सोनीपत में ट्रायल्स के दौरान बजरंग पूनिया हार गए थे और उनके पेरिस ओलम्पिक में भाग लेने की संभावनाएं खत्म हो गई थी। उन्होंने ट्रायल्स के बाद जरूरी यूरीन सैंपल देने से मना कर दिया था और ट्रायल्स के बीच ही कैंप छोड़कर चले गए थे।
नाडा ने बजरंग पूनिया को जो नोटिस भेजा है, उसमें लिखा है कि ‘डीसीओ ने आपको डोप टेस्ट के लिए यूरीन सैम्पल देने को कहा था। डीसीओ द्वारा किए गए कई अनुरोधों के बाद भी आपने इस आधार पर अपने यूरीन सैम्पल देने से इनकार कर दिया था। सैम्पल देने से इनकार के बाद नाडा के डीसीओ ने आपको इसके परिणामों के बारे में विस्तार से बताया था। आप पर राष्ट्रीय डोपिंग रोधी नियम, 2021 के अनुच्छेद 2.3 के उल्लंघन का आरोप लगा है। अब आपको अस्थाई रूप से निलंबित कर दिया गया है।’
बता दें कि बजरंग पूनिया को पेरिस ओलंपिक क्वॉलिफायर्स के लिए आयोजित नेशनल सेलेक्शन ट्रायल्स में हार झेलनी पड़ी थी। टोक्यो ओलंपिक के कांस्य पदक विजेता पूनिया को रोहित कुमार ने ट्रायल्स के दौरान सेमीफाइनल में हरा दिया था। जिसके बाद पेरिस ओलंपिक 2024 में भाग लेने का भी उनका सपना टूट गया।
गौतरलब है कि किसी भी खिलाड़ी के प्रतियोगिताओं में हिस्सा लेने के दौरान एक सप्ताह पहले और एक सप्ताह बाद के बीच के समय में अपना यूरीन सैंपल डोपिंग की जाँच के लिए देना होता है। ये अनिवार्य है। ऐसा न करने पर खिलाड़ियों के खिलाफ अनुशासनात्मक कार्रवाई की जाती है। ऐसा इसलिए किया जाता है, ताकि खिलाड़ी किसी तरह की डोपिंग न कर सकें। डोपिंग का मतलब किसी ऐसे पदार्थ या दवा के सेवन से है, जो खेल के दौरान खिलाड़ियों के प्रदर्शन को बेहतर करता है। ऐसा करना प्रतिबंधित है।
उत्तर प्रदेश की शामली जिले की पुलिस ने पशु हत्या की तस्वीर सोशल मीडिया पर पोस्ट करने वाले जावेद को गिरफ्तार कर लिया है। इस्लामी कट्टरपंथी जावेद ने बकरीद के दौरान हिन्दुओं की भावनाओं को ठेस पहुँचाने वाली फोटो डाली थी, जिसके बाद हिमाचल प्रदेश स्थित उसके दुकान में घुस कर आक्रोशित लोगों ने विरोध किया था। DSP श्रेष्ठा ठाकुर ने बताया कि कुर्बानी की तस्वीर को जावेद ने व्हाट्सएप्प पर स्टेटस लगा कर सांप्रदायिक सौहार्द बिगाड़ने की कोशिश की है।
उन्होंने बताया कि मामला संज्ञान में आने के साथ ही यूपी पुलिस ने इसकी तलाश शुरू कर दी थी और अंततः इसे गिरफ्तार कर लिया गया है। उसके खिलाफ उचित धाराओं में मुकदमा दर्ज कर के कार्रवाई की जानकारी दी गई है। जावेद का वीडियो भी सामने आया है, जिसमें वो थाने के पुरुष बंदी गृह में दिख रहा है। हिमाचल प्रदेश के सिरमौर जिले के नाहन में पहले से ही जावेद के खिलाफ FIR दर्ज है। वो शामली का रहने वाला है लेकिन वहाँ कारोबार करता था।
जलालाबाद के कोटला मोहल्ले के निवासी जावेद के अब्बा का नाम कल्लू कुरैशी है। वो पिछले 12-13 साल से नाहन में कपड़े और कॉस्मेटिक्स की दुकान चलाता है। ईद-उल-अजहा के मौके पर वो जलालाबाद आया था और इस दौरान पशु की कुर्बानी के बाद उसकी रील बना कर उसने Whatsapp पर स्टेटस लगा दिया। इसके बाद वहाँ आक्रोशित भीड़ ने उसकी दुकान में घुस कर सामान फेंक दिया था। शनिवार (22 जून, 2024) की देर रात उसे यूपी में गिरफ्तार किया गया।
शामली के पुलिस अधीक्षक अभिषेक ने बताया कि उक्त तस्वीर गाय की नहीं है, लेकिन ये काफी वीभत्स है। बघरा स्थित योग साधना आश्रम के महंत यशवीर महाराज ने चेताया था कि 24 जून तक जावेद को गिरफ्तार नहीं किया गया तो 25 जून को उसके घर के बाहर हिन्दू महापंचायत होगी और उसकी गिरफ़्तारी तक धरना प्रदर्शन चलेगा। मोहम्मद ज़ुबैर ने जावेद की करतूत को सही ठहराने के साथ-साथ उलटे आक्रोशित हिन्दुओं को ही नीचा दिखाया था।
मध्य प्रदेश के इंदौर में एक भाजपा नेता की गोली मारकर हत्या कर दी गई है। मृतक का नाम मोनू कल्याणे है। कल्याणे कैबिनेट मंत्री कैलाश विजयवर्गीय का करीबी बताए जा रहे हैं। बीती रात (22 जून 2024) कुछ बदमाशों ने उन्हें गोली मार दी। इस घटना की जानकारी लोगों को जब सुबह लगी तो उनमें गुस्सा फैल गया। भीड़ ने आरोपितों के घरों में तोड़फोड़ और आगजनी की।
कहा जा रहा है कि भाजपा नेता मोनू कल्याणे रविवार (23 जून 2024) को भगवा यात्रा निकालने वाले थे। यह यात्रा चिमनबाग से राजवाड़ा तक निकलने वाली थी। इसके लिए वह देर रात तक अपने साथियों के साथ इसकी तैयारियों में जुटे हुए थे। घटना की रात करीब 2 बजे चिमनबाग के समीप गणेश मंडल के सामने झंडे-बैनर लगवाने का काम चल रह था।
इसी दौरान दो बदमाश बाइक से आए उन पर अंधाधुन फायरिंग कर भाग गए। गोली मोनू के सीने में लगी और एक गोली दाएँ हाथ को छूते हुए निकल गई। मोनू के साथी गंभीर हालत में उन्हें एमवाय अस्पताल लेकर गए, जहाँ डॉक्टरों ने उन्हें मृत घोषित कर दिया। पुलिस ने इस घटना के आरोपितों की पहचान कर ली है। इस मामले में दो लोगों को नामजद आरोपित बनाया गया है।
पुलिस का कहना है कि यह घटना पुरानी रंजिश में अंजाम दी गई है। कल्याणे को पीयूष और अर्जुन ने गोली मारी है। दोनों आरोपित फिलहाल फरार हैं और उनकी तलाश की जा रही है। यह भी कहा जा रहा है गोली मारने से पहले दोनों ने कल्याण से कुछ बातचीत भी की थी। इसके साथ ही दोनों ने मोनू कल्याणे के साथियों पर भी फायरिंग की थी, लेकिन वे बच गए।
मोनू कल्याणे विधानसभा क्रमांक-3 में काफी सक्रिय थे। वह मध्य प्रदेश सरकार में कैबिनेट मंत्री कैलाश विजयवर्गीय और पूर्व विधायक आकाश विजयवर्गीय के विशेष समर्थकों में से एक थे। वे इन दोनों के बेहद करीबी बताए जाते हैं। इतना ही नहीं, मोनू कल्याणे भाजपा की युवा ईकाई भारतीय जनता युवा मोर्चा (BJYM) के पदाधिकारी भी थे।