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पूरी हुई 832 साल की प्रतीक्षा, राष्ट्र को PM मोदी ने समर्पित की नालंदा की विरासत: कहा- आग की लपटें ज्ञान को नहीं मिटा सकती

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी बिहार के राजगीर में नालंदा विश्वविद्यालय के नए परिसर का उद्धघाटन किया। नया परिसर नालंदा विश्वविद्यालय के प्राचीन खंडहरों के पास है, जिसे नालंदा विश्वविद्यालय अधिनियम, 2010 के माध्यम से स्थापित किया गया था। यह अधिनियम 2007 में फिलीपींस में दूसरे पूर्वी एशिया शिखर सम्मेलन में लिए गए निर्णय का पालन करता है। प्रधानमंत्री मोदी ने नालंदा विश्वविद्यालय के नए परिसर का उद्घाटन करने के बाद कहा, “नालंदा इस सत्य का उद्घोष है कि आग की लपटों में पुस्तकें भले जल जाएं लेकिन आग की लपटें ज्ञान को नहीं मिटा सकतीं।”

नालंदा विश्वविद्यालय में अपने संबोधन में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने कहा, “मुझे तीसरे कार्यकाल के लिए शपथ ग्रहण करने के बाद पहले 10 दिनों में ही नालंदा आने का अवसर मिला है। यह मेरा सौभाग्य तो है ही, मैं इसे भारत की विकास यात्रा के एक शुभ संकेत के रूप में देखता हूँ। नालंदा केवल एक नाम नहीं है। नालंदा एक पहचान है, एक सम्मान है। नालंदा एक मूल्य है, मंत्र है, गौरव है, गाथा है। नालंदा इस सत्य का उद्घोष है कि आग की लपटों में पुस्तकें भले जल जाएँ, लेकिन आग की लपटें ज्ञान को नहीं मिटा सकतीं।”

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने कहा कि मैं बिहार के लोगों को भी बधाई देता हूँ। बिहार अपने गौरव को वापस लाने के लिए जिस तरह विकास की राह पर आगे बढ़ रहा है, नालंदा का ये परिसर उसी की एक प्रेरणा है।

पीएम मोदी ने कहा, “नालंदा एक पहचान है, एक सम्मान है। नालंदा केवल भारत के ही अतीत का पुनर्जागरण नहीं है। इसमें विश्व के, एशिया के कितने ही देशों की विरासत जुड़ी हुई है। नालंदा यूनिवर्सिटी के पुनर्निर्माण में हमारे साथी देशों की भागीदारी भी रही है। मैं इस अवसर पर भारत के सभी मित्र देशों का अभिनंदन करता हूँ। अपने प्राचीन अवशेषों के समीप नालंदा का नवजागरण। ये नया कैंपस, विश्व को भारत के सामर्थ्य का परिचय देगा। जो राष्ट्र, मजबूत मानवीय मूल्यों पर खड़े होते हैं… वो राष्ट्र इतिहास को पुनर्जीवित करके बेहतर भविष्य की नींव रखना जानते हैं।”

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने कहा, “हम सभी जानते हैं कि नालंदा कभी भारत की परंपरा और पहचान का जीवंत केंद्र हुआ करता था… शिक्षा को लेकर यही भारत की सोच रही है… शिक्षा ही हमें गढ़ती है, विचार देती है और उसे आकार देती है। प्राचीन नालंदा में बच्चों का प्रवेश उनकी पहचान, उनकी राष्ट्रीयता को देख कर नहीं होता था। हर देश हर वर्ग के युवा हैं यहाँ पर। नालंदा विश्वविद्यालय के इस नए परिसर में हमें उसी प्राचीन व्यवस्था को फिर से आधुनिक रूप में मजबूती देनी है और मुझे ये देख कर खुशी है कि दुनिया के कई देशों से आज यहाँ कई विद्यार्थी आने लगे हैं।

डॉ कलाम ने नालंदा विश्वविद्यालय को फिर से स्थापित करने की जताई थी इच्छा: नीतीश कुमार

सीएम नीतीश कुमार ने कहा कि खुशी की बात है कि नालंदा विश्वविद्यालय के परिसर का उद्घाटन आज प्रधानमंत्री मोदी के करकमलों से किया जा रहा है। पुराने नालंदा विश्वविद्यालय में देश के ही नहीं दुनिया की अनेक जगह के लोग आकर पढ़ते थे लेकिन दुर्भाग्य से ये विश्वविद्यालय 1200 ईस्वी में नष्ट हो गया था। 2005 से हम लोगों को काम करने का मौका मिला तब से हमने बिहार के विकास का काम शुरू किया। 2006 में तत्कालीन राष्ट्रपति ए.पी.जे. अब्दुल कलाम बिहार आए थे और उन्होंने अपने संबोधन में नालंदा विश्वविद्यालय को फिर से स्थापित करने की बात की थी।

साल 2014 से अस्थाई कैंपस में संचालित हो रहा था नालंदा विश्वविद्यालय

मूल रूप से पाँचवीं शताब्दी में स्थापित नालंदा विश्वविद्यालय, दुनिया भर के छात्रों को आकर्षित करने वाला एक प्रसिद्ध संस्थान था। यह 12वीं शताब्दी में नष्ट होने तक 800 वर्षों तक फलता-फूलता रहा। आधुनिक विश्वविद्यालय ने 2014 में 14 छात्रों के साथ एक अस्थायी स्थान से परिचालन शुरू किया। नए परिसर का निर्माण 2017 में शुरू हुआ। नालंदा विश्वविद्यालय को ऑस्ट्रेलिया, बांग्लादेश, भूटान, चीन, इंडोनेशिया और थाईलैंड सहित 17 अन्य देशों का समर्थन प्राप्त है, जिन्होंने समझौता ज्ञापन (MOU) पर हस्ताक्षर किए हैं। विश्वविद्यालय अंतर्राष्ट्रीय छात्रों को 137 छात्रवृत्तियाँ प्रदान करता है। 2022-24 और 2023-25 ​​के लिए स्नातकोत्तर कार्यक्रमों और 2023-27 के पीएचडी कार्यक्रम में नामांकित अंतर्राष्ट्रीय छात्रों में अर्जेंटीना, बांग्लादेश, कंबोडिया, घाना, केन्या, नेपाल, नाइजीरिया, श्रीलंका, अमेरिका और जिम्बाब्वे के छात्र शामिल हैं।

नालंदा विश्‍वविद्यालय कैम्पस में 40 कक्षाओं वाले दो शैक्षणिक ब्लॉक हैं, जिनकी कुल बैठने की क्षमता लगभग 1900 है। इसमें 300 सीटों की क्षमता वाले दो सभागार हैं। इसमें लगभग 550 छात्रों की क्षमता वाला एक छात्र छात्रावास है। इसमें अंतरराष्ट्रीय केंद्र, 2000 व्यक्तियों तक की क्षमता वाला एम्फीथिएटर, फैकल्टी क्लब और खेल परिसर सहित कई अन्य सुविधाएँ भी हैं। यह परिसर एक ‘नेट जीरो’ ग्रीन कैंपस है।

यूनेस्को की विश्व धरोहर सूची में शामिल

साल 1193 में दिल्ली सल्तनत के शासक कुतुबुद्दीन ऐबक के सेनापति मोहम्मद बिन बख्तियार खिलजी ने आग लगाकर इस विश्‍वविद्यालय को जला दिया था। इस यूनिवर्सिटी की लाइब्रेरी में इतनी किताबें थीं कि 3 दिनों तक आग धधकती रही। आज ये नालंदा खंडहर के रूप में जाना जाता है और यूनेस्‍को की विश्‍व धरोहर सूची में शामिल है।

इसकी नींव गुप्त राजवंश के कुमार गुप्त प्रथम ने रखी थी। पाँचवीं सदी में बने प्राचीन विश्वविद्यालय में करीब 10 हजार छात्र पढ़ते थे, जिनके लिए 1500 अध्यापक हुआ करते थे. छात्रों में अधिकांश एशियाई देशों चीन, कोरिया और जापान से आने वाले बौद्ध भिक्षु होते थे। इतिहासकारों के मुताबिक, चीनी भिक्षु ह्वेनसांग ने भी सातवीं सदी में नालंदा में शिक्षा ग्रहण की थी। उन्होंने अपनी किताबों में नालंदा विश्वविद्यालय की भव्यता का जिक्र किया है। यह ज्ञान और बुद्धिमत्ता के प्रसार की दिशा में प्राचीन भारत के योगदान का गवाह है।

नालंदा विश्‍वविद्यालय के नए परिसर के उद्घाटन के मौके पर प्रधानमंत्री के साथ भारत के विदेश मंत्री एस जयशंकर, बिहार के राज्यपाल राजेंद्र विश्वनाथ आर्लेकर, मुख्यमंत्री नीतीश कुमार, नालंदा विश्वविद्यालय के कुलाधिपति अरविंद पनगढ़िया भी मौजूद रहे। इसके साथ ही नालंदा विश्वविद्यालय के स्थापना में अहम योगदान देने वाले कुल 17 देशों के राजदूत भी शामिल हुए, तो नालंदा विश्वविद्यालय में अध्ययन कर रहे कई देशों के छात्र-छात्राएं भी इस अवसर पर उपस्थित रहे।

गाँव की 150+ औरतों की नग्न तस्वीर इंस्टाग्राम पर डाली, जैकब-जोसेफ-लुकोस गिरफ्तार: साथ पढ़ने वाली लड़कियों से लेकर चर्च आने वाली महिलाएँ तक शिकार

केरल के कासरगोड जिले के एक गाँव में तीन युवकों ने मिलकर अपने ही गाँव की 150 से अधिक महिलाओं की फर्जी नग्न तस्वीरें बनाईं। इन तीनों ने यह तस्वीरें बनाने के लिए आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) तकनीक का सहारा लिया। तीनों युवकों को पुलिस ने गिरफ्तार कर लिया है।

ऑनमनोरमा की एक रिपोर्ट के अनुसार, कासरगोड के चित्तरीक्क्ल थाने की पुलिस ने जस्टिन जैकब, एबिन जोसेफ और शिबिन लुकोस को गिरफ्तार किया है। यह तीनों पिछले डेढ़ साल से अपने गाँव की महिलाओं की नग्न तस्वीरें बना रहे थे। इन्होंने इन तस्वीरों को एक निजी इन्स्टाग्राम अकाउंट पर अपलोड किया था, जिसे गिने चुने लोग ही देख सकते थे।

यह अपने गाँव और आसपास की महिलाओं की फोटो सोशल मीडिया से लेते थे और AI सॉफ्टवेयर के माध्यम से एडिट करते थे और उनकी नग्न तस्वीरें बनाते थे। जिन महिलाओं की तस्वीरें सोशल मीडिया के माध्यम से नहीं मिलती थी, उनकी यह फोटो अपने कैमरे से खीँच लेते थे।

इन तीनों ने अपने साथ पढ़ने वाली कम से कम 40 छात्राओं की फोटो भी एडिट करके नग्न तस्वीरें बनाई थी। यह रविवार को प्रार्थना के लिए चर्च आने वाली महिलाओं को भी निशाना बनाते थे। इनके इस कृत्य से अब गाँव की महिलाओं में दहशत फ़ैल गई है।

इस पूरे मामले का खुलासा इनके एक दोस्त के माध्यम से हुआ। दरअसल, तीनों आरोपितों में से एक सिबिन का एक दोस्त एक बार उससे मिलने आया। यहाँ उसने सिबिन के फोन में अपनी एक रिश्तेदार की अश्लील फोटो देखी, इसके बाद उसने जब पड़ताल की तो सैकड़ों ऐसे फोटो पाए।

उसने इस बात की सूचना अपनी रिश्तेदार और पुलिस को दी। इसके बाद जब पुलिस ने तीनों पर कार्रवाई की तो सिबिन और एबिन ने अपने फ़ोन से फोटो हटा दिए जबकि जस्टिन के फोन में यह फोटो पड़ी थीं। इसी आधार पर तीनों को पकड़ लिया गया।

बताया गया कि तीनों आरोपितों में से एबिन इस वर्ष कक्षा 12 की परीक्षा में फेल हो गया था। जबकि शिबिन और जस्टिन बसों को धोने का काम करते हैं। पुलिस ने इन तीनों को गिरफ्तार करके आईटी एक्ट की धारा 67 के तहत मामला दर्ज किया है। अभी तक चार शिकायतकर्ता सामने आए हैं जबकि कई और के सामने आने की बात कही जा रही है।

फिर सामने आई कनाडा की दोगलई: जी-7 में शांति पाठ, संसद में आतंकी निज्जर को श्रद्धांजलि; खालिस्तानियों ने कंगारू कोर्ट में PM मोदी को दी फाँसी

कनाडा सरकार का दोहरा चेहरा एक बार फिर से बेनकाब हुआ है। एक तरफ कनाडा का प्रधानमंत्री जस्टिन ट्रूडो जी-7 के दौरान प्रधानमंत्री मोदी से मुलाकात करता है और दोनों देशों के बीच सहयोग की बात करता है, तो दूसरी तरफ वो खालिस्तानी आतंकियों के प्रति अपना रवैया बदलता नहीं दिख रहा है। कनाडा में एक साल पहले मारे गए खालिस्तानी आतंकी हरदीप सिंह निज्जर को कनाडा की संसद में न सिर्फ श्रद्धांजलि दी गई, बल्कि उसके सम्मान में 2 मिनट का मौन रखकर उसे इज्जत भी दी।

ये वही हरदीप सिंह निज्जर है, जिसकी कनाडा में हत्या के बाद कनाडा के प्रधानमंत्री जस्टिन ट्रूडो ने खुलेआम बिना किसी ठोस सबूत के भारत का नाम घसीटा था। जिसकी वजह से दोनों देशों के बीच तनाव हो गया था। इस बीच, वैंकूवर में भारतीय दूतावास के बाहर खालिस्तान समर्थकों ने रैली निकाली और प्रदर्शन भी किया। खालिस्तान समर्थकों ने पीएम मोदी के पुतले के खिलाफ फर्जी केस चलाकर सुनवाई भी की और पुतले को फाँसी पर भी लटकाया। इस मामले में भारत सरकार ने भी तीखी प्रतिक्रिया दी है।

मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक, कनाडा की संसद ने खालिस्तानी आतंकी हरदीप सिंह निज्जर के लिए दो मिनट का मौन रखकर उसे श्रद्धांजलि दी, कनाडाई संसद ने यह शर्मनाक हरकत तब की है जब 23 जून को कनिष्क विमान हादसे के 39 साल पूरे हो रहे हैं। कनिष्क विमान में धमाका हुआ था, जिस पर आरोप खालिस्तानी आतंकियों पर लगा था। इस धमाके में कनाडाई नागरिकों की भी मौत हुई थी, जिसे कनाडा के इतिहास का सबसे बड़ा आतंकी हमला माना जाता है। इन सबके बावजूद कनाडा न सिर्फ खालिस्तानी तत्वों को आश्रय दे रहा है, बल्कि बढ़ावा भी दे रहा है। आज खालिस्तानी तत्व कनाडा की राजनीति पर अहम पकड़ रखने लगे हैं। यही नहीं, कनाडा की संसद नाजी सैनिक को भी संसद में सम्मान दे चुकी है।

बता दें कि खालिस्तानी आतंकी हरदीप सिंह निज्जर की पिछले साल 18 जून को एक गुरुद्वारे की पार्किंग में हमलावरों ने गोली मारकर हत्या कर दी थी। हरदीप सिंह कनाडा के वैंकूवर शहर स्थित गुरु नानक सिख गुरुद्वारा का अध्यक्ष भी था। हरदीप सिंह निज्जर खालिस्तान आंदोलन से जुड़ा भारतीय मूल का एक कनाडाई सिख अलगाववादी नेता था। भारत सरकार की ओर से उसे आतंकवादी घोषित किया गया था। वह आतंकवादी संगठन खालिस्तान टाइगर फोर्स से जुड़ा हुआ था।

पीएम मोदी पर चर्चा हत्या का मुकदमा

इस बीच, मंगलवार (18 जून 2024) को वैंकूवर में भारतीय दूतावास के सामने खालिस्तान समर्थकों ने रैली निकाली। इस दौरान उन्होंने सड़कों पर पीएम मोदी पर मुकदमा चलाने जैसी झाँकी निकाली और प्रतीकात्मक रूप से उन्हें मुजरिम के तौर पर पेश किया। यही नहीं, मॉक ट्रायल शुरू होने से पहले जेल की वर्दी पहने मोदी के पुतले को एक अस्थायी पिंजरे में रखकर सड़क पर घुमाया गया। इसके बाद उनके पुतले को सजा सुनाई गई और फाँसी दे दी गई। इस मामले पर भारत सरकार ने तीखा विरोध दर्ज कराया और कनाडा को सबूतों के साथ डाँट लगाई। भारतीय दूतावास ने कनाडा की सरकार से एक बार फिर से कहा है कि वो खालिस्तानी तत्वों और भारत सरकार के विरोधियों को बढ़ावा न दे।

लाश, कुत्ते, डिलीवरी ब्वॉय… ऐसे खुला रेणुका स्वामी की हत्या का राज, छिपाने के लिए एक्टर दर्शन ने दिए थे ₹30 लाख: ऑटोप्सी रिपोर्ट से नए खुलासे

कर्नाटक के फैन हत्याकांड मामले में कुछ नए खुलासे हुए हैं। सबसे पहले तो रेणुका स्वामी की ऑटोप्सी रिपोर्ट से पता चला है कि रेणुका को अपहरण के बाद मार-मारकर इतना टॉर्चर किया गया था कि उसके शरीर से अत्यधिक खून बहने के कारण वो शॉक में चला गया था और उसका हैमरेज हो गया था। इसके अलावा इस मामले में पुलिस की जाँच से ये भी सामने आया है कि आरोपितों ने हत्या के बाद खून से सने कपड़े बदलने के लिए रिलायंस स्टोर से जाकर कपड़े खरीदे थे। पुलिस ने एक्टर के कपड़े और अन्य सबूत उसके आरआर नगर स्थित आवास से किए हैं।

गिरफ्तारी के बाद दर्शन ने बताया था कि उसने हत्या की रात पहने कपड़े उसके घर पर छोड़े थे। ऐसे में पुलिस दर्शन को घर लेकर गई, जहाँ छानबीन में पहले कुछ नहीं मिला। बाद में टेरेस पर देखा तो वहाँ कपड़ों को धोकर सूखने के लिए डाल दिया गया था। पुलिस ने सारे कपड़े, जूते भी घर से बरामद किए हैं। दर्शन की रिमांड कॉपी से ये भी जानकारी सामने आ रही है कि अभिनेता ने इस मामले में अपने नाम को रफा-दफा कराने के लिए आरोपित प्रदोष को कुल 30 लाख रुपए दिए थे। इस रकम में बाकी आरोपितों को दी गई 5-5 लाख रुपए की राशि भी सम्मिलित थी। पुलिस को पड़ताल में आरोपितों के घर से इन रुपयों में से कुछ रुपए बरामद भी हुए हैं।

वहीं आरोपितों ने पूछताछ में बताया है कि उन्होंने रेणुका स्वामी को पीटने के लिए लाठी, पेड़ की टूटी छड़ और बोतल का इस्तेमाल किया था। छानबीन में घटनास्थल से पुलिस को रेणुकास्वामी के कपड़े बरामद हुए हैं। पुलिस ने घटना को अंजाम देने के लिए प्रयोग में लाई गई स्कॉर्पियो भी जब्त कर ली है। कार की बैक सीट पर खून के धब्बे मिले हैं। पुलिस ने अब तक कुल 10 फोन को फॉरेंसिक जाँच के लिए भेजा है।

ये भी मालूम चला है कि आरोपित प्रदोश और राघवेंद्र ने मृतक के मोबाइल फोन को नाले में फेंक सबूत मिटाने की कोशिश की। इसके बाद राघवेंद्र ने मृतक के कपड़ों को आरआर नगर की खाली जगह पर ठीकाने पर लगाया। इसके बाद शव को भी नाले के पास फेंक दिया गया, जिसे कुत्तों को नोचते एक फूड डिलीवरी ब्वॉय ने देखा और फिर उसने इस संबंध में जानकारी दी, तब जाकर मामला खुला।

बकरीद पर भी पाकिस्तान में अहमदिया मुस्लिमों की प्रताड़ना नहीं हुई बंद, पुलिस ने घर-घर जाकर मारा छापा: कुर्बानी देने पर 36 गिरफ्तार

पाकिस्तान में अल्पसंख्यकों का दमन लगातार जारी है। पाकिस्तान के पुलिस-प्रशासन को अहमदिया समुदाय का बकरीद के मौके पर कुर्बानी देना भी रास नहीं आ रहा है। ऐसा करने वालों पर पाकिस्तान की पुलिस अत्याचार कर रही है। कुर्बानी देने वालों के घरों में छापे मारे जा रहे हैं।

मीडिया रिपोर्ट्स के अनुसार, बकरीद के बाद पाकिस्तान में पुलिस ने कम से कम 36 अहमदिया को गिरफ्तार किया है। इनका अपराध यह है कि इन्होने बकरीद के दिन कुर्बानी दी थी। पाकिस्तान में अहमदियों का कुर्बानी देना अपराध है। अहमदियों को पाकिस्तान में गैर-मुस्लिम माना गया है।

अहमदिया समुदाय के लिए पाकिस्तान में काम करने वाली संस्था जमात-ए-अहमदिया के सदस्य आमिर महमूद ने मीडिया को बताया, “पाकिस्तान भर में ईद-उल-अजहा के मौके पर पशुओं की कुर्बानी करने के आरोप में अल्पसंख्यक अहमदिया समुदाय के कम से कम 36 सदस्यों को गिरफ्तार किया गया है। इनमें से अधिकतर लोग पंजाब प्रांत के हैं।”

जमात ने आरोप लगाया कि पाकिस्तान में पुलिस भी इस प्रताड़ना में हिस्सा ले रही है। वह अहमदियों के घरों पर जाकर छापे मार रही है। जहाँ भी कोई अहमदिया परिवार कुर्बानी करते मिलता है, तो उस परिवार सदस्यों को गिरफ्तार किया जा रहा है साथ में कुर्बानी वाले पशु को भी जब्त किया जा रहा है।

अहमदियों का पाकिस्तान में उत्पीड़न यहाँ तक बढ़ गया है कि उन्हें ईद की नमाज तक पढ़ने से रोका गया। पाकिस्तान की कट्टर इस्लामी पार्टी तहरीक-ए-लब्बैक इस आग में घी डालने का काम कर रही है और अहमदियों को धमका रही है। पाकिस्तानी पुलिस के अहमदियों को गिरफ्तार करने के वीडियो भी सामने आए हैं।

अहमदियों को प्रताड़ित करने का ऐसा ही एक मामला पंजाब के टोबा टेक सिंह जिले से सामने आया है। यहाँ गोजरा गाँव में बकरीद के मौके पर एक अहमदिया मुस्लिम पर बकरा कुर्बान करने का आरोप लगाकर उसके खिलाफ FIR दर्ज करवाई गई है। FIR में कहा गया है कि अहमदिया व्यक्ति ने खुद को मुसलमान बताकर एक अपराध किया है।

यह शिकायत तहरीक-ए-लब्बैक ने दर्ज करवाई है। शख्स को गिरफ्तार कर लिया गया है। अहमदियों की प्रताड़ना का यह कोई अकेला मौका नहीं है। जून महीने में ही पाकिस्तान के मंडी बहाउद्दीन इलाके में दो अहमदियों की गोली मारकर हत्या कर दी गई थी।

अहमदियों को पाकिस्तान में कानून बनाकर प्रताड़ित किया जाता रहा है। उन्हें मुस्लिम का दर्जा नहीं दिया जाता और वह ऊँचे सरकारी पदों पर भी नहीं बैठ सकते। पाकिस्तान में अहमदियों को कोई भी सरकारी कागज लेने के लिए एक शपथ पत्र दाखिल करना होता है जिसमें वह खुद को गैर मुस्लिम घोषित करते हैं।

पिता YSRCP का सांसद, बेटी ने BMW से फुटपाथ पर सोए युवक को रौंदा: मौके से भागी ‘नवाबजादी’, अगले दिन गिरफ्तार हुई तो थाने से ही मिल गई बेल

तमिलनाडु की राजधानी चेन्नई में राज्यसभा सांसद बीड़ा मस्ताव राव की बेटी ने अपनी बीएमडब्ल्यू कार से एक व्यक्ति को रौंद दिया, जिसकी अस्पताल ले जाते समय मौत हो गई। हादसे के बाद सांसद की बेटी माधुरी मौके से फरार हो गई, हालाँकि तब तक उसकी सहेली मौके पर रुकी थी और उसके एंबुलेंस बुलाया, लेकिन उसके बाद वो भी फरार हो गई। मृतक के परिजनों के हंगामे के बाद पुलिस ने आरोपित माधुरी को गिरफ्तार कर लिया, हालाँकि उसे थाने से ही जमानत दे दी गई।

बता दें कि पुणे में एक रईसजादे के बेटे ने पोर्श कार से 2 युवा इंजीनियरों की जान ले ली थी, जिसके बाद उसे गिरफ्तार किया गया था, लेकिन 300 शब्दों का निबंध लिखने के बाद उसे जमानत मिल गई थी। इस मामले ने बाद में कई मोड़ लिए और अब तीन पीढ़ियों के लोग जेल के भीतर हैं। वहीं, ऐसा ही एक मामला नागपुर से सामने आया है, जहाँ इंजीनियरिंग के छात्रों ने पार्टी के बाद घर जाते समय फुटपाथ पर सो रहे लोगों पर कार चढ़ा दी, जिसमें 17 लोग घायल हो गए। उनमें से दो महिलाओं की मौत हो गई।

सांसद की बेटी से जुड़ा क्या है मामला?

इंडिया टुडे की रिपोर्ट के मुताबिक, सोमवार (17 जून 2024) की रात वाईएसआर कॉन्ग्रेस पार्टी के राज्यसभा सांसद बीड़ा मस्तान राव की बेटी माधुरी अपनी सहेली के साथ बीएमडब्ल्यू कार चला रही थी, तभी उसने चेन्नई के बेसेंट नगर में नशे की हालत में फुटपाथ पर सो रहे 24 वर्षीय पेंटर सूर्या को कार से कुचल दिया। हादसे के तुरंत बाद माधुरी मौके से फरार हो गई, जबकि उसकी दोस्त कार से उतरी और एंबुलेंस को कॉल किया। इस दौरान वो एक्सीडेंट के बाद इकट्ठा हुए लोगों से बहस भी करती दिखी। हालाँकि बाद में वो भी फरार हो गई। वहाँ मौजूद लोगों ने पीड़ित पेंटर को अस्पताल पहुँचाया, लेकिन उसकी मौत हो गई। बताया जा रहा है कि अभी 8 माह पहले ही उसकी शादी हुई थी।

इस हादसे के बाद उसके रिश्तेदार और कॉलोनी के लोग जे-5 शास्त्री नगर पुलिस स्टेशन पहुँच गए और कार्रवाई की माँग करने लगे। पुलिस ने सीसीटीवी फुटेज की जाँच कर कार का पता लगाया और एंबुलेंस को बुलाने के लिए किए गए कॉल के आधार पर माधुरी तक पहुँची और उसे गिरफ्तार कर लिया। हालाँकि माधुरी को पुलिस स्टेशन से ही जमानत भी मिल गई। माधुरी के पिता बीड़ा मस्तान राव साल 2022 से YSRCP के राज्यसभा सांसद हैं। वो विधायक भी रह चुके हैं और सी-फूड बिजनेस में उनका बड़ा नाम है।

महाराष्ट्र में पुणे-पोर्श जैसा काँड, इंजीनियरिंग के छात्रों ने 17 को रौंदा-2 की मौत

इस बीच, रविवार (16 जून 2024) की रात महाराष्ट्र के नागपुर में पुणे-पोर्श कांड जैसा मामला सामने आया। यहाँ इंजीनियरिंग की पढ़ाई कर रहे 6 युवकों ने देर रात तक एक ढाबे पर पार्टी की और बाद में फुटपाथ पर कार चढ़ा दी। इस हादसे में 2 महिलाओं की मौत हो गई, तो 7 लोग गंभीर रूप से घायल हो गए, इसमें कई छोटे बच्चे हैं। यही नहीं, इस हादसे में 8 अन्य लोगों के भी घायल होने की जानकारी मिली है।

बताया जा रहा है कि शराब पीकर गाड़ी चला रहे युवकों को 2 पुलिसवालों ने रोकने की कोशिश की थी, लेकिन उन्होंने पुलिस वालों पर भी गाड़ी चढ़ाने की कोशिश की थी। इसी क्रम में टोल नाके के पास उनकी गाड़ी पंक्चर हो गई और एक कार से टकरा गई और फिर तेज रफ्तार गाड़ी फुटपाथ पर चढ़ गई। जहाँ सो रहे लोगों को कुचल दिया। यही नहीं, नशे में होने की वजह से उन्होंने कार को फुटपाथ पर भी आगे पीछे किया और गाड़ी पलट गई। इसके बाद कार में बैठे सभी 6 लोग फरार हो गए थे। बाद में पुलिस ने गाड़ी चला रहे भूषण लांजेवार और उसके दोस्तों – वंश जादे, सन्मय पत्रिकर, अथर्व वनायत, अथर्व मोगरे और ऋषिकेश चौबे को गिरफ्तार कर लिया है।

पुलिस ने सोमवार (17 जून 2024) को बताया कि लांजेवार और उसके दोस्त, सभी इंजीनियरिंग के छात्र हैं या इंजिनियरिंग खत्म कर चुके हैं। उन पर आईपीसी की धारा 304 (II) (गैर इरादतन हत्या) और अन्य धाराओं के तहत आरोप लगाए गए हैं। मृतकों की पहचान 42 वर्षीय कांतिबाई बागड़िया और 30 वर्षीय सीताराम बागड़िया के रूप में हुई है। घायलों में से सात की हालत गंभीर है, जबकि आठ अन्य को इलाज के बाद छुट्टी दे दी गई।

‘हमारे बारह’ पर जो बॉम्बे हाई कोर्ट ने कहा, वही हम भी कह रहे- मुस्लिम नहीं हैं अल्पसंख्यक… अब तो बंद हो देश के सबसे बड़े ‘मजहब’ का तुष्टिकरण

‘हमारे बारह’ फिल्म को लेकर उठे विवाद पर बॉम्बे हाईकोर्ट में पीठ ने सुनवाई करते हुए कुछ टिप्पणी की हैं। कोर्ट ने कहा है कि ‘हमारे बारह’ फिल्म उन्होंने देखी और उन्हें इस फिल्म में कुछ भी आपत्तिजनक नहीं लगा। फिल्म का उद्देश्य वास्तव में महिलाओं का उत्थान है।

जस्टिस बीपी कोलाबावाला और फिरदौस पूनीवाला की खंडपीठ ने कहा कि फिल्म का पहला ट्रेलर आपत्तिजनक था, लेकिन उन्होंने (निर्माताओं ने) उसे हटा दिया और साथ ही फिल्म से आपत्तिजनक सीन भी हटा दिए गए हैं।

अदालत ने कहा कि ये एक ऐसी फिल्म है जिसे देख विचार किया जाए, न कि ऐसी फिल्म है जिसे लेकर दर्शकों से अपेक्षा की जाए कि वो अपना दिमाग घर पर रखकर इसे देखें।

हाई कोर्ट ने कहा कि इस फिल्म में मौलाना को कुरान की गलत व्याख्या करते दिखाया गया, और एक मुस्लिम व्यक्ति उसी दृश्य पर आपत्ति जताता है… लोगों से यही अपेक्षा की जाती है कि लोगों को अपने दिमाग का इस्तेमाल करना चाहिए और ऐसे मौलानाओं की बातें आँख मूँदकर नहीं माननी चाहिए।

कोर्ट ने कहा कि उन्हें फिल्म देखखर नहीं लगा कि कोई ऐसी चीज है इसमें जो हिंसा भड़काने वाली है। अगर लगता, तो पहले ही इस पर आपत्ति जता देते। भारत की जनता इतनी भोली या मूर्ख नहीं है कि उसे ये सब समझ न आए।

मामले की सुनवाई के दौरान कोर्ट ने यह भी गौर किया कि फिल्म निर्माताओं ने सेंसर बोर्ड से प्रमाण पत्र पाने के पहले ही फिल्म का ट्रेलर रिलीज कर दिया था, इसलिए अदालत ने उनपर जुर्माना लगाया। साथ ही कहा कि ट्रेलर रिलीज करके उल्लंघन तो किया गया है इसलिए याचिकाकर्ता की पसंद की चैरिटी के अनुसार भुगतान करना होगा।

कोर्ट ने कहा कि बिन प्रमाण पत्र हासिल किए जो ट्रेलर रिलीज किया गया वो थोड़ा परेशान करने वाला था। अदालत ने निर्माताओं को सावधान रहकर काम करने की सलाह दी। उन्होंने कहा कि रचनात्मक स्वतंत्रता की आड़ में किसी भी मजहब की भावनाओं को ठेस पहुँचाने वाले संवाद और दृश्य नहीं जोड़े जाने चाहिए।

अदालत ने इस पूरी सुनवाई के दौरान एक महत्वपूर्ण टिप्पणी यह भी दी कि निर्माओं को सावधान रहना चाहिए कि वो पेश क्या कर रहे हैं। वे किसी भी धर्म को ठेस पहुँचाने का काम नहीं कर सकते हैं। मुस्लिम इस देश का दूसरा सबसे बड़ा मजहब है।

अदालत ने माना मुस्लिम देश का दूसरा सबसे बड़ा धर्म हैं

मालूम हो कि अदालत द्वारा कि गई यह महत्वपूर्ण टिप्पणी आज के समय में इसलिए भी इतनी जरूरी है क्योंकि आजकल राजनीति में मुस्लिमों को अल्पसंख्यक बताकर खूब तुष्टिकरण किया जाता है। कभी उनके लिए आरक्षण माँगा जाता है तो कभी उनके लिए अलग से कानून की बातें होती हैं। अगर इन माँगों पर सुनवाई न हो तो कहा जाता है कि देश में तानाशाह आ गया है जो देश के अल्पसंख्यकों को कुचलने और दबाने के प्रयास हो रहे हैं। हकीकत जबकि यह है कि भारत में मुस्लिमों की संख्या सिर्फ हिंदुओं से कम है, बाकी वो अन्य किसी भी धर्म के मुकाबले ज्यादा आबादी है. इसलिए उन्हें अल्पसंख्यक कहना सिर्फ उन लोगों के अधिकार को मारने जैसा है जो हकीकत में इस देश में कम आबादी में हैं और मुस्लिमों से ज्यादा आरक्षण जैसी सुविधाओं की उनको ज्यादा जरूरत है।

2011 में हुई जनगणना के अनुसार, देश के 19.3% अल्पसंख्यकों में से मुसलमानों की जनसंख्या 14.2% है। वहीं ईसाई 2.3%, सिख 1.7%, बौद्ध 0.7%, जैन 0.4% और पारसी 0.006% हैं। इसके अलावा संख्या की भी बात करें तो पीआईबी पर प्रकाशित जानकारी बताती है कि उस समय मुस्लिमों की संख्या 17 करोड़ 22 लाख 45 हजार 158 के आसपास थी जो आज के समय में कहा जाता है 23-24 करोड़ तक पहुँच गई है। जबकि सिखों की संख्या तब 20 लाख 833 हजार 116 थी, ईसाइयों की 27 लाख 819 हजार 588 थी, जैन की 4,451,753, बौद्धों की 8,442,972 संख्या थी।

आँकड़े सामने होने के बावजूद भी समय-समय पर मुस्लिमों को अल्पसंख्यक कहकर उनके लिए सहानुभूति इकट्ठा करने का काम होता रहा है। हमारे बारह जैसी फिल्में आती हैं तो उनपर विचार करने से पहले ये ऐलान कर दिया जाता है वो अल्पसंख्यकों की भावनाओं को आहत करेंगी। ये नहीं सोचा जाता कि फिल्म का मूल संदेश क्या है और क्या वजह रही कि उस मुद्दे को पर्दे पर उठाना जरूरी हो गया। मामला चाहे तीन तलाक का हो या फिर हलाला का हो… ये मुद्दे कभी समुदाय विशेष से जुड़े नहीं होते बल्कि महिलाओं को अधिकार दिलाने के लिए उठाया जाता है और इन पर बोला जाता है। इस पर केवल अल्पसंख्यक की भावनाएँ आहत हो जाएँगी जैसी बात करना राजनीति का हिस्सा का हो सकता है, सामाजिक उत्थान का नहीं।

NEET पर जिस आयुषी पटेल के दावों को प्रियंका गाँधी ने दी हवा, उसके खुद के दस्तावेज फर्जी: कहा था- NTA ने रिजल्ट नहीं दिया, हाई कोर्ट में झूठी साबित हुई

लखनऊ की रहने वाली एक छात्रा आयुषी पटेल ने हाल ही में नेशनल टेस्टिंग एजेंसी (NTA) पर आरोप लगाया गया था कि एजेंसी ने उनका NEET परीक्षा का परिणाम जारी नहीं किया। आयुषी का आरोप था कि उनकी OMR शीट को NTA द्वारा फटा बताया गया। इसको लेकर आयुषी पटेल ने इलाहाबाद हाई कोर्ट में याचिका भी दाखिल की थी। अब आयुषी पटेल के सभी आरोप कोर्ट में झूठे साबित हुए हैं। आयुषी ने फर्जी दस्तावेजों के आधार पर NTA पर यह आरोप लगाए थे।

मंगलवार (18 जून, 2024) को इलाहाबाद हाई कोर्ट में इस मामले पर हुई सुनवाई में आयुषी पटेल झूठी साबित हुई हैं। NTA ने आयुषी पटेल की असली OMR शीट भी कोर्ट के सामने रख दी जिसे आयुषी ने भी स्वीकार किया। इस OMR शीट के अनुसार, आयुषी के 720 में से 355 नम्बर हैं।

इलाहाबाद हाई कोर्ट में झूठी साबित होने के बाद आयुषी पटेल ने अपनी याचिका भी वापस लेने का अनुरोध किया। कोर्ट ने NTA को छूट दी है कि वह आयुषी पटेल के खिलाफ नियमानुसार एक्शन ले। कोर्ट ने यह याचिका भी खारिज कर दी। आयुषी पटेल के खिलाफ धोखाधड़ी का भी मामला बन रहा है।

दरअसल, NEET परिणाम जारी होने के बाद आयुषी पटेल ने दावा किया था कि उसका परिणाम नहीं जारी किया। आयुषी ने दावा किया था कि जब उन्होंने इस संबंध में NTA को इमेल भेज कर शिकायत की तो उन्हें एक फटी OMR शीट की फोटो भेजी गई और इसी आधार पर उनका परिणाम रोक लिया गया। आयुषी ने इसके बाद एक वीडियो बनाया था जो कि सोशल मीडिया पर वायरल हो गया था। आयुषी पटेल के लिए न्याय की माँग की जा रही थी।

NTA ने इसको लेकर स्पष्ट किया था कि उसने आयुषी पटेल को कोई OMR शीट नहीं भेजी है। दूसरी तरफ आयुषी ने जिस फटी OMR शीट के आधार पर NTA पर आरोप लगाए थे उसका नम्बर और आयुषी पटेल की असली OMR शीट का नम्बर भी अलग निकला।

कोर्ट में भी यह बात कही गई कि आयुषी ने NTA की तरफ से सामने रखी गई OMR शीट को अपनी माना है लेकिन वह फिर भी दूसरे नम्बर वाली OMR शीट के आधार पर अपना परिणाम ना दिए जाने का दावा कर रही थीं। आयुषी पटेल ने कोर्ट के समक्ष यही फर्जी दस्तावेज रख कर याचिका लगाई थी।

आयुषी पटेल ने इन्हीं फर्जी दस्तावेजों के आधार NTA NEET परीक्षा में घोटाले का आरोप लगाया था और खूब सिम्पथी बटोरी थी। आयुषी पटेल का वीडियो कॉन्ग्रेस नेता प्रियंका गाँधी ने भी बिना तथ्यों का मिलान किए एक्स पर डाला था। प्रियंका गाँधी ने इसके जरिए सरकार पर हमला बोला था। हालाँकि, अब जब आयुषी पटेल का दावा झूठा निकला है, तब उन्होंने कोई भी ट्वीट नहीं किया।

गौरलतब है कि हाल ही में NEET परीक्षा का परिणाम NTA ने जारी किया था। इसको लेकर देश भर के कई छात्रों ने प्रश्न उठाए थे। कुछ जगहों पर परीक्षा के दौरान गड़बड़ी की शिकायतें आई थीं। इस मामले को लेकर भी सुप्रीम कोर्ट में सुनवाई चल रही है।

‘बिजली चोरों ने बिछाए तार, झारखंड में 2 भैंसों की मौत’: शवों को निकाल रहे लोगों पर मुस्लिम भीड़ ने बोला हमला, कहा – हिन्दुओं से खाली कराई जाएँ जमीनें

झारखंड के बोकारो में सांप्रदायिक तनाव की खबर है। यहाँ करेंट लगने से 2 भैंसों की मौत होने के बाद 2 समुदाय के लोग आमने-सामने आ गए। दोनों तरफ से पत्थरबाजी की गई जिसमें लगभग एक दर्जन लोग घायल हो गए। घायलों में पुलिसकर्मी भी शामिल हैं। हालात सँभालने के लिए पुलिस ने आँसू गैस के गोले छोड़े। मामले की जाँच की जा रही है। घटना सोमवार (17 जून, 2024) की है।

मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक, घटना बोकारो के विकास नगर इलाके की है। सोमवार को यहाँ के भर्रा पुल क्षेत्र में गुजर रहे बिजली के तारों की चपेट में 2 भैंसे आ गईं। ये दोनों मृत भैंसे दूध के एक कारोबारी की थीं। इस घटना के बाद एक पक्ष भड़क गया। उसका आरोप था कि जिन तारों के करेंट से भैंसों की मौत हुई हैं वो बिजली चोरी करने वालों द्वारा बिछाए गए है। तारों को काट कर मृत भैंसों को निकालने के प्रयास किए जा रहे थे। तभी मुस्लिम पक्ष के लोग मौके पर पहुँच गए। दोनों पक्षों में बहस शुरू हो गई।

बताया जा रहा है कि कुछ ही देर की बहस के बाद पथराव शुरू हो गया। पथराव की चपेट में आ कर दोनों तरफ के लगभग 1 दर्जन लोग घायल हो गए। हालात काबू करने के लिए मौके पर पुलिस बल पहुँचा। हिंसक भीड़ ने पुलिस वालों पर भी पत्थर फेंके। पत्थरबाजी में 2 पुलिसकर्मी चोटिल हो गए। आँसू गैस के गोले छोड़ कर हिंसा को काबू किया गया। घायलों का अस्पताल में इलाज करवाया गया। हालात कबूल करने के लिए मौके पर अतिरिक्त फ़ोर्स की तैनाती कर दी गई है। दोनों ही पक्ष एक दूसरे पर हमले का आरोप लगा रहे हैं।

जिस मालिक की दोनों भैंसे मरी थीं वो प्रशासन से मुआवजे की माँग कर रहे थे। दोनों पक्षों को बिठा कर समझाया गया है। मुस्लिम समुदाय के लोगों ने हिन्दुओं पर अवैध जमीन कब्ज़ा कर के रहने का आरोप लगाया। उन्होंने प्रशासन से फ़ौरन ही हिन्दुओं से वो जमीन खाली करवाने की माँग की। पुलिस मामले की जाँच कर रही है। पुलिस का कहना है कि हिंसा के असल कारणों की पड़ताल कर के आरोपितों के खिलाफ कड़ी कार्रवाई की जाएगी।

मोहम्मद आज़ाद ने ईंट फेंक कर राजकपूर शर्मा को मार डाला: पहले से रहा है आपराधिक इतिहास, दूसरी मंजिल से जानबूझकर किया था वार

बिहार के दरभंगा जिले में एक व्यक्ति की छत से ईंट फेंक कर हत्या कर दी गई है। 53 वर्षीय मृतक का नाम राजकपूर शर्मा है। हत्या का आरोप मोहम्मद आज़ाद नाम के व्यक्ति पर लगा है। पुलिस ने बताया है कि मोहम्मद आज़ाद का पहले भी आपराधिक इतिहास रहा है। रविवार (16 जून 2024) को आरोपित को गिरफ्तार कर के जेल भेज दिया गया है। घटना गुरुवार (13 जून, 2024) की है।

मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक, यह मामला दरभंगा जिले के थाना क्षेत्र बहेड़ी का है। यहाँ के वार्ड नंबर 10 में रहने वाले बिन्दे शर्मा ने पुलिस में शिकायत दर्ज करवाई थी। शिकायत में उन्होंने बताया था कि 13 जून को रात लगभग 9 बजे उनके चचेरे भाई राजकपूर शर्मा पैदल ही कहीं जा रहे थे। इसी रास्ते में वार्ड नंबर 10 में ही मोहम्मद आज़ाद का भी घर पड़ता है। रात में वह अपनी छत पर था। जैसे ही राजकपूर आरोपित आज़ाद के घर के सामने से गुजरे उनके सिर पर ईंट का जोरदार वार हुआ।

शिकायतकर्ता का आरोप है कि ये वार मोहम्मद आज़ाद द्वारा दूसरी मंजिल से जानबूझ कर हत्या कर देने की नीयत से किया गया था। सिर पर ईंट लगने से राजकपूर गंभीर रूप से घायल हो गए। उनको इलाज के लिए पहले स्थानीय अस्पताल में भर्ती करवाया गया। हालत गंभीर होते देख पीड़ित को DMCH में रेफर कर दिया गया। डॉक्टरों ने राजकपूर को बचाने की बहुत कोशिश की लेकिन वो नाकाम रहे। शनिवार (15 जून) को राजकपूर ने दम तोड़ दिया। उनकी मौत के बाद उनके परिजन बिन्दे शर्मा ने पुलिस में शिकायत दी।

पुलिस ने इस शिकायत पर तत्काल मुकदमा दर्ज कर के जाँच शुरू कर दी। जाँच में पता चला कि नियामत के बेटे मोहम्मद आज़ाद ने जानबूझ कर राजकपूर के सिर पर दूसरी मंजिल से ईंट फेंकी थी। पुलिस ने मोहम्मद आज़ाद को आपराधिक प्रवृत्ति का बताते हुए कहा है कि वो पहले भी इस प्रकार के अपराध कर चुका है। आज़ाद का पुराना आपराधिक इतिहास भी रहा है। वह पहले भी चोरी के केस में जेल काट चुका है। रविवार (16 जून) को मोहम्मद आज़ाद को गिरफ्तार कर के जेल भेज दिया गया है। मामले में पुलिस द्वारा आगे की जाँच व अन्य जरूरी कानूनी कार्रवाई की जा रही है।