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बसपा के पूर्व MLC हाजी इकबाल की 4440 करोड़ की यूनिवर्सिटी को ED ने किया जब्त: दुष्कर्म से लेकर मनी लॉन्ड्रिंग के आरोप, अरब देशों में छिपा बैठा है माफिया

उत्तर प्रदेश के कुख्यात खनन माफिया और बसपा के पूर्व एमएलसी हाजी मोहम्मद इकबाल पर प्रवर्तन निदेशालय (ED) ने बड़ी कार्रवाई करते हुए अवैध रूप से बनाई गई यूनिवर्सिटी को जब्त कर लिया है। हाजी इकबाल फिलहाल फरार है और माना जाता है कि वह दुबई में कहीं छिपा हुआ है। वहीं, जब्त यूनिवर्सिटी का संचालन उसके भाई और बेटों कर रहे थे।

हाजी इकबाल पर अवैध खनन के अलावा, मनी लॉन्ड्रिंग सहित कई तरह के गंभीर आरोप हैं। उसके खिलाफ देश की कई एजेंसियाँ जाँच कर रही हैं। प्रवर्तन निदेशालय ने उसकी जिस ग्लोकल यूनिवर्सिटी को जब्त किया है, उसकी इमारत एवं जमीन की कीमत लगभग 4,440 करोड़ रुपए है। वहीं, मोहम्मद इकबाल के चार बेटे हैं। बेटों और भाई के खिलाफ भी कई मामले दर्ज हैं और वे जेल में बंद हैं।

एजेंसी के अनुसार, मनी लॉन्ड्रिंग केस की जाँच एजेंसी ने एक कुर्की आदेश जारी किया था। इसके बाद 121 एकड़ जमीन और ग्लोकल यूनिवर्सिटी की इमारत को जब्त कर लिया गया है। प्रवर्तन निदेशालय (ईडी) ने एक बयान में कहा कि ये संपत्तियाँ अब्दुल वाहिद एजुकेशनल एंड चैरिटेबल ट्रस्ट के नाम पर दर्ज हैं। इन पर मोहम्मद इकबाल और उनके परिवार के सदस्यों का कंट्रोल था।

हाजी इकबाल ने खनन के कारोबार हजारों करोड़ रुपए की संपत्ति इकट्ठा की है। राज्य की हर सरकार में उसकी पैठ रही है। हाजी इकबाल ने मिर्जापुर इलाके में लोगों को डरा धमकाकर करीब 121 एकड़ जमीन खरीदी और उस पर एक आलीशान यूनिवर्सिटी बनाई थी। यह यूनिवर्सिटी शुरू से विवादों में रही है, क्योंकि इसे बरसती नदियों पर कब्जा करके अवैध तरीके से बनाया गया है।

साल 2017 में वह चुनाव हार गया। इस बीच सरकार की नजर भी उसके काले कारनामों पर पड़ी। इसके बाद हाजी इकबाल, उसके छोटे भाई महमूद अली तथा हाजी इकबाल के चारों बेटों, रिश्तेदारों और सहयोगियों पर शिकंजा कसना शुरू हो गया। हाजी इकबाल, उसके सहयोगियों और परिजनों पर अवैध खनन, मनी लॉन्ड्रिंग, डरा-धमकाकर जमीन कब्जाने के साथ-साथ दुष्कर्म के आरोप भी हैं।

हाजी इकबाल को पुलिस ने गैंग लीडर बताया है। कार्रवाई शुरू होने के दौरान हाजी इकबाल देश छोड़कर फरार हो गया। वहीं, यूपी पुलिस ने हाजी इकबाल के छोटे भाई महमूद अली और हाजी इकबाल के बेटों एवं रिश्तेदारों को गिरफ्तार कर जेल भेज दिया है। वहीं, लंबे समय तक हाजी इकबाल कोर्ट में पेश नहीं हुआ तो कोर्ट ने उसे भगोड़ा घोषित कर दिया। उस पर पुलिस ने लाखों रुपए का इनाम घोषित किया है।

सीबीआई और ED ने भी अपनी जाँच में हाजी इकबाल पर कई मामले दर्ज किए हैं। हाजी इकबाल और उसके सहयोगियों की यूपी से लेकर उत्तराखंड तक अरबों रुपए की संपत्ति कुर्क की गई है। उसके घरों को बुल्डोजर से गिरा दिया गया है। इसके बावजदू वह कोर्ट में पेश नहीं हुआ। माना जाता है कि वह दुबई या किसी अन्य अरब मुल्क में छिपा बैठा हुआ है।

कुछ महीने पहले हाजी इकबाल की एक फोटो मिडिल ईस्ट के एक बड़े उद्योगपति के साथ वायरल हुई थी। बाद में हाजी इकबाल ने अपने वकील द्वारा वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग से पेशी की गुहार लगाई। हाजी इकबाल विदेश में बैठकर ही कोर्ट में पेश होता है। हाजी इकबाल को कुछ मामलों में राहत भी मिली है। हाजी इकबाल उत्तर प्रदेश के सहारनपुर का रहने वाला है।

‘राज्य में मौत का तांडव’: बंगाल के राज्यपाल ने कहा- चुनाव बाद की हिंसा पीड़ितों से नहीं मिलने दे रही ममता सरकार, HC पूछा- गवर्नर हाउस अरेस्ट हैं?

लोकतंत्र का सबसे बड़ा त्योहार चुनाव है, लेकिन पश्चिम बंगाल के लोगों के लिए यह अभिशाप बन गया है। बंगाल में हर चुनाव के बाद राजनैतिक हत्या का सिलसिला शुरू हो जाता है। लोकसभा चुनाव 2024 के चुनाव खत्म होने के बाद एक बार फिर ऐसे ही आरोप लगाए जा रहे हैं। बंगाल के राज्यपाल सीवी आनंद बोस ने राज्य की ममता बनर्जी सरकार में राज्य में कई जगहों पर मौत का तांडव हो रहा है।

राज्यपाल बोस ने मुख्यमंत्री ममता बनर्जी पर संविधान की उपेक्षा करने का आरोप लगाते हुए कहा कि राज्य सरकार हिंसा के शिकार लोगों को राजभवन नहीं आने दे रही है। दरअसल, गुरुवार (13 जून) को पुलिस ने भाजपा नेता एवं विधानसभा में नेता प्रतिपक्ष सुवेंदु अधिकारी और हिंसा के पीड़ितों को राजभवन जाने से रोक दिया था। पुलिस ने तर्क दिया था कि राजभवन के आसपास धारा 144 लागू है।

इसके बाद राज्यपाल बोस ने शुक्रवार (14 जून) को एक प्रेस कॉन्फ्रेंस में कहा, “मैंने इन सभी लोगों को राजभवन आने और मुझसे मिलने की लिखित इजाजत दी थी। इसके बावजूद उन्हें राजभवन आने से रोका गया। मैं ये जानकर स्तब्ध हूँ कि कुछ कारण बताकर इन सभी लोगों को अपने लोकतांत्रिक अधिकारों का इस्तेमाल करने से रोका गया।”

राज्यपाल ने आगे कहा, “मुख्यमंत्री संवैधानिक नियमों का उल्लंघन कर सकती हैं। मैं यह सुनिश्चित करूँगा कि सरकार अपनी जिम्मेदारियों को पूरा करे। राज्य में मौत का तांडव हो रहा है। पंचायत चुनावों के दौरान मैंने अपनी आँखों से ये सब देखा है। मैं राज्य में कई जगह गया था। इन चुनावों में भी हिंसा, हत्या, डराने-धमकाने के कई मामले सामने आए हैं।”

वहीं, शुक्रवार को पीड़ितों से मिलने के बाद राज्यपाल ने कहा कि उन्होंने पीड़ितों की बात सुनी। गवर्नर होने के नाते वे निष्पक्ष होना चाहता हैं। इसलिए उन्होंने राज्य सरकार से भी रिपोर्ट माँगी है। उन्होंने कहा कि राज्य सरकार का पक्ष सुनने के बाद वे अपनी राय देंगे। उन्होंने ममता बनर्जी को पत्र लिखकर पूछा है कि इजाजत दिए जाने के बावजूद पुलिस ने किस आधार पर पीड़ितों को राजभवन आने से रोका।

संविधान की बात करते हुए गवर्नर सीवी आनंद बोस ने कहा कि संविधान के अनुच्छेद 167 के मुताबिक किसी मुख्यमंत्री के लिए यह जरूरी है कि जब भी उनसे रिपोर्ट या जानकारी माँगी जाए तो वे दें। संविधान में यह भी लिखा है कि गवर्नर को यह अधिकार और कर्तव्य है कि वे मुख्यमंत्री को बताएँ कि कौन-सा मुद्दा मंत्रिमंडल के सामने रखना है।

वहीं, भाजपा नेता सुवेंदु अधिकारी और एक अन्य व्यक्ति ने पुलिस के खिलाफ कलकत्ता हाईकोर्ट में याचिका दायर की है। शुक्रवार को कलकत्ता हाईकोर्ट ने कहा कि अगर राजभवन की तरफ से इजाजत मिलती है तो सुवेंदु अधिकारी और हिंसा पीड़ित लोग गवर्नर से मिलकर अपनी शिकायत दर्ज करा सकते हैं। जस्टिस अमृता सिन्हा बंगाल सरकार से पूछा कि क्या गवर्नर को हाउस अरेस्ट में रखा गया है।

मदरसे में बच्चों से गुप्तांग धुलवाता है मौलवी, शौच के बाद नितंब साफ कराने का भी आरोप: अब्दुल हफीज के खिलाफ शिकायत, जाँच शुरू

उत्तर प्रदेश के बस्ती जिले में एक मदरसे के मौलवी पर नाबालिग छात्रों से अश्लील हरकतें करने का मामला सामने आया है। मौलवी का नाम अब्दुल हफीज है। आरोपित अब्दुल बच्चों से अपना गुप्तांग धुलवाता है। एक बच्चे ने आरोप लगाया कि शौच के बाद मौलवी नितंब धुलवाता है। इनकार करने वह छात्रों को धमकाता भी है। कई छात्रों ने इस वजह से मदरसे में जाने से भी इनकार कर दिया है।

गुरुवार (11 जून 2024) कई ग्रामीणों ने जिले के पुलिस अधीक्षक को शिकायत देकर मौलवी पर कड़ी कार्रवाई की माँग की है। शिकायत मिलने के बाद पुलिस ने मामले की जाँच शुरू कर दी है। वहीं, मौलाना ने इन आरोपों से पल्ला झाड़ लिया है। अपनी सफाई में मौलवी ने खुद पर लगे आरोपों को बेबुनियाद बताया और शिकायतकर्ताओं पर लीगल एक्शन लेने की बात कही है।

यह मामला बस्ती जिले के थाना क्षेत्र मुंडेरवा का है। इस क्षेत्र के गाँव परसा हज्जाम में काफी लंबे समय से अरबिया शम्सुल उलूम नाम का मदरसा संचालित हो रहा है। इस मदरसे में गाँव और उसके आसपास के कई नाबालिग बच्चे मज़हबी एवं दीनी तालीम हासिल करने जाते हैं। लगभग 3 साल पहले मुंडेरवा थाना क्षेत्र का मौलवी अब्दुल हफीज इस मदरसे में बच्चों को पढ़ाने के लिए रखा गया था।

दी गई शिकायत के अनुसार, मौलवी की नियुक्ति के पीछे भी कुछ लोगों द्वारा मदरसे पर कब्ज़ा करने की साजिश बताई गई है। इसमें आगे कहा गया है कि अब्दुल हफीज बच्चों को पढ़ाने का ढोंग कर रहा है, क्योंकि उसे गाँव के कुछ लोगों ने खिला-पिला कर रखा है। कुछ ही समय बाद बच्चे मौलवी द्वारा अपने साथ अत्याचार किए जाने की शिकायत करने लगे। इन पीड़ितों में एक बच्चा बिहार का भी है।

बच्चे ने फोन करके अपने घर बताया था कि मदरसे में अब्दुल हफीज शौच से लौटने के बाद बच्चों से अपना नितम्ब धुलवाता है। इसके साथ ही उसने अपने साथ गंदी हरकतें करने का भी आरोप लगाया है।पीड़ित छात्र के परिजनों ने इस शिकायत की फोन पर रिकॉर्डिंग भी कर रखी है। इसी रिकार्डिंग में बच्चे ने आगे कहा कि वो अब मदरसे में नहीं पढ़ेगा।

शिकायतकर्ताओं ने मदरसे में चल रही इन हरकतों से खुद को शर्मिंदा बताया है। आरोप यह भी लगाया गया है कि मौलवी अब्दुल हफीज को गाँव के ही सादिक अली के बेटे मुस्लिम, परवेज अहमद और तबब्कल हुसैन सहित कुछ अन्य लोगों का संरक्षण मिला हुआ है। ग्रामीणों ने यह भी आशंका जताई कि उलटे उनको ही फँसाने की साजिश रची जा रही है।

ऑपइंडिया के पास शिकायत कॉपी मौजूद। इसमें मौलवी अब्दुल हफीज को शिकायतकर्ताओं ने बेहद शातिर बताते हुए आशंका जताई है कि वो गाँव वालों को आपस में ही लड़ना चाहता है। उस पर कई अन्य बच्चों के साथ भी बहला-फुसला कर उल्टी-सीधी हरकतें करने और विरोध करने पर धमकाने का भी आरोप है। इस शिकायती पत्र पर लगभग आधे दर्जन ग्रामीणों ने दस्तखत कर रखे हैं।

मुझ पर लगे आरोप निराधार, लेंगे लीगल एक्शन

मीडिया से बात करते हुए मौलवी ने खुद पर लगे आरोपों को निराधार बताया है। अब्दुल हफीज इसे मदरसे को बदनाम करने की साजिश करार दिया है और खुद को बदनाम करने वालों के खिलाफ लीगल नोटिस भेजने का एलान किया है। मौलवी ने अबरार अहमद, मोहम्मद सगीर, निसार, मोहम्मद हकीम, समसुद्दीन और यूनुस पर आए दिन खुद को धमकियाँ देने का आरोप लगाया।

मौलाना अब्दुल हफीज ने इन सभी लोगों से अपनी जान का खतरा बताया है। मदरसे के लीगल एडवाइजर शोएब आजम ने इस शिकायत को गाँव के मनबढ़ों द्वारा मदरसे पर कब्ज़े की साजिश कहा है। वहीं, इस मदरसे में पढ़ने वाले छात्रों के परिजन बस्ती पहुँचकर बच्चे को वहाँ ले जाने के लिए आए हैं।

पटना में परीक्षा से पहले अभ्यर्थियों को दिए गए थे प्रश्न-पत्र, गुजरात को गोधरा में बेच डाला NEET का परीक्षा केंद्र: गुजरात पुलिस ने 5 को दबोचा, करोड़ों के लेनदेन की मिली जानकारी

गोधरा NEET धोखाधड़ी घोटाले की जाँच में पुलिस को 12 छात्रों, उनके अभिभावकों और दोषी व्यक्तियों के बीच करोड़ों रुपए के लेन-देन का पता चला है। जाँच में MBBS डिग्री के लिए राष्ट्रीय पात्रता-सह-प्रवेश परीक्षा (NEET) में धोखाधड़ी में सहायता के लिए धन लेनदेन की घटना सामने आई है। यहाँ परीक्षा सेंटर ही बेच दिया गया था। इस मामले में पुलिस ने पाँच आरोपितों को गिरफ्तार किया है।

जाँच में यह सामने आया है कि NEET के लिए खास परीक्षा सेंटर आवंटित करने के लिए 10 लाख रुपए दिए गए थे। इस मामले में अधिकारियों ने कई बैंक चेक भी बरामद किए हैं। आरोपितों से जब्त किए गए चेक पर अभ्यर्थियों के माता-पिता के फोन नंबर लिखे हुए हैं। इस तरह कुल 2.30 करोड़ रुपए (कुछ रिपोर्ट में 2.82 करोड़ रुपए) चेक मिले हैं और लगभग 12 करोड़ रुपए की वित्तीय लेन-देन की जानकारी सामने आई है।

इस मामले के सभी आरोपितों को न्यायिक हिरासत में भेज दिया गया है। इस मामले के मुख्य आरोपित तुषार भट्ट की अंतरिम जमानत याचिका को भी गोधरा जिला अदालत ने खारिज कर दिया है। वहीं, इस मामले में पुलिस ने पैसे देने वाले विद्यार्थियों और उनके माता-पिता के बयान दर्ज कर रही है। यह रैकेट पुरुषोत्तम रॉय नाम के व्यक्ति द्वारा संचालित किया जा रहा था।

मामले में शामिल 12 छात्रों में से चार ने वडोदरा के परशुराम रॉय द्वारा संचालित रॉय ओवरसीज कंपनी के बैंक खाते में ₹66 लाख जमा किए। छात्रों ने तुषार भट्ट और परशुराम रॉय को ₹2.82 करोड़ के चेक भी दिए। जाँच में यह भी पता चला कि तीन छात्रों ने भट्ट और रॉय को खाली चेक दिए, जो नीट परीक्षा में कथित कदाचार के लिए एक बड़े मौद्रिक लेनदेन का संकेत देते हैं।

जाँच में पता चला है कि आरोपितों और विद्यार्थियों एवं उनके माता-पिता के बीच 12 करोड़ रुपए का लेन-देन हुआ है। इनमें से अकेले 2.30 करोड़ रुपए का लेन-देन परशुराम रॉय के साथ हुआ है। NEET परीक्षा में आरोपितों को लगभग 26 करोड़ रुपए मिलने का अनुमान था। इसके लिए उन्होंने हर छात्र से 10 लाख रुपए की रेट तय कर रखी थी।

ये गिरफ्तारी उस समय हुई जब NEET की परीक्षा लेने वाली एजेंसी NTA ने सुप्रीम कोर्ट को बताया कि ग्रेस मार्क्स पाने वाले 1563 विद्यार्थियों के मार्क्स कैंसिल जाएंँगे। साथ ही कोर्ट को यह भी बताया था कि अगर ये अभ्यर्थी चाहें तो परीक्षा में फिर से भाग ले सकते हैं। इसकी परीक्षा 23 जून 2024 को आयोजित की जाएगी और उसका परिणाम 30 जून को जारी किया जाएगा।

बेच दिया गया था पूरा परीक्षा केंद्र

गुजरात के गोधरा के जलाराम स्कूल में NEET का परीक्षा केंद्र था। इसमें 30 छात्रों को गलत तरीके से परीक्षा दिलवाया गया। परीक्षा देने वालों में सिर्फ गुजरात के नहीं, बल्कि महाराष्ट्र, उड़ीसा, बिहार और झारखंड के भी छात्र थे। दरअसल, इस पूरा सेंटर को मैनेज कर लिया गया था और बच्चों को पास कराने की जिम्मेदारी ली गई थी। इसके बदले एक-एक छात्र से 10-10 लाख रुपए लिए गए थे।

इस परीक्षा केंद्र के परीक्षार्थियों से कहा गया था कि उन्हें जितने सवाल आते हैं, उसे मार्क दें और बाकी को छोड़ दें। जो सवाल छोड़ दिए गए थे, उसे वहाँ के सेंटर के लोगों ने मार्क कर दिया। दरअसल, परीक्षा खत्म होने के बाद उत्तर पुस्तिकाओं को भेजने के लिए लगभग तीन घंटे का वक्त लगता है। वहीं, परीक्षा खत्म होने के आधे घंटे में कई बड़े कोचिंग सेंटर सवालों के उत्तर ऑनलाइन जारी कर देते हैं।

इस सेंटर के कर्मचारियों को उन्हीं उत्तर की मदद से छात्रों की ओएमआर शीट पर सही उत्तर को मार्क करना था। इस तरह से ये सारे छात्र पास हो जाते, लेकिन यह सब हो पाता उससे पहले ही गोधरा के जिला प्रशासन को यह सूचना मिल गई। प्रशासन ने इस सेंटर को अपने कब्जे में ले लिया और उसके बाद प्रशासन की देखरेख में यहाँ फिर से परीक्षा हुई।

पटना में पेपर लीक

वहीं, पटना से खबर आ रही है कि 5 मई को होने वाली एग्जाम से पहले वाली रात को कई छात्रों को एक कमरे में पेपर सॉल्व करवाए गए थे। पटना में शास्त्री नगर इलाके में डीएवी स्कूल में नीट का सेंटर था। पुलिस ने एग्जाम के बाद इस सेंटर पर परीक्षा देने वाले आयुष नाम के एक छात्र को हिरासत में लिया था। उसने पूछताछ में बताया कि उसे परीक्षा से पहले ही प्रश्न पत्र उपलब्ध हो गया था।

पटना के एक हॉस्टल में आयुष और उसके जैसे 25 और छात्रों को एग्जाम पेपर और आंसर उपलब्ध करवाए गए थे। परीक्षा से पहले वाली रात को इन सभी छात्रों को प्रश्नों के उत्तर रटवाए गए थे। अगले दिन नीट के एग्जाम में हू-ब-हू वही सवाल आए। इसके लिए एक-एक छात्र से 20-20 लाख रुपए लिए गए थे। पटना पुलिस ने इस केस में 13 लोगों को गिरफ्तार किया है। इनमें छह छात्र, चार सेंटर्स और तीन अभिभावक हैं।

बता दें कि NEET परीक्षा में पेपरलीक मामले का आरोप लगाकर सुप्रीम कोर्ट और कई राज्यों के अदालतों में मामला दर्ज किया गया है। विद्यार्थियों का कहना है कि पेपरलीक हुआ है, इसलिए पूरी परीक्षा को कैंसिल की जाए और इसका एग्जाम नए सिरे से हो। इस मामले में सुप्रीम कोर्ट ने NTA ने जवाब माँगा है। साथ ही केंद्रीय शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान ने कहा है कि इसमें किसी तरह की गड़बड़ी बर्दाश्त नहीं की जाएगी और अगर गड़बड़ी मिलती है तो NTA की जवाबदेही तय की जाएगी।

जाकिर और शाकिर ने रात के अंधेरे में जगन्नाथ मंदिर में फेंका गाय का कटा सिर: रतलाम में हंगामे के बाद पुलिस ने दबोचा, बुलडोजर से घर ढहाया

मध्य प्रदेश के रतलाम के जावरा इलाके में शुक्रवार (14 जून 2024) को भगवान जगन्नाथ मंदिर परिसर में गाय का कटा हुआ एक सिर मिला। इसको लेकर स्थानीय लोग सड़कों पर उतर आए। विरोध कर रहे हिंदुओं ने आरोपितों को तुरंत गिरफ्तार करने की चेतावनी दी। इसके बाद लोगों के गुस्सा को देखते हुए पुलिस ने दो आरोपियों को गिरफ्तार कर लिया और उनके घरों को ध्वस्त कर दिया।

रतलाम जिले के जावरा में जगन्नाथ महादेव मंदिर के पुजारी सुबह मंदिर पहुँचे। मंदिर में पहुँचते ही पुजारी ने गाय के बछड़े का खून से लथपथ सिर देखा। इसकी सूचना उन्होंने तुरंत पुलिस और स्थानीय लोगों को दी। जानकारी मिलते ही लोगों में आक्रोश फैल गया। हिंदू संगठन के लोग और स्थानीय श्रद्धालु तुरंत मंदिर पहुँचे। इसके बाद विरोध में लोगों ने जावरा बाजार बंद करा दिया और सड़क जाम कर दी।

इतना ही नहीं, बड़ी संख्या में प्रदर्शनकारी जावरा पुलिस थाने पहुँचे और आरोपितों के खिलाफ मुकदमा दर्ज करने एवं उनकी तत्काल गिरफ्तारी की माँग की। लोगों के गुस्सा को देखते हुए पुलिस और प्रशासन के अधिकारियों ने उन्हें शांत कराने की कोशिश की। हालाँकि, भीड़ वहाँ से जाने से मना कर दिया तो पुलिस को स्थिति को नियंत्रित करने के लिए लाठी चार्ज और आँसू गैस के गोले दागने पड़े।

इस बीच पुलिस ने सीसीटीवी फुटेज की जाँच करके दो आरोपितों की पहचान कर ली। इसके बाद पुलिस उनके घरों पर पहुँची और उन्हें हिरासत में लिया। आरोपितों की पहचान जाकिर और शाकिर के रूप में हुई है। हिंदू समूहों ने आरोपितों की पहचान होने के बाद उनके घरों तक जुलूस निकालने की कोशिश की, लेकिन पुलिस ने उन्हें ऐसा करने की अनुमति नहीं दी।

एएसपी राकेश खाखा के अनुसार, सीसीटीवी फुटेज में देखा गया कि 13 और 14 जून की रात 2.41 बजे दो बदमाश मोटरसाइकिल पर आए और मंदिर में गोमांस के अवशेष फेंक कर भाग गए। इसके बाद संबंधित धाराओं में मुकदमा दर्ज करके बदमाशों को पकड़ लिया गया। एएसपी ने बताया कि उनसे पूछताछ की जा रही है और यह पता लगाने की कोशिश की जा रही है कि उन्हें किसी ने उकसाया तो नहीं था।

एएसपी राकेश खाखा ने बताया कि आरोपितों के मकानों में अवैध निर्माण के आरोप भी पाए गए थे। इसलिए जिला प्रशासन के सहयोग से उन मकानों को बुलडोजर से ढहा दिया गया है। मकान ढहाने की कार्रवाई के दौरान पुलिस के वरिष्ठ अधिकारी भी मौजूद थे। शुक्रवार (14 जून की) शाम को जगन्नाथ महादेव मंदिर का शुद्धिकरण किया गया और पूरे मंदिर की सफाई की गई।

स्थिति को देखते हुए शहर में किसी भी तरह की अप्रिय घटना को रोकने के लिए बड़ी संख्या में पुलिसकर्मियों को तैनात किया गया है। शहर में कर्फ्यू जैसे हालात हैं। हर चौराहे पर पुलिस को तैनात किया गया है। शहर काजी हाफिज भुरू भाईजान ने घटना की निंदा करते हुए दोषियों के खिलाफ सख्त कार्रवाई की माँग की है। उन्होंने लोगों से शांति बनाए रखने की अपील की है।

NEET पर सुप्रीम कोर्ट ने NTA को दिया नोटिस, सभी पक्षों से माँगा जवाब : छात्रों और उनके परिजनों से मिले शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान, ‘SC जो भी फैसला देगा, हम लागू करेंगे’

राष्ट्रीय पात्रता-सह-प्रवेश परीक्षा-स्नातक (नीट-यूजी) को लेकर चल रहे विवाद में सुप्रीम कोर्ट सुनवाई कर रहा है। सुप्रीम कोर्ट ने सभी पक्षों को नोटिस जारी कर जवाब माँगा है। एक याचिका मामले की सीबीआई जाँच करने की माँग को लेकर है। इस बीच, केंद्रीय शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान ने शुक्रवार को कहा कि नीट-यूजी जैसी प्रतियोगी परीक्षाओं के आयोजन में किसी भी प्रकार की गड़बड़ी बर्दाश्त नहीं की जाएगी। इसके साथ ही उन्होंने कहा कि अगर इसमें कोई खामी या गड़बड़ी पाई गई तो परीक्षा आयोजित करने वाली एजेंसी एनटीए की जवाबदेही भी तय की जाएगी।

शिक्षा मंत्री प्रधान ने नीट विवाद पर कहा कि छात्रों की चिंताओं को निष्पक्षता और समानता के साथ दूर किया जाएगा। प्रधान की यह टिप्पणी इस साल राष्ट्रीय पात्रता सह प्रवेश परीक्षा (नीट-यूजी) के आयोजन में कथित अनियमितताओं को लेकर विपक्ष की आलोचना के बीच आई है। केंद्रीय मंत्री ने विपक्ष पर छात्रों के भविष्य के साथ राजनीति करने का आरोप लगाया और कहा कि काउंसलिंग प्रक्रिया को समय पर आगे बढ़ाना बेहद जरूरी है।

धर्मेंद्र प्रधान ने दोहराया कि इस साल नीट-यूजी परीक्षा के दौरान पेपर लीक के आरोपों को साबित करने के लिए कोई ठोस सबूत नहीं है। इस बीच, शुक्रवार (14 जून 2024) को उन्होंने कुछ नीट परीक्षार्थियों और उनके अभिभावकों से भी मुलाकात की और उनकी समस्याएँ सुनीं। केंद्रीय मंत्री ने कहा कि नीट-यूजी की परीक्षा 4500 से अधिक केंद्रों पर आयोजित की गई थी। उनमें से केवल छह परीक्षा केंद्रों पर ही गलत प्रश्न पत्र बँटने की सूचना मिली थी। उन्होंने कहा, “केवल छह केंद्रों के कारण, हम पूरी परीक्षा प्रणाली की पवित्रता और विश्वसनीयता पर सवाल नहीं उठा सकते।”

धर्मेंद्र प्रधान ने इस बारे में ट्वीट भी किया और लिखा, “केंद्र सरकार NEET परीक्षार्थियों के हितों की रक्षा के लिए प्रतिबद्ध है। मैं छात्रों को आश्वस्त करना चाहता हूं कि उनकी सभी चिंताओं का निष्पक्षता और समानता के साथ समाधान किया जाएगा। किसी भी छात्र को नुकसान नहीं पहुँचाया जाएगा और किसी भी बच्चे के करियर को खतरे में नहीं डाला जाएगा। NEET परीक्षा से संबंधित तथ्य माननीय सर्वोच्च न्यायालय के संज्ञान में हैं। केंद्र सरकार छात्रों के हित के लिए माननीय सर्वोच्च न्यायालय के निर्देशों के अनुसार सभी आवश्यक कदम उठाएगी। NEET की काउंसलिंग प्रक्रिया जल्द ही शुरू होगी और इस दिशा में बिना किसी भ्रम के आगे बढ़ना अत्यंत महत्वपूर्ण है।”

इस बीच, नीट काउंसलिंग पर एक बार फिर से सुप्रीम कोर्ट ने रोक लगाने से इनकार कर दिया है, साथ ही सुप्रीम कोर्ट ने याचिकाओं को हाई कोर्ट्स से सुप्रीम कोर्ट में ट्रांसफर करने के अनुरोध वाली राष्ट्रीय परीक्षा एजेंसी की याचिका पर सभी पक्षों को नोटिस जारी किया। सुप्रीम कोर्ट का कहना है कि नीट-यूजी विवाद पर मामलों को विभिन्न हाई कोर्ट से सुप्रीम कोर्ट में ट्रांसफर करने की माँग वाली राष्ट्रीय परीक्षा एजेंसी (एनटीए) की याचिका पर 8 जुलाई को सुनवाई की जाएगी। एक याचिकाकर्ता ने सीबीआई जाँच की माँग की।

सुप्रीम कोर्ट में कुल 11 याचिकाएँ थीं, 4 NTA की तरफ से दाखिल की गई थीं। जिनमें अलग-अलग हाई कोर्ट में नीट परीक्षा से जुड़े मामलों को सुप्रीम कोर्ट में ट्रांसफर करने की अर्जी लगाई गई थी। 7 याचिकाएँ अलग अलग छात्रों ने दाखिल की है, इनमें पेपर लीक की सीबीआई जाँच करवाने, परीक्षा रद्द करने, ग्रेस मार्क्स ख़त्म करने और परीक्षा केंद्रों के चयन में धाँधली जैसी शिकायतें की गई थीं। इन सभी याचिकाओं पर कोर्ट ने नोटिस जारी किया और सब पर सुनवाई पहले की याचिकाओं के साथ 8 जुलाई को होगी।

NSA, तीनों सेनाओं के प्रमुख, अर्धसैनिक बलों के निदेशक, LG, IB, R&AW – अमित शाह ने सबको बुलाया: कश्मीर में ‘एक्शन’ की तैयारी में सरकार, हर स्कूल में राष्ट्रगान अनिवार्य

हाल ही में जम्मू कश्मीर के रियासी, कठुआ और डोडा में लगातार आतंकी हमले हुए। रियासी में हुए हमले में शिव खोड़ा मंदिर से लौट रही बस पर गोलीबारी से 10 श्रद्धालुओं की मौत हो गई, जिनमें बच्चे और महिलाएँ भी शामिल थीं। अब जम्मू कश्मीर में आतंकी हमलों को लेकर केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह ने बैठक की है। वहीं PDP की महबूबा मुफ़्ती राज्य में राष्ट्रगान को अनिवार्य बनाए जाने पर निशाना साध रही है। जम्मू कश्मीर में विधानसभा चुनाव के आसार जताए जा रहे थे, लेकिन आतंकी हमले फिर बढ़ गए हैं।

जम्मू कश्मीर के स्कूलों में राष्ट्रगान अनिवार्य

जम्मू कश्मीर के के स्कूली शिक्षा विभाग ने राज्य के सभी विद्यालयों में सुबह की असेम्ब्ली के दौरान राष्ट्रगान को अनिवार्य कर दिया है। इसे स्टैंडर्ड प्रोटोकॉल बताते हुए विभाग ने कहा है कि सुबह के इस रिवाज का केंद्रशासित प्रदेश में सभी स्कूलों में समान रूप से अनुसरण नहीं किया जा रहा था। वहीं पूर्व CM महबूबा मुफ़्ती का कहना है कि असली मुद्दों से ध्यान भटकाने के लिए ये सब किया जा रहा है। वहीं प्रशासन का कहना है कि राष्ट्र को लेकर बच्चों में गर्व की भावना भरने के लिए ऐसा किया जा रहा है।

इससे बच्चों के भीतर राष्ट्रीय पहचान मजबूत होगी। साथ ही अनुशासन और एकता को बढ़ावा देने की भी उम्मीद इस कदम से की जा रही है। राष्ट्रगान में बच्चे और शिक्षक, दोनों शामिल होंगे। प्रशासन का कहना है कि इससे नैतिक मूल्यों का संरक्षण, साझा सामाजिक भावना और शक्ति के सिद्धांतों को पोषित करने का काम करेगा। जम्मू कश्मीर में ऐसा फैसला पहली बार लिया गया है। साथ ही स्कूलों को कहा गया है कि वो बच्चों को जागरूक करते रहें, उन्हें महँ हस्तियों/स्वतंत्रता सेनानियों की जीवनी पढ़ाएँ और उनका उत्साहवर्धन करें।

अमित शाह ने बुलाई उच्चस्तरीय बैठक

उधर 3 आतंकवादी हमलों के बाद देश के गृह मंत्री अमित शाह ने जम्मू कश्मीर में सुरक्षा व्यवस्था की समीक्षा की है, साथ ही रविवार (16 जून, 2024) को एक उच्च-स्तरीय बैठक बुलाई है। 1 दिन पहले पीएम नरेंद्र मोदी ने भी सुरक्षा व्यवस्था की समीक्षा की थी। रविवार को 360 डिग्री रिव्यू किया जाएगा। NSA अजीत डोभाल के अलावा उप-राज्यपाल मनोज सिन्हा, तीनों सेनाओं के प्रमुख के अलावा IB और R&AW के मुखिया भी मौजूद रहेंगे।

साथ ही अमरनाथ यात्रा को लेकर क्या तैयारियाँ हैं इसकी भी समीक्षा की जाएगी। 29 जून, 2024 से ही ये यात्रा शुरू होने वाली है ऐसे में मात्र 15 दिन ही बचे हुए हैं। श्रीनगर में हाल ही में यूनिफाइड कमांड मीटिंग भी हुई थी, जिसमें सिक्योरिटी की सामान्य समीक्षा की गई। अमित शाह की आगामी बैठक में सशस्त्र बलों के निदेशक भी हिस्सा लेंगे। कठुआ में मुठभेड़ के दौरान हाल ही में एक आतंकी को सुरक्षा बलों ने मार गिराया है। अभी घाटी में ‘सफाई अभियान’ और तेज़ होगा।

अब तक की सबसे अधिक ऊँचाई पर पहुँचा भारत का विदेशी मुद्रा भंडार, उधर कंगाली की ओर बढ़ा पाकिस्तान: सिर्फ 2 महीने का बचा रिजर्व

भारत से मुकाबले की कोशिश करता पाकिस्तान तबाही की कगार पर पहुँच चुका है। पाकिस्तान के पास अपनी जरूरतों को पूरा करने के लिए विदेशी मुद्रा भंडार लगातार कम हो रहा है। पाकिस्तान के पास महज इतनी ही विदेशी मुद्रा बची है कि वो सिर्फ 2 माह तक ही सामान खरीद सकता है, लेकिन उसके ऊपर बढ़ता कर्ज सुरसा के मुँह की तरह बढ़ता जा रहा है। उसे विदेशी कर्ज की किश्तें चुकाने में भी मुश्किलों का सामना करना पड़ रहा है, यहाँ तक कि हुक्मरानों को पिछले कई सालों से विदेशी सरकारों से अनुदान माँगने के लिए दौरे करने पड़ रहे हैं। इस बीच, पाकिस्तान का फॉरेक्स रिजर्व महज 9 अरब डॉलर का ही बचा है।

मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक, पाकिस्तान का विदेशी मुद्रा भंडार गिरावट के साथ 9 अरब डॉलर के करीब बना हुआ है। वहीं, पाकिस्तानी रुपया यूएस डॉलर के मुकाबले 278 पर है। स्टेट बैंक ऑफ पाकिस्तान की लेटेस्ट वीकली अपडेट के अनुसार, 7 जून 2024 को समाप्त हुए सप्ताह में विदेशी मुद्रा भंडार 6 मिलियन डॉलर की गिरावट के साथ 9.10 अरब डॉलर रहा। यह मुद्रा भंडार 2 महीने से कम के आयात के जितना ही है। अगर पाकिस्तान ने कुछ मजबूत कदम नहीं उठाए, तो वह विदेशों से कुछ भी आयात नहीं कर पाएगा।

रिकॉर्ड ऊँचाई पर भारत का विदेशी मुद्रा भंडार

एक तरफ पाकिस्तान लगातार बर्बादी की कगार पर पहुँच रहा है, तो दूसरी तरफ भारत का विदेशी मुद्रा भंडार लगातार बढ़ता जा रहा है। देश का विदेशी मुद्रा भंडार सात जून को समाप्त सप्ताह में 4.307 अरब डॉलर बढ़कर 655.817 अरब डॉलर की नयी सर्वकालिक ऊँचाई को छू गया। भारतीय रिजर्व बैंक ने शुक्रवार (14 जून 2024) को यह जानकारी दी। इससे पूर्व के सप्ताह में विदेशी मुद्रा भंडार 4.837 अरब डॉलर के उछाल के साथ 651.51 अरब डॉलर के स्तर पर पहुँचा था।

पिछले कुछ सप्ताहों में भारत के विदेशी मुद्रा भंडार में उल्लेखनीय वृद्धि देखी गई है। एक तरफ पाकिस्तान लगातार बर्बादी की कगार पर पहुँच रहा है, तो दूसरी तरफ भारत का विदेशी मुद्रा भंडार लगातार बढ़ता जा रहा है। वहीं, रिजर्व बैंक ने कहा कि आलोच्य सप्ताह में अंतरराष्ट्रीय मुद्राकोष (IMF) के पास भारत की आरक्षित जमा भी एक करोड़ डॉलर बढ़कर 4.336 अरब डॉलर हो गई।

अरुंधति रॉय पर UAPA के तहत चलेगा मुकदमा: दिल्ली LG ने दी मंजूरी, कश्मीरी अलगाववादियों के साथ दिया था भड़काऊ भाषण

दिल्ली के एलजी वीके सक्सेना ने लेखिका अरुंधति रॉय के खिलाफ गैरकानूनी गतिविधियाँ (रोकथाम) अधिनियम (UAPA) के तहत मुकदमा चलाने की मंजूरी दे दी है। इन पर 2010 में ‘आजादी-एकमात्र रास्ता’ के बैनर तले आयोजित एक सम्मेलन में कथित रूप से ‘भड़काऊ’ भाषण देने का आरोप है। उस कार्यक्रम में अरुंधति रॉय ने कश्मीरी को भारत से अलग करने के विचारों का समर्थन किया था। इस बात की जानकारी शुक्रवार (14 जून 2024) को दिल्ली स्थित राज निवास द्वारा प्रेस रिलीज के जरिए दी गई।

ये मामला साल 2010 से जुड़ा है। अरुधंति रॉय और डॉ शेख शौकत हुसैन ने 21 अक्‍टूबर 2010 को एलटीजी ऑडिटोरियम, कॉपरनिकस मार्ग, नई दिल्ली में ‘आजादी – द ओनली वे’ के बैनर तले आयोजित एक सम्मेलन में कथित तौर पर उत्तेजक भाषण दिए थे। सम्मेलन में जिन मुद्दों पर चर्चा की गई और बात की गई, उनमें ‘कश्मीर को भारत से अलग करने’ का प्रचार किया गया था। सम्मेलन में भाषण देने वालों में सैयद अली शाह गिलानी, एसएआर गिलानी (सम्मेलन के एंकर और संसद हमले मामले के मुख्य आरोपित), अरुंधति रॉय, डॉ. शेख शौकत हुसैन और अर्बन नक्सल वरवर राव शामिल थे।

आरोप हैं कि गिलानी और अरुंधति रॉय ने इसका पूरी मजबूती के साथ प्रचार क‍िया था क‍ि कश्मीर कभी भी भारत का हिस्सा नहीं रहा और उस पर भारत के सशस्त्र बलों ने जबरन कब्जा कर क‍िया। उन्होंने कहा था कि जम्मू-कश्मीर राज्य को भारत से आजादी द‍िलाने का हर संभव प्रयास किया जाना चाहिए। इस पूरे सम्‍मेलन की शिकायतकर्ता की ओर से र‍िकॉर्ड‍िंग की गई थी जोक‍ि उपलब्‍ध करवायी गई।

इस मामले की श‍िकायत सुशील पंड‍ित की ओर से कोर्ट में 28 अक्‍टूबर 2010 को गई थी ज‍िसके बाद कोर्ट ने 27 नवंबर को एफआईआर दर्ज करने के न‍िर्देश द‍िए थे। श‍िकायत के एक माह बाद 29 नवंबर 2010 को सुशील पंडित की शिकायत पर मामला दर्ज हुआ था।

शिकायतकर्ता ने एमएम कोर्ट, नई दिल्ली के समक्ष सीआरपीसी की धारा 156(3) के तहत शिकायत दर्ज कराई थी। द‍िल्‍ली पुल‍िस ने इस मामले में आईपीसी की धारा 124-ए/153ए/153बी/504 और 505 और 13 यूए (पी) अधिनियम के तहत मामला दर्ज क‍िया था। यूएपीए के तहत मुकदमा चलाने की मंजूरी देने से पहले एलजी सक्‍सेना की ओर से अक्टूबर, 2023 में आईपीसी की धारा 153ए/153बी और 505 के तहत दंडनीय अपराधों के लिए उपरोक्त आरोपियों पर मुकदमा चलाने के लिए सीआरपीसी की धारा 196 के तहत भी मंजूरी दी थी।

India TV के रजत शर्मा ने कॉन्ग्रेस के प्रवक्ताओं पर ठोका मुकदमा, हाईकोर्ट में दायर की याचिका: रागिनी नायक वाले डिबेट से जुड़ा है मामला

वरिष्ठ पत्रकार रजत शर्मा ने कॉन्ग्रेस के प्रवक्ताओं के खिलाफ मानहानि का मामला दर्ज कर दिया है। उन्होंने दिल्ली हाई कोर्ट में ये याचिका दाखिल की। रजत शर्मा द्वारा दाखिल मानहानि के केस में हाई कोर्ट ने याचिका स्वीकार कर ली है और उस पर फैसला सुरक्षित रख लिया है। बता दें कि कॉन्ग्रेस की प्रवक्ता रागिनी नायक ने आरोप लगाया था कि वरिष्ठ पत्रकार रजत शर्मा ने उन्हें ऑन-एयर गाली दी थी।

मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक, पत्रकार रजत शर्मा ने कॉन्ग्रेस नेता जयराम रमेश और पार्टी के दो प्रवक्ता रागिनी नायक और पवन खेड़ा पर मानहानि का केस किया है। उन्होंने दिल्ली हाई कोर्ट में यह केस दायर किया है, जिसने अंतरिम राहत पर अपना फैसला सुरक्षित रख लिया है। रजत शर्मा पर कॉन्ग्रेस की प्रवक्ता रागिनी नायक ने आरोप लगाया था कि उन्होंने उनको इंडिया टीवी के स्टूडियो में गाली दी थी। इस पर जयराम रमेश और पवन खेड़ा ने रागिनी नायक के आरोपों का समर्थन किया था। इसी मामले को लेकर रजत शर्मा ने मानहानि का मुकदमा दायर किया है। उन्होंने कॉन्ग्रेस नेताओं के आरोपों को अपनी गरिमा को ठेस पहुँचाने वाला बताया है।

इस मामले में रजत शर्मा के खिलाफ रागिनी नायक ने भी दिल्ली में एफआईआर दर्ज कराई है। रागिनी नायक ने माँग की थी कि रजत शर्मा को इस मामले में बिना शर्त माफी माँगनी चाहिए। हालांकि रागिनी नायक के आरोपों को इंडिया टीवी ग्रुप ने खारिज किया था। यही नहीं चैनल की ओर से नायक और कॉन्ग्रेस नेताओं पवन खेड़ा और जयराम रमेश को चेतावनी दी गई थी कि वे अपने आरोप वापस ले लें। कॉन्ग्रेस नेताओं की ओर से आरोप वापस न लिए जाने के बाद अब मानहानि का केस किया गया है।

बता दें कि सोमवार (10 जून 2024) को कॉन्ग्रेस प्रवक्ता रागिनी नायक ने एक्स (पूर्व में ट्विटर) पर आरोप लगाया कि रजत शर्मा ने लाइव डिबेट के दौरान उनके साथ गाली-गलौज की। उन्होंने ट्वीट किया, “पत्रकारिता में इससे ज़्यादा घटिया और क्या हो सकता है? रजत शर्मा, क्या आपके पास कोई जवाब है?” हालाँकि इसके बाद इंडिया टीवी की लीगल हेड ने रागिनी नायक और अन्य कॉन्ग्रेसी नेताओं को चेतावनी दी थी, लेकिन अब कानूनी कार्रवाई के लिए रजत शर्मा कोर्ट पहुँच चुके हैं।