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‘इंशाअल्लाह, राम मंदिर को गिराना हमारी जिम्मेदारी बन चुकी है’: धमकी के बाद अयोध्या में अलर्ट जारी कर कड़ी की गई सुरक्षा, 2005 में भी जैश ने बोला था हमला

आतंकी संगठन जैश-ए-मुहम्मद ने उत्तर प्रदेश के अयोध्या स्थित राम मंदिर को बम से उड़ाने की धमकी दी है। अयोध्या का राम मंदिर का हाल ही में निर्माण हुआ है और अभी भी इसमें कई कार्य जारी हैं। प्रतिदिन हजारों श्रद्धालु यहाँ दर्शन करते हैं। इससे संबंधित एक ऑडियो जारी होने के बाद उत्तर प्रदेश में मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ की सरकार ने अलर्ट जारी किया है। अयोध्या में तैनात सुरक्षाकर्मियों को अतिरिक्त सुरक्षा बरतने के लिए कहा गया है।

अयोध्या में रामकोट के सभी बैरियरों पर सघन तलाशी अभियान चलाया जा रहा है, पुलिस जाँच में जुट गई है। जिस मार्ग से रामलला का दर्शन करने के लिए श्रद्धालु जाते हैं, वहाँ भी सुरक्षा व्यवस्था कड़ी कर दी गई है। सामने आए ऑडियो में जैश-ए-मुहम्मद का आतंकी कहता है, “बाबरी मस्जिद की जगह तुम्हारा मंदिर बना हुआ है और वहाँ हमारे 3 साथी शहीद हुए हैं। इंशाअल्लाह, इस मंदिर को गिराना हमारी जिम्मेदारी बन गई है।” जैश-ए-मुहम्मद का गढ़ पाकिस्तान में है।

पाकिस्तान से ही इसे पोषण मिलता रहा है। सुरक्षा एजेंसियों को इस ऑडियो की जाँच के लिए लगाया गया है। केंद्र और प्रदेश सरकार की सुरक्षा एजेंसियाँ मिल कर काम कर रही हैं। जैश-ए-मुहम्मद 2005 में राम मंदिर पर हमला भी कर चुका है। तब रामलला टेंट में विराजमान थे और मंदिर बना नहीं था। बस अड्डों पर भी संदिग्ध वस्तुओं की जाँच चल रही है। अयोध्या में NSG (राष्ट्रीय सुरक्षा गार्ड्स) का हब भी बनाया जा रहा है। ये देश का छठा ऐसा हब होगा।

अयोध्या देश के सबसे संवेदनशील और व्यस्त स्थलों में से एक बन गया है, ऐसे में NSG का हब यहाँ की सुरक्षा व्यवस्था को सुदृढ़ करने का काम करेगा। 5 जुलाई, 2005 को जैश के 5 आतंकियों ने यहाँ हमला बोला था, CRPF ने इन सभी को मार गिराया था। 2023 में भी राम मंदिर पर हमले की धमकी दी गई थी, जो फर्जी निकली थी। भारत के कट्टर मुस्लिम भी अक्सर ‘बाबरी ज़िंदा है’ का नारा लगाते हैं, जिसे असदुद्दीन ओवैसी जैसे नेता भी हवा देते रहे हैं।

मृतकों के शव लेकर कुवैत से भारत पहुँचा विशेष विमान, इमारत में आगजनी मामले में 3 गिरफ्तार: मृतकों में इंजीनियर से लेकर अकाउंटेंट तक

कुवैत में आग की घटना में मरे 45 भारतीयों के पार्थिव शरीर को लेकर भारतीय वायुसेना का एक विशेष विमान शुक्रवार (14 जून 2024) को भारत पहुँच गया। मृतकों के पार्थिव शरीर को लाने के लिए देश के विदेश राज्यमंत्री कीर्ति वर्धन सिंह अधिकारियों के साथ कुवैत पहुँचे थे। इस मामले में कुवैत के अधिकारियों ने इमारत के मालिक एवं गार्ड सहित तीन लोगों को गिरफ्तार किया है।

भारतीय वायुसेना का एक विशेष विमान आज सुबह शवों को लेकर केरल के कोच्चि पहुँचा। वहाँ से यह विमान दिल्ली आया। कुवैत स्थित भारतीय दूतावास ने बताया कि मृतकों में केरल के 23, तमिलनाडु के सात, उत्तर प्रदेश के तीन, ओडिशा के दो और बिहार, पंजाब, कर्नाटक, महाराष्ट्र, पश्चिम बंगाल, झारखंड और हरियाणा के एक-एक व्यक्ति शामिल हैं।

इनमें से अधिकांश मृतक कुवैत की सबसे बड़ी कंस्ट्रक्शन कंपनी NBTC में काम करते थे। जिस इमारत में आग लगी, वह भी NBTC की ही थी। मृतकों में इंजनीनियर और अकाउंटेंट भी हैं। वहीं, नलिनाक्षन करीब 12 साल से एनबीटीसी के साथ काम कर रहे हैं और वर्तमान में केरल के व्यवसायी के.जी. अब्राहम की कंपनी में जनसंपर्क अधिकारी हैं। वे इस घटना में घायल हो गए हैं।

विदेश मंत्रालय में राज्यमंत्री का एवं गोंडा के सांसद कीर्ति वर्धन सिंह ने बताया कि कागजी कार्रवाई में कम से कम 10 दिन लगते, लेकिन प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के निर्देशों के कारण अधिकारियों ने इसे जल्दी से पूरा कर लिया। जब विमान भारत पहुँचा, उस समय केरल के मुख्यमंत्री पिनाराई विजयन, केंद्रीय मंत्री सुरेश गोपी और पूर्व केंद्रीय मंत्री वी मुरलीधरन भी हवाई अड्डे पर मौजूद थे।

आज विशेष विमान से वापस लौटे मंत्री ने कहा, “मैं अधिकारियों को धन्यवाद देना चाहता हूँ, क्योंकि उन्होंने हर संभव प्रयास किया और सभी कागजात पूरे करने में पूरा सहयोग किया। इसके कारण इन शवों की पहचान इतने कम समय में हो गई। सामान्य तौर पर इसमें एक सप्ताह या कम से कम दस दिन लग सकते थे। प्रधानमंत्री मोदी के निर्देश पर अधिकारी इस काम में बहुत तत्पर थे।”

इस मामले में कुवैत के अधिकारियों ने तीन लोगों को गिरफ़्तार किया है। गिरफ़्तार किए गए लोगों में छह मंज़िला इमारत का मालिक है, जो कथित तौर पर एक कुवैती नागरिक है। इसके अलावा इमारत के सुरक्षा गार्ड और कंपनी अधिकारी शामिल हैं। ये दोनों आप्रावासी हैं। बताया जा रहा है कि ये फिलिपींस के रहने वाले हैं। इस घटना में फिलिपींस के भी तीन लोग मारे गए हैं।

शुरुआती जाँच में सामने आया है कि सुरक्षा गार्ड को ग्राउंड फ़्लोर पर तैनात था। आग लगने के बाद गार्ड एवं इमारत के अधिकारियों ने लिफ्ट बंद कर दिया, जिससे ऊपरी मंजिलों के लोग नीचे भागे, लेकिन सीढ़ियों पर धुआँ भर जाने के कारण कई लोग ने छत की ओर भागे। वहाँ छत पर जाने के दरवाजे में ताला लगा हुआ था। ऐसी स्थिति में कुछ लोग बालकनी से कूद गए।

कहा जा रहा है ज्यादातर मौत आग में जलने के बाद धुएँ से दम घुटने के कारण हुई है। कहा जा रहा है कि इस मकान में अनुमति से अधिक लोगों को इमारत के मालिक द्वारा रखा गया था। वहीं, इस घटना के बाद UAE में भारत के व्यवसायी और लुलु कंपनी के मालिक एमए यूसुफ अली ने मृतक परिवारों को लगभग 5 लाख रुपए देने की घोषणा की है। ये राशि केरल के मुख्यमंत्री के माध्यम से दी जाएगी।

बता दें कि बुधवार (12 जून 2024) को अल मंगाफ शहर में छह मंजिला (कुछ रिपोर्ट में सात मंजिला) इमारत में भीषण आग लग गई। इसमें 49 लोगों की मौत हो गई। दूतावास ने कहा कि इस आवास में 176 भारतीय श्रमिकों में से 45 की मौत हो गई और 33 अस्पताल में भर्ती हैं। बाकी कथित तौर पर सुरक्षित हैं।

जब तक नहीं हटेगा टाइटल से करण और जौहर, तब तक रिलीज नहीं होगी पिक्चर: बॉलीवुड फिल्म निर्माता की याचिका पर बॉम्बे HC का फैसला

बॉलीवुड के मशहूर डायरेक्टर करण जौहर द्वारा बॉम्बे हाई कोर्ट में डाली गई याचिका पर अदालत ने फैसला दे दिया है। करण जौहर ने माँग की थी कि एक फिल्म जिसमें उनका नाम का सीधे तौर पर इस्तेमाल है उसे रोका जाए। ऐसे में कोर्ट ने इस फिल्म की रिलीज रोक दी। फिल्म आज (14 जून 2024) ही सिनेमाघरों में आने वाली थी।

फिल्म का नाम ‘शादी के डायरेक्टर करण और जौहर’ है। ऐसे में फिल्म डायरेक्टर करण जौहर ने कहा था कि इस फिल्म में उनके नाम का सीधे तौर पर इस्तेमाल हुआ है वो भी इजाजत के, इसलिए उन्हें इससे आपत्ति है और वो माँग करते हैं कि फिल्म को बैन किया जाए।

उनकी इस याचिका पर सुनवाई करते हुए बॉम्बे हाई कोर्ट ने फिल्म पर रोक लगाने का फैसला दिया। हाई कोर्ट ने निर्देश दिया है कि फिल्म को सिनेमाघरों या किसी भी सोशल मीडिया प्लेटफॉर्मपर तब तक रिलीज नहीं किया जाएगा जब तक फिल्म के टाइटल और फिल्म में से करण जौहर नाम और उनकी व्यक्तिगत विशेषताओं को हटाया नहीं जाता है।

उल्लेखनीय है कि फिल्म शादी के डायरेक्टर करण और जौहर के निर्माता इंडिया प्राइड एडवाइजरी और संजय सिंह के खिलाफ फिल्म करण जौहर ने याचिका दायर की थी। एक दिन बाद ही हाईकोर्ट में इस पर सुनवाई हुई। जस्टिस रियाज चागला ने करण जौहर के पक्ष में फैसला देते हुए कहा कि फिल्म के टाइटल में बिना करण जौहर की इजाजत के उनके नाम का रिफरेंस देना उनके मौलिक अधिकार और पर्सनालिटी राइट का उल्लंघन है।

‘हरियाणा से समझौता करो’: दिल्ली में जल संकट पर लड़ रहे I.N.D.I. गठबंधन में शामिल कॉन्ग्रेस और AAP, सुप्रीम कोर्ट में अपने कहे से पलटी हिमाचल सरकार

दिल्ली में जल संकट का मामला सुप्रीम कोर्ट में है। सुप्रीम कोर्ट में हिमाचल प्रदेश सरकार की तरफ से बोला जाता है कि उसके पास ‘एक्स्ट्रा’ पानी नहीं है। जिसके बाद सुप्रीम कोर्ट ने हिमाचल सरकार को डाँट भी लगाई थी और कहा था कि क्यों न आपके खिलाफ कार्रवाई की जाए। ये मामला ही दिल्ली सरकार की उस याचिका के आधार पर शुरू हुआ था, जिसमें दिल्ली सरकार से सुप्रीम कोर्ट में कहा था कि हिमाचल प्रदेश सरकार 135 क्यूसेक पानी दिल्ली को देना चाहता है, लेकिन हरियाणा वो पानी आने नहीं दे रहा। लेकिन सुप्रीम कोर्ट में हिमाचल प्रदेश सरकार पलट गई। अब एक बार फिर से हिमाचल प्रदेश सरकार की तरफ से ट्विस्ट आया है। हिमाचल प्रदेश के मुख्यमंत्री सुखविंदर सिंह सुक्खू ने कहा है कि हिमाचल के पास जितना ‘एक्स्ट्रा’ पानी है, वो दिल्ली ही नहीं किसी भी अन्य राज्य को देने को तैयार हैं, लेकिन पहले दिल्ली सरकार हरियाणा के साथ सहमति बनाए।

दिल्ली में जल संकट का पूरा मामला घूम फिर कर वहीं आ गया है, जहाँ से शुरू हुआ था। हालाँकि सुखविंदर सिंह सुक्खू का बयान सुप्रीम कोर्ट में नहीं, बल्कि मीडिया से बातचीत में आया है। यही नहीं, सुक्खू ने ये भी नहीं बताया है कि हिमाचल प्रदेश के पास कितना पानी है। सुखविंदर सिंह सुक्खू ने कहा, “हिमाचल के पास जितना भी पानी है, हमारे राज्य की जरूरत के पानी को छोड़कर, हम दिल्ली या किसी अन्य राज्य को सारा पानी देने के लिए तैयार हैं… हिमाचल प्रदेश इस देश का हिस्सा है। अगर पानी हरियाणा से आना है, तो दिल्ली को हरियाणा सरकार के साथ समझौता करना होगा। इसमें हमारी कोई भूमिका नहीं है।”

हिमाचल प्रदेश के मुख्यमंत्री के बयान को देखें, तो ये जनता में भ्रम फैलाने का मामला साफ तौर पर लगता है। एक तरफ तो राजनीतिक रूप से आम आदमी पार्टी और कॉन्ग्रेस पार्टी लोकसभा चुनाव में साथ चुनाव लड़ती हैं, जिनकी हिमाचल प्रदेश और दिल्ली में सरकार है, तो दूसरी तरफ वो हरियाणा की बीजेपी सरकार को निशाना बनाने की कोशिश करती है, ताकि जनता में अविश्वास फैले।

इसे इसी बात से समझा जा सकता है, कि सुप्रीम कोर्ट में हिमाचल प्रदेश सरकार कुछ और बोलती है, जबकि मीडिया में कुछ और कहती है। वहीं, सुप्रीम कोर्ट में भी आम आदमी पार्टी की दिल्ली सरकार लगातार अपनी बातों से पलट रही है, तो हिमाचल सरकार को डाँट पड़ चुकी है। यहाँ तक कि टैंकर माफिया पर कार्रवाई के बारे में सुप्रीम कोर्ट ने पूछा तो आम आदमी पार्टी ने ये कहकर पल्ला झाड़ लिया है कि माफिया तो हरियाणा से ऑपरेट करते हैं। ऐसे में सुखविंदर सिंह सुक्खू के बयान को जनता किस तरह से देखती है, अब गेंद उसके पाले में है। बाकी ये साफ है कि दिल्ली को हिमाचल प्रदेश से पानी नहीं ही मिलने वाला है।

हिजाब पहनने से रोका तो मुस्लिम शिक्षिका ने कॉलेज ही छोड़ दी, मजहब के नियमों का दिया हवाला: बंगाल में अल्पसंख्यक आयोग में भी दर्ज करा दी शिकायत

पश्चिम बंगाल एक मुस्लिम महिला शिक्षिका ने हिजाब के मुद्दे पर कॉलेज ही छोड़ दिया है। मामला राजधानी कोलकाता के एक प्राइवेट लॉ कॉलेज का है, जहाँ उक्त शिक्षिका को हिजाब पहन कर क्लास चलाने से मना किया गया था। हालाँकि, विरोध होने के बाद में उसे दुपट्टा डालने की अनुमति दे दी गई। अब उसने कहा है कि वो वापस कॉलेज नहीं जा रही हैं। इस पर कॉलेज ने भी प्रतिक्रिया देते हुए कहा है कि वो उक्त मुस्लिम शिक्षिका के निर्णय का सम्मान करता है।

शिक्षिका संजीदा क़दर ने कॉलेज प्रबंधन को एक ईमेल भेज कर बताया कि वो अब वहाँ नहीं पढ़ाएँगी। टॉलीगंज स्थित LJD लॉ कॉलेज के प्रबंधन ने सोमवार (17 जून, 2024) को एक ईमेल के जरिए संजीदा क़दर को सन्देश भेज कर कहा था कि वो शिक्षक-शिक्षिकाओं के लिए कॉलेज द्वारा बनाए गए ड्रेस कोड का पालन करते हुए यहाँ वापस ज्वाइन कर सकती हैं। साथ ही ये सहूलियत भी दी गई थी कि वो इस दौरान अपना सिर ढँकने के लिए दुपट्टे का इस्तेमाल कर सकती हैं।

इसके बाद शिक्षिका ने जवाब देने के लिए एक सप्ताह का समय माँगा था। गुरुवार को कॉलेज को भेजे गए ईमेल में शिक्षिका ने कहा कि कॉलेज के निर्णय पर सावधानी से विचार करने के बाद उसने फैसला लिया है कि वो इस संस्थान में फिर से नौकरी नहीं करेगी और अपने लिए नए मौके की तलाश करेगी। मुस्लिम शिक्षिका ने कहा कि वो समझती है कि उसके करियर के लक्ष्य के लिए ये फ़िलहाल सर्वश्रेष्ठ विकल्प नहीं है। उसने कहा कि परिस्थितियाँ उसके लिए सामान्य हो जाएँगी।

कॉलेज ने इसके बाद उसने निर्णय का सम्मान करते हुए उसे बेहतर भविष्य की शुभकामनाएँ दी। रमजान के महीने से ही संजीदा क़दर ने कॉलेज में क्लास के दौरान हिजाब पहनना शुरू कर दिया था। हालाँकि, अप्रैल से चले आ रहे इस सिलसिले पर जून में विवाद हो गया। संजीदा क़दर ने कहा कि इस कॉलेज में वापस पढ़ाने के लिए जाना उसके लिए सुविधाजनक नहीं होगा। उसने कहा कि हिजाब पहनने से रोका जाना उसके सिद्धांतों के खिलाफ है। पश्चिम बंगाल अल्पसंख्यक आयोग में भी शिकायत दर्ज कराई गई है।

5000 ग्राम सोना देने का किया वादा… फिर धोखाधड़ी की: शिल्पा शेट्टी और पति राज कुंद्रा ‘गोल्ड स्कैम’ में फँसे, कोर्ट ने पुलिस को दिए जाँच के आदेश

बॉलीवुड अभिनेत्री शिल्पा शेट्टी और उनके पति राज कुंद्रा की मुश्किलें एक बार फिर बढ़ गई हैं। इस दफा उनके ऊपर गोल्ड स्कीम में निवेशकों के साथ धोखाधड़ी करने का आरोप लगा है। ये आरोप ‘ऋद्धि सिद्धि बुलियंस’ के मैनेजिंग डायरेक्टर पृथ्वीराज कोठारी ने लगाया है। उन्होंने इस संबंध में बीकेसी थाने में शिकायत दी थी।

उनकी शिकायत पर संज्ञान लेते हुए मुंबई की एक कोर्ट ने पुलिस को जाँच करने के निर्देश दे दिए हैं। रिपोर्ट्स के मुताबिक, अतिरिक्त सत्र न्यायाधीश एन पी मेहता ने अपने आदेश में कहा कि कुंद्रा दंपती, उनके द्वारा स्थापित कंपनी सतयुग गोल्ड प्राइवेट लिमिटेड तथा कंपनी के दो और निदेशकों एवं एक कर्मचारी के खिलाफ प्रथम दृष्टया संज्ञेय अपराध बनता है।

इसके साथ ही कोर्ट ने पुलिस को निर्देश दिए कि मामले की जाँच के बाद अगर आरोप सही पाए जाते हैं तो धोखाधड़ी, क्राइम और भरोसा तोड़ने के लिए भारतीय दंड संहिता की संबंधित धाराओं के तहत उनके खिलाफ एफआईआर दर्ज की जाए।

बता दें कि शिल्पा शेट्टी और राज कुंद्रा समेत अन्य लोगों के खिलाफ कोठारी ने अपनी शिकायत में कहा कि इन लोगों ने साल 2014 में एक योजना को शुरू किया था। इसमें निवेश करने वालों के लिए स्कीम थी कि उन्हें आवेदन करते समय डिस्काउंट रेट पर सोने का एडवांस पेमेंट करने की बात कही गई थी और फिर स्कीम की मैच्योरिटी पर उन्हें तय अमाउंट में सोना दिया जाना था।

कोठारी के मुताबिक उन्होंने इस योजना में 90,38,600 रुपए का निवेश किया कि उन्हें 2 अप्रैल 2019 को 5000 ग्राम 24 कैरेट सोना दिया जाएगा। हालाँकि कंपनी ने अपना वादा पूरा नहीं किया। ऐसे में उन्होंने शिकायत दर्ज कराई और अब इस मामले में कोर्ट ने आदेश के लि

सड़कों पर न पढ़ी जाए नमाज, न प्रतिबंधित पशुओं की कुर्बानी हो: बकरीद से पहले UP में CM योगी ने दिए सख्त निर्देश, अधिकारियों से कहा- 24 घंटे एक्टिव रहने की जरूरत

उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने गुरुवार (13 जून 2024) को पर्व-त्योहारों को देखते हुए अधिकारियों के साथ बैठक की। इस दौरान सीएम ने बकरीद के दिन मुस्लिमों को सड़कों एवं सार्वजनिक स्थानों पर नमाज नहीं पढ़ने, प्रतिबंधित जानवरों की कुर्बानी नहीं देने और कुर्बानी वाले जानवरों के अवशेषों का उचित ढंग से निस्तारण करने का निर्देश दिया।

बता दें कि सोमवार (17 जून 2024) को बकरीद है। बैठक के दौरान मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने कहा कि 16 जून को गंगा दशहरा, 17 जून को बकरीद, 18 जून को ज्येष्ठ माह का मंगल का पर्व और 21 जून को अंतरराष्ट्रीय योग दिवस का आयोजन है। वहीं, जुलाई में मोहर्रम और काँवड़ यात्रा होने हैं। इसलिए सभी अधिकारियों को चौकन्ना रहना होगा और कानून-व्यवस्था दुरुस्त रखनी होगी।

मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने कहा कि बकरीद पर कुर्बानी के लिए स्थान पहले से तय होना चाहिए। तय स्थान के अलावा, कहीं और कुर्बानी न हो। विवादित एवं संवेदनशील स्थानों पर कुर्बानी नहीं होनी चाहिए। प्रतिबंधित पशुओं की कुर्बानी किसी स्थिति में नहीं होनी चाहिए। उन्होंने यह भी कहा कि नमाज परंपरा के अनुसार निर्धारित स्थल पर ही होना चाहिए, सड़कों पर नहीं।

सीएम योगी ने कहा कि सभी लोग आस्था का सम्मान करें, लेकिन किसी नई परंपरा को प्रोत्साहन न दें। हर एक पर्व शांति और सौहार्द्र के बीच संपन्न हों, इसके लिए स्थानीय जरूरतों को देखते हुए सभी जरूरी प्रयास किए जाएँ। उन्होंने अधिकारियों से कहा कि यदि कोई भी कानून हाथ में लेने का प्रयास करे तो उसके खिलाफ तुरंत कार्रवाई की जाए। अराजक तत्वों पर नजर रखें। 

ज्येष्ठ माह में बड़ा मंगल पर भंडारा आयोजन की परंपरा रही है। इसको लेकर भी सीएम योगी ने दिशा निर्देश दिया। उन्होंने कहा कि आयोजकों को स्पष्ट रूप से बताया जाना चाहिए कि प्रसाद खाकर अपशिष्ट सड़क किनारे न फेंके जाएँ। भंडारा वाली हर जगह पर डस्टबिन की उपलब्धता होनी चाहिए। उन्होंने कहा कि ऐसी कोई घटना न हो, जिससे दूसरे धर्म के लोगों की भावनाएँ आहत हों।

 

G-7 शिखर सम्मेलन के लिए इटली पहुँचे PM मोदी: मेलोनी, मैक्रों समेत विश्व के कई नेताओं से करेंगे मुलाकात, बोले- अंतरराष्ट्रीय सहयोग को बढ़ावा देना है लक्ष्य

प्रधानमत्री नरेंद्र मोदी इटली के अपुलिया में आयोजित ग्रुप ऑफ सेवन (जी-7) शिखर सम्मेलन में भाग लेने इटली पहुँच चुके हैं। ब्रिंडिसि हवाई अड्डे पर इटली में भारत के राजदूत वाणी राव और अन्य अधिकारियों ने पीएम मोदी का स्वागत किया।

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने एक्स पर पोस्ट कर लिखा, “G7 शिखर सम्मेलन में हिस्सा लेने के लिए इटली पहुँचा। विश्व नेताओं के साथ सार्थक चर्चा में शामिल होने के लिए उत्सुक हूँ। साथ मिलकर, हमारा लक्ष्य वैश्विक चुनौतियों का समाधान करना और उज्जवल भविष्य के लिए अंतरराष्ट्रीय सहयोग को बढ़ावा देना है।”

जानकारी के मुताबिक, इस दौरे के दौरान प्रधानमंत्री मोदी इटली की प्रधानमंत्री जॉर्जिया मेलोनी के निमंत्रण पर आज जी-7 शिखर सम्मेलन के आउटरीच सत्र में भाग लेंगे। इसके अलावा पीएम मोदी इटली की प्रधानमंत्री जॉर्जिया मेलोनी शिखर सम्मेलन से इतर द्विपक्षीय बैठक करेंगे। साथ ही पीएम मोदी की मुलाकात विश्व के अन्य नेताओं से भी होगी।

सामने आए शेड्यूल के हिसाब से वह आज दोपहर 2.15 से 2.40 बजे तक फ्रांस के राष्ट्रपति इमैनुअल मैक्रों के साथ द्विपक्षीय वार्ता करेंगे। वह इसके बाद 2.40-3 बजे तक ब्रिटेन के प्रधानमंत्री ऋषि सुनक के साथ वार्ता करेंगे। इसके बाद वो जी-7 में शामिल होंगे। वहाँ पहले उनका इटली पीएम जॉर्जिया मेलोनी के साथ वेलकम शूट होगा फिर आउटरीच सत्र शुरू होगा। बाद में पीएम मोदी जर्मनी चांसलर ओलाफ स्कॉलज के साथ द्विपक्षीय वार्ता करेंगे। इसके बाद उनकी पीएम मेलोनी के साथ बी द्विपक्षीय वार्ता होगी। उनके बाद वह जापान के पीएम किशिदा के साथ बैठक करेंगे और फिर रात का खान होगा।

बता दें कि जी7 में अमेरिका, ब्रिटेन, फ्रांस, इटली, जर्मनी, कनाडा और जापान शामिल हैं। इस बार इनकी मेजबानी का जिम्मा इटली का है। ऐसे में इटली ने इस समिट में शामिल होने के लिए भारत को आमंत्रित किया और साथ ही साथ अफ्रीका, दक्षिण अफ्रिका, हिंद प्रशांत क्षेत्र के 11 विकासशील देशों को इनवाइट भेजा था।

गुजरात में हड़प रखी है सरकारी जमीन: TMC सांसद युसूफ पठान पर नगर निगम करेगा कार्रवाई , VMC ने नोटिस भेजा

भारतीय क्रिकेट टीम में खेल चुके और हाल ही में पश्चिम बंगाल से तृणमूल कॉन्ग्रेस (TMC) की टिकट पर लोकसभा चुनाव जीतने वाले क्रिकेटर यूसुफ पठान विवादों में घिर गए हैं। भाजपा (BJP) के एक पूर्व पार्षद ने शिकायत की है कि पठान ने गुजरात के वडोदरा में सरकारी जमीन पर कब्जा कर लिया है। इसके बाद वडोदरा म्यूनिसिपल कॉरपोरेशन (VMC) ने पठान को नोटिस जारी किया है।

भाजपा नेता विजय पवार ने VMC की स्थायी समिति के अध्यक्ष को पत्र लिखकर इस मुद्दे को उठाया है और कहा कि यूसुफ पठान ने सरकारी जमीन पर जबरन कब्जा कर रखा है। उन्होंने माँग है की कि उस जमीन को निगम वापस अपने कब्जे में ले। इसके बाद नगर निगम ने क्रिकेटर से नेता बने पठान को 6 जून 2024 को नोटिस भेजा है।

नोटिस में कहा गया है, “यह बताया जाता है कि वीएमसी को (मार्च 2012 में) टीपी स्कीम नंबर 22 और फाइनल प्लॉट नंबर 90 में 978 वर्ग मीटर की भूमि आवंटित करने के लिए आपसे अनुरोध प्राप्त हुआ था। प्रक्रिया के अनुसार, आपके आवेदन को स्थायी समिति के पास भेजा गया और उसके बाद मूल्यांकन समिति द्वारा न्यूनतम मूल्य तय करने के बाद सामान्य बोर्ड को भेजा गया।”

उसमें आगे कहा गया है, “इसके बाद बिना नीलामी के इसे विशेष मामले के तहत 99 साल की अवधि के लिए भूमि पट्टे पर देने के लिए गुजरात राज्य सरकार को मंजूरी के लिए आवेदन को भेजा गया था। हालाँकि, 9 जून 2014 को शहरी विकास विभाग से प्राप्त उत्तर के अनुसार, उक्त भूमि को आपको पट्टे पर देने का अनुरोध अस्वीकार कर दिया गया था।”

नोटिस में आगे कहा गया है, “आपको एक पत्र के माध्यम से इसकी जानकारी दी गई थी… हालाँकि, यह पता चला है कि आपने वीएमसी की उक्त भूमि पर अतिक्रमण किया है और आपको जल्द से जल्द अतिक्रमण हटाने का निर्देश दिया जाता है।” दरअसल, यह मामला वडोदरा के तंदलजा में शुभम पार्टी प्लॉट के पास नगर निगम के स्वामित्व वाले प्लॉट से जुड़ा है।

यूसुफ पठान ने अपने प्लॉट नंबर 91 पर बंगला बनाने का फैसला किया। इसलिए उन्होंने उससे सटे प्लॉट नंबर 90 की माँग की। नगर आयुक्त की सिफारिश पर इसके लिए तुरंत प्रस्ताव तैयार किया गया। प्रस्ताव में सुरक्षा के विशेष मामलों में सार्वजनिक नीलामी के बिना आवासीय प्रयोजनों के लिए यूसुफ महमूद पठान को 57,270 रुपए प्रति वर्गमीटर की दर से भूमि आवंटित करने की सिफारिश की गई।

इसके अतिरिक्त, सरकार से अनुमोदन प्राप्त करने और 99 साल के पट्टे पर सुरक्षा प्रदान करने के लिए सभी शक्तियाँ प्रदान करने की भी सिफारिश की गई है। यह प्रस्ताव 30 मार्च 2012 को नगर निगम की स्थायी समिति के समक्ष प्रस्तुत किया गया और उसे मंजूरी दे दी गई। इसके बाद इसे मंजूरी के लिए आम सभा में भेजा गया। 8 जून 2012 को आम सभा ने सर्वसम्मति से प्रस्ताव को मंजूरी दी।

अंत में निगम के इस प्रस्ताव को मंजूरी के लिए राज्य सरकार को भेज दिया गया। हालाँकि, 9 जून 2014 को शहरी विकास एवं शहरी आवास विभाग के एक अधिकारी ने प्रस्ताव को खारिज कर दिया। आयुक्त को लिखित रूप से बताया गया कि राज्य सरकार ने क्रिकेटर यूसुफ महमूद पठान को सार्वजनिक नीलामी के बिना विशेष मामले के रूप में भूमि आवंटित करने के अनुरोध को खारिज कर दिया है।

पूर्व पार्षद विजय पवार ने अब स्थायी समिति के अध्यक्ष के समक्ष शिकायत दर्ज कराई है। उन्होंने दावा किया है कि भूमि आवंटन अनुरोध को अस्वीकार किए जाने के बावजूद पठान ने बगीचे और अस्तबल बनाने के लिए परिसर में दीवार खड़ी की है। पवार ने सवाल उठाया कि सरकार की अनुमति के बिना भूमि पर कब्जा कैसे किया जा सकता है। उन्होंने इस मामले में उचित कार्रवाई की माँग की है।

इस मामले पर स्थायी समिति की अध्यक्ष डॉक्टर शीतल मिस्त्री ने गुरुवार (13 जून) को बताया कि पठान के खिलाफ दो सप्ताह बाद कार्रवाई की जा सकती है। मिस्त्री ने कहा कि पठान को 6 जून को नोटिस देकर अतिक्रमण हटाने के लिए दो सप्ताह का समय दिया गया था। उन्होंने कहा कि दो सप्ताह का समय पर्याप्त है। अगर टीएमसी नेता खुद अतिक्रमण नहीं हटाते हैं तो समिति आगे की कार्रवाई करेगी।

मिस्त्री ने ‘राजनीतिक कदम’ वाले आरोपों से इनकार करते हुए कहा, “मुझे राजनीतिक कदम के बारे में जानकारी नहीं है, लेकिन हमारे संज्ञान में आने के बाद अतिक्रमण हटाने की यह एक प्रक्रिया है।” बता दें कि भारतीय क्रिकेट टीम के लिए खेल चुके यूसुफ पठान वह पश्चिम बंगाल की बेहरामपुर सीट से ममता बनर्जी की TMC के टिकट पर चुनाव लड़कर कॉन्ग्रेस नेता अधीर रंजन चौधरी को हराया है।

‘देवस्थानम में भ्रष्टाचार बर्दाश्त नहीं…’: CM बनने के बाद तिरुपति पहुँचे चंद्रबाबू नायडू, भगवान वेंकटेश्वर का दर्शन कर लिया हिंदू धर्म की रक्षा करने का प्रण

तेलुगु देशम पार्टी (TDP) सुप्रीमो चंद्रबाबू नायडू ने बुधवार (12 जून 2024) को आंध्र प्रदेश के मुख्यमंत्री के रूप में चौथी बार शपथ ली। इसके बाद उन्होंने बतौर मुख्यमंत्री गुरुवार (13 जून) को तिरुमाला में भगवान वेंकटेश्वर स्वामी मंदिर में दर्शन किया। नायडू ने मंदिर में पूजा-अर्चना की और तिरुपति-तिरुमाला प्रशासन को ‘शुद्ध’ करने की शपथ के साथ हिंदू धर्म की रक्षा का प्रण लिया।

भगवान वेंकटेश स्वामी का दर्शन करने के बाद मुख्यमंत्री नायडू ने जगन मोहन रेड्डी सरकार पर आरोप लगाए। उन्होंने कहा कि पूर्ववर्ती जगन मोहन रेड्डी शासन के दौरान वेंकटेश्वर मंदिर की देखरेख करने वाले तिरुमाला तिरुपति देवस्थानम (टीटीडी) में अनियमितताएँ हुई थीं। उन्होंने कहा कि वो तिरुमाला में भ्रष्टाचार को खत्म करने और ‘हिंदू धर्म’ की रक्षा के लिए हरसंभव कोशिश करेंगे।

पूरे परिवार के साथ वेंकटेश्वर स्वामी के दर्शन करने पहुँचे TDP सुप्रीमो चंद्रबाबू नायडू ने कहा, “मैं तिरुमाला से शासन का शुद्धिकरण शुरू करूँगा। तिरुमाला को अपवित्र करना बिल्कुल भी स्वीकार नहीं किया जा सकता है। तिरुमाला में केवल गोविंदा के नाम का ही जाप रहेगा।” उन्होंने आगे आरोप लगाया कि पूर्ववर्ती राज्य सरकार ने तिरुमाला तिरुपति देवस्थानम का व्यवसायीकरण किया।

सीएम नायडू ने कहा, “प्रसादम अच्छी गुणवत्ता का होना चाहिए। दरें नहीं बढ़ाई जानी चाहिए और ‘दर्शन’ के लिए टिकट काला बाजार में नहीं बेचे जाने चाहिए। उन्होंने इस धार्मिक स्थल को मारिजुआना, शराब और मांसाहारी भोजन का केंद्र बना दिया। सफाई की शुरुआत टीटीडी से होगी।” उन्होंने यह भी कहा कि राज्य में भ्रष्टाचार और अपराध किसी कीमत पर बर्दाश्त नहीं किया जाएगा।

अपने शासन में जवाबदेही और पारदर्शिता सुनिश्चित करने की बात कहते हुए मुख्यमंत्री नायडू ने कहा कि वो प्रदेश को गरीबी से मुक्त करने की पूरी कोशिश करेंगे। उन्होंने कहा, “2047 तक तेलुगु लोग दुनिया में नंबर एक होंगे। मैं आंध्र प्रदेश को देश का नंबर एक राज्य बनाऊँगा। कुछ लोग अपराध करने के बाद हमारे खिलाफ झूठे आरोप लगा रहे हैं। राजनीतिक साजिशों को बर्दाश्त नहीं किया जाएगा।”

सीएम पद का कार्यभार सँभालने से पहले अपनी पत्नी, बेटे नारा लोकेश, बहू और अन्य रिश्तेदारों सहित अपने परिवार के सदस्यों के साथ मुख्यमंत्री कल शाम तिरुपति के लिए विशेष विमान से रवाना हुए और फिर सड़क मार्ग से तिरुमाला पहुंचे, जहां उन्होंने रात बिताई। गुरुवार की सुबह उन्होंने पवित्र पहाड़ी मंदिर में पूजा-अर्चना की। यहाँ से वे अमरावती के लिए निकल गए।