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‘अभिव्यक्ति की आज़ादी के बहाने झूठ फैला कर किसी को बदनाम नहीं कर सकते’: दिल्ली हाईकोर्ट से कॉन्ग्रेस नेताओं को झटका, कहा – हटाओ रजत शर्मा वाला वीडियो

न्यूज़ चैनल ‘India TV’ के चेयरमैन एवं एडिटर-इन-चीफ रजत शर्मा को मानहानि के मामले में दिल्ली उच्च न्यायालय ने राहत दी है। साथ ही कॉन्ग्रेस नेताओं को रजत शर्मा के खिलाफ किए गए ट्वीट्स डिलीट करने के लिए कहा गया है। ‘आप की अदालत’ इंटरव्यू शो के लिए लोकप्रिय रजत शर्मा पर कॉन्ग्रेस नेताओं ने आरोप लगाया था कि पार्टी की प्रवक्ता रागिनी नायक को उन्होंने बीच शो में धीमे से गाली दी। हालाँकि, वीडियो में गाली सुनाई नहीं दे रही है।

कॉन्ग्रेस के कम्युनिकेशन विभाग के सेक्रेटरी इंचार्ज जयराम रमेश, मीडिया एवं पब्लिसिटी डिपार्टमेंट के चेयरमैन पवन खेड़ा और पार्टी के विदेश मामलों की संयोजक रागिनी नायक को अब रजत शर्मा के खिलाफ किए गए ट्वीट्स हटाने पड़ेंगे। जस्टिस नीना बंसल कृष्णा ने इसके लिए तीनों नेताओं को एक सप्ताह का समय दिया है। Google को आदेश दिया गया है कि जो वीडियो सार्वजनिक हो चुके हैं उन्हें प्राइवेट किया जाए, बिना न्यायिक आदेश के उन्हें सार्वजनिक न किया जाए।

साथ ही इन तीनों नेताओं ने YouTube और X (पूर्व में ट्विटर) पर इस संबंध में जो भी पोस्ट किए, उनके URLs को हटाने के लिए भी दिल्ली हाईकोर्ट ने कहा है। मामला लोकसभा चुनाव 2024 की मतगणना के दिन चल रहे डिबेट शो का है। तीनों नेताओं ने एक एडिटेड वीडियो को ये कह कर पोस्ट किया कि ये इंडिया टीवी के डिबेट शो के रॉ फुटेज हैं। कोर्ट ने टी डिबेट का फुटेज देख कर कहा कि प्रारंभिक रूप से लगता है कि रजत शर्मा ने किसी गाली का इस्तेमाल नहीं किया।

हाईकोर्ट ने कहा कि अगर ये वीडियो सार्वजनिक मीडिया में मौजूद रहते हैं तो इससे रजत शर्मा को भविष्य में बदनाम किए जाने की आशंका बनी रहेगी और उनकी प्रतिष्ठा को देखते हुए व्यावहारिक रूप से नुकसान की भरपाई नहीं की जा सकेगी। कोर्ट ने कहा कि मानहानि और आलोचना के बीच एक पतली सी रेखा है। उच्च न्यायालय ने कहा कि अभिव्यक्ति एवं बोलने की आज़ादी के तहत किसी की प्रतिष्ठा को ठेस नहीं पहुँचाई जा सकती।

उन्होंने कहा कि कॉन्ग्रेस नेताओं ने ‘रजत शर्मा ने गाली दी’ वाक्य का इस्तेमाल किया, जो तथ्यों को पूरी तरह गलत तरीके से पेश करने के बराबर है। कोर्ट ने कहा कि रजत शर्मा की प्रतिष्ठा को ठेस पहुँचाने के लिए ये सब किया गया। इंडिया टीवी ने पहले भी बताया था कि रजत शर्मा पर लगाए गए आरोप गलत हैं और इस पर कानूनी कार्रवाई की जाएगी। रागिनी नायक अक्सर टीवी डिबेट्स में हल्ला-गुल्ला करने के लिए जानी जाती हैं। जयराम रमेश पहले भी कई बार झूठ फैला चुके हैं। हाईकोर्ट ने कहा कि अत्यधिक सनसनी बनाने के लिए कॉन्ग्रेस नेताओं ने झूठ फैलाया।

साथ काम करने वाले और एक जैसा सोचने वाले एक-दूसरे के दीवाने होते हैं? प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और इटली की PM मेलोनी की मीम चरित्र हनन का प्रयास

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी एवं इटली की पीएम जॉर्जिया मेलोनी अपने-अपने देश के जनता के मतों से चुनकर आए हुए प्रधानमंत्री हैं। इन दोनों की ही छवि एक कुशल प्रशासक एवं अपने देश के लिए कार्य करने वाले नेताओं की है। दोनों ही नेता अपने-अपने देशों में कई चुनौतियों का भी सामना कर रहे हैं।

सोशल मीडिया के विभिन्न प्लेटफॉर्म पर यह देखने में आया है कि इन दोनों को लेकर मजाक में अजीबोगरीब मीम एवं चुटकुले बनाए जा रहे हैं। सोशल मीडिया पर मेलोड़ी जैसे ट्रेंड चलाए जा रहे हैं। आखिर क्यों? ऐसा क्या कारण है कि दो गंभीर छवि एवं अपने देश के लिए कार्य करने वाले नेताओं की ऐसी छवि गढ़ी जा रही है।

क्या हम यह प्रमाणित करना चाहते हैं कि दो साथ काम करने वालों के बीच एक ही प्रकार के संबंध हो सकते हैं? क्या हम यह कहना चाहते हैं कि दो लोग जब साथ काम करते हैं, एक जैसा सोचते हैं तो एक-दूसरे के दीवाने होते हैं? यह कैसी मानसिकता और चरित्र हनन का प्रयास है?

एक ऐसा व्यक्ति, जिसने अपना पारिवारिक जीवन देश के लिए त्याग दिया हो, जिसके पास अपना निजी कुछ भी न हो, उसके विषय में इटली की प्रधानमंत्री को लेकर ऐसे पोस्ट बनाए जाएँ, जिससे आगे जाकर उनका चरित्र हनन हो या किसी को ऐसा अवसर मिले कि वह इस समय प्रचलित मीम आदि के आधार पर छोटे-छोटे शब्दों एवं मुलाकातों का दूसरा अर्थ निकाले तो प्रश्न यह उठता ही है कि हम कैसा समाज बना रहे हैं?

भारत के प्रधानमंत्री मोदी का निजी जीवन बेदाग रहा है। उन पर कोई भी चारित्रिक आरोप लगाने से पहले लोगों को कई बार सोचना पड़ता है। हम एक ऊँचे चारित्रिक मानकों का पालन करने वाले व्यक्ति के चरित्र हनन में सबसे आगे हैं, क्योंकि हम एक वृहद उद्देश्य के लिए कार्य कर रहे अपने नेताओं को सीमित कर रहे हैं।

पुरुष आयोग की अध्यक्ष होने के नाते मुझे एक उच्च चरित्र के मनुष्य और विश्व में भारत का नाम गर्व से ऊँचा करने वाले हमारे प्रिय प्रधानमंत्री की इस छवि को लेकर चिंता है और मैं आपत्ति व्यक्त करती हूँ। मुझे इसे लेकर सख्त ऐतराज है कि दो निर्दोष लोगों की छवि ऐसे नष्ट की जाए। उनकी गंभीर छवि पर इस प्रकार का दाग लगाया जाए कि वे किसी भी महिला या पुरुष की ओर देखें तो उसमें कोई अर्थ निकले।

जैसे अभी हाल ही में जी-7 में ही जब यूके के प्रधानमंत्री ऋषि सुनक ने मेलोनी से हाथ मिलाकर और पाश्चात्य तरीके से अभिवादन किया तो भारत में इसे लेकर भी मजाक उड़ाया गया कि मेलोनी के साथ नहीं! ये लोग राष्ट्राध्यक्ष हैं एवं इनकी अपनी गरिमा होती है। इस गरिमा को कलंकित करने का कुकृत्य क्यों और किसके निर्देशों पर किया जा रहा है, यह समझ नहीं आ रहा है।

क्या हम भारत की छवि ऐसी बना देना चाहते हैं, जहाँ पर दो राष्ट्राध्यक्ष मित्र ही न रह पाएँ? प्रधानमंत्री मोदी एवं इटली की प्रधानमंत्री जॉर्जिया मेलोनी के साथ किया जा रहा यह मजाक बंद होना चाहिए।

कहीं दर्जनों परिवारों को करना पड़ा पलायन, कहीं सिर मर मार दी गोली… बंगाल में राजनीतिक हिंसा की जाँच के लिए BJP ने बनाई 4 सदस्यीय समिति, राज्य का करेगी दौरा

लोकसभा चुनाव के दौरान और उसके बाद पश्चिम बंगाल में हो रही राजनीतिक हिंसा की घटनाओं की जाँच के लिए बीजेपी ने एक टीम का गठन किया है। बीजेपी ने त्रिपुरा के पूर्व मुख्यमंत्री बिप्लब कुमार देब के नेतृत्व में चार नेताओं की समिति का गठन किया है। यह समिति जल्द ही पश्चिम बंगाल का दौरा करेगी और हिंसा की घटनाओं की रिपोर्ट बीजेपी के राष्ट्रीय अध्यक्ष जेपी नड्डा को सौंपेगी।

बीजेपी की समिति का संयोजक त्रिपुरा के पूर्व मुख्यमंत्री बिप्लब कुमार देब को बनाया गया है। इस चार सदस्यीय समिति में पूर्व केंद्रीय मंत्री रविशंकर प्रसाद, राज्यसभा सांसद एवं उत्तर प्रदेश के पूर्व डीजीपी बृजलाल और सांसद कविता पाटीदार को भी शामिल किया गया है। समिति के गठन के साथ ही बीजेपी ने पश्चिम बंगाल में हो रही हिंसा के लिए ममता बनर्जी पर निशाना साधा है।

ममता बनर्जी पर हमला बोलते हुए बीजेपी ने कहा, “भारत के 28 राज्यों और 8 केंद्र शासित प्रदेशों में हाल ही में लोकसभा चुनाव संपन्न हुए हैं। लोकसभा आम चुनाव के साथ-साथ तीन राज्यों में विधानसभा चुनाव भी हुए और सत्ता का हस्तांतरण शांतिपूर्ण ढंग से हुआ। पश्चिम बंगाल को छोड़कर कहीं भी राजनीतिक हिंसा की कोई घटना नहीं हुई है। पश्चिम बंगाल ही एकमात्र ऐसा राज्य है जो चुनाव के बाद हिंसा की चपेट में है, जैसा कि हमने वहाँ 2021 के विधानसभा चुनाव के बाद देखा था।”

बीजेपी ने कहा, “राजनीतिक हिंसा की घटनाओं को लेकर पश्चिम बंगाल की मुख्यमंत्री ममता बनर्जी मूकदर्शक बनी हुई हैं, जबकि उनकी पार्टी के अपराधी बेखौफ होकर विपक्षी कार्यकर्ताओं और मतदाताओं पर हमला कर रहे हैं और उन्हें डरा-धमका रहे हैं। कोलकता हाई कोर्ट ने भी इसे गंभीरता से लेते हुए CAPF की तैनाती 21 जून तक बढ़ा दी है और मामले को आगे की समीक्षा के लिए 18 जून को सूचीबद्ध किया है। पश्चिम बंगाल में हो रही राजनीतिक हिंसा की घटनाओं का जायजा लेने के लिए एक समिति का गठन किया है, जो शीघ्र ही पश्चिम बंगाल का दौरा करेगी तथा हिंसा की घटनाओं की पूरी रिपोर्ट राष्ट्रीय अध्यक्ष जेपी नड्डा को सौंपेगी।”

बता दें कि लोकसभा चुनाव के नतीजे घोषित होने के एक दिन बाद 5 जून को पश्चिम बंगाल के विभिन्न हिस्सों से चुनाव-पश्चात हिंसा की कई घटनाएँ सामने आईं। उत्तर बंगाल के कूचबिहार, दक्षिण बंगाल के उत्तर 24 परगना जिले और दक्षिण 24 परगना तथा जंगलमहल क्षेत्र के झारग्राम सहित राज्य के कई जिलों में चुनाव-पश्चात हिंसा की घटनाएं सामने आईं। कूचबिहार के नाटाबाड़ी में एक भाजपा समर्थक ने तृणमूल कार्यकर्ता पर बंदूक से हमला किया, जिसका वीडियो वायरल हो रहा है। इलाके में सत्तारूढ़ पार्टी और भाजपा समर्थकों के बीच झड़पें हुईं।

इसके अलावा उत्तर 24 परगना, बैरकपुर, हावड़ा में देशी बम फेंके घए, तो लोकसभा चुनाव के नतीजे घोषित होने के बाद कई पार्टी समर्थकों को संदेशखली से भागना पड़ा। संदेशखली उत्तर 24 परगना में बशीरहाट लोकसभा सीट के अंतर्गत आता है। भाजपा कार्यकर्ताओं के करीब 40 परिवारों ने दक्षिण कोलकाता के जादवपुर इलाके में एक पार्टी कार्यालय में शरण ली है।

‘हिन्दुओं गाड़ियों से रौंदो, बम से उड़ाओ, चाकू से उनके पेट चीरो’: ISIS की पत्रिका में हिंसक जिहाद का एलान, PM मोदी और राम मंदिर सहित कई निशाने पर

ISIS समर्थित पत्रिका ‘वॉयस ऑफ खुरासान’ ने अपने ताजा संस्करण में हिन्दुओं के कत्लेआम का एलान किया है। इस नरसंहार के लिए भारत के साथ-साथ दुनिया भर के मुस्लिमों को उकसाया गया है। महमूद गज़नवी और मोहम्मद बिन कासिम जैसे आक्रांताओं की तारीफ करते हुए इस पत्रिका में भारत के भारत प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और भाजपा के अन्य नेताओं को इस्लाम का दुश्मन घोषित किया गया है। इसी संस्करण में राम मंदिर पर भी आपत्तिजनक टिप्पणी की गई है।

रिपोर्ट्स के मुताबिक, पत्रिका ‘वॉयस ऑफ खुरासान’ ने अपने कवर पेज पर दी गई हेडलाइन में लिखा, “हे बहुदेववादी भारतीय राजा। महमूद गजनवी का फिर से सामना करने के लिए तैयार हो जाओ।” इसके बाद उन्होंने लिखा, “भारत के मुशरिकों को कारों से मारो। चाकुओं से उनके पेट चीरो। इनके मंदिरों, घरों, कारों, संपत्तियों और फसलों में आग लगाओ। भीड़-भाड़़ वाली जगहों को निशाना बनाओ। उन्हें दिखाओ कि पैगंबर मुहम्मद का उम्माह अभी जिंदा है।”

Source: VOK

लेख यहीं खत्म नहीं हुआ। इसमें आगे लिखा गया, “अगर भारत के मुसलमान हिंदुओं पर हमला करने में असमर्थ हैं तो दुनिया भर के मुस्लिमों को एक साथ मिलकर भारत पर हमला करना चाहिए। अगर तुम इसके बावजूद मुशरिकों पर काबू नहीं पा सके तो इस्लामिक में विलायत के दरवाज़े तुम्हारे लिए खुले हैं।” पश्चिम के देशों का जिक्र करते हुए इस लेख में उनको नास्तिक और मुस्लिमों को खत्म करने की कोशिश करने वाला बताया गया है।

Source: VOK

मुस्लिमों को भड़काने के लिए इस लेख में कहा गया है कि गैर मुस्लिम उनकी जमीनों पर कब्ज़ा और महिलाओं का अपमान करते हुए शरिया कानूनों का मज़ाक उड़ा रहे हैं। आज के अधिकतर मुस्लिमों को इस दुनिया से मोहब्बत हो गई है, इसलिए वो जिहाद की राह में मरने की हिम्मत नहीं जुटा पाते। यहाँ मुशरिकों का अर्थ उन सभी से है, जो किसी भी प्रकार की बुतपरस्ती (मूर्ति पूजा) करते हैं।

हिन्दुओं के साथ हिन्दू नेता भी निशाने पर

ISIS समर्थित पत्रिका के इस लेख में हिन्दू नेताओं में खासतौर पर भाजपा से जुड़े लोगों को मुस्लिमों पर अत्याचार करने वाला बताया गया है। लेख में मोहम्मद बिन कासिम और महमूद गज़नवी जैसे हमलावरों की तारीफों के पुल बाँधे गए हैं। मुस्लिमों से उनकी जीत को याद करके उन्हीं की राह पर चलने को हिदायत दी गई है। इस जीत का एकमात्र रास्ता हिंसक जिहाद ही बताया गया है।

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी पर खासतौर से निशाना

इस पत्रिका के आतंकवाद समर्थक लेख में भारत के प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को खासतौर पर निशाने पर लिया गया है। उन्हें इस्लाम का दुश्मन करार देते हुए मुस्लिमों के खिलाफ गलत व्यवहार करने वाला बताया गया है। लेख में यह भी है कि नरेंद्र मोदी इस्लामी तौर-तरीकों का मज़ाक उड़ाते हैं। मोदी के शासन को ISIS की पत्रिका ने एक चरमपंथी हिन्दू राष्ट्रवादी का राज बताया है और उनकी नीतियों की आलोचना की है।

चित्र- VOK (वॉयस ऑफ़ खुरासान)

ISIS की इस पत्रिका में यह भी आरोप लगाया गया है कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने अपने चुनाव प्रचार के दौरान भारत के मुसलमानों को घुसपैठिया कहा था। हालाँकि, यह कॉन्ग्रेस और भारत के कुछ कथित उदार मुस्लिमों द्वारा फैलाई गई अफवाह थी।

राम मंदिर पर अपमानजनक टिप्पणी

राम मंदिर को बाबरी मस्जिद की जगह बनवाने जैसी बातें भी इस पत्रिका में कही गई हैं। इसके लेख से लगता है कि जैसे ISIS राम मंदिर पर हमले की फिराक में था। रामजन्मभूमि पर हुए तमाम आयोजनों और भजन को ISIS की इस पत्रिका में अश्लील पार्टी और गंदे गाने जैसे शब्दों से सम्बोधित किया गया है। मंदिर परिसर में शराब परोसने जैसी बातें लिखी गईं है। इसमें आगे कहा गया है कि मस्जिद की उस पाक जमीन पर अब गाय और मूर्तियों की पूजा हो रही है।

चित्र- VOK (वॉयस ऑफ़ खुरासान)

जनवरी 2024 में राम मंदिर प्राण प्रतिष्ठा में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के साथ तमाम फ़िल्मी, राजनैतिक, खेल और व्यापार जगत की हस्तियों के शामिल होने पर भी ISIS की इस पत्रिका में नाराजगी जताई गई है। लेख में राम मंदिर-बाबरी केस में आए गए फैसले को भी गलत ठहराने की कोशिश की गई है।

पत्रिका में नूपुर शर्मा भी निशाने पर

एक लम्बे समय के बाद सार्वजानिक जीवन में फिर से दिख रहीं नूपुर शर्मा का भी जिक्र ISIS की इस पत्रिका में हुआ है। TV डिबेट में उनके द्वारा की गई टिप्पणी को भी दोबारा याद दिला कर कुछ लोगों को भड़काने का प्रयास हुआ है। बताते चलें कि मोहम्मद जुबैर द्वारा एडिटेड क्लिप शेयर करते ही नूपुर शर्मा को पूरी दुनिया से रेप, हत्या और सिर तन से जुदा की धमकियाँ मिलने लगीं थी।

हालाँकि TV डिबेट के दौरान तस्लीम रहमानी द्वारा बार-बार ज्ञानवापी के शिवलिंग का अपमान किए जाने के जवाब में नूपुर शर्मा की कही गई तमाम बातें ज़ाकिर नाईक सहित कई कई इस्लामिक स्कॉलर के बयानों से मेल खाती हैं। इसके बावजूद नूपुर शर्मा आज इस्लामी कट्टरपंथियों के निशाने पर आ गई हैं।

चित्र- VOK (वॉयस ऑफ़ खुरासान)

कट्टरपंथियों के निशाने पर अब माधवी लता भी

लोकसभा चुनाव 2024 में हैदराबाद से असदुद्दीन ओवैसी के खिलाफ रहीं भाजपा प्रत्याशी भी अब कट्टरपंथियों के निशाने पर हैं। इस लेख में दावा किया गया है कि साल 2023 में माधवी लता को किसी मुस्लिम विरोधी बयान के चलते कार्रवाई झेलनी पड़ी थी। माधवी लता को प्रत्याशी बनाने की वजह इस लेख में भाजपा द्वारा मुस्लिम विरोधी नेताओं को तरजीह देने की सोच माना गया है।

भारत में हिंसा को भड़काने की साजिश

भारत और उसके आसपास के इलाकों को मुस्लिम विरोधी बताकर ISIS ने हिन्दुओं को मुस्लिमों का दुश्मन बताया है। प्रधानमंत्री मोदी के शासन को इस लेख में मिस्र के फराओ का बनी इस्रायल के साथ दुश्मनी वाले दौर की तरह बताया गया है। लेख में लोगों को भड़काते हुए कहा गया है कि आज भारत के लगभग 22 करोड़ मुस्लिम हिन्दुओं की गुलामी में दर्दनाक जीवन बिताने को मजबूर है।

जिहाद के लिए उकसाया

ISIS ने अपने इस लेख में मुसलमानों से गैर मुस्लिमों के खिलाफ हिंसा के लिए उकसाया है। उन्हें हिन्दुओं की हत्या बम ब्लास्ट और अन्य रूपों के जरिए करने के लिए कहा गया है। इन हरकतों को लेख में बदला लेने की नीयत से किया गया मज़हबी और नेक काम वाली कोशिश कहा गया है। हिंसा के लिए मंदिरों, सार्वजनिक स्थानों और राजनीतिक हस्तियों को चुन लेने के लिए भी भड़काया गया है।

चित्र- VOK (वॉयस ऑफ़ खुरासान)

राष्ट्रीय सुरक्षा के लिए खतरा है लेख

इस तरह के लेख भारत की आतंरिक सुरक्षा के लिए एक गंभीर खतरा है। ‘वॉयस ऑफ खुरासान’ पत्रिका टेलीग्राम चैनलों के साथ फेसबुक व अन्य सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म पर वायरल की जाती है। इसी की वजह से सार्वजनिक स्थानों के साथ कुछ नामी-गिरामी हस्तियों पर हमले की आशंका बढ़ जाती है। इससे पैदा हुए हालात देश में अस्थिरता का माहौल बनाते हैं। आशा है कि सरकार इसे गंभीरता से लेगी।

(इस लेख को मूल रूप से अंग्रेजी में अनुराग ने लिखा है। इस लिंक को क्लिक करके आप इसे पढ़ सकते हैं।)

खेत में घुसी ऊँट को जमींदार ने काट डाली उसकी टाँग, रोता-चीखता रहा निरीह पशु: डरावनी तस्वीरें वायरल, फिर भी पुलिस ने अज्ञातों पर किया मुकदमा

पाकिस्तान के सिंध स्थित नवाबशाह की कुछ डराने वाली तस्वीरें वायरल हो रही हैं। असल में एक जमींदार के खेत में ऊँट घुस गया तो उसने उस निरीह पशु के पाँव को ही काट डाला। इसके बाद उसने पाँव के कटे हुए हिस्से को हाथ में लेकर गर्व से तस्वीर भी पोस्ट की। वहीं एक अन्य तस्वीर में उक्त ऊँट को कटा हुआ पाँव लेकर लँगड़ा कर चलते हुए देखा जा सकता है। ये घटना मुंड जामराव गाँव की है। उसका कहना है कि ऊँट उसके खेत में घुसा, इसीलिए उसने ‘सज़ा’ दी।

शुक्रवार (14 जून, 2024) को संघार जिले में हुई इस घटना की लोग निंदा कर रहे हैं। स्थानीय SSP ने इस घटना का संज्ञान लेते हुए उस ऊँट के मालिक से संपर्क किया, जिसके साथ ज्यादती हुई है। ऊँट का मालिक सुमार बेहन एक गरीब किसान है। अधिकारियों का कहना है कि उक्त किसान ने आरोपित को पहचानने से इनकार कर दिया, साथ ही उसके खिलाफ FIR दर्ज कराने से भी उसने मना कर दिया। इसके बाद पुलिस ने सरकार की तरफ से FIR दर्ज की।

इसमें भी आरोपित का नाम नहीं लिखा गया, बल्कि अज्ञातों के खिलाफ PPC की धारा-34 (एक से अधिक लोगों द्वारा मिल कर किसी अपराध को अंजाम देना) और 429 (पशुओं की हत्या करना या उन्हें ज़हर देना) के तहत मामला दर्ज किया गया। मीडिया ने भी इस पर आपत्ति जताई है कि बासीर वडेरे की हगाह नामालूम आरोपितों के खिलाफ मामला दर्ज किया। पहले उसने ऊँट को पकड़ कर पीटा, फिर उसने उसकी टाँग काट डाली। मीडिया प्रेशर खत्म करने के लिए जल्दबाजी में FIR दर्ज की गई।

उक्त ऊँट टाँग काटे जाने के बाद रोता-चीखता हुआ नज़र आया। मांगली पुलिस थाने पर इसके बाद सवाल उठ रहे हैं, जो जानबूझकर प्रभावशाली जमींदार के खिलाफ कार्रवाई न कर के केवल दिखावा कर रहा है। उक्त जमींदार ने जब इस कृत्य को अंजाम दिया, तब उसके साथ उसके कुछ लोग भी थे। संघार प्रेस क्लब में ऊँट का मालिक गरीब किसान पशु की कटी हुई टाँग लेकर पहुँचा। बता दें कि पाकिस्तान में खुलेआम गायों को काटा जाता है, उन्हें JCB से गिरा कर भी मारा जाता है।

‘डिलीट करो वीडियो’: सुनीता केजरीवाल को दिल्ली हाईकोर्ट का आदेश, पति का भाषण दिखाने के लिए रिकॉर्ड कर वायरल कर दी थी कोर्ट की कार्यवाही

दिल्ली के मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल शराब घोटाले में फ़िलहाल जेल में बंद हैं। लोकसभा चुनाव प्रचार 2024 के लिए उन्हें जमानत मिली थी, लेकिन फिर उन्हें आत्मसमर्पण करना पड़ा। अब उनकी पत्नी सुनीता केजरीवाल को दिल्ली उच्च न्यायालय ने सोशल मीडिया से एक वीडियो हटाने के लिए कहा है। असल में सुनवाई के दौरान जब अरविंद केजरीवाल खुद अदालत को संबोधित कर के अपना पक्ष रख रहे थे, तब का वीडियो सुनीता ने सोशल मीडिया पर अपलोड कर दिया था।

अरविंद केजरीवाल को ED ने गिरफ्तार किया था। जस्टिस नीना बंसल कृष्णा और जस्टिस अमित शर्मा की खंडपीठ ने शनिवार (15 जून, 2024) को ये आदेश दिया। कोर्ट के वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग नियमों के उल्लंघन को लेकर दाखिल की गई PIL पर सुनवाई करते हुए उन्होंने ये आदेश दिया। अधिवक्ता वैभव सिंह ने सुनीता केजरीवाल के अलावा अन्य AAP नेताओं व समर्थकों के खिलाफ भी जनहित याचिका दायर की थी, जिन्होंने इस वीडियो को सोशल मीडिया पर फैलाया था।

इन सभी को अब ये वीडियो हटाना होगा। अब इस मामले पर अगली सुनवाई 9 जुलाई, 2024 को होगी। कोर्ट की कार्यवाही के वीडियो को रिकॉर्ड और शेयर करने वालों के खिलाफ FIR दर्ज करने की भी माँग की गई है। बताया जा रहा है कि इस वीडियो के वायरल होने के बाद ट्रायल कोर्ट की जज को खतरा है। कोर्ट की कार्यवाही का ऑडियो-वीडियो रिकॉर्डिंग किए जाने को याचिकाकर्ता ने साजिश करार दिया। साथ ही उन पर अदालत की अवमानना के 1971 वाले कानून के तहत सज़ा देने की माँग भी की गई है।

X, इंस्टाग्राम और फेसबुक को भी दिल्ली हाईकोर्ट ने कहा है कि इस तरह के कंटेंट वो खुद से ही हटाएँ। ये वीडियो 28 मार्च का है, जब केजरीवाल ने राउज एवेन्यू कोर्ट में अपनी दलीलें खुद पेश की थीं। उस वीडियो में दिल्ली सीएम ने ED को भाजपा का वसूली वाला रैकेट बताया था। 2021 में हाईकोर्ट दिल्ली द्वारा बनाए गए नियमों के हिसाब से ऐसे वीडियो को प्रसारित करना अपराध है। याचिका में कहा गया था कि इससे पहले या बाद की सुनवाइयों में केजरीवाल ने खुद दलील नहीं पेश की, ऐसे में ये साजिश है।

महबूबा-महुआ को दिखा फासीवाद, आरफा ने बताया बहादुर: अरुंधति रॉय पर UAPA वाली कार्रवाई से कॉन्ग्रेस भी भड़की, देश को करना चाहती थी खंडित

दिल्ली के एलजी वीके सक्सेना ने कश्मीर को भारत से अलग बताने वाली लेखिका अरुंधति रॉय के खिलाफ गैरकानूनी गतिविधियाँ (रोकथाम) अधिनियम (UAPA) के तहत मुकदमा चलाने की मंजूरी दे दी है। इसके बाद पीडीपी प्रमुख महबूबा मुफ्ती, टीएमसी सांसद महुआ मोइत्रा और कथित पत्रकार आरफा खानुम शेरवानी जैसे लोग अरुंधती रॉय के पक्ष में खड़े हो गए हैं।

महबूबा मुफ्ती ने एक्स पर अपने पोस्ट में लिखा, “अरुंधति रॉय विश्व प्रसिद्ध लेखिका और एक बहादुर महिला हैं, जो फासीवाद के खिलाफ एक शक्तिशाली आवाज के रूप में उभरी हैं। उन पर कठोर UAPA के तहत मामला दर्ज किया गया है। भारत सरकार मौलिक अधिकारों का उल्लंघन करते हुए अपनी क्रूरता जारी रखे हुए है। कश्मीर के एक पूर्व लॉ प्रोफेसर पर मामला दर्ज करना भी हताशा का काम है।”

वहीं, तृणमूल कॉन्ग्रेस की सांसद महुआ मोइत्रा ने अपने पोस्ट में लिखा, “अगर अरुंधति रॉय पर UAPA के तहत मुकदमा चलाकर बीजेपी यह साबित करने की कोशिश कर रही है कि वे वापस आ गए हैं तो ऐसा नहीं है। वे कभी भी उस तरह वापस नहीं आएँगे जैसे वे पहले थे। इस तरह के फासीवाद के खिलाफ भारतीयों ने वोट दिया है।”

कॉन्ग्रेस नेता बीके हरिप्रसाद ने एक्स पर लिखा, “मैं अरुंधति रॉय पर मुकदमा चलाने के लिए एलजी की मंजूरी की कड़ी निंदा करता हूँ। वह एक शानदार, अंतरराष्ट्रीय स्तर की प्रसिद्ध लेखिका और एक अग्रणी बुद्धिजीवी हैं। बुद्धिजीवियों, कलाकारों, लेखकों, कवियों और कार्यकर्ताओं की असहमति को कुचलने पर फासीवाद पनपता है। बीजेपी असहमति जताने वालों को विचलित करने और अपनी विफलताओं से ध्यान हटाने के लिए प्रतिदिन उनके लिए संकट पैदा करती है। अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता और लोकतांत्रिक मूल्यों पर यह हमला अस्वीकार्य है।”

वहीं, इस्लामी कट्टरपंथ पर चुप्पी साधने वाली कथित पत्रकार आरफा खानुम शेरवानी ने भी अरुंधती रॉय का पक्ष लिया है। उन्होंने अपने सोशल मीडिया हैंडल एक्स (पूर्व में ट्विटर) पर लिखा, “हमारी सबसे बेहतरीन सोच रखने वाली, हमारी सबसे बहादुर आवाज़ों में से एक, अरुंधति रॉय के साथ एकजुटता में! फासीवादी सबसे बुरे एवं कायर हैं।”

दरअसल, अरुंधती रॉय पर UAPA को मामला लगाया गया है, वह मामला साल 2010 से जुड़ा है। अरुधंति रॉय और डॉक्टर शेख शौकत हुसैन ने 21 अक्‍टूबर 2010 को एलटीजी ऑडिटोरियम, कॉपरनिकस मार्ग, नई दिल्ली में ‘आजादी– द ओनली वे’ के बैनर तले आयोजित एक सम्मेलन में उत्तेजक भाषण दिए थे।

सम्मेलन में जिन मुद्दों पर चर्चा की गई और बात कही गई, उनमें ‘कश्मीर को भारत से अलग करने’ का प्रचार किया गया था। सम्मेलन में भाषण देने वालों में सैयद अली शाह गिलानी, एसएआर गिलानी (सम्मेलन के एंकर और संसद हमले मामले के मुख्य आरोपित), अरुंधति रॉय, डॉ. शेख शौकत हुसैन और अर्बन नक्सल वरवरा राव शामिल थे।

आरोप है कि गिलानी और अरुंधति रॉय ने इस बात का मजबूती से प्रचार क‍िया था क‍ि कश्मीर कभी भी भारत का हिस्सा नहीं रहा और उस पर भारत के सशस्त्र बलों ने जबरन कब्जा क‍िया है। उन्होंने कहा था कि जम्मू-कश्मीर राज्य को भारत से आजादी द‍िलाने का हरसंभव प्रयास किया जाना चाहिए। इस सम्‍मेलन की शिकायतकर्ता की ओर से र‍िकॉर्ड‍िंग की गई थी, जोक‍ि उपलब्‍ध करवायी गई।

इस मामले की श‍िकायत कश्मीरी कार्यकर्ता सुशील पंड‍ित की ओर से कोर्ट में 28 अक्‍टूबर 2010 को गई थी। इसके बाद कोर्ट ने 27 नवंबर 2010 को एफआईआर दर्ज करने के न‍िर्देश द‍िए थे। श‍िकायत के एक माह बाद 29 नवंबर 2010 को सुशील पंडित की शिकायत पर मामला दर्ज हुआ था।

अपने ही गढ़ में ढेर हुए 8 नक्सली, छत्तीसगढ़ में वामपंथी आतंकियों के खिलाफ बड़ी कार्रवाई: 1 जवान बलिदान, ऑपरेशन जारी

छत्तीसगढ़ में नक्सलियों के सफाए का सबसे बड़ा अभियान चलाया जा रहा है। छत्तीसगढ़ के बस्तर रेंज में स्थित अबूझमाड़ के जंगलों में 4 दिनों से जारी ऑपरेशन में अब तक 8 नक्सली ढेर हो चुके हैं। इस ऑपरेशन में नारायनपुर जिले के अबूझमाड़ में जारी नक्सलियों के सफाए के अभियान में नारायणपुर, कोण्डागांव, कांकेर, दंतेवाड़ा डीआरजी, एसटीएफ और आईटीबीपी 53वीं वाहिनी के लगभग 900 से ज्यादा जवान शामिल हैं। इस बीच, नक्सलियों से मुठभेड़ में 1 जवान की वीरगति की भी सूचना मिल रही है, तो 2 सुरक्षाकर्मी घायल भी हो गए हैं।

मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक, अबूझमाड़ के कुतुल, फरसबेड़ा, कोड़तामडता इलाके में संयुक्त नक्सल विरोधी अभियान के तहत पिछले 2 दिनों से पुलिस और नक्सलियों के बीच रूक-रूक कर मुठभेड़ हो रही है। बीते 4 दिनों से फोर्स अबूझमाड़ के घनघोर जंगलों में सर्चिंग ऑपरेशन चला रही है।

नारायणपुर के एसपी प्रभात कुमार ने मुठभेड़ की पुष्टि की है। उन्होंने बताया कि अबूझमाड़ में चल रहे एनकाउंटर में चार जिले की पुलिस शामिल है, जो नक्सलवाद का सफाया करने के प्रयास में जॉइंट ऑपरेशन चला रही है। नारायणपुर-कोण्डागांव-कांकेर-दन्तेवाड़ा की डीआरजी, एसटीएफ और आईटीबीपी 53वीं वाहिनी का बल इस मुठभेड़ में शामिल है। इस ऑपरेशन में अब तक 8 नक्सली ढेर हो चुके हैं, तो 1 जवान के भी वीरगति प्राप्त करने की सूचना मिल रही है। वहीं, 2 घायल भी हो गए हैं।

इससे पहले 7 जूनन 2024 को भी छत्तीसगढ़ के नारायणपुर-दंतेवाड़ा के सीमावर्ती इलाके में नक्सलियों और डीआरजी के जवानों के बीच मुठभेड़ हुई थी, जिसमें 7 नक्सली ढेर हुए थे। यह नक्सल विरोधी अभियान सुरक्षाबलों ने उस वक्त शुरू किया था जब नारायणपुर, दंतेवाड़ा और कोंडागांव जिले की सीमा पर स्थित मुंगेडी और गोबेल क्षेत्र में एक गाँव में कई नक्सलियों के छिपे होने की जानकारी मिली थी।

मुस्लिम बहुल गाँव में रामनवमी की शोभायात्रा पर 40 साल से प्रतिबंध: हिंदू कार्यकर्ता ने निकाली यात्रा तो झारखंड पुलिस ने किया गिरफ्तार, परिजन बोले- जय श्रीराम कहना गुनाह है?

झारखंड पुलिस ने शुक्रवार (14 जून 2024) को हजारीबाग जिले के हिन्दू कार्यकर्ता अमन कुमार उर्फ अमन बाबा को गिरफ्तार कर लिया। अमन पर 12 अप्रैल 2024 को रामनवमी की शोभा यात्रा निकालने का आरोप है। 40 वर्षों से बड़कागाँव-महुदी में कभी भी रामनवमी की शोभा यात्रा नहीं निकली थी, लेकिन इस साल अमन ने यह यात्रा निकाली थी। इसके कारण कॉन्ग्रेस-जेएमएम सरकार की पुलिस ने अमन सहित कई अन्य लोगों के खिलाफ FIR दर्ज की गई थी।

अमन की गिरफ्तारी के बाद उनकी माँ ने बताया कि रास्ते को लेकर हो रहे विवाद के चलते पिछले 40 वर्षों से बड़कागाँव में रामनवमी का जुलूस नहीं निकल पा रहा था। अमन को सनातन धर्म के लिए समर्पित बताते हुए उनकी माँ का दावा है कि उनके बेटे ने एक रथ बनाकर उसे अपने हाथों से हजारीबाग से राँची तक खींचा था। उनकी माँ का कहना है कि अमन की लोकप्रियता सरकार और कुछ नेताओं को नहीं पच रही थी।

अमन की माँ पूनम देवी का आरोप है कि अमन के प्रयासों से मिली प्रसिद्धि से बड़कागांव विधायक सहित कुछ अन्य लोगों को जलन हुई। बाद में अंचल अधिकारी बालेश्वर राम के कहने पर दर्जनों लोगों के खिलाफ केस दर्ज करवा दिया गया, जिसमें अमन भी शामिल हैं। अमन इस से पहले भी बड़कागांव क्षेत्र में हिंदुत्व के मुद्दे उठाते रहे हैं। पूनम देवी ने पुलिस से उम्मीद जताई है कि जो तेजी उन्होंने उनके बेटे को पकड़ने में दिखाई वैसी ही कार्रवाई अवैध बालू खनन, भूमि घोटाले, आतंकियों और अपराधियों को पकड़ने में भी दिखाई जाए।

पूनम कुमारी की प्रेस कॉन्फ्रेंस में अमन की पत्नी डिम्पल मिश्रा, भाई ईशु कुमार और पिता सुबोध भी मौजूद थे। लोकसभा चुनावों को देखते हुए अमन की गिरफ्तारी टाल दी गई थी। अमन की माँ ने कहा कि झारखंड में लोग अपनी धार्मिक मान्यताओं को भी ठीक से नहीं पूरा कर पा रहे हैं। पूनम ने कहा, “क्या भारत में जय श्रीराम का नारा लगाना भी अपराध की श्रेणी में आता है? यह साफ़ है कि राज्य सरकार को अमन कुमार से खतरा था, क्योंकि वह लगातार हिंदुत्व के लिए काम कर रहा था। उसने चुनावों के दौरान हजारीबाग, चतरा, दुमका, गोड्डा, राँची लोकसभा और कई अन्य जगहों पर भाजपा का प्रचार किया, जिससे प्रदेश का प्रशासन डर गया।”

पूनम का दावा है कि JMM सरकार को डर सता रहा था कि कहीं आगामी विधानसभा चुनावों में अमन कुमार कोई उलटफेर न करवा दे। उन्होंने झारखंड सरकार को सलाह दी कि वो चतरा के बिरहोर परिवार के दो सदस्यों की कट्टरपंथियों द्वारा की गई निर्मम हत्या पर कार्रवाई करे। इसी के साथ पूनम ने हजारीबाग में माहेश्वरी परिवार की हत्या, सुजीत देव की हत्या और विश्वकर्मा परिवार के सदस्यों की मौत के मामलों में झारखंड पुलिस द्वारा की गई कार्रवाई की भी जानकारी माँगी।

रामनवमी का जुलूस रोकने के लिए पुलिस ने लगाए थे बैरिकेड

बताते चलें कि अप्रैल 2024 में निकली जिस शोभा यात्रा को निकालने के आरोप में अमन को गिरफ्तार किया गया है, उसे रोकने के लिए प्रशासन ने तमाम तैयारियाँ की थीं। प्रशासन ने रास्ते में बैरिकेड लगा कर पुलिस बल तैनात कर दिया था। इस दौरान पुलिस और श्रद्धालुओं में झड़प हुई थी। वाहनों में तोड़फोड़ के साथ पत्थरबाजी की गई थी, जिसमें कुछ लोग घायल हुए थे। पराली में आगजनी हुई थी, जिसे बुझाने के लिए फायर ब्रिगेड को बुलाना पड़ा था। इस हिंसा के चलते महुदी गाँव को छावनी में तब्दील कर दिए गया था।

तब अनुमंडल पुलिस अधिकारी कुलदीप कुमार ने दावा किया था कि किसी प्रकार का जुलूस नहीं निकला था। उन्होंने बताया था कि कुछ लोगों ने पूजा करने के बहाने विवादित मार्ग प्रयोग करने का प्रयास किया था। बताया जा रहा है कि जुलूस उसी प्रतिबंधित मार्ग से निकला था, लेकिन वापसी के दौरान पुलिस ने नाकेबंदी कर दी थी। इस नाकेबंदी को देख कर श्रद्धालु भड़क गए थे। इसी दौरान पुलिस ने लाठीचार्ज किया था, जिस से हालत और खराब हो गए थे। गुस्साए लोगों ने पत्थर फेंक कर कुछ झोपड़ियों में आगजनी कर दी थी।

1985 से नहीं निकलता जुलूस

गौरतलब है कि मुस्लिम बहुल बड़कागाँव महुदी में साल 1985 से ही हिन्दुओं की शोभा यात्रा नहीं निकलती। तब यह आदेश स्थानीय प्रशासन ने जारी किया था, जिसे अब तक लागू किया जाता है। अक्सर हिन्दू कार्यकर्ता इस प्रतिबंध को तोड़ने का प्रयास करते हैं। साल 2017 में भाजपा नेता यशवंत सिन्हा अपने लगभग 100 समर्थकों के साथ इस रास्ते से नवरात्रि की शोभा यात्रा निकालना चाहते थे। तब पुलिस ने उन्हें समर्थकों सहित गिरफ्तार कर लिया था। उस समय भी शोभा यात्रा में शामिल लोगों की पुलिस से झड़प हुई थी।

बसपा के पूर्व MLC हाजी इकबाल की 4440 करोड़ की यूनिवर्सिटी को ED ने किया जब्त: दुष्कर्म से लेकर मनी लॉन्ड्रिंग के आरोप, अरब देशों में छिपा बैठा है माफिया

उत्तर प्रदेश के कुख्यात खनन माफिया और बसपा के पूर्व एमएलसी हाजी मोहम्मद इकबाल पर प्रवर्तन निदेशालय (ED) ने बड़ी कार्रवाई करते हुए अवैध रूप से बनाई गई यूनिवर्सिटी को जब्त कर लिया है। हाजी इकबाल फिलहाल फरार है और माना जाता है कि वह दुबई में कहीं छिपा हुआ है। वहीं, जब्त यूनिवर्सिटी का संचालन उसके भाई और बेटों कर रहे थे।

हाजी इकबाल पर अवैध खनन के अलावा, मनी लॉन्ड्रिंग सहित कई तरह के गंभीर आरोप हैं। उसके खिलाफ देश की कई एजेंसियाँ जाँच कर रही हैं। प्रवर्तन निदेशालय ने उसकी जिस ग्लोकल यूनिवर्सिटी को जब्त किया है, उसकी इमारत एवं जमीन की कीमत लगभग 4,440 करोड़ रुपए है। वहीं, मोहम्मद इकबाल के चार बेटे हैं। बेटों और भाई के खिलाफ भी कई मामले दर्ज हैं और वे जेल में बंद हैं।

एजेंसी के अनुसार, मनी लॉन्ड्रिंग केस की जाँच एजेंसी ने एक कुर्की आदेश जारी किया था। इसके बाद 121 एकड़ जमीन और ग्लोकल यूनिवर्सिटी की इमारत को जब्त कर लिया गया है। प्रवर्तन निदेशालय (ईडी) ने एक बयान में कहा कि ये संपत्तियाँ अब्दुल वाहिद एजुकेशनल एंड चैरिटेबल ट्रस्ट के नाम पर दर्ज हैं। इन पर मोहम्मद इकबाल और उनके परिवार के सदस्यों का कंट्रोल था।

हाजी इकबाल ने खनन के कारोबार हजारों करोड़ रुपए की संपत्ति इकट्ठा की है। राज्य की हर सरकार में उसकी पैठ रही है। हाजी इकबाल ने मिर्जापुर इलाके में लोगों को डरा धमकाकर करीब 121 एकड़ जमीन खरीदी और उस पर एक आलीशान यूनिवर्सिटी बनाई थी। यह यूनिवर्सिटी शुरू से विवादों में रही है, क्योंकि इसे बरसती नदियों पर कब्जा करके अवैध तरीके से बनाया गया है।

साल 2017 में वह चुनाव हार गया। इस बीच सरकार की नजर भी उसके काले कारनामों पर पड़ी। इसके बाद हाजी इकबाल, उसके छोटे भाई महमूद अली तथा हाजी इकबाल के चारों बेटों, रिश्तेदारों और सहयोगियों पर शिकंजा कसना शुरू हो गया। हाजी इकबाल, उसके सहयोगियों और परिजनों पर अवैध खनन, मनी लॉन्ड्रिंग, डरा-धमकाकर जमीन कब्जाने के साथ-साथ दुष्कर्म के आरोप भी हैं।

हाजी इकबाल को पुलिस ने गैंग लीडर बताया है। कार्रवाई शुरू होने के दौरान हाजी इकबाल देश छोड़कर फरार हो गया। वहीं, यूपी पुलिस ने हाजी इकबाल के छोटे भाई महमूद अली और हाजी इकबाल के बेटों एवं रिश्तेदारों को गिरफ्तार कर जेल भेज दिया है। वहीं, लंबे समय तक हाजी इकबाल कोर्ट में पेश नहीं हुआ तो कोर्ट ने उसे भगोड़ा घोषित कर दिया। उस पर पुलिस ने लाखों रुपए का इनाम घोषित किया है।

सीबीआई और ED ने भी अपनी जाँच में हाजी इकबाल पर कई मामले दर्ज किए हैं। हाजी इकबाल और उसके सहयोगियों की यूपी से लेकर उत्तराखंड तक अरबों रुपए की संपत्ति कुर्क की गई है। उसके घरों को बुल्डोजर से गिरा दिया गया है। इसके बावजदू वह कोर्ट में पेश नहीं हुआ। माना जाता है कि वह दुबई या किसी अन्य अरब मुल्क में छिपा बैठा हुआ है।

कुछ महीने पहले हाजी इकबाल की एक फोटो मिडिल ईस्ट के एक बड़े उद्योगपति के साथ वायरल हुई थी। बाद में हाजी इकबाल ने अपने वकील द्वारा वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग से पेशी की गुहार लगाई। हाजी इकबाल विदेश में बैठकर ही कोर्ट में पेश होता है। हाजी इकबाल को कुछ मामलों में राहत भी मिली है। हाजी इकबाल उत्तर प्रदेश के सहारनपुर का रहने वाला है।