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गलत वीडियो डालने वाले अब नहीं बचेंगे: संसद के अगले सत्र में ‘डिजिटल इंडिया बिल’ ला सकती है मोदी सरकार, डीपफेक पर लगाम की तैयारी

डीपफेक एक बहुत बड़ी समस्या बनकर उभरा है। इस पर काबू पाने के लिए सरकार लगातार प्रयास कर रही है। नरेंद्र मोदी सरकार आगामी संसद सत्र में AI-जनरेटेड डीपफेक वीडियो और यूट्यूब कंटेंट को लेकर एक विधेयक पेश कर सकती है। इसे डिजिटल इंडिया बिल (Digital India Bill) के नाम से पेश किया जाएगा।

सूत्रों के हवाले से मीडिया रिपोर्ट में कहा जा रहा है कि डीपफेक पर रोक और यूट्यूब समेत विभिन्न ऑनलाइन माध्यमों पर कंटेंट को रेग्यूलेट करने के लिए आगामी सत्र में बिल पेश किया जाएगा। यह सत्र 24 जून से शुरू होकर 3 जुलाई तक चलेगा। इसके बाद मानसून सत्र 22 जुलाई से शुरू होगा और संभवतः 9 अगस्त तक चलेगा।

इस बिल पर सरकार सभी दलों से चर्चा करेगी और आम सहमति बनाने का प्रयास करेगी। पिछले साल की शुरुआत में तत्कालीन केंद्रीय इलेक्ट्रॉनिक्स और सूचना प्रौद्योगिकी राज्यमंत्री राजीव चंद्रशेखर ने भी विधेयक के बारे में संकेत दिया था। उन्होंने कहा था कि इसे अगली सरकार द्वारा अधिनियमित और क्रियान्वयन के लिए लिया जाएगा।

चंद्रशेखर ने कहा था, “हमें इसके बारे में बहुत सारे परामर्श और चर्चा की जरूरत है, लेकिन हमारे पास एक रोडमैप है कि कानून क्या है, हमारे नीतिगत लक्ष्य क्या हैं और सुरक्षा और विश्वास के लिए नीतिगत सिद्धांत क्या हैं। डीपफेक एक ऐसी तकनीक है, जिसने मिसलीडिंग कॉन्टेंट को लेकर चिंता पैदा की हैं। इसके जरिए गलत जानकारी का प्रसार और सार्वजनिक हस्तियों के फर्जी वीडियो का निर्माण व्यक्तिगत गोपनीयता का उल्लंघन शामिल है।”

चंद्रशेखर के मंत्रालय इलेक्ट्रॉनिक्स और सूचना प्रौद्योगिकी मंत्रालय (MeitY) ने फेसबुक, इंस्टाग्राम और यूट्यूब सहित सभी सोशल मीडिया प्लेटफार्मों को 24 घंटे के भीतर डीपफेक कंटेंट हटाने की सलाह दी थी। इसको लेकर सरकार ने साफ कहा था कि ऐसा न करने पर इन प्लेटफॉर्म पर भारतीय कानूनों के तहत आपराधिक और न्यायिक कार्रवाई की जाएगी।

पिछले साल दिवाली मिलन समारोह में पत्रकारों से बातचीत के दौरान प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने भी डीपफेक पर चर्चा की थी। भाजपा के दिल्ली स्थित मुख्यालय में दिवाली मिलन समारोह के दौरान मौजूद लोगों को संबोधित करते हुए पीएम मोदी ने भारत को ‘विकसित भारत’ बनाने का आह्वान किया था। इसके साथ ही उन्होंने डीपफेक पर गहरी चिंता जताई थी।

पीएम मोदी ने वहाँ मौजूद पत्रकारों से डीपफेक के संकट के बारे में लोगों को शिक्षित करने के लिए आग्रह किया था। गौरतलब है कि बॉलीवुड अभिनेत्री रश्मिका मंदाना, फिल्म स्टार अमिताभ बच्चन से लेकर कई बड़ी हस्तियाँ डीपफेक का शिकार हो चुकी हैं। इस तरह के कंटेंट को लेकर उन्होंने चिंता जताई थी।

बताते चलें कि बॉलीवुड अभिनेत्रियों से लेकर सेलिब्रेटी तक डीपफेक (DeepFake) का शिकार हो रही हैं। रश्मिका मंदाना, सारा तेंदुलकर, कैटरीना कैफ, ऐश्वर्या राय के बाद अब काजोल इसकी शिकार बनी हैं। बॉलीवुड अभिनेत्री काजोल का एक अश्लील वीडियो सामने आया है। इस वीडियो में वो कैमरे के सामने कपड़े बदलती नजर आ रही हैं।

अपनी डीपफेक वीडियो वायरल होने के बाद अभिनेत्री रश्मिका मंदाना ने दिल्ली पुलिस में प्राथमिकी भी दर्ज कराई थी। दिल्ली पुलिस की स्पेशल सेल इंटेलिजेंस फ्यूजन एंड स्ट्रैटेजिक यूनिट ने इसे लेकर अज्ञात लोगों के खिलाफ एफआईआर दर्ज कर अपनी जाँच शुरू की थी।

अपने इस वीडियो को लेकर रश्मिका मंदाना ने अपने एक्स हैंडल पर लिखा था, “मुझे अपने ऑनलाइन फैलाए जा रहे डीप फेक वीडियो पर बात करते और इसे शेयर करते हुए बेहद दुख हो रहा है। ईमानदारी से कहूँ तो ऐसा कुछ, न केवल मेरे लिए, बल्कि हममें से हर एक के लिए बेहद डरावना है, जो आज तकनीकी के बेजा इस्तेमाल की वजह से खतरे में हैं।”

आतंकवाद का बखान, अलगाववाद को खुलेआम बढ़ावा और पाकिस्तानी प्रोपेगेंडा को बढ़ावा : पढ़ें- अरुँधति रॉय का 2010 वो भाषण, जिसकी वजह से UAPA में चलेगा केस

विवादास्पद लेखिका अरुँधति रॉय के खिलाफ दिल्ली के उप-राज्यपाल ने UAPA मामले में केस चलाने की मंजूरी दे दी है। अरुँधति रॉय के खिलाफ जिस भाषण को लेकर केस चलाया जा रहा है, वो भाषण 21 अक्टूबर 2010 को दिल्ली में आयोजित ‘आजादी: द ओनली वे’ नाम के सेमिनार में दिया गया था, जिसमें भारत विरोधी सैयद अली शाह गिलानी, शेख शौकत हुसैन, वरवर राव जैसे लोग मौजूद थे।

इस सेमिनार का आयोजन दिल्ली में CRPP ने किया था। इस सेमिनार में 15 मिनट लंबा भाषण दिया था, जिसमें उन्होंने भारत देश के खिलाफ जमकर जहर उगला था। ऑपइंडिया के पास अरुँधति रॉय का दिया पूरा भाषण मौजूद है। जिसमें भारत विरोधी उसके भाषण पर उसके समर्थक जमकर तालियाँ बजा रहे थे। इसमें से 8 मिनट का वीडियो यहाँ देख सकते हैं।

अपने भाषण में अरुँधति रॉय दावा कर रही है कि भारत सरकार ने गरीबों के खिलाफ जंग छेड़ा हुआ है। देश के आदिवासी इलाकों में असंतोष को हवा देते हुए तत्कालीन यूपीए सरकार पर निशाना साधते हुए अरुँधति ने कहा, “मैं हप्ते या 10 दिन पहले राँची में थी, जहाँ ऑपरेशन ग्रीन हंट के खिलाफ पीपल्स ट्रिब्यूनल चल रहा है। ऑपरेशन ग्रीन हंट देश के सबसे गरीब लोगों के खिलाफ भारत राज्य की लड़ाई है।”

इस दौरान जब पत्रकारों ने जम्मू-कश्मीर पर उसके रुख को लेकर सवाल पूछा, तो अरुँधति ने कहा, “कश्मीर कभी भारत का आंतरिक हिस्सा नहीं रहा है। चाहे आप मुझसे कितनी भी आक्रामकता से और कितनी भी बार यह पूछें।” ये वही लाइन है, जो पाकिस्तान लेता रहा है। साफ है अरुँधति यहाँ पाकिस्तानी प्रोपेगेंडा को आगे बढ़ाती नजर आई।

देश में जातीय और सांप्रदायिक मतभेद पैदा करने की कोशिश

इस दौरान अरुँधति रॉय ने दावा किया कि भारतीय राज्य सैन्य हस्तक्षेप के माध्यम से भारत के कुछ हिस्सों पर कब्ज़ा कर रहा है। जिसमें अल्पसंख्यकों और कुछ जातीय समूहों को ‘उच्च जाति हिंदू राज्य’ द्वारा ‘उत्पीड़ित’ किया जा रहा है।

“अंग्रेजों ने 1899 में भारत का नक्शा बनाया। जैसे ही वो आजाद हुआ, वो खुद औपनिवेशिक ताकत (अंग्रेजों की तरह) बन गया। भारतीय राज्य ने मणिपुर, नागालैंड, मिजोरम, कश्मीर, तेलंगाना, नक्सलवाड़ी असंतोष, पंजाब, हैदराबाद, गोवा, जूनागढ़ में हस्तक्षेप किया। भारत राज्य, भारत का अमीर वर्ग और भारत के अमीर लोग नक्सलियों पर युद्ध छेड़ने के आरोप लगाते हैं, लेकिन खुद भारत राज्य ने अपने ही लोगों के खिलाप 1947 से लगातार युद्ध छेड़ा हुआ है। चाहे वो नगा हों, मिजो हों, मणिपुरी हो, असल के लोग हों, हैदराबाद, कश्मीर या पंजाब हो। हमेशा अल्पसंख्यों, जिसमें मुस्लिम, आदिवासी, ईसाई और दलित, वनवासी हैं, उनके खिलाफ उच्च जाति के हिंदू राज्य ने युद्ध छेड़ा हुआ है। यही हमारे देश का आधुनिक इतिहास है।”

भारत के आंतरिक लोगों को भड़काने के बाद विवादास्पद लेखिका ने खुलेआम जम्मू-कश्मीर को भारत संघ से अलग करने की वकालत की। उसने ‘आजादी’ के पाकिस्तानी नरेटिव को आगे बढ़ाता और बताया कि कैसे भारत ने कश्मीर और कश्मीरियों पर कब्जा किया है।

एक पत्रकार के साथ 2007 की बातचीत को याद करते हुए, अरुंधति रॉय ने कहा, “भारत को कश्मीर से आजादी की उतनी ही जरूरत है जितनी कश्मीर को भारत से आजादी की जरूरत है।” और जब मैंने भारत कहा, तो मेरा मतलब भारतीय राज्य से नहीं था, मेरा मतलब भारतीय लोगों से था क्योंकि मुझे लगता है कि कश्मीर पर कब्जा – आज 12 मिलियन लोगों की उस घाटी में 700,000 सुरक्षाकर्मी तैनात हैं – यह दुनिया का सबसे अधिक सैन्यीकृत क्षेत्र है – और हमारे लिए, भारत के लोगों के लिए, उस कब्जे को बर्दाश्त करना हमारे रक्तप्रवाह में एक तरह के नैतिक क्षरण को अनुमति देने जैसा है।”

यह जानते हुए भी कि उसके राजधानी दिल्ली में दिए भड़काऊँ भाषण से कश्मीर घाटी में लॉ एंड ऑर्डर की समस्या पैदा हो सकती है, उसने आगे कहा, “कश्मीरी बिना एक-47 की नाल से निकलते धुएँ के साँस भी नहीं ले सकते। बहुत कुछ यहाँ किया गया है। हर बार एक चुनाव होता है। लोग वोट देते हैं और भारत सरकार वहाँ जाकर बोलती है, ‘तुम्हें रेफरेंडम क्यों चाहिए? यहाँ लोग भारत के लिए वोटिंग करते हैं।”

कश्मीरी अलगाववाद की भारत की आजादी की लड़ाई से तुलना गलत

अरुँधति रॉय ने एक बेहद गलत व्याख्या करते हुए दावा किया कि कश्मीर में ‘आजादी’ की लड़ाई भारत देश की औपनिवेशिक ताकत ब्रिटेन के खिलाफ लड़ी गई लड़ाई की तरह ही है। अरुँधति रॉय ने कहा, “अब, कभी-कभी यह जानना बहुत मुश्किल होता है कि औपचारिक रूप से भारत के नागरिक के रूप में कोई व्यक्ति किस स्थान पर खड़ा है, कोई क्या कह सकता है, उसे क्या कहने की अनुमति है, क्योंकि जब भारत ब्रिटिश उपनिवेशवाद से आज़ादी के लिए लड़ रहा था – कश्मीर में आज़ादी की समस्याओं को लेकर लोग जो भी तर्क देते हैं, वे निश्चित रूप से भारतीयों के खिलाफ़ इस्तेमाल किए गए थे। मोटे तौर पर कहें तो, “मूल निवासी आज़ादी के लिए तैयार नहीं हैं, मूल निवासी लोकतंत्र के लिए तैयार नहीं हैं।”

“औपनिवेशिक राज्य चाहे वो भारत में ब्रिटिश राज्य रहा हो या कश्मीर, नगालैंड या फिर छत्तीसगढ़ में भारतीय राज्य, उसके एलीट लोग इस कब्जे को मैनेज करते हैं। तो तुम्हें अपने दुश्मनों और उन्हें कैसे जवाब देना है, इस बारे में पता होना चाहिए। तुम होशियार हो, चाहे वो इंटरनेशनल लेवल पर राजनीति की बात हो या स्थानीय स्तर पर किसी भी स्तर पर, तुम्हें अपने साथी बनाने होंगे। वर्ना तुम लोग टैंक में फँसी मछलियों जैसे होंगे, जो टैंक की दीवारों पर बमबारी कर के थक जाओगे, क्योंकि दीवारें बहुत मजबूत हैं।”

बता दें कि अक्टूबर 2010 में विवादास्पद लेखिका द्वारा भाषण दिए जाने के तुरंत बाद, सुशील पंडित (उस समय अरुण जेटली के सहयोगी) की शिकायत के आधार पर उनके खिलाफ मामला दर्ज किया गया था। इस मामले के संबंध में 29 नवंबर 2010 को प्रथम सूचना रिपोर्ट (एफआईआर) दर्ज की गई थी। अरुँधति रॉय पर भारतीय दंड संहिता (आईपीसी) की धाराओं 124 ए (राजद्रोह), 153 ए (वर्गों के बीच दुश्मनी को बढ़ावा देना), 153 बी (राष्ट्रीय एकता के लिए हानिकारक दावे), 504 (शांति भंग करने के लिए उकसाना) और 505 (विद्रोह पैदा करने के इरादे से अफवाह फैलाना) के तहत मामला दर्ज किया गया था। लगभग 14 साल मामले में कोई डेवलपमेंट न होने के बाद शुक्रवार (14 जून 2024) को दिल्ली के उप-राज्यपाल ने अरुँधति रॉय के खिलाफ गैरकानूनी गतिविधियाँ (रोकथाम) अधिनियम, 1967 की धारा 13 के तहत मुकदमा चलाने की मंजूरी दे दी।

(यह लेख मूल रूप से अंग्रेजी भाषा में प्रकाशित किया गया है। मूल लेख पढ़ने के लिए यहाँ क्लिक करें।)

जबड़ा तोड़ा, खोपड़ी फोड़ी, रॉड से दागा, नाले में बहाया शव… ‘पति, पत्नी और वो’ की कहानी में फैन की एंट्री के बाद कन्नड़ स्टार बना ‘हत्यारा’, इंस्टाग्राम से कनेक्शन

कर्नाटक में रेणुका स्वामी नामक शख्स की हत्या का मामला पिछले कई दिनों से चर्चा में बना हुआ है, क्योंकि इस हत्याकांड में 27 वर्षों से तेलुगु फिल्म इंडस्ट्री में सक्रिय दर्शन तुगुदीप का नाम आया है। आखिर इतना बड़ा स्टार अपराधी कैसे हो गया? फैंस इसी सवाल का जवाब तलाश रहे हैं। ये पूरा मामला दर्शन तुगुदीप और उसकी गर्लफ्रेंड अभिनेत्री पवित्रा गौड़ा से जुड़ा हुआ है। मृतक रेणुका स्वामी, दर्शन तुगुदीप का बहुत बड़ा फैन भी था। वो अभिनेता के जीवन की गहरी जानकारी रखता था।

दर्शन तुगुदीप शादीशुदा हैं। उन्होंने 2003 में विजयलक्ष्मी से शादी की थी। दर्शन के पिता तुगुदीप श्रीनिवास कन्नड़ फिल्म इंडस्ट्री में विलेन के किरदारों के लिए जाने जाते थे। रेणुका स्वामी हत्याकांड में पुलिस ने 15 लोगों को गिरफ्तार किया है। असल में रेणुका स्वामी अपने फेवरिट स्टार दर्शन का नाम पवित्रा से जुड़ने से नाराज़ था। उसने अभिनेत्री के सोशल मीडिया पोस्ट्स पर आपत्तिजनक कमेंट्स किए, जिस बारे में पवित्रा ने अपने बॉयफ्रेंड को बताया।

पवित्रा और दर्शन उसकी इस हरकत से काफी नाराज़ हुए। फिर 9 जून, 2024 को रेणुका स्वामी की लाश पुलिस को कामाक्षीपाल्या के एक नाले से मिली। इसके बाद 2 लोग थाने पहुँचे और उन्होंने रेणुका स्वामी की हत्या का जुर्म कबूलते हुए कहा कि लेनदेन का विवाद बढ़ने के कारण उन्होंने ऐसा किया। लेकिन, जब पुलिस ने खँगाला तो पाया कि इन दोनों ने कई बार दर्शन से बात की थी। साथ ही हत्या वाले दिन आरोपितों और दर्शन तुगुदीप की लोकेशन सेम मिली।

चित्रदुर्ग में रहने वाला रेणुका स्वामी एक फार्मेसी कंपनी में कार्यरत था। उसे लगता था कि दर्शन तुगुदीप के जीवन में पवित्रा गौड़ा की एंट्री के कारण अभिनेता की शादीशुदा ज़िन्दगी में दिक्कतें आ रही हैं। इसीलिए, उसने पवित्रा को अपनी फेक आईडी से कई बार मैसेज-कमेंट्स कर के कहा कि वो दर्शन को छोड़ दे। दर्शन तुगुदीप ने चित्रदुर्ग के अपने फैन-क्लब कोऑर्डिनेटर रघुवेन्द्र से बात कर के रेणुका स्वामी की डिटेल्स निकलवाई थी। एक कमेंट में रेणुका स्वामी ने पवित्र गौड़ा से पूछा था कि अभिनेता दर्शन तुगुदीप उसके साथ क्यों ट्रेवल नहीं करते?

साथ ही उसने ये तंज भी कसा था कि दर्शन अपनी पत्नी विजयलक्ष्मी के साथ ही अक्सर दिखते हैं। उसने लिखा था, “रहने दो, समाज में तुम रखैल ही रहोगी।” वह गौड़ा को अपनी प्राइवेट पार्ट की तस्वीर भेज कर कहता था कि ये दर्शन से अधिक दमदार है। पत्नी सहाना ने बताया कि रेणुका स्वामी को राघवेंद्र नामक शख्स लेकर गया था और अपहरण कर के एक झोपड़ी में रखा गया। वहाँ दर्शन ने रेणुका को बेल्ट से पीटा। फिर अपने गुर्गों से उसकी हत्या कर देने को कह कर निकल गया।

दर्शन तुगुदीप के जाने के बाद उसके गुर्गों ने रेणुका स्वामी को लोहे की रॉड से दागा, लाठियों से पीटा और दीवार से दे मारा। शाकाहारी रेणुका स्वामी को मांस भी जबरन खिलाया गया। उसका जबड़ा तोड़ा गया, जीभ और नाक काट दी गई। हत्या के बाद शव को नाले में बहा दिया गया। 30 लाख रुपए की सुपारी लेकर गुंडों ने ये काम किया। पोस्टमॉर्टम रिपोर्ट में पता चला कि रेणुका की कई हड्डियाँ टूटी हुई थीं, 15 घाव थे। खोपड़ी की हड्डी में भी फ्रैक्चर था। पोस्टमॉर्टम करने वाले डॉक्टरों को भी 1 करोड़ रुपए ऑफर किए गए थे, ताकि इस हत्या को प्राकृतिक मौत दिखाई जा सके।रॉड से

‘इस बार माफ़ी दे दो बाबूजी, कभी ऐसा नहीं होगा’: गायों की तस्करी करता था सूफियान, फायरिंग कर भागा तो टाँग में लगी यूपी पुलिस की गोली

उत्तर प्रदेश के मुजफ्फरनगर में एक संदिग्ध गौ-तस्कर एनकाउंटर के बाद पकड़ा गया है। पकड़े गए बदमाश का नाम सूफियान है। उस पर कई मामले दर्ज हैं और पुलिस उसकी हिस्ट्रीशीट खंगाल रही है। उसने पुलिस द्वारा चेकिंग के दौरान रोके जाने पर पुलिस पर ही गोली चला दी थी और फरार हो गया, जिसके बाद पुलिस ने मुठभेड़ में इसके पैरों में गोली मार दी। इस दौरान उसका एक वीडियो सामने आया है, जिसमें वो खुद को बचाने की गुहार लगा रहा है और कह रहा है ‘मुझसे इस बार गलती हो गई, आगे नहीं होगी। मुझे माफ कर दो।’

मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक, मुजफ्फगरनगर की कोतवाली पुलिस और एसओजी की टीम ने काली नदी के पास चेकिंग अभियान चलाया था। इस दौरान एक बाइक सवार युवक को रोकने का इशारा किया गया तो वह रुका नहीं, बल्कि पुलिस पर फायरिंग कर भागने लगा। पुलिस की टीम ने बदमाश का पीछा और एनकाउंटर में उसे घायल कर पकड़ लिया।

एनकाउंटर के बाद पकड़े गए अभियुक्त का नाम सोफियान है जो जनपद शामली के तीन थानों से वांछित है। वो गौतस्करी के मामले में भी लिप्त रहा है। रॉयल बुलेटिन की खबर में उसे गौतस्कर बताया जा है। इस बीच, उसका एक वीडियो वायरल हो रहा है, जिसमें वो पुलिस वालों से उसे छोड़ने की गुजारिश कर रहा है। इस वीडियो में सूफियान बोलता दिख रहा है, ‘गलती हो गई साहब, एक बार माफी दे दो। आगे से ऐसा नहीं होगा बाबू जी।’

पुलिस ने बताया है कि बदमाश के पास से तमंचा, कारतूस और मोटरसाइकिल बरामद हुई है। बदमाश के ऊपर शामली जिले के थानों में गोकशी व चोरी के मुकदमें दर्ज है। फिलहाल बदमाश की हिस्ट्रीशीट निकाली जा रही है।

मध्य प्रदेश में गौतस्करों पर छापेमारी में मिला 150 किलो गोमाँस, जिंदा गौवंश भी छुड़ाए : प्रशासन ने की बुलडोजर कार्रवाई, ढहाए 11 अवैध घर

मध्य प्रदेश के मंडला जिले में एक गाँव से लगातार गौवंश की हत्या, तस्करी और गौमाँस के व्यापार की सूचना मिल रही थी, जिसके बाद प्रशासन ने अब तक की सबसे बड़ी कार्रवाई की। शुक्रवार (14 जून 2024) को प्रशासन ने गौतस्करी से जुड़े गाँव में छापेमारी की, जिसमें 11 घरों से गौवंश के अवशेष बरामद हुए। इन घरों में फ्रिज में भी भरकर गौवंश के अवशेष रखे गए थे। वहीं, 150 जिंदा गौवंश को भी मुक्ति कराया गया, इसके बाद प्रशासन ने बुलडोजर कार्रवाई को अंजाम दिया और सभी 11 घरों को ढहा दिया।

मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक, मंडला जिले के नैनपुर थाना इलाके के भैंसवाही गाँव में मुखबिर की सूचना के आधार पर शुक्रवार की देर रात छापेमारी की गई थी, जिसमें 11 घरों में गौवंश के अवशेष बरामद हुए। इस मामले में पुलिस ने 11 एफआईआर दर्ज करते हुए एक आरोपित को गिरफ्तार भी किया था, बाकी अंधेरे का फायदा उठाते हुए फरार हो गए थे, लेकिन शनिवार को प्रशासन ने राजस्व विभाग की टीम के साथ मिलकर आरोपितों के घरों को बुलडोजर से ढहा दिया।

पुलिस की कार्रवाई के दौरान घरों के आसपास खेतों और तबेले में लगभग 150 की संख्या में जीवित गौवंश मिले। जिन्हें पुलिस टीम द्वारा मुक्त कराया गया एवँ 85 पशुओं को प्रशासन के सहयोग से सुरक्षित गोशाला पहुँचाया गया है।

प्रशासन ने पाया कि ये सभी घर अवैध रूप से सरकारी जमीनों पर बने हुए थे, जिसके बाद सरकारी जमीन को मुक्त कराने के लिए शनिवार (15 जून 2024) को बुलडोजर अभियान चलाया गया। बता दें कि इस गाँव में लंबे समय से गो तस्करी व वध करने के आरोप लगते रहे है। पहले भी कार्रवाई हुई है। लेकिन इस बार गो तस्करों के विरुद्ध बड़ी कार्रवाई पुलिस ने की है।

जानकारी के मुताबिक, पुलिस अधीक्षक मंडला के निर्देशन पर एसडीओपी नैनपुर नेहा पच्चसिया के नेतृत्व में थाना प्रभारी नैनपुर निरीक्षक बलदेव सिंह मुजालदा द्वारा थाना नैनपुर की पुलिस टीम ने इस कार्रवाई को अंजाम दिया और 11 आरोपितों के विरूद्ध थाना नैनपुर में पशु क्रुरता अधिनियम व गौवंश वध प्रतिषेध अधिनियम के तहत अपराध पंजीबद्ध किया। पुलिस टीम द्वारा दबिश में गिरफ्तार एक आरोपित से पूछताछ जारी हैं। बाकियों की गिरफ्तारी के लिए टीम का गठन किया गया है।

शरीफ नाम के किन्नर ने अपने गिरोह के साथ 3 साधुओं को पीटा, पटक कर तोड़ डाला भजन बजाने वाला हारमोनियम और ढोलक: थाने में घुस कर भी किया हंगामा

उत्तर प्रदेश के शाहजहाँपुर जिले में किन्नरों के एक गिरोह ने भिक्षा माँग रहे साधुओं पर हमला कर दिया है। इस हमले में कुल 3 साधुओं को चोटें आईं हैं। उनके ढोलक और हारमोनियम छीन कर तोड़ डाले गए। हमले का मुख्य आरोपित शरीफ बताया जा रहा है। पुलिस ने कुल 4 आरोपितों के खिलाफ नामजद FIR दर्ज कर के जाँच शुरू कर दी है। घटना मंगलवार (11 जून 2024) की है। जिस इलाके का यह मामला है वहाँ के किन्नरों की मुखिया ने हमलावरों को आदतन अपराधी बता कर कड़ी कार्रवाई की माँग की है।

यह मामला शाहजहाँपुर जिले के थाना क्षेत्र कलान का है। यहाँ जिला बदायूँ के रहने वाले राजेंद्र नाथ गोस्वामी ने बुधवार (12 जून, 2024) को पुलिस में तहरीर दी है। तहरीर में उन्होंने बताया कि मंगलवार को वह वार्षिक भिक्षा के लिए कलान इलाके में भ्रमण कर रहे थे। राजेंद्र के साथ रामसरन और गोपाल नाथ भी थे। ये सभी हारमोनियम और ढोलक पर भजन गाते हुए स्वेच्छा से मिल रहा दान ले रहे थे। इसी दौरान वहाँ पर किन्नर समुदाय के शरीफ, आसिव, सोनम और सुंदरम पहुँच गए।

इन सभी ने मिल कर तीनों साधुओं को बेरहमी से बीच रास्ते दिन दहाड़े पीटा। इनके हारमोनियम और ढोलक को जमीन पर पटक कर तोड़ डाला गया। तीनों साधुओं को आरोपितों ने गंदी-गंदी गालियाँ दी। डर से लौट रहे साधुओं को इन आरोपितों ने दोबारा दिखाई देने से जान से मार डालने की भी धमकी दी। चारों आरोपितों ने साधुओं से यह भी कहा कि इलाके में किसी से भी माँगने का अधिकार केवल उन्ही लोगों के पास है। पीड़ित राजेंद्र ने पुलिस ने शरीफ, सोनम, आसिव और सुंदरम के खिलाफ कड़ी कार्रवाई की माँग की है।

इस घटना का वीडियो भी सोशल मीडिया पर वायरल हो रहा है। वायरल वीडियो में चारों किन्नरों को साधुओं की पिटाई करते देखा जा सकता है। तीनों साधु स्वयं को बचाने की कोशिश करते दिखाई दे रहे हैं। पिटाई से आसपास अफरातरफी का माहौल हो गया। इस माहौल में किन्नरों को कपड़े भी उतारते देखा जा सकता है। जब पीड़ित साधु अपनी शिकायत ले कर थाने पहुँचे थे तो यहाँ भी शरीफ अपने साथियों सहित पहुँच गया था। उसने यहाँ हंगामा काटा। पुलिस ने जैसे-तैसे हालत को काबू किया।

पुलिस ने आसिव, सोनम, शरीफ और सुंदरम किन्नर के खिलाफ IPC की धारा 323, 427, 504 व 506 के तहत FIR दर्ज कर ली है। मामले की जाँच की जा रही है। ऑपइंडिया के पास शिकायत कॉपी मौजूद है। इस बीच संबंधित इलाके में किन्नरों की मुखिया चाँदनी चौहान का बयान सामने आया है। उन्होंने साधुओं को पीटे जाने की घटना को निंदनीय बताते हुए चारों आरोपितों पर कड़ी कार्रवाई की माँग की है। चाँदनी किन्नर का कहना है कि आसिव, सोनम, शरीफ और सुंदरम आदतन अपराधी हैं जो आए दिन कोई न कोई उत्पात किया करते हैं। इन आरोपितों ने पहले भी कुछ अन्य लोगों की पिटाई की है।

कर्नाटक में बढ़ाए गए पेट्रोल-डीजल के दाम: लोकसभा चुनाव खत्म होते ही कॉन्ग्रेस ने शुरू की ‘वसूली’, जनता पर टैक्स का भार बढ़ा कर जुटाएगी पैसा

लोकसभा चुनाव 2024 खत्म हो चुका है। कॉन्ग्रेस की अगुवाई वाली इंडी गठबंधन की बुरी तरह से हार हुई है। और अब इसका गुस्सा आम जनता पर निकलने लगा है। कॉन्ग्रेस के सत्ता वाले सबसे बड़े राज्य कर्नाटक में जनता को अब पेट्रोल-डीजल की बढ़ी हुई कीमतों से ये गुस्सा सहना पड़ेगा। कर्नाटक की कॉन्ग्रेस की सरकार ने पेट्रोल और डीजल पर बेतहाशा टैक्स लाद दिए हैं। इसी के साथ पेट्रोल की कीमतें भी बढ़कर 102.85 रुपए प्रति लीटर हो गई हैं।

रिपोर्ट्स के मुताबिक, कर्नाटक सरकार ने पेट्रोल और डीजल पर सेल्स टैक्स क्रमश: 3 रुपए और 3.20 रुपए बढ़ा दिए हैं। इस आदेश के अनुसार, पेट्रोल 25.92 से 29.84% और डीजल 14.34% से 18.44% तक सेल्स टैक्स बढ़ा दिया गया है। जिसके बाद पेट्रोल की कीमत 3 रुपये बढ़कर 102.85 रुपये प्रति लीटर हो जाएगी, जबकि डीजल की कीमत 3.02 रुपये बढ़कर 88.93 रुपये प्रति लीटर हो जाएगी। यह आदेश तत्‍काल प्रभाव से लागू कर दिया गया है। अभी तक बेंगलुरु में पेट्रोल 99.84 रुपये प्रति लीटर और डीजल 85.93 रुपये प्रति लीटर बिक रहा था, लेकिन नए आदेश के बाद बढ़ी हुई कीमतें तत्काल प्रभाव से लागू हो गई हैं।

कर्नाटक सरकार जुटाएगी 2500 से 2800 करोड़ रुपए

जानकारी के मुताबिक, ईंधन की कीमतों में वृद्धि से इस वित्तीय वर्ष में लगभग 2,500-2,800 करोड़ रुपये जुटाने में मदद मिलेगी। कॉन्ग्रेस पार्टी ने राज्य में सरकार बनने पर गारंटियों की घोषणा की थी, जिसके लिए अतिरिक्त राजस्व जुटाने के लिए राज्य सरकार ने भारतीय निर्मित शराब (आईएमएल) पर सभी स्लैबों पर 20 प्रतिशत अतिरिक्त उत्पाद शुल्क (एईडी) लगाया है और बीयर पर एईडी 175 प्रतिशत से बढ़ाकर 185 प्रतिशत कर दिया है, नए पंजीकृत परिवहन वाहनों पर 3 प्रतिशत अतिरिक्त उपकर लगाया है, 25 लाख रुपये से अधिक के ईवी (इलेक्ट्रिक वाहनों) पर आजीवन कर लगाया है और कर संग्रह में तेजी लाई है।

इस मामले में बीजेपी ने कर्नाटक की कॉन्ग्रेस सरकार पर हमला बोला है। बीजेपी प्रवक्ता एस प्रकाश ने कहा, “सिद्धारमैया के नेतृत्व वाली कॉन्ग्रेस सरकार ने इस राज्य में डीजल और पेट्रोल की कीमतों में भारी वृद्धि की है। लोगों को उम्मीद थी कि राहुल गाँधी के वादे के अनुसार उनके बैंक खातों में 8500 रुपये आएंगे। इसके विपरीत, पेट्रोलियम उत्पादों की कीमतों में वृद्धि से उन पर भारी बोझ पड़ा है। यह राज्य सरकार द्वारा अपनाई गई गारंटी योजनाओं का नतीजा है। राज्य सरकार आर्थिक रूप से दिवालिया हो चुकी है, वे जो कुछ भी उपलब्ध है, उससे राजस्व निकालने की कोशिश कर रहे हैं…”

बता दें कि सिद्धारमैया के 2024-25 के राजस्व-घाटे वाले बजट में कुल 3,71,383 करोड़ रुपये का रेवेन्यू है। 27,354 करोड़ रुपये के घाटे के साथ, यह संभवतः पहली बार है जब किसी वित्तीय वर्ष में वार्षिक उधारी 1 लाख करोड़ रुपये से अधिक हो गई है।

‘पूरे हिंदुस्तान में अल्लाह-हू-अकबर गूँजेगा, रोका तो चीर देंगे’: यूपी पुलिस के शिकंजे में आते ही माफ़ी माँगने लगा रील बनाने वाला हारुन, कहा – आगे से नहीं करूँगा

उत्तर प्रदेश के मुजफ्फरनगर में बकरीद को लेकर भड़काऊ रील बनाना एक युवक को भारी पड़ा। यूपी पुलिस की कार्रवाई के बाद अब वो जेल में बंद है। उसने भड़काऊ रील सोशल मीडिया पर पोस्ट कर दी थी। वीडियो में वो धमकियाँ दे रहा था, लेकिन जैसे ही पुलिस ने पकड़ा उसकी हेकड़ी निकल गई। इसके बाद वो माफ़ी माँगते हुए कहने लगा कि उससे गलती हो गई। आरोपित हारुन ने कहा कि दोस्तों के कहने पर उसने ये वीडियो बना दिया, एक बार उसे माफ़ कर दिया जाए।

मामला दर्शन बुढ़ाना कोतवाली थाना क्षेत्र का है। ये वीडियो शुक्रवार (14 जून, 2024) का है। वो बड़कता गाँव का रहने वाला है। वीडियो में उसने कहा था, “ईद पर ग़दर फिल्म से भी तगड़ा बना देंगे सीन। जिन्होंने भी रोकटोक की, टाँग पर टाँग रख कर देंगे चीर। हिंदुस्तान के कोने-कोने पर अल्लाह-हू-अकबर नारा गूँजेगा।” हालाँकि, अब वो कह रहा है कि आइंदा उससे ऐसी गलती नहीं होगी। उसका कहना है कि उसे इस रील के बारे में कुछ पता नहीं था।

SP (ग्रामीण) आदित्य बंसल ने अपील की कि सब कोई आपसी सौहार्द के साथ त्योहार मनाएँ, किसी भी तरह की अफवाहों पर ध्यान न दें। उन्होंने कहा कि इंटरनेट मीडिया पर भी यूपी पुलिस पूरी तरह से सक्रिय एवं सतर्क है, किसी भी प्रकार का भड़काऊ वीडियो या सन्देश कोई भी व्यक्ति प्रसारित करता है तो उस पर तत्काल कार्रवाई की जाएगी। उन्होंने भरोसा दिलाया कि किसी भी कीमत पर त्योहारों के मौके पर सांप्रदायिक सौहार्द बिगड़ने नहीं दिया जाएगा।

पुलिस ने स्पष्ट कर दिया है कि सामुदायिक तनाव बिगाड़ने का कुत्सित प्रयास करने वालों पर तत्काल कानूनी कार्रवाई की जाएगी। बता दें कि बकरीद सोमवार (17 जून, 2024) को मनाया जाना है। इस दिन पूरी दुनिया में मुस्लिम बड़ी संख्या में बकरों को काटते हैं। कई जगह से सड़कों पर खून की नदियाँ बहने के वीडियो आते हैं। भारत में हिन्दू त्योहारों पर इस्लामी कट्टरपंथी हमला करते हैं, वहीं अपने त्योहारों पर वो प्रशासन को चुनौती देते हैं।

बस ड्राइवर वसीम ने ‘सोनू’ बन फार्मा कंपनी में काम करने वाली हिन्दू लड़की को फँसाया: रेप के बाद करने लगा ब्लैकमेल, मुस्लिम बनने का डालने लगा दबाव

मध्य प्रदेश के इंदौर से लव जिहाद का एक और मामला सामने आया है। बस ड्राइवर वसीम खान ने फार्मा कम्पनी में जॉब करने वाली एक हिंदू लड़की को निशाना बनाया है। वसीम ने सोनू बनकर पीड़िता को प्यार के जाल में फँसाकर रेप किया और फिर इस्लाम कबूल करने का दबाव बनाया। बजरंग दल ने के सहयोग से पीड़िता की शिकायत पर पुलिस ने केस दर्ज करके वसीम को हिरासत में ले लिया है।

मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक, पीड़िता इंदौर के उमरिया की रहने वाली है। वह राउ की एक फार्मा कम्पनी में जॉब करती है। ऑफिस वह अक्सर इंदौर-महू के बीच चलने वाली बस से आया-जाया करती थी। वहीं बस स्टैंड पर वसीम मिला और अपना नाम सोनू बताकर पीड़िता से दोस्ती कर ली। वसीम ड्राइवर था। कुछ समय बाद दोनों ने अपने मोबाइल नंबर एक-दूसरे को दे दिए।

इसके बाद दोनों के बीच बातचीत होने लगी। एक दिन सोनू उर्फ़ वसीम ने पीड़िता को अपने एक दोस्त से मिलवाने के नाम पर साथ चलने को कहा। पीड़िता वसीम की बातों में आ गई। दोनों एक साथ मैडीकैप्स इलाके में आए। यहाँ सोनू ने पीड़िता को पहले खाना खिलाया और बाद में चाय पिलाई। चाय पीने के बाद पीड़िता पर बेहोशी छाने लगी।

लड़की को आशंका है कि उसकी चाय में सोनू ने कोई नशीला पदार्थ डाल दिया था। चाय पीकर लड़की बेसुध हुई तो वसीम ने उसके साथ रेप किया। इस दौरान उसने लड़की की अश्लील फोटो और वीडियो बना ली। लड़की को जब होश आया तो इस घटना से दुखी होकर रोने लगी। इसके बाद सोनू ने शादी का वादा करके उसे चुप करवा दिया।

इसके बाद वसीम ने पीड़िता को ब्लैकमेल करके कई बार रेप किया। एक दिन सोनू के बैग से मिले आधार कार्ड से लड़की को उसके मुस्लिम होने की जानकारी हुई। जब लड़की ने खुद को धोखे में रखने की वजह पूछी तो वसीम भड़क गया। उसने पहले पीड़िता को उसके अश्लील फोटो-वीडियो का डर दिखाया और बाद में हिन्दू धर्म छोड़कर इस्लाम कबूल करने का दबाव बनाने लगा।

उसने पीड़िता से कहा, “तेरे अश्लील फोटो और वीडियो हैं मेरे पास। ज्यादा तेज चलेगी तो वायरल कर दूँगा। इसलिए अब जैसा मैं कहूँ वैसा ही करना। मुस्लिम बन जा इसमें ही तेरी भलाई है, नहीं तो अच्छा नहीं होगा।” वसीम पीड़िता पर धर्मांतरण करके निकाह करने का लगातार दबाव बनाता था। वसीम ने इस्लाम कबूल नहीं करने पर लड़की और उसके माता-पिता को मार डालने की धमकी दी।

उसकी धमकियों से पीड़िता काफी डर गई। उसने वसीम से दूरी बनानी शुरू कर दी। बुधवार (12 जून 2024) को पीड़िता राउ बाजार के विश्वकर्मा मंदिर गई थी। तभी वहाँ सोनू उर्फ़ वसीम आ गया। उसने लड़की को अपने साथ ले जाना चाहा। पीड़िता ने विरोध किया तो सोनू ने उसे बहुत पीटा। इससे पीड़िता बेहद हताश हो गई और हिंदू संगठनों से संपर्क किया।

आखिरकार परेशान होकर पीड़िता ने सारी बात बजरंग दल के जिला संयोजक राम दांगी को बताई। दांगी ने पीड़िता के साथ थाने पहुँचकर शिकायत दी और केस दर्ज करवाया। पुलिस ने सोनू उर्फ वसीम पर मध्य प्रदेश धर्मान्तरण विरोधी कानून सहित अन्य धाराओं में केस दर्ज कर लिया है। वसीम को हिरासत में ले लिया गया है। मामले की जाँच चल रही है।

दिल्ली-NCR में इस साल आग का कहर, नोएडा-गाजियाबाद में भी तबाही: अकेले राजधानी में हर दिन 200 कॉल, कैसे बदलेंगे हालात?

दिल्ली-एनसीआर में आग लगने की घटनाओं में तेजी से वृद्धि हो रही है। शनिवार (15 जून 2024) को दिल्ली, गाजियाबाद, नोएडा में आग लगने की भीषण घटनाएँ सामने आई। पहली घटना दिल्ली के वसंत विहार इलाके की है, जहाँ एक दुकान में लगी आग ने कई दुकानों को अपनी चपेट में ले लिया। दूसरी आग की घटना गाजियाबाद जिले के लोनी की ट्रॉनिका सिटी के सेक्टर A3 से सामने आई। यहाँ पर संपत पैकेजिंग फैक्ट्री में भीषण आग ने पड़ोस की दो फैट्रियों को भी चपेट में ले लिया, तो तीसरी घटना नोएडा की है, जहाँ कोतवाली फेज तीन क्षेत्र में एक फैक्ट्री में आग लग गई। नोएडा में दमकल विभाग की एक दर्जन गाड़ियों ने घंटों की मशक्कत के बाद आग पर काबू पाया।

दिल्ली में हर रोज 200 से ज्यादा घटनाएँ

ईटीवी भारत की रिपोर्ट के मुताबिक, दिल्ली के दमकल विभाग द्वारा जारी आँकड़ों की मानें तो दिल्ली में साल दर साल आग लगने की घटनाएँ तेजी से बढ़ रही हैं। इनमें सैकड़ों लोगों को अपनी जान गँवानी पड़ रही है। अकेले साल 2022-23 में 1029 लोगों की मौत हो गई थी, तो 2193 लोग घायल हो गए थे। साल 2021 में मौतों का आँकड़ा 591 और घायलों की संख्‍या 1421 दर्ज की गई, तो साल 2020-21 में ये आँकड़ा 346 लोगों की मौत और 1135 लोगों के घायल होने की थी।

देश की राजधानी दिल्ली में आग लगने की घटनाओं को देखें, तो साल 2022 में 31,958 आग लगने की घटनाएँ दर्ज हुई। साल 2021-22 में ये आँकड़ा 27,343 और 2020-21 में आँकड़ा 25,709 का था। दिल्ली दमकल विभाग की मानें तो हर साल 200 से ज्यादा घटनाएँ आग लगने की मिली हैं, जो बेहद चिंता जनक है।

दिल्ली में आगजनी की बड़ी घटनाओं की सूची

1- इस साल की बड़ी घटनाओं में गणतंत्र दिवस के दिन 26 जनवरी को शाहदरा जिलेके के मानसरोवर पार्क इलाके में लगी आग शामिल है। एक 4 मंजिला इमारत में आग लगने से 7 महीने की बच्ची समेत 4 लोगों की मौत हो गई थी।

2- इसी साल 15 फरवरी को अलीपुर स्थित केमिकल फैक्ट्री में भीषण आग लग गई थी, जिसमें 7 लोगों की दर्दनाक मौत हो गई थी।

3- दिल्ली के ज्योति नगर थाना इलाके के दुर्गापुरी एक्सटेंशन इलाके में 4 मंजिला इमारत में आग लग गई थी, जिसमें 1 व्यक्ति की मौत हो गई, तो लाखों का माल स्वाहा हो गया।

4-दिल्ली के विवेक विहार स्थित बेबी केयर सेंटर में रात 11 बजे भीषण आग लग गई थी, जिसमें 9 नवजात बच्चों की मौत हो गई थी, तो 5 बच्चे घायल हो गए।

5-कुछ दिन पहले 25 मई 2024 को कृष्णा नगर इलाके में स्थित इमारत में आग लगने से बुजुर्ग महिला समेत 3 लोगों की मौत हो गई। इस हादसे में 10 लोग घायल हो गए, तो एक दर्जन दो पहिया गाड़ियाँ भी जल गई।

6- करीब 10 दिन पहले 5 जून 2024 को लाजपत नगर इलाके में बच्चों के अस्पताल में आग गई। बड़ी मशक्कत से आग पर काबू पाया गया था।

7- नरेला इंडस्ट्रियल इलाके में 8 जून को एक फैक्ट्री में आग लगने से 3 लोगों की मौत हो गई, तो 6 लोग घायल हो गए। ये हादसा बॉयलर फटने की वजह से हुई थी।

गाजियाबाद में हुए ये बड़े हादसे

गाजियाबाद में पिछले 2 माह में कई बड़ी घटनाएँ आग लगने से हुई। टीला मोड़ इलाके में स्थित एक फ्लैट में 14 अप्रैल को आग लग गई थी, जिसमें बुजुर्ग महिला की मौत हो गई थी. 22 अपैल को इलाके में आग लगे ने पति-पत्नी की मौत हो गई थी। तो 10 जून 2024 को लोनी के बेटा हाजीपुर इलाके में फैक्ट्री में आग लगने से लाखों का नुकसान हुआ। इसके अलावा भी कई घटनाएँ सामने आ चुकी हैं।

नोएडा में हुई बड़ी घटनाएँ

नोएडा में इस साल हर महीने आग लगने की कई बड़ी घटनाएँ सामने आ चुकी हैं। जनवरी माह में 121, फरवरी माह में 136, मार्च में 182, अप्रैल में 366 और मई में आग लगने की 405 घटनाएँ हुई थी। सेक्टर 104 के एक होटल में आग लगने से एक युवती की मौत हो गई थी, तो सेक्टर 8 के एक कार वर्कशॉप में 33 गाड़ियाँ आग में जल गई थी।