राजनीति में तथ्यों का पता लगाए बिना किसी झूठ को फैलाना अब सामान्य हो गया है और कॉन्ग्रेस इसे बहुत अच्छे से कर भी रही है। जैसे ताजा उदाहरण की बात करें तो केरल कॉन्ग्रेस ने कल फैलाया कि नरेंद्र मोदी और राजनाथ सिंह का नाम मार्गदर्शक मंडल में रख दिया गया है। इसके बाद अनुमान लगाए गए कि शायद ये इस ओर इशारा है कि फ्लोर टेस्ट फेल होने वाला है। ट्वीट के साथ एक लिंक भी लगाया गया जो भाजपा की साइट का था।
अब उनके इसी ट्वीट के बाद भाजपा प्रवक्ता शहजाद पूनावाला ने इस पर बयान दिया है। उन्होंने कॉन्ग्रेस के झूठ की पोल खोलते हुए तथ्यों से अवगत कराया। उन्होंने बताया कि 26 अगस्त 2014 को मार्गदर्शक मंडल में पाँच लोगों को शामिल किया गया था- श्री अटल बिहारी वाजपेयी, श्री नरेंद्र मोदी, श्री लाल कृष्ण आडवाणी, डॉ मुरली मनोहर लाल जोशी और राजनाथ सिंह।
Fact: On 26.8.2014 – 5 leaders were included in Margdarshak Mandal Shri Vajpayee Shri Modi Shri Advani Shri Joshi Shri Rajnath Singh
Press note of BJP is on the same website but under GAALIBAAZ- Congress has become a factory of fake news
— Shehzad Jai Hind (Modi Ka Parivar) (@Shehzad_Ind) June 13, 2024
उन्होंने कहा कि जहाँ से कॉन्ग्रेस ने नरेंद्र मोदी और राजनाथ सिंह के मार्गदर्शक मंडल में शामिल होने वाली बात उठाई है वहाँ पर वो इस प्रेस रिलीज को भी देख सकते थे जिसमें ये बात है कि नरेंद्र मोदी और राजनाथ सिंह पिछले पिछले 10 साल से मार्गदर्शक मंडल में है, ये कोई अभी का फैसला नहीं है। उन्होंने कहा कॉन्ग्रेस पूरी तरह झूठ बोलने की फैक्ट्री बन गया है। इस रिलीज में साफ तौर पर 26 अगस्त 2014 की तारीख में 5 नेताओं का नाम लिखा है।
अजीब बात ये है कॉन्ग्रेस ने अपने झूठ की बात खुलने के बाद भी अभी तक अपने ट्वीट को हटाया नहीं है। लोग कह रहे गहैं कि जब तक झूठ फैलाने के लिए इन्हें कोर्ट तक नहीं घसीटा जाएगा तब तक ये इसी तरह की हरकतें करते रहेंगे।
अपने यूट्यूब चैनल ‘कुँवारी बेगम’ पर बच्चों का यौन शोषण करने की शिक्षा देने वाली यूट्यूबर शिखा मैत्रेय को गाजियाबाद पुलिस ने गिरफ्तार कर लिया है। हालाँकि, बाद में उसे जमानत मिल गई। दरअसल, मैत्रेय अपने वीडियो में बच्चों के यौन शोषण के अलावा, कह रही थी, “अगर मेरे पास लिंग होता तो मैं हस्तमैथुन पर एक ट्यूटोरियल बनाती और हस्तमैथुन को बेहतर तरीके से करने का सुझाव देती।”
उसका एक वीडियो वायरल हुआ था, जिसमें वह कह रही थी, “मैं यह भी बताती हूँ कि आपको हस्तमैथुन क्यों करनी है। एक छोटा बच्चा ढूँढो। छोटा बच्चा, जिसके दाँत ना हों। पहले देखो कि तुम्हारे आसपास कौन-सा नवजात बच्चा है। जो नवजात है उसकी मम्मी से बोलो कि मैं इसे खिलाने ले जा रहा हूँ। उसकी मम्मी से परमिशन ले लो कि इसको खिलाने लेकर जाता हूँ मैं।”
खुद को पेशेवर गेमर बताने वाली शिखा मैत्रेय नाम यह यूट्यबर अपनी गंदी सोचकर को शेयर करते हुए आगे कहती है, उसके बाद उसे बच्चे को ले जाओ और उसके साथ कुछ करो। मैं इसके लिए माफी नहीं माँगती। अगर मेरे लिंग होता तो मैं ऐसा जरूर करती। सो बिना दाँत का…ओहो। यह एक अद्भुत अनुभव होगा।”
थाना कौशांबी पुलिस टीम द्वारा ऑनलाइन यूट्यूब के माध्यम से बच्चों को स्पष्ट यौन कृत्यों के लिए प्रेरित करने तथा बच्चों के प्रति दुर्व्यवहार को बढ़ावा देने वाली 01 अभियुक्ता गिरफ्तार। बाइट- श्री रितेश त्रिपाठी सहायक पुलिस आयुक्त इन्दिरापुरम (कार्यवाहक)@Uppolicepic.twitter.com/xcJftn5jx1
— POLICE COMMISSIONERATE GHAZIABAD (@ghaziabadpolice) June 13, 2024
इस वीडियो के वायरल होने के बाद सोशल मीडिया पर यूट्यूबर को गिरफ्तार करने की माँग उठने लगी। इसके बाद गाजियाबाद पुलिस ने गुरुवार (13 जून 2024) को शिखा मैत्रेय को गिरफ्तार कर लिया। जाँच में कई चौंकाने वाले खुलासे हुए हैं। शिखा ने अपने यूट्यूब चैनल ‘कुँवारी बेगम’ पर पिछले कुछ दिनों में करीब 115 वीडियो अपलोड किए थे। इनमें अधिकांश अश्लील कंटेंट हैं।
शिखा मैत्रेय ने गिरफ्तारी से पहले अपने सभी सोशल मीडिया प्रोफाइल को प्राइवेट कर दिया था। इतना ही नहीं, उसने काफी कंटेंट भी हटा दिए थे। अब यूट्यूब पर चैनल शो नहीं हो रहा है। बताया जा रहा है कि शिखा ने चैनल को डिलीट कर दिया है या फिर प्राइवेसी सेटिंग में बदलाव कर दिया है। पुलिस अब उसके मोबाइल और लैपटॉप को फोरेंसिक जाँच के लिए लैब भेजने का निर्णय लिया है।
23 वर्षीया शिखा गाजियाबाद के इंद्रगढ़ी की रहने वाली है। उसने 2021-22 में नेशनल इंस्टीट्यूट ऑफ फैशन टेक्नोलॉजी (NIFT), दिल्ली से फैशन डिजाइनिंग का कोर्स किया है। इसके बाद कालकाजी में एक ई-कॉमर्स कंपनी में काम कर रही थी। वहीं, शिखा के पिता गाजियाबाद के स्कूल में टीचर हैं, जबकि माँ गुरुग्राम की कंपनी में इंजीनियर हैं। उसकी छोटी बहन 12वीं की पढ़ाई कर रही है।
शिखा कर्नाटक की राजधानी बेंगलुरू में आदित्य बिड़ला कंपनी में भी जॉब कर चुकी है। हालाँकि, पिछले दो साल से वह यूट्यूब पर कुँवारी बेगम के नाम से चैनल चला रही थी। इसमें वह अश्लील कंटेंट डालकर अपना रिच बढ़ाने की कोशिश कर रही थी। गिरफ्तार के बाद उसने पुलिस को यह भी बताया कि वह एक प्रोफेशनल गेमर है।
दरअसल, दीपिका नारायण भारद्वाज नाम की एक महिला ने शिखा मैत्रेय के खिलाफ 12 जून 2024 को गाजियाबाद के थाना कौशांबी में IT एक्ट में FIR कराई थी। पुलिस ने शिखा मैत्रेय को 13 जून को गिरफ्तार करके उसे कोर्ट में पेश किया और फिर उसे जेल भेज दिया। न्यूज 18 की रिपोर्ट के मुताबिक, शिखा को अंतरिम जमानत मिल गई है।
बहुजन समाज पार्टी की प्रमुख मायावती के लिए अपशब्द बोलने के मामले में कमाल राशिद खान उर्फ KRK पर केस दर्ज हुआ है। उनके खिलाफ बसपा के जिला प्रमुख ने देवबंद थाने में शिकायत दी थी। ये शिकायत केआरके के एक पोस्ट के खिलाफ दी गई थी जिसमें उन्होंने मायावती को लेकर घटिया बात लिखी थी।
कमाल राशिद खान ने अपने ट्वीट में लिखा था- “बहन जी ने टिकट दिया! कौन है बहन जी? बहन जी को बोलो शौचालय साफ करें। यही औकात है उसकी।”
केआरके का यह ट्वीट देखने के बाद उनके ऊपर आईपीसी की धारा 500, 509 और अनुसूचित जाति और अनुसूचित जनजाति (अत्याचार निवारण) अधिनियम, 1989 के तहत मामला दर्ज किया गया है।
Uttar Pradesh: "Bollywood actor Kamal Rashid Khan, known as KRK, has been charged under IPC sections 500, 509, and the SC/ST Act at Devband Police Station for allegedly making derogatory remarks against Bahujan Samaj Party (BSP) President Mayawati" says SP Sagar Jain pic.twitter.com/KiHUHOjC6g
एसपी सागर जैन ने भी मीडिया को जानकारी दी कि बॉलीवुड अभिनेता कमाल राशिद खान, जिन्हें केआरके के नाम से जाना जाता है, पर बहुजन समाज पार्टी (बीएसपी) की अध्यक्ष मायावती के खिलाफ कथित तौर पर अपमानजनक टिप्पणी करने के लिए देवबंद पुलिस स्टेशन में आईपीसी की धारा 500, 509 और एससी/एसटी एक्ट के तहत केस दर्ज हुआ है।
ना ही तेरी घटिया पार्टी का टिकट किसी मुस्लिम को चाहिए और ना ही किसी मुस्लिम को तेरे को वोट देना है। अब अपने घर पर बैठकर CM बनने के सपने देख! अब आगे देश को लूटने का मौक़ा नहीं मिलेगा! @Mayawatipic.twitter.com/bKxgaG3L7b
बता दें कि इससे पहले मायावती को लेकर केआरके तब हमलावर हुए थे जब मायावती ने बयान दिया था कि मुस्लिम समाज ने बसपा को वोट नहीं दिया, तो आगे वो भी टिकट सोच समझकर देंगी। केआरके ने कहा था- “ना ही तेरी घटिया पार्टी का टिकट किसी मुस्लिम को चाहिए और न ही किसी मुस्लिम को तेरे को वोट देना है। अब अपने घर पर बैठकर सीएम बनने के सपने देख… देश को लूटने का मौका नहीं मिलेगा।”
After defeat in each election @Mayawati show her frustration and blame Muslims, like Muslims are her father’s servants. You must understand Mayawati that Muslims are not your servants. UP Muslims are free to vote for Any party. Tera Koi Ahsaan Nahi Hai UP Ke Muslims Par! pic.twitter.com/XJpadt852o
इसके अलावा एक ट्वीट में केआरके ने कहा था- “हर चुनाव में हारने के बाद ये मायावती अपनी भड़ास मुस्लिमों पर उतारती है। ऐसा लगता है जैसे मुस्लिम इसके नौकर हैं। तुम्हें समझना होगा मायावती मुस्लिम तुम्हारे नौकर नहीं हैं। यूपी के मुस्लिम किसी भी पार्टी को वोट दे सकते हैं। तेरा कोई एहसान नहीं है यूपी के मुस्लिमों पर।”
All UP’s Muslims must see this to know, how @Mayawati is helping BJP and fooling Muslims. How she is selling votes of Muslims to defeat congress and SP. Therefore No Muslim should ever vote for #BSP of Mayawati. pic.twitter.com/rhdfFoZv7L
कुवैत में आग की घटना में मरे 45 भारतीयों के पार्थिव शरीर को लेकर भारतीय वायुसेना का एक विशेष विमान कोच्चि के लिए रवाना हो गया है। विमान में विदेश राज्यमंत्री कीर्ति वर्धन सिंह भी सवार हैं। वहाँ पहुँचकर विदेश राज्यमंत्री सिंह ने घायल भारतीय श्रमिकों से मुलाकात की और मृतकों के शवों को अंतिम संस्कार के लिए जल्द से जल्द भारत लाने के लिए कुवैती अधिकारियों के साथ समन्वय किया।
यह विमान आज सुबह करीब 11 बजे केरल के कोच्चि पहुँचेगा और फिर वहाँ से दिल्ली के लिए रवाना होगा। कुवैत में भारतीय दूतावास ने इसके बारे में शुक्रवार (14 जून 2024) सोशल मीडिया साइट एक्स (पहले ट्विटर) पर एक पोस्ट के जरिए जानकारी दी। पोस्ट में कहा गया, “विदेश राज्यमंत्री कीर्ति वर्धन सिंह, जिन्होंने शीघ्र वापसी सुनिश्चित करने के लिए कुवैती अधिकारियों के साथ समन्वय किया, विमान में सवार हैं।”
A special IAF aircraft carrying mortal remains of 45 Indian victims in the fire incident in Kuwait has taken off for Kochi.
बता दें कि कुवैत के अल-मंगफ इलाके में प्रवासी श्रमिकों के आवास वाली एक इमारत में भीषण आग लग गई थी, जिसमें 49 लोगों की मौत हो गई है। मृतकों में 45 भारतीय हैं। मृतकों में 23 केरल से, 7 तमिलनाडु से, 2-2 आंध्र प्रदेश और ओडिशा से और 1-1 बिहार, मध्य प्रदेश, कर्नाटक, पश्चिम बंगाल और उत्तर प्रदेश से हैं।
पीड़ितों में से अधिकांश कुवैत की एक कंपनी एनबीटीसी के लिए काम करते थे। यह कंपनी कुवैत की सबसे बड़ी निर्माण कंपनी है। जिस इमारत में आग लगी, वह भी एनबीटीसी की ही थी। बताया जा रहा है कि इमारत में 196 प्रवासी कामगार रह रहे थे। इनमें 176 भारतीय श्रमिक थे। वहीं, घायल 33 भारतीय श्रमिकों का विभिन्न अस्पतालों में इलाज चल रहा है।
प्रारंभिक जाँच में इस अग्निकांड में बड़ी चूक के संकेत मिले हैं। सात मंजिला इमारत के भूतल पर लगभग दो दर्जन गैस सिलेंडर रखे हुए थे। श्रमिकों के रहने के बनाए गए कमरे को कागज, कार्डबोर्ड और प्लास्टिक जैसे ज्वलनशील पदार्थ से कमरे का पार्टिशन किया गया था। ये पार्टिशन कमरे में अधिक-से-अधिक श्रमिकों को रखने के लिए किया गया था।
इंडियन एक्सप्रेस की रिपोर्ट के मुताबिक, छत पर लगे बंद दरवाजे थे, जिससे श्रमिक छत पर नहीं जा सके और फँस कर रह गए कमरे में लगाए गए कागज, कार्डबोर्ड और प्लास्टिक के कारण यह आग बहुत तेजी से फैली और लोगों को बचने का मौका नहीं मिल पाया। ये सारी जानकारी जब भारतीय दूतावास के अधिकारियों ने इस घटना में घायल लोगों से मुलाकात की तो बाहर आई।
इस घटना में बाल-बाल बचे केरल के कासरगोड जिले के टिकरीपुर के रहने वाले नलिनाक्षन टी.वी. ने अपने डरावने अनुभव को साझा किया। 58 वर्षीय नलिनाक्षन ने बताया कि जब आग की लपटें उठने लगीं तो उनके पास निर्णय लेने के लिए कुछ ही पल थे। उन्होंने इमारत की तीसरी मंजिल की खिड़की से नीचे पानी की टंकी में छलांग लगा दी। इसमें उनकी कुछ पसलियाँ टूट गईं और पैर में चोट आई, लेकिन वे बच गए।
नलिनाक्षन करीब 12 साल से एनबीटीसी के साथ काम कर रहे हैं और वर्तमान में केरल के व्यवसायी के.जी. अब्राहम की कंपनी में जनसंपर्क अधिकारी हैं। बता दें कि इस घटना के पीछे ग्राउंड फ्लोर पर शॉर्ट सर्किट को माना जा रहा है। इस शॉर्ट सर्किट के कारण वहाँ रखे लगभग दो दर्जन गैस सिलिंडर में ब्लास्ट हो गया और सात मंजिला इमारत धू-धू करके जलने लगी।
जेएनयू के प्रोफेसर और राजनीतिक विश्लेषक आनंद रंगनाथन ने कश्मीर समस्या को सुलझाने के लिए ‘इजरायल जैसे समाधान’ की बात कही थी, जिसके बाद से वो लगातार इस्लामिक कट्टरपंथियों के निशाने पर हैं। एएनआई के पॉडकास्ट में आनंद रंगनाथन ने ये सलाह दी थी, जिसके बाद जेएनयू स्टूडेंट यूनियन ने ऐलान किया था कि वो 13 जून की शाम 6 बजे जेएनयू कैंपस में आनंद रंगनाथन का पुतला फूँकेगा और मार्च निकालेगा। इसके बाद कश्मीरी हिंदुओं के संगठन Youth4PanunKashmir ने JNUSU को कानूनी नोटिस भेजा है। यूथ 4 पनुन कश्मीर कश्मीरी हिंदू युवाओं का वैश्विक संगठन है, जो कश्मीर से विस्थापित हुए हिंदुओं की आवाज उठाता है।
यूथ 4 पनुन कश्मीर संगठन ने अपने वकील द्वारा भेजे कानूनी नोटिस में कहा है कि जेएनयू में स्टूडेंट यूनियन जो प्लानिंग कर रहा है, उसका उद्देश्य कश्मीरी समुदाय के खिलाफ हिंसा को भड़काना है। संगठन ने कहा है कि प्रोफेसर आनंद रंगनाथन की सलाह का गलत मतलब लोगों में फैलाया जा रहा है। नोटिस में कहा गया है कि प्रोफेसर आनंद रंगनाथन को सोशल मीडिया पर लगातार निशाना बनाया जा रहा है और उन्हें धमकी दी जा रही है।
संगठन के वकील मुकेश शर्मा द्वारा भेजे गए कानूनी नोटिस में लिखा है, “व्हाट्सएप ग्रुपों के माध्यम से एक सुनियोजित प्रयास किया गया है, जिसमें आपके संगठन (JNUSU) से जुड़े छात्र और बाहरी पक्ष शामिल हैं। जेएनयू कैंपस में प्रोफेसर रंगनाथन के लैब के बाहर प्रो. रंगनाथन का पुतला दहने करने का उद्देश्य उनकी प्रतिष्ठा को खराब करना है। ऐसा करना मेरे मुवक्किल (यूथ फॉर पनुन कश्मीर) के साथ-साथ प्रो. रंगनाथन की गरिमा और प्रतिष्ठा पर सीधा हमला है।”
Kashmiri Hindus are victims of genocide, and our return to the valley as envisaged in the #MargdarshanResolution of 1991 is non-negotiable. Amid the malicious campaign against our well-wisher, Dr. @ARanganathan72 we, Youth 4 Panun Kashmir (regd), are compelled to send a legal… pic.twitter.com/gq7T9qIQ7w
— Youth 4 PanunKashmir (@Y4PK_Homeland) June 13, 2024
कानूनी नोटिस में कहा गया है कि पुतला दहन कार्यक्रम से जुड़े पोस्टों में रंगनाथन की टिप्पणियों को गलत तरीके से पेश किया गया है। ऐसा करके प्रो रंगनाथन और मेरे मुवक्किल के खिलाफ दुश्मनीपूर्ण माहौल तैयार करने की कोशिश की जा रही है। इस तरह के विरोध प्रदर्शन बदनाम करने, उत्पीड़न और हिंसा को बढ़ावा देने के लिए चलाए जा रहे हैं, जो कानूनी रूप से गलत है। इसलिए यूथ 4 पनुन कश्मीर संगठन जेएनयूएसयू से आनंद रंगनाथन का पुतला जलाने या किसी अन्य तरह के विरोध प्रदर्शन से दूर रहने की अपील करता है।
इस नोटिस में छात्र संगठन से रंगनाथन के खिलाफ सभी अपमानजनक बयान वापस लेने और सार्वजनिक रूप से माफी माँगने तथा कश्मीरी हिंदुओं और रंगनाथन के बारे में आगे से झूठे और भड़काऊ बयान देने से बचने को कहा गया है।
कानूनी नोटिस पोस्ट करते हुए, यूथ 4 पनुन कश्मीर समूह ने कहा कि कश्मीरी हिंदू नरसंहार के शिकार हैं। कश्मीरियों द्वारा पास साल 1991 के रिजोल्यूशन के मुताबिक, कश्मीरी हिंदुओं की घाटी में वापसी के मामले में कोई समझौता नहीं किया जा सकता। नोटिस के मुताबिक, ‘हम न तो डरेंगे और न ही किसी को हमारी मातृभूमि पनुन कश्मीर में वापसी की हमारी उचित माँग का समर्थन करने वाली आवाज को चुप कराने की अनुमति देंगे।’
बता दें कि रंगनाथन ने यह टिप्पणी एएनआई संपादक स्मिता प्रकाश द्वारा आयोजित पॉडकास्ट में की थी, जिसमें अभिजीत अय्यर-मित्रा, सुशांत सरीन और तहसीन पूनावाला भी शामिल थे। चर्चा के दौरान रंगनाथन ने कश्मीर की मौजूदा स्थिति पर अपना असंतोष व्यक्त करते हुए पिछली सरकार की नीतियों की आलोचना की थी। उन्होंने भारतीयों, खासकर कश्मीरी हिंदुओं को निराश करने के लिए हर पार्टी के नेतृत्व वाली सरकारों की आलोचना की थी।
रंगनाथन ने कहा था, “आपने 7 लाख कश्मीरी हिंदुओं का पुनर्वास नहीं किया है। पर्यटकों से आने वाला सारा पैसा आतंकवादियों के पास जा रहा है। यह आतंकवाद/उग्रवाद और आप इसे जो भी कहें, जारी रहेगा।” सभी विस्थापित कश्मीरी हिंदुओं के पुनर्वास का आह्वान करते हुए उन्होंने कहा, “आपको कश्मीर के लिए इज़रायल जैसा समाधान चाहिए। इज़राइल इसे हल करने में असमर्थ है, इसका कारण यह नहीं है कि इज़रायल इसे हल करने के लिए काम नहीं कर रहा है। इज़राइल ने अपने लोगों की ज़रूरतों को पूरा किया है, लेकिन हमने नहीं किया है।”
हालाँकि उनके बयान को गलत तरीके से पेश किया जाने लगा, जिसमें बताया गया कि रंगनाथन इजरायल की तरह कश्मीर में लड़ाई की वकालत कर रहे हैं। बाद में 11 जून को उन्होंने एक्स पर एक पोस्ट डालकर सफाई भी दी थी, जिसमें उन्होंने लिखा कि ‘वो कश्मीर में हिंदुओं के पुनर्वास की माँग कर रहे थे, जैसे यहूदियों को इजरायल में फिर से बसाया गया। ये नरसंहार का आह्वान नहीं है, जैसा कि आरोप लगाया जा रहा है।’
उन्होंने लिखा, “इजरायल जैसे समाधान की माँग करना – पीड़ितों का पुनर्वास करना, बस्तियाँ बनाना, आतंकवाद से लड़ना, सीमाओं को सुरक्षित करना – नरसंहार की माँग नहीं है, बल्कि यह एक और नरसंहार को रोकने की माँग है। मैं इजराइल के साथ खड़ा हूँ। मैं कश्मीरी हिंदुओं के साथ खड़ा हूँ। और मैं हर एक शब्द के साथ खड़ा हूँ।”
Calling for an Israel-like solution – rehabilitating the victims, making settlements, fighting terror, securing borders – is not calling for genocide; it is calling for preventing another genocide.
I stand by Israel. I stand by Kashmiri Hindus. And I stand by every single word. pic.twitter.com/FOXg8A6bFY
Thank you so much. ? This is not about me, and me being targeted and killed; these Islamists claimed safely and securely rehabilitating 700,000 Kashmiri Hindus was an act of genocide. They were targeting you and 700,000 Kashmiri Hindus.
जेएनयूएसयू को भेजे गए कानूनी नोटिस को लेकर रंगनाथन ने संगठन को धन्यवाद कहा और लिखा, “ये मेरे बारे में नहीं है और न ही इसके बारे में कि वो मुझे टारगेट कर रहे हैं और मार देंगे, बल्कि उन इस्लामिक कट्टरपंथियों के बारे में है, जो 7 लाख कश्मीरियों के पुनर्वास को नरसंहार बताने का काम साबित कर रहे हैं। वो आपको और 7 लाख कश्मीरी हिंदुओं को निशाना बना रहे हैं।”
यह समाचार मूल रूप से अंग्रेजी भाषा में प्रकाशित किया गया है। मूल लेख को पढ़ने के लिए यहाँ क्लिक करें।
यौन उत्पीड़न जैसे मामलों में कानून महिलाओं की पक्ष लेता है, लेकिन इसका मतलब ये नहीं कि हमेशा पुरुष ही गलत हो। यह बात इलाहाबाद हाई कोर्ट ने एक केस की सुनवाई करते हुए कही, जिसमें महिला ने एक व्यक्ति पर शादी का झाँसा देकर सालों तक रेप करने का आरोप लगाया था। इलाहाबाद हाई कोर्ट ने कहा कि परिस्थितियों का आँकलन करना हमेशा बेहद महत्वपूर्ण होता है।
बार एंड बेंच की रिपोर्ट के मुताबिक, इलाहाबाद हाई कोर्ट में जस्टिस राहुल चतुर्वेदी और जस्टिस नंद प्रभा शुक्ला की बेंच ने इस मामले की सुनवाई करते हुए कहा कि सबूत पेश करने की जिम्मेदारी सिर्फ आरोपित का ही नहीं है, बल्कि शिकायतकर्ता का भी है। हाई कोर्ट ने रेप के आरोपित को बरी करने के सेशन कोर्ट के फैसले को बरकरार रखते हुए ये टिप्पणी की।
हाई कोर्ट ने कहा, “इसमें कोई शक नहीं है अध्याय XVI के तहत यौन अपराधों में एक महिला/लड़की की गरिमा और सम्मान की रक्षा को प्रमुखता देते हुए कानून महिला केंद्रित हैं। ये जरूरी भी है, लेकिन परिस्थितियों का आँकलन भी जरूरी है। हर बार ये जरूरी नहीं कि पुरुष ही गलत हो।” इस मामले में महिला ने आरोपित के खिलाफ एससी-एसटी एक्ट में भी मामला दर्ज कराया था।
महिला ने साल 2019 में पुलिस में शिकायत दर्ज कराई थी कि आरोपित ने उससे शादी का वादा करके शारीरिक सम्बंध बनाए, लेकिन बाद में वो अपने वादे से मुकर गया। यही नहीं, उसने पीड़ित महिला की जाति को लेकर भी अपमानजनक बातें कही। इस मामले में आरोपित के खिलाफ 2020 में चार्जशीट दाखिल की गई थी। हालाँकि ट्रायल कोर्ट ने आरोपित को रेप के आरोपों से बरी कर दिया था और सिर्फ आईपीसी की धारा 323 के तहत दोषी ठहराया था। इसके बाद महिला हाई कोर्ट पहुँची थी।
इस मामले में आरोपित व्यक्ति ने हाई कोर्ट से बताया कि महिला के साथ उसके संबंध सहमति थे। महिला ने उससे खुद को ‘यादव’ जाति का बताया था, लेकिन उसकी जाति कुछ और थी, जिसके बाद उसने शादी से मना किया। कोर्ट ने रिकॉर्ड के आधार पर पाया कि महिला ने साल 2010 में शादी की थी, लेकिन 2 साल बाद ही वो अपने पति से अलग हो गई थी, हालाँकि दोनों का तलाक नहीं हुआ था।
ऐसे में कोर्ट ने अहम टिप्पणी की और कहा, “परिस्थितियों के मुताबिक, इस बात की संभावना कम है कि आरोपित ने महिला को शादी के झूठे वादे में फँसाया हो। दूसरी बात ये है कि महिला पहले से ही विवाहित थी और उसका विवाह अब भी कानून की नजर में मौजूद है। ऐसे में शादी का वादा करने का आरोप अपने आप खत्म हो जाता है।” हाई कोर्ट ने ट्रायल कोर्ट के फैसले को बरकरार रखा। यही नहीं, कोर्ट ने कहा था कि समाज में किसी भी रिश्ते को स्थायित्व देने में दोनों पक्षों की जाति की भी महत्वपूर्ण भूमिका होती है। जबकि ये साफ है कि महिला ने अपनी जाति छिपाई थी।
कोर्ट ने कहा, “महिला पहले से शादीशुदा थी और पिछली शादी को खत्म किए बिना और बिना किसी आपत्ति के वो 5 साल तक आरोपित से संबंध बनाए रखती है। दोनों ने इलाहाबाद, लखनऊ के कई होटलों और लॉज में एक-दूसरे के साथ का आनंद लिया। ऐसे में ये तय करना मुश्किल है कि कौन किसे बेवकूफ बना रहा था। ऐसे में यौन उत्पीड़न या रेप का मामला सही नहीं लगता।” हाई कोर्ट ने कहा कि निचली अदालत का फैसला सही था। इसके साथ ही कोर्ट ने आरोपित के खिलाफ ट्रायल कोर्ट के फैसले को बरकरार रखा।
नेटफ्लिक्स पर हाल ही में रिलीज हुई वेब सीरीज ‘हीरामंडी’ में तवायफ फरीदन का किरदार निभाकर चर्चा बटोर रहीं सोनाक्षी सिन्हा अब घर बसा रही हैं। सोनाक्षी सिन्हा ने अपने कथित बॉयफेंड जहीर इकबाल के साथ जिंदगी आगे बढ़ाने का फैसला किया है। इस बात से जुड़ा एक इन्विटेशन लेटर सोशल मीडिया पर भी वायरल हो रहा है।
हालाँकि ममता बनर्जी की पार्टी तृणमूल कॉन्ग्रेस के सांसद और बॉलीवुड के दिग्गज अभिनेता रहे शत्रुघ्न सिन्हा ने ऐसी किसी जानकारी से इनकार किया है, वहीं सोनाक्षी के भाई लव सिन्हा ने भी मामले से अनभिज्ञता जताई है। ये अलग बात है कि मीडिया रिपोर्ट्स सोनाक्षी के दोस्तों के हवाले से इस बात पर मुहर लगा रहे हैं कि जश्न 23 जून को मुंबई के एक रेस्टोरेंट में होगा, जिसकी मालकिन शिल्पा शेट्टी हैं।
मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक, सोनाक्षी सिन्हा और जहीर इकबाल ने जिंदगी आगे बढ़ाने का फैसला किया है, इसके लिए उन्होंने अपने दोस्तों को मुंबई के बास्तियन रेस्टोरेंट में 23 जून को इन्वाइट किया है। कथित रूप से सोनाक्षी के दोस्त ने बताया है कि सोनाक्षी और जहीर उस दिन कोई शादी या निकाह नहीं करने वाले हैं, या तो वो रजिस्टर्ड मैरिज कर चुके हैं या फिर उस दिन करेंगे। ऐसे में 23 जून की पार्टी में बहुत कुछ खुलासा हो सकता है। उस दोस्त के हवाले से बताया गया है कि सोनाक्षी सिन्हा और जहीर इकबाल से जुड़ा ये कार्ड खास दोस्तों जैसे हुमा कुरैशी, आयुश शर्मा और वरुण शर्मा को भेजा जा चुका है।
इस मामले में सोनाक्षी सिन्हा के पिता शत्रुघ्न सिन्हा ने साफ तौर पर कहा है कि उन्हें कुछ भी पता नहीं है। शत्रुघ्न सिन्हा ने कहा कि सोनाक्षी मेरी इकलौती बेटी है। उसके हरेक फैसले में मैं उसके साथ हूँ। ‘अगर’ वो ‘ऐसा कुछ’ करती है, तो पिता के तौर पर मुझे सबसे ज्यादा खुशी होगी। इस दौरान उन्होंने कहा, ‘आज कल के बच्चे कंसेंट नहीं लेते माँ-बाप का, सिर्फ इन्फॉर्म करते हैं। हम ‘इन्फॉर्म’ होने का इंतजार कर रहे हैं।’ वहीं, सोनाक्षी के भाई लव सिन्हा ने भी साफ कहा कि उन्हें सोनाक्षी के इस फैसले से जुड़ी कोई भी बात पता नहीं है। और न ही वो ‘इसमें शामिल हैं’।
बता दें कि सोनाक्षी-जहीर से जुड़ा जो कार्ड वायरल हो रहा है, उसमें कथित तौर पर सोनाक्षी सिन्हा और जहीर इकबाल की आवाज है, जिसमें वो अपने 7 साल के अफेयर के बारे में बता रहे हैं। बहरहाल, इन बातों में कितनी सच्चाई है, ये तो आने वाले समय में पता चल ही जाएगा।
उत्तर प्रदेश के मिर्जापुर में समीर नाम का मुस्लिम दबंग एक हिंदू परिवार के घर में घुस गया। उसके हाथ में तमंचा था। उसने हिंदू परिवार की 14 साल की नाबालिग लड़की के सिर पर तमंचा लगा दिया और ‘अल्लाहू अकबर’ के साथ ही ‘अस्सलामु अलैकुम’ बोलने का दबाव डालने लगा। यही नहीं, वो नाबालिग लड़की के पीछे 2 साल से पड़ा है और उसे परेशान भी करता रहता है। हिंदू परिवार ने आरोप लगाया है कि समीर दबंग और प्रभावशाली मुस्लिम परिवार का लड़का है, उसका परिवार भी उसकी कोई सुनवाई नहीं करता। अब पीड़ित परिवार ने पुलिस की शरण ली है और न्याय की माँग की है।
मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक, ये मामला मिर्जापुर जिले के विंध्याचल कस्बे का है, जहाँ दबंग समीर हिंदू लड़की को पिछले दो साल से डरा- धमका कर परेशान कर रहा था। आरोपित समीर पीड़ित के घर में कई दफे घुस चुका है। लड़की और उसके भाई को मारने पीटने की धमकी देकर उसको ब्लैकमेल करता था। समीर का घर पीड़ित हिंदू परिवार के पास ही है। लड़की के परिजनों ने जब इसकी शिकायत समीर के परिजनों से की, तो उल्टा दबंग परिवार उनके ही ऊपर दबाव बनाने लगा और मारने-पीटने की कोशिश की।
हद तो तब हो गई, जब समीर तमंचा लेकर उनके घर में ही घुस गया और बेटी को ‘अस्सलामु अलैकुम’ और अल्लाहू अकबर कहने के लिए दबाव डालने लगा। इस मामले में परिजनों की शिकायत पर पुलिस ने केस दर्ज कर लिया है और कुछ लोगों को गिरफ्तार भी किया है।
मिर्जापुर के एसपी अभिनंदन ने मीडिया से बातचीत में कहा है कि पीड़ित लड़की और समीर एक-दूसरे से बात करते थे। इसके बाद लड़का उसके ऊपर दबाव बनाने लगा। फिलहाल मामले में एफआईआर दर्ज कर ली गई है और आरोपितों की धरपकड़ के लिए टीमों का गठन कर दिया गया है। कुछ लोगों को गिरफ्तार भी किया गया है, जल्द ही पूरे मामले का खुलासा कर दिया जाएगा।
जम्मू-कश्मीर के रियासी इलाके में रविवार (9 जून 2024) को मंदिर में दर्शन करने जा रहे श्रद्धालुओं की बस पर आतंकी हमला हुआ था। इस हमले में 9 लोगों की मौत हो गई थी जिसमें मासूम बच्चे और महिलाएँ भी शामिल हैं। आतंकियों के इस कृत्य की दुनिया भर में आलोचना हो रही है। हमले को लेकर सोशल मीडिया पर ‘All eyes on reasi’ और ‘All eyes on Vaishno Devi attack’ नाम से ट्रेंड भी चलाया गया। पाकिस्तानी क्रिकेटर हसन अली ने भी इसी ट्रेंड की एक पोस्ट को अपनी इंस्टाग्राम स्टोरी के तौर पर शेयर किया था, तब से सोशल मीडिया पर भड़क कर उनको कई कट्टरपंथी गालियाँ दे रहे हैं।
पाकिस्तान के मध्यम तेज गेंदबाज हसन अली की पत्नी भारतीय हैं। उनकी ससुराल मेवात के नूहं इलाके में है। जम्मू के आतंकी हमले में कत्ल हुए श्रद्धालुओं के लिए न्याय की गुहार लगाते हुए उन्होंने अपनी इंस्टाग्राम प्रोफ़ाइल पर एक स्टेटस लगाया था। इसमें ‘All eyes on Vaishno Devi attack’ लिखा हुआ था। कुछ ही देर में यह स्टेटस वायरल हो गया और कई कट्टरपंथी हसन को अपशब्द बोलने लगे। इन कट्टरपंथियों के स्क्रीनशॉट लेकर लोग सोशल मीडिया पर साझा कर रहे हैं
— Amrendra Bahubali ?? (@TheBahubali_IND) June 12, 2024
टाइगर खान ने हसन अली को तू बोलते हुए ‘शिया’ कह डाला। शेख इबादत ने हसन अली को हड़काते हुए पोस्ट को डिलीट करने के लिए कहा। अब्दुल्ला बेग और अर्बा सिद्दीकी ने तो हसन अली को गोली मारने की इच्छा जताई है। नूर ने लिखा है कि अगर हसन अली को भी आएशा उमर के साथ शूट करवा देते तो ये दिन नहीं देखना पड़ता। या कुर्बान का मन है कि हसन अली एक हिंदुस्तानी जैसे ट्वीट कर रहा है इसलिए उसे पाकिस्तान आते ही मार डालना चाहिए। के मुस्तफ़ाई ने हसन अली को थूक फाँकने की नसीहत दे डाली है।
World know how tough life is for minorities in Pakistan even for Muślim minorities.
Stay strong Hassan Ali, ignore these abusive comments by Pakistanis…we Indians are with you. pic.twitter.com/wrE6EzDX68
इन सभी के अलावा जीशान ने हसन अली को माँ की गाली दी है। गाजी हसन ने सलाह दी कि अब हसन अली को सिर्फ टिकटॉक बनाने पर ध्यान देना चाहिए। प्रिक कलीम ने लिखा, “कुत्ता, पेन$द, $डू, सेमीफाइनल – मरवा दी।” सोशल मीडिया के X यूजर @JohnyBravo183 ने इन तमाम कमेंट के स्क्रीनशॉट हसन अली के उस ट्वीट के नीचे डाले है जिसमें वो अपनी सफाई पेश कर रहे हैं। इन तमाम गालियों के बाद हसन अली ने बुधवार (12 जून) को सफाई दी है कि वो किसी भी इंसान की मौत पर दुखी होते हैं। उदाहरण के तौर पर उन्होंने गाजा का भी नाम लिया है।
पाकिस्तान के लाहौर में पैदा हुई ईरम के अब्बू ने कहा था कि ‘बेटी हिंदुस्तान में औरतों पर जुल्म नहीं होता, तू वहाँ खुश रहेगी।’ साल 2008 में बुआ के दिखाए रिश्ते पर बरेली के मोहम्मद अतहर से मेरा निकाह कराया गया। निकाह के बाद अतहर 6 माह लाहौर में ही रहा। लेकिन इसके बाद उसे बरेली ले आया गया। एक साल तो सबकुछ ठीक रहा, लेकिन फिर ईरम के ऊपर जुल्म होने लगा। उससे दहेज माँगा जाने लगा और न लाने पर उसके साथ मारपीट की जाने लगी। अब 11 जून 2024 को मोहम्मद अतहर ने एक बार फिर से दरिंदगी की सारी हदें पार कर दी। उसे रात भर जमकर पीटा और तीन तलाक देकर घर से निकाल दिया है। ईरम की चिंता ये है कि उसके पास अभी तक भारत की नागरिकता नहीं है। उसके 2 बच्चे हैं। शौहर घर से निकाल चुका है। ईरम ने पुलिस की शरण ली है और कहा है कि उसे अब लाहौर भेज दिया जाए, क्योंकि मेरा शौहर जल्लाद है। मैं उसके पास नहीं रह सकती। उसे दोजख़ में भी जगह नहीं मिलेगी।
मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक, पाकिस्तान के लाहौर शहर की ओसामा ब्लॉक के नस्तर कॉलोनी की ईरम का निकाह साल 2008 में बरेली के बिहारीपुरा में रहने वाले मोहम्मद अतहर के साथ पाकिस्तान के लाहौर में हुआ था। बारात लेकर 9 लोग हिंदुस्तान से पाकिस्तान गए थे। फिर 5-6 महीने बाद उसे बरेली ले आया गया और फिर मोहम्मद अतहर और उसके परिवारी जनों की हकीकत सामने आई।
ये पूरा मामला बरेली के बिहारीपुर का है। यहाँ के रहने वाले अतहर ने साल 2008 में पाकिस्तान के लाहौर की रहने वाली महिला से पाकिस्तान में जाकर मुस्लिम रीति रिवाज से निकाह की थी और वह पाँच महीने तक पाकिस्तान में ही रहा था। पीड़िता का आरोप है कि पहले उसका शौहर उसे बहला फुसलाकर बरेली ले आया और बरेली लाकर उससे दो बच्चे पैदा हुए। महिला के एक बेटा (15 साल) और बेटी (7 साल) है। लेकिन इसके बाद अतहर और उसके परिजन महिला से मारपीट करने लगे। उसे तीन तलाक देकर घर से निकाल दिया और महिला को यातनाएँ भी दी।
ईरम का कहना है कि उसे अभी तक हिंदुस्तान की नागरिकता नहीं मिली है। उसका शौहर उसके वीजा में अड़ंगे लगाता है। इस बार उसे वीजा भी नहीं मिला है। उसकी जान को खतरा है। दहेज के मामले में पहले से पुलिस केस चल रहा है। पीड़िता ईरम ने बताया कि शौहर शराब पीकर घर आता है। उसे और बच्चों को चाकू दिखा कर धमकाता है। अब उसने अपनी बुआ के घर शरण ली है। अपनी बुआ और आला हजरत दरगाह के पदाधिकारियों की मदद से वो कोतवाली पुलिस पहुँची और शौहर के खिलाफ लिखित शिकायत दी है।
कोलवाली पुलिस का कहना है कि इस मामले की जाँच की जा रही है। कोतवाल डी के शर्मा ने कहा कि महिला की शिकायत दर्ज कर ली गई है। आरोपित शौहर को थाने बुलाया गया है और अब आगे नियमों के हिसाब से कार्रवाई की जाएगी। वहीं, अब ईरम का कहना है कि उसे अपने बच्चों और खुद की जान का खतरा है और उसके ससुराल वाले उसकी जान भी ले सकते हैं, इसलिए वह अपने वतन पाकिस्तान वापस जाना चाहती है।