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‘गाँव के मुस्लिमों ने हिन्दुओं का हुक्का-पानी किया बंद’: मंदिर के आगे दरवाजा खोलने की जिद, प्रशासन ने किया इनकार… पढ़िए वायरल खबर की जमीनी पड़ताल

उत्तर प्रदेश के कौशाम्बी जिले का थाना पश्चिम शरीरा इस समय सुर्ख़ियों में है। इसकी वजह सोशल मीडिया में गाँव जाफरपुर महावा की चर्चा है। इन चर्चाओं में मुस्लिम पक्ष द्वारा हिन्दू समुदाय का हुक्का-पानी बंद करने जैसी बातें कही जा रही हैं। कुछ मीडिया संस्थानों ने इसी से मिलती-जुलती खबरों को प्रकाशित किया है। हालाँकि, पुलिस इन खबरों का खंडन कर रही है। हिन्दू संगठनों ने स्थानीय प्रशासन के रवैये पर असंतोष जताते हुए थाने पर प्रदर्शन किया है। ऑपइंडिया ने इस खबर के सभी पहलुओं की पड़ताल की।

जड़ में है जमीनी विवाद

इस पूरे मामले की जड़ में जमीनी विवाद है। गाँव में एक मंदिर है, जो छोटेलाल गुप्ता के घर के बगल है। इस मंदिर से सटी एक जमीन पहले किसी हिन्दू की हुआ करती थी। इस जमीन को गाँव के ही एक मुस्लिम ने खरीद लिया। आरोप है कि खरीदार अब मंदिर की तरफ अपना दरवाजा खोलना चाहता है। दूसरी तरफ होने के बावजूद मुस्लिम खरीदार ‘मेरी जमीन-मेरा अधिकार’ कहकर मंदिर के आगे ही दरवाजा खोलने पर अड़ा हुआ है। हिन्दू पक्ष का मानना है कि ऐसा होने से भविष्य में आए दिन साम्प्रदायिक तनाव फैलेगा, क्योंकि मुस्लिम परिवार के तौर-तरीकों से मंदिर अपवित्र हो सकता है।

हिन्दू पक्ष ने लगाए गंभीर आरोप

इस मामले में गाँव के निवासी छोटेलाल गुप्ता, महेश और वीरेंद्र दिवाकर आदि के बयान सामने आए हैं। इन सभी ने एक स्वर में कहा है कि जमीनी विवाद की कागजी लड़ाई से हटकर मुस्लिम पक्ष अब सामाजिक बहिष्कार पर उतारू हो गया है। आरोप है कि गाँव में मुस्लिम वर्ग के लोगों ने मीटिंग की और इसमें सर्वसम्मति से तय किया गया कि हिन्दुओं के घरों से किसी भी प्रकार का कोई भी लेन-देन नहीं होगा। ऑपइंडिया को स्थानीय डिप्टी एसपी के नाम भेजी गई एक चिट्ठी भी मिली है। पत्र के नीचे छोटेलाल, महेश, राजेश कुमार, रूपेंद्र कुमार शर्मा, धीरेन्द्र सिंह और जगदीश कुमार के दस्तखत हैं।

शिकायत की कॉपी

इस चिट्ठी में गाँव के प्रधान नसीर अहमद, अबरार के बेटे गुड्डू, अकरम, नौशाद और वहाब को हिन्दुओं के बहिष्कार का सूत्रधार बताया गया है। बहिष्कार में हिन्दुओं की दुकान से सामान लेना, उनसे बातचीत करना और इनके खेतों में पानी देने से रोकने के आरोप लगाए गए हैं। इस फरमान को न मानने वाले मुस्लिम पर 5 हजार रुपए जुर्माना और बिरादरी से निकालने की चेतावनी दी गई है। शिकायत में गाँव के हिन्दुओं के अंदर दहशत का माहौल होने की बात कही गई है। सिंचाई के लिए पानी न मिलने से प्रभावित हिन्दुओं के नाम वैजनाथ और राजेश लिखे गए हैं। प्रार्थी के तौर पर समस्त हिन्दू समाज लिखा हुआ है।

ग्राम प्रधान ने आरोपों को आंशिक रूप से स्वीकारा

ऑपइंडिया को इस पूरे विवाद पर ग्राम प्रधान नस्सन उर्फ़ नसीर अहमद की एक वीडियो बाइट मिली है। नसीर अहमद ने पहले तो हिन्दू-मुस्लिम एकता जैसी तमाम बातें कहीं। उन्होंने जमीनी विवाद में भी मुस्लिम खरीदार का ही पक्ष लिया और उसके द्वारा कराए जा रहे निर्माण को सही करार दिया। ग्राम प्रधान ने किसी के भी सामाजिक बहिष्कार जैसी बातों से इनकार किया। अंत में उन्होंने यह माना कि हिन्दू-मुस्लिम की बातें करने वाले कुछ लोगों के खिलाफ कड़े कदम उठाए गए है।

पुलिस द्वारा तमाम आरोपों का खंडन

इस पूरे मामले में कौशाम्बी पुलिस ने सोमवार (10 जून 2024) को अपना बयान जारी किया है। पुलिस के मुताबिक, गाँव में किसी के बहिष्कार करने जैसा फतवा देने आदि की बातें निराधार और भ्रामक हैं। साथ ही पुलिस ने यह भी स्पष्ट किया है कि सिंचाई के लिए पानी न देने का मामला सामूहिक नहीं, बल्कि एक व्यक्ति का था। तब फकीरे ने पानी लेने से पहले पुराना बकाया खत्म करने के लिए कहा था। गाँव में आंतरिक शान्ति का दावा करते हुए पुलिस ने कहा है कि कुछ बाहरी लोग वहाँ का माहौल खराब करना चाहते हैं, जिनको कड़ी हिदायत दी गई है।

प्रशासन की कार्यशैली से हिन्दू संगठन नाखुश

वहीं, हिन्दू संगठनों ने प्रशासनिक कार्यशैली पर नाराजगी जताई है। गाँव में हिन्दुओं के साथ अन्याय का आरोप लगाकर हिन्दू संगठन से जुड़े सदस्यों ने 9 जून 2024 (रविवार) को पश्चिम शरीरा पुलिस स्टेशन में धरना दिया। धरने के दौरान पुलिस पर हिन्दू पक्ष को धमकाने, राजस्व अधिकारियों द्वारा एकतरफा फैसले लेने जैसे आरोप लगाए गए। धरने के दौरान मामले की शिकायत सीधे मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ से करने का एलान किया गया है।

गाँव में मुस्लिम और हिन्दू आबादी लगभग बराबर बताई गई। हिन्दू संगठनों ने घोषणा की है कि गाँव के हिन्दुओं को किसी भी अन्याय का शिकार नहीं होने देंगे। फिलहाल गाँव में शांति है। प्रशासन हालत पर लगातार नजर रखे हुए है। इसको लेकर सोशल मीडिया की भी निगरानी की जा रही है।

तेंदुआ, कुत्ता, एलियन या कुछ और: पीएम मोदी के शपथ ग्रहण समारोह के दौरान राष्ट्रपति भवन में टहलता रहस्यमयी जानवर, वीडियो देख लोग हैरान

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने रविवार (9 जून 2024) को तीसरी बार भारत के प्रधानमंत्री के रूप में शपथ ली। पीएम मोदी के नेतृत्व वाले राष्ट्रीय लोकतांत्रिक गठबंधन (NDA) ने हाल ही में संपन्न लोकसभा चुनाव में बहुमत हासिल किया और कॉन्ग्रेस के नेतृत्व वाले INDI गठबंधन को हराया है।

शपथ ग्रहण समारोह की कार्यवाही देख रहे लोगों ने एक दिलचस्प मेहमान को देखा, लेकिन आधिकारिक तौर पर इस कार्यक्रम में आमंत्रित 8,000 मेहमानों में से कोई नहीं था। यह घटना उस समय हुई जब मध्य प्रदेश के सांसद डीडी उइके नाम से विख्यात दुर्गादास उइके केंद्रीय मंत्रियों में से एक के रूप में शपथ ले रहे थे।

इस दौरान लोगों ने पृष्ठभूमि में एक जानवर को देखा। अब इस बात को लेकर कयास लगाए जा रहे हैं कि वह कौन-सा जानवर हो सकता है। इस जानवर को लेकर लोगों में उत्सुकता देखने को मिली। हालाँकि, उस दौरान कोई यह स्पष्ट रूप से नहीं जान सका कि यह कौन सा जानवर है और शपथ ग्रहण समारोह के दौरान क्या कर रहा है।

ज़्यादातर लोग अनुमान लगा रहे हैं कि यह तेंदुआ था, लेकिन राष्ट्रपति भवन में खुलेआम तेंदुआ घूमना थोड़ा दूर की कौड़ी लगता है। वहीं, कुछ लोगों का कहना है कि यह कोई पालतू जानवर है। बता दें कि रविवार को राष्ट्रपति मुर्मू ने 72 सदस्यीय मंत्रिपरिषद को पद और गोपनीयता की शपथ दिलाई, जिसमें 30 कैबिनेट मंत्री, 36 राज्य मंत्री और पांच स्वतंत्र प्रभार वाले राज्य मंत्री शामिल हैं।

रियासी में आतंकी हमले के बाद भड़के डच नेता गीर्ट वाइल्डर्स, बोले – ‘पाकिस्तानी आतंकियों को कश्मीर में घुसने मत दो, अपने हिंदुओं को बचाए भारत’

जम्मू-कश्मीर के रियासी में रविवार (9 जून 2024) को हुए आतंकी हमले पर नीडरलैंड्स के दक्षिणपंथी नेता गीर्ट वाइल्डर्स ने तीखी प्रतिक्रिया दी है। उन्होंने भारत सरकार से अपील की है कि वो कश्मीर घाटी में पाकिस्तानी आतंकियों को घुसने से रोके और देश के हिंदुओं की रक्षा करे। बता दें कि रियासी में एक टूरिस्ट बस पर आतंकियों ने हमला कर दिया था। आतंकियों की फायरिंग की वजह से बस घाटी में गिर गई थी, जिसमें 10 लोगों की मौत हो गई, तो 30 से अधिक लोग घायल हो गए थे।

गीर्ट वाइल्डर्स ने एक ट्वीट कर भारत से अपने लोगों की रक्षा करने की अपील की है। गीर्ट वाइल्डर्स ने ट्वीट कर कहा है, कि “कश्मीर घाटी में पाकिस्तानी आतंकवादियों को हिंदुओं की हत्या करने की इजाजत न दें। अपने लोगों की रक्षा करें भारत!”

भारत और हिंदुओं को लेकर गीर्ट वाइल्डर्स अक्सर अपनी बात रखते हैं। पिछले साल नीदरलैंड्स में चुनाव में उनकी पार्टी को काफी अच्छा जनसमर्थन मिला था। उन्हें पूरी दुनिया से बधाइयाँ मिल रही थी। इस दौरान उन्होंने भारत और हिंदुओं को लेकर खास पोस्ट किया था और हिंदुओं का समर्थन करते रहने की बात कही है।

कौन हैं गीर्ट वाइल्डर्स?

नीदरलैंड के वेनलो में 6 सितंबर 1963 में जन्मे गीर्ट वाइल्डर्स एक दक्षिणपंथी डच नेता हैं। वह अपने इस्लाम विरोधी रुख के लिए जाने जाते हैं। वह वर्ष 2004 के बाद से लगातार पुलिस सुरक्षा में रहते हैं। उनके एक बार मोरक्को के लोगों को कूड़ा बोलने पर काफी विवाद हुआ था। पीवीवी की स्थापना उन्होंने 2006 में की थी। उन्हें अमेरिका के पूर्व राष्ट्रपति डोनल्ड ट्रंप का डच अवतार भी कहा जाता है।

वाइल्डर्स को अवैध प्रवासियों के प्रति उनके कठोर रवैए और डच हितों को सबसे आगे रखने के लिए जाना जाता है। उन्होंने जुलाई 2022 में भाजपा की पूर्व प्रवक्ता नूपुर शर्मा और बांग्लादेशी हिंदुओं का मुद्दा भी डच संसद में उठाया था। उन्होंने अक्टूबर 2022 में भी नूपुर शर्मा के समर्थन में ट्वीट किया था। डच सांसद ने भारत में हिंदुओं पर हमले की घटनाओं का भी जिक्र किया था। उन्होंने नूपुर शर्मा का समर्थन करने पर इस्लामी कट्टरपंथियों द्वारा एक हिंदू दर्जी (कन्हैया लाल) का सिर कलम करने की घटना पर भी प्रकाश डाला था। यही नहीं, उन्होंने अभी अप्रैल 2024 में भी नूपुर शर्मा से फोन पर बातचीत की थी और उसके बारे में सोशल मीडिया पर भी पोस्ट किया था।

मोदी मंत्रिमंडल 3.0: कोई पंच से केंद्रीय कैबिनेट में पहुँचा तो किसी ने पार्षद से शुरू की थी राजनीतिक सफर, एक ने तो पंचर बनाने का भी किया काम

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में लगातार तीसरी बार राष्ट्रीय जनतांत्रिक गठबंधन (NDA) की सरकार बन गई है। पीएम मोदी और उनके मंत्रिमंडल के साथियों ने रविवार (9 जून 2024) को शपथ ग्रहण कर लिया। इस बार के मंत्रिमंडल में कुछ ऐसे लोग भी शामिल हैं, जिन्होंने जमीन से शुरूआत की है। एक मंत्री तो ऐसे हैं, जो राजनीति में आने से पहले पंचर बनाने का काम करते थे।

पीएम मोदी के तीसरे कार्यकाल में जिन पाँच मंत्रियों की हम बात करेंगे, वे हैं- वीरेंद्र कुमार, तोखन साहू, हर्ष मल्होत्रा, अजय टम्टा और बंडी संजय कुमार। ये सभी नेता अलग-अलग राज्यों से ताल्लुक रखते हैं और लोकतंत्र के सबसे निचले पायदान से अपनी राजनीति शुरू की है और आज ये अपनी मेहनत एवं लगन के बल पर केंद्रीय मंत्रिमंडल में शामिल किए गए हैं।

वीरेंद्र कुमार खटीक

वीरेंद्र कुमार खटीक मध्य प्रदेश के बुंदेलखंड के बड़े नेता माने जाते हैं। वे 8वीं बार सांसद चुने जाने के बाद केंद्र में मंत्री बनाए गए हैं। खटीक टीकमगढ़ से सांसद हैं। उन्होंने कॉन्ग्रेस के पंकज अहिरवार को 4 लाख से ज्यादा वोटों से हराया है। पीएम मोदी की पहली कैबिनेट में साल 2017 में उन्हें महिला एवं बाल विकास राज्यमंत्री और दूसरी कैबिनेट में साल 2021 में सामाजिक न्याय एवं अधिकारिता मंत्री बनाया गया था।

वीरेंद्र कुमार का जन्म सागर जिले के एक बेहद गरीब परिवार में 27 फरवरी 1954 को हुआ था। उन्होंने सागर यूनिवर्सिटी से डॉक्टरेट की उपाधि हासिल की। वे पढ़ाई के लिए साइकिल का पंचर बनाने से लेकर गाड़ियों की रिपेयरिंग तक का काम करते थे। वे आज भी अपने पुराने और संघर्ष के दिनों के स्कूटर पर सवार होकर आम जनता से मिलने निकल जाते हैं। वे 1996 से लगातार चुनाव जीत रहे हैं।

खटीक संघ से जुड़े रहे हैं। साल 1975 में लोकनायक जयप्रकाश नारायण द्वारा शुरू किए गए संपूर्ण क्रांति आंदोलन में भाग लिया और आपातकाल में 16 महीने तक सागर और जबलपुर जेल में रहे। वे छात्रों की समस्याओं के समाधान के लिए आंदोलन शुरू किया। साल 1982 में वे राजनीति में आए और तब से भाजपा के विभिन्न प्रकल्पों से जुड़े रहे।

तोखन साहू

तोखन साहू छत्तीसगढ़ के बिलासपुर से सांसद हैं। उन्हें केंद्रीय मंत्रिमंडल में शामिल करते हुए राज्यमंत्री बनाया गया है। तोखन साहू पहली बार लोकसभा का चुनाव जीतकर सांसद बने हैं। उन्होंने कॉन्ग्रेस प्रत्याशी देवेंद्र यादव को लगभग 1.64 लाख वोटों के अंतर से हराया है। वे एक बेहद साधारण किसान परिवार से आते हैं। वे वर्ष 2013 में पहली बार लोरमी विधानसभा सीट से विधायक निर्वाचित हुए थे।

तोखन साहू का जन्म लोरमी के छोटे से गाँव सूरजपुरा में हुआ है। उन्होंने साल 1994 में पंच पद से अपने राजनैतिक जीवन की शुरुआत की थी। तोखन पंच से सरपंच, फिर जिला परिषद सदस्य और उसके बाद वर्ष 2013 में लोरमी विधानसभा सीट से विधायक निर्वाचित हुए। साल 2015 में विधायक रहते हुए उन्हें रमन सिंह के कार्यकाल में संसदीय सचिव का पद भी दिया गया था।

हर्ष मल्होत्रा

हर्ष मल्होत्रा पूर्वी दिल्ली लोकसभा चुनाव जीतकर मोदी मंत्रिमंडल में मंत्री बने हैं। दिल्ली की सभी 7 सीटों पर भाजपा ने जीत हासिल की है, लेकिन सिर्फ हर्ष मल्होत्रा को ही मंत्री पद दिया गया है। हर्ष मल्होत्रा ने आम आदमी पार्टी के विधायक एवं सफाई कर्मी के बेटे कुलदीप कुमार उर्फ मोनू को लगभग 93 हजार वोटों से हराया है।

हर्ष मल्होत्रा ने साल 2012 में दिल्ली के वेलकम कॉलोनी से पार्षद बनकर आगे मंत्री तक का सफर तय किया है। वे साल 2015-16 में ईस्ट दिल्ली म्यूनिसिपल कॉरपोरेशन के मेयर रह चुके हैं। हर्ष मल्होत्रा ने दिल्ली विश्वविद्यालय से पढ़ाई की है और उन्होंने एलएलबी की भी डिग्री हासिल की है।

अजय टम्टा

उत्तराखंड के अल्मोड़ा से भाजपा सांसद अजय टम्टा को इस बार केंद्रीय मंत्रिमंडल में जगह दी गई है। वे साल 2014 में मोदी सरकार के पहले मंत्रिमंडल में भी शामिल हुए थे। वे अल्मोड़ा से तीसरी बार सांसद चुने गए हैं। उन्होंने कॉन्ग्रेस के प्रदीप टम्टा को लगातार तीसरी बार हराया है। टम्टा उत्तराखंड के मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी के करीबी माने जाते हैं और प्रदेश के बड़े दलित चेहरा हैं।

उत्तराखंड के अल्मोड़ा में 16 जुलाई 1972 को जन्मे अजय टम्टा ने 23 साल में अपने राजनीतिक करियर की शुरुआत की थी। साल 1996 में वे जिला पंचायत के सदस्य चुने गए और 1997 में जिला पंचायत अध्यक्ष निर्वाचित हुए। साल 2007 में वे सोमेश्वर से विधायक चुने गए। साल 2014 में पहली बार अल्मोड़ा से सांसद बने। उन्होंने स्नातक तक पढ़ाई की है।

बंडी संजय कुमार

तेलंगाना के रहने वाले बीजेपी के राष्ट्रीय महासचिव बंडी संजय कुमार को इस बार मंत्रिमंडल में शामिल किया गया है। उन्होंने तेलंगाना के करीमनगर लोकसभा सीट से लगातार दूसरी बार जीत दर्ज की है। संजय कुमार ने कॉन्ग्रेस उम्मीदवार वेलिचला राजेंद्र राव को लगभग 2.25 लाख वोटों से हराया है। संजय कुमार कट्टर हिंदुत्ववादी विचारधारा के जाने जाते हैं।

संजय कुमार का जन्म 11 जुलाई 1971 को बी. नरसेया और बी. शकुंतला के यहाँ हुआ था। उन्होंने अपनी स्कूली शिक्षा संघ के सरस्वती शिशु मंदिर में ली है। संजय कुमार 12 साल की उम्र में राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ से जुड़ गए थे। संजय ने आडवाणी की रथ यात्रा में भी महत्वपूर्ण भूमिका निभाई थी।

संजय कुमार 2005 में करीमनगर के 48वें डिवीजन के लिए नगर निगम पार्षद चुने गए थे। साल 2019 में लोकसभा चुनाव जीतने से पहले तक वे इस पद पर रहे। संजय कुमार 2014 और 2018 में हुए तेलंगाना विधानसभा चुनावों में करीमनगर से भाजपा के प्रत्याशी थे, लेकिन दोनों बार उन्हें हार मिली। तेलंगाना में भाजपा को खड़ा करने में उनकी महत्वपूर्ण भूमिका मानी जाती है।

फिल्मों के लिए छोड़ दूँगा मंत्री पद… केरल के BJP सांसद सुरेश गोपी पर मीडिया ने फैलाया झूठ, कॉन्ग्रेस ने हवा दी: जानें क्या है सच्चाई

केरल में पहली बार भारतीय जनता पार्टी का खाता खोलने वाले सांसद सुरेश गोपी को लेकर सुबह से खबरें चलाई जा रही थीं कि वो मंत्री पद की शपथ लेने के बाद अब उस पद से इस्तीफा दे रहे हैं। वायरल दावे में कहा जा रहा था कि उन्होंने पहले से कुछ फिल्में साइन की हुई हैं इसलिए वो इस पद को छोड़ रहे हैं। हालाँकि शाम होते-होते इस मामले पर खुद सुरेश गोपी का बयान आया है।

सुरेश गोपी ने अपने ट्वीट में वायरल होते दावों का खंडन किया है। उन्होंने एक्स पर ट्वीट करके कहा, “कुछ मीडिया प्लेटफॉर्म गलत खबर फैला रहे हैं कि मैं मोदी सरकार के मंत्रिपरिषद से इस्तीफा देने जा रहा हूँ। यह सरासर गलत है। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी जी के नेतृत्व में हम केरल के विकास और समृद्धि के लिए प्रतिबद्ध हैं।”

उल्लेखनीय के सुरेश गोपी के बारे में झूठ फैलाने में कॉन्ग्रेस भी पीछे नहीं थी। कॉन्ग्रेस केरल ने एक वीडियो ट्वीट कर कहा था कि वो भाजपा सांसद सुरेश गोपी ने कल मंत्री होने की शपथ ली अब उसे छोड़ना चाहते हैं क्योंकि उन्हें फिल्म करनी है। ये तो मतदाताओं का मजाक है…।

कॉन्ग्रेस के इसी ट्वीट के नीचे अब लोग उन्हें जवाब दे रहे हैं और सुरेश गोपी का ट्वीट टैग करके कहा जा रहा है कि चुनाव पूरे हो गए पर कॉन्ग्रेस ने प्रोपगेंडा करना बंद नहीं किया है।

बता दें कि सुरेश गोपी ने साल 2024 के चुनावों में त्रिशूर निर्वाचन क्षेत्र से जीत हासिल की है। ये भाजपा की केरल में पहली जीत थी इसलिए मोदी सरकार के तीसरे कार्यकाल में उन्हें उतनी ही महत्ता देते हुए मंत्री पद दिया गया है। उन्होंने इन चुनावों में वकील और सीपीएम उम्मीदवार वीएस सुनील कुमार को 74 हजार 686 वोटों से हराया है।

प्रधानमंत्री पद की शपथ के बाद PM मोदी का पहला बड़ा फैसला, देश के 9.3 करोड़ किसानों को लाभ: सेंसेक्स में बहार, छुआ 77,000 अंक का आँकड़ा

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में तीसरी बार एनडीए की सरकार बनने के बाद से बाजार में भी रौनक छाई हुई है। इस बीच, सोमवार (10 जून 2024) को भारत के शेयर बाजारों में काफी बढ़त देखी गई। सुबह के कारोबार में सेंसेक्स से 77 हजार अंक तक का रिकॉर्ड स्तर हासिल कर लिया था। हालाँकि बाद में बाजार थोड़ा गिरा, क्योंकि लोग मुनाफा वसूली में लग गए। वहीं, पीएम मोदी ने प्रधानमंत्री पद संभालने के बाद पहली फाइल पर हस्ताक्षर किए। उन्होंने पीएम किसान सम्मान निधि से जुड़ी फाइल पर हस्ताक्षर किए और किसानों को 17वीं किस्त जारी करने का आदेश दिया।

पीएम मोदी की सत्ता में तीसरी बार वापसी के बाद बीएसई का 30 शेयर वाला सेंसेक्स शुरुआती कारोबार में 385.68 अंक चढ़कर 77,079.04 अंक के नए रिकॉर्ड स्तर तक पहुँचा, तो एनएसई निफ्टी भी 121.75 अंक की बढ़त के साथ 23,411.90 अंक के अपने सर्वकालिक उच्चतम स्तर पर पहुँचने में कामयाब रहा। इस दौरान सेंसेक्स में सूचीबद्ध 30 कंपनियों में से पावर ग्रिड, एक्सिस बैंक, स्टेट बैंक ऑफ इंडिया, बजाज फिनसर्व, रिलायंस इंडस्ट्रीज और एनटीपीसी के शेयरों को सबसे ज्यादा लाभ हुआ।

इस बीच, प्रधानमंत्री पद की शपथ लेने के बाद पीएम मोदी ने पहला बड़ा फैसला लिया और किसान सम्मान निधि की राशि जारी करने को मंजूरी दे दी। पीएम मोदी ने पीएम किसान निधि की 17वीं किस्त जारी करने के लिए फाइल पर हस्ताक्षर किए। इस फैसले से 9.3 करोड़ किसानों को फायदा होगा और लगभग 20,000 करोड़ रुपये वितरित किए जाएँगे। फाइल पर हस्ताक्षर के बाद प्रधानमंत्री मोदी ने कहा है कि उनकी सरकार किसानों के लिए प्रतिबद्ध है। उन्होंने कहा, “हमारी सरकार किसान कल्याण के लिए पूरी तरह प्रतिबद्ध है। इसलिए यह सही है कि कार्यभार संभालने पर हस्ताक्षरित पहली फाइल किसान कल्याण से संबंधित है। हम आने वाले समय में किसानों और कृषि क्षेत्र के लिए और भी अधिक काम करना चाहते हैं।”

बता दें कि प्रधानमंत्री किसान सम्मान निधि योजना को 1 दिसंबर 2018 को शुरू किया गया था। इस योजना के अंतर्गत सरकार द्वारा लाभार्थी किसानों को सलाना 6000 रूपये की धनराशि दी जाती है। यह 2000 रूपये की तीन किस्तें दी जाती है, जो सीधे किसानों के बैंक अकाउंट में भेज दिया जाता है। किसानों को अब तक 16 किस्त भेजी जा चुकी हैं।

गौरतलब है कि पीएम मोदी ने रविवार (09 जून 2024) को राष्ट्रपति भवन के प्रांगण में आयोजित समारोह में प्रधानमंत्री पद की शपथ ली थी। उनके साथ मंत्रिपरिषद के 71 सदस्यों ने भी शपथ ली थी। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के शपथ ग्रहण समारोह में करीब 8 हजार मेहमान पहुँचे थे, जिसमें कई देशों के राष्ट्राध्यक्ष भी मौजूद रहे थे।

लड़की को गुस्सा था…इसलिए मारा : कंगना रनौत थप्पड़ केस में कुलविंदर के बचाव में बोले पंजाब CM भगवंत मान, समर्थन देना दूर, सांसद पर ही उठाए सवाल

हिमाचल प्रदेश के मंडी से नवनिर्वाचित सांसद कंगना रनौत को सरेआम थप्पड़ मारने वाली सीआईएसएफ महिला जवान को पंजाब के मुख्यमंत्री भगवंत मान खुलेआम समर्थन देते गए।

उन्होंने मीडिया से बातचीत में कुलविंदर कौर का पक्ष लेते हुए कंगना को ही दोषी दिखाया। सीएम मान ने कहा कंगना रनौत के पहले दिए गए बयानों की वजह से लड़की के मन में गुस्सा था जिसकी वजह से उसने ऐसा कदम उठाया।

आगे मीडिया में अपना बयान बैलेंस करने के लिए सीएम मान ने कहा कि जो हुआ वैसा होना नहीं चाहिए थे लेकिन कंगना रनौत को पब्लिक फिगर होने के नाते ऐसी बात नहीं कहनी चाहिए थे वो फिल्म स्टार हैं और निर्वाचित सांसद है। ऐसी बातें कहना कि सारा पंजाब ही आतंकवादी है, बहुत गलत है।

बता दें कि 6 जून को कंगना रनौत को चंडीगढ़ एयरपोर्ट पर एक सीआईएसएफ सुरक्षाकर्मी ने पीछे से आकर झापड़ मारा था। महिला का नाम कुलविंदर कौर है जो कि पंजाब के सुल्तानपुर लोधी की रहने वाली है। इस घटना के बाद कंगना ने पंजाब में बढ़ रहे कट्टरपंथ पर सवाल उठाए थे। वहीं दूसरी ओर कई सिख संगठनों ने कुलविंदर का समर्थन किया था और उसके घर पर जाकर उसे सम्मानित भी करके आए।

ऐसे में सवाल उठे थे कि अगर इस तरह लोग अपनी नाराजगी हिंसक होकर जताने लगे तो देश में अराजकता आ जाएगी, लेकिन कई लोगों को कुलविंदर का झापड़ मारना अच्छा लगा और उन्होंने कंगना से नफरत जाहिर करने के लिए कुलविंदर को खूब सपोर्ट किया। इस घटना के बाद कुलविंद कौर को उसकी ड्यूटी से सस्पेंड कर दिया गया है।

पहले 70 घरों में आग… अब मुख्यमंत्री के काफिले पर गोलियाँ: मणिपुर में 2 जवान घायल, टीमें जाँच में जुटीं; विजुअल्स सामने आए

मणिपुर के जिरीबाम में हुई हिंसा के बाद अब मुख्यमंत्री एन बीरेन सिंह के काफिले पर जानलेवा हमले की खबर है। सीएम के जेड श्रेणी के सुरक्षाकर्मियों पर ये हमला हुआ है। इस अटैक में दो सुरक्षाकर्मी घायल हो गए हैं। उन्हें अस्पताल में भर्ती कराकर इलाज कराया जा रहा है।

घटना सोमवार (10 जून 2024) सुबह राष्ट्रीय राजमार्ग-37 पर कांगपोकपी जिले के कोटलेन के पास टी लाइजांग गाँव में घटी। कहा जा रहा है कि सीएम कल चूँकि जिरीबाम दौरे के लिए जाने वाले थे इसलिए उससे पहले सुरक्षाकर्मी वहाँ मुआयना करने गए थे। इसी दौरान उनके काफिले पर उग्रवादियों द्वारा अटैक किया गया। काफिले पर अचानक गोलियाँ चलीं और सुरक्षाकर्मी घायल हो गए। हमले के बाद मणिपुर पुलिस कमांडो और असम राइफल्स ने एक संयुक्त टीम बनाई है और अपराधियों का पता लगाने के लिए तलाशी अभियान चलाया जा रहा है।

समाचार एजेंसी एएनआई ने कुछ विजुअल्स साझा किए हैं। इसमें घायल सुरक्षाकर्मी को अस्पताल में ले जाया जा रहा है। उनकी पीठ में पट्टी बँधी देखी जा सकती है। एक अधिकारी ने पीटीआई को बताया, “सीएम बीरेन सिंह अभी दिल्ली से इंफाल नहीं पहुँचे हैं, जिले में स्थिति का जायजा लेने के लिए जिरीबाम जाने की योजना बना रहे थे।”

बता दें कि अभी हाल में मणिपुर के जिरीबाम इलाके में हिंसा हुई थी। वहाँ उग्रवादियों द्वारा 6 जून को दो पुलिस चौकियों और कम से कम 70 मकानों को आग लगा दी गई थी। बाद में स्थिति ‘तनावपूर्ण’ हो गए थे। इसी क्रम में मुख्यमंत्री को हालातों का जायजा लेने जाना था इसीलिए काफिला मुआएना के लिए निकला था। हालाँकि बीच रास्ते में ही काफिले पर अटैक कर दिया गया और 2 जवान घायल हो गए। ये जवाब सीआईडी राज्य पुलिस और सीआईएसएफ के हैं। इनमें एक घायल को इंफाल भेजा गया है। और दूसरी ओर हमला करने वालों के बारे में पता लगाने का प्रयास हो रहा है।

राहुल गाँधी की माँग बकवास, विशेषज्ञों ने बताया कारण: ‘भागेगा शेयर बाजार’ को लेकर PM मोदी और अमित शाह के बयान का मामला

कॉन्ग्रेस के पूर्व अध्यक्ष राहुल गाँधी ने आरोप लगाया है कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और केंद्रीय मंत्री अमित शाह 4 जून को हुए शेयर बाजार में भारी गिरावट में सीधे तौर पर शामिल थे। उन्होंने कहा कि इससे निवेशकों की 30 लाख करोड़ रुपए डूब गए। इसलिए इस मामले की जाँच के लिए एक संयुक्त संसदीय समिति (JPC) बनाई जाए। वहीं, सुप्रीम कोर्ट में एक आवेदन दायर करके केंद्र सरकार और भारतीय प्रतिभूति और विनिमय बोर्ड (SEBI) को शेयर बाजार में गिरावट और निवेशकों को हुए नुकसान पर एक विस्तृत स्थिति रिपोर्ट प्रस्तुत करने का निर्देश देने की माँग की गई है।

शेयर बाजार में गिरावट को लेकर सुप्रीम कोर्ट में याचिका

सुप्रीम कोर्ट में दायर यह आवेदन अडानी-हिंडनबर्ग मामले में दायर किया गया है, जो सर्वोच्च न्यायालय में लंबित है। इस वर्ष 3 जनवरी को सर्वोच्च न्यायालय ने सेबी और केंद्र सरकार से यह जाँच करने को कहा था कि क्या अमेरिका स्थित शॉर्टसेलर हिंडनबर्ग रिसर्च के आचरण में कोई कानून का उल्लंघन हुआ है, जिसके कारण भारतीय शेयर बाजार में अस्थिरता आई और भारतीय निवेशकों को नुकसान हुआ।

न्यायालय ने यह निर्णय लिया था कि अडानी समूह की कंपनियों के खिलाफ हिंडनबर्ग रिसर्च द्वारा लगाए गए स्टॉक हेरफेर के आरोपों पर कोई कार्रवाई करने की कोई आवश्यकता नहीं है। न्यायालय ने सेबी और सरकार को उसके द्वारा पहले नियुक्त एक विशेषज्ञ समिति की सिफारिशों पर विचार करने का निर्देश दिया था, जिसने निवेशकों के हितों की रक्षा के लिए नियामक ढाँचे को मजबूत करने का सुझाए था।

अधिवक्ता विशाल तिवारी द्वारा दायर इस याचिका में तर्क दिया गया है कि यह स्पष्ट नहीं है कि सेबी ने न्यायालय के आदेश के अनुपालन में लंबित जाँच पूरी की है या नहीं और न्यायालय को कोई रिकॉर्ड प्रस्तुत किया है या नहीं। याचिका में यह भी कहा गया है कि यह स्पष्ट नहीं है कि सरकार ने विशेषज्ञ समिति द्वारा की गई सिफारिशों पर विचार किया है या नहीं।

तिवारी ने अपनी याचिका में कहा है, “नुकसान उठाने वाले लोगों को यह जानने का अधिकार है कि क्या किसी कॉर्पोरेट समूह द्वारा कुछ अनियमितताओं और उल्लंघनों के कारण हिंडनबर्ग रिपोर्ट के बाद भारतीय शेयर बाजार में जनता के पैसे को बड़ा नुकसान हुआ। इस संबंध में सेबी द्वारा की गई जाँच के परिणाम को रिकॉर्ड में रखा जाना चाहिए, ताकि चीजें छिपी और दबी हुई न रहें।”

तिवारी ने याचिका में 2024 के लोकसभा चुनाव के नतीजों के बाद शेयर बाजार में आई गिरावट को लेकर कहा है कि एग्जिट पोल की घोषणा के बाद शेयर बाजार में तेजी आई, लेकिन जब वास्तविक नतीजे घोषित हुए तो शेयर बाजार में गिरावट आई। इसलिए सवाल उठता है कि क्या नियामक प्राधिकरण और तंत्र विफल हो गया है। क्या एग्जिट पोल आने के बाद फिर से कुछ हेरफेर किए गए थे?

इसको लेकर याचिका में शीर्ष अदालत के 3 जनवरी के निर्देशों के अनुसार अडानी-हिंडनबर्ग मामले में जाँच रिपोर्ट प्रस्तुत करने के लिए सेबी को निर्देश देने की माँग की गई है। इसमें केंद्र सरकार और सेबी दोनों को 2024 के लोकसभा चुनाव परिणामों के बाद शेयर बाजार में गिरावट और निवेशकों के नुकसान पर एक विस्तृत रिपोर्ट प्रस्तुत करने के निर्देश देने की भी माँग की गई है।

राहुल गाँधी के आरोप

इस मामले में राहुल गाँधी ने 6 जून 2024 को कॉन्ग्रेस मुख्यालय में एक संवाददाता सम्मेलन को संबोधित करते हुए 4 जून की गिरावट को सबसे बड़ा शेयर बाजार गिरावट घोटाला कहा बताया था। उन्होंने कहा था कि फर्जी एग्जिट पोल के बाद शेयर बाजार को ऊपर धकेल दिया गया। उन्होंने आरोप लगाया था कि 3 जून को बाजार में रिकॉर्ड लेनदेन देखा था और फिर एक दिन बाद वोटों की गिनती के समय बाजार में गिरावट आ गई।

उन्होंने कहा था कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी, गृह मंत्री अमित शाह और वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने चुनाव के दौरान पहली बार शेयर बाजार पर टिप्पणी की थी। उन्होंने सवाल किया था, “हम कुछ सवाल पूछना चाहते हैं: प्रधानमंत्री और गृह मंत्री ने शेयर बाज़ार में निवेश करने वाले 5 करोड़ परिवारों को विशेष निवेश सलाह क्यों दी? क्या लोगों को निवेश सलाह देना उनका काम है?”

उन्होंने कहा था, “दोनों साक्षात्कार एक ही मीडिया हाउस को क्यों दिए गए, जिसका स्वामित्व एक ही व्यापारिक समूह के पास है, जो शेयर बाजारों में हेराफेरी करने के लिए सेबी की जाँच के दायरे में भी है? भाजपा, फर्जी एग्जिट पोल करने वालों और संदिग्ध विदेशी निवेशकों के बीच क्या संबंध है, जिन्होंने एग्जिट पोल घोषित होने से एक दिन पहले निवेश किया और 5 करोड़ परिवारों की कीमत पर भारी मुनाफा कमाया?”

इस मामले की जाँच की जाँच के लिए जेपीसी की माँग करते हुए राहुल गाँधी ने इस घटनाक्रम को समझने की बात कही थी। उन्होंने कहा था, “13 मई को शाह ने लोगों को ‘4 जून से पहले शेयर खरीदने’ की सलाह दी थी और प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने 19 मई को कहा था कि शेयर बाजार 4 जून को सारे रिकॉर्ड तोड़ देगा।”

उन्होंने आरोप लगाया था कि भाजपा का शीर्ष नेतृत्व जानता है कि एग्जिट पोल ‘फर्जी’ हैं, क्योंकि पार्टी के आंतरिक सर्वेक्षण ने भाजपा को 220 सीटें दी गई थीं। इतना ही नहीं, खुफिया एजेंसियों के आकलन में कहा गया था कि सत्तारूढ़ पार्टी 200 से 220 सीटें जीतेगी। उन्होंने कहा, “यह एक घोटाला है। किसी ने भारतीय खुदरा निवेशकों की कीमत पर हजारों करोड़ रुपए कमाए हैं। प्रधानमंत्री और गृह मंत्री ने खरीदने का संकेत दिया था और यह एक आपराधिक कृत्य है।”

पीएम और गृहमंत्री के बयान से शेयर बाजार का लेना-देना नहीं: एक्सपर्ट

प्रधानमंत्री मोदी और गृहमंत्री अमित शाह द्वारा शेयर बाजार को लेकर दिए बयान को लेकर शेयर बाजार के विशेषज्ञों का कहना है कि ये बयान सेबी के नियमों का उल्लंघन नहीं करते हैं। विशेषज्ञों का कहना है कि प्रधानमंत्री और अमित शाह द्वारा दिया गया विशुद्ध राजनीतिक बयान है और इसमें व्यवसायिक विचार शामिल नहीं हैं और ना ही किसी शेयर को खरीदने या बेचने के लिए कहा गया है।

रेगस्ट्रीट लॉ एडवाइजर्स के सुमित अग्रवाल और सेबी के पूर्व अधिकारी ने ईटीमार्केट्स को बताया, “पीएम मोदी और अमित शाह द्वारा दिए गए बयान राजनीतिक प्रकृति के हैं। जब तक यह साबित नहीं हो जाता कि ये बयान ‘व्यावसायिक विचारों’ या विशिष्ट ‘स्टॉक’ के संदर्भ में दिए गए थे, तब तक उन्हें सेबी (निवेश सलाहकार) विनियम, 2013 का उल्लंघन नहीं माना जा सकता है।”

सेबी के निवेश सलाहकार विनियम 2013 के विनियमन 2(1)(l) के अनुसार, “निवेश सलाह का अर्थ है प्रतिभूतियों या निवेश उत्पादों में निवेश, खरीद, बिक्री या अन्यथा व्यवहार से संबंधित सलाह तथा प्रतिभूतियों या निवेश उत्पादों वाले निवेश पोर्टफोलियो पर सलाह और इसमें वित्तीय नियोजन शामिल होगा।”

नवभारत टाइम्स के हवाले से इकोनॉमी टाइम्स ने अपनी रिपोर्ट में लिखा है कि इस कानून में यह भी कहा गया है कि समाचार पत्र, पत्रिकाओं, किसी इलेक्ट्रॉनिक या प्रसारण या दूरसंचार माध्यम के माध्यम से दी गई ऐसी कोई भी सलाह, जो जनता के लिए व्यापक रूप से उपलब्ध हो, इन विनियमों के उद्देश्य के लिए निवेश सलाह नहीं मानी जाएगी।

निवेश सलाहकार विनियमन की धारा 4 (ए) में स्पष्ट रूप से कहा गया है कि कोई भी व्यक्ति, जो वित्तीय या प्रतिभूति बाजार या आर्थिक स्थिति में रुझानों के संबंध में सामान्य टिप्पणियाँ देता है, जहाँ ऐसी टिप्पणियाँ किसी विशेष प्रतिभूति या निवेश उत्पाद को निर्दिष्ट नहीं करती हैं, उसे सलाहकार के रूप में पंजीकरण लेने की आवश्यकता नहीं होगी।

AAP को सुप्रीम कोर्ट से ‘आखिरी मौका’, 10 अगस्त तक जमीन खाली नहीं करने पर कड़ा एक्शन : DelHI HC की जमीन पर बना है पार्टी ऑफिस

सुप्रीम कोर्ट ने आम आदमी पार्टी को आखिरी मौका देते हुए चेतावनी दी है कि वो 10 अगस्त तक अपने दफ्तर पर कब्जे वाली जमीन को खाली कर दे, क्योंकि इससे दिल्ली हाई कोर्ट के विस्तार को लेकर दिक्कत हो रही है। सुप्रीम कोर्ट ने साफ किया कि ये आम आदमी पार्टी के लिए आखिरी मौका है, फिर से कोई तारीख नहीं बढ़ाई जाएगी। जल्द से जल्द आम आदमी पार्टी अपने कब्जे वाली जमीन को खाली कर दे, क्योंकि ये दिल्ली हाई कोर्ट के लिए 2020 में ही आबंटित की जा चुकी है।

Live Law की रिपोर्ट के मुताबिक, जस्टिस विक्रम नाथ और संदीप मेहता की अवकाशकालीन बेंच ने आम आदमी पार्टी की तरफ से पेश हुए वरिष्ठ वकील अभिषेक मनु सिंघवी की दलीलों को स्वीकार कर लिया और समय सीमा 10 अगस्त तक बढ़ाने का आदेश दिया। बेंच ने याचिका स्वीकार करते हुए कहा, ‘तथ्यों और परिस्थितियों पर विचार करते हुए अंतिम मौके के रूप में हम 4 मार्च के आदेश में दिए गए समय को विस्तार दे रहे हैं।’ कोर्ट ने कहा कि याचिकाकर्ता (आप) को एक सप्ताह के भीतर कोर्ट की रजिस्ट्री को लिखकर देना है कि वे 10 अगस्त तक शांतिपूर्वक जमीन हैंडओवर कर देंगे।

सुप्रीम कोर्ट ने ‘आम आदमी पार्टी’ को यह राहत उसकी उस याचिका पर सुनवाई के बाद दी, जिसमें पार्टी ने 15 जून तक मिले समय को बढ़ाने की गुजारिश की थी। 4 मार्च 2024 को कोर्ट ने 15 जून तक दफ्तर खाली करने का आदेश दिया था। कोर्ट ने ‘आम आदमी पार्टी’ से कहा कि यह अंतिम बार मौका दिया जा रहा है और यह शपथ पत्र दिया जाए कि संपत्ति को 10 अगस्त तक हैंडओवर कर दिया जाएगा। वरिष्ठ वकील अभिषेक मनु सिंघवी ने कहा कि 10 अगस्त तक मोहलत माँगी जा रही है क्योंकि दिल्ली हाई कोर्ट ने हाल ही में केंद्र सरकार को आम आदमी पार्टी की अपील पर वैकल्पिक दफ्तर के लिए छह सप्ताह में जमीन देने को कहा है।

ये जगह दिल्ली हाई कोर्ट को साल 2020 में ही दे दी गई थी। दिल्ली हाई कोर्ट की तरफ से पेश हुए वकील के परमेश्वर ने कहा कि 4 साल बाद भी हाई कोर्ट को कब्जा नहीं मिला है। परमेश्वर ने कहा, ‘आवदेक और केंद्र के बीच खींचतान चलती रहेगी। क्योंकि उन्होंने राजधानी के केंद्रीय इलाके में जमीन माँगी है। हम नहीं चाहते कि इस वजह से देर हो। हम कोर्ट रूम्स की कमी के कारण गंभीर संकट में हैं। हम न्यायिक अधिकारियों के लिए जगह किराए पर लेने के लिए मजबूर हैं।’

हाई कोर्ट ने कहा कि भवन निर्माण में हर साल 30-40 प्रतिशत की बढ़ोतरी हो रही है, जिसकी वजह से हमारा प्रोजेक्ट पीछे हो रहा है। कोर्ट की तरफ से पेश हुए वकील परमेश्वर ने कहा कि दिल्ली हाई कोर्ट के पास 90 कोर्ट रूम की कमी है। नए अधिकारी सितंबर में ट्रेनिंग पूरी करके हाई कोर्ट में काम संभालने वाले हैं, लेकिन हमारे पास बिल्डिंग ही नहीं है। ऐसे ही हाल रहा, तो हमें किराए की बिल्डिंग में शिफ्ट होना पड़ेगा। वकील ने कहा कि हम आम आदमी पार्टी और केंद्र सरकार के बीच झगड़े में नहीं पड़ना चाहे। हमें सिर्फ अपनी जमीन से मतलब है।