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महाराष्ट्र ATS ने मुंबई से 4 बांग्लादेशी नागरिकों को दबोचा: फर्जी कागजात से बनवाया वोटर कार्ड और लोकसभा चुनावों में डाला था वोट, 5 अन्य की तलाश

मुंबई पुलिस के आतंकवाद निरोधी दस्ते (Mumbai ATS) ने राजधानी में अवैध रूप से रह रहे चार और बांग्लादेशियों को गिरफ्तार किया है। इन लोगों ने फर्जी कागजात के आधार पर वोटर कार्ड भी बनवा रखे हैं। सबसे बड़ी बात ये है कि इन लोगों ने इस बार के लोकसभा चुनावों में वोट भी डाला था। इसके अलावा, एटीएस ने 5 बांग्लादेशियों की पहचान की है, जिनकी तलाश की जा रही है।

गिरफ्तार किए सभी चारों आरोपितों को ATS मुंबई के मझगाँव कोर्ट पहुँची है। इस मामले में फारुख शेख को 14 जून तक पुलिस कस्टडी में भेज दिया गया है। बाकी आरोपितों को जेल कस्टडी में भेज दिया गया है। जाँच में सामने आया है कि ये सभी बांग्लादेशी नागरिक गुजरात में रहकर फर्जी पासपोर्ट बनाया करते थे, जिसका इस्तेमाल करके कुछ लोग विदेश में जाकर नौकरी भी कर रहे हैं।

जिन चार आरोपितों को गिरफ्तार किया गया है, वे हैं- रियाज हुसैन शेख, सुल्तान सिद्दीकी शेख, इब्राहिम शफीउल्लाह शेख और फारूक उस्मान गनी शेख। रियाज हुसैन शेख 33 साल का है और यह इलेक्ट्रिशियन का काम करता है। यह यमुनानगर, मिल्लतनगर, लोखंडवाला, अंधेरी (पश्चिम) में रहता था। यह हृदयनगर, जिला नोवाखाली, बांग्लादेश का रहने वाला है।

दूसरा आरोपित सुल्तान सिद्दीकी शेख 54 साल का है। यह अंबुजवाडी, आझाद नगर, मालवणी, मालाड, मुंबई में रहता था और यहाँ वह रिक्शा चलाने का काम करता था। सुल्तान सिद्दीकी सिनोदी, पो. चंदेहाट, तहसिल बाटोया, जिला सदर नोवाखाली, बांग्लादेश का रहने वाला है।

तीसरे आरोपित इब्राहिम शफीउल्लाह शेख 46 साल का है। यह म्हाडा कॉलनी और माहुल गाँव में रहता था और सब्जी बेचने का काम करता था। जाँच में ATS को पता चला कि इसका असली पता साहेबर हाट, कादीरपुर, थाना बेगमगंज, जिला नोवाखाली, बांग्लादेश का रहने वाला है।

चौथे आरोपित का नाम फारूक उस्मान गनी शेख है और यह 39 साल का है। फारूक ओशिवरा, जोगेश्वरी (पश्चिम) में रहता था। जाँच में एजेंसी को पता चला कि यह कबीर हाट, मोनीनगर, जिला नोवाखाली, बांग्लादेशी का रहने वाला है। इस मामले में 5 अन्य बांग्लादेशियों की पहचान हुई है, जो फरार हैं। इनकी तलाश चल रही है।

ये गुजरात के सूरत से फर्जी भारतीय दस्तावेज बनाकर नागरिक के तौर पर मुंबई में अवैध रूप से रह रहे थे। बाकी के फरार 5 में से एक बांग्लादेशी नागरिक भारत का फर्जी कागजात बनाकर सऊदी अरब में नौकरी के लिए गया था। इसका भी खुलासा एजेंसी ने किया है। ये सभी वर्षों पहले भारत में अवैध रूप से घुसे थे।

भारत-पाकिस्तान मैच में पहले टूटती थी TV, इस बार मार दी गोली: यूट्यूबर ने मैच के बारे में पूछा, गार्ड ने जान से ही मार दिया

भारत-पाकिस्तान के बीच क्रिकेट मैच के बाद पाकिस्तान से अक्सर खबरें आती थी टीवी टूटने की, या सोशल मीडिया पर रोते हुए फैन्स की, या फिर कप्तान कोच के बदलने का, लेकिन इस बार तो हद ही हो गई है। पाकिस्तान की आर्थिक राजधानी कहे जाने वाले कराची में एक सिक्योरिटी गार्ड ने यूट्यूबर को ही मार दिया। यूट्यूबर लोगों से क्रिकेट विश्वकप में भारत-पाकिस्तान के बीच मुकाबले को लेकर सवाल पूछ रहा था, लेकिन गुस्साए गार्ड ने उसे गोली मार दी।

स्थानीय मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक, यूट्यूबर का नाम साद अहमद था। उसकी उम्र 24 साल थी और 2 बच्चों का पिता था। साद यूट्यूबर चैनल के लिए वीडियो व्लॉग बनाता था। वो कराची के मोबाइल मार्केट में लोगों की वीडियो बाइट ले रहा था। इसी दौरान उसने सिक्योरिटी गार्ड से भी कुछ पूछने की कोशिश की, लेकिन गुस्साए सिक्योरिटी गार्ड ने उसे एकदम पास से गोली मार दी। वो तुरंत वहीं गिर गया। कुछ सेकंड तक लोगों ने उसे उठाने और समझाने की कोशिश की, और अस्पताल के लिए लेकर भागे, लेकिन रास्ते में ही उसने दम तोड़ दिया।

पुलिस ने आरोपित सिक्योरिटी गार्ड को उसी दिन 5 जून को गिरफ्तार कर लिया। सिक्योरिटी गार्ड ने कहा कि उसे पता ही नहीं कि इस बंदूक से गोली कैसे चली। उसे बंदूक चलाना नहीं आता। उसने बताया कि वो 5 बच्चों का पिता है, अब उसका क्या होगा, ये उसे नहीं मालूम। कराची की ये खबर सामने आने के बाद हर कोई हैरान है।

बता दें कि ये समाचार भारत के लोगों तक तब पहुँचा है, जब भारत-पाकिस्तान के बीच आईसीसी टी-20 क्रिकेट विश्वकप का मुकाबला हो चुका है। ये मुकाबला काफी करीबी रहा था। भारत ने पाकिस्तान को 6 रनों से हरा दिया था। भारतीय टीम महज 119 रन ही बना पाई थी, लेकिन पाकिस्तानी टीम महज 113 रन ही बना पाई, जिसके बाद से पाकिस्तानी क्रिकेट फैन पाकिस्तान की टीम पर गुस्सा उतार रहे हैं।

झूठा, धोखेबाज, चोर… : CM केजरीवाल के खिलाफ सड़कों पर उतरीं महिलाएँ, बोलीं- वोट के बदले किया ₹1000 देने का वादा, अब तक नहीं दिए

दिल्ली में मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल के खिलाफ महिलाएँ सड़कों पर उतरीं हुई हैं। उनका कहना है कि सीएम केजरीवाल ने उन लोगों से हर महीने 1000 रुपए देने को कहा था, लेकिन वो पैसे अब तक उनके खातों में नहीं आए हैं। विरोध प्रदर्शन के दौरान महिलाएँ केजरीवाल से 1000-1000 रुपए माँगते दिखीं और सीएम पर दिल्ली की जनता को बेवकूफ बनाने का इल्जाम भी लगाया। महिलाओं का आरोप है चुनाव से पहले उन्होंने वोट पाने के लिए ये वादा किया था।

जानकारी के अनुसार, इस प्रदर्शन को ‘दिल्ली महिला मंच’ द्वारा किया जा रहा है। इसकी वीडियो भी सामने आई है। वीडियो में प्रदर्शनकारी महिलाओं में से एक बुर्काधारी महिला कहती है- “हम लोग महिला मंच से आए हैं और मैं मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल से यह सवाल करना चाहती हूँ कि जो फॉर्म अरविंद केजरीवाल ने हमसे भरवाए थे, उसे पूरा क्यों नहीं किया जा रहा है? आखिर क्यों केजरीवाल अपने वादों से मुकर रहे हैं? दूसरों को यह लोग शराब की बोतलें बाँट रहे हैं, लेकिन हमें एक हजार रुपए तक नहीं दे पा रहे हैं।”

महिलाएँ कहती सुनाई पड़ रही हैं- केजरीवाल ने हमसे वादा किया तो हमने ईमानदारी से उन्हें वोट दिया। उन्होंने फॉर्म भरवाने के बाद भी पैसे नहीं भेजे। ये झूठे हैं, धोखेबाज हैं और चोर हैं।

एक अन्य महिला भी बताती है कि उन लोगों ने फॉर्म भरे थे ताकि उन्हें बाद में 1000 रुपए मिलें। महिला बोली- केजरीवाल ने हमसे वादा किया था कि 18 साल की आयु को पार कर चुकी प्रत्येक बहन-बेटियों को 1 हजार रुपए दिए जाएँगे। ये हमेशा झूठ बोलते हैं। कि दिल्ली में 200 यूनिट बिजली मुफ्त है, कहीं बिजली मुफ्त नहीं है और कहते हैं कि बस में यात्रा फ्री है, लेकिन बस वाले महिलाओं को देखकर बस रोकते ही नहीं हैं। यह सरकार हम लोगों को पागल बना रही है। इस सरकार का हमसे कोई लेना-देना नहीं है। यह सरकार सिर्फ झूठे वादे करती है। किसी से भी पूछ लो। मुख्यमंत्री ने सबसे झूठे वादे किए हैं।

बांग्लादेशी सांसद की लाश वाली फोटो उसी की पार्टी के नेता के मोबाइल पर: कोर्ट में हत्यारे का कबूलनामा, सेप्टिक टैंक से मिले शव के कुछ टुकड़े

बांग्लादेश के सांसद अनवारुल अजीम अनार के हत्यारे ने कबूल किया है कि उसने अनवरुल के शव की फोटो खींची थी और बांग्लादेश में उन्हीं की पार्टी के नेता के पास फोटो भेजा था। कोर्ट में उसने बताया कि हत्या के बाद शव की तस्वीर उनके संसदीय क्षेत्र झेनाइदह में अवामी लीग के नेता काजी कमाल अहमद उर्फ बाबू के फोन पर भेजी थी।

रिपोर्ट्स के मुताबिक, इस मामले में मुख्य आरोपितों में से एक शिमुल भुइयाँ ने बांग्लादेशी राजनेता की हत्या के बाद शव की तस्वीर उनके संसदीय क्षेत्र झेनाइदह में अवामी लीग के नेता काजी कमाल अहमद उर्फ बाबू के फोन पर भेजी थी। इसकी वजह ये थी कि लोगों को पता चले कि अनवारुल अजीम की हत्या हो चुकी है, साथ ही प्रभावशाली लोगों में डर बैठाने के लिए भी ये तस्वीर भेजी गई।

कोलकाता के न्यूटाउन स्थित फ्लैट के सेप्टिक टैंक से बरामद माँस के टुकड़े इंसान के बताए जा रहे हैं, लेकिन यह अभी निश्चित नहीं है कि वे सांसद अनार के हैं या नहीं, डीएनए जाँच के बाद ही इसकी पुष्टि हो सकेगी। जिस फ्लैट के सेप्टिक टैंक से इंसानी माँस के टुकड़े मिले, उसी फ्लैट में सांसद की हत्या की थी और शव को 80 टुकड़ों में बाँट दिया था। उन्होंने उन टुकड़ों को दक्षिण 24 परगना जिले के बड़े नाले में फेंक दिया था, तो छोटे हिस्सों को कमोड के जरिए बहा दिया था। यही नहीं, इस फ्लैट के पास के नाले से भी इंसानी हड्डियाँ बराबद होने की बात सामने आ रही है।

गौरतलब है कि सांसद अनवारुल इलाज कराने के बहाने पश्चिम बंगाल की राजधानी कोलकाता पहुँचे थे। वो 12 मई को कोलकाता पहुँचे, लेकिन उनकी तलाश कुछ दिनों बाद शुरू हुई, जब उनके परिचित गोपाल बिश्वास ने 18 मई 2024 को पुलिस में उनकी गुमशुदगी की रिपोर्ट दर्ज कराई। बताया जा रहा है कि इस हत्याकाँड को अंजाम देने के लिए अनवारुल के ही करीबी दोस्त अख्तरुज्जमाँ ने 5 करोड़ की सुपारी दी थी। अख्तरुज्जमाँ अमेरिकी नागरिक है और अनवारुल का बिजनेस पार्टनर भी।

सांसद अनवारुल अजीम अनार और संदिग्ध अख्तरुज्जमाँ मिलकर सोने की तस्करी का काम करते थे, मगर पैसों को लेकर दोनों के बीच मतभेद हुआ और अख्तरुज्जमाँ ने पूरी हत्या की साजिश रची। बताया जा रहा है कि अजीम ने 100 करोड़ टका से अधिक अपने पास रख लिया था।

यूरोपीय संसद के चुनाव में जीती दक्षिणपंथी पार्टी तो भड़के वामपंथी: फ्रांस के कई शहरों में दंगे एवं प्रदर्शन, फिलिस्तीन के समर्थन में नारे

यूरोपीय संसद के चुनावों में दक्षिणपंथी नेशनल रैली (रैसेम्बलमेंट नेशनल, आरएन) ने फ्रांस के राष्ट्रपति इमैनुएल मैक्रों की रेनेसां पार्टी को 31.5% वोटों से पराजित कर दिया है। इसके बाद सोमवार (10 जून 2024) को राजधानी पेरिस की सड़कों पर सैकड़ों वामपंथी समर्थकों ने विरोध प्रदर्शन किया।

वामपंथी प्रदर्शनकारियों ने फ्रांसीसी संसद के बाहर एकत्र होकर विजयी दक्षिणपंथी पार्टी नेशनल रैली के खिलाफ नारे लगाए। इतना ही नहीं, प्रदर्शनकारियों ने विरोध प्रदर्शन के दौरान फिलिस्तीन के समर्थन में नारे भी लगाए।

इस महीने के अंत में होने वाले संसदीय चुनावों में नेशनल रैली के खिलाफ लड़ने के लिए घनघोर वामपंथी ‘पॉपुलर फ्रंट’ पर दबाव बनाने के लिए हज़ारों वामपंथी रेनेस, नैनटेस और रूएन में एकत्र हुए। रेनेस में 2,500 से अधिक लोगों ने दक्षिणपंथ के उदय के खिलाफ विरोध प्रदर्शन किया।

प्रदर्शनकारियों ने दक्षिणपंथ के खिलाफ़ वामपंथियों को एकजुट होने का आह्वान करते हुए पॉपुलर फ्रंट (Front Populaire) के नारे लगाए। प्रदर्शनकारियों में मुख्य रूप से वामपंथी दल, इकोलजिस्ट और ट्रेड यूनियन शामिल थे।

रेनेस में वामपंथियों का विरोध प्रदर्शन किया (फोटो स्रोत: फ्रांस24)

नैनटेस में सोमवार को 1,000 से ज़्यादा लोगों ने रैली निकाली और ‘ला ज्यूनेसे एम्मर्डे ले आरएन’ (Youth f*cks with the RN) और ‘वोत्रे हैन, नोट्रे रेवोल्टे’ (“आपकी नफ़रत, हमारा विद्रोह”) जैसे नारे लगाए। वामपंथी प्रदर्शनकारियों ने शाम को शहर में ‘क्रांति या बर्बरता’ लिखे बैनर के साथ मार्च शुरू किया।

इस बीच रूएन में 800 से ज़्यादा लोगों ने दक्षिणपंथी पार्टी के ख़िलाफ़ रैली निकाली। इस दौरान नारे लगाए गए, ‘Young people f*ck the Front National’ और ‘हर कोई फ्रंट नेशनल से नफ़रत करता है’ जैसे नारे लगाए। बोर्डो और कुछ दूसरी जगहों पर विरोध प्रदर्शन ने हिंसक रूप ले लिया और पुलिस को स्थिति को नियंत्रित करना पड़ा।

सोमवार को फ्रांसीसी छात्र पेरिस के हेनरी IV हाई स्कूल में यूरोपीय संसद में दक्षिणपंथी पार्टी की जीत का विरोध करने के लिए एकत्र हुए। इस दौरान प्रदर्शनकारियों ने इमारत के प्रवेश द्वार को अवरुद्ध कर दिया, बैनर लहराए और रूढ़िवादी पार्टी एवं राष्ट्रपति मैक्रोन के खिलाफ नारे लगाए।

फ्रांसीसी हाई स्कूल के छात्रों ने पेरिस में आर.एन. के खिलाफ विरोध प्रदर्शन किया (स्रोत: अनादोलु)

फ्रांस में दक्षिणपंथ के उदय के खिलाफ वामपंथियों का विरोध यह दर्शाता है कि दुनिया भर में वामपंथियों में आम विशेषता है। लोकतंत्र तभी है, जब वामपंथी जीतते हैं और लोकतंत्र तब खत्म हो जाता है, जब उनके विरोधी विजयी होते हैं।

मैक्रों ने संसद भंग की, शीघ्र चुनाव की घोषणा की

यह घोषणा राष्ट्रपति इमैनुएल मैक्रों द्वारा फ्रांस की संसद के निचले सदन को भंग करने के बाद की गई है। मतदाताओं को 9 जून को यूरोपीय संसद के चुनावों में दक्षिणपंथी पार्टी द्वारा अपनी पार्टी की अपमानजनक हार के बाद सांसदों को चुनने के लिए आने वाले दिनों में चुनावों में वापस जाना पड़ा।

यह घोषणा ऐसे समय में की गई है, जब फ्रांस के प्रोविजिनल परिणामों से पता चला है कि यूरोपीय संघ के संसदीय चुनावों में दक्षिणपंथी नेशनल रैली पार्टी बहुत आगे है, जिससे मैक्रों के यूरोप समर्थक मध्यमार्गियों को शर्मनाक निराशा हुई है।

इसमें रैसम्बलमेंट नेशनल (नेशल रैली) को 31.37% वोट मिले, मार्कोन की रेनेसां पार्टी और उसके गठबंधन बेसोइन डी यूरोप को सिर्फ 14.60% वोट मिले हैं।

पानी में दिखी ‘लाश’… पुलिस ने किनारे खींचा तो जिंदा हो गई: वायरल वीडियो देख लोगों का सिर घूमा, नहीं रुक रही हँसी

दिल्ली, हरियाणा, उत्तर प्रदेश, बिहार समेत कई राज्यों में इन दिनों प्रचंड गर्मी से लोग परेशान हैं। ऐसे में हर कोई अपने तरीके से राहत पाने के लिए इंतजाम कर रहा है। इस बीच एक ऐसी अजीबोगरीब वीडियो सोशल मीडिया पर वायरल होना शुरू हुई है कि अगर आप उसे देखेंगे तो आपको अपने आप हँसी आ जाएगी।

दरअसल, वीडियो में दिखाई दे रहा है कि एक पुलिसकर्मी नदी में बेसुध लेटे एक व्यक्ति को अपनी ओर खींचने की कोशिश करते हैं। उन्हें लगता है कि शायद वो कोई लाश है जो बहते हुए किनारे पर आ गई है, आसपास खड़े लोगों को भी यही लगता है, लेकिन जैसे ही पुलिस की वर्दी पहना शख्स उस बॉडी को हाथ पकड़कर अपनी ओर खींचता है वो व्यक्ति अचानक उठ खड़ा होता है और अपने ऊपर पानी डालकर बताता है कि वो तो पानी में सिर्फ लेटा है। इसके बाद सब उसे देख हँसने लगते हैं।

गर्मी से छुटकारा पाने का इस व्यक्ति का ये अंदाज अब हर सोशल मीडिया पर लोग शेयर कर रहे हैं। वीडियो कब की और कहाँ की है ये तो नहीं स्पष्ट हो पा या है, लेकिन जो भी इस वीडियो को देख रहा है वो यही कह रहा है कि ये गर्मी से निजात पाने का सबसे मजेदार तरीका है। लोगों की इस वीडियो देखने के बाद हँसी भी नहीं रुक रही है। ये कहकर मजा लिया जा रहा है कि इतना भी गर्मी से बचने के लिए ऐसे खतरनाक तरीकों भी नहीं अपनाना चाहिए कि लोग लाश समझ लें।

एलन मस्क का Apple से ऐलान-ए-जंग: OpenAI के इस्तेमाल पर दी प्रोडक्ट के बहिष्कार की धमकी, गिर गए iPhone बनाने वाली कंपनी के शेयर

दुनिया के सबसे अमीर बिजनेसमैनों में से एक एलन मस्क ने दिग्गज कंपनी एप्पल के खिलाफ कई बड़े हमले किए हैं। एप्पल कंपनी का मजाक उड़ाने से लेकर एलन मस्क ने iPhone और iMac के भी बहिष्कार की धमकी दे दी है। उन्होंने साफ कहा है कि अगर एप्पल कंपनी अपने प्रोडक्ट में ओपनएआई का इस्तेमाल करेगी, तो वो अपनी कंपनी में एप्पल के प्रोडक्ट को ही बैन कर देंगे और एप्पल के सारे मशीन-फोन कंपनी के गेट पर रखवा देंगे।

एलन मस्क ने अपने एक्स पोस्ट में कहा कि अगर एप्पल अपने प्रोडक्ट और डिवाइस में ओपनएआई को ऑपरेटिंग सिस्टम लेवल पर इंटिग्रेट करता है, तो मेरी कंपनी में बैन कर दिया जाएगा। यह सिक्योरिटी वायलेशन हमें बिलकुल बर्दाश्त नहीं है। एलन मस्क ने एक साथ कई पोस्ट करते हुए कहा कि वो अपनी कंपनी में आने वाले सभी विजिटर्स के एप्पल डिवाइस को दरवाजे पर रखवा लेंगे।

यही नहीं, एलन मस्क ने एप्पल की खिंचाई करते हुए कहा कि एप्पल इतना भी स्मार्ट नहीं है कि वो अपना आर्टिफिशियल इंटेलीजेंट क्रिएट कर सके। एप्पल को इस बात का अभी अंदाजा भी नहीं है कि वो अपने यूजर्स का डाटा कितनी आसानी से ओपन एआई के हाथों में सौंप रहा है।

दरअसल, एलन मस्क ओपनएआई के फाउंडर्स में से एक रहे हैं, लेकिन सालों पहले उन्होंने आर्टिफिशियल इंटेलीजेंस को खतरा बताते हुए कंपनी से अपना नाता तोड़ दिया था। इस बीच उनके ट्वीट्स की वजह से एप्पल को बाजार में बड़ी चपत भी लगी है। एप्पल कंपनी के शेयर 1.91% गिरावट के साथ बंद हुए। इसके साथ ही एप्पल मार्केट कैप के मामले में माइक्रोसॉफ्ट के बाद एनवीडिया से भी पिछड़ गई और तीसरे नंबर पर खिसक गई। एनवीडिया का मार्केट कैप 2.995 ट्रिलियन डॉलर है, तो एप्पल का 2.961 ट्रिलियन डॉलर। वहीं, माइक्रोसॉफ्ट 3.180 ट्रिलियन डॉलर के मार्केट कैप के साथ दुनिया का सबसे वैल्यूएबल कंपनी है।

गौरतलब है कि एप्पल ने अपने जेनरेटिव एआई टूल एप्पल इंटेलीजेंस की घोषणा की है। एप्पल ने अपने डिवाइस में एआई फीचर को इंटिग्रेट करने के लिए ओपन एआई से मदद ली है, जिसमें चैट-जीपीटी को शामिल किया जाना है। साथ ही एप्पल ने कहा है कि वो यूजर की प्राइवेसी और सुरक्षा का ध्यान रखेगी, लेकिन एलन मस्क इतने भर से सहमत नहीं हैं। उन्होंने इसका सीधा विरोध किया है।

2 साल के हिंदू बच्चे टीटू की हत्या पर चुप्पी, लेकिन विदेशी मुस्लिम लड़कों की मौत पर मातम: आरफा को हिंदुस्तान में फिर भी चाहिए इस्लामी सांसद-मंत्री

  • 2 सितंबर 2015
  • 5 दिसंबर 2016
  • 9 जून 2024

3204 दिन। लगभग 9 साल। सीरिया, म्यांमार और भारत। यह कोई कविता नहीं है। ‘लिबरल’ मीडिया का घिनौना सच है। इस सच से जुड़ी है भारतीय राजनीति। घेरते हैं मोदी को, फँस जाते हैं खुद। मुस्लिम और मोदी करते-करते इंसानियत बेच देते हैं।

2 सितंबर 2015 को क्या हुआ था? 2 साल का एलन कुर्दी मर गया था। लेकिन मरते तो हर दिन सैकड़ों-हजारों बच्चे हैं। फिर एलन कुर्दी में ऐसा क्या था? क्यों उसका नाम-फोटो गूगल से लेकर सोशल मीडिया और मीडिया में छा गया? छा गया क्योंकि उसे छपवाया गया। छपवाने के पीछे सोची-समझी साजिश थी। इस्लामी-लिबरल साजिश।

सवाल यह है कि 2 साल के बच्चे की लाश से साजिश क्यों? करने वाले कौन लोग? फायदा किसे? एलन कुर्दी इस्लामी मुल्क सीरिया में पैदा हुआ। मुस्लिम परिवार का बच्चा था। उसके माँ-बाप को सीरिया छोड़ कर तुर्की भागना पड़ा। कारण – इस्लामी आतंकी। तुर्की क्या है? इस्लामी मुल्क है। लेकिन क्या मुस्लिम एलन कुर्दी और उसके परिवार को इस्लामी मुल्क तुर्की में जीने-खाने-फलने-फूलने की जगह मिली? नहीं। फिर क्या? तुर्की से भाग कर यूरोप में घुसने का प्लान। और इसी घुसने के प्रयास में मर गया 2 साल का एलन कुर्दी।

देश, समय, काल, पीड़ित, विलेन – सब कुछ इस्लाम से जुड़ा हुआ तो दोष किस पर मढ़ा जाए? साजिश इसी के लिए रची गई। एलन कुर्दी की लाश को ‘हीरो’ बनाया गया। गोरे यूरोपियन पर ‘शरणार्थी’ जैसे शब्दों से वार किया गया। तथाकथित लिबरल मीडिया ने 2 साल के बच्चे की लाश पर राजनीति की। यूरोप के नेता, लोग, इंस्टिट्यूशन सबको आत्मग्लानि वाले भाव से जोड़ा गया… वो जुड़ भी गए। साजिश सफल हुई। इस्लामी आतंक शब्द पीछे छूट गया। मुस्लिम शरणार्थियों से यूरोप की डेमोग्राफी बदलने लगी। महीने, 2-4 महीने पर लगभग हर यूरोपियन देश में इसके नतीजे समाचारों के रूप में देखने को हमें मिल ही जाती हैं।

सीरिया से भारत की हवाई दूरी लगभग 4200 किलोमीटर है। भाई-भतीजे वाला कोई संबंध भी नहीं है। फिर क्या वजह है कि 2 सितंबर 2015 की घटना को भारतीय राजनीति और ‘लिबरल’ मीडिया के घिनौने सच से मैंने जोड़ दिया? वजह है आरफा खानम शेरवानी नाम की एक औरत, जो खुद को पत्रकार कहती है, कुछ लोग मानते भी हैं।

सीरियन एलन कुर्दी के लिए आरफा के आँसू

3 सितंबर 2015 (मतलब 2 सितंबर के ठीक एक दिन बाद ही) को आरफा खानम शेरवानी का दिल रोता है 2 साल के एलन कुर्दी के लिए। वो एलन कुर्दी जो आरफा से 4200 किलोमीटर दूर पैदा हुआ। मरा और भी दूर। किसी तरह का सगा-संबंधी भी नहीं। Muslim Brotherhood वाली थ्योरी के अलावे कोई कनेक्शन नहीं। लेकिन सोशल मीडिया पर रोया ऐसा कि दुनिया खत्म होने वाली है, इंसानियत मर गई है।

अब 5 दिसंबर 2016 की बात। आरफा खानम शेरवानी एक ट्वीट करती है। फोटो एक मरे हुए बच्चे की होती है। फिर से वही लॉजिक। हर दिन इतने सारे मरते बच्चों के बीच में यही बच्चा क्यों? क्योंकि यह बच्चा होता है रोहिंग्या। रोहिंग्या मतलब म्यांमार के लोग। रोहिंग्या मतलब मुस्लिम।

रोहिंग्या ‘एलन कुर्दी’ के लिए भी रोती आरफा

मुस्लिम रोहिंग्या लोगों को उसके पड़ोसी मुस्लिम देश बांग्लादेश रखने को तैयार नहीं। गोली मारता है म्यांमार का सिपाही। दिल रोता है लेकिन आरफा का। शब्द गढ़े जाते हैं एलन कुर्दी के नाम पर। इसके पीछे की साजिश भी वही – रोहिंग्या मुस्लिमों के लिए हर देश अपने दरवाजे खोल दे, शरणार्थी के नाम पर अपने-अपने जगह की डेमोग्राफी को छिन्न-भिन्न होने दे।

Muslim Brotherhood वाली थ्योरी के लिए 2 उदाहरण ऊपर हैं। लेकिन क्या यही Muslim Brotherhood की थ्योरी एक कदम आगे चल कर ‘इंसानी ब्रदरहुड’ तक पहुँच पाती है? देखते हैं एक और उदाहरण से।

टीटू मार दिया जाता है। 9 जून 2024 को। रियासी आतंकी हमले में। मारने वाले इस्लामी आतंकी। टीटू भी सिर्फ 2 साल का था, एलन कुर्दी की तरह। आरफा खानम शेरवानी क्या करती है? वो एक ट्वीट करती है। भारतीय राजनीति पर। वो पूछती है कि 293 सांसदों और 72 मंत्रियों में एक भी मुस्लिम क्यों नहीं? पढ़ने के बाद क्या यह ट्वीट 2 साल के बच्चे टीटू के लिए लिखा गया प्रतीत होता है? अगर नहीं, तो क्यों? क्योंकि टीटू के माता-पिता का नाम ममता और राजेंद्र था… इसलिए आरफा के की-बोर्ड से शब्द नहीं गढ़े गए।

2 साल का टीटू भारत में पैदा हुआ, भारतीय बच्चा था। वही देश, जो आरफा का भी है। वही देश, जिसमें पा रही सैलरी-कमाई से आरफा का घर चलता है। लेकिन आरफा की इंसानियत जागी किसके लिए – सीरियन एलन कुर्दी और रोहिंग्या मुस्लिम बच्चे के लिए। टीटू का हिंदू होना और उसका इस्लामी आतंकियों की गोली से मारा जाना, आरफा की इंसानियत को झकझोर नहीं पाया।

Muslim Brotherhood वाली थ्योरी पर धब्बा लग जाता, अगर आरफा टीटू के लिए रोती तो। क्योंकि हत्या इस्लामी आतंकियों ने की है। इसलिए लोकतंत्र, संसद, सांसदों/मंत्रियों की संख्या पर ट्वीट किया गया। टीटू की हत्या हुए 2 दिन हो चुके हैं। आरफा के सोशल मीडिया अकाउंट पर इसको लेकर चुप्पी है। और यह चुप्पी ही साजिश है।

आरफा अगर पत्रकार है, इसका मतलब 10वीं-12वीं और कम से कम स्नातक तो किया ही होगा। मतलब कम से कम 15 साल की पढ़ाई-लिखाई। उसके बाद भारत के संदर्भ में यह सवाल बेतुका है कि कितने सांसद/मंत्री मुस्लिम? इस सवाल में जरूर दम होता; अगर यह सवाल सीरिया, तुर्की, म्यांमार या बांग्लादेश से किया जाता। जिस भारत देश के 2 साल के बच्चे टीटू की हत्या पर इस्लामी मानसिकता की शिकार, Muslim Brotherhood के आइने से हर चीज को देखने वाली आरफा की इंसानियत नहीं जागी, उसे कोई हक नहीं कि वो भारत के संदर्भ में कोई भी सवाल पूछे… फिर भले ही आप पत्रकार हों या पागलखाने में चाँद-सितारे गिन इस्लाम का झंडा बुलंद करने का ख्वाब देखने वाली बुढ़िया!

PS: जहाँ-जहाँ इस्लामी देश लिखा है, उसकी डेमोग्राफी को लेकर लिखा गया है। मुझे इसमें कोई दिलचस्पी नहीं कि उस देश के संविधान ने देश को इस्लामी करार दिया है या लोकतांत्रिक या धर्मनिरपेक्ष या ‘सर्वजन हिताय सर्वजन सुखाय’ टाइप कुछ शब्द गढ़ा है। जेनरल नॉलेज और करेंट अफेयर्स की किताबों/अखबारों से यह ज्ञान मेरे लिए काफी है कि 80-90% मुस्लिम आबादी वाले इस्लामी देशों में आम जनता (खास कर अल्पसंख्यकों) की क्या स्थिति है।

जेल में बंद चायनीज ने चश्मे का शीशा तोड़ काटी अपनी नस, प्राइवेट पार्ट भी: अस्पताल में मौत, अवैध रूप से भारत में घुसने पर हुई थी गिरफ्तारी

बिहार के मुजफ्फरपुर जिले की जेल में बंद एक चीनी नागरिक ने आत्महत्या कर ली है। मृतक का नाम ली जियाकी है जिसकी उम्र 63 वर्ष है। ली जियाकी ने काँच से अपने हाथ की नस को काट दिया था। इसी दौरान उसने अपने प्राइवेट पार्ट पर भी घाव कर लिया था। गंभीर हालत में ली को इलाज के लिए अस्पताल में भर्ती करवाया गया था जहाँ मंगलवार (11 जून 2024) को उसने दम तोड़ दिया। उस पर भारत की सीमा को अवैध तौर पर पार करने का आरोप था।

मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक 5 जून 2024 को मुज़फ्फरनगर के थानाक्षेत्र ब्रह्मपुरा की पुलिस को लक्ष्मी चौक पर एक संदिग्ध व्यक्ति की मौजूदगी की सूचना मिली थी। पुलिस ने दबिश दी तो वहाँ चीन का नागरिक ली जियाकी मिला। वह चीन के शेडोंग प्रांत के कैंगशांग काउंटी का मूल निवासी निकला। माँगे जाने पर वह भारत में घुसने का वैध कागजात नहीं दिखा पाया। ली को गिरफ्तार कर लिया गया। तब पुलिस के साथ केंद्रीय एजेंसियों ने भी ली से लम्बी पूछताछ की थी।

ली को मुजफ्फरपुर जिले के शहीद खुदीराम बोस केंद्रीय कारागार में दाखिल करवाया गया। उसके केस में आगे की वैधानिक कार्रवाई चल रही थी। ली की गिरफ्तारी के 2 दिन बाद 7 जून की शाम को जेल में कैदियों की गिनती की जा रही थी। इसी दौरान वह शौचालय में गया। यहाँ उसने अपना चश्मा तोड़ लिया और उसके शीशे को धारदार हथियार के तौर प्रयोग में लाया। ली ने अपने हाथ की नस काट डाली और सीने के अन्य हिस्सों में वार किए। उसने अपने प्राइवेट पार्ट पर भी कई घाव कर डाले। इस हरकत से ली का काफी खून शौचालय में ही बहने लगा। वह टॉयलेट में ही बेहोश हो गया।

अधिकारियों को घटना का पता चला तो उन्होंने ली को फ़ौरन स्थानीय अस्पताल में भर्ती करवाया। हालत गंभीर होता देख कर ली को एसकेएमसीएच (श्रीकृष्ण मेडिकल कॉलेज एवं अस्पताल) में रेफर कर दिया गया। यहाँ ली का ऑपरेशन भी किया गया। हालाँकि डॉक्टरों के तमाम प्रयास काम नहीं आए। अंत में मंगलवार को ली ने अंतिम सांस ले ली। प्रशसनिक अधिकारी अब आगे की कानूनी कार्रवाई में जुट गए हैं।

67 परीक्षार्थियों को शत-प्रतिशत अंक, एक ही सेंटर से बने कई टॉपर: NEET परीक्षा आयोजित करने वाली NTA पर गंभीर सवाल, पेपरलीक के भी हैं आरोप

चार जून 2024 को नेशनल टेस्टिंग एजेंसी (NTA) ने नीट (NEET-UG 2024) परीक्षा का परिणाम घोषित कर दिया। हालाँकि, यह परीक्षा परिणाम शिक्षा जगत में हड़कंप मचा देने वाला साबित हुआ।NEET भारत के सबसे बड़ी प्रतियोगी परीक्षाओं में से एक है, जिसमें क़रीब 25 लाख अभ्यर्थी इस साल भाग लिए थे।

इस बार की परीक्षा में 67 छात्रों ने 720 में से 720 अंक प्राप्त किए, जो इस प्रतिष्ठित परीक्षा के इतिहास में पहली बार हुआ है। इस असामान्य परिणाम ने शिक्षा विशेषज्ञों, छात्रों और आम जनता के बीच गहरी चिंता और संदेह पैदा कर दिया है। इस लेख में हम परीक्षा आयोजित करने वाली NTA की कार्यप्रणाली, विवादों और वर्तमान स्थिति पर समीक्षा करेंगे।

नेशनल टेस्टिंग एजेंसी (NTA) की स्थापना

नेशनल टेस्टिंग एजेंसी (NTA) की स्थापना नवंबर 2017 में भारत सरकार द्वारा उच्च शिक्षा में प्रवेश परीक्षाओं की पारदर्शिता और गुणवत्ता को बढ़ाने के उद्देश्य से की गई थी। मानव संसाधन विकास मंत्रालय (अब शिक्षा मंत्रालय) के अंतर्गत गठित इस स्वायत्त संस्था का मुख्यालय नई दिल्ली में है। NTA राष्ट्रीय स्तर की विभिन्न परीक्षाओं का आयोजन करता है।

इन परीक्षाओं में JEE (मेन), NEET, UGC-NET, सीमैट और जीपैट आदि बेहद महत्वपूर्ण हैं। यह अत्याधुनिक तकनीक का उपयोग करके परीक्षाओं के संचालन में पारदर्शिता, निष्पक्षता और विश्वसनीयता सुनिश्चित करता है। कंप्यूटर आधारित परीक्षण (CBT) और ऑनलाइन पंजीकरण जैसी प्रक्रियाओं को अपनाकर NTA ने भारतीय शिक्षा प्रणाली में महत्वपूर्ण सुधार किए हैं।

अभूतपूर्व परिणाम और उठते सवाल

नीट 2024 के परिणाम ने उस समय सबको चौंका दिया, जब 67 छात्रों ने परीक्षा में पूर्ण अंक प्राप्त कर लिए। इनमें से 8 छात्र हरियाणा के एक ही परीक्षा केंद्र से हैं। इसके अलावा तमिलनाडु, उत्तर प्रदेश, कर्नाटक और गुजरात के विभिन्न केंद्रों से दो-दो छात्रों ने भी पूर्ण अंक प्राप्त किए। यह असामान्य परिणाम कई सवाल खड़े करता है:

  • क्या परीक्षा का पेपर अत्यंत सरल था? : विशेषज्ञों का मानना है कि नीट जैसी कठिन परीक्षा में इतने सारे छात्रों का पूर्ण अंक प्राप्त करना सामान्य नहीं है। बोर्ड परीक्षाओं में भी ऐसे परिणाम दुर्लभ होते हैं।
  • क्या परीक्षा के संचालन में कोई खामी थी? : परीक्षा केंद्रों की निगरानी और सुरक्षा में संभावित खामियों की जाँच की आवश्यकता है, क्योंकि कई छात्र एक ही केंद्र से टॉप कर गए हैं।

मार्किंग स्कीम और ग्रेस मार्क्स का विवाद

नीट की मार्किंग स्कीम के अनुसार, प्रत्येक सही उत्तर के लिए 4 अंक और गलत उत्तर के लिए 1 अंक काटे जाते हैं। इस प्रकार 718 या 719 अंक आना संभव नहीं है, फिर भी इस बार ऐसे अंक देखे गए हैं। एनटीए ने इस पर सफाई दी कि कुछ अभ्यर्थियों को समय की कमी के कारण ग्रेस मार्क्स दिए गए हैं।

एनटीए के इस ग्रेस मार्क्स तर्क ने छात्रों और शिक्षाविदों के बीच और अधिक संदेह पैदा किया है। प्रतियोगी परीक्षाओं में ग्रेस मार्क्स का प्रावधान सामान्य नहीं है और इसके पीछे की प्रक्रिया और पारदर्शिता पर सवाल उठ रहे हैं।

पेपर लीक का मामला

नीट परीक्षा के दौरान बिहार की राजधानी पटना से पेपर लीक होने की खबरें सामने आई थी। इस मामले में 13 लोगों की गिरफ्तारी हुई थी। खबर ये थी कि प्रश्न पत्र और उसके उत्तर परीक्षा से पहले ही कई छात्रों को उपलब्ध कराए गए थे। इसके बावजूद, NTA ने पूरे देश में सभी परीक्षा केंद्रों का परिणाम जारी कर दिया, जिससे छात्रों में असंतोष बढ़ गया है।

एनटीए की प्रेस कॉन्फ्रेंस

NTA ने हाल ही में एक प्रेस कॉन्फ्रेंस आयोजित कर परीक्षा संचालन और परिणामों पर उठे सवालों का जवाब दिया था। NTA ने स्पष्ट किया था कि परीक्षा के दौरान सुरक्षा मानकों का पालन किया गया था और पेपर लीक की घटनाओं का परिणाम पर कोई प्रभाव नहीं पड़ा है। उन्होंने यह भी कहा कि ग्रेस मार्क्स केवल उन छात्रों को दिए गए, जिन्होंने परीक्षा के दौरान तकनीकी कठिनाइयों का सामना किया।

जनहित याचिकाएँ और छात्र विरोध

नीट 2024 के परिणामों के खिलाफ विभिन्न अदालतों में जनहित याचिकाएँ (PIL) दाखिल की गई हैं और देश भर में छात्रों ने विरोध प्रदर्शन किए हैं। दिल्ली उच्च न्यायालय, मद्रास उच्च न्यायालय और कलकाता उच्च न्यायालय में नीट 2024 की शुचिता और परिणामों की सत्यता पर सवाल उठाते हुए याचिकाएँ दाखिल की गई हैं।

याचिकाकर्ताओं का आरोप है कि एनटीए ने परीक्षा संचालन में गंभीर चूक की है और परिणामों में पारदर्शिता की कमी है। दिल्ली, मुंबई, चेन्नई और लखनऊ जैसे प्रमुख शहरों में छात्रों ने विरोध प्रदर्शन किए हैं। छात्रों का आरोप है कि एनटीए ने परीक्षा प्रक्रिया में गड़बड़ी की है, जिससे उनका भविष्य खतरे में पड़ गया है।

मीडिया की भूमिका

मीडिया का ध्यान अधिकतर राजनीतिक खबरों पर केंद्रित रहता है, जबकि शिक्षा और युवाओं से जुड़े मुद्दों को नजरअंदाज किया जाता है। नीट 2024 के इस विवाद पर भी मुख्यधारा के मीडिया ने उतनी गंभीरता से रिपोर्टिंग नहीं की, जितनी अपेक्षित थी।

मीडिया का ध्यान शिक्षा जैसे महत्वपूर्ण मुद्दों से हटकर राजनीतिक विवादों पर अधिक रहता है। शिक्षा प्रणाली की खामियों को उजागर करने और सुधार की दिशा में काम करने की बजाय, मीडिया अक्सर विवादास्पद राजनीतिक घटनाओं को प्राथमिकता देता है।

निष्कर्ष और आगे की राह

नीट 2024 के परिणाम और एनटीए की कार्यप्रणाली पर उठे सवालों ने शिक्षा व्यवस्था की विश्वसनीयता और पारदर्शिता पर गंभीर प्रश्न चिह्न लगाए हैं। यह अत्यंत महत्वपूर्ण है कि एनटीए अपनी प्रक्रियाओं की गहन समीक्षा करे और परीक्षा की शुचिता और निष्पक्षता को सुनिश्चित करे। सरकार और शैक्षिक संस्थाओं को मिलकर परीक्षा प्रणाली में सुधार के लिए ठोस कदम उठाने चाहिए।

शिक्षा का स्तर और परीक्षा प्रणाली की शुचिता बनाए रखना हमारी प्राथमिकता होनी चाहिए, ताकि प्रत्येक छात्र को न्यायपूर्ण और समान अवसर मिल सके। शिक्षा और युवाओं के भविष्य से खिलवाड़ किसी भी स्थिति में स्वीकार्य नहीं है। हमें यह सुनिश्चित करना होगा कि हमारे देश की शिक्षा प्रणाली विश्वसनीय और पारदर्शी हो, जिससे हर छात्र को समान अवसर और न्याय मिले।

नीट 2024 की विवादास्पद स्थिति ने हमें यह सोचने पर मजबूर कर दिया है कि हमारी शिक्षा प्रणाली में सुधार की कितनी आवश्यकता है। यह समय की माँग है कि हम इन खामियों को सुधारें और एक मजबूत, पारदर्शी और विश्वसनीय शिक्षा प्रणाली का निर्माण करें। यह हमारे युवाओं और देश के उज्ज्वल भविष्य की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम होगा।