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जिसकी पीठ में छुरा घोंप CM बने थे शरद पवार, अब उसके पोते ने शिवसेना (UBT) को हराया तो MVA में मचा घमासान: कॉन्ग्रेस का बाग़ी बन कर उतरा, उद्धव के सेनानी को चटाई धूल

महाराष्ट्र में उद्धव ठाकरे की शिवसेना (UBT) और I.N.D.I. गठबंधन के बाकी घटक दलों के बीच मनमुटाव की अटकलें लगाई जा रही हैं। इसकी वजह सांगली लोकसभा सीट से निर्दलीय उम्मीदवार विशाल पाटिल की जीत है। उद्धव ठाकरे को लगता है कि यहाँ से राष्ट्रवादी कॉन्ग्रेस पार्टी (NCP) और कॉन्ग्रेस ने शिवसेना (UBT) के प्रत्याशी चंद्रहर सुभाष पाटिल को धोखा दिया है।

विशाल पाटिल ने इसी साल अप्रैल में कॉन्ग्रेस से बगावत कर दिया था। वहीं, I.N.D.I. गठबंधन ने यहाँ से शिवसेना उद्धव गुट के प्रत्याशी को मैदान में उतारा था। विशाल पाटिल कॉन्ग्रेस के कद्दावर नेता और पूर्व मुख्यमंत्री वसंतदादा पाटिल के पोते हैं। सांगली से निर्दलीय उम्मीदवार विशाल पाटिल ने अपने निकटतम प्रतिद्वंदी भाजपा के संजय पाटिल को 1,00,053 वोटों से हराया था।

शिवसेना उद्धव गुट ने सांगली लोकसभा सीट से चंद्रहर सुभाष पाटिल को मैदान में उतारा था। चंद्रहर सुभाष पाटिल तीसरे नंबर पर रहे। उनका विशाल पाटिल से हार का अंतर 5,10,806 वोटों का रहा। I.N.D.I. गठबंधन में इस सीट को लेकर चुनाव पूर्व भी खींचतान हुई थी। अंत में इस सीट को उद्धव ठाकरे के गुट के पाले में डाल दिया गया था।

Source: ECI website

निर्दलीय होने के बावजूद विशाल पाटिल की बड़े अंतर से हुई जीत ने कई राजनैतिक सवाल खड़े कर दिए हैं। इनमें से एक प्रश्न यह भी है कि क्या कॉन्ग्रेस के गढ़ में बाकी I.N.D.I. दलों द्वारा हाथ खींच लेने और उद्धव के प्रत्याशी को खड़ा करना कोई धोखा तो नहीं है। आशंका इस बात की भी जताई जा रही है कि इस सीट पर कॉन्ग्रेस और NCP ने अपने मतदाताओं को शिवसेना उद्धव गुट के बजाय विशाल पाटिल को वोट देने के लिए अंदर ही अंदर उकसाया था।

एक्जिट पोल में जब सांगली सीट से विशाल पाटिल द्वारा जीत दर्ज करने की भविष्यवाणी हुई तभी उद्धव गुट ने गठबंधन के सहयोगियों पर गुस्सा दिखाया था। मतगणना से एक दिन पहले उद्धव ठाकरे के करीबी नेता संजय राउत ने बिना नाम लिए ही कॉन्ग्रेस और NCP के खिलाफ बयानबाजी की थी। तब उन्होंने कहा था कि सांगली में जो कुछ भी हुआ उस पर उनकी पार्टी चुप नहीं बैठेगी। संजय राउत ने यह भी कहा था कि वो राजनीति में कंचे खेलने नहीं आए हैं।

माना यह भी जा रहा है कि अगर कुछ दिन और महाराष्ट्र में I.N.D.I. गठबंधन में सब सही चला तो आगामी विधानसभा चुनावों में भी सीटों के बँटवारे पर इसी तरह का विवाद खड़ा होगा। इसी साल मार्च के महीने में जब शिवसेना (उद्धव गुट) ने सांगली से अपना उम्मीदवार घोषित किया था कॉन्ग्रेस के पूर्व नेता संजय निरुपम ने अपनी पार्टी से गठबंधन तोड़ने की अपील की थी। संजय निरुपम ने कॉन्ग्रेस के इस कदम को चरमपंथी रुख करार दिया था। याद दिला दें कि शरद पवार पहली बार वसंतदादा पाटिल की पीठ में छुरा घोंप कर ही मुख्यमंत्री बने थे।

सांगली लंबे समय से कॉन्ग्रेस का गढ़ रहा है। यहाँ सन 1962 से 2014 के 52 वर्षों के अंतराल में कॉन्ग्रेस का ही कब्ज़ा रहा है। यह इलाका महाराष्ट्र के तीन बार के मुख्यमंत्री और राज्य के सबसे बड़े कॉन्ग्रेस नेताओं में से एक वसंतदादा पाटिल का गढ़ रहा है। साल 1980 से 2014 तक वसंतदादा के परिवार के ही सदस्य इस सीट से जीत कर संसद में जाते रहे हैं। ऐसे में यह भी सवाल खड़ा हो रहा है कि क्या उद्धव ठाकरे ये नहीं जान पाए कि कॉन्ग्रेस ने उद्धव ठाकरे के लिए अपने मजबूत गढ़ को इतनी आसानी से क्यों छोड़ दिया। इसके बाद एक कॉन्ग्रेस के एक बागी नेता ने उद्धव के प्रत्याशी को पटखनी क्यों दी?

एग्जिट पोल के बाद संजय राउत के बयान से अनुमान लगाया गया था कि उन्हें अपनी पार्टी के साथ सहयोगी दलों द्वारा खेले गए खेल का पता पहले से था। हालाँकि, तब तक बहुत देर हो चुकी थी। ख़ास बात ये भी है कि सांगली सीट पर जीत हासिल करने के बाद विशाल पाटिल ने बयान दिया था कि उनकी लड़ाई कभी कॉन्ग्रेस के खिलाफ थी ही नहीं। तब उन्होंने कहा कि वो कॉन्ग्रेस को बचाने के लिए चुनाव मैदान में उतरे थे। विशाल पाटिल ने खुद को असली कॉन्ग्रेसी भी कहा था। इस बयान के बाद इन आशंकाओं को और बल मिला था कि कॉन्ग्रेस कार्यकर्ताओं ने अंदर ही अंदर विशाल पाटिल की मदद की थी।

NDA ने नरेंद्र मोदी को लगातार तीसरी बार चुना अपना नेता, सब बोले – उनकी नीतियों से विकसित हो रहा देश

लोकसभा चुनाव 2024 के परिणाम जारी हो गए, जिसमें भाजपा को 240 सीटें प्राप्त हुईं और NDA 292 सीटों के साथ पूर्ण बहुमत के साथ सत्ता में लौटा। अब नई दिल्ली में बुधवार (5 जून, 2024) को NDA के घटक दलों की बैठक में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को गठबंधन का नेता चुन लिया गया है। गठबंधन ने जो प्रस्ताव पारित किया है, उसमें स्पष्ट लिखा है कि भारत के 140 करोड़ देशवासियों ने पीएम मोदी के नेतृत्व में NDA सरकार की जन-कल्याणकारी नीतियों से देश को हर क्षेत्र में विकसित होते देखा है।

NDA के सभी दलों द्वारा पारित किए गए प्रस्ताव में आगे लिखा है कि 6 दशक बाद ऐसा हुआ है जब भारत की जनता ने लगातार तीसरी बार पूर्ण बहुमत से किसी सशक्त नेतृत्व को चुना है। NDA नेताओं ने इस पर गर्व जताया कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में उन्होंने न सिर्फ ये चुनाव लड़ा, बल्कि जीता भी। साथ ही सर्वसम्मति से एक बार फिर से उन्हें अपना नेता चुन लिया गया। गरीब, महिला, युवा, किसान, शोषित, वंचित और पीड़ित नागरिकों की सेवा के लिए भी प्रतिबद्धता जताई गई है।

NDA ने अपने बयान में कहा है कि भारत की विरासत को संरक्षित कर देश के सर्वांगीण विकास हेतु NDA सरकार भारत के जन-जन के जीवन में सुधार लाने के लिए कार्य करती रहेगी। प्रधानमंत्री ने राजग के सभी सांसदों के प्रति कृतज्ञता जताते हुए कहा है कि वो इस निर्णय के लिए उन्हें धन्यवाद देते हैं। शुक्रवार (7 जून, 2024) को राजग के सभी सांसदों की बैठक होगी, जिसके बाद राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू से मुलाकात कर सरकार बनाने का दावा पेश करेंगे।

गठबंधन सहयोगियों से बातचीत की जिम्मेदारी भाजपा के राष्ट्रीय अध्यक्ष JP नड्डा के अलावा ‘मोदी 2.0’ में गृह मंत्री रहे अमित शाह और रक्षा रहे मंत्री राजनाथ सिंह को सौंपा गया है। उधर I.N.D.I. गठबंधन भी सरकार बनाने पर विचार-विमर्श कर रहा है, लेकिन इसकी शायद ही कोई संभावना नज़र आ रही है। बता दें कि 17वीं लोकसभा को राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू ने भंग कर दिया है। अब 8 जून को शपथग्रहण समारोह के बाद नई कैबिनेट का गठन होगा। 3 निर्दलीयों और एक-एक सांसद वाले 7 अन्य दलों ने भी पीएम मोदी को समर्थन दिया है।

हमारी निष्ठा NDA के साथ, नरेंद्र मोदी ही हमारे प्रधानमंत्री: पॉवर स्टार पवन कल्याण की दो टूक, आंध्र प्रदेश का डिप्टी CM बनने पर ‘जनसेना’ के नेता ने नहीं खोले पत्ते

आंध्र प्रदेश में तेलुगू देशम पार्टी, जनसेना पार्टी और भारतीय जनता पार्टी के एनडीए गठबंधन को लैंडस्लाइड जीत मिली है। तेलुगू फिल्मों के सुपरस्टार अभिनेता और जनसेना पार्टी के अध्यक्ष पवन कल्याण ने कहा है कि वो एनडीए के ही साथ हैं। इस गठबंधन ने आंध्र प्रदेश में एकतरफा जीत दर्ज की है। पवन कल्याण की पार्टी जनसेना ने 2 सीटों पर लोकसभा चुनाव लड़ा था और दोनों ही सीटों पर पार्टी को जीत मिली है। टीडीपी को 16 और बीजेपी को 3 लोकसभा सीटों पर जीत मिली है, वहीं विपक्षी पार्टी YSRCP को महज 4 सीटों पर जीत मिली।

न्यूज18 से बातचीत में पवन कल्याण ने साफ कर दिया है आंध्र प्रदेश में एनडीए गठबंधन अटूट है। वो एनडीए से अलग नहीं होंगे। पवन कल्याण ने कहा कि हमारे मन में एनडीए के समर्थन करने और न करने को लेकर दूसरी बार कोई सवाल नहीं आया। हम सिर्फ एनडीए के साथ हैं। पवन कल्याण ने कहा कि वो सत्ता में समुचित हिस्सेदारी लेंगे, लेकिन ये सब कुछ जनता के कल्याण के लिए होगा। ये पूछने पर कि क्या वो डिप्टी सीएम बनना चाहते हैं, पवन कल्याण के कहा कि इस पर एक-दो दिनों में चर्चा कर ली जाएगी।

आंध्र प्रदेश में पवन कल्याण की जनसेना पार्टी ने 21 विधानसभा और 2 लोकसभा सीटों पर चुनाव लड़ा था। उन्होंने टीडीपी और बीजेपी का मेल कराने में भी महत्वपूर्ण भूमिका निभाई थी। उन्होंने साफ कर दिया है कि उनकी प्राथमिकता आम जनमानस का कल्याण है। वो अपने लिए कुछ नहीं चाहते, वो बस जनता की सभी परेशानियों को दूर करने के लिए राजनीति में उतरे हैं। इस दौरान जगन मोहन रेड्डी से तनातनी को लेकर पवन कल्याण ने कहा कि जगन मोहन रेड्डी से मेरी कोई आपसी रंजिश नहीं है। उन्होंने जो कुछ भी किया, जनता ने उन्हें सबक सिखाया है।

लोकसभा चुनाव 2024 के नतीजों और नई सरकार को लेकर सस्पेंस के बीच प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने राष्ट्रपति को अपना इस्तीफा सौंप दिया है। राष्ट्रपति ने भी उनका इस्तीफा स्वीकार कर लिया। हालाँकि, नई सरकार के गठन तक पीएम मोदी कार्यवाहक प्रधानमंत्री बने रहेंगे। पीएम मोदी ने राष्ट्रपति भवन पहुँचकर अपना इस्तीफा सौंपा। पीएम नरेंद्र मोदी 8 जून को पीएम पद की शपथ लेंगे। इस बीच, एनडीए ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को संसदीय दल का नेता चुन लिया है।

बता दें कि लोकसभा चुनाव 2024 के नतीजे 4 जून को सामने आए, जिसमें भारतीय जनता पार्टी के नेतृत्व वाले राष्ट्रीय जनतांत्रिक गठबंधन ने तीसरी बार बहुमत हासिल कर लिया है। बीजेपी की अगुवाई में एनडीए गठबंधन ने 292 सीटें जीती हैं। हालाँकि, बीजेपी अकेले बहुमत के आँकड़े को नहीं छू पाई और उसे 240 सीटों से ही संतोष करना पड़ा। विपक्षी इंडी गठबंधन ने 234 सीटों पर जीत हासिल की। इंडी गठबंधन की सबसे बड़ी पार्टी 99 सीटों तक ही सीमित रह गई।

मोहम्मद सरफुद्दीन की चिकन बिरयानी शॉप पर राष्ट्रीय ध्वज का अपमान: कारीगर तिरंगे से उतार रहा था पका मांस, रोकने वालों को देने लगा गालियाँ, पुलिस ने दबोचा

उत्तर प्रदेश के बरेली जिले में मंगलवार (4 जून 2024) को राष्ट्रीय ध्वज तिरंगे का अपमान करने का मामला सामने आया। यह अपमान चिकन बिरयानी बेचने वाले मोहम्म्द सरफुद्दीन की दुकान पर किया गया है। मुरादाबादी चिकन कॉर्नर नाम की इस दुकान पर कारीगर साहब ने राष्ट्रीय ध्वज से कड़ाही उतारी। दुकान के पास से गुजर रहे एक हिन्दू युवक ने जब ऐसा करने से रोका तो उसे गालियाँ दी गईं।

पुलिस ने सरफुद्दीन और साहब को हिरासत में ले लिया है। दोनों के खिलाफ FIR दर्ज करके जाँच की जा रही है। यह घटना बरेली जिले के थाना क्षेत्र इज्जतनगर की है। यहाँ 4 जून को आदित्य मौर्य नाम के युवक ने पुलिस में शिकायत दर्ज करवाई है। आदित्य ने बताया कि 4 जून को वो अपने एक साथी वकील के साथ बरेली के कर्मचारी नगर से गुजर रहे थे।

इसी दौरान आदित्य ने देखा कि मुरादाबादी चिकन कॉर्नर नाम की एक नॉनवेज की दुकान पर एक व्यक्ति पके मांस से भरी कड़ाही उठा रहा था। आदित्य ने आरोपित को ऐसा करने से रोका तो वह गालियाँ देने लगा। वह समझाने पर भी मानने को तैयार नहीं हुआ। आदित्य ने बताया कि कारीगर की हरकत से राष्ट्र ध्वज काफी गंदा हो चुका था। उन्होंने दुकान के कारीगर से तिरंगे को माँगा, लेकिन नहीं दी।

इस दौरान उन्होंने आदित्य को गालियाँ देना जारी रखा। आख़िरकार आदित्य ने 112 नंबर डायल करके पुलिस बुलाई। पुलिस ने राष्ट्र ध्वज को कब्ज़े में ले लिया। आरोपितों की वीडियोग्राफ़ी भी की गई। दुकान मालिक का नाम मोहम्मद सरफुद्दीन और कारीगर का नाम साहब है। दोनों को हिरासत में लेकर चालान कर दिया गया है। मामले की जाँच व अन्य जरूरी कार्रवाई की जा रही है।

ऑपइंडिया के पास FIR कॉपी मौजूद है। दोनों आरोपितों के खिलाफ IPC की धारा 504 के साथ राष्ट्र गौरव अपमान निवारण अधिनियम 1971 की धारा 2 के तहत कार्रवाई की गई है। हिन्दू संगठनों ने इस हरकत पर नाराजगी जताई है। उन्होंने पुलिस से दोनों आरोपितों के खिलाफ कड़ी कार्रवाई के साथ सरफुद्दीन के होटल की वैधानिकता की भी जाँच करने की माँग उठाई है।

तीसरी बार सत्ता में लौटे PM मोदी लेकिन AAP विधायक सोमनाथ भारती ने सिर मुँडवाने से किया इनकार, खुद को बता रहे सनातनी: कहा – बहुमत मिलता तो ये होती लोकतंत्र की हत्या

लोकसभा चुनाव 2024 में NDA 292 सीटों के साथ सरकार बनाने जा रही है और भाजपा ने अकेले दम पर 240 सीटें प्राप्त की हैं। मालवीय नगर से लगातार तीसरी बार विधायक सोमनाथ भारती ने चुनाव परिणाम घोषित होने से पहले कहा था कि अगर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी फिर से सरकार में आते हैं तो वो अपना बाल मुँडवा लेंगे और चेहरा काला कर लेंगे। हालाँकि, अब जब तस्वीर साफ़ हो गई है और नरेंद्र मोदी लगातार तीसरी बार शपथ लेने जा रहे हैं, तब वो अपने इस बयान से पलट गए हैं।

अब AAP विधायक सोमनाथ भारती ने कहा है कि नरेंद्र मोदी से उन्हें कोई तकलीफ नहीं है, तकलीफ इससे है कि उन्होंने जिस तरह से अपने शासन के दौरान हुनर दिखाए हैं। सोमनाथ भारती ने कहा कि जनता जिसको मरजीबनाए, जनता मालिक है और लोकतंत्र में जनता ही सब कुछ है, लेकिन ‘400 पार’ का नारा देकर जनता ने उन्हें 240 सीटें दी हैं। सोमनाथ भारती ने दावा किया कि जनता ने नरेंद्र मोदी को प्रधानमंत्री बनाने का जनमत नहीं दिया है।

सोमनाथ भारती ने कहा, “160 सीटें नरेंद्र मोदी को नहीं मिल पाईं, इसीलिए नैतिकता के आधार पर नरेंद्र मोदी को प्रधानमंत्री पद से इस्तीफा देकर चला जाना चाहिए। क्योंकि, ये दायित्व जनता उनको तीसरी बार नहीं देना चाहती। जहाँ तक सिर मुँडाने की बात है, मैं एक सनातनी हूँ और एक सनातनी के घर में जब किसी की मृत्यु होती है तो वो संस्कार करवाने के बाद अपना सिर मुँडवाता है। नरेंद्र मोदी को अगर मैंडेट मिलता, तो भाजपा को 272 से ज़्यादा आता।”

सोमनाथ भारती ने दावा किया कि भाजपा को बहुमत से नीचे सीटें मिली हैं। सोमनाथ भारती ने कहा कि अगर पीएम मोदी को मैंडेट मिलता तो वो मानते कि लोकतंत्र की हत्या हुई है, और जब किसी की मौत हो तो संस्कार करने के बाद सिर मुँडवा कर इसका इजहार किया जाता है और वही उन्होंने कहा था। सोमनाथ भारती पर अपनी पत्नी को कुत्ते से कटवाने का आरोप भी लगा था। उत्तर प्रदेश में उनके चेहरे पर स्याही भी फेंक दी गई थी। वो अक्सर बड़बोलेपन के लिए जाने जाते रहे हैं।

घर वापसी कर रुखसार बनी राधा, कुमेंद्र संग मंदिर में रचाई शादी: बोली- भगवान राम में पहले से ही है मेरी आस्था

उत्तर प्रदेश के बरेली जिले में बुधवार (5 जून 2024) को एक मुस्लिम लड़की ने घर वापसी की है। लड़की का नाम रुखसार है, जो अब राधा नाम से जानी जाएँगी। रुखसार ने एक मंदिर में वैदिक विधि-विधान से हिन्दू युवक कुमेंद्र कुमार से विवाह किया है। हिंदू संगठनों ने रुखसार का कन्यादान व अन्य वैवाहिक कार्यक्रम सम्पन्न करवाया। रुखसार ने बताया कि भगवान राम में उनकी गहरी आस्था है।

यह मामला बरेली के इज्जतनगर थाना क्षेत्र का है। यहाँ पड़ने वाले भीटानाथ महादेव मंदिर में बुधवार (5 जून) को कुमेंद्र कुमार अपनी प्रेमिका रुखसार के साथ पहुँचे। इन दोनों ने विवाह करने की इच्छा जताई। कुमेंद्र की तरफ से उनके माता-पिता और रिश्तेदार मौजूद थे। रुखसार के पक्ष से हिन्दू संगठन के सदस्य मंदिर में आए। शादी से पहले रुखसार ने शुद्धिकरण करवा के हिन्दू धर्म स्वीकार किया।

रुखसार ने शुद्धिकरण के बाद अपना नाम राधा रखा। रुखसार ने बताया कि बचपन से ही उनकी आस्था भगवान राम में रही है। शुद्धिकरण के बाद 20 वर्षीया रुखसार ने वैदिक विधि-विधान से कुमेंद्र कुमार को अपना जीवनसाथी चुना। इस दौरान उन्होंने मंदिर में स्थापित देवी-देवताओं को बारी-बारी प्रणाम किया और उनके जयकारे लगाए। शादी के बाद जय श्रीराम के सामूहिक नारे लगाए गए।

रुखसार ने इस शादी से खुद को बेहद खुश बताया। बकौल रुखसार, उन्होंने यह कदम बिना किसी जोर-जबरदस्ती के तमाम दबाव से मुक्त होकर उठाया है। इस शादी को करवाने वाले दल में शामिल विहिप कार्यकर्ता हिमांशु पटेल ने ऑपइंडिया से बात की। हिमांशु ने बताया कि 26 वर्षीय कुमरेन्द्र और रुखसार मूल रूप से बरेली जिले के अलग-अलग थाना क्षेत्र के रहने वाले हैं।

उन्होंने बताया कि रुखसार के अब्बा मुन्ने बख्स का इंतकाल हो चुका है। अभिभावक के तौर पर घर में सिर्फ उनकी अम्मी हैं। दरअसल, रुखसार और कुमेंद्र 3 साल से देहरादून में एक साथ एक ही सिलाई फैक्ट्री में काम करते थे। यहीं पर दोनों की दोस्ती हो गई, जो बाद में प्यार में बदल गई।

रुखसार ने अपने घर और रिश्तेदारी में कुमेंद्र से शादी की बात चलाई तो इनकार कर दिया गया। उन पर पहरे भी लगा दिए गए। आखिरकार तमाम बंधनों को तोड़ते हुए रुखसार भीटानाथ मंदिर पहुँचकर कुमेंद्र संग शादी के बंधन में बँध गईं। शादी के बाद रुखसार अपने पति के साथ उनके घर चली गईं।

उत्तर प्रदेश, महाराष्ट्र, बंगाल, झारखंड… कई राज्यों में हारे मोदी 2.0 के मंत्री, पराजितों में 4 कैबिनेट तो 14 राज्य मंत्री: स्मृति ईरानी ने भी खोई अमेठी सीट

लोकसभा चुनाव 2024 में मोदी सरकार के 18 मंत्रियों को हार का सामना करना पड़ा है। इस लोकसभा चुनाव में 4 केन्द्रीय कैबिनेट मंत्री तो वहीं 14 केन्द्रीय राज्य मंत्री भी हारे हैं। हारने वालों में स्मृति ईरानी से लेकर अर्जुन मुंडा जैसे हैवीवेट नाम शामिल हैं।

कौन-कौन हारा?

केंद्र सरकार में महिला और बाल कल्याण विकास मंत्री स्मृति ईरानी उत्तर प्रदेश की अमेठी सीट से चुनाव हार गईं। उन्हें यहाँ कॉन्ग्रेस के किशोरी लाल शर्मा के हाथों पराजय का सामना करना पड़ा है। अमेठी में 2019 में स्मृति ईरानी ने राहुल गाँधी को हराया था।

स्मृति ईरानी के अलावा उत्तर प्रदेश में ही केन्द्रीय राज्य मंत्री संजीव सिंह बालियान भी चुनाव हार गए। वह उत्तर प्रदेश की मुजफ्फरनगर सीट से सपा के हरेन्द्र मलिक के हाथों हारे। वह मोदी सरकार में मत्स्य, पशुपालन और डेयरी मामलों के मंत्री थे। उत्तर प्रदेश में ही कैबिनेट मंत्री महेन्द्रनाथ पांडेय की हार भी हुई। महेन्द्रनाथ पाण्डेय चंदौली से सपा के बीरेंद्र सिंह से हार गए। महेंद्र नाथ पाण्डेय मोदी सरकार में भारी उद्योगों के मंत्री थे।

उत्तर प्रदेश की खीरी लोकसभा सीट से देश के गृह राज्य मंत्री रहे अजय मिश्र टेनी की भी हार हो गई, उन्हें सपा के उत्कर्ष वर्मा ने हरा दिया। उत्तर प्रदेश की फतेहपुर सीट से साध्वी निरंजन ज्योति भी हार गईं। उन्हें सपा के नरेश चन्द्र ने हरा दिया। वह मोदी सरकार में खाद्य वितरण, ग्रामीण विकास और उपभोक्ता मामलों की राज्य मंत्री थी।

उत्तर प्रदेश की मोहनलालगंज सीट से केन्द्रीय आवासन और शहरी कार्य राज्यमंत्री रहे कौशल किशोर भी हार गए। उन्हें सपा के आरके चौधरी ने पटखनी दी। उत्तर प्रदेश के ही जालौन से MSME मामलों के केन्द्रीय मंत्री भानु प्रताप सिंह भी हार गए। उन्हें सपा प्रत्याशी नारायण दास अहिरवार ने हरा दिया।

महाराष्ट्र में भी भाजपा के दो केन्द्रीय मंत्रियों की हार हुई। महाराष्ट्र की जालना लोकसभा सीट से रावदानवे साहब को कॉन्ग्रेस को वैजनाथ राव ने हरा दिया। वह मोदी सरकार में कोयला और खनन मामलों के राज्यमंत्री थे। इसके अलावा भिवंडी लोकसभा सीट से केन्द्रीय राज्य मंत्री कपिल पाटील की हार हो गई, उन्हें एनसीपी शरद पवार के गोपीनाथ म्हात्रे ने हराया। महाराष्ट्र के पड़ोसी राज्य कर्नाटक की बीदर सीट से भगवंत खुबा भी हारे। उन्हें कॉन्ग्रेस के ईश्वर खंद्रे ने हराया। वह उर्वरक और रसायन मामलों के राज्य मंत्री थे।

पश्चिम बंगाल में भी भाजपा के मंत्रियों की हार हो गई। पश्चिम बंगाल की कूच बिहार सीट से केन्द्रीय गृह राज्य मंत्री निशीथ प्रमाणिक भी हार गए। उन्हें TMC के जगदीश चन्द्र बर्मा ने हराया। पश्चिम बंगाल की ही बांकुरा सीट से शिक्षा राज्य मंत्री सुभाष सरकार भी हार गए। उन्हें TMC के अरुण चक्रवर्ती से हार मिली। राजस्थान के बाड़मेर से केन्द्रीय कृषि राज्य मंत्री कैलाश चौधरी हार गए, उन्हें कॉन्ग्रेस के उम्मेदाराम बेनीवाल ने हरा दिया। बिहार की आरा सीट से केन्द्रीय कैबिनेट मंत्री आरके सिंह हार गए। उन्हें CPIM के सुदामा प्रसाद ने हरा दिया।

केरल में भी भाजपा के दो मंत्री हारे। केरल के अत्तिंगल में केन्द्रीय विदेश राज्य मंत्री वी मुरलीधरन हारे, उन्हें कॉन्ग्रेस के अदूर प्रकाश ने हराया। केरल की तिरुवनंतपुरम सीट से आईटी मामलों के केन्द्रीय राज्य मंत्री राजीव चंद्रशेखर को कॉन्ग्रेस नेता शशि थरूर के हाथों हार मिली।

झारखंड में खूंटी लोकसभा सीट से केन्द्रीय कैबिनेट कृषि कल्याण और ST कल्याण मंत्री अर्जुन मुंडा भी चुनाव हार गए, उन्हें कॉन्ग्रेस के कालीचरण मुंडा ने हरा दिया। तमिलनाडु की नीलगिरी सीट से केन्द्रीय राज्य सूचना प्रसारण मामलों के मंत्री एल मुरुगन भी चुनाव हार गए, उन्हें DMK के ए राजा ने हराया।

पिता को बना दिया ‘किंग मेकर’, आंध्र में ला दी NDA की आँधी: जिस सीट पर TDP का नामलेवा नहीं वहाँ से रिकॉर्ड तोड़ जीत, कौन हैं नारा लोकेश

साल 2024 में हुए लोकसभा और विधानसभा चुनाव दोनों में ही तेलुगु देशम पार्टी का प्रदर्शन सराहनीय दिखा। इस बीच टीडीपी के महासचिव नारा लोकेश की लगातार चर्चा रही। उन्हें लेकर कहा गया कि उनकी वजह से ही आंध्र प्रदेश में टीडीपी को बढ़त मिली।

उन्होंने खुद विधानसभा चुनाव में मंगलगिरी निर्वाचन क्षेत्र से वाईएसआरसीपी के मुरुगुडु लावण्या के खिलाफ 91,413 वोटों के रिकॉर्ड अंतर से जीत हासिल की। ​​लोकेश को 1,67,710 वोट मिले, जबकि लावण्या को 76,297 वोट मिले। लोकेश की जीत के साथ, टीडीपी ने लगभग चालीस वर्षों में पहली बार मंगलगिरी में जीत हासिल की है।

41 वर्षीय लोकेश, टीडीपी प्रमुख चंद्रबाबू नायडू के बेटे हैं और स्टैनफॉर्ड यूनिवर्सिटी से उन्होंने एबीए की पढ़ाई की है। इन चुनावों में उनकी भूमिका अहम थी। साल 2019 के विधानसभा चुनाव में जब टीडीपी को मात्र 23 सीट पाकर सिमटना पड़ा था उस समय कहा गया था कि ये तेलुगु देसम पार्टी का अंत है। हालाँकि, टीडीपी ने अपनी लड़ाई लड़ी और इन चुनावों में अपनी जगह बनाई।

पाँच साल बाद टीडीपी को 135 सीटें मिली हैं। उनकी सहयोगी पार्टी पवन कल्याण जन सेना पार्टी को 21 सीटें मिली हैं। भाजपा ने 8 सीटें जीती हैं तो कुल गठबंधन की सीट 164 हो गई है। ये प्रचंड बहुमत टीडीपी की सरकार को 175 विधानसभा सीटों पर मिला है।

इस जीत का प्रमुख कारण नारा लोकेश को इसलिए भी मिल रहा है क्योंकि नारा लोकेश युवाओं के बीच बहुत फेमस थे। सोशल मीडिया पर उनकी तमाम रील्स और शॉर्ट्स चल रहे थे। उन्हें आंध्र प्रदेश और टीडीपी का भविष्य कहा जा रहा था।

इस पूरी जीत में नारा लोकेश द्वारा की गई 400 दिनों की पदयात्रा को भी अहम बताया जा रहा है। उन्होंने चुनावी प्रचार में खुद को हर वक्त आगे रखा। वह एक महीने तक रोजाना 28 हजार कदम चलते थे। लोगों से मिलते थे, उनकी बात समझते थे।

जनवरी 2023 में शुरू हुई उनकी पदयात्रा में 4000 किलोमीटर दूरी को कवर किया गया था। इसका मकसद था कि लोग उनकी पार्टी से जमीनी स्तर पर जुड़ें। पार्टी की नीतियों और लक्ष्यों को जानें।

उनकी राजनीति को हवा तब मिली जब उनके पिता को भ्रष्टाचार के आरोप में गिरफ्तार किया गया। इसके बाद उन्होंने पदयात्रा रोककर पार्टी का कार्यभार थामा। अपनी शिक्षा और अनुभव से पार्टी को मजबूत किया। उन्होंने यात्रा से भी पहले पार्टी को डिजिटली मजबूत करना शुरू कर दिया था। उन्होंने पार्टी में लोगों को शामिल और पार्टी सदस्यों के मैनेज करने के लिए व्हॉट्सएप और टेलीग्राम जैसे प्लेटफॉर्म का बराबर इस्तेमाल किया। नतीजा ये हुआ कि पदयात्रा से पहले उनके साथ 5 लाख लोग जुड़े।

अब उनके राजनैतिक करियर की बात करें तो एमएलसी चुने जाने पर ही लोकेश को 2017-2019 के बीच नायडू कैबिनेट में आईटी, पंचायती राज और ग्रामीण विकास मंत्री का पद मिल गया था। लोगों ने ये देख उनका काफी विरोध भी किया था क्योंकि उन्हें लोगों द्वारा निर्वाचित नहीं किया गया था। हालाँकि बाद में वो माहौल शांत हुआ। बताया जाता है कि नारा लोकेश ने एनटीआर मेमोरियल ट्रस्ट में प्रमुख भूमिका निभाई थी जो ये स्वास्थ्य सेवा, कौशल और आपदा प्रबंधन पर काम करता है। इसके अलावा आँध्र प्रदेश में नारा लोकेश भाजपा और टीडीपी के गठबंधन के कोर समर्थक रहे हैं।

देश के मन में आज है जो सवाल, PM मोदी ने 5 साल पहले ही दे दिया था उसका जवाब: कहा था – गठबंधन राष्ट्रीय एकता का माध्यम, क्षेत्रीय मसलों के समाधान का रास्ता

नरेंद्र मोदी गुजरात में बतौर मुख्यमंत्री 4 और केंद्र में प्रधानमंत्री के रूप में 2 बार सरकार का नेतृत्व कर चुके हैं, ऐसे में 2024 लोकसभा चुनाव के परिणाम घोषित होने के बाद वो 7वीं सरकार का नेतृत्व सँभालने जा रहे हैं। हालाँकि, ये पहली बार होगा जब वो किसी ऐसी गठबंधन सरकार का नेतृत्व करेंगे, जहाँ भाजपा बहुमत से पीछे हो। चंद्रबाबू नायडू की TDP, नीतीश कुमार की JDU, चिराग पासवान की RLJP और एकनाथ शिंदे की शिवसेना (शिंदे) को उन्हें साथ लेकर चलना है।

लोग चर्चा कर रहे हैं कि इस नई चुनौती को प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी किस तरह से लेंगे, UCC और NRC जैसे कोर एजेंडों का क्या होगा और क्या संसद ठीक से चल पाएगी? इन सबका जवाब पीएम मोदी के एक पुराने बयान में भी छिपा है, जो बताता है कि इस तरह की चुनौती के लिए वो पहले से ही तैयार हैं। इसके लिए हमें 5 साल पीछे चलना होगा, तब 2024 नहीं बल्कि 2019 लोकसभा चुनाव चल रहा था और प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी इस बार की तरह ही ज़ोर-शोर से प्रचार-प्रसार में जुटे थे।

13 मई, 2019 को News24 के मानक गुप्ता ने पीएम मोदी से ये इंटरव्यू लिया था, तब 6 चरण के चुनाव हो चुके थे और सिर्फ अंतिम चरण बाकी था। वहीं गठबंधन के परिदृश्य में पूछे गए सवाल पर पीएम मोदी ने कहा था कि उन्हें गठबंधन सरकार चलाने का पुराना अनुभव है। उन्होंने याद किया कि कैसे जब वो संगठन में थे तब हरियाणा में बंसीलाल और ओमप्रकाश चौटाला की सरकार में उन्होंने काम किया। इसी तरह जम्मू कश्मीर में फारूक अब्दुल्ला और मुफ़्ती मोहम्मद सईद के साथ भी उन्होंने काम किया।

नरेंद्र मोदी ने गिनाया था कि कैसे उन्हें गुजरात में चिमनभाई पटेल के साथ काम करने का अनुभव है। PM मोदी का तब कहना था कि केंद्र में पूर्ण बहुमत की सरकार चलाने के बावजूद उन्होंने अहंकार को नहीं पाला, उनका ये मत है कि हिंदुस्तान की राजनीति ध्रुवीकरण वाली राजनीति है और एक खेमे का भाजपा नेतृत्व करती है तो दूसरे का कॉन्ग्रेस, कितना भी बहुमत क्यों न आए हमें सभी साथियों को साथ लेकर ही चलना चाहिए क्योंकि इससे न सिर्फ क्षेत्रीय मुद्दों का समाधान किया जा सकता है बल्कि देश की एकता भी बनाई रखी जा सकती है।

PM नरेंद्र मोदी ने तब कहा था, “हमारे लिए गठबंधन एक चुनावी चहल-पहल नहीं है, ये हमारे लिए क्षेत्रीय राजनीतिक दलों को जोड़ कर रखने के देश की एकता बनाए रखने के हमारे महान प्रयासों का एक पहलू है।” इस बार NDA में जयंत चौधरी की RLD, HD देवगौड़ा की JDS और पवन कल्याण की JsP भी है, जिसकी दो-दो सीटें हैं। इसी तरह ‘अपना दल (सोनेलाल)’ से अनुप्रिया पटेल और HAM (सेक्युलर) से जीतन राम माँझी ने जीत दर्ज की है। इस तरह NDA ने 292 सीटों पर जीत दर्ज की है।

अभी जेल में ही कटेंगे अरविंद केजरीवाल के दिन, दिल्ली की कोर्ट ने न्यायिक हिरासत 14 दिनों के लिए बढ़ाई: खराब सेहत का हवाला दे माँगी थी राहत

दिल्ली शराब घोटाला केस में मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल को बुधवार (05 जून 2024) को राउज एवेन्यू कोर्ट से बड़ा झटका लगा है। कोर्ट ने उनकी अंतरिम जमानत याचिका खारिज कर दी है। केजरीवाल ने सेहत का हवाला देते हुए सात दिनों की अंतरिम जमानत की माँग की थी, लेकिन कोर्ट ने कोई राहत देने से इनकार कर दिया, लेकिन जेल प्रशासन को ये निर्देश दिया है कि वो अरविंद केजरीवाल की सेहत की पूरी जाँच कराए और रिपोर्ट कोर्ट को सौंपे।

राऊज एवेन्यू कोर्ट ने अरविंद केजरीवाल की न्यायिक हिरासत भी 14 दिन के लिए बढ़ा दी है। अब केजरीवाल को 19 जून तक जेल में ही रहना होगा। अपने आदेश में कोर्ट ने संबंधित अधिकारियों को जरूरी मेडिकल टेस्ट कराने का निर्देश दिया है। विशेष न्यायाधीश कावेरी बावेजा ने तिहाड़ जेल अधिकारियों को न्यायिक हिरासत में केजरीवाल की चिकित्सा आवश्यकताओं का ध्यान रखने का निर्देश दिया है।

बता दें कि केजरीवाल को लोकसभा चुनाव में प्रचार के लिए सुप्रीम कोर्ट द्वारा 10 मई को दी गई अंतरिम जमानत पर एक जून तक के लिए जेल से रिहा किया गया था। इसके बाद उन्होंने अंतरिम जमानत को सात दिन के लिए बढ़ाने की माँग करते हुए सुप्रीम कोर्ट का रुख किया था। हालाँकि, सुप्रीम कोर्ट ने 29 मई को उनकी याचिका को तत्काल सूचीबद्ध करने से इनकार कर दिया था।

इस याचिका में केजरीवाल ने गुहार लगाई थी कि उन्हें मेडिकल जाँच कराने के लिए समय चाहिए क्योंकि उनका वजन कम हो रहा है और कीटोन का स्तर बढ़ा है। इसके बाद उन्होंने चिकित्सा आधार पर अंतरिम जमानत की माँग करते हुए विशेष सीबीआई-ईडी अदालत का रुख किया। 1 जून को उनकी याचिका पर सुनवाई करते हुए विशेष न्यायाधीश कावेरी बावेजा की अदालत ने अपना आदेश पाँच जून के लिए सुरक्षित रख लिया था। अरविंद केजरीवाल की अंतरिम जमानत का विरोध करते हुए ईडी ने कहा था कि केजरीवाल अदालत को गुमराह कर रहे हैं। ईडी ने आरोप लगाया कि लगातार चुनाव प्रचार कर रहे केजरीवाल का स्वास्थय तब खराब हुआ जब सरेंडर करने का समय आया।

गौरतलब है कि अरविंद केजरीवाल को ईडी ने 21 मार्च 2024 को गिरफ्तार किया था। कोर्ट ने उन्हें 1 जून तक की अंतरिम बेल दी थी, ताकि वो लोकसभा चुनाव में प्रचार कर सकें। इसके बाद उन्होंने तिहाड़ जेल पहुँचकर सरेंडर कर दिया था। अरविंद केजरीवाल की नियमित जमानत याचिका अभी पेंडिंग है। आगामी 7 जून 2024 को उस जमानत याचिका पर सुनवाई होनी है।