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लोकसभा चुनाव नतीजों के साइड इफेक्ट्स: दिल्ली में टूटा कॉन्ग्रेस का ‘इंडी’ गठबंधन, अकेले विधानसभा चुनाव लड़ेगी AAP, सभी 7 सीटों पर मिली थी हार

राजधानी दिल्ली में आम आदमी पार्टी और कॉन्ग्रेस का गठबंधन टूट गया है। आम आदमी पार्टी ने विधायकों की बैठक बुलाई थी। इस बैठक के बाद आम आदमी पार्टी ने ऐलान किया है कि दिल्ली में अब कॉन्ग्रेस पार्टी और आम आदमी पार्टी का गठबंधन नहीं होगा। दिल्ली में आम आदमी पार्टी विधानसभा चुनाव में अकेले लड़ेगी।

लोकसभा चुनाव में कॉन्ग्रेस और आम आदमी पार्टी ने दिल्ली और गुजरात में साथ चुनाव लड़ा था, लेकिन दोनों ही पार्टियों की करारी हार हुई थी। लोकसभा चुनाव में हार के बाद दिल्ली में आम आदमी पार्टी ने विधायकों की समीक्षा बैठक बुलाई थी। इस बैठक के बाद आम आदमी पार्टी ने कॉन्ग्रेस को छोड़ते हुए विधानसभा चुनाव में अकेले उतरने का ऐलान किया।

दिल्ली सरकार के मंत्री और आम आदमी पार्टी के सीनियर लीडर गोपाल राय ने मीडिया को संबोधित करते हुए कहा कि हमने लोकसभा चुनाव में कॉन्ग्रेस पार्टी के साथ गठबंधन करने का फैसला किया था लेकिन विधानसभा चुनाव हम अकेले ही लड़ेंगे। उन्होंने आगे कहा कि यह पहले से तय था कि यह गठबंधन लोकसभा चुनाव तक के लिए है। लोकसभा चुनाव हमने ईमानदारी के साथ लड़ा था। लेकिन अब ये गठबंधन आगे नहीं बढ़ेगा।

गोपाल राय ने कहा कि हम दिल्ली की जनता के साथ मिलकर इस लड़ाई को जीतेंगे। आम आदमी पार्टी पूरी ताकत के साथ विधानसभा चुनाव अकेले लड़ेगी।

बता दें कि आम आदमी पार्टी ने लोकसभा चुनाव में इंडिया अलायंस के साथ गठबंधन कर चुनाव लड़ा था। दिल्ली में कॉन्ग्रेस ने 3 और आम आदमी पार्टी ने 4 सीटों पर चुनाव लड़ा था, लेकिन सभी सीटों पर उसे मुँह की खानी पड़ी थी औरदिल्ली की सातों सीटें बीजेपी की झोली में गई थीं।

मौजूदा समय में 70 विधानसभा सीटों पर आप के 62 विधायक हैं। गठबंधन के उम्मीदवार आप के 44 विधायकों के क्षेत्रों में धराशायी हो गए। लोकसभा चुनाव में उतरे आप के चार उम्मीदवारों में से तीन वर्तमान में विधायक हैं, लेकिन इन तीनों में से दो अपने ही विधानसभा क्षेत्र में बीजेपी उम्मीदवार से हार गए।

‘पंजाब में बढ़ते आतंकवाद को हम कैसे हैंडल करेंगे?’: BJP सांसद कंगना रनौत बोलीं- मैं ठीक हूँ, थप्पड़ मारने वाली CISF कॉन्स्टेबल कुलविंदर कौर निलंबित

बीजेपी सांसद कंगना रनौत को एयरपोर्ट के अंदर थप्पड़ मारने वाली सीआईएसफ कॉन्स्टेबल कुलविंदर कौर को निलंबित कर दिया गया है। सीआईएसएफ ने इस मामले में आरोपित के खिलाफ जाँच भी शुरू कर दी है। बता दें कि गुरुवार (06 जून 2024) को चंडीगढ़ एयरपोर्ट पर अभिनेत्री से राजनेता बनीं कंगना रनौत के साथ सीआईएसएफ की एक कॉन्स्टेबल ने दुर्व्यवहार करते हुए उन्हें थप्पड़ मार दिया। सीआईएसएफ कॉन्स्टेबल कुलविंदर कौर ने स्वीकार किया कि उसने कंगना रनौत को थप्पड़ मारा है क्योंकि कंगना ने किसान आंदोलन को लेकर बयानबाजी की थी, जिसमें उसकी माँ भी बैठी थी।

कंगना रनौत का बयान

मंडी से बीजेपी की सांसद कंगना रनौत ने इस बाबत एक बयान भी जारी किया है। उन्होंने वीडियो में कहा, “नमस्ते दोस्तों, मुझे बहुत ज्यादा फोन कॉल्स आ रहे हैं, मीडिया के भी, मेरे शुभ चिंतकों के भी। मैं सुरक्षित हूँ। आज चंडीगढ़ एयरपोर्ट पर जो हादसा हुआ, वह सिक्योरिटी चेक के साथ हुआ। वहाँ सिक्योरिटी चेक कर जब मैं निकली तो दूसरे कमरे में सीआईएसएफ की जो सुरक्षाकर्मी थीं। उन्होंने सामने से आकर मेरे चेहरे पर मारा। इसके बाद वो गालियाँ देने लगीं। जब उनसे पूछा कि उन्होंने ऐसा क्यों किया, तो उन्होंने कहा कि वो किसान आंदोलन को सपोर्ट करती हैं। मैं सुरक्षित हूँ, लेकिन मेरी चिंता ये है कि जो आतंकवाद और उग्रवाद पंजाब में बढ़ रहा है, उसे हम कैसे हैंडल करेंगे।”

कंगना की शिकायत के बाद लिया गया एक्शन

सीआईएसएफ की महिला कॉन्स्टेबल का एक वीडियो सोशल मीडिया पर सामने आया है, जिसमें वो कहती दिख रही हैं, ‘इसने (कंगना रनौत ने) बयान दिया था कि 100-100 रुपये में लोग किसान आंदोलन में बैठे हैं। मेरी माँ किसान आंदोलन में बैठी थी। ये क्या वहाँ बैठेगी?’

बता दें कि यह पूरी घटना गुरुवार दोपहर 3.30 बजे की है, जब कंगना रनौत चंडीगढ़ एयरपोर्ट से दिल्ली के लिए रवाना हुई थीं। इसी दौरान उनके साथ यह घटना घटी। इसके बाद कंगना रनौत ने इस मामले की शिकायत पुलिस में जिसके बाद अब एक्शन लेते हुए महिला कॉन्स्टेबल कुलविंदर कौर को सस्पेंड कर दिया गया है। सीआईएसएफ इस मामले की जाँच कर रही है, जाँच के बाद विभागीय कार्रवाई पूरी की जाएगी।

‘चुनाव नतीजों के बाद TMC के गुंडों द्वारा BJP कार्यकर्ताओं पर हमला बंगाल की संस्कृति बन गई’: सुवेंदु अधिकारी ने राज्यपाल को लिखी चिट्ठी, कहा- 2021 जैसी घटनाएँ रोकें

पश्चिम बंगाल में विपक्ष के नेता सुवेंदु अधिकारी ने गुरुवार (6 जून 2024) को राज्यपाल सीवी आनंद बोस को पत्र लिखकर चुनाव बाद की हिंसा में सत्ताधारी तृणमूल कॉन्ग्रेस (TMC) की कथित भूमिका पर चिंता जताई। उन्होंने अपने पत्र में राज्यपाल से साल 2021 में चुनाव के बाद ऐसी स्थिति की पुनरावृत्ति रोकने के लिए कदम उठाने का आग्रह किया।

पश्चिम बंगाल के राज्यपाल को लिखे पत्र में भाजपा नेता सुवेंदु अधिकारी ने कहा कि 4 जून 2024 के संसदीय चुनाव के नतीजे घोषित होने के बाद पश्चिम बंगाल में ‘सत्तारूढ़ सरकार के गुंडे’ भाजपा के कार्यकर्ताओं को लेकर पागल हो गए हैं। उन्होंने कहा कि यह हिंसा पश्चिम बंगाल के लिए पर्याय बन चुकी है।

भाजपा नेता ने कहा, “यह बंगाल में 2021 के विधानसभा चुनाव परिणामों की घोषणा के बाद हुई घटनाओं की पुनरावृत्ति प्रतीत होती है, जिसके परिणामस्वरूप कई भाजपा कार्यकर्ताओं की मौत हो गई थी।” उन्होंने कहा कि चुनावों के बाद केंद्रीय सशस्त्र बलों का उपयोग बिगड़ती स्थिति को नियंत्रित करने के लिए नहीं किया जा रहा है और सत्तारूढ़ पार्टी के गुंडे भाजपा कार्यकर्ताओं को निशाना बना रहे हैं।

It has now become the culture of West Bengal, that the TMC Party goons will attack the BJP Karyakartas after the declaration of results.
In a repeat of the incidents which had transpired after the declaration of the 2021 Assembly Election results, which caused deaths of several… pic.twitter.com/3czEYAjODb

— Suvendu Adhikari (Modi Ka Parivar) (@SuvenduWB) June 6, 2024

सुवेंदु अधिकारी ने कहा, “चुनाव के बाद भी केंद्रीय सशस्त्र अर्धसैनिक बलों को तैनाती की गई है, लेकिन बिगड़ती स्थिति को नियंत्रित करने के लिए ऐसे बलों का उपयोग नहीं किया जा रहा है।” उन्होंने कहा कि मतगणना के 24 घंटे के भीतर राज्य भर में 20 से अधिक घटनाएँ सामने आई हैं। ये घटनाएँ आसनसोल, दुर्गापुर, मेदनीपुर, झारग्राम, बाँकुरा, कूच बिहार, हुगली, बैरकपुर, बारासात और उत्तर 24 परगना में हुई हैं।

अपने पत्र में उन्होंने आगे लिखा, “शुरुआती संकेतों से ऐसा लगता है कि टीएमसी से जुड़े गुंडे उन्हीं भयावह घटनाओं को दोहराने की योजना बना रहे हैं, जो 2021 में विधानसभा चुनाव की घोषणा के बाद हुई थीं, ताकि भाजपा के कार्यकर्ताओं और कार्यकर्ताओं में डर की भावना पैदा की जा सके।” अधिकारी ने राज्यपाल से उन क्षेत्रों का दौरा करने का आग्रह किया जहाँ चुनाव के बाद हिंसा हो रही है।

बंगाल विधानसभा में विपक्ष के नेता ने कहा, “मैं आपसे अनुरोध करता हूँ कि आप उन क्षेत्रों का दौरा करें, जहाँ से चुनाव के बाद की हिंसा की खबरें आ रही हैं। ये सुनिश्चित करें कि निर्दोष लोगों की जान न जाए और 2021 के विधानसभा चुनावों के बाद हुई चुनाव के बाद की हिंसा की भयावहता फिर से न दोहराई जाए।”

उन्होंने आरोप लगाया, “स्थिति बेहद भयावह है और राज्य मशीनरी ने जानबूझकर तैनात केंद्रीय अर्धसैनिक बलों को स्थिति को नियंत्रित करने नहीं दिया है और टीएमसी के गुंडों को भाजपा के कार्यकर्ताओं को आतंकित करने की खुली छूट दे रही है। राज्य पुलिस हमेशा की तरह मूकदर्शक बनी हुई है और गहरी नींद में रहकर इस तरह के अत्याचारों को अंजाम देने की अनुमति दे रही है।”

साल 2024 के लोकसभा चुनाव में टीएमसी ने पश्चिम बंगाल की 42 संसदीय सीटों में से 29 सीटें हासिल की हैं, जबकि भाजपा ने केवल 12 सीटों पर जीत दर्ज की है। वहीं, कॉन्ग्रेस के खाते में सिर्फ एक सीट आई है। साल 2019 के लोकसभा चुनाव में टीएमसी ने राज्य की 42 लोकसभा सीटों में से 22 सीटें जीती थीं और भाजपा ने 18 सीटें जीती थीं। कॉन्ग्रेस ने सिर्फ 2 सीटें जीती थीं।

जिन्होंने माता सीता पर शक किया, ये वही अयोध्यावासी हैं: रामलला की नगरी में हारी BJP तो क्रोधित हो उठे ‘लक्ष्मण’, मतदाताओं को बताया स्वार्थी

लोकसभा चुनाव 2024 के नतीजे आने के बाद रामानंद सागर के ‘रामायण’ में लक्ष्मण की भूमिका निभाने वाले मशहूर एक्टर सुनील लहरी काफी मायूस दिखे। उन्होंने अयोध्या जिले की फैजाबाद लोकसभा सीट पर बीजेपी की हार के बाद अयोध्या के लोगों पर अपनी भड़ास निकाली है। सुनील लहरी ने अपने सोशल मीडिया अकाउंट पर अयोध्या के लोगों की तुलना ‘धोखेबाज’ से की है और कहा कि ये लोग उसी अयोध्या के वासी है, जिन्होंने ‘माता सीता पर भी शक’ किया था।

सुनील लहरी ने अयोध्या में बीजेपी की हार पर अपनी प्रतिक्रिया देते हुए एक पोस्ट शेयर किया, जिन्होंने उन्होंने अयोध्या नगरी की जनता को लताड़ लगाते हुए अयोध्यावासियों को स्वार्थी करार दिया। सुनील ने अपनी इंस्टाग्राम स्टोरीज में बाहुबली के मशहूर सीन की एक तस्वीर शेयर की है। इसमें कटप्पा बाहुबली को मारते हैं। बाहुबली पर बीजेपी लिखा हुआ है, जबकि कटप्पा पर अयोध्या लिखा हुआ है।

सुनील लहरी ने अगली स्लाइड में हिंदी में एक नोट लिखा है, जिसमें लिखा है, “हम भूल रहे हैं कि ये वही अयोध्यावासी हैं, जिन्होंने वनवास से लौटने के बाद देवी सीता पर संदेह किया था। उस व्यक्ति को क्या कहेंगे जो भगवान को भी नकार देता है? स्वार्थी… इतिहास गवाह है कि अयोध्यावासियों ने हमेशा अपने राजा को धोखा दिया है शर्म आनी चाहिए उन्हें।”

सुनील लहरी ने अयोध्या की जनता को धोखेबाज करार देते हुए लिखा, “हम अयोध्या के प्यारे नागरिकों की महानता को सलाम करते हैं, आप ही हैं जिन्होंने देवी सीता को भी नहीं बख्शा। हमें इस बात पर कोई आश्चर्य नहीं है कि आपने उस व्यक्ति को धोखा दिया जिसने यह सुनिश्चित किया कि भगवान राम उस छोटे से तंबू से बाहर आएं और एक खूबसूरत मंदिर में स्थापित हों.. पूरा देश आपको फिर कभी सम्मान की नजर से नहीं देखेगा।”

गौरतलब है कि सुनील लहरी ने रामानंद सागर की टीवी सीरीज रामायण में लक्ष्मण का किरदार निभाया था। उन्होंने अयोध्या में हुए राम मंदिर उद्घाटन समारोह में भी भाग लिया था। वो रामायण में राम की भूमिका निभाने वाले अरुण गोविल और माता सीता की भूमिका निभाने वाली दीपिका चिखलिया के साथ शामिल हुए थे। तीनों का अयोध्या में जोरदार स्वागत किया गया था। लोगों ने सीरियल के राम-सीता-लक्ष्मण का फूल बरसाते हुए स्वागत किया था।

बता दें कि अयोध्या जिले की फैजाबाद लोकसभा सीट, जिसके अंतर्गत रामलला का जन्मस्थान भी आता है। वहाँ बीजेपी को लोकसभा चुनाव में हार का मुँह देखना पड़ा। बीजेपी के 2 बार के सांसद लल्लू सिंह को समाजवादी पार्टी के अवधेश प्रसाद पासी ने हरा दिया। अयोध्या जिले में बीजेपी का हार से नाराज सुनील लहरी का ये पोस्ट मीडिया में भी खासा अटेंशन पा रहा है।

BJP की नवनिर्वाचित सांसद कंगना रनौत को CISF कॉन्स्टेबल ने मारा थप्पड़, किसान आंदोलन को लेकर पूछा था सवाल: हिरासत में कुलविंदर कौर

बॉलीवुड अभिनेत्री और हिमाचल प्रदेश के मंडी से भाजपा सांसद कंगना रनौत को चंडीगढ़ एयरपोर्ट पर CISF एक कॉन्स्टेबल द्वारा थप्पड़ मारने की घटना सामने आई है। भाजपा सांसद की राजनीतिक सलाहकार ने यह आरोप लगाया है। थप्पड़ मारने वाली कॉन्स्टेबल का नाम कुलविंदर कौर बताया जा रहा है। आरोपित को हिरासत में लेकर पूछताछ की जा रही है।

कंगना रनौत के राजनीतिक सलाहकार के अनुसार, चंडीगढ़ एयरपोर्ट के भीतर CISF की महिला गार्ड ने पर कंगना रनौत को थप्पड़ मारा। उन्होंने कहा कि सीआईएसएफ गार्ड को तुरंत हटाया जाना चाहिए और उसके खिलाफ जल्द से जल्द कार्रवाई करने की जानी चाहिए। दावा किया जा रहा है कि CISF गार्ड किसान आंदोलन के खिलाफ बात करने को लेकर उनसे नाराज थी।

कहा जा रहा है कि दिल्ली पहुँचने के बाद कंगना रनौत ने सीआईएसएफ महानिदेशक नीना सिंह और दूसरे सीनियर अधिकारियों से मुलाकात की और उन्हें इस मामले की जानकारी दी। इसके बाद कॉन्स्टेबल कुविंदर कौर को हिरासत में लिया गया है। आरोपित कुलविंदर से पूछताछ के लिए सीआईएसएफ कमांडेंट दफ्तर ले जाया गया है।

मंडी लोकसभा क्षेत्र से चुनाव जीतने के बाद कंगना रनौत भाजपा संसदीय बोर्ड की मीटिंग में शामिल होने के लिए गुरुवार (6 जून) को दिल्ली के लिए निकली थीं। वह 3 बजे चंडीगढ़ एयरपोर्ट पहुँचीं। जब वह एयरपोर्ट सिक्योरिटी चेक से निकल रही थीं, तभी महिला सुरक्षाकर्मी ने उनसे पूछा, “मैडम आप बीजेपी से जीती हैं। आपकी पार्टी किसानों के लिए कुछ क्यों नहीं कर रही है।” 

इसके बाद कुलविंद कौर ने कंगना पर हाथ चला दिया। उसके बाद कंगना रनौत के साथ यात्रा कर रहे मयंक मधुर नाम के एक शख्स ने कुलविंदर कौर को थप्पड़ मारने की कोशिश की। कंगना रनौत ने इस मामले शिकायत भी दर्ज कराई है। DSP एयरपोर्ट कुलजिंदर सिंह ने बताया कि CISF की एक महिला जवान ने कंगना रनौत के साथ गलत व्यवहार किया है। इसकी सूचना मिली है।  

‘दिल्ली में नहीं हारी ‘सांप्रदायिक भाजपा’: INDI गठबंधन के साथ मजबूती से खड़े हैं, फिर भी BJP की जीत से छलक आया उनका दर्द

लोकसभा चुनाव के नतीजे भले ही बीजेपी के नेतृत्व वाले एनडीए की उम्मीदों के मुताबिक न रहे हों, लेकिन कुछ महत्वपूर्ण क्षेत्रों में उनका प्रदर्शन शानदार रहा है और सभी उम्मीदों से बढ़कर रहा है। दिल्ली में आम आदमी पार्टी और कॉन्ग्रेस गठबंधन को भगवा पार्टी ने हराया, जिसने राष्ट्रीय राजधानी की सभी सात सीटों पर जीत हासिल की। ​​टाइम्स ऑफ इंडिया की एक रिपोर्ट के अनुसार, बीजेपी की भारी जीत मुस्लिम समुदाय के लोगों को पसंद नहीं आई।

लोकसभा चुनाव 2024 के नतीजे सामने आने के बाद दिल्ली में 35 साल के महफूज आलम ने कहा, “ऐसा लगता है कि हमारे वोटों का कोई खास महत्व नहीं रहा। लोकसभा चुनाव में, बीजेपी के खिलाफ सीधे मुकाबले में समुदाय का प्रभाव सीमित है। हम बीजेपी के झूठे वादों से निराश हैं, जो नफरत और समुदाय को बाँटने का काम करते हैं। हालाँकि, हम आने वाले विधानसभा चुनावों को लेकर आशावादी नजरिया रखते हैं।”

2011 की जनगणना के अनुसार, दिल्ली की आबादी में मुसलमानों की संख्या लगभग 12.9% है। राजनीतिक अनुमानों के अनुसार उत्तर पूर्व लोकसभा क्षेत्र में मुस्लिम मतदाताओं का प्रतिशत 20.7% तक है। चाँदनी चौक (14%), पूर्वी दिल्ली (16.8%), नई दिल्ली (16.8%), उत्तर पश्चिम दिल्ली (10.6%), दक्षिण दिल्ली (7%), और पश्चिमी दिल्ली (6.8%) अन्य निर्वाचन क्षेत्रों में से हैं जहाँ मुस्लिम आबादी अच्छी खासी है। उत्तर पूर्व विधानसभा में 58.3% वोट के साथ सीलमपुर विधानसभा में सबसे ज्यादा मुस्लिम वोटर हैं, जो इसके बाद मुस्तफ़ाबाद और बाबरपुर का स्थान रहा, जहाँ मुस्लिम आबादी सबसे ज़्यादा थी। हालाँकि, कॉन्ग्रेस के उम्मीदवार कन्हैया कुमार को भाजपा के मनोज तिवारी ने 1.3 लाख से ज़्यादा वोटों के अंतर से हरा दिया।

जोहरीपुर निवासी मोहम्मद मुश्ताक ने कहा कि आम जनता का झुकाव बीजेपी के पक्ष में था। नंद नगरी के एक व्यापारी अदनान जैन ने कहा, “कन्हैया कुमार के साथ समस्या यह है कि वह जमीनी स्तर पर लोगों से उतना नहीं मिले, जितना उन्हें मिलना चाहिए था। प्रभाव के लिए ऑनलाइन जोशीले भाषण देना पर्याप्त नहीं है। आप जिस व्यक्ति का प्रतिनिधित्व कर रहे हैं, उसके साथ पारस्परिक संबंध बनाना महत्वपूर्ण है।”

उत्तर-पूर्वी दिल्ली के एक एक वोटर ने कहा कि मनोज तिवारी का काम खराब था, लेकिन लोगों ने उन्हें नहीं, बल्कि पीएम मोदी की मजबूत ब्रांड वैल्यू की वजह से उन्हें वोट दिया। उन्होंने उम्मीद जताई कि मनोज तिवारी के तीसरे कार्यकाल के दौरान कचरा प्रबंधन, पेयजल और मच्छरों जैसी समस्याओं का समाधान किया जाएगा। चाँदनी चौक लोकसभा क्षेत्र में चाँदनी चौक, मटिया महल और बल्लीमारान विधानसभा सीटें दिल्ली में तीन अन्य महत्वपूर्ण मुस्लिम बहुल इलाके हैं, जहाँ वोट प्रतिशत क्रमशः 56.8%, 67.20% और 64.7% रहा। पूर्वी दिल्ली निर्वाचन क्षेत्र के मुस्लिम बहुल ओखला में मतदान प्रतिशत 52.2% रहा। साल 2014 और 2019 के लोकसभा चुनावों की तुलना में दिल्ली में कम मतदान प्रतिशत को मुस्लिम समुदाय के लोगों ने लोगों ने बीजेपी की जीत की वजह बताया।

बल्लीमारान के व्यापारी सरीम उल्लाह ने आरोप लगाया कि बहुत सी महिलाएँ घर के अंदर ही रहीं और गर्मी की वजह से वोटिंग ही नहीं की। मटिया महल में एस खान ने कहा, “हम एक ऐसी सरकार चाहते थे, जो लोगों को सुरक्षा दे और सभी के साथ समान व्यवहार करे। ये नतीजे हमारे लिए झटका हैं। अगर वोटिंग प्रतिशत अधिक रहती, तो कॉन्ग्रेस आसानी से जीत जाती।’

पूर्वी दिल्ली निर्वाचन क्षेत्र के 33 वर्षीय निवासी नसीम ने आप के उम्मीदवार के जीतने की उम्मीद की थी। वहीं, दक्षिणी दिल्ली के गोविंदपुरी निवासी शरीफ अहमद का कहना है कि जीतने वाले उम्मीदवारों को लोगों का ज्यादा साथ मिला, लेकिन इंडी गठबंधन ने पूरे देश में बीजेपी को कड़ी टक्कर दी।

मुस्लिमों के वोट के अधिकार बनाम हिंदू सांप्रदायिकता का अजीब मामला

आँकड़े साफ बताते हैं कि मुस्लिमों ने बीजेपी को हराने के लिए विपक्षी गठबंधन को एकमुश्त समर्थन दिया। उन्होंने इंडी गठबंधन की सरकार बनाने के लिए इंडी गठबंधन के पक्ष में मास वोटिंग की, हालाँकि उनकी इच्छा पूरी नहीं हुई। खास बात ये है कि जिसे मुस्लिम समुदाय विभाजनकारी मोदी सरकार कहती है, उस मुस्लिम समुदाय को मोदी सरकार की पीएम आवास योजना, पीएम जन धन जैसी योजनाओं का बहुत लाभ हुआ है । इसके अलावा मोदी सरकार अल्पसंख्यकों के लिए तमाम अन्य कल्याणकारी योजनाएँ चलाई। हालाँकि, मुस्लिमों ने बीजेपी के लिए वोट नहीं किया और अपने पुराने पैटर्न के हिसाब से बीजेपी के विरोध में ही वोटिंग की।

बड़ी विडंबना ये है कि मुस्लिमों ने कॉन्ग्रेस और टीएमसी जैसी पार्टियों का पूर्ण समर्थन सिर्फ धार्मिक आधार पर किया, जो समाज के अन्य कमजोर समुदायों की जगह मुस्लिम तुष्टिकरण की राह पर चलते हैं। हालाँकि देश का दूसरा सबसे बड़ा वोटिंग ग्रुप सिर्फ इसलिए पहले को सांप्रदायिक कहता है, क्योंकि उनके धार्मिक रीति-रिवाज अलग हैं।

लोकतंत्र में हर किसी को वोट देने का अधिकार है, चाहे वे धर्म, जाति या किसी अन्य कारण से वोट क्यों न दें। लेकिन सवाल यह है कि यही शिष्टाचार बीजेपी के वोटर को क्यों नहीं दिया जाता? मुस्लिम वोट को समुदाय के हितैषी दलों के साथ धर्मनिरपेक्ष क्यों माना जाता है, जबकि भाजपा और उसके वोटर और समर्थकों को नफरती कट्टरपंथी क्यों कहा जाता है? इसके लिए अलग-अलग पैमाने क्यों हैं? मुसलमानों को धार्मिक चश्मे से एक समूह के रूप में वोट देने का लोकतांत्रिक अधिकार है, फिर भी वही लोग भाजपा का समर्थन करने वाले अन्य लोगों की निंदा और उन्हें शर्मिंदा करते हैं।

तमाम शिकायतों और शिकायतों के बावजूद मोदी सरकार में मुस्लिमों या किसी अन्य धार्मिक समुदाय के खिलाफ भेदभाव का कोई सबूत पेश नहीं मिला है, जबकि ऐसे कई मामले मिले हैं, जहाँ ‘धर्मनिरपेक्ष’ दलों की सरकारों ने अनुसूचित जातियों और अनुसूचित जनजातियों सहित हिंदुओं के खिलाफ पक्षपात किया है। अदालतों और अन्य संवैधानिक निकायों के पास इस स्पष्ट भेदभाव को चुनौती देने के लिए कदम उठाने के अलावा कोई विकल्प नहीं था।

सच तो यह है कि विपक्ष मुस्लिम समुदाय को तरजीह दे रहा है और समुदाय इस बात से खुश नहीं है कि मोदी सरकार सभी के साथ समान व्यवहार करती है। भारत में मुस्लिम असहज और बेचैन महसूस कर रहे हैं क्योंकि उन्हें विपक्ष के गुलाबी चश्मे के बिना देखे जाने की आदत नहीं है और उन्हें अन्य भारतीय नागरिकों के समान ही देखा जाता है जो उनकी नज़र में “सांप्रदायिक” है। यह “जब आप विशेषाधिकार के आदी हो जाते हैं, तो समानता उत्पीड़न की तरह लगती है” का एक क्लासिक मामला है।

लोकसभा चुनाव 2024 के नतीजे

गौरतलब है कि 4 जून 2024 को भारतीय चुनाव आयोग (ECI) ने 2024 के लोकसभा चुनाव में 543 निर्वाचन क्षेत्रों में से 542 के परिणाम घोषित किए। बीजेपी ने 240 सीटें जीती हैं, और कॉन्ग्रेस ने 99 सीटें जीती हैं। बीजेपी ने 2014 में जीती गई 282 सीटों और 2019 में जीती गई 303 सीटों की तुलना में हाल के चुनाव में काफी कम सीटें जीती हैं। दूसरी ओर, कॉन्ग्रेस ने 2019 में 52 और 2014 में 44 की तुलना में 99 सीटें हासिल करते हुए काफी बढ़ोतरी की है। इंडी गठबंधन 230 के आँकड़े को पार करने में सफल रहा, इसके बावजूद वो पीएम नरेंद्र मोदी को तीसरे ऐतिहासिल कार्यकाल से वंचित करने में असफल रहा और पीएम मोदी 9 जून को तीसरी बार प्रधानमंत्री पद की शपथ लेने के लिए तैयार हो चुके हैं।

यह लेख मूल रूप से अंग्रेजी भाषा में लिखा गया है। मूल लेख पढ़ने के लिए यहाँ क्लिक करें।

चुनावों में CM की बने रहे छाया, बताए जा रहे थे नवीन पटनायक के उत्तराधिकारी: ओडिशा के चुनावी नतीजों के बाद गायब वीके पांडियन, रिपोर्ट में बताया- सार्वजनिक रूप से नहीं दिख रहे

ओडिशा में मुख्यमंत्री नवीन पटनायक के उत्तराधिकारी कहे जाने वाले वीके पांडियन चुनावों में बीजू जनता दल (BJD) की करारी हार के बाद लापता हैं। इस हार के लिए पूर्व IAS अधिकारी पांडियन को दोषी ठहराया जा रहा है। चुनाव नतीजे आने के बाद से पांडियन सार्वजनिक रूप से कहीं नहीं दिखे। पांडियन को पहले नवीन पटनायक के हमेशा साथ देखा जाता था।

टाइम्स ऑफ इंडिया की रिपोर्ट के मुताबिक, वीके पांडियन को ओडिशा विधानसभा और लोकसभा चुनावों में बीजेडी की हार का मुख्य कारण माना जा रहा है। नतीजों की घोषणा के बाद से पांडियन की अनुपस्थिति ने राजनीतिक पर्यवेक्षकों और आम जनता के बीच नए सवालों को जन्म दे दिया है। नवीन पटनायक के दौरे पर हमेशा साथ रहने वाले पांडियन अब उनके साथ नहीं दिख रहे हैं।

ओडिशा विधानसभा का चुनाव हारने के बाद अपना त्यागपत्र देने के लिए जब नवीन पटनायक राजभवन गए, उस समय भी पांडियन कहीं नहीं दिखे। बीजेडी सुप्रीमो पटनायक ने बुधवार (5 जून) को अपने निवास पर पार्टी सदस्यों और नवनिर्वाचित 51 विधायकों के साथ दो बैठक की। इन बैठकों में भी पांडियन शामिल नहीं हुए।

नाम नहीं बताने की शर्त पर एक विधायक ने TOI को बताया, “पांडियन बाबू बैठक में मौजूद नहीं थे। नवीन बाबू ने हमसे चर्चा की और हमें राज्य के लोगों के लिए काम करते रहने के लिए कहा।” पार्टी नेताओं ने बीजद की हार के लिए जिम्मेदार कई महत्वपूर्ण कारकों की ओर इशारा किया है। इनमें पांडियन का नाम प्रमुखता से लिया जा रहा है।

बता दें कि दो दशक से भी अधिक समय तक ओडिशा में नवीन पटनायक का बोलबाला रहा। 5 जून को उन्होंने राज्यपाल रघुबर दास को अपना इस्तीफा सौंप दिया। इस तरह से मुख्यमंत्री के रूप में उनके 24 साल के कार्यकाल का अंत हो गया। इसके साथ ही पार्टी के भीतर बीजेडी की चुनावी हार के पीछे के कारणों को जानने के लिए आत्ममंथन शुरू हो गया।

पार्टी के एक सूत्र का कहना है कि उम्मीदवार चयन में भारी चूक, निर्णय लेने की प्रक्रिया में पार्टी के दिग्गजों को शामिल नहीं करना और वीके पांडियन पर अत्यधिक निर्भरता ही पार्टी की हार की मुख्य वजह बनी। वहीं, बीजेडी के पूर्व विधायक सौम्य रंजन पटनायक ने कहा कि हार ठीकरा पांडियन पर फोड़ने से नवीन पटनायक को बचना चाहिए और उन्हें इसकी जिम्मेदारी लेनी चाहिए।

‘हिंदुस्तान’ की खबर के अनुसार, ओडिशा में बीजेडी की करारी हार के लिए वीके पांडियन की भूमिका के सवाल पर पूर्व विधायक सौम्य रंजन पटनायक ने कहा, वीके पांडियन कौन हैं और हेलीकॉप्टर से वे राज्य के विभिन्न हिस्सों का दौरान कैसे कर रहे थे? उन्हें पूरी शक्ति किसने दी? वह मुख्यमंत्री नवीन पटनायक ही थे, जिन्होंने उन्हेें ऐसा करने की अनुमति दी थी।”

बता दें कि ओडिशा में लोकसभा के साथ विधानसभा के भी चुनाव हुए हैं। इसमें बीजेडी लोकसभा की एक भी सीट हासिल करने में नाकाम रही है। वहीं, 147 विधानसभा सीटों में पार्टी को केवल 51 सीटों पर जीत मिली है। वहाँ भाजपा सबसे बड़ी पार्टी बनकर पूर्ण बहुमत हासिल की है। इस तरह नवीन पटनायक के 24 साल के मुख्यमंत्री के रूप में राजनीति का पटाक्षेप हो गया है।

3 बेटी है, बेटा हो नहीं रहा… बाजार से 9 महीने का बच्चा चुरा लाई राहत जहाँ, अम्मी रोशन जहाँ ने भी दिया साथ: 600+ CCTV की जाँच कर पुलिस ने दबोचा

उत्तर प्रदेश के कानपुर में दो महिलाओं ने एक बच्चा चोरी कर लिया। बच्चा चोरी करने वाली दोनों महिलाएँ माँ-बेटी हैं। बच्चा चुराने के पीछे बेटे की चाहत का मामला सामने आया है। पुलिस बच्चे को सकुशल बरामद कर असली अभिभावकों को सौंप दिया है।

मीडिया रिपोर्ट्स के अनुसार, कानपुर की राहत जहाँ के तीन बेटियाँ हैं। उसे एक बेटे की इच्छा थी। बेटा ना होने के कारण उसने लड़का गोद लेने की कोशिश की जिसमें वह सफल नहीं हुई। इसके बाद उसने अपनी माँ रोशन जहाँ को इस विषय में बताया। दोनों ने इसके बाद चोरी की योजना बनाई।

दोनों ने कानपुर के बेकनगंज बाजार में अपने 9 महीने के बच्चे को लेकर घूम रहीं दो छोटी बच्चियों को निशाना बनाया। महिलाओं ने बच्चियों को झाँसे में लेकर उनसे बच्चा चोरी करने की योजना बनाई। महिलाओं ने पहले बच्चियों को गोलगप्पे खिलाए और जब उन्हें इससे तीखा लगा तो पैसे देकर लस्सी पीने भेज दिया।

महिलाओं ने बच्चियों से बच्चे को ले लिया। इसके बाद जब बच्चियाँ वहाँ से चली गईं तो दोनों वहाँ से रफूचक्कर हो गईं। इसके बाद बच्चियों ने अपने घर में यह बात बताई। जिस बच्चे की चोरी हुई, उसके अभिभावकों ने पुलिस के पास इस मामले की धिकय्त दर्ज करवाई।

पुलिस इसके बाद बच्चे की तलाश में जुट गई। पुलिस ने इसके लिए आठ टीमों को काम पर लगाया। इसके बाद उस इलाके के लगभग 600 CCTV की जाँच की गई। CCTV की मदद से पुलिस ने महिलाओं की पहचान की और उनके पते तक पहुँची। पुलिस ने दोनों को गिरफ्तार कर लिया।

पुलिस की जाँच में यह सामने आया है कि राहत जहाँ ने घर ले जाकर अपने पति से यह बताया कि वह यह बच्चा खरीद कर लाई है। पति ने इस विषय में तफ्तीश नहीं की। वहीं दोनों महिलाओं ने कार्रवाई के डर से अब बताया है कि उन्हें यह बच्चा सड़क पर मिला, जिसे वह उठा लाईं।

18 साल के लड़के को अगवा किया, टॉयलेट साफ कराया, मुँह पर किया पेशाब: इंस्टाग्राम पर Video शेयर करने की फिटनेस ‘इन्फ्लुएंसर’ ने दी ‘सजा’, अहमदाबाद पुलिस ने किया गिरफ्तार

सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म इंस्टाग्राम पर फिटनेस ‘इन्फ्लुएंसर’ का टैग रखने वाले रजत दलाल को अहमदाबाद पुलिस ने गिरफ्तार किया है। उस पर 18 साल के लड़के पर मारपीट, अगवा करने और उसके मुँह पर पेशाब करने का आरोप है। लड़के ने कथित तौर पर रजत दलाल का एक वीडियो शेयर किया था, जिसके बाद रजत ने उसे अगवा कर क्रूरता की।

रिपोर्ट्स के मुताबिक, पीड़ित एक कॉलेज स्टूडेंट है। उसे रजत दलाल और उसके साथियों ने अगवा कर लिया। टॉयलेट साफ कराया और क्रूरता बरती। उसके मुँह पर गोबर भी डाला गया। यही नहीं, रजत दलाल ने पीड़ित युवक को मारने-पीटाने के साथ ही उसके चेहरे पर पेशाब भी किया। इसके बाद पीड़ित को उसके घर के सामने छोड़ते हुए उसकी माँ को भी धमकाया कि हमारा कोई कुछ नहीं बिगाड़ सकता, हम ‘हरियाणा’ के जाट हैं। इस मामले में पीड़ित और उसकी माँ ने पुलिस से शिकायत की, जिसके बाद पुलिस ने रजत दलाल और उसके साथियों को गिरफ्तार कर लिया।

रजत दलाल की गिरफ्तारी के बाद एक वीडियो सोशल मीडिया पर तेजी से वायरल हुआ, जिसमें युवक ने रजत का जिम के अंदर का वीडियो शेयर किया। उस पर उसका कैप्शन भी लिखा है, ‘रोज सुबह अपना मुँह जिम में दिखाकर मेरा दिन खराब करता है।’ इसके बाद इस वीडियो में आगे दिख रहा है, जिसमें रजत दलाल और उसके दोस्त युवक को कार में पीटते दिख रहे हैं और रजत दलाल को ‘पापा’ कहने के लिए मजबूर कर रहे हैं, साथ ही वीडियो शेयर करने के लिए माफी भी मँगवा रहे हैं।

रजत दलाल के इंस्टाग्राम पर 1 मिलियन फॉलोवर हैं। वो अपने फिटनेस वीडियो के लिए जाना जाता है और सोशल मीडिया पर अक्सर उसके वीडियो शेयर किए जाते हैं।

रजत दलाल का इंस्टाग्राम हैंडल

बताया जा रहा है कि रजत का वीडियो जिस युवक ने शेयर किया था, वो वीडियो वायरल होने के बाद रजत ने युवक को सोसायटी के बाहर बुलाया और अपने दोस्तों के साथ उसे अगवा कर लिया। रजत दलाल और उसके साथियों ने लड़के को गालियाँ दी और पूछा कि ‘तेरी हिम्मत कैसे हुई मेरा वीडियो बनाने की। मैं तुझे टुकड़े-टुकड़े कर दूँगा, तुझे छोड़ने वाला नहीं हूँ।’

इसके बाद रजत दलाल और उसके साथी युवक को जगतपुर स्थित ग्रीन गैल्स सोसायटी के एक फ्लैट में ले गए और उसके पीटते हुए फ्लैट का टॉयलेट साफ कराया। लड़का जब पिटाई की वजह से बेहोश हो गया, तो रजत दलाल ने उसके चेहरे पर पेशाब कर दिया। जब लड़का होथ में आया, तो रजत ने उसके उसकी माँ के पास छोड़ दिया और दोनों को धमकाया।

रजत दलाल ने कथित तौर पर उसकी माँ से कहा, ‘मैं इस लड़के को जान से भी मार सकता था, लेकिन ये बहुत छोटा है, तो इसे छोड़ रहा हूँ। मैं हरियाणा का जाट हूँ। यहाँ मेरे बड़े लोगों से कनेक्शन हैं। पुलिस मेरा कुछ नहीं बिगाड़ पाएगी, वो मेरी जेब में है।’ इस घटनाक्रम के बाद पीड़ित और उसकी माँ ने अहमदाबाद के साबरमती पुलिस स्टेशन में शिकायत दर्ज कराई, जिसके बाद पुलिस ने मामले की जाँच शुरू करते हुए रजत दलाल और उसके तीन साथियों को गिरफ्तार कर लिया। पुलिस ने इस मामले में अपहरण और मारपीट का मामला दर्ज किया है।

इमरान मसूद के जीतते ही समर्थकों ने दिखाया ‘रंग’, 150+ बाइक पर सवार हो सहारनपुर की सड़कों पर किया हुड़दंग: महिलाओं को किए अश्लील इशारे, Video वायरल

उत्तर प्रदेश के सहारनपुर में कॉन्ग्रेस के नवनिर्वाचित लोकसभा सांसद इमरान मसूद की जीत के बाद उनके समर्थकों ने सड़कों पर जमकर हुड़दंग किया और महिलाओं से अश्लील इशारे किए। इसका वीडियो सोशल मीडिया पर वायरल हो रहा है। वीडियो में दिख रहा है कि सैकड़ों बाइक पर सवार उनके हुड़दंगी समर्थक हंगामा कर रहे हैं। एक-एक बाइक पर चार-चार हुड़दंगी बैठे और खड़े थे। इसमें चारपहिया वाहन पर शामिल थे।

वीडियो सामने आने के बाद सोशल मीडिया पर हंगामा मच गया और पश्चिमी यूपी में एक बार फिर अराजकता को लेकर लोग चिंता जाहिर करने लगे। फिलहाल, पुलिस ने इस वीडियो का संज्ञान लिया है और 5 नामजद सहित 50 अज्ञात लोगों के खिलाफ मुकदमा दर्ज कर लिया है। हुड़दंग करने वाले लोगों की पहचान करने की भी कोशिश की जा रही है। जागरण के अनुसार, रैली में 150 बाइक शामिल थी।

कहा जा रहा है कि बाइकों पर सवार हुड़दंगियों का काफिला कुतुबशेर थाने के सामने हूटिंग करते हुए और महिलाओं को अश्लील इशारे करते हुए निकला। इस दौरान पुलिस विवश नजर आती रही। सहारनपुर शहर के ही रहने वाले एक व्यक्ति ने सोशल मीडिया पर पोस्ट करके कार्रवाई की माँग की है। इसके बाद यह वीडियो वायरल हो गया है।

दरअसल, पश्चिमी उत्तर प्रदेश के सहारनपुर लोकसभा सीट से कॉन्ग्रेस-समाजवादी पार्टी गठबंधन ने इमरान मसूद को मैदान उतारा था। उन्हें इस लोकसभा चुनाव में भारी जीत मिली है। इमरान मसूद को 5,47,967 वोट मिले हैं। वहीं, उनके निकटतम प्रतिद्वंदी बीजेपी के राघव लखनपाल शर्मा को 4,83,425 वोट मिले। इस तरह इमरान मसूद ने 64,542 वोटों से जीत हासिल की है।

इसी जीत को लेकर उनके समर्थक हुड़दंग मचा रहे थे। बाइक रैली में एक-एक बाइक पर चार-चार, पाँच-पाँच लोग बैठे थे। कुछ बाइकों पर तो दो लोग बैठे दिखे और दो लोग खड़े दिखे। इस दौरान लोगों ने जमकर नारे लगाए और हंगामा किया। कुछ समर्थकों के सिर पर नमाजी टोपी भी दिखी। रैली के दौरान जाम की स्थिति बन गई। इसी दौरान किसी राहगीर ने इसकी वीडियो बनाकर वायरल कर दिया।

बताया जा रहा है कि वायरल वीडियो 4 जून 2024 की रात का है। वीडियो अंबाला रोड के पास की है। अंबाला रोड कुतुबशेर थाने के पास का है। इस मामले में सहारनपुर के वरिष्ठ पुलिस अधीक्षक विपिन टाडा ने कहा कि वायरल वीडियो का संज्ञान लेते हुए 50 अज्ञात लोगों और 5 नामजद के खिलाफ मुकदमा दर्ज किया गया है। उन्होंने कहा कि चुनाव के नतीजे के बाद कुछ युवक हंगामा कर रहे थे।