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JNU प्रोफेसर ने चाइनीज में भेजे अश्लील मैसेज, सहेलियों से पूछा पीड़िता का पता: यौन उत्पीड़न से परेशान हो छात्रा ने छोड़ा कैंपस, दिल्ली पुलिस ने लिया एक्शन

जवाहरलाल नेहरू विश्वविद्यालय (JNU) में पढ़ाने वाला एक प्रोफेसर अपनी एक छात्रा को अश्लील मैसेज भेजता था। वह छात्रा को अकेले मिलने के लिए बुलाता था। ऐसा ना करने पर प्रोफ़ेसर ने छात्रा को फेल करने की धमकी भी दी। अब दिल्ली पुलिस ने उसके खिलाफ यौन उत्पीड़न मामले में कार्रवाई चालू कर दी है।

मीडिया रिपोर्ट्स के अनुसार, दिल्ली पुलिस ने प्रोफ़ेसर को पेश होने को कहा है और आगे चार्जशीट दायर करने की तैयारी कर रही है। पुलिस ने छात्रा का बयान भी ले लिया है और उससे अश्लील चैट के स्क्रीनशॉट लेकर जाँच चालू कर दी है। पुलिस अब इस मामले की जाँच करके और भी तथ्य तलाशने का प्रयास कर रही है।

गौरतलब है कि अप्रैल, 2024 को JNU के भाषा स्कूल में चाइनीज और साउथ ईस्ट एशियन स्टडीज विभाग के एक प्रोफेसर के विरुद्ध एक छात्रा ने दिल्ली के वसंत कुंज (उत्तरी) थाने में यौन उत्पीड़न की एक FIR दर्ज करवाई थी। छात्रा ने इसमें आरोप लगाया था कि प्रोफ़ेसर उसे लगातार फोन और मैसेज करता था।

छात्रा का आरोप है कि प्रोफेसर चीनी भाषा में लिखी हुई अश्लील कविताएँ भी भेजता था, उसे चैम्बर में अकेले मिलने के लिए बुलाता था। वह ऐसा ना करने पर उसे फेल करने की धमकी देता था। उसने कक्षा में भी ऐलान किया था कि वह छात्रा के ना आने पर उसे फेल कर देगा।

छात्रा ने इसके बाद परेशान होकर JNU छोड़ दिया था और अपने घर चली गई थी। छात्रा की सहेली ने इस मामले में आरोप लगाया था कि प्रोफ़ेसर पीड़िता के बारे में पूछताछ करता रहता था। प्रोफ़ेसर ने कुछ ऐसी फ़िल्में भी बताई थी जिनमें छात्र-शिक्षक प्रेम सम्बन्धों को दिखाया गया हो। सहेली का यह भी आरोप है कि प्रोफ़ेसर ने पीड़िता को बिना सहमति के गले लगाया।

JNU की आंतरिक मामलों की समिति ने भी इसकी जाँच की है। समिति ने प्रोफ़ेसर पर कार्रवाई करते हुए उसे कक्षाएँ लेने से रोक दिया है। अब दिल्ली पुलिस आगे कार्रवाई कर रही है।

बकरे को पहनाई अन्नामलाई की फोटो और फिर बीच सड़क काट डाला: DMK समर्थकों का Video आपने देखा क्या? BJP नेता की हार का जश्न मटन बिरयानी खाकर मनाया

लोकसभा नतीजे सामने आने के बाद एक बहुत दिल दहलाने वाली वीडियो सामने आई है। ये वीडियो तमिलनाडु से है जहाँ भाजपा को मजबूत करने का काम अन्नामलाई कर रहे थे। नतीजे आने के बाद यहाँ डीएमके कार्यकर्ताओं ने अन्नामलाई की फोटो बकरे के गले में टांगकर उसका सिर खुली सड़क पर धारदार हथियार से एक बार में अलग कर दिया। इसके बाद बाकी सब लोग जश्न मनाते दिख रहे हैं।

इस वीडियो को देखकर साफ पता चलता है कि डीएमके कार्यकर्ता सिर्फ बकरे का गला नहीं काट रहे बल्कि प्रतीकात्मक तौर पर भाजपा अध्यक्ष का सिर तन से जुदा करते दिखा रहे हैं। सोशल मीडिया पर भी लोगों ने इसे शेयर करके सवाल किए हैं कि ये क्या अन्नामलाई की फोटो लगाकर इस तरह बकरे का सिर काटना निर्मम हत्या करने के इशारे को नहीं दर्शता।

लोगों ने ऐसी हरकत करने वाले डीएमके कार्यकर्ताओं के विरुद्ध कार्रवाई की माँग की है। कहा जा रहा है कि ऐसा करके अन्नामलाई के बैकग्राउंड का भी मखौल उड़ाया गया है। वो किसान परिवार से हैं और बकरी पालन का काम भी करते हैं। इसके अलावा उन्होंने पहले कहा भी था कि उनके पास कोई संपत्ति नहीं है, उनके पास सिर्फ कुछ बकरियाँ हैं। यही वजह है कि उनकी तस्वीर बकरे पर लगा उसका सिर काटा गया है।

बता दें कि 4 जून को लोकसभा चुनाव के नतीजे आने के बाद कोयंबटूर में डीएमके कार्यकर्ताओं ने जश्न के तौर पर ऐसी हरकत को अंजाम दिया है। पहले उन्होंने ऐलान किया था कि अन्नामलाई हारे तो बकरे की बिरयानी बनेगी। इसके बाद नतीजे देख मटन बिरयानी बनी और डीएमके कार्यकर्ताओं को समर्थकों में बँटी।

उल्लेखनीय है कि इस तरह प्रतीकात्मक हत्या दिखाए जाने की यह कोई पहली घटना नहीं है। इससे पहले 2022 में भाजपा प्रवक्ता नुपूर शर्मा का पुतला बनाकर उसे सरेआम सड़क पर फाँसी देने की घटना कर्नाटक के बेलगावी में सामने आई थी। इसके अलावा साल 2021 में केरल में पीएफआई ने एक रैली आयोजित की थी। इस रैली में आरएसएस की ड्रेस पहनाकर हिंदुओं के नरसंहार को दर्शाया गया था।

मालूम हो कि भले ही ये प्रतीकात्मक तौर पर किए गए कुछ प्रदर्शन हिंसा में नहीं आते लेकिन ये उस भीड़ की मानसिकता को जरूर उजागर करते हैं जो प्रतिद्वंदियों को मारने को अपनी बहादुरी मानते हैं।

स्वर्ण मंदिर में लगे खालिस्तानी नारे, भिंडरांवाले के लहराए पोस्टर: ऑपरेशन ब्लू स्टार की बरसी पर जुटी भीड़ में शामिल था पूर्व MP सिमरनजीत सिंह मान भी

पंजाब के अमृतसर में स्थित स्वर्ण मंदिर में खालिस्तान समर्थक नारे लगे गए हैं। यहाँ जरनैल सिंह भिंडरांवाले के पोस्टर भी लहराए गए। इस पूरे घटनाक्रम के दौरान शिरोमणि अकाली दल (A) के पूर्व सांसद सिमरनजीत सिंह मान भी मौजूद रहे। स्वर्ण मंदिर में यह खालिस्तानी नारेबाजी ऑपरेशन ब्लूस्टार की 40वीं बरसी पर हुई।

गुरुवार (6 जून, 2024) को अमृतसर स्थित स्वर्ण मंदिर में यह घटना हुई। इस दौरान यहाँ बड़ी संख्या में सिख इकट्ठा हुए और तलवारों के साथ नारेबाजी की। कुछ युवाओं ने इस दौरान अपने हाथों में भिंडरांवाले की तस्वीर लगे पोस्टर भी पकड़े हुए थे। इन पर सिख यूथ फेडरेशन भिंडरांवाले (SYFB) का नाम लिखा हुआ था।

भीड़ में मौजूद लोग खालिस्तान जिंदाबाद के नारे लगा रहे थे। कुछ लोगों ने अन्य पोस्टर भी पकड़े हुए थे जिनमें बंदी सिखों की फोटो लगी हुई थी। यह बंदी सिंह आतंक के मामलों में जेलों में बंद हैं, जिनको मुक्त किए जाने की बात की जाती रही है। एक पोस्टर पर लिखा हुआ था, “हमें सिख लाइब्रेरी की राख तक याद है जिसे दरबार साहिब में आर्मी ऑपरेशन के दौरान लूटा और जलाया गया था।” इसमें 1984 के ब्लूस्टार ऑपरेशन को कभी ना भूलने की बात भी लिखी हुई थी।

ऑपरेशन ब्लूस्टार की बरसी के चलते अमृतसर में सुरक्षा बढ़ा दी गई है। स्वर्ण मंदिर के आसपास भी बड़ी संख्या में सुरक्षाबलों को लगाया गया है। अमृतसर में कुछ संगठनों ने ऑपरेशन ब्लूस्टार की बरसी पर बंद की घोषणा की है। यहाँ इस मौके पर खालिस्तानी सांसद अमृतपाल सिंह के माता-पिता के भी पहुँचने के भी कयास हैं।

गौरतलब है कि 6 जून, 1984 को तत्कालीन इंदिरा गाँधी सरकार के आदेश पर सेना ने अमृतसर स्थित स्वर्ण मंदिर में आतंक विरोधी अभियान चलाया था। इस दिन सेना मंदिर के अंदर घुसी थी और बड़ी संख्या में आतंकियों को मार गिराया था। इसी दौरान खालिस्तानी जरनैल सिंह भिंडरांवाले को भी मार दिया गया था। इसके बाद से हर साल कई सिख समूह इस दिन ऑपरेशन ब्लूस्टार की बरसी मनाते हैं और इस पर रोष प्रकट करते हैं।

लोकसभा चुनाव के नतीजों से ‘हड़बड़ा’ गया SEBI, गाँधी परिवार के करीबी को दिया ‘चीफ’ का पद: UPA काल में RBI की डिप्टी गवर्नर थीं उषा थोराट, NSE बोर्ड की सदस्य भी

लोकसभा चुनावों के बाद और केंद्र सरकार के दोबारा गठन से पहले खबर है कि बाजार नियामक SEBI ने गाँधी परिवार के करीबी की पत्नी को हड़बड़ी में आकर सेबी पैनल का चीफ नियुक्त कर दिया है। 5 जून को बिजनेस वर्ल्ड में प्रकाशित जानकारी के अनुसार, सेबी ने उषा थोराट को स्टॉक एक्सचेंजों के सेटलमेंट गारंटी फंड की समिति का अध्यक्ष नियुक्त किया है। रिपोर्ट में सेबी के इस हड़बड़ी में उठाए गए कदम पर सवाल है। दूसरा इस नियुक्ति के वक्त और कैंडिडेट के चयन पर भी सवाल है।

बता दें कि उषा थोराट, यशवंत थोराट की पत्नी हैं, जिन्हें नवंबर 2007 में नाबार्ड के अध्यक्ष पद से सेवानिवृत्त होने के बाद राजीव गाँधी फाउंडेशन का सीईओ बनाया गया और वे एक दशक से भी अधिक समय तक इस पद पर बने रहे। उन्हें गाँधी परिवार का करीबी का कहा जाता है। उनकी पत्नी यूपीए काल में ही भारतीय रिजर्व बैंक की डिप्टी गवर्नर नियुक्त की गई थीं। इसके अलावा जब यूपीए काल में ही उन्हें NSE बोर्ड का सदस्य भी बनाया गया था।

उल्लेखनीय है कि रिपोर्ट में बिजनेस वर्ल्ड की पलक शाह ने इस जानकारी को साझा करते हुए गौर कराया कि संभव है कि चुनाव परिणामों के ठीक बाद इस तरह से गाँधी परिवार के करीबी को चीफ का पद दिया जाना इस ओर इशारा करता है कि सेबी के अधिकारियों को पीएम मोदी की सत्ता में वापसी पर शंका थी, इसिलए उन्होंने हड़बड़ी में गाँधी परिवार के लोगों की नियुक्तियाँ कीं। हालाँकि संयोग है कि नई समिति के अध्यक्ष के रूप में केवल उषा थोराट के नाम की घोषणा की गई। वहीं पैनल के बाकी लोगों के नाम अभी नहीं तय किए गए हैं।

रिपोर्ट में पलक शाह के हवाले से कहा गया कि भारतीय व्यवसायी समझदार हैं, लेकिन फिर भी चुनाव परिणामों पर उन्होंने असामान्य चुप्पी बनाई हुई है। ऐसा लगता है वो इस मुद्दे पर बोलना नहीं चाहते। उन्हें पता चल गया है कि एनडीए के पास बहुमत है और प्रधानमंत्री मोदी लगातार तीसरी बार पीएम बनेंगे। वह जवाहरलाल नेहरू के बाद दूसरे नेता हैं जो लगातार तीसरी बार पीएम बनने जा रहे हैं, मगर फिर भी कॉरपोरेट जगत ने इस मुद्दे पर अब तक कुछ नहीं बोला है। ये हाल तब हैं जब मोदी सरकार ने अपने कार्यकाल में उदय कोटक, आनंद महिंद्रा, सुनील मित्तल, कुमार बिड़ला जैसे बड़े व्यापारियों को पद्म भूषण से सम्मानित किया। रिपोर्ट के अनुसार चुनाव नतीजों के दिन सोशल मीडिया एक्स पर प्रधानमंत्री को तीसरे कार्यकाल के लिए बधाई देने वाला पहला और एकमात्र ट्वीट एनएसई के एमडी और सीईओ अशोक चौहान का था।

नरेंद्र मोदी लगातार तीसरी बार लेंगे प्रधानमंत्री पद की शपथ, साक्षी बनेंगे BIMSTEC देशों के भी नेता: लोकसभा चुनावों में जीत के बाद दुनियाभर से मिल रही बधाइयाँ

NDA के संसदीय दल के नेता चुने गए नरेन्द्र मोदी के प्रधानमंत्री पद के शपथ ग्रहण समारोह में अधिकांश पड़ोसी देशों के नेता शामिल होंगे। इन सभी को शपथ ग्रहण समारोह में शामिल होने का न्योता भेजा जा रहा है। भारत संभवतः पाकिस्तान को नहीं आमंत्रित करेगा।

2024 लोकसभा परिणामों में स्पष्ट बहुमत प्राप्त करने के बाद नरेन्द्र मोदी लगातार तीसरी बार भारत के प्रधानमंत्री पद की शपथ लेंगे। इस शपथ ग्रहण समारोह में BIMSTEC देशों के राज्य प्रमुखों को शामिल होने के लिए न्योता भेजा जा रहा है। BIMSTEC देशों में भारत के अलावा बांग्लादेश, नेपाल, म्यांमार, थाईलैंड, श्रीलंका और भूटान शामिल हैं। इसमें पाकिस्तान को किनारे कर दिया गया है। इससे पहले के संगठन SAARC में पाकिस्तान भी शामिल था।

पीएम मोदी को लगातार जीत की बधाइयाँ पूरे विश्व भर से मिल रही हैं। उन्हें विश्व के 100 से अधिक देशों से सरकार बनाने को लेकर बधाई मिल चुकी है। भारत के मित्र देशों के राष्ट्रप्रमुखों ने पीएम मोदी को फोन करके बधाई भी दी है।

पीएम मोदी को रूस के राष्ट्रपति ब्लादिमीर पुतिन, इंग्लैंड के प्रधानमंत्री ऋषि सुनाक, नीदरलैंड के प्रधानमंत्री मार्क रत्ते समेत भारत के सभी पड़ोसी देशों से बधाई मिली है। उन्हें बांग्लादेश की प्रधानमंत्री शेख हसीना ने फोन करके बधाई दी है, पीएम मोदी ने उन्हें शपथ ग्रहण समारोह में शामिल होने को कहा है, जिसे उन्होंने स्वीकार किया है।

श्रीलंका के राष्ट्रपति रानिल विक्रमसिंघे ने भी पीएम मोदी को फोन करके बधाई दी, नेपाल के प्रधानमंत्री पुष्प कमल दहल प्रचंड ने भी पीएम मोदी को बधाई दी। इन सभी को भी पीएम मोदी ने शपथ ग्रहण में शामिल होने को कहा है। अमेरिका के राष्ट्रपति जो बायडेन ने भी पीएम मोदी को बधाई दी है।

पाकिस्तान की तरफ से पीएम मोदी को बधाई नहीं मिली है। यह भी माना जा रहा है कि उसे शपथ ग्रहण में नहीं बुलाया जाएगा, 2019 में भी उसे नहीं बुलाया गया था। 2014 में पाकिस्तान के प्रधानमंत्री नवाज शरीफ को पीएम मोदी ने बुलाया था और इसे भारत-पाकिस्तान रिश्तों में नई शुरुआत होगी।

2024 लोकसभा चुनाव में भाजपा की अगुवाई वाले NDA गठबंधन ने 290 से अधिक सीटें जीते हैं। बुधवार (5 जून, 2024) को प्रधानमंत्री आवास में हुई बैठक में NDA के सभी घटक दलों ने पीएम मोदी को अपना नेता चुना था और उन्हें अपना समर्थन ज्ञापित किया था। बताया जा रहा है कि वह 8 जून, 2024 को शपथ लेंगे।

‘बार-बार न हो धार्मिक कंटेंट से छेड़छाड़’ : रणबीर कपूर की ‘रामायण’ के विरोध में उतरीं ‘सीता’, बोलीं दीपिका चिखलिया- नई स्टोरी, नया लुक देने में होता है सब खराब

रामानंद सागर की रामायण में माता सीता का रोल निभा चुकीं अभिनेत्री दीपिका चिखलिया ने रणबीर कपूर स्टारर रामायण का विरोध किया है। उन्होंने कहा कि रामायण बार-बार रामायण नहीं बननी चाहिए। दीपिका का मानना है कि नई स्टोरी और नया लुक देने की वजह से कई बार सब खराब हो जाता है। उदहारण के तौर पर दीपिका ने आदिपुरुष का नाम लिया। ऐसी हरकतों को दीपिका रामायण के साथ छेड़छाड़ मानती हैं।

दीपिका चिखलिया ने इंडिया टुडे से बातचीत के दौरान रणबीर कपूर के अभिनय में बन रही रामायण पर अपने विचार रखे। उन्होंने बताया कि बार-बार कुछ नया कोशिश करने में रामायण के मूल रूप से छेड़छाड़ हो रही है। उदाहरण के लिए दीपिका ने आदिपुरुष में सैफ अली खान द्वारा निभाए गए रावण के रोल और कृति सेनन को पहनाई गई गुलाबी साड़ी का जिक्र किया। सैफ अली के अभिनय को दीपिका रावण के प्रभाव को कम करने वाला मानती हैं।

जिस रामायण में रणबीर कपूर अभिनय करेंगे उसके डायरेक्टर नितेश तिवारी हैं। इस फिल्म के बारे में दीपिका ने अपनी राय रखते हुए कहा कि लोगों को धार्मिक कंटेंट से ज्यादा छेडख़ानी नहीं करनी चाहिए। दीपिका का मानना है कि अगर फिल्म बनानी ही है तो निर्माताओं के पास कई और भी विकल्प हैं। उन्होंने विकल्प के तौर पर स्वतंत्रता संग्राम सेनानियों की फ़िल्में बनाने की सलाह दी। दीपिका ने यह भी सवाल किया कि रामायण पर ही बार-बार फ़िल्में क्यों बन रहीं हैं।

गौरतलब है कि नितेश तिवारी की प्रस्तावित फिल्म रामायण में रणबीर कपूर को भगवान राम का रोल दिया गया है। सीता माता के किरदार के लिए सई पल्ल्वी को चुना गया है। रामानंद सागर के रामायण में भगवान राम का अभिनय कर चुके भाजपा सांसद अरुण गोविल भी इस फिल्म में दिखाई देंगे। बॉलीवुड अदाकारा लारा दत्ता भी इस फिल्म में रोल करेंगी। खबर यह भी है कि नितेश की रामायण में सनी देओल बजरंग बली और यश रावण का पात्र निभाएँगे। हालाँकि इन खबरों की अभी तक आधिकारिक पुष्टि नहीं हुई है।

जनगणना, जातिवाद, 1977, 295 और मूसेवाला… ‘पप्पू पास हो गया’ – इस पर हँसने की जगह अब स्वीकार कीजिए, आगे ये लोग जो करने वाले हैं उससे सतर्क रहिए

जब 2024 लोकसभा चुनावों में मतदान के सातों चरणों का समापन हुआ, उसके बाद विपक्ष का I.N.D.I. गठबंधन अपना एक अलग एग्जिट पोल लेकर आया। उन्होंने इसे ‘जनता का पोल’ नाम दिया। उन्होंने दावा ठोका कि उनका गठबंधन 295 सीटें जीतने वाला है। ध्यान दीजिए, उन्होंने 290 या 300 का आँकड़ा नहीं दिया, उन्होंने ये नहीं कहाँ कि उनका गठबंधन फलाँ नंबर से लेकर फलाँ नंबर के बीच के आँकड़े को पार करेगी, बल्कि उन्होंने सीधा अपना एक नंबर दिया – 295.

आखिर इसके पीछे क्या सोच थी, क्या तर्क था, अगर ऐसा कुछ था भी तो, इस पर चर्चा स्वाभाविक थी। जब पत्रकारों ने इस विषय में पार्टी के पूर्व अध्यक्ष राहुल गाँधी से इस संबंध में पूछा तो उन्होंने संक्षिप्त में सिद्धू मूसेवाला का नाम लिया। सिद्धू मूसेवाला, पंजाब के गायक जिन्होंने कॉन्ग्रेस की तरफ से विधानसभा चुनाव लड़ा था और जिनकी मई 2022 में गैंगवॉर में हत्या कर दी गई थी। अपने गानों के भड़काऊ बोल के कारण कुख्यात सिद्धू मूसेवाला का एक गाना आया था, जिसका नाम था – 295. गाना खूब चला था।

सिद्धू मूसेवाला को अपने गानों के माध्यम से बन्दूकबाजी की संस्कृति को बढ़ावा देने के लिए भी जाना जाता है। तो क्या राहुल गाँधी द्वारा दिए गए नंबर का संबंध इसी गाने से था? I.N.D.I. गठबंधन वालों ने किसी पोलिंग एजेंसी को सर्वे वगैरह के लिए लगाया तो था नहीं, तो स्पष्ट है कि उन्होंने 295 वाले आँकड़े की भविष्यवाणी की तो इसके पीछे कुछ न कुछ प्रतीकवाद रहा होगा। हालाँकि, पंजाबी गायक-रैपर सिद्धू मूसेवाला के गाने ‘295’ से इसका कोई कनेक्शन सांयोगिक ही लगा।

हालाँकि, मुझे लगता है कि 295 वाला आँकड़ा दिए जाने के पीछे एक और इतिहास जुड़ा हुआ है। 1977 में जब इंदिरा गाँधी के खिलाफ विपक्षी दलों ने एक होकर ‘जनता पार्टी’ का गठन किया था और भारत की उस समय की सबसे शक्तिशाली नेता को मात दी थी। उस समय ‘जनता पार्टी’ को मिली कुल सीटों की संख्या थी – 295. संख्या 295 और इसके साथ ‘जनता का पोल’ वाला टैगलाइन जोड़ा जाना – ये संयोग तो बिलकुल नहीं लगता।

भले ही ‘295’ के पीछे कोई सोचा-समझा प्रतीकवाद न हो, लेकिन कम से कम ये ऐसा आभास तो देता ही है कि इन विपक्षी दलों ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की लोकप्रियता और शक्ति को उसी रूप में आँका, जिस तरह इंदिरा गाँधी की उनके चरम के दिनों में हुआ करती थीं। साथ ही I.N.D.I. गठबंधन वालों ने खुद को एक ‘तानाशाह’ के खिलाफ एकजुट हुए जनआंदोलनकारियों के रूप में देखा। बड़ी बात ये है कि इस समूह का नेतृत्व इंदिरा गाँधी के पोते राहुल गाँधी कर रहे हैं, लेकिन फिर वही बात है कि राहुल गाँधी ऐसी विडम्बनाओं की चलती-फिरती दुकान हैं।

एक तरह से देखा जाए तो 2024 में नरेंद्र मोदी उसी चुनौती से जूझ रहे थे जिससे 10 वर्ष पूर्व मनमोहन सिंह जूझ रहे थे – एक दशक तक सरकार चलाने के बाद तीसरे कार्यकाल के लिए जनमत की माँग। मुझे व्यक्तिगत रूप से लगता था कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को ज़्यादा चिंता करने की ज़रूरत है नहीं, क्योंकि तब मनमोहन सिंह की हार के जो भी कारक थे वो सब यहाँ लागू नहीं हो रहे थे। मैं पूरी तरह गलत भी नहीं था क्योंकि चुनाव परिणाम में भाजपा भले ही पूर्ण बहुमत से चूक गई लेकिन NDA को बहुमत मिला और नरेंद्र मोदी लगातार तीसरी बार प्रधानमंत्री पद की शपथ लेने जा रहे हैं।

UPA-III भले ही वास्तविकता में तब्दील नहीं हो पाया, ‘मोदी 3.0’ हमारे सामने है। चुनावों के दौरान ये तो स्पष्ट हो गया कि विपक्ष और उसका पूरा का पूरा समर्थक तंत्र नरेंद्र मोदी को उस तरह से हराने में नहीं लगा था जिस तरह से मनमोहन सिंह को हराया गया था, भले ही उन्होंने चुनावी बॉन्ड और अडानी जैसे मुद्दे गढ़े। 2019 में इसी तरह से राफेल घोटाले का शिगूफा छेड़ा गया था। लेकिन, इतना तो दिख ही गया कि ये नरेंद्र मोदी को उसी तरह हराने में लगे थे जैसे इंदिरा गाँधी को हराया गया था।

आप देखिए तो सही कि 1977 में इंदिरा गाँधी को कैसे हराया गया था – विरोध प्रदर्शन कर-कर के अशांति और अराजकता पैदा की गई, खासकर छात्रों का आंदोलन और बेरोजगारी से जुड़े प्रदर्शन, महँगाई का अब तक का उच्चतम स्तर, चुनाव में धाँधली के आरोप जिस कारण बाद में इंदिरा गाँधी को बतौर सांसद अयोग्य घोषित कर दिया गया था, जिसके बाद देश पर आपातकाल थोपा गया। ये हाल ही में नरेंद्र मोदी पर विपक्षियों और उनके तंत्र द्वारा लगाए गए आरोपों से मेल खाते हैं।

ये 1977 की याद दिलाने को इतने बेताब थे कि इन्होंने ‘अघोषित आपातकाल’ तक का जम कर रट्टा लगाया। अब प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने इंदिरा गाँधी की तरह कोई लोकतंत्र विरोधी कदम उठाया तो था नहीं, तो इन्होंने ‘अघोषित’ जोड़ दिया। हालाँकि, उनका 295 वाला सपना पूरा नहीं हुआ और I.N.D.I. गठबंधन 234 सीटों पर ही सिमट गया। लेकिन, वो पूरी तरह नाकाम भी नहीं हुए। विपक्ष और उसके तंत्र को देखिए – अंतरराष्ट्रीय मीडिया, यहाँ उनके पाले हुए यूट्यूबर्स, बुद्धिजीवी वर्ग, AI का इस्तेमाल कर के नैरेटिव बना कर चुनाव को प्रभावित करने वाली विदेशी ताकतें और इच्छाधारी आंदोलनकारियों का गुट।

इस पूरे के पूरे इकोसिस्टम ने पूरी ताकत लगा दी और उन्होंने एक तरह से खून चख लिया है, क्योंकि उत्तर प्रदेश में उनकी रणनीति काम आ गई है। कारण – यूपी में भाजपा 2014 में 71 और 2019 में 62 सीटों से 2024 में सीधा 33 पर गिर गई। अब वो इन करतूतों को एक अलग स्तर पर ले जाने वाले हैं। यही तो कारण है कि वो उतना जश्न मना नहीं रहे हैं, वो अभी अगले स्तर पर जाने वाले हैं। अब जब उनकी साजिश थोड़ी-बहुत सफल हो गई है, एक राष्ट्र के रूप में अब इसका पूरा भार हमलोगों पर आ जाता है कि हम अपने देश को असफल न होने दें।

चलिए, उत्तर प्रदेश के परिणामों को देख कर तो हम ये कह रहे हैं कि हमें इसका बिलकुल भी अंदाज़ा नहीं था, हम इसे पढ़ने में कामयाब नहीं रहे, लेकिन कम से कम I.N.D.I. गठबंधन वालों की जो मंशा है और आगे ये लोग जो करने वाले हैं उसके बारे में तो हम कम से कम ऐसा नहीं कह सकते। राहुल गाँधी को लेकर अब तक एक चीज तो समझ आ गई है, वो अपनी सनक में बार-बार एक ही चीज दोहराते रहेंगे भले ही 100वीं बार में इसमें सफलता क्यों न मिले।

राहुल गाँधी का समर्थन करने वाला इकोसिस्टम भी इसमें उनका साथ देने में उफ्फ तक नहीं करता है, थकना तो दूर की बात है। इसीलिए तो उन्हें 2004 से लेकर अब तक दर्जनों बार लॉन्च किया जा चुका है। अतः, साफ़ है कि अब वैसी-वैसी चुनौतियाँ ही खड़ी की जाने वाली हैं जैसी इंदिरा गाँधी के सामने कभी आई थीं। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के तीसरे कार्यकाल में अशांति और अराजकता का माहौल बनाया जाएगा, विभिन्न वर्गों को उसके खिलाफ सड़क पर उतारा जाएगा झूठतंत्र का सहारा लेकर।

इसका विश्लेषण ज़रूरी है कि राहुल गाँधी, उनकी पार्टी कॉन्ग्रेस और इनका समर्थन करने वाला इकोसिस्टम अब आगे क्या साजिश कर रहा है? अराजकता, संघर्ष और शांति का दौर पैदा करना, यही उनकी मंशा है। इसकी शुरुआत विरोध प्रदर्शनों से होगी, हर प्रकार के विरोध प्रदर्शन। इसकी पूरी संभावना है कि सिद्धू मूसेवाला और AK47 का स्टिकर लगा कर किसान आंदोलनकारी फिर से दिल्ली में लौटेंगे। इसीलिए, राहुल गाँधी ने जो 295 का आँकड़ा दिया था वो सिर्फ संयोग प्रतीत नहीं होता।

उत्तर प्रदेश में भाजपा को हराने में जातिवाद का खूब इस्तेमाल किया गया, इसीलिए इस बार जाति का इस्तेमाल खूब किया जाने वाला है और जातिगत संघर्षों को जन्म दिया जाएगा। अगर आप कथित किसान आंदोलन को भी याद करें तो उसका नेतृत्व जाट किसान नेताओं ने ही किया था। अब कुछ ऐसी पटकथा लिखी जा सकती है कि एक के बाद एक जातीय समूह अपने ‘अधिकारों’ के लिए सड़क पर उतर आएँ। भाजपा को इससे बड़े ही सलीके से निपटना होगा, क्योंकि अब तक पार्टी और समर्थक ऐसी समस्याओं के इर्दगिर्द विरोधाभासी नैरेटिव ही परोसते रहे हैं।

2014 में नरेंद्र मोदी के पहली बार प्रधानमंत्री बनने के बाद ‘Subaltern Hinduva’ का विचार ज़रूर आया, जिसमें ये कहा गया कि जातिगत पहचान आपके धर्म के आड़े नहीं आता। हालाँकि, ये कॉन्सेप्ट जाति व्यवस्था को लेकर अधिक व्याख्या नहीं करता। इसका समाधान कैसे करना है, ये हमें देखना होगा। 2021 से ही भारत में आम जनगणना नहीं हो पाई है, ऐसे में नई सरकार बनने के बाद इसे जल्द से जल्द पूरा करवाना होगा। इस बीच जाति जनगणना की माँग और जोर-शोर से उठाई जाएगी।

जनगणना की प्रक्रिया जैसे ही शुरू होगी, इसे NRC से जोड़ते हुए ‘कागज़ नहीं दिखाएँगे’ वाला ड्रामा फिर से वापस रचा जाएगा। और हाँ, उत्तर-दक्षिण में विभाजन का अभियान और तेज़ किया जाएगा। विडम्बना देखिए कि आज यही इकोसिस्टम उत्तर प्रदेश के लिए अपने प्यार और सम्मान को प्रकट करने का दिखावा कर रहा है, क्योंकि भाजपा को यहाँ मात मिली है। लेकिन, कुछ ही दिनों बाद ये इकोसिस्टम ‘जनसंख्या में तेज़ी से बढ़ते’, ‘अशिक्षित’ और ‘अस्वच्छ’ ‘भैय्या’ लोगों को अपमानित करना, उन पर तंज कसना, उन्हें बदनाम करना और उन्हें लेकर घृणा फैलाना जारी रखेगा।

ये ट्रेंड और खतरनाक होगा, क्योंकि 2026 या उसके बाद संसदीय सीटों का पुनः परिसीमन ही होना है। सीटों की संख्या बढ़ेंगी, इसे लेकर भी खूब झूठ फैलाया जाएगा। परिसीमन भी जनसंख्या के अनुपात के हिसाब से ही परिसीमन भी होना है, ऐसे में जनगणना कराना मोदी सरकार के लिए एक बड़ा सिरदर्द शामिल होने वाला है। इसकी प्रक्रिया पूरी कराने से अधिक इसे लेकर जो प्रोपेगंडा फैलाया जाएगा जो लोगों को इसे लेकर जिस तरह से डराया जाएगा, उससे मोदी सरकार कैसे निपटेगी ये देखना है।

जनगणना से घुसपैठियों को बाहर रखा जाएगा, विदेशी मीडिया इसे ‘मुस्लिमों पर अत्याचार’ बता कर प्रचारित करेगा। ये सब तो उन समस्याओं की सूची है, जो सीधे दिख रही है या जिसका इशारा मिल रहा है। क्षेत्र, भाषा, जाति, धर्म, वर्ग या किसी भी चीज़ के आधार पर अराजकता या शांति फैलाई जा सकती है, किसी समूह को भड़काया जा सकता है। किसी भी कन्फ्यूजन की स्थिति का फायदा उठाया जा सकता है। अचानक से विदेशी मीडिया में चलने लगेगा कि समूह A समूह B पर अत्याचार कर रहा है, विदेशी राष्ट्राध्यक्षों से इन कृत्रिम संघर्षों पर सवाल पूछे जाएँगे जबरन।

आप देखिए, आखिर सबकी निगाहें भारत पर ही है। भारत के किसी भी हिस्से से ऐसी कहानी पेश कर के उसका अंतरराष्ट्रीय करण किया जा सकता है। इसीलिए, अब वो समय गया जब हम ‘पप्पू पास हो गया’ या ‘पप्पू कांट डांस साला’ पर हँसते थे। पप्पू न सिर्फ पास हो गया है, बल्कि औपनिवेशिक ताकतों के इशारे पर नाच भी रहा है। हम तो यह तय करें कि अनजाने में ही सही लेकिन कहीं हम ऐसी ताकतों के क्रियाकलापों को समर्थन देकर उन्हें पुष्ट तो नहीं कर रहे हैं?

हमें ये नहीं सोचना चाहिए कि ये सब सिर्फ और सिर्फ नरेंद्र मोदी के खिलाफ किया जा रहा है, हमें इससे क्या! हाँ, सीधे तौर पर तो ये दिख ही रहा है कि ये सब उन्हें सत्ता से बेदखल करने के लिए किया जा रहा है। गहराई से देखेंगे तो आपको भी पता चल जाएगा कि अंदरखाने क्या सब पक रहा है। हम ये नहीं कह सकते कि अभी देश में परम आदर्श स्थिति है, लेकिन अगर हमने थोड़ी सी भी ढील बरत दी या गलती कर दी तो हम अराजकता और संघर्ष के चक्र में फँसते चले जाएँगे।

(ये लेख मूल रूप से ऑपइंडिया के CEO राहुल रौशन द्वारा हमारी अंग्रेजी वेबसाइट पर प्रकाशित किया गया है, इसे मूल रूप में पढ़ने के लिए यहाँ क्लिक करें।)

चंद्रबाबू नायडू की TDP को चाहिए लोकसभा अध्यक्ष, नीतीश कुमार माँग रहे ‘रेल’: मीडिया रिपोर्ट्स ने बताया क्या है शिंदे-चिराग-माँझी के डिमांड्स

लोकसभा चुनाव 2024 के नतीजों के बाद अब मोदी सरकार के तीसरे कार्यकाल की तैयारी शुरु हो चुकी है। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने अपना इस्तीफा राष्ट्रपति को सौंप दिया है और अब वो तीसरी बाद प्रधानमंत्री पद की शपथ 8 जून को लेंगे। इस बीच दिल्ली में एनडीए की सहयोगी दलों की बैठक हुई, जिसमें 16 पार्टियों के 21 शीर्ष नेताओं ने हिस्सा लिया। वहीं, मीडिया रिपोर्ट्स की मानें, तो अब सरकार गठन के बाद मंत्रालय को लेकर एनडीए के सहयोगी दलों की माँगें सामने आ रही हैं।

टाइम्स नाउ ने सूत्रों के हवाले से बताया है कि एनडीए में बीजेपी के बाद सबसे बड़ी पार्टी बनकर उभरी तेलुगू देशम पार्टी ने अपनी माँग बीजेपी के सामने रख दी है। टीडीपी ने लोकसभा स्पीकर के साथ ही 3 कैबिनेट और 2 राज्य मंत्रियों की जगह माँगी है।

टीडीपी के अलावा चिराग पासवान की लोजपा (राम विलास) ने पाँच लोकसभा सीटें जीती है। ऐसे में चिराग पासवान एक कैबिनेट मंत्री और एक राज्यमंत्री का पद अपनी पार्टी के सांसदों के लिए चाहते हैं। वहीं, बिहार से एक सीट जीतने वाली हिंदुस्तानी आवामी मोर्चा के सबसे बड़े नेता जीतन राम माँझी भी कैबिनेट पद चाहते हैं।

सूत्रों की मानें तो शिंदे की अगुवाई वाली शिवसेना भी केंद्र सरकार में अहम हिस्सा चाहती है। उसने भी एक कैबिनेट मंत्रालय और एक राज्य मंत्री का पद माँगा है। हालाँकि संख्या के हिसाब से ये माँग कम या ज्यादा भी नहीं लगती। वहीं, नीतीश कुमार द्वारा भी रेल मंत्रालय की माँग सामने आ रही है। हालाँकि एनडीए में शामिल सभी दलों ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को बिना शर्त समर्थन देने का ऐलान किया है, ऐसे में किस पार्टी के हिस्से कौन सा मंत्रालय आता है, इसका पता 2-3 दिनों में लग ही जाएगा।

बता दें कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी मौजूदा समय में कार्यवाहक के तौर पर देश की बागडोर संभाल रहे हैं। उन्होंने अपना इस्तीफा राष्ट्रपति को सौंप दिया है, जिसके राष्ट्रपति ने स्वीकार कर लिया है। एनडीए की बैठक दिल्ली में होने पर नरेंद्र मोदी को संसदीय दल का नेता भी चुन लिया गया है। माना जा रहा है कि वो 8 जून को तीसरी बार देश के प्रधानमंत्री पद की शपथ लेंगे।

बिहार की लड़की को आरिफ ने दिल्ली में फँसाया, इस्लाम कबूल कराकर बनाया मुस्लिम: भाई ने भी किया बलात्कार, अब्बा ने की मारपीट

उत्तर प्रदेश के बरेली में ग्रूमिंग जिहाद का मामला सामने आया है। यहाँ बिहार की एक हिन्दू लड़की ने मोहम्मद आरिफ पर खुद को प्रेमजाल में फँसाने और बाद में जबरन इस्लाम कबूल करवाने का आरोप लगाया है। पीड़िता के साथ आरिफ के भाई मोहम्मद तालिब ने भी बलात्कार किया। विरोध करने पर महिला की बेरहमी से पिटाई की गई और जान से मारने धमकी दी गई है।

यह घटना मंगलवार (4 जून 2024) की बताई जा रही है। इस मामले में हिन्दू संगठनों ने प्रशासन से आरोपितों पर कड़ी कार्रवाई करने की माँग की है। यह घटना बरेली के थाना क्षेत्र बहेड़ी की है। कस्बा सुन्नीनगर की रहने वाली पीड़िता ने पुलिस में शिकायत दर्ज करवाई है। अपनी शिकायत में महिला ने बताया कि वह मूल रूप से बिहार के नवादा जिले की रहने वाली है।

महिला दिल्ली में रहकर नौकरी करती थी। यहीं पर उसे उत्तर प्रदेश के बरेली का रहने वाला मोहम्मद आरिफ मिला। कुछ समय के बाद आरिफ ने लड़की को अपने प्रेमजाल में फँसा लिया। यहाँ से वो महिला को अपने घर बरेली के बहेड़ी ले आया। इस दौरान उसने महिला के साथ कई बार बलात्कार किया। लगभग एक साल पहले आरिफ ने दबाब डालकर पीड़िता को इस्लाम भी कबूल करवा दिया।

इस्लाम कबूल करवाने के बाद आरिफ ने पीड़िता का नाम सना रखा और फिर निकाह कर लिया। पीड़िता ने आरोप लगाया कि 4 जून (मंगलवार) को पीड़िता घर पर अकेली थी। रात में लगभग 2 बजे पीड़िता के कमरे में आरिफ का भाई मोहम्मद तालिब घुस गया। उसने पीड़िता से अश्लील हरकतें शुरू कर दीं। महिला ने विरोध किया, इसके बावजूद तालिब ने उसके साथ रेप किया।

पीड़िता ने जब इसकी शिकायत करने की चेतावनी दी तो तालिब बोला, “साली तू वैसे भी बिहार की रहने वाली है। अगर तूने इस बात को किसी से भी बताया तो तेरी हत्या कर दूँगा।” पीड़िता ने जैसे-तैसे रात बिताई और अगले दिन 5 जून (बुधवार) को आरिफ के घर आने के बाद उसे उसके भाई तालिब की करतूत बताई। आरिफ ने अपने भाई का ही पक्ष लिया और पीड़िता को ही गलत बता दिया।

इसके बाद आरिफ ने अपने भाई तालिब और अब्बा साबिर इस्लाम के साथ मिलकर पीड़िता को बुरी तरह से पीटा। इन सभी ने महिला को गंदी-गंदी गालियाँ दीं और कहा, “साली अगर तूने इस बात की शिकायत किसी से की तो हम सब मिलकर तुझे जलाकर तेरी हत्या कर देंगे। तेरी लाश का भी पता भी नहीं चलेगा। वैसे भी बहेडी थाना क्षेत्र में बाहर की लड़कियों की लाशें बहुत मिलती हैं।”

महिला ने आरोपितों को काफी दबंग और आपराधिक किस्म का बताते हुए अपनी हत्या की भी आशंका जताई है। पीड़िता ने आरोपितों पर कड़ी कार्रवाई की माँग की है। ऑपइंडिया के पास शिकायत कॉपी मौजूद है। बरेली के हिन्दू संगठन के पदाधिकारी हिमांशु पटेल ने स्थानीय प्रशासन से आरोपितों पर कड़ी कार्रवाई के साथ पीड़िता की जान-माल की रक्षा की अपील की है।

लोकसभा में साफ, विधानसभा में हाफ: ओडिशा ने नवीन पटनायक की कैश से लेकर FREE बिजली तक को नकारा, पहली बार राज्य में BJP बनाएगी सरकार

लोकसभा चुनाव 2024 के साथ ही ओडिशा विधानसभा चुनाव के भी नतीजे आए। ओडिशा में जनमत ढाई दशकों के बाद पूरी तरह से बदला नजर आया। जनकल्याण की नीतियों को छोड़कर सिर्फ चेहरा चमकाने की राजनीति कर रहे नवीन बाबू को जब लगा कि चुनाव में बीजेडी कमजोर पड़ रही है, तो उन्होंने मुफ्त की रेवड़ियों की झड़ी लगा दी। नवीन पटनायक की बीजेडी ने ओडिशा में 100 यूनिट फ्री बिजली, सभी छात्रों के छात्रवृत्ति, स्वयंसेवी समूहों को आर्थिक मदद और अन्य वादे किए, लेकिन जब नतीजे 4 जून को आए, तो ओडिशा में बीजू जनता दल को बुरी तरह से पराजय का मुँह देखना पड़ा। खुद मुख्यमंत्री नवीन पटनायक डैमेज कंट्रोल के लिए 2 सीटों पर चुनाव लड़े, लेकिन एक सीट पर उन्हें भी पराजय का मुँह देखना पड़ा।

ओडिशा में आम जनता ने बीजेडी की मुफ्त रेवड़ियों की जगह बीजेपी के विकास, रोजगार सृजन और समस्याओं के लॉन्ग टर्म समाधान को चुना है। नवीन बाबू की मुफ्त रेवड़ियों को नकारते हुए जनमानस ने ओडिशा की 147 विधानसभा सीटों में से 78 पर बीजेपी को जीत दिला दी। बीजेडी सिर्फ 51 तक सिमट गई, तो कॉन्ग्रेस 14, निर्दलीय 3 और सीपीआई-एम को महज 1 सीट मिली। चुनावी नतीजों के बाद धर्मशाला विधानसभा सीट से जीते निर्दलीय विधायक हिमाँशु साहू ने बीजेपी का दामन थाम लिया और बीजेपी के विधायकों की संख्या 79 तक पहुँच गई।

नवीन पटनायक की अगुवाई में बीजेडी ने विधानसभा चुनाव को देखते हुए चुनावी रेवड़ियों की झड़ी लगा दी। बीजेडी ने 100 यूनिट मुफ्त बिजली की घोषणा कर दी, साथ ही 100-150 यूनिट के बीच बिजली पर आँशिक सब्सिडी भी दी। बीजेडी ने कहा कि इससे गरीबी परिवारों और खासकर किसानों को फायदा मिलेगा। बता दें कि ओडिशा में अधिकाँश किसान सिंचाईं के लिए बिजली के पंप पर निर्भर हैं।

फोटो साभार : बीजेडी घोषणापत्र

बीजेडी ने मुफ्त बिजली के बाद सेल्फ हेल्ड ग्रुपों को आर्थिक सहयोग की घोषणा की। नवीन पटनायक ने अगले 10 सालों में 20 हजार करोड़ रुपए महिला सशक्तिकरण समूहों को देने की घोषणा की, जिसमें इन समूहों से जुड़े लोगों को पेंशन देने की भी घोषणा की गई। मिशन शक्ति के तहत 6 लाख महिला स्वयंसेवी समूहों और इनसे जुड़ी 70 लाख महिलाओं को इससे फायदा पहुँचाने की बात कही गई।

मिशन शक्ति के तहत नवीन पटनायक ने की थी हजारों करोड़ की घोषणा

इसके अलावा बीजेडी ने छात्रों के लिए 1 लाख करोड़ रुपए छात्रवृत्ति के तौर पर देने की घोषणा की। इसमें कॉलेज जाने वाली छात्राओं को 14 हजार रुपए सालाना और छात्रों को 12 हजार रुपए सालाना देने का वादा किया गया।

ये वादे देखने में तो आकर्षक लगते हैं, लेकिन बीजेपी ने बीजेडी की ये कहकर आलोचना की कि आखिरी समय में सत्ता में आने के लिए नवीन पटनायक ने इस तरह की घोषणा की। बीजेपी नेताओं खासकर केंद्रीय मंत्री धर्मेंद्र प्रधान ने बीजेडी की आलोचना की। बीजेपी नेताओं लंबे समय से राज्य की सत्ता में रही बीजेडी द्वारा इन घोषणाओं के समय पर सवाल उठाए। बीजेपी ने इसे चुनावी रेवड़ी की संज्ञा दी।

दूसरी तरफ बीजेपी ने ओडिशा की जनता के सामने समावेशी विकास का ताना-बाना रखा। बीजेपी ने 300 यूनिट मुफ्त बिजली की घोषणा की, लेकिन ये पूरी तरह से फ्री नहीं था। बल्कि इसे पीएम सूर्य घर योजना के तहत केंद्र सरकार की स्कीम से मिलाया। पीएम मोदी ने जनवरी 2024 को राम मंदिर प्राण प्रतिष्ठा समारोह के दिन इस योजना की घोषणा की थी, जिसमें घरों के ऊपर सोलर एनर्जी के लिए पैनल स्थापित किए जाएँगे।

केंद्र सरकार की इस योजना का लक्ष्य नवीनीकृति ऊर्जा के प्रयोग को बढ़ावा देना है। इसके साथ ही बीजेपी ने राज्य की 19,630 तालाबों-झीलों को पुनर्जीवित करने और सभी ग्राम पंचायतों की सड़कों को सोलर एनर्जी से प्रकाशित करने की योजना पेश की। ओडिशा में जनता ने एक तरफ बीजेडी की मुफ्त रेवड़ियों को लाल झंडी दिखाई, तो बीजेपी के समावेशी विकास के वादे को गंभीरता से लिया।

नवीन पटनायक को कंटबजी विधानसभा सीट पर बीजेपी के लक्ष्मण बाग ने बुरी तरह से हराया। इस विधानसभा क्षेत्र में पलायन का मुद्दा काफी गंभीर है। बीजेपी ने इस मुद्दे पर काफी काम किया और ओडिशा में चुनाव प्रचार को औद्योगिकीकरण और पलायन को रोकने के मुद्दे को जोड़कर उठाया। पीएम मोदी और गृहमंत्री शाह दोनों ने ही पलायन के मुद्दे को गंभीरता से उठाया।

ओडिशा में पिछले 25 साल से सत्ता में बीजेडी है। ओडिशा में हमेशा नवीन पटनायक और बीजेडी के पक्ष में मतदान करती रही आम जनता ने इस चुनाव में बीजेडी को सबक सिखाने का फैसला किया और बीजेपी के पक्ष में जमकर मतदान किया।

सिर्फ विधानसभा ही नहीं, बल्कि लोकसभा चुनाव में बीजेडी को जनता ने नकारा

साल 2024 के लोकसभा चुनाव में बीजेडी का खाता भी नहीं खुला है। यहाँ 25 साल से सत्ता में काबिज बीजेडी को 21 में से सभी 21 सीटों पर हार का मुँह देखना पड़ा। बीजेपी ने 20 लोकसभा सीटों पर जीत दर्ज की, तो कॉन्ग्रेस ने भी एक सीट जीत ली।

खास बात ये है कि ओडिशा में जीत के लिए बीजेपी लंबे समय से प्रयास कर रही थी। धर्मेंद्र प्रधान जैसे नेताओं को फ्री-हैंड दिया गया। लगातार ओडिशा में बीजेपी ने जोर लगाया। इस बार बीजेपी को अपनी मेहनत का फल भी मिला है। बीजेपी ने केरल में भी एक लोकसभा सीट जीती है और उस टैग से खुद को बाहर निकाला है, जिसमें बीजेपी को सिर्फ ‘उत्तर भारतीय राज्यों की पार्टी’ कहा जाता था।

मूल रूप से यह लेख अंग्रेजी भाषा में प्रकाशित है। मूल रिपोर्ट पढ़ने के लिए यहाँ क्लिक करें