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हिरोइन लैला खान की हत्या मामले में सौतेले अब्बा को हुई ‘सजा-ए-मौत’: फार्म हाउस में गाड़ दी परिवार के 6 लोगों की लाश, 13 साल बाद मिला इंसाफ

बॉलीवुड अभि‍नेत्री लैला खान और उनके परिवार के मर्डर के मामले में मुंबई की सत्र अदालत ने दोषी पाए गए एक्ट्रेस के सौतेले अब्बा परवेज टाक को सजा-ए-मौत सुनाई है। परवेज को इसी माह की शुरुआत में हत्या और सबूतों को नष्ट करने के मामले में दोषी ठहराया गया था।

9 मई, 2024 को अदालत ने इस संबंध में सुनवाई के बाद परवेज को दोषी माना था। परवेज पर आरोप था कि उसने न सिर्फ लैला खान, बल्कि उनके 4 अन्य भाई-बहनों और माँ को भी मार डाला था। पुलिस को बिस्तर और तकिये से लिपटी हुई उनकी लाशें मिली थीं। परवेज ने उन्हें एक सुनसान फार्महाउस में दफनाया था।

परवेज टाक, शेलीना का तीसरा शौहर था। शेलीना का अपने दूसरे शौहर आसिफ शेख के साथ नजदीकी उसे पसंद नहीं थी और इसे लेकर ही हुए वाद-विवाद के बाद उसने लोहे की रॉड से अपनी बीवी के सिर पर वार किया। असल में शेलीना खान बिल्डर आसिफ शेख को अपनी संपत्ति का केयरटेकर बनाने की योजना पर काम कर रही थी। बेटे इमरान, बेटी अज़मीना और भतीजी आफरीन उसे बचाने आई, लेकिन परवेज टाक ने एक-एक कर उन सभी को रॉड से मारा, चाकू भी घोंप दिया।

लैला खान और इमरान की जुड़वाँ बहन ज़ारा उस समय मुंबई के मीरा रोड में एक जमीन से संबंधित करार में व्यस्त थे। परवेज टाक को पता था कि उनके पास कुछ आभूषण हैं और साथ में 2 करोड़ रुपए भी, जिन्हें लेकर वो फार्महाउस पर आएँगे। ऐसे में वो अपने साथी शाकिर के साथ मीरा रोड उन्हें लेने के लिए पहुँचा। रास्ते में ही घोड़बंदर रोड पर कार रोक कर उसने दोनों को मार डाला। हत्या के वक्त लैला खान की उम्र मात्र 31 वर्ष थी। उसकी अम्मी 51 साल की थी, जबकि बड़ी बहन 32 साल की।

इमरान और ज़ारा दोनों जुड़वाँ 25 साल के थे। ओशिवारा पुलिस थाने में लैला खान के अब्बा और शेलीना के पहले शौहर नादिर पटेल ने अपने परिवार के गायब होने की शिकायत दर्ज कराई थी। उन्होंने परवेज टाक और आसिफ शेख पर आरोप लगाए थे। बेंगलुरु से आसिफ शेख को पकड़ा भी गया लेकिन फिर उसे छोड़ दिया गया। मोबाइल डेटा के आधार पर इगतपुरी में परवेज टाक के लैला खान के साथ होने का पता चला, ऐसे में उसे गिरफ्तार किया गया।

हत्या के बाद परवीज टाक अपने मूल निवास स्थान कश्मीर 2 कार लेकर चला गया था, जहाँ वो फॉरेस्ट कॉन्ट्रैक्टर हुआ करता था। 8 जुलाई, 2012 को जम्मू कश्मीर पुलिस ने उसे ठगी के एक मामले में पकड़ा, जिसके बाद उसने महाराष्ट्र में हत्या की बात उगल दी। 10 जुलाई, 2012 को फार्महाउस में खुदाई के बाद लाशें निकाली गईं। परवेज टाक लगातार बयान बदल रहा था और लाशों को पहाड़ से फेंकने की बात भी कह रहा था। उसके खिलाफ केस साबित करने के लिए 41 गवाहों की कोर्ट में पेशी हुई।

सेलिना के सब बच्चे उसके पहले शौहर से ही थे, ऐसे में पटेल उससे मिलने-जुलने आया करते थे। ये बात परवेज टाक को खटकती थी। नादिर पटेल के अनुसार, उनकी बेटियों ने उन्हें बताया था कि परवेज टाक दुबई शिफ्ट होने के लिए उन पर दबाव बनाता था और वेश्यावृत्ति कर के पैसे कमाने के लिए कहता था। परवेज टाक का कहना था कि उसे डर था कि शेलीना और उसके बच्चे उसे छोड़ कर दुबई में बस जाएँगे। वो अपनी बीवी की संपत्ति हड़पना चाहता था।

UPA सरकार ने ब्रह्मोस मिसाइल के निर्यात को रोका, लीक हुई चिट्ठियों से खुलासा: मोदी सरकार ने की जो हजारों करोड़ की डील, वो सालों पहले हो जाती

केंद्र में 2004 से लेकर 2014 तक UPA की सरकार थी। कॉन्ग्रेस इस गठबंधन की सबसे बड़ी पार्टी थी और डॉक्टर मनमोहन सिंह प्रधानमंत्री थे, लेकिन सत्ता की बागडोर सोनिया गाँधी के हाथ में थी। UPA सरकार में कोयला और कॉमनववेल्थ से लेकर 2G और रेलवे में नौकरी तक, कई घोटाले हुए। वहीं मुंबई में 26/11 हमलों के बाद सरकार हाथ पर हाथ धरे बैठी रही, कॉन्ग्रेस पार्टी पाकिस्तान को क्लीन-चिट देते हुए हिन्दुओं को इसके लिए जिम्मेदार ठहराती रही।

अब UPA सरकार का नया कारनामा देश के सामने आया है। UPA सरकार ने जानबूझकर ब्रह्मोस मिसाइल के निर्यात से जुड़ी फाइलों को अटकाया। ब्रह्मोस की टीम का फिलीपींस दौरा रोक दिया गया था और इसके लिए राजनीतिक क्लियरेंस न होने की बात कही गई थी। कोई पॉलिसी न होने से असमंजस की स्थिति बनी रही, ब्रह्मोस के निर्यात में देरी हुई। ‘ABP News’ के पत्रकार आशीष सिंह ने कई पुराने पत्रों को जारी करते हुए ये खुलासा किया। इसके तार विदेश और रक्षा मंत्रालय तक जुड़े हुए हैं।

3 अलग-अलग देशों से संबंधित ये दस्तावेज हैं। असल में पिछले महीने ब्रह्मोस की पहली बार देश से बाहर डिलीवरी हुई, वो कई वर्षों पहले हो सकती थी अगर UPA सरकार लचर रवैया नहीं अपनाती। 17 अप्रैल, 2014 को विदेश मंत्रालय ने ब्रह्मोस के GM को पत्र लिखा था, तब टीम फिलीपींस जाने वाली थी। उन्होंने हिदायत दी गई कि बिना पॉलिटिकल क्लियरेंस के वो फिलीपींस न जाए। उस समय RK अग्निहोत्री ब्रह्मोस ऐरोस्पेस के CEO थे और उन्हें भी ये पत्र लिखा गया था।

इस पत्र में लिखा गया है कि सूचना मिली है कि ब्रह्मोस की टीम फिलीपींस जा रही है, लेकिन हमारे पास इसके पॉलिटिकल क्लियरेंस संबंधित कोई दस्तावेज नहीं हैं। साथ ही टीम को MEA से संपर्क करने को भी कहा गया है। एक अन्य पत्र इंडिया इंडोनेशिया जॉइंट डिफेंस कॉर्पोरेशन की बैठक को लेकर है, जो 17-18 जून, 2010 को हुई थी। इस दौरान इंडोनेशिया प्रतिनधिमंडल को नई दिल्ली में ब्रम्होस ऐरोस्पेस का दौरा भी करना था। हालाँकि, केंद्रीय रक्षा मंत्रालय ने सलाह दी कि इस दौरे को रद्द किया जाए।

कारण बताते हुए कहा गया कि ब्रह्मोस के निर्यात को लेकर अभी राजनीतिक स्तर पर कोई निर्णय नहीं लिया गया है। ये पत्र ब्रह्मोस ऐरोस्पेस के तत्कालीन CEO ए सिवाथनु पिल्लई को केंद्रीय रक्षा मंत्रालय के अधिकारी DK महापात्रा ने लिखा था। इस पत्र में लिखा गया था कि हम इंडोनेशिया को गलती से ये इंगित करा रहे हैं कि हम ब्रह्मोस मिसाइल के निर्यात को लेकर तैयार हैं। वहीं 9 मई, 2011 को भी एक पत्र भेजा गया है जिसमें कहा गया है कि केंद्रीय विदेश मंत्रालय चुनिंदा देशों को ब्रह्मोस मिसाइल निर्यात करने के पक्ष में है।

इस पत्र में कहा गया है कि ब्रह्मोस मिसाइल के उत्पादन और विक्रय को लेकर रूस के साथ हुए करार को इस तरह से लागू किया जाना चाहिए जो किसी भी पक्ष की सुरक्षा और सैन्य-राजनीतिक हितों को नुकसान नहीं पहुँचाता हो। इसमें राष्ट्रीय कानूनों का ध्यान रखने की भी सलाह दी गई थी। हालाँकि, अंत में इसमें भी आदेश दिया गया था कि मिसाइलों के निर्यात को लेकर जब तक निर्णय नहीं हो जाता तब तक ब्रह्मोस के निर्यात को लेकर कोई बातचीत न की जाए।

तत्कालीन केंद्रीय विदेश सचिव निरुपमा राव ने कहा था कि हम ब्रह्मोस के पक्ष में हैं, लेकिन इसके निर्यात के लिए हमारे पास कोई नीति नहीं है। इस पत्र में भी लिखा गया है कि MEA इसके लिए नीति बनाने की ज़रूरत पर जोर देती है। इसमें संयुक्त राष्ट्र के नियमों के पालन की बात से लेकर आतंकियों के हाथ में तकनीक जाने की आशंका भी जताई गई है, लेकिन इसका कोई निदान नहीं बताया गया है। सिर्फ निर्यात के लिए किसी भी बातचीत से मना किया गया है।

बता दें कि ब्रह्मोस मध्यम रेंज सुपरसोनिक क्रूज मिसाइल है। इसे सबमैरीन, जहाज या फाइटर एयरक्राफ्ट से लॉन्च किया जा सकता है। इसके जमीन और जहाज से मार करने वाले वर्जन हैं। भारत के ब्रह्मपुत्र और रूस की नदी मॉस्क्वा नदी के संयुक्त नाम पर इसका नाम ब्रह्मोस रखा गया है। अब 1500 किलोमीटर रेंज तक के ब्रह्मोस मिसाइलों के उत्पादन की तैयारी है। इसकी पहली टेस्ट फायरिंग जून 2001 में हुई थी। सितंबर 2010 में सुपरसोनिक स्पीड में टेस्ट की जाने वाली ये पहले स्टीप डाइव मिसाइल बनी।

अप्रैल 2024 में भारत ने ब्रह्मोस की पहली सफल डिलीवरी पूरी की। भारत और फिलीपींस के बीच इसे लेकर 375 मिलियन डॉलर (3114 करोड़ रुपए) की डीप हुई थी। भारतीय वायुसेना के ट्रांसपोर्ट एयरक्राफ्ट से इसके पहले बैच की डिलीवरी पूरी की जा चुकी है। फिलीपींस अपनी सेना के आधुनिकीकरण की योजना के तहत ब्रह्मोस खरीद रहा है।4 खेप में ये मिसाइलें पहुँचाई गई हैं, हर खेप में 3 लॉन्चर और 290 किलोमीटर रेंज की 3 मिसाइलों के अलावा प्रत्येक लॉन्चर के लिए एक मोबाइल प्लेटफॉर्म दिया जाता है।

‘ड्राइवर को फँसा रहा बिल्डर का परिवार, दबाव में दिया बयान’: पुणे पुलिस का खुलासा, नाबालिग के पिता को पता था बेटा नशे में है फिर भी दे दी चाभी

पुणे पोर्श कार एक्सीडेंट केस में पुलिस ने कहा है कि अग्रवाल परिवार नाबालिग को बचाने के लिए परिवार के ड्राइवर को बलि का बकरा बना रहा है। पुणे के कमिश्नर अमितेश कुमार ने बाकायदा प्रेस कॉन्फ्रेंस करके शुक्रवार (24 मई 2024) को ये बाते कहीं। उन्होंने कहा कि पोर्श एक्सीडेंट केस में ड्राइवर को फँसाया जा रहा है।

मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक, पुणे पोर्श एक्सीडेंट केस में आरोपित किशोर पूरी तरह से होश में था, और उसे पता था कि वो क्या कर रहा है। इस केस में नाबालिग आरोपित 5 जून तक हिरासत में है, जिसे हादसे के कुछ ही देर में जमानत मिल गई थी, लेकिन बाद में जमानत कैंसिल कर दी गई। वहीं, नाबालिग का पिता विशाल अग्रवाल को पुलिस गिरफ्तार कर चुकी है, तो दादा से भी कार के मालिकाना हक को लेकर पूछताछ की है।

पुणे के कमिश्नर अमितेश कुमार ने कहा, “हमारे पास उसके पब में शराब पीने का सीसीटीवी फुटेज है। इस केस में अकेले ‘ब्लड रिपोर्ट’ के आधार पर ही जाँच आगे नहीं बढ़ रही, बल्कि अन्य बातों का भी ध्यान रखा जा रहा है। वह (आरोपित किशोर) पूरी तरह से होश में था। उसने इतनी भी नहीं पी थी कि उसे होश ही न रहे कि क्या हो रहा है। इस मामले में सेक्शन 304 के तहत मामला बनता है।” इस दौरान उन्होंने पुलिस स्टेशन में नाबालिग आरोपित को पिज्जा खिलाने जैसी रिपोर्ट्स को भी खारिज किया।

कमिश्नर ने कहा, “ड्राइवर पर दबाव डालने की कोशिश की गई। हम इस मामले की भी जाँच कर रहे हैं। ये भी सच है कि ड्राइवर ने शुरू में कहा था कि वह (ड्राइवर) ही गाड़ी चला रहा था। हम इस बात की जाँच कर रहे हैं कि उसने किसके दबाव में ये बयान दिया था।” उन्होंने कहा कि इस केस की जाँच एसीपी रैंक के अधिकारी कर रहे हैं। हम छोटी से छोटी बात का भी ख्याल रख रहे हैं। पीड़ितों को न्याय दिलाने और दोषियों को सजा दिलाने में पुलिस जुटी हुई है। हम इस केस में विशेष वकील की भी सेवाएँ लेंगे।

पुणे के डीसीपी (क्राइम) अमोल जेंडे ने कहा कि हमने किशोर के दादा का स्टेटमेंट रिकॉर्ड किया है, जिसमें उन्होंने बताया कि किशोर ने घर पर बताया था कि वो 12वीं कक्षा में पास होने को लेकर अपने दोस्तों के साथ पार्टी करना चाहता है। इसके बाद उन्होंने अपने बेटे यानी किशोर के पिता विशाल अग्रवाल से फोन पर बात की और कार की चाबी के साथ ही क्रेडिट कार्ड भी पार्टी करने के लिए दिया था।

इस बीच, टाइम्स नाऊ ने अपनी रिपोर्ट में बताया है कि ‘नाबालिग के पिता को उसके बेटे के नशे में होने की बात पता थी, इसके बावजूद उसने ड्राइवर से नाबालिग को चाबी देने के लिए कहा।’ रिपोर्ट के मुताबिक, पोर्श कार को ड्राइवर ही पार्किंग से बाहर ले आया था, लेकिन नाबालिग ने उसे चलाने की जिद की। उसने विशाल अग्रवाल को फोन किया, लेकिन विशाल अग्रवाल ने उसके नशे में होने की बात जानते हुए भी ड्राइवर को कहा कि वो उसे कार को चलाने दे। इसके बाद किशोर ने कल्याणी नगर इलाके में 200 की स्पीड से कार को भगाते हुए बाइक सवार 2 इंजीनियरों को रौंद दिया था, जिसमें उनकी मौत हो गई। इस मामले में किशोर को 15 घंटों के अंदर 300 शब्दों का निबंध लिखने की शर्त पर बेल मिल गई थी, लेकिन दबाव और पुलिस के रिब्यू पिटिशन के बाद किशोर न्याय बोर्ड ने उसकी जमानत खारिज कर दी और 5 जून तक रिमांड होम में भेज दिया।

टाइम्स ऑफ इंडिया ने डीसीपी के हवाले से ड्राइवर के बयान को छापा है, जिसमें उसने अपने बयान में कहा, ‘नाबालिग लड़का ही पोर्श को चलाकर बडगाँव शेरी स्थित बंगले से कोसी और फिर ब्लैक मैरिएट पब ले गया था। उस दौरान ड्राइवर और अन्य कर्मचारी दूसरी कार से उनके पीछे चल रहे थे। लेककिन ब्लैक मैरिएट में पार्टी के बाद ड्राइवर ही पोर्श चला रहा था।’

इस मामले में हादसे के समय कार में मौजूद रहे किशोर के दोस्त से भी पुलिस ने पूछताछ की। वहीं, एक अधिकारी ने बताया कि पोर्श कार अग्रवाल परिवार की रियलिटी फर्म के नाम पर है। ऐसे में नाबालिग के दादा से पूछताछ की गई, क्योंकि वो भी फर्म के मालिक हैं। उनसे कार के मालिकाना हक को लेकर पूछताछ हुई।

वायरल वीडियो को माँ ने बताया गलत, कहा-बेटे को बचा लो

इस बीच, एक वीडियो तेजी से वायरल हुआ, जिसमें पुणे पोर्श कांड के आरोपित नाबालिग के होने की बात कही गई। ये वीडियो रैप सॉन्ग का है, जो पुणे हादसे पर बनाया गया है। इस वीडियो में एक सोशल मीडिया एन्फ्लूएंसर दिख रहा है, जिसे कथित तौर पर नालाबिग आरोपित का होना बताया जा रहा है। हालाँकि पुणे पुलिस पहले ही बता चुकी है कि वीडियो फर्जी है और इसका किशोर से कोई लेना देना नहीं। इस मामले में किशोर की माँ का बयान आया है, जिसमें उन्होंने अपने बेटे को बचाने के लिए कहा है।

आरोपित किशोर की माँ ने मीडिया से बातचीत में कहा, ‘मेरा बेटा पुलिस की हिरासत में है, वो वीडियो में नहीं है। ये वीडियो फर्जी है। कृपया मेरे बेटे को बचा लिया जाए।’ इसके बाद माँ मीडिया के सामने ही रोने लगी। आरोपित किशोर की माँ ने पुलिस ने अपने बेटे को बचाने की गुहार लगाई है। उन्होंने कहा कि मेरे बेटे को फँसाया जा रहा है।

100 करोड़ टका का विवाद, कसाई ने काटकर बांग्लादेश के MP का बना दिया कीमा: रिपोर्ट में बताया- सोने की तस्करी में शामिल थे अनवारुल अजीम

बांग्लादेशी सांसद की हत्या मामले में स्थानीय स्तर पर नया खुलासा हुआ है। द डेली स्टार की रिपोर्ट में पता चला है कि सांसद अनवारुल अजीम अनार और संदिग्ध अख्तरुज्जमान मिलकर सोने की तस्करी का काम करते थे, मगर पैसों को लेकर दोनों के बीच मतभेद हुआ और अख्तारुज्जमान ने पूरी हत्या की साजिश रची। बताया जा रहा है कि अजीम ने 100 करोड़ टका से अधिक अपने पास रख लिया था।

रिपोर्ट में बांग्लादेश की जासूसी शाखा के अधिकारियों ने नाम न बताने की शर्त पर बताया हुआ है कि शाहीन मियाँ के नाम से मशहूर अख्तरुज्जमान दुबई से बांग्लादेश में सोने की तस्करी करता था, जबकि झेनइदाह-4 से सत्तारूढ़ अवामी लीग के विधायक अजीम यह सुनिश्चित करते थे कि खेप भारत में सही लोगों के हाथों में पहुँचे।

जासूसी शाखा और खुफिया एजेंसियों के सूत्रों के अनुसार, शाहीन मियाँ उर्फ अख्तारुज्जमान और अजीम के बीच चल रहे काम में खटास तब आई जब अजीम ने कहा कि वह तस्करी से होने वाली कमाई का बड़ा हिस्सा चाहते हैं। उस समय अख्तरुज्जमान ने इससे इनकार कर दिया, लेकिन बाद में किसी लेन-देन से आई रकम का 100 टका अजीम ने अपने पास रख लिया। इस बात को लेकर दोनों के बीच कई बार विवाद हुआ। 6 महीने में मामला निपटाने के लिए वो एक दूसरे से कई बार मिले। जब बात नहीं सुलझी तो हत्या की साजिश रचनी शुरू हुई।

द डेली स्टार की खबर के अनुसार, ये अख्तरुज्जमां शाहीन ही अनवारुल अजीम अनार की हत्या का मास्टरमाइंड था। इसके बैकग्राउंड के बारे में बताते हुए कहा गया कि शाहीन मियाँ उर्फ अख्तरुज्जमां ने एसएससी और एचएससी उत्तीर्ण करने के बाद चटगाँव मरीन अकादमी में प्रवेश लिया और बाद में एक शिपिंग कंपनी में नौकरी कर ली।

इसके बाद 90 के दशक में उसने डीवी लॉटरी जीती और बाद में अमेरिका चला गया, लेकिन इस बीच उसने बांग्लादेश और भारत की यात्रा करनी नहीं छोड़ी। वो और अजीम मिलकर सोना तस्करी करते थे। उसने ढाका के गुलशन, बारीधारा और बशुंधरा व कोलकाता के न्यू टाउन और न्यूयॉर्क के ब्रुकलिन में फ्लैट किराए पर ले रखे थे। इसके अलावा अमेरिका में भी ड्रग्स सप्लाई काम करता था।

सोने की तस्करी में रकम को लेकर झगड़ा होने के बाद शाहीन ने अजीम की हत्या की योजना बनाई और 5 करोड़ टका में एक हत्यारे को काम पर रखा था। जब 12 मई को अजीम भारत आए तब उन्हें हनीट्रैप में फँसा कोलकाता में फ्लैट पर बुलाया गया। यहीं हत्यारों ने उनकी हत्या की और फिर उनके शव को टुकड़ों में काटकर फेंक दिया गया।

हालाँकि इस मामले में जब अख्तरुज्जमान से पूछा गया तो उसने इसमें संलिप्ता से इनकार किया। उसने कहा कि अजीम अपने इलाज के लिए कोलकाता जाते थे। उन्होंने अपनी फ्लैट की चाबियाँ खुद दी थी। अख्तरुज्जमान ने कहा- “क्या मैं इतना बेवकूफ हूँ कि हत्या अपने फ्लैट में करवाऊँगा… मेरे वकील ने मुझे इस मामले पर किसी से बात न करने की सलाह दी है… मैं अमेरिका आया क्योंकि मुझे लगता है कि बांग्लादेश में मुझे न्याय नहीं मिलेगा। मैं इस देश में आया क्योंकि यहाँ कानूनी सुरक्षा है। अगर पुलिस के पास कोई दस्तावेज या सबूत है, तो उन्हें उसे यहाँ [अमेरिका] पेश करना चाहिए।”

हिंदू नेताओं की हत्या की साजिश में शामिल अबूबकर पहले खुद था हिंदू, हनीट्रैप में फँसकर दिल्ली की मस्जिद में कबूला इस्लाम: आतंकी बन शुरू किया धर्मांतरण का काम, 40 पाकिस्तानी नंबर बरामद

सूरत में हिन्दू नेताओं की हत्या करवाने को लेकर पकड़े गए मौलाना सोहेल के एक और साथी को पाकिस्तानी लड़कियों ने हनीट्रैप करके इस्लाम में धर्मान्तरित करवाया था। उसने इस्लाम में परिवर्तित हो कर और भी हिन्दू युवकों को इस्लाम में हनीट्रैप के जरिए परिवर्तित करवाने का प्रयास कर रहा था। यह भी पता चला है कि अहमदाबाद एयरपोर्ट से पकड़े गए आतंकी भी सूरत के मौलवी के शागिर्द थे। वह यहाँ फिदायीन हमला करने आए हुए थे।

सूरत से पकड़े गए मौलवी से पूछताछ के बाद एक अबूबकर नाम के एक आदमी को राजस्थान के बीकानेर ने पकड़ा गया था। वह भी आतंकी गतिविधियों में शामिल था। सबसे चौंकाने वाली बात यह सामने आई है कि बीकानेर का अबूबकर पहले हिन्दू था और उसका नाम अशोक सुथार था। वह सोशल मीडिया के माध्यम से पाकिस्तानी लड़कियों के सम्पर्क में आया था, वह पिछले कई महीनों से पाकिस्तानी लड़कियों से बातें कर रहा था।

मुस्लिम लड़कियों ने अबूबकर को हनीट्रैप में फंसा कर इस्लाम की बातें बतानी चालू कर दी थीं। उसको धीमे-धीमे हिन्दू धर्म से इस्लाम की तरफ ले जाया गया। उसका जब ब्रेनवाश हो गया तो उसे इस्लाम मजहब कबूल करने को कहा गया। इसके बाद वह दिल्ली कि एक मस्जिद में जाकर इस्लाम में परिवर्तित हो गया था। उसने इसके बाद अपना नाम अबूबकर रख लिया था। इसके बाद भी उसका पाकिस्तानी लड़कियों से बात करने का सिलसिला जारी रहा। पाकिस्तानी लड़कियों ने उसे जिहाद का रास्ता लेने को कहा।

अबूबकर उर्फ़ अशोक सुथार इसके बाद स्वयं भी धर्मांतरण में लग गया और कई हिन्दू युवकों को पाकिस्तानी लड़कियों से शादी करने और बाद में धर्मान्तरित करने का पाठ पढ़ाने लगा। उसके पास से 40 पाकिस्तानी नम्बर बरामद हुए हैं, वह इन नम्बरों से हिन्दू नेताओं को धमकियाँ भेजता था। उसका कनेक्शन मौलाना सोहेल से हो गया था जो कि हिन्दू नेताओं की हत्या की साजिश रचने में गिरफ्तार किया गया था। अबूबकर को गुजरात ATS ने गिरफ्तार करके कोर्ट में पेश किया है।

श्रीलंकाई आतंकी भी थे मौलाना सोहेल के शागिर्द

अहमदाबाद एयरपोर्ट से पकड़े गए चार श्रीलंकाई इस्लामी आतंकी के बारे में भी कई नए खुलासे हुए हैं। गुजरात ATS को उनकी एक वीडियो भी मिली है। इनमें आतंकी कहते हैं कि अबू हमारा मास्टर है, हम उसको समर्पित हैं, हमें उसकी हर बात माननी होगी। इन आतंकियों से पूछताछ और मामले में जाँच के लिए तमिलनाडु ATS की भी एक टीम गुजरात आ गई है। ATS को यह भी पता चला है कि पकड़े गए चार आतंकियों में से दो आतंकी पहले भी 8 बार भारत आ चुके हैं।

इन चारों आतंकियों में से पकड़ा गय मोहम्मद नुसरत सोना तस्करी करता था, जबकि मोहम्मद फारिस ड्रग्स बेचता था। तीसरे आतंकी मोहम्मद रसदीन के खिलाफ श्रीलंका में भी पाँच मामले दर्ज हैं। इन आतंकियों की फरवरी से ही ट्रेनिंग चल रही थी। यह भारत फिदायीन हमला करने आए थे। इस मामले में श्रीलंका की पुलिस ने भी जाँच चालू कर दी है। इन आतंकियों को बताया गया था भारत अमेरिका और इजरायल की मदद कर रहा है, इसलिए उस पर हमला करो।

गौरतलब है कि गुजरात में कुछ दिन पहले पाकिस्तान के हैंडलर के दिशानिर्देशों पर काम करने वाले मौलाना अबूबक्र सोहेल गिरफ्तार हुआ था। बताया था कि यह मौलाना हिन्दूवादी नेताओं, नुपुर शर्मा, टाइगर राजा सिंह, उपदेश राणा और पत्रकार सुरेश चव्हाणके को मारने की योजना बना रहा था। बाद में गुजरात पुलिस ने इस मामले में कार्रवाई करते हुए इसके 2 और साथियों को देश के अलग-अलग हिस्से से पकड़ा था। इसके बाद यह आतंकी अहमदाबाद एयरपोर्ट से पकड़े गए थे, इनके विषय में पता चला था यह श्रीलंका से आए थे।

‘हमारे बारह’ से बौखलाए इस्लामी कट्टरपंथी, फिल्म के एक्टर्स-मेकर्स को ‘सिर तन से जुदा’ की धमकी: कहा- रिलीज डेट होगा जीवन का आखिरी दिन

मुस्लिम महिलाओं की स्थिति दिखाने के लिए बनाई गई ‘हमारे बारह’ फिल्म का पहला टीजर रिलीज होने के बाद इस्लामी कट्टरपंथी भड़के हुए हैं। उन्होंने अपनी बौखलाहट उतारने के लिए डायरेक्टर कमल चंद्रा, एक्टर अन्नू कपूर और एक्ट्रेस अदिति धीमन को ‘सिर तन से जुदा’ की धमकियाँ देनी शुरू कर दी हैं। पोस्ट और स्टोरीज में इस्लामी गानों के साथ लिखा जा रहा है कि सिर्फ फिल्म रिलीज होने की देरी है, उसके बाद एक्टर्स और मेकर्स का ‘सिर कलम’ किया जाएगा।

एक Error 404 नाम के X यूजर ने ऐसी धमकी देने वाले लोगों के अकॉउंट की लिस्ट बनाकर पोस्ट की है। साथ ही मुंबई पुलिस का ध्यान इस मामले में दिलाते हुए एक्शन लेने को कहा है। इस अकॉउंट पर दी जानकारी की मानें तो धमकी देने वालों में ‘तहरीक-ए-लब्बैक पाकिस्तान’ को फॉलो करने वाले कट्टरपंथी भी हैं, जो इस तरह की धमकियाँ डायरेक्टर और मेकर्स को दे रहे हैं। ISIS द्वारा ‘सिर तन से जुदा’ करने की वीडियो कट्टरपंथियों द्वारा शेयर करके मेकर्स को दिखाई जा रही है।

इसके अलावा ये भी सामने आया है कि इन कट्टरपंथियों में से कुछ का कनेक्शन पॉपुलर फ्रंट ऑफ इंडिया की एक ईकाई सोशल डेमोक्रेटिक पार्टी ऑफ इंडिया से है। ये लोग सोशल मीडिया पर मुस्लिमों को उकसा रहे हैं कि वो अन्नू कपूर और फिल्म से जुड़े अन्य लोगों के खिलाफ एक्शन लें।

इस फिल्म के टीजर के विरोध में इस्लामी नारे और बंदूक की आवाज वाली वीडियो शेयर की जा रही है। फिल्म के मेकर का फोन नंबर तक पब्लिक कर दिया गया है और कट्टरपंथियों द्वारा व्हॉट्सएप पर भी मेकर को मारने की धमकियाँ दी जा रही हैं।

इतना ही नहीं, उन वीडियो में जिसमें इस्लामी आतंकी लोगों का ‘सिर तन से जुदा’ करते दिखाई देते हैं, उस वीडियो में डायरेक्टर का और एक्टर्स का चेहरा लगाकर भी डराने का काम हो रहा है। खुलेआम साइबर अटैक की धमकियाँ दी जा रही हैं। इसके लिए फिल्म प्रोड्यूसर का भी फोन नंबर, ईमेल, आईपी एड्रेस, मैक अड्रेस और टावर की डिटेल ऑनलाइन लीक कर दी गई हैं ताकि हमला करने में आसानी रहे।

बता दें कि हमारे बारह का ऑफिशियल ट्रेलर रिलीज होने के बाद से इसपर एक्टर्स और मेकर्स को धमकियाँ दी जानी शुरू हुई है। इस फिल्म में दिखाया गया है कि कैसे कट्टरपंथी मौलानाओं के प्रभाव में आकर मुस्लिम महिलाओं पर अत्याचार होता है, उनकी स्थिति क्या हो जाती है। इस फिल्म में अन्नू कपूर, अश्विनी कालसेकर और मनोज जोशी मुख्य तौर पर हैं। फिल्म 7 जून को रिलीज होगी। इसका प्रीमियर 77वे कान्स फिल्म समारोह में भी हुई। पहले इस फिल्म का नाम ‘हम दो हमारे बारह था।’ अब फिल्म का नाम सेंट्रल बोर्ड ऑफ फिल्म सर्टिफिकेशन के कहने पर ‘हमारे बारह’ कर दिया गया है।

पैसा नहीं मिलने का मतलब यह नहीं कि भ्रष्टाचार नहीं हुआ: दिल्ली शराब घोटाले में मनीष सिसोदिया को हाई कोर्ट ने नहीं दी राहत

दिल्ली हाई कोर्ट ने शराब घोटाला मामले में सुनवाई करते हुए कहा कि किसी के पास नकदी नहीं मिली, इसका मतलब यह नहीं है कि कि भ्रष्टाचार नहीं किया है। कोर्ट ने कहा कि अब यह अपराध करने के लिए नई तकनीक अपनाई जाती हैं। कोर्ट ने यह टिप्पणी दिल्ली शराब घोटाला मामले में आरोपित मनीष सिसोदिया की जमानत याचिका पर सुनवाई करते हुए की।

हाई कोर्ट ने कहा, “मनी लॉन्ड्रिंग के मामले में किसी व्यक्ति के पास से नकदी की बरामदगी कोई जरुरी नहीं है जहाँ साजिश का हिस्सा कई लोग हैं।” कोर्ट ने कहा कि शराब घोटाला मामले में भ्रष्टाचार और मनी लॉन्ड्रिंग जैसे गंभीर आरोप हैं जिनसे देश के सामाजिक-आर्थिक ढाँचे पर जोर पड़ता है और जनता का विश्वास सरकारी संस्थाओं में घटता है।”

हाई कोर्ट ने कहा कि दिल्ली की शराब नीति ने छोटे और मझोले दुकानदारों को बिक्री से बाहर करके उनको सारी ताकत दे दी जिनके पास पैसा और पहुँच थी और जिन्होंने अपना एक कार्टेल बना लिया था। कोर्ट ने कहा कि शराब नीति को वितीय फायदे के लिए बनाया गया जो कि इस अपराध की गंभीरता को बढ़ाता है।

कोर्ट ने कहा कि मनीष सिसोदिया का आचरण लोकतांत्रिक सिद्धांतों को धोखा है। कोर्ट ने कहा कि सिसोदिया ने ऐसा दिखाया कि दिल्ली की शराब नीति सबको फायदा पहुँचाने के लिए लाई गई है, जबकि असल में यह कुछ लोगों को लाभ पहुँचाने की नीति थी। कोर्ट ने यह भी कहा कि सिसोदिया ने दो फोन तोड़ दिए और महत्वपूर्ण सबूत मिटाए।

मनीष सिसोदिया को जमानत देने से मना करते हुए कहा कि वह अभी तक यह बात स्थापित नहीं कर पाए हैं कि उन्हें जमानत क्यों दी जाए। कोर्ट ने इसी के साथ उन्हें जमानत देने से मना कर दिया। सिसोदिया लगातार अलग-अलग अदालतों में जमानत के लिए याचिकाएँ लगाते रहे हैं।

गौरतलब है कि दिल्ली के पूर्व उपमुख्यमंत्री को फरवरी, 2023 में दिल्ली शराब घोटाला मामले में गिरफ्तार किया गया था। वह दिल्ली के आबकारी मंत्री थे। इसी के अंतर्गत वह शराब नीति बनाई गई थी जिसमें गड़बड़ी के आरोप एजेंसियों ने लगाए हैं। एजेंसियों ने आरोप लगाया है कि इस नई नीति ने बड़े शराब डीलरों को फायदा पहुँचाया गया और उनसे मिले पैसे का उपयोग आम आदमी पार्टी ने गोवा चुनावों में किया।

राजनीतिक फायदे के लिए मुस्लिमों का ‘वस्तु’ की तरह हुआ इस्तेमाल: कलकत्ता हाई कोर्ट, OBC आरक्षण में ‘घुसपैठ’ पर ममता बनर्जी और लेफ्ट को किया नंगा

कलकत्ता हाई कोर्ट ने कहा है कि पश्चिम बंगाल की वामपंथी और ममता सरकार ने मात्र वोट बैंक के लिए 77 मुस्लिम जातियों को अन्य पिछड़ा वर्ग (OBC) में शामिल करके आरक्षण दे दिया। कोर्ट ने कहा कि यह सब चुनावों में फायदे के लिए किया गया और आरक्षण जाति नहीं बल्कि धर्म के आधार पर दिया गया।

कलकत्ता हाई कोर्ट ने बुधवार (22 मई, 2024) को पश्चिम बंगाल सरकार के मुस्लिम जातियों को OBC में जोड़ने के निर्णय को रद्द कर दिया था। इसी दौरान कलकत्ता हाई कोर्ट ने कई टिप्पणियाँ की। कोर्ट ने मुस्लिमों को आरक्षण देना वोट बैंक की राजनीति बताया।

कोर्ट ने कहा, ” ऐसा लगता है कि इस समुदाय (मुस्लिम) का इस्तेमाल राजनीतिक फायदे के लिए वस्तु की तरह किया गया है। यह बात उन घटनाओं के क्रम से साफ हो जाती है जिसके कारण 77 जातियों को वोट बैंक की तरह इस्तेमाल करने के लिए OBC में डाला गया।”

कोर्ट ने मुस्लिम जातियों को आरक्षण देने के लिए तैयार की गई रिपोर्ट को लेकर भी नाराजगी जाहिर की और इसे नियमों और सेक्युलरिज्म के सिद्धांतों के विरुद्ध पाया। कोर्ट ने कहा, “हालाँकि, कमीशन की रिपोर्ट ऐसे बनाई गई है कि यह मजहब के आधार पर दिया गया आरक्षण ना लगे, लेकिन कोर्ट को ऐसा नहीं लगता।”

कोर्ट ने आरक्षण देने के फैसले के पहले की घटनाओं का जिक्र भी इससे जोड़ कर किया। कोर्ट ने कहा कि मुस्लिमों को आरक्षण देने के लिए बनाई गई यह रिपोर्ट CM ममता बनर्जी के मुस्लिमों को 10% आरक्षण देने के ऐलान के बाद बनाई गई थी। आयोग को यह बात मालूम होगी। कोर्ट ने आरक्षण देने के लिए कलकत्ता विश्ववविद्यालय की एक रिपोर्ट को आधार बनाए जाने को लेकर भी सवाल उठाए। कोर्ट ने कहा कि इस रिपोर्ट के चार महीने के भीतर ही जातियों का बँटवारा कर दिया।

कोर्ट ने उस दौरान की घटनाओं को लेकर कहा, “सभी घटनाओं की टाइमलाइन जोड़ते ही सारी बातें साफ़ हो जाती हैं। मुख्यमंत्री का ऐलान, आयोग का बिजली की रफ़्तार से 77 जातियों को आरक्षण देने की सिफारिश, राज्य सरकार का इनको आरक्षण देना और फिर कलकत्ता विश्वविद्यालय की यह रिपोर्ट और फिर उसके आधार पर जातियों का बँटवारा।”

कोर्ट ने कहा कि इन बातों के आधार पर कहा जा सकता है कि यह आरक्षण केवल और केवल मजहब के आधार पर दिया गया। ममता सरकार ने दौरान कोर्ट के सामने दलील पेश की कि यह आरक्षण सच्चर समिति में मुस्लिमो की खराब हालत को लेकर सामने आई बातों को के बाद दिया गया। इस दलील कोर्ट ने खारिज करते हुए कहा कि सच्चर समिति पर केवल देश के राष्ट्रपति ही एक्शन ले सकते हैं ना कि राज्य सरकार। कोर्ट ने इस दौरान इस आरक्षण को अन्य कानूनों और नियमों का उल्लंघन भी बताया।

गौरतलब है कि कलकत्ता हाई कोर्ट ने बुधवार (22 मई, 2024) को पश्चिम बंगाल की सरकार के 77 मुस्लिम जातियों को OBC में जोड़ने के निर्णय को रद्द कर दिया था। इन मुस्लिम जातियों को 2010 में वामपंथी सरकार के दौरान OBC में जोड़ा गया था जबकि ममता सरकार में इन्हें नौकरियों में आरक्षण दिया गया था। हाई कोर्ट ने 2010 के बाद जारी किए गए सभी OBC प्रमाण पत्र भी रद्द कर दिए थे।  हाईकोर्ट ने 2010 के बाद से अब तक जारी किए गए करीब 5 लाख ओबीसी सर्टिफिकेट रद्द कर दिए थे।

सांसद की उतारी खाल, मांस का कीमा बना पैकेटों में भर दिया: कसाई जिहाद गिरफ्तार, अनावरुल अजीम की हत्या में ‘हनी ट्रैप’ का भी आया एंगल

बांग्लादेशी सांसद अनवारुल अजीम अनार की हत्या के मामले में चौंकाने वाला खुलासा हुआ है। खबर है कि इस हत्या में एक कसाई भी शामिल था। इस कसाई को पश्चिम बंगाल की सीआईडी ने गिरफ्तार कर लिया है। कसाई ने ही बांग्लादेशी सांसद के शव से खाल उतारने का और उसे छोटे-छोटे टुकड़ों में कीमे की तरह काटने का काम किया था।

कसाई की पहचान 24 साल के जिहाद हवलदार के रूप में हुई है। वह मुंबई में अवैध अप्रवासी के तौर पर रह रहा था और उसका अब्बा जोयनल हवलदार बांग्लादेश के खुलना में रहता है। अधिकारियों ने छानबीन के बाद बताया कि कसाई को अजीम की हत्या से दो महीने पहले मुंबई से कोलकाता लाया गया था।

इस काम की सुपारी उसे बांग्लादेशी मूल के अमेरिकी नागरिक अखतरुज्जमां ने दी थी, जो कि बांग्लादेशी सांसद का दोस्त था। जिहाद ने अन्य चार बांग्लदेशी नागरिकों के साथ मिलकर सांसद की हत्या फ्लैट में ही की थी। हत्या के बाद इन्होंने पहचान मिटाने के लिए शव से खाल उतारी, शव से मांस काटा और अलग-अलग पैकेट में भरकर उसे कोलकाता के अलग-अलग जगहों पर फेंक दिया है।

अब इस आरोपित को पुलिस बारासात कोर्ट में भेजकर बयान दर्ज करवाएगी और उसके बाद सांसद के अलग अलग अंगों को बरामद करने के लिए इसे पुलिस कस्टडी में लिया जाएगा। इस मामले में हनीट्रैप एंगल का भी खुलासा हुआ है। बताया जा रहा है कि एक महिला ने ही सांसद को उस फ्लैट में जाने को कहा था जहाँ उनके शव के टुकड़े हुए।

सांसद की हत्या दोस्त ने कराई

बता दें कि इससे पहले बांग्लादेश में पुलिस ने इस मामले में तीन लोगों को गिरफ्तार करते हुए हत्या की पूरी कहानी का खुलासा किया था। पता चला था कि अजीम की कोलकाता में हत्या उन्हीं के एक दोस्त ने करवाई थी। उसी ने अनवारुल अजीम को अपने कोलकाता वाले फ्लैट पर बुलवाया था जहाँ उनकी हत्या कर दी गई।

बांग्लादेश की सत्ताधारी पार्टी के सांसद अनवारुल अजीम 12 मई को भारत इलाज के लिए आए थे। यहाँ वह पहले दो दिन अपने एक सुनार दोस्त के यहाँ रुके थे, इसके बाद वह इलाज की बात कह कर उसके घर से निकले और फोन पर बताया कि वह दिल्ली जा रहे हैं।

हालाँकि, इसके बाद से वह गायब हो गए और उनका कोई पता नहीं लगा। इसके बाद उनकी हत्या की खबर आई। उनकी हत्या की योजना बनाने वाला अख्तरुज्ज्मान उनका पुराना दोस्त और व्यापारिक पार्टनर था। वह उनसे एक पुराने विवाद में बदला लेना चाहता था। इसलिए उसने अनवारुल अजीम की हत्या की साजिश रची थी।

अख्तरुज्ज्मान एक अमेरिकी-बांग्लादेशी नागरिक है और वह अमेरिका से भारत और बांग्लादेश इसी काम के लिए आया था। उसने अपने साथियों के साथ मिल कर कोलकाता में सांसद हत्या की साजिश रची। इस हत्या में उसके साथ अमानुल्लाह अमान, सियाम जिहाद, फैसल शजी और मोस्ताफियाज भी शामिल थे। इस हत्या में अख्तरुज्मान की गर्लफ्रेंड भी शामिल थी। यह सभी बारी बारी से भारत आए थे।

बताया गया कि अख्तरुज्ज्मान ने इस हत्या के लिए ₹5 करोड़ देने की बात कही थी। उसने कुछ पैसे पहले दे भी दिए थे। अभी कुछ धनराशि ही दी थी। बांग्लादेश पुलिस ने इस मामले में अमान को गिरफ्तार कर लिया है, वह हत्या को अंजाम देने का आरोपित है। उसके अलावा दो और लोग गिरफ्तार किए गए हैं।

‘भारत के साथ बढ़ाएँगे न्यूक्लियर साझेदारी’: रूस की परमाणु ऊर्जा एजेंसी का खुला ऐलान, नई साइटों पर रिएक्टर लगाने में करेगा सहयोग

भारत और रूस की दोस्ती लगातार मजबूत होती जा रही है। रूस भारत में पहले से ही परमाणु ऊर्जा के क्षेत्र में सहयोग कर रहा था, अब रूस ने कहा कि वो सिर्फ कुडनकुलम परियोजना ही नहीं, बल्कि नए प्रोजेक्ट्स पर भी भारत का साथ मजबूती से देने को तैयार है। रूस की परमाणु ऊर्जा एजेंसी के महानिदेशक की ओर से ये बयान आधिकारिक तौर पर जारी हुआ है।

मीडिया रिपोर्ट के मुताबिक, भारत के परमाणु उर्जा आयोग के अध्यक्ष अजीत कुमार मोहंती रूस पहुँचे हैं। यहाँ उनकी मुलाकात रोसाटॉम राज्य परमाणु ऊर्जा निगम के महानिदेशक एलेक्सी लिकचेव और उनकी टीम के साथ हुई, जिसके बाद एलेक्सी लिकचेव ने रूस के सेवरस्क में अजीत कुमार मोहंती के साथ एक बैठक के दौरान रूस की पेशकश को सार्वजनिक किया। रोसाटॉम द्वारा जारी एक बयान के अनुसार, लिकचेव ने कहा कि हम शांतिपूर्ण उद्देश्यों के लिए परमाणु ऊर्जा के उपयोग के क्षेत्र में भारत के साथ सहयोग के गंभीर विस्तार के लिए तैयार हैं।

दरअसल, अजीत कुमार मोहंती ने रूस में प्रोरीव या ब्रेकथ्रू प्रोजेक्ट का दौरा किया था, जहाँ दोनों देशों के शीर्ष परमाणु ऊर्जा अधिकारी मौजूद थे। इसी दौरान दोनों शीर्ष अधिकारियों की बैठक में रूसी पक्ष ने ये पेशकश की। रोसाटॉम राज्य परमाणु ऊर्जा निगम के महानिदेशक एलेक्सी लिकचेव ने अपने बयान में कहा है कि भारत में एक नई साइट पर रूसी-डिज़ाइन की गई उच्च क्षमता वाली परमाणु ऊर्जा इकाइयों का क्रमिक निर्माण शामिल है।

लिकचेव ने कहा कि रूसी पक्ष भूमि-आधारित और अस्थायी कम-बिजली उत्पादन परियोजनाओं के कार्यान्वयन और परमाणु ईंधन चक्र और परमाणु प्रौद्योगिकियों के गैर-ऊर्जा अनुप्रयोगों में सहयोग के लिए भी खुला है। रूस वर्तमान में तमिलनाडु में कुडनकुलम परमाणु ऊर्जा परियोजना के निर्माण में भारत की सहायता कर रहा है, जिसमें 1,000 मेगावाट के छह हल्के-जल परमाणु रिएक्टर होंगे। इसमें से दो मौजूदा समय में बिजली उत्पादित कर रहे हैं।

बता दें कि अभी तमिलनाडु के कुडनकुलम में भारत और रूस 6 परमाणु रिएक्टर पर काम कर रहे हैं, जिसपर साल 2002 में काम शुरू हुआ था। कुडनकुलम न्यूक्लियर एनर्जी प्रोजेक्ट के पहले रिएक्टर से साल 2014 से बिजली का उत्पादन हो रहा है, तो साल 2016 से दूसरे में। तीसरे और चौथे रिएक्टर पर काम लगभग पूरा हो चुका है, तो इसी महीने 13 तारीख को पाँचवें और छठें रिएक्टर पर काम आगे बढ़ाने के लिए भारत-रूस में समझौता हो चुका है। भारत के विदेश मंत्री एस जयशंकर ने 13 मई 2024 को रूस के दौरे के समय इसपर हस्ताक्षर भी किए।