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‘प्यार से माँगते तो जान दे देती, अब किसी कीमत पर नहीं दूँगी इस्तीफा’: स्वाति मालीवाल ने राज्यसभा सीट छोड़ने से किया इनकार

आम आदमी पार्टी की राज्यसभा सांसद स्वाति मालीवाल ने कहा है कि उनसे अगर प्यार से राज्यसभा सीट से इस्तीफा देने को कहा जाता तो वह छोड़ देतीं। उन्होंने अब किसी भी हाल में राज्यसभा से इस्तीफा देने से मना कर दिया है। उन्होंने अपने साथ हुई मारपीट और चरित्र हनन के पीछे का कारण यही बताया है।

किसी ख़ास वकील के लिए राज्यसभा सीट खाली करने को लेकर स्वाति मालीवाल ने ANI पॉडकास्ट पर स्मिता प्रकाश से बताया, “अगर मेरी राज्यसभा सीट उनको वापस चाहिए थी, तो अगर प्यार से माँगते तो मैं जान भी दे देती, राज्यसभा सीट तो बहुत छोटी चीज है।”

गौरतलब है कि जिस खास वकील के लिए राज्यसभा सीट खाली करने की बात कही जा रही है, मीडिया रिपोर्ट्स में वह अभिषेक मनु सिंघवी बताए गए हैं। वह हाल ही में हिमाचल प्रदेश से राज्यसभा चुनाव हार गए थे। वह दिल्ली शराब घोटाला मामले में अरविन्द केजरीवाल के वकील हैं।

उन्होंने आगे कहा, “मैंने कभी भी पद की लालसा नहीं दिखाई, मैं 2006 में तब जुड़ी थी जब कोई किसी को जानता नहीं था। मैंने जमीन से जुड़ कर काम किया है। 2006 से 2012 तक सारे ऑपरेशन चलाए हैं। मैं 3-4 लोगों में सबसे अधिक महत्वपूर्ण व्यक्ति थी।”

उन्होंने अब राज्यसभा सीट से इस्तीफ़ा देने को लेकर साफ इनकार किया। उन्होंने कहा, “मुझे सांसद पद की कोई लालसा नहीं है, ये मुझे प्यार से बोलते तो मैं हर हाल में इस्तीफा दे देती, मुझे कोई समस्या नहीं। मैं किसी पद में नहीं बंधी। जिस तरीके से इन्होने मुझे मारा पीटा है, अब मैं किसी भी हाल में इस्तीफा नहीं दूँगी। मुझे बताया गया है कि इसी वजह से मेरा चरित्र हनन हो रहा है, मेरी बेइज्जती की जा रही है। मैं अब सांसद के तौर पर मेहनत करुँगी और एक आदर्श सांसद कैसा होता है, बन कर दिखाऊँगी।”

गौरतलब है कि AAP की राज्यसभा सांसद स्वाति मालीवाल के साथ 13 मई, 2024 को दिल्ली CM के आधिकारिक आवास पर मारपीट हुई थी। उनके साथ यह मारपीट दिल्ली CM केजरीवाल के पूर्व PS विभव कुमार ने की थी। इस घटना को लेकर स्वाति मालीवाल ने FIR भी दर्ज करवाई थी।उन्होंने FIR में बताया था कि विभव कुमार ने उन्हें गालियाँ दी थी।

विभव ने उनसे कहा, “तू कैसे हमारी बात नहीं मानेगी? कैसे नहीं मानेगी? साली तेरी औकात क्या है कि हमको ना करदे। समझती क्या है खुद को नीच औरत। तुझको हम सबक सिखाएँगे।” उन्हें जमीन पर घसीटा गया था और उनकी शर्ट भी खोली गई थी। इसके अलावा उन्हें लातों से मारा गया। इसके बाद उन्हें CM आवास से बाहर कर दिया गया था। उनकी मेडिकल रिपोर्ट में चेहरे के अंदर चोट लगने की बात की पुष्टि हुई थी।

दिल्ली पुलिस ने इस मामले में दर्ज FIR के आधार पर विभव कुमार को गिरफ्तार कर लिया था। अब दिल्ली पुलिस इस मामले की जाँच कर रही है।

UP में जज साहब का गायब हो गया कुत्ता, बरेली में 14 पर हुई FIR: पड़ोसी डंपी अहमद पर जताया शक, मारपीट-दुर्व्यवहार का भी आरोप

उत्तर प्रदेश के बरेली में एक जज साहब का कुत्ता गायब हो गया है। इस मामले में अब जज के पड़ोसी डंपी अहमद समेत 14 लोगों के खिलाफ एफआईआर दर्ज कर ली गई है। इस एफआईआर में मारपीट, बेटियों से दुर्व्यवहार का भी आरोप है। जज साहब लखनऊ में रहते हैं, लेकिन उनका परिवार बरेली में ही रहता है।

मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक, मामला बरेली के इज्जत नगर का है। जज साहब की पत्नी का आरोप है कि 16 मई को डंपी अहमद, उनकी पत्नी और साथ आए लोगों ने दुर्व्यवहार किया। डंपी अहमद और उनके साथियों ने उनके साथ ही उनकी 2 बेटियों को भी धमकाया। लेकिन 18 मई को उन्होंने उनके कुत्ते को गायब कर दिया। जज के परिवार ने आशंका जताई है कि उनके कुत्ते को शायद जान से मार डाला गया है। इस मामले में पुलिस ने पशु क्रूरता अधिनियम का भी केस जोड़ा है।

जानकारी के मुताबिक, 16 मई की देर शाम को डंपी अहमद की पत्नी ने उनके कुत्ते द्वारा काटे जाने की शिकायत की और वो जज के घर पहुँची, तभी डंपी अहमद ने जज की बेटियों के साथ बदसलूकी की। उसने पास के गाँव से एक दर्जन से अधिक साथियों को बुला लिया और पूरे परिवार को जमकर धमकाया। जज साहब ने वॉट्सऐप पर कॉल किया, तो उन्हें भी धमकाया। इस दौरान पुलिस को फोन किया गया, तो पुलिस के पहुँचने से पहले ही सभी फरार हो गए।

जज की पत्नी ने आरोप लगाया है कि 18 मई की रात उनके पालतू कुत्ते को ‘गायब’ कर दिया गया। उन्हें शक है कि आरोपितों ने ही कुत्ते को गायब कर दिया है, वो उसकी जान भी ले सकते हैं। इस पूरे प्रकरण से जज का परिवार खौफ में है।

इज्जत नगर थाने के प्रभारी निरीक्षक जयशंकर सिंह ने बताया कि जज की पत्नी की तहरीर पर एक नामजद सहित कई अज्ञात के खिलाफ मुकदमा दर्ज किया गया है। मामले की जाँच की जा रही है। इस मामले में डंपी अहमद और उसके करीब 14 अज्ञात साथियों के खिलाफ पशु क्रूरता अधिनियम के साथ ही कई गंभीर धाराओं में मुकदमा दर्ज हुआ है।

‘टेबल पर लगा सिर, पैर पकड़कर नीचे घसीटा’: विभव कुमार ने CM केजरीवाल के घर में कैसे पीटा, स्वाति मालीवाल ने अब कैमरे पर बताया

आम आदमी पार्टी की राज्यसभा सांसद स्वाति मालीवाल ने बताया है कि दिल्ली CM अरविन्द केजरीवाल के आवास पर उन्हें घसीटा गया। उन्हें केजरीवाल के पूर्व निजी सचिव विभव कुमार ने पैर पकड़ कर घसीटा। उन्हें थप्पड़ मारे गए। उन्होंने अपनी आपबीती अब कैमरे के सामने बताई है। ANI पॉडकास्ट पर स्मिता प्रकाश से बात करते हुए स्वाति मालीवाल पूरी घटना बताई है।

उन्होंने बताया “मैं 13 मई को सुबह 9 बजे के करीब अरविन्द केजरीवाल से मिलने गई थी। वहाँ मुझे उनके स्टाफ ने ड्राइंग रूम में बिठाया और बताया कि केजरीवाल मिलने आ रहे हैं। इतने में ही विभव कुमार यहाँ आ गए। मैंने उनको बोला कि अरविन्द जी आ रहे हैं, क्या हो गया है। इतने में ही उन्होंने मुझ पर हाथ छोड़ दिया। उन्होंने मुझे 7-8 थप्पड़ पूरे जोर से मारे।”

आगे उन्होंने बताया, “जब मैंने उन्हें धक्का देने की कोशिश की तो उन्होंने मेरा पैर पकड़ लिया और नीचे घसीट दिया। मेरा सर भी बीच की मेज पर टकरा गया। मैं नीचे गिरी फिर उन्होंने मुझे लातों से मारना चालू कर दिया। मैं बहुत जोर से चीख चीख कर मदद माँगती रही लेकिन कोई नहीं आया। किसी ने भी मदद नहीं की।”

मालीवाल ने बताया कि विभव ने किसी के कहने पर उन्हें पीटा है, यह बात जाँच का विषय है। उन्होंने बताया कि वह किसी को क्लीन चिट नहीं दे रही हैं। उन्होंने कहा है कि जिस दौरान वह पीटी गईं, उस दौरान केजरीवाल घर में मौजूद थे लेकिन कोई बचाने नहीं आया।

गौरतलब है कि AAP की राज्यसभा सांसद स्वाति मालीवाल के साथ 13 मई, 2024 को दिल्ली CM के आधिकारिक आवास पर मारपीट हुई थी। उनके साथ यह मारपीट दिल्ली CM केजरीवाल के पूर्व PS विभव कुमार ने की थी। इस घटना को लेकर स्वाति मालीवाल ने FIR भी दर्ज करवाई थी।

उन्होंने FIR में बताया था कि विभव कुमार ने उन्हें गालियाँ दी थी। विभव ने उनसे कहा, “तू कैसे हमारी बात नहीं मानेगी? कैसे नहीं मानेगी? साली तेरी औकात क्या है कि हमको ना करदे। समझती क्या है खुद को नीच औरत। तुझको हम सबक सिखाएँगे।” उन्हें जमीन पर घसीटा गया था और उनकी शर्ट भी खोली गई थी। इसके अलावा उन्हें लातों से मारा गया। इसके बाद उन्हें CM आवास से बाहर कर दिया गया था। उनकी मेडिकल रिपोर्ट में चेहरे के अंदर चोट लगने की बात की पुष्टि हुई थी।

दिल्ली पुलिस ने इस मामले में दर्ज FIR के आधार पर विभव कुमार को गिरफ्तार कर लिया था। अब दिल्ली पुलिस इस मामले की जाँच कर रही है।

‘भीड़ का मजहब नहीं होता’: हाईकोर्ट जस्टिस फरजंद अली ने 18 कट्टरपंथियों को दी जमानत, हिंदुओं की शोभायात्रा पर हुआ था हमला; कहा- हार्ट अटैक से मरा होगा

‘भीड़ का कोई मजहब नहीं होता’ – राजस्थान उच्च न्यायालय ने ये टिप्पणी की है। सांप्रदायिक हिंसा के आरोपितों की धर-पकड़ में आने वाली चुनौतियों का जिक्र करते हुए हाईकोर्ट ने ऐसा कहा। मामला बाबू मोहम्मद बनाम राजस्थान सरकार का है। ये टिप्पणी करने के साथ ही अदालत ने हिंसा के 18 आरोपितों को जमानत भी दे दी। ये सभी 19 मार्च, 2024 को चित्तौड़गढ़ में हिन्दुओं की शोभा यात्रा पर हुए हमले में भीड़ का हिस्सा थे। इस फैसले ने विवादों को जन्म दिया है।

राजस्थान हाईकोर्ट ने कहा कि 2 अलग-अलग समुदायों के बीच हिंसा भड़की और धार्मिक भावनाएँ भी आहत हुई होंगी, लेकिन ये तय करना मुश्किल है कि विवाद पैदा करने और लोगों को घायल करने के लिए कौन लोग जिम्मेदार हैं। जस्टिस फरजंद अली का कहना है कि भीड़ के हमले में आरोपितों और निर्दोषों को अलग करना बड़ा मुश्किल होता है। जज ने कहा कि भीड़ का कोई मजहब नहीं होता, जब लोगों के एक बड़े समूह ने किसी घटना को अंजाम दिया हो तो ये पता करना बहुत कठिन होता है कि कौन आरोपित हैं और कौन निर्दोष।

जज फरजंद अली ने कहा कि जब भीड़-भाड़ वाले इलाके में कोई हंगामा होता है कई लोग वहाँ पर जुट जाते हैं। उन्होंने कहा कि कुछ सिर्फ देखने के लिए जाते हैं कि क्या घटनाक्रम चल रहा है तो कुछ डर के मारे जाते हैं, तो कुछ उत्सुकता से जुट जाते हैं। जज ने कहा कि ऐसी अस्त-व्यस्त स्थिति में जो असली अपराधी होते हैं वो भागने में कामयाब हो जाते हैं और जो सिर्फ देखने के लिए आए थे उन पर मामला दर्ज हो जाता है। सोमवार (20 मई, 2024) को ये फैसला सुनाया गया।

हाईकोर्ट ने इस मामले में SC/ST एक्ट लगाए जाने पर भी चर्चा की बात कही। ट्रायल कोर्ट ने इन 18 गिरफ्तार आरोपितों की जमानत याचिका ख़ारिज कर दी थी। हाईकोर्ट ने कहा कि अपीलकर्ता दोषी हैं या नहीं इस पर कुछ भी टिप्पणी करना फ़िलहाल सुरक्षित नहीं होगा। हाईकोर्ट के जज फरजंद अली ने कहा कि हो सकता है कि मौत हिंसा से नहीं बल्कि हार्ट अटैक से हुई तो क्योंकि मृतक के घुटने पर सिर्फ छोटा सा जख्म था जो मौत का कारण नहीं हो सकता।

जज फरजंद अली ने कहा कि मेडिकल बोर्ड का इस मौत को लेकर कोई ओपिनियन नहीं है, विसरा रिपोर्ट को केमिकल परीक्षण के लिए भेजा गया है। उन्होंने कहा कि आरोपितों को जेल में बंद रखने से कोई फायदा नहीं है, अतः तथ्यों एवं परिस्थितियों को देखते हुए इन्हें जमानत देना उचित रहेगा। बता दें कि मार्च महीने में भगवान चारभुजानाथ की शोभायात्रा के दौरान कट्टरपंथियों ने पत्थरबाजी और मारपीट की थी। गाड़ियों और दुकानों को आग के हवाले आकर दिया गया था। 1 व्यक्ति की मौत हो गई थी।

एक देश, 2 हाई कोर्ट… एक ने मुस्लिम के साथ ‘हिंदू लड़की’ को रहने की दी इजाजत, दूसरे को ‘मुस्लिम महिला’ का हिंदू के साथ रहना नहीं था कबूल: जानिए क्या है मामला

कर्नाटक हाई कोर्ट ने हाल ही में एक मामले की सुनवाई करते हुए एक हिन्दू लड़की को मुस्लिम व्यक्ति के साथ रहने की इजाजत दे दी। इससे कुछ दिन पहले इलाहाबाद हाई कोर्ट ने एक मुस्लिम महिला को हिन्दू व्यक्ति के साथ लिव इन रिलेशनशिप में रहने की इजाजत देने से मना कर दिया था।

कर्नाटक हाई कोर्ट ने दायर किए गए इस मामले में हिन्दू लड़की की माँ से उसे पेश करने की याचिका लगाई थी। हिन्दू लड़की के मुस्लिम पति के वकील ने लड़की को कोर्ट के सामने पेश कर दिया था। इसके बाद कोर्ट ने लड़की से उससे बातचीत की।

लड़की ने बताया कि उसने 1 अप्रैल, 2024 को मुस्लिम लड़के के साथ निकाह कर लिया था और अब वह अपने मुस्लिम पति के साथ केरल में रहना चाहती है। उसने कहा कि वह अपने हिन्दू परिवार में वापस नहीं लौटना चाहती। इसके बाद हाई कोर्ट ने उसे मुस्लिम पति के साथ रहने की इजाजत दे दी।

इससे पहले मार्च, 2024 में इलाहाबाद हाई कोर्ट ने एक मुस्लिम महिला को उसके हिन्दू लिव इन पार्टनर के साथ रहने की अनुमति देने से मना कर दिया था। इलाहाबाद हाई कोर्ट ने यह निर्णय शरिया के आधार पर दिया था, जिसमें महिला का हिन्दू व्यक्ति के साथ रहना गलत गुनाह था।

याचिका लगाने वाली महिला का निकाह एक मुस्लिम व्यक्ति के साथ हुआ था, जिसने दो साल बाद एक और महिला से निकाह कर लिया था। इसके बाद मुस्लिम महिला अपने माता-पिता के पास रहने चली आई थी। इसके बाद उसका एक हिन्दू व्यक्ति से सम्पर्क हो गया और वह उसके साथ लिव इन रिलेशनशिप में रहने लगी।

महिला ने अपने पूर्व मुस्लिम पति के साथ जाने से मना कर दिया था, महिला का कहना था कि उसका मुस्लिम पति उसे मारता पीटता है। हिन्दू व्यक्ति के साथ रहने के कारण महिला को उसके घरवालों से धमकियाँ मिल रही थीं। उसने अपनी सुरक्षा को लेकर इलाहाबाद हाई कोर्ट के समक्ष एक याचिका लगाई थी।

इलाहाबाद हाई कोर्ट ने इस मामले की सुनवाई करते हुए महिला को कोई भी राहत देने से इनकार कर दिया। हाई कोर्ट ने कहा कि महिला का पहले निकाह हो गया और उसने तलाक नहीं लिया ऐसे में वह हिन्दू पुरुष के साथ नहीं रह सकती। कोर्ट ने यह भी कहा कि महिला का हिन्दू पुरुष के साथ रहना शरिया के अनुसार हराम है।

कोर्ट ने यह भी कहा कि महिला पर हिन्दू पुरुष के साथ रहने के लिए मुकदमा भी चलाया जा सकता है। हाई कोर्ट ने इसी के साथ मुस्लिम महिला की हिन्दू पुरुष के साथ रहने की याचिका को खारिज कर दिया था और अनुमति नहीं दी थी।

चर्चा में आया पुणे का रईसजादा तो कानुपर में डॉक्टर के बेटे पर भी हुआ एक्शन, 2 लोगों को कुचलने के केस में 7 महीने बाद गिरफ्तार

पुणे में एक बिल्डर के बेटे ने पोर्शे कार से कुचल कर एक पुरुष और एक महिला इंजीनियर को मार डाला। शराब पार्टी के बाद तेज़ रफ़्तार गाड़ी चलाते हुए उसने इस घटना को अंजाम दिया। 15 घंटे के भीतर नाबालिग को जमानत मिल गई। स्थानीय NCP (अजीत पवार गुट) के विधायक सुनील टिंगरे भी थाने में उसके लिए मौजूद रहे। थाने में उसे पिज्जा खिलाया गया, सुलाया गया। 2 मर्सिडीज से 3 वकील उसके लिए पहुँचे। हालाँकि, सोशल मीडिया में कड़े विरोध के बाद उसके पिता को गिरफ्तार किया गया।

अब किशोर न्याय बोर्ड (JJB) ने बुधवार (22 मई, 2024) को 17 वर्षीय आरोपित को 5 जून तक के लिए ऑब्जर्वेशन होम में भेज दिया है। जहाँ पुलिस के रिव्यू पेटिशन को लेकर सुनवाई हुई, उसी परिसर में स्थित ऑब्जर्वेशन होम में 30 से अधिक बच्चे रखे गए हैं। उधर सेशन कोर्ट ने उसके रियल एस्टेट कारोबारी पिता को भी कस्टडी में भेज दिया है। पुलिस ने JJB द्वारा आरोपित की जमानत ख़ारिज किए जाने का दावा किया, लेकिन आरोपित के वकील ने कहा कि ऐसा कुछ नहीं हुआ है बल्कि सिर्फ पुराने आदेश में कुक बदले किया गया है।

इससे पहले उसे सड़क दुर्घटना पर 300 शब्दों का लेख लिखने की शर्त पर जमानत दे दी गई थी। अब उसे यरवदा जेल स्थित नेहरू उद्योग केंद्र ऑब्जर्वेशन होम भेज दिया गया है। इस दौरान उसका मानसिक परीक्षण भी किया जाएगा। अर्पित और उसके पिता के अलावा उन पब संचालकों को भी गिरफ्तार किया गया है जिन्होंने किशोरों को दारू परोसी। जब लड़का पोर्शे लेकर निकला था तब उसका ड्राइवर घर पर ही था और उसने गाड़ी ड्राइव करनी चाहि थी, लेकिन उसे मना कर दिया गया था।

महाराष्ट्र के मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस का कहना है कि पुलिस ने सही तरीके से स्थिति को हैंडल किया। ‘वंचित बहुजन अघाड़ी’ के नेता प्रकाश आंबेडकर का कहना है कि दुर्घटना के बाद आरोपित पर कार्रवाई की बजाए पुलिस मृत युवक और युवती के रिलेशनशिप को लेकर सवाल-जवाब कर रही थी। मृतक अनीस अवधिया और अश्विनी कोस्टा 24 साल के थे। पुलिस का कहना है कि गाड़ी चलाते समय उसने शराब पी रखी थी, हालाँकि मेडिकल परीक्षण में रिपोर्ट नेगेटिव आई।

इस मामले में आरोपित के दादा से भी पूछताछ हुई है, वहीं पिता को ट्रांसपोर्ट विभाग ने नोटिस भेजा है। दादा सुरेंद्र कुमार अग्रवाल का नाम एक शूटआउट में भी आया था, जिसकी FIR बंड गार्डन थाने में दर्ज की गई थी। बाद में मामला CBI के पास चला गया था। CBI के अनुसार, सुरेंद्र अग्रवाल ने शिवसेना कॉर्पोरेटर अजय भोंसले की हत्या के लिए अंडरवर्ल्ड डॉन छोटा राजन से संपर्क किया था। उधर नंबर प्लेट और प्रोविजनल रजिस्ट्रेशन न होने के कारण नाबालिग के पिता को RTO ने नोटिस भेजा है।

उधर इस घटना का असर अन्य मामलों में भी देखने को मिला है। उत्तर प्रदेश के कानपुर में अक्टूबर 2023 में एक नाबालिग ने कार चलाते हुए 2 बच्चों को कुचल दिया था। अब जाकर उसे गिरफ्तार किया गया है। अब 15 वर्षीय आरोपित को बाल सुधार गृह भेज दिया गया है। उसके पिता कानपुर के नामी डॉक्टरों में से एक हैं। नाबालिग अपने 3 दोस्तों के साथ गाड़ी चला रहा था और उसने मैगी की एक दुकान में कार घुसा दी थी। अब 7 महीने बाद उसे गिरफ्तार किया गया है।

मोदी की जीत करण थापर को नहीं पची तो प्रशांत किशोर ने बिगाड़ा हाजमा: पहले माँगा सबूत, फिर कहा- आप जैसे चार से अकेले निपट सकता हूँ

लोकसभा चुनाव 2024 में सभी पार्टियों ने पूरी ताकत झोंक दी है, तो इन पार्टियों के साथ काम करने वाले नॉन पॉलिटिकल ‘जैसे’ सहायक भी। इसी क्रम में कॉन्ग्रेसी और वामपंथी विचारधारा द्वारा पोषित ‘पत्रकार’ करन थापर ने इंटरव्यू के लिए बुलाया राजनीतिक रणनीतिकार प्रशांत किशोर को। इस इंटरव्यू के कुछ हिस्से सोशल मीडिया पर वायरल हैं, जिसमें प्रशांत किशोर ने साफतौर पर कहा कि बीजेपी लोकसभा चुनाव 2024 में प्रचंड बहुमत के साथ एक बार फिर मोदी सकार की वापसी हो रही है। चूँकि करन थापर का राजनीतिक दुराग्रह किसी से छिपा नहीं है, ऐसे में जब उन्होंने प्रशांत किशोर के साथ ऊल-जलूल सवाल किए, तो प्रशांत किशोर ने भी उन्हें आईना दिखाने में कोई कोर-कसर नहीं छोड़ी।

ये इंटरव्यू 22 मई 2024 को यू-ट्यूब पर अपलोड किया गया है। इस इंटरव्यू में प्रशांत किशोर बता रहे थे कि पूर्ण बहुमत के साथ तीसरी बार मोदी सरकार आ रही है। इसमें उन्होंने कहा कि ‘उत्तर प्रदेश-बिहार में 20-50 सीटों का जो नुकसान हो सकता है, बीजेपी उसकी भरपाई पूर्वी और दक्षिणी भारत से कर लेगी।’ इस दौरान करन थापर ने कहा कि वो कितने भरोसे से ये बात कह रहे हैं, जिसके जवाब में प्रशांत किशोर ने कहा कि ‘पूरे भरोसे से, जैसे अब तक कहता आया हूँ।’ इसके बाद करन थापर ने कहा कि ‘आपने तो हिमाचल प्रदेश में कॉन्ग्रेस के जड़ से उखड़ जाने की बात कही थी, लेकिन वहाँ तो कॉन्ग्रेस की सरकार बन गई।’

करन की इस टिप्पणी पर प्रशांत किशोर ने पूछा कि क्या ये उन्होंने कभी कहा? अगर कहा तो उन्हें वह वीडियो दिखाया जाए। करन कहते हैं कि मई, 2022 में आपने हिमाचल में कॉन्ग्रेस के खात्मे का अनुमान लगाया था। इस प्रशांत उनसे इस बयान का वीडियो दिखाने की माँग करते हैं और इस पर अड़ जाते हैं। वो कहते हैं कि अगर आप मुझे यह वीडियो दिखा दें तो मैं इस पेशे से निकल जाऊँगा और अगर आप गलत हैं तो तुरंत माफि माँगिए। इस पर दोनों के बीच काफी बहस चलती रही।

आप जैसे 4 पत्रकारों से अकेले निपट लूँगा

इस वीडियों में प्रशांत किशोर यहाँ तक कहते हैं कि करन, आप मुझे डरा-धमका नहीं सकते। फिर आप ही क्या, कोई भी पत्रकार या कोई और व्यक्ति मुझे नहीं डरा सकता है। प्रशांत किशोर ने आगे कहा, ‘करन, आपको लगता है कि इंटरव्यू में कड़े सवाल से असहज करके लोगों को भागने पर मजबूर करना आपकी यूएसपी है, लेकिन मैं आप जैसे चार लोगों से अकेले निपट सकता हूँ।’ इस तरह, थोड़ी देर तक चली गरमा-गरम बहस के बात इंटरव्यू आगे बढ़ता है और फिर से सवाल-जवाब का सिलसिला चल पड़ता है।

द वायर के इस इंटरव्यू में करन थापर और प्रशांत किशोर के बीच 40.34 मिनट पर पूछे गए सवाल और उसका जवाब देने की वजह से जबरदस्त गरमा-गरम बातचीत हुई। अगले कुछ मिनट तक दोनों एक-दूसरे को काटते रहे। देखिए इंटरव्यू…

सोशल मीडिया पर करन थापर की उड़ी खिल्ली

वरिष्ठ पत्रकार अनंत विजय ने लिखा, “करन का प्रशांत किशोर का इंटरव्यू पूरा सुना। पहली बार करण को किसी ने बोलने नहीं दिया तो फ़्रस्ट्रेशन तो स्वाभाविक था। करन निरंतर प्रशांत की बातों को घुमाने का प्रयत्न करते रहे, लेकिन प्रशांत ने उनको अवसर नहीं दिया।”

रिटायर्ड आईएएस सूर्य प्रताप सिंह ने लिखा, “करण थापर के लेफ्ट विंग एजेंडे को @PrashantKishor ने अपने तर्कों से ध्वस्त कर दिया। प्रशांत किशोर ने कहा कि आप जैसे चार लोग भी एक साथ इंटरव्यू लें तब भी मुझे अपने नफरती शब्द जाल में नहीं फँसा सकते। करण थापर का दाँव उलटा पड़ गया। प्रशांत किशोर ने धुन कर रख दिया, अर्बन नक्सल्स के पूर्व नियोजित एजेंडे की हवा निकाल दी। सीधे शब्दों में कहें तो करन थापर को औक़ात दिखा दी…..जय हो बिहारी बाबू। कॉन्ग्रेस के समय में एक पत्रकार लॉबी की बड़ी चाँदी थी, कॉन्ग्रेस से इन सब के घनिष्ठ संबंध किसी से छिपे नहीं।”

शुभम शुक्ला नाम के एक्स यूजर ने लिखा, “बिहार के लाल, प्रशांत किशोर ने कर दिया कमाल- प्रशांत किशोर जी ने करण थापर जी के साथ इंटरव्यू में गजब के तर्क रखे हैं। करण जी को लगा कि वो पूरे इंटरव्यू को हाईजैक कर लेंगे। लेकिन इस बार उनका पाला बिहार की गली-गली घूमने वाले एक ऐसे व्यक्ति से पड़ा जो ना सिर्फ नेता है बल्कि पार्टियों को नेतागीरी की ट्रेनिंग देता है। करण जी को लगा इस इंटरव्यू को वो हाईजैक कर लेंगे उसके बाद सोशल मीडिया में उनके लेफ्ट विंग की ट्रोल आर्मी प्रशांत किशोर के खिलाफ प्रोपोगेंडा चला लेगी, लेकिन दाँव उल्टा पड़ गया। प्रशांत किशोर ने धुआँ-धुआँ कर दिया। आप पूरा इंटरव्यू देखेंगे तो पाएँगे कि करण थापर के इंटरव्यू में जाकर प्रशांत किशोर ने उनके ही माइक कैमरे के सामने उन्हें को एक्सपोज़ कर दिया।”

डॉ सुधांशु त्रिवेदी सटायर नाम के यूजर ने लिखा, “करन थापर का दाँव उलटा उन्हीं को लपेट दिया प्रशांत किशोर ने और चुन चुन कर कंबल धुलाई कर के रख दिया। अर्बन नक्सल्स के पूर्व नियोजित एजेंडे की तबियत ख़राब कर दी। सीधे शब्दों में कहें तो करन थापर को औक़ात दिखा दी…..जय हो बिहारी बाबू। कॉन्ग्रेस के समय में ऐसे दलाली करते पत्रकार लॉबी की बड़ी चाँदी हुआ करती थी और कॉन्ग्रेस से इन सब के बड़े ही घनिष्ठ संबंध हुआ करते थे, जो किसी से छुपा नहीं थाl”

इंटरव्यू का हिस्सा ‘कट’ न करने करने के लिए किया मजबूर

जितेंद्र प्रताप सिंह ने लिखा, “प्रशांत किशोर ने इस बेहया बेशर्म और बदतमीज पत्रकार को इसकी बेहयाई और बदतमीजी का बहुत करारा जवाब दिया। करण थापर यह भूल गया कि हर कोई सज्जन शरीफ नहीं होता की बेहयाई और बेशर्मी बर्दाश्त करता रहे और बाद में इंटरव्यू छोड़कर चला जाए।”

सोशल मीडिया पर और भी तमाम कमेंट्स आ रहे हैं, जो करण थापर की सही जगह बता रहे हैं। बता दें कि प्रशांत किशोर पूर्व चुनावी रणनीतिकार हैं। वो कई पार्टियों के साथ सफलतापूर्वक काम कर चुके हैं, तो कई पार्टियों के साथ उनका काम विवादों में भी घिरा रहा है। कॉन्ग्रेस की ओर से फ्री-हैंड मिलने के बाद भी कई राज्यों में कॉन्ग्रेस को हार का मुँह देखना पड़ा था, जिसके बाद उन्होंने साफ तौर पर कह दिया था कि राहुल गाँधी को लेकर कॉन्ग्रेस पार्टी को बड़ा फैसला करना ही पड़ेगा। हालाँकि इस लोकसभा चुनाव में उन्होंने किसी पार्टी का साथ नहीं दिया है और इस समय वो बिहार में अपने संगठन ‘जन सुराज’ को लेकर काफी सक्रिय हैं।

OBC में घुसा दी 77 मुस्लिम जाति, अब आरक्षण रद्द करने के फैसले को बता रहीं ‘BJP का आदेश’: जानिए क्यों ममता बनर्जी कह रही नहीं मानूँगी हाई कोर्ट का फैसला

कलकत्ता उच्च न्यायालय ने 2010 के बाद जारी हुए सभी OBC प्रमाण-पत्र रद्द कर दिए हैं, जिसके बाद मुस्लिमों को ‘अन्य पिछड़ा वर्ग’ में घुसाने की मुख्यमंत्री ममता बनर्जी की साजिशों को गहरा धक्का लगा है। बुधवार (22 मई, 2024) को दिए गए इस आदेश पर TMC सुप्रीमो ने गहरी नाराज़गी जताई है। बता दें कि 2010 में मुस्लिमों के कई समूहों को OBC वर्ग में डाल दिया गया था। 2010 में राज्य में वामपंथी दल CPI(M) की सरकार थी और बुद्धदेव भट्टाचार्जी मुख्यमंत्री थे।

ममता बनर्जी मई 2011 में CM बनी थीं। तब राज्य में सेवाओं एवं पदों पर रिक्तियों के मामले में ये आरक्षण दिया गया था। कलकत्ता हाईकोर्ट ने इसे ख़ारिज करते हुए कहा कि आरक्षण देने का आधार सिर्फ मजहब ही मालूम होता है। हालाँकि, न्यायमूर्ति तपब्रत चक्रवर्ती और राजशेखर मंथा की खंडपीठ ने इस दौरान स्पष्ट किया कि इस फैसले के तहत आरक्षण का लाभ लेकर जो लोग नौकरियों में जा चुके हैं, उन पर कोई असर नहीं पड़ेगा। जो लोग राज्य की चयन प्रक्रिया में सफल हो चुके हैं, उनकी नौकरियों पर कोई इसका कोई असर नहीं पड़ेगा।

साथ ही राज्य की तृणमूल कॉन्ग्रेस सरकार को कलकत्ता हाईकोर्ट ने आदेश दिया है कि ‘पश्चिम बंगाल पिछड़ा वर्ग आयोग अधिनियम, 1993’ के आधार पर OBC में शामिल जातियों की एक नई सूची शामिल की जाए। हाईकोर्ट ने स्पष्ट कहा कि राजनीतिक उद्देश्य से मुस्लिमों के कुछ समूहों को आरक्षण दिया गया, जो लोकतंत्र का अपमान है। हाईकोर्ट ने कहा कि चुनावी वादे को पूरा करने के लिए जल्दबाजी में ये काम किया था गया, इसके लिए सत्ता हासिल होते ही असंवैधानिक तरीका अपनाया गया।

उस दौरान मुस्लिमों के लिए 10% आरक्षण की व्यवस्था की गई थी। कुल 42 नए समुदायों को OBC वर्ग में जोड़ा गया था, जिनमें से 41 मुस्लिम थे। बताया जा रहा है कि 2010 के बाद 5 लाख से भी अधिक लोगों ने अपना OBC सर्टिफिकेट बनवाया। 2010 से पहले जिन 66 जातियों को इसमें जोड़ा गया था, उसमें हाईकोर्ट ने हस्तक्षेप नहीं किया। हाईकोर्ट ने माना कि जो लोग सही में पिछड़ा वर्ग से थे, उन्हें सर्टिफिकेट नहीं मिला। 5 मार्च, 2010 से 11 मई, 2012 तक 42 वर्गों को OBC में जोड़े जाने को न्यायालय ने अवैध बताया।

इस तरह 2010-2024 के बीच जारी किए गए सभी प्रमाण-पत्र रद्द कर दिए गए। अब ये OBC के तहत मिलने वाले सरकारी फायदों का लाभ नहीं उठा सकते हैं। वहीं ममता बनर्जी ने इस फैसले को स्वीकार करने से इनकार कर दिया है और कहा है कि सुप्रीम कोर्ट में इसे चुनौती दी जाएगी। उन्होंने इसे ‘BJP का आदेश’ बताते हुए ‘OBC आरक्षण’ जारी रहेगा। उन्होंने इसे देश में एक कलंकित अध्याय बताते हुए एक दुस्साहस करार दिया। ममता बनर्जी ने कहा कि ये फैसला उनका नहीं, उपेंद्र नाथ बिस्वास का था।

बता दें कि बिहार में चारा घोटाले की जाँच करने वाले पूर्व IPS अधिकारी रहे उपेंद्र नाथ बिस्वास ममता बनर्जी की पहली सरकार में पिछड़ा वर्ग कल्याण मंत्री थे। चारा घोटाले की जाँच के समय वो CBI के जॉइंट डायरेक्टर थे। अब हाईकोर्ट के आदेश के बाद OBC की नई सूची बना कर इसे विधानसभा में पेश किया जाएगा। अब TMC सरकार के पास इस मामले में हाईकोर्ट में रिव्यू पेटिशन दाखिल करने या फिर सुप्रीम कोर्ट में इस फैसले को चुनौती देने का विकल्प है।

25 जून को लोकसभा चुनाव 2024 के छठे चरण का मतदान होना है। उससे ठीक पहले ये फैसला आया है। बताया जा रहा है कि कुल 77 मुस्लिम जातियों को मिला OBC का दर्जा रद्द किया गया है, जिनमें से 42 को CPI(M) और 35 को TMC सरकार ने जोड़ा था। पश्चिम बंगाल में एक तिहाई जनसंख्या मुस्लिमों की है, ऐसे में अब विपक्षी दल न्यायालय के इस आदेश का इस्तेमाल मुस्लिम ध्रुवीकरण के लिए कर सकते हैं। अदालत ने स्पष्ट कहा है कि इन समूहों को वोटबैंक की तरह ट्रीट किया गया।

वहीं भाजपा ने इस फैसले का स्वागत किया है। पार्टी के राष्ट्रीय अध्यक्ष JP नड्डा ने कहा कि असंवैधानिक तरीके से ममता बनर्जी तुष्टिकरण और मुस्लिम लीग के एजेंडे को आगे बढ़ा रही थीं। उन्होंने कहा कि ‘घमंडिया’ गठबंधन संविधान की धज्जियाँ उड़ाने में लगा है। वहीं केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह ने कहा कि वोट बैंक के लिए डाका डाल कर मुस्लिमों को आरक्षण दिया। उन्होंने पश्चिम बंगाल की जनता से पूछा कि क्या कोई मुख्यमंत्री उच्च न्यायालय के आदेश को न मानने की बात कर सकती है?

क्या सोने की तस्करी में हुई MP अनवारुल अजीम की हत्या? बांग्लादेश पुलिस का दावा- दोस्त ने ही मरवाया, कोलकाता की फ्लैट में आई औरत कौन

बांग्लादेश के सांसद अनवारुल अजीम की कोलकाता में हत्या उन्हीं के एक दोस्त ने करवाई थी। इसी ने अनवारुल अजीम को अपने कोलकाता वाले फ्लैट पर बुलवाया था जहाँ उनकी हत्या कर दी गई। बांग्लादेश में पुलिस ने इस मामले में तीन लोगों को गिरफ्तार करते हुए हत्या की पूरी कहानी का खुलासा किया है।

बांग्लादेश की सत्ताधारी पार्टी के सांसद अनवारुल अजीम 12 मई को भारत इलाज के लिए आए थे। यहाँ वह पहले दो दिन अपने एक सुनार दोस्त के यहाँ रुके थे, इसके बाद वह इलाज की बात कह कर उसके घर से निकले और फोन पर बताया कि वह दिल्ली जा रहे हैं।

हालाँकि, इसके बाद से वह गायब हो गए और उनका कोई पता नहीं लगा। इसके बाद उनकी हत्या की खबर आई। उनकी हत्या की योजना बनाने वाला अख्तरुज्ज्मान उनका पुराना दोस्त और व्यापारिक पार्टनर था। वह उनसे एक पुराने विवाद में बदला लेना चाहता था। इसलिए उसने अनवारुल अजीम की हत्या की साजिश रची थी।

अख्तरुज्ज्मान एक अमेरिकी-बांग्लादेशी नागरिक है और वह अमेरिका से भारत और बांग्लादेश इसी काम के लिए आया था। उसने अपने साथियों के साथ मिल कर कोलकाता में सांसद हत्या की साजिश रची। इस हत्या में उसके साथ अमानुल्लाह अमान, सियाम जिहाद, फैसल शजी और मोस्ताफियाज भी शामिल थे। इस हत्या में अख्तरुज्मान की गर्लफ्रेंड भी शामिल थी। यह सभी बारी बारी से भारत आए थे।

उसने अनवारुल अजीम को 13 मई को कोलकाता के न्यू टाउन इलाके में स्थित संजीवा गार्डन्स के अपने फ्लैट में बुलाया था। यह फ्लैट अख्तरुज्ज्मान ने किराए पर लिया हुआ था। यहीं पर उसके गुर्गों ने अनवारुल अजीम को बंधक बना कर उनकी हत्या कर दी। उनकी हत्या तकिए से दबा कर की गई।

इसके बाद उनकी लाश को टुकड़ों में काट कर ट्राली बैग में भर कर फेंक दिया गया। कमरे को साफ़ कर दिया गया ताकि खून के धब्बे ना दिखे। अनवारुल अजीम की हत्या करने के लिए बांग्लादेश के ही लोगों का ही इस्तेमाल किया गया। इस घटना की CCTV जाँच में भी दिखा है कि फ्लैट से ट्राली बैग लेकर कुछ लोग निकलते हैं।

बताया गया है कि अनवारुल के शरीर के हिस्सों को अलग अलग जगह पर फेंका गया है। पुलिस को गुमराह करने के लिए अनवारुल के दो फोन को भी दो दिशाओं में ले जाया गया। उनकी हत्या करवाने वाला अख्तरुज्ज्मान इस मुद्दे के उठने के बाद भारत से नेपाल के रास्ते अमेरिका चला गया था।

बताया गया कि अख्तरुज्ज्मान ने इस हत्या के लिए ₹5 करोड़ देने की बात कही थी। उसने कुछ पैसे पहले दे भी दिए थे। अभी कुछ धनराशि ही दी थी। बांग्लादेश पुलिस ने इस मामले में अमान को गिरफ्तार कर लिया है, वह हत्या को अंजाम देने का आरोपित है। उसके अलावा दो और लोग गिरफ्तार किए गए हैं।

बांग्लादेश के गृह मंत्री असदुज्जमान खान कमल ने बताया, “पता चला है कि सांसद अनवारुल की हत्या में बांग्लादेशी शामिल हैं। यह एक सुनियोजित हत्या है। तीन लोगों को पहले ही गिरफ्तार किया जा चुका है। अन्य की गिरफ्तारी के लिए अभियान चलाया जा रहा है। इस मामले पर दोनों देशों की पुलिस मिलकर काम कर रही है।”

वहीं सांसद अनवारुल अजीम के बारे में और भी कई जानकारियाँ निकल कर आई हैं। बताया जा रहा है कि वह लम्बे समय से सोना और हथियार तस्करी में लिप्त थे। बांग्लादेश में उनके खिलाफ 21 मामले दर्ज थे। उनको हत्या के एक मामले में भी सजा हुई थी। बाद में यह सजा हटा ली गई थी। उनके और हत्यारे अख्तारुज्ज्मान के बीच हुआ विवाद भी तस्करी के पैसे से जुड़ा हुआ था, ऐसा दावा किया गया है।

गौरतलब है कि बांग्लादेश के सांसद अनवारुल अजीम 12 मई को भारत आने के कुछ दिनों बाद गायब हो गए थे। उनका कोई पता नहीं चल पा रहा था। उनके फोन की आखिरी लोकेशन बिहार के मुजफ्फरपुर में मिली थी। उनकी तलाश को लेकर बांग्लादेश ने भारत से मदद मांगी थी। इसके बाद इस मामले का पूरा खुलासा हुआ है। कोलकाता पुलिस में एक टीम इस मामले की जाँच कर रही है, अजीम का शव टुकड़ों में बाँट दिया गया था, वह अभी बरामद नहीं हो सका है।

बंगाल के नंदीग्राम में मतदान से पहले BJP की महिला कार्यकर्ता की हत्या, TMC गुंडों पर धारदार हथियारों के साथ हमले का आरोप: ‘भाइपो’ की रैली के बाद बिगड़े हालात

पश्चिम बंगाल के नंदीग्राम में लोकसभा चुनाव से पहले भारी हिंसा हुई है। हिंसा में भाजपा की एक महिला कार्यकर्ता की हत्या हो गई है। महिला की हत्या का आरोप तृणमूल कॉन्ग्रेस (TMC) के गुंडों पर लगा है। हमले में 7 लोग गंभीर रूप से घायल भी हो गए हैं।

जानकारी के अनुसार, नंदीग्राम के सोनचूरा गाँव में बुधवार (22 मई, 2024) को यह घटना हुई। भाजपा कार्यकर्ता बुधवार रात को चुनाव प्रचार को लेकर इकट्ठा हुए थे, इसी दौरान कुछ गुंडे वहाँ मोटरसाइकिल पर आए और भाजपा कार्यकर्ताओं पर हमला कर दिया। उन्होंने धारदार हथियारों से भाजपा कार्यकर्ताओं पर हमला किया।

इसी दौरान गुंडों ने एक महिला भाजपा कार्यकर्ता रथिबाला आदि पर हमला किया, जिससे वह गंभीर रूप से घायल हो गईं। उनको बचाने आए उनके बेटे पर भी गुंडों ने हमला किया। इस हमले में महिला का बेटा भी गंभीर रूप से घायल हो गया। महिला की बाद में मौत हो गई। उसके घायल बेटे को कोलकाता एक एक अस्पताल में भर्ती करवाया गया है।

इस हमले में भाजपा के कुल 7 कार्यकर्ता घायल हो गए हैं, उनका भी इलाज चल रहा है। भाजपा ने इस हमले का आरोप तृणमूल कॉन्ग्रेस (TMC) के कार्यकर्ताओं पर लगाया है। TMC ने इस हमले में ना शामिल होने की बात कही है। TMC ने कहा है कि यह भाजपा कार्यकार्ताओं की आपसी लड़ाई है।

भाजपा नेता सुवेंदु अधिकारी ने इस हिंसा का कारण CM ममता के भांजे अभिषेक बनर्जी को बताया है। उन्होंने एक्स (पहले ट्विटर) पर लिखे एक पोस्ट में बनर्जी पर हिंसा भड़काने का आरोप लगाया है। उन्होंने कहा कि यह बर्बर कृत्य TMC ने इसलिए करवाया है क्योंकि उन्हें पता है कि वह हार रहे हैं।

अभिषेक बनर्जी ने नंदीग्राम में एक रैली में कहा था कि सुवेंदु अधिकारी यहाँ से गड़बड़ी करके जीते थे। उन्होंने कहा था कि यहाँ 2021 चुनावों में कुछ लोगों ने वोट नहीं पड़ने दिया था, अब उनको सावधान रहना चाहिए। अभिषेक बनर्जी ने एक महीने के भीतर नंदीग्राम वापस आने की बात भी कही थी।

भाजपा के एक कार्यकर्ता ने घटना के विषय में बताया, “कल भाईपो (भांजा) यहाँ आया था, उसके आने के बाद हमारे शांतिपूर्ण नंदीग्राम में तनाव हो गया। इसके बाद हमारी एक कार्यकर्ता की हत्या हो गई। बाकी लोग कोलकाता में भर्ती हैं। उनको पता है कि भाजपा नंदीग्राम से 50000 वोट जीतेगी इसलिए यह किया गया है।”