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जिस पान को खाकर सब बनाते हैं रील, उसे खाने पर 12 साल की बच्ची के पेट में क्यों हुआ छेद; क्यों काटना पड़ा पेट का बड़ा हिस्सा: जानिए सब कुछ

सोशल मीडिया पर आपने अक्सर देखा होगा कि स्मोकी पान खाने के लिए लंबी कतारें लगती हैं। लोग डर-डर करके खाते हैं लेकिन एक बार इसे ट्राय जरूरत करते हैं। कारण सिर्फ इंस्टाग्राम की रील्स पर भौकाल बनाना होता है। लेकिन, क्या आपको पता है कि सोशल मीडिया पर एक रील के लिए चबाए जाने वाले इस पान के परिणाम कितने घातक हो सकते हैं… अगर नहीं जानते तो आपको बेंगलुरु में 12 साल की बच्ची के साथ हुई घटना पढ़नी चाहिए।

बेंगलुरु में एक 12 साल की बच्ची अपने माता-पिता के साथ एक शादी में गई थी। शादी में खाने की वैरायटी में एक जगह स्मोकी पान भी था। बच्ची ने देखा तो उसकी खाने की भी इच्छा हुई। बच्ची गई और उसे एक सामान्य खाने की चीज समझ खा गई। थोड़ी देर बाद जब उसके पेट में दर्द शुरू हुआ तो किसी को कुछ समझ नहीं आया। घरवाले फौरन उसे अस्पताल लेकर भागे।

अस्पताल जाकर डॉक्टर ने उसके पेट का चेक अप किया। बाहर से कुछ न पता चलने पर इंट्राऑपरेटिव ओजीडी स्कोपी हुई। रिपोर्ट देख पता चला कि बच्ची के पेट में ज्यादा लिक्विड नाइट्रोजन चले जाने से उसके पेट में बड़ा सा (4.5 सेंटींमीटर) छेद हो गया है, जिसका इलाज ऑपरेशन से ही होगा… फिर क्या? घरवालों ने जल्द से जल्द ऑपरेशन करने की अनुमति दी और डॉक्टरों ने उसका इलाज शुरू किया। ऑपरेशन के बाद अब लड़की खतरे से बाहर है लेकिन उसके एक स्मोकी पान खाने से उसके पेट का एक बड़ा हिस्सा डॉक्टरों को काटकर बाहर करना पड़ा।

मालूम हो कि आजकल खाने को अट्रैक्टिव दिखाने के लिए उसमें से धुआँ निकालने के लिए लिक्विड नाइट्रोजन का प्रयोग होता है। आप देखेंगे कि आइसक्रीम हो, पान हो, ओरियो का बिस्किट हो या फिर भी कोई भी अन्य चीज हो…लोगों ने लिक्विड नाइट्रोजन के इस्तेमाल को आम बना दिया है। जबकि मेडिकली देखें तो डॉक्टर इसका प्रयोग करने से सख्त मना करते हैं।

डॉक्टर बताते हैं कि लिक्विड नाइट्रोजन पेट के अंदर जाने से शरीर को काफी नुकसान होता है। ऊपर से यदि इसे तरल मात्रा में दिया जाए तो इसके और भी अधिक गंभीर परिणाम होते हैं। एक रिजल्ट तो आपने बच्ची का पढ़ा ही। इसके अलावा इसके सेवन से लोगों में सांस की दिक्कत बढ़ जाती है क्योंकि इसके वाष्प से ये सांस लेने वाले टिशू को डैमिज करता है और सांस लेने में कठिनाई पैदा करता है। इसी तरह स्किन पर भी इसका बुरा प्रभाव पड़ता है।

लोग ऐसे खतरनाक पदार्थ को शादी-पार्टियों में आम बना रहे हैं जो कि सोचने का विषय है। साल 2017 में भी गुरुग्राम से एक घटना सामने आई थी जब एक शख्स ने लिक्विड नाइट्रोजन वाली कॉकटेल पी थी। इसके बाद उसे काफी स्वास्थ्य समस्याएँ झेलनी पड़ी थी।

रिटायर होते ही हाई कोर्ट जस्टिस ने 37 साल की दूरी मिटाई: कहा- बचपन से लेकर जवानी RSS को दी, फिर करूँगा सेवा क्योंकि इसी संगठन ने सिखाई देशभक्ति

कलकत्ता हाई कोर्ट के जस्टिस चित रंजन दाश ने सोमवार (20 मई, 2024) को अपने सेवानिवृत्ति भाषण में बताया कि वह बचपन से ही राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (RSS) से जुड़े रहे हैं। उन्होंने खुद पर RSS का एहसान बताया और कहा कि इस संगठन ने उनका चरित्र निर्माण किया है। उन्होंने कहा कि अब वह संगठन का काम करने के लिए दोबारा मुक्त हैं।

जस्टिस चित रंजन दाश ने अपने सेवानिवृत्ति के उपलक्ष्य में रखे गए कार्यक्रम में कहा, “आज, मैं अपने मन की बात बताता हूँ। मैं एक संगठन का बहुत आभारी हूँ। मैं बचपन से लेकर युवा होने तक तक वहाँ रहा हूँ। मैंने साहसी, ईमानदार होना, दूसरों को बराबर मानना, देशभक्ति की भावना और सबसे ज्यादा आप जहाँ भी काम करते हैं वहाँ काम के प्रति प्रतिबद्धता सीखी है। मुझे यहाँ यह स्वीकार करना होगा कि मैं RSS का सदस्य था और अभी भी हूँ।”

जस्टिस दाश ने बताया कि उन्होंने न्यायपालिका में आने के बाद RSS से दूरी बना ली थी लेकिन अब वह वापस जाने के लिए मुक्त हैं और जिस भी तरह से संगठन की सेवा हो सकेगी, करेंगे। उन्होंने कहा, “मैंने अपने काम के कारण लगभग 37 वर्षों तक संगठन (RSS) से दूरी बना ली थी। मैंने कभी भी RSS की सदस्यता का उपयोग अपने करियर में आगे बढ़ने के लिए नहीं किया, क्योंकि यह हमारे सिद्धांतों के विरुद्ध है।”

आगे उन्होंने बताया, “अगर उन्हें (RSS) किसी भी काम के लिए मेरी जरूरत होगी तो मैं RSS में वापस जाने के लिए तैयार हूँ। मैंने कुछ भी गलत नहीं किया है इसलिए मैं कह सकता हूँ कि मैं RSS से हूँ क्योंकि यह भी गलत नहीं है।” उन्होंने यह भी स्पष्ट किया कि न्यायपालिका में काम करने के दौरान वह सबको समान रूप से देखते रहे। उन्होंने कहा, “मैंने सभी के साथ समान व्यवहार किया है, चाहे वह कम्युनिस्ट व्यक्ति हो, चाहे वह भाजपा या कॉन्ग्रेस का व्यक्ति हो या यहाँ तक ​​कि TMC का आदमी हो।”

जस्टिस दाश बीते 37 वर्षों से न्यायपालिका में काम कर रहे थे। वह बीते 15 वर्षों से हाई कोर्ट में जज थे। वह कलकत्ता हाई कोर्ट तीसरे सबसे वरिष्ठ जज थे। वह कलकत्ता हाई कोर्ट से पहले ओडिशा हाई कोर्ट में भी जज रहे हैं। ओडिशा में वह जिला स्तर के जज भी कई जिलों में रहे हैं।

‘बालिग़ हो जाएगी तो मुस्लिम बना कर कराएँगे निकाह’: नेपाल में निषाद समाज की नाबालिग लड़की को उठा ले गया फ़िरोज़ मंसूरी, माँ बोलीं – भारत में कहीं जाकर छिपा है

नेपाल के झापा जिले से ‘लव जिहाद’ का मामला सामने आया है। यहाँ डेढ़ माह पहले एक नाबालिग हिन्दू लड़की को फ़िरोज़ मंसूरी नाम का युवक अपहरण कर के अपने साथ ले गया। पीड़िता के परिजनों ने 24 मार्च, 2024 को पुलिस में शिकायत दर्ज करवाई है। शिकायत में ओहिद, मजुदीन खातून, सकीना खातून और आलम सहित कुल 7 लोगों को नामजद किया है। नेपाली पुलिस अभी तक पीड़िता को बरामद नहीं कर पाई है।

पीड़िता की माँ ऑपइंडिया को बताया कि पीड़िता को ले कर फ़िरोज़ भारत के किसी हिस्से में छिपा हुआ है। आरोप है कि फ़िरोज़ पीड़िता के घर वालों पर कॉल कर के केस वापस लेने का दबाव बना रहा है।

शिकायत कॉपी के मुताबिक, घटना झापा जिले के कंचनकवल इलाके की है। यहाँ रहने वाले पीड़ित हिन्दू परिवार ने पुलिस में शिकायत दर्ज करवाई है। शिकायत में पीड़िता के पिता ने बताया है कि 15 मार्च, 2024 को उनकी बेटी का अपहरण फ़िरोज़ मंसूरी ने कर लिया। पीड़िता नाबालिग बताई जा रही है। फ़िरोज़ नेपाल के सिरहा जिले के मिरचैया नगरपालिका के वार्ड नंबर 7 का निवासी है। दिन में लगभग 8:30 पर हुए लड़की के अपहरण में फ़िरोज़ का साथ उसके अम्मी-अब्बा सहित अन्य परिजनों व कुछ परिचितों ने दिया है।

पीड़ित परिवार का कहना है कि उनकी बेटी के अपहरण में उनके कुछ पड़ोसियों का भी हाथ है। इन पड़ोसियों पर आरोप है कि उन्होंने पुलिस प्रशासन के आगे ही पीड़ित परिवार पर हमला किया। बताया गया है कि उन हमलावरों पर भी शिकायत के बावजूद अभी तक कोई कार्रवाई नहीं हो पाई है। पार्वती और श्याम गिरी नाम के 2 संदिग्धों पर फ़िरोज़ और उसके घर वालों का साथ देने का आरोप लगा है। पीड़ित परिवार ने अपनी बेटी के साथ किसी अनहोनी की आशंका ही जताई है और प्रशासन से उसे जल्द से जल्द बरामद करने की अपील की है। ऑपइंडिया के पास शिकायत कॉपी मौजूद है।

‘बंधक बना कर रखेंगे जब तक बालिग नहीं हो जाती’

ऑपइंडिया ने पीड़िता की माँ से बात की। पीड़िता की माँ ने हमें बताया कि फ़िरोज़ की चाची का कहना है कि वो लड़की को तब तक अपने पास छिपा कर बंधक बना कर रखेंगे जब तक वो बालिग नहीं हो जाती। बालिग होने के बाद पीड़िता का बकायदा निकाह इस्लाम कबूल करवा के कराया जाएगा। लड़की के परिवार वालों पर दबाव है कि वो केस वापस लें तो मामले में आगे की बात होगी। हालाँकि पीड़िता के परिजनों ने केस वापस लेने से इनकार कर दिया। उन्होंने आशंका जताई है कि उनकी बेटी को भारत की किसी जगह छिपाया गया है।

बातचीत के लिए कर रहा IMO एप का प्रयोग

पीड़िता की माँ ने हमें आगे बताया कि फ़िरोज़ उनके परिवार पर IMO एप कर कॉल कर के केस वापस लेने का दबाव बना रहा है। डेढ़ महीने पहले उनकी बेटी ने IMO पर रोते हुए कॉल किया। इस दौरान लड़की ने अपनी माँ से कहा, “मुझे खोजने की कोशिश मत करना। मेरा सारा जेवर फ़िरोज़ ने बेच दिया है। मैं कहीं मुँह दिखाने लायक नहीं बची।” बकौल पीड़िता की माँ, उनकी बेटी घर से घर से सोना और चाँदी भी साथ ले गई है। पीड़िता के पिता मेहनत मजदूरी कर के अपना परिवार चलाते हैं।

टोकरी बेचने के दौरान हुआ था परिचय

पीड़िता की माँ ने ऑपइंडिया को बताया कि फ़िरोज़ का परिवार टोकरी बनाने का काम करता है। इसी टोकरी को बेचने के लिए फ़िरोज़ गाँव-गाँव घूमा करता था। आशंका है कि इसी दौरान दोनों का परिचय हुआ था। बाद में दोनों सोशल मीडिया पर बात करने लगे। पीड़िता की माँ ने बताया कि उनकी बेटी धार्मिक स्वभाव की है लेकिन इसके बावजूद फ़िरोज़ के चंगुल में फँस गई। ऑपइंडिया से बात करते हुए ‘हिन्दू सम्राट सेना’ के राष्ट्रीय अध्यक्ष राजेश यादव ने बताया कि उन्होंने नेपाली प्रशासन से आरोपितों के खिलाफ कड़ी कार्रवाई की माँग की है। जल्द बरामदगी न होने पर राजेश यादव ने आंदोलन की चेतावनी दी है।

पीटा, धक्का दिया, कैमरे का स्क्रीन थोड़ा, गालियाँ बकी… AAP के दफ्तर में ‘टाइम्स नाउ’ के पत्रकारों से बदसलूकी, ₹7 करोड़ की विदेशी फंडिंग पर पूछा था सवाल

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को बार-बार तानाशाह कहने वाला विपक्ष एक बार फिर से बेनकाब हो गया है। दिल्ली की सत्ताधारी ‘आम आदमी पार्टी’ (AAP) के दफ्तर में मीडिया संस्थान ‘टाइम्स नाउ’ के पत्रकारों के साथ मारपीट की गई है। ‘टाइम्स नाउ’ के क्रू में शामिल मीडियाकर्मियों को न सिर्फ थप्पड़ जड़े गए, बल्कि उनके साथ धक्कामुक्की भी की गई। असल में आकांक्षा खजुरिया AAP को लेकर ED (प्रवर्तन निदेशालय) की रिपोर्ट को लेकर कवर करने गई थीं।

बताया जा रहा है कि AAP के ‘चीफ मीडिया कोऑर्डिनेटर’ विकास कुमार ने इस करतूत को अंजाम दिया है। असल में ये पत्रकार विदेशी फंडिंग के मामले में सवाल पूछ रहे थे, जो AAP नेताओं को पसंद नहीं आया। पत्रकारों को गालियाँ भी बकी गईं। साथ ही कैमरा के स्क्रीन को तोड़ डाला गया। ये सब कैमरे में कैद हो गया। बता दें कि AAP को 2014-22 के बीच 7.08 करोड़ रुपए की विदेशी फंडिंग मिली है। ED ने केंद्रीय गृह मंत्रालय को इस संबंध में रिपोर्ट भी भेज दी है।

इस रिपोर्ट में स्पष्ट कहा गया है कि अरविंद केजरीवाल की पार्टी ने FCRA (विदेशी योगदान विनियमन अधिनियम) का उल्लंघन किया है। साथ ही लोक प्रतिनिधित्व अधिनियम (RPA), 1951 का भी उल्लंघन किया गया है। ‘टाइम्स नाउ’ की नाविका कुमार ने बताया कि दूसरी बार ऐसा हुआ है जब उनके चैनल के पत्रकारों के साथ ऐसा व्यवहार हुआ है। उन्होंने बताया कि ‘शीशमहल’ घोटाले को उजागर करने के बाद उनकी पत्रकार भावना किशोर को जेल में बंद कर दिया गया था।

बता दें कि अरविंद केजरीवाल ने अपने आधिकारिक आवास को चमकाने में सरकारी खजाने से 45 करोड़ रुपए खर्च किए थे, वो भी कोरोना महामारी के भीषण दौर में। नाविका कुमार ने अरविंद केजरीवाल से कहा कि वो अपनी पार्टी के गुंडों को नियंत्रण में रखें। उन्होंने कहा कि किसी भी रिपोर्टर या वीडियो जर्नलिस्ट को छुआ जाएगा तो दिल्ली की पूरी जनता के गुस्सा का सामना AAP को करना पड़ेगा। बता दें कि AAP को कनाडा, सऊदी अरब और ऑस्ट्रेलिया तक से फंडिंग आई है।

J&K के बारामुला में टूट गया पिछले 40 साल का रिकॉर्ड, पश्चिम बंगाल में सर्वाधिक 73% मतदान: 5वें चरण में भी महाराष्ट्र में फीका-फीका रहा चुनाव

लोकसभा चुनाव 2024 के 5वें चरण का मतदान संपन्न हो गया। इस दौरान 6 राज्यों और 2 केंद्र शासित प्रदेशों की 49 सीटों पर वोट डाले गए। उत्तर प्रदेश में गाँधी परिवार का गढ़ माने जाते रहे अमेठी और रायबरेली में भी मतदान हुआ। रायबरेली से कॉन्ग्रेस के राहुल गाँधी तो अमेठी से भाजपा की स्मृति ईरानी उम्मीदवार हैं। मुंबई में फ़िल्मी सितारे भी वोट देने के लिए लिखने। बच्चन और अम्बानी परिवार को बूथ पर देखा गया। वहीं कश्मीर और लद्दाख में पोलिंग के रिकॉर्ड टूटे।

जम्मू कश्मीर के बारामुला से सबसे सकारात्मक खबर आई, जहाँ पिछले 40 वर्षों में सबसे अधिक मतदान दर्ज किया गया। वहाँ 54.21% का टर्नआउट रहा। इससे पहले 1984 में 58.84% मतदाताओं ने पोलिंग में हिस्सा लिया था। अलगाववादियों-आतंकियों ने चुनाव का बॉयकॉट किया था, जिसका कोई असर नहीं हुआ। मुंबई के सियोन क्षेत्र में लिटिल एंगेल्स स्कूल में भाजपा-कॉन्ग्रेस कार्यकर्ताओं में झड़प हुई। भाजपा कार्यकर्ता की शिकायत पर मामला दर्ज कर लिया गया है।

कुल मिला कर सभी 49 सीटों पर 57.51% मतदाताओं ने अपने मताधिकार का प्रयोग किया। पश्चिम बंगाल 73% पोलिंग के साथ सबसे आगे है, वहीं इसके बाद 67.15% के साथ लद्दाख का स्थान रहा। झारखंड में 63%, ओडिशा में 60.72%, उत्तर प्रदेश में 57.79% और जम्मू कश्मीर में 54.67% मतदाताओं ने वोट डाले। इसी तरह बिहार में 52.60% और महाराष्ट्र में 49.01% लोगों ने वोट डाले। पश्चिम बंगाल के आरामबाग में 76.90% मतदान हुआ है।

सबसे कम मतदान महाराष्ट्र में हुआ। दक्षिणी मुंबई में तो पोलिंग परसेंटेज 45% से भी कम रहा। बिहार में मुजफ्फरपुर में सबसे अधिक 55.60% मतदाताओं ने वोट डाले। वहीं उत्तर प्रदेश की बात करें तो वहाँ बाराबंकी में सबसे अधिक 66.89% लोगों ने अपने मताधिकार का इस्तेमाल किया। झारखण्ड में हजारीबाग में सर्वाधिक 64.32% पोलिंग हुई। वहीं ओडिशा के बारगढ़ में 66.14% लोगों ने वोट डाले। लद्दाख से भी सकारात्मक खबर आई, जो क्षेत्रफल के मामले में देश का सबसे बड़ा लोकसभा क्षेत्र है और कारगिल-लेह जिलों को कवर करता है।

महज 130 रुपए के लिए इस्लामनगर के साजिद ने हरिद्वार निवासी नितिन को चाकू घोंप कर मार डाला, पुरानी दोस्ती का भी नहीं किया ख्याल: पुल के नीचे पड़ा था शव

उत्तराखड के हरिद्वार जिले में महज 130 रुपए के लिए साजिद द्वारा एक हिन्दू युवक की हत्या कर दी गई। हत्या चाकुओं से गोद कर की गई थी। मृतक का नाम नितिन उर्फ़ गुड्डू है जिसका शव इसी माह 4 मई को एक पुल के नीचे लावारिश हालत में मिला था। मृतक और आरोपित दोस्त हुआ करते थे। हत्या के बाद साजिद लगातार फरार चल रहा था जिसको रविवार (19 मई 2024) को गिरफ्तार कर लिया गया।

यह मामला थाना क्षेत्र रुड़की कोतवाली का है। सोमवार (20 मई, 2024) को पुलिस ने इस मामले की जानकारी मीडिया से साझा की। मीडियाकर्मियों से बात करते हुए हरिद्वार के एसएसपी परमेंद्र सिंह डोभाल ने बताया कि 4 मई को रुड़की के सोलानी पुल के नीचे पुलिस को एक शव पड़े होने की सूचना मिली थी। पुलिस ने मौके पर पहुँच कर शव कब्ज़े में लिया और जाँच शुरू की। लाश रुड़की के ही अम्बर तालाब निवासी नितिन की निकली। पुलिस ने FIR दर्ज कर के जाँच पड़ताल शुरू की।

जाँच के दौरान पुलिस ने कई CCTV फुटेज खंगाले। एक फुटेज में इस्लामनगर निवासी साजिद नाम के व्यक्ति को नितिन के साथ घटना के आसपास के समय पाया गया। पुलिस ने खोजबीन शुरू की तो साजिद फरार हो गया। पुलिस के मुताबिक, अपनी लोकेशन बदलते रहने और मोबाइल अक्सर बंद रखने की वजह से साजिश को खोजने में समय लगा। आखिरकार 19 मई (रविवार) को उसकी लोकेशन हरिद्वार जिले के ही कलियर इलाके में पाई गई। पुलिस ने दबिश दे कर साजिद को गिरफ्तार कर लिया।

साजिद को थाने पर ला कर पूछताछ की गई तो उसने अपना गुनाह कबूल कर लिया। उसने बताया कि वो और नितिन पुराने दोस्त थे। दोनों एक साथ लगभग 1 हफ्ते पहले नितिन ने नशे में उस से 130 रुपए छीन लिए थे। इस बात को ले कर साजिद मन में खुन्नस खाए हुए था और लगातार नितिन को खोज रहा था। घटना के दिन साजिद ने नितिन को सोलानी पुल के नीचे अकेले देखा। यहाँ उसने चाकू निकाल कर नितिन पर ताबड़तोड़ वार किए। हमले में नितिन के पेट और सीने में कई घाव हो गए।

जिस इलाके में नितिन को चाकू घोंपे गए वह सुनसान क्षेत्र है जहाँ लोगों का अधिक आवागमन नहीं है। इसलिए नितिन को समय से मेडिकल मदद नहीं पहुँच पाई। अधिक खून बह जाने के कारण नितिन की मौके पर ही मौत हो गई। पुलिस ने हत्या में प्रयोग किया चाकू बरामद कर लिया है। साजिद को जेल भेज दिया गया है। मामले में जाँच व अन्य कानूनी कार्रवाई जारी है।

भारत पर हमले के लिए 44 ड्रोन, मुंबई के बगल में ISIS का अड्डा: गाँव को अल-शाम घोषित चला रहे थे शरिया, जिहाद की कसम दिलाता था खतरनाक मंसूबों वाला साकिब नाचन

भारत की आर्थिक राजधानी कही जाने वाली मुंबई के बारे में पत्रकार पंकज प्रसून ने एक नई रिपोर्ट प्रकाशित की है। इस रिपोर्ट में मुंबई से 50 किलोमीटर दूर बैकवाटर के पडघा में आतंकी सगंठन ISIS की गतिविधियाँ संचालित होने का दावा किया गया है। इन आतंकी गतिविधियों का मास्टरमाइंड साकिब नाचन नाम का आतंकवादी बताया जा रहा है। बताया जा रहा है कि पडघा को ISIS के सेंटर बनाने की साजिश के चलते ही उसका नाम बदल कर अल शाम कर दिया गया है।

पंकज प्रसून की इस रिपोर्ट में दावा किया गया है कि अब अल शाम नाम से जानी जाने वाली पडघा नाम की जगह शरिया कानून लागू करने की साजिश रची जा रही है। यह जगह अब भारत के कानूनों को मानने के बजाय एक स्वतंत्र क्षेत्र की तरह काम कर रही है। इस जगह को आतंकवाद का केंद्र आतंकवादी साकिब नाचन ने बनाया है। कभी पडघा एक शाँत जगह हुआ करती थी लेकिन अब यहाँ अपरिचित और संदिग्ध व्यक्तियों की आवाजाही लगी रहती है। यहाँ रहने वाले लोगों में कट्टरपंथ भी तेजी से पनपा है।

साल 2023 में ‘राष्ट्रीय जाँच एजेंसी’ (NIA) ने पडघा में छापा मारा था। तब 44 ऐसे ड्रोन का पता चला था जिनका प्रयोग मुंबई में हमले के लिए किया जाना था। इन आधुनिक उपकरणों को हासिल करने में आतंकियों को निश्चित तौर पर बाहर से सहयोग मिलने का अनुमान लगाया गया था। पर सिर्फ ड्रोन ही चिंता क विषय नहीं थे। इसके साथ आतंकी ठिकाने से कट्टरपंथी साहित्य और इजरायल के झंडे भी बरामद हुए थे। इन वस्तुओं से यह अनुमान लगाया गया कि आतंकियों के मंसूबे काफी खतरनाक थे।

महानगर मुंबई के इतने पास ऐसे आतंकी केंद्र का सामने आना सुरक्षा को ले कर गंभीर खतरे की तरफ इशारा करता है। साथ ही इस खतरे को खत्म करने की दिशा में सोचने के लिए भी विवश करता है।

कौन है साकिब नाचन

साकिब नाचन भारत में ISIS की जड़ें जमाने में जुटा मुख्य साजिशकर्ता माना जाता है। वह मूल रूप से प्रतिबंधित आतंकी संगठन SIMI से जुड़ा है। साकिब पर दिसंबर 2002 में मुंबई सेंट्रल रेलवे स्टेशन पर हुए विस्फोट का भी आरोप था। इस विस्फोट में 25 लोग घायल हुए थे। एक माह बाद मुंबई के विले पार्ले एरिया में भी ब्लास्ट हुआ था। इस धमाके में 1 व्यक्ति की मौत हो गई थी जबकि 25 अन्य घायल हुए थे। इस धमाके का भी मास्टरमाइंड साकिब नाचन बताया गया था। मार्च 2003 में मुलुंड में हुए बम विस्फोट में भी साकिब नाचन ही मुख्य साजिशकर्ता बताया गया था। इस ब्लस्ट में 11 लोग मारे गए थे जबकि 82 अन्य घायल हुए थे।

साकिब को अप्रैल 2003 में गिरफ्तार कर लिया गया था। वह 7 साल से अधिक समय तक जेल में रहा था। 2011 में साकिब को जमानत मिल गई। हालाँकि कुछ ही महीने बाद उसे हत्या के प्रयास में एक बार फिर से गिरफ्तार कर लिया गया। तब साकिब ने विश्व हिन्दू परिषद कार्यकर्ता और वकील मनोज रायचा की हत्या की कोशिश की थी। साकिब को मार्च 2016 में अदालत ने आतंकवाद विरोधी कानून के तहत हथियार रखने का दोषी माना। तब साकिब को 10 साल कैद की सजा सुनाई गई थी। हालाँकि साकिब ने महज 1 साल 8 महीने ही जेल में बिताए। नवंबर 2017 में उसे जमानत मिल गई और वो रिहा हो गया।

बेहद खरतनाक है साकिब के इरादे

सिमी के पूर्व पदाधिकारी साकिब नाचन ने मुंबई से सटे पडघा को एक अलग राज्य बनाने की साजिश रची। अपनी साजिश को अंजाम देने के लिए उसने रणनीतिक ढंग से नए रंगरूटों को बसाया। खुफिया सूत्रों की मानें तो नाचन ने युवाओं को कट्टरपंथी बनाने के लिए कई ट्रेनिंग और कार्यक्रम आयोजित करवाए। इन कार्यक्रमों के लिए विदेशों से फंडिंग की हुई। साकिब अपने द्वारा तैयार किए गए रंगरूटों से 26/11 से भी बड़ा आतंकी हमला भारत में करना चाहता था। उसकी मंशा पूरे देश में बम धमाके करने की थी।

साकिब नाचन जिन भी युवाओं को अपनी टीम में भर्ती करता था उनको जिहाद की कसम दिलाई जाती थी। इस पूरी आतंकी टीम को विदेशी आकाओं से निर्देश मिला करते थे। पद्घा (अल-शाम) गाँव में साकिब अपनी टीम के सदस्यों को IED बनाने से ले कर हमले की ट्रेनिंग दिया करता था। आर्थिक रूप से कमजोर मुस्लिम युवकों को साकिब लालच दे कर अपने साथ मिलाने की कोशिश करता था। ISIS का भारत में बेस बन रहे पद्घा में NIA ने दिसंबर 2023 में दबिश दी। तब NIA ने नाचन सहित कुल 15 आतंकवादियों को गिरफ्तार किया था।

साकिब की गिरफ्तार से कुछ महीने पहले ही सुरक्षा एजेंसियों ने उसके बेटे शामिल नाचन को पकड़ा था। साकिब के बेटे पर भी अपने अब्बा के नक्शे कदम पर चल कर आतंकी हरकतों को संचालित करने का आरोप है।

‘सारी बहनें कैरेक्टरलेस हैं, ऐसे ही घूमती रहती हैं’: कामरान-इमरान की मामी-दादी ने पीड़ित हिन्दू लड़की को ही बताया ‘बेशर्म’, अपहरण के बाद निकाह की थी तैयारी

छत्तीसगढ़ के बिलासपुर में 28 फरवरी, 2024 को पुलिस ने 13 साल की नाबालिग हिन्दू लड़की के अपहरण और रेप केस में इमरान और उसके भाई कामरान को गिरफ्तार किया था। अब आरोपित की रिश्तेदार मीडिया के सामने आई हैं जिन्होंने इमरान की करतूत को सही ठहराने की कोशिश की है। इमरान के रिश्तेदारों ने नाबालिग पीड़िता के साथ उसकी बहनों को भी चरित्रहीन साबित करने का प्रयास किया है। वहीं दूसरी तरफ पीड़िता के पिता को केस वापस न लेने पर जान से मार डालने की धमकी भी दी जा रही है।

‘ऑर्गेनाइजर’ की पत्रकार शुभी विश्वकर्मा ने बिलासपुर जा कर आरोपित और पीड़ित परिवारों से मुलाक़ात की। इमरान के रिश्तेदार के तौर पर सीमा खातून मिलीं। हिजाब वाली सीमा खुद को इमरान की दूर के रिश्ते में मामी बता रहीं थीं। सीमा खातून ने दावा किया है कि आरोपित और पीड़िता का अफेयर था। उन्होंने पीड़िता के साथ इमरान को भी नासमझ बता डाला। सीमा का यह भी दावा है कि इमरान उनके घर में रहा था लेकिन उनको दोनों के रिश्ते के बारे में कुछ नहीं पता था। बकौल सीमा, उन्हें ये सब पसंद नहीं है इसलिए अगर उनको पता होता तो वो एक्शन लेतीं।

सीमा खातून ने आगे कहा कि हिन्दू-मुस्लिम का मसला था इसलिए पता होता तो वो लोग विरोध करते। FIR में इमरान पर लगाए गए आरोपों को झूठा बताते हुए इमरान के रिश्तेदारों ने दावा किया कि लड़की के पापा और चाचा मिल कर आरोपित को फँसाने की साजिश रच रहे हैं। सीमा ने आगे कहा, “वो लड़कियाँ जितनी भी सारी बहनें हैं, सब कैरेक्टरलेस (चरित्रहीन) हैं। आज इस लड़के से, कल उस लड़के से।” सीमा ने दावा किया कि ये सब वो अपनी आँखों से देखती हैं। वहीं सीमा के साथ बैठी इमरान की दादी ने पीड़िता को ‘बेशर्म’ बताते हुए कहा, “अभी भी वो लड़की दिन-रात ऐसे ही घूमती-फिरती है”।

आरोपित के परिवार से मिलने के बाद शुभी पीड़िता के पिता से मिलीं। उन्होंने वो तमाम बातें एक बार फिर से दोहराया जो FIR में दर्ज है। उन्होंने बताया कि पुलिस में केस दर्ज करवाने के बाद आरोपित उनकी बेटी को स्टेशन पर छोड़ कर भाग निकला था। अपनी बेटी को नाबालिग और नासमझ बताते हुए पीड़िता के पिता का दावा है कि इमरान उनकी बेटी को बेचना चाहता था। पीड़िता के पिता का दावा है कि आरोपित के परिजनों द्वारा उनको केस वापस लेने के लिए कहा जा रहा है। ऐसा न करने पर पूरे परिवार को खत्म कर देने की धमकी भी दी जा रही है।

‘ऑर्गेनाइजर’ की ग्राउंड रिपोर्ट में यह बात भी निकल कर सामने आई कि जिस गाँव के आरोपित और पीड़ित हैं वहाँ मजारें बनी हुई हैं। कई अवैध निर्माण सरकारी सम्पत्तियों पर कर लिए गए हैं। इसके अलावा बाहर से आए कई लोगों ने मकानों पर भी कब्ज़ा जमा लिया है।

बताते चलें कि 12 फरवरी, 2024 को इमरान ने अपने भाई कामरान की मदद से बिलासपुर में 13 साल की नाबालिग पीड़िता का अपहरण किया था। इमरान एक मस्जिद में काम करता था। पीड़िता को उत्तर प्रदेश के हमीरपुर ला कर रेप किया गया। यहाँ पीड़िता को इस्लाम कबूल करवा के निकाह की भी तैयारी थी। हालाँकि, पुलिस के दबाव के चलते इमरान पीड़िता को वापस उसके घर जाने वाली ट्रेन पर बिठा कर फरार हो गया था। 28 फरवरी को इमरान और कामरान को पुलिस ने दबोच लिया था।

कनाडा, अमेरिका, अरब… AAP ने करोड़ों का लिया चंदा, लेकिन देने वालों की पहचान छिपा ली: ED का खुलासा, खालिस्तानी आतंकी पन्नू ने भी फंड देने का किया था दावा

एक रिपोर्ट में खुलासा हुआ है कि आम आदमी पार्टी (AAP) ने विदेश से लिए गए करोड़ों के फंड के स्रोत की पहचान छुपाई हैं। प्रवर्तन निदेशालय (ED) की एक रिपोर्ट में बताया गया है कि AAP को कनाडा, अमेरिका, न्यूजीलैंड और मध्यपूर्व के देशों से यह पैसा मिला है। विदेशी फंडिंग को AAP तक पहुँचाने के लिए कई गड़बड़ियाँ की गईं।

मीडिया रिपोर्ट्स के अनुसार, AAP को 2014 से 2022 के बीच ₹7.08 करोड़ की विदेशी फंडिंग मिली है। यह पैसा विदेशी फंडिंग कानून (FCRA) के नियमों का उल्लंघन करके ली गई है। ED ने इस फंडिंग को लेकर एक रिपोर्ट तैयार की है, इसे गृह मंत्रालय को भेजा गया है। इसके कुछ हिस्से बाहर आए हैं।

रिपोर्ट में बताया गया है कि AAP को यह फंडिंग देने वाले अलग-अलग लोगों ने एक ही पासपोर्ट नम्बर, एक ही मोबाइल नम्बर और एक ही क्रेडिट कार्ड की जानकारियाँ देते हुए यह धनराशि दी। यह सारी फंडिंग कनाडा, न्यूजीलैंड, USA और मध्य पूर्व के देशों से आई है।

इस अवैध फंडिंग के एक उदाहरण को भी रिपोर्ट में बताया गया है। विदेशों में रहने वाले 155 लोगों ने 55 पासपोर्ट का इस्तेमाल करके 1.04 करोड़ की धनराशि AAP को दी। ऐसा 404 मौकों पर किया गया। इस रिपोर्ट में यह भी आरोप लगाया गया कि AAP नेता दुर्गेश पाठक ने कनाडा में 2016 में AAP के लिए इकट्ठा किए गए फंड को अपने इस्तेमाल में लिया।

ED ने इस पूरी गड़बड़ी के सबूत में AAP पदाधिकारियों के बीच ईमेल में हुई बातचीत का भी ब्यौरा दिया है। यह बातचीत कुमार विश्वास, कपिल भारद्वाज, दुर्गेश पाठक और अनिकेत सक्सेना के बीच हुई। यह सभी तब AAP में महत्वपूर्ण पदों पर थे। इसके अलावा भी फंडिंग को लेकर कई खुलासे ED की इस रिपोर्ट में किए गए हैं।

आतंकी पन्नू भी कह चुका है AAP को फंडिंग की बात

खालिस्तानी आतंकी गुरपतवंत सिंह पन्नू ने मार्च, 2024 में आरोप लगाया था कि भगवंत मान और केजरीवाल ने आम आदमी पार्टी के लिए खालिस्तानियों से मोटी रकम ली है। पन्नू ने बताया था, “2014-2022 के बीच खालिस्तानियों ने AAP की सरकार बनाने के लिए 16 मिलियन डॉलर (₹133 करोड़) की मदद दी।”

पिज्जा खिलाया, सुलाया, मर्सिडीज से आए परिजनों को अंदर बुलाया… इंजीनियरों को कुचलने वाले रईसजादे को पुणे पुलिस ने भी दिया VIP ट्रीटमेंट, गवाहों को भी धमकाया

पुणे में एक बिल्डर के नाबालिग बेटे ने पब में दारू पार्टी करने के बाद पोर्शे की करोड़ों की कार लेकर एक युवक और एक युवती को कुचल कर मार डाला। इसके बाद इस मामले में कुछ ऐसी घटनाएँ हुईं जिनसे पुलिस और न्यायपालिका में लोगों का भरोसा डिग रहा है। आरोपित को इस घटना पर लेख लिखने के लिए कह कर जमानत दे दी गई। पुलिस ने कमजोर धारा लगाई। अब गवाहों को ही उलटा धमकाए जाने की बात सामने आई है जो व्यवस्था पर सवाल खड़े कर रही है।

‘Punekar News’ ने अपनी खबर में बताया है कि जहाँ आरोपित के साथ VIP अतिथि जैसा व्यवहार किया गया, वहीं मृतकों की तरफ से जो लोग आए थे उन्हें पुलिस के सहयोग के लिए भी तरसना पड़ा। मृतक IT इंजीनियरों अश्विनी कोस्टा और अनीस अवधिया की उम्र मात्र 24 वर्ष थी। उन्हें शास्त्रीनगर के सह्याद्रि हॉस्पिटल ले जाया गया, जहाँ पता चला कि मौके पर ही उनकी मौत हो गई थी। वहाँ मौजूद लोगों ने ड्राइवर की सीट से नाबालिग को निकाला और उसकी पिटाई की।

यरवदा पुलिस थाने ले जाए जाने के बाद पता चला कि वो नाबालिग है। केशवनगर में सॉफ्टवेयर इंजीनियर और अनीस अवधिया के कजन भाई पारस सोनी ने बताया कि तड़के सुबह फोन कॉल पाने के बाद वो पुलिस थाने की तरफ भागे, जहाँ उन्होंने देखा कि गिरफ्तार नाबालिग को VIP ट्रीटमेंट मिल रहा है। उसे पिज्जा खिलाया जा रहा था, साथ ही आराम से सुलाया भी गया था। उन्होंने इस मामले में एक स्थानीय विधायक के शामिल होने के आरोप लगाए।

पारस सोनी ने बताया कि जब उन्होंने इस मामले में FIR दर्ज कर के संदिग्धों का मेडिकल परीक्षण की माँग की, पुलिस वाले बिना ज़रूरत के गुस्सा हो गए और उलटा मृतकों के परिजनों पर ही केस की धमकी देने लगे। जब मृतकों के दोस्त बतौर गवाह सामने आए तो पुलिस ने उन सबको हिरासत में लेने की धमकी देते हुए कहा कि जाँच कराई जाएगी कि उन्होंने शराब पी रखी थी या नहीं। पारस सोनी का कहना है कि आरोपित लड़के की रसूखदार पृष्ठभूमि से पुलिस प्रभावित दिखी।

उन्होंने कहा, “संयोग से भीड़ ने लड़के को पकड़ लिया। गवाहों ने उसकी पहचान की पुष्टि की। इसके बावजूद पुलिस ने स्थानीय MLA के साथ मिल कर किसी और को ड्राइवर बताने की साजिश रची ताकि मामले को कवर-अप किया जा सके। हमने मीडिया और अपने संपर्कों को सब कुछ बताने की चेतावनी दी। चूँकि लड़के को पीटा गया था, हमने उसे तुरंत पहचान लिया। हमारे पास वीडियो भी था। अंततः हम मीडिया के पास मदद के लिए पहुँचे। आखिरकार सुबह के 11 बजे पुलिस लड़के को मेडिकल परीक्षण के लिए ले गई।”

पारस सोनी ने बताया कि इस दौरान वो लोग परिजनों को ढाँढस बँधाने, मृतकों के शवों को प्राप्त करने और एम्बुलेंस की व्यवस्था वगैरह जैसे कार्यों में व्यस्त थे। मराठी न आने के कारण परिजनों को परेशानी हुई सो अलग। आरोपित को पुलिस अर्टिगा कार से नाबालिगों वाले कोर्ट में लेकर गई, साथ में 2 मर्सिडीज कार में 3 वकील थे, जिनमें एक महिला वकील थे। वहीं जिस विधायक के बारे में पारस सोनी बता रहे थे, वो NCP (अजीत पवार गुट) का हिस्सा हैं।

वडगाँव विधायक सुनील टिंगरे ने कहा कि लड़के के पिता के साथ उनके व्यापारिक रिश्ते हैं और वो परिवार उनके ही विधानसभा क्षेत्र में रहता है। उन्होंने कहा कि इसी कारण उनसे मदद माँगी गई थी और वो मदद करने पुलिस थाने पहुँचे थे, लेकिन उन्होंने इस केस में कोई हस्तक्षेप नहीं किया। जहाँ मृतकों के परिजन थाने के बाहर बयान देने के लिए इंतजार कर रहे थे, मर्सिडीज से आए 17 वर्षीय आरोपित के परिजनों को पुलिस थाने के अंदर लेकर गई।