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5 आतंकियों की उम्रकैद दिल्ली हाई कोर्ट ने 10 साल की सजा में बदली, कहा- इनका अपराध गंभीर लेकिन इन्होंने कोई आतंकवादी घटना अंजाम नहीं दी

दिल्ली हाई कोर्ट ने जैश-ए-मोहम्मद के 5 ओवर ग्राउंड वर्कर्स (OGW) की सजा उम्रकैद से घटा कर 10 वर्ष कर दी है। हाई कोर्ट ने कहा कि कई मामलों में लिप्त होने के बावजूद उन्होंने खुद किसी वारदात को अंजाम नहीं दिया। इस दौरान दिल्ली हाई कोर्ट ने सुप्रसिद्ध रुसी लेखक फ्योडोर दोस्तोवस्ती के मशहूर नॉवेल ‘क्राइम एंड पनिशमेंट’ का भी हवाला दिया। दिल्ली हाई कोर्ट की ओर से बिलाल अहमद मीर, सज्जाद अहमद खान, मुजफ्फर अहमद भट, मेहराज-उद-द्दीन चोपन और इशफाक अहमद भट को ये राहत मिली है।

लॉ रिपोर्टिंग वेबसाइट लाइव लॉ की रिपोर्ट के मुताबिक, दिल्ली हाईकोर्ट ने सोमवार (20 मई 2024) को आतंकवादी संगठन जैश-ए-मोहम्मद के पाँच सदस्यों को भारतीय दंड संहिता की धारा 121ए के तहत अपराध के लिए दी गई सजा को बदलकर उम्रकैद से 10 साल के कठोर कारावास में बदल दिया। जस्टिस सुरेश कुमार कैत और जस्टिस मनोज जैन की बेंच ने बिलाल अहमद मीर, सज्जाद अहमद खान, मुजफ्फर अहमद भट, मेहराज-उद-दीन चोपन और इशफाक अहमद भट द्वारा ट्रायल कोर्ट से मिली उम्रकैद की सजा के खिलाफ दायर अपील पर ये फैसला दिया। हाई कोर्ट की बेंच ने यूएपीए की धारा 23 के तहत अपराध के लिए इशफाक अहमद भट को दी गई सजा को उम्रकैद से 10 साल की कठोर सजा में बदल दिया।

दिल्ली हाई कोर्ट ने कहा, “जिस व्यक्ति के पास विवेक है, वह अपने पाप को स्वीकार करते हुए कष्ट सहता है। हम ‘क्राइम एंड पनिशमेंट’ के लेखक फ्योदोर दोस्तोवस्की के उद्धरण का उल्लेख करते हैं, जिसके 19वें चैप्टर में दोस्तोवस्की ने लिखा, “यदि उसके पास विवेक है तो वह अपनी गलती के लिए पीड़ित होगा; वही सजा होगी – साथ ही जेल भी।”

जानकारी के मुताबिक, बिलाल अहमद मीर, सज्जाद अहमद खान, मुजफ्फर अहमद भट, मेहराज-उद-द्दीन चोपन और इशफाक अहमद भट को साल 2022 में ट्रायल कोर्ट ने आईपीसी की धाराओं और यूएपीए की धाराओं के तहत दोषी पाया था और उन्हें 28 नवंबर 2022 को उम्रकैद की सजा सुनाई गई थी। ये सभी लोग जम्मू-कश्मीर में आत्यधिक सक्रिय रहे जैश-ए-मोहम्मद जैसे दुर्दांत आतंकी संगठन के ओवर ग्राउंड वर्कर थे।

दिल्ली हाईकोर्ट ने कहा कि उनकी सजा कम करने से इनके अपराध कम नहीं हो जाते, ये भले ही कई मामलों से जुड़े रहे थे, लेकिन सीधे इन्होंने किसी काम को अंजाम नहीं दिया। ऐसे में इन्हें सुधरने के लिए एक खिड़की खुली छोड़ देनी चाहिए। हालाँकि एनआईए ने जोर दिया है कि ये लोग कई आतंकी घटनाओं से जुड़े रहे हैं।

CM केजरीवाल के PA विभव कुमार को लेकर मुंबई गई दिल्ली पुलिस, स्वाति मालीवाल के साथ मारपीट के बाद यहीं फॉर्मेट किया था फोन: जाँच के लिए SIT का गठन

स्वाति मालीवाल से CM अरविन्द केजरीवाल के आधिकारिक आवास पर मारपीट मामले में आरोपित पूर्व PS बिभव कुमार को दिल्ली पुलिस मुंबई लेकर पहुँची है। दिल्ली पुलिस इस मामले में जाँच के लिए बिभव कुमार को हवाई रास्ते से दिल्ली लेकर पहुँची है। बताया गया है कि दिल्ली पुलिस ऐसा सबूत जुटाने के लिए कर रही है।

जानकारी के अनुसार, दिल्ली पुलिस की टीम बिभव कुमार को मुंबई में उस जगह पर लेकर जाएगी जहाँ उन्होंने अपना फोन फॉर्मेट किया था। यह बात दिल्ली पुलिस ने तीस हजारी कोर्ट को भी बताई है। बताया गया था कि बिभव कुमार ने स्वाति मालीवाल के साथ बदसलूकी के बाद अपना फोन फॉर्मेट कर दिया था।

दिल्ली पुलिस इस प्रयास में है कि वह बिभव कुमार फॉर्मेटेड किए गए फोन से डाटा वापस निकाल सके। इसके लिए ही वह बिभव कुमार को मुंबई में उस जगह ले जा रही है जहाँ उन्होंने फोन से सारा डाटा उड़ा चुके हैं। बिभव कुमार अभी पुलिस की हिरासत में हैं।

पुलिस इस पूरी घटना के अधिक से अधिक सबूत जुटाने में लगी हुई है। बिभव कुमार को इस मामले में शुक्रवार (16 मई, 2024) को गिरफ्तार किया गया था। दिल्ली पुलिस ने इस मामले में सबूत जुटाने के लिए घटना का रीक्रिएशन भी CM आवास में करवाया था। इसमें बिभव कुमार को भी ले जाया गया था।

दिल्ली पुलिस ने लगभग 20 लोगों के बयान भी इस मामले में दर्ज किए गए हैं। दिल्ली पुलिस यह भी पता लगाने का प्रयास कर रही है कि बिभव कुमार CM आवास पर घटना वाले दिन क्यों पहुँची थी। मामले में कई डिवाइस की फॉरेंसिक जाँच भी करवाई जाएगी।

मामले में जाँच के लिए एक SIT का भी गठन हुआ है, इसमें सिविल लाइन्स थाने के अधिकारी भी शामिल हैं। उनके पास ही स्वाति मालीवाल शिकायत लेकर सबसे पहले पहुँची थी और इसी थाने में FIR दर्ज की गई थी। यह भी बताया गया है कि आवश्यकता पड़ने पर CM केजरीवाल के परिवार के लोगों के बयान भी लिए जा सकते हैं।

गौरतलब है कि AAP राज्यसभा सांसद स्वाति मालीवाल ने 13 मई, 2024 को आरोप लगाया था कि उनके साथ CM आवास में केजरीवाल के पूर्व PS बिभव कुमार ने मारपीट की। इस मामले में बाद में मालीवाल ने दिल्ली पुलिस के पास FIR भी दर्ज करवाई थी। इसके बाद से इस मामले में AAP और स्वाति मालीवाल के बीच आरोप-प्रत्यारोप का सिलसिला चल रहा है।

‘हिन्दुओं को बदनाम करने के लिए बनाई फिल्म’: मलयालम सुपरस्टार ममूटी का ‘जिहादी’ कनेक्शन होने का दावा, ‘ममूक्का’ के बचाव में आए प्रतिबंधित SIMI के पूर्व अध्यक्ष

दक्षिण भारतीय राज्य तमिलनाडु और आंध्र प्रदेश में सिनेमा व राजनीति एक-दूसरे से मिले-जुले हुए हैं। तमिलनाडु के CM रहे करूणानिधि और जयललिता फिल्म इंडस्ट्री से थे। आंध्र प्रदेश के मुख्यमंत्री रहे NTR फिल्म इंडस्ट्री से थे। हालाँकि, केरल में ये देखने को नहीं मिलता है। मलयालम फिल्म इंडस्ट्री एक एक बड़ा बाजार है, जिसने ममूटी, मोहनलाल, जयराम और सुरेश गोपी जैसे सुपरस्टार दिए हैं। आज दिलकीर सलमान और फहाद फासिल सुर्खियाँ बटोर रहे हैं।

अब पिछले 53 वर्षों से मलयालम फिल्म इंडस्ट्री में सक्रिय ममूटी पर जिहादी होने के आरोप लगे हैं, जिसके बाद वो विवादों में आ गए हैं। उन्हें उनके फैंस ‘मम्मूक्का’ भी कहते हैं। चेन्नई स्थित एक कारोबार मोहम्मद शरशाद बनियांदी, जो कि CPI(M) नेता भी है, उन्होंने ‘सुपर मेगास्टार’ ममूटी को लेकर कुछ ऐसे खुलासे किए हैं, जो धर्मनिरपेक्ष, उदार और लोकतांत्रिक व्यवस्था में यकीन रखने वालों को हैरान करने वाले हैं। हालाँकि, न सिर्फ CPI(M) व उनके लेफ्ट के साथी दल, बल्कि कॉन्ग्रेस भी ममूटी को जिहादी बताए जाने का विरोध कर रही है।

मोहम्मद शरशाद बनियांदी ने कहा है कि उनकी पूर्व-पत्नी राठीना PT और स्क्रिप्ट लेखक हर्षद ने मिल कर एक हिन्दू विरोधी और सवर्ण विरोधी फिल्म बनाने की साजिश रची, जिसमें ममूटी मुख्य अभिनेता थे। रिपोर्ट में ये भी कहा गया है कि राठीना PT पर दबाव बनाया गया था कि हिन्दुओं को बदनाम करने के लिए वो इस फिल्म का निर्देशन करें। मामला 2022 में रिलीज हुई फिल्म ‘Puzhu’ से जुड़ा है, जिसे ममूटी की होम प्रोडक्शन कंपनी ‘Wayfarer Films’ द्वारा बनाया गया था।

इस फिल्म का डिस्ट्रीब्यूशन SonyLIV ने किया था।इस फिल्म इस फिल्म में उन्होंने एक ‘उच्च जाति’ के IPS अधिकारी का किरदार निभाया है, जो अपनी बहन से इसीलिए नफरत करता है क्योंकि वो अपने दलित प्रेमी के साथ भाग गई थी। असल में राठीना PT ने एक हल्का-फुल्का मनोरंजन वाली फिल्म बनाने की सोची थी, लेकिन दावा है कि उन्हें ‘सुपर मेगास्टार’ के हिसाब से चलना पड़ा। फिल्म के लेखक हर्षद को भी शरशाद ने एक ‘इस्लामी कट्टरपंथी’ बताया है।

बनियांदी ने कहा कि ममूटी को राठीना के साथ एक अन्य प्रोजेक्ट पर काम करना था, लेकिन जल्दी-जल्दी में ‘Puzhu’ बना दी गई। उन्होंने दावा किया कि इस फिल्म के लिए कुछ ‘बाहरी तत्वों’ ने उनकी पूर्व पत्नी के मन में कुछ भर दिया था। ममूटी 2000 से ही ‘कैराली टीवी’ के चेयरमैन हैं, जिसे CPI(M) का वरदहस्त हासिल है। मुख्यमंत्री पिनाराई विजयन से उनके नज़दीकी रिश्ते हैं। 2007 में ‘डेमोक्रेटिक यूथ फेडरेशन ऑफ इंडिया (DYFI)’ के ऑल इंडिया कॉन्फ्रेंस में उन्होंने कहा था कि अगर ये संगठन गुजरात में सक्रिय रहता तो 2002 में दंगे नहीं होते।

बता दें कि DYFI ‘कम्युनिस्ट पार्टी ऑफ इंडिया (मार्क्सिस्ट)’ का ही युवा संगठन है। अब SIMI के पूर्व अध्यक्ष एवं CPI(M) के MLA KT जलील ने भाजपा पर हमला किया है। उन्होंने ममूटी का बचाव किया है। वो कहते रहे हैं कि भारत को इस्लाम के माध्यम से ही ‘मुक्त’ किया जा सकता है। वो केरल में मंत्री भी रहे हैं। दावा किया जा रहा है कि मोहम्मद शरशाद बनियांदी अपने कहे से पलट गए हैं, लेकिन हमें अभी तक ऐसा कुछ आधिकारिक नहीं मिला है।

रोहिंग्या मुस्लिमों ने 5000 हिंदुओं-बौद्धों के घर जलाए, आँखों के सामने सब कुछ लूटा: इससे पहले म्यांमार से आई थी 1600 हिंदुओं को बंधक बनाने की खबर

म्यांमार के रखाइन प्रांत में सैन्य नेतृत्व वाले जुंटा और जातीय विद्रोही समूहों के बीच झड़पें तेज होने के बाद वहाँ सांप्रदायिक हिंसा भड़क गई है। खबर है कि वहाँ पर इस तनाव के चलते रोहिंग्याओं ने हिंदुओं और बौद्धों के 5000 घरों को जला दिया है।

सूत्रों से प्राप्त जानकारी बताती है, “घरों को निशाना इसीलिए बनाया गया था क्योंकि वो हिंदुओं और बौद्धों के हैं। इस घटना के बाद कई लोग इलाका छोड़ भाग गए थे, जो लोग बचे थे उन्हें जबरन वहाँ से हटा दिया गया और आँखों के सामने घरों को लूट लिया गया। इस घटना को अंजाम रोहिंग्याओं ने दिया।”

बताया जा रहा है कि ये विध्वंस 11 अप्रैल से 21 अप्रैल के बीच बांग्लादेश सीमा से सिर्फ 25 किमी दूर स्थित बुथिदौंग क्षेत्र में अंजाम दिया गया। सूत्र बताते हैं कि 2018 की जनगणना के अनुसार बुथिदौंग में 3000 घर थे। बाद में संख्या बढ़ी और घरों की गिनती 10000 हो गई। अब इन 10 हजार में से 50 फीसद घर तो मुस्लिमों के हैं और बाकी बचे हिंदू और बौद्धों के, जिनपर अब हमले की खबर है।

उल्लेखनीय है कि रखाइन राज्य में सांप्रदायिक हिंसा कोई नई बात नहीं रह गई है। यहाँ दशकों से भड़कती आग के कारण पलायन होता रहा है। इससे पहले इसी बुथिडुआंग से खबर आई थी कि वहाँ 1600 से भी अधिक हिन्दुओं एवं 120 बौद्ध समाज के लोगों को बंधक बनाया गया था।

रिपोर्ट्स में बताया गया था कि म्यांमार की फ़ौज की तरफ से इस्लामी कट्टरपंथियों को ये काम सौंपा गया है कि वो मुल्क के स्थानीय समुदायों को आतंकित करें। धर्म को आधार बना कर नरसंहार की साजिश रची जा रही है। इसी क्रम में 1600 से अधिक हिन्दुओं और 120 से अधिक बौद्धों को बंधक बनाया गया है। 

कॉन्ग्रेस और उसके साथियों ने पीढ़ियाँ बर्बाद की, अम्बेडकर नहीं होते तो नेहरू नहीं देते SC/ST को आरक्षण: चम्पारण में बोले पीएम मोदी

प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने बिहार में कहा है कि कॉन्ग्रेस ने बापू के आदर्शों को छोड़ कर एक परिवार को आगे बढ़ाने पर सारा जोर लगा दिया, देश के 60 साल बर्बाद कर दिए। पीएम मोदी ने राजद पर भी हमला किया। उन्होंने इन सभी पार्टियों पर देश का विकास ना करने और मूल सुविधाएँ ना देने को लेकर हमला किया।

पीएम मोदी बिहार के पूर्वी चम्पारण में लोकसभा चुनावों के लिए एक रैली को संबोधित कर रहे थे। यहाँ उन्होंने भाजपा उम्मीदवार राधामोहन सिंह के लिए वोट माँगे। यहाँ उन्होंने भाजपा सरकार की नीतियों को भी लोगों को बताया।

पीएम मोदी ने कहा, “मैं गरीब माँ का बेटा हूँ, इसलिए मुझे पता है कि महिलाओं को शौचालय ना होने पर कैसी असुविधा का सामना करना पड़ता था। पहले होने वाली समस्याओं से महिलाओं के स्वास्थ्य पर गंभीर प्रभाव पड़ते थे। कॉन्ग्रेस को गरीब की आवश्यकता की समझ नहीं थी। मोदी सरकार में गरीब के घर में बिजली पहुँची।”

उन्होंने कहा, “60 सालों में इन लोगों ने बड़े बड़े महल बना लिए, स्विस बैंक में अकाउंट खुल गए, आपके पास पेट भरने को अन्न नहीं था लेकिन इन लोगों की तिजोरियां नोटों से भरी रहती थी। गरीब परेशानी में था लेकिन इन लोगों को कोई फर्क नहीं था। देश में गरीब की पूछ तब हुई जब गरीब का यह बेटा खपने लगा।”

पीएम मोदी ने कहा कि जितना काम पिछले 10 वर्षों में हुआ है, उससे ज्यादा काम अगले पाँच वर्षों में होगा। उन्होंने कहा कि यह मोदी की गारंटी है। पीएम मोदी ने कहा कि मजबूत सरकार उन्हें गरीब बच्चों की जिन्दगी बनाने के लिए चाहिए। पीएम मोदी ने कहा कि वह बापू की जन्मभूमि से बापू की कर्मभूमि पर आए हैं।

पीएम मोदी ने कहा, “इस चुनाव में इन लोगों के पास मोदी को गाली देने सिवाय कोई मुद्दा नहीं है। कोई कह रहा है कि मोदी की कब्र खोदेंगे, कोई कह रहा है कि गाड़ देंगे, कॉन्ग्रेस के शहजादे मोदी की आँखों में आंसू देखना चाहते हैं। INDI वालों की इच्छा से अब देश नहीं चलता।”

राम मंदिर को लेकर भी पीएम मोदी ने यहाँ कॉन्ग्रेस और INDI गठबंधन पर हमला बोला। उन्होंने कहा कि मंदिर वालों ने इनके घर जाकर निमन्त्रण दिया और उन्होंने इसे ठुकरा दिया। उन्होंने लालू यादव पर हमला बोलते हुए कहा कि इन लोगो को जेल से बाहर आए व्यक्ति के घर खाना पकाने की फुर्सत है लेकिन मंदिर जाने की फुर्सत नहीं है। उन्होंने बिहार के जंगलराज को लेकर भी राजद को निशाने पर लिया और कहा कि राजद ने केवल कट्टा और अपहरण का उद्योग दिया।

पीएम मोदी ने आरोप लगाया कि अगर बाबासाहेब भीमराव अम्बेडकर नहीं होते तो जवाहर लाल नेहरू SC/ST को आरक्षण नहीं मिलने देते। उन्होंने कहा कि गाँधी परिवार के लोगों ने आरक्षण का विरोध किया और उनके पास एक ही वोटबैंक उनके पास बचा है।

3 दिन का उपवास रखकर जुबान फिसलने का प्रायश्वित करेंगे संबित पात्रा, कहा- मैं महाप्रभु जगन्नाथ का भक्त, अनजाने में हुई भूल पर माँग चुके हैं क्षमा

भाजपा नेता संबित पात्रा ने अपने एक हालिया बयान को लेकर माफ़ी माँगी है। इस बयान में उनके मुंह से निकल गया था कि भगवान जगन्नाथ प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी के भक्त हैं। उन्होंने निर्णय लिया है कि अपने बयान पर भगवान जगन्नाथ से माफ़ी माँगने के लिए वह तीन दिन का उपवास रखेंगे। उन्होंने कहा है कि उसने यह भूल अनजाने में हुई है।

संबित पात्रा ने मीडिया को बताया, “मेरा एक बयान विवादित हो गया, आज पीएम मोदी का पुरी में भव्य रोड शो हुआ है। रोड शो जब समाप्त हुआ, सफल हुआ, तब मैंने 15-16 मीडिया चैनल को बाईट दी। हर जगह मैंने यही बताया कि प्रधानमंत्री मोदी महाप्रभु जगन्नाथ के बड़े भक्त हैं। अहमदाबाद में बतौर मुख्यमंत्री और उससे पहले भी जगन्नाथ मंदिर में पूजा अर्चना की है। हर चैनल में मैंने यही बात कही। आखिर में जब एक चैनल को बाईट देते समय मैंने इसका उलटा कह दिया।”

पात्रा ने आगे बताया, “मैंने कह दिया कि भगवान् जगन्नाथ पीएम मोदी के भक्त हैं। ऐसा कभी नहीं हो सकता है, कोई मनुष्य सही हालत में ऐसा कोई नहीं कह सकता कि किसी मनुष्य के भक्त भगवान होंगे। मैंने यह बयान काफी शोरगुल और गर्मी के बीच दिया था। इस बयान से कुछ लोग जरूर आहत होंगे। मेरी मंशा बिलकुल भी वो नहीं थी। मुझे अनजाने में हुई इस गलती के लिए महाप्रभु से क्षमा याचना करनी चाहिए और मैंने निर्णय लिया है कि मैं तीन दिन का उपवास करूँगा।”

संबित पात्रा ने यह बयान सोमवार (20 मई, 2024) को पीएम मोदी के पुरी में किए गए रोड शो के बाद दिया था। इस पर ओडिशा के मुख्यमंत्री ने इस पर कहा था कि इससे करोड़ों लोगों की आस्था को ठेस पहुँची है। उन्हें इसे निंदा के लायक बताया था। संबित पात्रा ने उनकी इस बात का जवाब भी दिया था। संबित पात्रा ने इसका जवाब देते हुए अपनी गलती मानी थी और कहा था कि उनकी जुबान फिसल गई जिस कारण से उन्होंने भगवान जगन्नाथ को पीएम मोदी का भक्त बता दिया। उन्होंने इस को लेकर विवाद ना खड़ा करने की बात कही।

भाजपा के प्रवक्ता और बड़े नेता संबित पात्रा इस इस बार पुरी लोकसभा से चुनाव लड़ रहे हैं। वह 2019 में भी पुरी से ही चुनाव लड़े थे लेकिन हार गए थे। चुनाव में हार के बाद से लगातार वह जमीन पर मेहनत कर रहे थे। उनके समर्थन में ही पीएम मोदी ने यह रोड शो किया जिसके बाद गलती से यह बयान उन्होंने दे दिया।

मतदान के दिन लालू की बेटी रोहिणी आचार्य को बूथ से पड़ा था लौटना, अगली सुबह बिहार के छपरा में गिर गई 1 लाश: खूनी संघर्ष के बाद इंटरनेट बंद

बिहार के छपरा में चुनावी हिंसा में एक की मौत की खबर आ रही है। रिपोर्टों के अनुसार 21 मई 2024 को बीजेपी और राजद समर्थकों के बीच टकराव हुआ। फायरिंग हुई।

हिंसा की यह घटना उसी इलाके में हुई है, जहाँ के एक बूथ से रोहिणी आचार्य को मतदान के दिन (20 मई) विरोध के बाद लौटना पड़ा था। पूर्व मुख्यमंत्री लालू प्रसाद यादव की बेटी रोहिणी, सारण की सीट से राजद उम्मीदवार हैं। उनका मुकाबला बीजेपी के राजीव प्रताप रुडी से है।

छपरा में हुई हिंसा को लेकर आई जानकारी बताती है कि भाजपा और राजद समर्थकों ने न केवल हाथापाई की बल्कि काँच की बोतल से एक दूसरे पर हमला किया और फायरिंग की गई। घटना में एक की मौत हो गई जबकि दो लोग गंभीर रूप से घायल बताए जा रहे हैं। उन्हें पटना रेफर किया गया है।

मीडिया रिपोर्ट्स के अनुसार, पूरा मामाल भिखारी ठाकुर चौक का है। इस झड़प के बाद पूरे जिले को हाई अलर्ट कर दिया गया है। अब पुलिस चप्पे-चप्पे पर गश्त कर रही है। स्थिति नियंत्रित रखने के लिए पूरे जिले से 48 घंटे के लिए इंटरनेट बंद कर दिया गया है। वहीं शांति व्यवस्था बनाने के लिए काम हो रहा है। पुलिस एसपी गौरव मंगला ने घटना की जानकारी देते हुए शांति अपील की। साथ ही आरोपित को पकड़ने का आश्वासन दिया।

बता दें कि सारण की लोकसभा सीट की राजद प्रत्याशी एक बूथ पर सोमवार (20 मई 2024) शाम को पहुँचीं थी, लेकिन यहाँ किन्हीं कारणों से इनका विरोध हुआ और बाद में इन्हें बूथ से लौटना पड़ा। इस घटना की अगली सुबह ही मीडिया में खबर आई कि भाजपा और राजद के कार्यकर्ता आपस में भिड़ गए, जिसमें एक की मौत हो गई है वहीं दो बुरी तरह गोली लगने से घायल हैं।

मृतक की पहचान 26 साल के चंदन राय के तौर पर हुई है। वह तेलपा के रहने वाले थे। वहीं घायलों में शंभू राय के 30 वर्षीय पुत्र गुड्डू राय और विदेशी राय के 40 वर्षीय पुत्र मनोज राय भी शामिल हैं। इनका इलाज सदर अस्पताल में चल रहा था। बाद में इन्हें पीएमसीएच रेफर किया गया। इनमें मनोज के जहाँ कमर में गोली लगी हुई है तो वहीं गुड्डू के सिर में गोली लगी है। घटना के बाद पूर्व मंत्री भी इनसे मिलने पहुँचे।

भाई-बहन ने साथ देखा पोर्न, फिर सेक्स की कोशिश: 13 साल के भाई पर 15 साल की बहन से रेप का केस, प्रेग्नेंट होने पर खुला मामला

मुंबई के वासी इलाके में एक 13 साल के लड़के ने पोर्न देखने के बाद अपनी ही 15 साल की बहन को प्रेगनेंट कर दिया। घटना का खुलासा तब हुआ जब माता-पिता बेटी को लेकर वासी जनरल अस्पताल में गए ताकि उसका गर्भ गिरवा सकें। हालाँकि, अस्पताल ने इस संबंध में पहले पुलिस को सूचना दे दी और पूछताछ के बाद ये मामला खुला।

हिंदुस्तान टाइम्स की रिपोर्ट के अनुसार, नाबालिग लड़की ने अपने बयान में कहा कि उसने और उसके छोटे भाई ने साथ में पोर्न देखा था। इसके बाद उन्होंने सेक्स किया की कोशिश की। पुलिस अधिकारी के अनुसार जाँच में सामने आया कि लड़के और लड़की ने दिसंबर महीने में सेक्स करने की कोशिश की थी लेकिन दोनों असफल हो गए थे। उसके बाद जनवरी में लड़के ने अपनी बहन का जबरन रेप किया।

लड़की कहती है कि घटना के समय उसने अपने भाई को मना किया था। मगर उसने एक बार भी नहीं सुनी। पूरा मामला घरवालों के आगे तब खुला जब लड़की के पीरियड्स रुक गए। परिजन बच्ची का गर्भ गिरवाने के लिए उसे अस्पताल लेकर गए जहाँ से पुलिस को इसकी सूचना मिली।

इसके बाद सारी जाँच करके, लड़की का बयान लेकर पुलिस ने लड़के को आईपीसी की धारा 376 (बलात्कार) और 376 (2) (एन) (एक ही महिला से बार-बार बलात्कार करना) और यौन अपराधों से बच्चों की सुरक्षा (POCSO) की धारा 4, 6, 8 और 12 के तहत मामला दर्ज किया।

इस मामले में चूँकि दोनों ही लोग नाबालिग हैं इसलिए आगे की कार्रवाई बाल कल्याण आयोग तय करेगा, फिलहाल केस को खंडेश्वर पुलिस को स्थानांतरित कर दिया गया है।

इससे पहले बता दें कि एक ऐसा ही मामला उत्तर प्रदेश के गाजियाबाद से भी सामने आया था। वहाँ दो भाइयों ने मिलकर अपनी 14 वर्षीय बहन के साथ रेप किया था। बाद में ये मामला टीला मोड़ थाने में दर्ज हुआ था। शिकायत में यही बात सामने आई थी कि दोनों भाई पिछले एक साल से बहन का यौन शोषण कर रहे थे, जब वह गर्भवती हुई, तब ये मामला खुला। इनमें एक आरोपित 20 का था, जबकि दूसरा 23 का है।

पहले दोस्तों के साथ बार में की मौज-मस्ती, फिर बिना रजिस्ट्रेशन वाली पोर्शे से 2 इंजीनियर को कुचला: CCTV से खुलासा, पुणे के रईसजादे का बिल्डर बाप गिरफ्तार

महाराष्ट्र के पुणे में पोर्शे गाड़ी से दो सॉफ्टवेयर इंजीनियरों को कुचल कर मार देने वाले 17 वर्षीय लड़के ने गाड़ी चलाने से पहले शराब पी थी। उसके शराब पीने का एक कथित CCTV वीडियो भी सामने आया है। यह भी पता चला है कि उसकी पोर्शे गाड़ी का कोई रजिस्ट्रेशन नहीं करवाया गया था। लड़के को जहाँ 15 घंटे में जमानत मिल गई थी, वहीं उसके पिता को अब महाराष्ट्र पुलिस ने गिरफ्तार कर लिया है।

मीडिया रिपोर्ट्स के अनुसार, रविवार (18 मई, 2024) की रात को गाड़ी से दो लोगों को कुचल कर मारने से कुछ घंटे पहले 17 वर्षीय लड़के ने एक बार में बैठ कर शराब पी थी। यहाँ वह अपने दोस्तों के साथ बैठा था। यह CCTV वीडियो में भी दिखा है, वह इसके बाद ग्लास लेकर मेज से उठ जाता है। पुणे पुलिस कमिश्नर ने भी इस बात की पुष्टि की है कि लड़के ने दो लोगों को रौंदने से पहले शराब पी थी। यह घटना भी शराब के नशे में होने के कारण हुई।

यह भी सामने आया है कि जिस पोर्शे टायकान गाड़ी से लड़के ने दो लोगों को रौंद कर मार दिया, वह बिना रजिस्ट्रेशन के सड़कों पर दौड़ रही थी। यह गाड़ी मार्च से ही पुणे में बिना रजिस्ट्रेशन के चल रही थी। टाइम्स ऑफ़ इंडिया को पुणे के RTO संजीव भोर ने बताया, “कार को बेंगलुरु में एक डीलर के माध्यम से बुक किया गया था, जिसने इस साल मार्च में गाड़ी की डिलीवरी देने से पहले अस्थायी रजिस्ट्रेशन दिया था। इसका रजिस्ट्रेशन कराना मालिक की जिम्मेदारी थी।”

आगे उन्होंने बताया, “गाड़ी को पुणे RTO में लाया गया था और उसकी जाँच भी हुई थी। हालाँकि, गाड़ी के मालिक ने इसके रजिस्ट्रेशन के लिए जरूरी फीस नहीं जमा की। चूंकि इसकी फीस नहीं जमा थी, इसलिए इसका रजिस्ट्रेशन नम्बर नहीं दिया जा सका।” यह कानून का भी उल्लंघन है। अधिकांश मामलों में गाड़ी खरीदने के साथ जबकि कुछ मामलों में गाड़ी खरीदने के कुछ दिनों के भीतर नया नम्बर मिल जाता है, जिसे सही ढंग से गाड़ी पर लगाना होता है। ऐसा ना करने पर चालान और गाड़ी सीज होने की कार्रवाई हो सकती है।

लड़के को जहाँ इस मामले में कुछ ही घंटे बाद जमानत मिल गई थी, वहीं उसके पिता को इस मामले में गिरफ्तार कर लिया गया है। वह घटना के बाद से फरार था। उसे महाराष्ट्र पुलिस की टीमें तलाश रहीं थी। लड़के के बिल्डर पिता को महाराष्ट्र के ही छत्रपति संभाजी नगर से गिरफ्तार किया गया है। उसकी गिरफ्तारी सोमवार (20 मई, 2024) को हुई है। उसके पिता को गिरफ्तार करके पुणे लाया गया है।

गौरतलब है कि 18 मई की रात पुणे के कल्याणी नगर इलाके में एक अनियंत्रित पोर्शे कार ने बाइक पर जा रहे एक महिला और एक पुरुष को कुचल कर मार दिया था। यह दोनों सॉफ्टवेयर इंजीनियर थे। इनकी पहचान अनीस दूधिया और अश्विनी कोस्टा के रूप में की हुई थी। पोर्शे गाड़ी इस दुर्घटना के बाद क्षतिग्रस्त हो गई थी और 17 वर्षीय लड़के को पकड़ लिया गया था। उसे जुवेनाइल जस्टिस बोर्ड ने 15 घंटे के भीतर इस शर्त पर जमानत दे दी थी कि वह एक 300 शब्द का निबन्ध ट्रैफिक समस्या पर लिखेगा।

कानून की पढ़ाई करती थी दलित लड़की, अमीरुल इस्लाम ने घर में घुस किया रेप फिर मार डाला: मौत की सजा पर हाई कोर्ट की मुहर, असम से मजदूरी करने आया था केरल

केरल हाई कोर्ट ने दलित छात्रा की रेप के बाद हत्या करने वाले अमीरुल इस्लाम को निचली अदालत द्वारा सुनाई गई मौत की सजा बरकरार रखी है। 28 अप्रैल 2016 की इस घटना में अमीरुल को लगभग 1 साल बाद जिला अदालत ने मृत्युदंड दिया था। अमीरुल ने इस सजा के खिलाफ हाई कोर्ट में अपील की थी। सोमवार (20 मई 2024) को उच्च न्यायालय ने अमीरुल की याचिका ख़ारिज कर दी।

मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक मामले की सुनवाई जस्टिस पी बी सुरेश कुमार और जस्टिस एस मानू की डिवीजन बेंच में हुई। बचाव पक्ष के वकील ने अमीरुल इस्लाम को बेगुनाह बताया और निचली अदालत से मिली सजा को निरस्त करने की अपील की। वहीं राज्य सरकार की तरफ से पेश अधिवक्ता ने अमीरुल की करतूत को ‘रेयरेस्ट ऑफ़ रेयर’ बताते हुए निचली अदालत द्वारा दी गई मौत की सजा को बरकरार रखने की दलील दी। दोनों पक्षों को सुनने के बाद हाई कोर्ट ने अमीरुल की अपील ख़ारिज कर दी।

क्या है मामला?

यह मामला 28 अप्रैल 2016 का है। एर्नाकुलम जिले में कानून की पढ़ाई (LLB) कर रही एक 30 वर्षीय दलित छात्रा का उसके ही घर में रेप हुआ था। रेप के बाद पीड़िता की बेरहमी से हत्या कर दी गई थी। यह घटना कुरुप्पमपडी के पास पेरुम्बावूर की थी। पुलिस ने जाँच शुरू की तो असम से केरल में मजदूरी करने गए अमीरुल इस्लाम का नाम सामने आया। घटना के लगभग 49 दिनों के बाद अमीरुल इस्लाम को गिरफ्तार कर लिया गया। उस पर IPC की धारा 449, 342, 302, 376 और 376 (ए) के तहत कार्रवाई की गई थी।

पुलिस ने अमीरुल इस्लाम के खिलाफ 17 सितंबर 2016 को 1500 पेज की चार्जशीट दाखिल कर दी थी। अमीरुल की गिरफ्तारी फोन की लोकेशन, कॉल रिकार्डिंग व DNA जाँच के आधार पर की गई थी। अमीरुल ने छात्रा को अकेला देख कर घर में प्रवेश किया था। उसने छात्रा से रेप किया और भेद खुल जाने के डर से धारदार हथियार से उसे मार डाला था। छात्रा का बलात्कार और उसकी हत्या करने के बाद अमीरुल ने फ़ौरन ही केरल छोड़ दिया था।

अमीरुल इस्लाम को केरल पुलिस ने तमिलनाडु के कांचीपुरम से गिरफ्तार किया था। उसकी गिरफ्तारी के लिए लगे 100 से अधिक पुलिसकर्मियों ने 1500 से ज्यादा लोगों से पूछताछ की थी। एर्नाकुलम की जिला अदालत ने साल 2017 में इस केस में अमीरुल इस्लाम को मौत की सजा सुनाई थी। उस पर 25 हजार रुपए का जुर्माना भी लगाया गया था। जज ने इस घटना को रेयरेस्ट ऑफ़ रेयर करार दिया था। अमीरुल को अलग-अलग धाराओं में अलग-अलग सजाएँ मिली हैं। ये सभी सजाएँ एक साथ चलेंगी।