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‘सारी बहनें कैरेक्टरलेस हैं, ऐसे ही घूमती रहती हैं’: कामरान-इमरान की मामी-दादी ने पीड़ित हिन्दू लड़की को ही बताया ‘बेशर्म’, अपहरण के बाद निकाह की थी तैयारी

छत्तीसगढ़ के बिलासपुर में 28 फरवरी, 2024 को पुलिस ने 13 साल की नाबालिग हिन्दू लड़की के अपहरण और रेप केस में इमरान और उसके भाई कामरान को गिरफ्तार किया था। अब आरोपित की रिश्तेदार मीडिया के सामने आई हैं जिन्होंने इमरान की करतूत को सही ठहराने की कोशिश की है। इमरान के रिश्तेदारों ने नाबालिग पीड़िता के साथ उसकी बहनों को भी चरित्रहीन साबित करने का प्रयास किया है। वहीं दूसरी तरफ पीड़िता के पिता को केस वापस न लेने पर जान से मार डालने की धमकी भी दी जा रही है।

‘ऑर्गेनाइजर’ की पत्रकार शुभी विश्वकर्मा ने बिलासपुर जा कर आरोपित और पीड़ित परिवारों से मुलाक़ात की। इमरान के रिश्तेदार के तौर पर सीमा खातून मिलीं। हिजाब वाली सीमा खुद को इमरान की दूर के रिश्ते में मामी बता रहीं थीं। सीमा खातून ने दावा किया है कि आरोपित और पीड़िता का अफेयर था। उन्होंने पीड़िता के साथ इमरान को भी नासमझ बता डाला। सीमा का यह भी दावा है कि इमरान उनके घर में रहा था लेकिन उनको दोनों के रिश्ते के बारे में कुछ नहीं पता था। बकौल सीमा, उन्हें ये सब पसंद नहीं है इसलिए अगर उनको पता होता तो वो एक्शन लेतीं।

सीमा खातून ने आगे कहा कि हिन्दू-मुस्लिम का मसला था इसलिए पता होता तो वो लोग विरोध करते। FIR में इमरान पर लगाए गए आरोपों को झूठा बताते हुए इमरान के रिश्तेदारों ने दावा किया कि लड़की के पापा और चाचा मिल कर आरोपित को फँसाने की साजिश रच रहे हैं। सीमा ने आगे कहा, “वो लड़कियाँ जितनी भी सारी बहनें हैं, सब कैरेक्टरलेस (चरित्रहीन) हैं। आज इस लड़के से, कल उस लड़के से।” सीमा ने दावा किया कि ये सब वो अपनी आँखों से देखती हैं। वहीं सीमा के साथ बैठी इमरान की दादी ने पीड़िता को ‘बेशर्म’ बताते हुए कहा, “अभी भी वो लड़की दिन-रात ऐसे ही घूमती-फिरती है”।

आरोपित के परिवार से मिलने के बाद शुभी पीड़िता के पिता से मिलीं। उन्होंने वो तमाम बातें एक बार फिर से दोहराया जो FIR में दर्ज है। उन्होंने बताया कि पुलिस में केस दर्ज करवाने के बाद आरोपित उनकी बेटी को स्टेशन पर छोड़ कर भाग निकला था। अपनी बेटी को नाबालिग और नासमझ बताते हुए पीड़िता के पिता का दावा है कि इमरान उनकी बेटी को बेचना चाहता था। पीड़िता के पिता का दावा है कि आरोपित के परिजनों द्वारा उनको केस वापस लेने के लिए कहा जा रहा है। ऐसा न करने पर पूरे परिवार को खत्म कर देने की धमकी भी दी जा रही है।

‘ऑर्गेनाइजर’ की ग्राउंड रिपोर्ट में यह बात भी निकल कर सामने आई कि जिस गाँव के आरोपित और पीड़ित हैं वहाँ मजारें बनी हुई हैं। कई अवैध निर्माण सरकारी सम्पत्तियों पर कर लिए गए हैं। इसके अलावा बाहर से आए कई लोगों ने मकानों पर भी कब्ज़ा जमा लिया है।

बताते चलें कि 12 फरवरी, 2024 को इमरान ने अपने भाई कामरान की मदद से बिलासपुर में 13 साल की नाबालिग पीड़िता का अपहरण किया था। इमरान एक मस्जिद में काम करता था। पीड़िता को उत्तर प्रदेश के हमीरपुर ला कर रेप किया गया। यहाँ पीड़िता को इस्लाम कबूल करवा के निकाह की भी तैयारी थी। हालाँकि, पुलिस के दबाव के चलते इमरान पीड़िता को वापस उसके घर जाने वाली ट्रेन पर बिठा कर फरार हो गया था। 28 फरवरी को इमरान और कामरान को पुलिस ने दबोच लिया था।

कनाडा, अमेरिका, अरब… AAP ने करोड़ों का लिया चंदा, लेकिन देने वालों की पहचान छिपा ली: ED का खुलासा, खालिस्तानी आतंकी पन्नू ने भी फंड देने का किया था दावा

एक रिपोर्ट में खुलासा हुआ है कि आम आदमी पार्टी (AAP) ने विदेश से लिए गए करोड़ों के फंड के स्रोत की पहचान छुपाई हैं। प्रवर्तन निदेशालय (ED) की एक रिपोर्ट में बताया गया है कि AAP को कनाडा, अमेरिका, न्यूजीलैंड और मध्यपूर्व के देशों से यह पैसा मिला है। विदेशी फंडिंग को AAP तक पहुँचाने के लिए कई गड़बड़ियाँ की गईं।

मीडिया रिपोर्ट्स के अनुसार, AAP को 2014 से 2022 के बीच ₹7.08 करोड़ की विदेशी फंडिंग मिली है। यह पैसा विदेशी फंडिंग कानून (FCRA) के नियमों का उल्लंघन करके ली गई है। ED ने इस फंडिंग को लेकर एक रिपोर्ट तैयार की है, इसे गृह मंत्रालय को भेजा गया है। इसके कुछ हिस्से बाहर आए हैं।

रिपोर्ट में बताया गया है कि AAP को यह फंडिंग देने वाले अलग-अलग लोगों ने एक ही पासपोर्ट नम्बर, एक ही मोबाइल नम्बर और एक ही क्रेडिट कार्ड की जानकारियाँ देते हुए यह धनराशि दी। यह सारी फंडिंग कनाडा, न्यूजीलैंड, USA और मध्य पूर्व के देशों से आई है।

इस अवैध फंडिंग के एक उदाहरण को भी रिपोर्ट में बताया गया है। विदेशों में रहने वाले 155 लोगों ने 55 पासपोर्ट का इस्तेमाल करके 1.04 करोड़ की धनराशि AAP को दी। ऐसा 404 मौकों पर किया गया। इस रिपोर्ट में यह भी आरोप लगाया गया कि AAP नेता दुर्गेश पाठक ने कनाडा में 2016 में AAP के लिए इकट्ठा किए गए फंड को अपने इस्तेमाल में लिया।

ED ने इस पूरी गड़बड़ी के सबूत में AAP पदाधिकारियों के बीच ईमेल में हुई बातचीत का भी ब्यौरा दिया है। यह बातचीत कुमार विश्वास, कपिल भारद्वाज, दुर्गेश पाठक और अनिकेत सक्सेना के बीच हुई। यह सभी तब AAP में महत्वपूर्ण पदों पर थे। इसके अलावा भी फंडिंग को लेकर कई खुलासे ED की इस रिपोर्ट में किए गए हैं।

आतंकी पन्नू भी कह चुका है AAP को फंडिंग की बात

खालिस्तानी आतंकी गुरपतवंत सिंह पन्नू ने मार्च, 2024 में आरोप लगाया था कि भगवंत मान और केजरीवाल ने आम आदमी पार्टी के लिए खालिस्तानियों से मोटी रकम ली है। पन्नू ने बताया था, “2014-2022 के बीच खालिस्तानियों ने AAP की सरकार बनाने के लिए 16 मिलियन डॉलर (₹133 करोड़) की मदद दी।”

पिज्जा खिलाया, सुलाया, मर्सिडीज से आए परिजनों को अंदर बुलाया… इंजीनियरों को कुचलने वाले रईसजादे को पुणे पुलिस ने भी दिया VIP ट्रीटमेंट, गवाहों को भी धमकाया

पुणे में एक बिल्डर के नाबालिग बेटे ने पब में दारू पार्टी करने के बाद पोर्शे की करोड़ों की कार लेकर एक युवक और एक युवती को कुचल कर मार डाला। इसके बाद इस मामले में कुछ ऐसी घटनाएँ हुईं जिनसे पुलिस और न्यायपालिका में लोगों का भरोसा डिग रहा है। आरोपित को इस घटना पर लेख लिखने के लिए कह कर जमानत दे दी गई। पुलिस ने कमजोर धारा लगाई। अब गवाहों को ही उलटा धमकाए जाने की बात सामने आई है जो व्यवस्था पर सवाल खड़े कर रही है।

‘Punekar News’ ने अपनी खबर में बताया है कि जहाँ आरोपित के साथ VIP अतिथि जैसा व्यवहार किया गया, वहीं मृतकों की तरफ से जो लोग आए थे उन्हें पुलिस के सहयोग के लिए भी तरसना पड़ा। मृतक IT इंजीनियरों अश्विनी कोस्टा और अनीस अवधिया की उम्र मात्र 24 वर्ष थी। उन्हें शास्त्रीनगर के सह्याद्रि हॉस्पिटल ले जाया गया, जहाँ पता चला कि मौके पर ही उनकी मौत हो गई थी। वहाँ मौजूद लोगों ने ड्राइवर की सीट से नाबालिग को निकाला और उसकी पिटाई की।

यरवदा पुलिस थाने ले जाए जाने के बाद पता चला कि वो नाबालिग है। केशवनगर में सॉफ्टवेयर इंजीनियर और अनीस अवधिया के कजन भाई पारस सोनी ने बताया कि तड़के सुबह फोन कॉल पाने के बाद वो पुलिस थाने की तरफ भागे, जहाँ उन्होंने देखा कि गिरफ्तार नाबालिग को VIP ट्रीटमेंट मिल रहा है। उसे पिज्जा खिलाया जा रहा था, साथ ही आराम से सुलाया भी गया था। उन्होंने इस मामले में एक स्थानीय विधायक के शामिल होने के आरोप लगाए।

पारस सोनी ने बताया कि जब उन्होंने इस मामले में FIR दर्ज कर के संदिग्धों का मेडिकल परीक्षण की माँग की, पुलिस वाले बिना ज़रूरत के गुस्सा हो गए और उलटा मृतकों के परिजनों पर ही केस की धमकी देने लगे। जब मृतकों के दोस्त बतौर गवाह सामने आए तो पुलिस ने उन सबको हिरासत में लेने की धमकी देते हुए कहा कि जाँच कराई जाएगी कि उन्होंने शराब पी रखी थी या नहीं। पारस सोनी का कहना है कि आरोपित लड़के की रसूखदार पृष्ठभूमि से पुलिस प्रभावित दिखी।

उन्होंने कहा, “संयोग से भीड़ ने लड़के को पकड़ लिया। गवाहों ने उसकी पहचान की पुष्टि की। इसके बावजूद पुलिस ने स्थानीय MLA के साथ मिल कर किसी और को ड्राइवर बताने की साजिश रची ताकि मामले को कवर-अप किया जा सके। हमने मीडिया और अपने संपर्कों को सब कुछ बताने की चेतावनी दी। चूँकि लड़के को पीटा गया था, हमने उसे तुरंत पहचान लिया। हमारे पास वीडियो भी था। अंततः हम मीडिया के पास मदद के लिए पहुँचे। आखिरकार सुबह के 11 बजे पुलिस लड़के को मेडिकल परीक्षण के लिए ले गई।”

पारस सोनी ने बताया कि इस दौरान वो लोग परिजनों को ढाँढस बँधाने, मृतकों के शवों को प्राप्त करने और एम्बुलेंस की व्यवस्था वगैरह जैसे कार्यों में व्यस्त थे। मराठी न आने के कारण परिजनों को परेशानी हुई सो अलग। आरोपित को पुलिस अर्टिगा कार से नाबालिगों वाले कोर्ट में लेकर गई, साथ में 2 मर्सिडीज कार में 3 वकील थे, जिनमें एक महिला वकील थे। वहीं जिस विधायक के बारे में पारस सोनी बता रहे थे, वो NCP (अजीत पवार गुट) का हिस्सा हैं।

वडगाँव विधायक सुनील टिंगरे ने कहा कि लड़के के पिता के साथ उनके व्यापारिक रिश्ते हैं और वो परिवार उनके ही विधानसभा क्षेत्र में रहता है। उन्होंने कहा कि इसी कारण उनसे मदद माँगी गई थी और वो मदद करने पुलिस थाने पहुँचे थे, लेकिन उन्होंने इस केस में कोई हस्तक्षेप नहीं किया। जहाँ मृतकों के परिजन थाने के बाहर बयान देने के लिए इंतजार कर रहे थे, मर्सिडीज से आए 17 वर्षीय आरोपित के परिजनों को पुलिस थाने के अंदर लेकर गई।

शादी का झाँसा दे भोपाल से केरल ले गया, इस्लाम कबूलने का बनाने लगा दबाव: FIR के बाद पीड़िता को वापस भेजा, बैग में मिला- ‘मुसलमान कैसे बनें’ किताब

मध्य प्रदेश की राजधानी भोपाल की एक हिंदू युवती को शादी का झाँसा दे बादशाह खान केरल ले गया। कथित तौर पर वहाँ इस्लामी धर्मांतरण और कलमा पढ़ने का दबाव बनाने लगा। पुलिस का दबाव बढ़ने पर बादशाह ने जब युवती को भोपाल भेजा तो उसके बैग से ‘मुसलमान कैसे बनें’ जैसी किताबें मिली। बादशाह खान को भी गिरफ्तार कर लिया गया है।

20 वर्षीय पीड़िता ने 18 मई 2024 को थाने पहुँच कर अपना बयान दर्ज करवाया। मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक पीड़िता भोपाल के अवधपुरी थाना क्षेत्र की रहने वाली है। शिकायत के मुताबिक कुछ समय पहले पीड़िता भोपाल के अन्ना नगर इलाके में रहती थी। यहीं बादशाह नाम का युवक उसका पड़ोसी था। बादशाह और पीड़िता में जान-पहचान हुई जो बाद में प्यार में बदल गई। कुछ दिनों के बाद लड़की का परिवार अवधपुरी क्षेत्र में शिफ्ट हो गया। यहाँ भी बादशाह लड़की से मिलने आया करता था। पीड़िता गरीब परिवार से है। उसके पिता एक छोटी से दुकान से परिवार का गुजारा चलाते हैं।

14 मई 2024 (मंगलवार) को बादशाह पीड़िता को ले कर रफूचक्कर हो गया। बताया जा रहा है कि वो लड़की को केरल के कोझिकोड ले गया। केरल जाने के लिए आरोपित ने पीड़िता के साथ पहले कैब बुक की फिर 5 अलग-अलग ट्रेनें पकड़ीं। इधर परिजनों को जब युवती का कोई सुराग नहीं मिला तो उन्होंने 17 मई को पुलिस में गुमशुदगी की शिकायत दर्ज करवाई। पुलिस ने केस दर्ज कर युवती की तलाश शुरू कर दी। मामले में विश्व हिन्दू परिषद ने भी पुलिस से मिल कर कड़ी कार्रवाई की माँग की थी।

पुलिस को एक्टिव देख कर बादशाह खान ने फ्लाइट बुक की और पीड़िता को केरल से वापस भोपाल भेज दिया। शनिवार को पीड़िता ने पुलिस में अपने बयान दर्ज करवाए। बयान में पीड़िता ने बताया कि केरल में बादशाह उस पर इस्लाम कबूलने का दबाव बनाने लगा था। मौका पा कर पीड़िता ने अपने परिजनों को फोन पर सारी बात बता दी थी। पीड़िता के परिजनों का भी आरोप है कि बादशाह लड़की को जबरन कलमा पढ़ने के लिए भी मजबूर किया करता था। पीड़िता के बैग में ‘मुसलमान कैसे बनें’ जैसी किताबें मिली है। साथ ही कुछ पन्नों पर कलमा भी लिखा मिला है।

पुलिस ने आरोपित बादशाह को दबिश दे कर गिरफ्तार कर लिया है। पीड़िता की काउंसलिंग करवाई जा रही है। आरोपित झुग्गियों में रहता है, ऐसे में उसके केरल से फ्लाइट टिकट से आने आदि के खर्च के स्रोत को ले कर भी कई सवाल खड़े हो रहे हैं। बादशाह पर IPC की धारा 366 और मध्य प्रदेश धर्मी स्वतंत्रता अधिनियम 2021 के सेक्शन 3/5 के तहत कार्रवाई की गई है।

₹200 की चोरी पर 1 साल की जेल, 2 इंजीनियरों को कुचलने पर रईसजादे को बेल, कहा- हादसे पर लिखो लेख: यह न्याय है या पीड़ित परिवारों के जख्म पर नमक?

महाराष्ट्र के पुणे में पोर्शे लक्जरी कार की टक्कर से एक युवक और एक युवती की मौत हो गई। दोनों ने इस हादसे से कुछ मिनट पहले तक सोचा भी नहीं होगा कि अनीस अवधिया और अश्विनी कोस्टा, दोनों ही मृतक सॉफ्टवेयर इंजीनियर थे। घटना कल्याणी नगर क्षेत्र की है। असली खबर ये है कि भद्दे तरीके से कार चलाने वाला एक नाबालिग था। इससे भी बड़ी बात ये है कि उसने उस समय शराब पी रखी थी। इससे भी बड़ी बात ये है कि उसके बिल्डर पिता ने उसके हाथ में 3 करोड़ रुपए की कार दे दी। इन सबसे बड़ी खबर ये है कि कुछ ही मिनटों बाद वो जमानत पर रिहा हो गया।

एक बार में पार्टी के बाद उक्त नाबालिग लड़का लौट रहा था। उसके साथ उसके दोस्तों का एक समूह था। हालाँकि, मौके पर आक्रोशित लोगों ने उसकी धुनाई तो की लेकिन पुलिस और न्यायपालिका उसका कुछ नहीं बिगाड़ पाई। घटना का वीडियो भी सामने आया। नाबालिग की उम्र मात्र 17 वर्ष है। दोनों सॉफ्टवेयर इंजीनियर बाइक पर सवार थे, तभी पोर्शे ने पीछे से टक्कर मारी। रात के ढाई बजे हुई इस घटना के दौरान कार इसके बाद एक अन्य गाड़ी से टकराई, फिर पार्किंग में खड़ी एक बाइक इसकी जद में आ गई।

पुणे में नाबालिग ने पोर्शे से कुचल कर युवक-युवती को मार डाला

मामला यरवदा पुलिस थाना क्षेत्र का है। अनीश अवधिया और अश्विनी कोस्टा की उम्र 24 वर्ष थी। मौके पर ही इन दोनों की मौत हो गई। दोनों ने मध्य प्रदेश के जबलपुर के रहने वाले थे और उन्होंने पुणे में कम्प्यूटर साइंस से इंजीनियरिंग की थी। इसके बाद उनकी नौकरी भी लग गई थी। ये दोनों एक रेस्टॉरेंट में पार्टी के बाद लौट रहे थे, उनके साथ अन्य बाइकों से उनके दोस्त थे। कार ने इन दोनों को कुचलने के बाद सड़क के किनारे बनी रेलिंग को भी क्षतिग्रस्त कर दिया।

नाबालिग के खिलाफ लापरवाही और उतावलेपन के साथ ड्राइविंग का मामला दर्ज किया गया। साथ ही उस पर अन्य लोगों के जीवन को खतरे में डालने और नुकसान पहुँचाने का मामला भी दरक किया गया। नाबालिग को ‘जुवेलाइन जस्टिस बोर्ड (JJB)’ के समक्ष पेश किया गया। जहाँ कुछ मामूली शर्तों के साथ उसे तुरंत ही रिहा कर दिया गया। हालाँकि, किशोर के पिता के खिलाफ उसे कार चलाने की अनुमति देने का मामला दर्ज किया गया है।

उक्त बिल्डर ने पुलिस थाने में मौजूदगी दर्ज कराने तक की जहमत नहीं उठाई, बल्कि अपने भाइयों को भेजा। इस परिवार को कई परियोजनाओं से जुड़े होने के कारण जाना जाता है। रविवार (19 मई, 2024) को तड़के सुबह हुई इस घटना को लेकर ईस्ट एवेन्यू स्थित मुंधवा पब के खिलाफ भी नाबालिगों को शराब परोसने का मामला दर्ज किया गया है। नाबालिग के साथ उसके 2 दोस्त उस कार में मौजूद थे, जो शहर के एक नामी स्कूल में पढ़ते हैं।

तुरंत मिला जमानत: न्यायपालिका पर उठ रहे हैं सवाल

अब आइए, बताते हैं कि नाबालिग को जमानत दिए जाने की शर्तें क्या थीं। ये ‘भारी-भड़कम’ शर्तें थीं – इस दुर्घटना पर एक लेख लिखो, 15 दिन के लिए ट्रैफिक पुलिस के साथ काम करो, शराब की लत छोड़ने के लिए डॉक्टर की मदद लो, और मनोचिकित्सक से काउंसिलिंग लेकर उसकी रिपोर्ट सबमिट करो। ये थी 2 युवाओं के हत्यारे एक शराबी ड्राइवर को मिली ‘कड़ी सज़ा’। इसके बाद सवाल खड़े हो गए हैं कि क्या न्यायपालिका को पूरी तरह से सुधार की आवश्यकता है?

परिस्थिति को थोड़ा पलट कर देखिए। क्या मृतकों में अगर कोई रसूखदार परिवार का होता और ये दुर्घटना किसी ग़रीब ट्रक ड्राइवर से हुई होती तो क्या उससे भी लेख लिखवा कर उसे छोड़ दिया जाता? आजकल 17 वर्ष की उम्र में लड़के-लड़कियाँ पब में पार्टी कर रहे हैं, बाइक-कार चला रहे हैं, सामान्य वयस्क की तरह रह रहे हैं और यहाँ तक कि शारीरिक संबंध भी बना रहे हैं, ऐसी स्थिति में ऐसे अपराध को अंजाम देने वाले के साथ नर्सरी के बच्चे की तरह व्यवहार करना कहाँ तक उचित है?

चूँकि नाबालिग का पिता रसूखदार है, इसीलिए उसने थाने में आने तक की जहमत नहीं उठाई भले ही उसके खिलाफ FIR ही क्यों न दर्ज हो गई हो। इसका कारण ये है कि न्यायपालिका को नचाने के हथियार इनलोगों के पास हैं। बड़े वकील हैं, पैसा है, प्रभाव है, संपर्क है और फैला हुआ कारोबार भी है। जो 2 लोग इस घटना में मारे गए, उनके परिवारों के बारे में सोचिए। पढ़ा-लिखा कर इंजीनियर बनाया, अब शादी-विवाह वगैरह किए जाते, उन परिवारों के सारे अरमान मिट्टी में मिल गए।

करोड़ों रुपए की कार मिल जाने का ये अर्थ नहीं है कि आपको 2 लोगों को कुचल कर मार डालने और उसके बाद बिना किसी सज़ा के रिहा हो जाने का लाइसेंस मिल जाता है। 12वीं में पास होने के बाद दारू पार्टी कर के 2 लोगों को मार डालने वाले नाबालिग के पिता ने तुरंत प्रशांत पाटिल और आबिद मुलानी जैसे वकीलों को खड़ा कर दिया अपने बेटे के पक्ष में। हालाँकि, पुलिस इस पक्ष में है कि नाबालिग को इस मामले में बालिग़ की तरह ट्रीट किया जाए।

रसूखदार और अमीर परिवारों के लिए अलग हैं नियम-कानून?

इसे एक जघन्य वारदात बताते हुए पुलिस ने नाबालिग की कस्टडी की भी माँग की है। जमानत के इस आदेश के खिलाफ अब पुलिस सेशन कोर्ट जाएगी। कार में नंबर प्लेट तक नहीं थी। ACP स्तर के अधिकारी को मामले की जाँच सौंपी गई है। रोड सेफ्टी के लिए काम करने वाले NGO के संचालक अनुराग कुलश्रेष्ठ ने कहा कि हम एक अनुशासनहीन समाज में रह रहे हैं जहाँ सड़क के कानूनों के लिए कोई जगह नहीं है। उन्होंने कहा कि पुणे में ट्रैफिक पुलिस की स्थिति ये है कि हेलमेट को लेकर चेकिंग अभियान शुरू किया गया तो कई राजनीतिक दल इसके विरोध में उतर गए।

प्रशांत पाटिल बॉम्बे हाईकोर्ट के अधिवक्ता हैं। कॉर्पोरेट और बैंकिंग धोखाधड़ी से लेकर घरेलू व अंतरराष्ट्रीय मध्यस्थता तक के मामलों को देखते रहे हैं। बतौर क्रिमिनल लॉयर भी काम कर चुके हैं। सावित्रीबाई फुले यूनिवर्सिटी से संबद्ध पुणे स्थित पद्मश्री DY पाटिल कॉलेज ऑफ लॉ और मुंबई यूनिवर्सिटी से उन्होंने कानून की पढ़ाई की है। वहीं आबिद मुलानी भी बड़े वकीलों में से एक हैं। क्या कोई साधारण व्यक्ति नामी वकीलों को हायर करने की सोच भी सकता है?

न्यायपालिका में सुधार की बातें इसीलिए भी की जा रही हैं, क्योंकि इसका दोहरा रवैया इस मामले में सामने आता रहता है। दिल्ली में एक लड़के को 200 रुपए की चोरी के आरोप में 1 साल जेल की सज़ा काटनी पड़ी। भारत की जेलों में 9681 ऐसे बच्चे रह रहे हैं, जिन्हें वयस्कों की जेलों में डाल दिया गया है। यहाँ तक कि लड़कियाँ भी इनमें शामिल हैं। सुप्रीम कोर्ट के जज इसके लिए राज्यों को दोषी ठहराते हैं। लेकिन, जब आरोपित रसूखदार और अमीर परिवार का हो तो भेदभाव क्यों?

क्या कहते हैं अधिवक्ता

ये तो एक तरह से उन दोनों मृतकों के परिवारों के जख्म पर मरहम लगाने की बजाए नमक छिड़कने जैसा हुआ। हमने इसके कानूनी पहलुओं को समझने के लिए सुप्रीम कोर्ट के अधिवक्ता शशांक शेखर झा से बातचीत की। उन्होंने कहा कि भारत में 18 वर्ष से कम उम्र के बच्चों की संलिप्तता वाले मामलों में 3 तरह के केस लगाए जाते हैं – Petty (छोटे), Serious (गंभीर) और Heinous (घृणित)। उन्होंने बताया कि गंभीर मामलों में 7 साल तक की सज़ा होती है, छोटे वाले में 2 साल तक की और 7 साल से ऊपर सज़ा वाली को ‘Heinous’ की श्रेणी में डाला जाता है।

उन्होंने समझाते हुए कहा कि मायने ये रखता है कि FIR में जो धाराएँ लगाई गई हैं वो किस कैटेगरी में आती हैं इन तीनों में से। उन्होंने बताया कि 2015 में एक मूवमेंट के बाद कानून में संशोधन हुआ और JJD (जुवेनाइल जस्टिस बोर्ड) को ये अधिकार दिया गया कि अगर नाबालिग की उम्र 16-18 है तो गंभीर मामलों में उस पर बालिग़ की तरह मुकदमा चलाया जाए। उन्होंने बताया कि ऐसे मामलों में 304 लगाया जाता है, जिसमें सज़ा 10 साल तक की है जबकि 304A में 2 साल तक की सज़ा मिल सकती है।

बताते चलें कि पुणे वाले मामले में पुलिस ने 304A धारा लगाई है। उन्होंने बताया कि लापरवाही से खतरनाक ड्राइविंग के मामले में 304 लगाया जाता है, जब मामला गंभीर हो। उन्होंने उदाहरण देकर समझाया कि 304A तब लगाया जा सकता है जब किसी ने ट्रैफिक लाइट जंप किया और किसी गाड़ी की चपेट में आने के कारण उसकी मौत हो गई। उन्होंने बताया कि कैसे मीडिया में चल रहा है कि FIR दर्ज करने में कोताही बरती जा रही थी और गवाहों से ही सही व्यवहार नहीं किया गया।

पालघर में साधुओं की मॉब लिंचिंग के मामले में उन्हें न्याय दिलाने में सक्रिय रहे शशांक शेखर झा ने पुणे वाले मामले को लेकर पुलिस की मंशा पर भी सवाल उठाए और पूछा कि अगर वो चाहती है कि नाबालिग को बालिग की तरह ट्रीट किया जाए तो उस पर कमजोर धाराएँ क्यों लगाई गईं? साथ ही उन्होंने पूछा कि जज ने तुरंत जमानत कैसे दे दी? उन्होंने कहा कि इस मामले को लेकर गलत सन्देश गया है। उन्होंने ध्यान दिलाया कि लोगों ने आरोपित को पकड़ लेने के बावजूद उसे पुलिस को सौंप दिया और न्याय व्यवस्था पर भरोसा जताया, कहीं उनका ये भरोसा भविष्य में खत्म हुआ तो ये लोकतंत्र के लिए ये ठीक नहीं होगा।

अहमदाबाद एयरपोर्ट पर पकड़े गए 4 ISIS आतंकी, श्रीलंका से आए थे: पाकिस्तान से हुक्म का कर रहे थे इंतजार

गुजरात एंटी टेरिरिस्ट स्क्वाड (ATS) ने गुजरात के सरदार वल्लभ भाई पटेल अंतरराष्ट्रीय एयरपोर्ट अहमदाबाद से इस्लामिक स्टेट (ISIS) के 4 आतंकवादी पकड़े हैं। यह सभी पड़ोसी देश श्रीलंका से भारत आए थे। इन्हें सोमवार (20 मई, 2024) को पकड़ा गया।

जानकारी के अनुसार, यह चारों ISIS के आतंकवादी अहमदाबाद एयरपोर्ट पर किसी का इंतजार कर रहे थे। इन्हें गुजरात ATS ने केन्द्रीय सुरक्षा बलों से मिले इनपुट के बाद गिरफ्तार किया। बताया जा रहा है कि यह चारों आतंकी किसी पाकिस्तानी हैंडलर के दिशानिर्देश पर काम कर रहे थे।

यह भी कहा गया है कि इहने गुजरात में ही हथियार दिए जाने थे, जिसके बाद यह किसी बड़ी घटना को अंजाम देते। गुजरात ATS इन्हें गिरफ्तार करने के बाद अपने साथ ले गई है और इनसे पूछताछ कर रही है। पता लगाया जा रहा है कि यह चारों भारत किस तरह की आंतकी गतिविधि करने आए थे और इनका भारत में मददगार कौन था।

यह भी सामने आया है कि यह चारों श्रीलंकाई नागरिक हैं और पहले श्रीलंका से चेन्नई आए थे। इसके बाद वह यहाँ से गुजरात पहुँचे। इन आतंकियों की गिरफ्तारी के बाद अहमदाबाद एयरपोर्ट पर सुरक्षा बढ़ा दी गई है। चारों आतंकियों के नाम अभी सामने नहीं आए हैं।

गौरलतब है कि हाल ही में अहमदाबाद एयरपोर्ट पर हमले की धमकी भी दी गई थी। यह धमकी 12 मई को दी गई थी। इसके बाद यह ISIS आतंकी गिरफ्तार हुए हैं। गुजरात में 15 दिन पूर्व भी पाकिस्तान के हैंडलर के दिशानिर्देशों पर काम करने वाले मौलाना अबूबक्र सोहेल गिरफ्तार हुआ था।

बताया था कि यह मौलाना हिन्दूवादी नेताओं, नुपुर शर्मा, टाइगर राजा सिंह, उपदेश राणा और पत्रकार सुरेश चव्हाणके को मारने की योजना बना रहा था। बाद में गुजरात पुलिस ने इस मामले में कार्रवाई करते हुए इसके 2 और साथियों को देश के अलग-अलग हिस्से से पकड़ा था।

बैंकों को बर्बादी के रास्ते पर ढकेल गए थे मनमोहन सिंह, अब ₹3 लाख करोड़ से अधिक का मुनाफा: बोले PM मोदी- ‘फोन पर लोन’ वाली परिपाटी बंद की

वित्त वर्ष 2023-24 में देश के बैंकिंग क्षेत्र ने ₹3 लाख करोड़ से अधिक का मुनाफा कमाया है। इस दौरान निजी और सरकारी, दोनों ही बैंकों का मुनाफा बढ़ा है। वित्त वर्ष 2023 में देश के बैंकिंग क्षेत्र के मुनाफे 39% की वृद्धि देखी गई है। पीएम मोदी ने बैंकिंग क्षेत्र की इस उपलब्धि को सराहा है।

टाइम्स ऑफ इंडिया की एक रिपोर्ट के अनुसार, देश के सरकारी क्षेत्र के बैंक ने वित्त वर्ष 2023-24 में ₹1.4 लाख करोड़ का मुनाफा कमा चुके है। यह वित्त वर्ष 2022-23 से 34% अधिक है। इन बैंकों ने 2022-23 के दौरान ₹1.04 लाख करोड़ का मुनाफ़ा कमाया था। ऐसा दूसरी बार हो रहा है, जब सभी सरकारी बैंक का मुनाफा ₹1 लाख करोड़ के पार गया हो।

सरकारी बैकों के अलावा निजी क्षेत्र के बैंकों को भी खूब मुनाफा हुआ है। रिपोर्ट बताती है कि 2023-24 में देश के निजी बैंकों को ₹1.7 लाख करोड़ का मुनाफा हुआ। इनके मुनाफे में सरकारी बैंकों से अधिक वृद्धि हुई। वित्त वर्ष 2023-24 में इनका मुनाफा ₹1.2 लाख करोड़ था।

मुनाफे की इन खबरों के बीच सबसे बड़ी उपलब्धि सरकारी बैकों के हिस्से में ही है। सरकारी बैंकों ने भारी घाटे से ₹1 लाख करोड़ से अधिक के मुनाफे का सफ़र तय किया है। पिछले समय से तुलना की जाए तो सरकारी बैंक लगातार घाटे में जा रहे थे और उन्हें अपना कामकाज चलाने के लिए हर साल केंद्र सकरार मदद करती थी।

अब यह मामला पूरी तरह बदल चुका है। सरकारी बैकों ने वित्त वर्ष 2017-18 में ₹85,000 करोड़ से अधिक का घाटा झेला था। इसके बाद शुरू हुई प्रक्रिया के कारण बैकों को अब मुनाफा होने लगा है। मोदी सरकार में बैंकों के बुरे कर्जों को निपटाने, नए कर्जे सोच समझ कर देने और बैंकों के एकीकरण के कारण यह मुनाफा हुआ है।

दूसरी तरफ निजी क्षेत्र के बैंक भी आगे बढ़ रहे हैं। देश में बढती आर्थिक गतिविधि और लगातार बढ़ते उद्योग धन्धों के कारण निजी क्षेत्र के बैंकों का कारोबार बढ़ रहा है। ऐसे में उनके कर्ज पोर्टफोलियो भी बढ़ रहे हैं, बिना सरकारी दबाव के कारण वह अब कर्जदारों की जाँच करके लोन दे रहे हैं। इससे उनका भी लाभ बढ़ा है।

पीएम मोदी ने भी बैंकिंग क्षेत्र की इस उपलब्धि की सराहना की है। उन्होंने एक्स (पहले ट्विटर) पर लिखा, ”पिछले 10 वर्षों में हुए उल्लेखनीय बदलाव से, भारत के बैंकिंग क्षेत्र का मुनाफ़ा पहली बार ₹3 लाख करोड़ को पार कर गया है। जब हम सत्ता में आए थे, तो हमारे बैंक UPA की फोन-बैंकिंग नीति के कारण घाटे और NPA से जूझ रहे थे। गरीबों के लिए बैंकों के दरवाजे बंद कर दिये गये थे। बैंकों की सेहत में यह सुधार हमारे गरीबों, किसानों और MSME को कर्जे मिलने में आसानी होगी।”

बैंकिंग क्षेत्र के इस भारी मुनाफे का अंदाजा इस बात से लगाया जा सकता है कि इसने मुनाफे के मामले में देश IT क्षेत्र को भी पीछे छोड़ दिया है। जहाँ बैंकिंग क्षेत्र ने 2023-24 में ₹3.1 लाख करोड़ कमाए हैं, वहीं IT क्षेत्र ₹2.2 लाख करोड़ कमाने में ही सफल रहा है।

तेल कंपनी में काम करने के लिए बिहार के गौरव को ईरान बुलाया, ड्रग्स के बदल रख दिया गिरवी: गुजरात ATS के हत्थे चढ़े ड्रग्स तस्करों का खुलासा

बिहार के भोजपुर जिले के 23 साल के गौरव कुमार को तेल कंपनी में काम के बहाने ईरान बुलाया गया। लेकिन उसे एक ड्रग्स गैंग के पास गिरवी रख दिया गया। अब उसकी रिहाई के एवज में परिजनों से 2 करोड़ रुपए माँगे जा रहे हैं।

यह खुलासा उन ड्रग्स तस्करों ने किया है, जिन्हें गुजरात पुलिस के आतंकवाद निरोधक दस्ते (ATS) ने कोस्ट गार्ड और नारकोटिक्स कंट्रोल ब्यूरो (NCB) के साथ पोरबंदर तट पर एक ज्वाइंट ऑपरेशन में पकड़ा था। 29 अप्रैल 2024 को हुए इस ऑपरेशन में करीब 1 अरब रुपए मूल्य की 173 किलोग्राम ड्रग्स के साथ 5 लोग पकड़े गए थे।

दैनिक भास्कर के मुताबिक गुजरात ATS को गौरव के गिरवी होने की सूचना गिरफ्तार हुए पाँचों ड्रग्स पैडलरों से पूछताछ के बाद पता चली। जानकारी जुटाने के बाद 11 मई को ATS ने भोजपुर जिले में पीरो प्रखंड स्थित गाँव सुखरौली के निवासी गौरव के घर वालों को फोन किया और पूरी बात बताई। कुछ ही दिनों बाद गौरव के परिजनों को पाकिस्तानी नंबरों से फोन और वॉइस मैसेज आने लगे। इन कॉल और संदेशों में गौरव की रिहाई के बदले 2 करोड़ रुपए की फिरौती माँगी जा रही है।

गौरव के बड़े भाई राजन ने बताया कि उनके दुबई में रहने वाले जीजा के माध्यम से किसी मिस्टर साहू नाम के दलाल ने गौरव को सम्पर्क किया था। मिस्टर साहू ने तेल कम्पनी में काम का लालच दे कर गौरव को ईरान बुला लिया था। 15 फरवरी 2024 को गौरव ईरान जाने के लिए अपने घर से निकला था। पटना से ट्रेन पकड़ कर गौरव मुंबई पहुँचा था, जहाँ उसे लगभग 1 हफ्ते होटल में ठहराया गया। 22 फरारी को गौरव को मुंबई से अरबिया एयरलाइंस की फ्लाइट पर बिठा कर शारजाह भेजा गया।

शारजाह में गौरव को मिस्टर साहू और सोनू मिले थे। मिस्टर साहू और सोनू को अंतर्राष्ट्रीय किडनैपर गैंग का सदस्य माना जा रहा है। शारजाह से गौरव को ईरान भेजा गया। यहाँ उसे कोई काम नहीं बताया जाता है। ईरान में उसे चाहबार लाकर मोहम्मद करीम नाम के एक व्यक्ति के घर में बंद कर दिया गया। शुरू में गौरव एक ईरानी नंबर से अपने घर बात करता था। बाद में वो नंबर भी बंद हो गया। गौरव की अपने परिवार में अंतिम बार बात 8 मई 2024 को हुई थी।

अंतिम कॉल में गौरव ने रो-रो कर अपनी व्यथा परिजनों को बताई थी। बताया जा रहा है कि भारत में तस्करी करने वाले गिरोह ने उसे ईरान के ड्रग्स गैंग के पास गिरवी रख दिया। गौरव के घर वाले किसी अनहोनी की आशंका से परेशान हैं। उन्होंने भारत सरकार से मदद की गुहार लगाई है। गौरव के 2 भाई और 4 बहन हैं। इस मामले में भोजपुर पुलिस ने बताया कि गौरव की रिहाई के लिए ईरानी दूतावास की मदद ली जाएगी।

कभी वामपंथी राजनीति के कारण 16 भिक्षु+1 साध्वी को कोलकाता में मारकर आग में फेंक दिया, अब उसी बंगाल में ममता बनर्जी ने संतों को राजनीति में घसीट खतरे में डाला

पश्चिम बंगाल की मुख्यमंत्री ममता बनर्जी ने शनिवार (18 मई 2024) को दिए एक अपने बयान के जरिए संतों को राजनीति में घसीटने का प्रयास किया। सीएम ने अपने बयान में रामकृष्ण मठ एवं रामकृष्ण मिशन और भारत सेवाश्रम संघ से जुड़े संतों पर निशाना साध कहा है कि वे लोग भाजपा के लिए काम कर रहे हैं। उनके इस बयान के बाद पीएम मोदी ने ममता बनर्जी पर संतों को धमकाने का आरोप लगाया। वहीं एक संत कार्तिक महाराज ने मुख्यमंत्री को उनके लिए कानूनी नोटिस भेजा है। इस नोटिस में सीएम के बयान को संत ने निराधार, झूठा और अपमानजनक बताया है।

गौरतलब है कि मुख्यमंत्री ममता बनर्जी का ये बयान ऐसे समय में सामने आया है कि जब चुनाव हैं और पिछले कुछ सालों में ये हमेशा देखा गया है कि तृणमूल कॉन्ग्रेस के कार्यकर्ता भाजपा समर्थकों के साथ सत्ता पाकर कैसा व्यवहार करते हैं। साल 2021 में भी टीएमसी के जीतने के बाद राज्य में बवाल हुआ था और पंचायत चुनाव जीतने के बाद भी टीएमसी कार्यकर्ताओं ने उत्पात मचाया था। उस समय भाजपा कार्यकर्ताओं के घरों को खोज-खोजकर हमले हुए थे।

ऐसे स्थिति में और ऐसे टीएमसी कार्यकर्ताओं के बीच ममता बनर्जी का ये बयान संतों के लिए जान तक का खतरा पैदा करता है। भाजपा नेता अमित मालवीय ने तो इस संबंध में ट्वीट भी किया है। उन्होंने जानकारी दी है कि सीएम ममता के बयान के बाद कुछ हमलावर जलपाईगुड़ी स्थित रामकृष्ण मिशन के आश्रम में घुस गए। उन्होंने भिक्षुओं पर हमला किया, सीसीटीवी आदि तोड़े दिए।

बता दें कि बंगाल की राजनीति में पहली बार संतों पर दोष लगाकर उनके खिलाफ माहौल बनाने का काम नहीं हुआ। ममता बनर्जी सरकार से पहले वामपंथी शासन काल में भी संतों को माकपा की सरकार ने निशाना बनाया था। अंजाम ये हुआ था कि तब कोलकाता में सरेआम 16 भिक्षु और 1 साध्वी निशाना बना लिए गए थे। आज उस नरसंहार को ‘बिजान सेतु नरसंहार’ कहा जाता है।

ये नरसंहार बात 30 अप्रैल 1982 को कोलकाता के बॉलीगंज के निकट दिनदहाड़े अंजाम दिया गया था। हमलावरों ने हिंदू संगठन आनंद मार्ग के 16 भिक्षुओं और एक साध्वी की निर्मम तरीके से हत्या कर उन्हें आग में फेंक दिया था। उन्हें उनकी टैक्सियों से उस समय बाहर खींच लिया गया था, जब वे कोलकाता के तिलजला स्थित अपने मुख्यालय में आयोजित एक शैक्षिक सम्मलेन में भाग लेने जा रहे थे।

हत्याओं को तीन अलग-अलग स्थानों पर अंजाम दिया गया था। इतना ही नहीं, इन घटनाओं को अपनी आँखों से एक दो नहीं बल्कि हजारों लोगों ने देखा था, इसके बावजूद भी आज तक एक की भी गिरफ्तारी नहीं हो सकी, जबकि 2012 में ही पश्चिम बंगाल सरकार ने इन हत्याओं की जाँच के लिए एकल सदस्यीय न्यायिक आयोग का गठन किया था।

बताया जाता है कि इन हत्याओं के तत्काल बाद के वर्षों में माकपा सरकार ने इस मामले से संबंधित तथ्यों को छिपाना जारी रखा। वहीं राष्ट्रीय मानवाधिकार आयोग ने 1996 के अंत में इस मामले की जाँच बिठाई थी, लेकिन ज्योति बसु और उनकी सरकार के सहयोग न मिलने के कारण यह जाँच आगे नहीं बढ़ सकी।

आनंद मार्ग के जनसंपर्क सचिव आचार्य त्रंबकेश्वरानंद अवधूत ने द इंडियन एक्सप्रेस को बताया था, “बसु सरकार की एक मात्र सफलता राज्य के सबसे बड़े नरसंहार मामले में अपने शामिल होने को छिपाने की रही है।” उनके अनुसार कम्युनिस्ट आनंद मार्ग के शीर्ष नेतृत्व को खत्म करना चाहते थे, लेकिन उनके गुंडों ने गलतफहमी में संगठन से जुड़े साधारण भिक्षुओं की हत्या कर दी।

बिजोन सेतु हत्याकांड के बाद भी अप्रैल 1990 में CPI(M) के कैडरों द्वारा कथित तौर पर आनंद मार्ग के पाँच सदस्यों की हत्या कर दी गई थी। 1982 की जघन्य हत्याओं के बारे में तत्कालीन मुख्यमंत्री ज्योति बसु ने बड़ी ही बेशर्मी से कहा था, “क्या किया जा सकता है? ऐसी बातें होती रहती हैं।” 

इन संतों की हत्या के बाद से हर साल 30 अप्रैल को आनंद मार्गियों के नरसंहार की सालगिरह पर आनंद मार्गी जुलूस निकालते हैं और उन भिक्षुओं को श्रद्धांजलि देते हैं, जिन्हें दिनदहाड़े मारने के बाद आग में फेंक दिया गया था। उन्हें घटना के चार दशक बीत जाने के बाद भी आज तक न्याय नहीं मिल सका है। कभी माओ ने कहा था, “राजनीतिक शक्ति बंदूक की नोंक से बढ़ती है।” वर्षों से ये लोग दूसरों के सिर पर बंदूक रखकर राजनीतिक सत्ता हासिल करने में कामयाब रहे हैं। हालाँकि उन्हें राजनीतिक रूप से अलग कर दिया गया है, फिर भी उन्हें न्याय की बारीकियों का अनुभव करना बाकी है।

जिसके राज में 1 साल में 853 को मिली सजा-ए-मौत, जिसे कहते थे ‘तेहरान का कसाई’; उसके इंतकाल के बाद किस राह जाएगा ईरान?

ईरान के राष्ट्रपति इब्राहिम रईसी की रविवार (19 मई, 2024) को हुई एक हेलीकॉप्टर दुर्घटना में 8 अन्य लोगों समेत मौत हो गई। इब्राहिम रईसी का हेलीकॉप्टर एक दुर्गम इलाके में जाकर क्रैश हो गया। राहत बचाव टीमों ने उनकी तलाश में कई घंटे का अभियान चलाया, जिसके बाद उनके शव सोमवार को बरामद किए जा सके।

इब्राहिम रईसी के साथ ही इस दुर्घटना में ईरान के विदेश मंत्री हुसैन अमीर अब्दोल्लाहियान की भी मौत हो गई। रईसी के साथ यह दुर्घटना ईरान के पूर्वी अजरबैजान प्रांत से लौटते समय हुई। यहाँ वह एक बाँध का उद्घाटन करने गए हुए थे। उनके साथ अन्य कई महत्वपूर्ण लोग मौजूद थे। रईसी की मौत के बाद ईरान में नए नेतृत्व के लिए कवायद चालू हो गई है।

कौन थे इब्राहिम रईसी

हेलीकॉप्टर दुर्घटना में मारे गए इब्राहिम रईसी 63 वर्ष के थे। वह 2021 में चुनाव जीत कर ईरान के 13वें राष्ट्रपति बने थे। इससे पहले 2017 में वह राष्ट्रपति चुनाव हार चुके थे। कट्टरपंथी माने जाने वाले रईसी ईरान के मुख्य न्यायाधीश भी रहे थे। उन्हें 2019 में ईरान का मुख्य न्यायाधीश बनाया गया था। रईसी ईरान के आयतुल्लाह खुमैनी और आयतुल्लाह खामनेई दोनों के करीबी माने जाते थे। इब्राहिम रईसी मूल रूप से ईरान के मश्दाद के रहने वाले थे और 1979 में ईरान में हुए तख्तापलट के प्रदर्शनों में शामिल रहे थे।

इब्राहिम रईसी ने सरकार में अन्य कई महत्वपूर्व जिम्मे भी सम्भाले थे। रईसी ने ईरान के सबसे बड़े दीनी तालीम के मदरसे, कोम से शिक्षा हासिल की थी। रईसी के दो बेटियाँ हैं। उन्होंने 1982 में निकाह किया था। रईसी को सेना, न्यायपालिका और IRGC का बेहद करीबी माना जाता था। ईरान के वर्तमान सुप्रीम लीडर आय्तोल्लाह खामनेई के उत्तराधिकारी के रूप में उन्हें ही देखा जाता था, वह उनके काफी नजदीकी थे। उनकी मौत के बाद नया राष्ट्रपति बनाए की प्रकिया चालू हो गई है।

इब्राहिम रईसी को कहते थे ‘तेहरान का कसाई’

इब्राहिम रईसी एक धड़े ने ‘तेहरान का कसाई’ की संज्ञा दी है। यह संज्ञा उन्हने उन्हने 1988 में एक समिति में रहने कारण दी गई है। इस समिति ने 1988 में 500 लोगों को फांसी की सजाएँ दी थी। यह सजाएँ राजनीतिक कैदियों को दी गई थीं। रईसी को कट्टरपंथी माना जाता था, वह 2015 में ईरान-अमेरिका और यूरोपियन देशों के बीच JCPOA डील के विरुद्ध थे, इसके अंतर्गत ईरान पर से प्रतिबन्ध हटाए जाने थे। बदले में ईरान ने अपना परमाणु प्रोग्राम रोकने का वादा किया था।

अब कौन होगा ईरान का राष्ट्रपति

इब्राहिम रईसी की मौत के बाद अब मोहम्मद मोखबर को ईरान का राष्ट्रपति बनाया जाएगा। वह वर्तमान में ईरान के पहली वरीयता के उपराष्ट्रपति हैं। मोखबर अगले 50 दिनों के लिए अंतरिम राष्ट्रपति का रोल निभाएँगे। मोखबर ईरान की सेताद नाम की संस्था के प्रमुख रहे हैं। यह संस्था ईरान में भलाई के काम देखती है। इसे ईरान के पहले सुप्रीम लीडर खुमैनी के आदेश पर स्थापित किया गया था। मोखबर ईरान की एक बैंक के भी मुखिया रहे हैं।

जहाँ ईरान में अधिकांश नेता मजहबी पृष्ठभूमि से आते हैं, मोखबर की छवि एक एक्सक्युटिव वाली है। मोखबर ने 2017 में ईरान के राष्ट्रपति पद के चुनाव के लिए पर्चा भरा था, लेकिन बाद में उन्होंने रईसी के समर्थन में अपना नाम वापस ले लिया था। अब राष्ट्रपति पद के लिए होने वाले अगले चुनावों में मोखबर के भी प्रत्याशी बनने की संभावना है।

मोखबर को क्यों बनाया जा रहा राष्ट्रपति

दरअसल, मोखबर को राष्ट्रपति बनाए जाने के पीछे ईरान का एक कानून है। इसके अंतर्गत यदि राष्ट्रपति की आकस्मिक मौत हो जाती है, या फिर वह लम्बी बीमारी के कारण अपना काम करने में सक्षम नहीं रहता, तो उसकी जगह सबसे वरिष्ठ उपराष्ट्रपति को अंतरिम राष्ट्रपति बनाया जाता है और 50 दिनों के भीतर पूर्णकालिक राष्ट्रपति के लिए चुनाव करवाए जाते हैं। ईरान में एक से अधिक उपराष्ट्रपति होते हैं, इनको राष्ट्रपति स्वयं नियुक्त करता है। जो पहली वरीयता का उपराष्ट्रपति होता है, वह राष्ट्रपति का रोल किसी समस्या के कारण निभाता है।

रईसी की मौत: ईरान के लिए संकट

इब्राहिम रईसी की मौत ऐसे समय में हुई जब ईरान कई समस्याओं से गुजर रहा है। रईसी की मौत के कारण ईरान में नेतृत्व का संकट खड़ा हो गया है। वर्तमान में ईरान, इजरायल से सीधा खतरा झेल रहा है। उसने हाल ही में इजरायल पर हमला भी किया था। हमास के आतंकियों के समर्थन में ईरान होर्मुज की खाड़ी में भी कई जहाजों को निशाना बना चुका है। रईसी के ही कार्यकाल में ऐसा पहली बार हुआ है कि ईरान ने इजरायल पर सीधा हमला किया हो।

इसके अलावा ईरान पर अमेरिका समेत पश्चिमी देशों द्वारा लगाए गए प्रतिबन्ध अभी भी जारी हैं। इस कारण से ईरान में जनजीवन प्रभावित हुआ है। ईरान को अपना कच्चा तेल बेचने में भी समस्या आ रही है। ईरान के साथ हुई सामान्यीकरण की डील JCPOA से अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रम्प ने हाथ खींच लिए थे। अमेरिका में सत्ता परिवर्तन के बाद भी ईरान पर लगे प्रतिबंधों में कोई ढील नहीं दी गई है। ऐसे में रईसी की मौत इस समस्या को और गहरा कर रही है।

रईसी के कार्यकाल में ईरान को मात्र बाहरी नहीं बल्कि आंतरिक समस्याओं से भी जूझना पड़ा है। 2022 में ईरान में एक महिला महशा अमीनी की हिजाब ना पहनने के कारण सुरक्षाबलों द्वारा हत्या किए जाने के बाद पूरा देश उबल पड़ा था। ईरान में तब बड़ी संख्या में प्रदर्शन हुए थे। महिलाओं ने इस दौरान हिजाब जला और बाल काट कर अपना रोष प्रकट किया था। इसके बाद सड़कों अपर सुरक्षाबलों को उतरना पड़ा था। एक रिपोर्ट बताती है कि ईरान ने प्रदर्शनों को रोकने के लिए 800 से अधिक लोगों को मौत की सजा दी थी।

रईसी की मौत से ईरान की जनता को मौका

रईसी की मौत से ईरान की जनता को एक बार फिर अपना नेतृत्व चुनने का मौक़ा मिलेगा। ईरान की जनता ने रईसी से पहले हसन रूहानी को चुना था जो कि उदारवादी माने जाते थे। उनके मुकाबले रईसी को कट्टर समझा जाता था। रूहानी के राष्ट्रपति रहते हुए ही ईरान और अमेरिका तथा पश्चिमी देशों के बीच JCPOA समझौता हुआ था जिसके कारण ईरान पर लगे प्रतिबंधों में ढील दी गई थी। अब ईरान की जनता को फिर से यह मौक़ा मिलेगा कि वह रईसी की तरह ही किसी कट्टरपंथी को दोबारा मौका देती है या फिर कोई उदारवादी नेता सत्ता में आता है।