Home Blog Page 954

‘संदेशखाली की बहनों को डराया जा रहा, हिन्दुओं को बना दिया दोयम दर्जे का नागरिक’: बंगाल में गरजे PM मोदी, मिल कर रोने लगीं महिलाएँ

लोकसभा चुनाव 2024 के प्रचार के लिए रविवार (12 मई 2024) को प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी पश्चिम बंगाल के बैरकपुर और हुगली पुहँचे। यहाँ पीएम मोदी ने भाजपा कार्यकर्ताओं से मुलाकात की। वे प्रधानमंत्री से मिलकर भावुक हो गए। उन्होंने मोदी-मोदी और जय श्रीराम के नारे लगाए। प्रधानमंत्री से मुलाकात को उन्होंने अपने लिए सौभाग्य की बात कही।

प्रधानमंत्री ने जनसभा को संबोधित करते हुए कहा कहा कि बंगाल में तृणमूूल कॉन्ग्रेस (TMC) सरकार वोटबैंक के लिए तुष्टिकरण की राजनीति करती है। उन्होंने कहा कि यहाँ बंगाल में आज राम का नाम नहीं लेने दिया जाता। रामनवमी नहीं मनाने दी जाती। CAA का विरोध किया जाता है। हिंदुओं को दोयम दर्जे का नागरिक समझा जाता है।

इस दौरान प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी संदेहखाली और उसके आरोपित शाहजहाँ शेख का जिक्र किया। संदेशखाली में यौन उत्पीड़न के मामले को लेकर पीएम मोदी ने कहा, “संदेशखाली के गुनहगारों को पहले TMC की पुलिस ने बचाया। अब TMC ने एक नया खेल शुरू किया है। TMC के गुंडे संदेशखाली की बहनों को डरा रहे हैं, धमका रहे हैं। सिर्फ इसलिए कि अत्याचारी का नाम शाहजहाँ शेख है।”

मोदी ने कहा, कभी बंगाल में एक से बढ़कर एक वैज्ञानिक खोज हुआ करती थीं। आज TMC के राज में जगह-जगह बम बनाने की होम इंडस्ट्री चल रही है। एक समय था, जब बंगाल घुसपैठियों के खिलाफ क्रांति किया करता था, लेकिन आज TMC के संरक्षण में यहाँ घुसपैठी फल-फूल रहे हैं। बंगाल में अपनी आस्था का पालन करना भी गुनाह है। यहाँ रामनवमी नहीं मनाने दिया जाता।”

ममता बनर्जी की सरकार पर हमला बोलते हुए पीएम मोदी ने कहा, “बंगाल में TMC सरकार राम का नाम नहीं लेने देती। बंगाल में TMC सरकार रामनवमी नहीं मनाने देती। कांग्रेस और लेफ्ट के लोगों ने भी राम मंदिर के विरुद्ध मोर्चा खोल रखा है। TMC के MLA ने कहा कि हिंदुओं को भागीरथी में बहा देंगे। सोचिए, इतनी हिम्मत, इतना साहस। इन्होंने हिंदुओं को दोयम दर्जे का नागरिक बनाकर रख दिया है।”

बताते चलें कि शाहजहाँ शेख TMC में था, तब संदेशखाली की महिलाओं का यौन उत्पीड़न करता था और उनकी जमीनों पर जबरन कब्जा करता था। इसके विरोध में महिलाओं ने प्रदर्शन किए और देश भर में बवाल हुआ तो ममता बनर्जी की सरकार ने आरोपित शाहजहाँ शेख को गिरफ्तार किया और पार्टी से निकाला। इसके बाद से वहाँ की महिलाओं को डराने-धराने का आरोप लगते रहे है।

अब खबर आई है कि TMC नेताओं पर रेप का आरोप लगाने वाली तीन महिलाओं में से दो ने केस वापस ले लिया है। महिलाओं ने आरोप लगाया कि भारतीय जनता पार्टी के स्थानीय नेता ने कई महिलाओं से सादे कागज पर दस्तखत करवाए और बाद में सत्तारूढ़ तृणमूल कॉन्ग्रेस के नेताओं के खिलाफ रेप और यौन उत्पीड़न की शिकायत दर्ज करवाने में इनका इस्तेमाल किया गया।

इसको लेकर भाजपा ने आरोप लगाया कि संदेशखाली की महिलाओं को डराया धमकाया जा रहा है। पश्चिम बंगाल भाजपा के अध्यक्ष सुकांत मजूमदार ने आरोप लगाया कि वीडियो और कथित स्टिंग ऑपरेशन फर्जी था और उन्हें शक है कि विडियो आर्टिफिशल इंटेलिजेंस की मदद से बनाया गया है। बता दें कि यहाँ की महिलाएँ पहले ही डर जता चुकी है कि उन्हें डराया धमकाया जा रहा है।

अगले 10 वर्षों में ₹1152946 करोड़ के कारोबार के लिए तैयार है भारत का रक्षा क्षेत्र: विदेशी कंपनी ने रिसर्च में बताया – मोदी सरकार के प्रयासों से और मजबूत होगी सेना

दुनिया के हर सेक्टर में भारत तेजी से अपनी शीर्ष जगह बना रहा है। अगले 10 सालों में भारत डिफेंस सेक्टर में सबसे बड़े निवेश और उत्पादन के लिए तैयार है। एक विदेशी फर्म की रिपोर्ट के मुताबिक, भारत डिफेंस इक्विपमेंट, एडवांस टेक्नोलॉजी और सर्विसेज की बढ़ती माँग के बीच रक्षा क्षेत्र में वित्त वर्ष 2024-32 में 138 बिलियन अमेरिकी डॉलर का ऑर्डर देने का प्लान बना रहा है।

विदेशी ब्रोकरेज कंपनी नोमुरा की ‘डिफेंस इंडिया’ रिपोर्ट के मुताबिक, भारत की सरकार स्वदेशी मैन्युफैक्चरिंग और टेक्नोलॉजी के विकास को बढ़ावा देने के लिए अनुकूल नीति सुधारों, प्रोत्साहनों और पहलों के माध्यम से रक्षा क्षेत्र को सक्रिय रूप से समर्थन दे रही है। रिपोर्ट के मुताबिक, वित्त वर्ष 2030 में रक्षा कैपिटल आउटले का हिस्सा कुल रक्षा बजट का 37% तक बढ़ जाएगा, जो FY24 में 26 प्रतिशत के आसपास है। यह FY24-30 में 15.5 ट्रिलियन रुपए के कैपिटल के बराबर होगा, जो पिछली अवधि की तुलना में पर्याप्त वृद्धि का संकेत देता है।

एयरफोर्स के साथ नेवी भी होगी मजबूत

रिपोर्ट के अनुसार, रक्षा एयरोस्पेस के क्षेत्र में 50 बिलियन अमेरिकी डॉलर का निवेश शामिल है, जिसमें विमान, हेलीकॉप्टर, मानव रहित हवाई वाहन (यूएवी), एवियोनिक्स और संबंधित प्रणालियों में निवेश शामिल है। रक्षा जहाज निर्माण एक और महत्वपूर्ण अवसर वाला क्षेत्र है, जिसमें समुद्री सुरक्षा को मजबूत करने के लिए नौसैनिक जहाजों, पनडुब्बियों, गश्ती नौकाओं और सहायक जहाजों के लिए 38 बिलियन अमेरिकी डॉलर के पैकेज की जरूरत पड़ने वाली है। अपनी तोपखाने और मिसाइल क्षमताओं को बढ़ाने के भारत के प्रयासों के अनुरूप, मिसाइलों/तोपखाने/बंदूक प्रणालियों में निवेश 21 अरब अमेरिकी डॉलर तक पहुँचने का अनुमान है।

नोमुरा कंपनी की रिपोर्ट में कहा गया “भारत सरकार स्थानीय विनिर्माण और प्रौद्योगिकी विकास को बढ़ावा देने के लिए पहल, अनुकूल नीति सुधारों और प्रोत्साहनों के माध्यम से रक्षा क्षेत्र को सक्रिय रूप से समर्थन प्रदान करती है।”

भारत के सबड़े बड़े उत्पादकों में से एक हिंदुस्तान एयरोनॉटिक्स लिमिटेड को लड़ाकू विमान और हेलीकॉप्टरों में मजबूत बढ़त प्राप्त की है, जिससे इसके शेयरों में 28 प्रतिशत की संभावित बढ़ोतरी हुई है। इसी समय भारत इलेक्ट्रॉनिक्स ने ऑर्डर प्रवाह पर बेहतर दृश्यता, अनुकूल मार्जिन देने में विश्वास और रिटर्न अनुपात में विस्तार के कारण 32 प्रतिशत की वृद्धि के साथ आशाजनक क्षमता दिखाई देती है।

डिफेंस एक्सपोर्ट में रिकॉर्ड बढ़ोतरी

बता दें कि भारत का डिफेंस एक्सपोर्ट अब तक के सारे रिकॉर्ड तोड़ चुका है। 31 मार्च 2024 की रिपोर्ट के मुताबिक, वित्तीय वर्ष 2023-24 में ही देश का रक्षा निर्यात 21,083 करोड़ रुपये के स्तर पर पहुंच गया है। पिछले वित्तीय वर्ष की तुलना में यह 32.5 फीसदी बढ़ा है। पिछले वित्त वर्ष में भारत का रक्षा निर्यात लगभग 16 हजार करोड़ रुपये के रिकॉर्ड स्तर पर पहुंचा था, जो वित्त वर्ष 2021-22 की तुलना में लगभग 3,000 करोड़ रुपये ज्यादा है। भारत का रक्षा निर्यात 2016-17 के बाद से 10 गुना से ज्यादा बढ़ा है। फिलहाल 85 से ज्यादा देशों को हथियार प्रणालियों का निर्यात कर रहा है भारत भारत फिलहाल 85 से ज्यादा देशों को हथियार प्रणालियों का निर्यात कर रहा है। अब पिछले साल के मुकाबले रक्षा निर्यात ने वित्तीय वर्ष 2023-24 में 32.5 फीसदी की छलाँग लगाई है। इस वर्ष रक्षा निर्यात 21,083 करोड़ रुपये के स्तर पर पहुंच गया है।

दिल्ली मेट्रो की दीवारों पर ‘खालिस्तान ज़िंदाबाद’ के नारे: जिस गुरपतवंत सिंह पन्नू की ‘हत्या की साजिश’ का रोना रो रहा था अमेरिका, उसी ने ली जिम्मेदारी

खालिस्तानी अलगाववादी अब भी अपनी चाल से बाज नहीं आ रहे हैं। अब उन्होंने दिल्ली मेट्रो को निशाना बनाया है। दिल्ली मेट्रो में खालिस्तान के समर्थन में नारा लिख दिया गया। दिल्ली के 2 मेट्रो स्टेशनों के नीचे दीवार पर ‘खालिस्तान ज़िंदाबाद’ नारा लिखा हुआ मिला है। अभी तक कुछ पता नहीं चल सका है कि ये हरकत किसने की है, लेकिन ‘सिख फॉर जस्टिस’ (SFJ) के आतंकी गुरपतवंत सिंह पन्नू ने इसकी जिम्मेदारी ली है। वो अमेरिका में छिपा हुआ है।

लोकसभा चुनाव 2024 के 3 चरण बीत चुके हैं और चौथे चरण के लिए चुनाव प्रचार का दौर उफान पर है, ऐसे में राजनीतिक रूप से इस संवेदनशील समय में इस तरह की हरकत किए जाने के बाद सुरक्षा एजेंसियाँ चौकन्नी हो गई हैं। पंजाब में 1 जून, 2024 को 13 सीटों पर चुनाव होना है, ये सातवाँ और अंतिम चरण होगा। इसके 3 दिन बाद ही चुनाव परिणाम घोषित कर दिए जाएँगे। पंजाब में मुख्य मुकाबला राज्य की सत्ताधारी AAP (आम आदमी पार्टी), कॉन्ग्रेस, देश की दूसरी सबसे पुरानी पार्टी SAD (शिरोमणि अकाली दल) और भाजपा के बीच है।

दिल्ली पुलिस को जैसे ही खालिस्तानी नारे लिखे जाने की सूचना मिली, तुरंत टीम ने घटनास्थल के लिए कूच किया। वहाँ लिखे देश विरोधी नारों को फ़िलहाल मिटा दिया गया है। पुलिस इसकी जाँच कर रही है कि ये किन लोगों की करतूत है। इसके लिए CCTV फुटेज भी खँगाले जा रहे हैं। दिल्ली पुलिस ने FIR भी दर्ज कर ली है। सोशल मीडिया के जरिए गुरपतवंत सिंह पन्नू ने इसकी जिम्मेदारी ली है, जिसकी हत्या की साजिश रचने का झूठा आरोप अमेरिका ने भारत पर लगाया था।

रूस ने भी कहा कि अमेरिका के पास अपने दावे का समर्थन करने के लिए सबूत मौजूद नहीं हैं। हालाँकि, राष्ट्रीय राजधानी में खालिस्तानी नारे लिखे जाने का यह कोई पहला मौका नहीं है। इसी साल मार्च के महीने में पश्चिमी दिल्ली के पंजाबी बाग़ मेट्रो स्टेशन के खम्भों पर खालिस्तानी नारे लिख दिए गए थे। उस समय भी दिल्ली पुलिस ने केस दर्ज की थी। वहीं गणतंत्र दिवस के दौरान 26 जनवरी को भी उत्तम नगर में एक सरकारी स्कूल की दीवारों पर ऐसे नारे लिखे गए थे।

क्या तमिलनाडु में फासीवाद चल रहा है? यूट्यूबर सुवुक्कु शंकर के बाद अब पत्रकार फेलिक्स गिरफ्तार, CM स्टालिन पर उठे सवाल

रेड पिक्स यूट्यूब के संपादक फेलिक्स गेराल्ड को नई दिल्ली में तमिलनाडु पुलिस ने गिरफ्तार किया है। इसको लेकर नाम तमिलर काची (NTK) प्रमुख सीमन ने शनिवार (11 मई 2024) को पूछा कि क्या तमिलनाडु अभी भी एक लोकतांत्रिक राज्य है या यह फासीवादी राज्य बन गया है। सीमन ने कहा कि गेराल्ड के खिलाफ मामला और ‘सवुक्कू’ शंकर पर थोपे गए झूठे मामले तुरंत वापस लिए जाने चाहिए।

तमिलनाडु के मुख्यमंत्री एमके स्टालिन के नेतृत्व वाली DMK सरकार पर हमला बोलते हुए उन्होंने कहा, “जिस कार्यक्रम में शंकर ने आपत्तिजनक बयान दिए, उस कार्यक्रम के एंकर (फेलिक्स गेराल्ड) को गिरफ्तार करना कानून के खिलाफ है। गेस्ट द्वारा की गई टिप्पणी के लिए एंकर को गिरफ्तार करना अस्वीकार्य है। यह मीडिया की बोलने और अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता को ख़त्म करने जैसा है।”

सीमन ने कहा कि पुलिस के बारे में शंकर की टिप्पणी गलत और अस्वीकार्य थीं, लेकिन यूट्यूब या टेलीविजन चैनल को जिम्मेदार नहीं ठहराया जाना चाहिए। उन्होंने कहा, “क्या यह उन लोगों के लिए खुली धमकी नहीं है, जो द्रमुक सरकार के आलोचक हैं? क्या यह एक लोकतांत्रिक राज्य चला रहा है या फासीवादी?”

उन्होंने आगे कहा, “पूरे तमिलनाडु में नशीली दवाओं के प्रसार की अनुमति देने के बाद क्या यह और भी विश्वसनीय है जब पुलिस कहती है कि ‘सवुक्कु’ शंकर के वाहन में गांजा पाया गया था? जो व्यक्ति यह दावा करता रहा कि उसे किसी भी समय गिरफ्तार किया जा सकता है, क्या यह विश्वास करने योग्य है कि वह अपने वाहन में मादक पदार्थ ले जा रहा होगा?”

दरअसल, गेराल्ड को तमिलनाडु पुलिस ने उस वक्त दिल्ली से गिरफ्तार कर लिया, जब वो प्रेस काउंसिल ऑफ इंडिया को एक याचिका देने के लिए दिल्ली आए हुए थे। इसमें उन्होंने कहा था कि तमिलनाडु पुलिस ने एक समन जारी किया है, जिसमें 10 जून को पुलिस के संबंध में पेश होने के लिए कहा गया था। इस बीच तमिलनाडु पुलिस ने उन्हें गिरफ्तार कर लिया।

दरअसल, फेलिक्स गेराल्ड ने अपने यूट्यूब चैनल पर कार्यक्रम का आयोजन किया था, जिसमें उन्होंने सुवुक्कु शंकर को भी आमंत्रित किया था। इसी प्रोग्राम में सुव्वुकु ने तमिलनाडु पुलिस पर कुछ टिप्पणी कर दी थी। इसके बाद तमिलनाडु पुलिस ने सुव्वुकु को 4 मई को ही। पहले ही गिरफ्तार कर लिया था। उन्हें कोयम्बटूर जेल में रखा गया था, जहाँ उनके साथ मारपीट करने की घटना सामने आई थी।

वकील गोपालकृष्ण ने बताया है कि कोयम्बटूर सेन्ट्रल जेल के कर्मचारियों ने उनके मुवक्किल सुव्वुकु की आँखों पर पट्टी बाँध दी, उसके बाद उन्हें पीटा गया। हथियार के रूप में प्लास्टिक की पाइपों पर कपड़ा लपेट कर उनका इस्तेमाल किया गया। रिपोर्ट के मुताबिक, न्यायिक हिरासत में जेल भेजे जाने के बाद उनके दाएँ हाथ में फ्रैक्चर हुआ है। उनके इलाज की व्यवस्था भी नहीं कराई गई।

पुलिस पर बदले की भावना से काम करने के आरोप हैं। सुव्वुकु को थेनि से गिरफ्तार किया गया था। उन पर महिला कॉन्स्टेबलों पर आपत्तिजनक टिप्पणी का मामला दर्ज किया गया है। वो विजिलेंस डिपार्टमेंट में कार्यरत रहे हैं। उन्हें 2 शीर्ष अधिकारियों की बातचीत लीक करने के आरोप में 2008 में जेल भेजा गया था। मद्रास हाईकोर्ट ने अदालत की अवमानना के मामले में उन्हें 6 महीने की सज़ा सुनाई थी।

मुस्लिम बहुल गाँव, दलित लड़कियों से छेड़खानी, मना करने पर जातिसूचक गालियाँ… नाबालिग के पिता ने बताया – पैसों के दम पर बच जाते हैं शादाब-शोएब

उत्तर प्रदेश के गाजियाबाद जिले में दलित समुदाय की एक लड़की से छेड़खानी का मामला सामने आया है। पीड़िता नाबालिग है जिसके पिता ने शादाब और शोएब के खिलाफ शिकायत दर्ज करवाई है। शिकायत में खुद को मुस्लिम बहुल इलाके का निवासी बताते हुए पीड़ित ने आरोपितों द्वारा गाँव की कई अन्य लड़कियों को भी प्रताड़ित किए जाने का दावा किया है। घटना रविवार (28 अप्रैल 2024) की है। पुलिस ने शुक्रवार (10 मई, 2024) को FIR दर्ज कर के जाँच शुरू कर दी है।

यह मामला गाजियाबाद के थाना क्षेत्र मसूरी का है। यहाँ रहने वाले एक दलित व्यक्ति ने शुक्रवार को थाने में तहरीर दी है। तहरीर में पीड़ित ने बताया कि वह मुस्लिम बहुल इलाके का निवासी है। उनके पड़ोस में शादाब और शोएब रहते हैं। आरोप है कि शादाब और शोएब आवारा किस्म के हैं जो गाँव की कई लड़कियों से आए दिन न सिर्फ बदतमीजी और छेड़खानी बल्कि उनका यौन उत्पीड़न भी करते हैं। बकौल शिकायतकर्ता, दोनों आरोपित पैसे के दम पर कानून के शिकंजे से बचते आ रहे हैं।

कुछ दिनों से इन दोनों आरोपितों ने शिकायतकर्ता की नाबालिग बेटी को भी छेड़ना शुरू कर दिया। जब पीड़िता कहीं आती-जाती तो उसके साथ अश्लीलता की जाने लगी। दोनों आरोपितों ने जबरन पीड़िता को अपना नंबर दे दिया और निकाह का दबाव भी बनाने लगे। इन्होंने लड़की की आपत्तिजनक तस्वीरें खींच कर उसे ब्लैकमेल करना शुरू कर दिया। पीड़ित के मुताबिक, शादाब और शोएब उनकी बेटी को को गलत नीयत से साजिशन बहला-फुसला रहे थे। दोनों लगातार पीड़िता को फोन भी कर रहे थे।

शिकायत में आगे बताया गया है कि 28 अप्रैल को पीड़िता रास्ते में कहीं जा रही थी। इसी दौरान शादाब और शोएब ने एक बार फिर से पीड़िता से अश्लील हरकतें कीं। इस बार परेशान हो कर लड़की ने अगले दिन 29 अप्रैल को अपने भाई को पूरी बात बता दीं। 30 अप्रैल को लड़की के भाई ने शादाब को कॉल कर के अपनी बहन से छेड़खानी न करने की नसीहत दी। इस नसीहत का आरोपितों पर कोई असर नहीं पड़ा। उलटे दोनों ने पीड़िता के भाई को फोन पर गंदी-गंदी गालियाँ दीं और जातिसूचक शब्द बोले।

शिकायतकर्ता के मुताबिक, शादाब और शोएब ने फोन पर पीड़िता के पूरे परिवार को खत्म करने की भी धमकी दी। शिकायत में यह भी बताया गया है कि दोनों आरोपितों को लेकर पहले भी शिकायत की जा चुकी है। तब पुलिस ने दोनों आरोपितों सहित पीड़िता के फोन जमा करवा कर उन पर शांतिभंग की धाराओं में कार्रवाई की थी। इस कार्रवाई को नाकाफी बताते हुए पीड़िता के पिता ने शादाब और शोएब पर कड़ी कार्रवाई की माँग की है।

पुलिस ने शादाब और शोएब पर IPC की धारा 354, 354 (क), 504 और 506 के अलावा SC/ST एक्ट और पॉक्सो एक्ट के तहत FIR दर्ज कर ली है। केस दर्ज होने के बाद दोनों आरोपित फरार बताए जा रहे हैं जिनकी तलाश जारी है। शनिवार को पुलिस ने पीड़िता के बयान दर्ज किए हैं। जल्द ही पीड़िता को 164 के बयान के लिए कोर्ट में पेश किया जा सकता है। ऑपइंडिया के पास शिकायत कॉपी मौजूद है।

वो चाहते हैं कि हम पलायन कर जाएँ

ऑपइंडिया ने इस मामले में शिकायतकर्ता से बात की। हमें बताया गया कि वो मुस्लिम बहुल गाँव में काफी प्रताड़ना झेल रहे हैं। पीड़िता के पिता ने बताया कि आरोपितों पर पहले से रेप केस दर्ज हैं। अपनी प्रताड़ना की मूल वजह पूछने पर पीड़िता के पिता ने कहा, “वो चाहते हैं कि हम लोग घर छोड़ कर चले जाएँ।” खुद को महादेव शिव का भक्त बताते हुए शिकायतकर्ता ने अपने बेटे की सुरक्षा को ले कर चिंता जताई है। हमें यह भी बताया गया कि केस दर्ज होने के बाद से मुस्लिम पक्ष के तमाम लोग उन पर समझौते का दबाव बना रहे हैं।

भैंस चोर है शोएब

हालाँकि, पीड़ित का कहना है कि वो कतई केस वापस नहीं लेंगे। जब हमें पूछा कि शादाब और शोएब को क्या गाँव में मुस्लिम पक्ष के बड़े-बुजुर्ग समझाते नहीं तो हमें जवाब मिला, “अगर वो समझाते तो ये सब क्यों देखना पड़ता।” दलित उत्पीड़न की इस FIR में नामजद दूसरा आरोपित शोएब इलाके का नामी पशु तस्कर बताया जा रहा है। उस पर भैंस चुराने की पहले से FIR दर्ज होने का दावा किया गया। शिकायतकर्ता ने पुलिस को अपने मामले में सक्रिय बताया और कहा कि उनको पूरी सुरक्षा मिलने का भरोसा दिया गया है।

‘पैसे भेजेंगे अम्बानी-अडानी तो हम नहीं बोलेंगे उनके खिलाफ’: कॉन्ग्रेस के नेता प्रतिपक्ष ने ही खोली राहुल गाँधी की पोल, बोले – नहीं मिलता है चंदा

कॉन्ग्रेस के बड़े नेता और बंगाल में कॉन्ग्रेस पार्टी के सबसे बड़े चेहरे अधीर रंजन चौधरी, जो लोकसभा में कॉन्ग्रेस पार्टी के नेता साथ ही नेता प्रतिपक्ष भी हैं, उन्होंने एक इंटरव्यू में कहा है कि अगर अंबानी और अडानी कॉन्ग्रेस पार्टी को पैसे पहुँचाने लगे, तो कॉन्ग्रेस पार्टी उनपर हमला नहीं करेगी। उन्होंने साफ तौर पर ये बात कही कि अडानी और अंबानी पैसे नहीं देते, इसलिए वो निशाना बनते हैं। उन्हें निशाना ही इसलिए बनाया जाता है, ताकि पैसे निकाले जा सकें। यही नहीं, वो इंटरव्यू में अडानी से एक बैग भरकर बड़े नोटों में रुपए माँग रहे हैं, ताकी चुनाव प्रचार में उसका इस्तेमाल कर सकें। अधीर रंजन ने खुद को बीपीएल कैंडिडेट यानी गरीब कैंडिडेट बताया है।

द रेड माइक को दिए इंटरव्यू के दौरान पत्रकार ने अधीर रंजन चौधरी से पूछा कि ‘आप पार्लियामेंट में तो इन्हें बुरा-भला कहते हैं, अडानी-अंबानी को…. इस पर अधीर रंजन ने कहा.. ‘जरूर कहते हैं, जरूर कहते हैं। वो तो (पैसे) नहीं भेजे, इसलिए कहते हैं, भेजने से चुप हो जाते।’ इसके बाद पत्रकार खुद हैरान होकर हंसने लग जाते हैं और फिर से क्लियर करते हैं, “अगर पैसा भेज दे तो आप चुप हो जाओगे?” इसके जवाब में अधीर रंजन चौधरी हाँ में सिर हिलाते हैं। उनके इंटरव्यू का ये हिस्सा अब सोशल मीडिया पर भी वायरल हो रहा है।

वैसे, द रेड माइक के यूट्यूब चैनल पर ये पूरा इंटरव्यू देखा जा सकता है। इस हिस्से को 12.12 मिनट से देखें।

अधीर रंजन चौधरी बहरामपुर लोकसभा सीट से 5 बार के सांसद हैं। वो लोकसभा में नेता प्रतिपक्ष भी हैं। वो अपनी सीट पर छठीं बार जीत दर्ज करने के लिए मैदान में हैं। अधीर रंजन चौधरी ने ममता बनर्जी को चैलेंज दिया है कि वो बहरामपुर से टीएमसी उम्मीदवार के साथ खड़ी होकर एक बार ये बात बोल दें कि चुनाव में पठान की हार उनकी हार है और पठान की जीत उनकी जीत है, तो वो मान लेंगे। चौधरी ने कहा कि ममता बनर्जी जाकर लोगों में फूट डाल रही हैं।

अधीर रंजन ने दावा किया है कि ममता बनर्जी हिंदू वोटरों को धमका रही है और मुस्लिम वोटरों को बहका रही हैं कि अधीर रंजन को वोट न दिया जाए। अधीर ने दावा किया कि ‘ममता बनर्जी मुस्लिमों से कह रही हैं कि इस दादा (अधीर-हिंदू) को वोट नहीं देना है, भाई (यूसुफ पठान) को देना है।’ वो हिंदुओं को भी डरा रही हैं। अधीर रंजन चौधरी ने दावा किया कि पश्चिम बंगाल में कॉन्ग्रेस चौंकाने वाला प्रदर्शन करेगी।

केरल के CM को नदवाथुल मुजाहिदीन ने दिखाई आँख, इस्लामी संगठन को दिव्यांगों को आरक्षण मिलने से भी दिक्कत

केरल की लेफ्ट डेमोक्रेटिक सरकार पर केरल का मुजाहिद्दीन ग्रुप भड़क गया है। इस्लामिक रिफॉर्मिस्ट मुजाहिद मूवमेंट का हिस्सा केरल नदवाथुल मुजाहिदीन (केएनएम) ने कहा कि एलडीएफ सरकार को अनुकंपा रोजगार योजना के खिलाफ मुस्लिम कोटा खड़ा करके सरकारी नौकरियों में मुस्लिम आरक्षण को कम करने की अपनी योजना छोड़ देनी चाहिए। केरल के कोझिकोड में हुई बैठक के बाद मुजाहिद ग्रुप के अध्यक्ष टीवी अब्दुल्ला कोया मदनी ने ये बयान जारी किया।

मनोरमा की रिपोर्ट के मुताबिक, केएनएम ने कहा कि सरकार ने पहले दिव्यांग व्यक्तियों को मुसलमानों की बारी सौंपकर मुस्लिम आरक्षण को खा (गायब कर) लिया था। संगठन ने कहा, “मुसलमानों को बड़ा नुकसान हो रहा है क्योंकि उनके हिस्से को बारी-बारी से अन्य कमजोर वर्गों को फायदा पहुँचाया जा रहा है, जो एक गंभीर मसला है। ये पूरा मामला सरकारी नौकरियों में ओबीसी आरक्षण से जुड़ा है, जो केरल में 40 प्रतिशत है। केरल में मुस्लिमों को आरक्षण ओबीसी आरक्षण के अंदर ही दिया जाता है।

केरल में आरक्षण के लिए 40 प्रतिशत कोटे से 11 एझावा-थियास और बिलावास समुदाय के लिए है, तो 10 प्रतिशत मुस्लिमों के लिए। लैटिन कैथोलिकों और एंग्लो इंडियंस के लिए 4, हिंदू और ईसाई नादरों के लिए 3, ईसाई धर्म अपनाने वाली अनुसूचित जाति के लिए दो, विश्वकर्ना के लिए 2, धीवरस के लिए 2 और अन्य वर्गों को कुल मिलाकर 6 सीटें दी जाती है। वहीं, अंतिम ग्रेड सेवा के बाहर के पदों के लिए 40 में से 14 पद एझावा-थियास और बिलावास के लिए, 12 मुस्लिमों के लिए, 4 लैटिन कैथोलिक और एंग्लो इंडियंस, दो हिंदू-ईसाई नादर के लिए, एक एससी से ईसाई धर्म में परिवर्तित लोगों के लिए, 3 विश्वकर्मा, 1 धीवत और 3 अन्य ओबीसी के लिए हुई थी।

ये नियुक्तियाँ पूर्व-निर्धारित रोटेशन के आधार पर की जाती हैं। ऐसा कहने के बाद, केरल लोक सेवा आयोग (केपीएससी) ने निर्दिष्ट किया है कि सेवा के दौरान मरने वाले सरकारी कर्मचारियों के रिश्तेदारों की नियुक्ति या मारे गए, स्थायी रूप से विकलांग या लापता सैन्य कर्मियों के रिश्तेदारों की नियुक्ति के लिए रोटेशन नियम लागू नहीं होगा।

केरल नदवथुल मुजाहिदीन (केएनएम) ने कहा कि किसी भी बहाने से सामाजिक रूप से वंचित मुस्लिम अल्पसंख्यक समुदाय को संविधान द्वारा दिए गए अधिकारों को छीनना अस्वीकार्य है। इसमें कहा गया है, “कोटा प्रणाली में नए, कम विशेषाधिकार प्राप्त समुदायों को शामिल करने के कारण मुस्लिम कोटा कम होने पर सरकार को आँख नहीं बंद करना चाहिए। राज्य सरकार को उन सांप्रदायिक ताकतों की मदद नहीं करनी चाहिए जो संविधान द्वारा दिए गए मुस्लिम आरक्षण को खत्म करने की कोशिश कर रही हैं।” बैठक में अध्यक्ष अब्दुल्ला कोया मदनी, उपाध्यक्ष पीपी उन्नीन कुट्टी मौलवी, नूर मुहम्मद नूरशा, हुसैन मदवूर, प्रोफेसर एनवी अब्दुल रहमान और एपी अब्दु समद सहित अन्य लोग उपस्थित थे।

कॉन्ग्रेसी अजीत अंजुम: जनता ने ही उतार दिया पत्रकार वाला चोंगा, अमेठी गए थे कॉन्ग्रेस के लिए स्नेह और स्मृति ईरानी पर सवाल लेकर

एक बड़े चैनल के संपादक से यूट्यूबर बने अंजीत अंजुम कॉन्ग्रेस के प्रति अपने झुकाव और भाजपा से दुराग्रह के लिए जाने जाते हैं। उनकी ऐसी छवि बनने के पीछे उनकी पत्रकारिता में दिखने वाला उनका स्टैंड ही है। यह बात पढ़े-लिखे और चीजों को समझने वाले बहुत पहले से जानते हैं, लेकिन अब आम लोग भी इस बात को समझने के लिए हैं कि उनका झुकाव कॉन्ग्रेस की ओर है।

अजीत अंजुम के पहले से ही ऐसे कई वायरल हैं, जिनमें उन्हें नैरेटिव गढ़ने के लिए झेंपना पड़ा है। हालाँकि, इससे उन पर खास फर्क नहीं पड़ता। लोग कितना भी उन्हें लताड़ें, लेकिन वे भाजपा के प्रति पूर्वाग्रह और कॉन्ग्रेस के प्रति समर्पित हैं कि इससे उन्हें कोई खास फर्क नहीं पड़ता। चेहरे पर पहले की भाँति बेशर्म और कुटिल मुस्कान उनकी हर वीडियो में दिखती रहती है। साथ में पत्रकार बने रहने का नाटक भी।

हाल ही उनका एक वीडियो सामने आया है। आया क्या है, उनके ही कथित रिपोर्टिंग की काटा हुआ क्लिप है। इस समय वे उत्तर प्रदेश के अमेठी लोकसभा क्षेत्र में ग्राउंड पर कॉन्ग्रेस के पक्ष में एकतरफा रिपोर्टिंग कर रहे हैं। यहाँ से भाजपा की ओर से स्मृति ईरानी उम्मीदवार हैं, जबकि कॉन्ग्रेस ने गाँधी परिवार के वफादार केके शर्मा को मैदान में उतारा है। यहाँ से कभी राहुल गाँधी भी दो-दो हाथ करते थे।

वीडियो में मोपेड पर बैठे एक बुजुर्ग से बात करते हुए अजीत अंजुम दिखाई देते हैं। बुजुर्ग के साथ एक महिला भी मोपेड पर पीछे बैठी हुई है। जब अंजीत अंजुम के साथ शख्स की बातचीत होती है तो वह भी बीच-बीच में कुछ-कुछ बोलती है। इस शख्स से अजीत अंजुम पूछते हैं, ‘इस बार कौन लड़ रहा है कॉन्ग्रेस से?” इस पर वह शख्स कहता है, “यहाँ तो ये पता नहीं कि कौन लड़ रहा है।”

इसके बाद यूट्यूबर अंजुम कहते हैं, “यहाँ से किशोरी लाल शर्मा हैं। राहुल गाँधी नहीं हैं। पता है कि नहीं?” इस पर वह व्यक्ति कहता है, “मुझे इतना अनुभव नहीं है। मुझे इतना पता है कि आप कॉन्ग्रेस से हो। ठीक है भाई।” इसके बाद अजीत अंजुम असहज हो जाते हैं। वे संकुचित भाव से कहते हैं, अरे भाई मैं तो पत्रकार हूँ। मैं किसी पार्टी से नहीं हूँ। मैं तो पूछने के लिए…।”

अजीत अंजुम का मानना है कि उम्मीदवार का नाम अनाउंस होने के बाद कार्यकर्ताओं को जो शॉक लगा था, उससे वे उबर गए हैं। उनका मानना है कि अब कॉन्ग्रेस के लिए प्रियंका गाँधी प्रचार कर रही हैं। ऐसे में भाजपा को किशोरी लाल शर्मा कड़ी मेहनत करते नजर आते हैं। इस बीच वे एक व्यक्ति को पकड़ते हैं, जो अपना घर बनवा रहा होता है। उससे बातचीत करते हैं तो वह भाजपा को वोट देने की बात करता है।

इस पर अंजुम पूछते हैं क्यों? तो वह कहता है कि जो राष्ट्रहित में बात करेगा, विकास की बात करेगा वही आगे जाएगा। तब तक अजीत अंजुम हमेशा की तरह थोड़ा असहज नजर आते हैं। वो उस शख्स से कहते हैं- ‘जैसे-जैसे… समझाओ।’ इसके बाद वह शख्स राम मंदिर बनने, धारा 370 हटने, आतंकवाद खत्म होने, गुंडागर्दी खत्म होने की बात करता है। अजीत अंजुम कहते हैं कि स्मृति ईरानी ने यहाँ क्या काम किया है।

इस पर वह शख्स किए गए कामों को गिनवाता है। अजीत अंजुम कॉन्ग्रेस के नैरेटिव को आगे करते हुए फिर पूछते हैं कि ‘इसके पहले राजीव गाँधी और राहुल गाँधी के समय में भी काम तो हुआ था ना?’ इस पर वह शख्स कहता है कि हाँ उन लोगों ने भी काम कराए थे। अजीत अंजुम महंगाई, बेरोजगारी आदि की बात करते हैं। हालाँकि, व्यक्ति तर्क देता है कि महंगाई के साथ-साथ मजदूरी और वेतन भी बढ़ा है।

मकान बनवाने वाला शख्स बगल में बने पानी टंकी की ओर इशारा करके कहता है कि इसे स्मृति ईरानी ने बनवाया है। उसने कई सारे नाम गिनवाए। इसी बीच अंजीत अंजुम वहाँ के एक मजदूर से बात करते हैं। वह कहता है कि पानी टंकी से पानी नहीं आता है। इसके बाद यूट्यूबर महोदय की शरीर में जहाँ कहीं भी बाँछें होंगी, वह खिल जाती है। वे जिराफ की तरह सिर उठाकर उस शख्स को देखने लगते हैं, जिसने पानी टंकी को स्मृति ईरानी का कार्यों में गिनवाया था।

उस शख्स को बुलाकर अजीत अंजुम पूछते हैं इसमें पानी तो आता नहीं है, लेकिन आप इसकी बड़ाई कर रहे थे। इस पर वह व्यक्ति तर्क देता है, लेकिन अजीत अंजुम उस पानी को पकड़ कर बैठे हुए तो जो दूर-दूर तक वहाँ मौजूद नहीं था। यानी उस योजना की अभी शुरुआत नहीं हुई थी। इसके बाद वे चेहरे पर मुस्कान लिए विजयी भाव से आगे की ओर बढ़ जाते हैं, स्मृति ईरानी की खामियाँ खोजने और कॉन्ग्रेस द्वारा कराए गए कार्यों की गिनती गिनाने।

‘मैं जिसे कहूँगा उसे वोट देना पड़ेगा’: घर में घुस कर BJP समर्थक के पिता राधेश्याम पाठक को मार डाला, 4 सपा समर्थकों पर आरोप, यूपी पुलिस ने दर्ज की FIR

उत्तर प्रदेश के कुशीनगर जिले में चुनावी बहस के दौरान राधेश्याम पाठक नाम के बुजुर्ग की हत्या कर दी गई है। हत्या का आरोप शम्भू चौधरी और उसके 3 साथियों पर लगा है। मृतक को बचाने दौड़े उसके परिजनों को भी बेरहमी से पीटा गया है। पुलिस ने कुल 4 आरोपितों के खिलाफ FIR दर्ज कर के जाँच शुरू कर दी है। घटना शुक्रवार (10 मई, 2024) की है।

मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक, घटना कुशीनगर के थाना क्षेत्र नेबुआ नौरंगिया की है। यहाँ के गाँव बघपरना में शुक्रवार को एक मंदिर के पास कुछ लोग पेड़ की छाया में बैठ कर चुनावी चर्चा कर रहे थे। मृतक के परिजनों का आरोप है कि इस दौरान शम्भू चौधरी और उसके साथ मौजूद लोगों ने समाजवादी पार्टी को वोट देने की बात की। मौके पर अमित पाठक नाम का युवक भी था। उसने भारतीय जनता पार्टी को वोट देने की वकालत की।

इसी बात पर दोनों पक्षों में गर्मागर्म बहस हो गई। आरोप है कि भाजपा को वोट देने की बात पर शम्भू भड़क उठा। उसने कहा, “मैं जिसे कहूँगा उसे वोट देना पड़ेगा।”

कुछ लोगों ने बीच-बचाव कर के मामले को शांत किया और दोनों पक्षों को अपने-अपने घर भेजा। आरोप है कि इसी रात शम्भू चौधरी अपने कुछ साथियों के साथ अमित पाठक के घर पहुँच गया। यहाँ पहुँच कर आरोपित ने पहले पीड़ितों को गालियाँ दीं और बाद में पूरे परिवार को बेरहमी से पीटने लगा। इस पिटाई की चपेट में अमित के अलावा उनके 55 वर्षीय पिता राधेश्याम पाठक और 21 साल की बहन रीतू भी आ गईं। शोरगुल सुन कर लोग जमा हुए।

पीड़ितों ने डायल 112 पर कॉल किया, जिसके बाद पुलिस के जवान आते दिखे तो हमलावर धमकी देते हुए भाग निकले। आरोपितो के नाम शम्भू, सीपू, टिंकल चौधरी बताए जा रहे हैं। सभी हमलावर शंभू के पारिवारिक सदस्य बताए जा रहे हैं।

रीतू और अमित के साथ उनके पिता राधेश्याम को अस्पताल ले जाया गया। भाई-बहन को मेडिकल कॉलेज रवींद्र नगर में भर्ती करवाया गया लेकिन राधेश्याम की हालत गंभीर देखते हुए उन्हें गोरखपुर मेडिकल कॉलेज रेफर कर दिया गया। अस्पताल में इलाज के दौरान राधेश्याम की मौत हो गई। उनके शव का पोस्टमार्टम करवाया गया। मृतकों के परिजनों ने कुछ स्थानीय निवासियों के साथ मिल कर थाने के आगे शव रख कर प्रदर्शन किया है। प्रदर्शन के दौरान शम्भू चौधरी और उसके साथियों पर कड़ी कार्रवाई की माँग उठाई गई है।

पुलिस ने लोगों को समझा कर शांत किया। पुलिस ने मामले को आपसी कहासुनी का बताते हुए घटना की FIR दर्ज कर ली है। कई संगठनों ने राधेश्याम पाठक की हत्या पर नाराजगी जताई है। घटना के बाद आरोपित फरार हो गए हैं जिनकी तलाश की जा रही है। तनाव को देखते हुए गाँव में पुलिस बल तैनात कर दिया गया है।

‘मौत के समय उत्तेजित था ईसा मसीह का लिंग’: चर्च में सबके सामने पादरी ने कहा, ईसाई भीड़ ने अश्लील उपदेश पर किया हंगामा, सजा की माँग

इंग्लैंड में एक पादरी ने ईसा मसीह की मौत को लेकर बड़ा अजीब सा दावा किया है। थॉमस मैकहेल नाम के पादरी ने कहा है कि यीशु की मौत के समय उनका लिंग (प्राइवेट पार्ट) उत्तेजित अवस्था में था। इस दावे को अश्लील बताते हुए उस समय चर्च में मौजूद लोगों ने पादरी पर कार्रवाई की माँग की है। यह घटना रविवार (5 मई 2024) की है। हालाँकि अभी तक पादरी उसी चर्च में अपने पद पर कायम है, जिससे लोगों में और असंतोष फैल रहा।

यह मामला ब्रिटेन के डरहम का है। यहाँ ब्लैकहिल, कॉन्सेट, काउंटी क्षेत्र में आवर ब्लेस्ड लेडी इमैक्युलेट नाम का एक चर्च है। यह चर्च कैथोलिक विचारधारा के ईसाइयों का है। इस चर्च के पादरी 53 वर्षीय थॉमस मैकहेल हैं। यहाँ रविवार (5 मई) को पादरी ने कथित तौर पर अश्लील उपदेश दिया है।

इस उपदेश के दौरान चर्च में लगभग 100 लोग मौजूद थे। इनके बीच पादरी थॉमस ने अपने उपदेश में ईसा मसीह की मृत्यु के वक्त का जिक्र किया। उन्होंने दावा किया कि जब यीशु की मौत हुई तो उनका लिंग उत्तेजित अवस्था में था।

मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक पादरी ने आगे कहा कि जब ईसा मसीह को क्रूस पर टाँगा गया था तो उनकी बॉडी का पूरा खून शरीर के निचले हिस्से में चला गया था। लिंग में उत्तेजना की थॉमस ने यही वजह बताई।

इस उपदेश के दौरान चर्च में कई लोग अपने परिवार के साथ बैठे थे। उन्होंने इसे अश्लील बयान माना है। बाद में इस बयान पर हंगामा खड़ा हो गया। पादरी थॉमस को उनके पद से हटाने और सजा देने की माँग उठने लगी। हालाँकि तमाम विरोधों के बावजूद पादरी अभी तभी अपने पद पर बना हुआ है। पादरी पर कार्रवाई न होने से कई लोगों में नाराजगी बताई जा रही है।