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‘ये तो मेरा लास्ट है’: रोहित शर्मा के ‘लास्ट’ वाली बातचीत पर क्यों मच रहा है हायतौबा? क्या उनके दिल में वही चल रहा, जो उनके फैन्स के मन में है…?

आईपीएल 2024 के 60वें मैच से पहले केकेआर की सोशल मीडिया टीम ने एक वीडियो पोस्ट किया, जिसमें रोहित शर्मा और केकेआर के असिस्टेंट कोच अभिषेक नायर दिख रहे थे। ये वीडियो अब डिलीट कर दिया गया है। दरअसल, इस वीडियो में रोहित शर्मा और अभिषेक नायर की आपसी बातचीत थी, जिसकी वजह से क्रिकेट फैन्स तमाम सवाल खड़े करते दिखे, खासकर ‘मेरा क्या भाई, मेरा तो लास्ट है।’ इस वीडियो के बाद ही सवाल उठने लगा कि क्या रोहित शर्मा अब सन्यास लेने जा रहे हैं?

37 साल के रोहित शर्मा भारतीय टीम के ऑल-फॉर्मेट कप्तान हैं। अगले महीने से वेस्टइंडीज और अमेरिका में होने जा रहे टी-20 विश्वकप में वो भारतीय टीम की कमान भी संभाल रहे हैं। वो इस साल से पहले तक आईपीएल की सबसे सफल फ्रेंचायजी में से एक मुंबई इंडियंस के कप्तान थे, जिनकी कप्तानी में मुंबई इंडियंस 5 बार आईपीएल की चैंपियन बनी, लेकिन इस साल रोहित शर्मा को कप्तानी से हटा दिया गया और हार्दिक पांड्या को कप्तानी दे दी गई। खास बात ये है कि मुंबई इंडियंस इस साल बेहतर प्रदर्शन कर पाने में नाकाम रही और हार्दिक पांड्या को भी खूब भला-बुरा सुनने को मिला, ऐसे में KKR vs MI मैच से पहले रोहित शर्मा और अभिषेक नायर का वीडियो सामने आया, तो तमाम तरह के सवाल क्रिकेट प्रेमियों के मन में कौंधने लगे।

इस वीडियो में रोहित शर्मा अभिषेक नायर से बातचीत में कहते हैं, “एक-एक चीज चेंज हो रहा है। सब उनके ऊपर है। मैं ध्यान नहीं देता।” इसके आगे वो बोल रहे हैं, “जो भी है, मेरा घर है। मैंने मंदिर टेंपल (मंदिर) बनाया है।” और फिर आखिर में… “भाई मेरा क्या, मेरा तो लास्ट है।” ये तीन लाइनें काफी उठापटक की ओर इशारा कर रही हैं। वैसे, रोहित शर्मा और अभिषेक नायर किस विषय पर बात कर रहे थे, ये तो वही दो लोग सही से बता पाएँगे, लेकिन कयासों का दौर चल पड़ा है। केकेआर द्वारा डिलीट कर दिया गया वीडियो कई सोशल मीडिया हैंडल्स से डाला गया है, उसमें से एक खुद को रोहित शर्मा का फैन बताने वाले आर्यन का एक्स हैंडल भी है।

इस आईपीएल में रोहित शर्मा की बल्लेबाजी में निरंतरता की कमी दिखी है, लेकिन सबसे ज्यादा चर्चा जिस बात की हो रही है, वो है उन्हें मुंबई इंडियंस की कप्तानी से हटाने की। हालाँकि रोहित शर्मा ने जिस ‘लास्ट’ की बात की है, हो सकता है कि वो मुंबई इंडियंस की ओर से खेले जाने वाले मैच की बात हो।

चूँकि इस आईपीएल में मुंबई इंडियंस के पास प्ले ऑफ में जगह बनाने का कोई मौका नहीं रह गया है। ऐसे में हो सकता है कि रोहित शर्मा का केकेआर के खिलाफ मैच ही इस साल के आईपीएल का उनका आखिरी मैच भी हो, क्योंकि आईपीएल के तुरंत बाद भारतीय टीम को टी-20 विश्वकप की तैयारी में भी जुट जाता है। केकेआर के खिलाफ उनका बल्ला चलता भी रहा है। ऐसे में हो सकता है कि वो मुंबई इंडियंस के लिए इस साल केकेआर के खिलाफ खेलने के बाद अगला मैच न ही खेलें। आखिरी मैच एलएसजी के खिलाफ मुंबई में ही है। वो सकता है कि वो मैच में हिस्सा लेने की जगह अपने घर पर समय बिताएं, क्योंकि फिर उन्हें काफी लंबा समय वेस्टइंडीज और अमेरिका में बिताना है।

वैसे, अगर रोहित शर्मा आखिरी मैच एलएसजी के खिलाफ खेलते भी हैं, तो फिर आईपीएल के लिए अगले साल का इंतजार करना होगा। इसके लिए टीम में बहुत सारे बदलाव भी हो सकते हैं, क्योंकि अगले साल के आईपीएल से पहले मेगा ऑक्शन भी होना तय है। ऐसे में हो सकता है कि रोहित शर्मा ने मुंबई इंडियंस फ्रेंचायजी से बोल दिया हो कि वो अब मुंबई इंडियंस से नहीं खेलेंगे और उन्हें रिलीज कर दिया जाए। मेगा ऑक्शन में उन्हें खरीदने के लिए बहुत सारी टीमें कोशिश करती दिख जाएँगी, रोहित शर्मा का ऐसा रिकॉर्ड है कि कोई भी टीम उन्हें अपने साथ जोड़ना चाहेगी। ऐसे में ये देखने वाली है कि रोहित शर्मा के ‘लास्ट’ का क्या मतलब निकलता है। क्या वो केकेआर के खिलाफ मैच को ही मुंबई इंडियंस के लिए अपना आखिरी मैच खेल लेंगे, या वानखेड़े मैच तक का इंतजार करेंगे, ये कुछ ही समय में पता चल ही जाएगा।

हिंदी की कोई ज़रूरत नहीं है… फहाद फाज़िल की मलयालम फिल्म ‘आवेशम’ में राजभाषा का अपमान? सोशल मीडिया में छिड़ी बहस

मलयालम फिल्म ‘आवेशम’ के एक दृश्य में हिंदी भाषा का अपमान किए जाने का आरोप लगा है। बता दें कि दक्षिण भारत में कुछ तत्वों द्वारा हिंदी थोपे जाने का आरोप लगाते हुए अपने ही देश की भाषा का विरोध किया जाता है। यहाँ तक कि वहाँ के राजनेता भी इसकी फसल काटते हैं। फहाद फाज़िल को अल्लू अर्जुन अभिनीत तेलुगु फिल्म ‘पुष्पा’ (2021) में बतौर विलेन शोहरत मिली थी। मलयालम मनोरंजन इंडस्ट्री में उनकी कई फिल्मों को समीक्षकों द्वारा प्रशंसा मिली है।

‘आवेशम’ में भी उनके परफॉर्मेंस की तारीफ की जा रही है। 155 करोड़ रुपए बटोरने के बाद अब ‘Amazon Prime’ के जरिए OTT पर रिलीज किया गया है। फिल्म में फहाद फाज़िल ने ‘रंगा’ नाम का किरदार निभाया है। एक दृश्य में दिखाया गया है कि रंगा कॉलेज के सीनियरों को धमकी दे रहा है। इस दौरान पहले मलयालम में धमकी देता है, फिर कन्नड़ में, फिर हिंदी में और अंत में फिर से कन्नड़ में। इसके बाद उसका एक साथी उसे जाकर रुकने के लिए कहता है, क्योंकि धमकी लंबी खिंच गई।

इस दौरान वो कहता है कि सबको सन्देश मिल गया है, अब हमें निकलना चाहिए। इस दौरान रंगा पूछता है, “हिंदी की ज़रूरत नहीं है?” उसका साथी कहता है, “कोई ज़रूरत नहीं है।” जब सोशल मीडिया में इस संबंध में ध्यान दिलाया गया कि तो कई दक्षिण भारतीय कहने लगे कि भारत की कोई एक आधिकारिक भाषा नहीं है। ‘आवेशम’ को नियमों के विरुद्ध रिलीज के 28 दिन बाद ही OTT पर रिलीज कर दिया गया, जबकि केरल के फिल्म एक्सहिबीटर्स एसोसिएशन ने इसके लिए 42 दिन का विंडो रखा है।

इसी कारण ‘आवेशम’ को OTT पर रिलीज किए जाने के साथ ही थिएटरों ने निकाल बाहर किया। अब हिंदी भाषा के अपमान के आरोप के बाद नया विवाद पैदा हो गया है। वहीं कुछ फिल्म प्रशंसकों का कहना है कि दृश्य के हिसाब से ये डायलॉग उचित था, हिंदी का अपमान नहीं किया गया है। फ़िलहाल इस फिल्म को हिंदी में डब नहीं किया गया है। तमिलनाडु में भी कई नेता ‘हिंदी थोपने’ का आरोप लगा कर अपनी राजनीति चमकाते रहते हैं।

चीनी कहने पर क्यों भड़क जा रहे सिंगापुर के लोग? जिस देश की 74% जनसंख्या चायनीज, वहाँ भी चीन को लेकर नाराज़गी: TikTok वीडियो के बाद फिर छिड़ी बहस

शॉर्ट वीडियो एप TikTok पर एक वीडियो खासा वायरल हो रहा है, जिसमें खुद को चायनीज बताने जाने पर कुछ सिंगापुर के नागरिक भड़के हुए नज़र आ रहे हैं। चीनी मीडिया कह रहा है कि वो अपने जड़ों को भूल गए हैं। वहीं कुछ लोगों का ये भी कहना है कि ये 2 अलग-अलग पहचान हैं, इन्हें मिलाना ठीक नहीं। चीन से आए एक व्यक्ति ने वीडियो में कहा कि वो इससे हैरान है कि सिंगापुर के लोग चीन की मुख्य भूमि से खुद को जोड़े जाने को लेकर उदासीन थे, साथ ही उन्होंने खुद को चीन से ‘हमवतन’ मानने से भी इनकार कर दिया।

उक्त चीनी नागरिक का कहना है कि सिंगापुर के लोग अपनी संस्कृति को भूल गए हैं। साथ ही उसने सिंगापुर को चीनी बहुसंख्यक वाला देश करार दिया। 36 सेकेण्ड के उक्त वीडियो पर हजारों कमेंट्स और लाखों व्यूज आ रहे हैं। कई वर्षों से इस पर चर्चा चलती रही है कि सिंगापुर सांस्कृतिक रूप से चीन का हिस्सा है या नहीं। वैसे साम्राज्यवादी चीन हर इलाके पर अपना दावा किसी न किसी बहाने ठोकता रहा है। ‘The Singaporean Son’ नामक TikTok यूजर ने बताया कि सिंगापुर के एक चीनी व्यक्ति ने ‘हमवतन’ कहे जाने पर कैसी प्रतिक्रिया दी।

उसने बताया, “मुझे नहीं पता था सिंगापुर के व्यक्ति का चेहरा काला पड़ गया था। उसने कहा – ‘हम कब से हमवतन हैं? मैं सिंगापुरी हूँ, चीनी नहीं।’ इसके बाद मैं दंग रह गया और मैंने ऐसी बातें कहनी बंद कर दी।” एक यूजर का कहना था कि सिंगापुर के चीनी मूल के लोग खुद को चीनी मानते हैं, लेकिन कोई और उन्हें चीनी माने इससे नहीं घृणा है। एक यूजर ने कहा कि बाहर घूमने जाने वाले चायनीज लोगों ने अपनी ख़राब छवि बना रखी है – वो चिल्ला कर बात करते हैं, उनकी आदतें और उनका व्यवहार ठीक नहीं है।

वहीं इस दौरान कुछ लोगों ने ये भी ध्यान दिलाया कि सिंगापुर में जो चीनी मूल के लोग हैं वो चीन मेनलैंड से ताल्लुक नहीं रखते। दोनों के पूर्वज अलग-अलग थे। वीडियो में देखा जा सकता है कि चीन का TikTok यूजर जो सिंगापुर घूमने गया था, वो मंदारिन भाषा न बोल पाने और ट्रेनों पर चीनी भाषा में न लिखे होने के कारण सिंगापुर के लोगों की आलोचना कर रहा है। इस पर कई लोगों ने ध्यान दिलाया कि सिंगापुर में आम संपर्क की भाषा अंग्रेजी है।

विशेषज्ञ कहते हैं सिंगापुर और चीन के संबंधों को लेकर ये चर्चा नई नहीं है। उनका कहना है कि सिंगापुर को लंबे समय तक चीन का हिस्सा होने को लेकर भ्रमित किया जाता रहा है और ये सोच मुख्य रूप से अमेरिकी और यूरोपियन देशों से आती है। इसका कारण बताया जाता है कि दोनों देशों की विरासत में समानता है और सिंगापुर में चीनी बहुसंख्यक हैं। सिंगापुर की जनसंख्या 40 लाख है, जिसका 74% हिस्सा चीनी हैं। 13% मलेशियन हैं और 9% भारतीय।

वहीं 3% यूरेशियन जनसंख्या भी सिंगापुर में रहती है। द्वीपीय देश सिंगापुर उत्तर-पूर्वी एशिया से बाहर अकेला ऐसा देश है, जहाँ एक तिहाई से अधिक जनसंख्या चीनी है। सिंगापुर के लिए ये समस्या भी पैदा करता है। वहाँ की संसद में भी ये मामला उठ चुका है कि चीनी समझे जाने के कारण बाकी दुनिया से उसके रिश्तों पर असर पड़ता है। भाषा और संस्कृति के मामले में सिंगापुर के चीनी मूल के लोग चीन के साथ काम करने में सहज महसूस करते हैं। इससे सिंगापुर-चीन के द्विपक्षीय रिश्ते भी ठीक हुए हैं।

चूँकि सिंगापुर एक अलग स्वतंत्र देश है, इसीलिए अगर वहाँ के लोगों को किसी अन्य देश से जोड़ा जाएगा तो उन्हें बुरा लगेगा ही। TikTok के CEO चिउ शोउ ज़ी से अमेरिका में चीनी कम्युनिस्ट पार्टी से उनके कनेक्शन को लेकर पूछताछ हो चुकी है। उनसे उनकी राष्ट्रीयता को लेकर भी सवाल किए गए। अमेरिकी के एक सीनेटर ने कहा कि सिंगापुर में चीन की सबसे ज्यादा घुसपैठ और प्रभाव है। 1990 में सिंगापुर ने चीन के साथ कूटनीतिक संबंध स्थापित किए थे और पिछले दशक में चीन इसका सबसे बड़ा कारोबारी पार्टनर रहा है।

1 मोबाइल के लिए 71 सिम कार्ड… आपके अकाउंट से पैसे निकालने के लिए ऐसे होता था साइबर क्राइम: 28200 मोबाइल ब्लॉक, 20 लाख सिम का दोबारा वेरिफिकेशन

साइबर क्राइम से निपटने के लिए केंद्र सरकार ने सख्ती भरे कदम उठाए हैं। डिपार्टमेंट ऑफ टेलीकम्यूनिकेशन ने गृह मंत्रालय के आदेश पर 28,200 मोबाइल हैंडसेट ब्लॉक कर दिए हैं। इसके साथ ही इन हैंडसेट्स से जुड़े 20 लाख से अधिक मोबाइल नंबरों को फिर से वेरीफिकेशन के लिए कहा है। अगर इनका री-वेरिफिकेशन नहीं कराया जाता है, तो इन्हें ब्लॉक करने के आदेश दिए गए हैं।

पीआईबी द्वारा जारी रिलीज में बताया गया है कि दूरसंचार विभाग (Department of Telecommunications), गृह मंत्रालय (Ministry of Home Affairs) और राज्य पुलिस साइबर अपराध और वित्तीय धोखाधड़ी में दूरसंचार संसाधनों के दुरुपयोग को रोकने के लिए एक साथ आए। इस सहयोगात्मक प्रयास का उद्देश्य धोखेबाजों के नेटवर्क को नष्ट करना और नागरिकों को डिजिटल खतरों से बचाना है।

गृह मंत्रालय और राज्य पुलिस द्वारा किए गए विश्लेषण से पता चला है कि साइबर अपराधों ( Cyber crimes ) में 28,200 मोबाइल हैंडसेट का दुरुपयोग किया गया था। डीओटी ने आगे विश्लेषण किया और पाया कि इन मोबाइल हैंडसेटों के साथ आश्चर्यजनक रूप से 20 लाख नंबरों का उपयोग किया गया था। इसके बाद, दूरसंचार विभाग ने देश भर के दूरसंचार सेवा प्रदाताओं को 28,200 मोबाइल हैंडसेटों को ब्लॉक करने और इन मोबाइल हैंडसेटों से जुड़े 20 लाख मोबाइल कनेक्शनों का तत्काल पुन: सत्यापन करने तथा पुन: सत्यापन में विफल रहने पर कनेक्शन काटने के निर्देश जारी किए।

भारत सरकार ने सार्वजनिक सुरक्षा को ध्यान में रखते हुए ये कदम उठाया है, ताकि आम लोगों को साइबर फ्रॉड से सुरक्षित रखा जा सके। बता दें कि साइबर क्राइम के चलते हर साल लाखों मामले दर्ज किए जाते हैं, जिसमें फर्जी नंबरों का इस्तेमाल किया जाता है।

भारत सरकार ने 6 फरवरी 2024 को लोकसभा में आधिकारिक रूप से बताया था कि अकेले साल 2023 में ही साइबर फ्रॉड के कुल 11.28 लाख मामले सामने आए थे। पूरे देश में सबसे ज्यादा मामले उत्तर प्रदेश में दर्ज किए गए। दूसरे नंबर पर महाराष्ट्र राज्य रहा। देश में कुल 11.28 लाख साइबर क्राइम के केस में 7,488.6 करोड़ रुपये की राशि शामिल थी। सबसे अधिक रकम महाराष्ट्र में 990.7 करोड़ रुपये थी। 759.1 करोड़ रुपये के साथ तेलंगाना दूसरे स्थान पर रहा, जबकि यूपी में 721.1 करोड़ रुपए की धोखाधड़ी की गई। कर्नाटक में 662.1 करोड़ रुपये और तमिलनाडु में 661.2 करोड़ रुपये का फ्रॉड शामिल रहा। वहीं, साल 2022 में 1,391,457 साइबर सुरक्षा से संबंधित घटनाएं दर्ज की गईं।थी.

मुर्शिदाबाद की मजहबी आबादी की कोई बात नहीं करेगा: कलकत्ता हाई कोर्ट ने लगाई रोक, TMC विधायक हुमायूँ कबीर ने दी थी धमकी

कलकत्ता हाई कोर्ट ने शुक्रवार (10 मई 2024) को राजनीतिक दलों और व्यक्तियों को मुर्शिदाबाद की धार्मिक जनसंख्या के बारे में बात करके सांप्रदायिक रूप से भड़काऊ बयान देने पर रोक लगा दिया। दरअसल, मुर्शिदाबाद के सांप्रदायिक रूप से संवेदनशील क्षेत्रों में कुछ निर्वाचित प्रतिनिधियों द्वारा दिए जा रहे बयानों के संदर्भ में यह आदेश दिया है।

मुख्य न्यायाधीश टीएस शिवगणनम और न्यायमूर्ति हिरण्मय भट्टाचार्य की खंडपीठ ने कहा, “राष्ट्रीय जाँच एजेंसी (NIA) घटना की प्रारंभिक जाँच कर रही है और यह अदालत इसकी निगरानी कर रही है। इसलिए किसी भी व्यक्ति या संगठन या राजनीतिक दल को विषयगत मुद्दे के संबंध में या जनसंख्या और जिस धर्म से वे संबंधित हैं, उसके जनसांख्यिकी या आँकड़ों के संबंध में टिप्पणी करने पर रोक होगा।”

बताते चलें कि पश्चिम बंगाल का मुर्शिदाबाद में लगभग 70 प्रतिशत आबादी मुस्लिमों की है और यह जिला धार्मिक रूप से बेहद संवेदनशील है। यहाँ पिछले महीने रामनवमी के अवसर पर निकाले गए शोभायात्रा के दौरान बड़े पैमाने पर सांप्रदायिक हिंसा हुई थी। इसको लेकर पूरे देश भर की नजर इस जिले पर गई थी।

दरअसल, कलकत्ता उच्च न्यायालय दो याचिकाओं पर सुनवाई कर रही थी, एक विश्व हिंदू परिषद की और दूसरी मुस्लिम राष्ट्रीय मंच की। दोनों याचिकाओं में मुर्शिदाबाद के विभिन्न हिस्सों में दो समुदायों के बीच अचानक भड़की हिंसा की उचित जाँच की माँग की गई थी। एक पक्ष की ओर से पेश वकील ने पीठ को बताया कि एक निर्वाचित प्रतिनिधि ने हाल ही में कुछ ‘घृणास्पद भाषण’ दिये हैं।

उस वकील ने कहा, “निर्वाचित प्रतिनिधि ने कहा कि क्षेत्र में हिंदुओं की आबादी केवल 30 प्रतिशत है, जबकि बाकी 70 प्रतिशत मुस्लिम हैं। निर्वाचित प्रतिनिधि ने आगे कहा कि जब किसी मस्जिद पर हमला हुआ है तो बहुसंख्यकों (मुसलमानों) की ताकत है यहाँ प्रबल होना चाहिए।” कोर्ट को यह भी बताया गया कि पिछले महीने हिंसा के दौरान उपद्रवियों ने बम फेंके थे।

अतिरिक्त सॉलिसिटर जनरल (एएसजी) अशोक कुमार चक्रवर्ती ने पीठ को बताया कि यदि बम फेंके जाने का तर्क सही है तो यह राष्ट्रीय जाँच एजेंसी अधिनियम (NIA अधिनियम) के तहत अनुसूचित अपराधों के अंतर्गत आएगा। इसके बाद अदालत ने NIA को इस मामले में जाँच करके विस्तृत रिपोर्ट देने का निर्देश दिया है।

इस पर मुख्य न्यायाधीश शिवगणनम ने कहा, “अगर ऐसा है तो वर्तमान मामले में दर्ज की गई प्रथम सूचना रिपोर्ट (FIR) को किसी केंद्रीय एजेंसी को स्थानांतरित किया जाना चाहिए। लेकिन, उन्हें (एनआईए को) उन रिपोर्टों की जाँच करने के लिए कुछ उचित समय दें, जिनमें दावा किया गया है कि बमों का इस्तेमाल किया गया था।” इस मामले की अगली सुनवाई 13 जून को होगी।

बता दें कि मुर्शिदाबाद जिले के बहरामपुर विधानसभा सीट से तृणमूल कॉन्ग्रेस (TMC) विधायक हुमायूँ कबीर ने कुछ दिन पहले एक चुनावी जनसभा को संबोधित करते हुए कहा था, “तुम लोग (हिंदू) 70 फीसदी हो और हम लोग भी 30 फीसदी हैं। यहाँ पर तुम काजीपाड़ा का मस्जिद तोड़ोगे और बाकी मुसलमान हाथ पर हाथ रखकर बैठे रहेंगे, यह कभी नहीं होगा। भाजपा को मैं यह बता देना चाहता हूँ कि यह कभी भी नहीं होगा। अगर 2 घंटे के अंदर भागीरथी नदी में बहा न दिया तो मैं राजनीति छोड़ दूँगा।”

LinkedIn ‘पश्चिमी बीमारी’ को भारत पर क्यों थोप रहा, Ola के CEO ने किया विरोध तो डिलीट कर दिया पोस्ट: समझिए विदेशी कंपनियों का एजेंडा क्यों है भारत-विरोधी

Ola के संस्थापक भविष अग्रवाल ने LinkedIn पर निशाना साधा है। बता दें कि कभी दुनिया के सबसे अमीर व्यक्ति रहे बिल गेट्स द्वारा स्थापित Microsoft के अधिपत्य वाली कंपनी LinkedIn को सामान्यतः प्रोफेशनल सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म के रूप में देखा जाता है, जहाँ लोग करियर संबंधी बातें करते हैं, एक-दूसरे की प्रोफेशनल गतिविधियों को देखते हैं और ब्रांड्स के साथ नौकरियों के लिए संपर्क बनाते हैं। हालाँकि, अब ये अपना Woke एजेंडा भारत पर भी थोपने में लग गया है।

बताते हैं कि मामला क्या है। असल में हुआ कुछ यूँ कि भविष अग्रवाल के एक पोस्ट को LinkedIn ने हटा दिया। इस पोर्ट में उन्होंने ‘Pronoun Illness’ की बात की थी, यानी प्रोनाउन के इस्तेमाल को लेकर फैलाई जा रही बीमारी। बता दें कि LGBTQIA+ में रोज नया अक्षर जुड़ता जा रहा है और नए-नए लैंगिक पहचान सामने आते जा रहे हैं। कोई लड़की खुद को लड़का समझने लगती है, कोई लड़का पता कर रहा होता है कि वो क्या है, तो कोई खुद को दोनों समझता है।

अब दिक्कत ये है कि जो नैसर्गिक रूप से समलैंगिक हैं, उनका भारतीय सभ्यता में हमेशा सम्मान किया जाता है। भारत में तो ‘किन्नर अखाड़ा’ भी है, जिसके महामंडलेश्वर आचार्य लक्ष्मीनारायण त्रिपाठी हैं। भारत में किसी भी शुभ मौके पर ट्रांसजेंडर समुदाय को बुलाया जाता है, उन्हें तोहफों से नवाजा जाता है। बच्चे के जन्म से लेकर शादी-विवाह तक के मौकों पर उनका आना शुभ माना जाता है, उनका आशीर्वाद शुभ माना जाता है। हाँ, अचानक से उम्र के किसी पड़ाव में कोई खुद को कुछ समझने लगे तो ये मानसिक समस्या हो सकती है।

अब बताते हैं कि भविष अग्रवाल के उस पोस्ट में था क्या। उनका आरोप था कि LinkedIn का AI चैटबॉट भारत पर एक खास राजनीतिक विचारधारा को थोप रहा है। उन्होंने इसे असुरक्षित और पापपूर्ण करार दिया। उलटा LinkedIn ने इस पोर्ट को ही औसरक्षित की श्रेणी में डाल दिया। भविष अग्रवाल ने बताया कि इसी कारण हमें भारत में अपनी तकनीक और AI मॉड्यूल विकसित करने की आवश्यकता है। उनका मानना है कि ऐसा नहीं होता है तो हम विदेशी बहुराष्ट्रीय कंपनियों के हाथों मोहरा बनते रहेंगे।

असल में LinkedIn के AI से जब पूछा गया कि भविष अग्रवाल कौन हैं, तो उसने उनके लिए ‘He/Him’ प्रोनाउन की जगह ‘They/Them’ का प्रयोग किया। यानी, अब पुरुषों के लिए इस्तेमाल किया जाने वाला ‘He/Him’ और महिलाओं के लिए इस्तेमाल किया जाने वाला ‘She/Her’ को पश्चिमी जगत में ‘पक्षपाती’ बताया जाने लगा है। LGBTQIA+ एक्टिविस्ट कहते हैं कि प्रोनाउन पक्षपाती है, क्योंकि इसमें उनके समुदाय के लिए अलग व्यवस्था नहीं है।

इसीलिए, वो सबके लिए एक प्रोनाउन यानी ‘They/Them/Their’ के इस्तेमाल पर ज़ोर देते हैं। भविष अग्रवाल पुरुष हैं, वो खुद को पुरुष मानते भी हैं, ऐसे में उनके लिए इस तरह की शब्दावली का प्रयोग किया जाना उन्हें पसंद नहीं आया। उन्होंने इसे पश्चिमी सभ्यता की बीमारी करार दिया। उन्होंने कहा कि अब बहुराष्ट्रीय कंपनियाँ इसे भारत में भी फैला रही हैं। बता दें कि Woke दिखने के चक्कर में जैसा एक्टिविस्ट्स कहते हैं, वैसा ही अनुसरण करते हैं।

भविष अग्रवाल ने इस पोस्ट को डिलीट कर दिए जाने के बाद LinkedIn पर निशाना साधते हुए कहा कि वो उनके इस पोस्ट को भी हटा सकता है, लेकिन लेकिन वो इसका विरोध जारी रखेंगे। इसके बाद सोशल मीडिया में माँग उठने लगी कि भारत को अपना AI विकसित करने की ज़रूरत है। लोगों का पूछना है कि क्या हम विदेशी तकनीक के लिए हम अपने मूल्यों से समझौता कर रहे हैं। याद दिला दें कि वेस्ट में ये समुदाय अक्सर नंगा होकर सड़क पर प्रदर्शन भी करता है और खुद की उपस्थिति का एहसास जताता है।

8वीं फेल सलमान ने हिंदू लड़की को लव जिहाद में फाँस बनाया सेक्स टेप, ब्लैकमेल कर लाखों वसूले: मोबाइल रिपेयरिंग षड्यंत्र से 3-4 और हिंदू लड़कियाँ ट्रैप में

राजस्थान के जयपुर में सलमान खान को पुलिस ने ‘लव जिहाद’ के मामले में गिरफ्तार किया है। वो आठवीं फेल है, लेकिन मोबाइल की दुकान चलाता था। दुकान पर आने वाली हिंदू लड़कियों को पहचान छिपाकर फाँसता था और उन्हें प्रेम जाल में फँसाकर उनके वसूली करता था। ऐसे ही एक मामले में पुलिस ने उसे गिरफ्तार किया है।

सलमान खान ने अपनी पहचान छिपाकर 5-6 साल पहले एक हिंदू लड़की को अपनी दुकान पर ही प्रेम जाल में फँसाया, फिर उसके साथ संबंध बनाए और उसका वीडियो तैयार कर लिया। इस वीडियो के दम पर वो सालों से हिंदू लड़की के साथ वसूली कर रहा था। यही नहीं, हिंदू लड़की के नाम पर उसने स्कूटी तक खरीदवा रखी थी। वो लड़की को जबरन अपने साथ दिल्ली लेकर भाग गया था, जिसके बाद घरवालों की शिकायत पर उसे गिरफ्तार किया गया है।

मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक, ये मामला जयपुर के शिप्रा पथ थाना इलाके का है, जो मुख्यमंत्री आवास के सामने वाला इलाका है। यहाँ मोबाइल रिपेयरिंग शॉप चलाने वाले सलमान को दिल्ली से गिरफ्तार किया गया है। वो अपने साथ जयपुर की हिंदू लड़की को लेकर भागा था। पता चला है कि उसने हिंदू लड़की को पहचान छिपाकर अपने जाल में फँसाया था और दुष्कर्म का वीडियो रिकॉर्ड कर सेक्स टेप तैयार कर लिया था। इसे वायरल करने की धमकी देकर वो लाखों रुपए लड़की से ऐंठ चुका था। जी मीडिया के मुताबिक, वो तीन-चार अन्य हिंदू लड़कियों को इसी तरह से फंसा चुका था

जानकारी के मुताबिक, सलमान खान अजमेर का रहने वाला है और जयपुर में मोबाइल रिपेयरिंग की दुकान चलाता है। वो 29 अप्रैल को हिंदू लड़की को अपहृत कर फरार हो गया था। परिजनों की शिकायत के बाद पुलिस ने मामले की जाँच शुरू की और दोनों को दिल्ली से बरामद कर लिया। जाँच के दौरान पता चला कि सलमान ने पहले भी इसी तरीके से 3-4 अन्य हिंदू महिलाओं को फंसाया था। पुलिस ने सलमान खान का मोबाइल फोन जब्त कर फॉरेंसिक जाँच के लिए भेज दिया है।

शिप्रा पथ पुलिस थाना के SHO अमित कुमार ने इस मालमे की पुष्टि की है और बताया है कि आठवीं फेल सलमान अजमेर का रहने वाला है। उसने 5-6 साल से लड़की को प्रेम जाल में फँसा रखा था। उसने लड़की से अपने लिए उसी के नाम पर स्कूटी भी खरीदवाई थी।

इस मामले में पुलिस ने पीड़िता का बयान कोर्ट में दर्ज कराया है साथ ही आरोपित सलमान खान को कोर्ट के आदेश के बाद रिमांड पर लेकर पूछताछ की जा रही है। पुलिस ने बताया है कि सलमान खान कई हिंदू लड़कियों के साथ ये कर चुका है, ऐसी जानकारी मिल रही है। हालाँकि उसके फोन की फॉरेंसिक जाँच कराई जा रही है, जिसके बाद अन्य तथ्य सामने आ जा जाएँगे।

पाकिस्तान के पास एटम बम- ये कहकर अपने ही लोगों को डरा रही कॉन्ग्रेस: पीएम मोदी ने कहा- बम बेचने की नौबत, खरीदने वाला कोई नहीं

लोकसभा चुनाव 2024 के चौथे चरण से पहले प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ओडिशा के कंधमाल में हैं। वहाँ उन्होंने एक विशाल जनसभा को संबोधित किया और कॉन्ग्रेस एवं बीजू जनता दल (BJD) पर जमकर निशाना साधा। पीएम मोदी ने यहाँ भगवान जगन्नाथ को नमन किया और ओडिशा के लोगों के आशीर्वाद के लिए जनता का धन्यवाद दिया।

प्रधानमंत्री ने कहा, “ओडिशा मुझे अपार प्यार और समर्थन प्रदान करता है। मैं निस्वार्थ भाव से देश की सेवा करके आपके विश्वास का एक-एक कतरा चुकाऊँगा।” उन्होंने कहा, “26 साल पहले आज ही के दिन अटल बिहारी वाजपेयी जी ने पोखरण परीक्षण किया था। परमाणु परीक्षण ने दुनिया भर में भारतीयों को गर्व से भर दिया।”

कॉन्ग्रेस पर निशाना साधते हुए पीएम मोदी ने कहा, “वह पहली बार था जब भारत ने दुनिया को अपनी क्षमताओं से अवगत कराया। वहीं, कॉन्ग्रेस अपने ही लोगों को धमकाती रहती है। वे ‘पाकिस्तान एक परमाणु शक्ति है’ को दोहराकर भारतीयों के मन में भय का माहौल पैदा करते हैं।”

प्रधानमंत्री ने आगे कहा, “हमने ये दिखा दिया था कि देशभक्ति से ओत-प्रोत सरकार देशहित के लिए, देश की सुरक्षा के लिए, देश के लोगों को आशा-अपेक्षा के लिए कैसे काम करती है। एक वो दिन था, जब भारत ने दुनिया को अपने सामर्थ्य से परिचित कराया था। दूसरी तरफ कॉन्ग्रेस बार-बार अपने ही देश को डराने की कोशिश करती है। वो कहते हैं कि ‘संभल कर चलो, पाकिस्तान के पास एटम बम है।”

पीएम मोदी ने कहा, “ये मरे पड़े लोग, देश के आदमी को भी मार रहे हैं। वे पाकिस्तान के बम के बारे में बात करते हैं, लेकिन पाकिस्तान की हालत ऐसी है कि उन्हें नहीं पता कि इसे कैसे रखा जाए और वे अपने बम बेचने के लिए खरीदार की तलाश कर रहे हैं, लेकिन कोई भी उन्हें खरीदना नहीं चाहता, क्योंकि लोग उनकी गुणवत्ता के बारे में जानते हैं।”

प्रधानमंत्री ने कहा, “कॉन्ग्रेस के इसी कमजोर रवैये के कारण जम्मू-कश्मीर के लोगों ने 60 साल तक आतंक भुगता है। देश ने कितने आतंकी हमले झेले हैं। देश भूल नहीं सकता कि आतंकियों को सबक सिखाने के बजाय ये लोग आतंकी संगठनों के साथ बैठकें करते थे। 26/11 के मुंबई हमले के बाद इन लोगों की हिम्मत नहीं पड़ी कि आतंक के सरपरस्तों पर कार्रवाई करें।”

उन्होंने आगे कहा, “क्यों? क्योंकि कॉ़न्ग्रेस और इंडी गठबंधन को लगता था कि अगर हम कार्रवाई करेंगे तो हमारा वोटबैंक नाराज हो जाएगा। मैं आज कॉन्ग्रेस को दो टूक कहूँगा… भारत के मुसलमान… कोई इधर-उधर जाएगा, ऐसा मानने की कोशिश न करें। कॉन्ग्रेस के शहजादे आए दिन बयानबाजी कर रहे हैं। कॉन्ग्रेस वाले कान खोलकर सुन लें… कॉन्ग्रेस इस देश में मान्य विपक्ष भी नहीं बन पाएगा। वे 50 सीटों से नीचे सिमटने वाले हैं।”

दरअसल, मणिशंकर अय्यर ने एक बार फिर पाकिस्तान की पैरवी की थी। उन्होंने एक यूट्यूब चैनल से बात करते हुए कहा था, “पाकिस्तान एक संप्रभु मुल्क है, उनकी भी इज्जत है, उनकी इज्जत को कायम रखते हुए उनसे जितनी कड़ी बात करनी है करो… लेकिन बात तो करो। बंदूक को लेकर आप घूम रहे हो। उससे क्या हल मिला… कुछ नहीं। तनाव बढ़ता जाता है।”

उन्होंने आगे कहा था, “कोई भी पागल वहाँ आ जाए तो क्या होगा देश का। उनके पास एटम बम है। हमारे पास भी है, लेकिन किसी पागल ने बम को लाहौर स्टेशन में छोड़ा तो आठ सेकेंड के अंदर उसकी रेडियो एक्टिविटी अमृतसर पहुँचेगी। आप उसको इस्तेमाल करने को रोको। उससे बात करो, उसको इज्जत दो तो तभी जाकर वह अपने बम के बारे में नहीं सोचेंगे, मगर आपने उसको ठुकरा दिया तो फिर क्या होगा।”

32.20 करोड़ रुपया, सिर्फ एक स्कूटी और झोले का कनेक्शन: झारखंड का टेंडर घोटाला लालू के चारा घोटाले की कॉपी, तब मोपेड पर ढोए गए थे सांड

झारखंड की राजधानी राँची में प्रर्वतन निदेशालय (ED) की टीम ने सोमवार (6 मई 2024) राज्य सरकार में मंत्री आलमगीर आलम के निजी सचिव संजीव लाल और नौकर जहाँगीर आलम के घर से करोड़ों की नकदी बरामद की। इसके बाद दोनों लोगों से ED की लगातार पूछताछ चल रही है। इसमें चौंकाने वाले खुलासे सामने आ रहे हैं। ये कहानी कुछ-कुछ चारा घोटाले में मोपेड पर सांड ढोने जैसी है।

रिमांड में पूछताछ के दौरान प्रवर्तन निदेशालय को जानकारी मिली कि संजीव लाल का नौकर जहाँगीर आलम बैग एवं थैले में नोट भरकर अपनी स्कूटी से घर लाता था। उसका घर हरमू रोड के सर सैय्यद अपार्टमेंट स्थित फ्लैट में है। उसके इसी फ्लैट से ED ने 32.20 करोड़ रुपए बरामद किए थे। इसके साथ ही उसकी स्कूटी को भी जब्त कर ली गई है।

टेंडर घोटाले से जुड़े मामले में छापेमारी के बाद मिले इन रुपयों को लेकर दोनों आरोपित नई-नई कहानियाँ गढ़ रहे हैं। संजीव लाल ने बताया कि जहाँगीर के घर से बरामद रुपए उनके नहीं हैं। उन्होंने कहा, “समझ ही नहीं पा रहा हूँ कि जहाँगीर के घर इतने पैसे कहाँ से आए।” संजीव ने जहाँगीर से सिर्फ अपनी जान-पहचान बताई। उन्होंने कहा कि इसके अलावा, उनका और कोई रिश्ता नहीं है।

वहीं, जहाँगीर आलम ने भी साफ मना कर दिया कि ये रुपए उसके नहीं हैं। जहाँगीर आलम इस पैसे को किसी अनजान मास्क वाले व्यक्ति का पैसा बता रहा है। जहाँगीर का कहना है कि मास्क वाला आदमी कभी उसे फोन करके बुलाता है तो कभी दरवाजा खटखटाता है और बैग देकर चला जाता है। उसने कहा कि मास्क वाले से सवाल किए बिना ही वह रुपयों से भरा थैला अपने घर में रख लेता था।

ED संजीव लाल और उनके नौकर जहाँगीर आलम की रिमांड अवधि के दौरान ही ठेकेदार मुन्ना सिंह और राजीव सिंह से पूछताछ करने की तैयारी कर रही है। प्रर्वतन निदेशालय ने राँची के हटिया में सिंह मोड़ के रहने वाले राजीव के ठिकाने पर छापेमारी की थी, जिसमें 2.14 करोड़ रुपए बरामद किए गए थे। ईडी पूछताछ में इसका स्रोत जानने की कोशिश करेगी।

इसी राँची और उससे सटे आसपास के जिलों में लालू यादव के मुख्यमंत्री रहते हुए चारा घोटाले को अंजाम दिया गया था। उस दौरान भी कुछ ऐसी ही कहानी गढ़ी गई थी। डोरंडा कोषागार से लगभग 140 करोड़ रुपए की अवैध निकासी की गई थी। इस घोटाले में लाखों टन भूसा, पुआल, पीली मकई, बदाम खली, नमक आदि स्कूटर, बाइक और मोपेड पर ढोए गए थे।

इतना ही नहीं, हरियाणा से बढ़िया नस्ल के सांड़, बछिया और हाईब्रिड भैंस भी स्कूटर और मोपेड से झारखंड लाए गए थे। ये सब इसलिए किया गया था, ताकि यहाँ अच्छी नस्ल की गाय और भैंसों का उत्पादन किया जा सके। चारा घोटाले का यह सब खेल बिहार (तब झारखंड भी बिहार का ही हिस्सा था) के मुख्यमंत्री रहते हुए लालू यादव की निगरानी में सन 1990 से 1992 के बीच खेला गया है।

अब झारखंड अलग हो गया है, लेकिन घोटालों का दौर रुकने का नाम ले रहा है। मुख्यमंत्री रहते हुए हेमंत सोरेन पर जमीन खरीद से लेकर खनन तक के आरोप हैं। फिलहाल वे घोटाले में ही जेल में बंद हैं। उसी राज्य में जहाँ मोपेड सो गाय-सांड ढोए गए थे, अब स्कूटी से नोटों की गड्डियाँ ढोई जा रही हैं। वह भी अनजान मास्क वाले व्यक्ति के देने पर।

करवा चौथ पर ‘खूब खाऊँगी’ बोलने वाली करीना कपूर खान बाइबिल पर फँस गई: ईसाई समाज में रोष, हाई कोर्ट से नोटिस भी

बॉलीवुड ने फिल्मों और उसके संवादों के माध्यम से हिंदू समाज और उसकी संस्कृति का बड़े ही भद्दे ढंग से मजाक उड़ाया है। ये बात किसी फिल्म विशेष की नहीं, बल्कि एक दौर की है। हिंदू धर्म, उसके त्योहारों, उसके आचार-विचार, उसकी आस्था, उसकी मान्यता, उसके विश्वास से लेकर उसके अनुयायियों को बेहद फूहड़ता से दिखाने का जैसे फिल्मों में रिवाज सा चल पड़ा है। हालाँकि, किसी दूसरे समुदाय के साथ इस तरह का प्रयोग मुश्किल में डालने वाला होता है।

दरअसल, बॉलीवुड अभिनेत्री एवं सैफ अली खान की बीवी करीना कपूर खान ने अपनी गर्भावस्था को लेकर एक पुस्तक लिखी है। उस पुस्तक के शीर्षक में उन्होंने बाइबिल शब्द का प्रयोग किया है। इसको लेकर ईसाई समाज के लोगों में रोष फैल गया। आखिरकार क्रिस्टोफर एंथनी नाम के एक वकील ने मध्य प्रदेश हाई कोर्ट में याचिका डालकर अभिनेत्री के खिलाफ मामला दर्ज करने की माँग की है।

इस मामले में मध्य प्रदेश उच्च न्यायालय के न्यायमूर्ति गुरपाल सिंह अहलूवालिया ने गुरुवार (9 मई 2024) को करीना कपूर खान को नोटिस जारी किया। वकील एंथनी ने फरवरी 2022 में अतिरिक्त सत्र न्यायालय द्वारा पारित एक आदेश को चुनौती देते हुए हाई कोर्ट का रुख किया था। अतिरिक्त सत्र न्यायालय ने करीना के खिलाफ मामला दर्ज करने की माँग वाली उनकी याचिका खारिज कर दी थी।

याचिकाकर्ता ने कहा कि करीना ने अपनी किताब ‘करीना कपूर खान्स प्रेग्नेंसी बाइबिल‘ के शीर्षक में ‘बाइबिल’ शब्द का उपयोग करके ईसाई समुदाय की भावनाओं को ठेस पहुँचाया है। इसलिए करीना कपूर खान के खिलाफ प्रथम सूचना रिपोर्ट (FIR) दर्ज की जानी चाहिए। करीना के अलावा याचिका के अन्य प्रतिवादी अमेज़ॅन ऑनलाइन शॉपिंग, जगरनॉट बुक्स और पुस्तक के सह-लेखक हैं।

दरअसल, वकील एंथनी ने शुरू में जबलपुर के एक स्थानीय पुलिस स्टेशन में शिकायत दर्ज कराई थी, जिसमें उन्होंने कहा था कि करीना कपूर खान के कृत्य ने ईसाई समुदाय की भावनाओं को आहत किया है। इसके पीछे उन्होंने तर्क दिया था ‘पवित्र पुस्तक बाइबिल’ की तुलना अभिनेत्री की गर्भावस्था से नहीं की जा सकती है। हालाँकि, पुलिस ने मामला दर्ज करने से इनकार कर दिया।

इसके बाद वकील एंथनी ने मजिस्ट्रेट अदालत का रुख किया और इसी तरह की राहत की माँग करते हुए एक निजी शिकायत दर्ज कराई। हालाँकि, मजिस्ट्रेट ने भी इस आधार पर याचिका खारिज कर दी कि शिकायतकर्ता यह बताने में विफल रहा कि ‘बाइबिल’ शब्द के इस्तेमाल से ईसाई समुदाय की भावनाएँ कैसे आहत हुईं।

इसके बाद एडवोकेट क्रिस्टोफर एंथनी ने अतिरिक्त सत्र न्यायालय का रुख किया, लेकिन वहाँ भी उन्हें राहत नहीं मिली और कोर्ट ने उनकी याचिका खारिज कर दी। इसके बाद क्रिस्टोफर मध्य प्रदेश हाई कोर्ट के दरवाजे पर पहुँचे। यहाँ पर हाई कोर्ट ने नोटिस जारी कर सात दिन में जवाब माँगा है।

दरअसल, हिंदुओं के दिवाली के त्योहार, मंगलसूत्र-बिंदी, कन्यादान आदि पर बॉलीवुड वाले मज़ाक उड़ाते रहते हैं। हालाँकि, अपनी सहिष्णुता की वजह से हिंदू समाज चुप रह जाता है। वहीं, हिंदुओं की तरह वे दूसरे समाज का माखौल उड़ाने की कोशिश करते हैं तो उन्हें परेशानी भोगनी पड़ती है। चाहे वह किसी मुद्दे पर फिल्म बनानी हो या फिल्म का कोई दृश्य हो, गैर-हिंदू समुदाय बॉलीवुड को ऐसा करने की स्वतंत्रता नहीं देता है। इसके कई उदाहरण सामने आ चुके हैं।

यही करीना कपूर हैं, जिन्होंने करवा चौथ का माखौल उड़ाया था। करीना कपूर ने एक बार कहा था, “जब बाकी औरतें भूखी रहेंगी, मैं खूब खाऊँगी। क्योंकि मुझे अपना प्यार साबित करने के लिए भूखे रहने की कोई भी जरूरत नहीं है।” नसीरुद्दीन शाह की बीवी रत्ना पाठक शाह ने भी इसे पिछड़ेपन से जोड़ दिया था।

रत्ना पाठक ने कहा था,  “एक बार मुझसे किसी ने पूछा था कि आप करवा चौथ का व्रत क्यों रखती। तो मैंने यही सोचा कि मैं क्या पागल हूँ क्या? ये बहुत ही अजीब है कि पढ़ी-लिखी महिलाएँ भी अपने पति की लंबी उम्र के लिए व्रत रख रही हैं।” उन्होंने यह भी कहा था कि इससे पता चलता है कि असहिष्णुता कितनी बढ़ गई है कि करवा चौथ तक का प्रश्न किया जाता है।