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साहिम ने लड़कों से मिलने पर गर्लफ्रेंड की कर दी हत्या: हिंदू सिपाही के नाम लिखवा दी गई FIR, फोन में मिली तस्वीरें तो कब्र से निकलवाई गई लड़की लाश

पीलीभीत में 13 अप्रैल को एक 16 साल की लड़की शीरीं का शव मिला था। माता-पिता नेपाल में ईंट-भट्टे पर काम करते थे, दादा-दादी घर पर रहते थे। सुबह शव मिला, तो सामान्य मौत मान कर घर वालों और गाँव वालों ने दफना दिया। माँ-बाप के आने से पहले ही शीरीं के शव को दफना दिया गया था, वो उसका चेहरा भी आखिरी बार नहीं देख पाए थे। इस मामले में स्थानीय थाने की चौकी पर तैनात रहे एक हिंदू सिपाही पर उँगली उठी और शीरीं के ही गाँव की एक लड़की, जो सिपाही की गर्लफ्रेंड थी। लेकिन अब मामला बदल चुका है, क्योंकि असली हत्यारे का चेहरे सामने आ चुका है। इस केस में शीरीं का प्रेमी साहिम ही हत्यारा निकला है। हम बताते हैं सिलसिलेवार तरीके से, कि आखिर इस मामले में क्या कुछ हुआ…

मोबाइल में मिली तस्वीर से उलझा मौत का राज

मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक, पीलीभीत के जहानाबाद थाना क्षेत्र का ये मामला बेहद चौंकाने वाला निकला है। यहाँ की शीरीं की हत्या के 23 दिन बीत जाने के बाद शीरीं की माँ ने उसके टूट चुके मोबाइल को रिपेयर कराया। चूँकि अब तक शीरीं की मौत को सभी सामान्य मान रहे थे, लेकिन माँ ने जब फोन ठीक कराया, तो गैलरी में मिली उसे एक सिपाही और गाँव की ही लड़की के आपत्तिजनक वीडियो और तस्वीर… इन वीडियो और तस्वीरों में यूपी पुलिस का सिपाही राजकुमार था, जो स्थानीय थाने में कभी तैनात रहता था। उस तस्वीर के आधार पर माँ-बाप पहुँचे एसपी के पास और फिर मामला दर्ज कराया।

पहले सिपाही पर गया सभी का शक

एसपी के आदेश के बाद शीरीं को दफनाने के 23 दिन बाद 7 अप्रैल शीरीं का शव कब्र से निकाला गया। पोस्टमार्टम हुआ, तो पता चला कि शीरीं की हत्या की गई थी। माता-पिता ने शीरीं के फोन में मिली तस्वीर के आधार पर सिपाही राजकुमार, अपने ही गाँव की सिपाही की प्रेमिका, एक लड़के साहिम और एक अन्य के खिलाफ एफआईआर लिखवा दी। खूब हो हल्ला-मचा और फिर पुलिस पर आरोप लगाए गए कि वो सिपाही को बचा रही है। लेकिन जाँच के बाद मामला खुल गया।

…फिर साहिम ने बताया, कैसे दिया हत्याकांड को अंजाम

शीरीं हत्याकांड में नामजद साहिम के साथ लड़की की खूब बातचीत होती थी। सिपाही राजकुमार के पास शीरीं की गाँव की दो लड़कियाँ शीरीं के फोन से ही बात करती थी। ऐसे में साहिम से पूछताछ हुआ, तो वो मामले को घुमाने लगा। लेकिन अंत में वो टूट गया। उसने जो खुलासा किया, वो हैरान करने वाला था।

दरअसल, साहिम और शीरीं की प्रेम कहानी 4 साल से चल रही थी। दोनों के बीच संबंध भी थे। उस रात शीरीं ने साहिम को अपने पास अपने घर में बुलाया था, लेकिन वो तय समय से पहले ही उसके घर पहुँच गया। इस दौरान साहिम ने देखा कि दो लड़के शीरीं के कमरे से निकल रहे हैं, जिसके बारे में उसने शीरीं से सवाल जवाब किए। अपने सवालों के संतोषजनक जवाब न पाकर वो गुस्से में पागल हो गया और शीरीं का गला दबा दिया। उसने एक हाथ से शीरीं का गला दबाया और दूसरे हाथ से उसका मुँह।

शीरीं की साँसे रुक गई, तो साहिम उसे बिस्तर पर ही लिटाकर भाग निकला। दूसरे दिन से वो बाकी गाँव वालों की तरह ही मामले से अंजान बना रहा। जब शीरीं के शव का पोस्टमार्टम हुआ, और हत्या की वजह गला दबाकर मारने की निकली, तब भी वो अंजान बनता रहा और खुद को बेकसूर बताता रहा। चूँकि शीरीं के फोन से राजकुमार नाम के सिपाही की तस्वीर निकली थी, इसलिए सारा ठीकरा उसके ही सर फोड़ता रहा, लेकिन पुलिस ने सख्ती की तो वो टूट गया और सच सामने आ गया। अब पुलिस ने उसे गिरफ्तार कर सलाखों के पीछे भेज दिया है।

चुनाव प्रचार के लिए केजरीवाल को अंतरिम जमानत बन जाएगी मिसाल: सुप्रीम कोर्ट में ED ने किया विरोध, कहा- इलेक्शन कैंपेन मौलिक अधिकार नहीं

शराब घोटाले में जेल में बंद दिल्ली के मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल को लोकसभा चुनाव को देखते हुए अंतरिम जमानत देने के सुप्रीम कोर्ट के सुझाव का प्रवर्तन निदेशालय (ED) ने गुरुवार (9 मई 2024) को जोरदार विरोध किया। सुप्रीम कोर्ट में दाखिल हलफनामे में केंद्रीय एजेंसी ने कहा कि चुनाव प्रचार का अधिकार न तो मौलिक अधिकार है और ना ही कानूनी या संवैधानिक अधिकार है।

अपने हलफनामे में ED ने कहा, “अभिसाक्षी की जानकारी में अभी तक किसी भी राजनीतिक नेता को चुनाव प्रचार के लिए अंतरिम जमानत नहीं दी गई है। ये तो चुनाव लड़ने वाला उम्मीदवार भी नहीं हैं। यहाँ तक कि चुनाव लड़ने वाले उम्मीदवार को भी चुनाव प्रचार के लिए अंतरिम जमानत नहीं दी जाती है, अगर वह हिरासत में है।”

केंद्रीय एजेंसी ने कहा, “पिछले 5 वर्षों में लगभग 123 चुनाव हुए हैं। यदि चुनाव प्रचार के उद्देश्य से अंतरिम जमानत दी जानी है तो किसी भी राजनेता को गिरफ्तार नहीं किया जा सकता है और ना ही न्यायिक हिरासत में नहीं रखा जा सकता है, क्योंकि चुनाव पूरे वर्ष होते रहते हैं।” ED ने तर्क दिया कि संघीय ढाँचे में हर चुनाव महत्वपूर्ण है।

हलफनामे में आगे कहा गया है, “हर स्तर पर हर राजनेता यह तर्क देगा कि यदि उसे अंतरिम जमानत पर रिहा नहीं किया गया तो उसे अपरिवर्तनीय परिणाम भुगतने होंगे। अकेले धनशोधन निवारण अधिनियम (PMLA) के तहत वर्तमान में कई राजनेता हैं, जो न्यायिक हिरासत में हैं और उनके मामलों की जाँच सक्षम अधिकारियों द्वारा की जा रही है।”

केंद्रीय एजेंसी प्रवर्तन निदेशालय ने आगे तर्क दिया, “अदालतें उनकी (नेताओं की) हिरासत को बरकरार रख रही हैं। गैर-पीएमएलए अपराधों में पूरे देश में कई राजनीतिक नेता न्यायिक हिरासत में होंगे। इसलिए ऐसा कोई कारण नहीं है कि याचिकाकर्ता द्वारा विशेष उपचार की विशेष प्रार्थना को स्वीकार किया जाए।”

एजेंसी ने कहा कि अगर चुनाव प्रचार के लिए अंतरिम जमानत दी जाती है तो यह एक मिसाल कायम करेगा, जो सभी बेईमान राजनेताओं को अपराध करने और फिर चुनाव की आड़ में जाँच से बचने की अनुमति देगा। ED ने कहा कि एक राजनेता एक सामान्य नागरिक से विशेष दर्जे का दावा नहीं कर सकता। समन से बचने के लिए केजरीवाल ने 5 राज्यों में विधानसभा चुनाव का यही बहाना बनाया था।

बता दें कि इस मामले पर अगली सुनवाई शुक्रवार (10 मई 2024) को होगी। इस मामले में गिरफ्तारी के खिलाफ अरविंद केजरीवाल की याचिका पर सुनवाई करने वाली पीठ की अध्यक्षता करने वाले सुप्रीम कोर्ट के जस्टिस संजीव खन्ना ने कहा था, “हम शुक्रवार को अंतरिम आदेश (अंतरिम जमानत पर) सुनाएँगे। गिरफ्तारी को चुनौती देने से जुड़े मुख्य मामले पर भी उसी दिन फैसला किया जाएगा।”

लोकसभा चुनाव में आतंकी की एंट्री! मुंबई ब्लास्ट केस में 10 साल की जेल काट चुका है इब्राहीम मूसा: अब उद्धव ठाकरे के कैंडिडेट के लिए माँग रहा वोट

लोकसभा चुनाव 2024 में अब आतंकवादी भी चुनाव प्रचार कर रहे हैं, वो भी बाला साहेब ठाकरे के सुपुत्र उद्धव ठाकरे की पार्टी शिवसेना के कैंडिडेट के लिए। आतंकवादी का नाम इब्राहीम मूसा चौहान है। वो मुंबई ब्लास्ट 1993 के दौरान आतंकवादियों को हथियार सप्लाई करता था। उसे 10 साल जेल की सजा भी हुई थी। अब वो मुंबई नॉर्थ-वेस्ट सीट से शिवसेना-यूबीटी के कैंडिडेट अमोल कीर्तिकर के लिए चुनाव प्रचार कर रहा है और आम जनता से वोट माँग रहा है।

अमोल कीर्तिकर वही व्यक्ति हैं, जिन्हें टिकट देने के विरोध में संजय निरूपम ने कॉन्ग्रेस पार्टी छोड़ दी थी और उन्हें ‘खिचड़ी चोर’ कहा था। अमोल पर कोरोना काल के दौरान खिचड़ी घोटाले का आरोप है, उनसे ईडी भी पूछताछ कर चुकी है। हालाँकि इस लोकसभा चुनाव में अमोल कीर्तिकर उद्धव ठाकरे के भरोसेमंद साथी हैं और उनके लिए उद्धव ठाकरे ने कॉन्ग्रेस से भी पंगा लेने में गुरेज नहीं किया। अब उन्हीं अमोल कीर्तिकर के चुनाव प्रचार में इब्राहीम मूसा जैसा दुर्दांत आतंकी उतरा है और उनके लिए वोट माँग रहा है।

मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक, इब्राहीम मूसा के चुनाव प्रचार का वीडियो भी सोशल मीडिया पर वायरल हो रहा है। इस वीडियो को शेयर करते हुए प्रीति गाँधी ने लिखा, “मुंबई ब्लास्ट 1993 का दोषी इब्राहीम मूसा उद्धव ठाकरे की शिवसेना के कैंडिडेट अमोल कीर्तिकर के लिए प्रचार करता दिखा है। उसने मुंबई ब्लास्ट से पहले संजय दत्त के घर पर हथियार पहुँचाए ते। ये बात (इब्राहीम मूसा का चुनाव प्रचार) माफी के काबिल नहीं है।”

बीजेपी विधायक बोले, ये वीडियो में दिख रहा-कौन पाकिस्तान के साथ

बीजेपी एमएलए अमित साटम ने कहा कि उद्धव की पार्टी आतंकी के साथ है। कल शाम मुंबई नॉर्थ वेस्ट में प्रचार के दौरान उद्धव गुट के नेता के साथ 1993 बॉम्ब ब्लास्ट आरोपी इब्राहीम मूसा प्रचार कर रहा था। इससे साफ है कि कौन पाकिस्तान के साथ है। अब यह लड़ाई भारत और पाकिस्तान की है।

इब्राहीम मूसा का क्या था रोल?

बता दें कि इब्राहीम मूसा वहीं आतंकवादी है, जिसने 1993 के मुंबई सीरियल ब्लास्ट के समय हथियार सप्लाई किए थे। इस केस में उसे 10 साल की सजा हुई थी। बता दें कि 12 मार्च, 1993 को दोपहर में मुंबई स्टॉक एक्सचेंज पर जोर धमाका हुआ। इस धमाके से पूरी मुंबई में अफरा-तफरी मच गई थी और फिर 2.10 घंटे के भीतर ही मुंबई में 12 जगहों पर धमाके पर धमाके होते रहे।

इब्राहीम मूसा चौहान उर्फ बाबा चौहान वही व्यक्ति है, जिसने एके-56 राइफलों, मैगजीन्स, विस्फोटकों और हैंड ग्रेनेड्स की सप्लाई की थी। उसी ने एक्टर संजय दत्त के घर में अनीस इब्राहीम के कहने पर हथियार पहुँचाए थे। इब्राहीम मूसा के पास से एक एके-56 राइफल, 635 राउंड गोलियाँ, 10 मैगजीन्स और 25 हैंड ग्रेनेड्स भी बरामद हुए थे।

इन धमाकों में 257 लोगों की मौत हो गई थी, तो 700 से अधिक लोग घायल हो गए थे। इन धमाकों की वजह से मुंबई में सांप्रदायिक तनाव भी फैल गया था। इस धमाके में पहली बार आरडीएक्स का भी इस्तेमाल किया गया था। इस केस की सुनवाई टाडा की स्पेशल कोर्ट में हुई थी और इसे देश के सबसे अहम मुकदमों में से एक माना जाता है। इन धमाकों के पीछे दाऊद इब्राहीम जैसे दुर्दांत मुस्लिम माफिया का नाम सामने आया और वो देश छोड़कर फरार हो गया था।

(नोट-कई मीडिया रिपोर्ट्स, बीजेपी नेताओं के ट्वीट्स में इब्राहीम मूसा को इकबाल मूसा भी बताया जा रहा है। ये समाचार मुंबई ब्लास्ट 1993 केस में हथियारों की सप्लाई करने वाले इब्राहीम मूसा चौहार उर्फ बाबा चौहान के बारे में है, जो शिवसेना-यूबीटी के उम्मीदवार के लिए चुनाव प्रचार करता देखा गया। उसका वीडियो सोशल मीडिया पर वायरल भी हो रहा है।)

‘हिंदुआ सूरज’ के नाम से विख्यात महाराणा प्रताप सिंह से क्यों भय खाता था मुगल बादशाह अकबर? दिवेर के युद्ध में छिपी है कहानी

महाराणा प्रताप सिंह एक ऐसा नाम है, जिसे भारत ही नहीं बल्कि भारतीय उपमहाद्वीप में बेहद सम्मान और श्रद्धा के साथ लिया जाता है। महाराणा प्रताप सिंह को ‘हिंदुआ सूरज’ और ‘हिंदू अधिपति’ के नाम से जाना जाता है। वहीं, उनके परम प्रतापी दादा महाराणा संग्राम सिंह उर्फ राणा सांगा को ‘हिंदूपति’ के नाम से जाना जाता है। दोनों ही दादा-पोते का नाम इतिहास में स्वर्णाक्षरों में दर्ज है, जो भारत के रहने तक कभी मिट नहीं सकता।

मेवाड़ के महाराणा प्रताप सिंह को मुगल बादशाह अकबर के साथ संघर्ष के लिए जाना जाता है। हल्दी घाटी युद्ध का नाम आज भी भारत के बच्चे-बच्चे के जुबान पर है। यह एक ऐसा युद्ध था, जिसमें महाराणा प्रताप सिंह ने 20,000 की सेना के साथ अकबर की 80,000 की सेना के साथ महायुद्ध किया था। इस युद्ध के परिणाम को लेकर अलग-अलग दावे किए जाते हैं, लेकिन इस युद्ध ने महाराणा प्रताप सिंह के पराक्रम को साबित कर दिया।

इस युद्ध से इतर महाराणा प्रताप का अकबर की सेना का एक और युद्ध का जिक्र इतिहास की किताबों में मिलता है, जिसमें उन्होंने मुगल बादशाह की भारी-भरकम सेना को उन्होंने बुरी तरह परास्त किया था। यह युद्ध इतिहास में दिवेर के युद्ध के नाम से जाना जाता है। देश के लोग इस युद्ध के बारे में कम जानते हैं और हमारे देश के पाठ्य-पुस्तकों में हल्दी घाटी के युद्ध के बारे में तो बताया जाता है, लेकिन दिवेर के युद्ध के बारे में कभी नहीं बताया गया।

सन 1576 में हल्दी घाटी के युद्ध के बाद मेवाड़ का अधिकांश हिस्सा मुगलों के अधिकार क्षेत्र में चला गया था। हालाँकि, महाराणा प्रताप ने इस युद्ध के बाद भी हार नहीं मानी। वे लगातार अपने खोये राज्य को पाने के लिए संघर्षरत रहे। इसमें महाराणा का साथ स्थानीय भील समुदाय, जैन समाज के संतों, व्यवसायियों और स्थानीय लोगों ने खुले दिल से साथ दिया। हल्दी घाटी युद्ध के सात साल बाद यानी 1583 में राजस्थान के दिवेर में वह युद्ध लड़ा गया।

हल्दी घाटी युद्ध के तुरंत बाद महाराणा प्रताप ने भामा शाह और तारा शाह को मालवा का सूबेदार नियुक्त कर दिया। ये दोनों भाई जैन समाज से आते थे। इन लोगों ने आगे की लड़ाई के लिए धन इकट्ठा करना शुरू कर दिया। ये मुगलों द्वारा हिंदुओं से लूटे गए माल को जब्त करते और उसे महाराणा के सामने आगे के अभियान के लिए प्रस्तुत करते थे। महाराणा अपनी छोटी सी सेना के साथ अकबर के खिलाफ छापामार युद्ध जारी रखे हुए थे।

ओमेंद्र रत्नू की पुस्तक ‘महाराणा: सहस्त्र वर्षों का धर्मयुद्ध’ का अंश

उदयपुर पर अधिकार करने के बाद अकबर ने उसका नाम मुहम्मदाबाद कर दिया था और वहाँ मुगलों के सिक्के चलवा दिए थे। लेकिन, मई 1577 में महाराणा प्रताप ने उदयपुर पर अधिकार कर लिया इसका नाम फिर से बदलकर उदयपुर कर दिया। इसके पहले वे गोगूंदा को जीत चुके थे और अब अगला निशाना मोही था। महाराणा प्रताप ने भाटी क्षत्रियों के साथ मिलकर आखिरकार इसे भी आजाद करा लिया।

डॉक्टर ओमेंद्र रत्नू अपनी शोधपरक पुस्तक ‘महाराणा: सहस्र वर्षों का धर्मयुद्ध’ में लिखते हैं कि मोही के युद्ध को लेकर ‘अकबरनामा’ में अबुल फजल लिखा है, “राणा के आदमियों ने मोही पर हमला करके फसलें बर्बाद करना शुरू कर दिया। उस समय कुँवर मान सिंह कच्छवाहा मेवाड़ के पहाड़ी इलाकों में चले गए। मोही के थानेदार मुजाहिद बेग को सूचना मिली तो वह हथियारों सहित आया और आखिर में शहीद हो गया।”

मान सिंह वही व्यक्ति हैं, जो अकबर के सेनापति थे। कहा जाता है कि हल्दीघाटी के युद्ध में भी मान सिंह ने महाराणा प्रताप को घायलावस्था में युद्ध भूमि से निकलने में परोक्ष मदद की थी। मोही में भी महाराणा के आक्रमण के दौरान मान सिंह पहाड़ी इलाकों में चले गए थे। यानी सब कुछ बहुत सुनियोजित तरीके से हो रहा था और इसमें मान सिंह परोक्ष रूप से महाराणा प्रताप सिंह की मदद कर रहे थे।

इसके बाद बाँसवाड़ा का युद्ध हुआ, जिसमें कई क्षत्रिय कुलों ने मदद की और महाराणा प्रताप ने जीत हासिल की। अब बारी दिवेर की थी। इसके लिए महाराणा प्रताप के छोटे भाई शक्ति सिंह, भामा शाह, तारा शाह, चूड़ावत, शक्तावत सहित कई सरदार भी अपनी सैन्य टुकड़ी के साथ महाराणा से कदम ताल मिला रहे थे। महाराणा ने भीलों की सैन्य टुकड़ी को पहाड़ी इलाकों में तैनात किया गया था।

इतिहासकारों के अनुसार, सितंबर 1583 में विजयदशमी का वह दिन आ गया जब महाराणा प्रताप सिंह ने अपने सात साल के छापामार युद्ध को पूर्ण युद्ध में बदल दिया और लगभग 20,000 सैनिकों की सेना लेकर मेवाड़ पर हमला कर दिया। दिवेर युद्ध में दोनों पक्ष की सेनाएँ आमने-सामने थीं। राजपूतों के मन में युद्ध जीतने की प्रबल लालसा थी।

इस युद्ध में महाराणा प्रताप सिंह का मुकाबला एक बार फिर मुगल सेनापति बहलोल खाँ उज्बेक से हुआ। हल्दी घाटी के युद्ध में वह बच गया था, लेकिन दिवेर युद्ध में वह बच नहीं सका। महाराणा प्रताप ने उस पर ऐसा वार किया कि बहलोल खाँ दो हिस्सों में कट गया। बहलोल का घोड़ा भी आधा कट गया। महाराणा के इस रूप को देखकर क्षत्रिय जोश से भर गए और मुगलों की सेना को गाजर-मूली की तरह काट डाला।

इस तरह मुगल सेना को परास्त करके महाराणा प्रताप सिंह की सेना ने अपने पुरखों की जमीन मेवाड़ की एक-एक इंच भूमि को स्वतंत्र करा लिया। मुगलों के कुल 36 थानों को महाराणा ने अपने अधिकार में ले लिया। महाराणा प्रताप सिंह के इस अभियान में अन्य क्षत्रिय सरदारों के साथ-साथ उनके बेटे एवं मेवाड़ के उत्तराधिकारी कुँवर अमर सिंह भी साथ थे। दिवेर युद्ध में विजय मिली, लेकिन महाराणा यहीं नहीं रूके।

उन्होंने अपनी सेना को दो भागों में विभाजित किया। एक का नेतृत्व अपने बेटे अमर सिंह को दिया और उन्हें भागते हुए मुगल सैनिकों का पीछा करने का आदेश दिया। इस तरह अमर सिंह ने आमेर तक मुगल सेना का पीछा किया और उन्हें मौत के घाट उतार दिया। दूसरी तरफ, आधी सेना लेकर महाराणा खुद कुंभलगढ़ को चल पड़े। वहाँ महाराणा ने मुगल सूबेदार शाहबाज खान का वध करके कुंभलगढ़ को अपने कब्जे में ले लिया।

दिवेर युद्ध और उसके बाद के अभियानों में महाराणा प्रताप सिंह और उनकी सेना ने मुगल सैनिकों का वो संहार किया कि भारत का सबसे शक्तिशाली मुगल शासक कहा जाने वाला अकबर अपनी जिंदगी में फिर कभी मेवाड़ की ओर नहीं देखा। इस तरह महाराणा प्रताप 1597 ईस्वी तक निष्कंटक राज किया।

कहा जाता है कि महाराणा प्रताप सिंह मुगल काल के इतिहास के अकेले ऐसे राजा थे, जिन्होंने मुगलों से अपनी इंच-इंच भूमि को वापस जीता था। महाराणा के स्वर्गारोहण के बाद उनके पुत्र महाराणा अमर सिंह ने भी मुगलों के खिलाफ अपना अभियान जारी रखा। कहा जाता है कि मोही अभियान के बाद अकबर को मान सिंह पर शक हो गया था कि वे महाराणा के खिलाफ परोक्ष मदद कर रहे हैं।

घर से निकली हिंदू नाबालिग छात्रा को रेप के बाद फरियाद ने चलती ट्रेन के आगे फेंका, जबरन कराया था धर्मांतरण-7 महीने से कर रहा था परेशान: FIR की डिटेल

उत्तर प्रदेश के बरेली में एक मुस्लिम युवक ने हिन्दू नाबालिग का इस्लाम में मतांतरण करवा कर उसका रेप किया और फिर ट्रेन के सामने फेंक हत्या कर दी। नाबालिग का शव ट्रेन से कटने के बाद दो टुकड़ों में बंट गया। मुस्लिम युवक के नाबालिग के परिजनों ने FIR दर्ज करवाई है। उसे गिरफ्तार कर लिया गया है।

परिजनों द्वारा दर्ज करवाई गई FIR के अनुसार, फरीदपुर की रहने वाली एक 15 वर्षीय हिन्दू बालिका को पास का ही रहने वाला मुस्लिम युवक फरियाद पिछले सात महीने से परेशान कर रहा था। इसके कारण हिन्दू नाबालिग डरी हुई थी। हिन्दू नाबालिग ने अपने घर में बताया था कि फरियाद ने उसका एक माह पूर्ण इस्लाम में धर्म परिवर्तन करवा दिया है।

इलाके में नाई की दुकान चलाने वाला फरियाद हिन्दू नाबालिग को मारने की धमकी दे रहा था। वह उसके भाई को मारने की धमकी देता था। परिजनों ने FIR में बताया है कि नाबालिग अपने घर से बुधवार (8 मई, 2024) को निकली थी। नाबालिग अपने कॉलेज पढ़ाई लिखाई के काम से जा रही थी।

फरियाद हिन्दू नाबालिग को रास्ते से ही अपनी बाइक पर जबरदस्ती उठा ले गया। इसके बाद फरियाद ने हिन्दू नाबालिग के साथ दुष्कर्म किया। हिन्दू नाबालिग को इसके बाद फरियाद पास की रेलवे लाइन के पास ले गया और उसे चलती ट्रेन के सामने फेंक दिया।

चलती ट्रेन की चपेट में आने के कारण हिन्दू नाबालिग की कट कर मौत हो गई। उसका शव दो हिस्सों में बंट गया। यह घटना एक नदी के पुल पर हुई इसलिए शव पानी में भी गिर गया। मामले की सूचना मिलने पर हिन्दू नाबालिग के परिजन घटनास्थल पर पहुँचे और पुलिस को सूचना दी।

पुलिस ने मामले की सूचना मिलने के बाद फरियाद को गिरफ्तार कर लिया। फरियाद के खिलाफ हत्या, बलात्कार, POCSO और जबरन धर्म परिवर्तन करवाने समेत अन्य धाराओं में मामला दर्ज कर लिया गया है। ऑपइंडिया के पास इस मामले की FIR कॉपी मौजूद है। बरेली पुलिस मामले की जाँच कर रही है। मृतका के परिजनों ने उसका अंतिम संस्कार कर दिया है।

विवाद मैदान का, खुद के मजे के लिए KL राहुल का ‘परिवार’ घसीट लाए मीमबाज: फैन नहीं कोढ़ है वह मानसिकता जो क्रिकेटरों की बेटियों तक को नहीं छोड़ती

IPL 2024 में लखनऊ सुपरजायंट्स के कप्तान के एल राहुल और टीम के मालिक संजीव गोयनका के बीच हुई नोक-झोंक की वीडियो वायरल होने के बाद सोशल मीडिया पर कुछ लोग ज्ञानी बने हुए हैं। अलग-अलग प्रतिक्रियाएँ आ रही हैं। एक तरफ कुछ लोग कह रहे हैं कि संजीव गोएनका ने के एल राहुल पर चिल्लाकर बहुत गलत किया, टीम खरीदने का मतलब ये नहीं होता खिलाड़ी की इज्जत करना भूल जाएँ। वहीं कुछ ऐसे मीमबाज हैं जो खुद के मजे के लिए केएल राहुल की पत्नी अथिया शेट्टी और ससुर सुनील शेट्टी को भी घसीट लाए हैं। जैसे

पंचायत सीरीज का सीन शेयर करके दिखाया जा रहा है कि सुनील शेट्टी और आथिया शेट्टी अब बदला लेने के लिए गोएनका के घर जाएँगे।

इसके अलावा वीडियो क्लिप शेयर दिखा रहे हैं कि अथिया शेट्टी अब अपने पिता से जाकर कहेंगी कि जो उनके पति के साथ गोएनका ने किया है उसकी सजा सिर्फ मौत है।

अब संजीव गोएनका ने जो के.एल राहुल के साथ किया है वो बतौर दर्शक देखना हमारे लिए थोड़ा पीड़ादायक जरूरत है क्योंकि हम भावनात्मक नजरिए से इसे देख रहे हैं। संजीव गोएनका तो फिर भी उस टीम के मालिक हैं जिसके अच्छे प्रदर्शन न करने के कारण ऐसी वीडियो आई। गोएनका ने 2022 में 7, 090 करोड़ रुपए की बोली लगाकर लखनऊ सुपर जायंट्स फ्रेंचाइजी खरीदी थी। इसके बाद के एल राहुल को भी 17 करोड़ देकर टीम में शामिल किया था। उन्होंने के एल राहुल पर विश्वास जताया था और जब हालिया मैच में उस मालिक के मुताबिक टीम का प्रदर्शन नहीं हुआ तब उनकी नाराजगी बीच मैदान देखने को मिली।

यहाँ सवाल ये है कि गोएनका मालिक हैं और नफा-नुकसान देखते हुए उनका पारा बढ़-चढ़ रहा है और खिलाड़ी उनकी बात सुन भी रहा है क्योंकि वो जानता है कि सामने वाले व्यक्ति ने उसपर करोड़ों लगाए हैं। लेकिन, सवाल यहाँ ये है कि गोएनका जैसे व्यापार की दृष्टि से अपनी प्रतिक्रिया दे रहे हैं… वैसे हम कौन हैं? हम किस दृष्टि से क्रिकेटरों को भला-बुला बोलने लगते हैं और किस अधिकार से हम उनके परिजनों का मजाक बनाना, उनपर मीम्स बनाना शुरू कर देते हैं?

जो भी वीडियो गोएनका और के एल राहुल के बीच बातचीत होने की सामने आई है उस पर बतौर दर्शक हमारी चर्चा इस बात पर हो सकती थी कि गोएनका को अगर कुछ कहना भी था तो कमरे के भीतर कह सकते थे, उन्हें सबके सामने एक खिलाड़ी से इस ढंग में बात नहीं करनी चाहिए थी। लेकिन, इस चर्चा की जगह के एल राहुल को सोशल मीडिया पर घसीटना और कहना कि ये बेइज्जती तो शेट्टी परिवार की है, उन्हें इसका बदला लेना चाहिए… कितना उचित है?

आज केएल राहुल को चुप देख उनके लिए आवाज उठाने वाले और गोएनका को चिल्लाता देख उनकी आलोचना करने वाले वहीं लोग हैं जिनका जुड़ाव क्रिकेट से सिर्फ दर्शक दीर्घा तक का हैं। उन्होंने न तो टीम में कुछ इन्वेस्ट किया है और न ही खिलाड़ी में। उनके लिए खेल में हार-जीत पर दुख तभी उमड़ता है जब उनका फेवरेट प्लेयर अच्छा न खेले या पसंदीदा टीम मनमुताबिक प्रदर्शन न करे। नफा-नुकसान से उनका क्या लेना-देना… लेकिन फिर भी यही लोग समय-समय पर किसी न किसी खिलाड़ी को ट्रोल करते हुए मिलते हैं।

मसलन, अगर विराट कोहली पसंद है तो महेंद्र सिंह धोनी को भला-बुरा कहेंगे और अगर धोनी पसंद है तो रैना को… दुखद बात ये है कि ज्यादातर दफा ये ट्रोलिंग सिर्फ खिलाड़ी के प्रदर्शन पर नहीं होती। इसमें परिवार के लोगों को बुरी तरह घसीट लिया जाता है। आपको याद होगा कि विराट कोहली की परफॉर्मेंस जब टीम के मुताबिक नहीं होती थी तो उसमें किस तरीके से अनुष्का शर्मा को निशाना बनाया जाता था, उन्हें पनौती कहा जाता था, माँग उठती है कि अनुष्का का स्टेडियम में आना बैन किया जाए… इतना ही नहीं, 2021 का मामला याद करिए जब विराट कोहली और अनुष्का शर्मा की मासूम बेटी को रेप की धमकियाँ तक दे डाली गई थीं, वो भी सिर्फ इसलिए क्योंकि कोहली की टीम हार गए थे।

क्या किसी क्रिकेटर की जिंदगी निजी नहीं होती, उसे अपने बारे में हो रही गलत बातों से फर्क नहीं पड़ता….युजवेंद्र चहल का मामला देखें तो शादी के बाद से हर बात पर उनकी पत्नी धनश्री तस्वीरें और वीडियो साझा करके चहल का मजाक उड़ाया जाता है। उनपर निजी टिप्पणियाँ होती हैं। दूसरे क्रिकेटरों से उनके अफेयर की अफवाहें उड़ा दी जाती हैं। इसके बाद शुभमन गिल का उदाहरण अगर देखें तो पता चलता है कि सचिन तेंदुलकर की बेटी सारा तेंदुलकर के साथ उड़ी अफेयर की अफवाहों के बाद स्टेडियम में बैठे दर्शक उनके आने पर सारा-सारा चिल्लाने लगे थे। बिना इस बात को सोचे कि रिश्ते की बात हकीकत में ऐसा है भी या नहीं।

ऐसे तमाम उदाहरण हैं जब क्रिकेटरों की ट्रोलिंग के लिए सोशल मीडिया यूजर्स ने उनकी माँ-बहन और बेटी पर निजी हमले करने से भी गुरेज नहीं किया। धोनी को भी उनकी पत्नी और बेटी के नाम पर शुरू में बहुत गलत शब्द कहे जाते थे। बाद में जब उनका प्रदर्शन ठीक हुआ तो दोबारा उनकी तारीफों के पुल बँधने लगे, तब ये बात नहीं कही गई कि इसमें परिवार की तारीफ होनी चाहिए।

निजी हमले करने की आदत करने वाले लोग गोएनका और के एल राहुल की बातचीत में अथिया शेट्टी और सुनील शेट्टी को घेरने लगे हैं। दिखाया जा रहा है कि इस घटना से सुनील शेट्टी का सिर शर्म से झुक गया है। वहीं आथिया बदला लेना चाहती हैं… आप सोचिए कि परिवार को घसीटकर इस प्रकार की ट्रोलिंग करना एक क्रिकेटर के दिमाग पर कैसी छाप छोड़ता होगा। उसके मन में क्या हमेशा ये नहीं चलता होगा कि प्रदर्शन अगर उसका ठीक नहीं था, तो फिर उसके परिजनों को क्यों कोसा गया?

क्रिकेटरों के जीवन को भी सामान्य प्रोफेशन से जोड़कर देखिए। क्या किसी दफ्तर में कर्मचारी की गलती पर उसे बाहर से कोई आकर माँ-बहन की गाली देता है। वो भी वो शख्स जिसने न उसकी पढ़ाई में खर्च किया, न उसकी नौकरी लगने में मदद की, न उसे सैलरी देता है और न ही उसकी गलती से किसी का पर्सनल नुकसान नहीं हुआ… फिर क्रिकेटरों के साथ या अन्य खिलाड़ियों के साथ ऐसा क्यों होता है, सिर्फ इसलिए क्योंकि वो पब्लिक तक पहुँचने वाले प्रोफेशन का हिस्सा हैं।

बात केएल राहुल के समय में आथिया को घसीटने की हो, कोहली के समय में अनुष्का को उलटा बोलने की हो या फिर चहल की पत्नी के कैरेक्टर पर सवाल उठाने की हो… हर बार आप देखेंगें कि सोशल मीडिया पर नारीवाद का झंडा गाड़ने वाले लोग ही समय आने पर ऐसे मुद्दों पर मीम बनाकर हँसते दिखाई देते हैं। इनके लिए महिला की इज्जत सिर्फ नैतिकता के भाषणों में सीमित होती है वरना इनका असली चेहरा तब दिखाई देता है जब अपनी नाराजगी उतारने के लिए भी ये गाली भी वो देते हैं जिसमें किसी की माँ-बहन का नाम आए। आज ऐसे ही कुंठित लोग के एल राहुल जैसे खिलाड़ियों को ये समझा रहे हैं कि किस तरीके से उन्हें रिएक्ट करना चाहिए, जबकि हकीकत ये है कि ऐसे लोगों को ये सीखने की जरूरत है कि वो खुद को कैसे खेल से दूर रखें, ताकि खेल का भविष्य बना रहे।

PM मोदी का नेतृत्व और अडानी-अम्बानी का काम… भारत कैसे बन रहा आर्थिक महाशक्ति अमेरिकी मीडिया ने बताया: कहा- ऐसे और कारोबारी समूह करने होंगे तैयार

अडानी समूह के मालिक गौतम अडानी और रिलायंस के चेयरमैन मुकेश अम्बानी भारत के आर्थिक विकास में प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी का सहयोग कर रहे हैं। भारत को विकसित करने में इन दोनों समूहों का बड़ा योगदान है। यह बात अमेरिका मीडिया कह रहा है।

अमेरिकी मीडिया समूह CNN द्वारा प्रकाशित एक लेख में भारत के विकास में अम्बानी-अडानी के रोल पर चर्चा की गई है। लेख में कहा गया है कि यह दोनों समूह उन क्षेत्रों में काम कर रहे हैं जिनकी प्रधानमंत्री मोदी लगातार बात करते आए हैं और जिन्हें वह प्राथमिकता देते हैं।

लेख में बताया गया है कि पीएम मोदी, गौतम अडानी और मुकेश अम्बानी भविष्य की महाशक्ति भारत का निर्माण कर रहे हैं। यह तीनों ही लोग इसमें अहम भूमिका निभा रहे हैं। भारत के बीते कुछ वर्षों में चीन का विकल्प बनने और लगातर आर्थिक तरक्की करने की बात भी इस लेख में कही गई है।

इस लेख में अडानी और अम्बानी की अमेरिकी कारोबारी जॉन डी रॉकफेलर से भी तुलना की गई है। कहा गया है कि जिस प्रकार अमेरिका के विकसित होने के दौरान रॉकफेलर अमीर हुए थे, उसी प्रकार भारत के विकसित होने के साथ ही यह दोनों लोग सफलता की सीढ़ियाँ चढ़े हैं।

इसके अनुसार, भारत अभी उस बदलाव के दौर में है जिससे कई विकसित देश गुजर चुके हैं। भारत मोदी सरकार के कार्यकाल में विश्व की पाँचवी सबसे बड़ी अर्थव्यवस्था बना है। मोदी सरकार से पहले यह नौवें स्थान पर था। इस दौरान देश के लोगों की औसत कमाई में 55% से अधिक की वृद्धि हुई है।

भारत की जीडीपी पिछले 10 वर्षों में 83% तक बढ़ी है। जबकि इसी दौरान जर्मनी 14% ही बढ़ सका है और जापान 14% घट गया है। कभी अगली आर्थिक शक्ति माने जाने वाला ब्राजील भी इस दौरान 13% घट गया है। यह जीडीपी वृद्धि तब देखने को मिली है जब अर्थव्यस्था को यूक्रेन-रूस युद्ध और कोरोना महामारी जैसे झटके लगे हैं।

लेख में बताया गया है कि अडानी और अम्बानी उन क्षेत्रों पर काम कर रहे हैं जो कि भारत को विश्व की तीसरी सबसे बड़ी अर्थव्यवस्था बनाने में सहायता करेंगे। इसमें कहा गया है कि यह दोनों कारोबारी समूह भारत की तरक्की के बड़े साझेदार हैं। मुकेश अम्बानी ने जहाँ भारत में घर घर तक इन्टरनेट पहुँचाने में मदद की है तो वहीं गौतम अडानी इन्फ्रा के क्षेत्र में काम कर रहे हैं। अडानी समूह, एनर्जी, एअरपोर्ट और पोर्ट बनाने पर काम कर रहा है जो कि भारत की आर्थिक तरक्की को बढ़ाएंगे।

यह दोनों समूह भारत के एनर्जी क्षेत्र में बड़े निवेश कर रहे हैं और साथ ही स्वच्छ ऊर्जा के मामले में भी भारत को आगे बढ़ा रहे हैं। लेख में यह भी कहा गया है कि भारत अडानी और अम्बानी जैसे बड़े कारोबारी घरानों के बिना तेज तरक्की हासिल नहीं कर सकता, बल्कि इसे इनके जैसे और समूह खड़े करने होंगे।

अरविंद केजरीवाल की मुसीबत बढ़ी, दिल्ली शराब घोटाले में ‘आरोपी’ बना सकती है ED: 10 मई को दाखिल करेगी चार्जशीट, इसी दिन जमानत पर भी सुप्रीम कोर्ट में सुनवाई

दिल्ली के मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल की मुश्किलें बढ़ती नजर आ रही है। खबरों के मुताबिक, शुक्रवार (10 मई 2024) को ईडी कोर्ट में सप्लीमेंट्री चार्जशीट दायर कर सकती है। सूत्रों की मानें तो इस चार्जशीट में अरविंद केजरीवाल को मुख्य साजिशकर्ता यानी ‘किंगपिन’ के तौर पर ‘चिन्हित’ किया जाएगा, साथ ही इसमें बीआरएस की एमएलसी के कविता की भूमिका के बारे में भी कोर्ट को जानकारी दी जाएगी।

ईडी ने पिछली बार अरविंद केजरीवाल की हिरासत बढ़ाने की माँग के दौरान भी ये कहा था कि अरविंद केजरीवाल दिल्ली शराब नीति घोटाला मामले में ‘मुख्य साजिशकर्ता‘ हैं। जिसमें अरविंद केजरीवाल को नई शराब नीति 2021-22 को तैयार करने और लागू करने के लिए ‘साउथ ग्रुप’ से रिश्वत के रूप में कई करोड़ रुपए मिले। अतिरिक्त सॉलिसिटर जनरल (एएसजी) एसवी राजू ने राउज एवेन्यू कोर्ट को बताया था कि उन्होंने चुनाव लड़ने के लिए ‘साउथ ग्रुप’ के लोगों से 100 करोड़ रुपए की माँग की थी।

मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक, ईडी अपनी चार्जशीट में केजरीवाल का नाम मुख्य साजिशकर्ता और किंगपिन के तौर पर दर्ज करने जा रही है। ईडी का दावा है कि उसने अरविंद केजरीवाल से जुड़े मनी ट्रेल का पता लगा लिया है। ऐसे में अब ईडी द्वारा दिल्ली शराब घोटाले में सप्लीमेंट्री चार्जशीट दाखिल किए जाने के बाद उनकी मुसीबत बढ़ सकती है, क्योंकि उसी दिन यानी शुक्रवार को ही सुप्रीम कोर्ट में अरविंद केजरीवाल की अंतरिम जमानत पर फैसला हो सकता है।

सुप्रीम कोर्ट में जमानत याचिका पर सुनवाई

इस बीच, सुप्रीम कोर्ट में अरविंद केजरीवाल की जमानत याचिका पर शुक्रवार (10 मई 2024) को ही सुनवाई की जाएगी। सुप्रीम कोर्ट ने कुछ दिन पहले सुनवाई की थी, और मामले में दोनों पक्षों की दलीलों को सुना था। सुप्रीम कोर्ट ने कहा था कि लोकसभा चुनाव 2024 को देखते हुए अरविंद केजरीवाल को अंतरिम जमानत देने पर विचार किया जा सकता है।

गौरतलब है कि ईडी ने बीआरएस नेता के कविता को 15 मार्च को हैदराबाद से और अरविंद केजरीवाल को दिल्ली से 21 मार्च 2024 को गिरफ्तार किया था। दोनों ही नेताओं से मौके पर पूछताछ की गई थी, इसके बाद गिरफ्तारी को अंजाम दिया गया था। इससे पहले, ईडी ने अरविंद केजरीवाल को पूछताछ के लिए 9 समन जारी किए थे। हालाँकि, केजरीवाल किसी भी समन पर पेश नहीं हुए थे।

केंद्रीय जाँच एजेंसी का आरोप है कि वह घोटाले के मुख्य साजिशकर्ता थे और सीधे तौर पर शराब कारोबारियों से रिश्वत माँगने में शामिल थे। इस मामले में के कविता और अरविंद केजरीवाल, दोनों ही नेता तिहाड़ जेल में बंद हैं। दिल्ली शराब नीति घोटाले में मनीष सिसोदिया समेत कई आप नेता और ‘साउथ ग्रुप’ से जुड़े कई लोग पहले ही गिरफ्तार किए जा चुके हैं और उनके खिलाफ जाँच चल रही है।

‘लिव इन भारतीय संस्कृति के लिए कलंक’: छत्तीसगढ़ HC से अब्दुल को झटका, इलाहाबाद हाई कोर्ट ने कहा था- मुस्लिमों को इसका अधिकार नहीं

छत्तीसगढ़ उच्च न्यायालय ने एक मामले की सुनवाई करते हुए कहा कि आजकल लोग विवाह के बजाय लिव-इन रिलेशनशिप को प्राथमिकता देते हैं। ऐसा इसलिए है, क्योंकि जब दोनों भागीदारों के बीच चीजें काम नहीं करती हैं तो उनके पास सुविधाजनक रूप से अलग होने का विकल्प होता है। अदालत ने इसे घृणित बताते हुए हा कि भारतीय संस्कृति लिव-इन रिलेशन को अभी भी कलंक माना जाता है।

न्यायमूर्ति गौतम भादुड़ी और न्यायमूर्ति संजय एस अग्रवाल की खंडपीठ ने 30 अप्रैल 2024 को सुनवाई के दौरान कहा कि विवाह नाम की संस्था किसी व्यक्ति को सुरक्षा, सामाजिक स्वीकृति, प्रगति और स्थिरता प्रदान करती है। ये सभी चीजें लिव-इन-रिलेशनशिप कभी नहीं प्रदान करती है। इसलिए इसमें सबसे अधिक नुकसान महिलाओं का होता है।

पीठ ने कहा, “विवाह की तुलना में लिव-इन रिलेशनशिप को प्राथमिकता दी जाती है, क्योंकि जब पार्टनर के बीच चीजें काम नहीं कर पाती हैं तो यह एक सुविधाजनक पलायन प्रदान करता है।यदि जोड़ा अलग होना चाहता है, तो वे दूसरे पक्ष की सहमति के बावजूद और अदालत में बोझिल कानूनी औपचारिकताओं से गुज़रे बिना, एकतरफा अलग होने की स्वतंत्रता का आनंद लेते हैं।”

कोर्ट ने आगे कहा, “हमारे देश में किसी रिश्ते को शादी के रूप में संपन्न न करना सामाजिक कलंक माना जाता है क्योंकि सामाजिक मूल्यों, रीति-रिवाजों, परंपराओं और यहाँ तक कि कानून ने भी शादी की स्थिरता सुनिश्चित करने का प्रयास किया है।” कोर्ट ने कहा कि इस बात से इनकार नहीं किया जा सकता है कि विवाह टूटने पर महिलाओं को अधिक पीड़ा होती है।

बार एंड बेंच की रिपोर्ट के मुताबिक, कोर्ट ने अपने फैसले में आगे कहा, “इस बात से इनकार नहीं किया जा सकता है कि विवाह में समस्याएँ होती हैं और असमान रिश्ते हो सकते हैं, जिसमें एक साथी, आमतौर पर महिलाएँ, नुकसानदेह स्थिति में होती हैं। यह भी सच है कि शादी के माध्यम से रिश्ते टूटने पर महिलाओं को कहीं अधिक नुकसान उठाना पड़ता है, विशेष रूप से भारतीय संदर्भ में।”

कोर्ट ने कहा कि समाज के बारीकी से निरीक्षण से पता चलता है कि पश्चिमी देशों के सांस्कृतिक प्रभाव के कारण विवाह जैसी संस्था अब लोगों को पहले की तरह नियंत्रित नहीं करती है। इस महत्वपूर्ण बदलाव और वैवाहिक कर्तव्यों के प्रति उदासीनता ने संभवतः लिव-इन की अवधारणा को जन्म दिया है। लिव-इन रिलेशनशिप में महिलाओं की सुरक्षा की आवश्यकता जरूरी है।

कोर्ट ने कहा, “महिलाएँ अक्सर लिव-इन रिलेशनशिप के साथी द्वारा शिकायतकर्ता और हिंसा की शिकार होती हैं। विवाहित व्यक्ति के लिए लिव-इन रिलेशनशिप से बाहर निकलना बहुत आसान है और ऐसे मामले में अदालतें ऐसे संकटपूर्ण लिव-इन रिलेशनशिप से बचे लोगों और ऐसे रिश्ते से पैदा हुए बच्चों की कमजोर स्थिति पर अपनी आँखें बंद नहीं कर सकती हैं।”

दरअसल, अब्दुल हमीद सिद्दीकी नाम के एक व्यक्ति ने निचली अदालत के फैसले के खिलाफ हाई कोर्ट में याचिका दायर की थी। अब्दुल कविता गुप्ता नाम की एक हिंदू महिला के साथ लिव-इन रिलेशनशिप में रहता था। इससे 31 अगस्त 2021 को एक बच्चा पैदा हुआ। बाद में दोनों के रिश्ते में खटास आ गई और महिला ने 10 अगस्त 2023 को बच्चे सहित अब्दुल का घर छोड़ दिया।

इसके बाद अब्दुल ने बच्चे की कस्टडी की माँग करते हुए पारिवारिक अदालत के समक्ष परिवाद दायर किया था। अब्दुल ने दावा किया था कि वह अच्छा कमाता है। इसलिए वह बच्चे की देखभाल करने में अधिक सक्षम है। हालाँकि, फैमिली कोर्ट ने अब्दुल की अर्जी खारिज कर दी और बच्चे की कस्टडी देने से इनकार कर दिया। इसके बाद अब्दुल ने हाई कोर्ट में याचिका दायर की।

सारे तथ्यों को देखने के बाद हाई कोर्ट ने कहा कि वह इस तथ्य से अवगत है कि भारतीय संस्कृति में लिव-इन रिलेशनशिप को अभी भी कलंक माना जाता है। भारतीय सिद्धांतों की सामान्य अपेक्षाओं के विपरीत यह एक आयातित दर्शन है। इसके बाद कोर्ट ने अब्दुल की याचिका खारिज कर दी।

कोर्ट ने कहा, “भारतीय परंपरा में प्रत्येक नागरिक के पास स्वयं की भावना होती है, जो अद्वितीय होती है और आयातित परंपराओं के साथ भ्रमित होने की संभावना नहीं होती है। समाज और परंपरा में आपस में जुड़ी संस्कृति को नष्ट करने के लिए लिव-इन रिलेशनशिप को अपनाने से ज्यादा कोई घृणित उद्देश्य नहीं हो सकता है।”

इलाहाबाद हाई कोर्ट में भी ऐसा ही आया मामला

ऐसे ही एक अन्य मामले में इलाहाबाद उच्च न्यायालय की लखनऊ पीठ ने बुधवार (8 मई) को फैसला सुनाया कि अगर किसी मुस्लिम की बीवी या शौहर जिंदा है तो वे लिव-इन रिलेशनशिप में अधिकारों का दावा नहीं कर सकते। हाई कोर्ट ने कहा कि ऐसा रिश्ता इस्लामी कानून में हराम माना गया है। इसके साथ ही कोर्ट ने महिला स्नेहा देवी को उनके माता-पिता के घर भेजने का आदेश दे दिया।

न्यायमूर्ति एआर मसूदी और न्यायमूर्ति एके श्रीवास्तव की पीठ ने स्नेहा देवी और मोहम्मद शादाब खान द्वारा लाई गई एक रिट याचिका पर सुनवाई की। इसमें महिला के माता-पिता द्वारा शादाब खान के खिलाफ अपहरण की शिकायत दर्ज कराने के बाद पुलिस कार्रवाई से सुरक्षा की माँग किया गया था। कोर्ट ने सुरक्षा में स्नेहा देवी को उसके माता-पिता के भेजने का आदेश दिया।

याचिकाकर्ताओं ने कहा कि वे लिव-इन रिलेशनशिप में हैं, लेकिन महिला के माता-पिता ने शादाब पर उनकी बेटी का अपहरण करने और उसे शादी के लिए फुसलाने का आरोप लगाते हुए रिपोर्ट दर्ज कराई थी। याचिका कर्ताओं ने दावा किया कि वे वयस्क हैं और सुप्रीम कोर्ट के अनुसार, वे लिव-इन रिलेशनशिप में एक साथ रहने के लिए स्वतंत्र हैं।

इस पर कोर्ट ने कहा, “इस्लामी सिद्धांत विवाह के दौरान लिव-इन संबंधों की अनुमति नहीं देते हैं। ये स्थिति अलग हो सकती है, यदि दोनों व्यक्ति अविवाहित हैं और दोनों पक्ष बालिग हैं और अपने तरीके से अपना जीवन जीना चुनते हैं।” इसके बाद हाई कोर्ट की पीठ ने जीवन और स्वतंत्रता की सुरक्षा के मुद्दे पर आदेश पारित करने से इनकार कर दिया।

पीठ ने पाया कि शादाब खान ने साल 2020 में फरीदा खातून से निकाह किया था और दोनों का एक बच्चा भी है। अदालत ने कहा कि विवाह संस्थाओं में संवैधानिक नैतिकता और सामाजिक नैतिकता में सामंजस्य होना चाहिए, अन्यथा सामाजिक शांति के लक्ष्य को पूरा करने के लिए जरूरी सामाजिक सामंजस्य फीका और गायब हो जाएगा।

मोदी राज में आत्मनिर्भर हुई सेना, विदेश से गोला-बारूद लेने की नहीं पड़ेगी जरूरत: जापान को पीछे छोड़ दुनिया का तीसरा सबसे बड़ा सोलर पावर भी बना

भारत जापान को पीछे छोड़ कर विश्व का तीसरा सबसे बाद सौर ऊर्जा उत्पादक बन गया है। भारत ने 8 वर्षों में 6 स्थानों की छलांग लगाते हुए यह उपलब्धि हासिल की है। सौर ऊर्जा के मामले में भारत ने पिछले कुछ वर्षों में काफी काम किया है। भारत अब पारम्परिक ऊर्जा संसाधनों की जगह अक्षय ऊर्जा स्रोतों से बिजली बनाने की क्षमताएँ बढ़ा रहा है।

ताजा रिपोर्ट ने इस बात की पुष्टि की है। सौर ऊर्जा के क्षेत्र में उपलब्धि के साथ ही भारतीय सेना ने फैसला किया है कि वह अगले वर्ष से किसी भी प्रकार का गोला-बारूद विदेशों से नहीं मँगाएगी। उसके सभी प्रकार की गोला बारूद की जरूरत को स्थानीय उत्पादक ही पूरी कर देंगे।

मोदी सरकार में भारत ने लगाई 6 स्थानों की छलांग

दुनिया भर में स्वच्छ ऊर्जा की प्रगति को लेकर रिपोर्ट जारी करने वाली संस्था एम्बर ने बताया है कि भारत 2023 में जापान को पीछे छोड़ कर विश्व का तीसरा सबसे सौर ऊर्जा उत्पादक बना। भारत 2015 में इस सूची में नौवें स्थान पर था और मात्र आठ वर्षों में उसने 6 स्थानों की छलांग लगाई। भारत ने विश्व में सौर ऊर्जा बढ़त में 5.9% का योगदान दिया है। एम्बर के अनुसार, भारत में वर्तमान में 113 Twh सौर ऊर्जा की क्षमता है। वर्ष 2014 में यह क्षमता मात्र 4.91 Twh थी। ऐसे में 9 वर्षों में 23 गुना की वृद्धि हुई है।

2023 में भारत में सौर ऊर्जा के मामले में चौथी सबसे तेज प्रगति हुई है। 2023 में भारत में 18 Twh सौर ऊर्जा क्षमता बढ़ी है। सौर ऊर्जा का भारत के ऊर्जा क्षेत्र में योगदान भी बढ़ रहा है। 2015 में भारत की कुल बिजली उत्पादन का 0.5% ही सौर स्रोतों से प्राप्त हो रहा था जबकि 2023 में यह बढ़ कर 5.8% हो गया। वर्तमान में भारत में सौर ऊर्जा, पनबिजली के बाद स्वच्छ ऊर्जा का सबसे बड़ा स्रोत है। 2023 में भारत में सौर ऊर्जा के मामले में चौथी सबसे तेज प्रगति हुई है। 2023 में भारत में 18 Twh सौर ऊर्जा क्षमता बढ़ी है। सौर ऊर्जा का भारत के ऊर्जा क्षेत्र में योगदान भी बढ़ रहा है। 2015 में भारत की कुल बिजली उत्पादन का 0.5% ही सौर स्रोतों से प्राप्त हो रहा था जबकि 2023 में यह बढ़ कर 5.8% हो गया। वर्तमान में भारत में सौर ऊर्जा, पनबिजली के बाद स्वच्छ ऊर्जा का सबसे बड़ा स्रोत है।

भारत सौर ऊर्जा के मामले में और भी बढ़त के लिए लगातार नई योजनाएँ ला रहा है। भारत ने हाल ही में पीएम सूर्यघर योजना चालू की है। इसके अंतर्गत केंद्र सरकार 1 करोड़ घरों में सौर ऊर्जा प्लांट लगाने के लिए सब्सिडी देने वाली है। इससे बनाई गई बिजली लोग अपने घरों में भी उपयोग कर सकेंगे। इसके अलावा जो बिजली बचेगी उसे सरकार खरीद लेगी। इससे कोयला आधारित बिजली बिजली पर दबाव कम होगा और इससे पर्यावरण भी सुरक्षित हो सकेगा।

भारत ने लक्ष्य रखा है कि वह 2030 तक अपनी कुल ऊर्जा जरुरुतों का 50% नवीनीकृत ऊर्जा के स्रोतों से प्राप्त करेगा। इसके लिए लगातार नए सोलर की स्थापना भी भारत में हो रही है। वर्तमान में विश्व का सबसे बड़ा सौर ऊर्जा पार्क भारत में ही है। भारत अपने मरुस्थल के क्षेत्र का उपयोग करके बड़े सौर ऊर्जा पार्क स्थापित कर रहा है।

सेना नहीं करेगी गोला बारूद का आयात

सौर ऊर्जा क्षेत्र के मामले में उपलब्धि हासिल करने के साथ ही भारत रक्षा क्षेत्र में भी आत्मनिर्भर हो रहा है। भारतीय सेना ने यह निर्णय लिया है कि वह अगले वर्ष से किसी भी प्रकार का गोला-बारूद का आयात नहीं करेगी। सेना 2025-26 के बाद स्थानीय स्रोतों से ही गोला-बारूद लेगी।

जानकारी के अनुसार, सेना को 175 तरह के गोला-बारूद की आवश्यकता होती है। सेना इनमें से कई प्रकार के गोला-बारूद विदेश से मंगाती है। हालाँकि, अब भारत में 175 में से 150 तरह के गोला-बारूद का निर्माण हो रहा है। यह निर्माण भारतीय कम्पनियाँ ही कर रही हैं।

इससे देश का रक्षा क्षेत्र भी आत्मनिर्भर होगा और साथ ही विदेशों को जाने वाला पैसा भी बचेगा। बताया गया है कि भारत विदेशों से सालाना ₹6000-₹8000 करोड़ का गोला-बारूद मँगवाता है। भारत में गोला-बारूद का यह निर्माण सरकारी ऑर्डिनेंस फैक्ट्री के साथ ही निजी फक्ट्रियों में भी हो रहा है। यह कम्पनियाँ सेना की आवश्यकता के अनुसार भी गोला-बारूद बना रही हैं। इसी के साथ यह बड़ी मात्रा में गोला-बारूद विदेशों को भी भेज रही हैं।

भारत के रक्षा क्षेत्र की बढ़त का बड़ा उदारहण भारत का बढ़ता आयात है। भारत का रक्षा आयात 2023-24 में ₹21,083 करोड़ रहा है। यह 2013-14 के मुकाबले 31 गुना अधिक है। इसमें निजी क्षेत्र का भी 40% योगदान रहा। कई देश भारत से रक्षा उत्पाद खरीद रहे हैं।