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रायबरेली के अँधेरे में जुगनू की तरह प्रियंका गाँधी को चमकाने आया, गाँधी परिवार की ही बेइज्जती करवा गया: पत्रकार/फिल्म डायरेक्टर की ‘दलाली’ को नेटिजन्स ने किया नंगा

कॉन्ग्रेस के प्रचार को अद्भुत बनाने के लिए नए-नए हथकंडे इस्तेमाल हो रहे हैं। पार्टी के नेताओं और गाँधी परिवार को जमीन से जुड़ा साबित करने के लिए अलग-अलग तस्वीरें दिखाई जा रही हैं। इसी क्रम में प्रियंका गाँधी की एक वीडियो भी सामने आई है। इसमें प्रियंका अंधेरे में खड़े होकर रायबरेली में भाषण दे रही हैं और जनता टॉर्च जलाए हुए हैं। उनका यह ट्वीट देखने के बाद पत्रकार से फिल्म डायरेक्टर बने अविनाश दास भी उनकी चापलूसी में लग गए और प्रियंका गाँधी द्वारा अंधेरे में व बिन माइक के दिए गए भाषण को ‘कविता’ बताने लगे।

अविनाश दास को शायद लगा कि इस ट्वीट से लोगों में प्रियंका गाँधी की क्रांतिकारी छवि बनेगी, लेकिन हो इसका उलटा गया। दरअसल, प्रियंका गाँधी की वीडियो शेयर करके अविनाश दास ने लिखा था- “रायबरेली की बछरावां विधानसभा। कोई एक चौराहा। रात थी और दूर दूर तक अंधेरा। भीड़ ने अपने हाथों में रोशनी की ज़िम्मेदारी ली और जुगनू की तरह टिमटिमाती हुई प्रियंका गाँधी बिना माइक के चमक उठीं, गरज उठीं। जब मैं इस दृश्य को देख रहा था, तब मेरे लिए ये महज़ एक दृश्य नहीं, पूरी की पूरी कविता थी।”

उनके इस ट्वीट के बाद सोशल मीडिया यूजर्स ने अनिवाश दास का मजाक तो उड़ाया ही, साथ ही कॉन्ग्रेस पर भी निशाना साध दिया। लोगों ने पूछा कि प्रियंका गाँधी का भाषण को कविता जैसा बताने वाले दास को दलाली छोड़ ये सवाल करना चाहिए था कि आखिर प्रियंका गाँधी को उस क्षेत्र में अंधेरे में भाषण क्यों देना पड़ा, जहाँ सालों से उनके परिवार का राज रहा है।

पत्रकार ऋचा अनिरुद्ध ने अविनाश दास के ट्वीट पर पूछा, “लेकिन दूर दूर तक अंधेरा था ही क्यों? इतने साल बाद भी देश के सबसे ताकतवर परिवार के क्षेत्र की ऐसी हालत? दुख हुआ जान कर, कम से कम पिछले 10 साल में सोलर लाइट्स ही लगवा देते यहाँ के विधायक/सांसद…।”

राहुल गुप्ता ने लिखा, कॉन्ग्रेस की खानदानी सीट होने के बावजूद ऐसी क्या मजबूरी आ पड़ी कि अंधेरे में मोबाइल फ्लैश का उपयोग करके भाषण देना पड़ रहा है। चमचे जिसे प्रियंका गाँधी का स्वैग बता रहे हैं। दरअसल वह कॉन्ग्रेस के खानदानी सीट की शर्मनाक हकीकत है। चमचे इस वीडियो को दिखाकर वाहवाही लूटने की सोच रहे हैं… जैसे उसकी मालकिन वैसे उसके चमचे…।

एक यूजर ने कहा, “तुम जैसे मूर्ख कविता लिखते रह गए और गाँधी खानदान पिछले कई दशकों तक रायबरेली और अमेठी में राज करता रहा। फिर भी बिजली, पानी जैसी आवश्यकता की चीजें नहीं दे पाए, जिसका उदाहरण तुम्हारे सामने है। ये देखकर तुम्हें शर्म नहीं आ रही। तुम उनके चरण चाटने में लगे हो।”

यूजर्स ने कहा कि 70 साल तक जहाँ गाँधी परिवार जमा रहा। वहाँ अगर सड़क पर स्ट्रीट लाइट नहीं है तो इसमें महिमामंडन करने वाली बात होनी चाहिए या फिर शर्म करने की।

रोहित नाम के यूजर ने कहा, “जब कोई दर्ज़ी फटे हुए लंगोट में अपनी दरिद्रता पर गर्व करता पहलवानी करने आए तो लोगों के मन में ये हास्यभाव स्वतः ही उठ जाता है की भई पहले अपना लंगोट तो सिल ले। यही भाव अंधेरे में खड़ी उस स्त्री को देखकर आ रहा है जो उस वंश से ही जिसने यहाँ 50 वर्ष सत्ता भोग किया।”

बता दें कि प्रियंका गाँधी 8 मई को रायबरेली में जनसभा को संबोधित करने गईं थीं। उन्होंने इसकी क्लिप शेयर करते हुए कहा था कि पिछले सौ साल का इतिहास कहता है कि रायबरेली हमेशा लोकतंत्र के साथ खड़ा रहा है। आजादी से पहले यहाँ के किसानों ने ब्रिटिश हुकूमत के खिलाफ आंदोलन किया और उसके बाद भी हमेशा राजनीति को दिशा दिखाई है।

उनकी इस क्लिप पर भी नेटिजन्स ने काफी मजाक बनाया था। उन्हें कहा गया था कि आजादी के बाद 17 बार उनकी पार्टी के लोग जिस जगह से सांसद रहे, 65 साल तक राज किया। फिर भी क्या कारण है टोर्च की रौशनी में जनता को संबोधित करना पड़।

‘मैं कॉन्ग्रेस के शाही परिवार की तरह बड़े घराने से नहीं निकला, गरीबी में बड़ा हुआ हूँ’: PM मोदी ने नंदुरबार में कहा- कॉन्ग्रेस का हाल ‘चोर मचाए शोर’ वाला

लोकसभा चुनाव 2024 के सात चरणों में से तीन चरण का मतदान हो चुका है। चौथे चरण का मतदान 13 मई है। इसको देखते हुए प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने शुक्रवार (10 मई 2024) को महाराष्ट्र के नंदुरबार में एक जनसभा को संबोधित किया। इस दौरान उन्होंने कॉन्ग्रेस और उसके गठबंधन के साथी पर जमकर निशाना साधा है।

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने कहा, ठकॉन्ग्रेस जानती है कि वो विकास में मोदी का मुकाबला कर ही नहीं सकती है। इसलिए वो इस चुनाव में झूठ की फैक्ट्री खोलकर बैठ गए हैं। झूठ फैलाकर वोट लेना चाहते हैं। कभी आरक्षण को लेकर झूठ, कभी संविधान को लेकर झूठ। इन्होंने पूरा इकोसिस्टम ऐसी अफवाहें फैलाने के लिए चौबीसों घंटे लगाकर रखा है।”

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने आगे कहा, “आरक्षण पर कॉन्ग्रेस का हाल ‘चोर मचाए शोर’ वाला है। धर्म के आधार पर आरक्षण बाबा साहेब के सिद्धांतों के खिलाफ है। बाबा साहेब की भावना के खिलाफ है। संविधान निर्माताओं ने जो संविधान बनाया, उसकी पीठ में भी छुरा भोंकने वाला माफ ना कर सके, ये ऐसा पाप है।”

प्रधानमंत्री ने कहा, “मैं कॉन्ग्रेस के शाही परिवार की तरह बड़े घराने से नहीं निकला हूँ। मैं तो गरीबी में ही बड़ा हुआ हूँ, मुझे पता है कि यहाँ आपने कितनी तकलीफ उठाई है। मोदी ने संकल्प लिया था – हर गरीब, हर आदिवासी को घर, हर आदिवासी के घर में पानी, हर परिवार को पानी की सुविधा, हर गाँव में बिजली।”

प्रधानमंत्री ने कहा, “हमने नंदुरबार के करीब 1.25 लाख गरीबों को पीएम आवास योजना के अंतर्गत पक्के आवास दिए। पिछले 10 साल में हम 4 करोड़ पक्के घर दे चुके हैं और तीसरे टर्म में हम 3 करोड़ घर और देंगे। NDA सरकार ने महाराष्ट्र के 20 हजार से अधिक गांवों में हर घर जल पहुंचाया है। इसमें नंदुरबार के 111 गाँव भी शामिल है।”

प्रोपेगेंडा भगवा आतंकवाद का, टारगेट RSS-VHP, सैनिक-संत’.. पीड़ित से लेकर कॉन्ग्रेस सरकार के अधिकारी तक खोल चुके हैं हिंदू विरोधी साजिशों की पोल

कॉन्ग्रेस ने अपने शासनकाल के दौरान भरसक यह प्रयास किया कि देश में हिन्दू आतंकवाद का नैरेटिव खड़ा किया जाए। मालेगाँव बम धमाका मामले के जरिए देश की हिन्दू आबादी पर प्रश्न खड़े गए। हिन्दू संतों और सैनिक को प्रताड़ित किया गया ताकि कैसे भी भगवा आतंकवाद की बात साबित की जा सके। धीमे-धीमे भगवा आतंकवाद शब्द सामने लाया गया और फिर एक पूरे धमाके का दोष ही हिन्दुओं पर डाल दिया गया।

दरअसल, मालेगाँव धमाका तो 2008 में हुआ था लेकिन इससे काफी पहले ही कॉन्ग्रेस की सरकार देश की बहुसंख्यक आबादी को विलेन बनाने के लिए काम पर लग चुकी थी। कॉन्ग्रेस सरकार के दौर में इस तैयारी की सबसे पहली झलक 2006 में मिलती है।

कैसे शुरू हुआ हिन्दू आतंकवाद का नैरेटिव

हिन्दू आतंकवाद के बारे में केंद्र सरकार में अंडर सेक्रेटरी रहे RVS मणि अपनी किताब में बताते हैं कि उन्हें एक बार केन्द्रीय मंत्री शिवराज पाटिल ने बुलाया था। पाटिल गृह मंत्री थे और मणि गृह मंत्रालय में आतंक के मामलों से जुड़ा एक विभाग देख रहे थे। मणि ने बताया कि पाटिल के कमरे में उन्हें IPS हेमंत करकरे और दिग्विजय सिंह भी बैठे हुए मिले। सिंह और करकरे ने इसके बाद मणि से पूछताछ चालू की। मणि से हालिया आतंकी घटनाओं के बारे में पूछा गया।

उनसे पूछा गया कि उनके आरोपित कौन हैं, उनमें जाँच की स्थिति क्या है, कौन-कौन से संगठन जुड़े हुए हैं। जब मणि ने उन्हें बताया कि अधिकांश आतंकी हमले एक ही मजहब के लोग कर रहे हैं तो करकरे और दिग्विजय उनकी बातों पर थोड़ा सा असहज नजर आए।

इस दौरान दोनों बात बजरंग दल, हिन्दू और ऐसे ही टॉपिक पर बात करते रहे। मणि का कहना है कि वह नांदेड़ का जिक्र बार बार कर रहे थे। नांदेड़ में एक बम धमाका हुआ था जिसके विषय में बात हो रही थी। मणि बताते हैं कि इस बैठक के कुछ दिनों बाद ही एक हिन्दू व्यक्ति को एक आतंक के मामले में पकड़ा गया।

नांदेड से ही समीर कुलकर्णी नाम का एक व्यक्ति गिरफ्तार किया गया। उसे ऊपर आरोप था कि उसने अपनी दुकान में विस्फोटक छुपा रखे थे, इनमें धमाका हुआ था। बताया गया कि समीर बजरंग दल के कार्यालय भी जाता था। इस मामले में समीर कुलकर्णी को हिन्दू आतंकवादी बताने की कोशिश हुई। इस पूरे मामले में करकरे की भूमिका संदिग्ध थी।

मालेगाँव धमाका और पूरी साजिश

महाराष्ट्र के मालेगाँव में 29 सितम्बर, 2008 को एक मोटरसाइकिल में धमाका हुआ जिसमें 6 लोग मारे गए। इसी मालेगाँव धमाका मामले के बाद कॉन्ग्रेस ने हिन्दू आतंकवाद की थ्योरी को आगे बढ़ाना चालू कर दिया। इस मामले में कई ऐसे लोगों को पकड़ा गया जो कि हिन्दू संगठनों से जुड़े हुए थे। कई ऐसे गवाह लाए गए जिनके जबरदस्ती बयान दिलवाए गए और RSS-VHP नेताओं को इस मामले में फँसाने की साजिश भी रची गई। यह अब काम तब की महाराष्ट्र ATS ने किया।

इस मामले में साध्वी प्रज्ञा, कर्नल पुरोहित, स्वामी असीमानंद समेत कई हिन्दू व्यक्ति आरोपित बनाए गए। कर्नल पुरोहित को इस मामले में RDX देने का आरोपित बताया गया। साध्वी प्रज्ञा पर धमाके के लिए बाइक देने का आरोप लगा। इस धमाके में आरोपित बनाए गए कई लोगों को समझौता एक्सप्रेस और मक्का मस्जिद ब्लास्ट मामले में भी आरोपित बनाया गया था। इसी के बाद पूरा नैरेटिव बुना जाने लगा कि देश में हिन्दू आंतकवाद भी है।

महाराष्ट्र ATS इस मामले में कर्नल पुरोहित और अन्य गवाहों के जरिए बड़े हिन्दू नेताओं को भी फँसाना चाहती थी। इसके लिए कर्नल पुरोहित को प्रताड़ित किया गया। उनकी टांग तोड़ी गई। उसने कहा गया कि वह मालेगाँव मामले में तत्कालीन सांसद योगी आदित्यनाथ और RSS-VHP के बड़े नेताओं का नाम ले और यह बात स्वीकार कर लें कि धमाका उन्हीं ने किया है। इसके अलावा साध्वी प्रज्ञा को इतना मारा गया कि उनकी रीढ़ की हड्डी में तक समस्या आ गई और उन्हें वेंटीलेटर पर भर्ती होना पड़ा।

यह सब इसीलिए किया गया ताकि देश में हिन्दुओं की आवाज उठाने वालों को आतंकवादी सिद्ध किया जाए और इस्लामी आतंकवाद के बराबर में हिन्दू आतंकवाद जैसे जूते नैरेटिव को खड़ा कर दिया जाए। बम धमाकों को रोक पाने में विफल कॉन्ग्रेस सरकार इस कोशिश में लगी रही कि देश की बड़ी हिन्दू आबादी को कैसे अपराधबोध में डाला जाए। हालाँकि उसकी यह कोशिशें कामयाब नहीं हो सकीं। ATS की मारपीट के कारण गवाहों ने शुरू में तो बयान दिए लेकिन बाद में उन्होंने भी सच्चाई बयाँ की।

ध्वस्त हो गया हिन्दू आतंकवाद का नैरेटिव, सामने आई प्रताड़ना की कहानी

कॉन्ग्रेस के राज में इस बात के खूब प्रयास हुए कि हिन्दू आतंक का नैरेटिव गढ़ा जाए लेकिन बाद में यह सब फेल हो गया। इसके उलट जिन लोगों पर इन मामलों में मुकदमे किए गए थे, उनकी प्रताड़ना की कहानियाँ सामने आईं। ATS के आरोपों पर 17 गवाह कोर्ट में अपने बयान से मुकर गए। इनमें से एक गवाह ने भी खुलासा किया कि उसको धमका कर हिन्दू नेताओं के नाम लेने के लिए कहा गया था। यहाँ तक कि जिन साध्वी प्रज्ञा को आरोपी बनाया गया था, उन्हें भी इस मामले में दाखिल की गई आखिरी चार्जशीट में दोषी नहीं माना गया।

कर्नल पुरोहित को भी इस मामले में जमानत मिली। इसके बाद इन लोगों ने बताया कि कैसे ATS ने इन्हें इस बात पर मजबूर किया कि वह देश में हिन्दू आतंकवाद की बात स्वीकारें। साध्वी प्रज्ञा ने बताया कि हेमंत करकरे, परमबीर सिंह समेत कई पुलिस अधिकारियों ने उन्हें जमीन पर गिरा कर पीटा, उन्हें गालियाँ दी, उनसे भद्दे सवाल पूछे। उनको पुरुष कैदियों के साथ पोर्न दिखाया। साध्वी को बेल देने की बात आई तो उस न्यायाधीशों को तक धमकाया गया।

कर्नल पुरोहित का पैर तोड़ दिया गया। उन्हें कई दिनों तक अवैध रूप से हिरासत में रखा, इस दौरान उनको नंगा करके मारा गया। उनके प्राइवेट पार्ट पर हमला हुआ। उन्हें बालों से खींचा गया। उन पर यह दबाव डाला गया कि वह RSS-VHP के बड़े नेताओं का नाम लें, उन्हें इस मामले में फँसाएँ। कोर्ट में गवाहों के पलटने और ATS की कारस्तानियों के बताने के बाद हिन्दू आतंकवाद का नैरेटिव मुंह के बल गिरा है।

दिल्ली में 1 दिन में 100 बम ब्लास्ट, भारत में खलीफा-राज की स्थापना… ISIS वाले मियाँ-बीवी कम्प्यूटर में एक्सपर्ट, MBA भी कर रखा था: क्रिप्टो में करते थे आतंकी फंडिंग

2019 में राष्ट्रीय राजधानी नई दिल्ली में उस समय ठंड का मौसम था, जब जहाँजेब सामी अपनी बीवी हिना बशीर बेग के साथ जम्मू कश्मीर से यहाँ शिफ्ट हुआ। उसी साल 6 अक्टूबर को इन दोनों का निकाह हुआ था, जब अनुच्छेद-370 को निरस्त किए जाने के मोदी सरकार के फैसले के कारण जम्मू कश्मीर में सख्ती थी और कई अलगाववादी नेता नज़रबंद थे। निकाह के 2 सप्ताह बाद ही दोनों दिल्ली के लिए निकल गए। जहाँजेब सामी एक ब्रिटिश कंपनी के लिए काम कर रहा था।

उसने B.Tech और MBA कर रखा है। इसी तरह उसकी बीवी हिना बशीर बेग ने भी कम्प्यूटर एप्लीकेशंस में स्नातक करने के बाद मैनेजमेंट का कोर्स किया था। वो कुछ बैंकों के लिए काम कर चुकी थी और निकाह के दौरान उसने काम से ब्रेक लिया हुआ था। दोनों की उम्र 35 वर्ष के आसपास थी। उन्होंने जामिया नगर के C ब्लॉक में एक फ़्लैट रेंट पर लिया। शुरू में वो मूवी देखते हुए या ओखला बर्ड सैंक्चुरी घूमते हुए वीकेंड्स पर समय व्यतीत करते थे।

उसके तुरंत बाद CAA (नागरिकता संशोधन कानून) के खिलाफ शाहीन बाग़ आंदोलन शुरू हो गया और फिर इस जोड़े को अधिकतर घर में ही रहना पड़ा। इसके अगले साल कोरोना वायरस आपदा दुनिया पर कहर बन कर टूटी और फिर लॉकडाउन में दोनों घर में ही रहे। 8 मार्च, 2020 – ये वो तारीख़ थी जब दिल्ली पुलिस का आतंकरोधी दस्ता उनके दरवाजे पर पहुँचा। गिरफ़्तारी के बाद उन पर UAPA लगाया गया। असल में इंटरनेट पर दोनों की अलग पहचान थी।

हिना बशीर बेग जहाँ ‘Hannabee’ और ‘कतिजह अल कश्मीरी’ नाम से सक्रिय थी, जबकि उसका शौहर ‘जाएब’, ‘अबू अब्दुल्लाह’ और ‘अबू मुहम्मद अल-हिन्द’ नाम से। असल में ये दोनों आतंकी संगठन ISIS के सदस्य थे और सीरिया-अफगानिस्तान में बैठे आका इन्हें आदेश दे रहे थे। मामला NIA को ट्रांसफर किया गया, दोनों जेल भेजे गए। साढ़े 4 महीने बाद वो दोषी साबित हुए। जहाँजेब सामी दिल्ली में एक दिन में 100 बम ब्लास्ट की साजिश रच रहा था।

उसकी मंशा थी कि भारत में खलीफा का राज स्थापित किया जाए और इसके लिए वो ये सब कर रहा था। उसे 20 साल की सज़ा सुनाई गई, जबकि उसकी बीवी को 7-7 साल की। गिरफ़्तारी से कई महीने पहले से दोनों सर्विलांस में थे। 2019 की गर्मियों में ही एक चैटिंग प्लेटफॉर्म से एन्क्रिप्टेड मैसेज के आदान-प्रदान का ट्रेस मिला था। उसी दौरान ISIS ने भारत में आतंकी वारदातों को अंजाम देने के लिए ‘विलायह अल-हिन्द’ मिशन लॉन्च किया था।

‘स्वात-अल-हिन्द’ नामक डिजिटल मैगजीन भी टेलीग्राम जैसे एप्स पर अपलोड किए गए थे। दोनों मियाँ-बीवी मिल कर CAA विरोध की आड़ में मुस्लिम युवाओं को हथियार उठाने के लिए भड़का रहे थे। IS-खोरासन के अबू उस्मान अल कश्मीरी से ये दोनों संपर्क में थे। IS कमांडर हुज़ैफ़ा-अल-बाकिस्तै से वो प्रेरणा लेते थे। उसे अफगानिस्तान के नंगरहार में एक ड्रोन हमले में मार गिराया गया था। इन दोनों ने मैगजीन में एक लेख लिख कर उक्त आतंकी का महिमामंडन किया था।

हिना ने पुणे से पढ़ाई की थी, ऐसे में वो पुणे के एक कपल के साथ भी संपर्क में थे। उक्त शख्स जिम ट्रेनर था, जबकि उसकी बीवी सादिया पहले से ही ISIS के प्रति झुकाव को लेकर जाँच एजेंसियों की रडार पर थी। हिना ने सादिया को एक मिशन के लिए सुसाइड बेल्ट पहनने के लिए भी तैयार कर लिया था। सामी-हिना की ऑनलाइन एक्टिविटीज के कारण उन्हें ट्रेस किया गया। वो आतंकी मैगनीज को भी सर्कुलेट कर रहे थे। क्रिप्टोकरेंसी के माध्यम से वो फंड्स का लेनदेन करते थे। अब NIA कोर्ट ने दोनों को दोषी करार दिया है।

ईरान ने 5 और नाविक छोड़े, महिला को पहले ही भेज चुका है भारत: इजरायल से जुड़े जहाज पर सवार थे 17 भारतीय क्रू मेंबर

ईरान ने एक इजरायली पोत से बंदी बनाए गए पाँच भारतीय नाविकों को रिहा कर दिया है। ये भारतीय नाविक गुरुवार (9 मई 2024) को ईरान से निकल गए। भारत ने इसके लिए ईरान की सरकार को धन्यवाद दिया है। दरअसल, कुछ दिन पहले ईरान ने इजरायल से संबंधित एक जहाज को जब्त कर लिया था और उसके क्रू सदस्यों को गिरफ्तार कर लिया था। इनमें पाँच भारतीय भी थे।

भारतीय दूतावास ने भारतीय नाविकों की रिहाई का विवरण साझा करते हुए कहा, “हम बंदर अब्बास में दूतावास और भारतीय वाणिज्य दूतावास के साथ घनिष्ठ समन्वय के लिए ईरानी अधिकारियों की सराहना करते हैं।” वहीं, भारतीय विदेश मंत्रालय के आधिकारिक प्रवक्ता रणधीर जायसवाल ने भी ने इस पर प्रतिक्रिया व्यक्त की है।

रणधीर जायसवाल ने सोशल मीडिया साइट एक्स (पूर्व में ट्विटर) पर एक पोस्ट कर कहा, “एमएससी एरीज पर सवार पाँच भारतीय नाविकों को गुरुवार शाम रिहा कर दिया गया और वे ईरान से चले गए हैं। इजरायल से जुड़े मालवाहक जहाज को 13 अप्रैल को ईरान ने जब्त कर लिया था, जिसमें 17 भारतीय नागरिक सवार थे।”

जहाज पर सवार भारतीय दल में केरल की एक महिला नाविक एन टेसा जोसेफ भी थीं। ईरान की सरकार ने जोसेफ को पहले ही रिहा कर दिया था और वह 18 अप्रैल 2024 को भारत पहुँच गई थीं। हालाँकि, जोसेफ के बाद अब पाँच भारतीय नाविकों को फिर रिहा किया गया है। हालाँकि, अभी भी 11 भारतीय नाविक ईरान में ही हैं।

दरअसल, ईरान ने 13 अप्रैल 2024 को भारत की ओर आ रहे एक जहाज एमएससी अराईज को होरमुज़ की खाड़ी में अपने कब्जे में लिया था। इस जहाज के चालक दल में 17 भारतीय भी शामिल थे। एक इजरायली-संबद्ध कंटेनर जहाज था। इसका एक वीडियो भी सामने आया था। ईरान का आरोप था कि जहाज उनके इलाके से बिना इजाजत गुजर रहा था।

पुर्तगाल के झंडे तले चलने वाला यह जहाज UAE से भारत की तरफ आ रहा था। ईरान के रिवॉल्यूशनरी गार्ड के कमांडो ने इस पर हेलिकॉप्टर से उतर कर इसे अपने कब्जे में लिया था। यह जहाज लंदन स्थित ज़ोडियाक मैरीटाइम से जुड़ा है। ज़ोडियाक मैरीटाइम इज़रायली अरबपति इयाल ओफ़र के ज़ोडियाक समूह का हिस्सा है। इस जहाज पर चालक दल के कुल 25 सदस्य सवार थे। 

इस घटना के सामने आने के बाद भारत ने अपने नागरिकों की रिहाई के प्रयास शुरू कर दिए थे। भारत के विदेश मंत्री एस जयशंकर ने दोनों देशों के विदेश मंत्रियों से बातचीत की थी। भारत सरकार की माँग पर ईरान ने अपने कब्जे में जहाज एमएससी अराईज पर मौजूद भारतीयों को सहायता को अनुमति दे दी थी।

बता दें कि ईरान आतंकी संगठन हमास का समर्थन कर रहा है, जबकि इजरायल हमास के खिलाफ कार्रवाई कर रहा है। वहीं, लाल सागर में ईरान के समर्थन से हूती विद्रोही अंतरराष्ट्रीय शिपिंग रूट पर लगातार हमले कर रहे हैं। वहीं, सीरिया में ईरान के दूतावास को निशाना बनाया था, जिसमें ईरानी सेना के दो शीर्ष कमांडर मारे गए थे। इस हमले का आरोप ईरान ने इजरायल पर लगाया था।

हिरोइन लैला खान को ‘अब्बा’ ने ही बंगले में गाड़ दिया, 13 साल बाद कोर्ट ने माना दोषी: बेटियों से करवाना चाहता था देह का धंधा, गिराई थी 6 लाशें

बॉलीवुड अभिनेत्री लैला खान की हत्या के मामले में एक सेशन कोर्ट ने उनके सौतेले अब्बा परवेज टाक को दोषी ठहराया है। गुरुवार (9 मई, 2024) को अदालत ने अपना फैसला सुनाया, जबकि मंगलवार को इस संबंध में सज़ा सुनाई जाएगी। न सिर्फ लैला खान, बल्कि उनके 4 अन्य भाई-बहनों और माँ माँ को भी मार डाला गया था। बिस्तर और तकिये से लिपटी हुई उनकी लाशें मिली थीं। इगतपुरी के एक सुनसान फार्महाउस में परवेज टाक ने उनके शवों को दफ़न कर दिया था।

परवेज टाक, शेलीना का तीसरा शौहर था। शेलीना का अपने दूसरे शौहर आसिफ शेख के साथ नजदीकी उसे पसंद नहीं थी और इसे लेकर ही हुए वाद-विवाद के बाद उसने लोहे की रॉड से अपनी बीवी के सिर पर वार किया। असल में शेलीना खान बिल्डर आसिफ शेख को अपनी संपत्ति का केयरटेकर बनाने की योजना पर काम कर रही थी। बेटे इमरान, बेटी अज़मीना और भतीजी आफरीन उसे बचाने आई, लेकिन परवेज टाक ने एक-एक कर उन सभी को रॉड से मारा, चाकू भी घोंप दिया।

लैला खान और इमरान की जुड़वाँ बहन ज़ारा उस समय मुंबई के मीरा रोड में एक जमीन से संबंधित करार में व्यस्त थे। परवेज टाक को पता था कि उनके पास कुछ आभूषण हैं और साथ में 2 करोड़ रुपए भी, जिन्हें लेकर वो फार्महाउस पर आएँगे। ऐसे में वो अपने साथी शाकिर के साथ मीरा रोड उन्हें लेने के लिए पहुँचा। रास्ते में ही घोड़बंदर रोड पर कार रोक कर उसने दोनों को मार डाला। हत्या के वक्त लैला खान की उम्र मात्र 31 वर्ष थी। उसकी अम्मी 51 साल की थी, जबकि बड़ी बहन 32 साल की।

इमरान और ज़ारा दोनों जुड़वाँ 25 साल के थे। ओशिवारा पुलिस थाने में लैला खान के अब्बा और शेलीना के पहले शौहर नादिर पटेल ने अपने परिवार के गायब होने की शिकायत दर्ज कराई थी। उन्होंने परवेज टाक और आसिफ शेख पर आरोप लगाए थे। बेंगलुरु से आसिफ शेख को पकड़ा भी गया लेकिन फिर उसे छोड़ दिया गया। मोबाइल डेटा के आधार पर इगतपुरी में परवेज टाक के लैला खान के साथ होने का पता चला, ऐसे में उसे गिरफ्तार किया गया।

हत्या के बाद परवीज टाक अपने मूल निवास स्थान कश्मीर 2 कार लेकर चला गया था, जहाँ वो फॉरेस्ट कॉन्ट्रैक्टर हुआ करता था। 8 जुलाई, 2012 को जम्मू कश्मीर पुलिस ने उसे ठगी के एक मामले में पकड़ा, जिसके बाद उसने महाराष्ट्र में हत्या की बात उगल दी। 10 जुलाई, 2012 को फार्महाउस में खुदाई के बाद लाशें निकाली गईं। परवेज टाक लगातार बयान बदल रहा था और लाशों को पहाड़ से फेंकने की बात भी कह रहा था। उसके खिलाफ केस साबित करने के लिए 41 गवाहों की कोर्ट में पेशी हुई।

सेलिना के सबसे बच्चे उसके पहले शौहर से ही थे, ऐसे में पटेल उससे मिलने-जुलने आया करते थे। ये बात परवेज टाक को खटकती थी। नादिर पटेल के अनुसार, उनकी बेटियों ने उन्हें बताया था कि परवेज टाक दुबई शिफ्ट होने के लिए उन पर दबाव बनाता था और वेश्यावृत्ति कर के पैसे कमाने के लिए कहता था। परवेज टाक का कहना था कि उसे डर था कि शेलीना और उसके बच्चे उसे छोड़ कर दुबई में बस जाएँगे। वो अपनी बीवी की संपत्ति हड़पना चाहता था।

लैला खान को ‘वफ़ा: अ डेडली लव स्टोरी’ (2008) फिल्म के लिए जाना जाता है। ये एक बोल्ड मूवी थी, जिसमें राजेश खन्ना मुख्य किरदार में थे। अटकलें थीं कि उन्होंने हरकत-उल-जिहाद-अल-इस्लामी बांग्लादेश के आतंकी मुनीर खान से निकाह कर रखा है। 2002 में उन्होंने ‘लैला पटेल’ नाम से कन्नड़ फिल्म ‘मेकअप’ से डेब्यू किया था। हत्या से पहले वो निर्माता राकेश सावंत की फिल्म ‘जिन्नात’ के लिए शूटिंग कर रही थीं। अब इस हत्याकांड में 13 वर्षों बाद न्याय मिला है।

कॉन्ग्रेस का ‘(ना) पाक इश्क’ जागा, बोले मणिशंकर अय्यर- पाकिस्तान की इज्जत करो… उनके पास एटम बम है

लोकसभा चुनावों के बीच कॉन्ग्रेस नेता मणिशंकर अय्यर का विवादित बयान सामने आया है। अपने बयान में उन्होंने पाकिस्तान की जमकर पैरवी की है। उसे समृद्ध मुल्क बताया है और कहा है कि भारत को पाकिस्तान से अच्छे से बात करनी चाहिए न कि उन्हें बंदूक दिखानी चाहिए। उन्होंने यूट्यूब चैनल The Ewer (Chill-pill) पर अपनी किताबों समेत अन्य मुद्दों पर चर्चा करते हुए टिप्पणी की। उनके इस बयान के वायरल होने के बाद अब भारतीय जनता पार्टी के नेताओं ने करारा जवाब दिया है।

मणिशंकर अय्यर की वायरल वीडियो में देख सकते हैं कि उन्होंने बोला, “पाकिस्तान एक संप्रभु मुल्क है, उनकी भी इज्जत है, उनकी इज्जत को कायम रखते हुए उनसे जितनी कड़ी बात करनी है करो… लेकिन बात तो करो। बंदूक को लेकर आप घूम रहे हो। उससे क्या हल मिला… कुछ नहीं। तनाव बढ़ता जाता है। कोई भी पागल वहाँ आ जाए तो क्या होगा देश का। उनके पास एटम बम है। हमारे पास भी है, लेकिन किसी पागल ने बम को लाहौर स्टेशन में छोड़ा तो आठ सेकेंड के अंदर उसकी रेडियो एक्टिविटी अमृतसर पहुँचेगी। आप उसको इस्तेमाल करने को रोको, उससे बात करो, उसको इज्जत दो तो तभी जाकर वह अपने बम के बारे में नहीं सोचेंगे, मगर आपने उसको ठुकरा दिया तो फिर क्या होगा।”

अय्यर ने आगे कहा, “दुनिया का विश्व गुरु बनना हो तो यह जरूरी है दिखाने के लिए कि जितना भी खराब हो हमारा समस्या पाकिस्तान के साथ, उसका हल निकालने के लिए हम मेहनत कर रहे हैं। पिछले दस साल से सारी मेहनत बंद है। मस्कुलर पॉलिसी दिखाने वाले भारत को यह नहीं भूलना चाहिए कि पाकिस्तान के पास भी कहुटा (रावलपिंडी) में मसल (परमाणु बम) है।”

उनके इसी ट्वीट में बाद भाजपा प्रवक्ता शहजाद पूनावाला ने क्लास लगाई। पूनावाला ने कहा कॉन्ग्रेस का पाकिस्तान प्रेम थमने का नाम नहीं ले रहा है। अब कॉन्ग्रेस भारत में आतंकवादी भेजने वाले पाकिस्तान को इज्जत देने की बात कर रही है। कॉन्ग्रेस का हाथ आतंकवादियों एवं पाकिस्तान के साथ दिख रहा है और अब इसका एक और प्रमाण सामने आ गया।

पूनावाला ने मणिशंकर अय्यर के बयान पर कहा, “कॉन्ग्रेस परिवार के करीबी मणिशंकर अय्यर जो कि पीएम मोदी को हटाने के लिए एक बार पाकिस्तान से मदद माँगने भी गए थे, अब वह पाकिस्तान की ताकत और उसके परमाणु बम को दिखा रहे हैं।”

मणिशंकर अय्यर, भारत में आतंकवादी भेजने वाले पाकिस्तान को इज्जत देने की बात कर रहे हैं, जबकि इसी कॉन्ग्रेस के नेता हमारी सेना के लिए अपमानजनक भाषा का इस्तेमाल करते हैं। मणिशंकर अय्यर हमारी सेना के बंदूक लेकर घूमने, मोदी सरकार द्वारा सर्जिकल स्ट्राइक और एयर स्ट्राइक कर पाकिस्तान को सबक सिखाने जैसे कदमों की बजाय यह चाहते हैं कि भारत अपनी सुरक्षा के लिए कदम न उठाए।

उन्होंने आगे कहा कि कॉन्ग्रेस सरकार के समय मुंबई में 26/11 के भयानक आतंकी हमले के बाद भी मनमोहन सिंह की सरकार ने पाकिस्तान को सबक सिखाने के बजाय उसे मोस्ट फेवर्ड नेशन का दर्जा दे दिया था। उनकी सरकार के समय लगातार आतंकी घटनाएँ होती थीं और भारत अंतर्राष्ट्रीय मंचों पर मदद की गुहार लगाया करता था, लेकिन पीएम मोदी की सरकार में यह सबकुछ बदला। उसके बाद अब हालात यह हो गई है कि पाकिस्तान को अंतरराष्ट्रीय मंचों पर गिड़गिड़ाना पड़ रहा है… वहीं ‘कॉन्ग्रेस का हाथ’ को ‘पाकिस्तान के साथ’ के साथ देखा जा रहा है। यह उसी का एक और उदाहरण है।

नंगा कर प्राइवेट पार्ट पर वार, बाल पकड़ खींचे… कैप्टन अभिनंदन के साथ जो करने की हिम्मत न जुटा सका पाकिस्तान, वह बर्बरता अपने ही देश में एक कर्नल के साथ कॉन्ग्रेस ने करवाई

सेना में जाकर देशसेवा करने वाले एक कर्नल को कॉन्ग्रेस सरकार ने आतंकवादी सिद्ध करने की कोशिश की। उसे धमाके के एक मामले में आरोपित बनाया गया। कर्नल के साथ पाकिस्तान में विमान दुर्घटना के बाद पहुँचे विंग कमांडर अभिनन्दन वर्धमान से भी बुरा बर्ताव किया गया। यहाँ तक कि कर्नल का पैर तोड़ा गया, उसके वरिष्ठ अधिकारी और पुलिस वालों ने उसे मारा। अवैध रूप से उसे बंद रखा। सालों तक जेल में रखा। उसकी सैन्य सेवा को भी प्रभावित किया गया।

यह कहानी किसी तानाशाही वाले देश की नहीं बल्कि भारत की है जहाँ कॉन्ग्रेस शासन में ‘भगवा आतंकवाद’ का नैरेटिव गढ़ने के लिए साधुओं, सैन्यकर्मियों और हिन्दू हितों के लिए काम करने वालों को निशाने पर लिया गया। 2008 में हुए मालेगाँव धमाका मामले में मुकदमे में आरोपी बनाए गए लेफ्टिनेंट श्रीकांत प्रसाद पुरोहित की कहानी पीड़ाजनक और गुस्से से भरने वाली है। कर्नल पुरोहित ने बुधवार (8 मई, 2024) को मुंबई के एक कोर्ट में अपनी पीड़ा बताई।

उन्होंने बताया, “मेरे साथ ऐसा व्यवहार किया गया जो किसी जानवर के साथ भी नहीं किया जाता। मेरे साथ युद्ध बंदी से भी बदतर व्यवहार किया गया। हेमंत करकरे, परमबीर सिंह और कर्नल श्रीवास्तव लगातार इस बात पर जोर देते रहे कि मैं मालेगाँव बम धमाके के लिए खुद को जिम्मेदार बता दूँ। उन्होंने मुझसे कहा कि मैं RSS, VHP के वरिष्ठ नेताओं और उत्तर प्रदेश के तत्कालीन सांसद योगी आदित्यनाथ का नाम लूँ। उन्होंने मुझे 3 नवम्बर, 2008 तक यातनाएँ दी।”

उन्होंने कोर्ट को बताया कि मालेगाँव में धमाके के बाद उन्हें पंचमढ़ी से गिरफ्तार किए जाने के बाद जबरदस्ती एक जगह अवैध रूप से रखा गया। कर्नल पुरोहित ने बताया कि उन्हें खंडाला के बंगले में रखा गया जहाँ उन्हें प्रताड़ित किया गया। उनको 29 अक्टूबर, 2008 को गिरफ्तार किया गया था और उन्हें 3 नवम्बर तक प्रताड़ित किया गया था। इस दौरान ATS अधिकारी परमबीर सिंह, हेमंत करकरे और अन्य अधिकारियों ने मारा और उनका घुटना तोड़ दिया। इसकी वजह से उन्हें चलने में परेशानी होती है।

कर्नल पुरोहित को जब पकड़ा गया तब वह इंटेलिजेंस के लिए काम कर चुके थे और SIMI, ISI समेत तमाम देश विरोधी गतिविधि को रोकने में काफी हद तक सफल रहे थे। मालेगाँव मामले की जाँच के नाम पर उनसे इन आतंकी संगठनों पर की गई कार्रवाई और उनके मुखबिरों के बारे में बताने को कहा गया। कर्नल पुरोहित ने आरोप लगाया कि उनके साथ यह ज्यादती इसलिए हुई क्योंकि तब की केंद्र और महाराष्ट्र की कॉन्ग्रेस सरकार ऐसा चाहती थीं। यह सब उनकी शह पर हो रहा था।

कर्नल पुरोहित को मारने तक की योजना बनाई गई थी। उनका एनकाउंटर करने का प्लान था। 2018 में लिखे गए एक पत्र में कर्नल पुरोहित ने बताया था कि पूछताछ के दौरान उनके कपड़े उतारे गए, उनके प्राइवेट पार्ट पर वार किया गया और उनके बाल पकड़ कर खींचा गया। उन्हें शारीरिक यातनाएँ देकर दबाव डाला गया कि वह मालेगाँव धमाके में जिम्मेदारी स्वीकार कर लें। उन पर दबाव डाला गया कि वह RSS-VHP नेताओं का नाम लें और योगी आदित्यनाथ को भी आतंक के मामले में फँसाएँ।

कर्नल पुरोहित ने जिन हेमंत करकरे पर यातना देने का आरोप लगाया है, उनकी 26/11 हमले में आतंकियों ने हत्या कर दी थी। परमबीर सिंह बाद में मुंबई के पुलिस कमिश्नर बने थे लेकिन उनके ऊपर उगाही के गंभीर आरोप लगे थे। वह भगोड़े भी घोषित किए गए थे। कर्नल पुरोहित ने मुंबई के कोर्ट को बताया है कि उनको यह यातनाएँ हिन्दू आतंकवाद का नैरेटिव गढ़ने के लिए दी जा रहीं थी। इसके लिए पहले से ही प्लान बनाया गया था।

इसी समय पर एनसीपी नेता शरद पवार हिन्दू आतंकवाद की बातें कर रहे थे। कॉन्ग्रेसी इकोसिस्टम यह सिद्ध करने में लगा था कि देश में सिर्फ इस्लामी आतंकवाद नहीं है बल्कि हिन्दू आतंकवाद नाम का भी कुछ होता है। यहाँ तक कि 26/11 हमले को तक हिन्दू आंतकवाद से जोड़ने की साजिश हुई थी। यह सब वोटबैंक और कॉन्ग्रेस की हिन्दू घृणा के कारण फल फूल रहा था। वामपंथी पत्रकार इस बात को और हवा दे रहे थे।

कर्नल पुरोहित को दी प्रताड़नाओं की तुलना अगर 2019 बालाकोट एयरस्ट्राइक के बाद पाकिस्तान में विमान क्रैश होने के कारण गिरे विंग कमांडर अभिनन्दन वर्धमान से की जाए तो पाकिस्तान का बर्ताव कॉन्ग्रेस सरकार से अच्छा दिखेगा। अभिनन्दन वर्धमान को जहाँ कुछ घंटों के लिए ही पाकिस्तान रख पाया था, वहीं कर्नल पुरोहित को मात्र इसलिए सालों तक जेल में रखा गया ताकि हिन्दू आतंकवाद का फर्जी नैरेटिव गढ़ा जा सके और बहुसंख्यक आबादी को आतातायी घोषित किया जाए।

विंग कमांडर अभिनन्दन वर्धमान को मोदी सरकार 48 घंटों के भीतर पाकिस्तान से वापस ले आई थी। पाकिस्तान खुद ही विंग कमांडर वर्धमान को सौंपने को मजबूर हो गया था क्योंकि उसे पता था कि मोदी सरकार अपने सैनिक के लिए कोई भी बड़ा कदम उठा सकती है। दूसरी तरफ कॉन्ग्रेस का रवैया था कि देश की करोड़ों जनता का दशकों का सेना में विश्वास टूट जाए, इसलिए एक सैनिक को ही आतंकी घोषित करने का प्रयास करो। उसे हिन्दू आतंकवादी बताओ।

‘आडवाणी ने कहा- राहुल गाँधी भारतीय राजनीति के नायक’: रामरथी के नाम का सहारा लेकर झूठ फैला रहे ‘राम द्रोही’, जानिए क्या है सच

लोकसभा चुनावों के बीच कॉन्ग्रेस फर्जी सूचनाओं के जरिए अपना प्रचार करने में लगी है। इस बीच राहुल गाँधी की छवि निर्माण के लिए कुछ दिन पहले एक पोस्ट वायरल की गई। इस पोस्ट में कहा गया है कि भाजपा नेता लाल कृष्ण आडवाणी ने कहा है कि राहुल गाँधी भारतीय राजनीति के नायक हैं। अब कॉन्ग्रेसी इसी पोस्ट को शेयर कर करके अपना एजेंडा चला रहे हैं, लेकिन सवाल है कि क्या वाकई भाजपा के दिग्गज नेता ने ऐसी कोई बात कही है या कॉन्ग्रेस की अन्य बातों की तरह ये भी निराधार दावा है।

वायरल होते पोस्ट में देख सकते हैं कि शीर्षक के तौर पर लिखा- “राहुल गाँधी भारतीय राजनीति का नायक है : लालकृष्ण आडवाणी।” इसके बाद पोस्ट में 7 मई, 2024 की तारीख डालकर लिखा गया है,

“देश के पूर्व गृहमंत्री भारतरत्न लाल कृष्ण आडवाणी ने राहुल गाँधी को लेकर एक बड़ा बयान दिया है। आडवाणी ने कहा है कि भले ही मैं भाजपा से हूँ, लेकिन मैं आज भारत देश के समाज सेवक के रूप में भारतीय जनता को ये कहना चाहता हूँ कि राहुल गाँधी ही एक ऐसे इंसान हैं जो भारत देश को एक अच्छा राष्ट्र बना सकते हैं, क्योंकि उनमें वह निर्णय लेने की क्षमता है जो भारत देश के देशवासियों को नई दिशा प्रदान कर सकते हैं। मैंने भी देश के लिए एक गृहमंत्री के रूप में सेवा की है, लेकिन मैंने कभी भी राजनीति में राहुल गाँधी जैसा प्रभावशाली नेता नहीं देखा।

लालकृष्ण आडवाणी का बयान ऐसे समय में सामने आया है जब आज तीसरे चरण का चुनाव चल रहा है। उनके बयान को महत्वपूर्ण इसलिए भी माना जा रहा है कि अभी हाल ही में उन्हें मोदी सरकार की ओर से भारत रत्न दिया गया है ऐसे में राहुल गाँधी की तारीफ करके लाल कृष्ण आडवाणी ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के सामने एक बड़ी चुनौती खड़ी कर दी है।”

अब जैसा कि समझा जा सकता है चुनाव के समय में इतने बड़े बयान के महत्व क्या हो सकते हैं और इससे कितनी खलबली मच सकती है, लेकिन मीडिया में चेक करने पर पता चलता है कि किसी मेनस्ट्रीम मीडिया ने इसे कवर नहीं किया है। उलटा इस पोस्ट की प्रमाणिकता पर जगह-जगह सवाल उठे हैं।

इस पोस्ट को अवधभूमि न्यूज ने अपनी साइट पर बिन किसी सोर्स के पब्लिश किया था। साथ में डिस्क्लेमर में ये भी कहा था कि वो इस पोस्ट की प्रमाणिकता की पुष्टि नहीं करते। बाद में पोस्ट वायरल हुआ तो इस लेख को वहाँ से हटा दिया गया, लेकिन कॉन्ग्रेस के लोग इसे साझा करते रहे।

वहीं एबीपी न्यूज बताता है कि जब उन्होंने इस संबंध में भाजपा के राष्ट्रीय प्रवक्ता संजय मयूख से बात की तो पता चला कि पूर्व उप-प्रधानमंत्री आडवाणी ने ऐसा कोई बयान दिया ही नहीं है। अगर उन्हें कुछ कहना होगा तो उसे भाजपा खुद रिलीज करेगी या फिर उनके करीबी दीपक चोपड़ा उसे रिलीज करेंगे। कॉन्ग्रेस नहीं। कॉन्ग्रेस सिर्फ तरह-तरह के हथकंडे अपना रही है, जो विफल हो रहे हैं। उसका जवाब लोग मतदान के जरिए देंगे।

वहीं आडवाणी के करीबी और उनके पुराने सहयोगी दीपक चोपड़ा ने तो साफ कहा, “लालकृष्ण आडवाणी ने ऐसी कोई बात नहीं की है। न तो उन्होंने अभी ऐसा कोई बयान दिया है और न ही कभी पहले दिया है।”

गौरतलब है कि लाल कृष्ण आडवाणी लंबे समय से सार्वजनिक तौर पर नजर भी नहीं आए हैं। न ही लंबे अरसे से वे मीडिया से बात करते दिखे हैं। स्वास्थ्य और उम्र के कारण वे राम मंदिर की प्राण-प्रतिष्ठा समारोह में भी शामिल नहीं हुए थे। यहाँ तक कि ‘भारत रत्न’ से उनको सम्मानित करने के लिए राष्ट्रपति भी खुद उनके घर तक गईं थी।

ऐसे में निष्कर्ष तो यही निकलता है कि भाजपा के वरिष्ठ नेता लाल कृष्ण आडवाणी ने ऐसी कोई बात कही ही नहीं है। न उन्होंने राहुल गाँधी की तारीफ की है न ही उन्हें भारतीय राजनीति का नायक बताया है, न ही ये कहा है कि वो प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को चुनौती दे सकते हैं।

‘हिंदू आतंकवाद’ का नैरेटिव गढ़ने को साध्वी को बेल्ट से पीटा, दिखाए थे पोर्न… कर्नल पुरोहित के खुलासों से पहले भी कोर्ट में सामने आए थे कॉन्ग्रेसी राज के कुकर्म

मालेगाँव बम धमाका मामले में मुकदमे का सामना करने वाले लेफ्टिनेंट कर्नल श्रीकांत प्रसाद पुरोहित ने बताया है कि महाराष्ट्र ATS ने पूछताछ के दौरान उनका घुटना तोड़ दिया था। उन्होंने एक कोर्ट को बताया है कि ATS उन पर इस बात के लिए दबाव बनाती थी कि वह मालेगाँव धमाका मामले में RSS-VHP नेताओं और सांसद योगी आदित्यनाथ का नाम लें। इससे पहले इसी मामले में कॉन्ग्रेस शासनकाल से मुकदमा झेलीं सांसद साध्वी प्रज्ञा कोर्ट में रो पड़ीं थी।

इस मामले में अक्टूबर 2023 में NIA के विशेष कोर्ट को बयान दर्ज करवाते समय साध्वी प्रज्ञा भावुक हो गईं थी। उनके साथ मालेगाँव धमाके में आरोपित बनाए गए अन्य 7 व्यक्तियों का भी बयान दर्ज किया जा रहा था। साध्वी से जब धमाके के बाद मृत और घायल लोगों को आई चोटों के सम्बन्ध में प्रश्न पूछे गए तो वह भावुक हो गईं थीं। इसके पश्चात मामले की सुनवाई कर रहे न्यायाधीश एके लाहोटी ने कार्रवाई को 10 मिनट के लिए रोक दिया था।

रिपब्लिक टीवी को दिए हुए एक इंटरव्यू में साध्वी प्रज्ञा ने इस मामले में कई खुलासे भी किए थे। उन्होंने मुंबई के पूर्व पुलिस आयुक्त परमबीर सिंह पर गंभीर आरोप लगाए थे। उन्होंने बताया था कि 3-4 पुलिसकर्मियों की उपस्थिति में उनको व्यक्तिगत रूप से बहुत ज्यादा प्रताड़ित किया और हिरासत में लेकर उन्हें बेल्ट से इस तरह पीटा गया कि उन्हें वेंटीलेटर तक पर जाना पड़ा। उनकी रीढ़ की हड्डी भी टूट गई।

उन्होंने बताया था कि जब भी उनकी बेल की बात चली तो न्यायाधीशों तक को धमकी देने का काम हुआ। उन्होंने परमबीर सिंह पर आरोप लगाया था कि उन्हें हिरासत के दौरान पॉर्न वीडियो दिखाई गईं और उनसे भद्दे सवाल किए गए। अपनी प्रताड़ना के विषय में बताया था कि उन्हें 7-8 लोगों के घेरे के बीच में मारा गया।

उनके पैरों के तलों तक में बेल्ट से पिटाई हुई। साध्वी ने इस इंटरव्यू में कहा था कि वह परमबीर के षड्यंत्र के विरुद्ध कुछ करने वाली हैं, जिन जिन लोगों ने उन्हें प्रताड़ित किया, उन पर भी केस होगा और उन्हें दंड दिलवाया जाएगा।

उन्होंने इस इंटरव्यू में बताया था कि पहले उनको भगवा आतंकी कहा गया कहा गया और फिर भारत को आतंकवादी देश घोषित करवाने का प्रयास हुआ। उन्होंने आरोप लगाया था कि ये सारा षड्यंत्र कॉन्ग्रेस का था। साध्वी प्रज्ञा 2019 में भोपाल से सांसद बनी थीं। मालेगाँव धमाका मामले में  NIA द्वारा वर्ष 2016 में दाखिल अंतिम चार्जशीट में उनका नाम नहीं था और उन्हें जमानत मिल गई थी। उनको इस मामले में दोषी नहीं माना गया था।