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लड़की से बात करने पर वामपंथी गुंडों ने सिद्धार्थन को नंगा घुमाया, बेल्ट-तार से पीटा, मरने को किया मजबूर: केरल के छात्र की आत्महत्या मामले में CBI रिपोर्ट से खुलासा

केरल के एक मेडिकल कॉलेज में एक छात्र की प्रताड़ना के बाद आत्महत्या के मामले में CBI जाँच से नए खुलासे हुए हैं। CBI ने अपनी रिपोर्ट में बताया है कि सिद्धार्थन को उसके साथी छात्रों ने कई दिनों तक प्रताड़ित किया, नंगा घुमाया, मारा पीटा और खाने-पीने भी नहीं दिया। इसके बाद उसने आत्महत्या कर ली।

CBI ने इस संबंध में एर्नाकुलम के एक कोर्ट में 25 अप्रैल को अपनी जाँच रिपोर्ट पेश की है। इसमें बताया गया है कि वायनाड के एक मेडिकल कॉलेज में पढ़ने वाला सिद्धार्थन 15 फरवरी, 2024 को अपने घर जाने के लिए मेडिकल कॉलेज से बाहर स्टेशन के लिए निकल चुका था। इसके बाद उसे हॉस्टल में रहने वाले कुछ छात्रों ने फोन करके वापस आने पर मजबूर किया।

रिपोर्ट में बताया गया कि यह छात्र सिद्धार्थन से बदला लेना चाह रहे थे। इन्होने सिद्धार्थन पर एक लड़की से बदतमीजी का आरोप लगाया था। जब सिद्धार्थन यहाँ वापस आ गया तो उसे हॉस्टल के पीछे एक सूनसान पहाड़ी पर ले जाया गया और मारापीटा गया। यहाँ उसके साथ बर्बरता हुई। यहाँ उसके साथ दानिश, आदित्यन वी, सऊद और अल्ताफ ने ज्यादती की।

इसके बाद काशिनाथन नाम के एक सीनियर ने सिद्धार्थन को हॉस्टल बुलाया। यहाँ उसे एक कमरे में बंद कर दिया गया। इसके बाद कई छात्रों ने यहाँ उसे मारना पीटना चालू किया, उसे बेल्ट से मारा गया। उस पर मुक्के और लातें बरसाई गईं और यहाँ तक कि उसे तार से पीटा गया।

सिद्धार्थन को इसके बाद हॉस्टल के कॉरिडोर में ले जाया गया। उसे इस प्रताड़ना के दौरान नंगा भी किया गया और छात्रों के समूह के सामने बेईज्जत किया गया। उसे कुछ खाने-पीने को भी नहीं दिया गया। इसके बाद उसे हॉस्टल के ही एक कमरे में छोड़ दिया गया। यह प्रताड़ना का दौर 16 से 17 फरवरी तक चला।

इसके बाद 18 फरवरी को सिद्धार्थन का शव एक बाथरूम में लटका हुआ मिला। इस मामले में CBI ने कुल 19 छात्रों को आरोपी बनाया है। पहले इस मामले की जाँच राज्य पुलिस ही कर रही थी लेकिन फिर परिजनों की माँग पर इसे CBI को सौंप दिया गया था। सिद्धार्थन के पिता ने आरोप लगाया था कि उनके बेटे की हत्या की गई है और इस मामले में कम्युनिस्ट छात्र संगठन SFI के कुछ नेता भी शामिल हैं जिन पर राज्य सरकार कार्रवाई करने से बच रही थी।

CBI ने सिद्धार्थन की मौत का कारण पता करने के लिए उसके पोस्टमार्टम की रिपोर्ट दिल्ली के AIIMS भेजी हैं जहाँ डॉक्टरों का एक पैनल इस मामले पर अपनी राय देगा। CBI ने सिद्धार्थन मामले में आत्महत्या के लिए प्रेरित करने, किसी को बंधक बना कर रखने, षड्यंत्र रचने और धमकाने समेत कई धाराओं में मामला दर्ज किया है।

गौरतलब है कि 18 फरवरी को केरल के वायनाड में एक मेडिकल कॉलेज के छात्र जे एस सिद्धार्थन की लाश मिली थी। बताया गया था कि सिद्धार्थन ने आत्महत्या की है। जब इस मामले की जाँच हुई थी तो पता चला था कि सिद्धार्थन को लगातार तीन दिन तक प्रताड़ित किया गया था जिससे आहत होकर उसने आत्महत्या कर ली थी।

‘पाकिस्तान का नारा लगाने वालों का वही हाल करेंगे, जैसा महाराजा सुहेल देव ने सालार मसूद गाजी का किया था’: बहराइच में गरजे मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ

उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने भारत में रहकर पाकिस्तान की गाने वालों के खिलाफ कड़ी टिप्पणी की है। उन्होंने चेतावनी देते हुए कहा है कि जो भिखारी पाकिस्तान का नारा लगाते हैं, वो वहीं चलाए जाएँ और भारत पर बोझ न बनें। बहराइच में जनसभा को संबोधित करते हुए सीएम योगी आदित्यनाथ ने कहा कि ‘जो लोग पाकिस्तान का नारा लगाते हैं, उनका वही हाल कर देंगे, जो महाराजा सुहेल देव ने सैयद सालार मसूद गाजी का किया था।’ बता दें कि बहराइच में इस्लामी आक्रांत महमदू गजनवी के भांजे सालार मसूद की कब्र है, उसे महाराजा सुहेव देव ने बहराइच में ही मार गिराया था।

बहराइच में जनसभा को संबोधित करते हुए मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ पाकिस्तान समर्थकों पर भड़क गए। उन्होंने भरे मंच से कहा कि भारत में रहने वाले बहुत सारे ऐसे लोग हैं, जिनका दिल पाकिस्तान के लिए धड़कता है। ये लोग रहते और खाते भारत में हैं, लेकिन इनकी वफादारी सीमा पार पाकिस्तान के साथ है। ऐसे लोगों से हमें सावधान रहना चाहिए।

न्यूज 18 की रिपोर्ट के मुताबिक, देश विरोधी नारे लगाए जाने पर मंगलवार (7 मई 2024) को उत्तर प्रदेश की मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने साफ कहा कि “भारत में बड़ी तादाद ऐसे लोगों की है… जिनका दिल पाकिस्तान के लिए धड़कता है… ये लोग रहते हैं भारत में… खाते हैं भारत में.. लेकिन इनकी वफादारी सीमा पार पाकिस्तान के साथ है। ऐसे लोगों से हमें सावधान रहना चाहिए।”

मुख्यमंत्री ने कहा, “जो भिखारी पाकिस्तान का नारा लगाते हैं, वो वहीं चले जाएँ… और भारत पर बोझ ना बनें।” उन्होंने कहा, “जो लोग पाकिस्तान का नारा लगाते हैं, उनका वो हाल कर देंगे जो महाराजा सुहेल देव ने सैयद सालार मसूद गाजी का किया था।”

इस दौरान उन्होंने महाराणा प्रताप की मूर्ति का अपमान करने पर समाजवादी पार्टी को निशाने पर लिया। सीएम योगी ने कहा, “अकबर-औरंगजेब की औलादें ये समझ लें कि ये नया भारत है। समाजवादी पार्टी के गुंडे मूर्ति के ऊपर चढ़ते हैं। महाराणा प्रताप के भाले को तोड़ने का प्रयास करते हैं। मूर्ति अपवित्र करते हैं। नया भारत राष्ट्रनायकों का अपमान बर्दास्त नहीं करता है।” सीएम योगी ने समाजवादी पार्टी को रामद्रोही और कॉन्ग्रेस को आतंकवादियों की समर्थक पार्टी बताया।

गुजरात के प्रेरणा पीठ निष्कलंकी मंदिर पर मुस्लिम भीड़ का हमला: VHP ने बताया- पूर्व नियोजित हमले में कई देवी-देवताओं की मूर्तियाँ तोड़ी गईं

गुजरात के अहमदाबाद में पिराना स्थित प्रेरणा पीठ निष्कलंकी मंदिर पर मुस्लिम भीड़ ने हमला कर दिया है। हमले का एक वीडियो भी वायरल हो रहा है। इस वीडियो में देखा जा सकता है कि भीड़ में ज्यादातर जालीदार टोपी पहने हुए हैं और वे मंदिर पर डंडों से हमला कर रहे हैं। विश्व हिंदू परिषद (VHP) ने दावा किया कि हमला पूर्व नियोजित था और हिंदू देवी-देवताओं की कई मूर्तियाँ तोड़ी गई हैं।

बता दें कि इस जगह को लेकर सालों से विवाद चलता आ रहा है। मुस्लिम पक्ष का दावा है कि इस मंदिर की जगह दरगाह की है, जबकि हिंदू पक्ष इसे मंदिर होने की बता करता आ रहा है। इस बात को लेकर अफवाह उड़ी थी कि यहाँ से कुछ कब्रें हटा दी गई हैं। यह अफवाह फैलते ही स्थानीय मुस्लिमों की भीड़ वहाँ जमा हो गई।

कुछ ही देर में एक बड़ी भीड़ जमा हो गई और मंदिर में घुस कर तोड़फोड़ करने लगी। भीड़ के हाथों में लकड़ी और लोहे के डंडे भी दिखे। हमले का एक वीडियो विश्व हिंदू परिषद की गुजरात इकाई ने अपने आधिकारिक इंस्टाग्राम अकाउंट पर पोस्ट किया है। इस में हिंदू संगठन ने दावा किया है कि यह हमला पूर्व नियोजित था।

हिंदू संगठन VHP ने आगे दावा किया है कि हमले में मंदिर के अंदर स्थापित देवी-देवताओं की कई मूर्तियाँ तोड़ दी गई हैं। ऑपइंडिया ने इस संबंध में विश्व हिंदू परिषद से संपर्क करने की कोशिश की, लेकिन उनसे संपर्क नहीं हो सका।

घटना की सूचना मिलते ही अहमदाबाद ग्रामीण जिला थाना पुलिस और एसओजी, एलसीबी सहित पुलिस का काफिला भी तुरंत पिराना पहुँच गया। उन्होंने स्थिति पर तुरंत काबू पा लिया। अब इस मामले में आगे की जाँच शुरू कर दी गई है।

बता दें कि इस मामले को लेकर कोर्ट में केस चल रहा है। साल 2022 में इमामशाह दरगाह के ट्रस्ट की ओर से हाई कोर्ट में हलफनामा दाखिल किया गया था। उसमें कहा गया था कि असल में मूल धार्मिक स्थल हिंदुओं का है और संस्था ‘सतपंथियों’ की है।

इमामशाह बावा रोजा ट्रस्ट ने हलफनामा दाखिल कर कहा था कि पिराना स्थित इस जगह पर 600 साल पुरानी मस्जिदें, दरगाह और मंदिर हैं। ट्रस्ट का कहना था कि यह कहना सही नहीं होगा कि यह स्थान मूल रूप से एक मुस्लिम संस्था है और एक हिंदू धार्मिक स्थल है। यह भी कहा गया है कि ट्रस्ट के ट्रस्टियों में हिंदू और मुस्लिम दोनों समुदाय के लोग शामिल हैं।

ट्रस्ट का यह दावा 1939 में निचली अदालत द्वारा अनुमोदित एक योजना के आधार पर किया गया है, जिसमें कहा गया है कि पिराना मंदिर हिंदू सतपंथियों की एक संस्था है। इसके अलावा कहा गया है कि सैयद ट्रस्टियों की ओर से धार्मिक स्थल को वक्फ संपत्ति घोषित करने की माँग की गई थी।

साउथ में PM मोदी का जलवा: रोड शो में उमड़ी भारी भड़ी, रथ पर सवार प्रधानमंत्री का झलक पाने के लिए बेताब दिखे लोग; साथ में चंद्रबाबू नायडू और पवन कल्याण भी

लोकसभा चुनाव 2024 और आँध्र प्रदेश विधानसभा चुनाव को देखते हुए प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने आंध्र प्रदेश के विजयवाड़ा में रोड शो किया। इस रोड शो में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के साथ आंध्र प्रदेश के पूर्व मुख्यमंत्री चंद्रबाबू नायडू और जनसेना पार्टी के मुखिया पवन कल्याण भी रथ पर मौजूद रहे। आंध्र प्रदेश में चंद्रबाबू नायडू की तेलुगू देशम पार्टी और अभिनेता पवन कल्याण की पार्टी जनसेना एनडीए गठबंधन का हिस्सा हैं। आंध्र प्रदेश में 13 मई को लोकसभा चुनाव के साथ ही विधानसभा चुनाव के लिए भी वोटिंग होगी।

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की अगुवाई में ये रोड शो 1 घंटे से अधिक समय तक चला। पीएम मोदी के रोड शो की शुरुआत विजयवाड़ा के इंदिरा गांधी म्यूनिसिपल स्टेडियम से हुई और बेंच सर्कल तक लगभग तीन किमी की दूरी तक चली। आंध्र प्रदेश में एनडीए का मुकाबला तीन पक्षीय है। यहाँ राज्य की सत्ताधारी पार्टी वाईएसआर कॉन्ग्रेस पार्टी और कॉन्ग्रेस पार्टी के साथ एनडीए का त्रिकोणीय मुकाबला हो रहा है।

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने इस रोडशो के बारे में एक्स पर भी लिखा। पीएम मोदी ने लिखा, “विजयवाड़ा में चंद्रबाबू नायडू और पवन कल्याण के साथ यादगार रोडशो। पिछले कुछ समय से पूरे आंध्र प्रदेश की यात्रा के दौरान मुझे ये समझ आया है कि राज्य के लोग एनडीए की पूर्ण बहुमत की सरकार के लिए मतदान करने जा रहे हैं। महिलाओं और युवाओं का बढ़ता समर्थन पूरे राज्य में एनडीए की स्वीकार्यता को दिखाता है।”

पीएम मोदी ने आगे लिखा, “आंध्र प्रदेश में बीजेपी और तेलुगू देशम पार्टी ने पहले भी साथ में काम किया है। हमारा एक मजबूत गठजोड़ है, जो आंध्र प्रदेश के उज्जवल भविष्य के लिए काम करेगा। जनसेना प्रमुख पवन कल्याण जी का साथ हमारे गठबंधन को और भी मजबूती दे रहा है। प्रदेश के लोग ये देख पा रहे हैं कि हमारा गठबंधन ही राज्य की आकाँक्षाओं को पूर्ण करने में सक्षम है।”

तेलंगाना की रैली में पीएम मोदी ने कॉन्ग्रेस पर किया जोरदार हमला

इससे पहले, लोकसभा चुनाव 2024 के प्रचार के लिए प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी बुधवार (8 मई 2024) को तेलंगाना के करीमनगर पहुँचे। इस एक जनसभा को संबोधित करते हुए उन्होंने कॉन्ग्रेस, राहुल गाँधी और गाँधी परिवार पर जमकर निशाना साधा। प्रधानमंत्री ने कहा कि कॉन्ग्रेस ने अपनी पार्टी के नेता एवं देश के पूर्व प्रधानमंत्री पीवी नरसिम्हाराव के पार्थिव शरीर का भी अपमान किया। पीएम मोदी ने गाँधी परिवार पर आरोप लगाया कि कॉन्ग्रेस में ‘फैमिली फर्स्ट’ की नीति है। उन्होंने कहा, “फैमिली फर्स्ट की वजह से कॉन्ग्रेस ने पीवी नरसिम्हाराव जी का भी अपमान किया। उनके निधन के बाद उनके पार्थिव शरीर का भी अपमान किया। कॉन्ग्रेस दफ्तर में एंट्री तक नहीं दी। ये बीजेपी-एनडीए सरकार है, जिसने पीवी नरसिम्हाराव जी को भारत रत्न से सम्मानित किया।”

सैम पित्रोदा के बयान पर कॉन्ग्रेस को दिखाया आईना

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने बुधवार (8 मई 2024) को तेलंगाना में करीमनगर के बाद वारंगल में जनसभा को संबोधित किया। इस दौरान भी उन्होंने कॉन्ग्रेस और राहुल गाँधी पर जमकर निशाना साधा। पीएम मोदी ने कहा, “मैं सोच रहा था कि (राष्ट्रपति) द्रौपदी जी, जिनकी बहुत अच्छी प्रतिष्ठा है, आदिवासी समाज की बहुत प्रतिष्ठित बेटी हैं। उनको हम राष्ट्रपति बना रहे हैं तो कॉन्ग्रेस उनको हराने के लिए इतनी मेहनत क्यों कर रही है? कॉन्ग्रेस आदिवासियों को नाराज क्यों कर रही है? मैं सोचता रहता था, लेकिन मुझे समझ में नहीं आ रहा था।”

राहुल गाँधी पर हमला बोलते हुए उन्होंने कहा, “मुझे लगता था कि ठीक है कि ये शहजादे का दिमाग ऐसा है तो शायद द्रौपदी जी का विरोध कर रहा है। उनको चुनाव में हराने के लिए निकल पड़ा है, लेकिन मुझे आज पता कि ये कॉन्ग्रेस पार्टी, जो एक आदिवासी बेटी है, उसको हराने के लिए क्यों मैदान में उतरी थी। आज मुझे पता कि अमेरिका में ये शहजादे के अंकल रहते हैं।”

प्रधानमंत्री ने कहा, “ये शहजादे के अंकल उनके फिलॉसफर एंड गाइड है। जैसे आजकल क्रिकेट में थर्ड अंपायर होता है ना कि कोई कंफ्यूजन हो तो थर्ड अंपायर को पूछते हैं। वैसे ही ये शहजादे कोई कंफ्यूजन होता है तो उनसे सलाह लेते हैं। ये शहजादे के फिलॉसफर एंड गाइड अंकल ने बड़ा रहस्य खोला है। उसने कहा है कि जिनकी चमड़ी का रंग काला होता है, ये सब अफ्रीका के हैं।”

‘अढ़ाई दिन का झोपड़ा असली मालिकों को सौंपा जाए’: जैन संतों उस मंदिर का किया दौरा, जिसे मुस्लिम आक्रांता कुतुबद्दीन ऐबक ने तोड़कर बना दिया मस्जिद

मंगलवार (7 मई) की सुबह, मुनि सुनील सागर के नेतृत्व में जैन समुदाय ने राजस्थान के अजमेर जिले में 12वीं सदी की मस्जिद अढ़ाई दिन का झोंपड़ा तक नंगे पैर मार्च किया। उन्होंने कहा कि एएसआई द्वारा संरक्षित इस जगह पर पूजा-अर्चना करना सदियों से उनका रिवाज रहा है। इस दौरान उन्हें रोकने की कोशिश की गई।

एएसआई ने संपत्ति को संरक्षित स्मारक घोषित किया है। स्थानीय लोगों ने उन्हें रोकने की कोशिश ये कहते हुए की, कि जैन मुनि बिना कपड़े पहने मस्जिद में प्रवेश नहीं कर सकते। भिक्षुओं ने तर्क दिया कि ऐसे ही रहना और अढ़ाई दिन का झोपड़ा में जाना उनका अधिकार है। जैन संतों के साथ विश्व हिंदू परिषद के कार्यकर्ता भी शामिल थे। उन्होंने कहा कि 12वीं शताब्दी में मस्जिद में बदलने होने से पहले यह स्थान कभी एक संस्कृत विद्यालय था।

जैन संतों और उनके अनुयायियों ने अपनी यात्रा के दौरान मस्जिद के केंद्रीय क्षेत्र में प्रवेश नहीं किया। मुनि सुनील सागर ने स्थल पर पत्थर के मंच पर दस मिनट तक प्रवचन किया। उन्होंने कहा “भवन उसके असली मालिकों के नियंत्रण में होनी चाहिए। अगर यहाँ पूजा-अर्चना करना हमारी परंपरा रही है तो ऐसा करना भी चाहिए। इसे सर्वोच्च पद के अधिकार की मंशा की ओर नहीं ले जाना चाहिए। हमें सावधान रहना चाहिए। जब हम तथ्यों को स्वीकार किए बिना दूसरे की संपत्ति पर अपना अधिकार जताते हैं, तो यह शत्रुता को बढ़ावा देता है। हमें सद्भाव के लिए प्रयास करना चाहिए और आगे बढ़ना चाहिए।”

टाइम्स ऑफ इंडिया से बात करते हुए मुनि सुनील सागर ने कहा, “आज मैंने अढ़ाई दिन का झोपड़ा का दौरा किया और पाया कि यह महज एक झोपड़ी (झोपड़ा) नहीं बल्कि एक महल है। मैंने रामायण और महाभारत के कई प्रतीक देखे। मुझे हिंदू आस्था की टूटी हुई मूर्तियाँ भी मिलीं, फिर भी ये विडंबना है कि इसे मस्जिद कहा जाता है। उन्होंने कहा, “हमें संपत्ति पर उचित स्वामित्व को स्वीकार करना चाहिए। हमें भी पूजा करने का अधिकार है और ऐसे अधिकारों पर किसी का एकाधिकार नहीं है। इतिहास विकसित होता है और परिस्थितियाँ भी। धर्म हमें दया, प्रेम और अहिंसा सिखाता है।”

अढ़ाई दिन का झोपड़ा का इतिहास

मूल रूप से एक शानदार संस्कृत कॉलेज (सरस्वती कंठाभरण महाविद्यालय) जिसमें ज्ञान और बुद्धि की हिंदू देवी माता सरस्वती को समर्पित एक मंदिर है, इस इमारत का निर्माण महाराजा विग्रहराज चतुर्थ द्वारा करवाया गया था। वह शाकंभरी चाहमान या चौहान वंश के राजा थे। कई दस्तावेज़ों के अनुसार, मूल इमारत चौकोर आकार की थी। इसके प्रत्येक कोने पर एक टावर था। भवन के पश्चिमी तरफ माता सरस्वती का मंदिर था। 19वीं शताब्दी में वहाँ सिक्का भी मिला था, जो 1153 ई. की थी। विशेषज्ञों का मानना ​​है कि सिक्के के आधार पर यह अनुमान लगाया जा सकता है कि मूल इमारत का निर्माण 1153 के आसपास हुआ था।

हालाँकि, कुछ स्थानीय जैन किंवदंतियाँ बताती हैं कि इमारत का निर्माण 660 ईस्वी में सेठ विरमदेव काला द्वारा करवाया गया था। इसका निर्माण एक जैन तीर्थस्थल के रूप में किया गया था और पंच कल्याणक मनाया जाता था। उल्लेखनीय है कि इस स्थल पर उस समय के जैन और हिंदू दोनों वास्तुकला के तत्व मौजूद हैं। अढ़ाई दिन का झोपड़ा के इतिहास पर ऑपइंडिया की रिपोर्ट यहाँ पढ़ सकते हैं

‘संपत्तियों पर कब्जा करना और उसे अपनी संपत्ति घोषित करना वक्फ बोर्ड का स्वभाव’: श्रीकृष्ण जन्मभूमि मामले में बोला हिंदू पक्ष- 1968 का समझौता अमान्य

उत्तर प्रदेश के मथुरा स्थित श्रीकृष्ण जन्मभूमि-शाही ईदगाह विवाद में हिंदू पक्ष ने मंगलवार (7 मई 2024) को इलाहाबाद हाई कोर्ट में तर्क दिया। हिंदू पक्ष ने बताया कि वक्फ बोर्ड की किसी भी संपत्ति पर अतिक्रमण करने और उसे अपनी संपत्ति घोषित करने की सामान्य प्रथा है। हिंदू पक्ष की अधिवक्ता रीना एन सिंह ने अदालत से वक्फ बोर्ड को इस तरह की प्रथा चलाने की अनुमति नहीं देने का आग्रह किया।

हिंदू पक्ष ने यह दलील तब दी, जब इलाहाबाद हाई कोर्ट मथुरा के श्रीकृष्ण जन्मभूमि मंदिर से सटे शाही ईदगाह मस्जिद को हटाने की माँग वाली मुकदमे को चुनौती देने वाली याचिका पर सुनवाई कर रहा था। यह चुनौती मुस्लिम पक्ष ने दी है। न्यायमूर्ति मयंक जैन श्रीकृष्ण जन्मभूमि-शाही ईदगाह ढाँचा विवाद से संबंधित 18 मुकदमों की समेकित पोषणीयता को चुनौती देने वाली याचिका पर सुनवाई कर रहे थे।

हिंदू पक्ष की वकील रीना सिंह ने इलाहाबाद उच्च न्यायालय को सूचित किया कि मुस्लिम पक्ष ने दावा किया है कि दोनों पक्षों के बीच 1968 के समझौते ने संपत्ति को वक्फ संपत्ति में बदल दिया है। रीना सिंह ने कहा कि इस संपत्ति के मालिक भगवान हैं, जो उस समझौते में एक पक्ष के रूप में नहीं थे। इसलिए यह समझौता अमान्य हो गया।

अधिवक्ता रीना सिंह ने आगे कहा कि वक्फ अधिनियम और पूजा स्थल अधिनियम के प्रावधान इस मामले में प्रासंगिक नहीं थे। इससे पहले 2 मई की सुनवाई में उन्होंने तर्क दिया था कि श्रीकृष्ण जन्मभूमि संरक्षित स्मारक और राष्ट्रीय महत्व का स्मारक, दोनों है। इस तरह, यह प्राचीन स्मारक और पुरातात्विक स्थल और अवशेष अधिनियम 1958 के अधीन होगा, ना कि पूजा स्थल अधिनियम के।

उन्होंने आगे कहा कि पूजा स्थल अधिनियम के साथ-साथ वक्फ अधिनियम के प्रावधान इस मामले में लागू नहीं होते हैं। रीना सिंह ने इस मामले में दर्जन भर से अधिक तथ्य रखे। उन्होंने दलील दी कि ASI की जाँच में पुरातात्विक खनन के दौरान ईदगाह के अंदर स्थित कुएँ से श्रीकृष्ण के मूल गर्भगृह के मंदिर की आठ फुट की चौखट मिल चुकी है। उस चौखट के आगे के भाग पर नक्काशी की हुई है।

उन्होंने आगे कहा कि इस चौखट के पीछे के भाग में ब्राह्मी लिपि में अंकित है कि यह भगवान वासुदेव का महास्थान है। यह चौखट मथुरा के सरकारी म्यूजियम में रखी हुई है। उन्होंने कहा कि खनन में राधा-कृष्ण की मूर्तियों के अवशेष भी मिले हैं। उन्होंने भारत सरकार के अंतर्गत आने वाले डिपार्मेंट ऑफ साइंस एंड टेक्नोलॉजी के अंतर्गत ‘इंस्टीट्यूट ऑफ साइंटिफिक रिसर्च ऑफ वेदाज’ के रिकॉर्ड को भी रखा।

इसके आधार पर रीना सिंह ने भगवान श्रीकृष्ण के जन्म और महाभारत के तमाम घटनाओं के वास्तविक समय का जिक्र करते हुए अपने तथ्यों को रखा। उन्होंने कहा कि भगवान श्रीकृष्ण और महाभारत काल के दौरान मस्जिद का कहीं कोई जिक्र ही नहीं था। इसके अलावा, उन्होंने देश के पूर्व राष्ट्रपति और भारत रत्न अब्दुल कलाम की पुस्तक ‘इग्नाइटेड माइंड्स’ का भी जिक्र किया।

इस किताब का हवाला देते हुए रीना सिंह ने कहा कि इसके पाँचवें अध्याय में साफ तौर पर इस बात का जिक्र किया गया है कि भारत का मूल धर्म सनातन संस्कृति और वह इस्लाम से अत्यधिक पुराना है। अब इस मामले की अगली सुनवाई 15 मई 2024 को होगी। हिंदू पक्ष की दलीलें पूरी होने के बाद मुस्लिम पक्ष अपनी दलीलें पेश करेगा। मुस्लिम पक्ष की ओर से अधिवक्ता तस्नीम अहमदी पेश हुए।

बताते चलें कि मथुरा में यह विवाद 13.37 एकड़ जमीन के मालिकाना हक को लेकर है। श्रीकृष्ण जन्मभूमि के पास 10.90 एकड़ जमीन है, जबकि शाही ईदगाह ढाँचा के पास 2.50 एकड़ जमीन है। ये पूरी ज़मीन हिंदू पक्ष की है। लंबे समय से चल रहे संघर्ष ने विवादित ढाँचे के निरीक्षण की अनुमति देने के इलाहाबाद उच्च न्यायालय के फैसले के साथ एक बड़ा मोड़ ले लिया है।

मणिपुर सरकार ने 5457 अवैध प्रवासियों की पहचान की, बायोमेट्रिक सैंपल जुटाए: मुख्यमंत्री बीरेन सिंह ने देश से निकालने की कार्रवाई शुरू की

मणिपुर के मुख्यमंत्री एन बीरेन सिंह ने बुधवार (8 मई) को बताया कि सरकार ने राज्य में 5457 अवैध प्रवासियों की पहचान की है। इनके निर्वासन की प्रक्रिया पूरी की जा रही है। उन्होंने कहा कि सरकार अवैध अप्रवासियों को मानवीय सहायता प्रदान कर रही है और चिंताजनक स्थिति के बावजूद सरकार इस मामले को संवेदनशीलता के साथ संभाल रही है।

सोशल मीडिया साइट एक्स (पूर्व में ट्विटर) पर पोस्ट करते हुए सीएम सिंह ने कहा, “5457 अवैध प्रवासियों की हुई पहचान, बायोमेट्रिक रजिस्टर्ड। सरकार ने 7 मई 2024 तक मणिपुर के कामजोंग जिले में कुल 5457 अवैध अप्रवासियों का पता लगाया है। इनमें से 5173 अवैध अप्रवासियों का बायोमेट्रिक डेटा एकत्र किया गया है। उनके निर्वासन की प्रक्रिया चल रही है।”

बता दें कि पिछले सप्ताह 38 अवैध अप्रवासियों को मणिपुर से म्यांमार निर्वासित किया गया था। इस तरह 8 मार्च के बाद से निर्वासित किए गए म्यांमार के अवैध प्रवासियों की कुल संख्या 77 हो गई है। इस संबंध में मुख्यमंत्री बीरेन सिंह ने 2 मई 2024 को जानकारी दी थी।

उन्होंने कहा था, “…बिना किसी भेदभाव के हमने म्यांमार से आए अवैध प्रवासियों के निर्वासन का पहला चरण पूरा कर लिया है। इसके तहत 38 और प्रवासी आज मोरेह के माध्यम से मणिपुर, भारत छोड़ रहे हैं। पहले चरण में कुल 77 अवैध अप्रवासियों को निर्वासित किया गया है।”

उन्होंने आगे कहा था, “हैंडओवर समारोह के दौरान एक भारतीय नागरिक को भी म्यांमार से वापस लाया गया। राज्य सरकार अवैध अप्रवासियों की पहचान जारी रखे हुए है और साथ ही बायोमेट्रिक डेटा भी दर्ज किया जा रहा है। आइए अपनी सीमाओं और देश को सुरक्षित रखें।”

‘इस्लामी रिवाज अपनाओ नहीं तो मार देंगे’: 14 साल की दलित नाबालिग से इब्राहिम खान करता था रेप, जबरन पढ़वाता था नमाज

महाराष्ट्र में मुंबई पुलिस ने इब्राहीम खान के खिलाफ लव जिहाद, एससी-एसटी एक्ट और पॉक्सो एक्ट समेत कई मामलों में एफआईआर दर्ज की है। इब्राहीम खान ने 14 साल की हिंदू लड़की से रेप किया और निकाह का झाँसा देकर अपने पास रखा। यही नहीं, उसने हिंदू लड़की को नमाज पढ़ने और धर्म परिवर्तन कराने के लिए दबाव डाला। वो उसे रोजा रखने के लिए भी मजबूर करता था।

ये मामला शुक्रवार (3 मई 2024) को सामने आया। जब पीड़ित बच्ची ने पुलिस से संपर्क किया। ऑपइंडिया के पास एफआईआर की कॉपी मौजूद है। एफआईआर की कॉपी के मुताबिक, लड़की के माता-पिता की मौत हो चुकी है। इब्राहीम खान उसके पड़ोस में रहता था। वो अक्सर उसके घर आया करता था। उसने नवंबर 2023 में पीड़ित को अपने घर बुलाया और उसका रेप किया। बच्ची अपनी बहन के साथ रहती है। बच्ची को उसने उसके परिवार समेत मार डालने की धमकी भी दी।

पीड़ित ने पुलिस को दी शिकायत में बताया है कि 8 नवंबर 2023 को इब्राहीम खान ने उससे कहा कि वो उसे पसंद करता है और उसके साथ पूरी जिंदगी बिताना चाहता है। उसने नाबालिग हिंदू बच्ची को निकाह के लिए प्रपोज किया। लड़की ने समय माँग कर अपना पीछा छुड़ाया, लेकिन 11 नवंबर को जब वो अपने घर में अकेले थी, तब इब्राहीम खान उसके घर में घुस आया और उसके साथ छेड़छाड़ की। इसके बाद उसने लड़की के साथ जबरदस्ती करने की कोशिश की। उसने एक बार फिर से लड़की को निकाह का झाँसा दिया और फिर जबरदस्ती उसका रेप किया।

एफआईआर में पीड़ित ने बताया, “इब्राहीम खान ने कहा कि वो मेरे साथ रहना चाहता है, अपने माता-पिता के साथ नहीं, क्योंकि वो उसे पसंद करता है। इब्राहीम ने कहा कि वो किराए पर कमरा लेगा और उसके साथ खुशी से रहेगा। मैंने मना कर दिया, लेकिन उसने मेरे साथ जबरदस्ती की और कहा कि इसमें कुछ भी गलत नहीं है।”

इब्राहीम खान ने लड़की के साथ दिसंबर 2023 में भी रेप किया। उसने लड़की को धमकाया कि अगर वो उसकी बात नहीं मानेगी, तो वो उसे मार देगा। यही नहीं, वो एक बार लड़की को पास की मस्जिद में ले गया और उसे इस्लामिक नियमों के साथ रोजा रखने को कहा। लड़की ने बताया कि उसे लव जिहाद का अंदेशा हो गया था, इसलिए वो भागने की कोशिश कर रही थी, लेकिन इब्राहीम खान ने उसका पीछा नहीं छोड़ा। वो 3 मई 2024 को एक बार फिर से लड़की के घर में घुस गया और उसके साथ मारपीट करते हुए उसे जान से मारने की धमकी दी। इस मामले में पुलिस ने इब्राहीम खान के खिलाफ सेक्शन 376 और सेक्शन 376 (3), पॉक्सो एक्ट के सेक्शन 4 और 8 के साथ ही एससी-एसटी एक्ट में मामला दर्ज किया है।

औरंगाबाद का नाम छत्रपति संभाजीनगर और उस्मानाबाद का नाम धाराशिव करना गलत नही: बॉम्बे हाई कोर्ट ने खारिज कीं चुनौती देने वाली याचिकाएँ

बॉम्बे हाई कोर्ट ने बुधवार (8 मई 2024) को औरंगाबाद और उस्मानाबाद का नाम बदलने के महाराष्ट्र सरकार के निर्णय के खिलाफ दायर की गई याचिकाओं को खारिज कर दिया। अदालत ने औरंगाबाद का नाम बदलकर छत्रपति संभाजीनगर और उस्मानाबाद का नाम बदलकर धाराशिव करने के सरकार फैसले को बरकरार रखा।

बॉम्बे हाई कोर्ट के मुख्य न्यायाधीश डीके उपाध्याय और जस्टिस आरिफ डॉक्टर की खंडपीठ ने कहा कि शहरों के नाम बदलने की अधिसूचना अवैध नहीं थी। कोर्ट ने कहा, “हमें यह मानने में कोई झिझक नहीं है कि शहरों और राजस्व प्रभागों का नाम बदलने वाली अधिसूचनाएँ किसी भी बुराई से ग्रस्त नहीं हैं।”

दरअसल, दोनों शहरों के नाम बदलने के महाराष्ट्र सरकार के फैसले के खिलाफ संबंधित जिलों के निवासियों सहित व्यक्तियों द्वारा उच्च न्यायालय के समक्ष कई याचिकाएँ दायर की गईं। याचिकाओं में कहा गया है कि राज्य सरकार ने वर्ष 2001 में औरंगाबाद का नाम बदलने के अपने प्रयास को विफल कर दिया था।

याचिकाकर्ताओं ने दावा किया था कि यह निर्णय संविधान के प्रावधानों की पूरी तरह अवहेलना है। उस्मानाबाद का नाम बदलने के खिलाफ दायर याचिका में कहा गया था कि उस्मानाबाद का नाम बदलकर धाराशिव करने से धार्मिक और सांप्रदायिक नफरत भड़क सकती है। इससे धार्मिक समूहों के बीच दरार पैदा हो सकती है।

याचिका में दावा किया गया था कि यह बदलाव भारत के धर्मनिरपेक्ष ताने-बाने के विपरीत है। इसमें यह भी बताया गया था कि सन 1998 में महाराष्ट्र सरकार ने उस्मानाबाद का नाम बदलकर धाराशिव करने का प्रयास किया था, लेकिन असफल रही। इसलिए इन बदलावों पर फिर से रोक लगाई जाए।

जवाब में महाराष्ट्र सरकार ने कहा कि ‘उस्मानाबाद’ का नाम बदलकर ‘धाराशिव’ करने से न तो कोई धार्मिक या सांप्रदायिक नफरत पैदा हुई, बल्कि अधिकांश लोगों ने उस्मानाबाद का नाम बदलकर धाराशिव करने पर जश्न मनाया। सरकार ने इन आरोपों से इनकार किया कि नाम बदलना एक समुदाय के प्रति नफरत फैलाने के उद्देश्य से राजनीति से प्रेरित कदम था।

बता दें कि मुख्यमंत्री उद्धव ठाकरे के नेतृत्व वाली महाविकास अघाड़ी (एमवीए) की पिछली सरकार ने 29 जून 2021 को अपनी कैबिनेट की बैठक में दोनों शहरों का नाम बदलने का फैसला किया था।औरंगाबाद शहर और राजस्व मंडल का नाम बदलकर ‘छत्रपति संभाजीनगर’ कर दिया गया, जबकि उस्मानाबाद का नाम बदलकर ‘धाराशिव’ कर दिया गया।

इसको लेकर कहा गया कि उद्धव ठाकरे के नेतृत्व वाली सरकार ने राजनीतिक लाभ के लिए कथित तौर पर अनधिकृत तरीके से इस मुद्दे को अपनी आखिरी कैबिनेट में उठाया। इसके बाद शिवसेना में टूट हुई मुख्यमंत्री एकनाथ शिंदे के नेतृत्व वाली नई सरकार ने 16 जुलाई 2022 को उद्धव सरकार के फैसले की फिर से पुष्टि की।

नगर कीर्तन पर खालिस्तानी छाया, PM मोदी की हत्या वाली झाँकी निकाली: भारत ने कनाडा को रगड़ा, कहा- कट्टरपंथियों का पनाहगाह न बने

कनाडा के टोरंटो में खालिस्तान समर्थकों ने रविवार (5 मई 2024) को नगर कीर्तन के दौरान झाँकी निकाली। इस झाँकी में पीएम मोदी को जंजीरों से कैद दिखाया गया। ठीक उसी तरह से, जैसा पिछले साल पूर्व पीएम इंदिरा गाँधी की हत्या को दिखाने वाली झाँकी निकाली गई थी। खालिस्तानी तत्वों के नगर कीर्तन के दौरान इस झाँकी पर भारत सरकार ने तीखी प्रतिक्रिया दी है। भारत सरकार ने खालिस्तान समर्थक परेड में ‘हिंसा का जश्न’ मनाने के लिए कनाडा की आलोचना की है।

मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक, कनाडा के टोरंटो में स्थित माल्टन काउंटी में खालिस्तान के समर्थकों ने एक नगर कीर्तन परेड निकाला था, लेकिन इस परेड में पीएम मोदी को बंधक बनाने जैसी झाँकी निकाली गई और भारत विरोधी नारेबाजी की गई थी। इस दौरान खालिस्तान के समर्थन में भी जमकर नारेबाजी हुई। इस मामले का भारत सरकार ने संज्ञान लिया है।

भारत सरकार के विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता रणधीर जायसवाल ने कहा कि जैसा कि आप जानते हैं, हमने कनाडा में हमारे राजनीतिक नेतृत्व के खिलाफ चरमपंथी तत्वों द्वारा इस्तेमाल की जा रही हिंसक छवि के बारे में बार-बार अपनी चिंताएँ उठाई हैं। पिछले साल हत्या का चित्रण करने वाली एक झाँकी हमारे पूर्व प्रधानमंत्री को एक जुलूस में दिखाया गया था। पूरे कनाडा में भारतीय राजनयिकों के खिलाफ हिंसा की धमकी वाले पोस्टर भी लगाए गए।

कनाडा को चेताते हुए जायसवाल ने कहा कि हम कनाडा में अपने राजनयिक प्रतिनिधियों की सुरक्षा को लेकर चिंतित हैं और उम्मीद करते हैं कि कनाडा सरकार यह सुनिश्चित करेगी कि वे बिना किसी डर के अपनी जिम्मेदारियों को निभाने में सक्षम हों। उन्होंने आगे कहा कि हम कनाडा सरकार से फिर से अपील करते हैं कि वह कनाडा में आपराधिक और अलगाववादी तत्वों को सुरक्षित पनाहगाह और राजनीतिक स्थान देना बंद करे।

नगर कीर्तन परेड का आयोजन ओंटारियो गुरुद्वारा कमेटी द्वारा किया गया था, जहाँ झाँकियों और भाषणों ने आक्रामक रूप से भारतीय राजनीतिक हस्तियों को निशाना बनाया, जिसमें प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को सलाखों के पीछे दिखाया गया था। भारतीय सुरक्षा एजेंसियों द्वारा घोषित आतंकवादी परमजीत मंड और अवतार सिंह पन्नू जैसे लोगों ने 6 किलोमीटर लंबी परेड में भड़काऊ भाषण दिए।

गौरतलब है कि पिछले साल सितंबर में खालिस्तानी आतंकवादी हरदीप सिंह निज्जर की हत्या में भारतीय एजेंटों की संभावित संलिप्तता बताते हुए कनाडाई प्रधानमंत्री ट्रूडो ने आरोप लगाए थे। आरोपों के बाद से नई दिल्ली और कनाडा की राजधानी ओटावा के बीच संबंध तनावपूर्ण हो गए हैं। हालाँकि, नई दिल्ली ने ट्रूडो के आरोपों को “बेतुका” बताते हुए खारिज कर दिया था। इस मामले में कुछ दिन पहले ही तीन भारतीय सिखों को कनाडा में गिरफ्तार किया गया था। भारत सरकार ने आरोप लगाया है कि कनाडा ऑर्गनाइज क्राइम में शामिल लोगों को वीजा देकर शरण देता है।