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PM मोदी का नेतृत्व और अडानी-अम्बानी का काम… भारत कैसे बन रहा आर्थिक महाशक्ति अमेरिकी मीडिया ने बताया: कहा- ऐसे और कारोबारी समूह करने होंगे तैयार

अडानी समूह के मालिक गौतम अडानी और रिलायंस के चेयरमैन मुकेश अम्बानी भारत के आर्थिक विकास में प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी का सहयोग कर रहे हैं। भारत को विकसित करने में इन दोनों समूहों का बड़ा योगदान है। यह बात अमेरिका मीडिया कह रहा है।

अमेरिकी मीडिया समूह CNN द्वारा प्रकाशित एक लेख में भारत के विकास में अम्बानी-अडानी के रोल पर चर्चा की गई है। लेख में कहा गया है कि यह दोनों समूह उन क्षेत्रों में काम कर रहे हैं जिनकी प्रधानमंत्री मोदी लगातार बात करते आए हैं और जिन्हें वह प्राथमिकता देते हैं।

लेख में बताया गया है कि पीएम मोदी, गौतम अडानी और मुकेश अम्बानी भविष्य की महाशक्ति भारत का निर्माण कर रहे हैं। यह तीनों ही लोग इसमें अहम भूमिका निभा रहे हैं। भारत के बीते कुछ वर्षों में चीन का विकल्प बनने और लगातर आर्थिक तरक्की करने की बात भी इस लेख में कही गई है।

इस लेख में अडानी और अम्बानी की अमेरिकी कारोबारी जॉन डी रॉकफेलर से भी तुलना की गई है। कहा गया है कि जिस प्रकार अमेरिका के विकसित होने के दौरान रॉकफेलर अमीर हुए थे, उसी प्रकार भारत के विकसित होने के साथ ही यह दोनों लोग सफलता की सीढ़ियाँ चढ़े हैं।

इसके अनुसार, भारत अभी उस बदलाव के दौर में है जिससे कई विकसित देश गुजर चुके हैं। भारत मोदी सरकार के कार्यकाल में विश्व की पाँचवी सबसे बड़ी अर्थव्यवस्था बना है। मोदी सरकार से पहले यह नौवें स्थान पर था। इस दौरान देश के लोगों की औसत कमाई में 55% से अधिक की वृद्धि हुई है।

भारत की जीडीपी पिछले 10 वर्षों में 83% तक बढ़ी है। जबकि इसी दौरान जर्मनी 14% ही बढ़ सका है और जापान 14% घट गया है। कभी अगली आर्थिक शक्ति माने जाने वाला ब्राजील भी इस दौरान 13% घट गया है। यह जीडीपी वृद्धि तब देखने को मिली है जब अर्थव्यस्था को यूक्रेन-रूस युद्ध और कोरोना महामारी जैसे झटके लगे हैं।

लेख में बताया गया है कि अडानी और अम्बानी उन क्षेत्रों पर काम कर रहे हैं जो कि भारत को विश्व की तीसरी सबसे बड़ी अर्थव्यवस्था बनाने में सहायता करेंगे। इसमें कहा गया है कि यह दोनों कारोबारी समूह भारत की तरक्की के बड़े साझेदार हैं। मुकेश अम्बानी ने जहाँ भारत में घर घर तक इन्टरनेट पहुँचाने में मदद की है तो वहीं गौतम अडानी इन्फ्रा के क्षेत्र में काम कर रहे हैं। अडानी समूह, एनर्जी, एअरपोर्ट और पोर्ट बनाने पर काम कर रहा है जो कि भारत की आर्थिक तरक्की को बढ़ाएंगे।

यह दोनों समूह भारत के एनर्जी क्षेत्र में बड़े निवेश कर रहे हैं और साथ ही स्वच्छ ऊर्जा के मामले में भी भारत को आगे बढ़ा रहे हैं। लेख में यह भी कहा गया है कि भारत अडानी और अम्बानी जैसे बड़े कारोबारी घरानों के बिना तेज तरक्की हासिल नहीं कर सकता, बल्कि इसे इनके जैसे और समूह खड़े करने होंगे।

अरविंद केजरीवाल की मुसीबत बढ़ी, दिल्ली शराब घोटाले में ‘आरोपी’ बना सकती है ED: 10 मई को दाखिल करेगी चार्जशीट, इसी दिन जमानत पर भी सुप्रीम कोर्ट में सुनवाई

दिल्ली के मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल की मुश्किलें बढ़ती नजर आ रही है। खबरों के मुताबिक, शुक्रवार (10 मई 2024) को ईडी कोर्ट में सप्लीमेंट्री चार्जशीट दायर कर सकती है। सूत्रों की मानें तो इस चार्जशीट में अरविंद केजरीवाल को मुख्य साजिशकर्ता यानी ‘किंगपिन’ के तौर पर ‘चिन्हित’ किया जाएगा, साथ ही इसमें बीआरएस की एमएलसी के कविता की भूमिका के बारे में भी कोर्ट को जानकारी दी जाएगी।

ईडी ने पिछली बार अरविंद केजरीवाल की हिरासत बढ़ाने की माँग के दौरान भी ये कहा था कि अरविंद केजरीवाल दिल्ली शराब नीति घोटाला मामले में ‘मुख्य साजिशकर्ता‘ हैं। जिसमें अरविंद केजरीवाल को नई शराब नीति 2021-22 को तैयार करने और लागू करने के लिए ‘साउथ ग्रुप’ से रिश्वत के रूप में कई करोड़ रुपए मिले। अतिरिक्त सॉलिसिटर जनरल (एएसजी) एसवी राजू ने राउज एवेन्यू कोर्ट को बताया था कि उन्होंने चुनाव लड़ने के लिए ‘साउथ ग्रुप’ के लोगों से 100 करोड़ रुपए की माँग की थी।

मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक, ईडी अपनी चार्जशीट में केजरीवाल का नाम मुख्य साजिशकर्ता और किंगपिन के तौर पर दर्ज करने जा रही है। ईडी का दावा है कि उसने अरविंद केजरीवाल से जुड़े मनी ट्रेल का पता लगा लिया है। ऐसे में अब ईडी द्वारा दिल्ली शराब घोटाले में सप्लीमेंट्री चार्जशीट दाखिल किए जाने के बाद उनकी मुसीबत बढ़ सकती है, क्योंकि उसी दिन यानी शुक्रवार को ही सुप्रीम कोर्ट में अरविंद केजरीवाल की अंतरिम जमानत पर फैसला हो सकता है।

सुप्रीम कोर्ट में जमानत याचिका पर सुनवाई

इस बीच, सुप्रीम कोर्ट में अरविंद केजरीवाल की जमानत याचिका पर शुक्रवार (10 मई 2024) को ही सुनवाई की जाएगी। सुप्रीम कोर्ट ने कुछ दिन पहले सुनवाई की थी, और मामले में दोनों पक्षों की दलीलों को सुना था। सुप्रीम कोर्ट ने कहा था कि लोकसभा चुनाव 2024 को देखते हुए अरविंद केजरीवाल को अंतरिम जमानत देने पर विचार किया जा सकता है।

गौरतलब है कि ईडी ने बीआरएस नेता के कविता को 15 मार्च को हैदराबाद से और अरविंद केजरीवाल को दिल्ली से 21 मार्च 2024 को गिरफ्तार किया था। दोनों ही नेताओं से मौके पर पूछताछ की गई थी, इसके बाद गिरफ्तारी को अंजाम दिया गया था। इससे पहले, ईडी ने अरविंद केजरीवाल को पूछताछ के लिए 9 समन जारी किए थे। हालाँकि, केजरीवाल किसी भी समन पर पेश नहीं हुए थे।

केंद्रीय जाँच एजेंसी का आरोप है कि वह घोटाले के मुख्य साजिशकर्ता थे और सीधे तौर पर शराब कारोबारियों से रिश्वत माँगने में शामिल थे। इस मामले में के कविता और अरविंद केजरीवाल, दोनों ही नेता तिहाड़ जेल में बंद हैं। दिल्ली शराब नीति घोटाले में मनीष सिसोदिया समेत कई आप नेता और ‘साउथ ग्रुप’ से जुड़े कई लोग पहले ही गिरफ्तार किए जा चुके हैं और उनके खिलाफ जाँच चल रही है।

‘लिव इन भारतीय संस्कृति के लिए कलंक’: छत्तीसगढ़ HC से अब्दुल को झटका, इलाहाबाद हाई कोर्ट ने कहा था- मुस्लिमों को इसका अधिकार नहीं

छत्तीसगढ़ उच्च न्यायालय ने एक मामले की सुनवाई करते हुए कहा कि आजकल लोग विवाह के बजाय लिव-इन रिलेशनशिप को प्राथमिकता देते हैं। ऐसा इसलिए है, क्योंकि जब दोनों भागीदारों के बीच चीजें काम नहीं करती हैं तो उनके पास सुविधाजनक रूप से अलग होने का विकल्प होता है। अदालत ने इसे घृणित बताते हुए हा कि भारतीय संस्कृति लिव-इन रिलेशन को अभी भी कलंक माना जाता है।

न्यायमूर्ति गौतम भादुड़ी और न्यायमूर्ति संजय एस अग्रवाल की खंडपीठ ने 30 अप्रैल 2024 को सुनवाई के दौरान कहा कि विवाह नाम की संस्था किसी व्यक्ति को सुरक्षा, सामाजिक स्वीकृति, प्रगति और स्थिरता प्रदान करती है। ये सभी चीजें लिव-इन-रिलेशनशिप कभी नहीं प्रदान करती है। इसलिए इसमें सबसे अधिक नुकसान महिलाओं का होता है।

पीठ ने कहा, “विवाह की तुलना में लिव-इन रिलेशनशिप को प्राथमिकता दी जाती है, क्योंकि जब पार्टनर के बीच चीजें काम नहीं कर पाती हैं तो यह एक सुविधाजनक पलायन प्रदान करता है।यदि जोड़ा अलग होना चाहता है, तो वे दूसरे पक्ष की सहमति के बावजूद और अदालत में बोझिल कानूनी औपचारिकताओं से गुज़रे बिना, एकतरफा अलग होने की स्वतंत्रता का आनंद लेते हैं।”

कोर्ट ने आगे कहा, “हमारे देश में किसी रिश्ते को शादी के रूप में संपन्न न करना सामाजिक कलंक माना जाता है क्योंकि सामाजिक मूल्यों, रीति-रिवाजों, परंपराओं और यहाँ तक कि कानून ने भी शादी की स्थिरता सुनिश्चित करने का प्रयास किया है।” कोर्ट ने कहा कि इस बात से इनकार नहीं किया जा सकता है कि विवाह टूटने पर महिलाओं को अधिक पीड़ा होती है।

बार एंड बेंच की रिपोर्ट के मुताबिक, कोर्ट ने अपने फैसले में आगे कहा, “इस बात से इनकार नहीं किया जा सकता है कि विवाह में समस्याएँ होती हैं और असमान रिश्ते हो सकते हैं, जिसमें एक साथी, आमतौर पर महिलाएँ, नुकसानदेह स्थिति में होती हैं। यह भी सच है कि शादी के माध्यम से रिश्ते टूटने पर महिलाओं को कहीं अधिक नुकसान उठाना पड़ता है, विशेष रूप से भारतीय संदर्भ में।”

कोर्ट ने कहा कि समाज के बारीकी से निरीक्षण से पता चलता है कि पश्चिमी देशों के सांस्कृतिक प्रभाव के कारण विवाह जैसी संस्था अब लोगों को पहले की तरह नियंत्रित नहीं करती है। इस महत्वपूर्ण बदलाव और वैवाहिक कर्तव्यों के प्रति उदासीनता ने संभवतः लिव-इन की अवधारणा को जन्म दिया है। लिव-इन रिलेशनशिप में महिलाओं की सुरक्षा की आवश्यकता जरूरी है।

कोर्ट ने कहा, “महिलाएँ अक्सर लिव-इन रिलेशनशिप के साथी द्वारा शिकायतकर्ता और हिंसा की शिकार होती हैं। विवाहित व्यक्ति के लिए लिव-इन रिलेशनशिप से बाहर निकलना बहुत आसान है और ऐसे मामले में अदालतें ऐसे संकटपूर्ण लिव-इन रिलेशनशिप से बचे लोगों और ऐसे रिश्ते से पैदा हुए बच्चों की कमजोर स्थिति पर अपनी आँखें बंद नहीं कर सकती हैं।”

दरअसल, अब्दुल हमीद सिद्दीकी नाम के एक व्यक्ति ने निचली अदालत के फैसले के खिलाफ हाई कोर्ट में याचिका दायर की थी। अब्दुल कविता गुप्ता नाम की एक हिंदू महिला के साथ लिव-इन रिलेशनशिप में रहता था। इससे 31 अगस्त 2021 को एक बच्चा पैदा हुआ। बाद में दोनों के रिश्ते में खटास आ गई और महिला ने 10 अगस्त 2023 को बच्चे सहित अब्दुल का घर छोड़ दिया।

इसके बाद अब्दुल ने बच्चे की कस्टडी की माँग करते हुए पारिवारिक अदालत के समक्ष परिवाद दायर किया था। अब्दुल ने दावा किया था कि वह अच्छा कमाता है। इसलिए वह बच्चे की देखभाल करने में अधिक सक्षम है। हालाँकि, फैमिली कोर्ट ने अब्दुल की अर्जी खारिज कर दी और बच्चे की कस्टडी देने से इनकार कर दिया। इसके बाद अब्दुल ने हाई कोर्ट में याचिका दायर की।

सारे तथ्यों को देखने के बाद हाई कोर्ट ने कहा कि वह इस तथ्य से अवगत है कि भारतीय संस्कृति में लिव-इन रिलेशनशिप को अभी भी कलंक माना जाता है। भारतीय सिद्धांतों की सामान्य अपेक्षाओं के विपरीत यह एक आयातित दर्शन है। इसके बाद कोर्ट ने अब्दुल की याचिका खारिज कर दी।

कोर्ट ने कहा, “भारतीय परंपरा में प्रत्येक नागरिक के पास स्वयं की भावना होती है, जो अद्वितीय होती है और आयातित परंपराओं के साथ भ्रमित होने की संभावना नहीं होती है। समाज और परंपरा में आपस में जुड़ी संस्कृति को नष्ट करने के लिए लिव-इन रिलेशनशिप को अपनाने से ज्यादा कोई घृणित उद्देश्य नहीं हो सकता है।”

इलाहाबाद हाई कोर्ट में भी ऐसा ही आया मामला

ऐसे ही एक अन्य मामले में इलाहाबाद उच्च न्यायालय की लखनऊ पीठ ने बुधवार (8 मई) को फैसला सुनाया कि अगर किसी मुस्लिम की बीवी या शौहर जिंदा है तो वे लिव-इन रिलेशनशिप में अधिकारों का दावा नहीं कर सकते। हाई कोर्ट ने कहा कि ऐसा रिश्ता इस्लामी कानून में हराम माना गया है। इसके साथ ही कोर्ट ने महिला स्नेहा देवी को उनके माता-पिता के घर भेजने का आदेश दे दिया।

न्यायमूर्ति एआर मसूदी और न्यायमूर्ति एके श्रीवास्तव की पीठ ने स्नेहा देवी और मोहम्मद शादाब खान द्वारा लाई गई एक रिट याचिका पर सुनवाई की। इसमें महिला के माता-पिता द्वारा शादाब खान के खिलाफ अपहरण की शिकायत दर्ज कराने के बाद पुलिस कार्रवाई से सुरक्षा की माँग किया गया था। कोर्ट ने सुरक्षा में स्नेहा देवी को उसके माता-पिता के भेजने का आदेश दिया।

याचिकाकर्ताओं ने कहा कि वे लिव-इन रिलेशनशिप में हैं, लेकिन महिला के माता-पिता ने शादाब पर उनकी बेटी का अपहरण करने और उसे शादी के लिए फुसलाने का आरोप लगाते हुए रिपोर्ट दर्ज कराई थी। याचिका कर्ताओं ने दावा किया कि वे वयस्क हैं और सुप्रीम कोर्ट के अनुसार, वे लिव-इन रिलेशनशिप में एक साथ रहने के लिए स्वतंत्र हैं।

इस पर कोर्ट ने कहा, “इस्लामी सिद्धांत विवाह के दौरान लिव-इन संबंधों की अनुमति नहीं देते हैं। ये स्थिति अलग हो सकती है, यदि दोनों व्यक्ति अविवाहित हैं और दोनों पक्ष बालिग हैं और अपने तरीके से अपना जीवन जीना चुनते हैं।” इसके बाद हाई कोर्ट की पीठ ने जीवन और स्वतंत्रता की सुरक्षा के मुद्दे पर आदेश पारित करने से इनकार कर दिया।

पीठ ने पाया कि शादाब खान ने साल 2020 में फरीदा खातून से निकाह किया था और दोनों का एक बच्चा भी है। अदालत ने कहा कि विवाह संस्थाओं में संवैधानिक नैतिकता और सामाजिक नैतिकता में सामंजस्य होना चाहिए, अन्यथा सामाजिक शांति के लक्ष्य को पूरा करने के लिए जरूरी सामाजिक सामंजस्य फीका और गायब हो जाएगा।

मोदी राज में आत्मनिर्भर हुई सेना, विदेश से गोला-बारूद लेने की नहीं पड़ेगी जरूरत: जापान को पीछे छोड़ दुनिया का तीसरा सबसे बड़ा सोलर पावर भी बना

भारत जापान को पीछे छोड़ कर विश्व का तीसरा सबसे बाद सौर ऊर्जा उत्पादक बन गया है। भारत ने 8 वर्षों में 6 स्थानों की छलांग लगाते हुए यह उपलब्धि हासिल की है। सौर ऊर्जा के मामले में भारत ने पिछले कुछ वर्षों में काफी काम किया है। भारत अब पारम्परिक ऊर्जा संसाधनों की जगह अक्षय ऊर्जा स्रोतों से बिजली बनाने की क्षमताएँ बढ़ा रहा है।

ताजा रिपोर्ट ने इस बात की पुष्टि की है। सौर ऊर्जा के क्षेत्र में उपलब्धि के साथ ही भारतीय सेना ने फैसला किया है कि वह अगले वर्ष से किसी भी प्रकार का गोला-बारूद विदेशों से नहीं मँगाएगी। उसके सभी प्रकार की गोला बारूद की जरूरत को स्थानीय उत्पादक ही पूरी कर देंगे।

मोदी सरकार में भारत ने लगाई 6 स्थानों की छलांग

दुनिया भर में स्वच्छ ऊर्जा की प्रगति को लेकर रिपोर्ट जारी करने वाली संस्था एम्बर ने बताया है कि भारत 2023 में जापान को पीछे छोड़ कर विश्व का तीसरा सबसे सौर ऊर्जा उत्पादक बना। भारत 2015 में इस सूची में नौवें स्थान पर था और मात्र आठ वर्षों में उसने 6 स्थानों की छलांग लगाई। भारत ने विश्व में सौर ऊर्जा बढ़त में 5.9% का योगदान दिया है। एम्बर के अनुसार, भारत में वर्तमान में 113 Twh सौर ऊर्जा की क्षमता है। वर्ष 2014 में यह क्षमता मात्र 4.91 Twh थी। ऐसे में 9 वर्षों में 23 गुना की वृद्धि हुई है।

2023 में भारत में सौर ऊर्जा के मामले में चौथी सबसे तेज प्रगति हुई है। 2023 में भारत में 18 Twh सौर ऊर्जा क्षमता बढ़ी है। सौर ऊर्जा का भारत के ऊर्जा क्षेत्र में योगदान भी बढ़ रहा है। 2015 में भारत की कुल बिजली उत्पादन का 0.5% ही सौर स्रोतों से प्राप्त हो रहा था जबकि 2023 में यह बढ़ कर 5.8% हो गया। वर्तमान में भारत में सौर ऊर्जा, पनबिजली के बाद स्वच्छ ऊर्जा का सबसे बड़ा स्रोत है। 2023 में भारत में सौर ऊर्जा के मामले में चौथी सबसे तेज प्रगति हुई है। 2023 में भारत में 18 Twh सौर ऊर्जा क्षमता बढ़ी है। सौर ऊर्जा का भारत के ऊर्जा क्षेत्र में योगदान भी बढ़ रहा है। 2015 में भारत की कुल बिजली उत्पादन का 0.5% ही सौर स्रोतों से प्राप्त हो रहा था जबकि 2023 में यह बढ़ कर 5.8% हो गया। वर्तमान में भारत में सौर ऊर्जा, पनबिजली के बाद स्वच्छ ऊर्जा का सबसे बड़ा स्रोत है।

भारत सौर ऊर्जा के मामले में और भी बढ़त के लिए लगातार नई योजनाएँ ला रहा है। भारत ने हाल ही में पीएम सूर्यघर योजना चालू की है। इसके अंतर्गत केंद्र सरकार 1 करोड़ घरों में सौर ऊर्जा प्लांट लगाने के लिए सब्सिडी देने वाली है। इससे बनाई गई बिजली लोग अपने घरों में भी उपयोग कर सकेंगे। इसके अलावा जो बिजली बचेगी उसे सरकार खरीद लेगी। इससे कोयला आधारित बिजली बिजली पर दबाव कम होगा और इससे पर्यावरण भी सुरक्षित हो सकेगा।

भारत ने लक्ष्य रखा है कि वह 2030 तक अपनी कुल ऊर्जा जरुरुतों का 50% नवीनीकृत ऊर्जा के स्रोतों से प्राप्त करेगा। इसके लिए लगातार नए सोलर की स्थापना भी भारत में हो रही है। वर्तमान में विश्व का सबसे बड़ा सौर ऊर्जा पार्क भारत में ही है। भारत अपने मरुस्थल के क्षेत्र का उपयोग करके बड़े सौर ऊर्जा पार्क स्थापित कर रहा है।

सेना नहीं करेगी गोला बारूद का आयात

सौर ऊर्जा क्षेत्र के मामले में उपलब्धि हासिल करने के साथ ही भारत रक्षा क्षेत्र में भी आत्मनिर्भर हो रहा है। भारतीय सेना ने यह निर्णय लिया है कि वह अगले वर्ष से किसी भी प्रकार का गोला-बारूद का आयात नहीं करेगी। सेना 2025-26 के बाद स्थानीय स्रोतों से ही गोला-बारूद लेगी।

जानकारी के अनुसार, सेना को 175 तरह के गोला-बारूद की आवश्यकता होती है। सेना इनमें से कई प्रकार के गोला-बारूद विदेश से मंगाती है। हालाँकि, अब भारत में 175 में से 150 तरह के गोला-बारूद का निर्माण हो रहा है। यह निर्माण भारतीय कम्पनियाँ ही कर रही हैं।

इससे देश का रक्षा क्षेत्र भी आत्मनिर्भर होगा और साथ ही विदेशों को जाने वाला पैसा भी बचेगा। बताया गया है कि भारत विदेशों से सालाना ₹6000-₹8000 करोड़ का गोला-बारूद मँगवाता है। भारत में गोला-बारूद का यह निर्माण सरकारी ऑर्डिनेंस फैक्ट्री के साथ ही निजी फक्ट्रियों में भी हो रहा है। यह कम्पनियाँ सेना की आवश्यकता के अनुसार भी गोला-बारूद बना रही हैं। इसी के साथ यह बड़ी मात्रा में गोला-बारूद विदेशों को भी भेज रही हैं।

भारत के रक्षा क्षेत्र की बढ़त का बड़ा उदारहण भारत का बढ़ता आयात है। भारत का रक्षा आयात 2023-24 में ₹21,083 करोड़ रहा है। यह 2013-14 के मुकाबले 31 गुना अधिक है। इसमें निजी क्षेत्र का भी 40% योगदान रहा। कई देश भारत से रक्षा उत्पाद खरीद रहे हैं।

परवेज, रहमान, आलम, अख्तर, अमीन, मोहम्मद खलीकुज्जमान… PFI आतंकियों को जमानत से पटना HC का इनकार, 2047 तक भारत को मुस्लिम मुल्क बनाने की थी साजिश

पटना हाई कोर्ट ने ‘पीएफआई-फुलवारी शरीफ आतंकी मॉड्यूल’ मामले से जुड़े छह आतंकवादियों को अग्रिम जमानत देने से इनकार कर दिया है। मामला प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की जुलाई 2022 की बिहार यात्रा में खलल डालने की कथित साजिश से जुड़ा है। इसके तहत बिहार में 12 सेंटर खोले गए थे और 15 हजार से अधिक मुस्लिम युवकों को आत्मरक्षा के नाम पर आक्रामक कार्रवाईयों के लिए ट्रेनिंग दी गई थी। इस मामले में 2 एफआईआर दर्ज हुई थी, जिसकी जाँच एनआईए कर रही है।

लाइव लॉ की रिपोर्ट के मुताबिक, पटना हाईकोर्ट में जस्टिस विपुल एम पंचोली और जस्टिस रमेश चंद मालवीय की बेंच ने इस मामले में राष्ट्रीय जाँच एजेंसी (एनआईए) द्वारा जुटाए गए सबूतों पर विचार करते हुए पाया कि अपीलकर्ताओं के खिलाफ प्रथम दृष्टया मामला बनता है, ऐसे में आरोपितों को जमानत नहीं दी जा सकती। पीएफआई के फुलवारी शरीफ टेरर मॉड्यूल से जुड़े आतंकियों मंज़र परवेज़, अब्दुर रहमान, महबूब आलम, शमीम अख्तर, मोहम्मद खलीकुज्जमान और मोहम्मद अमीन ने पटना हाई कोर्ट से जमानत माँगी थी। इस मामले की जाँच एनआईए कर रही है। ये सभी प्रतिबंधित संगठन पीपुल्स फ्रंट ऑफ इंडिया (पीएफआई) और स्टूडेंट इस्लामिक मूवमेंट ऑफ इंडिया (सिमी) के सदस्य हैं।

मोहम्मद जलालुद्दीन और अताहर परवेज़ के बयानों से ये पता चला है कि सभी आतंकी पीएम मोदी की रैलियों में बाधा डालकर सांप्रदायिक सद्भाव और सार्वजनिक व्यवस्था को बाधित करने के लिए “नापाक मंसूबों” को अंजाम देने की कोशिश कर रहे थे। पटना हाईकोर्ट ने माना है कि एनआईए ने इस साजिश की जांच में अब तक पर्याप्त सबूत जुटा लिए हैं। कोर्ट ने अपने आदेश में कहा है कि साजिश के तहत पीएफआई और सिमी के बैनर तले लोगों को संगठित कर पूरे देश में धार्मिक उन्माद चार चरणों में फैलाना था ताकि इस्लामी राज्य को स्थापित किया जा सके।

कोर्ट ने कहा है कि इस्लामिक साजिश के तहत जिन चार चरणों के तहत जो प्लानिंग की गई थी उसके अनुसार, सबसे पहले भारत के मुस्लिमों को संगठित कर हथियारों का प्रशिक्षण देना था दूसरा चुने गए जगह पर दूसरे धर्म के लोगों को निशाना बनाकर हमला कर दहशत फैलाना था। तीसरे चरण में एससी-एसटी के साथ मिलकर हिंदुओं में विभाजन करना था। आखिरी चरण में देश की पुलिस, फौज और न्यायपालिका में घुसना था। इन सबका जिक्र पीएफआई के ‘मिशन 2047’ नाम के विजन डॉक्यूमेंट में भी है।

बता दें कि दोनों संदिग्ध आतंकियों ने खुलासा किया था कि PFI द्वारा बिहार के जिलों में शारीरिक शिक्षा के नाम पर मुस्लिम युवाओं को आतंक की ट्रेनिंग दी जा रही थी। बिहार में इन ठिकानों पर PFI अब तक 15000 से अधिक मुस्लिम युवाओं को अस्त्र-शस्त्र चलाने की ट्रेनिंग दे चुकी है। युवाओं को ट्रेनिंग देने के लिए राज्य में करीब 12 जिलों में ऑफिस खोला गया था। जबकि, पूर्णिया को PFI का हेड क्वार्टर बनाया गया था। देश विरोधी गतिविधियों की इस बड़ी साजिश की जाँच अब एनआइए कर रही है।

इन सबूतों के आधार पर केंद्र सरकार के एडिशनल सॉलिसिटर जनरल ने जमानत का कड़ा विरोध किया। पटना हाई कोर्ट ने सुनवाई के दौरान यह पाया कि इन सारी साजिशों को पूरा करने के लिए आरोपियों ने जिन डिजिटल उपकरणों का इस्तेमाल किया उनकी बरामदगी के बाद एजेंसी ने सरकारी तकनीकी लैब में उसका परीक्षण करवाया।

बता दें कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के पटना के कार्यक्रम में गड़बड़ी फैलाने की साजिश की सूचना पर पुलिस ने 11 जुलाई 2022 को फुलवारी में मोहम्मद जलालुद्दीन के घर छापा मार कर उसके किराएदार जाहिद परवेज के पास से जब्त दस्तावेज और उपकरण बरामद किया था। देश में सांप्रदायिक तनाव और देश के अखंडता के खिलाफ साजिश रचने का मामला फुलवारी थाने में रजिस्टर्ड किया गया था। इस मामले में कुल 2 एफआईआर दर्ज की गई थी, पहली एफआईआर में 26 और दूसरी एफआईआर में 1 आतंकी का नाम है। NIA ने पटना, दरभंगा, पूर्वी चम्पारण, नालंदा और मधुबनी जिलों में कुल 10 ठिकानों पर छापेमारी की थी। इस मामले में बिहार पुलिस द्वारा 12 जुलाई 2022 को FIR दर्ज की गई थी लेकिन NIA ने 22 जुलाई 2022 को एक बार फिर से FIR दर्ज करवाई, जिसमें IPC की धारा 120, 120- बी, 121, 121-A, 153-A, 153-बी और 34 लगाई गई।

ध्रुव राठी पर रील बनाने के बाद किए गए थे ट्रोल, अब चाकू से हुआ हमला: इन्फ्लुएंसर भूपेंद्र जोगी को लगे 37 टाँके, हमलावरों का पता नहीं

इंस्टाग्राम पर कुछ समय पहले मशहूर हुए भूपेंद्र जोगी पर हमला होने की खबर है। मध्य प्रदेश के भोपाल में अपनी कपड़ों की दुकान से लौटते वक्त कुछ नकाबपोशों ने चाकू लेकर उनपर हमला किया। घटना रात 9 बजे हुई। इस दौरान उन्होंने खुद को बचाने का प्रयास लेकिन चोटें गंभीर आ गईं। अस्पताल ले जाने पर उन्हें 37 टाँके आए। पुलिस अब मामले को दर्ज करके अपनी पड़ताल कर रही है।

एक वरिष्ठ पुलिस अधिकारी ने मीडिया से बात करते हुए कहा कि मामले में अरेरा हिल्स पुलिस स्टेशन में भारतीय दंड संहिता (आईपीसी) की धारा 307 के तहत मामला दर्ज किया गया है। हालाँकि अब तक आरोपितों का कोई सुराग नहीं मिला है। जोगी ने पूर्व में मिली धमकियों के बारे में जानकारी नहीं दी है। पुलिस सीसीटीवी फुटेज खँगाल रही है।

भूपेंद्र जोगी ने बताया, “मैं अपनी दुकान बंद कर चुका था और वापस लौट रहा था, तभी दो नकाबपोश लोगों ने मुझ पर चाकुओं से हमला कर दिया। उन्हें गिरफ्तार नहीं किया गया है। मैं इन लोगों को ढूंढने और मुझे न्याय दिलाने में मदद करने के लिए सभी से मदद का अनुरोध करता हूँ।”

अपने इंस्टाग्राम स्टोरी में भी जोगी ने कहा, “मैं भूपेंद्र जोगी हूँ, कल रात 9:30 बजे जब मैं अपनी दुकान से घर लौट रहा था तो रौशनपुरा चौराहे (थाने से 100 मीटर दूर) पर कुछ लोगों ने मुझ पर चाकू से हमला कर दिया, जिससे मेरे शरीर पर 37 टाँके आए। हमला करने के बाद वे आसानी से भाग गए और अब तक उनका कोई पता नहीं चल सका है… कृपया आप सभी से अनुरोध है कि इन लोगों को ढूँढने में मेरी मदद करें और मुझे न्याय दिलाने में मदद करें।”

बताया जा रहा है कि भूपेंद्र जोगी एक ओटीटी प्लेटफॉर्म में ऑडिशन के लिए जाने वाले थे। अगर वह ऑडिशन पास करने में कामयाब होते तो सलमान खान के साथ काम करते। माना जा रहा है कि ये ऑडिशन बिग बॉस ओटीटी का था जिसके होस्ट सलमान खान ही हैं। उनके परिवार वालों का मानना है कि ये हमला उसी ऑडिशन से पहले हुआ।

वहीं, कुछ जगह कहा जा रहा है कि कुछ समय पहले भूपेंद्र जोगी ने अपने इंस्टाग्राम पर ध्रुव राठी का मजाक उड़ाया था। इसी के बाद सोशल मीडिया पर कुछ इस्लामी कट्टरपंथियों ने उन्हें धमकी दी थी।

किसी कमेंट में उन्हें अनफॉलो करने को कहा गया था तो कहीं पर उन्हें कहा गया था कि वह भाजपा के हाथों बिक गए हैं इसलिए इस तरह की बातें कर रहे हैं। फिलहाल हमले की असल वजह साफ नहीं हो पाई है लेकिन भूपेंद्र जोगी के लिए न्याय की माँग लोगों द्वारा उठाई जा रही है।

बता दें किं भूपेन्द्र जोगी भोपाल के एक व्यापारी हैं जो कपड़े की दुकान चलाते हैं। जोगी 2018 में अपने “नाम क्या है” मीम के वायरल होने के बाद प्रसिद्ध हुए थे। इसके बाद वो सोशल मीडिया इन्फ्लुंसर बन। वर्तमान में उनके फॉलोवर्स 2 लाख होने वाले हैं। वो मध्यप्रदेश के नेताओं के साथ भी फोटो खिंचवा चुके हैं।

भारत के साथ रूस: कहा- लोकसभा चुनावों को प्रभावित करने की कोशिश कर रहा है अमेरिका, धार्मिक स्वतंत्रता उल्लंघन के आरोप निराधार

रूस ने अमेरिका पर आरोप लगाया है कि अपने रिपोर्ट के जरिए वह भारत में जारी लोकसभा चुनाव 2024 को प्रभावित करने की कोशिश कर रहा है। रूस ने कहा कि अमेरिका ने भारत पर आरोप लगाया था कि वह धार्मिक स्वतंत्रता अधिकारों का उल्लंघन कर रहा है। इस आरोप का एकमात्र उद्देश्य आम चुनावों को प्रभावित करना था।

रूसी विदेश मंत्रालय की प्रवक्ता मारिया ज़खारोवा ने बुधवार (8 मई 2024) को कहा, “धार्मिक स्वतंत्रता के उल्लंघन के मामले में नई दिल्ली पर अमेरिका के नियमित निराधार आरोप कुछ और नहीं, बल्कि अमेरिका की राष्ट्रीय मानसिकता की गलतफहमी, भारत के विकास के ऐतिहासिक संदर्भ और एक देश के रूप में भारत के प्रति अनादर का प्रतिबिंब है।”

ज़खारोवा ने कहा, “इसका कारण देश में होने वाले आम चुनाव को जटिल बनाने के लिए भारत की घरेलू राजनीतिक स्थिति को अस्थिर करने का इरादा है।” रूसी राजनयिक ने कहा कि संयुक्त राज्य अमेरिका द्वारा लगाए गए आरोप उनकी नव-उपनिवेशवादी मानसिकता की अभिव्यक्ति हैं। उन्होंने कहा कि ये दावे एक संप्रभु राष्ट्र के रूप में भारत के प्रति सम्मान की कमी दर्शाते हैं।

रूस का यह बयान ऐसे समय में आया है, जब अमेरिकी अंतर्राष्ट्रीय धार्मिक स्वतंत्रता आयोग (USCIRF) ने अपनी वार्षिक रिपोर्ट में भारत पर धार्मिक स्वतंत्रता के उल्लंघन का निराधार आरोप लगाया है।आयोग ने भारत को ‘विशेष चिंता वाला देश’ घोषित करने के लिए अमेरिकी विदेश विभाग को अपनी सिफारिश भी दी है।

रिपोर्ट में सत्ताधारी भाजपा पर ‘भेदभावपूर्ण’ राष्ट्रवादी नीतियों को बढ़ावा देने का आरोप लगाया गया है। आयोग ने आतंकी निरोधी गैरकानूनी गतिविधियाँ (रोकथाम) अधिनियम (UAPA), विदेशी योगदान (विनियमन) अधिनियम (FCRA), नागरिकता (संशोधन) अधिनियम (CAA), धर्मांतरण विरोधी कानून और गो-हत्या विरोधी कानूनों को भी चिह्नित किया है।

अमेरिकी आयोग ने कहा कि इन कानूनों को लागू करने के कारण धार्मिक अल्पसंख्यकों और उनकी ओर से वकालत करने वालों को मनमाने ढंग से हिरासत में लिया गया, निगरानी की गई और निशाना बनाया गया। हालाँकि, भारत के विदेश मंत्रालय ने इस रिपोर्ट को चुनावी प्रक्रिया में हस्तक्षेप का प्रयास बताया और देश के खिलाफ दुष्प्रचार करने के लिए अमेरिकी आयोग की आलोचना की है।

वहीं, प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने सोमवार (7 मई 2024) को एक इंटरव्यू में बाहरी हस्तक्षेप की बात की थी। उन्होंने कहा था कि पूरी दुनिया भारत के चुनाव को प्रभावित करने की कोशिश कर रही है। उन्हें ऐसा नहीं करना चाहिए। ये अपनी राय नहीं दे रहे हैं, वे प्रभावित कर रहे हैं। लेकिन, वे भारत को प्रभावित नहीं कर पाएँगे। भारत के लोगों की अंदरूनी शक्ति जबर्दस्त होती है।”

प्रधानमंत्री ने कहा था, “आपातकाल के चुनाव के बाद देश ने देख लिया है कि भारत के गरीब आदमी में भी लोकतंत्र, स्वतंत्रता और आदर्श क्या होते हैं।” बता दें कि विदेश मंत्री जयशंकर ने इस चुनाव को दुनिया का सबसे बड़ा चुनाव बताया है। इसमें 96.80 करोड़ पंजीकृत मतदाता 12 लाख मतदान केंद्रों अपने मत तका प्रयोग करेंगे। इसके लिए 1.40 करोड़ चुनाव आयोग के कर्मचारी लगे हैं।

बालमुनि को उसी अख्तर अंसारी ने मार डाला, जिसके लिए तोड़ आई थी सारे रिश्ते-नाते: कब्रिस्तान में लाश दफनाते हुए पकड़े गए

झारखंड के लोहरदगा में अख्तर अंसारी के साथ 5 साल से लिव-इन-पार्टनरशिप में रह रही बालमुनी लोहरा को अपनी जान गँवानी पड़ी, क्योंकि अख्तर अंसारी ने ही उसे मौत के घाट उतार दिया। इसका खुलासा तब हुआ, जब अख्तर अंसारी अकेले ही बाल मुनि लोहरा के शव को कब्रिस्तान में दफना रहा था, तभी स्थानीय लोगों की नजर उस पर पड़ गई।

मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक, ये मामला लोहरदगा के किस्को थाना इलाके में आने वाले नवाडीह गाँव का है। जहाँ अनुसूचित जनजातीय समुदाय की बाल मुनि लोहरा (26 वर्ष) पिछले 5 साल से अपने लिव-इन पार्टनर अख्तर अंसारी के साथ रह रही थी। दोनों के बीच एक डेढ़ साल का बच्चा भी है। बताया जा रहा है कि बाल मनु पाँच साल पहले अपने घर से भाग आई थी और अख्तर अंसारी के साथ रह रही थी। बताया जा रहा है कि दोनों ने कथित तौर पर निकाह भी किया था, लेकिन इस बाल मुनि के इस्लामिक नाम का कुछ पता नहीं चल पाया।

इस बीच, सोमवार को अख्तर अंसारी ने बाल मुनि लोहरा की गला दबाकर हत्या कर दी और चुपचाप उसके शव को कब्रिस्तान में ठिकाने लगाने के लिए पहुँच गया। अख्तर के साथ उसका भाई सैमुल्लाह भी था। स्थानीय लोगों ने दोनों को कब्रिस्तान में शव को ठिकाने लगाते देख लिया और पुलिस को सूचना दे दी। मौके पर पहुँची पुलिस ने देखा कि बाल मुनि के शरीर पर चोट के निशान हैं और गले पर भी, जिसके बाद पुलिस ने शव को पोस्ट मार्टम के लिए भेज दिया और अख्तर अंसारी को गिरफ्तार कर लिया। पूछताछ में पता चला है कि अख्तर अंसारी ने बाल मुनि की हत्या सोमवार (06 मई 2024) को ही कर दी थी।

ऑर्गनाइजर के मुताबिक, ये वारदात मंगलवार (7 मई 2024) को सामने आई, जब अख्तर अंसारी को लोगों ने कब्रिस्तान में बाल मुनि लोहरा के शव को ठिकाने लगाते रंगे हाथों पकड़ लिया। इसके बाद लोगों ने बाल मुनि के माता-पिता और परिवार को सूचित किया। इसके बाद मौके पर पहुँची पुलिस ने अख्तर अंसारी को गिरफ्तार कर लिया। इस मामले में किस्को थाना कांड संख्या 13/24,धारा 302, 201, 34 आईपीसी के तहत मामला दर्ज किया गया है।

क्यों उड़ान नहीं भर पा रही एयर इंडिया एक्सप्रेस, कैसे कर्मचारियों की बर्खास्तगी तक पहुँचा संकट: जानिए सब कुछ, अब तक 100 फ्लाइट कैंसल

एयर इंडिया एक्सप्रेस (Air India Express) में कर्मचारियों का संकट गहरा गया है। बताया जा रहा है कि विरोध प्रदर्शन करने के नाम पर एक साथ करीबन 200 स्टाफ मेंबर ने सिक लीव ले ली, जिसकी वजह से एयरलाइन की 100 उड़ानें बाधित हुईं। साथ ही पैसेंजर्स को भी काफी मुश्किलों का सामना करना पड़ा। इस घटना के बाद एयरलाइन ने 25 स्टाफ मेंबर्स पर कार्रवाई की है। वहीं बाकी बचे स्टाफ को नोटिस भेजकर नौकरी पर आने को कहा है। साथ ही ये चेतावनी भी दी है कि अगर वो बात नहीं मानते तो फिर एक्शन लिया जाएगा।

कहाँ की फ्लाइट हुई कैंसिल

जानकारी के मुताबिक, एयर इंडिया एक्सप्रेस के पास अभी 70 प्लस एयरक्राफ्ट हैं। रोजाना ये एयरलाइन 300 से ज्यादा फ्लाइट ऑपरेट करती है। 1 हफ्ते में इस एयरलाइन्स से 2500 फ्लाइट्स ऑपरेट की जाती है। ये उड़ानें देश के 31 और विदेश के 14 शहरों में ऑपरेट होती हैं। मंगलवार को स्टाफ की कमी के कारण नई दिल्ली, श्रीनगर, गुवाहाटी, बेंगलुरु, गोवा, तिरुवनंतपुरम, कोच्चि, कालीकट, कुन्नूर, कोझिकोड एयरपोर्ट पर एअर इंडिया एक्सप्रेस की उड़ानें कैंसिल करनी पड़ी थीं, जिसकी वजह से काफी नुकसान हुआ था और पैसेंजर्स को दिक्कत भी हुई थी।

क्यों बिगड़े हालात

एयर इंडिया एक्सप्रेस के चेयरमैन की मानें तो 2022 में टाटा द्वारा टेकओवर के बाद हालत बिगड़े हैं। वेतन का बड़ा हिस्सा पोस्टर लाइफ इंश्योरेंस से जोड़ा गया है जिससे कर्मचारी नाराज हैं। इसके अलावा सीनियर्स पर भेदभाव का आरोप है। साथ ही ये भी बात हैं कि यहाँ प्रमोशन की नीति ठीक नहीं है। इसके अलावा ये इस प्रदर्शन का कारण एआईएक्स कनेक्ट और विस्तारा का एअर इंडिया में विलय करना, भी माना जा रहा है। कर्मचारी कह रहे हैं कि ऐसे निर्णय एअर इंडिया के मूल कर्मचारियों के हितों के खिलाफ है।

मामला सुलझाने के लिए हो रही बात

एयरलाइन इस संकट को खत्म करने के लिए मैनेजमेंट वर्कर्स की यूनियन से बात कर रही हैं। कोशिश की जा रही हैं कि किसी भी तरह से उड़ानें प्रभावित न हों। मगर, हालात देख लगता है कि फिलहाल कर्मचारी काम पर लौटने के लिए तैयार नहीं हैं।

ऐसे में एयर इंडिया एक्सप्रेस ने अचानक छुट्टी पर जाने वाले 200 में से 25 क्रू मेंबर्स को नौकरी से निकाल दिया है। बाकी बचे सभी सदस्यों को नौकरी ज्वाइन करने को कहा है। वहीं यात्रियों से उन्हें हो रही असुविधा के लिए माफी माँगी है।

बता दें कि मंगलवार को एयरलाइन के 200 से ज्यादा कर्मचारियों के एकसाथ छुट्टी जाने पर कंपनी की उड़ानों के परिचालन पर 100 से ज्यादा फ्लाइट्स रद्द करनी पड़ीं थीं। इससे एयर इंडिया एक्सप्रेस का परिचालन लगभग ठप हो गया था, जिससे करीब 15 हजार यात्री प्रभावित हुए।

सिर्फ सलमान खान नहीं, मुंबई में 2 और एक्टर के घर की हुई थी रेकी: राजस्थान से मोहम्मद रफीक को मुंबई पुलिस ने पकड़ा, बिश्नोई को भेजे थे वीडियो

बॉलीवुड अभिनेता सलमान खान के घर पर फायरिंग मामले में मुंबई पुलिस ने पाँचवे आरोपित को गिरफ्तार किया है। मोहम्मद रफीक चौधरी नाम के इस आरोपित ने सलमान खान के घर की रेकी का वीडियो बना कर बिश्नोई गैंग को भेजा था। उसने पूछताछ में खुलासा किया है कि वह दो और एक्टरों के घरों की वीडियो बना चुका है।

मोहम्मद रफीक को मुंबई पुलिस ने राजस्थान से मंगलवार (7 मई, 2024) को गिरफ्तार किया था। रफीक ने मुंबई पहुँच कर सलमान खान के घर की वीडियो बनाई और उसे अनमोल बिश्नोई को भेजा। मोहम्मद रफीक ने सलमान खान के साथ ही 8 अप्रैल, 2024 और 12 अप्रैल को मुंबई में रहने वाले दो एक्टरों के घरों की वीडियो भी बनाई थी।

मुंबई पुलिस उसके द्वारा किए गए इन खुलासों की अब जाँच कर रही है और उसके मोबाइल फोन को जब्त करके उससे भी डाटा निकाला जा रहा है। उसने अपने फोन से यह वीडियो हटा दी थीं। ऐसे में पुलिस को तकनीकी विशेषज्ञों का सहारा लेना पड़ रहा है। यह भी सामने आया है कि रफीक बिश्नोई गैंग से 6 साल से अधिक से जुड़ा हुआ था।

रफीक अनमोल बिश्नोई और रोहित गोदारा से लगातार वीडियो कॉल पर भी बात करता था। वह सलमान खान के घर पर फायरिंग करने वाले दोनों आरोपितों को पहले से नहीं जानता था। पुलिस उससे इस मामले में और तथ्य निकालने की कोशिश कर रही है।

इसी के साथ यह भी सामने आया है कि सलमान खान के घर पर फायरिंग करने वाले दोनों शूटर विक्की गुप्ता और श्रीजोगेंद्र पाल पहले डर रहे थे। इन्हें अनमोल बिश्नोई ने समझाया था कि अगर वह सलमान खान के घर फायरिंग करते हैं तो उनका नाम हो जाएगा। लोग उन्हें पहचानने लगेंगे।

गौरलतब है कि 14 अप्रैल को अभिनेता सलमान खान के घर पर सुबह सुबह दो शूटरों ने हमला किया था। इन्होने यहाँ कई राउंड फायरिंग की थी। इसके बाद दोनों शूटर फरार हो गए थे। इस घटना की जिम्मेदारी लॉरेंस बिश्नोई गैंग के अनमोल बिश्नोई ने ली थी।

पुलिस ने कुछ दिन की तलाश के बाद सलमान खान के घर पर हमला करने वाले दोनों शूटरों को गुजरात से पकड़ लिया था। यह भुज में छुपे हुए थे। इसके अलावा पुलिस ने दो और आरोपितों अनुज थापन और चंदर बिश्नोई को पकड़ा था। इन पर हमले के लिए हथियार उपलब्ध करवाने का आरोप था। अनुज थापन ने बाद में आत्महत्या कर ली थी।

पुलिस ने अब इस मामले के पाँचवे आरोपित को पकड़ा है और आगे की जाँच कर रही है। सलमान खान के घर की सुरक्षा इस बीच बढ़ाई गई है। सलमान खान को काले हिरन के शिकार के मामले में लॉरेंस बिश्नोई लगातार धमकी देता आया है। यह हमला भी उसी के गैंग ने करवाया था।