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मुस्लिम वोट बैंक के कारण चुना वायनाड, दोनों सीटों से जीते तो रायबरेली छोड़ेंगे राहुल गाँधी: कॉन्ग्रेस के वफादार पत्रकार ने खोल दी ‘शर्त’

लोकसभा चुनाव 2024 में राहुल गाँधी 2 सीटों पर चुनाव लड़ रहे हैं। वो केरल के वायनाड से दोबारा चुनावी मैदान में हैं, जहाँ से वो मौजूदा लोकसभा सांसद हैं, तो दूसरी सीट है रायबरेली। रायबरेली सीट पर अब तक सोनिया गाँधी चुनाव लड़ती रही हैं। इस बार राहुल गाँधी रायबरेली से चुनाव मैदान में हैं और अब जो जानकारी सामने आ रही है, वो ये है कि रायबरेली की जनता ने ‘अगर’ राहुल गाँधी को चुन भी लिया, तो वो रायबरेली की जनता के नहीं होंगे, क्योंकि ‘मुस्लिम वोटों’ की मजबूरी में वो वायनाड के ही सांसद बने रहना पसंद करेंगे।।

बता दें कि वायनाड में वोटिंग के बाद यूपी में बीजेपी को ‘टक्कर’ देने की ‘मजबूरी’ में उन्हें यूपी से चुनाव लड़ना पड़ रहा है। हालाँकि अपनी परंपरागत सीट अमेठी से पिछला चुनाव हार चुके राहुल गाँधी दोबारा वहाँ से चुनाव लड़ने की हिम्मत नहीं जुटा सके, ऐसे में उन्होंने रायबरेली लोकसभा सीट से चुनाव लड़ने की घोषणा की। ऐसे में सभी लोगों का एक ही सवाल था कि ‘अगर’ राहुल गाँधी वायनाड और रायबरेली दोनों ही जगह से चुनाव जीतते हैं, तो फिर वो किस सीट से इस्तीफा देंगे। शायद इस सवाल का जवाब आ चुका है। कॉन्ग्रेस के ‘वफादारों’ में गिने जाने वाले ‘पत्रकार’ आदेश रावल ने जाने-अनजाने इसका खुलासा कर दिया है।

लल्लनटॉप से बातचीत में देश रावत ने ‘अंदर की बात‘ बताई और कहा, “राहुल गाँधी ने रायबरेली में चुनाव लड़ने के लिए शर्त रखी थी। क्योंकि खड़गे साहब ने कहा कि अगर हमने उत्तर प्रदेश की सीटें छोड़ दी तो खराब मैसेज जाएगा, क्योंकि पाँच चरणों के मतदान अभी बाकी है। इसके जवाब में राहुल गाँधी ने कहा कि अगर मैं दोनों सीट जीत जाता हूँ, तो मैं वायनाड नहीं छोड़ूँगा। चुनाव के दौरान अगर मीडिया ने मुझसे पूछा कि मैं किस सीट से बना रहूँगा, तो मैं झूठ नहीं बोल पाऊँगा, तो मैं कह दूँगा कि मैं रायबरेली छोड़ दूँगा।” इस बात पर सहमति बनने के बाद ही उन्होंने रायबरेली से चुनाव लड़ने के लिए हामी भरी।

बता दें कि लोकसभा चुनाव 2024 के दौरान कॉन्ग्रेस के आंतरिक सर्वे में बताया गया था कि राहुल गाँधी अमेठी में स्मृति ईरानी से हार जाएँगे, इसके बाद कॉन्ग्रेस एक सुरक्षित सीट की तलाश कर रही थी। तब कॉन्ग्रेस पार्टी की ओर से राहुल गाँधी के लिए मुस्लिम बहुल वायनाड सीट को चुना गया था। टाइम्स नाउ की रिपोर्ट में एक स्टिंग ऑपरेशन दिखाया गया था, जिसमें कॉन्ग्रेस पार्टी के वरिष्ठ नेता कहा कि अमेठी में उस समय कॉन्ग्रेस के सबसे बड़े नेता रहे राहुल गाँधी को अमेठी में प्रेशर झेलना पड़ रहा है। ऐसे में कॉन्ग्रेस को सुरक्षित सीट ढूँढने की जरूरत है। इसका मतलब ये था कि राहुल गाँधी को वायनाड से चुनाव लड़ना चाहिए, क्योंकि इस सीट पर हिंदू अल्पसंख्यक और मुस्लिम बहुसंख्यक हैं, जिससे राहुल गाँधी के लिए जीतना आसान हो जाएगा।

इस बार राहुल गाँधी उत्तर भारत से चुनाव नहीं लड़ रहे थे, वहीं, सोनिया गाँधी ने राज्यसभा जाने का फैसला कर लिया था, जबकि प्रियंका गाँधी के चुनाव लड़ने पर सस्पेंस बना हुआ था। ऐसे में अमेठी-रायबरेली से गाँधी परिवार से किसी का न होना पार्टी को नुकसान पहुँचा रहा था। यही वजह है कि कॉन्ग्रेस की टॉप लीडरशिप ने तय किया कि राहुल गाँधी को रायबरेली से चुनाव लड़ना ही पड़ेगा, क्योंकि वही सुरक्षित सीट है।

ऐसे में राहुल गाँधी को नामांकन दाखिल करने के आखिरी दिन से एक दिन पहले कॉन्ग्रेस की ओर से तैयार किया गया और तीन 3 मई को उन्होंने नामिनेशन दाखिल किया। 3 मई को नामांकन दाखिल कराया गया। इस सीट से बीजेपी ने उत्तर प्रदेश सरकार के मंत्री दिनेश प्रताप सिंह को मैदान में पहले ही उतार दिया था। हालाँकि आदेश रावल के खुलासे के बाद साफ हो गया है कि रायबरेली की जनता ने अगर ‘गलती’ से राहुल गाँधी को चुन लिया, तो उसे तुरंत ही फिर से लोकसभा चुनाव झेलना पड़ेगा, साथ ही कॉन्ग्रेस के किसी दूसरे प्रत्याशी को भी, क्योंकि राहुल गाँधी अल्पसंख्यक बहुल सीट वायनाड की जगह रायबरेली सीट से इस्तीफा दे देंगे।

शहजादे के ‘फिलॉसफर अंकल’ को काली चमड़ी से नफरत, इसलिए राष्ट्रपति चुनाव में द्रौपदी जी का कॉन्ग्रेस ने विरोध किया: पीएम मोदी बोले- ये देश को गाली दी गई

लोकसभा चुनाव 2024 में तीन चरण के मतदान पूरे हो चुके हैं। सात चरणों में होने वाले मतदान के अगले चरणों के लिए सभी दलों ने चुनाव प्रचार तेज कर दिए हैं। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने बुधवार (8 मई 2024) को तेलंगाना में करीमनगर के बाद वारंगल में जनसभा को संबोधित किया। इस दौरान भी उन्होंने कॉन्ग्रेस और राहुल गाँधी पर जमकर निशाना साधा।

पीएम मोदी ने कहा, “मैं सोच रहा था कि (राष्ट्रपति) द्रौपदी जी, जिनकी बहुत अच्छी प्रतिष्ठा है, आदिवासी समाज की बहुत प्रतिष्ठित बेटी हैं। उनको हम राष्ट्रपति बना रहे हैं तो कॉन्ग्रेस उनको हराने के लिए इतनी मेहनत क्यों कर रही है? कॉन्ग्रेस आदिवासियों को नाराज क्यों कर रही है? मैं सोचता रहता था, लेकिन मुझे समझ में नहीं आ रहा था।”

राहुल गाँधी पर हमला बोलते हुए उन्होंने कहा, “मुझे लगता था कि ठीक है कि ये शहजादे का दिमाग ऐसा है तो शायद द्रौपदी जी का विरोध कर रहा है। उनको चुनाव में हराने के लिए निकल पड़ा है, लेकिन मुझे आज पता कि ये कॉन्ग्रेस पार्टी, जो एक आदिवासी बेटी है, उसको हराने के लिए क्यों मैदान में उतरी थी। आज मुझे पता कि अमेरिका में ये शहजादे के अंकल रहते हैं।”

प्रधानमंत्री ने कहा, “ये शहजादे के अंकल उनके फिलॉसफर एंड गाइड है। जैसे आजकल क्रिकेट में थर्ड अंपायर होता है ना कि कोई कंफ्यूजन हो तो थर्ड अंपायर को पूछते हैं। वैसे ही ये शहजादे कोई कंफ्यूजन होता है तो उनसे सलाह लेते हैं। ये शहजादे के फिलॉसफर एंड गाइड अंकल ने बड़ा रहस्य खोला है। उसने कहा है कि जिनकी चमड़ी का रंग काला होता है, ये सब अफ्रीका के हैं।”

कॉन्ग्रेस नेता सैम पित्रोदा के बयान को लेकर राहुल गाँधी और कॉन्ग्रेस पर हमला बोलते हुए प्रधानमंत्री मोदी ने आगे कहा, “मतलब आप सबको… मेरे देश के अनेक लोगों को… चमड़ी के आधार पर इतनी बड़ी गाली दे दी। अब जाकर मुझे समझ में आया कि ये चमड़ी का रंग देखकर उन्होंने मान लिया कि द्रौपदी मुर्मू भी अफ्रीकन है। इसलिए उनकी चमड़ी का रंग काला है तो उनको हराना चाहिए।”

सभी भारतीयों को भगवान श्रीराम और श्रीकृष्ण का वंशज बताते हुए प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने आगे कहा, “ये सोच आज पहली बार मुझे पता चला कि ये दिमाग कहाँ काम कर रहा है इनका। ये देश को कहाँ ले जाएँगे? अरे चमड़ी का रंग कोई भी हो, हम तो श्रीकृष्ण की पूजा करने वाले लोग हैं, जिनकी चमड़ी का रंग यहाँ के सब लोगों जैसा था।”

बता दें कि सैम पित्रोदा ने कहा है कि देश में एक गुट है जो भारत में संस्कृति, सभ्यता, भगवान राम, हनुमान सबकी बातें करता है और दूसरा गुट वो है जो कहता है कि उनके पूर्वजों ने इस देश की आजादी के लिए काम किया है। पाकिस्तान ने मजहब के आधार पर मुल्क बनाया आज उनकी हालत देख लीजिए क्या है…।”

उन्होंने आगे कहा था, “हम भारत जैसे विविधतापूर्ण देश को एक साथ रख सकते हैं, जहाँ पूर्व के लोग चीनी जैसे दिखते हैं, पश्चिम के लोग अरब जैसे दिखते हैं, उत्तर के लोग शायद गोरे जैसे दिखते हैं और दक्षिण के लोग अफ्रीकी जैसे दिखते हैं।” सैम पित्रोदा की यह टिप्पणी अब सोशल मीडिया पर हो रही वायरल है। वहीं, पीएम मोदी ने भी पित्रोदा के इसी बयान को लेकर हमला बोला है। 

बलात्कारियों को चुन-चुन कर मारने वाले ‘हरक्युलिस’, हत्या के बाद गले में लटका देता था तख्ती: ‘सीरियल किलर’ की पहचान के लिए देशभर में चला अभियान

बांग्लादेश में हरक्युलिस नाम के एक हत्यारे ने कई बलात्कारियों को खोज-खोज कर मारा। उसने बलात्कार के आरोपितों को मार कर उनके गले में एक तख्ती टांगनी चालू कर दी थी। उसने तीन बलात्कार के संदिग्धों की हत्या कर दी थी। लोगों को आश्चर्य में डालने वाला मामला 2019 में सामने आया था।

इस आदमी की पहचान अब तक सामने नहीं आई है। उसका किरदार लोगों को एक फिल्म ‘डार्क नाईट’ की याद दिला रहा है। उसने हत्या करके लाशों पर सन्देश भी छोड़े, और खुद को ग्रीक हीरो ‘हरक्युलिस’ बताया। इससे मामला और गहरा हो गया।

यह पूरी कहानी 7 जनवरी, 2019 को एक घटना से शुरू हुई। इस दिन आशुलिया जिले की रहने वाली एक फैक्ट्री कर्मचारी ने पुलिस को अपने बलात्कार की शिकायत की, इसके कुछ ही घंटों के बाद उसकी लाश उसके घर में मिली। इस मामले में रिपन नाम का कपड़ा मिल कर्मचारी और उसके तीन साथियों को संदिग्ध माना गया।

हरक्युलिस ने 17 जनवरी को रिपन को मार दिया और बदला ले लिया। रिपन की लाश पर एक नोट भी छोड़ा गया। इस पर लिखा, “मैं बलात्कार के मामले में मुख्य आरोपित हूँ। मैं एक बलात्कारी हूँ। बलात्कार के लिए यह मेरी सजा है। सावधान रहें। सावधान रहें – हरक्युलिस।” इसके बाद इसी तरह की हत्याओं की जाँच चालू हुई।

यह तख्ती मारे गए लोगों के गले में टंगी मिली।

इसके बाद पुलिस को 1 फरवरी को जलकाठी जिले के राजापुर में कूड़ेदान में एक शव मिलने की सूचना मिली। मृतक के सिर पर गोली लगने के निशान थे, उसके सर पर गोली के निशान थे। पुलिस को मृतक के गले में एक संदेश लटका हुआ मिला, इसमें लिखा था, “मैं रकीब हूँ। मैं भंडारिया की एक मदरसा में पढ़ने वाली लड़की (अनाम) का बलात्कारी हूँ। बलात्कार की यही सजा है। बलात्कारियों सावधान रहो – हरक्युलिस।” यह बलात्कार के एक आरोपित रकीब मोल्लाह का शव था।

गौरतलब है कि एक महीने पहले ही बांग्लादेश की पुलिस ने एक 13 वर्षीय बालिका की पहचान करके उसके साथ हुई भयानक घटना के बारे में पता लगाया था, जब वह 14 जनवरी को जब वह अपनी दादी से मिलने जा रही थी, तो दो पुरुषों ने उसका यौन शोषण किया था।

यह अपराध पिरोजपुर जिले के भंडारिया क्षेत्र में हुआ। बालिका के पिता ने 17 जनवरी को इस मामले में स्थानीय पुलिस को सूचना दी थी, बालिका के पिता ने बाद में रकीब हुसैन मोल्ला और सजल जमादार को इस मामले में आरोपित बनाया था।

इसके बाद रकीब का शव भी सामने आया। इस चौंकाने वाली घटना के साथ, ‘हरक्युलिस’ की चर्चा पूरे देश में फ़ैल गई। यह मामला सामने आने पर मीडिया से इसकी पड़ताल की और पाया कि एक और हरक्युलिस के नाम से ही जाने जाने वाले एक सीरियल किलर ने इससे पहले भी हत्याएँ की थीं।

जाँच के पूरे ना होने तक अधिकारियों का मानना ​​था कि हरक्युलिस ने दो बार हत्याएँ की थी और रकीब की हत्या रिपन के बाद की गई थी। उन्हें जल्द पता चला कि रकीब असल में तीसरा मामला था। रकीब से एक सप्ताह पहले, हरक्युलिस ने रकीब के दोस्त सजल को भी सजा दी थी।

पुलिस ने इसे एक अलग मामला माना था। पुलिस ने बताया कि सजल के सर में गोलियाँ मारी गई थीं और सर पर धारदार हथियार से वार किए गए थे। सजल के शव पर भी एक तख्ती मिली थी जिसमें लिखा था- मैं सजल हूँ। मैं एक बलात्कारी हूँ। यह मेरे अपराध की सज़ा है। सावधान, बलात्कारियों। सावधान – हरक्युलिस।

हरक्युलिस कौन था?

हरक्युलिस के बारे में पता लगाने के लिए देश भर की पुलिस ने अभियान चलाया लेकिन हत्या के मामले बढ़ते रहे। ‘हरक्युलिस’ मामले के प्रभारी अधिकारी एम. जाहिदुल इस्लाम ने यह बात मानी कि वह इस हरक्युलिस को पहचान नहीं पाए हैं। इन हत्याओं को पाँच साल होने के बाद भी हरक्युलिस की पहचान, उसने हत्याएँ क्यों की, ठिकाने के बारे में कोई जानकारी नहीं है।

हरक्युलिस की बड़े स्तर पर सराहना हुई है। हालाँकि, कुछ लोगों ने कानून को हाथ में लेकर काम करने को लेकर उसकी निंदा भी की। मानवाधिकार संगठन ऐन-ओ-सलिश की कार्यकारी प्रमुख शीपा हाफ़िज़ ने प्रेस को दिए एक बयान में उसे चेतावनी दी थी। शीपा हाफ़िज़ ने ऐसे मामलों में लोगों और न्यायपालिका को सावधानी से काम करने की चेतावनी दी। “हमें इस बात पर बहुत ध्यान से विचार करना होगा कि ऐसी घटनाएँ क्यों हो रही हैं।”

पुलिस महानिरीक्षक शोहेल राणा ने इस मामले में कहा, “पुलिस को यह मालूम नहीं है कि इस तरह की गुप्त हत्याओं के पीछे कौन है। हम उसकी पहचान करने की कोशिश कर रहे हैं।” हालाँकि, जिनके घर के लोग मारे गए थे, उन्होंने दावा किया कि मृतकों को पुलिस उठा कर ले गई थी। पुलिस ने इन आरोपों का खंडन किया। हालाँकि कुछ समय के बाद यह हत्याएँ रुक गईं और यह मामला हमेशा के लिए दब गया।

कौन हैं रायता किंग सैम पित्रोदा, पोछते-पोछते कॉन्ग्रेस ही हो रही साफ: इंदिरा-राजीव से लेकर सोनिया-राहुल तक बने रहे खास

भारतीयों के रंग रूप की तुलना चीनियों और अफ्रीकियों से करने वाले सैम पित्रोदा अक्सर कॉन्ग्रेस का महिमामंडन करने में कुछ न कुछ अनाप-शनाप बोल ही जाते हैं। लोग उन्हें कभी बड़बोला बोलते हैं तो कभी कॉन्ग्रेस पार्टी का सबसे बड़ा चमचा कहते हैं। इसके अलावा आधिकारिक तौर पर उनकी पहचान आज के समय में इंडियन ओवरसीज कॉन्ग्रेस के अध्यक्ष के तौर पर होती है। लेकिन असल में सैम पित्रोदा हैं कौन और कैसे वो कॉन्ग्रेस पार्टी में आए… आइए इसे बताते हैं।

खुद को सैम पित्रोदा बताने वाले कॉन्ग्रेस नेता का असली नाम सत्यनारायण गंगाराम पित्रोदा है जिन्होंने अमेरिका में पैसे कमाने के लिए अपने भारतीय नाम को त्यागा था और इसका जिक्र वो एक इंटरव्यू में भी कर चुके हैं। उन्होंने गुजरात से फिजिक्स और इलेक्ट्रॉनिक्स में ग्रेजुएशन करने के बाद और अमेरिका में मास्टर्स की थी और फिर 1965 से टेलिकॉम इंडस्ट्री में हाथ आजमाया। इसके बाद 1975 में उन्होंने इलेक्ट्रॉनिक डायरी का आविष्कार किया था।

कॉन्ग्रेस से कैसे जुड़े सैम पित्रोदा

अपना काम भारत में भी एक्सपैंड करने की चाह में सैम पित्रोदा ने अपने दोस्त से कहकर इंदिरा गाँधी के साथ अपनी मीटिंग फिक्स करवाई थी। इस मीटिंग के लिए उन्होंने अपनी प्रेजेंटेशन भी तैयार रखी थी लेकिन किसी कारणवश जब इंदिरा गाँधी उनसे मिलने में लेट हो गईं तो उनकी मुलाकात राजीव गाँधी से हुई।

इस दौरान पित्रोदा ने राजीव गाँधी को ग्रामीण दूरसंचार, डिजिटल स्विचिंग के बारे में थोड़ा बताया और तब राजीव गाँधी को यह विचार आया कि टेलीफोन की तादाद बढ़ाने के बजाय उसकी पहुँच पर ध्यान केंद्रित किया जाना चाहिए। उन्होंने तब इंदिरा गाँधी से कहा कि हमें प्रौद्योगिकी को डिजिटल बनाने की जरूरत है और इसके लिए कुछ दूसरे देशों से नहीं खरीदना होगा। हमारे देश में खुद इतना टैलेंट है।

इंदिरा गाँधी ने पित्रोदा के इस आइडिया को सुन उनकी तारीफ की और यहीं से उनकी कॉन्ग्रेसियों से करीबियाँ बढ़ गईं। अमेरिकी नागरिकता मिलने के बावजूद उन्होंने इंदिरा गाँधी के कहने पर भारत का रुख किया और यहाँ की नागरिकता तक ले ली। लेकिन इसके बाद जब 31 अक्तूबर 1984 को इंदिरा गाँधी की हत्या हुई तो राजीव गाँधी की सरकार सत्ता में आई और सैम पित्रोदा को पूरा समर्थन दिया।

राजीव गाँधी ने अपनी सरकार में पित्रोदा को अपना सलाहकार बनाया गया। भारत में इंफोर्मेशन इंडस्ट्री में बदलाव के लिए दोनों मिलकर काम किया। राजीव ने उन्हें टेलीकॉम, वाटर, शिक्षा जैसे छह टेक्नोलॉजी मिशन का हेड बनाया था। बाद में राजीव गाँधी की हत्या हुई तो सैम पित्रोदा फिर अमेरिका लौट गए। उन्होंने एक बार फिर से शिकागो से अपने काम की शुरुआत की और कई कंपनियों को लॉन्च किया। 1995 में सैम पित्रोदा को इंटरनेशनल टेलीकम्युनिकेशन यूनियन WorldTel इनिशिएटिव का पहना चेयरमैन बनाया गया।

भारत में उनकी वापसी तब हुई जब 2004 में कॉन्ग्रेस की सरकार बनी। तत्कालीन पीएम मनमोहन ने सैम पित्रोदा को फिर से भारत आने का न्योता दिया। इसके बाद मनमोहन सरकार ने उन्हें नेशनल नॉलेज कमीशन का अध्यक्ष बनाया। 2009 में जब यूपीए सरकार आई तो सैम पित्रौदा को तत्कालीन प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह का सलाहकार बनाया गया।

इसके बाद मोदी सरकार 2014 में आई और सैम पित्रोदा कॉन्ग्रेस नेता राहुल गाँधी की छवि बनाने में लग गए। उन्हें कई बार राहुल गाँधी के साथ विदेशों में भी देखा गया और उन्हें सलाह देते हुए भी। कई मौके ऐसे भी आए जब उनकी चर्चा विवादित बयानों के कारण से हुई।

सैम पित्रोदा के विवादित बयान

उनका सबसे विवादित बयान 2019 में सामने आया था। उन्होंने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की आलोचना करते हुए सिख दंगों के लिए कहा था- “अब क्या है 84 का? भाजपा ने 5 साल में क्या किया, उसकी बात करे। 84 हुआ तो हुआ, आपने क्या किया?” पित्रोदा ने इस बयान पर बाद में माफी जरूर माँगी थी लेकिन उनकी भाषा के कारण लोग अब भी उनपर सवाल उठाते हैं।

इसी तरह पित्रोदा ने पाकिस्तान के बालाकोट में भारतीय सेना द्वारा की गई एयरस्ट्राइक का भी विरोध किया था। पित्रोदा ने कहा था कि मुंबई में भी हमला हुआ था और हमारी सरकार भी तब प्रतिक्रिया दे सकती थी और अपने विमान भेज सकती थी, लेकिन यह सही दृष्टिकोण सही नहीं है। उन्होंने कहा कि यह गलत है कि कुछ लोगों की गलती के चलते हम पाक के प्रत्येक नागरिक को दोषी ठहराएँ।

इसके बाद कुछ दिन पहले पित्रोदा ने अमेरिका में लागू विरासत टैक्स तो भारत में शुरू करने की बात कहकर कॉन्ग्रेस के लिए मुसीबत खड़ी कर दी थी और अब उन्होंने भारत की विविधता पर बात करते हुए भारत के लोगों की तुलना दूसरे देशों के लोगों से करके विवाद खड़ा कर दिया है। उन्होंने साफ तौर पर पूर्वोत्तर के लोगों को चीनी जैसा कहा और साउथ के लोगों को अफ्रीकनों के समान।

स्कूल टाइम में नमाज पढ़ने नहीं जा सकेंगे राजस्थान के शिक्षक, मोबाइल ले जाने पर बैन: शिक्षा मंत्री मदन दिलावर ने फोन को बताया बीमारी

राजस्थान के स्कूलों में मोबाइल फोन ले जाने पर प्रतिबंध लगा दिया गया है। विद्यालय में मोबाइल रखने की इजाजत सिर्फ प्रधानाध्यापक को होगी। इसकी घोषणा शिक्षा मंत्री मदन दिलावर ने की है। उन्होंने कहा कि स्कूलों में बच्चों को बेहतर शिक्षा देने के लिए टीचरों को हिदायत भी दी है। इसके साथ ही अब शिक्षक स्कूल छोड़कर नमाज पढ़ने भी नहीं जा सकते।

शिक्षा मंत्री मदन दिलावर का कहना है कि सरकारी स्कूलों में मोबाइल पर पूरी तरह से बैन रहेगा। उन्होंने कहा कि स्कूलों में शिक्षक मोबाइल पर पूरे दिन शेयर मार्केट और न जाने क्या-क्या देखते रहते हैं। शिक्षक उसी में उलझे रहते हैं और बच्चों पर उनका ध्यान ही नहीं रहता है। इससे बच्चों की पढ़ाई का भारी नुकसान होता है।

मदन दिलावर ने कहा कि अगर कोई सरकारी शिक्षक अपने साथ मोबाइल लेकर आता है तो उसे अपना फोन प्रधानाध्यापक के पास जमा करना होगा। वहीं, सिर्फ प्रिंसिपल को अपने साथ मोबाइल रखने की इजाजत होगी। शिक्षा मंत्री मदन दिलावर ने मोबाइल फोन को एक बीमारी जैसा बताया है।

इतना ही नहीं, नमाज के नाम पर स्कूल से गायब होने वाले शिक्षकों पर भी लगाम कस दिया है। मदन दिलावर ने कहा कि नमाज और पूजा-पाठ के नाम पर स्कूल छोड़कर जाने वाले शिक्षकों के खिलाफ कार्रवाई की जाएगी। उन्होंने कहा है कि अगर कोई शिक्षक धार्मिक कार्यक्रम में शामिल होना चाहता है तो वह छुट्टी लेकर जा सकता है।

दिलावर ने कहा कि शिक्षकों के गायब होने से बच्चों की पढ़ाई में बाधा उत्पन्न होती है। शिक्षा मंत्री ने कहा कि सरकारी स्कूलों में शिक्षक भैरूजी, बालाजी की पूजा और नमाज पढ़ने के नाम पर स्कूल नहीं छोड़ेंगे। यदि उनको जाना है तो छुट्टी लेकर जाएँ। उन्होंने यह भी कहा है कि बच्चों को पढ़ाने से पहले शिक्षक खुद पढ़कर जाएँ।

शिक्षा मंत्री ने कहा कि जो भी इन बातों का ध्यान नहीं रखेगा, उनके खिलाफ निलंबन या बर्खास्तगी की कार्रवाई की जाएगी। उन्होंने कहा कि स्कूल शिक्षा में जो पहले से आदेश, निर्देश और नियम बने हुए हैं उन सब की पालना करने का प्रयास कर रहे हैं। शिक्षा मंत्री ने कहा कि सरकारी स्कूलों में खेल के मैदानों पर हो रखे अतिक्रमणों को हटाया जाएगा।

फोटो ओसामा बिन लादेन की, वीडियो ISIS कत्लेआम की… हाई कोर्ट ने अब्दुल रहमान को दी जमानत, कहा- मोबाइल में जेहादी कंटेंट रखने से कोई आतंकी नहीं होता

दिल्ली हाई कोर्ट ने आतंकवाद से जुड़े UAPA के एक मामले में सोमवार (6 मई 2024) को सुनवाई करते हुए मुस्लिम युवक अम्मार अब्दुल रहमान को जमानत दे दी। उसे खूंखार आतंकी संगठन इस्लामिक स्टेट (ISIS) से जुड़े होने के जुर्म में गिरफ्तार किया गया था। हाई कोर्ट ने कहा कि मोबाइल में आतंकी ओसामा बिन लादेन की तस्वीरें, जिहाद प्रचार और ISIS के झंडे रखने से कोई आतंकी नहीं हो जाता।

न्यायमूर्ति सुरेश कुमार कैत और न्यायमूर्ति मनोज जैन की खंडपीठ ने अपने आदेश में कहा कि आरोपित के मोबाइल में आतंकवादी ओसामा बिन लादेन की तस्वीरें, जिहाद प्रचार सामग्री और ISIS झंडे जैसी आपत्तिजनक सामग्री मिलने और कट्टरपंथी या मुस्लिम उपदेशक के लेक्चर को सुनना आरोपित को एक प्रतिबंधित आतंकवादी संगठन के सदस्य के रूप में ब्रांड करने के लिए पर्याप्त नहीं होगा।

कोर्ट ने आगे कहा, “आज के इलेक्ट्रॉनिक युग में इस प्रकार की आपत्तिजनक सामग्री वर्ल्ड वाइड वेब (www) पर स्वतंत्र रूप से उपलब्ध है और केवल इसे एक्सेस करना और यहाँ तक कि इसे डाउनलोड करना भी यह मानने के लिए पर्याप्त नहीं होगा कि उसने खुद को ISIS के साथ जोड़ा था। कोई भी जिज्ञासु मन ऐसी सामग्री तक पहुँच सकता है और यहाँ तक कि उसे डाउनलोड भी कर सकता है। हमारे लिए वह कृत्य अपने आप में कोई अपराध नहीं प्रतीत होता है।”

हाई कोर्ट की खंडपीठ ने कहा कि इस तरह का कृत्य व्यक्ति की मानसिकता के बारे में ‘अंतर्दृष्टि’ दे सकता है, लेकिन जब कोई दंडात्मक प्रावधान के तहत, जिसमें किसी की स्वतंत्रता छीन ली जाती है, ऐसे में जमानत देना भी एक प्रकार का अपवाद बन जाता है। अभियोजन पक्ष को समझने योग्य और ठोस सामग्री के रूप में कुछ अतिरिक्त सबूत की आवश्यकता है।

इसमें आगे कहा गया है कि केवल इसलिए कि वह व्यक्ति ‘मध्य-पूर्व और इज़रायल-फिलिस्तीन संघर्ष से संबंधित समाचारों’ फॉलो कर रहा था या ‘कट्टरपंथी मुस्लिम उपदेशकों के नफरत भरे भाषणों को देख-सुन रहा था’ यह मानने के लिए पर्याप्त नहीं होगा कि वह एक प्रतिबंधित आतंकवादी संगठन की विचारधारा को आगे बढ़ाने में सक्रिय भूमिका अदा कर रहा था।

पीठ ने कहा कि इस मामले में UAPA की धारा 38 और 39 का प्रयोग गलत प्रतीत होता है। UAPA की धारा 38 एक आतंकवादी संगठन की सदस्यता से संबंधित अपराध है और धारा 39 एक आतंकवादी संगठन को दिए गए समर्थन से संबंधित अपराध है। इसके बाद कोर्ट ने अम्मार अब्दुल रहमान को जमानत दे दी। हालाँकि, कोर्ट ने यह भी कहा कि उसकी टिप्पणियाँ अस्थायी स्वभाव की हैं।

अम्मार अब्दुल रहमान को NIA ने UAPA की विभिन्न धाराओं के तहत अगस्त 2021 में गिरफ्तार किया था। उस पर ISIS से जुड़े होने और आतंकी संगठन की कट्टरपंथी विचराधारा को आगे बढ़ाने का आरोप लगाया था। हालाँकि, निचली अदालत ने दिसंबर 2023 में आरोपित को जमानत देने से इनकार कर दिया था। इसके बाद निचली अदालत के इस आदेश को हाई कोर्ट में चुनौती दी गई थी।

पिता सपा के पूर्व MLA, बेटी से रेप करता था सपा कार्यकर्ता आसिफ अली: न्यूड फोटो से ब्लैकमेल कर वसूले ₹3 करोड़, तेजाब हमले की देता था धमकी

उत्तर प्रदेश के मुरादाबाद में सपा के ही एक पूर्व विधायक की बेटी ने आरोप लगाया है कि एक सपा नेता ने उससे बलात्कार करके उसे सालों तक ब्लैकमेल किया और उससे करोड़ों रूपए हड़प लिए। पीड़िता ने इस मामले में मुरादाबाद में FIR दर्ज करवाई है। पीड़िता ने आरोप लगाया है कि सपा नेता उसके अश्लील फोटो के बल पर सालों तक उसे प्रताड़ित करता रहा, जिसमें उसका परिवार भी शामिल था।

जानकारी के अनुसार, मुरादाबाद के सिविल लाइन्स इलाके में रहने वाली एक महिला ने सपा नेता आसिफ अली और उसके परिजनों के खिलाफ बलात्कार और ब्लैकमेलिंग की मंगलवार (7 मई, 2024) को FIR दर्ज करवाई है। पीड़िता ने बताया है कि वह सपा के दो बार के एक विधायक की बेटी है।

पीड़िता ने बताया वह तीन बहनें हैं, उसकी शादी कानपुर में एक बड़े व्यापारी से हुई है। वह अपने पिता की देखभाल करने के लिए कानपुर से मुरादाबाद आती थी। 2019 में अपने पिता के बीमार होने पर वह उनकी देखभाल के लिए मुरादाबाद आई हुई थी। इस दौरान आसिफ भी उनके घर आता-जाता था।

पीड़िता ने बताया कि एक दिन आसिफ ने कोल्डड्रिंक में उसे नशीला पदार्थ मिला कर पिला दी। इसके बाद उसने एक कमरे में ले जाकर पीड़िता के साथ बलात्कार किया और उसके अश्लील फोटो ले लिए। पीड़िता ने बताया कि उसने जब होश आने पर इस संबंध में आसिफ से पूछताछ की तो वह उसे धमकाने लगा और उसकी न्यूड फोटो दिखाई।

आसिफ ने पीड़िता को धमकाया कि अगर वह किसी को इस विषय में बताएगी तो वह उनकी न्यूड फोटो वायरल कर देगा और बदनामी करवा देगा। पीड़िता को उसने इस दौरान हथियार के साथ धमकाया भी। आसिफ ने इसके बाद न्यूड फोटो को हथियार बनाते हुए कई बार पीड़िता के साथ रेप किया।

आसिफ यहीं नहीं रुका बल्कि उसने पीड़िता से फोटो के बल पर वसूली भी चालू कर दी। उसने कई कागजों पर पीड़िता से हस्ताक्षर करवा लिए। इस काम में उसका भाई और भाभी भी शामिल थे। पीड़िता ने बताया कि वह उससे पैसे वसूलता था। पीड़िता से आसिफ ने ₹3 करोड़ की वसूली की। एक फ्लैट भी अपने नाम से खरीदा जिसका भुगतान पीड़िता ने किया।

पीड़िता ने बताया कि उसे अपने पिता कि सम्पत्ति में हिस्सा मिला था। इस हिस्से में एक पेट्रोल पम्प भी शामिल था। आसिफ चाहता था कि पीड़िता पेट्रोल पम्प भी उसके नाम कर दे। पीड़िता के पिता की मौत के बाद उसकी डिमांड लगातार बढती गई। वह पीड़िता को अपने घर ले जाकर रेप करता था और इस दौरान उसकी भाभी बाहर बैठी रहती थीं।

आसिफ ने इसके बाद और वसूली करने के लिए पीड़िता को धमकी दी कि वह उसके चेहरे पर तेज़ाब डाल देगा। पीड़िता ने आसिफ की कारस्तानियों से तंग आकर अपने पति को घटना बताई और मुरादाबाद में मुकदमा दर्ज करवाया। बताया गया कि आसिफ सपा के छात्र संगठन युवजन सभा में बड़े पदों पर भी रहा है। उसकी सपा मुखिया अखिलेश यादव के साथ फोटो है।

पहले दिनभर अडानी-अंबानी को देते रहते थे गाली, चुनावों की घोषणा के बाद नाम भी नहीं ले रहे: PM मोदी ने पूछा- शहजादे बताएँ कितने पैसे मिले

लोकसभा चुनाव 2024 के प्रचार के लिए प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी बुधवार (8 मई 2024) को तेलंगाना के करीमनगर पहुँचे। इस एक जनसभा को संबोधित करते हुए उन्होंने कॉन्ग्रेस, राहुल गाँधी और गाँधी परिवार पर जमकर निशाना साधा। प्रधानमंत्री ने कहा कि कॉन्ग्रेस ने अपनी पार्टी के नेता एवं देश के पूर्व प्रधानमंत्री पीवी नरसिम्हाराव के पार्थिव शरीर का भी अपमान किया।

पीएम मोदी ने गाँधी परिवार पर आरोप लगाया कि कॉन्ग्रेस में ‘फैमिली फर्स्ट’ की नीति है। उन्होंने कहा, “फैमिली फर्स्ट की वजह से कॉन्ग्रेस ने पीवी नरसिम्हाराव जी का भी अपमान किया। उनके निधन के बाद उनके पार्थिव शरीर का भी अपमान किया। कॉन्ग्रेस दफ्तर में एंट्री तक नहीं दी। ये बीजेपी-एनडीए सरकार है, जिसने पीवी नरसिम्हाराव जी को भारत रत्न से सम्मानित किया।”

प्रधानमंत्री ने आगे कहा, “मुझे मेरे लिए बहुत सुखद है कि कल ही मुझे उनके पूरे परिवार के साथ मुलाकात करने का, पीवी नरसिम्हाराव जी के बारे में बहुत कुछ सुनने का सौभाग्य मिला। बहुत देर तक उनके परिवार के दो-दो, तीन-तीन पीढ़ी के साथ मैं बैठा। मैं गर्व महसूस कर रहा था कि एक परिवार ने… नरसिम्हाराव जी ने देश के लिए कितना कुछ किया और कॉन्ग्रेस ने उनके साथ कैसा व्यवहार किया।”

राहुल गाँधी पर निशाना साधते हुए पीएम मोदी ने कहा, “कॉन्ग्रेस के शहजादे पिछले पाँच साल से सुबह उठते ही माला जपना शुरू कर देते हैं। जब से उनका राफेल वाला मामला ग्राउंडेड हो गया, तब से उन्होंने एक नई माला जपना शुरू किया। पाँच साल से एक ही माला जपते थे। पाँच उद्योगपति… पाँच उद्योगपति… पाँच उद्योगपति। फिर धीरे-धीरे कहने लगे अंबानी-अडानी… अंबानी-अडानी… अंबानी-अडानी।”

प्रधानमंत्री ने आगे कहा, “लेकिन, जब से चुनाव घोषित हुआ है इन्होंने अंबानी-अडानी को गाली देना बंद कर दिया। अब शहजादे ये घोषित करें कि इस चुनाव में अंबानी-अडानी से उन्होंने कितना माल उठाया है। काले धन के कितने रूपये भर के मारे हैं? क्या टेम्पो भर के नोटें कॉन्ग्रेस के लिए पहुँची हैं? क्या सौदा हुआ है? आपने रातों-रात अंबानी-अडानी को गाली देना बंद कर दिया।”

पीएम मोदी ने राहुल गाँधी से पूछा, “जरूर दाल में कुछ काला है। पाँच साल तक अंबानी-अडानी को गाली दी और रातों-रात अब बंद हो गई। मतलब कोई ना कोई चोरी का माल टेम्पो भर-भर के आपने पाया है। इसका जवाब आपको देश को देना पड़ेगा।” बता दें कि राहुल गाँधी प्रधानमंत्री मोदी पर उद्योगपति मुकेश अंबानी और गौतम अडानी को फायदा पहुँचाने का आरोप लगाते रहे हैं।

चीनी की तरह दिखते हैं पूर्वोत्तर के लोग, दक्षिण वाले अफ्रीकी जैसे: कॉन्ग्रेस नेता सैम पित्रोदा ने खड़ा किया नया विवाद, असम के CM बोले- मैं भारतीय जैसा दिखता हूँ

इंडियन ओवरसीज कॉन्ग्रेस के अध्यक्ष सैम पित्रोदा ने ‘द स्टेट्समैन’ से बात करते हुए हाल में भारतीयों की अखंडता और विविधता पर एक शर्मनाक टिप्पणी की। उन्होंने भारत की विविधता पर बात करते हुए दक्षिण के लोगों की तुलना अफ्रीकियों से कर डाली और उत्तर पूर्व भारत में रहने वाले लोगों की तुलना चीनियों से। उनके इस बयान के वायरल होने के बाद अब कॉन्ग्रेस की आलोचना हो रही है। असम सीएम ने भी इस बयान को सुनने के बाद कॉन्ग्रेस नेता को जवाब दिया है।

सैम पित्रोदा ने द स्टेट्समैन से बातचीत के दौरान भारत के लोगों के विचारों पर बात करते हुए ये टिप्पणी की। उन्होंने कहा कि एक गुट है जो भारत में संस्कृति, सभ्यता, भगवान राम, हनुमान सबकी बातें करता है और दूसरा गुट वो है जो कहता है कि उनके पूर्वजों ने इस देश की आजादी के लिए काम किया है।

सैम पित्रोदा एक ओर तो कहते हैं कि वो हर विचार का सम्मान करते हैं। इसके बाद वो कहते हैं, “पाकिस्तान ने मजहब के आधार पर मुल्क बनाया आज उनकी हालत देख लीजिए क्या है… हम भारत जैसे विविधतापूर्ण देश को एक साथ रख सकते हैं, जहाँ पूर्व के लोग चीनी जैसे दिखते हैं, पश्चिम के लोग अरब जैसे दिखते हैं, उत्तर के लोग शायद गोरे जैसे दिखते हैं और दक्षिण के लोग अफ्रीका जैसे दिखते हैं।”

सैम पित्रोदा की यह टिप्पणी अब सोशल मीडिया पर वायरल है। उनकी इस टिप्पणी पर असम के मुख्यमंत्री हिमंता बिस्वा सरमा ने भी प्रतिक्रिया दी है। उन्होंने कहा, “सैम भाई, मैं नॉर्थ ईस्ट से हूँ और भारतीय जैसा दिखता हूँ। हम एक विविधतापूर्ण देश में रहते हैं। हम अलग दिख सकते हैं लेकिन हम सभी एक हैं। हमारे देश के बारे में थोड़ा तो समझ लो।”

वहीं, इस कमेंट को सुनने के बाद लोग सैम पित्रोदा के साथ-साथ नस्लवादी, जातिवादी और सांप्रदायिक कट्टरपंथी कहा जा रहा है। इसके अलावा ये भी कहा जा रहा है कि कॉन्ग्रेस का काम सिर्फ भारतीयों की पहचान मिटाने का है। उन्हें भारतीयों की पहचान भारतीयों के रूप में नहीं कर रहे। उलटा उनके रंग रूप को दूसरों से जोड़ रहे हैं।

हरियाणा का क्या है गणित, क्या 3 निर्दलीय MLA की समर्थन वापसी से खतरे में आ गई है सरकार: जानिए सब कुछ

हरियाणा के तीन निर्दलीय विधायकों ने मंगलवार (7 मई, 2024) को राज्य की नायब सिंह सैनी वाली भाजपा सरकार से समर्थन वापस लेने की घोषणा की है। इन विधायकों ने आगे कॉन्ग्रेस को समर्थन देने का ऐलान किया है। इन विधायकों ने कॉन्ग्रेस नेता भूपिंदर सिंह हुड्डा के साथ एक प्रेस कॉन्फ्रेंस की।

हरियाणा की भाजपा सरकार से चरखी दादरी से विधायक सोमवीर सांगवान, पुंडरी से विधायक रणधीर गोलन एवं नीलोखेड़ी से विधायक धर्मपाल गोंदर ने समर्थन वापस लिया है। इन तीनों विधायकों के समर्थन वापस लेने पर कॉन्ग्रेस ने एक्स (ट्विटर) पर लिखा, “पूर्व मुख्यमंत्री भूपेंद्र सिंह हुड्डा और अध्यक्ष श्री उदयभान की मौजूदगी में तीन निर्दलीय विधायकों ने दिया कांग्रेस को समर्थन। लोकसभा चुनाव के परिणाम आने से पहले ही हरियाणा में रुझान आने शुरू हो गए हैं। जन विरोधी मोदी और खट्टर सरकार को जल्द हरियाणा की जनता सबक सिखाने वाली है।”

इसके बाद कई जगह यह खबर उड़ाई गई कि हरियाणा की भाजपा सरकार अल्पमत में है। भाजपा ने इस मामले पर वस्तुस्थिति बताई है। हरियाणा भाजपा के प्रवक्ता जवाहर यादव ने कहा, “भारतीय जनता पार्टी की सरकार पर कोई भी खतरा नहीं है। तीन निर्दलीय विधायकों ने कहा है कि उन्होंने सरकार से समर्थन वापस लिया है, उनके जाने के बाद भी भाजपा की नायब सिंह सैनी सरकार के पास बहुमत है। बहुमत परीक्षण का एक ही स्थान विधानसभा होता है, यह कॉन्ग्रेस और भूपिंदर सिंह हुड्डा द्वारा भ्रम फैलाया जा रहा है।”

भाजपा प्रवक्ता ने बताया, “मार्च में ही मुख्यमंत्री नायब सिंह सैनी ने विश्वास मत हासिल किया था। 6 महीने के भीतर ऐसा मामला दुबारा आना मुश्किल बात होती है, लेकिन जब भी विधानसभा के भीतर ऐसी बात आएगी तो हम प्रचंड बहुमत सिद्ध कर देंगे, यह लोकसभा चुनावों के लिए राजनीतिक बयानबाजी हो रही है।”

हरियाणा विधानसभा में कुल 90 सीटें हैं और बहुमत के लिए यहाँ 46 सीटों की आवश्यकता होती है। वर्तमान में भाजपा सरकार के पास अपने 40 विधायक हैं जबकि उसे 1 निर्दलीय और हरियाणा लोकहित पार्टी के एक और विधायक का समर्थन हासिल है। मार्च 2024 तक हरियाणा सरकार को जननायक जनता पार्टी का भी समर्थन हासिल था, JJP के पास राज्य में 10 सीटें हैं। दूसरी तरफ कॉन्ग्रेस के पास राज्य 30 सीटें हैं और उसे 4 निर्दलीयों का समर्थन हासिल हो गया है।

हरियाणा विधानसभा में दो सीटें खाली भी हैं जो कि पूर्व मुख्यमंत्री मनोहर लाल खट्टर और रणजीत चौटाला के इस्तीफे के बाद खाली हुई हैं। ऐसे में स्पष्ट गणित में तो भाजपा के पास बहुमत नहीं है लेकिन अभी उसकी सरकार को राज्य में खतरा नहीं है। दरअसल, हरियाणा की नायब सिंह सैनी सरकार ने मार्च, 2024 में ही बहुमत हासिल किया था। नियमानुसार, एक बार किसी सरकार के बहुमत सिद्ध करने के बाद अगले 6 महीने तक उसके खिलाफ अविश्वास प्रस्ताव नहीं लाया जा सकता।

जहाँ सितम्बर माह तक अविश्वास प्रस्ताव नहीं लाया जा सकता वहीं अक्टूबर तक राज्य में चुनाव भी होने हैं। इसी दौरान राज्य की विधानसभा का कार्यकाल खत्म हो रहा है। ऐसे में विपक्ष की सरकार गिराने की मंशा पूरी होना असम्भव सा लग रहा है। भाजपा ने भी इसको लेकर स्पष्ट किया है कि उनके पास संख्याबल मौजूद है और सरकार को कोई खतरा नहीं है।