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रोड से प्रदर्शनकारियों को हटाने के आदेश पर सुप्रीम कोर्ट ने लगाई रोक: HC ने पंजाब सरकार को दिया था आदेश, कहा था- गुरु ग्रंथ साहिब को ढाल बना नहीं जाम कर सकते सड़क

सुप्रीम कोर्ट ने शुक्रवार (3 मई, 2024) को पंजाब एवं हरियाणा हाई कोर्ट के रोड प्रदर्शनकारियों से खाली करवाने सम्बन्धी एक फैसले पर रोक लगा दी। हाई कोर्ट ने अप्रैल माह में मोहाली-चंडीगढ़ रोड को रोक कर बैठे प्रदर्शनकारियों को हटाने का आदेश चंडीगढ़ और पंजाब को दिया था।

लाइव लॉ के अनुसार, सुप्रीम कोर्ट ने हाई कोर्ट के इस निर्णय पर रोक लगाने के साथ ही इस मामले में नोटिस जारी किया। इस मामले की सुनवाई जस्टिस बी आर गवई, सतीश चंद शर्मा और संदीप मेहता की बेंच ने की और निर्णय पर अगली सुनवाई तक रोक लगाई।

गौरतलब है कि अप्रैल में हुई एक सुनवाई में पंजाब और हरियाणा हाई कोर्ट में प्रदर्शनकारियों के रोड जाम करने को लेकर पंजाब सरकार और चंडीगढ़ प्रशासन को लताड़ लगाई थी। हाई कोर्ट के कार्यकारी चीफ जस्टिस गुरमीत सिंह संधावालिया और जस्टिस लापिता बैनर्जी की बेंच ने कहा था कि कई मौकों के बाद भी पंजाब सरकार और चंडीगढ़ प्रशासन ने रोजाना इस सड़क पर चलने वाले लोगों को कोई राहत नहीं पहुँचाई।

कोर्ट ने कहा था कि कुछ प्रदर्शनकारी यहाँ अपने साथ गुरु ग्रंथ साहिब लेकर बैठते हैं, यह कोई कारण नहीं हो सकता कि इन लोगों के खिलाफ पंजाब सरकार कार्रवाई ना करे। हाई कोर्ट ने कहा था, “केवल इस बात के आधार पर कि कुछ प्रदर्शनकारी गुरु ग्रंथ साहिब को रखकर धार्मिक भावनाओं का सहारा ले रहे हैं और इसे ढाल बना रहे हैं, इससे पंजाब को यह बहाना नहीं मिल जाता कि वह इन धर्म की आड़ लेने वालों पर कार्रवाई ना करे।”

कोर्ट ने यह टिप्पणियाँ एक याचिका की सुनवाई के दौरान की थी। यह याचिका के NGO द्वारा दायर की गई थी। इसने इन प्रदर्शनकारियों के हटाए जाने की माँग की थी। याचिका में कहा गया था कि इस धरना प्रदर्शन की वजह से रोजाना के यात्रियों को बड़ी समस्याएँ झेलनी पड़ रही थीं। कोर्ट ने इस दौरान इस बात का उल्लेख किया था कि उसने पिछली सुनवाई में पंजाब के डीजीपी तक को बुलाया था और यह सुनिश्चित करने को कहा था कि को प्रदर्शनकारी यहाँ ना रुके। कोर्ट ने कहा कि पंजाब और चंडीगढ़ मिलकर इस मामले में देरी कर रहे हैं।

इस मामले में दाखिल की गई जनहित याचिका में कहा गया था कि यह प्रदर्शन जनवरी 2023 से चल रहा है, जिससे स्कूली बच्चों और आमजन, दोनों को असुविधा हो रही है। प्रदर्शनकारी केंद्र सरकार से बेअदबी के मामलों में सख्त सजा और कुछ सिख कैदियों जिन्हें बंदी सिख के नाम से भी जाना जाता है, की जल्द रिहाई की माँग कर रहे हैं। इन बंदी सिखों में 1993 दिल्ली बम विस्फोट का दोषी देविंदरपाल सिंह भुल्लर और पंजाब के पूर्व सीएम बेअंत सिंह का हत्यारा कैदी बलवंत सिंह राजोआना शामिल हैं।

बृजभूषण शरण सिंह को अपने निशान पर चुनाव लड़वाना चाहती थी कॉन्ग्रेस, पार्टी नेता ने किया था संपर्क: WFI के पूर्व अध्यक्ष का खुलासा

भारतीय कुश्ती महासंघ (WFI) के पूर्व अध्यक्ष और यूपी के कैसरगंज लोकसभा सीट से बीजेपी सांसद बृजभूषण शरण सिंह ने दावा किया है कि कॉन्ग्रेस पार्टी ने उनसे संपर्क कर ‘पंजा’ चुनाव निशान से लोकसभा चुनाव लड़ने का ऑफर दिया था। बृजभूषण शरण सिंह ने कहा कि कॉन्ग्रेस के एक वरिष्ठ नेता ने उन्हें चुनाव में कॉन्ग्रेस के टिकट पर लड़ने की पेशकश की थी।

बृजभूषण शरण सिंह ने इस बात खुलासा शुक्रवार (03 मई 2024) को किया, जब वो अपने बेटे करण भूषण सिंह के लिए नामांकन कर रहे थे। न्यूज 18 की रिपोर्ट के मुताबिक, कॉन्ग्रेस पार्टी ने बृजभूषण शरण सिंह से संपर्क किया था, ताकि उन्हें कॉन्ग्रेस के टिकट पर चुनाव लड़ाया जा सके। बृजभूषण शरण सिंह ने कहा कि “कॉन्ग्रेस पार्टी के एक वरिष्ठ नेता ने मुझसे संपर्क किया और मुझे कॉन्ग्रेस से चुनाव लड़ने के लिए कहा।” हालाँकि उन्होंने उस नेता के नाम का खुलासा नहीं किया, जिसने उन्हें ऑफर दिया था। बता दें कि बीजेपी ने गुरुवार (2 मई 2024) को कैसरगंज लोकसभा सीट से बृजभूषण शरण सिंह की जगह उनके बेटे करण भूषण सिंह को उम्मीदवार घोषित किया और इसके दूसरे दिन उन्होंने अपना नामांकन दाखिल किया।

बता दें कि गुरुवार (2 मई 2024) को उत्तर प्रदेश की कैसरगंज लोकसभा सीट से बीजेपी ने 6 बार के सांसद रहे बाहुबली बृजभूषण शरण सिंह की वजह उनके बेटे को प्रत्याशी घोषित किया है। नामांकन के समय बृजभूषण ने कहा कि मेरे क्षेत्र के पार्टी कार्यकर्ता चाहते थे कि मैं चुनाव लड़ूँ। अगर मैं न लड़ूँ तो मेरा बेटा चुनाव लड़े। और पार्टी ने कार्यकर्ताओं की बात सुनी।

गौरतलब है कि गोंडा, बलरामपुर और कैसरगंज लोकसभा सीट से अलग-अलग 6 बार के सांसद रहे बृजभूषण शरण सिंह पर देश के नामी पहलवानों बजरंग पुनिया, साक्षी मलिक, विनेश फोगाट, संगीता फोगाट ने गंभीर आरोप लगाए थे और उनके खिलाफ विरोध-प्रदर्शन किया था। हालाँकि बृजभूषण ने अपने ऊपर लगे आरोपों को खारिज कर दिया है।

पूर्व मंत्री दिनभर पत्नी के साथ रहे, फिर बाथरूम से निकाला और घूँसा मार-मार कर मार डाला: CCTV से सामने आई क्रूरता, अब सुनवाई लाइव देख रही दुनिया

मध्य एशियाई देश कजाकिस्तान के पूर्व मंत्री ने अपनी पत्नी को पीट-पीट कर क्रूरता से मार दिया। इस हत्या का मुकदमा पूरा कजाकिस्तान अब लाइव देख रहा है। यह मामला आसपास के देशों में भी देखा जा रहा है। मुकदमे की लाइव सुनवाई से रोज क्रूरता की नई कहानियाँ सामने आ रही हैं।

जानकारी के अनुसार, कजाकिस्तान के मंत्री कुआन्दिक बिशिम्बायेव ने 9 नवम्बर, 2023 को अपनी 31 वर्षीय पत्नी सल्तनत नुकेनोवा को एक रेस्टोरेंट में पीट पीट कर मार दिया था। इस मामले में उनके ऊपर हत्या का मुकदमा चलाया जा रहा है। इस मुकदमे को कजाकिस्तान में लाइव प्रसारित किया जा रहा है। यह देश का पहला ऐसा मुकदमा है जिसे लाइव प्रसारित किया गया है। इस मुकदमे के बाद देश में महिलाओं के खिलाफ घरेलू हिंसा पर आन्दोलन खड़ा हो गया है।

हाल ही में इस हत्या का एक सीसीटीवी वीडियो भी कोर्ट को दिया गया है, इस वीडियो में दिखता है कि कितनी क्रूरता से बिशिम्बायेव ने अपनी पत्नी की हत्या की। वीडियो से पता चला कि पहले उसने अपनी पत्नी को बालों से खींचा और हाथों-पैरों पर मारना चालू कर दिया। इसके बाद जब उनकी पत्नी बाथरूम में चली गई तो बिशिम्बायेव ने दरवाजा तोड़ कर उसे मारा और खून से लथपथ कर दिया। अब ऊनि पत्नी नुकेनोवा बेसुध हो गई तो उसने एक भविष्यवक्ता को बुलाया ना कि इलाज की व्यवस्था की।

डॉक्टरों के आने पर नुकेनोवा को मृत घोषित कर दिया गया। इस मामले में दायर किए गए मुकदमे में पहले बिशिम्बायेव अपने दोषी होने से इनकार करते रहे लेकिन बाद में उन्होंने स्वीकार कर लिया। उनके वकीलों ने भी इस मामले में गड़बड़ियाँ करने की कोशिश की। बिशिम्बायेव 2016 में कजाकिस्तान में अर्थव्यवस्था के मंत्री बनाए गए थे। तब उन्हें देश में एक पढ़े लिखे व्यक्ति के रूप में समझा जाता था। हालाँकि, जल्द ही उनकी छवि पर बट्टा लग गया और 2018 में उन्हें घोटाले के आरोप में 10 वर्ष की सजा हुई।

उनकी सजा को कजाकिस्तान के पूर्व राष्ट्रपति ने जल्द ही माफ़ कर दिया था लेकिन यहाँ सरकार बदलने के साथ ही बिशिम्बायेव के ऊपर कार्रवाई फिर चालू हो गई है। नुकेनोवा के परिजनों ने बताया है कि बिशिम्बायेव लगातार अपनी पत्नी नुकेनोवा को मारते पीटते थे। नुकेनोवा के शरीर पर अक्सर मारने पीटने और यहाँ तक कि रस्सी से गला कसे जाने के भी निशान दिखते थे। अभी इस मामले में फैसला नहीं आया है लेकिन कजाक महिलाओं का देश भर में बिशिम्बायेव के विरुद्ध गुस्सा निकल रहा है।

लोकसभा चुनाव के लिए जेल से बाहर आ सकते हैं अरविंद केजरीवाल, सुप्रीम कोर्ट ने कहा- अंतरिम जमानत पर करेंगे विचार: 7 मई को सुनवाई

दिल्ली के मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल की जमानत याचिका पर सुप्रीम कोर्ट सुनवाई को तैयार हो गया है। सुप्रीम कोर्ट ने कहा है कि लोकसभा चुनाव 2024 को देखते हुए अरविंद केजरीवाल की जमानत याचिका पर सुनवाई कर सकते हैं। जमानत दे दी जाए, इस बात की कोई गारंटी नहीं है। इसके लिए हम कुछ नहीं कह रहे हैं। सुप्रीम कोर्ट ने ईडी को भी सूचना दे दी है कि 7 मई को इस मामले में वो सुनवाई करेगी। सुप्रीम कोर्ट ने कहा है कि अगर ये मामला लंबा चलता है, तो अरविंद केजरीवाल को लोकसभा चुनाव के लिए अंतरिम जमानत देने पर विचार किया जा सकता है।

मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक, अरविंद केजरीवाल ने सुप्रीम कोर्ट में अपनी गिरफ्तारी को चुनौती दी है। इसके बाद सुप्रीम कोर्ट ने अरविंद केजरीवाल की अंतरिम जमानत पर दोनों पक्षों को बहस के लिए तैयार हो कर आने के लिए कहा है। मंगलवार (7 अप्रैल 2024) को सुप्रीम कोर्ट ने बहस के लिए समय दिया है। कोर्ट ने कहा कि ये मामला लंबा चलेगा, लिहाजा आम चुनाव के मद्देनजर हम केजरीवाल को अंतरिम जमानत पर चुनाव प्रचार के लिए छोड़े जाने पर विचार करेंगे। उनको अंतरिम जमानत दी जाए या नहीं, इस पर बात करेंगे। साथ ही कहा कि अतिरिक्त सॉलिसिटर जनरल एसवी राजू अपने मुवक्किल ईडी से जमानत की शर्तों पर निर्देश लेकर आएँ। सुप्रीम कोर्ट ने ईडी से पूछा कि क्या केजरीवाल अभी भी फाइल पर हस्ताक्षर कर सकते है? इस पर सुप्रीम कोर्ट ने ईडी को जवाब देने के लिए कहा है।

मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक, जस्टिस संजीव खन्ना और जस्टिस दीपांकर दत्ता की बेंच ने ईडी की ओर से पेश अतिरिक्त सॉलिसिटर जनरल एसवी राजू से कहा कि गिरफ्तारी के खिलाफ केजरीवाल की याचिका पर सुनवाई में समय लगने की संभावना है और इसलिए अदालत उन्हें अंतरिम जमानत देने पर ईडी की दलीलें सुनने पर विचार कर रही है। इस पर एसवी राजू ने कहा कि वह केजरीवाल को अंतरिम जमानत देने का विरोध करेंगे। बता दें कि बेंच केजरीवाल की याचिका पर सुनवाई कर रही है, जिसमें ईडी द्वारा उनकी गिरफ्तारी को चुनौती दी गई है।

सुप्रीम कोर्ट ने इस मामले की सुनवाई के दौरान ईडी की ओर से पेश हुए अतिरिक्त सॉलिसिटर जनरल एसवी राजू ने दलीलें रखी, लेकिन कोर्ट ने राजू को टोका और कई सवाल पूछे। कोर्ट ने पूछा कि आपके पास मेटेरियल क्या हैं जिनसे ये बताया जा सके कि गिरफ्तारी अनिवार्य है। जस्टिस संजीव खन्ना ने केजरीवाल के वकील अभिषेक मनु सिंघवी से पूछा कि दिल्ली में चुनाव कब होने हैं? इस पर एडवोकेट सिंघवी ने कहा कि 25 मई को दिल्ली में चुनाव होने हैं। चुनाव के 48 घंटे पहले प्रचार बंद हो जाएगा।

जिस टैक्सी में बैठकर स्कूल पढ़ने जाती थी 12 साल की दलित बच्ची, उसे चलाने वाला हाजी मुहम्मद करता था गंदी हरकत: राजस्थान का मामला, FIR दर्ज

राजस्थान के पाली से के 12 वर्षीय दलित बच्ची के यौन उत्पीड़न का मामला सामने आया है। बच्ची से उसके टैक्सी चालक हाजी मुहम्मद ने लगातार एक महीने तक छेड़छाड़ और गन्दी हरकतें की। बच्ची ने तंग आकर अपने परिजनों को यह बात बताई तो इस पर पुलिस कार्रवाई हुई।

जानकारी के अनुसार, पाली में स्कूल जाने वाली एक 12 वर्षीय दलित बालिका के लिए उसके परिजनों ने एक टैक्सी किराए पर रखी हुई थी। यह टैक्सी 35 साल का हाजी मुहम्मद चलाता था। बच्ची इस टैक्सी में अकेले आती जाती थी। इसी से हाजी मुहम्मद की नीयत खराब हो गई।

उसने बीते एक माह से अकेले में पाकर बच्ची को छेड़ना चालू कर दिया। उसके साथ वह गन्दी हरकतें करने लगा। बच्ची का वह रोक ही यौन उत्पीड़न करता था। बच्ची ने बताया कि हाजी मुहम्मद उसे गाड़ी में आगे बैठने को कहता था और फिर शरीर पर छूता था। वह कमर के नीचे हाथ लगाता था।

बच्ची ने बताया कि हाजी मुहम्मद अपने शरीर पर भी कहीं कहीं हाथ रखने को कहता था। वह बच्ची से कहता था कि बड़ी होकर मेरे पास आना। वह उसे को घुमाने का भी लालच देता था। हाजी मुहम्मद ने बच्ची को धमकी दी थी कि यदि वह कोई बात अपने माता-पिता को बताएगी तो उन्हें वह उनकी हत्या कर देगा। उसने लगातार छेड़खानी से परेशान होकर यह बात अपने परिजनों को एक माह के बाद बताई जिन्होंने इस पर एक्शन लिया और स्कूल प्रबन्धन के साथ ही पुलिस के पास पहुँचे।

परिजनों ने हाजी मुहम्मद के विरुद्ध पुलिस के शिकायत दर्ज करवाई। हाजी मुहम्मद के विरुद्ध POCSO और SC/ST समेत कई गंभीर धाराओं में मुकदमा दर्ज किया गया है। बच्ची का भी मेडिकल करवाया गया है। हाजी मुहम्मद यह मामला दर्ज होने के बाद से फरार है और पुलिस उसकी तलाश में छापेमारी कर रही है।

तन पर भगवा, हाथों में रुद्राक्ष, हजारों की भीड़ में खड़ा एक साधु… EVM कैसे होता है हैक, PM मोदी ने बंगाल में फिर से खुलेआम दिखाया

लोकसभा चुनाव 2024 के रण में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने पश्चिम बंगाल के बर्धमान में जनसभा को संबोधित किया। बर्धमान-दुर्गापुर लोकसभा क्षेत्र में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने ममता बनर्जी और टीएमसी पर जोरदार हमला बोला। इस दौरान प्रधानमंत्री की नजर रैली में आए एक साधु पर पड़ी, जो हाथ में रुद्राक्ष की माला पकड़े हुए थे। पीएम मोदी ने उन्हें न सिर्फ मंच से पुकारा, बल्कि उन्हें आराम करने के लिए भी कहा। पीएम मोदी ने पूछा कि ‘आप मेरे लिए प्रसाद लेकर आए हैं’, इसके जवाब में साधु ने हाथ उठाकर अभिवादन किया।

‘आपको प्रणाम करता हूँ’

पीएम मोदी ने साधु के सामने खड़े होकर कैमरामैन से कहा कि ‘महात्मा जी, वह प्रसाद लेकर मुझे दे दीजिए।’ पीएम मोदी ने आगे साधु से कहा, “आप परेशान मत होइए, आपका प्रसाद मुझे मिल जाएगा।” इसके आगे प्रधानमंत्री ने साधु से कहा कि आप काफी देर से हाथ ऊपर कर खड़े हैं, ऐसे में आप थक जाएँगे। इस उम्र में आप इतना आशीर्वाद दे रहे हैं। मैं यहाँ से आपको प्रणाम करता हूँ।

पीएम मोदी हाथ जोड़कर साधु का अभिवादन करते हैं, जिस पर वह भी हाथ जोड़कर उनको प्रणाम करते हैं। इस पूरे वाकए का वीडियो भी सोशल मीडिया पर वायरल हो रहा है।

हालाँकि ये पहला मौका नहीं है, जब प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने मंच से इस तरह से लोगों को पुकारा हो। पीएम मोदी की 3 मार्च 2024 को पश्चिम बंगाल के आरामबाग में जनसभा को संबोधित करते हुए एक बच्ची पर नजर पड़ी थी। बच्ची के हाथ में भगवान जगन्नाथ की पेंटिग थी। ये पेंटिग हाथ से बनाई हुई थी और वह बच्ची बार-बार अपनी पेंटिग पीएम मोदी की ओर दिखाने की कोशिश कर रही थी।

जनसभा में खड़ी इस बच्ची के पेंटिग पर पीएम मोदी की नजर पड़ी तो उन्होंने प्रोटोकॉल से हटकर तुरंत सुरक्षा अधिकारी को वो पेंटिग लाने का निर्देश दिया। बता दें कि पीएम मोदी ने बच्ची की पेंटिग लेने के लिए थोड़ी देर के लिए अपनी जनसभा को बीच में ही रोक दिया। भगवान जगन्नाथ की पेंटिग जैसे ही पीएम मोदी के पास पहुंची उन्होंने उसे तुरंत उस बच्ची की ओर दिखाकर धन्यवाद किया।

बता दें कि पीएम मोदी अपनी रैलियों में आए लोगों का भी ध्यान रखते देखे गए हैं। एक ऐसा ही वाकया बेंगलुरु में हुआ था, जहाँ एक बच्ची के हाथ में पेंटिंग थी। पीएम मोदी ने पेंटिंग के पीछे बच्ची का पता भी लिखवाया था और उन्होंने बच्ची को चिट्ठी भी लिखी थी। यही नहीं, काँकेर में भी पीएम मोदी ने एक बच्ची को चिट्ठी लिखी थी।

दरबारियों सोनिया जी के बेटे पर कुछ तो रहम करो, थू-थू करवाकर बता रहे हो ‘मास्टरस्ट्रोक’: रायबरेली की जीत से भी नहीं धुलेगा ये दाग

कॉन्ग्रेस नेता राहुल गाँधी ने उत्तर प्रदेश की रायबरेली लोकसभा सीट से नामांकन दाखिल कर दिया है। उनके रायबरेली लड़ने का निर्णय शुक्रवार (3 मई, 2024) को कॉन्ग्रेस ने सार्वजनिक किया। राहुल ने इसी के साथ अपनी पुरानी सीट अमेठी को छोड़ दिया जहाँ से वह 2019 में स्मृति ईरानी के हाथों हार गए थे। उनके इस निर्णय पर कहा जा रहा है कि राहुल गाँधी हार से डरे हुए हैं तो वहीं उनकी पार्टी के नेता इसे मास्टरस्ट्रोक बताने में जुटे हैं।

राहुल गाँधी के रायबरेली से पर्चा भरते समय माँ सोनिया गाँधी, बहन प्रियंका गाँधी और कॉन्ग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खरगे मौजूद रहे। राहुल गाँधी यहाँ भाजपा के दिनेश प्रताप सिंह से मुकाबला करेंगे। अक्सर कॉन्ग्रेस समर्थक मीडिया और विपक्षी दल पीएम मोदी के बराबर में राहुल गाँधी को खड़ा करते हैं। वह राहुल गाँधी को पीएम मोदी के विकल्प के तौर पर पेश करते हैं। जबकि असल सच्चाई इस बात से कोसों दूर है, यह उनके अमेठी छोड़ने के निर्णय ने और पुख्ता कर दी है।

दरअसल, कॉन्ग्रेस और उसके समर्थकों को यह बात समझनी होगी कि राहुल गाँधी को पीएम मोदी के समकक्ष खड़ा करने से ही वह उनके बराबर राजनीतिक कौशल और परिपक्वता नहीं पा जाएँगे। इसके लिए उन्हें बड़ा नेता बनना और बड़े नेता वाला सन्देश देना होगा। कॉन्ग्रेस जैसी पुरानी और बड़ी पार्टी के दो शीर्ष नेताओं में से एक होने के नाते राहुल गाँधी को वायनाड और रायबरेली जैसी तुलनात्मक रूप से सेफ सीट चुनने के बजाय अमेठी का किला ही बचाना चाहिए था। इससे कार्यकर्ताओं में सन्देश जाता कि पार्टी चुनाव से पहले ही हार नहीं मान रही।

राहुल ने ऐसा नहीं किया। राहुल के इस कृत्य से कॉन्ग्रेस के कार्यकर्ताओं का मनोबल टूटा है। अमेठी में कॉन्ग्रेस पर विश्वास करने वाले कार्यकर्ता भी अब सोचने को मजबूर हैं कि आखिर एक हार के बाद ही राहुल गाँधी इतना भयभीत हो गए कि उन्होंने अमेठी से मुंह मोड़ लिया। इसका असर मात्र अमेठी ही नहीं बल्कि बाकी जगह के कॉन्ग्रेस के कार्यकर्ताओं पर भी पड़ा है। उनके मन में भी यह बात आई होगी कि उनका नेता स्वयं ही बड़ी लड़ाई करने से बच रहा है।

राहुल गाँधी को कॉन्ग्रेसी उन नरेन्द्र मोदी के विरुद्ध खड़ा करना चाहते हैं जो कि दो बार पानी पार्टी को केंद्र की सत्ता और साथ ही अनेकों राज्यों में सता में ला चुके हैं। पीएम मोदी के पार्टी के शीर्ष पर होने के दौरान ही यह एक ऐसी जिताऊ मशीन बन गई है जो कि 24×7 संगठन मजबूत करने में जुटी रहती है।

दूसरी तरफ राहुल गाँधी हैं जो कि अपनी पार्टी को केंद्र की सत्ता में लाना दूर, उसके लोकसभा में सीटो के आँकड़े को 60 के पार नहीं ले जा पाए हैं। राज्यों में हार का तो उनके नाम रिकॉर्ड है ही। वह मोदी सरकार की कैबिनेट में एक महिला मंत्री से चुनाव नहीं लड़ पा रहे हैं और सीट छोड़ कर सेफ सीट की तलाश में दक्षिण से लकर उत्तर भारत की यात्रा कर रहे हैं।

अमेठी से राहुल गाँधी चुनाव लड़ कर यदि हार भी जाते तो कम से कम यह कहा जाता कि उन्होंने लड़ाई लड़ने में कसर नहीं छोड़ी। लेकिन खुद लड़ाई लड़ना छोडिए, राहुल और कॉन्ग्रेस अमेठी से किशोरी लाल शर्मा को प्रत्याशी बनाया है। इसे राजनीतिक विश्लेषक चुनावी केकवॉक की तरह देख रहे हैं। स्मृति ईरानी की जीत की संभावनाएँ अब और पुख्ता हो गई हैं। ऐसे में राहुल गाँधी कार्यकर्ताओं को विश्वास देने और मनोबल बढ़ाने में तो विफल ही रहे हैं, वह लड़ने लायक एक उम्मीदवार भी नहीं दे पाए।

राहुल गाँधी ने जो भी किया हो, उनको बचाने के लिए हमेशा एक फ़ौज खड़ी रहती है। कॉन्ग्रेस के प्रवक्ता-नेता लगातार यह साबित करने में लगे रहते हैं कि राहुल गाँधी एक सफल राजनेता भले ही पार्टी इतिहास अपने इतिहास के सबसे निचले स्तर पर आ गई हो। राहुल गाँधी के अमेठी छोड़ने को फैसले को भी अब दरबारी एक मास्टरस्ट्रोक साबित करने में जुट गए हैं। इसके लिए कॉन्ग्रेस के मीडिया प्रमुख जयराम रमेश और प्रवक्ता सुप्रिया श्रीनेत ने बीड़ा उठाया है। राहुल गाँधी को शतरंज का बड़ा खिलाड़ी बताया जा रहा है।

सुप्रिया श्रीनेत ने मास्टरस्ट्रोक का यह आधार अपने ट्वीट में बताया है। उन्होंने लिखा है-

• रायबरेली सिर्फ़ सोनिया जी की नहीं, ख़ुद इंदिरा गांधी जी की सीट रही है. यह विरासत नहीं ज़िम्मेदारी है, कर्तव्य है।

• रही बात गांधी परिवार के गढ़ की, तो अमेठी-रायबरेली ही नहीं, उत्तर से दक्षिण तक पूरा देश गांधी परिवार का गढ़ है। राहुल गांधी तो तीन बार उत्तरप्रदेश से और एक बार केरल से सांसद बन गये, लेकिन मोदी जी विंध्याचल से नीचे जाकर चुनाव लड़ने की हिम्मत क्यों नहीं जुटा पाये?

• एक बात और साफ़ है कि कांग्रेस परिवार लाखों कार्यकर्ताओं की अपेक्षाओं उनकी आकांक्षाओं का परिवार है। कांग्रेस का एक साधारण कार्यकर्ता ही बड़े बड़ों पर भारी है। कल एक मूर्धन्य पत्रकार अमेठी के किसी कार्यकर्ता से व्यंग में कह रही थी कि “आप लोगों का नंबर कब आएगा टिकट मिलने का”? लीजिए, आ गया!

• प्रियंका जी धुआँधार प्रचार कर रही हैं और अकेली नरेंद्र मोदी पर भारी पड़ रही हैं। इसको देखते हुए ज़रूरी था कि उन्हें सिर्फ़ अपने चुनाव तक सीमित ना रखा जाए। प्रियंका जी तो कोई भी उपचुनाव लड़कर सदन पहुँच जायेंगी।

• आज स्मृति ईरानी की सिर्फ़ यही पहचान है कि वो राहुल गांधी के ख़िलाफ़ अमेठी से चुनाव लड़ती हैं। अब स्मृति ईरानी से वो शोहरत भी छिन गई।

• अब बजाय व्यर्थ की बयानबाज़ी के, स्मृति ईरानी स्थानीय विकास के बारे में जवाब दें, जो बंद किए अस्पताल, स्टील प्लांट और IIIT हैं – उसपर जवाब देना होगा। • शतरंज की कुछ चालें बाक़ी हैं, थोड़ा इंतज़ार कीजिए।

हालाँकि, कॉन्ग्रेस के प्रवक्ता अपनी नेतागीरी की तकाजे में कितना भी मास्टरस्ट्रोक बताने की कोशिश करें असल में राहुल के इस कदम से यह सिद्ध हुआ है कि वह स्मृति ईरानी के खिलाफ नहीं लड़ सकते। इससे पार्टी का चुनाव के पहले ही हथियार डालने वाला रूप भी सामने आ गया है। राहुल गाँधी कभी डरो मत के नारे दिया करते थे, वह खुद ही अपनी परम्परागत सीट से चुनाव लड़ने से डर गए हैं। अब इसे चाहे मास्टरस्ट्रोक बताया जाए चाहे शतरंज की चाल, माना इसे राजनीतिक हार ही जाएगा।

और समस्या सिर्फ यहीं नहीं खत्म होती कि राहुल गाँधी अमेठी छोड़ रायबरेली लड़ने पहुँचे हैं। असल में समस्या रायबरेली से ही शुरू होती है। रायबरेली कॉन्ग्रेस का गढ़ माना जाता रहा है। 2019 के चुनाव में सोनिया गाँधी को यहाँ दिनेश प्रताप सिंह के विरुद्ध लगभग 2 लाख वोटों से जीत मिली थी।

थोड़ी देर के लिए मान लिया जाए कि बिल्ली के भाग से छींका फूटा, राहुल गाँधी किसी तरह रायबरेली से जीतने में कामयाब भी रहते हैं पर इससे वह दाग नहीं धुलेगा जो बताता है कि उनमें अमेठी के मैदान में अब स्मृति ईरानी का मुकाबला करने की हिम्मत नहीं है।

लिहाजा उनके इस फैसले ने पहले से ही हताश निराश, देश भर के कॉन्ग्रेस कार्यकर्ताओं के मनोबल को और दुर्बल काम किया है। रायबरेली और वायनाड, दोनों ही सीटों पर जीत हासिल करके भी इस मनोबल को गर्त से बाहर नहीं निकाला जा सकता। बल्कि दोनों सीटों पर जीत कॉन्ग्रेस के लिए आगे कुआँ-पीछे खाई वाली स्थिति लेकर आएगा।

यदि वह वायनाड सीट छोड़ते हैं तो केरल में उनकी पार्टी को नुकसान होगा। कॉन्ग्रेस केरल में वैसे ही विपक्ष में है और पिछले विधानसभा चुनाव में सत्ता का ट्रेंड तोड़ने में विफल रही है। राहुल गाँधी यदि वायनाड छोड़ते हैं तो उन पर केरल में मुस्लिम वोटरों को भी अनदेखा करने का आरोप लगेगा। वायनाड में मुस्लिम वोटरों का उनकी जीत में बड़ा योगदान रहता है।

इसी के साथ वायनाड सीट छोड़ने पर यह सन्देश जाएगा कि राहुल गाँधी इस सीट को मात्र यूज एंड थ्रो के लिए उपयोग किया है। दूसरी तरफ रायबरेली की सीट छोड़ने पर और बड़ी समस्या का सामना उन्हें करना होगा। यदि वह रायबरेली सीट छोड़ते हैं तो एक तो उन पर अमेठी के बाद रायबरेली के वोटरों और कॉन्ग्रेस कार्यकर्ताओं को धोखा देने का आरोप लगेगा और साथ ही पार्टी के साथ से यह सीट भी जा सकती है। इसके अलावा जो लोग अभी रायबरेली में उनके लड़ने को लेकर कर्तव्य निभाना बता रहे हैं वह तब इसका भी जवाब नहीं दे पाएँगे।

हेमंत सोरेन की याचिका हाई कोर्ट में खारिज, ED की गिरफ्तारी को बताया था गलत: चाचा के श्राद्ध में शामिल होने के लिए 1 दिन की मिली राहत

झारखंड हाई कोर्ट में पूर्व मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन को तगड़ा झटका लगा है। उन्होंने ईडी द्वारा अपनी गिरफ्तारी को गलत बताते हुए याचिका दाखिल की थी, लेकिन उसे हाई कोर्ट ने खारिज कर दिया है। झारखंड हाई कोर्ट ने हेमंत सोरेन की गिरफ्तारी को सही बताया है। इस मामले में हेमंत सोरेन ने सुप्रीम कोर्ट में भी याचिका दाखिल की थी, लेकिन सुप्रीम कोर्ट ने उन्हें हाई कोर्ट का रुख करने का निर्देश दिया था।

लाइव लॉ की रिपोर्ट के मुताबिक, झारखंड हाई कोर्ट के कार्यवाहक चीफ जस्टिस श्री चंद्रशेखर और जस्टिस नवनीत कुमार की बेंच ने ये फैसला सुनाया। झारकंड हाई कोर्ट ने ये फैसला सुप्रीम कोर्ट में सुनवाई शुरू से पहले दिया है, जिसमें 6 मई को सुनवाई होनी थी। हेमंत सोरेन ने सुप्रीम कोर्ट का रुख ये कहते हुए किया था कि हाई कोर्ट इस मामले में फैसला सुनाने में देरी कर रही है। दरअसल, झारखंड हाई कोर्ट इस मामले में सुनवाई 28 फरवरी 2024 को ही पूरी कर ली थी और अपना फैसला सुरक्षित रख लिया था।

वहीं, हेमंत सोरेन को 31 जनवरी को ईडी ने गिरफ्तार कर लिया था। वो तभी से ईडी की हिरासत में हैं। 2 फरवरी को सुप्रीम कोर्ट ने ईडी की गिरफ्तारी को चुनौती दी थी। लेकिन सुप्रीम कोर्ट ने कहा था कि वो पहले हाई कोर्ट में जाएँ।

चाचा के श्राद्ध में शामिल होने के लिए 1 दिन की छूट

इस बीच, हाई कोर्ट ने हेमंत सोरेन को एक दिन की अंतरिम जमानत दी है, ताकि वो अपने चाचा राजा राम सोरेन के श्राद्ध समारोह में शामिल हो सके। राजा राम सोरेन का निधन पिछले महीने हुआ था। जस्टिस आर मुखोपाध्याय की बेंट ने सोरेन को न्यायिक हिरासत में रहते हुए श्राद्ध कर्मी में शामिल होने की अनुमति दी है, साथ ही निर्देश भी दिया है कि उन्हें मीडिया से बातचीत करने की अनुमति नहीं होगी।

इस मामले में उन्होंने पीएमएलए कोर्ट में 27 अप्रैल को अंतरिम जमानत की याचिका दाखिल की थी, जो कोर्ट ने खारिज कर दी थी। सोरेन ने याचिका में अपने शिबू सोरेन के भाई यानी अपने चाचा के अंतिम संस्कार में शामिल होने की अनुमति माँगी थी।

गौरतलब है कि राँची में जमीन घोटाले और मनी लॉन्ड्रिंग के मामले में हेमंत सोरेन के खिलाफ जाँच चल रही है। इस मामले में 8.5 करोड़ की संपत्ति अपराधिक स्रोतों से जमा किए गए पैसों से खरीदी गई, जिसपर सोरेन ने अवैध तरीके से कब्जा कर लिया। इस मामले में जमीन के मूल रिकॉर्ड को छिपाने और इस आपराधिक रिकॉर्ड को छिपाने में भानु प्रताप व अन्य लोगों के साथ मिलीभगत की।

बता दें कि पिछले साल सितंबर में झारखंड मुक्ति मोर्चा के अध्यक्ष ने मनी लॉन्ड्रिंग के केस में ईडी के समन को चुनौती देते हुए सुप्रीम कोर्ट का दरवाजा खटखटाया था। हालाँकि सुप्रीम कोर्ट ने अनुच्छेद 226 के तहत इस मामले में सुनवाई नहीं की और कहा कि इसकी अपील अन्य केसों में की जा सकती है। इसके बाद सोरेन ने अपनी याचिका वापस ले ली ती।

जिसको लिया गोद, उसके साथ ही बिस्तर में नग्न पकड़ी गई महिला नेता: पति ने ही किया भंडाफोड़, Video वायरल होते ही पार्टी ने निकाला

थाईलैंड में एक नेता के पति ने उसे एक बौद्ध भिक्षु के साथ बेड में रंगरलियाँ मनाते हुए पकड़ लिया। यह बौद्ध भिक्षु महिला का गोद लिया हुआ बेटा है। नेता के पति ने अपनी पत्नी के इस कारनामे की वीडियो भी बना ली। यह अब सोशल मीडिया पर वायरल है। यह मामला पूरी दुनिया में चर्चा में है।

जानकारी के अनुसार, थाईलैंड की 45 वर्षीय नेता प्रापापोर्न चोइवाडकोह (Prapaporn Choeiwadkoh) को उनके पति ‘टी’ बेड रूम में एक 24 वर्षीय बौद्ध भिक्षु के साथ पकड़ा। इस बौद्ध भिक्षु को के वर्ष पहले ही दम्पत्ति ने गोद लिया था। महिला ने अपने पति से कहा था कि उसे बौद्ध भिक्षु की हालत पर तरस आता है, ऐसे में उसे गोद लिया जाए।

इसके बाद महिला घंटों कमरा बंद करके भिक्षु के साथ बिताने लगी, पति के पूछने पर वह इसे प्रार्थना का नाम दे देती थी। इसके बाद उसके पति ने इस पूरे मामले का खुलासा करने की सोची। वह लगभग साढ़े पाँच घंटे गाड़ी चला कर घर पहुँचा और वीडियो बनाते हुए बेडरूम में घुसा।

यहाँ नेता प्रापापोर्न बौद्ध भिक्षु के साथ एकदम नग्न सोई हुई थी। पति के पहुँचने पर यहाँ बवाल हो गया। उसने महिला पर चिल्लाना चालू कर दिया। महिला भी उठ कर भागने लगी। इस पूरी घटना का वीडियो सोशल मीडिया पर वायरल हो गया।

बताया गया कि महिला का पति एक कारोबारी है और काफी अमीर है। वहीं महिला प्रापापोर्न को उसके समर्थक मैडम प्ले के नाम से जानते हैं। उसने 2023 में थाई डेमोक्रेट पार्टी की सदस्यता ली थी और सुखोताई राज्य में बड़े पद पर थी। उसके प्रशंसकों की लम्बी लिस्ट है।

उसके अपने गोद लिए हुए बेटे के साथ ही संबंध बनाने के इस मामले के सामने आने के बाद उसे पार्टी से निलंबित कर दिया गया है। महिला के पति ने बताया कि उसकी पत्नी हमेशा से धार्मिक रही है और मंदिर जाती है लेकिन बीते कुछ समय से वह बौद्ध भिक्षुओं के साथ ज्यादा समय गुजार रही थी।

महिला के पति ने बताया कि उसने महिला को कई महंगे गिफ्ट दिए है। पति ने आरोप लगाया है कि बौद्ध भिक्षु ने उनकी पत्नी को भ्रमित किया है। वहीं महिला ने बताया है कि बेड में नग्न होकर वह और भिक्षु केवल बातचीत कर रहे थे।

मैट्रिमोनियल साइट को बनाया हथियार, एक-दो नहीं 20+ महिलाओं को इमरान अली खान ने बनाया शिकार: मुंबई पुलिस ने किया गिरफ्तार

मुंबई की पाइधोनी पुलिस ने मैट्रिमोनियल वेबसाइट के जरिए महिलाओं को धोखा देने वाले जालसाज इमरान अली खान को हैदराबाद से गिरफ्तार किया है। उसने पाइधोनी इलाके की एक 42 वर्षीय महिला से 22 लाख रुपये की ठगी की। इमरान खान के खिलाफ धोखाधड़ी का केस दर्ज हुआ है। माना जा रहा है कि उसने देश भर की 20 से अधिक महिलाओं को निशाना बनाया है, जिनमें मुंबई के परभरी, धुले और सोलापुर की 10 से 12 महिलाएँ शामिल हैं।

मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक, शिकायतकर्ता 42 वर्षीय महिला है जो टीचर के तौर पर काम करती है। महिला ने साल 2023 में एक मैट्रिमोनियल वेबसाइट पर अपनी प्रोफाइल बनाई थी, जहाँ से कुछ प्रोफाइल के बारे में सुझाव मिला था। इसमें से एक हैदराबाद का इमरान अली खान भी शामिल था। महिला ने जब इमरान अली खान से संपर्क किया, तो उसने बताया कि वो कंस्ट्रक्शन का काम करता है। उसके पाता-पिता की मौत हो चुकी है और हैदराबाद में अपनी चाची के साथ रहता है। उसके दोनों भाई कनाडा में पढ़ रहे हैं। दोनों ने एक-दूसरे को पसंद किया। महिला के पास अचानक इमरान ने 10 मई 2023 को फोन किया और बताया कि उसने दोनों के रिश्ते के बारे में अपने दोस्तों को बताया है और वो उसके साथ पार्टी करना चाहते हैं। इसके लिए इमरान ने महिला से 1000 रुपए ऑनलाइन ही मँगा लिए।

एक पुलिस अधिकारी ने बताया कि महिला ने कुछ दिन बाद इमरान को मुंबई बुलाया, ताकि उसे अपनी माँ से मिलवा सके। मुंबई आने के लिए भी इमरान ने महिला ने 10 हजार रुपए लिए और कहा कि उसके पैसे फँस गए हैं। कुछ दिन वो मुंबई में रहा और फिर उसने भायखला में प्लॉट खरीदने के नाम पर महिला ने 15 लाख रुपए ले लिए। इसके बाद इमरान ने महिला से बताया कि जो जमीन उसने खरीदी वो वन विभाग की थी, इसके लिए उसे पुलिस ने गिरफ्तार कर लिया है। उसने महिला से खुद को छुड़ाने केलिए फिर से पैसे लिए और कुल मिलाकर 21.73 लाख रुपए ऐंठ लिए। इमरान ने वो पैसे महिला को नहीं लौटाए, जिसके बाद महिला ने पुलिस ने संपर्क किया और शिकायत दर्ज कराई।

पुलिस ने एक्शन लेते हए इमरान अली खान को हैदराबाद से गिरफ्तार कर लिया। जाँच में पता चला कि इमरान पर कई मामले पहले से दर्ज हैं। उस पर हत्या का भी इल्जाम है। वो पहले से शादीशुदा है और उसकी बीवी ने उसके खिलाफ घरेलू हिंसा का केस दर्ज कराया गया है। यही नहीं, उसने मुंबई, सोलापुर, धुले की 10-12 महिलाओं को भी इसी तरह से ठगा है। वो इतना शातिर है कि वो सिर्फ महाराष्ट्र ही नहीं, बल्कि कोलकाता, लखनऊ, दिल्ली और देहरादून की भी कई महिलाओं के साथ ठगी कर चुका है। पुलिस उसके नंबर की जाँच कर ये पता लगाने की कोशिश कर रही है कि उसने इस तरह से कितनी महिलाओं को अपना शिकार बनाया।