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राहुल गाँधी की इंटरनेशनल बेइज्जती: जिस Garry Kasparov को बताया अपना फेवरिट चेस प्लेयर, उन्हीं ने कहा – पहले रायबरेली जीत के दिखाओ

नेता लोग के बीच में सबसे धाँसू चेस कौन खेलता है? राहुल गाँधी। अपने आप को चेस का सरताज (Rahul Gandhi best chess player among politicians) खुद राहुल गाँधी ने ही बताया है। वैसे उनका फेवरिट चेस प्लेयर है गैरी कास्परोव। यह भी उन्होंने खुद ही बताया है। जिस दिन उन्होंने यह सब कुछ बताया, उसी दिन गैरी कास्परोव (Garry Kasparov) ने उनको पहले रायबरेली से जीतने और तब जाकर टॉप के लोगों को चैलेंज करने की सलाह दे डाली है – एकदम इंटरनेशनल बेइज्जती टाइप फील करवा दिया।

राहुल गाँधी को भारत के लोग सिरियसली नहीं लेते हैं। यह बात सबको पता है, कॉन्ग्रेसियों तक को! लेकिन सबसे महान चेस खिलाड़ियों में से एक, रूस के गैरी कास्परोव, जो अब अमेरिका में रहते हैं, उन्हें भी राहुल गाँधी एक मजाक से ज्यादा कुछ नहीं लगते, यह एक ट्वीट से पता चल गया। लेकिन यह हुआ कैसे?

हुआ यह कि राजनीतिक विश्लेषक और स्तंभकार संदीप घोष ने एक ट्वीट किया। इसमें उन्होंने गैरी कास्परोव और विश्वनाथन आनंद को टैग किया और तंज करते हुए लिखा – “मुझे बहुत राहत महसूस हो रही है कि गैरी कास्परोव और विश्वनाथन आनंद जल्दी रिटायर हो गए। इस कारण से इन दोनों को हमारे समय के सबसे बड़े शतरंज खिलाड़ी (राहुल गाँधी की ओर इशारा) का सामना नहीं करना पड़ रहा।”   

इस ट्वीट के रिप्लाई में लाफिंग इमोजी बनाते हुए गैरी कास्परोव ने जवाब दिया, “चेस की परंपरा के अनुसार शीर्ष (राजा) को चुनौती देने से पहले आपको रायबरेली सीट जीतना चाहिए!”

लोकसभा चुनाव में राहुल गाँधी की रायबरेली सीट पर जीत को लेकर गैरी कास्परोव (Garry Kasparov) का किया गया यह तंज देखते ही देखते वायरल हो गया। सोशल मीडिया यूजर्स ने इसके बाद कॉन्ग्रेस के कथित युवराज को लेकर तरह-तरह के तंज कसे, मीम शेयर किए। 

बॉलीवुड कलाकार रणवीर शौरी ने राहुल गाँधी का एक वीडियो शेयर किया। उन्होंने गैरी कास्परोव को टैग करते हुए लिखा कि बाकी सब तो सही है… लेकिन क्या आप राहुल गाँधी के इस मूव को बचा पाओगे?

इंडिया टुडे के पत्रकार गौरव सावंत ने लिखा कि भारत के लोकसभा चुनाव को अब विदेशी भी सीरियसली लेते हैं, दिलचस्पी रखते हैं। भारतीय राजनीति में क्या चल रहा है, किसकी कितनी राजनीतिक हैसियत है, यह सबको पता है। 

अपना ट्वीट वायरल होने के बाद हालाँकि गैरी कास्परोव ने लिखा – “मुझे उम्मीद है कि मेरा मजाक भारतीय राजनीति में हस्तक्षेप नहीं समझा जाएगा, ना ही यह मेरी विशेषज्ञता समझी जाए! लेकिन ‘1000 आँखों वाला राक्षस, जो सब कुछ देख सकता है (all-seeing monster with 1000 eyes,)’ जो नाम मुझे कभी दिया गया था, उसके अनुरुप मैं एक नेता को अपने प्रिय खेल में हाथ आजमाते हुए देखने से नहीं चूक सकता!”

न राहुल गाँधी वीडियो में खुद को सबसे बड़ा चेस खिलाड़ी बताते, न उनकी इंटरनेशनल बेइज्जती होती!

‘हम आग से खेलते हैं… जला देंगे सारा जंगल’: उत्तराखंड के वनों में लगी भीषण आग के बीच वीडियो वायरल; सलीम-फिरोज-नुरुल सहित 5 गिरफ्तार

उत्तराखंड के जंगलों में लगी भयावह हो चुकी है और अब वह लोगों घरों-आंगन तक पहुँच गई है। ये आग इतनी भयावह हो गई है कि इसे अंतरिक्ष से भी देखा जा सकता है। आग के कारण लगभग एक हजार हेक्टेयर से अधिक जंगल जलकर खाक हो गए हैं। वहीं, कुछ लोगों के मौत की भी खबर है। इस बीच एक वीडियो सामने आया है, जिसमें दो लड़के जंगल में आग लगाने की बात कर रहे हैं।

सामने आए वीडियो में दो लड़के हैं, जबकि एक वीडियो बना रहा है। इनमें से एक लड़का कहता है, “देखिए फाइनली गाइज, हम लोग आग लगाने का काम कर रहे हैं। आग लगाना और आग से खेलना ही हमारा काम है। हम जब-तब आग से खेलते रहते हैं। आज हम लोग यही काम करने यहाँ आए हैं। हम यहाँ पहाड़ को जलाकर भस्म कर देंगे। नीचे गिरे पत्तों को भी जलाकर राख कर देंगे।”

वीडियो में लड़के कह रहे हैं, “हम हमेशा आग से खेलते हैं। ये हमारे सुखलाल अंकल हैं, जो हमेशा आग लगाते रहते हैं। आग से खेलने वालों से कभी टक्कर नहीं लिया जाता और बिहारियों को कभी चैलेंज नहीं किया जाता।” इन लड़कों का दावा है कि वे बिहार के रहने वाले हैं। ये वीडियो कब के हैं, इसके बारे में अभी जानकारी सामने नहीं आई है।

हालाँकि, 28 अप्रैल 2024 को उत्तराखंड के वन विभाग ने नागदेव रेंज खिर्सू के पास जंगल में आग लगाने वाले पाँच मजदूरों को पकड़ा था। ये सभी बिहार के रहने वाले हैं। इन आरोपितों की पहचान मोसार आलम, नाजेफर आलम, नुरुल, सलीम और फिरोज आलम के रूप में हुई है। ये यहाँ मजदूरी का काम करते थे। ये जंगल में आग लगाते हुए वन विभाग को मिले थे। 

हालाँकि, इस वीडियो को लेकर उत्तराखंड सरकार या किसी सरकारी एजेंसी द्वारा अभी तक प्रतिक्रिया नहीं दी गई है। उत्तराखंड में गढ़वाल से लेकर कुमाऊँ तक जंगल जल रहे हैं। इसके कारण ना सिर्फ पेड़-पौधे नष्ट हो रहे हैं, बल्कि जीव-जंतु भी जलकर राख हो रहे हैं। आग की लपटें केंद्रीय संस्कृत विश्वविद्यालय के श्री रघुनाथ कीर्ति परिसर तक पहुँच गई हैं।

वहीं, पौड़ी जिले में वन विभाग के पोखड़ा रेंज अंतर्गत आने वाले जंगलों में आग लगाने वाले एक आरोपित को वन विभाग ने पकड़ा है। वह गमला गाँव के समीप जंगलों में आग लगा रहा थाआरोपित के खिलाफ वन अधिनियम और लोकसंपत्ति को नुकसान पहुँचाने के तहत केस दर्ज किया है। जिले में अभी तक जंगलों में आग लगाने वाले 11 आरोपितों को गिरफ्तार किया जा चुका है।

वहीं, अगर पूरे राज्य की बात करें तो वनों में आग लगाने वाले 52 लोगों की पहचान करके उनके खिलाफ मुकदमा दर्ज किया गया है। उनके खिलाफ गिरफ्तारी की कार्रवाई की जा रही है। प्रमुख वन संरक्षक हॉफ सीनियर आईएफएस अधिकारी धनंजय मोहन ने बताया कि अब तक उत्तराखंड के जंगलों में आग लगने के 804 मामलों में 1011 हेक्टेयर जंगल प्रभावित हुए हैं।

राज्य में अब तक आग लगने या लगाने की कुल 828 घटनाएँ सामने आई हैं। पिछले 24 घंटे में कुल 66 आग की घटनाएँ दर्ज की गई हैं। वहीं, अल्मोड़ा में आग बुझाते वक्त एक व्यक्ति की मौत हो गई और तीन लोग झुलस गए। इस विकराल आग ने करीब एक हजार हेक्टेयर एरिया में तांडव मचाया है।

बताया जा रहा है कि आग लगने के कारण ना सिर्फ पर्यावरण और संपदा को नुकसान हुआ है, बल्कि पशु-पक्षी भी मारे गए हैं। वहीं, भीषण आग के कारण करीब 24 लाख रुपए का नुकसान हुआ है। एक रिपोर्ट के मुताबिक, बीते 10 वर्षों में जंगल में आग की घटनाओं में कुल 18 लोगों की मौत हो चुकी है, जबकि 75 लोग अब तक झुलस चुके हैं।

खालिस्तानी गुटों की आपसी लड़ाई का परिणाम है हरदीप निज्जर हत्याकांड! कनाडा पुलिस ने 3 संदिग्धों को किया गिरफ्तार, गैंगस्टर लॉरेंस बिश्नोई से लिंक का दावा

खालिस्तानी आतंकी हरदीप सिंह निज्जर की पिछले साल कनाडा में हुई हत्या के मामले में स्थानीय पुलिस ने तीन लोगों को गिरफ्तार किया है। पुलिस के अनुसार, ये तीनों कथित हिट स्क्वाड के सदस्य हैं। गिरफ्तार किए गए लोगों के नाम कमलप्रीत सिंह, करणप्रीत सिंह और करण बराड़ बताया जा रहा है। इन सभी के गैंगस्टर लॉरेस बिश्नोई गैंग से ताल्लुक रखने का भी दावा किया जा रहा है।

कनाडाई मीडिया हाउस सीबीसी की रिपोर्ट के मुताबिक, ये तीनों जिस ग्रुप के सदस्य हैं, वह गैंगस्टर लॉरेंस बिश्नोई से जुड़ा है। राष्ट्रीय जाँच एजेंसी (NIA) की एक रिपोर्ट में कहा गया है कि लॉरेंस बिश्नोई, गोल्डी बराड़ और कई अन्य गैंगस्टरों के प्रतिबंधित आतंकी संगठन बब्बर खालसा इंटरनेशनल (BKI) और कई अन्य खालिस्तान समर्थक आतंकवादी संगठनों के साथ घनिष्ठ संबंध हैं।

इन गिरफ्तारियों से ऐसा लगता है कि निज्जर की हत्या खालिस्तानियों के बीच अंतर-गिरोह प्रतिद्वंद्विता के कारण हुई है। इसमें भारत सरकार की कोई भूमिका है। बता दें कि कनाडा के प्रधानमंत्री जस्टिन ट्रूडो ने भारत सरकार पर आरोप लगाया था कि इस हत्या के पीछे भारत है। इसको लेकर भारत ने कनाडा की सरकार से सबूत भी माँगा था। हालाँकि, कोई भी सबूत देने में अब तक नाकाम रहा है।

कनाडाई की मीडिया की इस रिपोर्ट के अनुसार, दो अलग-अलग प्रांतों से पुलिस ने शुक्रवार (3 मई 2024) को एक अभियान चलाकर इन तीनों लोगों को गिरफ्तार किया है। रिपोर्ट में कहा गया है, “सूत्रों ने कहा कि जाँचकर्ताओं ने कुछ महीने पहले कनाडा में कथित हिट दस्ते के सदस्यों की पहचान की थी और उन पर कड़ी निगरानी रखी गई थी।”

पुलिस के अनुसार, हिट स्क्वाड के सदस्य कम से कम तीन अन्य हत्या के मामलों में शामिल हो सकते हैं। इनमें से एक एडमॉन्टन में 11 वर्षीय लड़के की गोली मारकर हत्या भी शामिल है। अदालत में पुलिस द्वारा पेश किए गए दस्तावेजों में कमलप्रीत सिंह, करणप्रीत सिंह और करण बराड़ पर निज्जर की हत्या और साजिश के आरोप लगाए गए हैं। उम्मीद है कि पुलिस जल्द ही एक बयान जारी करेगी।

कनाडा की मीडिया में कहा गया है कि गिरफ्तार किए गए तीनों आरोपित भारतीय नागरिक हैं। ये सभी साल 2021 के बाद कनाडा गए थे। उनमें से कुछ ने छात्र वीजा का इस्तेमाल किया था। हालाँकि, कनाडा पहुँचने के बाद उनमें से किसी ने भी किसी शैक्षणिक संस्थान में दाखिला नहीं लिया और उनमें से किसी ने भी स्थायी निवास प्राप्त नहीं किया है।

गुरु नानक सिख गुरुद्वारा साहिब के प्रमुख और भारत में वांछित खालिस्तानी आतंकवादी हरदीप सिंह निज्जर की 18 जून 2023 को ब्रिटिश कोलंबिया के सरे में अज्ञात हमलावरों ने गोली मारकर हत्या कर दी थी। 18 सितंबर को कनाडा के प्रधानमंत्री जस्टिन ट्रूडो ने हत्या के लिए भारत को दोषी ठहराया था। हालाँकि, भारत ने इस आरोप को खारिज कर दिया था।

इसके कारण दोनों देशों के बीच राजनयिक संबंध तक खराब हो गए। हालाँकि, भारत ने भी कनाडा की सरकार से अपनी धरती पर भारत विरोधी तत्वों के खिलाफ सख्त कार्रवाई करने का आग्रह किया। तब से कनाडाई सरकार बिना कोई सबूत दिए कहती रही है कि निज्जर की हत्या भारतीय सरकार के आदेश पर की गई थी।

19 साल बाद संजय निरुपम ने की घर वापसी, शिवसेना में CM एकनाथ शिंदे ने किया स्वागत: ‘खिचड़ी चोर’ के विरोध में छोड़ दी थी कॉन्ग्रेस

कॉन्ग्रेस पार्टी छोड़ने के बाद अब संजय निरुपम फिर से शिवसेना में शामिल हो गए हैं। करीब 19 साल बाद घर वापसी करते हुए उन्होंने शिवसेना का दामन थाम लिया। अपना राजनीतिक करियर शिवसेना से ही शुरू करने वाले संजय निरुपम ने 2005 में शिवसेना से इस्तीफा दे दिया था और कॉन्ग्रेस पार्टी से जुड़ गए थे, लेकिन लोकसभा चुनाव 2024 के दौरान उन्होंने कॉन्ग्रेस पार्टी से बगावत कर दी थी, जिसके बाद कॉन्ग्रेस ने उन्हें 6 सालों के लिए पार्टी से निकाल दिया था, हालाँकि इससे पहले ही उन्होंने कॉन्ग्रेस की सदस्यता से इस्तीफा दे दिया था। अब उन्होंने 19 साल बाद शिवसेना में वापसी की है।

महाराष्ट्र के मुख्यमंत्री और शिवसेना के अध्यक्ष एकनाथ शिंदे ने शिवसेना में उनका स्वागत किया। खास बात ये है कि संजय निरुपम ने जब शिवसेना से इस्तीफा दिया था, तब पार्टी बालासाहेब ठाकरे के हाथों में थी, लेकिन अब पार्टी का असली निशान और पार्टी एकनाथ शिंदे के हाथों में है।

महाराष्ट्र के मुख्यमंत्री एकनाथ शिंदे ने संजय निरुपम की शिवसेना में वापसी को ‘घर वापसी’ बताया है। उन्होंने एक्स पर निरुपम की पार्टी से जुड़ने की तस्वीरें साझा करते हुए लिखा, “पूर्व सांसद और मुंबई कॉन्ग्रेस के पूर्व अध्यक्ष संजय निरुपम लगभग बीस साल बाद घर वापसी के बाद आज आधिकारिक तौर पर शिवसेना पार्टी में शामिल हो गए। ठाणे के आनंद आश्रम में हुए इस पार्टी प्रवेश के दौरान वह अपने कई कार्यकर्ताओं के साथ सार्वजनिक तौर पर शिवसेना में शामिल हुए।”

कौन हैं संजय निरुपम?

संजय निरुपम ने अपना करियर बतौर पत्रकार शुरू किया था। उन्होंने 1993 में सामना के हिंदी संस्करण ‘दोपहर का सामना’ के संपादक का दायित्व संभाला और शिवसेना में शामिल हो गए। सामना शिवसेना का मुखपत्र है। उन्हें साल 1996 में शिवसेना ने राज्यसभा भेजा था। वो दो बार राज्यसभा सांसद रहे और 2005 में उन्होंने शिवसेवा के साथ ही राज्यसभा की सदस्यता से इस्तीफा दे दिया था। इसके बाद वो कॉन्ग्रेस में शामिल हो गए। वो मुंबई कॉन्ग्रेस के अध्यक्ष भी रहे हैं, तो कॉन्ग्रेस ने उन्हें कई राज्यों की जिम्मेदारियाँ भी सौंपी थी।

संजय निरुपम ने साल 2009 में मुंबई उत्तर लोकसभा सीट से चुना लड़ा और जीत हासिल की। हालाँकि साल 2014 में उन्हें हार का सामना करना पड़ा। साल 2019 में कॉन्ग्रेस ने उनकी सीट पर उर्मिला मांतोड़कर को चुनाव लड़ाया था। वो इस साल लोकसभा चुनाव लड़ना चाहते थे, लेकिन गठबंधन में मुंबई नॉर्थ सीट शिवसेना (उद्धव ठाकरे) को चली गई, जिसके बाद उन्होंने बगावत का झंडा बुलंद दिया और कॉन्ग्रेस पार्टी छोड़ दी और अब वो शिवसेना (शिंदे गुट) में शामिल हो गए हैं।

अमित शाह फर्जी वीडियो केस में अब अरुण रेड्डी गिरफ्तार, चलाता है ‘स्पिरिट ऑफ कॉन्ग्रेस’ नाम से हैंडल: कार्रवाई देख बिलबिलाया मोहम्मद जुबैर

दिल्ली पुलिस ने गृह मंत्री अमित शाह का एडिटेड वीडियो शेयर करने के मामले में कॉन्ग्रेस के सोशल मीडिया टीम से जुड़े अरुण रेड्डी को गिरफ्तार किया है। दिल्ली पुलिस ने अरुण रेड्डी को दिल्ली से ही गिरफ्तार किया और अब वो शनिवार (04 मई 2024) को उसे कोर्ट में पेश कर रिमाँड की माँग करेगी। अरुण रेड्डी पर गृह मंत्री अमित शाह का डीपफेक वीडियो फैलाने और सबूत नष्ट करने के आरोप हैं। दिल्ली पुलिस ने उसका मोबाइल फोन जब्त कर जाँच के लिए भेज दिया है।

मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक, अरुण रेड्डी ‘Spirit of Congress’ नाम से से अकाउंट चलाता है। वो कॉन्ग्रेस की सोशल मीडिया टीम का नेशनल कॉर्डिनेटर भी है, इसके साथ ही वो तेलंगाना में भी कॉन्ग्रेस का सोशल मीडिया देखता है और वो तेलंगाना कॉन्ग्रेस की सोशल मीडिया टीम और नेशनल मीडिया टीम के साथ कोर्डिनेशन का काम भी देखता है।

कौन है अरुण रेड्डी?

अरुण रेड्डी ‘स्पिरिट ऑफ कॉन्ग्रेस’ नाम का एक्स (पूर्व में ट्विटर) अकाउंट चलाता है और खुद को कॉन्ग्रेस समर्थक बताता है। उसने अपनी प्रोफाइल में भी खुद को कॉन्ग्रेस की सोशल मीडिया टीम का नेशनल कोऑर्डिनेटर बताया है। अपनी प्रोफाइल फोटो में उसने राहुल गाँधी के ‘भारत जोड़ो न्याय यात्रा’ के पोस्टर वाली तस्वीर भी लगाई है। जिसमें पोस्टर के सामने वो खुद दिख रहा है।

छटपटाया मोहम्मद जुबैर, एक्स पर लिखी ये बात

कॉन्ग्रेसी सोशल मीडिया विंग से जुड़े अरुण रेड्डी की गिरफ्तारी से ‘इकोसिस्टम’ का हिस्सा मोहम्मद जुबैर तिलमिला गया है। उसने एक्स पर लिखा, “सिर्फ बीजेपी के सदस्य और समर्थक ही सोशल मीडिया पर बिना किसी डर के गलत सूचना/दुष्प्रचार फैला सकते हैं। उन्हें इसके लिए पार्टी लीडरशिप से सम्मानित भी किया जा सकता है। अन्य लोग ऐसा करने से पहले 100 बार सोच लें। क्योंकि अगर उनके (बीजेपी) नेताओं के विरोध में गलत जानकारी शेयर की, तो वो तुम्हारे पीछे लग जाएँगे। अमित शाह का एडिटेड वीडियो शेयर करने वाले बहुत सारे लोगों के खिलाफ केस हो चुका है/ गिरफ्तार हो चुके हैं। अमित शाह का इंटेंशनली एडिटेड वीडियो एक व्यक्ति ने पोस्ट गिया, जिसे सोशल मीडिया पर बहुत सारे अकाउंट्स ने बिना जाँच के ही शेयर किया। अब, उस वीडियो की जाँच किए बगैर उसे शेयर करने वाले या तो जेल जा रहे हैं, या एफआईआर झेल रहे हैं। सावधान!”

क्या है पूरा मामला

बता दें कि गृह मंत्री अमित शाह का आरक्षण को लेकर एक फर्जी वीडियो सोशल मीडिया पर वायरल हो रहा था। इस मामले में बीते रविवार को बड़ा एक्शन लिया गया था। फर्जी वीडियो फैलाने वाले लोगों के खिलाफ एफआईआर की गई थी। इस फर्जी वीडियो को लेकर ये भ्रम फैलाया जा रहा था कि अमित शाह ने एससी, एसटी और ओबीसी आरक्षण हटाने की बात कही, जबकि वास्तविकता में उन्होंने ऐसा नहीं कहा था।

पूरे मामले पर गृह मंत्री अमित शाह ने भी बयान दिया था। उन्होंने कहा था कि विपक्ष की हताशा और निराशा इस स्तर पर पहुंच गई है कि उन्होंने मेरा और कुछ भाजपा नेताओं का फेक वीडियो बनाकर सार्वजनिक किया है। उनके मुख्यमंत्री, प्रदेश अध्यक्ष आदि ने भी इस फेक वीडियो फॉरवर्ड करने का काम किया है। शाह ने कहा कि जब से राहुल गांधी ने कांग्रेस की कमान संभाली है तब से वह राजनीति के स्तर को नए निचले स्तर पर ले जाने का काम कर रहे हैं।

असम से लेकर हैदराबाद तक एक्शन

जानकारी के अनुसार, यह गिरफ्तारियाँ भाजपा नेता की शिकायत के आधार पर दर्ज की गई हैं। इस शिकायत में कहा गया था कि अमित शाह का एडिटेड वीडियो चला कर आरक्षण के संबंध में गलत सूचना फैलाई गई। जिन लोगों को गिरफ्तार किया गया है, उनके नाम आसमा, गीता, नवीन, शिवा एवं एक अन्य हैं।

इस मामले में देश के अलग-अलग इलाकों से यह फर्जी वीडियो फैलाने के मामले में गिरफ्तारियाँ हुई थीं। अहमदाबाद से दो व्यक्तियों को गिरफ्तार किया गया था। अहमदाबाद साइबर क्राइम टीम ने जिन्हें गिरफ्तार किया था, उनके नाम सतीष वरसोला और आर बी बारिया हैं। सतीश वनसोला कॉन्ग्रेस विधायक जिग्नेश मेवानी का ऑफिस संभालता है। उसे कॉन्ग्रेस विधायक जिग्नेश मेवानी का पीए भी बताया जा रहा है। वहीं, आर बी बारिया आम आदमी पार्टी का दाहोद जिले का जिलाध्यक्ष है। दोनों ने गृहमंत्री अमित शाह के एडिटेड वीडियो सोशल मीडिया पर वायरल किए थे।

डीपफेक वीडियो से जुड़े केस में असम के कॉन्ग्रेसी कार्यकर्ता ऋतम सिंह को गिरफ्तार किया जा चुका है। वो असम में कॉन्ग्रेस का सोशल मीडिया देखता है। इस गिरफ्तारी के बारे में खुद असम सीएम हिमंता बिस्वा सरमा ने अपने एक्स पर जानकारी देते हुए बताया था कि उसे गृह मंत्री का फेक वीडियो शेयर करने के मामले में पकड़ा गया है।

इस मामले में तेलंगाना के मुख्यमंत्री रेवंत रेड्डी को भी दिल्ली पुलिस ने समन किया था। हालाँकि, उनकी जगह उनके वकील ने दिल्ली पुलिस को बताया कि मुख्यमंत्री का इस मामले से कोई लेना देना नहीं है। झारखंड के कॉन्ग्रेस अध्यक्ष को भी इस मामले में समन जारी किया जा चुका है।

पति जैसे चाहे पत्नी के साथ कर सकता है सेक्स, बिना मर्जी के भी अप्राकृतिक संबंध बनाना रेप नहीं: हाई कोर्ट ने रद्द की FIR

मध्य प्रदेश हाई कोर्ट ने अपने एक निर्णय में कहा है कि किसी पुरुष का अपनी पत्नी के साथ अप्राकृतिक संबंध बनाना मैरिटल रेप की श्रेणी में नहीं आता है। कोर्ट ने यह भी कहा कि शादी के बाद की स्थिति में पत्नी की सहमति का प्रभाव नहीं रह जाता।

मध्य प्रदेश हाई कोर्ट की जस्टिस गुरपाल सिंह अहलुवालिया की एक सदस्यीय बेंच ने यह निर्णय सुनाया। कोर्ट ने इस मामले में कहा कि यदि कोई पुरुष अपनी पत्नी के साथ सबंध बनाता है और पत्नी 15 साल से कम की नहीं है तो यह मैरिटल रेप नहीं माना जा सकता भले ही यह सबंध अप्राकृतिक तरीके बनाए गए हों।

हाई कोर्ट ने यह निर्णय एक महिला द्वारा दायर अपने पति के खिलाफ दायर किए गए एक मामले में सुनाया। महिला ने आरोप लगाया था कि उसके पति ने उसके साथ अप्राकृतिक सबंध बनाए और गुदाद्वार में भी लिंग डाला। महिला ने आरोप लगाया कि ऐसा उसके साथ कई बार हुआ और पति ने उसे धमकाया भी। महिला ने अपने पति के विरुद्ध मामला दर्ज करवाया था।

महिला के पति ने हाई कोर्ट में इस FIR को रद्द करने की याचिका लगाई थी। पति ने कोर्ट के सामने कहा कि उसका अपनी पत्नी के साथ किसी भी तरह के संबंध बनाना मैरिटल रेप की श्रेणी में नहीं आता। इस मामले की सुनवाई के दौरान हाई कोर्ट ने कहा कि गुदा मैथुन तब अपराध रेप माना जाएगा जब पति-पत्नी साथ रह ना रहे हों, यह तब अपराध नहीं हो सकता जब पत्नी-पति के साथ एक घर में रह रही थी। हाई कोर्ट ने कहा कि यदि पत्नी 15 वर्ष से कम की हो तो भी यह मैरिटल रेप माना जाता।

कोर्ट ने यह भी कहा वैसे तो भारत में बिना सहमति के किसी भी महिला के मुख और गुदा में लिंग डालना अपराध माना गया है लेकिन विवाहित और साथ रहे पति-पत्नी के बीच यह अपराध नहीं माना गया। कोर्ट ने इस मामले में दर्ज की गई FIR रद्द करने का आदेश दिया।

रोड से प्रदर्शनकारियों को हटाने के आदेश पर सुप्रीम कोर्ट ने लगाई रोक: HC ने पंजाब सरकार को दिया था आदेश, कहा था- गुरु ग्रंथ साहिब को ढाल बना नहीं जाम कर सकते सड़क

सुप्रीम कोर्ट ने शुक्रवार (3 मई, 2024) को पंजाब एवं हरियाणा हाई कोर्ट के रोड प्रदर्शनकारियों से खाली करवाने सम्बन्धी एक फैसले पर रोक लगा दी। हाई कोर्ट ने अप्रैल माह में मोहाली-चंडीगढ़ रोड को रोक कर बैठे प्रदर्शनकारियों को हटाने का आदेश चंडीगढ़ और पंजाब को दिया था।

लाइव लॉ के अनुसार, सुप्रीम कोर्ट ने हाई कोर्ट के इस निर्णय पर रोक लगाने के साथ ही इस मामले में नोटिस जारी किया। इस मामले की सुनवाई जस्टिस बी आर गवई, सतीश चंद शर्मा और संदीप मेहता की बेंच ने की और निर्णय पर अगली सुनवाई तक रोक लगाई।

गौरतलब है कि अप्रैल में हुई एक सुनवाई में पंजाब और हरियाणा हाई कोर्ट में प्रदर्शनकारियों के रोड जाम करने को लेकर पंजाब सरकार और चंडीगढ़ प्रशासन को लताड़ लगाई थी। हाई कोर्ट के कार्यकारी चीफ जस्टिस गुरमीत सिंह संधावालिया और जस्टिस लापिता बैनर्जी की बेंच ने कहा था कि कई मौकों के बाद भी पंजाब सरकार और चंडीगढ़ प्रशासन ने रोजाना इस सड़क पर चलने वाले लोगों को कोई राहत नहीं पहुँचाई।

कोर्ट ने कहा था कि कुछ प्रदर्शनकारी यहाँ अपने साथ गुरु ग्रंथ साहिब लेकर बैठते हैं, यह कोई कारण नहीं हो सकता कि इन लोगों के खिलाफ पंजाब सरकार कार्रवाई ना करे। हाई कोर्ट ने कहा था, “केवल इस बात के आधार पर कि कुछ प्रदर्शनकारी गुरु ग्रंथ साहिब को रखकर धार्मिक भावनाओं का सहारा ले रहे हैं और इसे ढाल बना रहे हैं, इससे पंजाब को यह बहाना नहीं मिल जाता कि वह इन धर्म की आड़ लेने वालों पर कार्रवाई ना करे।”

कोर्ट ने यह टिप्पणियाँ एक याचिका की सुनवाई के दौरान की थी। यह याचिका के NGO द्वारा दायर की गई थी। इसने इन प्रदर्शनकारियों के हटाए जाने की माँग की थी। याचिका में कहा गया था कि इस धरना प्रदर्शन की वजह से रोजाना के यात्रियों को बड़ी समस्याएँ झेलनी पड़ रही थीं। कोर्ट ने इस दौरान इस बात का उल्लेख किया था कि उसने पिछली सुनवाई में पंजाब के डीजीपी तक को बुलाया था और यह सुनिश्चित करने को कहा था कि को प्रदर्शनकारी यहाँ ना रुके। कोर्ट ने कहा कि पंजाब और चंडीगढ़ मिलकर इस मामले में देरी कर रहे हैं।

इस मामले में दाखिल की गई जनहित याचिका में कहा गया था कि यह प्रदर्शन जनवरी 2023 से चल रहा है, जिससे स्कूली बच्चों और आमजन, दोनों को असुविधा हो रही है। प्रदर्शनकारी केंद्र सरकार से बेअदबी के मामलों में सख्त सजा और कुछ सिख कैदियों जिन्हें बंदी सिख के नाम से भी जाना जाता है, की जल्द रिहाई की माँग कर रहे हैं। इन बंदी सिखों में 1993 दिल्ली बम विस्फोट का दोषी देविंदरपाल सिंह भुल्लर और पंजाब के पूर्व सीएम बेअंत सिंह का हत्यारा कैदी बलवंत सिंह राजोआना शामिल हैं।

बृजभूषण शरण सिंह को अपने निशान पर चुनाव लड़वाना चाहती थी कॉन्ग्रेस, पार्टी नेता ने किया था संपर्क: WFI के पूर्व अध्यक्ष का खुलासा

भारतीय कुश्ती महासंघ (WFI) के पूर्व अध्यक्ष और यूपी के कैसरगंज लोकसभा सीट से बीजेपी सांसद बृजभूषण शरण सिंह ने दावा किया है कि कॉन्ग्रेस पार्टी ने उनसे संपर्क कर ‘पंजा’ चुनाव निशान से लोकसभा चुनाव लड़ने का ऑफर दिया था। बृजभूषण शरण सिंह ने कहा कि कॉन्ग्रेस के एक वरिष्ठ नेता ने उन्हें चुनाव में कॉन्ग्रेस के टिकट पर लड़ने की पेशकश की थी।

बृजभूषण शरण सिंह ने इस बात खुलासा शुक्रवार (03 मई 2024) को किया, जब वो अपने बेटे करण भूषण सिंह के लिए नामांकन कर रहे थे। न्यूज 18 की रिपोर्ट के मुताबिक, कॉन्ग्रेस पार्टी ने बृजभूषण शरण सिंह से संपर्क किया था, ताकि उन्हें कॉन्ग्रेस के टिकट पर चुनाव लड़ाया जा सके। बृजभूषण शरण सिंह ने कहा कि “कॉन्ग्रेस पार्टी के एक वरिष्ठ नेता ने मुझसे संपर्क किया और मुझे कॉन्ग्रेस से चुनाव लड़ने के लिए कहा।” हालाँकि उन्होंने उस नेता के नाम का खुलासा नहीं किया, जिसने उन्हें ऑफर दिया था। बता दें कि बीजेपी ने गुरुवार (2 मई 2024) को कैसरगंज लोकसभा सीट से बृजभूषण शरण सिंह की जगह उनके बेटे करण भूषण सिंह को उम्मीदवार घोषित किया और इसके दूसरे दिन उन्होंने अपना नामांकन दाखिल किया।

बता दें कि गुरुवार (2 मई 2024) को उत्तर प्रदेश की कैसरगंज लोकसभा सीट से बीजेपी ने 6 बार के सांसद रहे बाहुबली बृजभूषण शरण सिंह की वजह उनके बेटे को प्रत्याशी घोषित किया है। नामांकन के समय बृजभूषण ने कहा कि मेरे क्षेत्र के पार्टी कार्यकर्ता चाहते थे कि मैं चुनाव लड़ूँ। अगर मैं न लड़ूँ तो मेरा बेटा चुनाव लड़े। और पार्टी ने कार्यकर्ताओं की बात सुनी।

गौरतलब है कि गोंडा, बलरामपुर और कैसरगंज लोकसभा सीट से अलग-अलग 6 बार के सांसद रहे बृजभूषण शरण सिंह पर देश के नामी पहलवानों बजरंग पुनिया, साक्षी मलिक, विनेश फोगाट, संगीता फोगाट ने गंभीर आरोप लगाए थे और उनके खिलाफ विरोध-प्रदर्शन किया था। हालाँकि बृजभूषण ने अपने ऊपर लगे आरोपों को खारिज कर दिया है।

पूर्व मंत्री दिनभर पत्नी के साथ रहे, फिर बाथरूम से निकाला और घूँसा मार-मार कर मार डाला: CCTV से सामने आई क्रूरता, अब सुनवाई लाइव देख रही दुनिया

मध्य एशियाई देश कजाकिस्तान के पूर्व मंत्री ने अपनी पत्नी को पीट-पीट कर क्रूरता से मार दिया। इस हत्या का मुकदमा पूरा कजाकिस्तान अब लाइव देख रहा है। यह मामला आसपास के देशों में भी देखा जा रहा है। मुकदमे की लाइव सुनवाई से रोज क्रूरता की नई कहानियाँ सामने आ रही हैं।

जानकारी के अनुसार, कजाकिस्तान के मंत्री कुआन्दिक बिशिम्बायेव ने 9 नवम्बर, 2023 को अपनी 31 वर्षीय पत्नी सल्तनत नुकेनोवा को एक रेस्टोरेंट में पीट पीट कर मार दिया था। इस मामले में उनके ऊपर हत्या का मुकदमा चलाया जा रहा है। इस मुकदमे को कजाकिस्तान में लाइव प्रसारित किया जा रहा है। यह देश का पहला ऐसा मुकदमा है जिसे लाइव प्रसारित किया गया है। इस मुकदमे के बाद देश में महिलाओं के खिलाफ घरेलू हिंसा पर आन्दोलन खड़ा हो गया है।

हाल ही में इस हत्या का एक सीसीटीवी वीडियो भी कोर्ट को दिया गया है, इस वीडियो में दिखता है कि कितनी क्रूरता से बिशिम्बायेव ने अपनी पत्नी की हत्या की। वीडियो से पता चला कि पहले उसने अपनी पत्नी को बालों से खींचा और हाथों-पैरों पर मारना चालू कर दिया। इसके बाद जब उनकी पत्नी बाथरूम में चली गई तो बिशिम्बायेव ने दरवाजा तोड़ कर उसे मारा और खून से लथपथ कर दिया। अब ऊनि पत्नी नुकेनोवा बेसुध हो गई तो उसने एक भविष्यवक्ता को बुलाया ना कि इलाज की व्यवस्था की।

डॉक्टरों के आने पर नुकेनोवा को मृत घोषित कर दिया गया। इस मामले में दायर किए गए मुकदमे में पहले बिशिम्बायेव अपने दोषी होने से इनकार करते रहे लेकिन बाद में उन्होंने स्वीकार कर लिया। उनके वकीलों ने भी इस मामले में गड़बड़ियाँ करने की कोशिश की। बिशिम्बायेव 2016 में कजाकिस्तान में अर्थव्यवस्था के मंत्री बनाए गए थे। तब उन्हें देश में एक पढ़े लिखे व्यक्ति के रूप में समझा जाता था। हालाँकि, जल्द ही उनकी छवि पर बट्टा लग गया और 2018 में उन्हें घोटाले के आरोप में 10 वर्ष की सजा हुई।

उनकी सजा को कजाकिस्तान के पूर्व राष्ट्रपति ने जल्द ही माफ़ कर दिया था लेकिन यहाँ सरकार बदलने के साथ ही बिशिम्बायेव के ऊपर कार्रवाई फिर चालू हो गई है। नुकेनोवा के परिजनों ने बताया है कि बिशिम्बायेव लगातार अपनी पत्नी नुकेनोवा को मारते पीटते थे। नुकेनोवा के शरीर पर अक्सर मारने पीटने और यहाँ तक कि रस्सी से गला कसे जाने के भी निशान दिखते थे। अभी इस मामले में फैसला नहीं आया है लेकिन कजाक महिलाओं का देश भर में बिशिम्बायेव के विरुद्ध गुस्सा निकल रहा है।

लोकसभा चुनाव के लिए जेल से बाहर आ सकते हैं अरविंद केजरीवाल, सुप्रीम कोर्ट ने कहा- अंतरिम जमानत पर करेंगे विचार: 7 मई को सुनवाई

दिल्ली के मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल की जमानत याचिका पर सुप्रीम कोर्ट सुनवाई को तैयार हो गया है। सुप्रीम कोर्ट ने कहा है कि लोकसभा चुनाव 2024 को देखते हुए अरविंद केजरीवाल की जमानत याचिका पर सुनवाई कर सकते हैं। जमानत दे दी जाए, इस बात की कोई गारंटी नहीं है। इसके लिए हम कुछ नहीं कह रहे हैं। सुप्रीम कोर्ट ने ईडी को भी सूचना दे दी है कि 7 मई को इस मामले में वो सुनवाई करेगी। सुप्रीम कोर्ट ने कहा है कि अगर ये मामला लंबा चलता है, तो अरविंद केजरीवाल को लोकसभा चुनाव के लिए अंतरिम जमानत देने पर विचार किया जा सकता है।

मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक, अरविंद केजरीवाल ने सुप्रीम कोर्ट में अपनी गिरफ्तारी को चुनौती दी है। इसके बाद सुप्रीम कोर्ट ने अरविंद केजरीवाल की अंतरिम जमानत पर दोनों पक्षों को बहस के लिए तैयार हो कर आने के लिए कहा है। मंगलवार (7 अप्रैल 2024) को सुप्रीम कोर्ट ने बहस के लिए समय दिया है। कोर्ट ने कहा कि ये मामला लंबा चलेगा, लिहाजा आम चुनाव के मद्देनजर हम केजरीवाल को अंतरिम जमानत पर चुनाव प्रचार के लिए छोड़े जाने पर विचार करेंगे। उनको अंतरिम जमानत दी जाए या नहीं, इस पर बात करेंगे। साथ ही कहा कि अतिरिक्त सॉलिसिटर जनरल एसवी राजू अपने मुवक्किल ईडी से जमानत की शर्तों पर निर्देश लेकर आएँ। सुप्रीम कोर्ट ने ईडी से पूछा कि क्या केजरीवाल अभी भी फाइल पर हस्ताक्षर कर सकते है? इस पर सुप्रीम कोर्ट ने ईडी को जवाब देने के लिए कहा है।

मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक, जस्टिस संजीव खन्ना और जस्टिस दीपांकर दत्ता की बेंच ने ईडी की ओर से पेश अतिरिक्त सॉलिसिटर जनरल एसवी राजू से कहा कि गिरफ्तारी के खिलाफ केजरीवाल की याचिका पर सुनवाई में समय लगने की संभावना है और इसलिए अदालत उन्हें अंतरिम जमानत देने पर ईडी की दलीलें सुनने पर विचार कर रही है। इस पर एसवी राजू ने कहा कि वह केजरीवाल को अंतरिम जमानत देने का विरोध करेंगे। बता दें कि बेंच केजरीवाल की याचिका पर सुनवाई कर रही है, जिसमें ईडी द्वारा उनकी गिरफ्तारी को चुनौती दी गई है।

सुप्रीम कोर्ट ने इस मामले की सुनवाई के दौरान ईडी की ओर से पेश हुए अतिरिक्त सॉलिसिटर जनरल एसवी राजू ने दलीलें रखी, लेकिन कोर्ट ने राजू को टोका और कई सवाल पूछे। कोर्ट ने पूछा कि आपके पास मेटेरियल क्या हैं जिनसे ये बताया जा सके कि गिरफ्तारी अनिवार्य है। जस्टिस संजीव खन्ना ने केजरीवाल के वकील अभिषेक मनु सिंघवी से पूछा कि दिल्ली में चुनाव कब होने हैं? इस पर एडवोकेट सिंघवी ने कहा कि 25 मई को दिल्ली में चुनाव होने हैं। चुनाव के 48 घंटे पहले प्रचार बंद हो जाएगा।