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आतंकियों-वामपंथियों की राह पर उद्धव ठाकरे, भाजपा पर कॉमेंट में गौमूत्र का सहारा: अमित शाह बोले थे – ‘बाला साहेब ठाकरे की विरासत नहीं संभाल पाए’

महाराष्ट्र की राजनीति में हिंदुत्व पर फिर से जोर बढ़ गया है। बाला साहेब ठाकरे की शिवसेना का नाम, निशान सब गवाँ चुके उद्धव ठाकरे ने दावा किया है कि उनकी यूबीटी असली हिंदुत्व की राजनीति करती है। उनकी पार्टी सुधारवादी हिंदुत्व की बात करती है, जबकि बीजेपी का हिंदुत्व गौमूत्रधारी है। उद्धव ठाकरे ठीक वैसी ही भाषा और शब्दावली का उपयोग कर रहे हैं, जिस भाषा और शब्दावली का उपयोग आतंकवादी, वामपंथी और इस्लामिक गिरोह हिंदुत्व पर निशाना साधने के लिए करता है, भले ही वो पाकिस्तानी ही क्यों न हों।

खास बात ये है कि उद्धव ठाकरे ने ये बातें तब कही हैं, जब केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह ने उन पर हिंदुत्व से मुँह फेरने का आरोप लगाया था। गृह मंत्री अमित शाह ने कहा था कि ये कैसे शिवसेना वाले हैं, जो वीर सावरकर का नाम नहीं ले पाते। वो तो बाला साहेब ठाकरे की विरासत भी नहीं संभाल पाए। बाला साहेब ठाकरे की असली विरासत नारायण राणे, एकनाथ शिंदे और राज ठाकरे जैसे नेता संभाल रहे हैं।

उद्धव ठाकरे ने महाराष्ट्र के सिंधुदुर्ग जिले में शुक्रवार (03 मई 2024) को रैली को संबोधित किया। सिंधुदुर्ग के कंकावली में रैली को संबोधित करने के दौरान उन्होंने गौमूत्रधारी वाली टिप्पणी की। उद्धव ने कहा कि ‘भाजपा का हिंदुत्व गौमूत्रधारी है। हमारा हिंदुत्व सुधारवादी है। जब इंडी गठबंधन सत्ता में आएगा, तो मैं सुनिश्चित करूँगा कि महाराष्ट्र का खोया हुआ गौरव पुनः प्राप्त हो जाए।’ इस दौरान उन्होंने केंद्र पर महाराष्ट्र को ‘लूटने’ का भी आरोप लगाया। उद्धव ठाकरे पहले भी ऐसी शब्दावली का इस्तेमाल कर चुके हैं।

बता दें कि शुक्रवार को ही केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह ने उद्धव ठाकरे पर हमला बोला था। उन्होंने मंच से सवाल किया था ‘क्या वह (उद्धव ठाकरे) अपने भाषणों में स्वतंत्रता सेनानी और हिंदुत्व विचारकर वीर सावरकर का नाम ले सकते हैं? आप (उद्धव) कैसे शिवसेना के मुखिया हैं, जो सावरकर का नाम लेने में आपको शर्म आती है। आप ने नकली शिवसेना चला रहे हैं। असली शिवसेना तो एकनाथ शिंदे (महाराष्ट्र के मुख्यमंत्री) के साथ है।’ उन्होंने उद्धव पर बाला साहेब ठाकरे की विरासत को न संभाल पाने का आरोप लगाया।

आतंकियों-इस्लामिक कट्टरपंथियों और वामियों की भाषा बोल रहे ठाकरे?

बता दें कि हिंदुओं पर हमला करने से पहले इस्लामिक आतंकवादी अक्सर ‘गोमूत्र’ शब्द का इस्तेमाल करते हैं। 2019 में, एक आत्मघाती हमले में पाकिस्तान समर्थित जैश-ए-मोहम्मद के आतंकवादी ने कश्मीर के पुलवामा में सीआरपीएफ के 40 जवानों को मार डाला था। हमले के बाद, एक वीडियो जारी किया गया था जिसमें आतंकवादी को यह कहते हुए सुना जा सकता है कि वह अल्लाह के नाम पर ‘गोमूत्र पीने वालों’ को दंडित करना और मारना चाहता है। आदिल अहमद डार उर्फ वकास के रूप में पहचाने गए आतंकवादी को यह स्वीकार करते हुए देखा गया कि वह एक साल पहले जैश-ए-मोहम्मद में शामिल हुआ था। वीडियो में, उसने भारतीयों को “गाय का पेशाब पीने वाले” (गोमूत्र पीने वाले लोग) के रूप में संदर्भित किया था।

पुलवामा हमले के बाद भारत के इस्लामिक कट्टरपंथियों ने भी गौमूत्र वाली भाषा का इस्तेमाल किया था। तो महुआ मोइत्रा जैसे नेता भी हिंदुत्व पर हमले के लिए इसी शब्दावली का इस्तेमाल करते रहे हैं। यही नहीं, इस्लामिक कट्टरपंथी विचारधारा से लैस सरकारी मुलाजिम एक मुस्लिम महिला आईपीएस असलम खान ने भी इसी तरह की भाषा का इस्तेमाल किया था।

‘घर में बनता था गोमांस, इस्लाम में महिलाओं का सम्मान नहीं’: शमा परवीन ने घर-वापसी कर शिवम वर्मा को चुना जीवनसाथी, भाई से निकाह के डर से लिया फैसला

बिहार के औरंगाबाद की शमा परवीन नामक मुस्लिम महिला ने हिन्दू धर्म में घर-वापसी करते हुए शिवम वर्मा को अपना जीवनसाथी चुना है। शिवम वर्मा उत्तर प्रदेश के बलिया के रहने वाले हैं। शमा परवीन अब ‘पूनम’ नाम से जानी जाएँगी। शमा परवीन बिहार के औरंगाबाद के जगदीशपुर स्थित काजीचक गाँव की निवासी हैं। वो हाईस्कूल तक पढ़ी हैं। वहीं शिवम वर्मा 8वीं पास हैं और बलिया के राजेंद्रनगर के रहने वाले हैं। वो एक सर्राफा दुकान में कारीगरी का काम करते हैं।

असल में शिवम वर्मा लगभग 1 वर्ष पूर्व बिहार के बक्सर में अपनी दोस्त की शादी में पहुँचे थे। उसी शादी समारोह में उनकी मुलाकात शमा परवीन से हुई। दोनों में फिर बातचीत शुरू होगी और उसके बाद उनमें प्यार पनपने लगा। अंततः दोनों ने शादी करने का फैसला ले लिया। हालाँकि, शमा परवीन के परिजन इस रिश्ते से नाराज़ हैं और उन्होंने इसका विरोध भी किया था। यही कारण है कि लड़की को अपना घर छोड़ना पड़ा था। दोनों कई दिनों तक इधर-उधर भटकते रहे।

इसी बीच बरेली के मढ़ीनाथ स्थित अगस्त्य मुनि आश्रम के पंडित KK शंखधार के बारे में किसी ने उन्हें बताया। उन्हें बताया गया कि वो इन दोनों की शादी करा सकते हैं, जिसके बाद वो आश्रम पहुँचे। पंडित KK शंखधार ने एक अधिवक्ता के जरिए दोनों के दस्तावेजों की जाँच करवाई। इसके बाद गंगाजल से शमा परवीन का शुद्धिकरण करवाया गया और फिर हिन्दू रीति-रिवाज से विवाह की रस्म पूरी कराई गई। विवाह के बाद शमा परवीन अब ‘पूनम देवी’ नाम से जानी जाएँगी।

ये नाम शमा परवीन ने ही अपने लिए पसंद किया है। उन्होंने बताया कि मुग़ल आक्रांताओं के कारण उनके पूर्वजों ने इस्लामी धर्मांतरण कर लिया था। उन्होंने बताया कि उनका विश्वास और आस्था सनातन धर्म में है, वो हिन्दू देवी-देवताओं की पूजा-अर्चना करती हैं। उन्होंने ‘तीन तलाक’ और हलाला जैसी कुप्रथाओं की बात करते हुए कहा कि इस्लाम में महिलाओं का कोई सम्मान नहीं है। बकौल शमा परवीन, उन्होंने स्वेच्छा से सनातन धर्म को अंगीकार करने का निर्णय लिया है।

शमा परवीन गाय में भी श्रद्धा रखती हैं। जबकि उनके घर में खाने में गाय के मांस का इस्तेमाल किया जाता था। उन्होंने कहा कि इन सबके उलट हिन्दू धर्म में महिलाओं का सम्मान किया जाता है। शमा परवीन (अब पूनम देवी) को डर था कि उनके ही कजन भाई के साथ उनका निकाह कराया जा सकता है, इसीलिए उन्होंने जल्द से जल्द अपने प्रेमी शिवम वर्मा से हिन्दू रीति-रिवाज से शादी करने की ठानी। पंडित केके शंखधार ऐसी कई जोड़ियों की मदद कर चुके हैं।

‘मोदी के आने से देश बदल गया’: 250 पाकिस्तानी हिंदुओं ने अयोध्या में भगवान राम के किए दर्शन, बोले युधिष्ठिर- सिंध जल्दी बनेगा भारत का हिस्सा

अयोध्या में भगवान राम का मंदिर श्रद्धालुओं को खोल दिया गया है। यहाँ भगवान का दर्शन करने के लिए ना सिर्फ देश के कोने-कोने से लोग आ रहे हैं, बल्कि दुनिया भर के लोग अयोध्या आकर अपना श्रद्धा सुमन चढ़ा रहे हैं। भारत के पड़ोसी देश पाकिस्तान से भी 250 लोगों ने अयोध्या आकर सरयू में स्नान किए भगवान राम के दर्शन किए। इसके साथ ही प्राचीन मंदिरों के भी दर्शन किए।

पाकिस्तान के लगभग 30 शहरों के 250 सिंधी श्रद्धालुओं ने रामलला का दर्शन-पूजन किया। ये श्रद्धालु हनुमानगढ़ी, कनकभवन, भरत की तपस्थली नंदीग्राम भी पहुँचे। श्रद्धालुओं के इस समूह का संयोजन छत्तीसगढ़ के रायपुर स्थित प्रसिद्ध शदाणी दरबार के पीठाधीश्वर साईं डॉक्टर युधिष्ठिर लाल ने किया। 

इस अवसर पर साईं युधिष्ठिर लाल ने कहा कि जिस तरह पाँच सौ वर्षों के बाद रामजन्मभूमि मिली और वहाँ भव्य श्रीराम मंदिर का निर्माण हुआ है, उसी तरह सिंध प्रांत भी एक दिन भारत का हिस्सा बनेगा। इससे पूर्व अयोध्या सिंधी समाज एवं सिंधी सेंट्रल पंचायत की ओर से श्रद्धालुओं का स्वागत भी किया गया।

पाकिस्‍तान के सिंध प्रांत के जरवार गाँव से आए गोविंद राम माखेजा ने बताया कि भारत में पूरी तरह से शांति है। लोग देर रात तक सड़कों पर घूम रहे हैं। व्यापार कर रहे हैं। सभी त्योहार धूमधाम और आस्था के साथ मनाए जाते हैं। शोभा यात्राएँ निकाली जा रही हैं। उन्होंने कहा कि पाकिस्तान में उन्हें ऐसे खुलकर त्योहार मनाने की आजादी नहीं है।

सिंध के ही मीरपुर मथेलो के रहने वाले ओमप्रकाश ने कहा कि पाकिस्तान में हमेशा डर का माहौल रहता है। भारत में बहू-बेटियाँ सुरक्षित हैं, लेकिन पाकिस्तान में शाम को लड़की घर नहीं लौटी तो अनहोनी का खौफ सताने लगता है। उन्होंने कहा कि राम मंदिर के निर्माण से पाकिस्तान के सिंधी समुदाय में उत्साह है।

भारत और पाकिस्तान के माहौल में जमीन-आसमान का फर्क बताते हुए ओम प्रकाश ने कहा कि भारत का माहौल खुशनुमा है। वहीं, सिंध प्रांत के लरकाना से आए अजीत मल ने कहा कि नरेंद्र मोदी के आने से भारत की तकदीर और तस्वीर बदली है। उन्होंने कहा कि पाकिस्तान में महँगाई अपने चरम पर है।

रोहित वेमुला की मौत की जाँच चलती रहेगी: तेलंगाना पुलिस ने ही जारी की क्लोजर रिपोर्ट, अब वहीं के DGP की घोषणा, रिपोर्ट में जाति छिपाने का आरोप

तेलंगाना स्थित हैदराबाद विश्वविद्यालय के छात्र रोहित वेमुला की आत्महत्या के मामले की फाइल फिर से पुलिस खोलेगी। तेलंगाना के पुलिस महानिदेशक (DGP) ने शुक्रवार (3 मई 2024) की देर रात को कहा कि रोहित वेमुला की मौत की जाँच जारी रहेगी। यह जाँच मृतक की माँ और अन्य लोगों के अनुरोध पर किया जा रहा है।

तेलंगाना पुलिस द्वारा जारी एक बयान में डीजीपी ने कहा, “मृतक रोहित वेमुला की माँ और अन्य लोगों द्वारा जाँच के संबंध में व्यक्त किए गए संदेह के कारण मामले में अतिरिक्त जाँच करने का निर्णय लिया गया है। संबंधित अदालत में एक याचिका दायर की जाएगी, जिसमें माननीय मजिस्ट्रेट से आगे की जाँच की अनुमति देने का अनुरोध किया जाएगा।”

डीजीपी ने आगे कहा, “मामले में जाँच अधिकारी सहायक पुलिस आयुक्त, माधापुर थे और इस मामले में अंतिम क्लोजर रिपोर्ट पिछले साल यानी नवंबर 2023 से पहले ही की गई जाँच के आधार पर तैयार की गई थी। क्लोजर रिपोर्ट को जाँच अधिकारी द्वारा 21.03.2024 को न्यायिक अदालत में दायर किया गया।”

डीजीपी का यह बयान उस दिन आया है, जब तेलंगाना पुलिस ने एक स्थानीय अदालत के समक्ष क्लोजर रिपोर्ट पेश की थी। क्लोजर रिपोर्ट के अनुसार, पुलिस ने निष्कर्ष निकाला है कि वेमुला ने साल 2016 में इस डर से आत्महत्या कर ली थी कि उसकी असली जाति की पहचान उजागर हो जाएगी। वेमुला अनुसूचित जाति (SC) वर्ग से नहीं था।

पुलिस ने कहा है कि रोहित की माँ ने उसे फर्जी अनुसूचित जाति का प्रमाण पत्र बनवा के दिया था और रोहित को लगातार यह डर बना रहता था कि यदि उसका भेद खुला तो उसकी डिग्रियाँ खत्म हो जाएँगी। पुलिस रिपोर्ट में कहा गया है कि रोहित वेमुला वद्देरा जाति से ताल्लुक रखता था जो कि पिछड़ा वर्ग में आती है। रिपोर्ट के अनुसार, रोहित वेमुला की मौत के लिए अन्य कोई व्यक्ति जिम्मेदार नहीं था।

यह भी बताया गया कि रोहित वेमुला की जाति की पहचान के लिए जब उनकी माँ राधिका से DNA टेस्ट के विषय में बात की गई तो उन्होंने कोई जवाब नहीं दिया। पुलिस रोहित की माँ के DNA सैंपल को उनके परिवार के अन्य सदस्यों के साथ मिलाकर देखना चाहती थी, ताकि जाति की जानकारी जुटाई जा सके। रिपोर्ट में कहा गया है कि रोहित वेमुला पढ़ने से अधिक छात्र राजनीति में ध्यान देता था।

रोहित वेमुला की मौत के बाद यह मुद्दा राजनीतिक बन गया था और इसके कारण विवाद बढ़ गया था। तब कॉन्ग्रेस नेता राहुल गाँधी ने भाजपा की अगुवाई वाली केंद्र सरकार और तत्कालीन केंद्रीय मानव संसाधन विकास मंत्री स्मृति ईरानी पर हमला करते हुए इसे जाति की लड़ाई के रूप में पेश किया था। इसके साथ ही उन्होंने सरकार और ईरानी की आलोचना की थी।

राहुल गाँधी की इंटरनेशनल बेइज्जती: जिस Garry Kasparov को बताया अपना फेवरिट चेस प्लेयर, उन्हीं ने कहा – पहले रायबरेली जीत के दिखाओ

नेता लोग के बीच में सबसे धाँसू चेस कौन खेलता है? राहुल गाँधी। अपने आप को चेस का सरताज (Rahul Gandhi best chess player among politicians) खुद राहुल गाँधी ने ही बताया है। वैसे उनका फेवरिट चेस प्लेयर है गैरी कास्परोव। यह भी उन्होंने खुद ही बताया है। जिस दिन उन्होंने यह सब कुछ बताया, उसी दिन गैरी कास्परोव (Garry Kasparov) ने उनको पहले रायबरेली से जीतने और तब जाकर टॉप के लोगों को चैलेंज करने की सलाह दे डाली है – एकदम इंटरनेशनल बेइज्जती टाइप फील करवा दिया।

राहुल गाँधी को भारत के लोग सिरियसली नहीं लेते हैं। यह बात सबको पता है, कॉन्ग्रेसियों तक को! लेकिन सबसे महान चेस खिलाड़ियों में से एक, रूस के गैरी कास्परोव, जो अब अमेरिका में रहते हैं, उन्हें भी राहुल गाँधी एक मजाक से ज्यादा कुछ नहीं लगते, यह एक ट्वीट से पता चल गया। लेकिन यह हुआ कैसे?

हुआ यह कि राजनीतिक विश्लेषक और स्तंभकार संदीप घोष ने एक ट्वीट किया। इसमें उन्होंने गैरी कास्परोव और विश्वनाथन आनंद को टैग किया और तंज करते हुए लिखा – “मुझे बहुत राहत महसूस हो रही है कि गैरी कास्परोव और विश्वनाथन आनंद जल्दी रिटायर हो गए। इस कारण से इन दोनों को हमारे समय के सबसे बड़े शतरंज खिलाड़ी (राहुल गाँधी की ओर इशारा) का सामना नहीं करना पड़ रहा।”   

इस ट्वीट के रिप्लाई में लाफिंग इमोजी बनाते हुए गैरी कास्परोव ने जवाब दिया, “चेस की परंपरा के अनुसार शीर्ष (राजा) को चुनौती देने से पहले आपको रायबरेली सीट जीतना चाहिए!”

लोकसभा चुनाव में राहुल गाँधी की रायबरेली सीट पर जीत को लेकर गैरी कास्परोव (Garry Kasparov) का किया गया यह तंज देखते ही देखते वायरल हो गया। सोशल मीडिया यूजर्स ने इसके बाद कॉन्ग्रेस के कथित युवराज को लेकर तरह-तरह के तंज कसे, मीम शेयर किए। 

बॉलीवुड कलाकार रणवीर शौरी ने राहुल गाँधी का एक वीडियो शेयर किया। उन्होंने गैरी कास्परोव को टैग करते हुए लिखा कि बाकी सब तो सही है… लेकिन क्या आप राहुल गाँधी के इस मूव को बचा पाओगे?

इंडिया टुडे के पत्रकार गौरव सावंत ने लिखा कि भारत के लोकसभा चुनाव को अब विदेशी भी सीरियसली लेते हैं, दिलचस्पी रखते हैं। भारतीय राजनीति में क्या चल रहा है, किसकी कितनी राजनीतिक हैसियत है, यह सबको पता है। 

अपना ट्वीट वायरल होने के बाद हालाँकि गैरी कास्परोव ने लिखा – “मुझे उम्मीद है कि मेरा मजाक भारतीय राजनीति में हस्तक्षेप नहीं समझा जाएगा, ना ही यह मेरी विशेषज्ञता समझी जाए! लेकिन ‘1000 आँखों वाला राक्षस, जो सब कुछ देख सकता है (all-seeing monster with 1000 eyes,)’ जो नाम मुझे कभी दिया गया था, उसके अनुरुप मैं एक नेता को अपने प्रिय खेल में हाथ आजमाते हुए देखने से नहीं चूक सकता!”

न राहुल गाँधी वीडियो में खुद को सबसे बड़ा चेस खिलाड़ी बताते, न उनकी इंटरनेशनल बेइज्जती होती!

‘हम आग से खेलते हैं… जला देंगे सारा जंगल’: उत्तराखंड के वनों में लगी भीषण आग के बीच वीडियो वायरल; सलीम-फिरोज-नुरुल सहित 5 गिरफ्तार

उत्तराखंड के जंगलों में लगी भयावह हो चुकी है और अब वह लोगों घरों-आंगन तक पहुँच गई है। ये आग इतनी भयावह हो गई है कि इसे अंतरिक्ष से भी देखा जा सकता है। आग के कारण लगभग एक हजार हेक्टेयर से अधिक जंगल जलकर खाक हो गए हैं। वहीं, कुछ लोगों के मौत की भी खबर है। इस बीच एक वीडियो सामने आया है, जिसमें दो लड़के जंगल में आग लगाने की बात कर रहे हैं।

सामने आए वीडियो में दो लड़के हैं, जबकि एक वीडियो बना रहा है। इनमें से एक लड़का कहता है, “देखिए फाइनली गाइज, हम लोग आग लगाने का काम कर रहे हैं। आग लगाना और आग से खेलना ही हमारा काम है। हम जब-तब आग से खेलते रहते हैं। आज हम लोग यही काम करने यहाँ आए हैं। हम यहाँ पहाड़ को जलाकर भस्म कर देंगे। नीचे गिरे पत्तों को भी जलाकर राख कर देंगे।”

वीडियो में लड़के कह रहे हैं, “हम हमेशा आग से खेलते हैं। ये हमारे सुखलाल अंकल हैं, जो हमेशा आग लगाते रहते हैं। आग से खेलने वालों से कभी टक्कर नहीं लिया जाता और बिहारियों को कभी चैलेंज नहीं किया जाता।” इन लड़कों का दावा है कि वे बिहार के रहने वाले हैं। ये वीडियो कब के हैं, इसके बारे में अभी जानकारी सामने नहीं आई है।

हालाँकि, 28 अप्रैल 2024 को उत्तराखंड के वन विभाग ने नागदेव रेंज खिर्सू के पास जंगल में आग लगाने वाले पाँच मजदूरों को पकड़ा था। ये सभी बिहार के रहने वाले हैं। इन आरोपितों की पहचान मोसार आलम, नाजेफर आलम, नुरुल, सलीम और फिरोज आलम के रूप में हुई है। ये यहाँ मजदूरी का काम करते थे। ये जंगल में आग लगाते हुए वन विभाग को मिले थे। 

हालाँकि, इस वीडियो को लेकर उत्तराखंड सरकार या किसी सरकारी एजेंसी द्वारा अभी तक प्रतिक्रिया नहीं दी गई है। उत्तराखंड में गढ़वाल से लेकर कुमाऊँ तक जंगल जल रहे हैं। इसके कारण ना सिर्फ पेड़-पौधे नष्ट हो रहे हैं, बल्कि जीव-जंतु भी जलकर राख हो रहे हैं। आग की लपटें केंद्रीय संस्कृत विश्वविद्यालय के श्री रघुनाथ कीर्ति परिसर तक पहुँच गई हैं।

वहीं, पौड़ी जिले में वन विभाग के पोखड़ा रेंज अंतर्गत आने वाले जंगलों में आग लगाने वाले एक आरोपित को वन विभाग ने पकड़ा है। वह गमला गाँव के समीप जंगलों में आग लगा रहा थाआरोपित के खिलाफ वन अधिनियम और लोकसंपत्ति को नुकसान पहुँचाने के तहत केस दर्ज किया है। जिले में अभी तक जंगलों में आग लगाने वाले 11 आरोपितों को गिरफ्तार किया जा चुका है।

वहीं, अगर पूरे राज्य की बात करें तो वनों में आग लगाने वाले 52 लोगों की पहचान करके उनके खिलाफ मुकदमा दर्ज किया गया है। उनके खिलाफ गिरफ्तारी की कार्रवाई की जा रही है। प्रमुख वन संरक्षक हॉफ सीनियर आईएफएस अधिकारी धनंजय मोहन ने बताया कि अब तक उत्तराखंड के जंगलों में आग लगने के 804 मामलों में 1011 हेक्टेयर जंगल प्रभावित हुए हैं।

राज्य में अब तक आग लगने या लगाने की कुल 828 घटनाएँ सामने आई हैं। पिछले 24 घंटे में कुल 66 आग की घटनाएँ दर्ज की गई हैं। वहीं, अल्मोड़ा में आग बुझाते वक्त एक व्यक्ति की मौत हो गई और तीन लोग झुलस गए। इस विकराल आग ने करीब एक हजार हेक्टेयर एरिया में तांडव मचाया है।

बताया जा रहा है कि आग लगने के कारण ना सिर्फ पर्यावरण और संपदा को नुकसान हुआ है, बल्कि पशु-पक्षी भी मारे गए हैं। वहीं, भीषण आग के कारण करीब 24 लाख रुपए का नुकसान हुआ है। एक रिपोर्ट के मुताबिक, बीते 10 वर्षों में जंगल में आग की घटनाओं में कुल 18 लोगों की मौत हो चुकी है, जबकि 75 लोग अब तक झुलस चुके हैं।

खालिस्तानी गुटों की आपसी लड़ाई का परिणाम है हरदीप निज्जर हत्याकांड! कनाडा पुलिस ने 3 संदिग्धों को किया गिरफ्तार, गैंगस्टर लॉरेंस बिश्नोई से लिंक का दावा

खालिस्तानी आतंकी हरदीप सिंह निज्जर की पिछले साल कनाडा में हुई हत्या के मामले में स्थानीय पुलिस ने तीन लोगों को गिरफ्तार किया है। पुलिस के अनुसार, ये तीनों कथित हिट स्क्वाड के सदस्य हैं। गिरफ्तार किए गए लोगों के नाम कमलप्रीत सिंह, करणप्रीत सिंह और करण बराड़ बताया जा रहा है। इन सभी के गैंगस्टर लॉरेस बिश्नोई गैंग से ताल्लुक रखने का भी दावा किया जा रहा है।

कनाडाई मीडिया हाउस सीबीसी की रिपोर्ट के मुताबिक, ये तीनों जिस ग्रुप के सदस्य हैं, वह गैंगस्टर लॉरेंस बिश्नोई से जुड़ा है। राष्ट्रीय जाँच एजेंसी (NIA) की एक रिपोर्ट में कहा गया है कि लॉरेंस बिश्नोई, गोल्डी बराड़ और कई अन्य गैंगस्टरों के प्रतिबंधित आतंकी संगठन बब्बर खालसा इंटरनेशनल (BKI) और कई अन्य खालिस्तान समर्थक आतंकवादी संगठनों के साथ घनिष्ठ संबंध हैं।

इन गिरफ्तारियों से ऐसा लगता है कि निज्जर की हत्या खालिस्तानियों के बीच अंतर-गिरोह प्रतिद्वंद्विता के कारण हुई है। इसमें भारत सरकार की कोई भूमिका है। बता दें कि कनाडा के प्रधानमंत्री जस्टिन ट्रूडो ने भारत सरकार पर आरोप लगाया था कि इस हत्या के पीछे भारत है। इसको लेकर भारत ने कनाडा की सरकार से सबूत भी माँगा था। हालाँकि, कोई भी सबूत देने में अब तक नाकाम रहा है।

कनाडाई की मीडिया की इस रिपोर्ट के अनुसार, दो अलग-अलग प्रांतों से पुलिस ने शुक्रवार (3 मई 2024) को एक अभियान चलाकर इन तीनों लोगों को गिरफ्तार किया है। रिपोर्ट में कहा गया है, “सूत्रों ने कहा कि जाँचकर्ताओं ने कुछ महीने पहले कनाडा में कथित हिट दस्ते के सदस्यों की पहचान की थी और उन पर कड़ी निगरानी रखी गई थी।”

पुलिस के अनुसार, हिट स्क्वाड के सदस्य कम से कम तीन अन्य हत्या के मामलों में शामिल हो सकते हैं। इनमें से एक एडमॉन्टन में 11 वर्षीय लड़के की गोली मारकर हत्या भी शामिल है। अदालत में पुलिस द्वारा पेश किए गए दस्तावेजों में कमलप्रीत सिंह, करणप्रीत सिंह और करण बराड़ पर निज्जर की हत्या और साजिश के आरोप लगाए गए हैं। उम्मीद है कि पुलिस जल्द ही एक बयान जारी करेगी।

कनाडा की मीडिया में कहा गया है कि गिरफ्तार किए गए तीनों आरोपित भारतीय नागरिक हैं। ये सभी साल 2021 के बाद कनाडा गए थे। उनमें से कुछ ने छात्र वीजा का इस्तेमाल किया था। हालाँकि, कनाडा पहुँचने के बाद उनमें से किसी ने भी किसी शैक्षणिक संस्थान में दाखिला नहीं लिया और उनमें से किसी ने भी स्थायी निवास प्राप्त नहीं किया है।

गुरु नानक सिख गुरुद्वारा साहिब के प्रमुख और भारत में वांछित खालिस्तानी आतंकवादी हरदीप सिंह निज्जर की 18 जून 2023 को ब्रिटिश कोलंबिया के सरे में अज्ञात हमलावरों ने गोली मारकर हत्या कर दी थी। 18 सितंबर को कनाडा के प्रधानमंत्री जस्टिन ट्रूडो ने हत्या के लिए भारत को दोषी ठहराया था। हालाँकि, भारत ने इस आरोप को खारिज कर दिया था।

इसके कारण दोनों देशों के बीच राजनयिक संबंध तक खराब हो गए। हालाँकि, भारत ने भी कनाडा की सरकार से अपनी धरती पर भारत विरोधी तत्वों के खिलाफ सख्त कार्रवाई करने का आग्रह किया। तब से कनाडाई सरकार बिना कोई सबूत दिए कहती रही है कि निज्जर की हत्या भारतीय सरकार के आदेश पर की गई थी।

19 साल बाद संजय निरुपम ने की घर वापसी, शिवसेना में CM एकनाथ शिंदे ने किया स्वागत: ‘खिचड़ी चोर’ के विरोध में छोड़ दी थी कॉन्ग्रेस

कॉन्ग्रेस पार्टी छोड़ने के बाद अब संजय निरुपम फिर से शिवसेना में शामिल हो गए हैं। करीब 19 साल बाद घर वापसी करते हुए उन्होंने शिवसेना का दामन थाम लिया। अपना राजनीतिक करियर शिवसेना से ही शुरू करने वाले संजय निरुपम ने 2005 में शिवसेना से इस्तीफा दे दिया था और कॉन्ग्रेस पार्टी से जुड़ गए थे, लेकिन लोकसभा चुनाव 2024 के दौरान उन्होंने कॉन्ग्रेस पार्टी से बगावत कर दी थी, जिसके बाद कॉन्ग्रेस ने उन्हें 6 सालों के लिए पार्टी से निकाल दिया था, हालाँकि इससे पहले ही उन्होंने कॉन्ग्रेस की सदस्यता से इस्तीफा दे दिया था। अब उन्होंने 19 साल बाद शिवसेना में वापसी की है।

महाराष्ट्र के मुख्यमंत्री और शिवसेना के अध्यक्ष एकनाथ शिंदे ने शिवसेना में उनका स्वागत किया। खास बात ये है कि संजय निरुपम ने जब शिवसेना से इस्तीफा दिया था, तब पार्टी बालासाहेब ठाकरे के हाथों में थी, लेकिन अब पार्टी का असली निशान और पार्टी एकनाथ शिंदे के हाथों में है।

महाराष्ट्र के मुख्यमंत्री एकनाथ शिंदे ने संजय निरुपम की शिवसेना में वापसी को ‘घर वापसी’ बताया है। उन्होंने एक्स पर निरुपम की पार्टी से जुड़ने की तस्वीरें साझा करते हुए लिखा, “पूर्व सांसद और मुंबई कॉन्ग्रेस के पूर्व अध्यक्ष संजय निरुपम लगभग बीस साल बाद घर वापसी के बाद आज आधिकारिक तौर पर शिवसेना पार्टी में शामिल हो गए। ठाणे के आनंद आश्रम में हुए इस पार्टी प्रवेश के दौरान वह अपने कई कार्यकर्ताओं के साथ सार्वजनिक तौर पर शिवसेना में शामिल हुए।”

कौन हैं संजय निरुपम?

संजय निरुपम ने अपना करियर बतौर पत्रकार शुरू किया था। उन्होंने 1993 में सामना के हिंदी संस्करण ‘दोपहर का सामना’ के संपादक का दायित्व संभाला और शिवसेना में शामिल हो गए। सामना शिवसेना का मुखपत्र है। उन्हें साल 1996 में शिवसेना ने राज्यसभा भेजा था। वो दो बार राज्यसभा सांसद रहे और 2005 में उन्होंने शिवसेवा के साथ ही राज्यसभा की सदस्यता से इस्तीफा दे दिया था। इसके बाद वो कॉन्ग्रेस में शामिल हो गए। वो मुंबई कॉन्ग्रेस के अध्यक्ष भी रहे हैं, तो कॉन्ग्रेस ने उन्हें कई राज्यों की जिम्मेदारियाँ भी सौंपी थी।

संजय निरुपम ने साल 2009 में मुंबई उत्तर लोकसभा सीट से चुना लड़ा और जीत हासिल की। हालाँकि साल 2014 में उन्हें हार का सामना करना पड़ा। साल 2019 में कॉन्ग्रेस ने उनकी सीट पर उर्मिला मांतोड़कर को चुनाव लड़ाया था। वो इस साल लोकसभा चुनाव लड़ना चाहते थे, लेकिन गठबंधन में मुंबई नॉर्थ सीट शिवसेना (उद्धव ठाकरे) को चली गई, जिसके बाद उन्होंने बगावत का झंडा बुलंद दिया और कॉन्ग्रेस पार्टी छोड़ दी और अब वो शिवसेना (शिंदे गुट) में शामिल हो गए हैं।

अमित शाह फर्जी वीडियो केस में अब अरुण रेड्डी गिरफ्तार, चलाता है ‘स्पिरिट ऑफ कॉन्ग्रेस’ नाम से हैंडल: कार्रवाई देख बिलबिलाया मोहम्मद जुबैर

दिल्ली पुलिस ने गृह मंत्री अमित शाह का एडिटेड वीडियो शेयर करने के मामले में कॉन्ग्रेस के सोशल मीडिया टीम से जुड़े अरुण रेड्डी को गिरफ्तार किया है। दिल्ली पुलिस ने अरुण रेड्डी को दिल्ली से ही गिरफ्तार किया और अब वो शनिवार (04 मई 2024) को उसे कोर्ट में पेश कर रिमाँड की माँग करेगी। अरुण रेड्डी पर गृह मंत्री अमित शाह का डीपफेक वीडियो फैलाने और सबूत नष्ट करने के आरोप हैं। दिल्ली पुलिस ने उसका मोबाइल फोन जब्त कर जाँच के लिए भेज दिया है।

मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक, अरुण रेड्डी ‘Spirit of Congress’ नाम से से अकाउंट चलाता है। वो कॉन्ग्रेस की सोशल मीडिया टीम का नेशनल कॉर्डिनेटर भी है, इसके साथ ही वो तेलंगाना में भी कॉन्ग्रेस का सोशल मीडिया देखता है और वो तेलंगाना कॉन्ग्रेस की सोशल मीडिया टीम और नेशनल मीडिया टीम के साथ कोर्डिनेशन का काम भी देखता है।

कौन है अरुण रेड्डी?

अरुण रेड्डी ‘स्पिरिट ऑफ कॉन्ग्रेस’ नाम का एक्स (पूर्व में ट्विटर) अकाउंट चलाता है और खुद को कॉन्ग्रेस समर्थक बताता है। उसने अपनी प्रोफाइल में भी खुद को कॉन्ग्रेस की सोशल मीडिया टीम का नेशनल कोऑर्डिनेटर बताया है। अपनी प्रोफाइल फोटो में उसने राहुल गाँधी के ‘भारत जोड़ो न्याय यात्रा’ के पोस्टर वाली तस्वीर भी लगाई है। जिसमें पोस्टर के सामने वो खुद दिख रहा है।

छटपटाया मोहम्मद जुबैर, एक्स पर लिखी ये बात

कॉन्ग्रेसी सोशल मीडिया विंग से जुड़े अरुण रेड्डी की गिरफ्तारी से ‘इकोसिस्टम’ का हिस्सा मोहम्मद जुबैर तिलमिला गया है। उसने एक्स पर लिखा, “सिर्फ बीजेपी के सदस्य और समर्थक ही सोशल मीडिया पर बिना किसी डर के गलत सूचना/दुष्प्रचार फैला सकते हैं। उन्हें इसके लिए पार्टी लीडरशिप से सम्मानित भी किया जा सकता है। अन्य लोग ऐसा करने से पहले 100 बार सोच लें। क्योंकि अगर उनके (बीजेपी) नेताओं के विरोध में गलत जानकारी शेयर की, तो वो तुम्हारे पीछे लग जाएँगे। अमित शाह का एडिटेड वीडियो शेयर करने वाले बहुत सारे लोगों के खिलाफ केस हो चुका है/ गिरफ्तार हो चुके हैं। अमित शाह का इंटेंशनली एडिटेड वीडियो एक व्यक्ति ने पोस्ट गिया, जिसे सोशल मीडिया पर बहुत सारे अकाउंट्स ने बिना जाँच के ही शेयर किया। अब, उस वीडियो की जाँच किए बगैर उसे शेयर करने वाले या तो जेल जा रहे हैं, या एफआईआर झेल रहे हैं। सावधान!”

क्या है पूरा मामला

बता दें कि गृह मंत्री अमित शाह का आरक्षण को लेकर एक फर्जी वीडियो सोशल मीडिया पर वायरल हो रहा था। इस मामले में बीते रविवार को बड़ा एक्शन लिया गया था। फर्जी वीडियो फैलाने वाले लोगों के खिलाफ एफआईआर की गई थी। इस फर्जी वीडियो को लेकर ये भ्रम फैलाया जा रहा था कि अमित शाह ने एससी, एसटी और ओबीसी आरक्षण हटाने की बात कही, जबकि वास्तविकता में उन्होंने ऐसा नहीं कहा था।

पूरे मामले पर गृह मंत्री अमित शाह ने भी बयान दिया था। उन्होंने कहा था कि विपक्ष की हताशा और निराशा इस स्तर पर पहुंच गई है कि उन्होंने मेरा और कुछ भाजपा नेताओं का फेक वीडियो बनाकर सार्वजनिक किया है। उनके मुख्यमंत्री, प्रदेश अध्यक्ष आदि ने भी इस फेक वीडियो फॉरवर्ड करने का काम किया है। शाह ने कहा कि जब से राहुल गांधी ने कांग्रेस की कमान संभाली है तब से वह राजनीति के स्तर को नए निचले स्तर पर ले जाने का काम कर रहे हैं।

असम से लेकर हैदराबाद तक एक्शन

जानकारी के अनुसार, यह गिरफ्तारियाँ भाजपा नेता की शिकायत के आधार पर दर्ज की गई हैं। इस शिकायत में कहा गया था कि अमित शाह का एडिटेड वीडियो चला कर आरक्षण के संबंध में गलत सूचना फैलाई गई। जिन लोगों को गिरफ्तार किया गया है, उनके नाम आसमा, गीता, नवीन, शिवा एवं एक अन्य हैं।

इस मामले में देश के अलग-अलग इलाकों से यह फर्जी वीडियो फैलाने के मामले में गिरफ्तारियाँ हुई थीं। अहमदाबाद से दो व्यक्तियों को गिरफ्तार किया गया था। अहमदाबाद साइबर क्राइम टीम ने जिन्हें गिरफ्तार किया था, उनके नाम सतीष वरसोला और आर बी बारिया हैं। सतीश वनसोला कॉन्ग्रेस विधायक जिग्नेश मेवानी का ऑफिस संभालता है। उसे कॉन्ग्रेस विधायक जिग्नेश मेवानी का पीए भी बताया जा रहा है। वहीं, आर बी बारिया आम आदमी पार्टी का दाहोद जिले का जिलाध्यक्ष है। दोनों ने गृहमंत्री अमित शाह के एडिटेड वीडियो सोशल मीडिया पर वायरल किए थे।

डीपफेक वीडियो से जुड़े केस में असम के कॉन्ग्रेसी कार्यकर्ता ऋतम सिंह को गिरफ्तार किया जा चुका है। वो असम में कॉन्ग्रेस का सोशल मीडिया देखता है। इस गिरफ्तारी के बारे में खुद असम सीएम हिमंता बिस्वा सरमा ने अपने एक्स पर जानकारी देते हुए बताया था कि उसे गृह मंत्री का फेक वीडियो शेयर करने के मामले में पकड़ा गया है।

इस मामले में तेलंगाना के मुख्यमंत्री रेवंत रेड्डी को भी दिल्ली पुलिस ने समन किया था। हालाँकि, उनकी जगह उनके वकील ने दिल्ली पुलिस को बताया कि मुख्यमंत्री का इस मामले से कोई लेना देना नहीं है। झारखंड के कॉन्ग्रेस अध्यक्ष को भी इस मामले में समन जारी किया जा चुका है।

पति जैसे चाहे पत्नी के साथ कर सकता है सेक्स, बिना मर्जी के भी अप्राकृतिक संबंध बनाना रेप नहीं: हाई कोर्ट ने रद्द की FIR

मध्य प्रदेश हाई कोर्ट ने अपने एक निर्णय में कहा है कि किसी पुरुष का अपनी पत्नी के साथ अप्राकृतिक संबंध बनाना मैरिटल रेप की श्रेणी में नहीं आता है। कोर्ट ने यह भी कहा कि शादी के बाद की स्थिति में पत्नी की सहमति का प्रभाव नहीं रह जाता।

मध्य प्रदेश हाई कोर्ट की जस्टिस गुरपाल सिंह अहलुवालिया की एक सदस्यीय बेंच ने यह निर्णय सुनाया। कोर्ट ने इस मामले में कहा कि यदि कोई पुरुष अपनी पत्नी के साथ सबंध बनाता है और पत्नी 15 साल से कम की नहीं है तो यह मैरिटल रेप नहीं माना जा सकता भले ही यह सबंध अप्राकृतिक तरीके बनाए गए हों।

हाई कोर्ट ने यह निर्णय एक महिला द्वारा दायर अपने पति के खिलाफ दायर किए गए एक मामले में सुनाया। महिला ने आरोप लगाया था कि उसके पति ने उसके साथ अप्राकृतिक सबंध बनाए और गुदाद्वार में भी लिंग डाला। महिला ने आरोप लगाया कि ऐसा उसके साथ कई बार हुआ और पति ने उसे धमकाया भी। महिला ने अपने पति के विरुद्ध मामला दर्ज करवाया था।

महिला के पति ने हाई कोर्ट में इस FIR को रद्द करने की याचिका लगाई थी। पति ने कोर्ट के सामने कहा कि उसका अपनी पत्नी के साथ किसी भी तरह के संबंध बनाना मैरिटल रेप की श्रेणी में नहीं आता। इस मामले की सुनवाई के दौरान हाई कोर्ट ने कहा कि गुदा मैथुन तब अपराध रेप माना जाएगा जब पति-पत्नी साथ रह ना रहे हों, यह तब अपराध नहीं हो सकता जब पत्नी-पति के साथ एक घर में रह रही थी। हाई कोर्ट ने कहा कि यदि पत्नी 15 वर्ष से कम की हो तो भी यह मैरिटल रेप माना जाता।

कोर्ट ने यह भी कहा वैसे तो भारत में बिना सहमति के किसी भी महिला के मुख और गुदा में लिंग डालना अपराध माना गया है लेकिन विवाहित और साथ रहे पति-पत्नी के बीच यह अपराध नहीं माना गया। कोर्ट ने इस मामले में दर्ज की गई FIR रद्द करने का आदेश दिया।