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हिन्दू के हृदय से बची मुस्लिम लड़की की जान, इमाम बोला- ये काफिर का दिल, बुतों के सामने झुकता था…

चेन्नई के एक अस्पताल में पाकिस्तानी युवती आएशा को हिन्दू व्यक्ति का ह्रदय लगाए जाने पर एक इमाम ने कहा है कि यह हृदय काफिर है। इमाम ने बताया कि यह ह्रदय पहले बुतों के सामने झुकता था और अब अल्लाह के सामने झुकेगा। इमाम का दावा है कि गैर मुस्लिम व्यक्ति ने भले ही पाकिस्तानी लड़की को ह्रदय दिया हो लेकिन उसका यह काम नेक नहीं है क्योंकि वह मुसलमान नहीं है। यह बातें कहने वाला इमाम पाकिस्तानी है। इसका एक वीडियो वायरल हो रहा है।

इसमें इमाम से जब एक यूट्यूबर ने इस मामले के विषय में पूछा तो उसने कहा कि पाकिस्तानी लड़की को ह्रदय देने वाला शख्स हिन्दू होकर मरा इसलिए उसका कोई भी शबाब नहीं गिना जाएगा। शबाब (पुण्य) पाने के लिए आदमी को मुसलमान हो कर मरना जरुरी है। इमाम ने कहा कि मुसलमान बच्ची की हिम्मत ये है कि उसने बुतों के सामने झुकने वाले का दिल रब (अल्लाह) के सामने झुका दिया। इमाम ने एक कहानी सुना कर बताया कि मुसलमान होकर मरना जरूरी है।

इमाम ने बताया कि काफिरों का कोई भी काम आखिरत (दुनिया के खात्मे) के समय गिना नहीं जाएगा। इमाम ने मुस्लिमों के अंगदान को भी गलत बताया। इमाम ने कहा कि बगैर जरूरत के रक्तदान भी जायज नहीं है। इमाम ने कहा कि जब रोगी की जान पर बन आए तभी रक्तदान होना चाहिए, ऐसे नहीं। इमाम ने इस बात पर गुस्सा जताया कि पाकिस्तान पूरी तरीके से इस्लामी नहीं है। उसने कहा कि पाकिस्तान के केवल नाम में ही इस्लामी बचा है।

गौरतलब है कि पाकिस्तानी के कराची की रहने वाली एक 19 वर्षीय मुस्लिम युवती आएशा को चेन्नई में जनवरी, 2024 में एक 68 वर्षीय हिन्दू व्यक्ति का ह्रदय लगाया गया था। हिन्दू व्यक्ति को अपस्ताल ने ब्रेन डेड घोषित कर दिया था जिसके बाद उनका अंगदान किया गया। इस ऑपरेशन के लिए लगे पैसों को भी भारत में ही इकट्ठा किया गया था। इसमें लगभग ₹30 से ₹40 लाख का खर्च आया। आएशा को अब अस्पताल से छुट्टी दे दी गई है। बताया गया कि आएशा का इलाज इस अपस्ताल से 2019 से ही चल रहा था।

इजरायल की महिला को प्रताड़ित कर खदेड़ दिया, भारतीय पर्यटकों पर हमला… जानिए कैसे मालदीव इस्लामी कट्टरपंथ का बना गढ़, सुनामी का आतंकी संगठनों ने उठाया फायदा

मालदीव के हुलहुमले में में 2 भारतीयों और वहाँ के स्थानीय लोगों के बीच सोमवार (29 अप्रैल, 2024) को वाद-विवाद की खबर आई है। घटना माले से 7 किलोमीटर उत्तर-पूर्व स्थित शहर के सेन्ट्रल पार्क की है। रात के 9 बजे के करीब हुई इस घटना में घायल 2 लोगों को अस्पताल में भर्ती कराया गया है। स्थानीय पुलिस ने हमले के आरोप में मालदीव के एक स्थानीय शख्स को गिरफ्तार किया है। घायलों को इलाज के बाद अस्पताल से रिहा कर दिया गया है।

इस घटना के अगले ही दिन इजरायल की एक महिला के साथ मालदीव के स्थानीय लोगों ने बदतमीजी की और उसे पीट खदेड़ दिया। मालदीव मल्टी पार्टी डेमोक्रेडिट सिस्टम के संस्थापक माउद मोहम्मद ज़की ने गर्व जताते हुए इस वीडियो को शेयर किया। उन्होंने इजरायली महिला की ब्लर की हुई तस्वीर शेयर करते हुए लिखा कि इजरायल नरसंहार करता है जबकि वहाँ की एक महिला मालदीव के एक द्वीप में घुसने की कोशिश कर रही थी। उन्होंने लिखा कि उक्त महिला वहाँ से एयरपोर्ट के लिए निकल गई, क्योंकि उसे पता चल गया कि मानवता उनलोगों का स्वागत नहीं कर सकती।

मालदीव में हमास आतंकियों और फिलिस्तीन का समर्थन

हाल ही में हमास आतंकियों ने इजरायल में घुस कर वहाँ के 1100 लोगों का नरसंहार किया। इसके बाद इजरायल ने भी जवाबी कार्रवाई की। मुस्लिम बहुल मालदीव ने इस मामले में फिलिस्तीन का समर्थन किया। अक्टूबर 2023 में हुए इस हमले में बच्चों और पालतू पशुओं तक को नहीं छोड़ा गया, महिलाओं से रेप हुआ, उनका नग्न परेड निकाला गया। ईरान और अल्जीरिया जैसे देशों ने भी फिलिस्तीन का समर्थन किया। मालदीव ने गाजा पट्टी में हिंसा पर चिंता ज़ाहिर की।

मालदीव ने कहा कि 1967 के पहले की भौगोलिक स्थिति के हिसाब से द्विराष्ट्रीय व्यवस्था ही इस समस्या का समाधान है, जिसके तहत पूर्वी जेरुसलम को फिलिस्तीन की राजधानी बनाई जाए। इजरायल के पर्यटकों और वहाँ के उत्पादों पर भी प्रतिबंध लगा दिया गया। वहाँ की संसद में प्रस्ताव पारित कर ये नियम बनाया गया। 14 अक्टूबर, 2023 को विल्लिंगिली के सांसद सऊद हुसैन ये प्रस्ताव लेकर आए, जिसे 41 सांसदों का समर्थन मिला।

मालदीव ने आरोप लगाया कि वेस्ट बैंक और गाजा पट्टी में इजरायली सेना अत्याचार कर रही है, साथ ही इसकी निंदा भी की। अधिकतर सांसदों ने इजरायल का पासपोर्ट रखने वालों की मुल्क में एंट्री बैन करने को कहा। इजरायल से आने वाली वस्तुओं पर प्रतिबंध लगाने को कहा गया, सरकार को सलाह दी गई कि वो इजरायल से कूटनीतिक संबंध तोड़ दे। विश्लेषकों का मानना है कि मालदीव इस्लामी कट्टरपंथी गतिविधियों का गढ़ बन गया है, न सिर्फ ISIS बल्कि जैश-ए-मुहम्मद और लश्कर-ए-तैय्यबा ने भी यहाँ ठिकाना बना रखा है।

पत्रकार गौरव सावंत ने कहा कि इजरायल की उक्त महिला को खुद को भाग्यशाली मानना चाहिए, वो वहाँ से जीवित निकलने में कामयाब हो गईं, वरना मालदीव में युवा उच्च-स्तर पर कट्टरपंथी बनाए जा रहे हैं। रिपोर्ट्स की मानें तो 2004 की सुनामी के बाद से ही मालदीव में कट्टरपंथ तेज़ी से प्रसारित होने लगा। 2022 की जनगणना को एक नज़र देखें तो मालदीव की 5.15 लाख जनसंख्या में 1.32 लाख विदेशी हैं। जिनमें अधिकतर दक्षिण एशियाई और पड़ोसी देशों के ही हैं जो ब्लू कॉलर्ड (फैक्ट्री वगैरह वाली नौकरियाँ) जॉब में काम करते हैं।

सांप्रदायिक इस्लामी विचारधारा में सना मालदीव

मालदीव में 189 द्वीप, 18 प्रवालद्वीप और 4 शहर हैं। सैकड़ों वर्षों तक मालदीव में बौद्ध धर्म का बोलबाला रहा। 12वीं शताब्दी में बड़े पैमाने पर इस्लामी धर्मांतरण हुआ। पाकिस्तान और सऊदी अरब से बड़ी संख्या में लोग स्थानीय जनसंख्या की मदद के नाम पर 2004 में राजधानी माले में बसे। इनमें से अधिकतर सांप्रदायिक व सशस्त्र समूहों का हिस्सा थे, जैसे – खिदमत-ए-खल्क और लश्कर-ए-तैय्यबा चैरिटी विंग। इन्होंने जोर-शोर से सांप्रदायिक इस्लाम का प्रचार-प्रसार शुरू किया।

जब इन समूहों ने मालदीव छोड़ा तब वो बड़ी संख्या में वहाँ के किशोरों और युवाओं को कट्टरपंथ का प्रशिक्षण देने के लिए अपने साथ पाकिस्तान और सऊदी अरब ले गए। इस तथाकथित चैरिटेबल यूनिट को अमेरिका ने भी अप्रैल 2006 में आतंकी संगठन घोषित किया। दिसंबर 2011 में कैलिफोर्निया यूनिवर्सिटी में प्रकाशित एक रिसर्च पेपर के अनुसार, राजधानी माले कट्टरपंथ का सबसे ज्यादा शिकार हुआ। इस रिसर्च पेपर को प्रकाशित करने वाले हस्सन आमिर अब मालदीव की नेशनल फोर्स में एक वरिष्ठ अधिकारी हैं।

उनका मानना है कि 1990 के दशक से ही मालदीव के लोगों में इस्लामी कट्टरपंथ का ज़हर बोया जाने लगा था। उन्होंने बताया कि पाकिस्तान जामिया-अल-सलफ़िया द्वारा पाकिस्तान में चलाए जा रहे शिक्षण संस्थानों में भर्ती होने वाले एक दर्जन से भी अधिक युवाओं को कयूम की सरकार के खिलाफ भड़काया गया। शरिया पर आधारित सरकार की स्थापना के लिए उनमें तख्तापलट के विचार डाले गए। पाकिस्तान में मालदीव के इन युवाओं को गिरफ्तार भी किया गया, लेकिन फिर बाद में वो बिना किसी भय के द्वीपों पर इस्लामी कट्टरंथ का प्रचार-प्रसार करने लगे।

अफगान युद्ध के दौरान पाकिस्तान के मदरसों में पढ़ने वाले कई छात्र इसका हिस्सा बने। 2004 के सुनामी से मालदीव में भारी तबाही आई, आतंकी समूहों ने इसका फायदा उठाया। चैरिटी की आड़ में इन्होंने लोगों को वित्तीय मदद दी, राहत कार्य में हाथ बँटाया। लामू प्रवालद्वीप क्षेत्र में इसका ज्यादा असर दिखा। आपदा पीड़ित युवाओं को पाकिस्तानी शैक्षिक संस्थानों में भर्ती कराया गया, उनका ब्रेनवॉश किया गया। इस तरह मालदीव के युवा पूरी तरह उनके चंगुल में आ गए।

1400 कट्टरपंथी, जो इस्लाम के लिए हत्याएँ करने को तैयार

2007 में हुए सुल्तान पार्क बम ब्लास्ट के आतंकियों में से एक मूसा इनास आपदा के मददगारों में शामिल था, जिसके पीछे कोई रहस्यमयी वित्तीय ताकत थी। इस हमले में 12 अंतरराष्ट्रीय पर्यटक घायल हुए थे। इद्रा खिदमत-ए-खल्क जैसे चैरिटी संस्था बनाए गए। IKK का कनेक्शन अहल-ए-हदीथ से है, उसने भी खुद को मालदीव में स्थापित किया। IKK तब्लीग को समर्पित जमात-उल-दावा से भी जुड़ा हुआ है। ये भारत में कई हमले करने वाले लश्कर-ए-तैय्यबा से भी अधिक खतरनाक है।

मालदीव के इस्लामी मंत्रालय ने दिसंबर 2019 में 3 प्रोफेसरों को निलंबित किया, जो आतंकी विचारधारा का प्रसार कर रहे थे। आरोप लगाया गया कि वो घृणा फैला रहे थे, अमानवीय कृत्यों को बढ़ावा दे रहे थे, और अन्य देशों में गृहयुद्ध के लिए उकसा रहे थे। उसी दौरान ये खुलासा हुआ कि मालदीव में 1400 कट्टरपंथी इस्लाम के लिए खून बहाने को तैयार हैं। सीरिया और इराक में ISIS के लिए लड़ने वालों में सबसे ज्यादा मालदीव के ही लोग थे। 2013-18 तक ये स्थिति और भयवाह रही।

याद दिलाते चलें कि कुछ महीने पहले प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने लक्षद्वीप के पर्यटन को वहाँ जाकर प्रमोट किया, जिसके बाद मालदीव के 3 मंत्रियों ने उन पर आपत्तिजनक टिप्पणी की। विरोध के बाद उन तीनों को बाहर का रास्ता दिखाया गया। फिर मालदीव के राष्ट्रपति मोहम्मद मुइज्जु ने भारत की सेना की एक टुकड़ी को वहाँ से जाने का आदेश दे दिया। भारतीय पर्यटकों ने मालदीव का बॉयकॉट भी किया। हाल ही में भगवान की प्रतिमा रखने के आरोप में 3 भारतीयों को वहाँ गिरफ्तार कर लिया गया था।

पहली बार ₹2 लाख करोड़ के पार पहुँचा GST कलेक्शन, अप्रैल 2024 में हुई सरकार की बम्पर कमाई: उद्योग धंधों में तेजी बरकरार

अप्रैल, 2024 में वस्तु एवं सेवा कर (GST) का संग्रह रिकॉर्ड ₹2 लाख करोड़ के पार पहुँच गया। वित्त वर्ष 2024-25 के पहले महीने में ही केंद्र सरकार और राज्य सरकारों की बम्पर कमाई हुई। महाराष्ट्र और कर्नाटक जैसे राज्यों ने GST संग्रह में बड़ी बढ़त दिखाई।

वित्त मंत्रालय द्वारा बुधवार (1 मई, 2024) को जारी किए गए आँकड़े के अनुसार, अप्रैल माह में GST संग्रह कुल ₹2,10,267 करोड़ रहा। इसमें अप्रैल 2023 की तुलना में 12.4% की बढ़त देखी गई। मार्च महीने में GST का संग्रह ₹1.78 लाख करोड़ रहा था, उसके मुकाबले इसमें लगभग 20% की बढ़त देखी गई।

वित्त मंत्रालय द्वारा दी गई जानकारी के अनुसार, GST के केन्द्रीय हिस्से (CGST) के रूप में सरकार को ₹43,846 करोड़ की कमाई हुई। जबकि राज्यों को इससे ₹53,538 करोड़ की कमाई हुई। इसके अलावा एक राज्य से दूसरे राज्य के बीच माल जाने पर लगने वाला GST ₹99,623 करोड़ रहा। इसके अलावा ₹13,260 करोड़ की कमाई सेस से भी हुई।

GST से केंद्र को होने वाली कुल कमाई अप्रैल महीने में ₹94,153 करोड़ जबकि राज्यों को मिलने वाली GST ₹95,138 करोड़ रहा। GST के संग्रह ने पहली बार ₹2 लाख करोड़ का आँकड़ा पार किया है। सबसे अधिक GST महाराष्ट्र से संग्रहित किया गया, यहाँ से ₹37,671 करोड़ की कमाई हुई।

गौरतलब है कि GST को 1 जुलाई, 2017 को लागू किया गया था। इसके कारण देश के करों का जंजाल खत्म करने में सहायता मिली थी। GST में 17 अलग-अलग तरह के करों को समाहित कर दिया गया। GST के लिए एक एकीकृत पोर्टल भी लाया गया।

यहाँ आसानी ने GST जमा किया जा सकता था। GST के कारण सरकार को भी बम्पर कमाई होना चालू हुई। वित्त वर्ष 2023-24 में सरकार को ₹20.18 लाख करोड़ की कमाई हुई थी। इसकी तुलना अगर GST से पहले के समय से की जाए तो यह 2016-17 के दौरान मात्र ₹3.19 लाख करोड़ था। यानी GST के बाद इसमें लगभग 6 गुने की वृद्धि हुई है।

टैबलेट खिलाकर बच्ची से करता था रेप, अब सेक्स के बिना नहीं रह सकती: हाई कोर्ट ने माना यौन प्रताड़ना की वजह से हुई ‘निम्फोमैनियाक’, बेल देने से इनकार

बॉम्बे हाई कोर्ट ने एक लड़की का 10 साल की उम्र से एक लड़की का रेप करने के आरोपित को जमानत देने से इनकार कर दिया है। इतनी छोटी उम्र से रेप का शिकार बनने का बाद यह लड़की आगे चलकर यौन विकार से ग्रस्त होकर निम्फोमेनिक (Nymphomaniac) हो गई है। यानी पीड़िता अब अपनी यौन इच्छा को रोक नहीं पाती और उसके बिना रह नहीं पाती। अदालत ने इसे बेहद भयावह बताया।

बॉम्बे हाई कोर्ट के न्यायमूर्ति पृथ्वीराज चव्हाण की एकल पीठ ने सोमवार (29 अप्रैल 2024) को अपने फैसले में आरोपित द्वारा दायर जमानत याचिका को खारिज कर दिया। इसके साथ न्यायमूर्ति चव्हाण ने कहा कि अपराध न केवल एक विवेकशील व्यक्ति की अंतरात्मा को झकझोरने वाला है, बल्कि बेहद अप्रिय भी है। ऐसे भयानक अपराध के कारण पीड़िता एक निम्फोमेनियाक बन गई है।

उच्च न्यायालय ने अपने आदेश में शब्दश: पीड़िता द्वारा अपनी आपबीती का वर्णन करते हुए लिखी गई 27 पेज की डायरी का हवाला दिया। अदालत ने कहा, “उसकी मानसिक, मनोवैज्ञानिक और शारीरिक स्थिति और आरोपित के हाथों हुई दरिंदगी के प्रभाव का वर्णन करने के लिए शब्द कम पड़ जाएँगे।”

पीड़िता के पिता ने कहा कि वह दुबई में काम करते थे। इस बात का फायदा आरोपित और उसकी पत्नी ने उठाया। लड़की के माता-पिता ने कहा कि उन्हें इस बात की जानकारी साल 2021 में पीड़िता की डायरी से मिली। तब 17 साल की पीड़िता की डायरी उसके कमरे से मिली थी। दरअसल, यह लड़की एक लड़के के साथ भाग गई थी जिसके बाद उसके माता-पिता ने उसके कमरे की तलाशी ली थी।

अपनी डायरी में पीड़िता ने लिखा था कि आरोपित ने उसके साथ तब से रेप करना शुरू किया, जब वह चौथी कक्षा में पढ़ती थी। इस बात से आरोपित की पत्नी भी अवगत है। पीड़िता ने यह भी लिखा है कि आरोपित अक्सर उसे एक टैबलेट खिलाता था, जिसके कारण वह यौन रूप से उत्तेजित हो जाती थी।

इस डायरी को पढ़ने के बाद पीड़िता के माता-पिता ने साल 2021 में आरोपित और उसकी पत्नी के खिलाफ मामला दर्ज करवाया। इस मामले में विशेष अदालत ने आरोपित पत्नी को जमानत दे दी, लेकिन आरोपित पत्नी को जमानत देने से इनकार कर दिया। इसके बाद आरोपित ने बॉम्बे हाई कोर्ट का रूख किया था।

उच्च न्यायालय ने यह भी कहा कि आरोपित की पत्नी ने जानबूझकर और गैर-कानूनी कृत्यों में सहायता की और उकसाया। इसलिए वह भी समान रूप से दोषी प्रतीत होती है। पीठ ने यह भी कहा कि लड़की की डायरी में यह भी कहा गया है कि उसने कथित बलात्कार के बारे में अपनी माँ को बहुत पहले ही बता दिया था, लेकिन सामाजिक कलंक के कारण माँ ने कोई कार्रवाई नहीं की।

उच्च न्यायालय ने कहा कि ज्यादातर मामलों में यौन शोषण करने वाले बच्चे के परिचित व्यक्ति होते हैं। ऐसे में आरोपित को जमानत देना पीड़िता के घावों को और अधिक बढ़ाने एवं दुखाने जैसा होगा, जो कि अभी भी पीड़िता के दिमाग, शरीर और आत्मा में ताजा है।

लश्कर से लिंक, शरजील इमाम से लेकर नक्सलियों तक पहुँचाए पैसे: चीनी पोपट NewsClick के फाउंडर प्रबीर पुरकायस्थ की पोल दिल्ली पुलिस ने चार्जशीट में खोली

दिल्ली पुलिस की स्पेशल सेल ने न्यूज़क्लिक के फाउंडर-एडिटर प्रबीर पुरकायस्थ के खिलाफ 8000 पन्नों की चार्जशीट दायर की है, जिसमें प्रतिबंधित इस्लामिक आतंकी संगठन लश्कर-ए-तैयबा (एलईटी) के साथ उनके संबंधों का खुलासा किया गया है। चार्जशीट के मुताबिक, प्रबीर पुरकायस्थ का लश्कर आतंकियों के साथ भी जुड़ाव रहा है और वो लश्कर के आतंकियों को फंडिंग भी करते थे।

दिल्ली पुलिस के अनुसार, न्यूज़क्लिक संस्थापक राष्ट्रीय नागरिक रजिस्टर (एनआरसी) और नागरिकता संशोधन अधिनियम (सीएए) के विरोध के बहाने दुष्प्रचार अभियान का नेतृत्व कर रहा था। स्पेशल सेल ने कहा कि फंड लश्कर-ए-तैयबा (एलईटी) को दिया गया था, जो यूए(पी)ए- 1967 की पहली अनुसूची के तहत प्रतिबंधित आतंकवादी संगठन है, जो जम्मू-कश्मीर में सक्रिय है और कई आतंकी हमलों के लिए जिम्मेदार है।

चार्जशीट के मुताबिक, प्रबीर पुरकायस्थ सीएए और एनआरसी के विरोध प्रदर्शनों के दौरान खूब सक्रिय था और अपने कर्मचारियों के माध्यम से दंगाइयों तक पैसे पहुँचा रहा था। वो न्यूजक्लिक के माध्यम से एनआरसी और सीएए के विरोध में माहौल भी बना रहा था। पुलिस ने बताया है कि प्रबीर ने जिन लोगों को पैसे देकर दंगे फैलाने में सहायता की, उनमें से शरजीम इमाम जैसे लोग दिल्ली के हिंदू-विरोधी दंगों और आतंकी संगठनों से साँठगाँठ के आरोपों में जेल में बंद हैं। उन पर यूएपीए जैसे मामलों में केस चल रहे हैं। इन दंगाइयों में वे लोग शामिल हैं जिन्होंने सीएए विरोधी प्रदर्शनों के दौरान शाहीन बाग और चांद बाग में उत्पात मचाया था और तथाकथित किसान भी शामिल हैं जिन्होंने देश की राजधानी में कृषि कानूनों के खिलाफ विरोध प्रदर्शन किया था।

कोरोना के दौरान वैक्सीन को लेकर फैलाई अफवाह

दिल्ली पुलिस की स्पेशल सेल ने चार्जशीट में बताया है कि प्रबीर पुरकायस्थ और उसकी कंपनी न्यूजक्लिक ने कोविड-19 के दौरान चीनी कम्युनिस्ट पार्टी (सीसीपी) के सदस्य नेविल रॉय सिंघम के साथ मिलकर भारत सरकार को बदनाम करने की कोशिश की। उन्होंने भारत सरकार की विफलता को हाईलाइट करने किया और भारतीय कंपनी द्वारा बनाए गए को-वैक्सीन की आलोचना वाले लेख प्रकाशित किए, ताकि भारत के आम जनमानस में सरकार के खिलाफ असंतोष और गुस्सा भड़के।

नक्सलियों को दी फंडिंग

चार्जशीट के मुताबिक, प्रबीर पुरकायस्थ ने ‘अर्बन नक्सली’ गौतम नवलखा के साथ मिलकर नक्सलियों को हिंसा बढ़ाने के लिए फंडिंग दी, ताकि छत्तीसगढ़, तेलंगाना, आँध्र प्रदेश जैसे नक्सल प्रभावित इलाकों में नक्सली हिंसा बढ़े।

पुलिस ने कहा कि ईमेल के रूप में सबूत हैं कि साजिश 2016 में शुरू हुई और अपने उद्देश्य के अनुसार, पीपीके न्यूज़क्लिक को पीपीके न्यूज़क्लिक स्टूडियो प्राइवेट लिमिटेड में बदल दिया गया ताकि भारत में आतंकवादी कृत्य और गैरकानूनी गतिविधियाँ के लिए धन उगाही की जा सके। न्यूज़क्लिक को 91 करोड़ रुपये मिले, जिसका इस्तेमाल बाद में आतंकवादी गतिविधियों के लिए किया गया। पीपी न्यूज़क्लिक इंडिया एलएलपी को एक निजी कंपनी में बदल दिया गया ताकि निवेश और सेवा समझौते की आड़ में धन दिया जा सके।

पुरकायस्थ के न्यूज़क्लिक पर कश्मीर और अरुणाचल प्रदेश के मानचित्र के साथ छेड़छाड़ करने का आरोप है। इसने कथित तौर पर चीनी मानचित्र को बदल दिया ताकि अक्साई चिन को चीन के हिस्से के रूप में शामिल किया जा सके और एक समाचार बुलेटिन में भारत को कश्मीर के बिना दिखाया गया।

चार्जशीट में बताया गया है कि इस मामले में कुल 8 गवाह हैं, जिसमें से 5 न्यूजक्लिक के साथ जुड़े हुए हैं। इसमें से एक अमित चक्रवर्ती भी हैं, जो गिरफ्तारी के बाद गवाह बन गए और कोर्ट ने उन्हें माफी दे दी, इसलिए उनके खिलाफ कोई चार्जशीट दाखिल नहीं दी जा रही।

प्रबीर पुरकायस्थ के खिलाफ 3 अहम गवाह

प्रबीर पुरकायस्थ के खिलाफ कई अहम गवाह भी हैं। इस केस से जुड़े गवाहों की पहचान गुप्त रखी गई है। उन्हें गामा-1, गामा-2 और गामा-3 नाम दिया गया है। इसमें ‘गामा-1’ ने बताया है, कि “सीएए विरोध प्रदर्शन के दौरान, पुरकायस्थ कर्मचारियों को भाग लेने के लिए भेजते थे और मुस्लिम समुदाय को हिंसक कृत्य और दंगे करने के लिए उकसाते थे। वह दंगाइयों के बीच बाँटने के लिए न्यूजक्लिक के कर्मचारियों को पैसे देता था। प्रबीर पुरकास्थ, चक्रवर्ती और इस गैंग के अधिकतर सदस्य वामपंथी और माओवादी विचार धारा वाले हैं, जिस्हें चीन की कम्युनिष्ट पार्टी से फंड मिलता था।”

एक अन्य गवाह ‘गामा2’ ने कहा कि न्यूज़क्लिक के संस्थापक ने इस्लामी चरमपंथी शरजील इमाम को पैसे देने के लिए एक व्यक्ति को शाहीन बाग भेजा था, जो वर्तमान में हिंदू विरोधी दिल्ली दंगों में अपनी भूमिका के लिए सलाखों के पीछे है। उन्होंने कहा, “इस पैसे से उसे (इमाम को) हिंसा और दंगा भड़काने के लिए हथियार और अन्य उपकरण खरीदने चाहिए।” ‘गामा2’ ने यह भी गवाही दी कि हिंसा भड़काने के लिए बाद में महाराष्ट्र, आंध्र प्रदेश और तेलंगाना में नक्सलियों को पैसा भेजा गया था। ‘गामा3’ ने बताया, “फंड (न्यूज़क्लिक द्वारा प्राप्त) का इस्तेमाल सीएए/एनआरसी विरोध, किसानों के आंदोलन, अनुच्छेद 370 के निरस्तीकरण के खिलाफ कश्मीरी अलगाववादियों और माओवादी समूहों के समर्थन में किया गया था।”

बता दें कि न्यूज़क्लिक के संस्थापक को 3 अक्टूबर, 2023 को कंपनी के एचआर हेड अमित चक्रवर्ती के साथ संयुक्त राज्य अमेरिका के रास्ते चीन से अवैध धन प्राप्त करने के आरोप में गिरफ्तार किया गया था। इसमें से अजय चक्रवर्ती बाद में सरकारी बवाह बन गया।

मूल रूप से ये समाचार अंग्रेजी भाषा में प्रकाशित किया गया है। मूल रिपोर्ट पढ़ने के लिए यहाँ क्लिक करें।

कॉन्ग्रेस के OBC ‘प्रेम’ की पीड़ित पत्रकारों ने खोली पोल, एक ने बताया- हिंदू राष्ट्र ट्वीट करने पर नौकरी से निकलवाया: बोले अशोक श्रीवास्तव- 100 पत्रकार रातोंरात नपे थे

राहुल गाँधी लगातार अपनी रैलियों में OBC-OBC का रट्टा लगाते रहते हैं। कभी वो कहते हैं कि देश चलाने वाले अधिकारियों में कोई पिछड़ा नहीं है तो कभी वो पूछते हैं कि मीडिया में कितने पत्रकार OBC हैं? अब ‘Zee News’ में कार्यरत रहे दीपक चौरसिया ने खुलासा किया है कि UPA काल में उनके साथ कैसा व्यवहार हुआ था। ‘इंडिया टीवी’ पर एक चर्चा के दौरान उन्होंने पिछली बातों को याद किया। असल में केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह के एक वीडियो को लेकर चर्चा चल रही थी।

अमित शाह ने एक रैली के दौरान कहा था कि कॉन्ग्रेस पार्टी अगर सत्ता में आ गई तो वो पिछड़ों, दलितों और जनजातीय समाज का आरक्षण छीन कर मुस्लिमों को दे देगी। कॉन्ग्रेस की तेलंगाना यूनिट ने इस वीडियो के साथ छेड़छाड़ कर अमित शाह को ये कहते हुए दिखा दिया कि भाजपा SC, ST और OBC का आरक्षण हटा देगी। जबकि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी कई बार कह चुके हैं कि आरक्षण को कोई छू भी नहीं सकता। इस मामले में तेलंगाना के मुख्यमंत्री रेवंत रेड्डी पर FIR हुई है, असम से कॉन्ग्रेस नेता रीतम सिंह गिरफ्तार हुआ है।

दीपक चौरसिया ने इस पर चर्चा के दौरान बताया, “मैं बड़े दिल से एक बात कहना चाहता हूँ। आरक्षण पर कॉन्ग्रेस पार्टी ने जितना फेक नैरेटिव फैलाया है, ऐसा कभी नहीं हुआ। मैं सच बोलूँ तो आधे लोगों को पता नहीं होगा। मैंने राहुल गाँधी का एक वीडियो देखा, जिसमें वो OBC पत्रकार ढूँढ रहे हैं। मैं हूँ न, मैं सामने बैठा हूँ। 2004 में राहुल गाँधी और उनकी पार्टी ने मुझे दूरदर्शन से निकाल कर बाहर कर दिया था। मैं DD का हेड था। मैं ओबीसी पत्रकार था, तब उनको नहीं दिखाई दिया।”

उन्होंने कहा कि राहुल गाँधी और उनके आसपास के लोगों को ये तक नहीं पता होगा कि उत्तर प्रदेश में OBC की कौन सी बड़ी जातियाँ हैं। उन्होंने बताया कि राहुल गाँधी की तरफ से आज पूरी कॉन्ग्रेस को चला रहे KC वेणुगोपाल को उत्तर भारत की 5 ओबीसी जातियों के नाम नहीं पता होंगे। राहुल गाँधी के मौजूदा सलाहकार जयराम रमेश को लेकर भी उन्होंने यही दावा किया। दीपक चौरसिया ने बताया कि इस घटना का जिक्र उन्होंने 20 साल बाद किया है, वो इस पर ज़्यादा बोलना नहीं चाहते।

DD न्यूज़ में कार्यकर्त पत्रकार अशोक श्रीवास्तव ने उनके इस दावे की पुष्टि की है। उन्होंने कहा कि आज दीपक चौरसिया ने यह सार्वजनिक रूप से स्वीकार किया कि 2004 में कॉन्ग्रेस की, सोनिया गाँधी- राहुल गाँधी की सरकार आते ही उन्हें डीडी से निकाल दिया गया था जबकि वो ओबीसी पत्रकार हैं। बकौल अशोक श्रीवास्तव, इसका खुलासा उन्होंने अपनी पहली पुस्तक ‘Narendra Modi Censored’ में किया था। उन्होंने बड़ी जानकारी दी कि अकेले दीपक चौरसिया ही नहीं, करीब 100 पत्रकारों को रातोंरात दूरदर्शन ने टारगेट करके निकाल दिया गया था।

अशोक श्रीवास्तव ने तंज कसा कि आज यही कॉन्ग्रेस अपने घोषणा-पत्र में मीडिया को ‘आज़ादी’ का देने ढिंढोरा पीट रही है। OBC समाज से आने वाले राजस्थान के एक अन्य सक्रिय पत्रकार जीतेश जेठानंदानी ने भी इस दौरान अपनी पीड़ा व्यक्त की। उन्होंने बताया कि जब वो ‘TV9 भारतवर्ष’ में राजस्थान ब्योरो देख रहे थे, तब उन्हें एक ट्वीट के कारण नौकरी से निकाल दिया गया था। उस ट्वीट में उन्होंने लिखा था कि भारत हिन्दू राष्ट्र था, हिन्दू राष्ट्र है और हिन्दू राष्ट्र रहेगा।

जीतेश जेठानंदानी ने बताया कि उस दौरान भाजपा की ही सरकार थी, लेकिन कॉन्ग्रेस नेताओं, कवि कुमार विश्वास और कुछ वामपंथी नेताओं के दबाव के कारण उन्हें नौकरी से हाथ धोना पड़ा। उन्होंने कहा कि वो इसका सबूत भी दे सकते हैं। उन्होंने अपनी व्यथा व्यक्त करते हुए बताया कि आज भी उन्हें अपने बच्चों की स्कूल फीस भरने में परेशानी हो रही है। हालाँकि, उन्होंने बताया कि ‘राष्ट्र प्रथम’ का उद्देश्य रखने वाले कुछ संगठनों ने उनकी मदद ज़रूर की, लेकिन भाजपा राज में भी मीडिया की स्थिति वही है।

छिनतई का है कॉन्ग्रेस का इरादा, पार्टी नेता मनीष तिवारी ने भी किया कन्फर्म: कहा- सबमें बँटेगा… खतरे से पहले ही आगाह कर चुके हैं PM मोदी

कॉन्ग्रेस देश के लोगों की संपत्ति लेकर दूसरों को बाँटने के अपने प्लॉन पर अडिग है। हाल में इस बात की पुष्टि कॉन्ग्रेस नेता मनीष तिवारी के एक्स पोस्ट से भी हुई। अपने पोस्ट में मनीष तिवारी ने कहा कि वो अमीरों से उनके पैसे लेकर गरीबों को अमीर बनाएँगे। उन्होंने कहा है कि वो देश की 1 फीसद जनता को देश की 77% संपत्ति कब्जा नहीं करने देंगे।

ध्यान देने योग्य बिंदु यह है कि कॉन्ग्रेस अपने वादों में गरीबों की स्थिति सुधारने की बात जॉब देने के वादे करके नहीं कर रही, बल्कि अगर कोई व्यक्ति मेहनत के दम पर अमीर हुआ है तो उसकी संपत्ति का हिस्सा लेकर दूसरों को देने के लिए कह रही है ताकि सब एक बराबर गरीब हो सकें।

अपने पोस्ट में मनीष तिवारी ने ‘थरूर’ स्टाइल में अंग्रेजी लिखी। अपने पोस्ट में उन्होंने चैबोल (Chaebol) और ओलीगार्चीज (Oligarchies) जैसे शब्द प्रयोग किए। इनमें चैबोल का अर्थ कोरियाई भाषा में होता है कि संपत्ति जिसका स्वामित्व आमतौर पर एक परिवार के पास होता है। वहीं ‘ओलिगार्की’ (Oligarchy) सामाजिक संगठन का वह स्वरूप है जिसमें राजनीतिक शक्ति मुख्य रूप से धनवान अभिजात्य वर्ग के हाथों में होती है।

तिवारी ने कॉन्ग्रेस पार्टी की यह मंशा पॉलिटिकल कमेंटेटर तुषार गुप्ता के ट्वीट पर जाहिर की। तुषार गुप्ता ने कॉन्ग्रेस का मेनिफेस्टो शेयर करके 28वें पृष्ठ पर 21 बिंदु पर गौर कराया था जिसमें कॉन्ग्रेस ने लिखा था, “हम नीतियों में उपयुक्त बदलावों के माध्यम से धन और आय की बढ़ती असमानता को सही करेंगे।” इसी ट्वीट पर मनीष तिवारी ने अपना जवाब दिया।

जिसके बाद तुषार गुप्ता ने उन्हें जवाब में कहा कि अगर कॉन्ग्रेस के प्लान के मुताबिक चीजें चलती हैं तो 1 फीसद की श्रेणी में कॉन्ग्रेस नेता मनीष तिवारी खुद भी आएँगे। लोकसभा चुनाव 2019 में जमा कराए गए हलफनामे के अनुसार मनीष तिवारी 15 करोड़ रुपए की संपत्ति के मालिक हैं।

वहीं ऑपइंडिया से बात करते हुए भी तुषार गुप्ता ने कहा कि अगर कॉन्ग्रेस मेनिफेस्टो के पेज नंबर 28 के प्वाइंट नंबर 21 का अर्थ ये है कि हर किसी को संपत्ति से बराबर पैसा मिलेगा, चाहे उसकी वो कमाई हो या विरासत में मिली तो हमें तैयार रहना चाहिए इस बात के लिए कि राहुल गाँधी की कॉन्ग्रेस देश को सामंतवाद की ओर ढकेल रही है।

बता दें कि 21 अप्रैल से लगातार पीएम मोदी जनता को इस बारे में बता रहे हैं कि कॉन्ग्रेस की मंशा क्या है और वो कैसे सत्ता में आने के बाद लोगों की संपत्ति के बँटवारे का प्लान बनाकर बैठे हैं। पीएम द्वारा इस मुद्दे को उठाने के बाद कॉन्ग्रेस ने उन्हें ‘डर फैलाने वाला’ तक कहा। हालाँकि, अब तिवारी के कमेंट के बाद ऐसा लग रहा है कि पीएम मोदी द्वारा दी जा रही चेतावनी सही हो सकती है कि सबको एक बराबर करने के नाम पर कॉन्ग्रेस गरीबों को विरासत में मिली संपत्ति और समृद्ध परिवार की संपत्ति को भी दूसरों में बाँट सकें। कॉन्ग्रेस ने अपने मेनिफेस्टों में जो बातें कही हैं उन्हें लेकर उन्होंने ये नहीं बताया कि ये लागू कैसे होगा। न ही ये बताया है कि संपत्ति का बँटवारा किस हिसाब से होगा।

इस रिपोर्ट को मूल रूप से अंग्रेजी में लिखा गया है। आप पूरी रिपोर्ट इस लिंक पर क्लिक करके पढ़ सकते हैं।

मणिपुर में सेना ने गोला-बारूद के साथ उपद्रवियों को पकड़ा, महिलाओं ने काफिला रोक 11 को छुड़ाया: हथियार छीनने की भी कोशिश

मणिपुर में भारतीय सेना के काफिले को रोककर उपद्रवियों को रिहा कराने की घटना सामने आई है। बताया जा रहा है कि 30 अप्रैल 2024 को भारतीय सेना अपने साथ वो हथियार और गोला बारूद लेकर जा रहे थे, जो उन्होंने बिष्णुपुर में कुछ वाहनों से जब्त किए थे। लेकिन, इस बीच रास्ते में महिलाओं का एक ग्रुप आया और काफिला रोककर उनसे सारी जब्ती छुड़ाने की बात कहने लगा। इतना ही नहीं महिलाओं के उस समूह ने 11 उपद्रवियों को भी रिहा कराया।

घटना मंगलवार को बिष्णुपुर के पास की है। महार रेजीमेंट के सैन्यकर्मियों द्वारा कुंबी इलाके में की जा रही पैट्रोलिंग के दौरान उन्होंने दो एसयूवी रोकी, जिसके बाद उस वाहन में बैठे लोग हथियार छोड़ फरार हो गए। जवान इन हथियारों को अपने साथ ला ही रहे थे कि मौके पर सैंकड़ों महिलाएँ इकट्ठा हो गईं। उन्होंने सुरक्षाकर्मियों से जब्त किए गए हथियार लेने के लिए सड़क को जाम कर दिया।

सेना ने सबको तितर-बितर करने के लिए हवा में गोलियाँ चलाईं लेकिन कोई सड़क से हटने को तैयार नहीं हुई। घटना की जानकारी होने पर राज्य पुलिस बल भी वहाँ पहुँची। पुलिस को सेना के जवानों ने बताया कि उनके कई प्रयासों के बावजूद आक्रामक टकराव के दौरान महिलाओं ने 11 लोगों को छुड़ा लिया है और हथियार लेने का भी जोर दे रही है। पुलिस से हुई बातचीत के बाद इस मामले में इस बात पर सहमति बनी कि सेना जो हथियार ले जा रही है वो पुलिस को सौंप देगी।

इस बीच सोशल मीडिया पर कुछ वीडियो सामने आई है जिनमें सैंकड़ों महिलाएँ सड़क जाम करते और सेना के काफिले को इलाके से निकलने से रोकने के लिए हल्ला मचाती दिख रही हैं। वहीं भीड़ को तितर-बितर करने के लिए पुलिस भी हवाई फायरिंग कर रही है। वहीं भीड़ को तितर-बितर करने के लिए पुलिस भी हवाई फायरिंग कर रही है।

इस घटना के संबंध में मणिपुर पुलिस ने भी पुष्टि की है। हालाँकि उन्होंने 11 उपद्रवियों की पहचान को उजागर नहीं किया है। सिर्फ बताया है कि महार रेजीमेंट ने 11 हथियारों से लैस उपद्रवियों को पकड़ा था जो पुलिस वर्दी में थे लेकिन वापसी में ‘मीरा पैबिस’ – मैतेई महिलाओं के एक नागरिक समूह ने उन्हें छुड़ा लिया। आर्मी को अपनी कार्रवाई के दौरान 3 राइफल, 5 INSAS (13 मैगजीन और 260 गोला-बारूद) और 2 SLRs (9 मैगजीन और 180 गोला-बारूद), 2 ग्रेनेड और बुलेट प्रूफ जैकेट भी मिली है। स्थिति अब सामान्य है।

कम उम्र में वासना और प्रेम में डूबे थे दोनों, लड़के को बना दिया ‘बलि का बकरा’: हाई कोर्ट ने सजा घटाई, कहा- POCSO के तहत माफी का प्रावधान नहीं

मेघालय हाई कोर्ट ने अहम फैसले में पॉक्सो एक्ट के तहत दोषी ठहराए गए व्यक्ति की सजा उम्रकैद से घटाकर 10 साल कर दी है और 10 हजार का जुर्माना न भरने की एवज में 1 माह की अतिरिक्ट सजा काटने का आदेश दिया है। कोर्ट ने इस मामले में सहमति पाने के बाद फैसला दिया है। मेघालय हाई कोर्ट ने अपने फैसले में कहा कि लड़की भले ही 13 साल से अधिक थी, लेकिन इस मामले में अपहरण या जबरदस्ती का कोई सबूत नहीं मिला। चूँकि दोनों ने शादी की थी, इसलिए पॉक्सो एक्ट में दी गई सजा को उम्रकैद से घटाकर 10 साल की जाती है।

लाइव लॉ की रिपोर्ट के मुताबिक, मेघालय हाई कोर्ट के चीफ जस्टिस एस. वैद्यनाथन और जस्टिस डब्ल्यू. डिएंगदोह की बेंच ने अपने फैसले में शिलॉन्ग कोर्ट के फैसले में बदलाव किया है। कोर्ट ने अपने फैसले में कहा, ‘दुर्भाग्य से लड़के को दोनों (लड़के और लड़की) की गलतियों/उकसावे के लिए सजा सुनाई गई है, ये बलि का बकरा बनाने जैसा हुआ, क्योंकि लड़की एक खुशहाल जीवन जी रही है, जबकि लड़का उम्रकैद की सजा काट रहा है। चूँकि पॉक्सो एक्ट में सजा को माफ करने का कोई प्रावधान नहीं है, इसलिए सजा को कम किया जाता है।’ कोर्ट ने पाया कि ‘लड़की अपने पुरुष मित्र के साथ अपनी सहमति से उसके साथ भागी थी, जोकि उसके खुद के बयान (161 के बयान) से साफ है।’

बचाव पक्ष ने ये भी कहा कि लड़की की उम्र 17 साल थी। हालाँकि हड्डियों की जाँच में ये साबित हुआ कि लड़की की उम्र 13 साल से अधिक थी। इस मामले में विसंगति पाए जाने पर कोर्ट ने दोषी को संदेह का लाभ दिया। कोर्ट ने वकील के उस दलील को स्वीकार किया, जिसमें वकील ने कहा, ‘लड़का और लड़की एक रोमांटिक रिश्ते में थे। उन्होंने अपनी मर्जी से अपने घर छोड़े और शादी कर ली। इसके बाद दोनों ने यौन संबंध बनाए।’ इस मामले में पॉक्सो एख्ट की धारा 42ए का संदर्भ दिया गया, जिसमें कानूनी तौर पर किसी भी तरह की गड़बड़ी मिलने पर 42ए लागू होता है।

इस मामले में 42ए का जिक्र इसलिए किया गया, क्योंकि आईपीसी की धारा 375 के उपबंध 2 (जिसमें शादी की सूरत में बिना अनुमति के अपनी नाबालिग पत्नी के साथ संबंध बनाने पर सजा से छूट) के तहत दोषी व्यक्ति छूट जाता। इस मामले में विवाह भी हुआ था, लेकिन 42ए के लागू होने की सूरत में आईपीसी की धारा 375-2 के अपवाद लागू नहीं होते। पॉक्सो एक्स बनाया ही इसलिए गया था, ताकि नाबालिगों के यौन उत्पीड़न में किसी तरह की छूट न मिले।

कोर्ट ने पाया कि लड़की के बयान बदलते भी रहे हैं। वहीं, परिस्थितियों पर नजर डालते हुए हाई कोर्ट ने पाया कि दोनों ने शादी की थी, इसलिए इसमें जबरदस्ती जैसी बात नहीं। अगर दोनों ने संबंध बनाए तो एक तरफ लड़की अपनी सामान्य जिंदगी जी रही है, तो दूसरी तरफ लड़का उम्रकैद की सजा काट रहा है। कोर्ट ने भावनात्मक मुद्दे को भी ध्यान में रखा और कहा कि दोनों की सामूहिक गलतियों की सजा सिर्फ एक व्यक्ति को मिल रही है, जोकि गलत है। हालाँकि पॉक्सो एक्ट के तहत नाबालिग से संबंध बनाने का दोष सिद्ध होता है। चूँकि इसमें बलात्कार यानी जबरदस्ती की पुष्टि नहीं हुई है। दोनों प्रेम में थे और खुद को शादीशुदा ही मानकर चल रहे थे, क्योंकि दोनों ने शादी भी की थी। खुद लड़की ने बताया कि उसके साथ कोई जबरदस्ती या हिंसा नहीं हुई, ऐसे में सजा को कम किया जाता है।

ये मामला 5 अप्रैल, 2013 का है, जब 14 साल की लड़की के पिता ने उसके लापता होने की सूचना पुलिस को दी। बाद में लड़की दोषी पाए गए लड़के के साथ त्रिपुरा की राजधानी अगरतला में बरामद की गई थी। चूँकि लड़की की उम्र 14 साल ही थी, ऐसे में पॉक्सो एक्ट के तहत लड़के को उम्रकैद की सजा सुनाई गई थी। शिलॉन्ग की विशेष कोर्ट ने पॉक्सो एक्ट 2012 की धारा 4 के तहत उम्रकैद और 10 हजार का जुर्माना और आईपीसी की धारा 366ए के तहत 10 साल की सजा और 10 हजार के जुर्माने की सजा सुनाई थी।

हालाँकि अब हाई कोर्ट ने उम्र कैद की सजा को घटाकर 10 साल के कठोर कारावास और 10 हजार रुपए के जुर्माने की सजा सुनाई है। 10 हजार का जुर्माना न भरने पर एक महीने साधारण कारावास की सजा सुनाई गई है।

राहुल राज ने शाहरुख बन शबाना को फँसाया, फिर गौमूत्र पिला करवाई घरवापसी: वो खबर जिसे ध्रुव राठी खोज ही नहीं पाया… इसलिए लव-जिहाद को झूठलाया

ध्रुव राठी ने कह दिया है। लव जिहाद जैसा कुछ नहीं होता है। यह बस एक क्राइम है। मुस्लिम लड़के ने अपनी हिंदू गर्लफ्रेंड को मार दिया, यह सामान्य अपराध है राठी के लिए। इतना सामान्य जितना किसी हिंदू लड़के द्वारा मुस्लिम लड़की को मारना। इसके लिए वो एक वीडियो बनाता है और उदाहरण देता है श्रद्धा वालकर केस का। ऐसा केस जिसकी जाँच में अभी तक लव जिहाद पाया ही नहीं गया।

खुद ही मुद्दा उठाओ, खुद ही उदाहरण कुछ और दो? यह कला ध्रुव राठियों ने कहाँ से सीखी? क्यों करते हैं ये लोग ऐसा? सीधा सा जवाब है – एक षड्यंत्र के तहत मुद्दे के वजूद को खत्म कर देना ही वामपंथियों-इस्लामियों का सबसे बड़ा हथियार रहा है। ध्रुव राठी नया नहीं है। न ही अकेला। और न ही यह आखिरी होगा।

पहले मुगलों का महिमामंडन पाठ्य-पुस्तकों में किया जाता था, उनके अत्याचारों को इतिहास में दबा दिया गया। अब कोई रवीश या ध्रुव राठी वीडियो बना कर यूट्यूब इतिहास दर्ज कर रहा है। अपने लेटेस्ट वीडियो में ध्रुव राठी ने मुद्दा उठाया लव जिहाद का, ताकि इसे खारिज कर दिया जाए। देखने वालों को बता दिया जाए कि यह सिर्फ एक शब्दिक टर्म है। और तो और, समाज में जो भी शख्स इस 2 शब्दों को मानता है, डरता है, जागरूक रहता है, उसे घृणा की दृष्टि से देखा जाना चाहिए।

असल मायने में लव जिहाद की हकीकत क्या है देश में? हकीकत यह है कि लव जिहाद के हजारों केस हो चुके हैं सिर्फ भारत में। सैकड़ों बहन-बेटियों को मार डाला गया है। पिछले 2 साल में 306 ऐसे मामलों को तो सिर्फ ऑपइंडिया दर्ज कर चुका है। न जाने और कितने ऐसे मामले होंगे, जो मीडिया तक आ ही नहीं पाए होंगे। कुछ पीड़िताओं ने हिम्मत की भी होगी तो मीडिया ने छापे नहीं होंगे। न जाने कितनी पीड़िताएँ डर और शर्म के मारे पुलिस तक भी नहीं पहुँची होंगी।

आँकड़े लेकिन किनके लिए? सच को सामने लाना अगर मंशा हो तो आँकड़े सामने हैं, मेहनत करने पर निकल आते हैं। अगर मकसद प्रपंच फैलाना है तो फिर आँकड़े चाहिए ही क्यों? ध्रुव राठी ने बिल्कुल वही किया, जो उसे करना था। लव जिहाद के होने और उसके पीछे छिपे षड्यंत्र को नकारने के लिए ध्रुव राठी को श्रद्धा वालकर का ही केस मिला, जो अभी तक की जाँच में लव जिहाद पाया ही नहीं गया।

ध्रुव राठी के लिए अपराधी की मंशा मतलब फर्जी बात

श्रद्धा वालकर और उसके हत्यारोपित आफताब पूनावाला के अलावा कुछ और भी नाम गिनाए ध्रुव राठी ने। इस वीडियो में जितने भी ऐसे अपराध और पीड़िता-आरोपितों का नाम लिया गया, पहले देखते हैं उन नामों को: श्रद्धा-आफताब | नेहा-फयाज | साक्षी-साहिल खान | निकिता-तौसीफ | अरशद-प्रभा | अंकिता-शाहरुख | रितिका-सैयद | मानसी-मुज्जमिल

इतने सारे नाम लेकर वीडियो बना देता तो प्रपंच कैसे रच पाता? इसलिए जैसे ही ये नाम खत्म होते हैं, ध्रुव राठी नामों व अपराधों की दूसरी लिस्ट पढ़ना शुरू कर देता है। पढ़ा जाए इन्हें भी: अंजन दास-पूनम | साहिल गहलोत-निक्की यादव | अमन कुमार-सोनम परवीन | अंशु-नाइमा उर्फ ईशा | सतीश कुमार-गुलनाज खातून | रामानुज साहू-रेखा | प्रवीण-आयनाज | विपुल टेलर-रुखसार उर्फ रिया | प्रदीप-रुखसाना

मुस्लिम लड़के-हिंदू लड़की और हिंदू लड़के-हिंदू+मुस्लिम लड़की का उदाहरण देकर ध्रुव राठी ज्ञान देता है कि सभी हिंदुओं को हत्यारा नहीं कहा जा सकता है, ठीक वैसे ही सभी मुस्लिमों को भी नहीं कहना चाहिए। बिल्कुल सही कहा उसने… लेकिन यहीं वो अपने तर्क में फँस भी जाता है। कैसे?

हिंदुओं के अपराध गिनाते समय वो एक भी ऐसा अपराध नहीं दिखा पाया जहाँ आरोपित ने अपना नाम बदल कर अलग मजहब वाली लड़की को फँसाया हो। ना ही ऐसा उदाहरण दे पाया जहाँ किसी मुस्लिम लड़की को शादी के बाद जबरन मंदिर ले जाया गया या ससुर-देवर के साथ सोने पर मजबूर किया गया। गौमूत्र पिलाया गया। जबकि उसके ही दिए अपराधों की लिस्ट में हिंदू लड़की को प्यार में फँसाने के लिए फर्जी हिंदू नाम रख कर जबरन निकाह से लेकर रेप और गौमांस खिलाने तक की खबरें शामिल हैं।

क्या ध्रुव राठी इतने तक पर रुक जाता है? बिल्कुल नहीं। उसने लव जिहाद के प्रचार-प्रसार के लिए हिंदुओं को ही दोषी भी ठहरा दिया। क्योंकि उसके अनुसार ऐसा कुछ हो ही नहीं रहा है समाज में। वो अगर ढंग से मेहनत करता तो एक खबर खोज लेता हिंदू लड़के-मुस्लिम लड़की वाला। फिर ‘रिवर्स लव जिहाद’ पर सबूतों के साथ वो वीडियो बना लेता। तब वो हिंदुओं को और भी ज्यादा शर्मसार कर पाने में सफल होता। आखिर वो क्यों नहीं खोज पाया ‘रिवर्स लव जिहाद’ वाली खबर? और क्या है वो खबर?

‘रिवर्स लव जिहाद’ क्यों नहीं खोज पाया ध्रुव राठी?

अगर आपको लगता है कि ऊपर लिखी खबर झूठी है, तो आप सही हैं। पीत पत्रकारिता ऐसे ही की जाती है। ठीक वैसे ही, जैसे ध्रुव राठी ने मंदिर या गाय के साथ अपराध की 4-5 खबरें दिखा, हिंदुओं को आरोपित दिखा आपको दिग्भ्रमित किया… ऊपर की खबर भी उसी स्टाइल में लिखी गई है। 1 अप्रैल का डेट देकर आपको मूर्ख बनाया है मैंने। लेकिन क्यों? क्योंकि आप समझें कि खबरों के अंदर का पक्ष दबा कर या उभार कर मीडिया ऐसे ही खेल खेलता है। फर्जी खबरें गढ़ी जाती हैं। भ्रमित करने वाली थम्बनेल बना कर उलझाया जाता है आपको। वामी-इस्लामी यूट्यूबर इसी मीडिया की अगली कड़ी हैं, सही मायने में ज्यादा खतरनाक हैं।

घटना जो कभी हुई नहीं, वो खबर बना दी जाती है। टुकड़े-टुकड़े उठा कर, उसे जोड़ कर वीडियो बना दिया जाता है। 10 मिलियन मतलब 1 करोड़ लोग उसे देख भी लेते हैं। वामी-इस्लामी मानसिकता के लोग फिर उस पर चर्चा भी करने लगते हैं।

नतीजा क्या होता है – जिस इंदिरा के साथ सच में कोई अब्दुल नाम बदल अमन बन कर प्यार का ढोंग रचता है, वो किसी नाले में कटी मिलती है। लव जिहाद जिसे हाई कोर्ट तक ने एक हकीकत माना है, जिससे ईसाई समुदाय भी परेशान है, उस षड्यंत्र को छिपा लिया जाता है, चर्चा में पीछे धकेल दिया जाता है। इसका नतीजा क्या होता है – फिर कोई नाबालिग लड़की अपने अब्दुल से पिटती रहती है लेकिन जब कोई उसे बचाने जाता है तो उलटे कहती है – हाँ मारेगा ये मुझे, कोई लव-सव-जिहाद नहीं होता है, सब झूठ है।

श्रद्धा की हत्या में मजहब का एंगल क्यों?

जिस श्रद्धा वालकर हत्याकांड का उदाहरण देकर ध्रुव राठी ने प्रपंच से भरा वीडियो बनाया, आखिर क्यों सोशल मीडिया पर बहुत सारे लोगों ने इस हत्या में मजहब का एंगल खोजा? बावजूद इसके कि अभी तक की जाँच में ऐसा कोई एंगल सामने आया नहीं है। आखिर क्यों? क्या ऐसा करने या सोचने वाले सब के सब पागल हैं?

नहीं। लोग मजबूर हैं। डरे रहते हैं। ऐसी खबरों को देख कर अपनी बहन-बेटियों का ख्याल उनके दिमाग में आता है। हर 2-4 दिन पर ऐसी खबरों को पढ़ने-सुनने-देखने वाले हिंदुओं के डर को कट्टरता या धर्मांधता का नाम देना मूर्खता होगी। लेकिन इसी मूर्खता की सीढ़ी का प्रयोग कर वीडियो बनाने और उसे अपने अंधभक्तों के बीच वायरल करने का नाम ध्रुव राठी है।

वीडियो बनाते समय ध्रुव राठी ने जिस चालाकी से श्रद्धा वालकर हत्याकांड को मजहब से दूर रखा, उसे सामान्य अपराध बता दिया, उतनी ही धूर्तता से उसने यह बात छिपा ली कि श्रद्धा के पिताजी ने ऑन-रिकॉर्ड यह कहा था कि उन्हें अपनी बेटी की हत्या में ‘लव जिहाद’ का संदेह है।

श्रद्धा अपना पक्ष रखने के लिए अब इस दुनिया में नहीं है। आफताब पूनावाला ने क्या कभी उसके साथ मजहबी ज्यादती की थी, यह बात अब शायद ही सार्वजनिक हो पाए। लेकिन हिंदुओं ने आफताब में मजहबी चेहरा देखा क्योंकि उनके लिए यह पहली घटना नहीं थी। 2 साल में 306 मामले पढ़ चुके लोगों के मन में छवि बनती है और बननी भी चाहिए। इसके उलट नाम छुपा कर दूसरे मजहब की लड़कियों को प्रेम जाल में फँसाने का एक भी उदाहरण आज तक नहीं आया है… वरना ध्रुव राठी का ‘रिवर्स लव जिहाद’ वीडियो अब तक बन चुका होता, इससे ज्यादा वायरल होता।

ध्रुव राठी मतलब दुनिया का सबसे बड़ा अंधभक्त

दूसरों पर ऊँगली उठाने वाला ध्रुव राठी, अपनी बातों से परे बात करने वाले को अंधभक्त कहने वाला ध्रुव राठी ही सबसे बड़ा अंधभक्त है। यह आरोप नहीं है बल्कि उसने खुद को साबित किया है। पॉइंट-वाइज समझते हैं इसे, सहूलियत होगी।

  • 5 जुलाई 2019 को ध्रुव राठी ने एक वीडियो अपलोड किया था। Article 15 – Reality of Casteism | Analysis by Dhruv Rathee – ये उस वीडियो का टाइटल है। पूरे वीडियो में 2-4 खबरें दिखाई जाती हैं। दलितों के हाथ का छुआ खाना-पानी से परहेज वाली इन खबरों के दम पर ध्रुव राठी यह निष्कर्ष निकाल लेता है कि पूरे का पूरा भारत और यहाँ का समाज जातिवादी है।
  • 26 जुलाई 2018 को Cow Urine Magic! | Hidden Secret in Gaumutra Explained by Dhruv Rathee नाम से एक वीडियो अपलोड हुआ है। इसमें यह गौमूत्र पर वीडियो बनाता है। व्यंग्य की भाषा में दर्शकों को गौमूत्र की जगह अपना मूत्र पीने की सलाह देता है। उसके पीछे का रासायनिक कारण (10-12वीं तक केमिस्ट्री की पढ़ाई करने वाला कोई भी बता देगा) भी बताता है। आखिर है कौन ध्रुव राठी? वैज्ञानिक है या डॉक्टर या गौमूत्र पर कोई रिसर्च पेपर आया है इसका?
  • 29 जून 2028 वाला वीडियो तो अल्टीमेट है। Is India World’s Most Dangerous Country for Women? | Analysis by Dhruv Rathee नाम के इस वीडियो में महिलाओं के लिए भारत को सबसे खतरनाक देश घोषित कर दिया जाता है। किस आधार पर? कोई सर्वे हुआ? नहीं। तो किसने तय किया? बड़े-बड़े लोगों ने कहा, इसलिए खतरनाक है तो है।

अब वापस आते हैं शुरुआती सवाल पर। अगर 2-4 हिंदू या मुस्लिम अपराधियों के कारण सभी हिंदुओं या मुस्लिमों को अपराधी नहीं कहने का तर्क ध्रुव राठी लव जिहाद को नकारने में गढ़ता है तो वही तर्क दलितों के साथ छुआछूत पर गायब क्यों हो जाता है? गौमूत्र का प्रयोग हिंदू घृणा के लिए जिस संदर्भ में आतंकी तक करते हैं, उसी भाषा में अपने मूत्र से उसकी तुलना करना क्या कहलाएगा? देश में रहने वाली लगभग 70 करोड़ महिलाओं में से एक से भी बिना पूछे भारत को सबसे खतरनाक देश घोषित करना किसके गोद में बैठ कर अंधभक्ति करना कहलाएगा?

जिस दिन ध्रुव राठी ने लव जिहाद को खारिज करता वीडियो बनाया, उसके 72 घंटे के भीतर ही 3 लव जिहाद की खबरें मीडिया में आ चुकी हैं। तो क्या जिस दिन तक लव जिहाद की आँच हर हिंदू के घर तक नहीं पहुँचे, उस दिन तक ध्रुव राठी के अनुसार इस भयावह सच्चाई से आँखें फेर ली जाए? लव जिहाद की शिकार बहन-बेटियों के दुखों को खारिज करना किस मजहब या इको-सिस्टम की अंधभक्ति करना है, इसका जवाब कोई रॉकेट साइंस नहीं है… सबको पता है। सबको पता है कि ध्रुव राठी किसकी गोद में बैठा है।