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फर्नीचर का काम करने वाले शाहरुख़ शेख ने बीमा कंपनी की मैनेजर को फाँसा, कई बार किया रेप: अकरम ने लिव इन पार्टनर को पीटा, रूममेट आबिद की गर्लफ्रेंड भी हिन्दू

मध्य प्रदेश के इंदौर से ‘लव जिहाद’ का नया मामला सामने आया है। यहाँ इंश्योरेंस कम्पनी में मैनेजर के पद पर काम करने वाली एक लड़की ने मुस्लिम युवक पर नाम बदल कर अपने साथ रेप करने का आरोप लगाया है। आरोपित का नाम मोहम्मद शाहरुख़ शेख है जिसके खिलाफ पुलिस ने FIR दर्ज कर ली है। शादीशुदा शाहरुख़ ने खुद को कुँवारा बता कर पीड़िता से शादी का भी वादा किया था। वहीं राजस्थान के जयपुर से एक अन्य मामले में लिव इन रिलेशनशिप में रह रही हिन्दू लड़की पर उसके मुस्लिम बॉयफ्रेंड ने पिस्टल तान दी। इस मामले की भी शिकायत पुलिस में दर्ज करवाई गई है।

शाहरुख़ शेख ने खुद को बताया था यश जैन

मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक, पहला मामला इंदौर के हीरानगर थाना क्षेत्र का है। यहाँ बीमा कम्पनी में मैनेजर पद पर काम करने वाली लड़की ने पुलिस में शिकायत दर्ज कराई है। पीड़िता ने बताया कि बीमा कम्पनी में काम करने के दौरान उसकी जान-पहचान एक फर्नीचर का काम करने वाले युवक से हुई थी जिसने अपना नाम ‘यश जैन’ बताया था। कुछ दिनों की बातचीत में दोनों लोग काफी घुल-मिल गए। युवक ने पीड़िता से शादी का प्रस्ताव रखा। लड़की इस झाँसे में आ गई। इसी दौरान आरोपित ने लड़की से 3-4 बार रेप किया। विरोध करने पर वह जल्द ही शादी का भरोसा दिया करता था।

खुद को यश बताने वाला आरोपित पीड़िता से अपनी मौसी के इंदौर स्थित घर मिलता था। एक दिन पीड़िता को लगा कि आरोपित कुछ छिपा रहा है। लड़की ने पड़ताल की तो खुद को यश बताने वाला युवक शाहरुख़ शेख निकला। पीड़िता ने यह भी पता लगा लिया कि शाहरुख़ इंदौर के पीठा चंदन नगर इलाके में रहता है। 15 अप्रैल, 2024 को जब लड़की ने आरोपित के घर जा कर पड़ताल की तो वह शादीशुदा निकला। पीड़िता ने अपने परिजनों को सारी बात बताई।

आखिरकार तमाम कानूनी प्रक्रियाओं के बाद शाहरुख़ के खिलाफ हीरानगर थाने में FIR दर्ज कर ली गई है। पुलिस शाहरुख़ की तलाश और मामले की जाँच कर रही है।

अकरम ने ताना हिन्दू प्रेमिका पर पिस्टल

दूसरा मामला राजस्थान के जयपुर से है। यहाँ के था नाक्षेत्र महेश नगर में एक हिन्दू लड़की ने शुक्रवार (26 अप्रैल) को अपने मुस्लिम प्रेमी के खिलाफ शिकायत दर्ज करवाई है। शिकायत में पीड़िता ने बताया कि वह अकरम नाम के युवक के साथ पिछले 7 वर्षों से लिव इन रिलेशनशिप में रह रही है। जिस घर में ये दोनों रहते हैं वह आदिल खान का है। 26 अप्रैल को लड़की ने अकरम पर शादी करने का दबाव बनाया। इसी बात को ले कर दोनों में कहासुनी हुई।

पीड़िता का आरोप है कि थोड़ी देर के बाद नाराज हुए अकरम ने उसकी पिटाई शुरू कर दी। लड़की को पीटने में मकान मालिक आदिल भी शामिल हो गया। इन दोनों ने कमरे के कई सामान भी तोड़ डाले। कुछ ही देर में अकरम ने शराब के नशे में पीड़िता पर पिस्टल तान दी। लड़की जैसे-तैसे अपनी जान बचा कर वहाँ से भाग पाई। बाद में उसने पुलिस में शिकायत दर्ज करवाई। पीड़िता का आरोप है कि अकरम पहले से शादीशुदा है और वह अब शादी नहीं करना चाहता।

लड़की ने यह भी खुलासा किया कि अकरम का साथी (मकान मालिक) आदिल भी एक हिंदू लड़की के साथ लिव इन रिलेशनशिप में है। आदिल की पार्टनर का नाम सिमरन सिंह राजपूत है। हालाँकि, सिमरन राजपूत ने आदिल के साथ अपनी मर्जी से बिना किसी दबाव के रहना बताया। पुलिस ने पीड़िता की शिकायत पर जब आदिल के मकान पर दबिश दी तो वहाँ अवैध हथियार बरामद हुए। आदिल के घर से पिस्टल, मैगजीन और 7 कारतूस मिले हैं।

आदिल और सिमरन दोनों ही बिहार के निवासी हैं। दिल्ली से होटल मैनेजमेंट में MBA करने वाली सिमरन पिछले 7 वर्षों से आदिल के साथ लिव इन रिलेशनशिप में रह रही है। आदिल जयपुर में रियल स्टेट का काम करता है। उसके खिलाफ पहले भी आपराधिक मामले दर्ज हैं। आदिल और सिमरन को आर्म्स एक्ट में गिरफ्तार कर लिया गया है। घटना के बाद से अकरम फरार है जिसकी तलाश में पुलिस दबिश दे रही है।

भक्तों से चढ़ावा लेने पर तमिलनाडु पुलिस ने 4 पुजारियों को किया गिरफ्तार: जानिए अंग्रेजों का काला कानून हिंदुओं को कैसे कर रहा प्रताड़ित

देश को आजाद हुए लगभग 77 साल हो गए हैं। भाजपा की सरकार अंग्रेजों के दमनकारी कानूनों को बदलने का लगातार प्रयास कर रही है। हालाँकि, मंदिरों को लेकर अंग्रेजों के कानून आज भी अपने बदले स्वरूप में लागू हैं। अंग्रेजों ने हिंदुओं के मंदिरों एवं अन्य स्थलों को अपनी निगरानी में ले लिया था। अब ऐसे ही कानून के आधार पर तमिलनाडु पुलिस ने अब कुछ पुजारियों को गिरफ्तार कर लिया है।

तमिलनाडु के मेट्टुपलयम के पास स्थित थेकमपट्टी में वाना बद्रकालियाम्मन मंदिर के चार पुजारियों को पुलिस ने गुरुवार (25 अप्रैल 2024) की रात को गिरफ्तार कर लिया। पुजारियों पर आरोप है कि उन्होंने भक्तों द्वारा चढ़ाए गए पैसे को हड़प लिया। एक शिकायत के बाद मंदिर के सहायक आयुक्त ने चार पुजारियों और वंशानुगत ट्रस्टी वसंत संपत के खिलाफ मामला भी दर्ज कराया है।

शिकायत के आधार पर तमिलनाडु पुलिस ने जाँच की और उसके बाद चारों पुजारियों को गिरफ्तार कर लिया गया। जिन पुजारियों को गिरफ्तार किया हैं, उनकी पहचान सुलुर के रहने वाले 36 वर्षीय आर रघुपति, मेट्टुपलयम के रहने वाले 47 वर्षीय एस दंडपाणि, 54 साल के सरवनन और गोबिचेट्टिपलयम के 33 वर्षीय विष्णु कुमार के रूप में हुई है। वहीं, मंदिर के वंशानुगत ट्रस्टी वसंत संपत फरार हैं।

एक पुलिस अधिकारी का कहना है कि चारों पुजारियों को सीसीटीवी कैमरे में भक्तों द्वारा अपनी थाली में छोड़े गए चढ़ावे को अपने घर ले जाते हुए पकड़ा गया था। हिंदू धार्मिक और धर्मार्थ बंदोबस्ती (एचआर एंड सीई) विभाग के सहायक आयुक्त और मंदिर के कार्यकारी अधिकारी यूएस कैलासमूर्ति ने कहा कि मंदिर के पुजारियों को चढ़ावे के पैसे को मंदिर की हुंडी में जमा करना होता है।

कैलासमूर्ति ने कहा, “इस आशय का एक सरकारी आदेश है। मद्रास उच्च न्यायालय ने भी इस प्रथा का समर्थन किया है और प्लेट पर संग्रह सहित पूरे दान को मंदिर के राजस्व के रूप में मानने का आदेश दिया है।” उन्होंने कहा कि मंदिर प्रशासन ने पुजारियों पर नजर रखने के लिए एक सीसीटीवी कैमरा लगाया है, ताकि यह देखा जा सके कि वे थाली की राशि को हुंडी में जमा कर रहे हैं या नहीं।

कैलासमूर्ति ने कुछ महीने पहले मेट्टुपलयम न्यायिक मजिस्ट्रेट अदालत के समक्ष दायर अपनी याचिका में कहा, “चारों लोग इस प्रथा का पालन नहीं कर रहे थे।” अदालत ने इस साल 14 मार्च को मेट्टुपालयम पुलिस को पुजारियों और उनका समर्थन करने वाले मंदिर ट्रस्टी के खिलाफ उचित कार्रवाई करने का निर्देश दिया था। इसके बाद पुलिस ने इनके खिलाफ मामला दर्ज करके इन्हें गिरफ्तार कर लिया।

अंग्रेजों का कानून और मंदिर पर नियंत्रण

दरअसल, भारत में आने से पहले हिंदू मंदिरों का प्रबंधन उसे बनवाने वाले राजा-महाराजाओं की निगरानी में स्थानीय समुदाय द्वारा किया जाता था। मैसूर, त्रावणकोर और कोचीन जैसी हिंदू शासकों ने इस लोकतांत्रिक स्थिति में भी मंदिरों की देखरेख की परंपरा को बनाए रखा। ईस्ट इंडिया कंपनी की अगुवाई में अंग्रेजों ने भारत में जब राज कायम किया तो मंदिरों को राजस्व के एक प्रमुख स्रोत के रूप में देखा।

इस मामले में दक्षिण भारत के मंदिरों पर अंग्रेजों की विशेष निगाह रही, क्योंकि उधर के अधिकांश मंदिर मुस्लिम आक्रांताओं के आक्रमण से बच गए थे। इस बीच साल 1796 में मद्रास के ब्रिटिश कलेक्टर ने कोंजीवरम (कांचीपुरम) में हिंदू मंदिरों का प्रशासन अपने हाथ में ले लिया। इसी तरह 1801 में यह घोषित किया गया कि तिरुपति के सभी मंदिर अर्कोट के जिला कलेक्टर के नियंत्रण में रहेंगे।

द प्रिंट में छपे अभिनव चंद्रचूड़ की लेख के अनुसार, इस आदेश में कहा गया कि जो मंदिर प्रशासन या पुजारी मंदिरों के धनों का दुरुपयोग करने पर उन्हें दंडित किया जाएगा। इसके बाद अंग्रेज सरकार ने जल्द ही अन्य मंदिरों और धार्मिक संस्थानों के नियंत्रण एवं प्रशासन के लिए कानून बनाना शुरू कर दिया। सन 1806 में सरकार ने आधुनिक ओडिशा में जगन्नाथ मंदिर के ‘प्रबंधन’ के लिए नियम जारी किए।

इस नियम के तहत मंदिर का प्रबंधन तो पुजारियों की एक समिति के पास थी, लेकिन किसी कदाचार की स्थिति में अंग्रेज सरकार उन्हें हटा सकती थी। हालाँकि, यह व्यवस्था बहुत लंबे समय तक नहीं चली। 1809 में जगन्नाथ मंदिर का प्रबंधन खोरदाह के राजा को स्थानांतरित कर दिया गया, जिन्हें मंदिर का ट्रस्टी नियुक्त किया गया था। हालाँकि, अंग्रेजी सरकार ने मंदिर पर कुछ नियंत्रण बरकरार रखा।

इसके तुरंत बाद अंग्रेजी सरकार ने मंदिरों के प्रशासन को विनियमित करने के लिए बंगाल, मद्रास और बॉम्बे में नियम बनाए। सन 1810 में बंगाल के लिए कानून बनाया गया था। इसके पीछे अंग्रेज सरकार ने तर्क दिया कि लोगों द्वारा मंदिरों को दिए गए बड़े दान और योगदान का उन संस्थानों के प्रबंधकों द्वारा दुरुपयोग और गबन किया जा रहा था। इन कानूनों के तहत सरकार ने इन पर निगरानी शुरू कर दी।

इसी तरह का एक कानून सन 1817 में मद्रास प्रांत के लिए बनाया गया। सन 1827 में बंबई के लिए एक कानून बनाया गया। इसमें कहा गया था कि जिन भूमियों को करों का भुगतान करने से छूट दी गई थी उन पर अब कर लगाया जाएगा। इस तरह अंग्रेज सरकार विभिन्न उपायों से इन मंदिरों पर निगरानी रखने लगी और भ्रष्टाचार के आरोप में मंदिर प्रशासन की बेदखली अपने हिसाब से करने लगी।

सन 1833 तक मद्रास सरकार 7600 हिंदू मंदिरों के प्रशासन की प्रभार देखती थी। हालाँकि, इंग्लैंड के राजा के हस्तक्षेप के 1840 में ईस्ट इंडिया कंपनी ने एक निर्देश जारी किया कि मंदिरों को उनके ट्रस्टी को लौटाया जाएगा। इसके बाद धार्मिक बंदोबस्ती अधिनियम 1863 आया, जिसने मंदिर प्रशासन को ब्रिटिश सरकार से ट्रस्टियों को सौंप दिया गया।

जब अंग्रेजों ने मद्रास धार्मिक और धर्मार्थ बंदोबस्ती अधिनियम 1925 लागू किया तो मुस्लिमों और ईसाइयों ने इसका भारी विरोध किया। इसके बाद इन दोनों समुदायों को इन से बाहर कर दिया गया। इसके सन 1927 में इस कानून को केवल हिंदुओं पर लागू किया गया और इसका नाम बदलकर मद्रास हिंदू धार्मिक और बंदोबस्ती अधिनियम 1927 कर दिया गया।

सन 1935 के अधिनियम XII के माध्यम से कानून में थोड़ा सा परिवर्तन पेश किया गया। इसके माध्यम से मंदिरों को सरकार द्वारा अधिसूचित किया जा सकता था और उनके प्रशासन को अपने कब्जे में लिया जा सकता था। इस तरह हिंदू धार्मिक बंदोबस्ती बोर्ड ने मंदिरों को सँभालने और प्रशासन करने की शक्तियाँ ग्रहण कर लीं। इस बोर्ड में तीन से पाँच सदस्य होते थे।

कॉन्ग्रेस सरकार और मंदिर पर नियंत्रण

देश आजाद होने के बाद तमिलनाडु सरकार ने 1951 में हिंदू धार्मिक और धर्मार्थ बंदोबस्ती अधिनियम 1951 नामक एक अधिनियम पारित किया और मंदिरों एवं उनकी संपत्ति का नियंत्रण अपने हाथ में ले लिया। इसे मद्रास उच्च न्यायालय और उसके बाद उच्चतम न्यायालय में चुनौती दी गई। इसके बाद 1951 अधिनियम के कई प्रावधानों को दोनों अदालतों द्वारा रद्द कर दिया गया था।

कुछ बदलावों के साथ तमिलनाडु हिंदू धार्मिक और धर्मार्थ बंदोबस्ती अधिनियम 1959 में पारित किया गया। उस समय देश में कॉन्ग्रेस की सरकार थी। इसमें कहा गया है कि अधिनियम का उद्देश्य यह देखना था कि धार्मिक ट्रस्टों और संस्थानों का प्रबंधन ठीक से किया जाए और यह सुनिश्चित किया जाए कि आय का दुरुपयोग न हो। इसके बाद से यह कानून अभी भी जारी है।

‘मेरे लैट्रिन वाले रस्ते में वो अपनी पेशाब वाली डाल देता है, दर्द होता है’: मदरसे में 7 साल के बच्चे के साथ कुकर्म करता था 27 साल का सीनियर मोहम्मद साद, पीड़ित परिवार को ही धमकी

उत्तर प्रदेश के मुजफ्फरनगर जिले में एक मदरसे में पढ़ने वाले नाबालिग छात्र के साथ अप्राकृतिक दुष्कर्म किए जाने का मामला सामने आया है। पीड़ित की उम्र महज 7 वर्ष है। कुकर्म का आरोप इसी मदरसे में पढ़ने वाले पीड़ित के सीनियर छात्र मोहम्मद साद पर लगा है। शिकायत के बाद आरोपित के परिजनों ने पीड़ित को ही धमकाना शुरू कर दिया था। पुलिस ने मोहम्मद साद को गिरफ्तार कर लिया है। सोमवार (29 अप्रैल, 2024) को पुलिस ने आरोपित को गिरफ्तार कर लिया है। मामले की जाँच और अन्य कानूनी कार्रवाई की जा रही है।

यह मामला मुजफ्फरनगर जिले के थाना क्षेत्र कोतवाली नगर का है। यहाँ रविवार (28 अप्रैल, 2024) को 7 साल के बच्चे के अब्बा ने पुलिस में शिकायत दर्ज करवाई है। शिकायत में उन्होंने बताया कि उनका बेटा मदरसा इस्लामिया में प्रथम वर्ष का छात्र है। 1-2 दिनों से बच्चा मदरसे में जाने से मना कर रहा था। उसे जब भी मदरसे में जाने के लिए कहा जाता था तो वो रोने लगता था। पीड़ित के अब्बा और अम्मी ने एक दिन अपने बच्चे से मदरसे न जाने की वजह पूछी। इस सवाल पर बच्चा रोने लगा।

जब पीड़ित चुप हुआ तो उसने पूरी वजह बताई। शिकायत के मुताबिक, बच्चे ने कहा, “मदरसे का ही एक लड़का मुझे जबरन टॉयलेट में बुलाता है और मेरे पीछे से लैट्रीन वाले रास्ते में अपनी पेशाब वाली __ देता है। मुझे लैट्रीन वाली जगह दर्द होता है। मैं मदरसे में नहीं जाऊँगा।” ये सुन कर बच्चे के अब्बा रविवार को उसे ले कर मदरसे में गए। पीड़ित अपने अब्बा को मदरसे के दूसरे कमरे में ले गया। यहाँ उसने कई लड़कों के बीच बैठे मोहम्मद साद की तरफ इशारा किया। पीड़ित ने कहा, “यही मेरे साथ गलत काम करता है।”

मोहम्मद साद की उम्र 27 साल बताई जा रही है। पीड़ित के अब्बा मोहम्मद साद से पूछताछ ही कर रहे थे कि अचानक उसके घर के तमाम लोग आ धमके। मदरसे में भीड़ जमा हो गई। आरोप है कि मोहम्मद साद के घर वाले पीड़ित के अब्बा को ही कार्रवाई करने की धमकी देने लगे। मामले की सूचना मिलते ही पुलिस पहुँची। पुलिस के पहुँचने से पहले और अपने ऊपर FIR दर्ज होने की खबर लगते ही मोहम्मद साद फरार हो गया। पीड़ित को बेहद डरा-सहमा बताते हुए उसके अब्बा ने आरोपित पर कड़ी कार्रवाई की माँग की है।

पुलिस प्रेसनोट

पुलिस ने इस शिकायत पर मोहम्मद साद को नामजद करते हुए FIR दर्ज कर ली। यह FIR IPC की धारा 377 और 506 के साथ पॉक्सो एक्ट के सेक्शन 5(ड)/6 के तहत दर्ज हुई है। FIR दर्ज करने के बाद पुलिस ने मोहम्मद साद की तलाश शुरू की। सोमवार (29 अप्रैल, 2024) को आरोपित के मुजफ्फरनगर में शामली बाईपास पर मौजूद होने की सूचना मिली। पुलिस ने दबिश दे कर साद को गिरफ्तार कर लिया। मामले की जाँच और अन्य जरूरी कार्रवाई की जा रही है। ऑपइंडिया के पास शिकायत कॉपी मौजूद है।

‘राम का मुकाबला करने के लिए शिव’: हिन्दुओं को बाँटने के लिए नया हथियार लेकर आई कॉन्ग्रेस, खड़गे को अपने प्रत्याशी का नाम याद नहीं पर प्रोपेगंडा नहीं भूले

भगवान राम को लेकर कॉन्ग्रेस की घृणा कोई छिपी हुई नहीं है। आज़ादी के बाद जब तक कॉन्ग्रेस का शासन रहा, अयोध्या मामले का निपटारा नहीं हो पाया। जब राम मंदिर में रामलला की प्राण प्रतिष्ठा हुई, तब कॉन्ग्रेस नेताओं ने इसका न्योता ही ठुकरा दिया। कॉन्ग्रेस के राष्ट्रीय अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खड़गे अब राम और शिव के बीच कटुता की कल्पना कर रहे हैं। हिन्दू शास्त्रों से अनभिज्ञ ये नेता लगातार अपनी अनर्गल बयानबाजी के कारण कुख्यात हैं।

अपने ही उम्मीदवार का नाम भूले मल्लिकार्जुन खड़गे

असल में मल्लिकार्जुन खड़गे छत्तीसगढ़ का जांजगीर-चांपा में मंगलवार (30 अप्रैल, 2024) को एक जनसभा को संबोधित कर रहे थे। वहाँ से कॉन्ग्रेस पार्टी ने डॉ शिवकुमार डहरिया को प्रत्याशी बनाया है। उनका मुकाबला भाजपा के कमलेश जांगड़े से है। 2019 के लोकसभा चुनाव में छत्तीसगढ़ की 11 में से 9 सीटें भाजपा ने जीती थीं, जबकि 2 पर कॉन्ग्रेस का कब्ज़ा रहा था। जांजगीर-चांपा लोकसभा क्षेत्र पर तो पिछले 20 वर्षों, यानी 4 चुनावों से भाजपा का ही कब्ज़ा है, जबकि उसने 3 बार उम्मीदवार बदले।

यहाँ तक कि मल्लिकार्जुन खड़गे जनसभा करने तो आ गए, लेकिन उन्हें अपने ही उम्मीदवार का नाम तक नहीं पता था। उन्होंने 2 बार अपने उम्मीदवार से उनका नाम पूछा, तब जाकर वो उनका पूरा नाम ले पाए। खड़गे ने कहा, “इनका भी नाम शिव है, ये बराबर में राम का मुकाबला कर सकते हैं। क्योंकि ये शिव हैं, मेरा नाम भी मल्लिकार्जुन है यानी मैं भी शिव हूँ।” इस दौरान उन्होंने भी ध्यान दिलाया कि आंध्र प्रदेश के श्रीशैलम में मल्लिकार्जुन नाम से एक ज्योतिर्लिंग भी है।

हालाँकि, इस दौरान मल्लिकार्जुन खड़गे भूल गए कि राम और शिव का मुकाबला कराने की बात कह कर उन्होंने हिन्दू समाज की भावनाओं को ठेस पहुँचाया है। वो हिन्दू समाज, जिसने कभी राम और शिव को अलग-अलग कर के नहीं देखा। तमिलनाडु में स्थित ‘रामेश्वरम’ ज्योतिर्लिंग के भी 2 अर्थ हैं – पहले, राम जिसके ईश्वर हैं और दूसरा, राम के जो ईश्वर हैं। जो राम और शिव में भेद कर के देखते हैं, उन्हें अविवेकी कहा जाता है। ये हिन्दुओं को बाँटने की नई नीति है।

राम और शिव के संबंध: तुलसीदास की नज़र में

जब हम अयोध्या के राजा श्रीराम और कैलाश पर्वत पर विराजने वाले भगवान शिव की बात करते हैं तो हमें रामचरितमानस के रचयिता गोस्वामी तुलसीदास को पढ़ना पड़ेगा। उन्होंने बड़े ही अच्छे ढंग से इसे प्रस्तुत किया है। शिव धनुष तोड़ने के बाद ऋषि परशुराम क्रोधित हो उठे थे और उनका लक्ष्मण से वाद-विवाद हुआ था। अंत में जब उन्होंने श्रीराम को पहचाना तो उन्होंने उनकी प्रशंसा में जो शब्द कहे, वो देखने लायक है। बालकाण्ड के इस प्रसंग में परशुराम, भगवान राम के बारे में कहते हैं:

इसका अर्थ है – “मैं एक मुख से आपकी क्या प्रशंसा करूँ? हे महादेव के मनरूपी मानसरोवर के हंस! आपकी जय हो।” जिन राम को खुद परशुराम ने महादेव के मन रूपी मनसरोवस का हंस कहा है, आज मल्लिकार्जुन खड़गे उन्हें राम और महादेव को आपस में लड़ाने की बातें कर रहे हैं? ये कितना हास्यास्पद है। ये दिखाता है कि इन्हें न तो हिन्दू धर्म की कदर है, न हिन्दू धर्मावलम्बियों की। इसी तरह यहाँ एक अन्य प्रसंग का जिक्र करना भी आवश्यक है।

ये प्रसंग है सेतु रचना के दौरान का। भगवान श्रीराम उससे पहले वहाँ न सिर्फ भगवान शिव के लिंग की स्थापना करते हैं, बल्कि उनका पूजन भी संपन्न करते हैं। इस दौरान वो कहते हैं – “सिव समान प्रिय मोहि न दूजा“, अर्थात उन्हें भगवान शिव से अधिक प्रिय कोई नहीं है। भगवान राम के परम भक्त हनुमान जी भी शिव के ही अंश थे। राम स्पष्ट कहते हैं कि उनके और शिव में किसी एक से घृणा और किसी एक में श्रद्धा हो तो वो व्यक्ति नरक में जाता है। लंकाकाण्ड की ये चौपाई देखिए:

इसका अर्थ है – “जो शिव से द्रोह रखता है और मेरा भक्त कहलाता है, वह मनुष्य स्वप्न में भी मुझे नहीं पाता। शंकर से विमुख होकर (विरोध करके) जो मेरी भक्ति चाहता है, वह नरकगामी, मूर्ख और अल्पबुद्धि है।” ये खुद भगवान राम के शब्द हैं। अब आप समझ जाइए, मल्लिकार्जुन खड़गे क्या हैं। वैसे कॉन्ग्रेस और इससे जुड़े लोग तो तुलसीदास को भी गाली देते हैं। राजद के चंद्रशेखर यादव और सपा में रहे स्वामी प्रसाद मौर्य से बड़ा उदाहरण क्या हो सकता है इसका।

हो सकता है कि तुलसीदास का लिखा ऐसे लोगों को विश्वसनीय न लगे। उनके लिए महर्षि वाल्मीकि द्वारा रचित ‘रामायण’ से भी प्रसंग उठाया जा सकता है। युद्धकाण्ड में एक प्रसंग है जब मृत्यु के पश्चात दशरथ दिव्य रूप में अपने बेटे राम से मिलने आते हैं। इसकी सूचना राम को कोई और नहीं बल्कि स्वयं महादेव ही देते हैं। उन्होंने रावण वध के लिए राम की प्रशंसा की है, जबकि राम भक्त था शिव का। राम की प्रशंसा करते हुए शिव कहते हैं:

इसका अर्थ है – “शत्रुओंको संताप देने वाले, विशाल वक्ष स्थल से सुशोभित, महाबाहु कमलनयन! आप धर्मात्माओं में श्रेष्ठ हैं। आपने रावण वध रूप कार्य सम्पन्न कर दिया—यह बड़े सौभाग्य की बात है।” ये स्वयं महादेव के शब्द हैं। इसके बाद वो कहते हैं कि रावण का आतंक सारे लोकों के लिए एक बढ़े हुए अंधकार के समान था, जिसे आपने युद्ध में मिटा दिया। इस दौरान वो उन्हें अश्वमेध यज्ञ करने की सलाह भी देते हैं और अयोध्या में जाकर राज्याभिषेक करने को भी कहते हैं।

सनातन विरोधी है I.N.D.I. गठबंधन

इस दौरान हमें ये नहीं भूलना चाहिए कि अगर I.N.D.I. गठबंधन का कोई भी नेता हिन्दू धर्म की बात करता है तो इसके पीछे उसकी कोई न कोई साजिश रहती है। कभी ये दलितों को हिन्दुओं से अलग बताते हैं, कभी ये कहते हैं कि लोग मंदिरों में लड़कियाँ छेड़ने के लिए जाते हैं। और तो और, DMK नेता उदयनिधि स्टालिन तो सनातन धर्म को डेंगू-मलेरिया बता कर इसे खत्म करने की बात तक कर देते हैं। चुनाव आते ही ये खुद को हिन्दू हितैषी बताने लगते हैं।

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी भी अपनी चुनावी रैलियों में सनातन विरोधी I.N.D.I. गठबंधन पर इन्हीं कारणों से लगातार हमला बोल रहे हैं। उनकी सरकार ने काशी और उज्जैन में कॉरिडोर बनवाया है, कामाख्या कॉरिडोर बन रहा है। तीर्थस्थलों का विकास हो रहा है, अयोध्या धार्मिक पर्यटन का हब बना है। इससे विकास भी हो रहा है। ‘विकास भी, विरासत भी’ नारे के उलट विपक्षी दल केवल अपना उल्लू सीधा करने में लगे हैं, तभी ये राम और शिव को आपस में लड़ते हुए दिखाना चाहते हैं।

हाथों में तलवार लेकर निकला 36 साल का हमलावर, ब्रिटेन में आम लोगों से लेकर पुलिस तक को बनाया निशाना: 13 साल के बच्चे की मौत

इंग्लैंड में एक व्यक्ति ने समुराई तलवार से लोगों पर हमला बोल दिया। उसने 2 पुलिसकर्मियों समेत 5 लोगों को घायल कर दिया। इस हमले में एक 13 साल का किशोर बुरी तरह से घायल हो गया था, जिसकी मौत हो गई। लंदन पुलिस ने किशोर की मौत की पुष्टि की है। इस बीच, एक आँकड़ा सामने आया है, जिसमें बताया गया है किअकेले लंदन में ही पिछले साल 14 हजार से ज्यादा चाकूबाजी की घटनाएँ सामने आई थी।

मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक, ये हमला उत्तरी-पूर्वी लंदन के हैनॉल्ट ट्यूब स्टेशन के पास हुआ, जिसके बाद ट्यूब स्टेशन को बंद कर दिया गया और पुलिस ने पूरे इलाके की घेरेबंदी कर दी। ये हमला मंगलवार सुबह 6.45 बजे के आसपास हुआ, जिसमें एक व्यक्ति ने कार से पहले तो एक घर में टक्कर मार दी, फिर वो बड़ी सी समुराई तलवार के साथ बाहर आया और लोगों पर हमले करने शुरू कर दिए। इस हमले में 2 पुलिसकर्मी भी घायल हो गए, वो हमलावर को पकड़े की कोशिश कर रहे थे। हमलावर की पहचान की सार्वजनिक नहीं की गई है। बताया जा रहा है कि उसकी उम्र 36 साल है।

इस हमले में कुल 5 लोग घायल हुए थे, जिसमें 13 साल का किशोर भी था। पुलिस ने प्रेस कॉन्फ्रेंस करके बताया कि किशोर की अस्पताल में इलाज के दौरान मौत हो गई। वहीं, यूके के प्रधानमंत्री ऋषि सुनक ने हमले की निंदा की है। उन्होंने इसे कायराना हरकत करार दिया है।

ऋषि सुनक ने एक्स पर लिखा, “यह एक चौंकाने वाली घटना है। मेरी संवेदनाएँ प्रभावित लोगों और उनके परिवारों के साथ हैं। मैं पुलिस और आपातकालीन सेवाओं को उनकी त्वरित प्रतिक्रिया के लिए सलाम करता हूँ। हमारी सड़कों पर ऐसी हिंसा का कोई स्थान नहीं है।”

लंदन में 14 हजार से ज्यादा चाकूबाजी के मामले हर साल, पूरे देश में 50 हजार

पीए न्यूज एजेंसी ने कुछ आँकड़े जारी किए हैं, जो चौंकाने वाले हैं। साल 2023 में अकेले लंदन मेट्रोपॉलिटर पुलिस ने 14,577 चाकूबाजी के मामले दर्ज किए हैं। साल 2022 में ये आंकड़े 12,119 तक थे, वहीं कोरोना काल से पहले साल मार्च 2020 तक 14,680 मामले दर्ज हुए थे। पूरे देश की बात करें तो इंग्लैंड और वेल्स में साल 2023 में चाकू से जुड़े अपराधों की संख्या 49,489 रही, जिसमें अकेले लंदन में 29% मामले दर्ज किए गए।

चीन से पैसा लेकर भारत विरोधी प्रोपेगेंडा: न्यूजक्लिक और प्रबीर पुरकायस्थ के खिलाफ चार्जशीट का UAPA कोर्ट ने लिया संज्ञान, 31 मई को सुनवाई

दिल्ली की पटियाला हाउस कोर्ट ने मंगलवार (30 अप्रैल 2024) को वामपंथी समाचार पोर्टल न्यूज़क्लिक और उसके संस्थापक-संपादक प्रबीर पुरकायस्थ के खिलाफ गैरकानूनी गतिविधियाँ (रोकथाम) अधिनियम (UAPA) के तहत दायर आरोप पत्र पर संज्ञान लिया। इस मामले में अब अगली सुनवाई 31 मई 2024 को होगी और आरोप पर बहस होगी।

दिल्ली पुलिस की स्पेशल सेल ने इन दोनों पर न्यूजक्लिक और प्रबीर पुरकायस्थ के खिलाफ चीन की ओर से पैसे लेकर चीन के पक्ष में बड़े पैमाने पर प्रोपगेंडा फैलाने का आरोप लगाया है। इस मामले में दिल्ली पुलिस की स्पेशल सेल की ओर से पेश विशेष लोक अभियोजक (SPP) अखंड प्रताप सिंह ने अदालत की बताया कि रेड के दौरान दो आरोपितों को गिरफ्तार किया गया था।

SPP अखंड प्रताप सिंह ने बताया कि इनमें से एक आरोपित अमित चक्रबर्ती सरकारी गवाह बन चुका है। इसके साथ ही उन्होंने यह बताया कि इस मामले में आठ संरक्षित गवाह हैं। उन्होंने कहा, “आरोपी के सभी अधिकार अदालत द्वारा सुरक्षित रखे जाएँगे।” उन्होंने बताया कि अन्य व्यक्तियों (जिनके नाम FIR में हैं और जिनके नाम बाद में सामने आए) की जाँच अभी भी जारी है।

दिल्ली पुलिस ने इस महीने की शुरुआत में पुरकायस्थ के खिलाफ UAPA के तहत मुकदमा चलाने की मंजूरी वाला आदेश अतिरिक्त सत्र न्यायाधीश हरदीप कौर की अदालत में पेश किया था। दरअसल, जब UAPA के तहत कोई मामला दर्ज किया जाता है तो केंद्र या राज्य सरकार को जाँच एजेंसी द्वारा उपलब्ध कराए गए सबूतों के आधार पर आरोपित के खिलाफ मुकदमा चलाने की मंजूरी देनी होती है।

पुरकायस्थ और न्यूज़क्लिक के एचआर प्रमुख अमित चक्रवर्ती को पिछले साल अक्टूबर में गिरफ्तार किया गया था और नवंबर में न्यायिक हिरासत में भेज दिया गया था। चक्रवर्ती इस साल जनवरी में इस मामले में सरकारी गवाह बन गए थे। बता दें कि न्यूज़क्लिक, पुरकायस्थ, अमेरिकी व्यवसायी नेविल रॉय सिंघम और वर्ल्डवाइड मीडिया होल्डिंग्स के जेसन फ़ेचर के खिलाफ UAPA सहित धाराओं में FIR दर्ज की गई थी।

हालाँकि, आरोप पत्र केवल न्यूज़क्लिक और पुरकायस्थ के खिलाफ दायर किया गया था। दरअसल, दिल्ली पुलिस ने आरोप लगाया था कि न्यूज़क्लिक को अमेरिका के माध्यम से चीन से अवैध धन प्राप्त हुआ था। FIR में एक्टिविस्ट गौतम नवलखा के साथ पुरकायस्थ की ‘1991 से दोस्ती’ का भी उल्लेख किया गया है, जो एल्गर परिषद-माओवादी लिंक मामले में नजरबंद हैं।

प्रबीर पुरकायस्थ के खिलाफ एफआईआर में दिल्ली पुलिस की विशेष सेल की विस्तृत आरोपों में ‘कश्मीर और अरुणाचल प्रदेश को भारत के हिस्से नहीं हैं’ बताया गया है। इसके अलावा, भारत सरकार की कोविड के खिलाफ लड़ाई को बदनाम करने, किसानों के आंदोलन को वित्तपोषित और चीनी दूरसंचार कंपनियों का बचाव करने का भी आरोप शामिल है।

उधर, इसी मामले में सुप्रीम कोर्ट में भी सुनवाई हुई। सुप्रीम कोर्ट ने मंगलवार को प्रबीर पुरकायस्थ द्वारा दायर विशेष अनुमति याचिका में प्रवर्तन निदेशालय (ED) से सवाल किया है कि उसने प्रबीर के वकील को रिमांड माँगने के बारे में पहले से सूचित क्यों नहीं किया था? सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि आरोपित को सूचित किए बिना सुबह 6 बजे रिमांड आदेश पारित करना ‘बहुत जल्दबाजी’ थी।

अदालत ने फर्जी कथाओं को बढ़ावा देने और विदेशी वित्त पोषित संस्थाओं की ओर से राष्ट्रीय हितों को खतरे में डालने के आरोप में UAPA के तहत अपराधों के लिए उनकी गिरफ्तारी को चुनौती देने वाली एसएलपी में दोनों पक्षों को विस्तार से सुना। पुरकायस्थ को दिल्ली पुलिस की स्पेशल सेल ने 3 अक्टूबर 2023 को गिरफ्तार किया था और वह फिलहाल तिहाड़ जेल में हैं।

प्रज्वल रेवन्ना मामले में घिरी कर्नाटक की कॉन्ग्रेस सरकार, दावा- महीनों पहले मिले थे सेक्स स्कैंडल के Videos, पर हाथ पर हाथ धरे बैठी रही: अमित शाह ने भी उठाए सवाल

गृह मंत्री अमित शाह ने कर्नाटक की कॉन्ग्रेस सरकार पर हमला बोला है। कर्नाटक के हासन से जेडीएस एमपी प्रज्वल रेवन्ना के कथित सेक्स वीडियो मामले में अमित शाह ने पूछा है कि कर्नाटक सरकार को इस बात की जानकारी थी लेकिन उन्होंने फिर भी कोई एक्शन क्यों नहीं लिया।

गुवाहाटी में मीडिया से बात करते हुए गृह मंत्री शाह ने कहा, ”भाजपा का स्पष्ट रवैया है कि हम देश की मातृशक्ति के साथ खड़े हैं। मैं कॉन्ग्रेस से पूछना चाहता हूँ कि यहाँ किसकी सरकार है? सरकार कॉन्ग्रेस पार्टी की है। उन्होंने अब तक कोई कार्रवाई क्यों नहीं की? हमें (केंद्र सरकार) को इस पर कार्रवाई करने की जरूरत नहीं है क्योंकि यह राज्य की कानून व्यवस्था का मामला है, राज्य सरकार को इस पर कार्रवाई करनी है।”

अमित शाह ने यह भी कहा कि भाजपा इस मामले में जाँच के पक्ष में है और जेडीएस ने खुद भी निर्णय लेने के लिए अपनी कोर कमिटी की बैठक बुलाई है जहाँ इस पर एक्शन होगा।उन्होंने इस मामले में प्रियंका गाँधी के आरोपों का भी जवाब दिया। प्रियंका गाँधी ने मोदी सरकार पर रेवन्ना के खिलाफ कोई एक्शन ना लेने का आरोप जड़ा था। इस पर अमित शाह ने कहा कि प्रियंका गाँधी को पीएम मोदी की जगह सिद्दारमैया से प्रश्न पूछने चाहिए। उन्होंने पूछा कि इस मामले में अब तक कोई जाँच क्यों नहीं हुई।

प्रज्वल रेवन्ना को जेडीएस ने किया निलंबित

जेडीएस ने हासन के सांसद और लोकसभा प्रत्याशी प्रज्वल रेवन्ना को पार्टी से निलंबित करने का ऐलान किया है। यह निर्णय उनके सेक्स वीडियो वाले मामले को देखते हुए लिया गया है। उन पर आरोप है कि उन्होंने बड़ी संख्या में महिलाओं के आपत्तिजनक वीडियो बनाए और उन्हें परेशान भी किया। इससे पहले प्रज्वल के चाचा और कर्नाटक के पूर्व मुख्यमंत्री एचडी कुमारस्वामी ने एक्शन की घोषणा की थी।

कॉन्ग्रेस सरकार को सब था मालूम: प्रज्वल का ड्राइवर

प्रज्वल रेवन्ना के पूर्व ड्राइवर कार्तिक रेड्डी ने दावा किया है कि रेवन्ना के सेक्स स्कैंडल के मामले की जानकारी कॉन्ग्रेस सरकार को महीनों पहले से ही थी। उसने दावा किया कि रेवन्ना की वीडियो वाली पेन ड्राइव उसने कर्नाटक के उपमुख्यमंत्री डीके शिवकुमार को कुछ महीने पहले दी थी जिस पर उन्होंने एक्शन लेने की बात कही थी। ऐसे में अब आरोप लग रहे हैं कि कॉन्ग्रेस सरकार जानबूझ कर इस मामले को दबाती रही और इसे लोकसभा चुनाव के समय में निकाला गया।

गौरतलब है कि हासन से सांसद और पूर्व प्रधानमंत्री एचडी देवेगौडा के पोते प्रज्वल रेवन्ना की कुछ कथित वीडियो हासन क्षेत्र में लगातार वायरल हो रही थीं। इन्हें पेन ड्राइव और व्हाट्सएप के माध्यम से फैलाया जा रहा था। बताया गया कि यह वीडियो आपत्तिजनक हैं और इनमें प्रज्वल रेवन्ना महिलाओं के साथ आपत्तिजनक स्थिति में हैं। यह सूचना सामने आने के बाद कर्नाटक महिला आयोग ने सरकार को एक पत्र लिख कर जाँच की माँग की थी। कर्नाटक सरकार ने इस मामले में SIT जाँच के आदेश दिए हैं। रेवन्ना इस बीच विदेश जा चुके हैं।

हाल जानने के नाम पर आए, वायरल कर दी नाबालिग गैंगरेप पीड़िता की फोटो: MP कॉन्ग्रेस अध्यक्ष जीतू पटवारी और विधायक भूरिया पर FIR

मध्य प्रदेश पुलिस ने कॉन्ग्रेस के प्रदेश अध्यक्ष जीतू पटवारी और उनकी ही पार्टी के विधायक विक्रांत भूरिया के खिलाफ FIR दर्ज की है। जीतू और विक्रांत पर आरोप है कि उन्होंने गैंगरेप की शिकार एक नाबालिग बच्ची की तस्वीर को अपने एक्स अकॉउंट पर शेयर करके उसकी पहचान को उजागर किया। सोमवार (29 अप्रैल 2024) को इन दोनों कॉन्ग्रेसी नेताओं पर पॉक्सो एक्ट सहित अन्य धाराओं में केस दर्ज हुआ है। पुलिस मामले की जाँच कर रही है।

आरोपितों के खिलाफ एक महिला ने शिकायत दर्ज करवाई है। जीतू और विक्रांत पर भारतीय दंड संहिता की धारा 228-A के साथ यौन अपराधों से बच्चों का संरक्षण (पॉक्सो) अधिनियम और किशोर न्याय (बच्चों की देखभाल और संरक्षण) अधिनियम, 2015 की संबंधित धाराओं में FIR दर्ज हो गई। अलीराजपुर के पुलिस अधीक्षक IPS राजेश व्यास ने इस कार्रवाई की पुष्टि की है। उन्होंने जीतू पटवारी और विक्रांत भूरिया की हरकत को सुप्रीम कोर्ट के निर्देशों का उल्लंघन बताया है। पुलिस मामले की जाँच और अन्य कानूनी कार्रवाई कर रही है।

मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक, गैंगरेप का मामला मध्य प्रदेश के अलीराजपुर जिले का है। यहाँ के थानाक्षेत्र जोबट में शुक्रवार (26 अप्रैल) को जनजातीय समुदाय की एक नाबालिग लड़की से गैंगरेप केस दर्ज हुआ। नामजद किए गए 2 आरोपितों की उम्र 14 से 18 साल के बीच बताई गई है। जाँच के दौरान पुलिस ने दोनों लड़कों को फरार होने में मदद करने वाले एक तीसरे लड़के को भी आरोपित बनाया।

इसके बाद रविवार (28 अप्रैल 2024) को पुलिस ने तीनों आरोपितों को हिरासत में ले लिया और फिर सभी को पॉक्सो एक्ट व अन्य धाराओं के तहत किशोर गृह भेज दिया गया। वहीं, पीड़िता का भी मेडिकल परीक्षण और काउंसिलिंग करवाई गई। इसी दिन रविवार को कॉन्ग्रेस के मध्य प्रदेश अध्यक्ष झाबुआ से विधायक विक्रांत भूरिया के साथ पीड़ित परिवार से मिलने गए थे। यहाँ उन्होंने पीड़िता बच्ची की तस्वीरें खींची। बाद में इन दोनों नेताओं ने इन चित्रों को अपने-अपने X हैंडलों पर शेयर कर दिया जो थोड़ी देर में वायरल हो गया। अलीराजपुर पुलिस ने दोनों कॉन्ग्रेसियों की इस हरकत का संज्ञान ले कर FIR दर्ज कर लिया। अब दोनों के खिलाफ कार्रवाई होगी।

जिस मालेगाँव ब्लास्ट पर कॉन्ग्रेस ने रची थी ‘हिन्दू आतंकवाद’ की थ्योरी, उसमें समीर शरद कुलकर्णी के खिलाफ ट्रायल पर सुप्रीम कोर्ट ने लगाई रोक: पलट चुके हैं 34 गवाह

जिस मालेगाँव बम ब्लास्ट का इस्तेमाल कर के कॉन्ग्रेस पार्टी और उसके समर्थकों ने ‘भगवा/हिन्दू आतंकवाद’ की फर्जी थ्योरी गढ़ी थी, अब उस मामले में सुप्रीम कोर्ट के ताज़ा फैसले ने ऐसे तत्वों को तगड़ा झटका दिया है। सर्वोच्च न्यायालय ने समीर शरद कुलकर्णी के खिलाफ चल रही ट्रायल पर रोक लगा दी है। उनके खिलाफ UAPA की धारा-45 के तहत मुकदमा चलाने के लिए केंद्र सरकार से अनुमति नहीं ली गई थी। अब जुलाई 2024 में इस मामले की अगली सुनवाई होगी।

इसी मामले में साध्वी प्रज्ञा सिंह ठाकुर को भी फँसाया गया था, हाल ही में वो मुंबई स्थित NIA की अदालत में पेश भी हुई थीं। इस दौरान उन्होंने खराब स्वास्थ्य का हवाला दिया, लेकिन कोर्ट ने उन्हें नियमित रूप से सुनवाई में पेश होने को कहा। साध्वी प्रज्ञा सिंह ठाकुर ने कहा कि वो सुनवाई में सहयोग करेंगी। उन्होंने खुद को शारीरिक रूप से बीमार बताते हुए कहा कि जब तक शरीर साथ देगा तब तक वो ट्रायल में हिस्सा लेती रहेंगी। 29 सितंबर, 2008 को महाराष्ट्र के नासिक स्थित मालेगाँव में बम ब्लास्ट हुआ था।

समीर शरद कुलकर्णी को राहत दिलाने के लिए अधिवक्ता विष्णु शंकर जैन ने याचिका दायर की थी। वो वाराणसी स्थित काशी विश्वनाथ मंदिर को इस्लामी अतिक्रमण से मुक्त कराने के अलावा मथुरा और भोजशाला वाले केस भी लड़ रहे हैं। जैन ने कहा कि ये एक प्रताड़ना का मामला है, जिसमें ‘हिन्दू टेरर’ की फर्जी थ्योरी लाई गई। मालेगाँव ब्लास्ट में 6 की मौत हुई थी, जबकि 100+ घायल हुए थे। रमजान का महीना था और लोग नमाज पढ़ने जा रहे थे।

आज़ाद नगर पुलिस थाने में इस संबंध में FIR दर्ज हुई थी। इस मामले में अब तक 34 गवाह अपने बयान से पलट चुके हैं। एक गवाह ने इसे कॉन्ग्रेस-NCP की साजिश बताते हुए कहा था कि प्रताड़ित कर के उससे गवाही ली गई थी। समीर शरद कुलकर्णी के ट्रायल पर लगी रोक अंतरिम है, अगले आदेश तक ये जारी रहेगी। ट्रायल को सुप्रीम कोर्ट ने गैर-कानूनी बताया। जाँच एजेंसी और केंद्र सरकार ने इस मामले में प्रतिक्रिया माँगी गई है।

समीर शरद कुलकर्णी पर आरोप लगाया गया था कि उन्होंने ही ब्लास्ट के लिए केमिकल की व्यवस्था की थी। वो मध्य प्रदेश की राजधानी भोपाल में एक प्रिंटिंग प्रेस में काम करते थे। मई 2019 में जमानत पर बाहर रहने के दौरान उन्होंने खुद की जान को खतरा बताते हुए महाराष्ट्र के तत्कालीन मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस को पत्र लिख कर सुरक्षा की माँग की थी। इसी मामले में भारतीय सेना के मेजर (रिटायर्ड) रमेश उपाध्याय और लेफ्टिनेंट कर्नल (रिटायर्ड) प्रसाद पुरोहित को भी फँसाया गया था।

छत्तीसगढ़ में फिर से एनकाउंटर, 9 (2 महिला) नक्सलियों के शव मिले: हथियारों का जखीरा भी बरामद, पिछली बार ढेर हुए थे 29

छत्तीसगढ़ में नक्सलियों के गढ़ माने जाने वाले अबूझमाड़ में सुरक्षा बलों को बड़ी कामयाबी मिली है। अबूझमाड़ के जंगलों में एसटीएफ और नारायणपुर डीआरजी की टीम की नक्सलियों के साथ मुठभेड़ हुई है, जिसमें 10 से ज्यादा नक्सलियों के मारे जाने की सूचना मिल रही है। ये मुठभेड़ अभी जारी है। इस बीच, सुरक्षा बलों ने 2 महिला नक्सलियों समेत 9 शव बरामद कर लिए हैं। नक्सलियों के पास से भारी मात्रा में हथियार और गोला बारूद भी बरामद हुए हैं। बता दें कि 16 अप्रैल 2024 को कांकेर में 25 लाख के ईनामी समेत 29 नक्सली ढेर हुए थे।

मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक, ये मुठभेड़ छत्तीसगढ़ के नारायणपुर और कांकेर जिले की सीमा पर स्थित अबूझमाड़ में हुई है। बस्तर रेंज के आईजी पी सुंदरराज ने बताया कि दोनों जिलों के सीमाई इलाके में स्थित अबूझमाड़ में स्पेशल टास्क फोर्स और डीआरजी नायारणपुर की टीम की नक्सलियों से मुठभेड़ हुई। ये मुठभेड़ अभी तक जारी है। मुठभेड़ की जगह से कई नक्सलियों के शव बरामद हो चुके हैं, जिसमें कम से कम 2 महिला नक्सली भी शामिल हैं। आजतक ने मारे गए नक्सलियों की संख्या 7 बताई है।

इस बीच, छत्तीसगढ़ के उप-मुख्यमंत्री विजय शर्मा ने कहा कि वर्दीधारी नक्सलियों के पास से भारी मात्रा में हथियार और राशन भी मिला है। हमारे सभी जवान सुरक्षित हैं। उन्होंने 5-7 नक्सलियों के मारे जाने की बात कही। वहीं, एएनआई ने बताया है कि इस मुठभेड़ में 9 नक्सलियों के शव बरामद किए जा चुके हैं। इस मुठभेड़ में मारे गए नक्सलियों की संख्या 9 से अधिक है।

बता दें कि 16 अप्रैल 2024 को भी कांकेर में नक्सलियों को बड़ा नुकसान पहुँचा था। बीएसएफ ने स्पेशल ऑपरेशन में टॉप कमांडर समेत 29 नक्सलियों को ढेर कर दिया था। उस मुठभेड़ में नक्सलियों का टॉप कमांडर और 25 लाख का ईनामी नक्सली शंकर राव भी ढेर हुआ था, तो महिला नक्सली कमांडर ललिता भी मारी गई थी।