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संस्कार है हिंदू विवाह, नाच-गान का मजमा नहीं, इसलिए केवल रजिस्ट्रेशन से नहीं बनेगी बात: सुप्रीम कोर्ट, जानिए क्या है सप्तपदी का विधान जो है अनिवार्य

सुप्रीम कोर्ट ने हिंदुओं की शादी को लेकर अहम फैसला सुनाया और कहा कि हिंदुओं की शादी बिना ‘सप्तपदी’ के मान्य नहीं है। मैरिज सर्टिफिकेट होने से शादी नहीं मानी जा सकती, जब तक सात फेरों के प्रमाण न हों। सुप्रीम कोर्ट ने साफ कहा कि हिंदुओं की शादी में ‘सप्तपदी’ यानी ‘अग्नि के समक्ष सात फेरों का होना’ सबसे महत्वपूर्ण है। सुप्रीम कोर्ट ने कहा है कि हिंदुओं का विवाह एक पवित्र बंधन है, ये सिर्फ खाने-पीने और नाच-गान का मौका भर नहीं। इससे पहले, इलाहाबाद हाई कोर्ट ने कहा था कि हिंदुओं की शादी में ‘सप्तपदी’ अनिवार्य है, कन्यादान कोई अनिवार्य रस्म नहीं है।

लाइव लॉ की रिपोर्ट के मुताबिक, सुप्रीम कोर्ट में जस्टिस बीवी नागरत्ना और ऑगस्टाइन जॉर्ज मसीह की बेंच ने एक अहम फैसला दिया है। सुप्रीम कोर्ट ने हिंदू मैरिज एक्ट 1955 के आधार पर एक ऐसी शादी को रद्द कर दिया है, जिसमें मैरिज सर्टिफिकेट पर पति-पत्नी के हस्ताक्षर तो थे, लेकिन दोनों के बीच विवाह की कोई रस्म नहीं हुई थी। दोनों की शादी का रजिस्ट्रेशन घर वालों ने ‘किसी वजह से’ करा दिया था, लेकिन अब उस कपल ने सुप्रीम कोर्ट से शादी को रद्द करने की गुहार लगाई थी।

सुप्रीम कोर्ट ने अपने फैसले कहा कि इस शादी में मैरिज सर्टिफिकेट तो बन गया है, क्योंकि उसके लिए अपील की गई थी, लेकिन शादी की प्रक्रिया ही नहीं पूरी की गई, ऐसे में इस शादी का कोई आधार ही नहीं है। सुप्रीम कोर्ट ने मैरिज सर्टिफिकेट को खारिज करते हुए दोनों की शादी को रद्द कर दिया।

सुप्रीम कोर्ट ने अपने फैसले में कहा, “जहाँ हिंदू विवाह सप्तपदी जैसे तय संस्कारों के साथ नहीं हुआ है, वो विवाह माना ही नहीं जाएगा। इसे ऐसे समझें कि वैध विवाह के लिए हिंदू विवाह में होने वाले सभी समारोहों को निभाया जाना जरूरी है। जिसमें सात फेरे की प्रक्रिया भी शामिल है। अगर कोई विवाद होता है, तो उसके निपटारे के लिए सात फेरों की प्रक्रिया का सबूत भी होना चाहिए। अगर किसी ने बिना सात फेरों के विवाह किया है, तो वो हिंदू मैरिज एक्ट के सेक्शन 7 के अनुसार हिंदू विवाह नहीं माना जा सकता। इन कार्यक्रों (वैवाहिक कार्यक्रमों) के बिना सिर्फ मैरिज सर्टिफिकेट बनवा लेना न तो शादी का सबूत है और न ही हिंदू मैरिज एक्ट के तहत वो शादी मान्य है, जिसका सर्टिफिकेट तो है, लेकिन सात फेरे जैसी अनिवार्य रस्में नहीं हुई।”

सुप्रीम कोर्ट ने आगे कहा, “अगर सात फेरों का कोई सबूत नहीं है, तो सेक्शन 8 के तहत मैरिज रजिस्ट्रेशन ऑफिसर ऐसी शादियों को पंजीकृत नहीं कर सकता। यानी मैरिज सर्टिफिकेट जारी नहीं कर सकता। मैरिज सर्टिफिकेट सिर्फ विवाह हो गया है, इसका सर्टिफिकेट है, लेकिन विवाह हुआ है, इसका सबूत देना अनिवार्य होगा।” अन्य शब्दों में कहें, तो मैरिज सर्टिफिकेट विवाह होने पर मुहर है, अगर सात फेरों की प्रक्रिया पूरी की गई हो। उसके बिना मैरिज सर्टिफिकेट का भी कोई वजूद नहीं होगा।

कन्यादान अनिवार्य नहीं, सात फेरों की अनिवार्यता

इससे पहले, 22 मार्च 2024 को उत्तर प्रदेश के इलाहाबाद हाई कोर्ट ने एक महत्वपूर्ण फैसला सुनाया था और कहा था कि कन्यादान हिंदू विवाह के लिए एक अनिवार्य रस्म नहीं है। कोर्ट ने कहा कि हिंदू विवाह अधिनियम, 1955 में केवल सात फेरे को हिंदू विवाह के लिए अनिवार्य रस्म माना गया है। कन्यादान का उल्लेख अधिनियम में नहीं है। इलाहाबाद हाई कोर्ट के जस्टिस सुभाष विद्यार्थी ने कहा था कि हिंदू विवाह अधिनियम, 1955 के अनुसार, ‘सात फेरे’ को विवाह की एकमात्र अनिवार्य रस्म माना गया है। ‘कन्यादान’ एक सांस्कृतिक रस्म है जिसमें पिता अपनी बेटी को दूल्हे को सौंपता है। यह रस्म पितृत्व से स्त्रीत्व की यात्रा का प्रतीक है। हाई कोर्ट ने कहा कि ‘कन्यादान’ एक महत्वपूर्ण रस्म हो सकती है, लेकिन यह विवाह की वैधता के लिए आवश्यक नहीं है।

बिना सात फेरों के विवाह ही पूर्ण नहीं

इससे पहले, पिछले साल अक्टूबर में इलाहाबाद हाई कोर्ट ने एक अन्य फैसले में कहा था कि सप्तपदी के बिना हिंदुओं में शादी मान्य नहीं है। ये हिंदुओं के विवाह की सबसे महत्वपूर्ण शर्त है। इलाहाबाद हाईकोर्ट ने 3 अक्टूबर 2023 को ये फैसला सुनाया। हाईकोर्ट ने कहा कि अगर शादी में सारी प्रक्रिया पूरी कर दी जाए और अग्नि के फेरे ना लिए जाएँ तो वह विवाह संपन्न नहीं माना जाएगा। हाईकोर्ट ने हिंदू विवाह अधिनियम, 1955 की धारा 7 का हवाला दिया, जिसमें कहा गया है कि एक हिंदू विवाह को तभी वैध माना जाएगा यदि वह ‘शादी के सभी रीति-रिवाजों के साथ’ संपन्न हुआ हो।

सप्तपदी के बारे में जानें

सप्तपदी हिंदू विवाह की एक महत्वपूर्ण रस्म है। यह अग्नि के चारों ओर सात चक्कर लगाने की प्रक्रिया है। इन सात चक्करों को सात वचनों का प्रतीक माना जाता है जो वर-वधू एक-दूसरे को देते हैं।

सप्तपदी की प्रक्रिया

वर और वधू को अग्नि के सामने खड़ा किया जाता है।
वर वधू के दाहिने हाथ को अपने बाएँ हाथ में पकड़ता है।
वर-वधू एक-दूसरे के सामने खड़े होकर सात चक्कर लगाते हैं।
प्रत्येक चक्कर के दौरान, वर-वधू एक-दूसरे को एक वचन देते हैं।
सातवें चक्कर के बाद, वर-वधू अग्नि के चारों ओर एक साथ खड़े होते हैं।

सात वचन इस प्रकार हैं:

पहला वचन: मैं तुम्हें अपना पति/पत्नी मानता/मानती हूँ।
दूसरा वचन: मैं तुम्हें अपना जीवनसाथी मानता/मानती हूँ।
तीसरा वचन: मैं तुम्हारी खुशी के लिए जीने का वादा करता/करती हूँ।
चौथा वचन: मैं तुम्हारी इच्छाओं का सम्मान करने का वादा करता/करती हूँ।
पाँचवाँ वचन: मैं तुम्हारी रक्षा करने का वादा करता/करती हूँ।
छठा वचन: मैं तुम्हें अपना जीवन भर प्यार करने का वादा करता/करती हूँ।
सातवाँ वचन: मैं तुम्हारे साथ बुरे और अच्छे समय में रहने का वादा करता/करती हूँ।

सप्तपदी हिंदू विवाह की एक महत्वपूर्ण रस्म है। यह एक ऐसा अनुष्ठान है जो वर-वधू को एक-दूसरे के प्रति अपने वचनों को दोहराने का अवसर देता है। यह एक ऐसा क्षण है जब वे अपने जीवन को एक साथ बिताने के लिए प्रतिबद्ध होते हैं।

‘आदिवासी होने के कारण राष्ट्रपति को राम मंदिर में नहीं बुलाया’: राहुल गाँधी के झूठ को ट्रस्ट ने बताया आपत्तिजनक, कहा- कॉन्ग्रेस नेता की बातें निराधार

गुजरात के गाँधीनगर में राहुल गाँधी ने भाषण देते हुए दावा किया था कि राम मंदिर की प्राण प्रतिष्ठा कार्यक्रम में देश के राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू को नहीं बुलाया गया क्योंकि वो जनजातीय (आदिवासी) समाज से आती हैं। राहुल गाँधी के इस भाषण के बारे में टाइम्स ऑफ इंडिया से पता चलने के बाद अब ‘श्री राम जन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र’ के महासचिव चंपत राय ने बयान जारी करके राहुल गाँधी के दावे को भ्रामक और निराधार बताया है।

उन्होंने वीडियो जारी करते हुए कहा कि राम मंदिर तीर्थ क्षेत्र का महामंत्री होने के नाते उन्हें राहुल गाँधी के भाषण से गंभीर आपत्ति है। उन्होंने कहा कि राहुल गाँधी की कही बातें नितांत असत्य हैं, निराधार हैं और भ्रामक हैं। वह बोले, “हम राहुल गाँधी को बताना चाहते हैं कि देश की वर्तमान राष्ट्रपति श्रीमती द्रौपदी मुर्मू और पूर्व राष्ट्रपति रामनाथ कोविंद, दोनों को अयोध्या में हुए कार्यक्रम में पधारने के लिए निमंत्रण दिया गया था।”

चंपत राय ने आगे कहा, “हम राहुल गाँधी को ये भी बता देना चाहते हैं कि अनुसूचित जाति, अनुसूचित जनजाति एवं अन्य पिछड़े वर्ग और अत्यधिक गरीब समाज के तमाम लोगों को आमंत्रित किया गया था और वे पधारे भी थे। संत-महापुरुष, समाज जीवन में यश प्राप्त करने वाले और समाज जीवन में भारत का नाम बढ़ाने वाले परिवारों एवं गणमान्य व्यक्तियों को भी आमंत्रित किया गया था। इसके अलावा अल्पसंख्यक समुदाय के लोग भी कार्यक्रम में आए थे।”

चंपत राय ने जानकारी दी कि कार्यक्रम के दौरान मंदिर निर्माण करने वाले श्रमिक भी प्राण प्रतिष्ठा समारोह में मौजूद थे। प्राण प्रतिष्ठा अनुष्ठान के दौरान भी, अनुसूचित जाति, अनुसूचित जनजाति और अन्य पिछड़ी जातियों के कई परिवारों को श्री राम जन्मभूमि मंदिर के ‘शुभ मंडप’ में पूजा करने का अवसर दिया गया था।”

यह तस्वीर उस समय की है जब मंदिर निर्माण समिति के अध्यक्ष ने प्राण-प्रतिष्ठा का निमंत्रण राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू को दिया

उन्होंने कहा कि भगवान राम ने अपने जीवन में किसी के साथ भेदभाव नहीं किया, तो राम जन्म भूमि निर्माण में लगा हुआ ट्रस्ट भी किसी के साथ भेदभाव करने का विचार नहीं रख सकता। इस ट्रस्ट में 6 संत महात्मा भी हैं, जो सब समाज को भगवान का ही रूप मानकर व्यवहार करते हैं। चंपत राय यह भी बोले कि राहुल गाँधी ने तथ्यों की जाँच के बिना यह आरोप लगाए हैं। प्राण प्रतिष्ठा के तीन महीने बाद ऐसी बात करना समाज में भेदभाव पैदा करने का प्रयास है सिद्ध हो सकता है। इसलिए ट्रस्ट इस पर गंभीर आपत्ति व्यक्त करता है। हमारा काम समाज को जोड़ना है।

उल्लेखनीय है कि इससे पहले भी कई बार राहुल गाँधी और कॉन्ग्रेस के नेता राम मंदिर को लेकर ऐसा विवाद खड़ा कर चुके हैं जहाँ कहा जाता है कि ये कार्यक्रम भाजपा का राजनैतिक कार्यक्रम था और इसमें नरेंद्र मोदी के खास लोग ही बुलाए गए थे। हकीकत जबकि यह है कि निमंत्रण देने का काम मंदिर के ट्रस्ट ने किया और इस कार्यक्रम में सभी समाज के लोग भी आए थे।

इंदौर में मटन दुकानदार कामरान ने गौतम के सिर पर लोहे के रॉड से कर दिया वार, सिर फटने के बाद हो गई मौत: बंटी भी जख्मी, बुलडोजर एक्शन की माँग

मध्य प्रदेश के इंदौर में कामरान अकरम खान ने रविवार (28 अप्रैल 2024) को गौतम सोलंकी नाम के एक हिन्दू युवक की हत्या कर दी है। मटन की दुकान चलाने वाले कामरान ने गौतम की हत्या उसके सिर पर लोहे की रॉड मार कर की। इस हमले में बंटी नाम का एक अन्य युवक घायल हो गया है। प्रशासन ने आरोपित के अवैध दुकान पर बुलडोजर चलाया है। पुलिस ने कामरान को गिरफ्तार कर लिया गया है।

मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक, मामला इंदौर के देपालपुर का है। शनिवार की शाम को अहीरखेड़ी निवासी 21 साल के गौतम मधुसूदन सोलंकी अपने साथी बंटी के साथ बाजार गए थे। मिर्जापुर यशवंत सागर के पास कामरान ने सुपर मटन शॉप नाम से दुकान खोल रखी है। यहाँ किसी बात पर कामरान का गौतम से झगड़ा हो गया। इसी दौरान कामरान ने लोहे की रॉड उठाई और गौतम के सिर पर मार दिया।

गौतम के साथ मौजूद बंटी ने अपने साथी को बचाने की कोशिश की तो कामरान ने रॉड से उन पर भी हमला कर दिया। इस हमले में बंटी भी घायल हो गए। मामले की जानकारी मिलते ही गौतम के परिजन घटनास्थल पर पहुँचे। परिजनों को देखकर कामरान भाग निकला। इसके बाद गौतम के परिजनों ने एम्बुलेंस मँगाकर दोनों घायलों को सरकारी अस्पताल में भर्ती करवाया।

दोनों की हालत खराब होने पर उन्हें इंदौर के अरविंदो हॉस्पिटल रेफर कर दिया गया। यहाँ गौतम की मौत हो गई। वहीं, बंटी का इलाज चल रहा है। मृतक गौतम सोलंकी टेंट हाउस चलते थे। उनके परिवार के सदस्य हिन्दू संगठन से जुड़े बताए जा रहे हैं। घटना की जानकारी मिलते ही नाराज हिन्दू संगठनों ने कामरान के खिलाफ कड़ी कार्रवाई की माँग के साथ हंगामा शुरू कर दिया।

मामले की संवेदनशीलता को देखते हुए पुलिस ने कई टीमें बनाकर आरोपित कामरान की तलाश में ताबड़तोड़ दबिश दी। आखिरकार सोमवार (29 अप्रैल) को पुलिस ने कामरान को गिरफ्तार कर लिया। इधर प्रशासन ने उसकी दुकान की जाँच की तो वह अवैध निकला। इसके बाद उस पर बुलडोजर चला दिया गया। हिंदू संगठनों ने आरोपित के घर पर भी बुलडोजर चलाने की माँग की है।

प्रदर्शनकारियों ने कामरान के घर पर भी बुलडोजर चलाने के लिए 3 दिनों का अल्टीमेटम दिया है। इसके साथ ही आरोपित कामरान के लिए फाँसी की सजा की माँग की है। मृतक के परिजनों के आरोप है कि गौतम की हत्या में कामरान अकेले नहीं था, बल्कि उसके साथ 3-4 अन्य लोग भी थे, जो सभी मुस्लिम वर्ग से हैं। उनका कहना है कि अगर तय समय सीमा में कार्रवाई नहीं हुई तो आंदोलन और उग्र होगा।

हिजाब का विरोध करने पर शरिया पुलिस ने 16 साल की लड़की को गिरफ्तार किया, टॉर्चर कर-कर के मार डाला: आत्महत्या नहीं, नीका शरकामी की हुई थी हत्या

ईरान में 2022 के हिजाब विरोधी प्रदर्शनों के दौरान एक 16 साल की किशोरी नीका शरकामी का शव मिला था। ईरान की पुलिस ने दावा किया था कि उसने आत्महत्या की थी, लेकिन अब खुलासा हुआ है कि नीका शरकामी ने आत्महत्या नहीं की थी, बल्कि ईरान की शरिया पुलिस ने उसकी हत्या की थी। हत्या से पहले नीका का उत्पीड़न भी हुआ था।

बीबीसी ने ईरान के रिवोल्यूशनरी गार्ड के टॉप कमांडर को भेजी गई रिपोर्ट के आधार पर ये खुलासा किया है। रिपोर्ट के मुताबिक, तीन पुलिस वालों ने 2022 में ईरान में विरोध प्रदर्शन के दौरान 16 साल की नीका को गिरफ्तार किया और फिर वैन की पिछली सीट पर उसका उत्पीड़न किया था। यही नहीं, पुलिसवालों ने उसे इतना पीटा कि उसकी मौत हो गई। ईरान के रिवोल्यूशनरी गार्ड के कमांडर-इन चीफ को भेजे गए सीक्रेट रिपोर्ट में इस बात का ब्यौरा दर्ज है।

रिपोर्ट के मुताबिक, आरोपित पुलिसवालों के साथ एक सीनियर अधिकारी भी था, तो वैन में आगे की सीट पर बैठा था। तीनों पुलिस वालों ने लड़की को हथकड़ी लगातर वैन में डाल दिया था।

जानकारी के मुताबिक, ये घटना 20 सितंबर 2022 की है, जब ईरान की राजधानी तेहरान में सरकार विरोधी प्रदर्शन हो रहे थे। वहाँ लालेह पार्क के पास आयोजित विरोध-प्रदर्शन में महिलाओं और युवतियों ने हिजाब जलाए थे। उस घटना के वीडियो में नीका भी दिखी थी और हिजाब के ढेर को आग के हवाले करने वालों में वो सबसे आगे थी।

हालाँकि उसके बाद वो लापता हो गई थी और घटना के 9 दिन बाद नीका का शव मिला था। सरकार ने दावा किया था कि उसने आत्महत्या की है। इस दावे की पुष्टि के लिए एक बिल्डिंग में जाते हुए उनका सीसीटीवी फुटेज बी जारी किया गया था। हालाँकि नीका की माँ ने पुलिस के दावे को खारिज कर दिया था। अब बीबीसी की रिपोर्ट में भी इस बात की पुष्टि हो गई है।

बता दें कि ईरान में इस्लामिक कानूनों को लागू कराने की जिम्मेदारी एक स्पेशल फोर्स पर है। महिषा अमीनी की हत्या के बाद ईरान में सरकार और हिजाब विरोधी प्रदर्शन तेजी से फैल गए थे। उन विरोध प्रदर्शनों को कुचलने के लिए ईरानी सरकार ने काफी ताकत का इस्तेमाल किया था। कई लोगों को इस दौरान गिरफ्तार किया गया और सरकार विरोधी काम करने के आरोपों में मौत की भी सजा दी गई है। हालाँकि नीका के पास अपील करने का भी समय नहीं मिला, क्योंकि ईरानी पुलिस वालों ने उनका उत्पीड़न किया और फिर उनकी हत्या कर दी।

T20 क्रिकेट विश्वकप के लिए भारतीय टीम घोषित: फिनिशर और मजबूत मिडिल ऑर्डर के बिना जीतेंगे कप? इस टीम से आपको कितनी उम्मीदें?

वेस्टइंडीज और अमेरिका में जून महीने में होने जा रहे T20 वर्ल्ड कप के लिए भारतीय टीम की घोषणा कर दी है। बीसीसीआई ने रोहित शर्मा की अगुवाई में 15 सदस्यीय टीम की घोषणा की है, जिसकी उप-कप्तानी की जिम्मेदारी हार्दिक पांड्या को दी गई है। इस टीम में युजवेंद्र चहल की काफी समय बाद वापसी हुई है, वो पिछली बार के विश्व कप में टीम का हिस्सा नहीं थे। वहीं, इस टीम में रिंकू सिंह जैसे फिनिशर को 15 खिलाड़ियों की जगह स्टैंडबाई में रखा गया है।

अजित अगरकर की अगुवाई वाली बीसीसीआई की चयन समिति ने भारतीय टीम की घोषणा की है। इस टीम में 5 बल्लेबाजों को जगह दी गई, जिसमें कप्तान रोहित शर्मा, विराट कोहली, यशस्वी जायसवाल, सूर्यकुमार यादव और शिवम दुबे हैं। इसमें से यशस्वी जायसवाल और शिवम दुबे 2021 की वर्ल्ड कप टीम में नहीं थी, जिसमें भारतीय टीम पहले ही दौर में बाहर हो गई थी।

विकेटकीपर के तौर पर भारतीय टीम में 2 चेहरों को जगह दी गई है। ऋषभ पंत और संजू सैमसन। इसमें से संजू सैमसन और ऋषभ पंत दोनों ने ही खुद को साबित किया है, लेकिन ऋषभ पंत लंबे समय बाद टीम में वापसी कर रहे हैं। उन्हें सीधे-सीधे आईपीएल 2024 में बेहतर प्रदर्शन का ईनाम मिला है। वहीं, संजू सैमसन लगातार बेहतरीन प्रदर्शन कर रहे हैं। आईपीएल 2024 में उन्होंने न सिर्फ बल्ले से, बल्कि विकेट के पीछे भी शानदार प्रदर्शन किया है। उन्होंने कप्तानी की जिम्मेदारी भी बाखूबी संभाली है।

आल राउंडर के तौर पर भारतीय टीम में रविंद्र जडेजा और अक्षर पटेल के साथ हार्दिक पांड्या को मौका मिला है। हार्दिक पांड्या इस समय आईपीएल में बेहद बुरे दौर से गुजर रहे हैं। न ही उनके बल्ले से रन बन पा रहे हैं और न ही गेदबाजी में वो कोई कमाल नहीं कर पा रहे हैं। वहीं, रविंद्र जडेजा और अक्षर पटेल टीम को लोवर मिडिल ऑर्डर में मजबूती देते हैं। हार्दिक पांड्या अगर एक-दो मैच में नहीं चले, तो शिवम दुबे की काम चलाऊ मध्यम गति की गेदबाजी का भी इस्तेमाल किया जा सकता है। चूँकि वेस्टइंडीज और अमेरिका में पिचे धीमी रहने वाली हैं, ऐसे में शिवम दुबे भी काम आ सकते हैं। हालाँकि आईपीएल में उन्होंने गेदबाजी नहीं की है, लेकिन उन्होंने सैयद मुश्ताक अली ट्रॉफी में थोड़े मैचों में गेंदबाजी कर विकेट भी निकाले थे।

स्पिनर के तौर पर टीम में कुल्चा की जोड़ी की वापसी हुई है। चहल लगातार लंबे समय से टीम से बाहर चल रहे थे, लेकिन आईपीएल में उन्होंने खुद को साबित किया है। चहल अब भी भारतीय टीम के लिए सबसे ज्यादा विकेट लेने वाले गेंदबाज हैं, तो आईपीएल में भी वो वही हैसियत रखते हैं। इनका साथ देने के लिए अक्षर पटेल और रविंद्र जडेजा की स्पिन है ही।

तेज गेंदबाजी की बात करें तो भारतीय टीम के पास जसप्रीत बुमराह निर्विवादित रूप से नंबर वन गेंदबाज है। वो दुनिया की किसी भी टीम में पहली पसंद के तौर पर शामिल होने की काबिलियत रखते हैं। आईपीएल 2024 में भी उनका दम दिखा है। लेकिन उनका साथ देने के लिए मोहम्मद सिराज और अर्शदीप सिंह को चुना गया है। जो एक नजर में कमजोर जोड़ी लग सकती है, लेकिन बुमराह के साथ दूसरे छोर पर लेफ्ट आर्म पेसर के तौर पर अर्शदीप फायदा उठा सकते हैं। वहीं, सिराज को टीम में शामिल किया है, जिन्होंने इंटरनेशनल क्रिकेट में बेहतरीन प्रदर्शन किया है, ये अलग बात है कि अर्शदीप और सिराज दोनों ही आईपीएल 2024 में अपनी चमक नहीं दिखा सके हैं।

रिंकू सिंह बाहर क्यों?

रिंकू सिंह भारतीय टीम के लिए फिनिशर की भूमिका निभाते रहे हैं। उन्होंने भारतीय टीम के लिए 89 की औसत और 170 से ज्यादा की स्ट्राइक रेट से रन भी बनाए हैं, लेकिन इस आईपीएल में उन्हें पूरा मौका ही नहीं मिल पाया और जब मौका मिला तो वो चल नहीं पाए। ऐसे में आईपीएल 2024 की विफलता भी उनके आड़े आ गई लगती है। हालाँकि उन्हें रिजर्व में रखा गया है, तो हो सकता है देर-सबेर उन्हें मौका ही मिल ही जाए।

शुबमन गिल भी रिजर्व

भारतीय टीम में जगह बनाने के लिए शुबमन गिल भी अच्छी प्रतिस्पर्धा कर रहे थे, लेकिन रोहित शर्मा के साथ टॉप ऑर्डर में लेफ्टी बैट्समैन की जरूरत को देखते हुए उन्हें वरीयता मिली है, फिर उनका बल्ला भले ही शुरुआती मैचों में खामोश रहा हो, लेकिन वो लय में आ चुके हैं। वहीं, भारतीय टीम के टॉप ऑर्डर में दाहिने हाथ के बल्लेबाजों की भरमार की वजह से भी शुबमन गिल का पत्ता कटा है। चूँकि जरूरत पड़ने पर संजू सैमसन भी ओपनिंग कर सकते हैं, ऐसे में शुबमन गिल के पास मौके कम हैं।

ऋतुराज बाहर क्यों?

शुबमन गिल जैसी बात ऋतुराज के भी खिलाफ गई लगती है। भले ही उन्होंने इस सीजन में जमकर रन बनाए हों, लेकिन स्ट्राइक रेट के मामले में वो थोड़ा पीछे रह गए। साथ ही टॉप ऑर्डर के बल्लेबाजों की भरमार भी उनके खिलाफ गई। बाकी बल्लेबाजों की बात करें तो जितेश शर्मा इस आईपीएल में फॉर्म में नहीं दिखे हैं।

शिवम दुबे एक्स फैक्टर?

इस टीम में एक्स फैक्टर के तौर पर शिवम दुबे हैं। वो मिडिल ओवरों में भारतीय टीम के लिए ताबड़तोड़ रन बना सकते हैं। स्पिनर्स के खिलाफ उनका खेल शानदार रहता है और इस आईपीएल में उन्होंने दिखाया है कि तेज गेदबाजों के खिलाफ भी काफी प्रभावी हैं। उनके साथ मिडिल ऑर्डर में किसे मौका मिलेगा, ये देखने वाली बात होगी। दरअसल, वेस्ट इंडीज और अमेरिका के छोटे मैदानों में शिवम दुबे की हिटिंग पर टीम की सफलता काफी हद तक निर्भर करेगी।

दूसरा एक्स फैक्टर मिस?

इस भारतीय टीम को देखकर लगता है कि इसमें कोई चौंकाने वाला नाम नहीं है। लोग उम्मीद कर रहे थे कि रॉ-पेस के नाम पर मयंक यादव को टीम में मिला जा सकता है, लेकिन अमेरिका और वेस्टइंडीज के छोटे मैदानों को देखते हुए कोई रिस्क नहीं लिया गया। फिर मयंक बीच में चोटिल भी चल रहे थे। ऐसे में उन्हें टीम में शामिल करना एक जुआँ ही हो सकता था। बैटिंग में सूर्या, शिवम दुबे, यशस्वी जैसे बिग हिटर मौजूद हैं, तो रोहित शर्मा और विराट कोहली अपनी भूमिका के बारे में फिर से सोच सकते हैं। हालाँकि विराट कोहली प्रचंड फॉर्म में चल रहे हैं, ऐसे में वो टीम इंडिया की नैय्या पार लगाने का दम खम रखते हैं।

बहरहाल, मिडिल ऑर्डर में कौन खेलेगा, किसका क्रम ऊपर-नीचे होगा, ये भी देखने वाली बात होगी। क्योंकि ओपनर के तौर पर रोहित शर्मा और यशस्वी यादव का नाम तय है, तो तीसरे नंबर पर विराट कोहली और चौथे पर सूर्यकुमार यादव। शिवम दुबे चौथे से पाँचवें होते हैं तो छठें नंबर पर कौन खेलेगा? चूँकि शिवम सीएसके के लिए चौथे नंबर पर खेल रहे हैं, तो रविंद्र जडेजा भी ये काम करते रहे हैं, वहीं संजू सैमसन टॉप ऑर्डर में बैटिंग करते हैं। मीडिल ऑर्डर की माथापच्ची रोहित शर्मा के लिए बड़ा सिरदर्द भी साबित हो सकती है।

भारतीय टीम इस प्रकार है: रोहित शर्मा (कप्तान), हार्दिक पांड्या (उप कप्तान), यशस्वी जायसवाल, विराट कोहली, सूर्यकुमार यादव, ऋषभ पंत, संजू सैमसन, शिवम दुबे, रविंद्र जडेजा, अक्षर पटेल, कुलदीप यादव, युजवेंद्र चहल, अर्शदीप सिंह, जसप्रीत बुमराह और मोहम्मद सिराज।

रिजर्व खिलाड़ी : शुबमन गिल, रिंकू सिंह, खलील अहमद और आवेश खान।

इस टीम से आपको कितनी उम्मीदें हैं, हमें जरूर बताएँ।

नैनीताल के सेंट थरेसा चर्च में पक रहा था प्रतिबंधित मांस, हिंदू संगठनों ने किया जमकर विरोध: धर्मांतरण का रैकेट चलाने का भी लगाया आरोप

उत्तराखंड के नैनीताल जिले में एक चर्च के अंदर प्रतिबंधित मांस बनाने का आरोप लगाकर हिन्दू संगठनों ने रविवार (28 अप्रैल 2024) को हंगामा किया है। चर्च का नाम सेंट थेरेजा है। इसमें एक स्कूल भी चलता है। मामले की सूचना पर पुलिस और पशुपालन विभाग मौके पर पहुँचे। चर्च में मिले मांस के सैम्पल लेकर जाँच के लिए प्रयोगशाला भेज दिया है। हिन्दू संगठनों ने यहाँ धर्मान्तरण का भी दावा किया है।

मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक, घटना थाना क्षेत्र काठगोदाम की है। यहाँ के नैनीताल रोड पर सेंट थरेजा चर्च है। इस चर्च में एक स्कूल भी चलता है, जिसमें आसपास के कई छात्र पढ़ते हैं। रविवार की दोपहर अचानक ही यहाँ हिन्दू संगठनों का जमावड़ा होना शुरू हो गया। वो चर्च के अंदर प्रतिबंधित मांस पकाने का आरोप लगाने लगे। मामले की सूचना पुलिस को मिली तो वो फ़ौरन ही मौके पर पहुँची।

पुलिस ने हिन्दू संगठनों को समझा कर शांत किया। इस मामले में तत्काल पशुपालन विभाग के अधिकारी और फ़ूड इंस्पेक्टर बुलवाए गए। पशुपालन विभाग के अधिकारियों ने चर्च के अंदर जाकर मिले पदार्थ के सैम्पल लिए। इन सैम्पलों को पुलिस की मौजूदगी में सील करके प्रयोगशाला भेजा गया है। बताया जा रहा है कि इनकी जाँच ऋषिकेश के लैब में होगी, जिसके रिपोर्ट कुछ दिनों बाद आएगी।

सैम्पल ले रहे अधिकारियों ने मीडिया में बयान देने से मना करते हुए सैम्पलों की जाँच रिपोर्ट आने तक प्रतीक्षा करने को कहा है। चर्च के मैनेजमेंट ने भी खुद पर हिन्दू संगठनों द्वारा लगाए गए आरोपों को बेबुनियाद बताया है। एहतियातन चर्च के पास सुरक्षा कड़ी कर दी गई है। हल्द्वानी के हिन्दू संगठन पदाधिकारी जोगिंदर उर्फ़ जोगी ने कहा कि प्रतिबंधित मांस पकने की सूचना उन्हें मिली थी।

जोगिंदर ने एलान किया कि अगर सैम्पल में मांस गोवंश का निकलेगा तो हिन्दू संगठन चर्च को खुलने नहीं देंगे। उन्होंने बताया कि घटना के दिन चर्च में कई लोगों की मौजूदगी थी, जो हिन्दू संगठन के कार्यकर्ताओं को देखकर निकल गए। जोगिंदर का आरोप है कि चर्च से धर्मान्तरण की भी गतिविधियाँ संचालित होती हैं। उन्होंने प्रशासन से भी कड़ी कार्रवाई की उम्मीद जताई है।

फर्नीचर का काम करने वाले शाहरुख़ शेख ने बीमा कंपनी की मैनेजर को फाँसा, कई बार किया रेप: अकरम ने लिव इन पार्टनर को पीटा, रूममेट आबिद की गर्लफ्रेंड भी हिन्दू

मध्य प्रदेश के इंदौर से ‘लव जिहाद’ का नया मामला सामने आया है। यहाँ इंश्योरेंस कम्पनी में मैनेजर के पद पर काम करने वाली एक लड़की ने मुस्लिम युवक पर नाम बदल कर अपने साथ रेप करने का आरोप लगाया है। आरोपित का नाम मोहम्मद शाहरुख़ शेख है जिसके खिलाफ पुलिस ने FIR दर्ज कर ली है। शादीशुदा शाहरुख़ ने खुद को कुँवारा बता कर पीड़िता से शादी का भी वादा किया था। वहीं राजस्थान के जयपुर से एक अन्य मामले में लिव इन रिलेशनशिप में रह रही हिन्दू लड़की पर उसके मुस्लिम बॉयफ्रेंड ने पिस्टल तान दी। इस मामले की भी शिकायत पुलिस में दर्ज करवाई गई है।

शाहरुख़ शेख ने खुद को बताया था यश जैन

मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक, पहला मामला इंदौर के हीरानगर थाना क्षेत्र का है। यहाँ बीमा कम्पनी में मैनेजर पद पर काम करने वाली लड़की ने पुलिस में शिकायत दर्ज कराई है। पीड़िता ने बताया कि बीमा कम्पनी में काम करने के दौरान उसकी जान-पहचान एक फर्नीचर का काम करने वाले युवक से हुई थी जिसने अपना नाम ‘यश जैन’ बताया था। कुछ दिनों की बातचीत में दोनों लोग काफी घुल-मिल गए। युवक ने पीड़िता से शादी का प्रस्ताव रखा। लड़की इस झाँसे में आ गई। इसी दौरान आरोपित ने लड़की से 3-4 बार रेप किया। विरोध करने पर वह जल्द ही शादी का भरोसा दिया करता था।

खुद को यश बताने वाला आरोपित पीड़िता से अपनी मौसी के इंदौर स्थित घर मिलता था। एक दिन पीड़िता को लगा कि आरोपित कुछ छिपा रहा है। लड़की ने पड़ताल की तो खुद को यश बताने वाला युवक शाहरुख़ शेख निकला। पीड़िता ने यह भी पता लगा लिया कि शाहरुख़ इंदौर के पीठा चंदन नगर इलाके में रहता है। 15 अप्रैल, 2024 को जब लड़की ने आरोपित के घर जा कर पड़ताल की तो वह शादीशुदा निकला। पीड़िता ने अपने परिजनों को सारी बात बताई।

आखिरकार तमाम कानूनी प्रक्रियाओं के बाद शाहरुख़ के खिलाफ हीरानगर थाने में FIR दर्ज कर ली गई है। पुलिस शाहरुख़ की तलाश और मामले की जाँच कर रही है।

अकरम ने ताना हिन्दू प्रेमिका पर पिस्टल

दूसरा मामला राजस्थान के जयपुर से है। यहाँ के था नाक्षेत्र महेश नगर में एक हिन्दू लड़की ने शुक्रवार (26 अप्रैल) को अपने मुस्लिम प्रेमी के खिलाफ शिकायत दर्ज करवाई है। शिकायत में पीड़िता ने बताया कि वह अकरम नाम के युवक के साथ पिछले 7 वर्षों से लिव इन रिलेशनशिप में रह रही है। जिस घर में ये दोनों रहते हैं वह आदिल खान का है। 26 अप्रैल को लड़की ने अकरम पर शादी करने का दबाव बनाया। इसी बात को ले कर दोनों में कहासुनी हुई।

पीड़िता का आरोप है कि थोड़ी देर के बाद नाराज हुए अकरम ने उसकी पिटाई शुरू कर दी। लड़की को पीटने में मकान मालिक आदिल भी शामिल हो गया। इन दोनों ने कमरे के कई सामान भी तोड़ डाले। कुछ ही देर में अकरम ने शराब के नशे में पीड़िता पर पिस्टल तान दी। लड़की जैसे-तैसे अपनी जान बचा कर वहाँ से भाग पाई। बाद में उसने पुलिस में शिकायत दर्ज करवाई। पीड़िता का आरोप है कि अकरम पहले से शादीशुदा है और वह अब शादी नहीं करना चाहता।

लड़की ने यह भी खुलासा किया कि अकरम का साथी (मकान मालिक) आदिल भी एक हिंदू लड़की के साथ लिव इन रिलेशनशिप में है। आदिल की पार्टनर का नाम सिमरन सिंह राजपूत है। हालाँकि, सिमरन राजपूत ने आदिल के साथ अपनी मर्जी से बिना किसी दबाव के रहना बताया। पुलिस ने पीड़िता की शिकायत पर जब आदिल के मकान पर दबिश दी तो वहाँ अवैध हथियार बरामद हुए। आदिल के घर से पिस्टल, मैगजीन और 7 कारतूस मिले हैं।

आदिल और सिमरन दोनों ही बिहार के निवासी हैं। दिल्ली से होटल मैनेजमेंट में MBA करने वाली सिमरन पिछले 7 वर्षों से आदिल के साथ लिव इन रिलेशनशिप में रह रही है। आदिल जयपुर में रियल स्टेट का काम करता है। उसके खिलाफ पहले भी आपराधिक मामले दर्ज हैं। आदिल और सिमरन को आर्म्स एक्ट में गिरफ्तार कर लिया गया है। घटना के बाद से अकरम फरार है जिसकी तलाश में पुलिस दबिश दे रही है।

भक्तों से चढ़ावा लेने पर तमिलनाडु पुलिस ने 4 पुजारियों को किया गिरफ्तार: जानिए अंग्रेजों का काला कानून हिंदुओं को कैसे कर रहा प्रताड़ित

देश को आजाद हुए लगभग 77 साल हो गए हैं। भाजपा की सरकार अंग्रेजों के दमनकारी कानूनों को बदलने का लगातार प्रयास कर रही है। हालाँकि, मंदिरों को लेकर अंग्रेजों के कानून आज भी अपने बदले स्वरूप में लागू हैं। अंग्रेजों ने हिंदुओं के मंदिरों एवं अन्य स्थलों को अपनी निगरानी में ले लिया था। अब ऐसे ही कानून के आधार पर तमिलनाडु पुलिस ने अब कुछ पुजारियों को गिरफ्तार कर लिया है।

तमिलनाडु के मेट्टुपलयम के पास स्थित थेकमपट्टी में वाना बद्रकालियाम्मन मंदिर के चार पुजारियों को पुलिस ने गुरुवार (25 अप्रैल 2024) की रात को गिरफ्तार कर लिया। पुजारियों पर आरोप है कि उन्होंने भक्तों द्वारा चढ़ाए गए पैसे को हड़प लिया। एक शिकायत के बाद मंदिर के सहायक आयुक्त ने चार पुजारियों और वंशानुगत ट्रस्टी वसंत संपत के खिलाफ मामला भी दर्ज कराया है।

शिकायत के आधार पर तमिलनाडु पुलिस ने जाँच की और उसके बाद चारों पुजारियों को गिरफ्तार कर लिया गया। जिन पुजारियों को गिरफ्तार किया हैं, उनकी पहचान सुलुर के रहने वाले 36 वर्षीय आर रघुपति, मेट्टुपलयम के रहने वाले 47 वर्षीय एस दंडपाणि, 54 साल के सरवनन और गोबिचेट्टिपलयम के 33 वर्षीय विष्णु कुमार के रूप में हुई है। वहीं, मंदिर के वंशानुगत ट्रस्टी वसंत संपत फरार हैं।

एक पुलिस अधिकारी का कहना है कि चारों पुजारियों को सीसीटीवी कैमरे में भक्तों द्वारा अपनी थाली में छोड़े गए चढ़ावे को अपने घर ले जाते हुए पकड़ा गया था। हिंदू धार्मिक और धर्मार्थ बंदोबस्ती (एचआर एंड सीई) विभाग के सहायक आयुक्त और मंदिर के कार्यकारी अधिकारी यूएस कैलासमूर्ति ने कहा कि मंदिर के पुजारियों को चढ़ावे के पैसे को मंदिर की हुंडी में जमा करना होता है।

कैलासमूर्ति ने कहा, “इस आशय का एक सरकारी आदेश है। मद्रास उच्च न्यायालय ने भी इस प्रथा का समर्थन किया है और प्लेट पर संग्रह सहित पूरे दान को मंदिर के राजस्व के रूप में मानने का आदेश दिया है।” उन्होंने कहा कि मंदिर प्रशासन ने पुजारियों पर नजर रखने के लिए एक सीसीटीवी कैमरा लगाया है, ताकि यह देखा जा सके कि वे थाली की राशि को हुंडी में जमा कर रहे हैं या नहीं।

कैलासमूर्ति ने कुछ महीने पहले मेट्टुपलयम न्यायिक मजिस्ट्रेट अदालत के समक्ष दायर अपनी याचिका में कहा, “चारों लोग इस प्रथा का पालन नहीं कर रहे थे।” अदालत ने इस साल 14 मार्च को मेट्टुपालयम पुलिस को पुजारियों और उनका समर्थन करने वाले मंदिर ट्रस्टी के खिलाफ उचित कार्रवाई करने का निर्देश दिया था। इसके बाद पुलिस ने इनके खिलाफ मामला दर्ज करके इन्हें गिरफ्तार कर लिया।

अंग्रेजों का कानून और मंदिर पर नियंत्रण

दरअसल, भारत में आने से पहले हिंदू मंदिरों का प्रबंधन उसे बनवाने वाले राजा-महाराजाओं की निगरानी में स्थानीय समुदाय द्वारा किया जाता था। मैसूर, त्रावणकोर और कोचीन जैसी हिंदू शासकों ने इस लोकतांत्रिक स्थिति में भी मंदिरों की देखरेख की परंपरा को बनाए रखा। ईस्ट इंडिया कंपनी की अगुवाई में अंग्रेजों ने भारत में जब राज कायम किया तो मंदिरों को राजस्व के एक प्रमुख स्रोत के रूप में देखा।

इस मामले में दक्षिण भारत के मंदिरों पर अंग्रेजों की विशेष निगाह रही, क्योंकि उधर के अधिकांश मंदिर मुस्लिम आक्रांताओं के आक्रमण से बच गए थे। इस बीच साल 1796 में मद्रास के ब्रिटिश कलेक्टर ने कोंजीवरम (कांचीपुरम) में हिंदू मंदिरों का प्रशासन अपने हाथ में ले लिया। इसी तरह 1801 में यह घोषित किया गया कि तिरुपति के सभी मंदिर अर्कोट के जिला कलेक्टर के नियंत्रण में रहेंगे।

द प्रिंट में छपे अभिनव चंद्रचूड़ की लेख के अनुसार, इस आदेश में कहा गया कि जो मंदिर प्रशासन या पुजारी मंदिरों के धनों का दुरुपयोग करने पर उन्हें दंडित किया जाएगा। इसके बाद अंग्रेज सरकार ने जल्द ही अन्य मंदिरों और धार्मिक संस्थानों के नियंत्रण एवं प्रशासन के लिए कानून बनाना शुरू कर दिया। सन 1806 में सरकार ने आधुनिक ओडिशा में जगन्नाथ मंदिर के ‘प्रबंधन’ के लिए नियम जारी किए।

इस नियम के तहत मंदिर का प्रबंधन तो पुजारियों की एक समिति के पास थी, लेकिन किसी कदाचार की स्थिति में अंग्रेज सरकार उन्हें हटा सकती थी। हालाँकि, यह व्यवस्था बहुत लंबे समय तक नहीं चली। 1809 में जगन्नाथ मंदिर का प्रबंधन खोरदाह के राजा को स्थानांतरित कर दिया गया, जिन्हें मंदिर का ट्रस्टी नियुक्त किया गया था। हालाँकि, अंग्रेजी सरकार ने मंदिर पर कुछ नियंत्रण बरकरार रखा।

इसके तुरंत बाद अंग्रेजी सरकार ने मंदिरों के प्रशासन को विनियमित करने के लिए बंगाल, मद्रास और बॉम्बे में नियम बनाए। सन 1810 में बंगाल के लिए कानून बनाया गया था। इसके पीछे अंग्रेज सरकार ने तर्क दिया कि लोगों द्वारा मंदिरों को दिए गए बड़े दान और योगदान का उन संस्थानों के प्रबंधकों द्वारा दुरुपयोग और गबन किया जा रहा था। इन कानूनों के तहत सरकार ने इन पर निगरानी शुरू कर दी।

इसी तरह का एक कानून सन 1817 में मद्रास प्रांत के लिए बनाया गया। सन 1827 में बंबई के लिए एक कानून बनाया गया। इसमें कहा गया था कि जिन भूमियों को करों का भुगतान करने से छूट दी गई थी उन पर अब कर लगाया जाएगा। इस तरह अंग्रेज सरकार विभिन्न उपायों से इन मंदिरों पर निगरानी रखने लगी और भ्रष्टाचार के आरोप में मंदिर प्रशासन की बेदखली अपने हिसाब से करने लगी।

सन 1833 तक मद्रास सरकार 7600 हिंदू मंदिरों के प्रशासन की प्रभार देखती थी। हालाँकि, इंग्लैंड के राजा के हस्तक्षेप के 1840 में ईस्ट इंडिया कंपनी ने एक निर्देश जारी किया कि मंदिरों को उनके ट्रस्टी को लौटाया जाएगा। इसके बाद धार्मिक बंदोबस्ती अधिनियम 1863 आया, जिसने मंदिर प्रशासन को ब्रिटिश सरकार से ट्रस्टियों को सौंप दिया गया।

जब अंग्रेजों ने मद्रास धार्मिक और धर्मार्थ बंदोबस्ती अधिनियम 1925 लागू किया तो मुस्लिमों और ईसाइयों ने इसका भारी विरोध किया। इसके बाद इन दोनों समुदायों को इन से बाहर कर दिया गया। इसके सन 1927 में इस कानून को केवल हिंदुओं पर लागू किया गया और इसका नाम बदलकर मद्रास हिंदू धार्मिक और बंदोबस्ती अधिनियम 1927 कर दिया गया।

सन 1935 के अधिनियम XII के माध्यम से कानून में थोड़ा सा परिवर्तन पेश किया गया। इसके माध्यम से मंदिरों को सरकार द्वारा अधिसूचित किया जा सकता था और उनके प्रशासन को अपने कब्जे में लिया जा सकता था। इस तरह हिंदू धार्मिक बंदोबस्ती बोर्ड ने मंदिरों को सँभालने और प्रशासन करने की शक्तियाँ ग्रहण कर लीं। इस बोर्ड में तीन से पाँच सदस्य होते थे।

कॉन्ग्रेस सरकार और मंदिर पर नियंत्रण

देश आजाद होने के बाद तमिलनाडु सरकार ने 1951 में हिंदू धार्मिक और धर्मार्थ बंदोबस्ती अधिनियम 1951 नामक एक अधिनियम पारित किया और मंदिरों एवं उनकी संपत्ति का नियंत्रण अपने हाथ में ले लिया। इसे मद्रास उच्च न्यायालय और उसके बाद उच्चतम न्यायालय में चुनौती दी गई। इसके बाद 1951 अधिनियम के कई प्रावधानों को दोनों अदालतों द्वारा रद्द कर दिया गया था।

कुछ बदलावों के साथ तमिलनाडु हिंदू धार्मिक और धर्मार्थ बंदोबस्ती अधिनियम 1959 में पारित किया गया। उस समय देश में कॉन्ग्रेस की सरकार थी। इसमें कहा गया है कि अधिनियम का उद्देश्य यह देखना था कि धार्मिक ट्रस्टों और संस्थानों का प्रबंधन ठीक से किया जाए और यह सुनिश्चित किया जाए कि आय का दुरुपयोग न हो। इसके बाद से यह कानून अभी भी जारी है।

‘मेरे लैट्रिन वाले रस्ते में वो अपनी पेशाब वाली डाल देता है, दर्द होता है’: मदरसे में 7 साल के बच्चे के साथ कुकर्म करता था 27 साल का सीनियर मोहम्मद साद, पीड़ित परिवार को ही धमकी

उत्तर प्रदेश के मुजफ्फरनगर जिले में एक मदरसे में पढ़ने वाले नाबालिग छात्र के साथ अप्राकृतिक दुष्कर्म किए जाने का मामला सामने आया है। पीड़ित की उम्र महज 7 वर्ष है। कुकर्म का आरोप इसी मदरसे में पढ़ने वाले पीड़ित के सीनियर छात्र मोहम्मद साद पर लगा है। शिकायत के बाद आरोपित के परिजनों ने पीड़ित को ही धमकाना शुरू कर दिया था। पुलिस ने मोहम्मद साद को गिरफ्तार कर लिया है। सोमवार (29 अप्रैल, 2024) को पुलिस ने आरोपित को गिरफ्तार कर लिया है। मामले की जाँच और अन्य कानूनी कार्रवाई की जा रही है।

यह मामला मुजफ्फरनगर जिले के थाना क्षेत्र कोतवाली नगर का है। यहाँ रविवार (28 अप्रैल, 2024) को 7 साल के बच्चे के अब्बा ने पुलिस में शिकायत दर्ज करवाई है। शिकायत में उन्होंने बताया कि उनका बेटा मदरसा इस्लामिया में प्रथम वर्ष का छात्र है। 1-2 दिनों से बच्चा मदरसे में जाने से मना कर रहा था। उसे जब भी मदरसे में जाने के लिए कहा जाता था तो वो रोने लगता था। पीड़ित के अब्बा और अम्मी ने एक दिन अपने बच्चे से मदरसे न जाने की वजह पूछी। इस सवाल पर बच्चा रोने लगा।

जब पीड़ित चुप हुआ तो उसने पूरी वजह बताई। शिकायत के मुताबिक, बच्चे ने कहा, “मदरसे का ही एक लड़का मुझे जबरन टॉयलेट में बुलाता है और मेरे पीछे से लैट्रीन वाले रास्ते में अपनी पेशाब वाली __ देता है। मुझे लैट्रीन वाली जगह दर्द होता है। मैं मदरसे में नहीं जाऊँगा।” ये सुन कर बच्चे के अब्बा रविवार को उसे ले कर मदरसे में गए। पीड़ित अपने अब्बा को मदरसे के दूसरे कमरे में ले गया। यहाँ उसने कई लड़कों के बीच बैठे मोहम्मद साद की तरफ इशारा किया। पीड़ित ने कहा, “यही मेरे साथ गलत काम करता है।”

मोहम्मद साद की उम्र 27 साल बताई जा रही है। पीड़ित के अब्बा मोहम्मद साद से पूछताछ ही कर रहे थे कि अचानक उसके घर के तमाम लोग आ धमके। मदरसे में भीड़ जमा हो गई। आरोप है कि मोहम्मद साद के घर वाले पीड़ित के अब्बा को ही कार्रवाई करने की धमकी देने लगे। मामले की सूचना मिलते ही पुलिस पहुँची। पुलिस के पहुँचने से पहले और अपने ऊपर FIR दर्ज होने की खबर लगते ही मोहम्मद साद फरार हो गया। पीड़ित को बेहद डरा-सहमा बताते हुए उसके अब्बा ने आरोपित पर कड़ी कार्रवाई की माँग की है।

पुलिस प्रेसनोट

पुलिस ने इस शिकायत पर मोहम्मद साद को नामजद करते हुए FIR दर्ज कर ली। यह FIR IPC की धारा 377 और 506 के साथ पॉक्सो एक्ट के सेक्शन 5(ड)/6 के तहत दर्ज हुई है। FIR दर्ज करने के बाद पुलिस ने मोहम्मद साद की तलाश शुरू की। सोमवार (29 अप्रैल, 2024) को आरोपित के मुजफ्फरनगर में शामली बाईपास पर मौजूद होने की सूचना मिली। पुलिस ने दबिश दे कर साद को गिरफ्तार कर लिया। मामले की जाँच और अन्य जरूरी कार्रवाई की जा रही है। ऑपइंडिया के पास शिकायत कॉपी मौजूद है।

‘राम का मुकाबला करने के लिए शिव’: हिन्दुओं को बाँटने के लिए नया हथियार लेकर आई कॉन्ग्रेस, खड़गे को अपने प्रत्याशी का नाम याद नहीं पर प्रोपेगंडा नहीं भूले

भगवान राम को लेकर कॉन्ग्रेस की घृणा कोई छिपी हुई नहीं है। आज़ादी के बाद जब तक कॉन्ग्रेस का शासन रहा, अयोध्या मामले का निपटारा नहीं हो पाया। जब राम मंदिर में रामलला की प्राण प्रतिष्ठा हुई, तब कॉन्ग्रेस नेताओं ने इसका न्योता ही ठुकरा दिया। कॉन्ग्रेस के राष्ट्रीय अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खड़गे अब राम और शिव के बीच कटुता की कल्पना कर रहे हैं। हिन्दू शास्त्रों से अनभिज्ञ ये नेता लगातार अपनी अनर्गल बयानबाजी के कारण कुख्यात हैं।

अपने ही उम्मीदवार का नाम भूले मल्लिकार्जुन खड़गे

असल में मल्लिकार्जुन खड़गे छत्तीसगढ़ का जांजगीर-चांपा में मंगलवार (30 अप्रैल, 2024) को एक जनसभा को संबोधित कर रहे थे। वहाँ से कॉन्ग्रेस पार्टी ने डॉ शिवकुमार डहरिया को प्रत्याशी बनाया है। उनका मुकाबला भाजपा के कमलेश जांगड़े से है। 2019 के लोकसभा चुनाव में छत्तीसगढ़ की 11 में से 9 सीटें भाजपा ने जीती थीं, जबकि 2 पर कॉन्ग्रेस का कब्ज़ा रहा था। जांजगीर-चांपा लोकसभा क्षेत्र पर तो पिछले 20 वर्षों, यानी 4 चुनावों से भाजपा का ही कब्ज़ा है, जबकि उसने 3 बार उम्मीदवार बदले।

यहाँ तक कि मल्लिकार्जुन खड़गे जनसभा करने तो आ गए, लेकिन उन्हें अपने ही उम्मीदवार का नाम तक नहीं पता था। उन्होंने 2 बार अपने उम्मीदवार से उनका नाम पूछा, तब जाकर वो उनका पूरा नाम ले पाए। खड़गे ने कहा, “इनका भी नाम शिव है, ये बराबर में राम का मुकाबला कर सकते हैं। क्योंकि ये शिव हैं, मेरा नाम भी मल्लिकार्जुन है यानी मैं भी शिव हूँ।” इस दौरान उन्होंने भी ध्यान दिलाया कि आंध्र प्रदेश के श्रीशैलम में मल्लिकार्जुन नाम से एक ज्योतिर्लिंग भी है।

हालाँकि, इस दौरान मल्लिकार्जुन खड़गे भूल गए कि राम और शिव का मुकाबला कराने की बात कह कर उन्होंने हिन्दू समाज की भावनाओं को ठेस पहुँचाया है। वो हिन्दू समाज, जिसने कभी राम और शिव को अलग-अलग कर के नहीं देखा। तमिलनाडु में स्थित ‘रामेश्वरम’ ज्योतिर्लिंग के भी 2 अर्थ हैं – पहले, राम जिसके ईश्वर हैं और दूसरा, राम के जो ईश्वर हैं। जो राम और शिव में भेद कर के देखते हैं, उन्हें अविवेकी कहा जाता है। ये हिन्दुओं को बाँटने की नई नीति है।

राम और शिव के संबंध: तुलसीदास की नज़र में

जब हम अयोध्या के राजा श्रीराम और कैलाश पर्वत पर विराजने वाले भगवान शिव की बात करते हैं तो हमें रामचरितमानस के रचयिता गोस्वामी तुलसीदास को पढ़ना पड़ेगा। उन्होंने बड़े ही अच्छे ढंग से इसे प्रस्तुत किया है। शिव धनुष तोड़ने के बाद ऋषि परशुराम क्रोधित हो उठे थे और उनका लक्ष्मण से वाद-विवाद हुआ था। अंत में जब उन्होंने श्रीराम को पहचाना तो उन्होंने उनकी प्रशंसा में जो शब्द कहे, वो देखने लायक है। बालकाण्ड के इस प्रसंग में परशुराम, भगवान राम के बारे में कहते हैं:

इसका अर्थ है – “मैं एक मुख से आपकी क्या प्रशंसा करूँ? हे महादेव के मनरूपी मानसरोवर के हंस! आपकी जय हो।” जिन राम को खुद परशुराम ने महादेव के मन रूपी मनसरोवस का हंस कहा है, आज मल्लिकार्जुन खड़गे उन्हें राम और महादेव को आपस में लड़ाने की बातें कर रहे हैं? ये कितना हास्यास्पद है। ये दिखाता है कि इन्हें न तो हिन्दू धर्म की कदर है, न हिन्दू धर्मावलम्बियों की। इसी तरह यहाँ एक अन्य प्रसंग का जिक्र करना भी आवश्यक है।

ये प्रसंग है सेतु रचना के दौरान का। भगवान श्रीराम उससे पहले वहाँ न सिर्फ भगवान शिव के लिंग की स्थापना करते हैं, बल्कि उनका पूजन भी संपन्न करते हैं। इस दौरान वो कहते हैं – “सिव समान प्रिय मोहि न दूजा“, अर्थात उन्हें भगवान शिव से अधिक प्रिय कोई नहीं है। भगवान राम के परम भक्त हनुमान जी भी शिव के ही अंश थे। राम स्पष्ट कहते हैं कि उनके और शिव में किसी एक से घृणा और किसी एक में श्रद्धा हो तो वो व्यक्ति नरक में जाता है। लंकाकाण्ड की ये चौपाई देखिए:

इसका अर्थ है – “जो शिव से द्रोह रखता है और मेरा भक्त कहलाता है, वह मनुष्य स्वप्न में भी मुझे नहीं पाता। शंकर से विमुख होकर (विरोध करके) जो मेरी भक्ति चाहता है, वह नरकगामी, मूर्ख और अल्पबुद्धि है।” ये खुद भगवान राम के शब्द हैं। अब आप समझ जाइए, मल्लिकार्जुन खड़गे क्या हैं। वैसे कॉन्ग्रेस और इससे जुड़े लोग तो तुलसीदास को भी गाली देते हैं। राजद के चंद्रशेखर यादव और सपा में रहे स्वामी प्रसाद मौर्य से बड़ा उदाहरण क्या हो सकता है इसका।

हो सकता है कि तुलसीदास का लिखा ऐसे लोगों को विश्वसनीय न लगे। उनके लिए महर्षि वाल्मीकि द्वारा रचित ‘रामायण’ से भी प्रसंग उठाया जा सकता है। युद्धकाण्ड में एक प्रसंग है जब मृत्यु के पश्चात दशरथ दिव्य रूप में अपने बेटे राम से मिलने आते हैं। इसकी सूचना राम को कोई और नहीं बल्कि स्वयं महादेव ही देते हैं। उन्होंने रावण वध के लिए राम की प्रशंसा की है, जबकि राम भक्त था शिव का। राम की प्रशंसा करते हुए शिव कहते हैं:

इसका अर्थ है – “शत्रुओंको संताप देने वाले, विशाल वक्ष स्थल से सुशोभित, महाबाहु कमलनयन! आप धर्मात्माओं में श्रेष्ठ हैं। आपने रावण वध रूप कार्य सम्पन्न कर दिया—यह बड़े सौभाग्य की बात है।” ये स्वयं महादेव के शब्द हैं। इसके बाद वो कहते हैं कि रावण का आतंक सारे लोकों के लिए एक बढ़े हुए अंधकार के समान था, जिसे आपने युद्ध में मिटा दिया। इस दौरान वो उन्हें अश्वमेध यज्ञ करने की सलाह भी देते हैं और अयोध्या में जाकर राज्याभिषेक करने को भी कहते हैं।

सनातन विरोधी है I.N.D.I. गठबंधन

इस दौरान हमें ये नहीं भूलना चाहिए कि अगर I.N.D.I. गठबंधन का कोई भी नेता हिन्दू धर्म की बात करता है तो इसके पीछे उसकी कोई न कोई साजिश रहती है। कभी ये दलितों को हिन्दुओं से अलग बताते हैं, कभी ये कहते हैं कि लोग मंदिरों में लड़कियाँ छेड़ने के लिए जाते हैं। और तो और, DMK नेता उदयनिधि स्टालिन तो सनातन धर्म को डेंगू-मलेरिया बता कर इसे खत्म करने की बात तक कर देते हैं। चुनाव आते ही ये खुद को हिन्दू हितैषी बताने लगते हैं।

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी भी अपनी चुनावी रैलियों में सनातन विरोधी I.N.D.I. गठबंधन पर इन्हीं कारणों से लगातार हमला बोल रहे हैं। उनकी सरकार ने काशी और उज्जैन में कॉरिडोर बनवाया है, कामाख्या कॉरिडोर बन रहा है। तीर्थस्थलों का विकास हो रहा है, अयोध्या धार्मिक पर्यटन का हब बना है। इससे विकास भी हो रहा है। ‘विकास भी, विरासत भी’ नारे के उलट विपक्षी दल केवल अपना उल्लू सीधा करने में लगे हैं, तभी ये राम और शिव को आपस में लड़ते हुए दिखाना चाहते हैं।