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अपने बच्चों के लिए छोड़े पैसे-जमीन, आम लोगों के लिए गरीबी: कॉन्ग्रेस पार्टी के शाही परिवार की ‘विरासत’ PM मोदी ने गिनाए

लोकसभा चुनाव 2024 में चुनाव प्रचार के लिए आज मंगलवार (30 अप्रैल 2024) को प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी महाराष्ट्र में हैं। उन्होंने माड़ा के बाद उस्मानाबाद में जनसभा को संबोधित किया। इस दौरान उन्होंने कॉन्ग्रेस पर जमकर हमला किया। उन्होंने कहा कि जिन लोगों के उन्होंने घोटाले सामने लाए, वे आज उन्हें गालियाँ दे रहे हैं।

प्रधानमंत्री मोदी ने कहा, “कॉन्ग्रेस पार्टी को पराजय का भय इतना सता रहा है कि AI के द्वारा हमारे चेहरे का उपयोग करके फेक वीडियो बना रहे हैं। मोदी की आवाज को और मोदी के भाषण का उपयोग करके नई-नई चीजें गढ़ रहे हैं। मोदी आपका जीवन बदलने के लिए दिन रात एक कर रहा है और ये इंडी अघाड़ी वाले मोदी को बदलने के लिए पूरी शक्ति लगा रहे हैं।”

प्रधानमंत्री ने कहा, “मोदी आपका जीवन बदलने के लिए दिन रात एक कर रहा है और ये इंडी अघाड़ी वाले मोदी को बदलने के लिए पूरी शक्ति लगा रहे हैं। जिनके घोटाले मैंने रोके हैं, वो मोदी से गुस्सा होंगे या नहीं? वो मोदी को गालियां देंगे या नहीं? आजकल ये इसी काम में लगे हैं।”

प्रधानमंत्री मोदी ने कहा, “ये चुनाव भारत के स्वाभिमान का है। आपने 10 साल पहले का समय देखा है और आप आज का भी समय देख रहे हैं। आज दुनिया उस भारत को जानती है, जो दुनिया के विकास को गति दे रहा है।” उन्होंने आगे कहा, “उस्मानाबाद में मोदी जी के प्रति उनके परिवारजनों का ये अपार स्नेह साफ बता रहा है कि पूरा महाराष्ट्र NDA के सुशासन के साथ है।”

इसके बाद प्रधानमंत्री ने महाराष्ट्र के लातूर में भी एक जनसभा को संबोधित किया। लातूर में बोलते हुए प्रधानमंत्री ने कहा, “ये चुनाव भारत के स्वाभिमान का है। आपने 10 साल पहले का समय देखा है और आप आज का भी समय देख रहे हैं। आज दुनिया उस भारत को जानती है, जो दुनिया के विकास को गति दे रहा है।”

उन्होंने आगे कहा, “कॉन्ग्रेस आपकी संपत्ति का ‘एक्स-रे’ कराना चाहती है। आपकी संपत्ति हड़पना चाहती है और फिर उसे अपने वोट बैंक में बाँटना चाहती है। क्या आप अपनी संपत्ति कांग्रेस को देना चाहेंगे? कॉन्ग्रेस की नज़र आपकी वर्तमान कमाई पर तो है ही, आप अपने बच्चों के लिए जो संपत्ति बना रहे हैं उस पर भी उसकी गिद्ध दृष्टि है!”

प्रधानमंत्री ने कहा, “मोदी आपका जीवन बदलने के लिए दिन रात एक कर रहा है। कॉन्ग्रेस पार्टी के शाही परिवार ने अपने बच्चों के लिए कौन सी विरासत छोड़ी? ढेर सारा पैसा… देश की प्राइम लोकेशंस पर जमीनें… पावर और प्रिविलेज… और कॉन्ग्रेस पार्टी के शाही परिवार ने 6 दशक में देश को कौन सी विरासत दी? सिर्फ गरीबी।”

आतंकी हमलों की बात करते हुए पीएम मोदी ने कहा, “2014 के पहले का वो कालखंड याद करिए… कॉन्ग्रेस के उस दौर में हेडलाइनें हुआ करती थीं- भारत ने मुंबई आतंकी हमले पर पाकिस्तान को एक और डोजियर सौंपा। आज भारत डोजियर नहीं देता, आज का भारत घर में घुसकर मारता है।”

उन्होंने आगे कहा, “आज आप किसी भी दिन टीवी खोलिए, कोई भी अखबार उठाइए… ऐसी अनेक खबरें होती हैं जो बताती हैं कि हमारा देश भारत, कैसे तेजी से आगे बढ़ रहा है। कोई ना कोई सेक्टर, चाहे मार्केट हो, मैन्युफैक्चरिंग हो, स्पेस हो, डिफेंस हो…। कॉन्ग्रेस ने युवाओं को सपनों को मारा है।”

प्रधानमंत्री ने कहा, “कॉन्ग्रेस के राज में हर सुबह हम अखबारों में एक नए घोटाले का नाम पढ़ते थे। हेडलाइन होती थीं- कोलगेट: कोयले में इतने लाख करोड़ का घोटाला। आज हेडलाइनें होती हैं- इतने करोड़ यहां पकड़े गए… इतने करोड़ रुपए वहां पकड़े गए, नोटों की गड्डियां निकल रही हैं… बड़े-बड़े भ्रष्टाचारी आज जेल की सलाखों के पीछे हैं।”

बुर्का न पहनने पर बेल्ट से मारता, इस्लाम कबूलने का दबाव बनाता: कानपुर में ज्योतिष की पत्नी को हाशिम ने ओम प्रकाश बन किया ब्लैकमेल, अश्लील वीडियो भी बनाई

उत्तर प्रदेश के कानपुर जिले से लव जिहाद का मामला सामने आया है। यहाँ एक बाल-बच्चेदार महिला ने अपने पति के दोस्त हाशिम पर अश्लील वीडियो बनाने और उसे ब्लैकमेल करने का आरोप लगाया है। पीड़िता ने कहा है कि हाशिम डरा धमकाकर उसे अपने साथ ले गया था और बाद में उसने उसपर इस्लाम कबूलने का दबाव भी बनाया। हाशिम पर पीड़िता की बेटी पर भी गलत नजर रखने का आरोप है। सोमवार (29 अप्रैल 2024) को पुलिस ने इस शिकायत पर FIR दर्ज करके जाँच शुरू कर दी है।

मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक महिला मूल रूप से महोबा जिले की रहने वाली है। सोमवार को वह बजरंग दल के सदस्यों के साथ पुलिस कमिश्नर कार्यालय पहुँची। यहाँ पीड़िता ने शिकायत देते हुए बताया कि उसका पति ज्योतिषी है और वह 3 बच्चों की माँ है। कुछ समय पहले उसके घर पर महोबा का ही हाशिम ज्योतिष सीखने के बहाने आता था। हाशिम पीड़िता के पति का परिचित था। एक दिन जब पीड़िता घर में अकेली थी और स्नान कर रही थी तभी वहाँ चुपके से हाशिम पहुँच गया। हाशिम ने पीड़िता की नहाते हुए वीडियो बना ली। इसी वीडियो के सहारे वह महिला को ब्लैकमेल करने लगा।

आरोप है कि इसी वीडियो का डर दिखा कर हाशिम ने पीड़िता से रेप किया। पीड़िता ने ये भी बताया कि आरोपित पहले खुद का नाम ओम प्रकाश बताता था। कुछ दिनों बाद वह महिला पर बच्चों सहित अपने पति को छोड़ने का दबाव बनाने लगा। अपनी जिद न मानने पर वह महिला के अश्लील वीडियो वायरल करने की धमकी भी देने लगा। आरोपित के दबाव में आ कर पीड़िता ने अपने पति को छोड़ दिया और हाशिम के साथ कानपुर के नौबस्ता इलाके में रहने लगी।

कानपुर लाकर हाशिम महिला को प्रताड़ित करने लगा और यहीं हाशिम ने महिला को अपना असली परिचय दिया। वह पीड़िता को आए दिन मारता-पीटता था और इस्लाम कबूल करने का दबाव बनाता था। महिला का आरोप है कि हाशिम बिना मर्जी के उसको मजार और दरगाहों पर ले जाने लगा। बुर्का न पहनने पर पीड़िता की बेल्टों पिटाई होती थी। यहाँ तक कि महिला को नशीली दवाएँ भी दी जाती थीं। पिछले कुछ दिनों से हाशिम ने पीड़िता की नाबालिग बेटी के साथ भी छेड़खानी शुरू कर दी थी।

आखिरकार महिला ने हाशिम के खिलाफ शिकायत दर्ज करवाने का फैसला किया। सोमवार को वह हिन्दू संगठनों के साथ पुलिस कमिश्नर ऑफिस पहुँची। यहाँ पीड़िता की व्यथा सुनने के बाद मामले में FIR दर्ज करने के आदेश जारी किए गए हैं। पुलिस ने मामले की जाँच शुरू कर दी है।

‘पतंजलि’ को फँसाते-फँसाते सुप्रीम कोर्ट में खुद फँसा IMA, अध्यक्ष के बयान से उखड़ा न्यायाधीशों का पीठ: कहा- ये बेहद गंभीर, मानहानि का केस कीजिए

सुप्रीम कोर्ट ने मंगलवार (30 अप्रैल, 2024) को ‘इंडियन मेडिकल एसोसिएशन (IMA)’ के अध्यक्ष डॉक्टर RV अशोकन द्वारा की गई टिप्पणी पर सख्ती दिखाई। सुप्रीम कोर्ट में बाबा रामदेव व आचार्य बालकृष्ण की ‘पतंजलि आयुर्वेद’ एवं ‘दिव्य फार्मेसी’ पर भ्रामक विज्ञापन का मामला चल रहा है। इसी सिलसिले में ये टिप्पणी आई थी। जस्टिस अहसानुद्दीन अमानुल्लाह और जस्टिस हिमा कोहली ने बाबा रामदेव के वकील मुकुल रोहतगी द्वारा ध्यान दिलाए जाने के बाद इस टिप्पणी पर नाराज़गी जताई।

IMA अध्यक्ष ने एक मीडिया इंटरव्यू के दौरान ये विवादित बयान दिया था। मुकुल रोहतगी ने बताया कि 1 दिन का पहले उन्होंने एक परेशान करने वाले इंटरव्यू को देखा, जिसमें IMA अध्यक्ष RV अशोकन कह रहे हैं कि सुप्रीम कोर्ट उन पर उँगली उठा रहा है। उन्होंने इसे सुप्रीम कोर्ट की कार्यवाही में सीधा हस्तक्षेप करार देते हुए कहा कि सर्वोच्च न्यायालय की टिप्पणी को IMA अध्यक्ष ने दुर्भाग्यपूर्ण और अस्पष्ट करार दिया है, उन्होंने कहा कि ये टिप्पणी सुप्रीम कोर्ट के स्तर की नहीं है।

जस्टिस अहसानुद्दीन अमानुल्लाह ने इस पर कहा कि इसे रिकॉर्ड पर लेकर आइए, अब तक जो भी हो रहा है ये इससे अधिक गंभीर है। उन्होंने चेतावनी दी कि ऐसा करने वाले गंभीर परिणाम भुगतने के लिए तैयार रहें। IMA ने ही बाबा रामदेव के खिलाफ मुकदमा दर्ज कराया हुआ है। इससे पहले 23 अप्रैल, 2024 को भी सुप्रीम कोर्ट ने संस्था से कहा था कि वो पहले अपने घर को व्यवस्थित करे। आधुनिक दवाओं को लेकर अनैतिक कारोबार और अस्पतालों द्वारा महँगी और गैर-ज़रूरी दवाएँ लिखने पर भी सुप्रीम कोर्ट ने आपत्ति जताई थी।

इसके बाद IMA अध्यक्ष ने इस टिप्पणी को दुर्भाग्यपूर्ण करार दिया था। उन्होंने इसे अस्पष्ट और सामान्यीकृत बयान भी बताया था। उनका दावा था कि इससे प्राइवेट डॉक्टर हतोत्साह हुए हैं। ‘इकोनॉमिक टाइम्स’ में ये इंटरव्यू प्रकाशित हुआ था। मुकुल रोहतगी ने कहा था कि वो मानहानि के लिए एप्लिकेशन दायर कर रहे हैं, खबर किसी छोटे-मोटे समाचार-पत्र द्वारा नहीं छापी गई है, किसी छोटे-मोटे पदाधिकारी ने ऐसा नहीं बोला है। जस्टिस हिमा कोहली ने कहा कि आप इसे फाइल कीजिए, जिस पर मुकुल रोहतगी बोले कि वो जो भी ज़रूरी होगा वो करेंगे।

वहीं ‘पतंजलि’ द्वारा फिर से दायर किए गए माफीनामे पर सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि पिछली बार से महत्वपूर्ण सुधार हुआ है, पिछली बार ये छोटा था और सिर्फ ‘पतंजलि’ का नाम था जबकि इस बार और नाम भी डाले गए हैं। जस्टिस अहसानुद्दीन अमानुल्लाह ने कहा कि माफीनामे की भाषा भी उचित है, इस सुधार की वो प्रशंसा करते हैं। उन्होंने कहा कि अब अदालत की अवमानना करने वाले भी समझ गए हैं कि कोर्ट की सहायता करने वाले एक बुद्धिमान वकील का क्या लाभ है।

माफीनामे के पेज नंबरिंग के मुद्दे पर ‘पतंजलि’ के अधिवक्ता शुक्ला को जस्टिस अमानुल्लाह ने कहा, “हम सिर्फ आहत थे। इस स्थिति में हर शब्द का महत्व है। कुछ भी व्यक्तिगत नहीं है। आपके दिल में क्या है, ये हम नहीं देख सकते। ब्लैक एन्ड व्हाइट में क्या लिखा है सिर्फ वही मायने रखता है। हम ये नहीं कह रहे कि हम गुस्सा हैं। बार और बेंच के बीच पारदर्शिता होनी चाहिए। अपने जो किया है उसकी जिम्मेदारी लीजिए, माफ़ी माँगिए। कोर्ट पर ये भरोसा रखिए कि आपको निशाना नहीं बनाया जाएगा। हम पक्षपात नहीं करेंगे। अपनी तरफ से हम ये भरोसा देते हैं।”

वाशिंगटन पोस्ट की रिपोर्ट को विदेश मंत्रालय ने बताया ‘गैर जिम्मेदार’, RAW अफसर पर लगाए थे खालिस्तानी आतंकी पन्नू की सुपारी देने का आरोप

भारतीय विदेश मंत्रालय ने अमेरिकी समाचार पत्र द वाशिंगटन पोस्ट की एक रिपोर्ट को खारिज कर दिया है। इस रिपोर्ट में दावा किया गया था कि R&AW के एक अधिकारी विक्रम यादव ने गुरपतवंत सिंह पन्नू की हत्या के लिए एक टीम को सुपारी दी थी। विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता ने इसे गैरजिम्मेदार बताया है।

भारतीय विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता रणधीर जायसवाल ने इस विषय में बयान जारी किया है। विदेश मंत्रालय ने कहा, ”इस रिपोर्ट में एक गंभीर मामले पर अनुचित और निराधार आरोप लगाए गए हैं। भारत सरकार द्वारा बनाई गई उच्च स्तरीय समिति संगठित अपराधियों, आतंकवादियों और अन्य के नेटवर्क पर अमेरिकी सरकार द्वारा साझा की गई सुरक्षा चिंताओं की जाँच की जा रही है। इस पर कयास और गैर-जिम्मेदाराना टिप्पणियां मददगार नहीं हैं।”

गौरतलब है कि हाल ही में अमेरिकी समाचार पत्र द वाशिंगटन पोस्ट ने एक रिपोर्ट में दावा किया था कि R&AW के अधिकारी विक्रम यादव ने अमेरिका में रहने वाले खालिस्तानी आतंकी गुरपतवंत सिंह पन्नू की हत्या के लिए हत्यारों की एक टीम को सुपारी दी। इस रिपोर्ट में दावा किया गया था कि और भी कुछ लोगों को निशाने पर लिया गया था। इस रिपोर्ट में दावा किया गया था कि यादव ने पन्नू की जानकारियाँ हत्यारों के साथ साझा की।

रिपोर्ट में दावा किया गया था कि पन्नू को मारने की योजना को R&AW के दिल्ली दफ्तर से मंजूरी मिली थी यानी इस विषय में R&AW मुखिया को मालूम था। रिपोर्ट में यह भी दावा किया गया था कि विक्रम यादव को यह पूरा प्लान फेल होने के बाद CRPF में भेज दिया गया जहाँ R&AW में आने से पहले उनकी पोस्टिंग थी। रिपोर्ट में दावा किया गया है कि इस मामले की जानकारी पीएम मोदी के आसपास रहने वालों को भी थी।

गौरतलब है कि नवम्बर 2023 में अमेरिका की खुफिया एजेंसियों ने दावा किया था कि एक भारतीय निखिल गुप्ता ने कुछ हत्यारों को काम पर लगाया। यह हत्यारे पन्नू को मारने वाले थे। उन्होंने दावा किया था कि गुप्ता को CC1 नाम का एक अधिकारी नियंत्रित कर रहा था जो कि अब विक्रम यादव के रूप में पुष्ट हुआ है। निखिल गुप्ता वर्तमान में चेक गणराज्य में है और अमेरिका उसका प्रत्यर्पण माँग रहा है। अभी तक इस मामले में किसी भी आरोप की पुष्टि नहीं हो पाई है। भारत भी इस विषय में जाँच कर रहा है।

आरजू, साइमा, हिना… UP में 3 मुस्लिम लड़कियों ने हिंदू युवकों से शादी कर की ‘घर वापसी’, लगाए जय श्रीराम के नारे: कहा- हलाला और बुर्का से चिढ़

उत्तर प्रदेश के 2 जिलों में 3 मुस्लिम युवतियों ने इस्लाम छोड़ कर हिन्दू धर्म अपनाया है। इसमें से 2 लड़कियाँ बरेली और 1 महोबा की है। इन सभी ने अपने-अपने हिन्दू प्रेमियों से वैदिक विधि-विधान से शादी कर ली है। विवाह के दौरान ‘जय श्री राम’ और ‘हर-हर महादेव’ के नारे लगाए गए हैं। हिन्दू संगठनों ने इन शादियों में शामिल हों कर वर-वधू को आशीर्वाद दिया है। ये तीनों विवाह हिन्दू देवस्थलों पर सोमवार (29 अप्रैल, 2024) को सम्पन्न हुए हैं।

महोबा में आरजू बनीं आरती

पहला मामला महोबा जिले का है। मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक, यहाँ के पनवाड़ी इलाके की रहने वाली आरजू का लम्बे समय से दिनेश जयसवाल से प्रेम प्रसंग चल रहा था। आरजू के अम्मी-अब्बा इस रिश्ते के खिलाफ थे। 2 साल पहले आरजू अपनी मर्जी से दिनेश के साथ दिल्ली चली गईं थीं। अब दिल्ली से वापस आ कर सोमवार (29 अप्रैल) को दिनेश जयसवाल और आरजू पनवाड़ी कस्बे के गौरेया दाई मंदिर पहुँचे। दिनेश के परिजन भी साथ थे। यहाँ दोनों ने शादी की इच्छा जताई।

दोनों की आपसी सहमति देख कर मंदिर के पुजारी ने वैदिक विधि-विधान से आरजू और दिनेश का विवाह सम्पन्न करवाया। इस मौके पर दिनेश के रिश्तेदार और दोस्त भी मौजूद थे। इन सभी ने मिल कर ‘जय श्री राम’ का उद्घोष किया। विवाह के बाद पुजारी ने नवदम्पति को सदा सुखी रहने का आशीर्वाद दिया। दिनेश और आरजू ने 7 जन्मों तक एक दूसरे का साथ निभाने का वादा किया। यहाँ आरजू को नया नाम आरती मिला। बाद में वर-वधू ख़ुशी-ख़ुशी अपने घर चले गए।

बरेली में हिना बनी आकांक्षा

‘घर वापसी’ का दूसरा मामला बरेली जिले से है। यहाँ के बहेड़ी थाना क्षेत्र की रहने वाली मुस्लिम लड़की हिना ने शपथ दे कर बताया है कि उन्हें पता है कि उनके पूर्वज हिन्दू थे जिन्होंने मुगल आक्रांताओं के दबाव में इस्लाम कबूल किया था। 25 वर्षीया हिना ने पहले से ही खुद को पूजा-पाठ में विश्वास करने वाली लड़की बताते हुए हिन्दू धर्म अपनाने की इच्छा जताई। सोमवार (29 अप्रैल) को हिना की ‘घर वापसी’ बरेली के अगस्त्य मुनि आश्रम में पंडित के के शंखधर के माध्यम से हुई।

‘घर वापसी’ के बाद हिना ने अपना नाम आकांक्षा गंगवार रखा। इसी दिन हिना ने बरेली के ही आकाश गंगवार को अपना जीवन साथी चुना और वैदिक रीति-रिवाज़ से अग्नि के 7 फेरे लिए। वर-वधू ने एक साथ हवन किया। इस दौरान हिन्दू संगठनों के कई सदस्य मौके पर मौजूद रहे। इन सभी ने ‘हर-हर महादेव’ और ‘जय श्री राम’ का उद्घोष किया। विवाह के बाद हिना अपने पति आकाश के साथ घर चली गईं।

अब साईना जानी जाएँगी सोनी नाम से

‘घर वापसी’ का तीसरा मामला बरेली से ही है। यहाँ के नवाबगंज थाना क्षेत्र की रहने वाले साइमा ने अपना शुद्धीकरण करवा के हिन्दू धर्म स्वीकार कर लिया है। यह शुद्धीकरण बरेली के अगत्स्य मुनि आश्रम में हुआ। घर वापसी बिना किसी दबाव में अपनी मर्जी से करने वाली 25 वर्षीया साइमा ने अपना नया नाम सोनी रखा है। साइमा ने अपने शपथ पत्र में लिखा है कि वो इस्लाम मत में तीन तलाक और हलाला जैसी कुप्रथाओं को देख कर काफी व्यथित थीं।

सोनी बनीं साइमा ने कहा कि उनकी हिन्दू धर्म में अपनी पहले से ही आस्था रही है। वो हिन्दू देवी-देवताओं की पूजा पहले ही करती आईं हैं। सोमवार को ही सोनी ने अगत्स्य मुनि आश्रम में पंडित के के शंखधर की मौजूदगी में हाफिजगंज के रहने वाले आकाश से विवाह कर लिया। यह विवाह वैदिक विधि-विधान से हुआ जिसमें हिन्दू देवी-देवताओं की जयकार की गई। हिन्दू संगठन से जुड़े सदस्य भी इस मौके पर मौजूद थे। उन्होंने वर-वधू को सदा सुखी रहने का आशीर्वाद दिया। साइमा ने पुलिस को प्रार्थना पत्र दे कर अपने परिवार से अपनी और अपने पति की सुरक्षा की गुहार लगाई है।

गृहमंत्री अमित शाह के फर्जी वीडियो मामले में एक्शन: गुजरात से कॉन्ग्रेस – AAP नेता गिरफ्तार, तेलंगाना के CM रेवंत रेड्डी समेत कई को नोटिस

केंद्रीय गृहमंत्री अमित शाह का डीपफेक वीडियो वायरल करने के मामले में लगातार एक्शन हो रहा है। अब गुजरात से कॉन्ग्रेस और आम आदमी पार्टी के नेताओं की गिरफ्तारी हुई है। अहमदाबाद साइबर क्राइम टीम ने आम आदमी पार्टी और कॉन्ग्रेस से 2 नेताओं की गिरफ्तारी की है। इन लोगों पर आरोप है कि उन्होंने खास एजेंडे के तहत ये वीडियो वायरल किए थे।

मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक, अहमदाबाद साइबर क्राइम टीम ने जिन्हें गिरफ्तार किया है, उनके नाम सतीष वरसोला और आर बी बारिया हैं। सतीश वनसोला कॉन्ग्रेस विधायक जिग्नेश मेवानी का ऑफिस संभालता है। उसे कॉन्ग्रेस विधायक जिग्नेश मेवानी का पीए भी बताया जा रहा है। वहीं, आर बी बारिया आम आदमी पार्टी का दाहोद जिले का जिलाध्यक्ष है। दोनों ने गृहमंत्री अमित शाह के एडिटेड वीडियो सोशल मीडिया पर वायरल किए थे।

असम में कॉन्ग्रेस नेता गिरफ्तार

बता दें कि ये उसी वीडियो से जुड़ा मामला है जिसे दो दिन पहले कॉन्ग्रेसी ये कहकर ट्वीट कर रहे थे कि अमित शाह ने चुनाव जीतने पर आरक्षण खत्म करने की बात कही है। इस मामले में असम के कॉन्ग्रेसी कार्यकर्ता ऋतम सिंह को गिरफ्तार किया जा चुका है। वो असम में कॉन्ग्रेस का सोशल मीडिया देखता है। इस गिरफ्तारी के बारे में खुद असम सीएम हिमंता बिस्वा सरमा ने अपने एक्स पर जानकारी देते हुए बताया था कि उसे गृह मंत्री का फेक वीडियो शेयर करने के मामले में पकड़ा गया है।”

दिल्ली पुलिस भी कर रही ताबड़तोड़ कार्रवाई

इस मामले में दिल्ली पुलिस ने FIR दर्ज की है और तेलंगाना के मुख्यमंत्री रेवंत रेड्डी को समन भेजा है। दिल्ली पुलिस ने सोमवार (29 अप्रैल, 2024) को उन्हें समन भेजा और 1 मई को अपना बयान दर्ज कराने के लिए कहा है। साथ ही ये भी कहा गया है कि जाँच के लिए वो अपने फोन-लैपटॉप इत्यादि जैसे इलेक्ट्रॉनिक उपकरण भी साथ लेकर आएँ। ‘इंडियन साइबर क्राइम कोऑर्डिनेशन सेंटर’ की शिकायत पर दिल्ली पुलिस की स्पेशल सेल ने ये FIR दर्ज की है।

इस मामले में सिर्फ रेवंत रेड्डी ही नहीं, बल्कि 5 अन्य लोगों को भी समन भेजा गया है जिनमें कुछ कॉन्ग्रेस के नेता हैं। इन सभी ने अमित शाह के डॉक्टर्ड वीडियो को शेयर किया था। केंद्रीय गृह मंत्रालय और भारतीय जनता पार्टी ने भी इस मामले में शिकायत दर्ज कराई थी। आरोप लगाया गया है कि समाज में विभिन्न समुदायों में वैमनस्य फैलाने के उद्देश्य से ये वीडियो प्रसारित किया गया, जिससे कानून-व्यवस्था और सार्वजनिक शांति के भंग होने की आशंका है।

JDS ने प्रज्वल रेवन्ना को पार्टी से निकाला, कहा- SIT जाँच पूरी होने तक रहेंगे निष्कासित: कर्नाटक सेक्स स्कैंडल पर बोली BJP- हम मातृशक्ति के साथ

कर्नाटक की हासन सीट से सांसद और पूर्व प्रधानमंत्री एचडी देवगौड़ा के पोते प्रज्वल रेवन्ना सेक्स स्कैंडल को सामने आने के बाद देश से फरार गए हैं। इसको लेकर आलोचना झेल रही जनता दल (सेक्युलर) (JDS) ने प्रज्वल रेवन्ना को SIT जाँच पूरी होने तक पार्टी से निलंबित कर दिया है। इसके साथ ही JDS की कोर कमिटी ने बैठक के बाद रेवान्ना को कारण बताओ नोटिस भी भेजा है।

जेडीएस ने कहा कि अगर प्रज्वल रेवन्ना पर लगे आरोप सही साबित होते हैं तो उनका पार्टी से निष्कासन बढ़ा दिया जाएगा। वहीं, अगर रेवन्ना निर्दोष साबित होते हैं तो उनका निष्कासन रद्द कर दिया जाएगा। बताते चलें कि कि रेवन्ना पर हजारों महिलाओं का यौन शोषण कर उनका वीडियो बनाने का मामला सामने आया है। इतना ही नहीं, रेवन्ना द्वारा बनाए गए लगभग 2900 वीडियो भी सामने आए हैं।

दरअसल, प्रज्वल रेवन्ना का वीडियो सामने आने के बाद कर्नाटक की राजनीति में भूचाल आ गया है। इसके बाद जेडीएस के ही विधायक शरणागौड़ा कांडपुर ने पार्टी के संस्थापक एचडी देवगौड़ा को सोमवार (29 अप्रैल 2024) को एक पत्र लिखा। उन्होंने पत्र में प्रज्वल रेवन्ना को पार्टी से निष्कासित करने की माँग की थी। उन्होंने कहा था कि इससे पार्टी को शर्मिंदगी उठानी पड़ी है।

शरणागौड़ा ने कहा था कि पिछले कुछ दिनों से सेक्स स्कैंडल का वीडियो पूरे राज्य में वायरल हो रहा है। वीडियो के कुछ हिस्सों में पार्टी सांसद प्रज्वल रेवन्ना भी दिखाई दे रहे हैं। इस वजह से ऐसा लगता है कि वे आरोपी हैं। इससे पार्टी को शर्मिंदगी उठानी पड़ रही है। विधायक ने पत्र में लिखा, “मैं आपसे अनुरोध करता हूँ कि उन्हें तुरंत पार्टी से बाहर निकाल देना चाहिए।”

वहीं, कर्नाटक में जेडीएस के साथ गठबंधन होने को लेकर भी लोग भाजपा की आलोचना कर रहे हैं। अब केंद्रीय गृहमंत्री अमित शाह ने इसका जवाब दिया है। उन्होंने कहा था कि जेडीएस प्रज्वल पर कार्रवाई करेगी। अमित शाह ने कहा, “प्रज्वल रेवन्ना का जो समाचार पत्रों और चैनल पर चल रहा है, वो बिलकुल आघातजनक है और बीजेपी का स्टैंड बहुत स्पष्ट है कि हम देश की ‘मातृ शक्ति’ के साथ खड़े हैं।”

उन्होंने आगे कहा, “वहाँ पर सरकार कॉन्ग्रेस पार्टी की है। उन्होंने अब तक कोई कार्रवाई क्यों नहीं की? कार्रवाई हमें नहीं करनी। यह राज्य की कानून व्यवस्था का मुद्दा है। राज्य सरकार को इस पर कार्रवाई करनी होगी… हम जाँच के पक्ष में हैं और हमारे सहयोगी जेडीएस ने भी इसके खिलाफ कार्रवाई करने की घोषणा की है। आज उनकी कोर कमेटी की बैठक है और कदम उठाए जाएँगे।”

इससे पहले जेडीएस नेता एचडी कुमारस्वामी ने कहा था, “हम रेवन्ना को बचाने नहीं जा रहे हैं। हम गंभीर कार्रवाई करेंगे, लेकिन जिम्मेदारी सरकार की है। न केवल एक चाचा के रूप में, बल्कि देश के एक आम आदमी के रूप में हमें आगे बढ़ना होगा। यह एक शर्मनाक मुद्दा है। सरकार कौन चला रहा है? उन्हें असली तस्वीर उजागर करनी है, जमीनी हकीकत सरकार को उजागर करनी है, मुझे नहीं।”

बता दें कि हसन लोकसभा सीट पर मतदान से ठीक दो दिन पहले एक वीडियो सामने आया था। आपत्तिजनक वीडियो में कथित रूप से हसन सांसद प्रज्वल रेवन्ना भी दिखाई दिए थे। इसके बाद कर्नाटक महिला आयोग ने सरकार को पत्र लिख कर एसआईटी बनाने की अपील की थी। कर्नाटक सीएम सिद्धारमैया ने 27 अप्रैल को एसआईटी बनाने का निर्देश दिया था।

बांग्लादेश में फिर हिंदू पर लगा ईशनिंदा का आरोप: गाने की पंक्ति लिखने पर मुस्लिम भीड़ भड़की, पुलिस ने गिरफ्तार किया

इस्लामी देशों में अल्पसंख्यक हिंदुओं पर होते अत्याचार कोई नई बात नहीं हैं। हाल में बांग्लादेश में एक हिंदू व्यापारी को एक गाने की चंद पंक्ति लिखकर साझा करने पर गिरफ्तार कर लिया गया और उस पर आरोप लगाया गया कि उसने मुस्लिम समुदाय के लोगों की मजहबी भावनाएँ आहत की हैं।

जानकारी के मुताबिक, संजय ने लिखा था, “सुन्नत ए खतना दिले जोड़ी होए मुसलमान, ताहोले नारी जातिर की होय बिधान ( यानी यदि खतना किसी पुरुष के लिए मुस्लिम बनने का तरीका है, तो, महिलाओं के लिए कौन सा नियम लागू होता है)”

ये गाना 18वीं सदी के बंगाली गायक ललन फकीर पर था। उन पर बंगाली लोक गायक कार्तिक दास ने 2016 में गीत लिखा था जिसका शीर्षक- सब लोके कोय लान की जात संसारे(जो ललन का विश्वास था वही सब लोग कहते हैं) था।

इसी पोस्ट को शेयर करने पर संजय के खिलाफ कार्रवाई हो गई। 40 वर्षीय हिंदू व्यापारी को 28 अप्रैल को शरियतपुर से गिरफ्तार किया गया। उनकी गिरफ्तारी बांग्लादेश की सीसीपी की धारा 54 के तहत हुई। इस धारा में व्यक्ति की गिरफ्तारी बिन वारंट की जाती है।

बताया जा रहा है कि संजय के अरेस्ट होने से पहले मुस्लिमों ने उनके घर के बाहर जमकर हंगामा किया था और यही सब देखते हुए किसी भी अनहोनी को रोकने के लिए पुलिस ने जल्दीबाजी में संजय को गिरफ्तार किया।

इस संबंध में एसपी महबूबउल आलाम बोले कि किसी भी प्रकार की हिंसा को रोकने के लिए उन्होंने जल्द से जल्द आरोपित पकड़ा और कोर्ट में पेशी के बाद उसे जेल भेजा। एसपी ने बताया कि स्थानीयों में इस पोस्ट के खिलाफ अभी भी गुस्सा है। इसलिए पुलिस लगातार स्थिति पर नियंत्रण बनाए हुए है।

वहीं 29 अप्रैल को दोबारा संजय की पेशी हुई जहाँ उनकी बेल मामले में सुनवाई हुई। इस बीच कई बांग्लादेशियों ने उनके पक्ष में समर्थन दिखाया और वही गाना गुनगुनाते हुए पुलिस को चुनौती दी थी कि वो आकर सबको गिरफ्तार करें।

बता दें कि इस्लामी मुल्कों में इस्लामी कट्टरपंथी अक्सर हिंदुओं पर अपना रौब बनाने के लिए उनपर अत्याचार करके दिखते हैं। इस बार इन लोगों ने संजय को शिकार बनाया है। संजय ने जिन ललन फकीर का गाना शेयर किया था वो एक समय के मशहूर गायब थे।

‘मिडिल क्लास की संपत्ति नीलाम, कॉरपोरेट लोन माफ’: बैंक की नीलामी विज्ञापन पर ‘द हिंदू’ की डिप्टी एडिटर ने किया गुमराह, जानिए सच

अंग्रेजी समाचार द हिन्दू की डिप्टी एडिटर विजेता सिंह लोन ‘वेव ऑफ’ करने और ‘राइट ऑफ’ करने को लेकर भ्रमित हो गईं। सोशल मीडिया पर एक पोस्ट में विजेता सिंह ने बैंकों को निशाना बनाया। निशाना बनाने का कारण यह था कि बैंक उन संपत्तियों की नीलामी कर रहे थे जिनके कर्ज नहीं भरे गए थे। विजेता सिंह ने ऐतराज जताया कि कॉर्पोरेट के कर्जे ‘राइट ऑफ’ कर दिए जाते हैं जबकि बाकी लोगों की संपत्तियों की नीलामी की जा रही है।

विजेता सिंह ने लिखा, “कॉर्पोरेट लोन राइट ऑफ कर दिए जाते हैं, जबकि मध्यम वर्ग के लोगों के घर और जमीन, जिनका कर्जा नहीं भरा जाता है, बैकों द्वारा जब्त करके नीलाम कर दिए जाते हैं। यह बिहार में केनरा बैंक द्वारा नीलाम की जाने वाली संपत्तियों की सूची है।”

विजेता सिंह ने 28 अप्रैल, 2024 को इंडियन एक्सप्रेस में जारी की गई इस नीलामी विज्ञप्ति का फोटो भी डाला। इस फोटो में दिखता है कि जिन लोगों के घर-मकान नीलाम हो रहे हैं, उनके ₹4 लाख से लेकर ₹1 करोड़ तक के कर्ज नहीं जमा किए गए। हालाँकि, यह कोई पहली बार नहीं है कि विजेता सिंह इस मामले में भ्रमित हुई हों। 2016 में नोटबंदी के बाद भी उन्होंने एक ऐसा ही पोस्ट किया था। इसमें उन्होंने लिखा था कि जहाँ सामान्य लोग लाइनों में लग रहे हैं तो वहीं SBI ने विजय माल्या का ₹1201 करोड़ का ‘राइट ऑफ’ कर दिया।

हालाँकि, उनकी टाइमलाइन देखने पर पता चलता है कि उन्हें यह अंतर खूब अच्छे से पता है। उन्होंने दिसम्बर 2019 में एक ट्वीट में लिखा था, “किसानों के कर्ज माफ़ी पर ₹19,000 करोड़ से अधिक खर्च करने के बावजूद, 2015 से 2018 के बीच महाराष्ट्र में कुल 12,021 किसानों की आत्महत्या के कारण मौत हो गई, यह जानकारी महाराष्ट्र सरकार ने शुक्रवार को विधानसभा में दी।”

क्या जानबूझकर गलत शब्द लिखती हैं विजेता?

विजेता सिंह की टाइमलाइन से पता चला कि वह इन दोनों शब्दों का अंतर समझती हैं तब फिर 28 अप्रैल को ट्विटर पर उनके द्वारा की गई भ्रामक पोस्ट के पीछे आखिर क्या कारण हो सकता है? शायद बात को अधिक सनसनीखेज बनाने के लिए ऐसा किया जाता हो। वैसे पत्रकारिता की नैतिकता मीडिया रिपोर्टिंग के सनसनीखेज होने का समर्थन नहीं करती क्योंकि जनता इससे घबरा सकती है। लेकिन यहाँ ऐसा ही हुआ। मीडिया में किसी खबर को सनसनीखेज बनाया जाता है ताकि पाठकों का ध्यान खींचा जाए।

राइट ऑफ और वेव ऑफ में फर्क

'राइट-ऑफ' बैंकों द्वारा उनकी बैलेंस शीट की सफाई की प्रक्रिया है। इसका उद्देश्य होता है कि बैंक की असल देनदारी और उसकी सम्पत्ति साफ-साफ़ दिखें। बैंक उन कर्जों को बैलेंस शीट से हटा देते हैं जिनके वापस आने की उम्मीद कम होती है। ऐसा ना करने पर बैंकों की कमाई ज्यादा दिखेगी जिससे उसकी असल तस्वीर नहीं दिखेगी। यह काम बैंकों द्वारा हर साल किया जाता है जिससे उन्हें अपने लेनदेन में आसानी रहे।

राइट ऑफ असल में पूरी तरीके से तकनीकी चीज है। जिनके लोन सामान्य तरीके से भरे नहीं जाते वह राइट ऑफ होते हैं लेकिन ऐसा नहीं है कि इन्हें वापस वसूलने के लिए कदम नहीं उठाए जाते। बैंक इनको वापस वसूलने के लिए SARFESI एक्ट समेत तमाम प्रक्रिया अपनाती हैं ताकि उनका पैसा वापस मिले। इसके उलट वेव ऑफ माने कर्जामुक्ति होती है। उदाहरण किसानों की कर्जामफी है, इसे 'वेव ऑफ' करने की श्रेणी में रखा जाएगा।

गौरतलब है कि इस सरकार में कर्जों की वसूली भी तेज हुई है। जुलाई 2023 में वित्त मंत्रालय ने लोकसभा को बताया था कि वित्त वर्ष 2014 से 2023 के बीच देश के बैंकों ने लगभग ₹10 लाख करोड़ के एनपीए या खराब कर्जे वसूल किए हैं। वित्त मंत्रालय द्वारा यह जानकारी लोकसभा में सांसद ज्ञानथिरविअम एस और सांसद विजयकुमार उर्फ ​​विजय वसंत द्वारा पूछे गए अतारांकित प्रश्न के उत्तर में दी गई थी।

सेल्युलर जेल में हिंदुत्व को लेकर खुली वीर सावरकर की आँख, मुस्लिम कैदियों के अत्याचारों ने खोली ‘घर वापसी’ की राह: ‘नायक बनाम प्रतिनायक’ पुस्तक में अहम खुलासे

हिंदुत्व के प्रति झुकाव की प्रक्रिया सावरकर के जीवन की विषम परिस्थितियों की देन है। इसका स्फुरण और सघनीकरण बहुत धीरे-धीरे हुआ। इसकी शुरुआत होती है सेल्युलर जेल के दिनों से।

1857 से सीख लेकर अंग्रेजों ने भारतीयों के धार्मिक-सामाजिक मामलों में दखल न देने की नीति अपना ली थी। इसी नीति के तहत ईसाई पादरियों के धर्मांतरण अभियान को किसी भी तरह का सरकारी संरक्षण और प्रोत्साहन देना बंद हो गया था। कितु इसी नीति में ईस्ट इंडिया कंपनी के भारत आगमन के पहले से चले आ रहे मुसलमानों द्वारा हिंदुओं के धर्मांतरण में हस्तक्षेप न करने का रुख भी निहित था, खासकर कारागारों में यह धर्मांतरण आम हो गया था, जो अपराधी किस्म के मुस्लिम कैदियों के अहं को तुष्ट करता था। इसके लिए वे सीधे-सादे युवा राजनीतिक कैदियों को डराने-धमकाने और प्रताड़ित करने से भी बाज नहीं आते थे। सेल्युलर जेल की विशेष परिस्थितियों ने इसे और भयानक रूप दे दिया था।

आ चुका है कि सेल्युलर जेल में हिंदू क्रांतिकारी बहुसंख्यक थे। उनको नियंत्रित करने और यातनाएँ देने के मकसद से जेलर बारी ने मुसलमान अपराधी कैदियों को वार्डर, पहरेदार और हवलदार वगैरह नियुक्त कर दिया था। हिंदू कैदियों के साथ नरमी न बरते जाने के उद्देश्य से यह एक प्रशासनिक कदम के रूप में उचित हो सकता था। कितु सेल्युलर जेल में बंद अपराधी पश्चिमोत्तर में सीमा प्रांत के धर्मांध और दबंग कबीलाई पठान बहुतायत में थे। वे हट्टे-कट्टे और उत्पाती किस्म के अपराधी थे और मद्रास, बंगाल या बंबई प्रेजीडेंसी से आनेवाले मुसलमान कैदियों को भी आधा काफिर कहकर बेइज्जत करते थे। उन्हें अपने रंग में रंगने की कोशिश भी करते थे। कुछ तो उनकी नकल में उनसे भी आगे निकल जाते थे (Savarkar, My Transportation for Life, pfd pp.k~ 68&69/k386)। कुछ बलूच, सिंधी और पंजाबी मुसलमान कैदी भी पठानों की जमात में शामिल हो गए थे। बारी जैसे परपीड़क जेलर ने इन सबका इस्तेमाल क्रांतिकारी कैदियों में भय और आतंक उत्पन्न करने के एजेंट के तौर पर किया।

भारतीय कारागार समिति (Indian Jails Committee) के अध्यक्ष आलेक्जैंडर जी- खार्दिव (Alexander G Cardew, ICS) ने बारी के इन अनुचरों के बारे में लिखा है, ‘ये कर्मचारी, अपने प्राकृतिक दोषों के कारण सक्रिय एजेंटों की विकृत किस्म की प्रभुता का उपभोग करते थे।‘

आ चुका है कि मिर्जा खान नाम का एक कर्मचारी इन उत्पीड़कों का संरक्षक था। वह एक गैर-कैदी कर्मचारी था और बारी का दाहिना हाथ बन गया था। सावरकर ने उसकी सांप्रदायिक मानसिकता की एक झलक अपने संस्मरण में दी है। तेल पेरने के कोल्हू की ड्यूटी लगाए जाने पर नानी गोपाल भूख हड़ताल पर चले गए थे और डेढ़ महीने निराहर रहकर जान देने के लिए कृतसंकल्प थे। जब सावरकर के समझाने पर उन्होंने हड़ताल तोड़ी, मिरजा खान ने सावरकर से नानी गोपाल की तारीफ इस तरह की, ‘तुम्हारा शागिर्द नानी बहादुर है, उसकी हिम्मत पठानों के काबिल है, हिंदुओं के नहीं।’

यही पठान कर्मचारी अपनी स्थिति का फायदा उठाकर हिंदू कैदियों को उत्पीड़ित करते और उत्पीड़न से बचने के लिए उन्हें इस्लाम ग्रहण करने को विवश करते थे। सेल्युलर जेल के उन कठिन, निराश और बेबस दिनों में हिंदू कैदी धर्म-परिवर्तन का प्रतिरोध करके अपने कष्ट को और नहीं बढ़ाना चाहते थे। कुछ तो धर्म-परिवर्तन का महज वादा करके अधिक से अधिक समय तक उत्पीड़न से बचे रहने की कोशिश करते थे।

किसी भी हिंदू कैदी के इस तरह से किए गए धर्म-परिवर्तन की खबर को सावरकर सरकार द्वारा कैदियों पर किए गए अत्याचार के रूप में लेते थे और तिलमिला उठते थे। बारी के उकसावे पर इन एजेंटों द्वारा सावरकर की पिटाई करने और कत्ल तक की धमकी देने के बावजूद उन्होंने ऐसे कैदियों की सहायता करने का निर्णय लिया। पहले तो उन्होंने जेल में ही शिकायत दर्ज कराई। उन्होंने लिखा कि यदि कोई अपनी मर्जी से या विचार-परिवर्तन के कारण धर्म बदलना चाहता है तो उन्हें कोई आपत्ति नहीं, कितु इस जेल में धर्म-परिवर्तन का चलन इन दोनों बातों से कोसों दूर है। सुपरिंटेंडेंट ने सावरकर से साफ-साफ पूछा, ‘आप लोग उन्हें हिंदू धर्म में वापस क्यों नहीं ले लेते?’ सावरकर ने जवाब तो दे दिया कि हिंदू धर्म धर्मांतरण में विश्वास नहीं रखता। कितु उनका दिमाग इस समस्या के इर्दगिर्द चक्कर काटने लगा।

पहले तो उन्होंने स्थिति के हर पहलू का सम्यक अध्ययन किया। उन्होंने पाया कि आने के दिन से ही हिंदू कैदी के साथ भेदभाव शुरू हो जाता था। मुस्लिम पहरेदार उन्हें अपने धर्मग्रंथ पढ़ने से रोकते थे। हिंदू धर्मग्रंथों में छपे चित्रों के बारे में अशिष्ट टिप्पणी करते थे और समूह में उनका पाठ होता तो समूह को तितर-बितर कर देते थे। कारागार में प्रवेश के दिन ही उनका यज्ञोपवीत तोड़ दिया जाता था, जबकि मुसलमानों की दाढ़ी और सिखों की पगड़ी पर कोई रोक नहीं थी। मुस्लिम पहरेदार हिंदू कैदियों से कठोर श्रम कराते और तरह-तरह के प्रलोभन देते। इस्लाम स्वीकार कर लेने पर उन्हें मुस्लिम नाम दे दिया जाता और वही नाम पंजीकृत हो जाता। जेल में हिंदुओं और मुस्लिमों के लिए अलग रसोई और अलग रसोइए थे। दोनों धर्मों के कैदी अलग-अलग बैठकर खाना खाते थे। धर्मांतरित कैदियों को मुसलमानों की रसोई में बना खाना, मुसलमानों के साथ बैठकर खाना पड़ता था। एक बार उनके साथ खाना खा लेने के बाद कोई हिंदू उन्हें अपने साथ बैठकर खाने नहीं देता था। अपने मूल समुदाय के तीव्र विरोध और निंदा के चलते उनके लिए वापसी का मार्ग हमेशा के लिए बंद हो जाता था।

सावरकर ने लिखा है कि लगभग हर हफ्ऱते वे किसी हिंदू कैदी को मुस्लिम साथियों के साथ बैठा देखते और समझ जाते कि उसका धर्म परिवर्तन होने वाला है। जब वे इस बाबत हिंदू कैदियों से बात करते तो उनका जवाब होताµजो लोग प्रताड़ना के डर से धर्म-परिवर्तन के लिए तैयार हो जाते हैं, हिंदू धर्म ऐसे लोगों के बिना बेहतर रहेगा। सावरकर ने उन्हें इसके दूरगामी परिणामों से अवगत कराया। इसके राजनीतिक निहितार्थ की ओर उनका ध्यान आकृष्ट किया। सावरकर ने उनसे कहा, मुस्लिम के हाथ का बना भोजन हिंदू क्यों नहीं खा सकता? इससे न उसका पेट फटेगा, न ही उसका धर्म भ्रष्ट होगा। उनके काफी प्रयास के बाद अंडमान के हिंदुओं को आभास हुआ कि हिंदू धर्म इतना कमजोर नहीं है कि ऐसे बाह्याचारों से भ्रष्ट हो जाए। (My Transportion for Life.pdf.k~ pp.k~ 218&19)।

अंततः हिंदू ऐसे कैदियों को अपने समुदाय में वापस स्वीकार करने को तैयार हो गए।

सावरकर का ध्यान स्वामी दयानंद सरस्वती (1824-1883) की ओर गया, जिन्होंने पंजाब और उत्तर भारत में शुद्धि अभियान चलाया था। धार्मिक विधि-विधानों में कोई आस्था न होने के बावजूद, अंडमान की खास परिस्थितियों में सावरकर ने उन्हीं की पद्धति अपनाई। कई धर्मांतरित कैदियों को शुद्धि की प्रक्रिया से वापस लाया गया।

इस दौरान पठान कैदियों द्वारा उन पर जानलेवा हमले हुए, एक बार विषाक्त भोजन देने का प्रयास भी हुआ। कितु बाबाराव की मुस्तैदी से हर प्रयास असफल रहा। (Babarav Savarkar.pdf.k~ pp.k~ 53&54)।

इसका असर यह हुआ कि सेल्युलर जेल में रहते हुए ही सावरकर हिंदू एकता और हिंदू संगठन की आवश्यकता पर चिंतन-मनन करने लगे थे। सनातनी, आर्यसमाजी, सिख, जैन और बौद्ध मत के लोगों को मिलाकर एक अखिल भारतीय संगठन बनाने की दिशा में सोचने लगे थे। उन्होंने ‘हिंदू’ होने के अर्थ को भी अपने ढंग से परिभाषित कर लिया था। उनके अनुसार हिंदू केवल उस धर्म को मानने वालों तक सीमित नहीं हैं, जिसे हिंदू धर्म कहा जाता है। उनके अनुसार इस देश को अपनी मातृभूमि और पुण्यभूमि मानने वाला हर व्यक्ति हिंदू है। उन्होंने लिखा कि उनकी यह परिभाषा समाज में और अधिक बिखराव व अलगाव को रोकने तथा हिंदुओं को भारत के लोगों का एक समुदाय बनाने में सशक्त भूमिका अदा करेगी (Savarkar, My Transportation for Life.k~ Pdf.pp 283&85)।

सावरकर जब भारत पहुँचे, वहाँ चारों तरफ खिलाफत असहयोग का धुआँ छाया हुआ था। खिलाफत आंदोलन को उन्होंने आफत का नाम दिया और उसके दौरान हुई दुर्भाग्यपूर्ण घटनाओं तथा उसकी असफल परिणति से जन्मे व्यापक मोहभंग, विग्रह, विखंडन और निराशा ने उनकी इस संज्ञा (आफत) में संगर्भित समस्त संभावनाओं को मूर्त कर दिया। इसने उनके विचारों के फलक का विस्तार किया और उसकी दिशा को और धार दी। उसी का हासिल रत्नागिरि जेल में लिखी उनकी पुस्तक ‘हिंदुत्व’ है।

(यह लेख ‘विनायक दामोदर सावरकर: नायक बनाम प्रतिनायक‘ पुस्तक का हिस्सा है, इसके लेखक हैं प्रसिद्ध कथाकार कमलाकांत त्रिपाठी।)