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जिस पर सलमान खान के घर पर हमले के लिए हथियार सप्लाई करने का आरोप, उसकी मौत: सुसाइड के प्रयास के बाद लाया गया था अस्पताल

बॉलीवुड अभिनेता सलमान खान के घर पर हमले के मामले में गिरफ्तार किए गए आरोपित अनुज थापन की बुधवार (1 मई, 2024) को अस्पताल में मौत हो गई। यहाँ उसका इलाज चल रहा था। थापन हमला करने वालों को हथियार उपलब्ध करवाने का आरोपित था।

जानकारी के अनुसार, बुधवार को ही अनुज थापन ने पुलिस कस्टडी में ही आत्महत्या की कोशिश की थी। उसे इसके बाद मुंबई ही के सेंट जॉर्ज अस्पताल ले जाया गया था। यहाँ अस्पताल में इलाज के दौरान ही उसने दम तोड़ दिया। उसकी मौत की पुष्टि डॉक्टरों ने कर दी। अभी उसका पोस्टमार्टम किया जाएगा, जिसमें मौत का कारण पता चलेगा।

अनुज थापन की मौत को लेकर पुलिस ने मामला दर्ज कर लिया है और इसकी आगे जाँच की जा रही है। अनुज थापन ने आत्महत्या कैसे की, इसकी जानकारी सामने नहीं आई है। अनुज थापन को इस मामले में एक और आरोपित के साथ पंजाब से 25 अप्रैल को ही गिरफ्तार किया था। उस पर आरोप था कि उसने सलमान खान के घर पर हमला करने वालों को हथियार मुहैया करवाए।

गौरतलब है कि 14 अप्रैल 2024 को तडके सुबह मुंबई स्थित सलमान खान के अपार्टमेंट पर हमला हुआ था। CCTV फुटेज की जाँच में सामने आया था कि सलमान खान के घर पर दो बैक सवार हमलावरों ने गोलियाँ बरसाईं। इस हमले की जिम्मेदारी गैंगस्टर लॉरेंस विश्नोई के भाई अनमोल विश्नोई ने ली थी।

बाद में इन दोनों शूटरों को भी गुजरात के भुज से गिरफ्तार कर लिया गया था। इनकी पहचान 24 साल के विक्की साहब गुप्ता और 21 वर्षीय श्रीजोगेंद्र पाल के तौर पर हुई थी। बताया गया था कि दोनों शूटर लगभग 15 दिनों तक मुंबई के पनवेल इलाके में किराये के मकान में रुके थे।

इस किराये के मकान की दूरी सलमान के आवास से लगभग 10 किलोमीटर है। इस दौरान दोनों ने 4 बार सलमान के अपार्टमेंट की रेकी की थी। वो सलमान खान के फार्म हाउस भी गए थे। दोनों की मुलाक़ात लॉरेंस विश्नोई के ख़ास कहे जाने वाले रोहित गोदारा से भी हो चुकी थी।

TOI ने पुलिस सूत्रों के माध्यम से बताया था कि दोनों शूटरों का मकसद सलमान खान को मारने के बजाय डराना था। ये दोनों सलमान के घर पर तब गोलियाँ चलाना चाह रहे थे जब ईद के 2 दिन बाद अभिनेता अपने घर के बालकनी से प्रसंशकों का अभिवादन स्वीकार करने वाला था। 

जिंदा होते चंदा बाबू तो तेजाब से भी तेज उन्हें गलाता ज्ञानेश्वर की थेथरई, आतंकी की बेवा के लिए बिछने वाले को पत्रकार क्यों कहे

बिहार के एक ‘पत्रकार’ हैं- ज्ञानेश्वर। खुद को निष्पक्ष बताते हैं, पर सोशल मीडिया में आए दिन उनकी पीतकारिता दिख ही जाती है। इस बार उनकी पीतकारिता के प्रताप से धन्य हुईं हैं हिना शहाब। हिना शहाब आतंकी शहाबुद्दीन की बेवा हैं और सीवान से निर्दलीय मैदान में हैं।

एक्स/ट्विटर पर उम्मीदवारों के लिए पोस्ट करते वक्त अक्सर जमीनी फैक्ट और दलाली के बीच का अंतर भूल जाने वाले ज्ञानेश्वर ने हिना शहाब के लिए बैटिंग करते हुए शहाबुद्दीन का महिमामंडन किया है। उसे सेकुलर बताने के लिए गीता की गंगा तक बहा दी है।

ज्ञानेश्वर ने इस ट्वीट में शहाबुद्दीन की बेवा के चुनावी मैदान में चुन्नी-माला ओढकर निर्दलीय उतरने पर खुशी जताई। इसके अलावा सबसे हैरान करने वाली बात ये थी कि उन्होंने ट्वीट में शहाबुद्दीन के सारे दोषों को नकारते हुए उसे इतना हल्का दिखाया जैसे माफिया पर कोई छोटे-मोटे आरोप हों जिन्हें आसानी से नजर अंदाज किया जा सकता है। 

ट्वीट की भाषा देखें तो इसमें ज्ञानेश्वर ने लिखा शहाबुद्दीन को ‘दिवंगत’ लिखा। साथ ही पूरे सम्मान के साथ कहा-“उन्होंने जो कुछ किया, लेकिन कभी हिन्दू-मुस्लिम नहीं किया।” इतना ही नहीं ये भी कहा कि शहाबुद्दीन के रहते सीवान में दंगा कोई सोच भी नहीं सकता था। आगे पत्रकार महोदय ने शहाबुद्दीन के पढ़ने-लिखने की शौक की तारीफ की और उसे सेकुलर दिखाते हुए कहा कि ‘उनसे गीता-कुरान दोनों पर बात की जा सकती थी।’

जिस हिसाब से ज्ञानेश्वर का ये ट्वीट किया गया है उसे देख ऐसा लगता है कि वो शहाबुद्दीन के सारे गुनाहों को भुला चुके हैं और बीड़ा उठाया है कि हीना शहाब के प्रचार के लिए किसी भी तरह जनता की स्मृतियों से वो शहाबुद्दीन की दुर्दांत अपराधी की छवि बदल दें।

हालाँकि, ये काम इतना आसान नहीं है जितना ज्ञानेश्वर मानकर बैठे हैं। उनकी बेशर्मी है कि वो बिहार से होते हुए शहाबुद्दीन की याद सीवान के लोगों को दिला सकते हैं लेकिन इतना इमान उनमें नहीं बचा है कि वो हीना शहाब के मैदान में उतरने पर चंदा बाबू को याद करके जनता को बता दें कि इन दोनों नामों के बीच क्या कनेक्शन है। पर बिहार की जनता ऐसी नहीं है। उन्हें जितना शहाबुद्दीन याद है उससे ज्यादा बिहार के चंदा बाबू याद हैं।

अच्छा है आज वो चंदा बाबू दुनिया में नहीं हैं वरना खुद को एक पत्रकार कहने वाले शख्स के ऐसे विचार देख उन्हें अथाह दुख पहुँचता। ऐसा दुख, जिसकी भरपाई ज्ञानेश्वर की चाशनी में डूबी भाषा नहीं कर पाती। ज्ञानेश्वर की तरह चंदा बाबू भी बिहार से ही थे, उनका परिवार भी एक समय तक हँसता-खेलता साथ रहता था। मगर, ये सब तब तक था जब तक कि शहाबुद्दीन की नजर उनके परिवार पर नहीं पड़ी। जिस दिन ऐसा हुआ उस दिन ज्ञानेश्वर के ‘सेकुलर’ शहाबुद्दीन ने उनके दो बेटों को तेजाब से नहलाकर मौत के घाट उतार दिया और जब तीसरे बेटे ने न्याय लेने की कोशिश की तो उसकी भी हत्या करवा दी गई।

साल 2020 में लंबे समय से बीमारी से जूझ रहे चंदा बाबू आखिरी सांस लेने से पहले सालों तक न्याय की गुहार लिए दर-दर भटके थे। जब उनकी तस्वीर आती थी तो अपनी पत्नी के साथ तीनों बेटों की तस्वीर को हाथ में लिए दिखते थे। उनका दुख इतना बड़ा था कि सामान्य व्यक्ति अगर चंदा बाबू के दर्द को सोच ले तो आज भी उसकी रूह कांप जाए लेकिन उन्हें भुलाकर शहाबुद्दीन का महिमामंडन करना सिर्फ ज्ञानेश्वर जैसे पत्रकार ही कर सकते हैं जिन्हें चंदा बाबू के दर्द से कोई सरोकार तक नहीं और उनका प्रोफेशन सिर्फ ‘दलाली’ करना रह गया है।

अजीब बात ये है कि ज्ञानेश्वर ने जिस शहाबुद्दीन को हीरो दिखाकर पेश करने का प्रयास किया है उसके खिलाफ एक दो ममाले नहीं बल्कि पूरे 56 मुकदमे थे जिसमें से उसे 6 में सजा भी हो गई थी। उसने अपराध की दुनिया में पाँव जमाना अपने करियर के शुरुआती समय से शुरू कर दिया था लेकिन पहली एफआईआर उसके खिलाफ 1986 में हुई थी। इसके बाद 2016 में भी उसका नाम एक पत्रकार की हत्या में आया था।

2005 में जब सीवान के एसपी और डीएम ने शहाबुद्दीन के घर छापेमारी की तो उसके यहाँ पाकिस्तान निर्मित कई गोलियाँ, एके-47 सहित ऐसे उपकरण मिले था। इसके अलावा नाइट गॉगल्स और लेजर गाइडेड समेत कई चीजें मिली थीं, जिनपर पाकिस्तना ऑडिनेंस फैक्ट्री की मुहर लगी थी। छापेमारी के बाद बिहार के पूर्व डीजीपी ओझा ने अपने कार्यकाल में शहाबुद्दीन के आईएसआई कनेक्शन के बारे में खुलासा किया था। उन्होंने पूरी 100 पेज की रिपोर्ट सौंपी थीं। लेकिन उस समय राबड़ी देवी सरकार थी और उन्होंने उसे पद से हटा दिया था।

ये सिर्फ चंद मामले हैं जो शहाबुद्दीन के मीडिया के सामने हैं। इसके अलावा स्थानीय स्तर पर उसके खौफ की कहानी तमाम हैं। बावजूद उन सबके ज्ञानेश्वर जैसे पत्रकार चुनाव आने पर ऐसे माफियाओं का महिमामंडन करते मिलते हैं तो समझना मुश्किल होता है कि खुद को निष्पक्ष कहने वाले लोगों के लिए निष्पक्ष होने की परिभाषा क्या है।

तमिलनाडु में अरुणाचलेश्वर मंदिर के सामने नहीं बनेगा शॉपिंग कॉम्प्लेक्स, हाई कोर्ट में पीछे हटी स्टालिन सरकार : कहा – अब नहीं होगा कोई निर्माण

तमिल नाडु के तिरुवन्नामलाई जिले में विश्व प्रसिद्ध अरुणाचलेश्वर मंदिर (अन्नामलाईयार मंदिर) स्थित है, जो कई शताब्दियों पुरानी है। इसे यूनेस्को ने संरक्षित इमारतों की सूची में भी रखा है। इस मंदिर का गोपुरम 66 मीटर ऊँचा है और ये मंदिर भगवान शिव को समर्पित है। इस मंदिर के सबसे बड़े गोपुरम के सामने तमिलनाडु सरकार का हिंदू धार्मिक और धर्मार्थ बंदोबस्ती (HR&CE) विभाग 150 दुकानों का शॉपिंग कॉम्प्लेक्स बनवा रहा रहा था और इसपर निर्माण कार्य भी शुरू हो गया। हालाँकि इस पर तमाम तरह की रोक थी, इसके बावजूद निर्माण कार्य शुरू होने के बाद मद्रास हाई कोर्ट में याचिका दाखिल की गई और अब इसपर निर्माण कार्य रुक गया है।

ये याचिका मंदिर कार्यकर्ता और इंडिक कलेक्टिव ट्रस्ट के अध्यक्ष टीआर रमेश ने दाखिल की। टीआर रमेश ने 30 अप्रैल 2024 को एक्स पर बताया कि अब तमिल नाडु सरकार ने अपने कदम पीछे खींच लिए हैं। तमिल नाडु के हिंदू धार्मिक और धर्मार्थ बंदोबस्ती (एचआरसीई) विभाग ने मद्रास उच्च न्यायालय को बताया है कि वह अरुणाचलेश्वर के परिसर में 150 दुकानों के अनधिकृत निर्माण को आगे नहीं बढ़ाएगा।”

टीआर रमेश ने एक्स पर लिखा, “इस मामले में हाई कोर्ट की बेंच के सामने जैसे ही सुनवाई शुरू हुई, वैसे ही HR&CE विभाग के वकील ने कोर्ट को बताया कि तिरुवन्नामलाई के प्रसिद्ध अरुणाचलेश्वर मंदिर के राजगोपुरम के सामने जो निर्माण कार्य होना था, उसकी योजना रद्द कर गई है। हाई कोर्ट ने राज्य सरकार द्वारा ये कदम वापस लेने पर खुशी जताई और उम्मीद भी जताई कि ऐसा वाकई में तुरंत हो जाना चाहिए।”

टी आर रमेश ने हाई कोर्ट में दाखिल अपनी याचिका में कहा था कि राज्य सरकार सिर्फ केयरटेकर की भूमिका में है, वो ऐतिहासिक स्थलों से छेड़छाड़ नहीं कर सकती। वो मंदिर में आने वाले भक्तों के अधिकारों का हनन करके मंदिर के बाहर शॉपिंग कॉम्प्लेक्स नहीं बनवा सकती। जिसके बाद सरकार ने मद्रास हाई कोर्ट के चीफ जस्टिस एस वी गंगापुरवाला और जस्टिस जी चंद्रसेखरन जे ने कहा कि हमें इस मामले में अब कोई आदेश पास करने की जरूरत नहीं है। हमें खुशी है कि सरकार ने सही कदम उठाया।

जानकारी के मुताबिक, ये मंदिर 10 एकड़ से ज्यादा बड़े क्षेत्र में फैला हुआ है, जिसमें कई गोपुरम है। मुख्य गोपुरम राजगोपुरम है। इसी गोपुरम के सामने 6 करोड़ से ज्यादा की लागत से इन शॉपिंग कॉम्प्लेक्स के निर्माण की योजना बनाई थी और इस पर काम भी शुरू हो गया था। इसके लिए पैसे भी मंदिर के खाते से ही निकाले गए थे और सरकार ने ये पैसा विधानसभा में पास किया था, लेकिन अब सरकार इस पैसे को वापस मंदिर के खाते में डाल देगी।

अरुणाचलेश्वर मंदिर के बारे में जानिए

इस मशहूर मंदिर का निर्माण कई राजवंशों ने मिलकर कराया, जो पूरा हुआ चोल राजाओं के समय में। 9वीं शताब्दी में बनकर तैयार हुए इस मंदिर में महादेव की पूजा होती है। अरुणाचलेश्वर मंदिर (जिसे अन्नामलाईयार मंदिर भी कहा जाता है) अरुणाचला पहाड़ी की तली में स्थित है। अरुणाचल पहाड़ी को ‘शिवलिंग’ की मान्यता है। माना जाता है कि इसी जगह पर महादेव ने अर्धनारीश्वर अवतार धारण किया था। इस मंदिर में कार्तिकेय दीपम त्यौहार के समय 30 लाख से ज्यादा लोग एकत्रित होते हैं। इस मंदिर में अग्नि तीर्थम नाम का कुंड है, जिसे बेहद पवित्र माना जाता है। अरुणाचलेश्वर मंदिर शैव मत के अनुयायियों के लिए आस्था का प्रमुख केंद्र है।

ये समाचार मूल रूप से अंग्रेजी भाषा में लिखा गया है। मूल लेख विस्तार से पढ़ने के लिए यहाँ क्लिक करें।

कॉन्ग्रेस को वोट नहीं दिया तो काट देंगे बिजली: कर्नाटक में कॉन्ग्रेस विधायक ने वोटरों को धमकाया, पहले कहा था- अगर मोदी मर गया तो…

कर्नाटक के कॉन्ग्रेस विधायक ने एक वोटरों को धमकी दी है कि अगर वह कॉन्ग्रेस को बड़े स्तर पर वोट नहीं देते तो बिजली काट दी जाएगी। उनकी इस धमकी का वीडियो भी वायरल हो रहा है। इससे पहले उन्होंने पीएम मोदी के मरने की बात कही थी।

कर्नाटक के बेलगावी से विधायक राजू कागे ने जुगुलातो गाँव में एक जनसभा में कहा, “मुझे 400 वोट कम मिले। मंगावती, शूलू में मुझे कम वोट मिले, शाहपुरा की तो बात ही छोड़ दो। मैं इस बारे में ज्यादा बात नहीं करूँगा। अगर मैं बोलूंगा तो मेरे मुँह में कीड़े पड़ जाएँगे। अगर मुझे ज्यादा वोट नहीं मिले तो तुमलोग की बिजली काट देंगे। इसलिए ऐसा नहीं होना चाहिए। मैं अपनी बात पर कायम रहने वाला हूँ।” कॉन्ग्रेस विधायक की धमकी देने वाली यह वीडियो सोशल मीडिया पर वायरल हो गई।

राजू कागे इससे पहले भी विवादित बयान दे चुके हैं। राजू कागे ने मंगलवार (30 अप्रैल, 2024) को कहा था,”मैं भी ग्रेजुएट हूँ, मेरे पास भी दिमाग है, क्या मैं अनपढ़ हूँ? मुझे भरोसा
है कि मैं भी देश अच्छे से चला सकता हूँ, कल अगर मोदी मर जाएँगे तो कोई और पीएम नहीं बनेगा? 140 करोड़ की आबादी है में कोई पीएम नहीं बनेगा।” इस बयान को लेकर खूब बवाल हुआ था। भाजपा ने भी उनके इस बयान को लेकर हमला बोला है।

भाजपा ने कहा कि कॉन्ग्रेस विधायक पीएम मोदी की मृत्यु चाहते हैं। कर्नाटक भाजपा ने लिखा,”कागवाड विधायक राजू कागे ने एक बार फिर अपनी बेलगाम जुबान चलाई है। अब उनके पास आलोचना के लिए मुद्दे नहीं है तो यह डरपोक लोग पीएम मोदी की मौत चाहते हैं। पीएम मोदी को 140 करोड़ भारतीयों का आशीर्वाद प्राप्त है। जितना अधिक कॉन्ग्रेसी उनकी मौत के लिए कामना करेंगे, वह उतने ही लम्बी आयु तक जीवित रहेंगे।”

इससे पहले भाजपा ने कर्नाटक के उपमुख्यमंत्री डीके शिवकुमार पर आरोप जड़ा था कि उन्होंने बेंगलुरु हाउसिंग सोसायटी के लोगों को धमकाया। भाजपा आईटी सेल के मुखिया अमित मालवीय ने डीके शिवकुमार का बयान एक्स पर डाला था। उन्होंने लिखा, “मैं यहाँ एक बिजनेस डील के लिए आया हूँ। यहाँ 2,500 घर हैं और 6,000 वोट हैं… आपको सीए साइट और कावेरी का पानी चाहिए… अगर मैं यह काम करवा दूँ, तो आप मुझे क्या देंगे?”

जोधपुर, जयपुर, दौसा, अलवर… जहाँ-जहाँ राहुल-प्रियंका गाँधी ने किया प्रचार, उन-उन जगहों पर मतदान घटा: 8.5% तक की गिरावट

देश में लोकसभा चुनाव 2024 की प्रक्रिया जारी है। सात चरणों में होने वाले मतदान में दो चरण के मतदान खत्म हो चुके हैं। इन दो चरणों में राजस्थान की कुल 25 लोकसभा सीटों पर मतदान खत्म हो चुका है। यहाँ पहले चरण में 19 अप्रैल को हुए मतदान में 12 लोकसभा सीटों पर वोट डाले गए गए थे, जबकि 26 अप्रैल को हुए दूसरे चरण के मतदान में 13 सीटों पर वोट डाले गए थे।

अगर इस लोकसभा चुनाव में मतदान की बात करें तो पिछले लोकसभा चुनाव में इस बार उत्साह देखने को कम मिला। इसमें सबसे महत्वपूर्ण बात यह रही कि जहाँ-जहाँ कॉन्ग्रेस के सुपर स्टार प्रचारक राहुल गाँधी और उनकी बहन प्रियंका गाँधी ने चुनाव प्रचार किए, वहाँ मतदान में भारी गिरावट देखी गई है।

कॉन्ग्रेस के प्रत्याशियों के पक्ष में राहुल गाँधी और प्रियंका गाँधी ने 6 लोकसभा सीटों पर प्रचार किया था। इन सभी सीटों पर मतदान प्रतिशत में 3 से लेकर 8.50 प्रतिशत तक की गिरावट इस बार देखी गई है। पहले चरण में राहुल गाँधी ने राजस्थान की दो लोकसभा सीटों- श्रीगंगानगर लोकसभा सीट के अनूपगढ़ और जोधपुर लोकसभा सीट के फलोदी में जनसभा की थी।

श्रीगंगानगर में इस बार पिछले लोकसभा चुनाव की तुलना में मतदान में 8.51 प्रतिशत की गिरावट हुई है। इस सीट पर इस बार 66.25 प्रतिशत मतदान हुआ है, जबकि साल 2019 के लोकसभा चुनावों में मतदान का प्रतिशत 74.77 था। उससे पहले साल 2014 के लोकसभा चुनावों में यह प्रतिशत 73.17 था। इस तरह 2014 की तुलना में 2019 में बढ़ोतरी हुई, लेकिन 2024 में भारी गिरावट हुई।

अगर जोधपुर लोकसभा क्षेत्र की बात करें तो 2024 के लोकसभा चुनाव में 63.89 प्रतिशत मतदान हुआ है। इससे पहले वाले साल 2019 के चुनाव में 68.89 प्रतिशत मतदान हुआ था। इस तरह पिछले चुनाव की तुलना में इस बार के मतदान में 5 प्रतिशत की गिरावट देखी गई है। वहीं, साल 2014 के लोकसभा चुनाव में 62.43 प्रतिशत मतदान हुआ था।

वहीं, पहले ही चरण में प्रियंका गाँधी ने सबसे पहले अपनी माँ सोनिया गाँधी के साथ 6 अप्रैल 2024 को जयपुर में एक सभा को संबोधित किया था। जयपुर के बाद प्रियंका गाँधी ने दौसा और जालोर में जनसभा की। उन्होंने अलवर में कॉन्ग्रेस प्रत्याशी के पक्ष में रोड शो किया। हालाँकि, दूसरे चरण में राहुल गाँधी या प्रियंका गाँधी ने कोई जनसभा नहीं की।

जयपुर लोकसभा में इस बार 63.48 प्रतिशत मतदान हुआ। पिछली बार यह प्रतिशत 68.48 प्रतिशत था। इस तरह पिछले लोकसभा चुनाव की तुलना में इस बार मतदान में 5 प्रतिशत की गिरावट दर्ज की गई है। अगर इस सीट पर साल 2014 के लोकसभा चुनाव की बात करें तो उस दौरान 66.35 प्रतिशत मतदान हुआ था।

भारतीय चुनाव आयोग की रिपोर्ट के मुताबिक, दौसा लोकसभा में भी इस बार पिछली बार की तुलना में 5.63 प्रतिशत कम मतदान हुआ। दौसा सीट पर इस बार 55.87 प्रतिशत मतदान हुआ है। पिछले लोकसभा चुनाव में यहाँ 65.50 प्रतिशत मतदान हुआ था। साल 2014 के लोकसभा चुनाव में यहाँ 61.08 प्रतिशत मतदान हुआ था।

जालौर लोकसभा सीट पर हालाँकि अपेक्षाकृत कम गिरावट हुई है। जालौर लोकसभा सीट पर इस साल 62.56 प्रतिशत मतदान हुआ है। पिछले लोकसभा चुनाव में यहाँ 65.74 प्रतिशत मतदान हुआ था। इस तरह पिछले लोकसभा चुनाव की तुलना में इस बार 3.18 प्रतिशत की गिरावट दर्ज की गई है। साल 2014 में इस सीट पर 59.62 प्रतिशत मतदान हुआ था।

इसी तरह अलवर लोकसभा सीट पर भी इस बार 6.84 प्रतिशत कम मतदान हुआ है। इस सीट पर इस बार 60.32 प्रतिशत मतदान हुआ है। साल 2019 के लोकसभा चुनावों में यह प्रतिशत 67.17 था। इसी तरह अगर 2014 के लोकसभा चुनावों की बात करें तो इस सीट पर 65.36 प्रतिशत मतदान हुआ था।

बता दें कि राजस्थान के दोनों चरणों के लिए प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने कुल 9 दौरे कि और 10 लोकसभा सीटों पर चुनाव प्रचार किया। इन 10 सीटों में से 9 सीटों पर इस बार मतदान प्रतिशत में पिछले लोकसभा चुनाव की तुलना में गिरावट दर्ज की गई है। वहीं, केवल एक सीट पर इस बार मतदान प्रतिशत बढ़ा है। जिस सीट पर वोट प्रतिशत बढ़ा है वह बाड़मेर है। यहाँ 0.95 प्रतिशत की वृद्धि हुई है।

कोविशील्ड पर सुप्रीम कोर्ट पहुँचा वकील, कहा- साइडइफेक्ट की हो जाँच: ICMR के वैज्ञानिक बोले- चिंता ना करें, 10 लाख में सिर्फ 7 ही प्रभावित

एस्ट्राजेनेका निर्मित वैक्सीन कोविशील्ड के साइड इफेक्ट की जाँच के लिए सुप्रीम कोर्ट में एक याचिका लगाई गई है। यह याचिका कंपनी के यह स्वीकारने के बाद लगाई गई है कि इसकी वैक्सीन के कुछ दुर्लभ साइड इफ़ेक्ट हो सकते हैं। इस रिपोर्ट के बाद वैज्ञानिकों ने लोगों से अपील की है कि वह घबराए नहीं और इसका वैज्ञानिक आधार भी दिया है।

सुप्रीम कोर्ट में लगाई गई याचिका में माँग की गई है कि कोविशील्ड वैक्सीन की जाँच के लिए एक विशेषज्ञ पैनल बनाया जाए। इसमें AIIMS के डॉक्टर शामिल किए जाएँ और इसकी निगरानी सुप्रीम कोर्ट के रिटायर जज करें। इसके अलावा यह भी माँग की गई है कि जिन लोगों को इस वैक्सीन की वजह से कोई बीमारी या मौत हुई, इन सभी मामलों में सरकार की तरफ से मुआवजा दिया जाए। इसके लिए अमेरिका का उदारहण दिया गया। यह याचिका एक वकील विशाल तिवारी ने लगाई है।

याचिका में कहा गया है कि देश में 170 करोड़ लोगों को यह वैक्सीन लगाई गई थी इसका निर्माण लाइसेंस के तहत सीरम इंस्टिट्यूट ने किया था। याचिका में दावा है कि देश में लोगों को यह वैक्सीन लगाए जाने के बाद हेरात अटैक के मामलों में वृद्धि देखी गई है।

वहीं वैक्सीन को लेकर मचे हल्ले के बीच इंडियन काउंसिल फॉर मेडिकल रिसर्च (ICMR) के वैज्ञानिक रमन गंगाखेड़कर ने मीडिया को बताया है कि लोगों को चिंता करने की आवश्यकता नहीं है। उन्होंने बताया है कि वैक्सीन लेने वाले 10 लाख लोगों में से 7-8 को इसके साइड इफेक्ट का खतरा है। उन्होंने कहा कि पहली डोज लेने के बाद खतरा अधिक होता है, दूसरी दोसे लेने पर यह खतरा कम हो जाता है और तीसरे डोज के साथ यह और कम हो जाता है। उन्होंने यह भी कहा कि अगर कोई साइड इफेक्ट होता भी है तो यह दो-तीन महीने में सामने आते हैं।

उन्होंने यह भी बताया कि TTS साइड इफेक्ट कोई नई बात नहीं है और जब वैक्सीन को मंजूरी दी गई थी तो उसके 6 महीने के भीतर TTS को एक दुर्लभ साइड इफेक्ट के रूप में पहचान लिया गया है। उन्होंने यह भी कहा कि जहाँ साइड इफेक्ट का खतरा मात्र 10 लाख में से 7-8 लोगों को है तो वहीं इसका फायदा करोड़ों को लोगों को मिला था।

गौरतलब है कि हाल ही में एक रिपोर्ट में बताया गया था कि एस्ट्राजेनेका ने अपनी वैक्सीन के कारण कुछ दुर्लभ मामलों में TTS होने की बात स्वीकारी थी। एस्ट्राजेनेका ने यह बात यूके के हाई कोर्ट में दिए गए कागजों में स्वीकार की थी। एस्ट्राजेनेका ने माना था कि इससे खून के थक्के जमने की समस्या हो सकती है। एस्ट्राजेनेका के विरुद्ध यूके में 51 लोगों ने मामला दायर कर रखा है कि इस कम्पनी की वैक्सीन लेने के बाद उनको नुकसान हुआ। इन्होने एस्ट्राजेनेका से हर्जाने की माँग की है।

मिडिल क्लास का चेहरा BJP में! विकास के महायज्ञ में शामिल होने आईं ‘मोनिशा’ तो लोगों को याद आई नसीरुद्दीन शाह की बीवी, बोलीं ‘अनुपमा’ – देशसेवा में आगे बढ़ूँगी

लोकप्रिय टीवी अभिनेत्री रुपाली गांगुली भाजपा में शामिल हो गई हैं। वो ‘साराभाई Vs साराभाई’ (2004-06) और में मोनिशा और ‘अनुपमा’ में टाइटल किरदार निभाने के लिए जानी जाती हैं। सीरियल देखने वाली महिलाओं के बीच उनका क्रेज है। उन्होंने बुधवार (1 मई, 2024) को दिल्ली स्थित पार्टी मुख्यालय में तीसरे चरण के लोकसभा चुनाव से पहले भाजपा ज्वाइन की। इसके बाद उन्होंने पार्टी की राष्ट्रीय अध्यक्ष JP नड्डा से भी मुलाकात की।

रुपाली गांगुली ने कहा कि एक नागरिक के नाते ही सही लेकिन हम सबको इसमें सहभागिता देनी चाहिए। उन्होंने कहा कि महाकाल और माता रानी का आशीर्वाद है कि वो अपनी कला के माध्यम से कई लोगों से मिलती हैं, बातचीत करती हैं, जब वो विकास का महायज्ञ देखती हैं तो उन्हें लगता है कि क्यों न वो भी इसमें सहभागी बनें। उन्होंने बताया कि उन्हें विनोद तावड़े (भाजपा के राष्ट्रीय जनरल सेक्रेटरी) का आशीर्वाद, अनिल बलूनी (भाजपा के राष्ट्रीय मीडिया इंचार्ज) का मार्गदर्शन और संजय मयूख (भाजपा के नेशनल मीडिया को-हेड) की सहायता मिली।

रुपाली गांगुली ने कहा कि वो प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के बताए रास्ते पर चलेंगी और किसी तरह देशसेवा में आगे बढ़ेंगी। उन्होंने कहा कि केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह के नेतृत्व में वो आगे बढ़ना चाहती हैं ताकि भाजपा के उन नेताओं को भी उन पर गर्व हो जो उन्हें पार्टी में लेकर आए हैं। रुपाली गांगुली ने इस दौरान लोगों का साथ माँगते हुए कहा कि वो जो भी करें अच्छा करें यही कामना है, अगर गलत करने पर उन्हें बताया जाए, सही रास्ता दिखाया जाए।

दिल्ली भाजपा महिला मोर्चा की स्टेट जनरल सेक्ट्री वैशाली पोद्दार ने रुपाली गांगुली का स्वागत करते हुए लिखा, “मिडिल क्लास की फेवरेट एक्ट्रेस मिडिल क्लास की फेवरेट पार्टी में आ गईं।” वहीं इस दौरान उनके किरदारों के नाम ‘मोनिशा’ और ‘अनुपमा’ भी सोशल मीडिया पर ट्रेंड होने लगे। उनके सीरियल वाले डायलॉग्स के कारण ‘मिडल क्लास’ भी ट्रेंड होने लगा। बता दें कि ‘साराभाई Vs साराभाई’ में उनके किरदार को मिडल क्लास का चेहरा माना जाता था।

वहीं कुछ लोगों ने इस दौरान इस सीरियल में उनकी सास का रोल करने वाली रत्ना पाठक शाह पर भी तंज कसा। लोगों ने लिखा कि ‘मोनिशा’ को भाजपा में आना ही था, क्योंकि ‘मम्मी जी’ तो कट्टर कॉन्ग्रेसी हैं। बता दें कि नसीरुद्दीन शाह की पत्नी रत्ना पाठक शाह अक्सर अपने शौहर की तरह ही भाजपा के खिलाफ बयान देती रहती हैं। 47 वर्षीय रुपाली गांगुली का जन्म महाराष्ट्र के एक बंगाली हिन्दू परिवार हुआ हुआ था। उन्होंने होटल मैनेजमेंट और थिएटर की पढ़ाई कर रखी है।

कोलंबिया यूनिवर्सिटी से खींचकर बाहर निकाले गए फिलीस्तीन समर्थक, 100 से ज्यादा गिरफ्तार: कब्जा करके कर रहे थे तोड़फोड़, लगा रहे थे आजादी के नारे

अमेरिका की कोलंबिया यूनिवर्सिटी को फिलीस्तीन समर्थकों से खाली करा लिया गया है। मंगलवार (30 अप्रैल 2024) रात को 100 से अधिक पुलिसकर्मी रैंप लगाकर यूनिवर्सिटी के परिसर में दाखिल हुए थे। उसके बाद गिरफ्तारियाँ हुईं और परिसर खाली कराया गया। परिसर हैमिल्टन हॉल की बिल्डिंग का था जहाँ इजरायली विरोधी प्रदर्शनकारियों ने सोमवार देर रात कब्जा किया था।

रिपोर्ट्स बताती हैं कि इन लोगों ने बिल्डिंग के गेट को यूनिवर्सिटी के फर्नीचर और वेंडिंग मशीन के जरिए बंद कर दिया था। वहीं खिड़कियों पर अखबार भी चिपका दिए थे ताकि अंदर क्या हो रहा इसके बारे में कुछ पता न चले। इसके बाद इन लोगों ने खिड़की से फिलीस्तीन का झंडा फहराया और वहाँ आजादी की नारेबाजी की थी।

इसके अलावा विश्वविद्यालय के लोगों ने ये भी जानकारी दी कि प्रदर्शनकारियों ने यूनिवर्सिटी में तोड़फोड़ करने का भी काम किया था जिसके बाद उन्हें परेशान होकर पुलिस बुलानी पड़ी। पुलिस ने इसके बाद बड़ी मशक्कत से सिटी कॉलेज से करीब 100 प्रदर्शनकारियों को गिरफ्तार किया।

वहीं यूनिवर्सिटी ने पुलिस से कहा कि वो 17 मई तक स्थिति पर ध्यान बनाए रखें। न्यूयॉर्क पुलिस विभाग ने खुद इस संबंध में जानकारी साझा की है। उन्होंने बताया है कि वे अब भी शहर के दूसरे इलाकों में प्रदर्शनकारियों को पकड़ने के लिए छानबीन कर रहे हैं। यूनिवर्सिटी के प्रवक्ता ने बताया कि जिन लोगों ने हैमिल्टन हॉल को कब्जे में लिया था, वो वहाँ के छात्र नहीं थे इसलिए पुलिस बुलाई गई।

बताया जा रहा है कि कोलंबिया यूनिवर्सिटी में यह दूसरी बार है किसी प्रदर्शन की वजह से पुलिस दाखिल हुई। इससे पहले 30 अप्रैल 1968 को भी वियतनाम जंग के खिलाफ प्रदर्शन कर रहे करीब 700 लोगों को गिरफ्तार किया गया था। इसके बाद यह मंगलवार को हुआ जब कैंपस में पुलिस के दाख़िल होने और गिरफ़्तारी किए जाने से क़रीब तीन घंटे तक अफ़रा-तफ़री का माहौल रहा। अभी भी पुलिस यूनिवर्सिटी के बाहर तैनात है।

बेटे को लेकर प्रेमी के साथ फरार हो गई सबीना खातून, शौहर से कहती थी- तुम बूढ़े हो गए… ‘भाई’ बनकर घर आता था आशिक

बिहार के मुजफ्फरपुर में निकाह के दो साल बाद एक निकाहशुदा महिला अपने शौहर को छोड़कर प्रेमी के साथ फरार हो गई। इस दौरान वह अपने साथ नकदी और गहने के साथ-साथ अपने 18 महीने के बेटे को भी ले गई। महिला अपने शौहर को बूढ़ा होने का अक्सर ताना मारती थी। वह कहती थी कि उसका शौहर बूढ़ा है। शिकायत मिलने के बाद पुलिस मामले की जाँच कर रही है।

यह मामला मुजफ्फरपुर शहर के ब्रह्मपुरा थाना क्षेत्र का है। बीवी के प्रेमी के साथ भाग जाने पर उसके शौहर ने ब्रह्मपुरा थाने में मामला दर्ज कराया है। जानकारी के अनुसार, गुड्डू और सबीना खातून का निकाह 31 जनवरी 2022 को परिजनों की सहमति से हुआ था। कुछ समय पहले दोनों को एक बेटा भी हुआ था। गुड्डू घर से लहठी कारोबार करता था।

वहीं, गुड्डू की बीवी सबीना उसे बाहर जाकर काम करने के लिए बोलती थी। हालाँकि, गुड्डू उसकी बातों पर ध्यान नहीं देता था। गुड्डू ने बताया कि बीवी के कहने पर उसने अपने भाई की दुकान पर रहकर काम करना शुरू कर दिया। इसी बीच 25 अप्रैल 2024 को गुड्डू काम करने के लिए घर से निकाल गया। दोपहर को उसने एक लड़के को किसी काम से अपने घर भेजा।

जब लड़का गुड्डू के घर पहुँचा तो देखा घर का दरवाजा बंद है। इसके बाद लड़के ने गुड्डू को फोन करके इसकी जानकारी दी। जब गुड्डू घर आया तो उसे पता चला कि उसकी बीवी एक बाइक सवार युवक के साथ चली गई। वह अपने साथ बेटे को भी ले गई है। इसके बाद गुड्डू ने अपने ससुराल वालों से इस संबंध में बात की। ससुराल वालों ने बताया कि वह घर नहीं आई है।

इसके बाद उसने आसपास लगे सीसीटीवी कैमरों की फुटेज देखी। इसमें वह एक युवक से बाइक पर सवार होकर जा रही है। गुड्डू ने इस युवक के बारे में पता किया तो पता चला कि उसकी बीवी का युवक के साथ उसका प्रेम संबंध चल रहा था। उसने युवक को अपने साले का दोस्त बताया है। इसके बाद गुड्डू ने पुलिस को मामले की जानकारी दी।

गुड्डू ने बताया कि निकाह के बाद से सबीना उसे बूढ़ा कहकर ताना मारती रहती थी। उसके कहने पर उसने अपने भाई की दुकान पर काम शुरू कर दिया। 25 अप्रैल को वह घर पर सब्जी और अन्य सामान लेकर आया था। उसे खाना बनाने के लिए कहा था, लेकिन उसने खाना नहीं बनाया। इसके बाद गुड्डू काम पर चला गया।

उसने बताया कि लड़के के यह बताने पर कि घर पर ताला लगा हुआ है, वह अपने घर आया। उसने ताला तोड़कर घर देखा तो सारा सामान बिखरा हुआ था। उसने बताया कि घर के कई कीमती सामान, लगभग डेढ़ लाख रुपए नकद और 3 लाख रुपए के गहने लेकर वह भाग गई है। उसका कहना है कि उसकी बीवी का वर्तमान लोकेशन दिल्ली आ रहा है।

गुड्डू ने बताया, “मुझे लोगों से जानकारी मिली कि मेरी अनुपस्थिति में लगभग 3 महीने से वह दिन में घर पर आया करता था। मेरी बीवी ने अगल-बगल वाले लोगों को उसने उसे अपना भाई बता रखा था।” पीड़ित शौहर ने बताया कि निकाह के वक्त उसकी बीवी के भाई का यह दोस्त भी आया था और उसने निकाह में खाना भी खिलाया था।

‘TMC को वोट क्यों देना? BJP को वोट करना बेहतर’: कॉन्ग्रेस नेता अधीर रंजन चौधरी का वीडियो वायरल, टीएमसी ने बताया भाजपा का ‘स्टार प्रचारक’

वरिष्ठ कॉन्ग्रेस नेता और लोकसभा में विपक्ष के नेता अधीर रंजन चौधरी ने बुधवार (01 मई 2024) को पश्चिम बंगाल के बेरहामपुर में एक राजनीतिक रैली में बीजेपी के लिए वोटिंग की अपील कर दी। वायरल वीडियो में अधीर रंजन चौधरी वीडियो में कहते दिख रहे हैं, ‘टीएमसी को वोट देने के बजाय बीजेपी को वोट देना चाहिए।”

पश्चिम बंगाल के बहरामपुर लोकसभा सीट से पाँच बार के लोकसभा सांसद अधीर रंजन चौधरी ममता बनर्जी के तीखे आलोचकों में से एक हैं। वो बहरामपुर में लोकसभा चुनाव के लिए प्रचार करते समय मंच पर थे, तभी उन्होंने बंगाली में कहा, “टीएमसी को वोट क्यों दें, बीजेपी को वोट देना बेहतर है।” अधीर रंजन चौधरी का वीडियो सोशल मीडिया पर तेजी से वायरल हो रहा है।

वरिष्ठ पत्रकार पल्लवी घोष ने ये वीडियो एक्स पर शेयर करते हुए लिखा, “अधीर रंजन चौधरी बोल रहे हैं कि टीएमसी की जगह बीजेपी को वोट दें, ऐसे में इंडी अलायंस का क्या होगा?”

भले ही कॉन्ग्रेस और अन्य विपक्षी दल ‘INDI’ गठबंधन के बैनर तले “एकता” का दावा कर रहे हैं, लेकिन ज़मीनी स्थिति उस बात से बहुत दूर है, जिस पर विपक्ष देश को विश्वास दिलाना चाहता है। पश्चिम बंगाल में कॉन्ग्रेस और टीएमसी के बीच टकराव चल रहा है, खासकर ममता बनर्जी द्वारा इंडी गठबंधन को मामूली 2 सीटों की पेशकश के बाद, जिससे दोनों राजनीतिक दलों के बीच बातचीत खत्म हो गई। इसके बाद टीएमसी ने पश्चिम बंगाल की सभी 42 लोकसभा सीटों पर उम्मीदवारों की घोषणा कर दी।

बता दें कि मुख्यमंत्री ममता बनर्जी पर चौधरी द्वारा लगातार विरोध ने इंडी गठबंधन से हटने के फैसले को महत्वपूर्ण माना जाता है। हालाँकि इस बीच टीएमसी नेता सुस्मिता देव ने अधीर रंजन चौधरी पर जोरदार हमला बोला है। उन्होंने अधीर रंजन चौधरी को बंगाल में ‘बीजेपी का स्टार कैंपेनर’ बताया है।

बता दें कि पश्चिम बंगाल की सत्ताधारी पार्टी टीएमसी पहले इंडी गठबंधन में शामिल थी, लेकिन लोकसभा चुनाव के लिए सीटों के बँटवारे में वो इंडी गठबंधन से निकल गई। दोनों ही पक्ष एक-दूसरे को बीजेपी का सहयोगी बताते हैं। अधीर रंजन चौधरी के सामने टीएमसी ने पूर्व क्रिकेट यूसुफ पठान को मैदान में उतारा है। अधीर रंजन चौधरी बहरामपुर लोकसभा सीट से पाँच बार के सांसद हैं, लेकिन इस बार उनकी राह कठिन नजर आ रही है।