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छिनतई का है कॉन्ग्रेस का इरादा, पार्टी नेता मनीष तिवारी ने भी किया कन्फर्म: कहा- सबमें बँटेगा… खतरे से पहले ही आगाह कर चुके हैं PM मोदी

कॉन्ग्रेस देश के लोगों की संपत्ति लेकर दूसरों को बाँटने के अपने प्लॉन पर अडिग है। हाल में इस बात की पुष्टि कॉन्ग्रेस नेता मनीष तिवारी के एक्स पोस्ट से भी हुई। अपने पोस्ट में मनीष तिवारी ने कहा कि वो अमीरों से उनके पैसे लेकर गरीबों को अमीर बनाएँगे। उन्होंने कहा है कि वो देश की 1 फीसद जनता को देश की 77% संपत्ति कब्जा नहीं करने देंगे।

ध्यान देने योग्य बिंदु यह है कि कॉन्ग्रेस अपने वादों में गरीबों की स्थिति सुधारने की बात जॉब देने के वादे करके नहीं कर रही, बल्कि अगर कोई व्यक्ति मेहनत के दम पर अमीर हुआ है तो उसकी संपत्ति का हिस्सा लेकर दूसरों को देने के लिए कह रही है ताकि सब एक बराबर गरीब हो सकें।

अपने पोस्ट में मनीष तिवारी ने ‘थरूर’ स्टाइल में अंग्रेजी लिखी। अपने पोस्ट में उन्होंने चैबोल (Chaebol) और ओलीगार्चीज (Oligarchies) जैसे शब्द प्रयोग किए। इनमें चैबोल का अर्थ कोरियाई भाषा में होता है कि संपत्ति जिसका स्वामित्व आमतौर पर एक परिवार के पास होता है। वहीं ‘ओलिगार्की’ (Oligarchy) सामाजिक संगठन का वह स्वरूप है जिसमें राजनीतिक शक्ति मुख्य रूप से धनवान अभिजात्य वर्ग के हाथों में होती है।

तिवारी ने कॉन्ग्रेस पार्टी की यह मंशा पॉलिटिकल कमेंटेटर तुषार गुप्ता के ट्वीट पर जाहिर की। तुषार गुप्ता ने कॉन्ग्रेस का मेनिफेस्टो शेयर करके 28वें पृष्ठ पर 21 बिंदु पर गौर कराया था जिसमें कॉन्ग्रेस ने लिखा था, “हम नीतियों में उपयुक्त बदलावों के माध्यम से धन और आय की बढ़ती असमानता को सही करेंगे।” इसी ट्वीट पर मनीष तिवारी ने अपना जवाब दिया।

जिसके बाद तुषार गुप्ता ने उन्हें जवाब में कहा कि अगर कॉन्ग्रेस के प्लान के मुताबिक चीजें चलती हैं तो 1 फीसद की श्रेणी में कॉन्ग्रेस नेता मनीष तिवारी खुद भी आएँगे। लोकसभा चुनाव 2019 में जमा कराए गए हलफनामे के अनुसार मनीष तिवारी 15 करोड़ रुपए की संपत्ति के मालिक हैं।

वहीं ऑपइंडिया से बात करते हुए भी तुषार गुप्ता ने कहा कि अगर कॉन्ग्रेस मेनिफेस्टो के पेज नंबर 28 के प्वाइंट नंबर 21 का अर्थ ये है कि हर किसी को संपत्ति से बराबर पैसा मिलेगा, चाहे उसकी वो कमाई हो या विरासत में मिली तो हमें तैयार रहना चाहिए इस बात के लिए कि राहुल गाँधी की कॉन्ग्रेस देश को सामंतवाद की ओर ढकेल रही है।

बता दें कि 21 अप्रैल से लगातार पीएम मोदी जनता को इस बारे में बता रहे हैं कि कॉन्ग्रेस की मंशा क्या है और वो कैसे सत्ता में आने के बाद लोगों की संपत्ति के बँटवारे का प्लान बनाकर बैठे हैं। पीएम द्वारा इस मुद्दे को उठाने के बाद कॉन्ग्रेस ने उन्हें ‘डर फैलाने वाला’ तक कहा। हालाँकि, अब तिवारी के कमेंट के बाद ऐसा लग रहा है कि पीएम मोदी द्वारा दी जा रही चेतावनी सही हो सकती है कि सबको एक बराबर करने के नाम पर कॉन्ग्रेस गरीबों को विरासत में मिली संपत्ति और समृद्ध परिवार की संपत्ति को भी दूसरों में बाँट सकें। कॉन्ग्रेस ने अपने मेनिफेस्टों में जो बातें कही हैं उन्हें लेकर उन्होंने ये नहीं बताया कि ये लागू कैसे होगा। न ही ये बताया है कि संपत्ति का बँटवारा किस हिसाब से होगा।

इस रिपोर्ट को मूल रूप से अंग्रेजी में लिखा गया है। आप पूरी रिपोर्ट इस लिंक पर क्लिक करके पढ़ सकते हैं।

मणिपुर में सेना ने गोला-बारूद के साथ उपद्रवियों को पकड़ा, महिलाओं ने काफिला रोक 11 को छुड़ाया: हथियार छीनने की भी कोशिश

मणिपुर में भारतीय सेना के काफिले को रोककर उपद्रवियों को रिहा कराने की घटना सामने आई है। बताया जा रहा है कि 30 अप्रैल 2024 को भारतीय सेना अपने साथ वो हथियार और गोला बारूद लेकर जा रहे थे, जो उन्होंने बिष्णुपुर में कुछ वाहनों से जब्त किए थे। लेकिन, इस बीच रास्ते में महिलाओं का एक ग्रुप आया और काफिला रोककर उनसे सारी जब्ती छुड़ाने की बात कहने लगा। इतना ही नहीं महिलाओं के उस समूह ने 11 उपद्रवियों को भी रिहा कराया।

घटना मंगलवार को बिष्णुपुर के पास की है। महार रेजीमेंट के सैन्यकर्मियों द्वारा कुंबी इलाके में की जा रही पैट्रोलिंग के दौरान उन्होंने दो एसयूवी रोकी, जिसके बाद उस वाहन में बैठे लोग हथियार छोड़ फरार हो गए। जवान इन हथियारों को अपने साथ ला ही रहे थे कि मौके पर सैंकड़ों महिलाएँ इकट्ठा हो गईं। उन्होंने सुरक्षाकर्मियों से जब्त किए गए हथियार लेने के लिए सड़क को जाम कर दिया।

सेना ने सबको तितर-बितर करने के लिए हवा में गोलियाँ चलाईं लेकिन कोई सड़क से हटने को तैयार नहीं हुई। घटना की जानकारी होने पर राज्य पुलिस बल भी वहाँ पहुँची। पुलिस को सेना के जवानों ने बताया कि उनके कई प्रयासों के बावजूद आक्रामक टकराव के दौरान महिलाओं ने 11 लोगों को छुड़ा लिया है और हथियार लेने का भी जोर दे रही है। पुलिस से हुई बातचीत के बाद इस मामले में इस बात पर सहमति बनी कि सेना जो हथियार ले जा रही है वो पुलिस को सौंप देगी।

इस बीच सोशल मीडिया पर कुछ वीडियो सामने आई है जिनमें सैंकड़ों महिलाएँ सड़क जाम करते और सेना के काफिले को इलाके से निकलने से रोकने के लिए हल्ला मचाती दिख रही हैं। वहीं भीड़ को तितर-बितर करने के लिए पुलिस भी हवाई फायरिंग कर रही है। वहीं भीड़ को तितर-बितर करने के लिए पुलिस भी हवाई फायरिंग कर रही है।

इस घटना के संबंध में मणिपुर पुलिस ने भी पुष्टि की है। हालाँकि उन्होंने 11 उपद्रवियों की पहचान को उजागर नहीं किया है। सिर्फ बताया है कि महार रेजीमेंट ने 11 हथियारों से लैस उपद्रवियों को पकड़ा था जो पुलिस वर्दी में थे लेकिन वापसी में ‘मीरा पैबिस’ – मैतेई महिलाओं के एक नागरिक समूह ने उन्हें छुड़ा लिया। आर्मी को अपनी कार्रवाई के दौरान 3 राइफल, 5 INSAS (13 मैगजीन और 260 गोला-बारूद) और 2 SLRs (9 मैगजीन और 180 गोला-बारूद), 2 ग्रेनेड और बुलेट प्रूफ जैकेट भी मिली है। स्थिति अब सामान्य है।

कम उम्र में वासना और प्रेम में डूबे थे दोनों, लड़के को बना दिया ‘बलि का बकरा’: हाई कोर्ट ने सजा घटाई, कहा- POCSO के तहत माफी का प्रावधान नहीं

मेघालय हाई कोर्ट ने अहम फैसले में पॉक्सो एक्ट के तहत दोषी ठहराए गए व्यक्ति की सजा उम्रकैद से घटाकर 10 साल कर दी है और 10 हजार का जुर्माना न भरने की एवज में 1 माह की अतिरिक्ट सजा काटने का आदेश दिया है। कोर्ट ने इस मामले में सहमति पाने के बाद फैसला दिया है। मेघालय हाई कोर्ट ने अपने फैसले में कहा कि लड़की भले ही 13 साल से अधिक थी, लेकिन इस मामले में अपहरण या जबरदस्ती का कोई सबूत नहीं मिला। चूँकि दोनों ने शादी की थी, इसलिए पॉक्सो एक्ट में दी गई सजा को उम्रकैद से घटाकर 10 साल की जाती है।

लाइव लॉ की रिपोर्ट के मुताबिक, मेघालय हाई कोर्ट के चीफ जस्टिस एस. वैद्यनाथन और जस्टिस डब्ल्यू. डिएंगदोह की बेंच ने अपने फैसले में शिलॉन्ग कोर्ट के फैसले में बदलाव किया है। कोर्ट ने अपने फैसले में कहा, ‘दुर्भाग्य से लड़के को दोनों (लड़के और लड़की) की गलतियों/उकसावे के लिए सजा सुनाई गई है, ये बलि का बकरा बनाने जैसा हुआ, क्योंकि लड़की एक खुशहाल जीवन जी रही है, जबकि लड़का उम्रकैद की सजा काट रहा है। चूँकि पॉक्सो एक्ट में सजा को माफ करने का कोई प्रावधान नहीं है, इसलिए सजा को कम किया जाता है।’ कोर्ट ने पाया कि ‘लड़की अपने पुरुष मित्र के साथ अपनी सहमति से उसके साथ भागी थी, जोकि उसके खुद के बयान (161 के बयान) से साफ है।’

बचाव पक्ष ने ये भी कहा कि लड़की की उम्र 17 साल थी। हालाँकि हड्डियों की जाँच में ये साबित हुआ कि लड़की की उम्र 13 साल से अधिक थी। इस मामले में विसंगति पाए जाने पर कोर्ट ने दोषी को संदेह का लाभ दिया। कोर्ट ने वकील के उस दलील को स्वीकार किया, जिसमें वकील ने कहा, ‘लड़का और लड़की एक रोमांटिक रिश्ते में थे। उन्होंने अपनी मर्जी से अपने घर छोड़े और शादी कर ली। इसके बाद दोनों ने यौन संबंध बनाए।’ इस मामले में पॉक्सो एख्ट की धारा 42ए का संदर्भ दिया गया, जिसमें कानूनी तौर पर किसी भी तरह की गड़बड़ी मिलने पर 42ए लागू होता है।

इस मामले में 42ए का जिक्र इसलिए किया गया, क्योंकि आईपीसी की धारा 375 के उपबंध 2 (जिसमें शादी की सूरत में बिना अनुमति के अपनी नाबालिग पत्नी के साथ संबंध बनाने पर सजा से छूट) के तहत दोषी व्यक्ति छूट जाता। इस मामले में विवाह भी हुआ था, लेकिन 42ए के लागू होने की सूरत में आईपीसी की धारा 375-2 के अपवाद लागू नहीं होते। पॉक्सो एक्स बनाया ही इसलिए गया था, ताकि नाबालिगों के यौन उत्पीड़न में किसी तरह की छूट न मिले।

कोर्ट ने पाया कि लड़की के बयान बदलते भी रहे हैं। वहीं, परिस्थितियों पर नजर डालते हुए हाई कोर्ट ने पाया कि दोनों ने शादी की थी, इसलिए इसमें जबरदस्ती जैसी बात नहीं। अगर दोनों ने संबंध बनाए तो एक तरफ लड़की अपनी सामान्य जिंदगी जी रही है, तो दूसरी तरफ लड़का उम्रकैद की सजा काट रहा है। कोर्ट ने भावनात्मक मुद्दे को भी ध्यान में रखा और कहा कि दोनों की सामूहिक गलतियों की सजा सिर्फ एक व्यक्ति को मिल रही है, जोकि गलत है। हालाँकि पॉक्सो एक्ट के तहत नाबालिग से संबंध बनाने का दोष सिद्ध होता है। चूँकि इसमें बलात्कार यानी जबरदस्ती की पुष्टि नहीं हुई है। दोनों प्रेम में थे और खुद को शादीशुदा ही मानकर चल रहे थे, क्योंकि दोनों ने शादी भी की थी। खुद लड़की ने बताया कि उसके साथ कोई जबरदस्ती या हिंसा नहीं हुई, ऐसे में सजा को कम किया जाता है।

ये मामला 5 अप्रैल, 2013 का है, जब 14 साल की लड़की के पिता ने उसके लापता होने की सूचना पुलिस को दी। बाद में लड़की दोषी पाए गए लड़के के साथ त्रिपुरा की राजधानी अगरतला में बरामद की गई थी। चूँकि लड़की की उम्र 14 साल ही थी, ऐसे में पॉक्सो एक्ट के तहत लड़के को उम्रकैद की सजा सुनाई गई थी। शिलॉन्ग की विशेष कोर्ट ने पॉक्सो एक्ट 2012 की धारा 4 के तहत उम्रकैद और 10 हजार का जुर्माना और आईपीसी की धारा 366ए के तहत 10 साल की सजा और 10 हजार के जुर्माने की सजा सुनाई थी।

हालाँकि अब हाई कोर्ट ने उम्र कैद की सजा को घटाकर 10 साल के कठोर कारावास और 10 हजार रुपए के जुर्माने की सजा सुनाई है। 10 हजार का जुर्माना न भरने पर एक महीने साधारण कारावास की सजा सुनाई गई है।

राहुल राज ने शाहरुख बन शबाना को फँसाया, फिर गौमूत्र पिला करवाई घरवापसी: वो खबर जिसे ध्रुव राठी खोज ही नहीं पाया… इसलिए लव-जिहाद को झूठलाया

ध्रुव राठी ने कह दिया है। लव जिहाद जैसा कुछ नहीं होता है। यह बस एक क्राइम है। मुस्लिम लड़के ने अपनी हिंदू गर्लफ्रेंड को मार दिया, यह सामान्य अपराध है राठी के लिए। इतना सामान्य जितना किसी हिंदू लड़के द्वारा मुस्लिम लड़की को मारना। इसके लिए वो एक वीडियो बनाता है और उदाहरण देता है श्रद्धा वालकर केस का। ऐसा केस जिसकी जाँच में अभी तक लव जिहाद पाया ही नहीं गया।

खुद ही मुद्दा उठाओ, खुद ही उदाहरण कुछ और दो? यह कला ध्रुव राठियों ने कहाँ से सीखी? क्यों करते हैं ये लोग ऐसा? सीधा सा जवाब है – एक षड्यंत्र के तहत मुद्दे के वजूद को खत्म कर देना ही वामपंथियों-इस्लामियों का सबसे बड़ा हथियार रहा है। ध्रुव राठी नया नहीं है। न ही अकेला। और न ही यह आखिरी होगा।

पहले मुगलों का महिमामंडन पाठ्य-पुस्तकों में किया जाता था, उनके अत्याचारों को इतिहास में दबा दिया गया। अब कोई रवीश या ध्रुव राठी वीडियो बना कर यूट्यूब इतिहास दर्ज कर रहा है। अपने लेटेस्ट वीडियो में ध्रुव राठी ने मुद्दा उठाया लव जिहाद का, ताकि इसे खारिज कर दिया जाए। देखने वालों को बता दिया जाए कि यह सिर्फ एक शब्दिक टर्म है। और तो और, समाज में जो भी शख्स इस 2 शब्दों को मानता है, डरता है, जागरूक रहता है, उसे घृणा की दृष्टि से देखा जाना चाहिए।

असल मायने में लव जिहाद की हकीकत क्या है देश में? हकीकत यह है कि लव जिहाद के हजारों केस हो चुके हैं सिर्फ भारत में। सैकड़ों बहन-बेटियों को मार डाला गया है। पिछले 2 साल में 306 ऐसे मामलों को तो सिर्फ ऑपइंडिया दर्ज कर चुका है। न जाने और कितने ऐसे मामले होंगे, जो मीडिया तक आ ही नहीं पाए होंगे। कुछ पीड़िताओं ने हिम्मत की भी होगी तो मीडिया ने छापे नहीं होंगे। न जाने कितनी पीड़िताएँ डर और शर्म के मारे पुलिस तक भी नहीं पहुँची होंगी।

आँकड़े लेकिन किनके लिए? सच को सामने लाना अगर मंशा हो तो आँकड़े सामने हैं, मेहनत करने पर निकल आते हैं। अगर मकसद प्रपंच फैलाना है तो फिर आँकड़े चाहिए ही क्यों? ध्रुव राठी ने बिल्कुल वही किया, जो उसे करना था। लव जिहाद के होने और उसके पीछे छिपे षड्यंत्र को नकारने के लिए ध्रुव राठी को श्रद्धा वालकर का ही केस मिला, जो अभी तक की जाँच में लव जिहाद पाया ही नहीं गया।

ध्रुव राठी के लिए अपराधी की मंशा मतलब फर्जी बात

श्रद्धा वालकर और उसके हत्यारोपित आफताब पूनावाला के अलावा कुछ और भी नाम गिनाए ध्रुव राठी ने। इस वीडियो में जितने भी ऐसे अपराध और पीड़िता-आरोपितों का नाम लिया गया, पहले देखते हैं उन नामों को: श्रद्धा-आफताब | नेहा-फयाज | साक्षी-साहिल खान | निकिता-तौसीफ | अरशद-प्रभा | अंकिता-शाहरुख | रितिका-सैयद | मानसी-मुज्जमिल

इतने सारे नाम लेकर वीडियो बना देता तो प्रपंच कैसे रच पाता? इसलिए जैसे ही ये नाम खत्म होते हैं, ध्रुव राठी नामों व अपराधों की दूसरी लिस्ट पढ़ना शुरू कर देता है। पढ़ा जाए इन्हें भी: अंजन दास-पूनम | साहिल गहलोत-निक्की यादव | अमन कुमार-सोनम परवीन | अंशु-नाइमा उर्फ ईशा | सतीश कुमार-गुलनाज खातून | रामानुज साहू-रेखा | प्रवीण-आयनाज | विपुल टेलर-रुखसार उर्फ रिया | प्रदीप-रुखसाना

मुस्लिम लड़के-हिंदू लड़की और हिंदू लड़के-हिंदू+मुस्लिम लड़की का उदाहरण देकर ध्रुव राठी ज्ञान देता है कि सभी हिंदुओं को हत्यारा नहीं कहा जा सकता है, ठीक वैसे ही सभी मुस्लिमों को भी नहीं कहना चाहिए। बिल्कुल सही कहा उसने… लेकिन यहीं वो अपने तर्क में फँस भी जाता है। कैसे?

हिंदुओं के अपराध गिनाते समय वो एक भी ऐसा अपराध नहीं दिखा पाया जहाँ आरोपित ने अपना नाम बदल कर अलग मजहब वाली लड़की को फँसाया हो। ना ही ऐसा उदाहरण दे पाया जहाँ किसी मुस्लिम लड़की को शादी के बाद जबरन मंदिर ले जाया गया या ससुर-देवर के साथ सोने पर मजबूर किया गया। गौमूत्र पिलाया गया। जबकि उसके ही दिए अपराधों की लिस्ट में हिंदू लड़की को प्यार में फँसाने के लिए फर्जी हिंदू नाम रख कर जबरन निकाह से लेकर रेप और गौमांस खिलाने तक की खबरें शामिल हैं।

क्या ध्रुव राठी इतने तक पर रुक जाता है? बिल्कुल नहीं। उसने लव जिहाद के प्रचार-प्रसार के लिए हिंदुओं को ही दोषी भी ठहरा दिया। क्योंकि उसके अनुसार ऐसा कुछ हो ही नहीं रहा है समाज में। वो अगर ढंग से मेहनत करता तो एक खबर खोज लेता हिंदू लड़के-मुस्लिम लड़की वाला। फिर ‘रिवर्स लव जिहाद’ पर सबूतों के साथ वो वीडियो बना लेता। तब वो हिंदुओं को और भी ज्यादा शर्मसार कर पाने में सफल होता। आखिर वो क्यों नहीं खोज पाया ‘रिवर्स लव जिहाद’ वाली खबर? और क्या है वो खबर?

‘रिवर्स लव जिहाद’ क्यों नहीं खोज पाया ध्रुव राठी?

अगर आपको लगता है कि ऊपर लिखी खबर झूठी है, तो आप सही हैं। पीत पत्रकारिता ऐसे ही की जाती है। ठीक वैसे ही, जैसे ध्रुव राठी ने मंदिर या गाय के साथ अपराध की 4-5 खबरें दिखा, हिंदुओं को आरोपित दिखा आपको दिग्भ्रमित किया… ऊपर की खबर भी उसी स्टाइल में लिखी गई है। 1 अप्रैल का डेट देकर आपको मूर्ख बनाया है मैंने। लेकिन क्यों? क्योंकि आप समझें कि खबरों के अंदर का पक्ष दबा कर या उभार कर मीडिया ऐसे ही खेल खेलता है। फर्जी खबरें गढ़ी जाती हैं। भ्रमित करने वाली थम्बनेल बना कर उलझाया जाता है आपको। वामी-इस्लामी यूट्यूबर इसी मीडिया की अगली कड़ी हैं, सही मायने में ज्यादा खतरनाक हैं।

घटना जो कभी हुई नहीं, वो खबर बना दी जाती है। टुकड़े-टुकड़े उठा कर, उसे जोड़ कर वीडियो बना दिया जाता है। 10 मिलियन मतलब 1 करोड़ लोग उसे देख भी लेते हैं। वामी-इस्लामी मानसिकता के लोग फिर उस पर चर्चा भी करने लगते हैं।

नतीजा क्या होता है – जिस इंदिरा के साथ सच में कोई अब्दुल नाम बदल अमन बन कर प्यार का ढोंग रचता है, वो किसी नाले में कटी मिलती है। लव जिहाद जिसे हाई कोर्ट तक ने एक हकीकत माना है, जिससे ईसाई समुदाय भी परेशान है, उस षड्यंत्र को छिपा लिया जाता है, चर्चा में पीछे धकेल दिया जाता है। इसका नतीजा क्या होता है – फिर कोई नाबालिग लड़की अपने अब्दुल से पिटती रहती है लेकिन जब कोई उसे बचाने जाता है तो उलटे कहती है – हाँ मारेगा ये मुझे, कोई लव-सव-जिहाद नहीं होता है, सब झूठ है।

श्रद्धा की हत्या में मजहब का एंगल क्यों?

जिस श्रद्धा वालकर हत्याकांड का उदाहरण देकर ध्रुव राठी ने प्रपंच से भरा वीडियो बनाया, आखिर क्यों सोशल मीडिया पर बहुत सारे लोगों ने इस हत्या में मजहब का एंगल खोजा? बावजूद इसके कि अभी तक की जाँच में ऐसा कोई एंगल सामने आया नहीं है। आखिर क्यों? क्या ऐसा करने या सोचने वाले सब के सब पागल हैं?

नहीं। लोग मजबूर हैं। डरे रहते हैं। ऐसी खबरों को देख कर अपनी बहन-बेटियों का ख्याल उनके दिमाग में आता है। हर 2-4 दिन पर ऐसी खबरों को पढ़ने-सुनने-देखने वाले हिंदुओं के डर को कट्टरता या धर्मांधता का नाम देना मूर्खता होगी। लेकिन इसी मूर्खता की सीढ़ी का प्रयोग कर वीडियो बनाने और उसे अपने अंधभक्तों के बीच वायरल करने का नाम ध्रुव राठी है।

वीडियो बनाते समय ध्रुव राठी ने जिस चालाकी से श्रद्धा वालकर हत्याकांड को मजहब से दूर रखा, उसे सामान्य अपराध बता दिया, उतनी ही धूर्तता से उसने यह बात छिपा ली कि श्रद्धा के पिताजी ने ऑन-रिकॉर्ड यह कहा था कि उन्हें अपनी बेटी की हत्या में ‘लव जिहाद’ का संदेह है।

श्रद्धा अपना पक्ष रखने के लिए अब इस दुनिया में नहीं है। आफताब पूनावाला ने क्या कभी उसके साथ मजहबी ज्यादती की थी, यह बात अब शायद ही सार्वजनिक हो पाए। लेकिन हिंदुओं ने आफताब में मजहबी चेहरा देखा क्योंकि उनके लिए यह पहली घटना नहीं थी। 2 साल में 306 मामले पढ़ चुके लोगों के मन में छवि बनती है और बननी भी चाहिए। इसके उलट नाम छुपा कर दूसरे मजहब की लड़कियों को प्रेम जाल में फँसाने का एक भी उदाहरण आज तक नहीं आया है… वरना ध्रुव राठी का ‘रिवर्स लव जिहाद’ वीडियो अब तक बन चुका होता, इससे ज्यादा वायरल होता।

ध्रुव राठी मतलब दुनिया का सबसे बड़ा अंधभक्त

दूसरों पर ऊँगली उठाने वाला ध्रुव राठी, अपनी बातों से परे बात करने वाले को अंधभक्त कहने वाला ध्रुव राठी ही सबसे बड़ा अंधभक्त है। यह आरोप नहीं है बल्कि उसने खुद को साबित किया है। पॉइंट-वाइज समझते हैं इसे, सहूलियत होगी।

  • 5 जुलाई 2019 को ध्रुव राठी ने एक वीडियो अपलोड किया था। Article 15 – Reality of Casteism | Analysis by Dhruv Rathee – ये उस वीडियो का टाइटल है। पूरे वीडियो में 2-4 खबरें दिखाई जाती हैं। दलितों के हाथ का छुआ खाना-पानी से परहेज वाली इन खबरों के दम पर ध्रुव राठी यह निष्कर्ष निकाल लेता है कि पूरे का पूरा भारत और यहाँ का समाज जातिवादी है।
  • 26 जुलाई 2018 को Cow Urine Magic! | Hidden Secret in Gaumutra Explained by Dhruv Rathee नाम से एक वीडियो अपलोड हुआ है। इसमें यह गौमूत्र पर वीडियो बनाता है। व्यंग्य की भाषा में दर्शकों को गौमूत्र की जगह अपना मूत्र पीने की सलाह देता है। उसके पीछे का रासायनिक कारण (10-12वीं तक केमिस्ट्री की पढ़ाई करने वाला कोई भी बता देगा) भी बताता है। आखिर है कौन ध्रुव राठी? वैज्ञानिक है या डॉक्टर या गौमूत्र पर कोई रिसर्च पेपर आया है इसका?
  • 29 जून 2028 वाला वीडियो तो अल्टीमेट है। Is India World’s Most Dangerous Country for Women? | Analysis by Dhruv Rathee नाम के इस वीडियो में महिलाओं के लिए भारत को सबसे खतरनाक देश घोषित कर दिया जाता है। किस आधार पर? कोई सर्वे हुआ? नहीं। तो किसने तय किया? बड़े-बड़े लोगों ने कहा, इसलिए खतरनाक है तो है।

अब वापस आते हैं शुरुआती सवाल पर। अगर 2-4 हिंदू या मुस्लिम अपराधियों के कारण सभी हिंदुओं या मुस्लिमों को अपराधी नहीं कहने का तर्क ध्रुव राठी लव जिहाद को नकारने में गढ़ता है तो वही तर्क दलितों के साथ छुआछूत पर गायब क्यों हो जाता है? गौमूत्र का प्रयोग हिंदू घृणा के लिए जिस संदर्भ में आतंकी तक करते हैं, उसी भाषा में अपने मूत्र से उसकी तुलना करना क्या कहलाएगा? देश में रहने वाली लगभग 70 करोड़ महिलाओं में से एक से भी बिना पूछे भारत को सबसे खतरनाक देश घोषित करना किसके गोद में बैठ कर अंधभक्ति करना कहलाएगा?

जिस दिन ध्रुव राठी ने लव जिहाद को खारिज करता वीडियो बनाया, उसके 72 घंटे के भीतर ही 3 लव जिहाद की खबरें मीडिया में आ चुकी हैं। तो क्या जिस दिन तक लव जिहाद की आँच हर हिंदू के घर तक नहीं पहुँचे, उस दिन तक ध्रुव राठी के अनुसार इस भयावह सच्चाई से आँखें फेर ली जाए? लव जिहाद की शिकार बहन-बेटियों के दुखों को खारिज करना किस मजहब या इको-सिस्टम की अंधभक्ति करना है, इसका जवाब कोई रॉकेट साइंस नहीं है… सबको पता है। सबको पता है कि ध्रुव राठी किसकी गोद में बैठा है।

संस्कार है हिंदू विवाह, नाच-गान का मजमा नहीं, इसलिए केवल रजिस्ट्रेशन से नहीं बनेगी बात: सुप्रीम कोर्ट, जानिए क्या है सप्तपदी का विधान जो है अनिवार्य

सुप्रीम कोर्ट ने हिंदुओं की शादी को लेकर अहम फैसला सुनाया और कहा कि हिंदुओं की शादी बिना ‘सप्तपदी’ के मान्य नहीं है। मैरिज सर्टिफिकेट होने से शादी नहीं मानी जा सकती, जब तक सात फेरों के प्रमाण न हों। सुप्रीम कोर्ट ने साफ कहा कि हिंदुओं की शादी में ‘सप्तपदी’ यानी ‘अग्नि के समक्ष सात फेरों का होना’ सबसे महत्वपूर्ण है। सुप्रीम कोर्ट ने कहा है कि हिंदुओं का विवाह एक पवित्र बंधन है, ये सिर्फ खाने-पीने और नाच-गान का मौका भर नहीं। इससे पहले, इलाहाबाद हाई कोर्ट ने कहा था कि हिंदुओं की शादी में ‘सप्तपदी’ अनिवार्य है, कन्यादान कोई अनिवार्य रस्म नहीं है।

लाइव लॉ की रिपोर्ट के मुताबिक, सुप्रीम कोर्ट में जस्टिस बीवी नागरत्ना और ऑगस्टाइन जॉर्ज मसीह की बेंच ने एक अहम फैसला दिया है। सुप्रीम कोर्ट ने हिंदू मैरिज एक्ट 1955 के आधार पर एक ऐसी शादी को रद्द कर दिया है, जिसमें मैरिज सर्टिफिकेट पर पति-पत्नी के हस्ताक्षर तो थे, लेकिन दोनों के बीच विवाह की कोई रस्म नहीं हुई थी। दोनों की शादी का रजिस्ट्रेशन घर वालों ने ‘किसी वजह से’ करा दिया था, लेकिन अब उस कपल ने सुप्रीम कोर्ट से शादी को रद्द करने की गुहार लगाई थी।

सुप्रीम कोर्ट ने अपने फैसले कहा कि इस शादी में मैरिज सर्टिफिकेट तो बन गया है, क्योंकि उसके लिए अपील की गई थी, लेकिन शादी की प्रक्रिया ही नहीं पूरी की गई, ऐसे में इस शादी का कोई आधार ही नहीं है। सुप्रीम कोर्ट ने मैरिज सर्टिफिकेट को खारिज करते हुए दोनों की शादी को रद्द कर दिया।

सुप्रीम कोर्ट ने अपने फैसले में कहा, “जहाँ हिंदू विवाह सप्तपदी जैसे तय संस्कारों के साथ नहीं हुआ है, वो विवाह माना ही नहीं जाएगा। इसे ऐसे समझें कि वैध विवाह के लिए हिंदू विवाह में होने वाले सभी समारोहों को निभाया जाना जरूरी है। जिसमें सात फेरे की प्रक्रिया भी शामिल है। अगर कोई विवाद होता है, तो उसके निपटारे के लिए सात फेरों की प्रक्रिया का सबूत भी होना चाहिए। अगर किसी ने बिना सात फेरों के विवाह किया है, तो वो हिंदू मैरिज एक्ट के सेक्शन 7 के अनुसार हिंदू विवाह नहीं माना जा सकता। इन कार्यक्रों (वैवाहिक कार्यक्रमों) के बिना सिर्फ मैरिज सर्टिफिकेट बनवा लेना न तो शादी का सबूत है और न ही हिंदू मैरिज एक्ट के तहत वो शादी मान्य है, जिसका सर्टिफिकेट तो है, लेकिन सात फेरे जैसी अनिवार्य रस्में नहीं हुई।”

सुप्रीम कोर्ट ने आगे कहा, “अगर सात फेरों का कोई सबूत नहीं है, तो सेक्शन 8 के तहत मैरिज रजिस्ट्रेशन ऑफिसर ऐसी शादियों को पंजीकृत नहीं कर सकता। यानी मैरिज सर्टिफिकेट जारी नहीं कर सकता। मैरिज सर्टिफिकेट सिर्फ विवाह हो गया है, इसका सर्टिफिकेट है, लेकिन विवाह हुआ है, इसका सबूत देना अनिवार्य होगा।” अन्य शब्दों में कहें, तो मैरिज सर्टिफिकेट विवाह होने पर मुहर है, अगर सात फेरों की प्रक्रिया पूरी की गई हो। उसके बिना मैरिज सर्टिफिकेट का भी कोई वजूद नहीं होगा।

कन्यादान अनिवार्य नहीं, सात फेरों की अनिवार्यता

इससे पहले, 22 मार्च 2024 को उत्तर प्रदेश के इलाहाबाद हाई कोर्ट ने एक महत्वपूर्ण फैसला सुनाया था और कहा था कि कन्यादान हिंदू विवाह के लिए एक अनिवार्य रस्म नहीं है। कोर्ट ने कहा कि हिंदू विवाह अधिनियम, 1955 में केवल सात फेरे को हिंदू विवाह के लिए अनिवार्य रस्म माना गया है। कन्यादान का उल्लेख अधिनियम में नहीं है। इलाहाबाद हाई कोर्ट के जस्टिस सुभाष विद्यार्थी ने कहा था कि हिंदू विवाह अधिनियम, 1955 के अनुसार, ‘सात फेरे’ को विवाह की एकमात्र अनिवार्य रस्म माना गया है। ‘कन्यादान’ एक सांस्कृतिक रस्म है जिसमें पिता अपनी बेटी को दूल्हे को सौंपता है। यह रस्म पितृत्व से स्त्रीत्व की यात्रा का प्रतीक है। हाई कोर्ट ने कहा कि ‘कन्यादान’ एक महत्वपूर्ण रस्म हो सकती है, लेकिन यह विवाह की वैधता के लिए आवश्यक नहीं है।

बिना सात फेरों के विवाह ही पूर्ण नहीं

इससे पहले, पिछले साल अक्टूबर में इलाहाबाद हाई कोर्ट ने एक अन्य फैसले में कहा था कि सप्तपदी के बिना हिंदुओं में शादी मान्य नहीं है। ये हिंदुओं के विवाह की सबसे महत्वपूर्ण शर्त है। इलाहाबाद हाईकोर्ट ने 3 अक्टूबर 2023 को ये फैसला सुनाया। हाईकोर्ट ने कहा कि अगर शादी में सारी प्रक्रिया पूरी कर दी जाए और अग्नि के फेरे ना लिए जाएँ तो वह विवाह संपन्न नहीं माना जाएगा। हाईकोर्ट ने हिंदू विवाह अधिनियम, 1955 की धारा 7 का हवाला दिया, जिसमें कहा गया है कि एक हिंदू विवाह को तभी वैध माना जाएगा यदि वह ‘शादी के सभी रीति-रिवाजों के साथ’ संपन्न हुआ हो।

सप्तपदी के बारे में जानें

सप्तपदी हिंदू विवाह की एक महत्वपूर्ण रस्म है। यह अग्नि के चारों ओर सात चक्कर लगाने की प्रक्रिया है। इन सात चक्करों को सात वचनों का प्रतीक माना जाता है जो वर-वधू एक-दूसरे को देते हैं।

सप्तपदी की प्रक्रिया

वर और वधू को अग्नि के सामने खड़ा किया जाता है।
वर वधू के दाहिने हाथ को अपने बाएँ हाथ में पकड़ता है।
वर-वधू एक-दूसरे के सामने खड़े होकर सात चक्कर लगाते हैं।
प्रत्येक चक्कर के दौरान, वर-वधू एक-दूसरे को एक वचन देते हैं।
सातवें चक्कर के बाद, वर-वधू अग्नि के चारों ओर एक साथ खड़े होते हैं।

सात वचन इस प्रकार हैं:

पहला वचन: मैं तुम्हें अपना पति/पत्नी मानता/मानती हूँ।
दूसरा वचन: मैं तुम्हें अपना जीवनसाथी मानता/मानती हूँ।
तीसरा वचन: मैं तुम्हारी खुशी के लिए जीने का वादा करता/करती हूँ।
चौथा वचन: मैं तुम्हारी इच्छाओं का सम्मान करने का वादा करता/करती हूँ।
पाँचवाँ वचन: मैं तुम्हारी रक्षा करने का वादा करता/करती हूँ।
छठा वचन: मैं तुम्हें अपना जीवन भर प्यार करने का वादा करता/करती हूँ।
सातवाँ वचन: मैं तुम्हारे साथ बुरे और अच्छे समय में रहने का वादा करता/करती हूँ।

सप्तपदी हिंदू विवाह की एक महत्वपूर्ण रस्म है। यह एक ऐसा अनुष्ठान है जो वर-वधू को एक-दूसरे के प्रति अपने वचनों को दोहराने का अवसर देता है। यह एक ऐसा क्षण है जब वे अपने जीवन को एक साथ बिताने के लिए प्रतिबद्ध होते हैं।

‘आदिवासी होने के कारण राष्ट्रपति को राम मंदिर में नहीं बुलाया’: राहुल गाँधी के झूठ को ट्रस्ट ने बताया आपत्तिजनक, कहा- कॉन्ग्रेस नेता की बातें निराधार

गुजरात के गाँधीनगर में राहुल गाँधी ने भाषण देते हुए दावा किया था कि राम मंदिर की प्राण प्रतिष्ठा कार्यक्रम में देश के राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू को नहीं बुलाया गया क्योंकि वो जनजातीय (आदिवासी) समाज से आती हैं। राहुल गाँधी के इस भाषण के बारे में टाइम्स ऑफ इंडिया से पता चलने के बाद अब ‘श्री राम जन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र’ के महासचिव चंपत राय ने बयान जारी करके राहुल गाँधी के दावे को भ्रामक और निराधार बताया है।

उन्होंने वीडियो जारी करते हुए कहा कि राम मंदिर तीर्थ क्षेत्र का महामंत्री होने के नाते उन्हें राहुल गाँधी के भाषण से गंभीर आपत्ति है। उन्होंने कहा कि राहुल गाँधी की कही बातें नितांत असत्य हैं, निराधार हैं और भ्रामक हैं। वह बोले, “हम राहुल गाँधी को बताना चाहते हैं कि देश की वर्तमान राष्ट्रपति श्रीमती द्रौपदी मुर्मू और पूर्व राष्ट्रपति रामनाथ कोविंद, दोनों को अयोध्या में हुए कार्यक्रम में पधारने के लिए निमंत्रण दिया गया था।”

चंपत राय ने आगे कहा, “हम राहुल गाँधी को ये भी बता देना चाहते हैं कि अनुसूचित जाति, अनुसूचित जनजाति एवं अन्य पिछड़े वर्ग और अत्यधिक गरीब समाज के तमाम लोगों को आमंत्रित किया गया था और वे पधारे भी थे। संत-महापुरुष, समाज जीवन में यश प्राप्त करने वाले और समाज जीवन में भारत का नाम बढ़ाने वाले परिवारों एवं गणमान्य व्यक्तियों को भी आमंत्रित किया गया था। इसके अलावा अल्पसंख्यक समुदाय के लोग भी कार्यक्रम में आए थे।”

चंपत राय ने जानकारी दी कि कार्यक्रम के दौरान मंदिर निर्माण करने वाले श्रमिक भी प्राण प्रतिष्ठा समारोह में मौजूद थे। प्राण प्रतिष्ठा अनुष्ठान के दौरान भी, अनुसूचित जाति, अनुसूचित जनजाति और अन्य पिछड़ी जातियों के कई परिवारों को श्री राम जन्मभूमि मंदिर के ‘शुभ मंडप’ में पूजा करने का अवसर दिया गया था।”

यह तस्वीर उस समय की है जब मंदिर निर्माण समिति के अध्यक्ष ने प्राण-प्रतिष्ठा का निमंत्रण राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू को दिया

उन्होंने कहा कि भगवान राम ने अपने जीवन में किसी के साथ भेदभाव नहीं किया, तो राम जन्म भूमि निर्माण में लगा हुआ ट्रस्ट भी किसी के साथ भेदभाव करने का विचार नहीं रख सकता। इस ट्रस्ट में 6 संत महात्मा भी हैं, जो सब समाज को भगवान का ही रूप मानकर व्यवहार करते हैं। चंपत राय यह भी बोले कि राहुल गाँधी ने तथ्यों की जाँच के बिना यह आरोप लगाए हैं। प्राण प्रतिष्ठा के तीन महीने बाद ऐसी बात करना समाज में भेदभाव पैदा करने का प्रयास है सिद्ध हो सकता है। इसलिए ट्रस्ट इस पर गंभीर आपत्ति व्यक्त करता है। हमारा काम समाज को जोड़ना है।

उल्लेखनीय है कि इससे पहले भी कई बार राहुल गाँधी और कॉन्ग्रेस के नेता राम मंदिर को लेकर ऐसा विवाद खड़ा कर चुके हैं जहाँ कहा जाता है कि ये कार्यक्रम भाजपा का राजनैतिक कार्यक्रम था और इसमें नरेंद्र मोदी के खास लोग ही बुलाए गए थे। हकीकत जबकि यह है कि निमंत्रण देने का काम मंदिर के ट्रस्ट ने किया और इस कार्यक्रम में सभी समाज के लोग भी आए थे।

इंदौर में मटन दुकानदार कामरान ने गौतम के सिर पर लोहे के रॉड से कर दिया वार, सिर फटने के बाद हो गई मौत: बंटी भी जख्मी, बुलडोजर एक्शन की माँग

मध्य प्रदेश के इंदौर में कामरान अकरम खान ने रविवार (28 अप्रैल 2024) को गौतम सोलंकी नाम के एक हिन्दू युवक की हत्या कर दी है। मटन की दुकान चलाने वाले कामरान ने गौतम की हत्या उसके सिर पर लोहे की रॉड मार कर की। इस हमले में बंटी नाम का एक अन्य युवक घायल हो गया है। प्रशासन ने आरोपित के अवैध दुकान पर बुलडोजर चलाया है। पुलिस ने कामरान को गिरफ्तार कर लिया गया है।

मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक, मामला इंदौर के देपालपुर का है। शनिवार की शाम को अहीरखेड़ी निवासी 21 साल के गौतम मधुसूदन सोलंकी अपने साथी बंटी के साथ बाजार गए थे। मिर्जापुर यशवंत सागर के पास कामरान ने सुपर मटन शॉप नाम से दुकान खोल रखी है। यहाँ किसी बात पर कामरान का गौतम से झगड़ा हो गया। इसी दौरान कामरान ने लोहे की रॉड उठाई और गौतम के सिर पर मार दिया।

गौतम के साथ मौजूद बंटी ने अपने साथी को बचाने की कोशिश की तो कामरान ने रॉड से उन पर भी हमला कर दिया। इस हमले में बंटी भी घायल हो गए। मामले की जानकारी मिलते ही गौतम के परिजन घटनास्थल पर पहुँचे। परिजनों को देखकर कामरान भाग निकला। इसके बाद गौतम के परिजनों ने एम्बुलेंस मँगाकर दोनों घायलों को सरकारी अस्पताल में भर्ती करवाया।

दोनों की हालत खराब होने पर उन्हें इंदौर के अरविंदो हॉस्पिटल रेफर कर दिया गया। यहाँ गौतम की मौत हो गई। वहीं, बंटी का इलाज चल रहा है। मृतक गौतम सोलंकी टेंट हाउस चलते थे। उनके परिवार के सदस्य हिन्दू संगठन से जुड़े बताए जा रहे हैं। घटना की जानकारी मिलते ही नाराज हिन्दू संगठनों ने कामरान के खिलाफ कड़ी कार्रवाई की माँग के साथ हंगामा शुरू कर दिया।

मामले की संवेदनशीलता को देखते हुए पुलिस ने कई टीमें बनाकर आरोपित कामरान की तलाश में ताबड़तोड़ दबिश दी। आखिरकार सोमवार (29 अप्रैल) को पुलिस ने कामरान को गिरफ्तार कर लिया। इधर प्रशासन ने उसकी दुकान की जाँच की तो वह अवैध निकला। इसके बाद उस पर बुलडोजर चला दिया गया। हिंदू संगठनों ने आरोपित के घर पर भी बुलडोजर चलाने की माँग की है।

प्रदर्शनकारियों ने कामरान के घर पर भी बुलडोजर चलाने के लिए 3 दिनों का अल्टीमेटम दिया है। इसके साथ ही आरोपित कामरान के लिए फाँसी की सजा की माँग की है। मृतक के परिजनों के आरोप है कि गौतम की हत्या में कामरान अकेले नहीं था, बल्कि उसके साथ 3-4 अन्य लोग भी थे, जो सभी मुस्लिम वर्ग से हैं। उनका कहना है कि अगर तय समय सीमा में कार्रवाई नहीं हुई तो आंदोलन और उग्र होगा।

हिजाब का विरोध करने पर शरिया पुलिस ने 16 साल की लड़की को गिरफ्तार किया, टॉर्चर कर-कर के मार डाला: आत्महत्या नहीं, नीका शरकामी की हुई थी हत्या

ईरान में 2022 के हिजाब विरोधी प्रदर्शनों के दौरान एक 16 साल की किशोरी नीका शरकामी का शव मिला था। ईरान की पुलिस ने दावा किया था कि उसने आत्महत्या की थी, लेकिन अब खुलासा हुआ है कि नीका शरकामी ने आत्महत्या नहीं की थी, बल्कि ईरान की शरिया पुलिस ने उसकी हत्या की थी। हत्या से पहले नीका का उत्पीड़न भी हुआ था।

बीबीसी ने ईरान के रिवोल्यूशनरी गार्ड के टॉप कमांडर को भेजी गई रिपोर्ट के आधार पर ये खुलासा किया है। रिपोर्ट के मुताबिक, तीन पुलिस वालों ने 2022 में ईरान में विरोध प्रदर्शन के दौरान 16 साल की नीका को गिरफ्तार किया और फिर वैन की पिछली सीट पर उसका उत्पीड़न किया था। यही नहीं, पुलिसवालों ने उसे इतना पीटा कि उसकी मौत हो गई। ईरान के रिवोल्यूशनरी गार्ड के कमांडर-इन चीफ को भेजे गए सीक्रेट रिपोर्ट में इस बात का ब्यौरा दर्ज है।

रिपोर्ट के मुताबिक, आरोपित पुलिसवालों के साथ एक सीनियर अधिकारी भी था, तो वैन में आगे की सीट पर बैठा था। तीनों पुलिस वालों ने लड़की को हथकड़ी लगातर वैन में डाल दिया था।

जानकारी के मुताबिक, ये घटना 20 सितंबर 2022 की है, जब ईरान की राजधानी तेहरान में सरकार विरोधी प्रदर्शन हो रहे थे। वहाँ लालेह पार्क के पास आयोजित विरोध-प्रदर्शन में महिलाओं और युवतियों ने हिजाब जलाए थे। उस घटना के वीडियो में नीका भी दिखी थी और हिजाब के ढेर को आग के हवाले करने वालों में वो सबसे आगे थी।

हालाँकि उसके बाद वो लापता हो गई थी और घटना के 9 दिन बाद नीका का शव मिला था। सरकार ने दावा किया था कि उसने आत्महत्या की है। इस दावे की पुष्टि के लिए एक बिल्डिंग में जाते हुए उनका सीसीटीवी फुटेज बी जारी किया गया था। हालाँकि नीका की माँ ने पुलिस के दावे को खारिज कर दिया था। अब बीबीसी की रिपोर्ट में भी इस बात की पुष्टि हो गई है।

बता दें कि ईरान में इस्लामिक कानूनों को लागू कराने की जिम्मेदारी एक स्पेशल फोर्स पर है। महिषा अमीनी की हत्या के बाद ईरान में सरकार और हिजाब विरोधी प्रदर्शन तेजी से फैल गए थे। उन विरोध प्रदर्शनों को कुचलने के लिए ईरानी सरकार ने काफी ताकत का इस्तेमाल किया था। कई लोगों को इस दौरान गिरफ्तार किया गया और सरकार विरोधी काम करने के आरोपों में मौत की भी सजा दी गई है। हालाँकि नीका के पास अपील करने का भी समय नहीं मिला, क्योंकि ईरानी पुलिस वालों ने उनका उत्पीड़न किया और फिर उनकी हत्या कर दी।

T20 क्रिकेट विश्वकप के लिए भारतीय टीम घोषित: फिनिशर और मजबूत मिडिल ऑर्डर के बिना जीतेंगे कप? इस टीम से आपको कितनी उम्मीदें?

वेस्टइंडीज और अमेरिका में जून महीने में होने जा रहे T20 वर्ल्ड कप के लिए भारतीय टीम की घोषणा कर दी है। बीसीसीआई ने रोहित शर्मा की अगुवाई में 15 सदस्यीय टीम की घोषणा की है, जिसकी उप-कप्तानी की जिम्मेदारी हार्दिक पांड्या को दी गई है। इस टीम में युजवेंद्र चहल की काफी समय बाद वापसी हुई है, वो पिछली बार के विश्व कप में टीम का हिस्सा नहीं थे। वहीं, इस टीम में रिंकू सिंह जैसे फिनिशर को 15 खिलाड़ियों की जगह स्टैंडबाई में रखा गया है।

अजित अगरकर की अगुवाई वाली बीसीसीआई की चयन समिति ने भारतीय टीम की घोषणा की है। इस टीम में 5 बल्लेबाजों को जगह दी गई, जिसमें कप्तान रोहित शर्मा, विराट कोहली, यशस्वी जायसवाल, सूर्यकुमार यादव और शिवम दुबे हैं। इसमें से यशस्वी जायसवाल और शिवम दुबे 2021 की वर्ल्ड कप टीम में नहीं थी, जिसमें भारतीय टीम पहले ही दौर में बाहर हो गई थी।

विकेटकीपर के तौर पर भारतीय टीम में 2 चेहरों को जगह दी गई है। ऋषभ पंत और संजू सैमसन। इसमें से संजू सैमसन और ऋषभ पंत दोनों ने ही खुद को साबित किया है, लेकिन ऋषभ पंत लंबे समय बाद टीम में वापसी कर रहे हैं। उन्हें सीधे-सीधे आईपीएल 2024 में बेहतर प्रदर्शन का ईनाम मिला है। वहीं, संजू सैमसन लगातार बेहतरीन प्रदर्शन कर रहे हैं। आईपीएल 2024 में उन्होंने न सिर्फ बल्ले से, बल्कि विकेट के पीछे भी शानदार प्रदर्शन किया है। उन्होंने कप्तानी की जिम्मेदारी भी बाखूबी संभाली है।

आल राउंडर के तौर पर भारतीय टीम में रविंद्र जडेजा और अक्षर पटेल के साथ हार्दिक पांड्या को मौका मिला है। हार्दिक पांड्या इस समय आईपीएल में बेहद बुरे दौर से गुजर रहे हैं। न ही उनके बल्ले से रन बन पा रहे हैं और न ही गेदबाजी में वो कोई कमाल नहीं कर पा रहे हैं। वहीं, रविंद्र जडेजा और अक्षर पटेल टीम को लोवर मिडिल ऑर्डर में मजबूती देते हैं। हार्दिक पांड्या अगर एक-दो मैच में नहीं चले, तो शिवम दुबे की काम चलाऊ मध्यम गति की गेदबाजी का भी इस्तेमाल किया जा सकता है। चूँकि वेस्टइंडीज और अमेरिका में पिचे धीमी रहने वाली हैं, ऐसे में शिवम दुबे भी काम आ सकते हैं। हालाँकि आईपीएल में उन्होंने गेदबाजी नहीं की है, लेकिन उन्होंने सैयद मुश्ताक अली ट्रॉफी में थोड़े मैचों में गेंदबाजी कर विकेट भी निकाले थे।

स्पिनर के तौर पर टीम में कुल्चा की जोड़ी की वापसी हुई है। चहल लगातार लंबे समय से टीम से बाहर चल रहे थे, लेकिन आईपीएल में उन्होंने खुद को साबित किया है। चहल अब भी भारतीय टीम के लिए सबसे ज्यादा विकेट लेने वाले गेंदबाज हैं, तो आईपीएल में भी वो वही हैसियत रखते हैं। इनका साथ देने के लिए अक्षर पटेल और रविंद्र जडेजा की स्पिन है ही।

तेज गेंदबाजी की बात करें तो भारतीय टीम के पास जसप्रीत बुमराह निर्विवादित रूप से नंबर वन गेंदबाज है। वो दुनिया की किसी भी टीम में पहली पसंद के तौर पर शामिल होने की काबिलियत रखते हैं। आईपीएल 2024 में भी उनका दम दिखा है। लेकिन उनका साथ देने के लिए मोहम्मद सिराज और अर्शदीप सिंह को चुना गया है। जो एक नजर में कमजोर जोड़ी लग सकती है, लेकिन बुमराह के साथ दूसरे छोर पर लेफ्ट आर्म पेसर के तौर पर अर्शदीप फायदा उठा सकते हैं। वहीं, सिराज को टीम में शामिल किया है, जिन्होंने इंटरनेशनल क्रिकेट में बेहतरीन प्रदर्शन किया है, ये अलग बात है कि अर्शदीप और सिराज दोनों ही आईपीएल 2024 में अपनी चमक नहीं दिखा सके हैं।

रिंकू सिंह बाहर क्यों?

रिंकू सिंह भारतीय टीम के लिए फिनिशर की भूमिका निभाते रहे हैं। उन्होंने भारतीय टीम के लिए 89 की औसत और 170 से ज्यादा की स्ट्राइक रेट से रन भी बनाए हैं, लेकिन इस आईपीएल में उन्हें पूरा मौका ही नहीं मिल पाया और जब मौका मिला तो वो चल नहीं पाए। ऐसे में आईपीएल 2024 की विफलता भी उनके आड़े आ गई लगती है। हालाँकि उन्हें रिजर्व में रखा गया है, तो हो सकता है देर-सबेर उन्हें मौका ही मिल ही जाए।

शुबमन गिल भी रिजर्व

भारतीय टीम में जगह बनाने के लिए शुबमन गिल भी अच्छी प्रतिस्पर्धा कर रहे थे, लेकिन रोहित शर्मा के साथ टॉप ऑर्डर में लेफ्टी बैट्समैन की जरूरत को देखते हुए उन्हें वरीयता मिली है, फिर उनका बल्ला भले ही शुरुआती मैचों में खामोश रहा हो, लेकिन वो लय में आ चुके हैं। वहीं, भारतीय टीम के टॉप ऑर्डर में दाहिने हाथ के बल्लेबाजों की भरमार की वजह से भी शुबमन गिल का पत्ता कटा है। चूँकि जरूरत पड़ने पर संजू सैमसन भी ओपनिंग कर सकते हैं, ऐसे में शुबमन गिल के पास मौके कम हैं।

ऋतुराज बाहर क्यों?

शुबमन गिल जैसी बात ऋतुराज के भी खिलाफ गई लगती है। भले ही उन्होंने इस सीजन में जमकर रन बनाए हों, लेकिन स्ट्राइक रेट के मामले में वो थोड़ा पीछे रह गए। साथ ही टॉप ऑर्डर के बल्लेबाजों की भरमार भी उनके खिलाफ गई। बाकी बल्लेबाजों की बात करें तो जितेश शर्मा इस आईपीएल में फॉर्म में नहीं दिखे हैं।

शिवम दुबे एक्स फैक्टर?

इस टीम में एक्स फैक्टर के तौर पर शिवम दुबे हैं। वो मिडिल ओवरों में भारतीय टीम के लिए ताबड़तोड़ रन बना सकते हैं। स्पिनर्स के खिलाफ उनका खेल शानदार रहता है और इस आईपीएल में उन्होंने दिखाया है कि तेज गेदबाजों के खिलाफ भी काफी प्रभावी हैं। उनके साथ मिडिल ऑर्डर में किसे मौका मिलेगा, ये देखने वाली बात होगी। दरअसल, वेस्ट इंडीज और अमेरिका के छोटे मैदानों में शिवम दुबे की हिटिंग पर टीम की सफलता काफी हद तक निर्भर करेगी।

दूसरा एक्स फैक्टर मिस?

इस भारतीय टीम को देखकर लगता है कि इसमें कोई चौंकाने वाला नाम नहीं है। लोग उम्मीद कर रहे थे कि रॉ-पेस के नाम पर मयंक यादव को टीम में मिला जा सकता है, लेकिन अमेरिका और वेस्टइंडीज के छोटे मैदानों को देखते हुए कोई रिस्क नहीं लिया गया। फिर मयंक बीच में चोटिल भी चल रहे थे। ऐसे में उन्हें टीम में शामिल करना एक जुआँ ही हो सकता था। बैटिंग में सूर्या, शिवम दुबे, यशस्वी जैसे बिग हिटर मौजूद हैं, तो रोहित शर्मा और विराट कोहली अपनी भूमिका के बारे में फिर से सोच सकते हैं। हालाँकि विराट कोहली प्रचंड फॉर्म में चल रहे हैं, ऐसे में वो टीम इंडिया की नैय्या पार लगाने का दम खम रखते हैं।

बहरहाल, मिडिल ऑर्डर में कौन खेलेगा, किसका क्रम ऊपर-नीचे होगा, ये भी देखने वाली बात होगी। क्योंकि ओपनर के तौर पर रोहित शर्मा और यशस्वी यादव का नाम तय है, तो तीसरे नंबर पर विराट कोहली और चौथे पर सूर्यकुमार यादव। शिवम दुबे चौथे से पाँचवें होते हैं तो छठें नंबर पर कौन खेलेगा? चूँकि शिवम सीएसके के लिए चौथे नंबर पर खेल रहे हैं, तो रविंद्र जडेजा भी ये काम करते रहे हैं, वहीं संजू सैमसन टॉप ऑर्डर में बैटिंग करते हैं। मीडिल ऑर्डर की माथापच्ची रोहित शर्मा के लिए बड़ा सिरदर्द भी साबित हो सकती है।

भारतीय टीम इस प्रकार है: रोहित शर्मा (कप्तान), हार्दिक पांड्या (उप कप्तान), यशस्वी जायसवाल, विराट कोहली, सूर्यकुमार यादव, ऋषभ पंत, संजू सैमसन, शिवम दुबे, रविंद्र जडेजा, अक्षर पटेल, कुलदीप यादव, युजवेंद्र चहल, अर्शदीप सिंह, जसप्रीत बुमराह और मोहम्मद सिराज।

रिजर्व खिलाड़ी : शुबमन गिल, रिंकू सिंह, खलील अहमद और आवेश खान।

इस टीम से आपको कितनी उम्मीदें हैं, हमें जरूर बताएँ।

नैनीताल के सेंट थरेसा चर्च में पक रहा था प्रतिबंधित मांस, हिंदू संगठनों ने किया जमकर विरोध: धर्मांतरण का रैकेट चलाने का भी लगाया आरोप

उत्तराखंड के नैनीताल जिले में एक चर्च के अंदर प्रतिबंधित मांस बनाने का आरोप लगाकर हिन्दू संगठनों ने रविवार (28 अप्रैल 2024) को हंगामा किया है। चर्च का नाम सेंट थेरेजा है। इसमें एक स्कूल भी चलता है। मामले की सूचना पर पुलिस और पशुपालन विभाग मौके पर पहुँचे। चर्च में मिले मांस के सैम्पल लेकर जाँच के लिए प्रयोगशाला भेज दिया है। हिन्दू संगठनों ने यहाँ धर्मान्तरण का भी दावा किया है।

मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक, घटना थाना क्षेत्र काठगोदाम की है। यहाँ के नैनीताल रोड पर सेंट थरेजा चर्च है। इस चर्च में एक स्कूल भी चलता है, जिसमें आसपास के कई छात्र पढ़ते हैं। रविवार की दोपहर अचानक ही यहाँ हिन्दू संगठनों का जमावड़ा होना शुरू हो गया। वो चर्च के अंदर प्रतिबंधित मांस पकाने का आरोप लगाने लगे। मामले की सूचना पुलिस को मिली तो वो फ़ौरन ही मौके पर पहुँची।

पुलिस ने हिन्दू संगठनों को समझा कर शांत किया। इस मामले में तत्काल पशुपालन विभाग के अधिकारी और फ़ूड इंस्पेक्टर बुलवाए गए। पशुपालन विभाग के अधिकारियों ने चर्च के अंदर जाकर मिले पदार्थ के सैम्पल लिए। इन सैम्पलों को पुलिस की मौजूदगी में सील करके प्रयोगशाला भेजा गया है। बताया जा रहा है कि इनकी जाँच ऋषिकेश के लैब में होगी, जिसके रिपोर्ट कुछ दिनों बाद आएगी।

सैम्पल ले रहे अधिकारियों ने मीडिया में बयान देने से मना करते हुए सैम्पलों की जाँच रिपोर्ट आने तक प्रतीक्षा करने को कहा है। चर्च के मैनेजमेंट ने भी खुद पर हिन्दू संगठनों द्वारा लगाए गए आरोपों को बेबुनियाद बताया है। एहतियातन चर्च के पास सुरक्षा कड़ी कर दी गई है। हल्द्वानी के हिन्दू संगठन पदाधिकारी जोगिंदर उर्फ़ जोगी ने कहा कि प्रतिबंधित मांस पकने की सूचना उन्हें मिली थी।

जोगिंदर ने एलान किया कि अगर सैम्पल में मांस गोवंश का निकलेगा तो हिन्दू संगठन चर्च को खुलने नहीं देंगे। उन्होंने बताया कि घटना के दिन चर्च में कई लोगों की मौजूदगी थी, जो हिन्दू संगठन के कार्यकर्ताओं को देखकर निकल गए। जोगिंदर का आरोप है कि चर्च से धर्मान्तरण की भी गतिविधियाँ संचालित होती हैं। उन्होंने प्रशासन से भी कड़ी कार्रवाई की उम्मीद जताई है।