इन जवानों ने तालिबान के सामने आत्म-समर्पण कर दिया था और वो निहत्थे थे, लेकिन आतंकियों ने उनकी एक न सुनी। उन्होंने 'अल्लाहु अकबर' का नारा लगाते हुए सभी को मार डाला।
उन्होंने मिशनरियों को भेजी गई अपनी रिपोर्ट में आगे लिखा कि जिनका आप धर्मांतरण कराते हैं उनका राष्ट्रांतरण हो जाता है। ये लोग पादरियों को परेशान नहीं करते हैं। संघ विध्वंसक काम नहीं करता है।
'इस हरम में टीपू सुल्तान और उसके अब्बा की 600 महिलाएँ थीं, जिनकी रखवाली के लिए नपुंसकों को लगाया गया था। इनमें कई ब्राह्मणों और राजाओं की बेटियाँ थी, जिन्हें उनके अभिभावकों के सामने ही बलपूर्वक उठाया गया था।'