डेढ़ साल की थीं भाषा सुंबली जब अपनी माँ की गोद में रहते हुए उन्हें कश्मीर घाटी छोड़ने पर मजबूर होना पड़ा। 19 जनवरी 1990 की उस भयावह रात को अब 31 साल बीत गए हैं।
यह बाइबिल बाइडेन के पिता की ओर से है। जोकि 1893 से उनके परिवार के पास है। उन्होंने अपने सभी सात शपथ ग्रहण समारोहों के लिए एक ही बाइबिल का उपयोग किया है।
"जो लिब्रु डर के मारे मम्मी की गोद में रो रहे हैं। वो ये पढ़ लें कि मैंने तुम्हारा सिर काटने के लिए नहीं कहा। इतना तो मैं भी जानती हूँ कि कीड़े मकोड़ों के लिए कीटनाशक आता है।"
आरती टिकू सिंह ने अपनी आँखों से कश्मीरी पंडितों के पलायन का खौफनाक मंजर देखा है। उनसे ही सुनिए उनके अनुभव। जानिए कैसे मीडिया ने पीड़ितों को ही विलेन बना दिया।
861 मिसाइल रेजिमेंट, राजपथ पर इस वर्ष गणतंत्र दिवस समारोह के दौरान ब्रह्मोस मिसाइल का प्रदर्शन करेगी। रेजिमेंट का 'वॉर क्राई' हो- स्वामीये शरणम् अय्यप्पा