"मेरे पास नौकरी नहीं है, शायद मिलेगी भी नहीं। कोई भी किसी लूजर को नौकरी नहीं देता। अपनी ग्रेड शीट देखकर हैरान हूँ। हर किसी की तरह मेरे भी सपने थे। लेकिन अब सब खत्म है। ये सारी पॉजिटिव बातें, हमेशा मुस्कुराना, लोगों से कहना कि मैं ठीक हूँ, जबकि मैं ठीक नहीं हूँ।"
जब नबी ने शोएब को गले लगाने की कोशिश की, तो शोएब ने नबी की बुरी साँसों के कारण उसे धक्का दे दिया। यह बात नबी के दिल पर लग गई। फिर क्या था, नबी ने शोएब को गाली देना शुरू कर दिया जिसके कारण दोनों के बीच झगड़ा होने लगा जो रुकने का नाम ही नहीं ले रहा था। टकराव बढ़ने पर नबी ने चाकू निकाला और सीधा शोएब के पेट में घोंप दिया।
अभिनेता शिवाजी और TV9 के तत्कालीन सीईओ रवि प्रकाश धोखाधड़ी के इस मामले में मुख्य साज़िशकर्ता हैं और उन पर आरोप है कि दोनों ने फ़र्ज़ी काग़ज़ातों के आधार पर TV9 के 40,000 शेयर्स पर कब्ज़ा कर लिया।
इतनी बड़ी संख्या में अधिकारियों पर कार्रवाई करने के बावजूद अभी 100 से भी अधिक ऐसे अधिकारी हैं, जिन पर सरकार की नज़र है। इन सुस्त अधिकारियों को सरकार ने अभी अपने रडार पर रखा है और इन पर कार्रवाई की गाज कभी भी गिर सकती है।
पश्चिम बंगाल में साल 2011 में जब तृणमूल सत्ता में आई उसके बाद 'कट मनी' का प्रचलन आम हो गया। यह इस तरीके से माँगा जाना शुरू हुआ कि ग्रामीणों को पता ही नहीं चला कि यह घूस है बल्कि इसे वे हाल के दिनों तक 'सरकारी दर' ही समझते रहे। उन्हें अपने ठगे जाने की बात तब समझ आई जब...
गिरफ़्तार आरोपितों में से मोहम्मद ज़ुबैर और मोहम्मद अनस में से एक ऐसा है, जो पहले भी चोरी-चकारी के आरोप में गिरफ़्तार हो चुका है। मंदिर में अब पहले की भाँति पूजा-अर्चना शुरू हो चुकी है और स्थिति धीरे-धीरे सामान्य हो रही है।
पिछले 8 वर्षों में इस योजना पर 700 करोड़ रुपए से भी अधिक राशि ख़र्च की गई थी। 2018 में भाजपा सरकार ने इस योजना के लिए 200 करोड़ रुपए का बजट आवंटित किया था। जबकि 2019 के बजट में इस योजना के बजट को 30 गुना कम कर दिया गया। सिर्फ़ 6 करोड़ रुपए ही आवंटित किए गए हैं।
ये घटना उत्तरी कश्मीर के हंदवारा स्थित वागत गाँव की है। शिक्षक ने बच्चे की इतनी पिटाई की कि वह ज़मीन पर लेट गया। इसके बाद उसने कुल्हाड़ी हाथ में लेकर उसे मारने की धमकी दी और डराया भी। अभी तक इसके पीछे के कारणों का पता नहीं चला है।
TV9 भारतवर्ष द्वारा 'कॉन्ग्रेस-वादी' पत्रकार सुप्रिया भरद्वाज की एक ऐसी रिपोर्ट शेयर की गई जिसमें दावा किया गया था कि पीएम मोदी भूतपूर्व पीएम मनमोहन सिंह से मिलने उनके निवास पर गए थे। इस रिपोर्ट में इस मीटिंग की 'एक्सक्लूसिव' रिपोर्टिंग का भी दावा किया गया था।
अब ये कातिलों से लेकर गबन के आरोपियों का बचाव केवल इस आधार पर करना चाहते हैं कि फलाना मोदी के खिलाफ बोला था, ‘एंटी-RSS’ था, तो अगर इसे जेल भेजा गया तो सरकार के खिलाफ बोलने वालों में ‘डर का माहौल’ बन जाएगा।