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होमवर्क बनाम गृहकार्य में नहीं उलझती हैं अब लड़कियाँ… वो टॉप करती हैं और हेडलाइन बनती हैं

बात सिर्फ़ उन लड़कियों तक सीमित नहीं, जिन्होंने 500 में से 499 अंक लाकर किसी लड़के को पछाड़ा है। बात उन सभी लड़कियों की, जिन्होंने सामाजिक और परिवारिक जद्दोजहद के बावजूद अकादमिक क्षेत्र में आगे बढ़ने का सपना देखा और उस सपने को पूरा करने के लिए अपना एक-एक पल झोंक दिया।

इशरत जहाँ एनकाउंटर: पूर्व पुलिस अधिकारी डीजी वंजारा को अदालत ने किया आरोप मुक्त

डीजी वंजारा इस मामले में 2007 से लेकर 2015 तक जुडिशल कस्टडी में थे। उन्हें 2015 में ज़मानत मिली थी। उन्हें अगस्त 2017 में सोहराबुद्दीन शेख एनकाउंटर मामले में भी बरी किया जा चुका है।

सर्टिफाइड ‘मौलाना’ है मसूद अजहर: आतंक का मजहब भले न हो, आतंकी का मजहब स्पष्ट है

मौलाना मसूद अज़हर कोई एक अकेला आतंकवादी नहीं है। जैश-ए-मोहम्मद आतंकी संगठन पूरी तरह से उसके परिवारवालों और परिजनों द्वारा संचालित है। इंडियन एयरलाइन्स के विमान IC-814 की हाईजैकिंग का मास्टरमाइंड मसूद का भाई इब्राहिम अज़हर था।

राबड़ी देवी ने पूछा, लीची कैसे खाते हैं… ‘चारा कहीं भी कैसे भी खा लीजिए’ परेश रावल ने लिए मजे

राबड़ी देवी ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के गैर-राजनैतिक साक्षात्कार पर तंज कसा। इसके बाद भाजपा सांसद और बॉलीवुड अभिनेता परेश रावल के साथ कई अन्य ट्विटर यूजर्स ने राबड़ी देवी और लालू यादव पर जमकर निशाना साधा।

मुश्किल में राहुल गाँधी: MHA के बाद विदेशी नागरिकता मामला अब सुप्रीम कोर्ट में, नामांकन रद्द की माँग

राहुल गाँधी की ब्रिटिश नागरिकता और उनके नाम (राउल विंची) को लेकर पहले भी विवाद उठ चुका है। गृह मंत्रालय ने बड़ा क़दम उठाते हुए राहुल गाँधी को नोटिस थमाकर उनसे अपनी विदेशी नागरिकता पर 15 दिनों के भीतर स्पष्टीकरण देने को कहा है।

₹272 करोड़ का दलाल दीपक तलवार और UPA के केंद्रीय मंत्री हैं ‘अच्छे दोस्त’: e-mail वाला सबूत ED के पास

दीपक तलवार को भारतीय कम्पनी को नुकसान पहुँचाने के लिए ₹272 करोड़ रुपए मिले थे। उसके ख़िलाफ़ ईडी, सीबीआई और आईटी विभाग जाँच कर रहा है। जाँच एजेंसी ने कहा कि उसके पास प्रफुल्ल पटेल और दीपक तलवार के बीच ईमेल से हुई बातचीत के सबूत हैं।

मेरे और सिद्दारमैया की अपील के बावजूद पार्टी कार्यकर्ताओं ने BJP को दिया वोट: JDS मंत्री

जीटी देवगौड़ा ने कहा कि उनके और सिद्दारमैया की अपील के बावजूद जेडीएस कार्यकर्ताओं ने उदपुर सीट पर भाजपा को वोट दिया। उनके अनुसार गठबंधन में देरी भी हुई और गठबंधन धर्म को ठीक से नहीं निभाया गया, इससे कार्यकर्ताओं में सही संकेत नहीं गया।

क्यों वामपंथियो, तुम्हारे कुकर्म इतने भारी हो गए कि अपने लिए वोट माँगने की हिम्मत नहीं बची?

लोगों से अपने नाम पर वोट माँगने लायक इनका मुँह ही नहीं बचा है- इनका दोहरापन दुनिया के सामने है। यह अब दूसरे को हराने की अपील तक सीमित हो गए हैं।

‘द वायर’ के हिसाब से भारतीय हिन्दू ही आतंकी हैं जिन्होंने समुदाय विशेष पर हिंसा की है! हाउ क्यूट!

मतलब, संकट मोचन मंदिर से लेकर लोकतंत्र के मंदिर संसद तक हमले में मरने वाले अधिकतर लोग हिन्दू ही होते हैं (क्योंकि जनसंख्या ज्यादा है और टार्गेट पर भी वही होते हैं) और मारने वाले हर बार कट्टरपंथी होते हैं, फिर भी असली हिंसा तो गौरक्षकों द्वारा गौतस्करों को सरेराह पीट देना है।

गढ़चिरौली को अब पुलवामा वाली प्रतिक्रिया की ज़रूरत है: निशानदेही और घेर कर वार

माओवादी कहीं ना कहीं अब ये बात जान और समझ गए हैं कि 'जल-जंगल-जमीन' का उनका नारा अब प्रासंगिक नहीं रहा है। इनके पोषक ये बात अच्छे से जानते है कि यदि अब यह 3 मुद्दे ही प्रासंगिक नहीं रहे, तो अब माओवंशी किस तरह से अपना अभियान आगे बढ़ाएँ? लोगों के बीच डर पैदा कर के ही ये आतंकवादी संगठन अब प्रासंगिक बने रहना चाहते हैं।

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