राष्ट्रीय सुरक्षा को ध्यान में रखने हुए श्री लंका सरकार ने यह कड़ा फैसला लिया है। पहले कयास लगाए जा रहे थे कि वहाँ के राष्ट्रपति ऐसा करने की अनुमति नहीं देंगे, लेकिन ऐसा नहीं हुआ।
अमर्त्य सेन को तत्कालीन यूपीए सरकार द्वारा नालंदा विश्वविद्यालय का प्रथम कुलपति नियुक्त किया गया। उन्हें पाँच लाख रुपए प्रति महीने का वेतन दिया जाता था। बेहिसाब विदेशी दौरे, सीधी नियुक्तियाँ करने का अधिकार सहित उन्हें कई अन्य सुविधाओ से नवाजा गया था।
हिंसा और सेक्स तो कामरेडों का प्रमुख हथियार है, यूनिवर्सिटी में तो जबरदस्ती करते ही हैं, बाद में, विद्यार्थी से नक्सली बनने तक, जंगलों में 'नारी देह कम्यून की प्रॉपर्टी है' के नाम पर महिला काडरों को आईसिस की तर्ज़ पर सेक्स स्लेव बना कर रखते हैं।
"मेरी शर्ट पर लगे फूल निशान को देख कर कन्हैया हमसे ठेठ भाषा में बोला कि ये क्या है। हम कुछ नहीं बोले, लेकिन इतने में ही उसके गुंडे कार्यकर्ता लोग गाली-गलौच करते हुए गाड़ी से नीचे उतर आए और मेरे साथ मारपीट करने लगे। मेरी जान बचाने के लिए आए मेरे 2-3 दोस्तों को भी लाठी-डंडे से मारा।”
"प्रधानमंत्री बनने से पहले नरेंद्र मोदी भी एक मुख्यमंत्री ही थे। ये तीनों भी मुख्यमंत्री हैं या रह चुके हैं। मायावती या चंद्रबाबू नायडू या ममता बनर्जी देश के अगले प्रधानमंत्री बनने के लिए सबसे उपयुक्त कैंडिडेट हैं।"
एक तरफ भाई राहुल गाँधी झूठ का कटोरा लिए राफ़ेल-राफ़ेल करते देश में घूम रहे हैं और अब प्रियंका का यह सड़क वाला झूठ… लगता है झूठ-झूठ खेलना कॉन्ग्रेस की आखिरी रणनीति का हिस्सा है - झूठ बोलो, जनता को मूर्ख बनाओ, कुर्सी पाओ!
"मैं जेल में हूँ। वाराणसी संसदीय क्षेत्र से चुनाव लड़ना चाहता हूँ। इसके लिए मैंने नामांकन फॉर्म भी खरीद लिया है। मगर जेल में रहकर चुनाव प्रचार नहीं कर सकता। इसलिए चुनाव प्रचार करने के लिए मुझे तीन सप्ताह के लिए जमानत पर रिहा किया जाए।"
कन्हैया कुमार के LPG सिलेंडर दिखाकर मीडिया गिरोह की TRP में भी उछाल आने के कारण कामरेड की गरीबी पर निष्पक्ष पत्रकारों को खूब चरमसुख मिलता नजर आ रहा है। लेकिन अचानक ‘वन फाइन डे’ इस LPG सिलेंडर न जुटा पाने वाले कामरेड की तस्वीरों से बेगूसराय के लगभग हर हिंदी और अंग्रेजी समाचार पत्र के पहले पन्ने भर गए।
रवीश कुमार चाहते हैं कि कोई पत्रकार लाइव इंटरव्यू के दौरान पीएम के जवाब के बाद टेबल पर एक करारा मुक्का मारे और अपनी कुर्सी को नीचे पटक डाले। रवीश की इच्छा है कि मोदी का इंटरव्यू लेनेवाला पत्रकार उनके जवाब के दौरान अपने ही मुँह पर माइक दे मारे।