भारत में बुर्क़ा पर प्रतिबन्ध लगाने की माँग अकेले शिवसेना ने नहीं की है, हिन्दू सेना नामक संगठन ने भी गृह मंत्रालय को पत्र लिखकर सार्वजानिक व निजी संस्थानों में सार्वजनिक तौर पर बुर्क़ा या नक़ाब के प्रयोग पर प्रतिबन्ध लगाने की माँग की है।
AAP ने 20 नए डिग्री कॉलेजों के निर्माण का वादा किया था लेकिन अब तक एक पर भी काम शुरू नहीं कराया जा सका है। जितने शिक्षकों की ज़रुरत थी, उससे आधे से भी कम पदों पर नियुक्तियाँ की गई हैं। फ्री वाई-फाई सर्विस से लेकर सीसीटीवी योजना सब की हालत पंक्चर है।
'वीरे दी वेडिंग' फिल्म में खुलकर अपने 'मन की बात' करने वाली स्वरा भास्कर को बहुत आसानी से नारीवाद का चेहरा बना कर पेश किया जाने लगा है। यह वर्तमान समय का सबसे बड़ा दुर्भाग्य ही कहा जा सकता है कि महिलाओं के अधिकारों को उसके शारीरिक सुख और जबरन फूहड़पन मात्र से जोड़कर पेश कर देने से वो समाज में महिलाओं की नई पहचान दिलाने वाले ठहराए जाने लगते हैं।
ऐसे आदमी के शर्ट में एक छेद हो, तो उँगली डाल कर पूरा फाड़ कर देख ही लेना चाहिए कि भाई तुम्हारे 2009, 2014 और 2019 के चुनावी हलफ़नामे में इतने बदलाव क्यों हैं? आखिर बैकऑप्स नामक कम्पनी का डायरेक्टर प्रियंका को चुनावों के तुरंत पहले क्यों बना दिया गया था?
ऐसे मौकों पर एडिटर्स गिल्ड उसी 'गुप्त' रोग से ग्रसित हो जाता है, जिसमें नियम है कि भाजपा-विरोधी शासित राज्यों में पत्रकारों पर ज़ुल्म भी हो तो उस पर कुछ नहीं बोलना है और भाजपा शासित राज्य में किसी पत्रकार की सीढ़ियों से गिरकर ऊँगली में चोट भी लगती है तो एक 'Condemnation Letter' जारी कर दिया जाता है।
एक वक्त ऐसा भी था, जब भाजपा को अपनी 'माँ' बताने वाले सिद्धू का कई साल तक भारतीय जनता पार्टी के साथ 'बेटे' जैसा जुड़ाव रहा था। लेकिन, पार्टी बदलते ही उन्होंने 'माँ' को 'गाली' देनी शुरू कर दी है।
राज्यसभा सांसद सुब्रह्मण्यम स्वामी ने सनसनीखेज आरोप लगाते हुए ख़ुलासा किया था कि राहुल गाँधी ने एक प्राइवेट कम्पनी के रजिस्ट्रेशन काग़ज़ात में ख़ुद को ब्रिटिश नागरिक बताया था। ये कम्पनी लंदन में स्थित है। इसी आरोप पर गृह मंत्रालय ने...
जम्मू के आईजी एमके सिन्हा ने मामले को सुलझाने का दावा करते हुए बताया कि 30 मार्च को बनिहाल में पुलवामा की तरह की कार ब्लास्ट करके CRPF कॉनवाय पर हमला करने की कोशिश की गई थी। इस साज़िश से जुड़े सभी 6 लोगों को गिरफ्तार कर लिया गया है जिसमें...
राहुल गाँधी व्यक्तित्व नहीं, एक मानसिक अवस्था है। कभी-कभी व्यक्ति व्यक्तिवाचक संज्ञा से ऊपर उठ कर जातिवाचक संज्ञा हो जाता है, और उनमें से राहुल गाँधी जैसे महज़ चंद लोग ऐसे होते हैं जो व्यक्ति होते हुए भी विशेषण बन जाते हैं।
KPPAC के उपाध्यक्ष सतीश महालदार ने कहा कि वो विधानसभा चुनाव में उम्मीदवारों को मैदान में उतारने की योजना बना रहे हैं और साथ ही अन्य राजनीतिक दलों से भी गठबंधन की माँग कर रहे हैं। समर्थन जुटाने के लिए देश भर में सदस्यता अभियान भी शुरू किया गया है।