'द वायर' ने इन दोनों स्कूलों को लेकर अपनी 'ग्राउंड रिपोर्टिंग' में झूठ फैलाया है। प्रोपेगंडा पोर्टल ने दावा किया है कि दोनों स्कूलों के मालिक समुदाय विशेष से ही हैं। बता दें कि डीआरपी स्कूल के ओनर पंकज शर्मा हिन्दू हैं।
भाषण के शुरू में ही मोहन भागवत स्पष्ट कहते सुने जा सकते हैं कि शब्दों का अर्थ बदलता जा रहा है। इसके बाद ही उन्होंने बताया है कि राष्ट्रवाद शब्द के इस्तेमाल करने पर आपके कथन का सीधा अर्थ फासीवाद और नाजीवाद से जोड़ दिया जाता है।
एक नजर में कोई भी इस फोटो के झूठ को कैप्शन देखकर सच मान लेगा। लेकिन उसी समय की वास्तविक तस्वीर को देखा जाए तो, पता चलेगा कि गिरोह का प्रोपगेंडा 10 मिनट से ज़्यादा नहीं चल पाता।
राहुल गाँधी ने बेशर्मी से दावा कर दिया कि एक-एक महिलाओं ने सुप्रीम कोर्ट में खड़े होकर मोदी सरकार को ग़लत साबित कर दिया। वे भूल गए कि इस मामले को सुप्रीम कोर्ट में मोदी सरकार नहीं, मनमोहन सरकार लेकर गई थी।
ट्रेन में हुई सागर नामक व्यक्ति की हत्या के आरोपितों के मुस्लिम होने की खबर में कितनी सच्चाई है? क्या बुरका पहनी औरतों के साथ चल रहे पुरुषों ने ली उसकी जान? जानिए क्या है सच।
'इंडिया टुडे' लिखा कि 430 दलितों ने इस्लाम अपना लिया है और कई अन्य इसी राह पर हैं। साथ ही ये भी लिखा गया कि क्षेत्र के दलितों ने भेदभाव की बात कही है। कुछ दलितों के बयान भी प्रकाशित किए गए हैं। दिसंबर में भी 'आजतक' ने ये ख़बर चलाई थी, जिसे वहाँ के दलितों ने नकार दिया था।
सवाल उठता है कि क्या अब सोने को भी विरोध-प्रदर्शन माना जाएगा? बाकी समय 'ऑल्टन्यूज' नासा के सॉफ़टवेयर इस्तेमाल करके फोटो लेने की तारीख, समय और फोटोग्राफर का मूड तक बता दिया करता है, लेकिन इस तस्वीर के बारे में यही बता पाया कि प्रदर्शनकारी सो रहे थे।
फ़र्ज़ी पत्र वायरल करने वाले ने एक ग़लती ये की है कि उसने भाजपा के राष्ट्रीय मुख्यालय का पता लिख दिया है। जबकि, मनोज तिवारी के पत्र में भाजपा के राज्य मुख्यालय का पता लिखा होता है। अर्थात, पता 'पंडित दीन दयाल उपाध्याय मार्ग' न होकर 'पंडित पंत मार्ग' होगा।
ट्विटर पर एक वीडियो काफी तेजी से शेयर किया जा रहा है, जिसमें आम आदमी पार्टी नेता अमानतुल्लाह खान एक 'जहरीला' भाषण देते हुए सुने जा रहे हैं। इस वीडियो को बीजेपी नेता संबित पात्रा और बॉलीवुड के डायरेक्टर विवेक अग्निहोत्री ने भी शेयर किया है।