जब तक इन्हें छीलेंगे नहीं, ये अपनी हरकतों से बाज़ नहीं आएँगे। इसलिए, इनके ट्वीट तो छोड़िए, एपिडर्मिस, इन्डोडर्मिस से लेकर डीएनए तक खँगालते रहिए क्योंकि बाय गॉड, ये लोग बहुत ही बेहूदे क़िस्म के हैं।
रॉयटर्स जैसी बड़ी और अंतरराष्ट्रीय न्यूज़ एजेंसी ख़बरों के साथ फ़र्ज़ीवाड़ा करती है।
भारतीय न्यूज़ एजेंसी में काम कर रहे हमारे एक साथी द्वारा शेयर किया गया चैट रॉयटर्स की इसी गंदगी का पर्दाफाश करती है।
'हम AAP के लोग हरिश्चंद्र की संतान हैं, जो हमसे अलग हैं वो झूठ के पुलिंदे।' ऐसे ब्रह्म वाक्य वाले नेताओं के लिए पुलवामा हो या करगिल, राजनीति को छोड़ना मुश्किल ही नहीं, नामुमकिन है।
जहाँ एक तरफ देश पुलवामा में शहीद हुए 44 सीआरपीएफ के जवानों को लेकर शोक मना रहा था, वहीं दूसरी ओर दिव्या स्पंदना ने NDTV की आधी-अधूरी रिपोर्ट का इस्तेमाल करते हुए ट्रेन-18 के बारे में झूठी ख़बर फैलाते हुए ट्रेन को विफल बताया।
द वायर पर लिखे अपने रिपोर्ट में स्वाति चतुर्वेदी ने बिना किसी तथ्य और सबूत के आधार पर लिखा कि मुरली मनोहर जोशी इस वीडियो को देखने के बाद गुस्से में हैं, और उन्होंने आरएसएस से भी इस बारे में शिकायत की है।
पुरस्कार लौटाने की ख़बर के कुछ ही समय बाद जब तेज हजारिका की ओर से जारी बयान सामने आया, तो यह स्पष्ट हो गया कि मुख्यधारा की मीडिया से आ रही यह ख़बर फर्जी थी।
प्रियंका गाँधी की रैली में भीड़ दिखाने के लिए कॉन्ग्रेस पार्टी प्रवक्ता ने तेलंगाना की तस्वीर शेयर कर डाली, झूठ पकड़े जाने पर जिसे उन्होंने डीलिट कर दिया।
डेस्क पर बैठ कर और रिवर्स इमेज सर्च के सहारे ही अगर फै़क्ट चेक का धंधा चलाना है तो कृपया इसे फोटो चेक का नाम दीजिए। सिर्फ पेजव्यू के लिए शीर्षक भ्रामक मत बनाइए।