खालिद सैफी के गुनाहों पर भावुकता की लीपापोती करने का जिम्मा उठाया है राणा अय्यूब ने। वह चाहती हैं कि सैफी के बच्चों के सवाल याद रहे, लेकिन वे तमाम बच्चों बिसरा दिए जाएँ जिनसे दिल्ली दंगों ने पिता छीन लिया था।
आजाद भारत में भी राम के खिलाफ साजिशें बंद नहीं हुईं। इसके अगुवा खुद नेहरू थे। लंबे संघर्ष के बाद 5 अगस्त का वो दिन आ रहा है जब पीएम मोदी खुद मंदिर की शिला स्थापित करेंगे।