दिवंगत अजय पंडिता की बेटी नियंता ने कहा है कि कॉन्ग्रेस को भारत के बेटे की हत्या पर राजनीति नहीं करनी चाहिए। उनके पिता की हत्या पर राजनीति करने की जरूरत नहीं है। उनका परिवार किसी से कुछ नहीं माँग रहा। उन्हें बस इंसाफ चाहिए।
जिस समय दुनिया कोरोना से लड़ रही है उत्तराखंड ईसाई मिशनरियों के धर्मांतरण के षड्यंत्रों से भी संघर्षरत है। यह कभी ऑनलाइन तो कभी राशन, बाइक और मुर्गा के नाम पर परोसा जा रहा है।
"लाशें किस तरह से रखी जा रही हैं? ये क्या हो रहा है? अगर लाशों के साथ ऐसा सलूक हो रहा है, अगर लाशें कचरे के ढेर में मिल रही हैं तो यह इंसानों के साथ जानवरों से भी बदतर सलूक है।"
इस कदम ने इंदिरा गाँधी को और भी अधिक निरंकुश बना दिया था। फिर पत्रकारों की गिरफ्तारी से लेकर सामाजिक कार्यकर्ताओं के खून से लोकतंत्र के इतिहास का सबसे कलंकित अध्याय लिखा गया।
बहुत ही बारीकी से कभी प्रतीकात्मक तस्वीर के नाम पर तो कभी सीधे खुल्ले में खेलते हैं कि कौन सी जनता जा रही है तहकीकात करने? अगर बाद में पता भी चला तो क्या हो जाएगा? क्योंकि आजतक कभी इन्हें अपनी इन हरकतों पर कोई बड़ा आउटरेज नहीं झेलना पड़ा।