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‘खुदकुशी हराम, वह काफिर था’: सुशांत सिंह की मौत पर शोक जता कट्टरपंथियों के निशाने पर आए पाकिस्तानी सितारे

सुशांत सिंह की आत्महत्या से हर कोई स्तब्ध है। लेकिन पाकिस्तानियों को उनकी मौत पर शोक जताना नहीं भाया, क्योंकि उनकी नजर में सुशांत 'काफिर' थे।

फ्लैट में मौजूद थे दोस्त, नहीं मिली कोई सुसाइड नोट: सुशांत सिंह राजपूत के मामा ने कहा – न्यायिक जाँच हो

उनके आत्महत्या करने की वजह धन या स्टारडम नहीं बल्कि कुछ और ही है। बॉलीवुड के वरिष्ठ अभिनेता शक्ति कपूर ने सुशांत सिंह राजपूत को लेकर...

सुशांत सिंह राजपूत ने की आत्महत्या: मृत माँ को लिखा था ‘खत’, आखिरी फिल्म में आत्महत्या न करने का दिया था संदेश

इस साल दुनिया को अलविदा कह के जाने वाले सिने हस्तियों की सूची में सुशांत सिंह राजपूत का नाम भी जुड़ गया। उन्होंने फाँसी लगा कर आत्महत्या...

अजय पंडिता की हत्या के विरोध में दुनिया भर के 100 शहरों में प्रदर्शन: कपिल मिश्रा का आह्वान

जम्मू कश्मीर में सरपंच अजय पंडिता की हत्या के बाद #HinduUnitedAgainstTerror के पोस्टर के साथ दुनिया भर में विरोध प्रदर्शन चालू है।

बारूद और खून की गंध से अपना मनोरंजन करने वाला हत्यारा: चे ग्वेरा, जिसने नेहरू को गिफ्ट किया था सिगार

टीशर्ट से लेकर बिकनी तक पर आज जिसकी फोटो छपवाई जाती है, वो एक ऐसा हत्यारा था जिसके लिए हत्या करना मनोरंजन के समान था। फिर भी उसे नायक बना दिया गया।

‘द वायर’ और CAA विरोधियों का संदिग्ध गठजोड़: भारत के आंतरिक मुद्दों में क्यों हस्तक्षेप कर रहे हैं अमेरिकी नागरिक वरदराजन

एआईसी एक ऐसा संगठन है, जो भारत में सीएए प्रदर्शनों को भड़का रहा था। इसका गठजोड़ 'द वायर' के संपादक सिद्धार्थ वरदराजन से था।

सनातन डेका की हत्या के बाद अरमान अली ने रितुपर्णा का गला ‘हलाल’ किया, असम में डरे हुए हिन्दुओं ने किया प्रदर्शन

पुलिस स्टेशन के सामने प्रदर्शन कर रहे लोगों का कहना है- "हम इन्हीं सड़कों पर घूमते हैं, हम इन्हीं बाजारों में जाते हैं, वे हमें भी उसी तरह मारेंगे।"

‘जस्टिस’ रवीश कुमार नींद से नहीं जागना चाहते क्योंकि उन्हें वही ‘दंगा साहित्य’ पसंद है जो वास्तविकता से अलग है

रवीश आज भी नेहरू-इंदिरा के अहंकार के उस दौर से आतंकित हैं, जब मनचाहे तरीकों से सत्ता, समाज और संस्थाओं को अपने नियंत्रण में रखा करती थी। लप्रेकी रवीश इस नींद से जागना नहीं चाहते क्योंकि उन्हें 'दंगा साहित्य' पसंद है।

मुरारी बापू जी, अली-मौला इतना ही पसंद है तो टोपी लगा कर नमाज पढ़ लीजिए, सत्संग-प्रवचन का नाम क्यों ले रहे?

एक तरफ एक मजहब है, जो कि अपने मूल रूप में प्रसारवादी, राजनैतिक और ऐतिहासिक तौर पर हिंसक और लूट-पाट से ले कर आतंक का शासन स्थापित करने पर तुला हुआ है, और दूसरी तरफ उसी की प्रसारवादी नीतियों को झेल कर हर बार खड़ा होने वाला धर्म! दोनों एक हैं ही नहीं, आप क्यों मिलाना चाह रहे हो?

भाई का ‘जहर’ बिका नहीं, बहन नमक पर बनाने चली ‘लल्लू’: कॉन्ग्रेसी मुखपत्र में प्रियंका गाँधी का इमोशनल अत्याचार

राहुल गॉंधी ने जो 2013 में किया उसे प्रियंका गॉंधी 2020 में अजय सिंह लल्लू के नाम पर दोहराने की कोशिश में हैं। दिलचस्प यह है कि इस कोशिश में चायवाले का मजाक उड़ाने वाली कॉन्ग्रेस नमक बेचने की दुहाई दे रही है।

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