दिल्ली पुलिस के बार-बार कहने पर भी मौलाना साद इमारत खाली करवाने को तैयार नहीं था। बाद में उसने केवल 167 लोगों को ही क्वारंटाइन किए जाने की अनुमति दी। लेकिन, जब डोभाल ने मोर्चा सॅंभाला तो वह पूरी इमारत खाली करवाने को तैयार हो गया।
सीएम योगी के मीडिया सलाहकार सिद्धार्थ वरदराजन को चेताया कि अगर उन्होंने अपनी इस फेक न्यूज़ को तुरंत डिलीट नहीं किया तो कार्रवाई की जाएगी और उन पर मानहानि का मुकदमा भी चलाया जाएगा। साथ ही उन्होंने तंज कसते हुए ये भी कहा कि कार्रवाई के बाद वेबसाइट के साथ-साथ केस लड़ने के लिए भी सिद्धार्थ वरदराजन को डोनेशन माँगना पड़ जाएगा।
जनता कर्फ्यू और प्रधानमंत्री द्वारा लॉकडाउन की घोषणा से काफी पहले दिल्ली में किसी तरह की गैदरिंग पर रोक लगा दी गई थी। तब न ट्रेनों का परिचालन रुका था और न ही बसों। बावजूद इसके नियम-कायदों की धज्जियॉं उड़ाकर जमात के लोग कानून को ठेंगा दिखाते रहे।
दिल्ली पुलिस ने केजरीवाल सरकार को एक चिट्ठी लिखी है। दिल्ली सरकार से 157 विदेशी नागरिकों के खिलाफ तत्काल कार्रवाई की मॉंग की है। ये विदेशी निजामुद्दीन के मरकज में हुए कार्यक्रम में मौजूद थे और फिलहाल दिल्ली की कई मस्जिदों और अन्य जगहों पर ठहरे हैं।
पैनडेमिक के पीछे कभी भी गरीब, पिछड़े और आम जीवन व्यतीत करने वालों का हाथ नहीं रहा। इसके पीछे प्राय: धनी, सुदृढ़, प्रवासी, धनाकांक्षी, गतिशील लोग होते थे और आज भी स्थिति वही है। फिर चाहे देश में पहला कोरोना केस बना वुहान से लौटा केरल का छात्र हो या लंदन से लौटी कनिका कपूर। सब एक समृद्ध समाज का हिस्सा हैं। जिनके लिए आज यहाँ कल वहाँ एक आम बात है।
मौलवी ने कहा कि आज मस्जिदों को बंद करने को कहा जा रहा है, जो ग़लत है। उसने डॉक्टरों की सलाहों की बात करते हुए लोगों से पूछा कि उन्हें इस बात पर कैसे यकीं आ गया कि मिलेंगे-जुलेंगे तो बीमारी फैलेगी, उन्हें इस बात पर यकीन क्यों नहीं आया कि इस समय अल्लाह उनकी हिफाजत करेगा? मौलाना ने कोरोना पर डॉक्टरों की सलाहों को इस्लाम के ख़िलाफ़ साज़िश करार दिया।
निजामुद्दीन में मिले विदेशियों ने वीजा नियमों का भी उल्लंघन किया है, ऐसा गृह मंत्रालय ने बताया है। यहाँ तबलीगी जमात के मजहबी कार्यक्रम में न सिर्फ़ सैकड़ों लोग शामिल हुए बल्कि उन्होंने एम्बुलेंस को भी लौटा दिया था। इन्होने सतर्कता और सोशल डिस्टन्सिंग की सलाहों को भी जम कर ठेंगा दिखाया।
“पूरा देश खतरे में है, सरकार ने लॉकडाउन घोषित कर रखा है, और तुम फतवे का इंतजार कर रहे हो? देश फतवे से चलेगा या लोकतांत्रिक रूप से चुनी हुई सरकार से चलेगा? यही तुम लोगों का असली चेहरा है, पूरी मानवता खतरे में है और तुम लोग फतवे के इंतजार में हो? शर्म आती है तुम जैसे जाहिलों पर।”
पटना, राँची और दिल्ली के बाद महाराष्ट्र के अहमदनगर में एक मस्जिद से 10 विदेशियों को पुलिस ने हिरासत में लिया। पुलिस ने मस्जिद के ट्रस्टी जुम्माखान नवाबखान पठान और सलीम बाबूलाल पठान को कोरोना फैलाने के आरोप में और आदेशों का उल्लंघन करने के आरोप में कई धाराओं के तहत गिरफ्तार कर लिया है।
निजामुद्दीन में एक भीड़ जुटती है - मलेशिया, इंडोनेशिया, सऊदी अरब और किर्गिस्तान समेत कई देशों के करीब 2500 लोग यहाँ आते हैं। कोरोना के बवाल के बावजूद यह सब होता है। नतीजा - दिल्ली में कोरोना पॉजिटिव के हालिया मामले में से 50% से ज्यादा सिर्फ इस एक कार्यक्रम में शामिल होने वाले लोग।